Mahesh Navami 2025 Date:जानिए इस वर्ष कब हैं महेश नवमी, नोट करलें पूजन विधि

Mahesh Navami 2025 Date:देवों के देव महादेव की महिमा निराली है। भगवान शिव के भक्तों को पृथ्वी लोक पर सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक के घर में सुख शांति और समृद्धि बनी रहती है। साधक श्रद्धा भाव से महेश नवमी (Mahesh Navami 2025 Date) के दिन देवों के देव महादेव और जगत की देवी मां पार्वती की पूजा करते हैं। हर साल ज्येष्ठ माह में महेश नवमी मनाई जाती है। यह पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही भगवान शिव के निमित्त व्रत भी रखा जाता है। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। धार्मिक मत है कि महेश नवमी Mahesh Navami पर भगवान शिव की पूजा करने से साधक के सुख, सौभाग्य और वंश में वृद्धि होती है। साथ ही साधक पर शिव-शक्ति की कृपा बरसती है। उनकी कृपा से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए, महेश नवमी की सही डेट (Mahesh Navami 2025), शुभ मुहूर्त एवं योग जानते हैं- महेश नवमी शुभ मुहूर्त (Mahesh Navami 2025 Shubh Muhurat) वैदिक पंचांग के अनुसार, 03 जून को रात 09 बजकर 56 मिनट पर ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि शुरू होगी और अगले दिन 04 जून को देर रात 11 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। इसके लिए 04 जून को महेश नवमी मनाई जाएगी। वहीं, 05 जून को गंगा दशहरा मनाया जाएगा। महेश नवमी शुभ योग (Mahesh Navami 2025 Shubh Yoga) ज्योतिषियों की मानें तो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर शुभ और शुक्ल योग का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही दोपहर 02 बजकर 27 मिनट तक शिववास योग बन रहा है। इस समय तक देवों के देव महादेव कैलाश पर जगत की देवी मां गौरी के साथ रहेंगे। इस योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होगी। महेश नवमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व:Religious and cultural importance of Mahesh Navami माहेश्वरी समुदाय में महेश नवमी का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने माहेश्वरी समुदाय की रचना की थी, इसलिए इस दिन को इस समुदाय का स्थापना दिवस भी माना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह दिन वैवाहिक सुख, पारिवारिक समृद्धि, धार्मिक उन्नति और मोक्ष प्राप्ति के लिए बहुत उपयुक्त है। महिलाएं विशेष रूप से इस दिन शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम और स्थायित्व की कामना करती हैं। वहीं पुरुष वर्ग व्रत और पूजा करके अपने कुलदेवता की पूजा करता है। व्रत रखने की विधि Mahesh Navami Vrat Vidhi जो भक्त इस दिन व्रत रखना चाहते हैं, उन्हें निम्न विधि का पालन करना चाहिए: व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पवित्र व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन केवल फलाहार करें या निर्जल व्रत (अपनी क्षमता के अनुसार) रखें। पूरे दिन सात्विकता बनाए रखें और संयम से व्यवहार करें। दिन में काम से काम 108 बार भगवान शिव के “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। शाम की पूजा के बाद आरती करें और प्रसाद बांटें। अगले दिन व्रत तोड़ें और किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं। पूजा विधि: भगवान महेश और माता पार्वती की पूजा:Worship Method: Worship of Lord Mahesh and Mother Parvati महेश नवमी पर निम्न तरीके से पूजा करें: पूजा स्थल को साफ करें और वहां गंगाजल छिड़कें और एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) से अभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल, चंदन, अक्षत, भस्म चढ़ाएं। माता पार्वती को लाल चुनरी, सिंदूर, चूड़ियां जैसी सुहाग की वस्तुएं चढ़ाएं। शिव पंचाक्षरी मंत्र “ओम नम: शिवाय” और देवी मंत्र “ओम ह्रीं नम: पर्वतायै” का जाप करें। अंत में आरती और शिव चालीसा का पाठ करें। व्रत रखने वालों के लिए विशेष निर्देश:Special instructions for those observing fast व्रत करने वाले को पूरे दिन पवित्रता, सात्विकता और धार्मिक आचरण बनाए रखना चाहिए। किसी से कटु वचन न बोलें और क्रोध से बचें। व्रत रखने के दौरान पूरे दिन शिव-पार्वती मंत्रों का जाप और ध्यान करें। केवल फल, दूध, शर्बत, मेवे आदि का सेवन करें, अनाज और नमक से परहेज करें। पूरे दिन कथा, पाठ, ध्यान, जप आदि धार्मिक क्रियाकलापों में संलग्न रहें। रात में शिव स्तोत्र या शिवपुराण का पाठ करके सोना शुभ होता है।

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वीरभद्र मंदिर:ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत

भगवान शिव के क्रोध से हुयी थी वीरभद्र की उत्पत्ति वीरभद्र मंदिर:उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित है वीरभद्र मंदिर। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान शिव के अवतार वीरभद्र की पूजा अर्चना की जाती है। इस मंदिर में शिवरात्रि और सावन के अवसर पर रात्रि जागरण और विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। जिसमे भक्तों की काफ़ी भीड़ रहती है। इन विशेष अवसरों पर यहाँ पर मेले का भी आयोजन किया जाता है। यह मंदिर ऋषिकेश राजमार्ग से 2 किमी दूर स्थित है। यह मंदिर प्राचीन सिद्धपीठ भी है। Veerabhadra Temple:मंदिर का इतिहास वीरभद्र मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो कि 1,300 साल पुराना है। वीरभद्र मंदिर के बारें में किद्वंती है कि वीरभद्र भगवान शिव के अवतार हैं। जो भोलेशंकर के क्रोध से उत्पन्न हुए है। स्कन्द पुराण में इसका उल्लेख है की एक बार राजा दक्ष प्रजापति ने एक भव्य यज्ञ का आयोजन करवाया । इस भव्य यज्ञ में भगवान शिव को छोड़कर शेष सभी देवी देवताओं को आमंत्रित किया गया। जब यह बात माता सती को पता चला की मेरे पिता ने इस भव्य यज्ञ का आयोजन करवाया है और उसमे मेरे पति को आमंत्रित नहीं किया। तो वह अपने पिता के पास गईं। परन्तु वहां पर उन्हें अपमानित महसूस हुआ। पिता द्वारा पति का यह अपमान देख कर माता सती ने उसी यज्ञ में अपने प्राणों की आहुति दे दी। जब इस बात का पता भगवान शिव को लगा तो वह बहुत क्रोधित हो गए और अपने बालो की जटा को खींच कर जमीन पर गिरा दिया। जिससे वीरभद्र उत्पन्न हुए।वीरभद्र ने भव्य यज्ञ को नष्ट कर राजा दक्ष का सिर काट दिया। तब सभी देवताओं के भगवान शिव से राजा दक्ष को पुनः जीवित करने के लिए याचना की। शिव जी ने उन्हें जीवन दान दिया और उस पर बकरे का सिर लगा दिया। राजा दक्ष को अपनी गलतियों का पश्च्याताप भी हुआ और उन्होंने भगवान शिव से क्षमा मांगी। भगवान शिव ने इसी स्थान पर वीरभद्र को अपने गले से लगा लिया। तभी वीरभद्र भगवान शिव के शरीर में समाहित हो गए और इसी स्थान पर एक शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए। इस कारण यह मंदिर बहुत ही पवित्र और धार्मिक महत्त्व रखता है। मंदिर का महत्व सावन के महीने में इस मंदिर में पूजा अर्चना करने से विशेष फल मिलता है। इस लिए यहाँ पर भक्तों की भीड़ रहती है। कहा जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भोलेनाथ से जो मांगता है उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ऐसा माना जाता है कि विशेष अवसरों पर इस मंदिर में देवता भी भगवान का पूजन करने आते है। क्योंकि मंदिर में लगी घंटियां अपने आप ही बजने लगती है। मंदिर की वास्तुकला वीरभद्र मंदिर की वास्तुकला अद्भुत है। मंदिर का मुख्य द्वार लाल रंग से निर्मित है। जो देखने में बहुत ही सुन्दर दिखता है। मुख्य द्वार पर ॐ को बहुत ही शानदार तरीके से सुसज्जित किया गया है। मंदिर के मुख्य गर्भ गृह में वीरभद्र महादेव एक शिवलिंग के रूप में विराजित है। शिवलिंग के ठीक सामने मंदिर के प्रांगण में नंदी जी की विशाल प्रतिमा विराजित है। साथ ही माता का मंदिर है यहाँ स्थापित है। मंदिर का समय वीरभद्र मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद भगवान शिव को दूध, दही, घी, जल, शहद, पुष्प, फल आदि अर्पित किये जाते है।

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भारत माता मन्दिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इस मंदिर को बनाने के पीछे लोगों के मन में राष्ट्रधर्म की भावना विकसित करना मकसद है। भारत माता मन्दिर भारत में मंदिरों में आमतौर पर देवी देवताओं के साथ लोग अपने आराध्य की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना की जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में एक ऐसा मंदिर है, जहां भारत माता की मूर्ति स्थापित है। यहां भारत माता की पूजा होती है। भारत माता मंदिर बाकी मंदिरों से इसलिए भी अलग है क्योंकि इस मंदिर में अन्य मंदिरों की तरह न कोई आरती होती है न ही शंक और घंटी बजती है। यहां सिर्फ राष्ट्रभक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती है। इस मंदिर को बनाने के पीछे लोगों के मन में राष्ट्रधर्म की भावना विकसित करना मकसद है, इसी बात को ध्यान में रखकर भारत माता मंदिर का निर्माण कराया है। Bharat Mata Mandir:भारत माता मन्दिर का इतिहास इंदौर के भारत माता मंदिर का भूमि पूजन 11 सितंबर 2000 को हुआ था। मंदिर को पूरा बनने में दो साल का समय लगा था, इस मंदिर को आम जनता के लिए जनवरी 2002 में खोला गया था। सद्गुरु धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट ने आम जन में राष्ट्रीय भावना जागृत करने के लक्ष्य से सुखलिया इलाके में भारत माता मंदिर का निर्माण कराया। वैसे तो यह बाहर से आम मंदिर की तरह नजर आता है, मगर भीतर से ऐसा नहीं है। यह ऐसा मंदिर है, जिसमें न तो घंटी की गूंज सुनाई देती है और न ही पूजा-पाठ के लिए हवन कुंड है, अगर कुछ है तो हाथ में तिरंगा लिए भारत माता की मूर्ति। भारत माता मन्दिर का महत्व 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस पर देवी-देवताओं की तरह विधि-विधान से भारत माता की पूजा अर्चना होती है। स्वतंत्रता दिवस के पर राष्ट्रध्वज वंदन के साथ युवाओं को राष्ट्रभाव की प्रतिज्ञा दिलाई जाती है और प्रतिमा की महाआरती होती है। भारत माता मंदिर में पूजा अर्चन के लिए कोई पुजारी या महंत बैठते। मंदिर में आने वाले देश भक्त और पर्यटक मंदिर में आकर भारत माता के आगे शीश झुका कर देश भक्ति के नारे लगाते हैं। भारत माता मन्दिर की वास्तुकला भारत माता मंदिर को मराठा शैली में बनाया गया है। दो मंजिला मंदिर के शीर्ष पर विशाल शिखर बना है, जिसके गर्भ गृह में भारत माता की मूर्ति स्थापित है। बॉर्डर वाली गहरे रंग की साड़ी पहने हाथ में तिरंगा थामे स्थापित भारत माता की प्रतिमा के पीछे भारत का नक्शा बना हुआ है। मंदिर परिसर में बगीचा बना हुआ है, जहां अलग-अलग प्रजाति के फूल वाले पौधे लगे हैं। भारत माता मन्दिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 11:00 AM शाम को मन्दिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM

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Mahakali Stotra:महाकाली स्तोत्र

Mahakali Stotra महाकाली स्तोत्र: मां कालिका के स्वरूप में जो बात भयावह है, वह भक्तों को उससे कहीं अधिक सुखद और आनंदित करने वाली है। आमतौर पर मां काली की पूजा तपस्वी और तांत्रिक ही करते हैं। ऐसा माना जाता है कि मां Mahakali Stotra काली काल का अतिक्रमण कर मोक्ष प्रदान करती हैं। वे आवेगशील होने के कारण अपने भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। तांत्रिक और ज्योतिषियों के अनुसार काली के कुछ मंत्र ऐसे हैं, जिनका प्रयोग आम व्यक्ति अपने रोजमर्रा के जीवन में अपनी समस्याओं को दूर करने के लिए कर सकता है। महाकाली स्तोत्र Mahakali Stotra का नित्य जाप करने वाले साधक को भोग और मोक्ष की दैनिक दिनचर्या का आनंद मिलता है, मोहिनी को शक्ति मिलती है, अनेकों पापों का नाश होता है, शत्रु पर विजय पाने वाला सबसे अद्भुत स्तोत्र है। महाकाली स्तोत्र का नित्य जाप करने से साधक के अंदर प्रेरणा उत्पन्न होती है! इसमें प्रेरणादायी ऊर्जा आती है! महाकाली स्तोत्र काली को बहुत प्रिय है। मां काली हिंदू त्रिदेवों में संहारक भगवान शिव की पत्नी देवी दुर्गा के उग्र रूपों में से एक हैं। Mahakali Stotra माँ काली की विशिष्ट छवि में एक उभरी हुई जीभ और घातक हथियारों से लैस खोपड़ियों की माला होती है जो दुष्ट और बुरे लोगों में आतंक पैदा करती है। हालाँकि, काली अपने भक्तों के लिए बहुत सौम्य और दयालु हैं और वह उन्हें सभी नुकसानों से बचाती हैं और समृद्धि और सफलता प्रदान करती हैं। Mahakali Stotra Ke Labh:महाकाली स्तोत्र के लाभ: देवी काली विनाशकारी शक्तियों से सशक्त हैं।वास्तव में, काली नाम मूल शब्द ‘काल’ या समय से लिया गया है। इसलिए, काली समय, परिवर्तन, संरक्षण, सृजन, विनाश और शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं।उन्हें “काली” और दुर्गा का क्रूर रूप माना जाता है, जो भगवान शिव की पत्नी हैं।देवी काली बुरी शक्तियों का नाश करने वाली हैं। वे मोक्ष या मुक्ति प्रदान करती हैं।वे दयालु माँ हैं जो अपने भक्तों को बुरी शक्तियों से बचाती हैं।हिंदू धर्म के अनुसार, माँ काली देवी दुर्गा की विनाशकारी शक्ति हैं जो हमारे जीवन में सभी प्रकार की बुराइयों को समाप्त करती हैं।उन्हें शक्ति के रूप में भी जाना जाता है जो हमेशा हमें बुराइयों से बचाती हैं और हमारे जीवन के चारों ओर सुरक्षा कवच बनाती हैं। देवी काली को प्रसन्न करना आसान है और अक्सर विशेष “सिद्धि” या शक्तियाँ प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा की जाती है। काली को हिंदू तांत्रिक परंपरा की “दस” (दस) महा-विद्या में पहली महा-विद्या माना जाता है। काली को नृत्य रूप में चित्रित किया गया है जहाँ हम भगवान शिव को उनके पीछे शांत और दंडवत लेटे हुए देख सकते हैं। महाकाली स्तोत्र पाठ:Mahakali Stotra in Hindi काली नाम मूल शब्द काल यानि समय से लिया गया है, तो, काली समय, परिवर्तन, संरक्षण, सृजन, विनाश और शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है। भक्तों के लिए माता कालिका का स्वरूप जितना डरावना और भयानक है, उससें कहीं ज्यदा  अधिक सुखद और आनंददायक भी है। Mahakali Stotra अधिकाश देखा गया है की, मां काली की पूजा साधु और तांत्रिक ही करते हैं, पैर ऐसा नही है, मां काली Mahakali Stotra की पूजा बहुत से लोग अपने दैनिक जीवन में पूजा आराधना करते है, माँ कालिक बहुत ही शांत, भय मुक्त ओर काल पर विजय प्राप्त कर मोक्ष प्रदान प्रदान करने वाली है। रुद्रयामल तंत्र अनुसार काली के कुछ मंत्र ऐसे हैं, जिनका प्रयोग आम व्यक्ति अपने रोजमर्रा के जीवन की समस्याओं को दूर करने के लिए कर सकता है। यह यह मन्त्र बहुत ही लाभदायक माने गये है महाकाली स्तोत्र, माँ काली को अत्यंत प्रिय है। जो साधक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसको भोग और मोक्ष दोनों ही इस जीवन में प्राप्त होते है। इसके पाठ से कई पापों का नाश होता है, शत्रु पर विजय प्राप्त होती है, हर प्रकार के तंत्र दोष से रक्षा होती है। माँ महाकाली, दुर्गा के उग्र रूप की तीसरी शक्ति है, जो विध्वंसक, Mahakali Stotra भगवान शिव महाकाल की पत्नी हैं। माँ काली की विशिष्ट छवि में एक उभरी हुई जीभ और खोपड़ी की एक माला है, जिसमें सीधे हाथ में तलवार हैं, जो दुष्ट शत्रु पर विजय और तंत्र रक्षा का स्वरूप है। महाकाली स्तोत्र के लाभ: Mahakali Stotra in Hindi:महाकाली स्तोत्र हिंदी पाठ अनादिं सुरादिं मखादिं भवादिं, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।जगन्मोहिनीयं तु वाग्वादिनीयं, सुहृदपोषिणी शत्रुसंहारणीयं ।। 1 ।। वचस्तम्भनीयं किमुच्चाटनीयं, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।इयं स्वर्गदात्री पुनः कल्पवल्ली, मनोजास्तु कामान्यथार्थ प्रकुर्यात ।। 2 ।। तथा ते कृतार्था भवन्तीति नित्यं, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।सुरापानमत्ता सुभक्तानुरक्ता, लसत्पूतचित्ते सदाविर्भवस्ते ।। 3 ।। जपध्यान पुजासुधाधौतपंका, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।चिदानन्दकन्द हसन्मन्दमन्द, शरच्चन्द्र कोटिप्रभापुन्ज बिम्बं ।। 4 ।। मुनिनां कवीनां हृदि द्योतयन्तं, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।महामेघकाली सुरक्तापि शुभ्रा, कदाचिद्विचित्रा कृतिर्योगमाया ।। 5 ।। न बाला न वृद्धा न कामातुरापि, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।क्षमास्वापराधं महागुप्तभावं, मय लोकमध्ये प्रकाशीकृतंयत् ।। 6 ।। तवध्यान पूतेन चापल्यभावात्, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।यदि ध्यान युक्तं पठेद्यो मनुष्य, स्तदा सर्वलोके विशालो भवेच्च ।। 7 ।। गृहे चाष्ट सिद्धिर्मृते चापि मुक्ति, स्वरूपं त्वदीयं न विन्दन्ति देवाः ।। 8 ।। ।। इति महाकाली स्तोत्र सम्पूर्णम् ।। महाकाली स्तोत्र की विशेषताऐ: Mahakali Stotra (महाकाली स्तोत्र) माँ काली को अत्यंत प्रिय है, यह तंत्रोक्त स्तोत्र है। जो साधक इस स्तोत्र नित्य पाठ करता है, उसको महाकाली के दर्शन होते है। इसके पाठ से कई पापों का नाश होता है, शत्रु पर विजय प्राप्त होती है, हर प्रकार के तंत्र दोष से रक्षा होती है। इस स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करे और परिणाम स्वयं देखे कितना प्रभावशाली है। Mahakali Stotra महाकाली स्तोत्र के साथ-साथ यदि भैरव चालीसा स्तोत्र का पाठ किया जाए तो, इस कवच का बहुत लाभ मिलता है, यदि साधक इस कवच के पाठ के साथ-साथ महाकाली गुटिका धारण करता है, तो उसकी मनोवांछित कामना पूर्ण होती है, सभी रोग भी दूर होते है।

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Mahakaal Stotra:महाकाल स्तोत्र

Mahakaal Stotra महाकाल स्तोत्र: महाकाल स्तोत्र का वर्णन स्वयं भगवान महाकाल ने देवी भैरवी को किया था। महाकाल स्तोत्र की महिमा का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। महाकाल स्तोत्र में भगवान महाकाल के विभिन्न नामों का वर्णन किया गया है। यह शिव भक्तों के लिए वरदान है। महाकाल स्तोत्र के जाप से साधक अपने मन में शक्ति और प्रसन्नता का अनुभव कर सकता है। “काल” का अर्थ मृत्यु नहीं है; काल एक क्षण में जीवन को पूर्णता प्रदान कर सकता है, यह एक क्षण में सफलता प्रदान कर सकता है। केवल एक चमक, एक चिंगारी, प्राप्त करने की क्षमता की आवश्यकता है। इस दुनिया में कोई भी साधना महाकाल साधना से श्रेष्ठ नहीं है। यह सर्वश्रेष्ठ साधना अभ्यास है, सबसे बड़ी साधना है। यह शरीर निश्चित रूप से समाप्त हो जाएगा, और मृत्यु एक दिन इसे खा जाएगी। यह आपके जीवन का अंतिम परिणाम है। Mahakaal Stotra इस भाग्य से बचने के लिए आपको महाकाल साधना अभ्यास करना होगा। यह महाकाल स्तोत्र स्वयं भगवान महाकाल ने भैरवी को बताया था। इसकी महिमा का वर्णन जितना किया जाए उतना कम है। भगवान महाकाल के विभिन्न नामों का वर्णन करके इसकी स्तुति की गई है। शिव भक्तों के लिए यह वरदान है। लगातार एक बार जाप करने से साधक के अंदर शक्ति तत्व और वीर तत्व जागृत होते हैं। मन में प्रसन्नता आती है। Mahakaal Stotra भगवान शिव की साधना में यदि एक बार इसका जाप कर लिया जाए तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है। भगवान शिव जिन्हें उनके भक्त विभिन्न नामों से पुकारते हैं, कोई उन्हें महादेव कहता है, तो कोई उन्हें भोलानाथ कहता है, किसी के लिए वे स्वयं ब्रह्मांड हैं, तो कोई उन्हें संहारक कहता है। भगवान शिव के विभिन्न रूप और स्वरूप हैं और वे सभी अपने भक्तों के लिए पूजनीय हैं। शिव को साधना तंत्र का जनक भी कहा जाता है, इसलिए कोई भी व्यवस्थित साधना उनके बिना अधूरी है। Mahakaal Stotra ke Labh:महाकाल स्तोत्र लाभ Mahakaal Stotra:भगवान शिव की पूजा से मानव जीवन की बड़ी से बड़ी परेशानियां भी कट सकती हैं। भगवान शिव का एक रूप महाकाल का भी है, वे मृत्यु का काल भी रखते हैं। महामृत्युंजय मंत्र के संबंध में यह भी माना जाता है कि वे आसन्न मृत्यु को भी टाल सकते हैं। महाकाल स्तोत्र को सर्वश्रेष्ठ स्तोत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह जीवन में धन, प्रतिष्ठा, सम्मान, पद, पदोन्नति, व्यापार, परिवार, वैवाहिक जीवन, संतान, शत्रु, विवाह में देरी, कोर्ट-कचहरी, मकान, संपत्ति आदि की कमी को दूर करने का निश्चित उपाय प्रदान करता है। Mahakaal Stotra महाकाल स्तोत्र संभावित समाधान के बजाय निश्चित समाधान प्रदान करता है। Mahakaal Stotra ka path kise karna chahiye:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए जिस व्यक्ति को अपने सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद भी वांछित परिणाम नहीं मिलते हैं, उन्हें नियमित रूप से महाकाल स्तोत्र का जाप करना चाहिए। इसके अलावा, लाइलाज बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को भी ठीक होने के लिए इसका पाठ करना चाहिए। महाकाल स्तोत्र हिंदी पाठ:Mahakaal Stotra in Hindi इस स्तोत्र को भगवान् महाकाल ने खुद भैरवी को बताया था, इसकी महिमा का जितना वर्णन किया जाये कम है, इसमें भगवान् महाकाल के विभिन्न नामों का वर्णन करते हुए उनकी स्तुति की गयी है, शिव भक्तों के लिए यह स्तोत्र वरदान स्वरुप है, नित्य एक बार जप भी साधक के अन्दर शक्ति तत्व और वीर तत्व जाग्रत कर देता है, मन में प्रफुल्लता आ जाती है,भगवान् शिव की साधना में यदि इसका एक बार जप कर लिया जाये तो सफलता की सम्भावना बढ जाती है। ॐ महाकाल महाकाय महाकाल जगत्पतेमहाकाल महायोगिन महाकाल नमोस्तुतेमहाकाल महादेव महाकाल महा प्रभोमहाकाल महारुद्र महाकाल नमोस्तुतेमहाकाल महाज्ञान महाकाल तमोपहनमहाकाल महाकाल महाकाल नमोस्तुतेभवाय च नमस्तुभ्यं शर्वाय च नमो नमःरुद्राय च नमस्तुभ्यं पशुना पतये नमःउग्राय च नमस्तुभ्यं महादेवाय वै नमःभीमाय च नमस्तुभ्यं मिशानाया नमो नमःईश्वराय नमस्तुभ्यं तत्पुरुषाय वै नमःसघोजात नमस्तुभ्यं शुक्ल वर्ण नमो नमःअधः काल अग्नि रुद्राय रूद्र रूप आय वै नमःस्थितुपति लयानाम च हेतु रूपआय वै नमःपरमेश्वर रूप स्तवं नील कंठ नमोस्तुतेपवनाय नमतुभ्यम हुताशन नमोस्तुतेसोम रूप नमस्तुभ्यं सूर्य रूप नमोस्तुतेयजमान नमस्तुभ्यं अकाशाया नमो नमःसर्व रूप नमस्तुभ्यं विश्व रूप नमोस्तुतेब्रहम रूप नमस्तुभ्यं विष्णु रूप नमोस्तुतेरूद्र रूप नमस्तुभ्यं महाकाल नमोस्तुतेस्थावराय नमस्तुभ्यं जंघमाय नमो नमःनमः उभय रूपा भ्याम शाश्वताय नमो नमःहुं हुंकार नमस्तुभ्यं निष्कलाय नमो नमःसचिदानंद रूपआय महाकालाय ते नमःप्रसीद में नमो नित्यं मेघ वर्ण नमोस्तुतेप्रसीद में महेशान दिग्वासाया नमो नमःॐ ह्रीं माया – स्वरूपाय सच्चिदानंद तेजसेस्वः सम्पूर्ण मन्त्राय सोऽहं हंसाय ते नमः फल श्रुति: इत्येवं देव देवस्य मह्कालासय भैरवीकीर्तितम पूजनं सम्यक सधाकानाम सुखावहम ।। इति महाकाल स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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 Lucky Dreams in Brahm Muhurt:ब्रह्म मुहूर्त में दिखे ये सपने तो हो जाएंगे खुश, घर में छाई कंगाली जल्द होगी दूर

Lucky Dreams in Brahm Muhurt:स्वप्न शास्त्र अनुसार अगर आप ब्रह्म मुहूर्त में खुद को नदी में स्नान करते हुए या डुबकी लगाते हुए देखते हैं तो यह सपना बहुत शुभ माना गया है रात में सोते समय अमूमन हर इंसान सपने देखता है. कभी सपना बहुत ही खुशनुमा होता है, तो कभी बहुत ही कष्टदायक. यह निकट भविष्य में होने वाली किसी न किसी घटना की ओर इशारा करती हैं. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, रात में देखे गए सपने भले ही सच न हो, लेकिन ब्रह्म मुहूर्त यानी 3 से लेकर 5 बजे के बीच देखे गए सपने जरूर सच होते हैं. ऐसे में अगर आप भी ब्रह्म मुहूर्त में इन सपनों को देखते हैं, तो यह आपकी जिंदगी में विभिन्न प्रकार की खुशहाली लाने और भविष्य में धन लाभ की ओर इशारा करते हैं. इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि आपको कार्यक्षेत्र में तरक्की मिलने वाली है. ऐसे में आइए जानते हैं कि ये सपने कौन-से हैं. Morning Dreaming Meaning: हिंदू धर्म में ब्रह्म मुहूर्त का विशेष महत्व है। क्योंकि Lucky Dreams ब्रह्म मुहूर्त को शास्त्रों मे सबसे शुभ और मंगलकारी माना जाता है। ये मुहूर्त सुबह 4 बजे से साढ़े 5 तक होता है। वहीं मान्यता है कि इस समय देखे गए सपने शुभ साबित होते हैं। साथ ही इस समय कुछ सपने देखना लाभप्रद सिद्ध हो सकता है। साथ ही आने वाले दिनों में आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। वहीं आकस्मिक धनलाभ और करियर में तरक्की मिल सकती है। आइए जानते हैं ये सपने कौन से हैं… swapna shastra lucky dreams in brahm muhurt subah me dikhne wale sapne सपने में पानी का घड़ा देखना Sapne Mai Pani Ka Ghada Dekhna स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में पानी से भरा कलश या घड़ा Lucky Dreams देखना शुभ सपना माना जाता है। इसका मतलब है कि व्यक्ति को भविष्य में जल्द ही अपार धन मिलने के साथ-साथ भूमि लाभ होने वाला है। वहीं आने वाले दिनों में आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। साथ ही कोई जरूरी काम आपको बन सकता है। सपने में नदी में स्नान करते देखना Sapne Mai Nadi Mai Snan Karte Huye Dekhna  अगर आप ब्रह्म मुहूर्त में खुद को नदी में स्नान करते हुए या डुबकी लगाते हुए देखते हैं तो यह सपना बेहद मंगलकारी है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपको आकस्मिक धनलाभ हो सकता है। साथ ही आपको उधार धन मिल सकता है। वहीं इस समय आपको करियर से संबंधित कोई शुभ समाचार मिल सकता है। सपने में इंटरव्यू देते देखना Seeing an interview in a dream स्वप्न शास्त्र के अनुसार Lucky Dreams ब्रह्म मुहूर्त में खुद को नौकरी के लिए इंटरव्यू देते देखते हैं तो यह एक बेहद शुभ संकेत है। Lucky Dreams इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आर्थिक लाभ हो सकता है। वहीं इस समय आपकी इनकम में बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही आपने अगर किसी इंटरव्यू दिया है तो आपको उसमें अवश्य ही सफलता मिलेगी। वहीं अगर आप बेरोजगार हैं तो आपको नौकरी के ऑफर आ सकते हैं।  सपने में अनाज का ढेर देखना Seeing a pile of grain in a dream यदि सपने में आप अनाज का ढेर देखते हैं तो यह एक Lucky Dreams शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आने वाले दिनों में आपका कोई कोई जरूरी काम बन सकता है। साथ ही आपको आकस्मिक धनलाभ हो सकता है। वहीं आपको निवेश से लाभ हो सकता है। स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, ब्रह्म मुहूर्त में अगर आप सपने में किसी बच्चे को हंसते हुए देख रहे हैं, तो यह बहुत ही शुभ संकेत है. माना जाता है कि निकट भविष्य में आपको अचानक धन लाभ हो सकता है. इसके अलावा, बच्चों को मस्ती करते हुए भी देखे, तो भी बहुत अच्छा होता है. कहा जाता है कि बहुत जल्द आपके घर में माता लक्ष्मी का वास हो सकता है. ब्रह्म मुहूर्त में अगर इंसान नदी में नहाते हुए दिखाई दे, तो भी बहुत ही शुभ संकेत होता है. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, Lucky Dreams यह माना जाता है कि उधार दिया धन बहुत जल्द वापस मिल जाएगा. इसके अलावा, बहुत जल्द पुराने निवेश से बहुत बड़ा फायदा होने वाला है. ब्रह्म मुहूर्त में अगर अनाज का भंडार या उस पर चढ़ाई करते हुए सपने में खुद को देख रहे हैं, तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के मुताबिक, अगर आपकी आंखें इस तरह की सपने देखते हुए खुल जा रही हैं, तो भी बहुत ही Lucky Dreams शुभ होता है. माना जाता है कि अचानक ही व्यक्ति को धन लाभ हो सकता है. अगर सपने में पानी से भरा हुआ कलश ब्रह्म मुहूर्त में दिखाई दे रहा है, तो यह निकट भविष्य में बहुत ही शुभ संकेत लाता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, आपको धन लाभ या भूमि लाभ हो सकता है. ब्रह्म मुहूर्त में अगर सपने में खुद का दांत टूटा देख रहे हैं, तो भी यह बहुत शुभ फलदायी होता है. माना जाता है कि आपके जीवन और व्यापार में तरक्की होने वाली है.

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Dhumavati Jayanti 2025 Date:धूमावती जयंती कब है? सातवीं महाविद्या की पूजा से दरिद्रता होगी दूर,ये 7 मंत्र गरीबी को करेंगे दूर

Dhumavati Jayanti 2025 Date: ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी तिथि को मां धूमावती की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए हर साल ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी को धूमावती जयंती मनाते हैं. मां धूमावती की पूजा और व्रत करने से दुख और दरिद्रता का नाश होता है, धन-वैभव में बढ़ोत्तरी होती है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं कि धूमावती जयंती कब है? धूमावती जयंती का मुहूर्त क्या है? Dhumavati Jayanti 2025 Date: देवी धूमावती 10 महाविद्याओं में से 7वीं महाविद्या हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मां धूमावती की उत्पत्ति ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इस वजह से हर साल इस तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है. इस बार धूमावती जयंती पर रवि योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है. उस दिन रवि योग निशिता मुहूर्त में बनेगा. इस दिन जो व्यक्ति व्रत रखकर मां धूमावती की पूजा करता है, तो उनकी कृपा से दरिद्रता मिटती है, धन और वैभव की प्राप्ति होती है. धूमावती जयंती 2025 तारीख Dhumavati Jayanti 2025 Date Dhumavati Jayanti देवी धूमावती की पूजा करने वाले व्यक्ति को केतु से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है. इस देवी के आशीर्वाद से सभी प्रकार के संकट और बाधाएं दूर होती हैं. जो अति दरिद्र है, उसे मां धूमावती की पूजा जरूर करनी चाहिए. दृक पंचांग के आधार पर देख जाए तो धूमावती जयंती के लिए आवश्यक ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी ति​थि 2 जून सोमवार को रात 8 बजकर 34 मिनट से प्रारंभ होगी. इस अष्टमी ति​थि का समापन 3 जून दिन मंगलवार को रात 9 बजकर 56 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयाति​थि के आधार पर धूमावती जयंती 3 जून मंगलवार को मनाई जाएगी. धूमावती जयंती 2025 मुहूर्त Dhumavati Jayant 2025 Muhurat 3 जून को Dhumavati Jayanti धूमावती जयंती के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त 04:02 ए एम से 04:43 ए एम तक है. उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:52 ए एम से दोपहर 12:47 पी एम तक है. लाभ-उन्नति मुहूर्त 10:35 ए एम से 12:19 पी एम और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 12:19 पी एम से 02:03 पी एम तक है. उस दिन का निशिता मुहूर्त रात 11:59 पी एम से देर रात 12:40 ए एम तक है. रवि योग में धूमावती जयंती 2025 Ravi yog Me Dhumavati Jayant धूमावती जयंती Dhumavati Jayanti पर रवि योग बन रहा है. रवि योग देर रात 12 बजकर 58 मिनट पर बनेगा और वह अगले दिन 04 जून को सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा हर्षण योग प्रात:काल से सुबह 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. फिर वज्र योग बनेगा. उस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र देर रात 12:58 ए एम तक है, फिर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है. कौन हैं देवी धूमावती? Koun hai Devi Dhumavati पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी धूमावती का संबंध 10 महाविद्याओं से है. वे सातवीं महाविद्या हैं. धन, वैभव, सुख, समृद्धि के साथ दरिद्रता को दूर करने के लिए देवी धूमावती की पूजा करते हैं. तंत्र साधना में मारण और उच्चाटन के लिए Dhumavati Jayanti देवी धूमावती की पूजा करते हैं. इनकी कृपा से केतु से संबंधित दोष और संकट मिटते हैं. जिस पर देवी धूमावती की कृपा होती है, उसे केतु परेशान नहीं करता है. शत्रुओं पर विजय के लिए भी इनकी पूजा करते हैं. रोग, दोष और कष्ट मिटते हैं. कैसे हुई देवी धूमावती की उत्पत्ति Kaise Huyi Devi Dhumavati Ki Utpati कथा के अनुसार, माता पार्वती और भगवान शिव कैलाश पर्वत पर भ्रमण कर रहे थे. उसी समय माता पार्वती को भूख लग गई. उन्होंने शिव जी से भोजन के लिए कहा. तो भोलेनाथ ने उनको कुछ समय प्रतीक्षा करने के लिए बोला. देखते ही देखते माता पार्वती की भूख इतनी बढ़ गई कि उन्होंने शिव जी को ही निगल गईं. शिव जी के अंदर विष का प्रभाव है, उसका असर माता पार्वती पर होने लगा, जिससे उनका शरीर धूएं के समान विकृत हो गया. माता पार्वती का यह स्वरूप देवी धूमावती के रूप में प्रसिद्ध हुआ. एक कथा यह भी है कि जब देवी सती ने अपने पिता के यज्ञ में अपने शरीर को जला दिया तो उसके धुएं से देवी धूमावती की उत्पत्ति हुई. देवी धूमावती कुमारी हैं. युद्ध में उनको कोई हरा नहीं सका, इसलिए उन्होंने विवाह नहीं किया. उनके विवाह की शर्त थी कि जो युद्ध में उनको परास्त करेगा, उससे ही विवाह करेंगी. धूमावती स्वरूप वर्णन Dhumavati Swaroop Bardan देवी धूमावती Dhumavati Jayanti को एक वृद्ध और कुरूप विधवा स्त्री के रूप में दर्शाया जाता है। अन्य महाविद्याओं के समान वह कोई आभूषण धारण नहीं करती हैं। वह पुराने और मलिन वस्त्र धारण करती हैं। इनके केश पूर्णतः अव्यवस्थित रहते हैं। Dhumavati Jayanti इन्हें दो भुजाओं के साथ चित्रित किया गया है। देवी अपने कम्पित हाथों में, एक सूप रखती हैं और उनका अन्य हाथ वरदान मुद्रा अथवा ज्ञान प्रदायनी मुद्रा में होता है। वह एक बिना अश्व के रथ पर सवारी करती हैं, जिसके शीर्ष पर ध्वज और प्रतीक के रूप में कौआ विराजमान रहता है। धूमावती मूल मंत्र Dhumavati mool mantra ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा॥ माता धूमावती के अन्य मंत्र 1. मां धूमावती सप्ताक्षर मंत्र धूं धूमावती स्वाहा॥ 2. मां धूमावती अष्टक्षर मंत्र धूं धूं धूमावती स्वाहा॥ 3. मां धूमावती दशाक्षर मंत्र धूं धूं धूं धूमावती स्वाहा॥ 4. मां धूमावती चतुर्दशाक्षर मंत्र धूं धूं धुर धुर धूमावती क्रों फट् स्वाहा॥ 5. मां धूमावती पंचदशाक्षर मंत्र ॐ धूं धूमावती देवदत्त धावति स्वाहा॥ 6. धूमावती गायत्री मंत्र ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात्॥

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Mahakal Shani Mrityunjay Stotra:महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र

Mahakal Shani Mrityunjay Stotra:महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र (महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र): किसी जीव का अमर होना असंभव है, लेकिन किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु, नश्वरता को दूर करने में व्यक्ति की एक अलौकिक क्षमता होती है। शनि देव शारीरिक, मानसिक कष्ट के शमन के आधिकारिक स्रोत हैं। आशुतोष शिव जी ने भक्तों के कल्याण के लिए देवी पार्वती के अनुरोध पर, आशुतोष शिव जी ने महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र प्रदान किया और कहा कि नियमित रूप से भक्ति के साथ महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करने से शनि देव सभी रोगों पर कृपा करते हैं। ‘मृत्यु का कारण’ शब्द मृत्यु पर विजय का अर्थ है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra किसी व्यक्ति का अमर होना असंभव है, लेकिन किसी व्यक्ति की मृत्यु पर एक अलौकिक क्षमता होती है। शनि देव शारीरिक, मानसिक कष्ट के शमन के आधिकारिक स्रोत हैं। भक्तों के कल्याण के लिए माता पार्वती के आग्रह पर आशुतोष शिव जी ने महाकाल को शनि मृत्युंजय स्तोत्र सुनाया और कहा कि, Mahakal Shani Mrityunjay Stotra इसका पाठ करने से शनि प्रसन्न होकर समस्त रोगों की पीड़ा दूर कर देते हैं। वह सुख, धन और संतान का भोग करता है तथा अकाल और अपमान से भयभीत हुए बिना पाप रहित हो जाता है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra अंत में शनिदेव की कृपा से वह सत्मार्ग का अनुगामी बन जाता है। आशा है पीड़ित लोग इसका लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। यह न केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति बल्कि पारिवारिक सुख की प्राप्ति का भी अनुकरणीय है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra यदि विद्यार्थी या विद्वान व्यक्ति कम से कम 11 स्तोत्र का पाठ करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं तो धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra Ke Labh महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र के लाभ महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति अकाल मृत्यु, शारीरिक कष्ट, मानसिक क्लेश, सुख, धन, संतान सुख आदि से बच जाता है।महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र से शनि को प्रसन्न किया जा सकता है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करना लाभदायक होता है। नियमित 11 बार पाठ करने से व्यक्ति को सुख, धन, समृद्धि, पारिवारिक सुख, धन, संतान और विजय की प्राप्ति होती है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra Kisko Karna Chahiye:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ Mahakal Shani Mrityunjay Stotra जीवन में असफलता के कारण तनाव में रहने वाले व्यक्ति को इस स्थिति से उबरने के लिए नियमित रूप से Mahakal Shani Mrityunjay Stotra महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र हिंदी पाठ Mahakal Shani Mrityunjay Stotra in Hindi Mahakal Shani Mrityunjay Stotra विनियोग:- ॐ अस्य श्री महाकाल शनि मृत्युञ्जय स्तोत्र मन्त्रस्य पिप्लाद ऋषिरनुष्टुप्छन्दो महाकाल शनिर्देवता शं बीजं मायसी शक्तिः काल पुरुषायेति कीलकं मम अकाल अपमृत्यु निवारणार्थे पाठे विनियोगः । श्री गणेशाय नमः । Mahakal Shani Mrityunjay Stotra ॐ महाकाल शनि मृत्युंजयाय नमः नीलाद्रीशोभाञ्चितदिव्यमूर्तिः खड्गो त्रिदण्डी शरचापहस्तः ।शम्भुर्महाकालशनिः पुरारिर्जयत्यशेषासुरनाशकारी ॥ 1 ॥ मेरुपृष्ठे समासीनं सामरस्ये स्थितं शिवम्‌ ।प्रणम्य शिरसा गौरी पृच्छतिस्म जगद्धितम्‌ ॥ 2 ॥ ॥ पार्वत्युवाच ॥ भगवन्‌ ! देवदेवेश ! भक्तानुग्रहकारक ! ।अल्पमृत्युविनाशाय यत्त्वया पूर्व सूचितम्‌ ॥ 3 ॥ तदेवत्वं महाबाहो ! लोकानां हितकारकम्‌ ।तव मूर्ति प्रभेदस्य महाकालस्य साम्प्रतम्‌ ॥ 4 ॥ शनेर्मृत्युञ्जयस्तोत्रं ब्रूहि मे नेत्रजन्मनः ।अकाल मृत्युहरणमपमृत्यु निवारणम्‌ ॥ 5 ॥ शनिमन्त्रप्रभेदा ये तैर्युक्तं यत्स्तवं शुभम्‌ ।प्रतिनाम चथुर्यन्तं नमोन्तं मनुनायुतम्‌ ॥ 6 ॥ ॥ श्रीशंकर उवाच ॥ नित्ये प्रियतमे गौरि सर्वलोक-हितेरते ।गुह्याद्गुह्यतमं दिव्यं सर्वलोकोपकारकम्‌ ॥ 7 ॥ शनिमृत्युञ्जयस्तोत्रं प्रवक्ष्यामि तवऽधुना ।सर्वमंगलमांगल्यं सर्वशत्रु विमर्दनम्‌ ॥ 8 ॥ सर्वरोगप्रशमनं सर्वापद्विनिवारणम्‌ ।शरीरारोग्यकरणमायुवरिद्द्धकरं नृणाम्‌ ॥ 9 ॥ यदि भक्तासि मे गौरी गोपनीयं प्रयत्नतः ।गोपितं सर्वतन्त्रेषु तच्छ्रणुष्व महेश्वरी ! ॥ 10 ॥ ऋषिन्यासं करन्यासं देहन्यासं समाचरेत्‌ ।महोग्रं मूर्घ्नि विन्यस्य मुखे वैवस्वतं न्यसेत्‌ ॥ 11 ॥ गले तु विन्यसेन्मन्दं बाह्वोर्महाग्रहं न्यसेत्‌ ।हृदि न्यसेन्महाकालं गुह्ये कृशतनुं न्यसेत्‌ ॥ 12 ॥ जान्वोम्तूडुचरं न्यस्य पादयोस्तु शनैश्चरम् ।एवं न्यासविधि कृत्वा पश्चात्‌ कालात्मनः शनेः ॥ 13 ॥ न्यासं ध्यानं प्रवक्ष्यामि तनौ श्यार्वा पठेन्नरः ।कल्पादियुगभेदांश्च करांगन्यासरुपिणः ॥ 14 ॥ कालात्मनो न्यसेद् गात्रे मृत्युञ्जय ! नमोऽस्तु ते ।मन्वन्तराणि सर्वाणि महाकालस्वरुपिणः ॥ 15 ॥ भावयेत्प्रति प्रत्यंगे महाकालाय ते नमः ।भावयेत्प्रभवाद्यब्दान्‌ शीर्षे कालजिते नमः ॥ 16 ॥ नमस्ते नित्यसेव्याय विन्यसेदयने भ्रुवोः ।सौरये च नमस्तेऽतु गण्डयोर्विन्यसेदृतून्‌ ॥ 17 ॥ श्रावणं भावयेदक्ष्णोर्नमः कृष्णनिभाय च ।महोग्राय नमो भार्दं तथा श्रवणयोर्न्यसेत्‌ ॥ 18 ॥ नमो वै दुर्निरीक्ष्याय चाश्विनं विन्यसेन्मुखे ।नमो नीलमयूखाय ग्रीवायां कार्तिकं न्यसेत्‌ ॥ 19 ॥ मार्गशीर्ष न्यसेद्-बाह्वोर्महारौद्राय ते नमः ।ऊर्द्वलोक-निवासाय पौषं तु हृदये न्यसेत्‌ ॥ 20 ॥ नमः कालप्रबोधाय माघं वै चोदरेन्यसेत्‌ ।मन्दगाय नमो मेढ्रे न्यसेर्द्वफाल्गुनं तथा ॥ 21 ॥ ऊर्वोर्न्यसेच्चैत्रमासं नमः शिवोस्भवाय च ।वैशाखं विन्यसेज्जान्वोर्नमः संवर्त्तकाय च ॥ 22 ॥ जंघयोर्भावयेज्ज्येष्ठं भैरवाय नमस्तथा ।आषाढ़ं पाद्योश्चैव शनये च नमस्तथा ॥ 23 ॥ कृष्णपक्षं च क्रूराय नमः आपादमस्तके ।न्यसेदाशीर्षपादान्ते शुक्लपक्षं ग्रहाय च ॥ 24 ॥ नयसेन्मूलं पादयोश्च ग्रहाय शनये नमः ।नमः सर्वजिते चैव तोयं सर्वांगुलौ न्यसेत्‌ ॥ 25 ॥ न्यसेद्-गुल्फ-द्वये विश्वं नमः शुष्कतराय च ।विष्णुभं भावयेज्जंघोभये शिष्टतमाय ते ॥ 26 ॥ जानुद्वये धनिष्ठां च न्यसेत्‌ कृष्णरुचे नमः ।ऊरुद्वये वारुर्णांन्यसेत्कालभृते नमः ॥ 27 ॥ पूर्वभाद्रं न्यसेन्मेढ्रे जटाजूटधराय च ।पृष्ठउत्तरभाद्रं च करालाय नमस्तथा ॥ 28 ॥ रेवतीं च न्यसेन्नाभो नमो मन्दचराय च ।गर्भदेशे न्यसेद्दस्त्रं नमः श्यामतराय च ॥ 29 ॥ नमो भोगिस्त्रजे नित्यं यमं स्तनयुगे न्यसेत्‌ ।न्येसत्कृत्तिकां हृदये नमस्तैलप्रियाय च ॥ 30 ॥ रोहिणीं भावयेद्धस्ते नमस्ते खड्गधारीणे ।मृगं न्येसतद्वाम हस्ते त्रिदण्डोल्लसिताय च ॥ 31 ॥ दक्षोर्द्ध्व भावयेद्रौद्रं नमो वै बाणधारिणे ।पुनर्वसुमूर्द्ध्व नमो वै चापधारिणे ॥ 32 ॥ तिष्यं न्यसेद्दक्षबाहौ नमस्ते हर मन्यवे ।सार्पं न्यसेद्वामबाहौ चोग्रचापाय ते नमः ॥ 33 ॥ मघां विभावयेत्कण्ठे नमस्ते भस्मधारिणे ।मुखे न्यसेद्-भगर्क्ष च नमः क्रूरग्रहाय च ॥ 34 ॥ भावयेद्दक्षनासायामर्यमाणश्व योगिने ।भावयेद्वामनासायां हस्तर्क्षं धारिणे नमः ॥ 35 ॥ त्वाष्ट्रं न्यसेद्दक्षकर्णे कृसरान्न प्रियाय ते ।स्वातीं न्येसद्वामकर्णे नमो बृह्ममयाय ते ॥ 36 ॥ विशाखां च दक्षनेत्रे नमस्ते ज्ञानदृष्टये ।विष्कुम्भं भावयेच्छीर्षेसन्धौ कालाय ते नमः ॥ 37 ॥ प्रीतियोगं भ्रुवोः सन्धौ महामन्दं ! नमोऽस्तु ते ।नेत्रयोः सन्धावायुष्मद्योगं भीष्माय ते नमः ॥ 38 ॥ सौभाग्यं भावयेन्नासासन्धौ फलाशनाय च ।शोभनं भावयेत्कर्णे सन्धौ पिण्यात्मने नमः ॥ 39 ॥ नमः कृष्णयातिगण्डं हनुसन्धौ विभावयेत्‌ ।नमो निर्मांसदेहाय सुकर्माणं शिरोधरे ॥ 40 ॥ धृतिं न्यसेद्दक्षवाहौ पृष्ठे छायासुताय च ।तन्मूलसन्धौ शूलं च न्यसेदुग्राय ते नमः ॥ 41 ॥ तत्कूर्परे न्यसेदगण्डे नित्यानन्दाय ते नमः ।वृद्धिं तन्मणिबन्धे च कालज्ञाय नमो न्यसेत्‌ ॥ 42 ॥ ध्रुवं तद्ङ्गुली-मूलसन्धौ कृष्णाय ते नमः ।व्याघातं भावयेद्वामबाहुपृष्ठे कृशाय च ॥ 43 ॥ हर्षणं तन्मूलसन्धौ भुतसन्तापिने नमः ।तत्कूर्परे न्यसेद्वज्रं सानन्दाय नमोऽस्तु

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राधा गोविंद मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

यह मंदिर युगल राधा-कृष्ण को समर्पित मंदिर है। राधा गोविंद मंदिर:मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के निपानिया में स्थित है इस्क़ॉन राधा गोविंद मंदिर। यह मंदिर शहर से केवल 11 किलोमीटर की दूरी पर निर्मित भव्य मंदिर है। रविवार और विशेष त्योहार के दिनों में मंदिर में अधिक संख्या में भीड़ होती है। यह मंदिर युगल राधा-कृष्ण को समर्पित है। मंदिर का इतिहास राधा गोविंद मंदिर का इतिहास स्पष्ट नहीं है। इस मंदिर के निर्माण का कार्य सन् 2004 से अस्थायी रूप से शुरू हुआ था। साथ ही भव्य मंदिर के निकट, बड़ा गेस्टहाउस, थीम पार्क और गोविंदा रेस्तरां का निर्माण भी किया गया है। इसका भूमिपूजन 2014 में हुआ था। मंदिर का महत्व राधा गोविंद मंदिर के दर्शन करने से मन को आत्म शांति मिलती है। शांत वातावरण में बना यह मंदिर भक्तों को सुकून प्रदान करता है। त्योहारों के समय मंदिर में बहुत भीड़ रहती है। मंदिर में विशाल आयोजन किया जाता है। भगवान को छप्पन भोग लगाया जाता है। मंदिर के पास जो भोग और भोजन मिलता है वह सात्विक भोजन होता है। जो लोग दर्शन करने आते है वह यहाँ का प्रसाद जरूर खा कर जाते हैं। मंदिर की वास्तुकला मंदिर में पारंपरिक भारतीय मंदिर डिजाइनों से प्रेरित सुंदर वास्तुकला की गयी है। यह जटिल नक्काशी और जीवंत चित्रों से सुसज्जित है। मंदिर की वास्तुकला भारत की समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिकता को दर्शाता है। मंत्रमुग्ध कर देने वाली सुंदर राधा और कृष्ण की मूर्तियाँ पूर्ण रूप से संगमरमर से बनी हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 01:00 PM शाम को मन्दिर खुलने का समय 04:15 PM – 09:00 PM मंगला आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM तुलसी आरती का समय 05:00 AM – 05:30 AM श्रृंगार आरती का समय 07:30 AM – 08:00 AM राजभोग आरती का समय 12:30 PM – 01:00 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 07:30 PM उत्थान आरती का समय 04:15 PM – 04:30 PM मंदिर का प्रसाद राधा गोविंद मंदिर चिरौंजी, माखन मिश्री, लड्डू, मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही पुष्प भी अर्पित किए जाते हैं।

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Jyeshtha Masik Durga Ashtami Vrat 2025 Date:कब है ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी, नोट करले डेट टाइम, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व उपाय

Jyeshtha Masik Durga Ashtami Vrat:हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के भक्त उनकी पूजा करते हैं और पूरे दिन व्रत रखते हैं। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है, कहा जाता है कि मां दुर्गा के सभी रूपों की विधि-विधान से पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। मासिक दुर्गाष्टमी को मास दुर्गाष्टमी या मासिक दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत के महत्व और मान्यताओं के बारे में: इसके अलावा यदि जो लोग मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा की पूजा करते है उनके द्वारा किये गए सभी पाप धुल जाते हैं और मन शुद्ध होता है। इस दिन देवी दुर्गा की पूजा करने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। Jyeshtha Masik Durga Ashtami मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा की सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। और ग्रहदोष से भी मुक्ति मिलती है। आईये जानते है साल 2025 में ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी कब मनाई जाएगी 02 या 03 जून, जानिए पूजा की सही तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस दिन किये जाने वाले उपाय ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी कब है 2025 Jyeshtha Durga Ashtami 2025 Date Muhurat Jyeshtha Masik Durga Ashtami हिंदी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि प्रारम्भ होगी 02 जून 2025 को रात 08 बजकर 34 मिनट पर और ज्येष्ठ मास की दुर्गा अष्टमी तिथि समाप्त होगी 03 जून 2025 को रात 09 बजकर 56 मिनट पर इसलिए साल 2025 में ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी 03 जून दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। दुर्गा अष्टमी पूजा विधि Durga Ashtami Puja Vidhi Jyeshtha Masik Durga Ashtami दुर्गा अष्टमी माता दुर्गा को समर्पित होती है। इसलिए ज्येष्ठ मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करे। और व्रत का संकल्प लें इसके बाद पूजा के स्थान को स्वच्छ करें और माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद माता दुर्गा के समक्ष धूप, दीप प्रज्वलित करें और माता दुर्गा को फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें। और माता दुर्गा का ध्यान करें और माता दुर्गा के मंत्रों का जाप करें. इसके Jyeshtha Masik Durga Ashtami अलावा दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसके बाद कलश का जल पूरे घर में छिड़कें और प्रसाद ग्रहण करने से पहले माता दुर्गा को अर्पित करें। और फिर पूजा समाप्त होने के बाद किसी गरीबों व्यक्ति या किसी और जरूरतमंद लोगों को दान करे। दुर्गा अष्टमी उपाय Durga Asthami Upay यदि आप जीवन की परेशानियों से छुटकारा पाना चाहते है तो मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा को हलवा और उबले हुए चने का भोग लगाएं। और साथ ही 6 सफेद कौड़ियां लेकर उन्हें लाल कपड़े में बांधकर माता दुर्गा के मंदिर में ले जाकर चढ़ाये। Jyeshtha Masik Durga Ashtami यदि आप कौड़ियां ना ले पायें तो 6 कपूर और 36 लौंग लेकर माता दुर्गा को चढ़ाएं। आप की सभी मनोकामना पूरी होगी। यदि आप धन की समस्या से परेशान हैं धन रुकता नही है, तो इसके लिए अष्टमी तिथि के दिन पान के पत्ते पर चंदन से ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे लिखकर माता दुर्गा के चरणों में अर्पित करें। और अगले दिन इस पान के पत्तों को अपनी तिजोरी में रख लें। Jyeshtha Masik Durga Ashtami ऐसा करने से आपको अपनी आर्थिक स्थिति में लाभ मिलेगा। दुर्गा अष्टमी के दिन माता दुर्गा के समक्ष देसी घी का दीपक जलाने के बाद इस मंत्र या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।। का 11 बार जप करने से बच्चे के कैरियर में उन्नति होगी दुर्गा अष्टमी पर ना करे ये काम Jyeshtha Masik Durga Ashtami Per Na kare Ye kaam माता दुर्गा की पूजा में तुलसी, आंवला, दूर्वा, मदार, आक के फूल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बल्कि पूजा के दौरान माता दुर्गा की एक ही तस्वीर रखनी चाहिए। दुर्गा पूजा के दौरान तामसिक चीजो का सेवन नही करना चाहिए। Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा के 108 नाम Shri Durga 32 Name:माँ दुर्गा के 32 नाम सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम् (Saptashloki Durga Stotra) दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)

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Jamai Sasthi 2025 Date : बंगाल के जमाई षष्ठी के बारे में ये बातें आपको हैरान कर देगी

Jamai Sasthi:भारत एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश है। यहां कई अद्भुत त्यौहार मनाए जाते हैं। जितने राज्य हैं, उतनी हीं भाषाएं है, उतनी ही जाति है, उतने ही धर्म है और सभी के उतने ही रिवाज और रस्में हैं। कई तो ऐसे भी त्यौहार है जिनका नाम कई लोगों ने कभी सुना भी नहीं होगा। इन्हीं रोचक त्यौहारों में से एक है बगांल में मनाया जाने वाला त्यौहार ‘जामाई षष्ठी’। कोलकाता में ‘जामाई षष्ठी’  नामक एक खूबसूरत त्यौहार मनाया जाता है। जामाई को कई जगह दामाद, मेहमान इत्यादि भी कहा जाता है। जामाई षष्ठी एक ऐसा त्यौहार है जो जामाई को अपने ससुराल पक्ष से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। यह त्यौहार ससुरालवालों के साथ दमाद के सुंदर बंधन को भी प्रदर्शित करता है। जामाई षष्ठी Jamai Sasthi का पारंपरिक त्यौहार महिलाओं की सामाजिक-धार्मिक तथा कर्तव्य के हिस्से के रूप में पैदा हुआ था। दामाद को ‘जामाई’  और ‘षष्ठी’ ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के छठे दिन को कहते हैं। जिसका अर्थ छठा दिन है।  इस प्रकार यह त्यौहार परंपरागत हिंदू कैलेंडर के ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष के छठे दिन मनाया जाता है। साल 2025 में जमाई षष्ठी कब है? (Jamai Sasthi 2025) प्रत्येक वर्ष जमाई षष्ठी का त्योहार ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार Jamai Sasthi जमाई षष्ठी का त्योहार मई तथा जून के महीने में मनाया जाता है। साल 2025 में जमाई षष्ठी 01 जून, दिन- रविवार को मनाया जाएगा। जमाई षष्ठी का शाब्दिक अर्थ क्या है? What is the literal meaning of Jamai Sasthi ? जमाई शब्द का अर्थ है दामाद, जबकी षष्ठी का अर्थ चंद्र मास का छठा दिन से है अर्थात् ज्येष्ठ माह के षष्ठी के दिन मनाए जाने वाले पर्व को जमाई षष्ठी कहा जाता है। जमाई षष्ठी के दिन किए जाने वाले कार्यक्रम:Jamai Sasthi ke din kiye jaane vale karyakram जमाई षष्ठी की तैयारी: Preparation for Jamai Sasthi सास अपने दामाद की स्वागत के लिए इस बड़े दिन की तैयारी पहले से ही शुरू कर देती है। सास अपनी बेटी और दामाद के लिए उपहार, साड़ियाँ और कभी-कभी सोने के गहने भी खरीदती हैं। उसके बाद एक भव्य दावत की योजना बनाई जाती है, जिसमें बंगाली व्यंजनों का सबसे अच्छा स्वाद होता है और इसमें दामाद के पसंदीदा व्यंजनों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अनुष्ठान और परंपराएँ: Rituals and Traditions बंगालियों के घरों में जमाई षष्ठी का त्योहार बहुत ही उत्साह और हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है। जमाई षष्ठी उत्सव की शुरुआत देवी षष्ठी की पूजा से होती है, जिसमें सास अपने परिवार की खुशहाली के लिए माता देवी षष्ठी से आशीर्वाद माँगती है। उसके बाद सास अपने जमाई का स्वागत आरती और तिलक लगाकर करती है, जो प्यार और सम्मान का प्रतीक है। सुरक्षा और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में सास अपने दामाद के कलाई पर एक पवित्र पीला धागा बाँधती है। जमाई षष्ठी के दिन दामाद का स्वागत: Welcoming the son-in-law on the day of Jamai Sasthi जमाई षष्ठी Jamai Sasthi की शुरुआत में सबसे पहले सास अपने दामाद को गृह प्रवेश करवाती है तथा इस दौरान सास अपने दामाद को तिलक लगाती है और अपने दामाद की कलाई में पीला धागा बांधती है तथा उसके बाद अपने दामाद को कपूर से आरती कर खुशहाल रहने का आशीर्वाद देती है। अंत में दामाद अपने सास का पैर छूकर आशीर्वाद लेता है। जमाई षष्ठी का सबसे प्रतीक्षित हिस्सा निस्संदेह भव्य दावत है तथा इस दिन सास अपने दामाद के लिए खास व्यंजन तैयार करती है जिनमें से शुक्तो, बेगुन भाजा, मिष्टी दोई, लूची, आलूर डोम, विभिन्न तरह का मिठाइयाँ तथा अन्य कई तरह के बंगाली व्यंजन शामिल होता है। जमाई षष्ठी की थाली: Jamai Sashhi Thali जमाई षष्ठी Jamai Sasthi के दिन सास अपने दामाद को एक राजा जैसा सम्मान प्रदान करने के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों से भरा एक थाल तैयार करती है। खासकर दोपहर के भोजन में सास अपने दामाद को भात, दाल, पाँच प्रकार की तली हुई सब्जी(भाजी), कोशा मांगशो, इलिश भापा तथा अन्य कई स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाते है। जमाई षष्ठी का महत्व: Importance of Jamai Sasthi जमाई षष्ठी Jamai Sasthi केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि सास और दामाद के बीच प्यार और खूबसूरत बंधन की अभिव्यक्ति है। मान्यता है कि जमाई षष्ठी का त्योहार मनाने से दोनों परिवारों के बीच मतभेद कम होता है और इस दौरान सास तथा दामाद के बीच के रिश्ते ओर भी मज़बूत होते है। शुभो जमाई षष्ठी! जमाई षष्ठी से जुड़ी कहानी: Story related to Jamai Sasthi 1.पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अपने घर पर भगवान शिव तथा देवी पार्वती को भोज के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन आपस में मन मुटाव होने के कारण माता लक्ष्मी ने देवी पार्वती की स्वागत नहीं की, इससे भगवान शिव नाराज हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु को यह श्राप दिया कि तुम्हें अपना घर छोड़ रास्ते में एक भिखारी की तरह भटकना पड़ेगा। तभी भगवान विष्णु ने एक जमाई(दामाद) का रूप धारण किया और ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की Jamai Sasthi षष्ठी तिथि को माता लक्ष्मी से आशीर्वाद प्राप्त किया। सास से क्षमा माँगने की इस कृतज्ञ से भगवान शिव द्वारा दिए गए श्राप से भगवान विष्णु मुक्त हो जाते है और इस तरह भगवान विष्णु अपने घर वापस लौटने में सक्षम हो जाते है। 2.अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय में एक महिला अपने घर का सारा खाना खा लेती थी, और लगातार अपना दोष एक बिल्ली पर लगाती कि उसके घर का खाना बिल्ली खाई है। बिल्ली की सवारी करने वाली माँ षष्ठी उस महिला पर काफी क्रोधित हुई। महिला गर्भवती थी तथा जब महिला के बच्चे धरती पर जन्म लिए तो उनमें से एक बच्चा ग़ायब हो गया, इस दौरान महिला देवी षष्ठी को खुश करने के लिए उनकी पूजा आराधना की। तो देवी षष्ठी महिला को उनका बच्चा वापस कर दी। लेकिन इस घटना की वजह से महिला के ससुराल वाले नाखुश थे, और महिला को अपने माता-पिता से मिलने के लिए मना कर दिए। लेकिन कुछ सालों बाद षष्ठी पूजा के दिन महिला की माता-पिता अपने दामाद तथा बेटी

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Dream Interpretation Money:अगर आपको भी दिखते हैं ऐसे 5 सपने, तो गलती से भी किसी को न बताएं

Dream Interpretation Money : स्वप्न विज्ञान का मानना है कि सपने जीवन में परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं। कहा जाता है कि सपने हमारे जीवन का आईना होते हैं। कहा जाता है कि इंसान जिस तरह की स्थिति से गुजर रहा होता है, उसे वैसे ही सपने आते हैं। स्वप्न विज्ञान के जानकारों का कहना है कि कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जिनसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हमें अक्सर जो सपने आते हैं वह हम तुरंत अपनों के साथ या फिर दोस्तों के साथ साझा कर लेते हैं। लेकिन, स्वप्न शास्त्र इस बात से असहमत है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने को अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को नहीं बताना चाहिए। जो सपने आपको आर्थिक लाभ देते हैं यदि वो सपने हम किसी को बता दें तो हमें लाभ के बदले नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं कौन से सपनों को हमें किसी को साझा नहीं करना चाहिए।  सपने हर एक व्यक्ति को आते हैं शायद ही कोई ऐसा हो जिसे सपने नहीं आते हों। सपनों की दुनिया को लेकर स्वप्न शास्त्र में बहुत सी जानकारी दी गई है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने का कुछ न कुछ अर्थ जरुर होता है। हमें अक्सर जो सपने आते हैं वह हम तुरंत अपनों के साथ या फिर दोस्तों के साथ साझा कर लेते हैं। लेकिन, स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने हर किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। Dream Interpretation Money आज हम आपको कुछ ऐसे सपनों के बारे में बताने जा रहे हैं यदि वह आपको आते हैं तो आपको उन्हें किसी और के साथ साझा नहीं करना चाहिए। वरना आपको बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। Dream Interpretation Money:अगर आपको भी दिखते हैं ऐसे 5 सपने सपने में फूलों का बगीचा देखना:See a flower garden in a dream अगर आपको सपने में फलों का बगीचा दिखाई देता है तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह का सपना देखना अच्छा माना जाता है। इस तरह के सपने आना का अर्थ है कि आपको कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। इस तरह का सपना आर्थिक मुनाफा होना का संकेत देता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर किसी को इस तरह का सपना आता है तो उसे किसी को नहीं बताना चाहिए। वरना इसका प्रभाव कम हो जाता है। चांदी से भरा कलश: A vase full of silver यदि आपको सपने में चांदी से भरा हुआ कलश नजर आता है तो इस तरह का सपने बहुत ही शुभ माना जाता है। Dream Interpretation Money स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह का सपना आना जीवन में अच्छे दिन आने के संकेत देता है। इस तरह का सपना इशारा करता है कि आने वाले भविष्य में आपके अच्छे दिन आने वाले है। इस तरह का सपने आने पर भी दूसरों को इस बारे में न बताएं। सपने में माता पिता को पानी पिलाते देखना:Seeing your parents giving you water in your dream अगर आपको सपने कभी दिखाई पड़े कि आप अपने माता पिता को पानी पिला रहे हैं तो इस तरह का सपना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस तरह का सपना इस बात का संकेत है कि आने वाले भविष्य में आपकी खूब तरक्की होने वाली है। Dream Interpretation Money इस तरह के सपनों को भी किसी के साथ साझा न करें वरना इसका प्रभाव कम होगा। सपने में दिखाई दे भगवान:see god in dreams अगर आपको सपने में भगवान दिखाई देते हैं तो यह इस बात के संकेत है कि आपको जल्द ही कोई गुड न्यूज मिलने वाली है। अगर इस तरह के सपने को आप किसी के साथ साझा करते हैं तो Dream Interpretation Money स्वप्न शास्त्र के अनुसार, आपका बनते काम बिगड़ सकते हैं। इसलिए भूलकर भी इस तरह के सपने किसी के साथ साझा न करें। सपने में खुद की मृत्यु होते देखना:Seeing your own death in a dream अगर आपको सपने में दिखाई देता है कि आपकी मृत्यु हो गई है या Dream Interpretation Money फिर किसी और की मृत्यु हो गई है तो इस तरह के सपने को भी किसी के साथ साझा न करें। ऐसा कहा जाता है कि इस तरह के सपने दूसरों के साथ साझा करने से खुशियों को नजर लग जाती है।

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