राजा मुचुकुन्द की कथा (Raja Muchkund Ki Katha)

त्रेता युग में महाराजा मान्धाता के तीन पुत्र हुए, अमरीष, पुरू और मुचुकुन्द। युद्ध नीति में निपुण होने से देवासुर संग्राम में इंद्र ने महाराज मुचुकुन्द को अपना सेनापति बनाया। युद्ध में विजय श्री मिलने के बाद महाराज मुचुकुन्द ने विश्राम की इच्छा प्रकट की। देवताओं ने वरदान दिया कि जो तुम्हारे विश्राम में अवरोध

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प्रेरक कथा: विवाह के कार्ड पे लड़का-चिरंजीव तथा लड़की-आयुष्मति क्यों लिखा जाता है? (Prerak Katha Vivah Ke Card Pe Ladaka Chiranjiv Aur Ladaki Ayushmati)

विवाह के कार्ड पे लडके के नाम के आगे-चिरंजीव तथा लडकी के नाम के आगे आयुष्मति क्यों लिखा जाता है?चिरंजीव:एक ब्राह्मण के कोई संतान नही थी, उसने महामाया की तपस्या की, माता जी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्राह्मण से बरदान माँगने को कहा: ब्राह्मण ने बरदान में पुत्र माँगा। माता ने कहा: मेरे पास दो

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पुत्रदा / पवित्रा एकादशी व्रत कथा (Putrada / Pavitra Ekadashi Vrat Katha)

पुत्रदा एकादशी का महत्त्व:श्री युधिष्ठिर कहने लगे कि हे भगवान! मैंने श्रावण माह के कृष्ण पक्ष  का सविस्तार वर्णन सुना। अब आप मुझे श्रावण शुक्ल एकादशी का क्या नाम है? व्रत करने की विधि तथा इसका माहात्म्य कृपा करके कहिए। मधुसूदन कहने लगे कि इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस एकादशी को पवित्रा एकादशी भी कहा जाता है।पुत्रदा एकादशी

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पार्श्व / परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा (Parshva / Parivartani Ekadashi Vrat Katha)

पार्श्व एकादशी का महत्त्व:युधिष्ठिर ने कहा हे भगवान! आपने भाद्रपद कृष्ण एकादशी  का सविस्तार वर्णन सुनाया। अब आप कृपा करके मुझे भाद्रपद शुक्ल एकादशी का क्या नाम, इसकी विधि तथा इसका माहात्म्य कहिए। तब भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष को देने वाली तथा सब पापों का नाश करने वाली, उत्तम वामन एकादशी

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जानें क्यों नहीं देखनी चाहिए जलती हुई होलिका

होली का त्योहार आने में अब कुछ दिन ही बाकी हैं। होली का पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन होलिका दहन किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इसके अगले दिन चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि को रंग वाली होली खेली जाती है। इस साल होलिका दहन 17 मार्च

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क्या होता है खरमास, इस दौरान क्यों नहीं किए जाते कोई भी शुभ कार्य?

खरमास क्या होता हैजब से सूर्य बृहस्पति राशि मीन में प्रवेश करता है तभी से खरमास या मलमास या अधिकमास शुरू हो जाता है. हिन्दू धर्म में यह महीना शुभ नहीं माना जाता है, इसलिए इस महीने में नए या शुभ काम नहीं किए जाते हैं. खरमास महीने के अपने कुछ अलग नियम बताए गए

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पापमोचनी एकादशी व्रत कथा (Papmochani Ekadashi Vrat Katha)

पापमोचनी एकादशी का महत्त्व:अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण से कहा: हे मधुसूदन! आपने फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात आमलकी एकादशी के बारे मे विस्तार पूर्वक बतलाया। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष मे आने वाली एकादशी का क्या नाम है? तथा उसकी विधि क्या है? कृपा करके आप मेरी बढ़ती हुई जिज्ञासा को शांत करें।भगवान श्रीकृष्ण ने कहा: हे

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कोकिला व्रत कथा (Kokila Vrat Katha)

कोकिला व्रत से जुड़ी कथा का संबंध भगवान शिव एवं माता सती से जुड़ा है। माता सती ने भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए लम्बे समय तक कठोर तपस्या को करके उन्हें पाया था। कोकिला व्रत कथा का वर्णन शिव पुराण में मिलता है। इस कथा के अनुसार देवी सती ने भगवान को अपने जीवन

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देवशयनी एकादशी व्रत कथा (Devshayani Ekadashi Vrat Katha)

देवशयनी एकादशी का महत्त्व:ब्रह्म वैवर्त पुराण में देवशयनी एकादशी के विशेष माहात्म्य का वर्णन किया गया है। इस व्रत से प्राणी की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। यह एकादशी आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी  कहते हैं, के बाद आती है।आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इसी एकादशी से

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मंगला गौरी व्रत कथा (Mangla Gauri Vrat Katha)

श्रावण माह के प्रत्येक मंगलवार को माँ गौरी को समर्पित यह व्रत मंगला गौरी व्रत के नाम से प्रसिद्ध है। मंगला गौरी व्रत महिलाओं के बीच उनके पति की लंबी आयु के लिए जाना जाता है।मंगला गौरी पौराणिक व्रत कथा :एक समय की बात है, एक शहर में धरमपाल नाम का एक व्यापारी रहता था। उसकी पत्नी

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वरलक्ष्मी व्रत कथा (Varalakshmi Vrat Katha)

कथा के अनुसार बहुत पौराणिक समय मैं मगध राज्य में कुण्डी नामक एक नगर था। पुरातन काल की कथाओं के अनुसार स्वर्ग की कृपा से इस नगर का निर्माण हुआ था। यह नगर मगध राज्य के मध्य स्थापित था। इस नगर में एक ब्राह्मणी नारी चारुमति अपने परिवार के साथ रहती थी। चारुमति कर्त्यव्यनिष्ठ नारी

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भाद्रपद संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा (Bhadrapad Sankashti Ganesh Chaturthi Vrat Katha)

पूर्वकाल में राजाओं में श्रेष्ठ राजा नल था उसकी रूपवती रानी का नाम दमयन्ती था। शाप वश राजा नल को राज्यच्युत खोना पड़ा और रानी के वियोग से कष्ट सहना पड़ा। तब दमयन्ती ने इस व्रत के प्रभाव से अपने पति को प्राप्त किया।राजा नल के ऊपर विपत्तियों का पहाड़ टूट पड़ा था। डाकुओं ने

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