INDORE

भारत माता मन्दिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इस मंदिर को बनाने के पीछे लोगों के मन में राष्ट्रधर्म की भावना विकसित करना मकसद है। भारत माता मन्दिर भारत में मंदिरों में आमतौर पर देवी देवताओं के साथ लोग अपने आराध्य की मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा अर्चना की जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में एक ऐसा मंदिर है, जहां भारत माता की मूर्ति स्थापित है। यहां भारत माता की पूजा होती है। भारत माता मंदिर बाकी मंदिरों से इसलिए भी अलग है क्योंकि इस मंदिर में अन्य मंदिरों की तरह न कोई आरती होती है न ही शंक और घंटी बजती है। यहां सिर्फ राष्ट्रभक्ति गीतों की गूंज सुनाई देती है। इस मंदिर को बनाने के पीछे लोगों के मन में राष्ट्रधर्म की भावना विकसित करना मकसद है, इसी बात को ध्यान में रखकर भारत माता मंदिर का निर्माण कराया है। Bharat Mata Mandir:भारत माता मन्दिर का इतिहास इंदौर के भारत माता मंदिर का भूमि पूजन 11 सितंबर 2000 को हुआ था। मंदिर को पूरा बनने में दो साल का समय लगा था, इस मंदिर को आम जनता के लिए जनवरी 2002 में खोला गया था। सद्गुरु धार्मिक एवं परमार्थिक ट्रस्ट ने आम जन में राष्ट्रीय भावना जागृत करने के लक्ष्य से सुखलिया इलाके में भारत माता मंदिर का निर्माण कराया। वैसे तो यह बाहर से आम मंदिर की तरह नजर आता है, मगर भीतर से ऐसा नहीं है। यह ऐसा मंदिर है, जिसमें न तो घंटी की गूंज सुनाई देती है और न ही पूजा-पाठ के लिए हवन कुंड है, अगर कुछ है तो हाथ में तिरंगा लिए भारत माता की मूर्ति। भारत माता मन्दिर का महत्व 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस पर देवी-देवताओं की तरह विधि-विधान से भारत माता की पूजा अर्चना होती है। स्वतंत्रता दिवस के पर राष्ट्रध्वज वंदन के साथ युवाओं को राष्ट्रभाव की प्रतिज्ञा दिलाई जाती है और प्रतिमा की महाआरती होती है। भारत माता मंदिर में पूजा अर्चन के लिए कोई पुजारी या महंत बैठते। मंदिर में आने वाले देश भक्त और पर्यटक मंदिर में आकर भारत माता के आगे शीश झुका कर देश भक्ति के नारे लगाते हैं। भारत माता मन्दिर की वास्तुकला भारत माता मंदिर को मराठा शैली में बनाया गया है। दो मंजिला मंदिर के शीर्ष पर विशाल शिखर बना है, जिसके गर्भ गृह में भारत माता की मूर्ति स्थापित है। बॉर्डर वाली गहरे रंग की साड़ी पहने हाथ में तिरंगा थामे स्थापित भारत माता की प्रतिमा के पीछे भारत का नक्शा बना हुआ है। मंदिर परिसर में बगीचा बना हुआ है, जहां अलग-अलग प्रजाति के फूल वाले पौधे लगे हैं। भारत माता मन्दिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 11:00 AM शाम को मन्दिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM

भारत माता मन्दिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

राधा गोविंद मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

यह मंदिर युगल राधा-कृष्ण को समर्पित मंदिर है। राधा गोविंद मंदिर:मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के निपानिया में स्थित है इस्क़ॉन राधा गोविंद मंदिर। यह मंदिर शहर से केवल 11 किलोमीटर की दूरी पर निर्मित भव्य मंदिर है। रविवार और विशेष त्योहार के दिनों में मंदिर में अधिक संख्या में भीड़ होती है। यह मंदिर युगल राधा-कृष्ण को समर्पित है। मंदिर का इतिहास राधा गोविंद मंदिर का इतिहास स्पष्ट नहीं है। इस मंदिर के निर्माण का कार्य सन् 2004 से अस्थायी रूप से शुरू हुआ था। साथ ही भव्य मंदिर के निकट, बड़ा गेस्टहाउस, थीम पार्क और गोविंदा रेस्तरां का निर्माण भी किया गया है। इसका भूमिपूजन 2014 में हुआ था। मंदिर का महत्व राधा गोविंद मंदिर के दर्शन करने से मन को आत्म शांति मिलती है। शांत वातावरण में बना यह मंदिर भक्तों को सुकून प्रदान करता है। त्योहारों के समय मंदिर में बहुत भीड़ रहती है। मंदिर में विशाल आयोजन किया जाता है। भगवान को छप्पन भोग लगाया जाता है। मंदिर के पास जो भोग और भोजन मिलता है वह सात्विक भोजन होता है। जो लोग दर्शन करने आते है वह यहाँ का प्रसाद जरूर खा कर जाते हैं। मंदिर की वास्तुकला मंदिर में पारंपरिक भारतीय मंदिर डिजाइनों से प्रेरित सुंदर वास्तुकला की गयी है। यह जटिल नक्काशी और जीवंत चित्रों से सुसज्जित है। मंदिर की वास्तुकला भारत की समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिकता को दर्शाता है। मंत्रमुग्ध कर देने वाली सुंदर राधा और कृष्ण की मूर्तियाँ पूर्ण रूप से संगमरमर से बनी हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 01:00 PM शाम को मन्दिर खुलने का समय 04:15 PM – 09:00 PM मंगला आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM तुलसी आरती का समय 05:00 AM – 05:30 AM श्रृंगार आरती का समय 07:30 AM – 08:00 AM राजभोग आरती का समय 12:30 PM – 01:00 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 07:30 PM उत्थान आरती का समय 04:15 PM – 04:30 PM मंदिर का प्रसाद राधा गोविंद मंदिर चिरौंजी, माखन मिश्री, लड्डू, मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही पुष्प भी अर्पित किए जाते हैं।

राधा गोविंद मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

Geeta Bhawan Mandir:गीता भवन मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इस मंदिर में महाभारत, रामायण और पुराणों के चित्रण है Geeta Bhawan Mandir :गीता भवन मंदिर इंदौर मध्यप्रदेश के आगरा मुम्बई रोड, मनोरमागंज में स्थित है। यह वास्तविक रूप से एक मंदिर की तरह है। परन्तु यह मंदिर किसी विशेष संप्रदाय का नहीं है। यहाँ पर सभी धर्मों के लोग आ सकते हैं। क्योंकि यह मंदिर लोगों की भावनाओं को समर्पित है। यहाँ पर सभी धर्मों के लोग एकत्रित होते हैं Geeta Bhawan Mandir :का इतिहास गीता भवन मंदिर का निर्माण सन् 1960 में बाबा लाल मुकुंद द्वारा करवाया गया था। गीता भवन मंदिर गीता भवन ट्रस्ट, इंदौर की सहायक कंपनी द्वारा संचालित होता है। जो कि ट्रस्ट, स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल और रिसॉर्ट भी चलाता है। Geeta Bhawan Mandir गीता भवन का विशेष अस्पताल भी गीता भवन मंदिर में स्थित है। Geeta Bhawan Mandir :का महत्व गीता जयंती पर यहाँ विशेष आयोजन होता है। भक्तों की भीड़ उमड़ती है। आपको यहाँ पर साधु संतों के दर्शन भी बड़ी आसानी से हो जायेंगे। गीता भवन मंदिर के प्रवचन चलते ही रहते है। आप यदि यहाँ पर जाते है तो समय निकालकर साधु संतों के प्रवचन का आनंद अवश्य लें। गीता भवन की एक विशेषता इसका पुस्तकालय भी है, जिसमें धार्मिक पुस्तकों, धर्मग्रंथों और अन्य साहित्य का एक बड़ा संग्रह है। यहाँ पर आप अपनी पसंद के अनुसार पुस्तक को पढ़ सकते हैं। गीता भवन में पूरे वर्ष विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें संगीत समारोह, नृत्य प्रदर्शन और थिएटर शो शामिल हैं। मंदिर में अपनी आस्था के अनुसार आप प्रार्थना भी कर सकते है क्योंकि यहाँ पर कई भक्तों के लिए एक विशाल प्रार्थना कक्ष भी है। Geeta Bhawan Mandir :की वास्तुकला गीता भवन मंदिर के वास्तुकला की बात की जाए तो यह एक बड़ी ईमारत है। जहाँ पर सभी धर्मों से सम्बंधित मूर्तियां है। इस भवन में एक शानदार केंद्रीय हॉल है जिसमे महाभारत, रामायण और पुराणों जैसे कथाओं को चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। गीता भवन में आपको एक ही स्थान पर सभी देवी – देवताओं के दर्शन हो जायेंगे। यहाँ सभी भगवानों की बहुत ही सुन्दर प्रतिमाएं स्थापित की गयी हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही आपको विशाल हॉल दिखेगा। चारों तरफ नजरें घुमाने पर आपको बहुत सारे देवी -देवताओं की प्रतिमाओं के साथ दीवालों पर कलाकृति भी दिखाई देगी। मंदिर का समय सुबह मन्दिर का समय 07:00 AM – 07:00 PM मंदिर का प्रसाद गीता भवन मंदिर में सभी धर्मों के भगवान है। इसलिए यहाँ पर भक्त अपनी श्रद्धानुसार प्रसाद अर्पित कर सकते हैं।

Geeta Bhawan Mandir:गीता भवन मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

शीतला माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

Sheetla Mata Mandir:शीतला माता का यह मंदिर “शीतला माता वाटरफॉल “के नाम से भी जाना जाता है। Sheetla Mata Mandir:शीतला माता मंदिर इंदौर से 55 किमी की दूरी पर मानपुर के रामपुरिया बुजर्ग गांव में स्थित है शीतला माता मंदिर। इस मंदिर से केवल 3 किमी की दूरी पर है शीतला माता जलप्रपात। जो भक्त यहाँ माता के दर्शन करने आते हैं। वह दर्शन के साथ साथ प्रकृति का भी आनंद लेते हैं। माता का यह मंदिर अति प्राचीन है और यह हजारों फ़ीट नीचे खाई में एक गुफा में स्थित है। शीतला माता का यह मंदिर “शीतला माता वाटरफॉल “के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का इतिहास शीतला माता मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। मंदिर के स्थापत्य की कोई सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है। परन्तु ऐसा कहा जाता है कि माता की प्रतिमा स्वयं से प्रकट हुई हैं। यह प्रतिमा 1000 साल पुरानी है। किदवंती यह भी है कि इस मंदिर का जीर्वोद्धार सन् 1857 में किया गया था। मंदिर का महत्व इस मंदिर कि ऐसी मान्यता है कि यहाँ पर माता के दर्शन करने के लिए शेर आता है और वह माता के दर्शन करके चला जाता है। कहा जाता है कि माता भक्तों के दुःख और मुसीबतों को दूर करती हैं। इस स्थान पर तीन खूबसूरत गुफाएं भी हैं और यह भी माना जाता है कि होल्कर राज्य के पिंडारी यहीं छिपे थे। स्कंद पुराण के अनुसार शीतला माता चेचक रोग की देवी हैं, जो सभी भक्तों के चेचक रोग को हर लेती हैं। मंदिर की वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला की बात करें तो मंदिर बहुत ही प्राचीन है और यह एक प्राकृतिक गुफा में स्थित है। इस कारण यहाँ पर कोई भी निर्माण कार्य नहीं हो सकता है। वहीं पाषाण रूप में शीतला माता विराजित है। उनका रंग सिंदूरी है। गुफा में प्रवेश करने पर आप माता के दर्शन कर सकते है। मंदिर के पास ही बहुत खूबसूरत झरनें भी है। मंदिर में भगवान शिव की पिंडी भी विराजित हैं। साथ ही नंदी जी भी विराजमान हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव का यह रूप नेपाल के पशुपतिनाथ के जैसा ही है। मंदिर का समय शीतला माता मंदिर खुलने का समय 08:00 AM – 05:00 PM मंदिर का प्रसाद मंदिर में चना चिरौंजी ,लड्डू का भोग लगाया जाता है। आप माता को चुनरी भी चढ़ा सकते है। पुष्प भी अर्पण किये जाते है।

शीतला माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

महालक्ष्मी मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इस मंदिर में होलकर काल से चली आ रही परंपरा आज भी देखने को मिलती है। भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के हृदय स्थल राजवाड़ा में महालक्ष्मी मंदिर स्थित है। यह इंदौर के प्राचीन मंदिरों में से एक है। भक्त मंदिर में जो चावल चढ़ाते हैं, उनमें से कुछ चावल मन्नत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं और फिर उसे घर की तिजोरी और दुकान के गल्ले में रखते हैं ताकि वर्षभर बरकत बनी रहे। बताया जाता है कि यह सिलसिला मंदिर की स्थापना के बाद से लगातार जारी है। महालक्ष्मी मंदिर का इतिहास महालक्ष्मी मंदिर करीब 188 साल प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर होलकर कालीन मंदिर की स्थापना 1833 में इंदौर के राजा हरि राव होलकर ने की थी। उस दौर में यहां मंदिर नहीं था, प्रतिमा की स्थापना एक पुराने मकान में की गई थी। होलकर वंश के लोग उस समय नवरात्र और दिवाली पर माता के दर्शन करने आते थे। इसके साथ ही खजाना खोलने से पूर्व भी होलकर राजवंश मां महालक्ष्मी का आशीष लेता था। इस मंदिर में होलकर काल से चली आ रही परंपरा आज भी देखने को मिलती है। Mahalakshmi Temple:मंदिर का महत्व दिवाली के मौके पर भक्त मंदिर पहुंचकर माता लक्ष्मी को पीले चावल देकर अपने घर आने का आमंत्रण देते हैं। भक्त मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि हमारे घर पधारें और सुख-समृद्धि का आशीष दें। दिवाली के दिन मंदिर के पट सुबह तीन बजे खोल दिए जाते हैं। 11 पंडित मां लक्ष्मी का विशेष अभिषेक करते हैं और फिर श्रृंगार के बाद माता की महाआरती की जाती है। हर साल दीपावली के मौके पर मंदिर में 5 दिवसीय महोत्सव होता है। धनतेरस से शुरू होकर ये महोत्सव भाईदूज पर पूरा होता है। इस मौके पर यहां लाखों दर्शनार्थी मंदिर पहुंचते हैं। होलकर रियासत के दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी और क्षेत्र के व्यापारी अपने दिन की शुरुआत मंदिर में मां लक्ष्मी के दर्शन के साथ करते हैं। मंदिर की वास्तुकला होलकर कालीन महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण पूरी तरह से लकड़ी से हुआ था। 1933 में ये मंदिर तीन मंजिला था, लेकिन बाद में जर्जर होने के कारण ये गिर गया। 1942 में मंदिर जीर्णोद्धार कराया गया, जिसके बाद 2011 में मंदिर का पुन: जीर्णोद्धार कराया गया। इस मंदिर में माता की 21 इंच की प्राचीन मूर्ति प्रतिष्ठित है। गर्भ गृह में बड़े चबूतरे पर माता महालक्ष्मी की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसके चारों ओर संगमरमर के आठ स्तम्भ लगे हुए हैं। साथ ही भगवान गणेश रिद्धि सिद्धि की काले पत्थरों से बनी मूर्ति है। मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर के तर्ज पर इस मंदिर का विकास किया जा रहा है। मंदिर को मराठा शैली में बनाया गया है। मंदिर के दीवारों पर नक्काशी की गई, जिसे देख कर मन प्रसन्न हो जाता है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 07:00 AM – 12:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM सुबह की आरती 07:00 AM – 07:30 AM सायंकाल आरती 07:00 PM – 07:30 PM मंदिर का प्रसाद महालक्ष्मी मंदिर में भक्त मां को फल, ड्राई फ्रूट्स, लड्डू का भोग लगाते हैं। कुछ श्रद्धालु मां को हलवा, चना और पूड़ी का भोग भी लगाते हैं।

महालक्ष्मी मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

बिजासन माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

माता को “राजराजेश्वरी बिजासन माता” के नाम से भी जाना जाता है। बिजासन माता मंदिर:क्लीन सिटी इंदौर, मध्यप्रदेश के एयरपोर्ट रोड के समीप पहाड़ी पर स्थित है बिजासन माता मंदिर। इस मंदिर में माता के नौ रूप विराजित है। यह मंदिर एक हजार वर्ष पुराना है। माता के दर्शन के लिए यहाँ प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। माता को “राजराजेश्वरी बिजासन माता” के नाम से भी जाना जाता है। Shree Bijasan Mata Mandir:मंदिर का इतिहास बिजासन माता मंदिर का निर्माण इंदौर के होलकर महाराजा शिवाजी राव होलकर ने सन 1760 में करवाया था। प्राचीन मंदिर में विजासन माता की प्रतिमा करीब 1000 साल से भी ज्यादा पुरानी है। मंदिर के निर्माण के 100 वर्ष पूरे होने पर सन 1860 में मंदिर में बहुत ही धूमधाम से उत्सव मनाया गया था। इस मंदिर का समय समय पर जीर्वोद्धार भी किया जाता रहा है। मंदिर का महत्व बिजासन माता मंदिर में माता की पाषाण पिंडियाँ विराजमान है। ये पिंडियां यहाँ पर कब विराजित हुयी है इसका कोई भी प्रमाण नहीं है। ऐसा माना जाता है कि ये पिंडियाँ स्वयंभू हैं। बिजासन माता संतान और सौभाग्य प्रदान करती है। इसलिए नवविवाहित जोड़े माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेने आते है। माता सभी की मनोकामनाओं को पूर्ण करती है। ऐसा कहा जाता है कि आल्हा-उदल ने मांडू के राजा को परास्त के लिए माता से प्रार्थना की थी। तंत्र-मंत्र और अनेकों प्रकार की सिद्धियों हेतु भी यह बिजासन माता मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। इस मंदिर के पीछे एक जलाशय है। ऐसा बताया जाता है कि पहले इस जलाशय में शेर पानी पीने आता था। वह माता के मंदिर के समीप कुछ देर खड़ा रहता और बिना किसी को नुकसान पहुँचाये चला जाता था। मंदिर की वास्तुकला माता का यह मंदिर ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है। पहले यह मंदिर मिट्टी और पत्थरों से निर्मित था। इस मंदिर का सन् 1920 में मराठा शैली में जिर्णोद्धार करवाया गया। इस मंदिर में माता के अलावा आपको शिव जी, काल भैरव, हनुमान जी के भी दर्शन करने को मिलेंगे। माता का यह मंदिर ऊँची पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर के पास ही एक छोटा सा तालाब है जिसमे कई रंग की मछलियां है। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 10:30 PM शनिवार और रविवार मंदिर का समय 05:30 AM – 11:00 PM सुबह की आरती 06:00 AM – 06:30 AM रात की आरती 09:00 AM – 10:00 PM

बिजासन माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

दत्ता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

मंदिर में दत्रात्रेय भगवान की पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। दत्ता मंदिर:इंदौर मध्यप्रदेश के कान्ह नदी (खान) के समीप कृष्णपुरा छत्री के पास स्थित है दत्त मंदिर। दत्त मंदिर भगवान दत्तात्रेय को समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि भगवान दत्तात्रेय विष्णु, महेश और ब्रह्मा का एक स्वरुप है। दत्ता मंदिर धर्म ग्रंथों में श्री दत्तात्रेय भगवान को विष्णु जी का छठा अवतार बताया गया है। भगवान दत्रात्रेय गुरु और भगवान दोनों का ही रूप है इसलिए इन्हे श्री गुरुदेवदत्त भी कहा जाता है। मंदिर का इतिहास दत्त मंदिर के इतिहास की बात की जाए तो यह मंदिर 700 साल पुराना है। इंदौर शहर के अस्तित्व में आने से पहले से ही यह मंदिर स्थापित था। इस बात की पुष्टि होलकर रियासत के सूबेदार मल्हारराव होलकर ने मालवा आगमन से पूर्व की थी। माता अहिल्या बाई होल्कर भी इस मंदिर के दर्शन करने आती थी। इस मंदिर का जीर्णोद्धार 1896 में किया गया था। Shree Datta Mandir:मंदिर का महत्व ऐसा माना जाता है यदि कोई भक्त तीनों ईश्वरीय शक्तियों से निहित भगवान दत्तात्रेय की आराधना करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। भक्त को दत्ता मंदिर भगवान दत्तात्रेय की आराधना से हर तरह की कठिनाई से मुक्ति मिल जाती है। छत्रपति शिवाजी महाराज और उनके पुत्र औरंगजेब को चकमा देकर कुछ समय के लिए इसी दत्त मंदिर में सन्यासी के रूप में रहे थे। दत्ता मंदिर हर गुरुवार और दत्त जयंती पर मंदिर में श्रद्धालुओं का भीड़ रहती है। लोग दत्तात्रेय भगवान के दर्शन करने और अपनी कामना लेकर मंदिर आते है। भगवान उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते है। मंदिर की वास्तुकला दत्त मंदिर लकड़ी से निर्मित बहुत ही सुन्दर मंदिर है। मंदिर में दत्रात्रेय भगवान की पाषाण की प्रतिमा विराजमान है। दत्ता मंदिर में तीन मुख और 6 हाथ वाले त्रिदेव की मूर्ति है। उनके पीछे एक गाय और आगे चार कुत्ते रहते है। साथ ही आपको मंदिर में गूलर के वृक्ष के भी दर्शन करने को मिलेंगे। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 10:00 AM – 12:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद दत्त मंदिर में गुड़,चना और केले का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी चढ़ाये जाते है।

दत्ता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

गोपाल मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर को 190 साल पुराना बताया जाता है। गोपाल मंदिर:भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बड़ा बाजार चौक के बीच मंदिर स्थित है। मंदिर में राधा-कृष्ण की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। इस मंदिर को 190 साल पुराना बताया जाता है। गोपाल मंदिर परिसर में आश्रय स्थल पत्थरों, लकड़ी और लोहे से बने हैं। बीते सालों में मूल मंदिर को छोड़कर आसपास का पूरा हिस्सा काफी जर्जर हो गया था, जिसके बाद ऐतिहासिक मंदिर का पुनर्निर्माण कार्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किया गया है। Gopal Mandir:मंदिर का इतिहास गोपाल मंदिर का निर्माण 1832 में महाराजा यशवंतराव होलकर की पत्नी कृष्णाबाई होलकर ने कराया था। वे भगवान कृष्ण की परम भक्त थीं। गोपाल मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्तियों के अलावा भगवान वरुण, वाराह अवतार, पद्मावती लक्ष्मी देवी की मूर्तियां भी हैं। उस समय इस मंदिर का निर्माण 80 हजार रुपये में हुआ था। मंदिर परिसर करीब सवा एकड़ में है। खास बात यह कि पूरा मंदिर पत्थरों और लकड़ियों से बना है। यहां मंदिर के अलावा आश्रय स्थल पत्थरों, लकड़ी और लोहे से बने हैं। Gopal Mandir:मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन पूजन से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं व भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। गोपाल मंदिर में अत्यंत सौभाग्यशाली ही प्रवेश कर पाता है। मंदिर में प्रार्थना करने का सबसे अच्छा समय वसंत पंचमी के दिन होता है। मंदिर की छत और दीवारों के प्लास्टर और जुड़ाई के लिए ईट का चूरा, चूना, मैथी दाना, उड़द की दाल, गुड़ जैसे मटेरियल इस्तेमाल किया गया है। Gopal Mandir:मंदिर की वास्तुकला गोपाल मंदिर का मुख्य आकर्षण इसकी आकर्षक वास्तुकला है। मंदिर एक संगमरमर सर्पिल की संरचना है, जो प्राचीन मराठा शैली की वास्तुकला में बनवाया गया है। इसमें एक बड़ा केन्द्रीय हाल है, जिसमें अस्तर की छत वाले विशाल खम्बे बने हुए हैं। सभी स्तम्भ को डिजाइन किया गया है। विशाल कांच के झूमर जब जल उठते हैं तो मंदिर की वास्तुकला प्रणाली सभी की आंखों को चकाचौंध कर देती है। मंदिर में भगवान कृष्ण की प्रतिमा गर्भगृह में विराजित है, जो चांदी से निर्मित दरवाजों के साथ संगमरमर की आकर्षक वेदी पर विराजित की गई है। मंदिर का जीर्णोद्धार 2022 में हुआ। होल्कर काल में मंदिर के आश्रय स्थल, परिसर की दीवारों में सीमेंट उपयोग नहीं किया गया था। मंदिर के जीर्णोद्धार में हेरिटेज के सारे नॉर्म्स का पालन किया गया। छत और दीवारों के प्लास्टर और जुड़ाई के लिए सुर्खी (ईट का चूरा), चूना, मैथी दाना, उड़द की दाल, गुड़ आदि मटेरियल यूज किया गया। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 09:00 PM शृंगार आरती 07:00 AM – 08:00 AM राज भोग 11:00 AM – 12:00 PM शयन आरती का समय Invalid date – 12:09 PM मंगला आरती 05:00 AM – 06:00 AM बाल भोग 09:00 AM – 10:00 AM संध्या आरती का समय 07:30 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद गोपाल मंदिर में कान्हा जी को मिश्री,माखन और पंचमेवे के लड्‌डू का भोग चढ़ाया जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, पंजीरी का भोग लगाते हैं।

गोपाल मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

रणजीत हनुमान मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। रणजीत हनुमान मंदिर:मध्य प्रदेश के स्वच्छ शहर इंदौर के फूटी कोठी रोड पर रणजीत हनुमान मंदिर स्थित है। हनुमान जी को समर्पित यह मंदिर बहुत ही चमत्कारिक है। प्रतिदिन इस मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है। परन्तु प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को यहाँ पर विशेष आरती होती है। जिस कारण बहुत भीड़ देखने को मिलती है। आपने हनुमान जी की कई तरह की प्रतिमाये देखीं होगी परन्तु रणजीत हनुमान जी की इस प्रतिमा को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि वे किसी युद्ध में जाने की तैयारी में हैं। RANJEET HANUMAN MANDIR:का इतिहास रणजीत हनुमान मंदिर के इतिहास से जुड़ी कोई सटीक जानकारी नहीं है। इस मंदिर के इतिहास से जुड़ी मान्यता है कि इंदौर शहर के पहलवान अल्हड़सिंह भारद्वाज, हनुमान जी के अनन्य भक्त थे। उन्होंने सन् 1907 में गुमाश्ता नगर में वीरान जंगलों में भगवान हनुमान जी की प्रतिमा को स्थापित किया और एक छोटा सा अखाडा बनाया। समय के साथ साथ इस स्थान पर कई चमत्कार होने लगे। तब से यह मंदिर “रणजीत हनुमान मंदिर” के नाम से जाना जाने लगा। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि जो भी व्यक्ति अपने रण अर्थात अपने कार्य क्षेत्र में ख्याति पाना चाहते है वह रणजीत हनुमान के दर्शन करने आते है। रणजीत हनुमान मंदिर में सभी की मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इतना ही नहीं इस मंदिर में नेता, अभिनेता भी अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में कई राजा युद्ध लड़ने से पूर्व जीत का आशीर्वाद लेने हेतु आते थे। परन्तु कोई भी ऐसा भक्त आज तक नहीं आया जिसने बोला हो कि उसकी हार हुयी है। मंदिर की वास्तुकला रणजीत हनुमान मंदिर का 130 साल पुराना है। इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर में प्रवेश करने से आप भक्तिमय हो जायेंगे। हनुमान जी की प्रतिमा के दर्शन मुख्य द्वार से ही होने लगते है। मंदिर के अंदर हनुमान जी की भव्य प्रतिमा है। वह ढाल और तलवार के साथ विराजित है। हनुमान जी के चरणों में अहिरावण है। मंदिर में शिव जी, राम सीता और दुर्गा देवी की प्रतिमाएं भी विराजित है। इसके अलावा मंदिर के समीप ही कई देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिर भी बनाये गए हैं। भगवान शनि के साथ साथ नव गृह के दर्शन भी आपको इस मंदिर में करने को मिलेंगे। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 02:00 PM सायंकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM शनिवार और रविवार आरती का समय 08:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद रणजीत हनुमान मंदिर में भगवान को चना चिरौंजी, मिठाई, पेड़ा, लड्डू आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूलों की माला भी अर्पित की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा से नारियल भी चढ़ाते है।

रणजीत हनुमान मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

हरसिद्धि माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इसे शहर का सबसे पुरातन मंदिर माना जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर, भारत के मध्य प्रदेश राज्य के इंदौर शहर में स्थित है। इसे शहर का सबसे पुरातन मंदिर माना जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर के दाई और एक पुराना सा खंडहर भी बना है जिसे रुक्मणी देवी का मंदिर कहा जाता है जो पुरातत्व विभाग के देख-रेख में संचालित होता है। हरसिद्धि माता मंदिर में मुंडन संस्कार से लेकर शादी समारोह का आयोजन भी होता है। मंदिर के पुजारी के अनुसार वर्ष में दो बार चैत्र नवरात्रि की दशमी और अश्विन मास की दशमी को मां का विशेष श्रृंगार किया जाता है। भक्तगण इस दिन मां के दर्शन सिंहवाहिनी के रूप में करते हैं। Harsiddhi Mata Temple:हरसिद्धि माता मंदिर का इतिहास हरसिद्धि माता मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होलकर ने 21 मार्च 1766 को कराया था। तब यहाँ उनके पुत्र श्रीमंत मालेरावजी का शासन था। मंदिर में स्थापित देवी की दिव्य मूर्ति पूर्वाभिमुखी महिषासुर मर्दिनी मुद्रा में है। मंदिर परिसर में बाद में निर्मित शंकरजी व हनुमान जी के मंदिर भी हैं। मंदिर के सामने कभी एक पक्की बाव़ड़ी हुआ करती थी। माँ की मूर्ति इसी बाव़ड़ी से मिली थी। मंदिर का महत्व लोगों की मान्यता है कि यहाँ पूजा करने से शरीर पर निकलने वाले दाने, जिन्हें स्थानीय बोलचाल में (माता) कहते हैं, नहीं निकलते। देवी हरसिद्धि के नेत्र अलग से लगाए हैं। प्रतिमा के जो नेत्र हैं वह थोड़े छोटे हैं। कई वर्षों से उन्हें मीनाकार (मछली के आकार की) नेत्र लगाए जा रहे हैं। यह नेत्र नाथद्वारा से आते हैं। चांदी पर मीना लगाकर इन नेत्रों को तैयार किया जाता है। खास बात यह है कि इन नेत्रों को लगाने के लिए किसी भी केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। नेत्रों को लगाने के लिए मधुमक्खी के छत्ते से निर्मित मेंढ लगाया जाता है। मंदिर की वास्तुकला हरसिद्धि माता मंदिर मराठा शैली में बना है। मंदिर में देवी हरसिद्धि, देवी महालक्ष्मी और देवी सिद्धिदात्री विराजमान है। देवियों की प्रतिमाएं भी काफी विशेष है। दिर का निर्माण वास्तु के अनुरूप किया गया है।सूर्योदय के समय सूर्य की किरणें मूर्ति पर पड़ती हैं। परिसर में अष्ट भैरव स्थापित है। मंदिर में हरसिद्धि देवी का महिषासुर मर्दिनी के रूप में है। चारभुजाधारी देवी के दाए हाथों में से एक में तलवार और दूसरे में त्रिशुल है जबकि बाए हाथों में से एक में घंटी और दूसरे में नरमुंड है। हरसिद्धि देवी की संगमरमर की यह प्रतिमा करीब चार फीट की है। इसी प्रकार मंदिर में विराजित महालक्ष्मी की प्रतिमा भी कुछ खास है। हरसिद्धि माता मंदिर में महालक्ष्मी की प्रतिमा काले पाषाण की है। यह प्रतिमा करीब ढ़ाई फीट की है। देवी के एक हाथ में अमृत तो दूसरे हाथ में पद्मपुष्प (कमल) है। जबकि तीसरी प्रतिमा सिद्धिदात्री की है, जो बिलकुल देवी हरसिद्धि के रुप से मिलती जुलती है। सिद्धिदात्रि की यह प्रतिमा संगमरमर की है। चारभुजाधारी इस प्रतिमा के दाए हाथों में से एक में खट्ग और त्रिशुल है, जबकि बाए हाथों में से एक में ढाल और दूसरे में मुंड है। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 09:00 PM श्रृंगार आरती 08:30 AM – 09:15 AM सुबह की आरती 05:30 AM – 06:00 AM सायंकाल आरती 07:30 PM – 08:15 PM मंदिर का प्रसाद हरसिद्धि माता मंदिर में मां को फल, लड्डू, ड्राई फ्रूट्स और पेड़े का भोग चढ़ाते है। कुछ श्रद्धालु माता को अपनी श्रद्धा के अनुसार पूड़ी-सब्जी का भोग भी लगाते हैं।

हरसिद्धि माता मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

वैष्णो धाम मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

माता का यह मंदिर कटरा के वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर ही बना हुआ है। इंदौर मध्यप्रदेश में ऐसे भी मंदिर है जो धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्त्व रखते है। उनमे से एक है माँ वैष्णो धाम मंदिर। यह मंदिर गुरु नानक कॉलोनी लालबाग में है। जो लोग इंदौर घूमने आते है वह इस मंदिर के दर्शन करने जरूर जाते है। माता का यह मंदिर कटरा के वैष्णो देवी मंदिर की तर्ज पर ही बना हुआ है। इस मंदिर के दर्शन करने से ऐसा लगता है मानों कटरा में स्थित मां वैष्णो देवी मंदिर के साक्षात् दर्शन हो रहे हों। वैष्णो धाम मंदिर का इतिहास Vaishno Dham Temple:एक बार श्रीमती सुरिंदर कौर ग्रोवर के सपने में माँ वैष्णो माता प्रकट हुईं और उन्होंने इंदौर शहर में भव्य मंदिर निर्माण की इच्छा प्रकट की और उन्हें आशीर्वाद दिया। श्रीमती सुरिंदर कौर ग्रोवर ने माता की इच्छा अनुसार सन 2009 में मंदिर निर्माण करवाया। “वैष्णव धाम” को पूर्ण होने में चार साल का समय लगा। गुफाओं के निर्माण में सात महीनों का समय लगा। 2 अखंड ज्योति मंदिर के गर्भगृह में सदैव जलती रहती है। वैष्णो धाम मंदिर का महत्व पहाड़ियों पर गुफाओं से होते हुए मां वैष्णोदेवी के दर्शन करने से मन को असीम शांति मिलती है। गुफाओं में अंदर मां वैष्णो के दर्शन से पहले रिद्धि-सिद्धि के साथ भगवान श्री गणेश के दर्शन होते हैं। गुफाओं में जाते समय झरने, पक्षियों का कोलाहल मन को आनंदित कर देता है। गुफाओं से होते हुए शिवधाम पहुंचते हैं जहां भगवान शिव के साथ विराजमान संपूर्ण शिव परिवार के भव्य दर्शन होते हैं। माता की प्रतिमा के समीप ही परम भक्त हनुमान जी के दर्शन होते हैं। माता की तीनों पिण्डियों को कटरा से लाया गया है। साथ ही अखंड ज्योति भी कटरा से लायी गयी है। जो आज भी जल रही है। वैष्णो धाम मंदिर की वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला हूबहू माता वैष्णो देवी के मंदिर से मिलती जुलती है। मंदिर में कई गुफाएं है। जिसमे में गुजरते हुए आप माता के दर्शन कर सकते हैं। यह गुफा भव्य और सुन्दर बनाई गई है। जिसकी खूबसूरती देखते ही बनती है। गुफा के रास्ते में आकर्षक जलप्रपात भी बने हुए हैं। जो मंदिर की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। मंदिर में महाकाली, महालक्ष्मी और महा सरस्वती पिंड स्वरुप में विराजित है। मंदिर में माता के साथ साथ अन्य देवता गणेश जी, भगवान शिव, हनुमान जी, कालभैरव और साईं बाबा भी विराजित हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 12:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद वैष्णो धाम मंदिर लड्डू, पेड़ा, चना- चिरौंजी आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही माता को चुनरी भी चढ़ाई जाती है।

वैष्णो धाम मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

नवग्रह शनि मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव सौम्य और प्रसन्ना मुद्रा में विराजमान है। नवग्रह शनि मंदिर शनि देव का नाम सुनते ही आम जन के मन में सबसे पहले डर बैठ जाता है। लेकिन शनि को एक न्याय प्रिय देवता माना गया है। शनि जातक को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। बुरे कुकर्म करने वालों को शनि दंडित करते हैं। अच्छे कर्म करने वालों पर शनि अपनी कृपा बरसाते हैं। नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव सौम्य और प्रसन्ना मुद्रा में विराजमान है। सोने-चांदी के आभूषणों से शनि देव को सुसज्जित किया जाता है। जैसे राजाधिराज होते है वैसे ही उनका पूजन-अर्चन किया जाता है। शनि देव के इस स्वरूप को देख भक्तों को भय नहीं लगता है बल्कि भक्तों को प्रेम की अनुभूति होती है। शनि देव के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामना पूर्ण हो जाती है। माना जाता है कि मंदिर में पहुंचकर नवग्रह की आराधना करने से कुंडली दोष, शनि दोष, राहु की दशा, साढ़ेसाती, ढैय्या और कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोग नवग्रह शनि मंदिर में पहुंचकर शनिदेव और नवग्रह की की विशेष आराधना एक साथ करते हैं और अपने ग्रहों को शांत करते हैं। नवग्रह शनि मंदिर का इतिहास Navagraha Shani Temple:नवग्रह शनि मंदिर करीब 450 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहं भगवान की प्रतिमा स्वयंभू है। यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान शनिदेव का 16 श्रृंगार किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि शनि देव का नाम सुनकर लोगों के मन में भगवान की काले पाषण की प्रतिमा उत्पन्न होती है। वहीं भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित नवग्रह शनि मंदिर इसी भक्ति का उदाहरण हैं जिससे लोगों की भारी आस्था जुड़ी हुई है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग इस मंदिर में पहुंचकर नवग्रह की पूजा करते हैं। मंदिर का महत्व शनिदेव की प्रतिमा के साथ इस मंदिर में होने वाली पूजा विधि भी अनोखी है। यहां तेल से नहीं बल्कि दूध और जल से शनिदेव के प्रसन्न होने की मान्यता है। मंदिर में शनि देव को फूलों और शाही पोशाकों से सजाया जाता है। शनिदेव के शृंगार में करीब छह घंटों का समय लगता है। इस शनि मंदिर में आरती से ठीक पहले शहनाई बजाई जाती है, जो आरती पूरी होने तक लगातार बजती रहती है। नवग्रह शनि मंदिर में श्रद्धालु स्नान के बाद पनोती के रूप में अपने जूते चप्पल वही छोड़कर चले जाते है। मंदिर की वास्तुकला नवग्रह शनि मंदिर के निर्माण में मराठा और आधुनिक वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। मंदिर को मजबूत स्तंभों पर बनाया गया है। नवग्रह शनि मंदिर में विशाल परिसर बना है जहां भक्त आकर नवग्रहों की शांति के लिए पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर के गर्भ गृह में शनि देव की प्रसन्न मुद्रा में प्रतिमा स्थापित है। मंदिर में एक प्रवेश द्वार है। नवग्रह शनि मंदिर में नवग्रहों की प्रतिमाओं के साथ शिव जी और हनुमान जी की प्रतिमा भी स्थापित की गई है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:30 AM – 12:00 PM सायंकाल आरती का समय Invalid date – 08:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 10:00 PM मंदिर का प्रसाद नवग्रह शनि मंदिर में शनि देव को फल, फूल, तेल, तिल और गुड चढ़ाया जाता है। साथ ही शनि देव का दूध का भी भोग चढ़ाया जाता है।

नवग्रह शनि मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »