Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी को भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस के रूप मे मानते है। यह पर्व हिंदू पंचांग के प्रथम माह चैत्र के शुक्ला पक्ष की नवमी के दिन आता है तथा यह उत्सव चैत्र नवरात्रि का नौवें दिन के रूप मे भी मनाया जाता है। श्री राम का प्राकट्य अभिजित नक्षत्र में दोपहर बारह बजे हुआ था। भगवान श्रीराम को भारत मे एक आदर्श पुरुष के रूप मे माना जाता है, Ram Navami Kab hai 2025:इस कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहा जाता है, तथा उनके उच्चतम प्रशासनिक कौशल को राम-राज्य के नाम से संबोधित किया जाता है। राम नवमी के दिन भक्त पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र की जन्मभूमि अयोध्या की पवित्र नदी सरयू में डुबकी लगाते हैं। तथा भक्त भगवान श्री राम, उनकी पत्नी माता सीता, उनके छोटे भाई श्री लक्ष्मण और श्री राम भक्त हनुमान जी से संबंधित भजन, कीर्तन, रामायण पाठ, उपवास, शोभा यात्रा और रथ यात्रा का आयोजन किया जाता हैं। माना जाता है कि, श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस दिन राम चरित मानस की रचना आरंभ की थी। Ram Navami 2025: राम नवमी का पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, जिन्हें विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम ने धरती पर अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए अवतार लिया था। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ माना जाता है। Ram Navami Kab hai 2025 राम नवमी का पर्व हर हिंदू परिवार में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन अयोध्या में इसकी भव्यता देखते ही बनती है।  राम नवमी के दिन करें ये काम, बरसेगी मां दुर्गा की कृपा ramnavmi Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी 2025 तिथि इस साल  चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का प्रारम्भ 5 अप्रैल की शाम को 07:26 बजे होगा और समाप्त 6 अप्रैल की शाम 07:22 बजे होगा। ऐसे में इस साल राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र नवरात्रि का समापन भी होगा, इसलिए यह दिन और अधिक पावन माना जाएगा। Ram Navami puja subh muhurat पूजा का शुभ मुहूर्त राम नवमी के दिन मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:08 बजे से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। यह अवधि 2 घंटे 31 मिनट की रहेगी। हालांकि, मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था, इसलिए 12:34 का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इस समय पूजन और अभिषेक करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। राम नवमी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान राम की बरसेगी कृपा Ram Navami puja mantra:राम नवमी पूजा मंत्र इस दिन श्रीराम के विभिन्न मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व होता है। “ॐ श्री रामचन्द्राय नमः”“ॐ रां रामाय नमः” श्रीराम तारक मंत्र “श्री राम, जय राम, जय जय राम” श्रीराम गायत्री मंत्र “ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥” इस दिन इन मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। रामनवमी कथा Ram Navami Puja vidhi:पूजा विधि  Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने और सूर्यदेव को जल अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत का संकल्प लेने के बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर भगवान राम की प्रतिमा स्थापित की जाती है। Ram Navami Kab hai 2025 दोपहर 12 बजे के करीब श्रीराम का गंगाजल, पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है।  पूजा में तुलसी पत्ता और कमल का फूल रखना शुभ माना जाता है। फिर षोडशोपचार विधि से भगवान राम की पूजा की जाती है और खीर, फल एवं अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। इस दिन राम रक्षा स्तोत्र, सुंदरकांड और रामायण का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अंत में आरती करने के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है और भक्तों को आशीर्वाद दिया जाता है। आज राम नवमी पर इस सरल विधि से करें हवन, प्रभु श्री राम के साथ मां सिद्धिदात्री भी होंगी प्रसन्न राम नवमी पूजा (Lord Ram puja vidhi) Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर राम जी का ध्यान करें। इसका बाद पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर भगवान राम के साथ-साथ माता सीता, लक्ष्मण और भगवान हनुमान की मूर्ति या फिर तस्वीर स्थापित करें। Ram Navami Kab hai 2025 सभी को चंदन, रोली, धूप, फूल माला आदि अर्पित करें।इसके बाद अलग-अगल तरह के फल अर्पित करें। साथ ही इस दिन पर रामायण, रामचरितमानस और रामरक्षास्तोत्र का पाठ करना भी काफी लाभदायक माना जाता है। अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें।

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may 2025 vrat tyohar list: मई 2025 व्रत और त्योहारों की संपूर्ण सूची एवं महत्व

may 2025 vrat tyohar list:मई 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, जो हमारे सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन में विशेष स्थान रखते हैं। नीचे मई 2025 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची प्रस्तुत है: मई 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं, may 2025 vrat tyohar list जिनका धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह माह बुद्ध पूर्णिमा, वट सावित्री व्रत, मोहिनी एकादशी, शनि जयंती जैसे प्रमुख पर्वों से भरा हुआ है। may 2025 vrat tyohar list आइए जानते हैं मई 2025 के सभी व्रत और त्योहारों की सूची और उनके महत्व के बारे में विस्तार से। तारीख दिन व्रत/त्योहार 1 मई 2025 गुरुवार चतुर्थी व्रत, महाराष्ट्र दिवस, मई दिवस 2 मई 2025 शुक्रवार सूरदास जयंती 3 मई 2025 शनिवार बगलामुखी जयंती, दुर्गा अष्टमी व्रत 5 मई 2025 सोमवार गंगा सप्तमी 6 मई 2025 मंगलवार सीता नवमी 7 मई 2025 बुधवार रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 8 मई 2025 गुरुवार मोहिनी एकादशी 9 मई 2025 शुक्रवार प्रदोष व्रत 11 मई 2025 रविवार नरसिंह जयंती, मातृ दिवस 12 मई 2025 सोमवार पूर्णिमा, कूर्म जयंती, चित्रा पूर्णिमा, श्री सत्यनारायण व्रत, बुद्ध पूर्णिमा 13 मई 2025 मंगलवार नारद जयंती 15 मई 2025 गुरुवार वृषभ संक्रांति 16 मई 2025 शुक्रवार संकष्टी चतुर्थी 20 मई 2025 मंगलवार कालाष्टमी 23 मई 2025 शुक्रवार भद्रकाली जयंती, अपरा एकादशी 24 मई 2025 शनिवार प्रदोष व्रत 25 मई 2025 रविवार मासिक शिवरात्रि 26 मई 2025 सोमवार वट सावित्री व्रत 27 मई 2025 मंगलवार रोहिणी व्रत, भौमवती अमावस्या, शनि जयंती 28 मई 2025 बुधवार चंद्र दर्शन 29 मई 2025 गुरुवार चतुर्थी व्रत 30 मई 2025 शुक्रवार महाराणा प्रताप जयंती 31 मई 2025 शनिवार शीतल षष्ठी may 2025 vrat tyohar list:इन व्रतों और त्योहारों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। उदाहरण के लिए: may 2025 vrat tyohar list पूजा विधि और लाभ इन व्रतों और त्योहारों के माध्यम से हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोते हैं और may 2025 vrat tyohar list आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर होते हैं।

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April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें

April 2025 vrat tyohar list: अप्रैल अंग्रेजी कैलेंडर का चौथा महीना है जो नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है. इस साल अप्रैल में चैत्र और वैशाख महीने का संयोग बन रहा है. April 2025 vrat tyohar list:वैशाख महीना दान पुण्य और हनुमान जी, राम जी, लक्ष्मी जी की पूजा के लिए खास माना जाता है. April 2025 vrat tyohar list अप्रैल में कई महत्वपूर्ण व्रत त्योहार भी मनाए जाते हैं जैसे हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया, राम नवमी, परशुराम जयंती आदि. April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जाएंगे, जो धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। नीचे अप्रैल 2025 के व्रत और त्योहारों की सूची प्रस्तुत की गई है: Lakshmi Panchami 2025:लक्ष्मी पंचमी 2025 शुभ तिथि, पूजा विधि और व्रत कथा से पाएं अपार धन-संपदा तिथि दिन व्रत/त्योहार 1 अप्रैल 2025 मंगलवार विनायक चतुर्थी 3 अप्रैल 2025 गुरुवार यमुना छठ, रोहिणी व्रत 5 अप्रैल 2025 शनिवार दुर्गाष्टमी व्रत 6 अप्रैल 2025 रविवार राम नवमी 7 अप्रैल 2025 सोमवार विश्व स्वास्थ्य दिवस 8 अप्रैल 2025 मंगलवार कामदा एकादशी 10 अप्रैल 2025 गुरुवार महावीर जयंती, प्रदोष व्रत 11 अप्रैल 2025 शुक्रवार ज्योतिराव फुले जयंती, गुड फ्राइडे 12 अप्रैल 2025 शनिवार हनुमान जयंती, पूर्णिमा व्रत 13 अप्रैल 2025 रविवार ईस्टर 14 अप्रैल 2025 सोमवार अम्बेडकर जयंती, बैसाखी, मेष संक्रांति 15 अप्रैल 2025 मंगलवार बंगाली नव वर्ष 16 अप्रैल 2025 बुधवार संकष्टी चतुर्थी 21 अप्रैल 2025 सोमवार कालाष्टमी 22 अप्रैल 2025 मंगलवार पृथ्वी दिवस 24 अप्रैल 2025 गुरुवार वरुथिनी एकादशी 25 अप्रैल 2025 शुक्रवार प्रदोष व्रत 26 अप्रैल 2025 शनिवार मासिक शिवरात्रि 27 अप्रैल 2025 रविवार अमावस्या 28 अप्रैल 2025 सोमवार चन्द्र दर्शन, सोमवार व्रत 29 अप्रैल 2025 मंगलवार परशुराम जयंती 30 अप्रैल 2025 बुधवार अक्षय तृतीया, रोहिणी व्रत, मातंगी जयंती April 2025 vrat tyohar list:नीचे इन व्रतों और त्योहारों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है: विनायक चतुर्थी (1 अप्रैल 2025, मंगलवार): इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है। श्रद्धालु गणेश जी की आराधना करके विघ्नों के नाश और सौभाग्य की कामना करते हैं। यमुना छठ (3 अप्रैल 2025, गुरुवार): मथुरा-वृंदावन में यमुना नदी के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। भक्त यमुना नदी में स्नान कर उनकी पूजा करते हैं। रोहिणी व्रत (3 अप्रैल 2025, गुरुवार): जैन धर्म में महत्वपूर्ण व्रत, जिसे महिलाएं अपने परिवार की समृद्धि और सुख-शांति के लिए करती हैं। दुर्गाष्टमी व्रत (5 अप्रैल 2025, शनिवार): मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे भक्तों को शक्ति और साहस प्राप्त होता है। राम नवमी (6 अप्रैल 2025, रविवार): भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन रामायण का पाठ और रामजी की विशेष पूजा की जाती है। कामदा एकादशी (8 अप्रैल 2025, मंगलवार): भगवान विष्णु की आराधना का यह दिन पापों से मुक्ति और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। महावीर जयंती (10 अप्रैल 2025, गुरुवार): जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन जैन मंदिरों में विशेष पूजा और प्रवचन होते हैं। हनुमान जयंती (12 अप्रैल 2025, शनिवार): भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। भक्त हनुमान जी की पूजा करके बल, बुद्धि और विद्या की कामना करते हैं। वरुथिनी एकादशी (24 अप्रैल 2025, गुरुवार): इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। अक्षय तृतीया (30 अप्रैल 2025, बुधवार): यह दिन शुभ कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन सोना खरीदना, दान करना और नए कार्यों की शुरुआत करना विशेष फलदायी होता है। April 2025 vrat tyohar list इन व्रतों और त्योहारों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविधता और April 2025 vrat tyohar list धार्मिक आस्था की झलक मिलती है। प्रत्येक पर्व का अपना विशेष महत्व है, जो समाज में एकता, प्रेम और सद्भावना को बढ़ावा देता है। 2025 ke vrat aur tyohar List:पढ़ें साल 2025 के प्रमुख व्रत-त्योहारों की सूची, नहीं पड़ेगी कैलेंडर देखने की जरूरत

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2025 ke vrat aur tyohar List:पढ़ें साल 2025 के प्रमुख व्रत-त्योहारों की सूची, नहीं पड़ेगी कैलेंडर देखने की जरूरत

2025 ke vrat aur tyohar List :1 जनवरी 2025 से नया साल शुरू हो रहा है. इस साल के प्रमुख व्रत त्योहार की तारीख जानने के लिए लोगों में उत्सुकता है. जानें जनवरी से दिसंबर 2025 तक व्रत-फेस्टिवल की लिस्ट. Calendar 2025: 1 जनवरी 2025, बुधवार से नया साल शुरू हो रहा है. 2025 ke vrat aur tyohar List ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल के राजा मंगल होंगे और मंत्री भी मंगल होंगे. नए साल का पहला बड़ा त्योहार मकर संक्रांति होगा. 2025 ke vrat aur tyohar List:जनवरी में जब सूर्य मकर राशि में 2025 ke vrat aur tyohar List प्रवेश करेंगे तब खरमास का समापन होगा. इस दिन से शुभ कार्य की शुरुआत भी हो जाएगी. इस साल 2025 में नवरात्रि, होली, करवा चौथ, दिवाली, रक्षाबंधन, छठ पूजा, बसंत पंचमी, 2025 ke vrat aur tyohar List महाशिवरात्रि आदि व्रत त्योहार किस दिन है आइए जानें इनकी डेट. साल 2025 के मुख्य व्रत-त्योहार (Hindu Calendar 2025 Festival and Vrat) जनवरी –गुरु गोबिंद सिंह जयंती – सोमवार, 06 जनवरी लोहड़ी – सोमवार, 13 जनवरीशिवाजी महाराज जयंती – बुधवार, 19 फरवरी महाशिवरात्रि – बुधवार, 26 फरवरी फरवरी –बसंत पंचमी – सोमवार, 03 फरवरीशिवाजी महाराज जयंती – बुधवार, 19 फरवरीमहाशिवरात्रि – बुधवार, 26 फरवरी मार्च –होलिका दहन – गुरुवार, 13 मार्चहोली, चंद्र ग्रहण – शुक्रवार, 14 मार्चपहला सूर्य ग्रहण – शनिवार, 29 मार्चचैत्र नवरात्र, घटस्थापना – रविवार, 30 मार्च अप्रैल –रामनवमी – रविवार, 6 अप्रैल मई –बुद्ध पूर्णिमा – सोमवार, 12 मई जुलाई –देवशयनी एकादशी – रविवार, 06 जुलाईसावन शिवरात्रि – बुधवार 23 जुलाई अगस्त –रक्षाबंधन – शनिवार, 9 अगस्तहरतालिका तीज – मंगलवार 26 अगस्तगणेश चतुर्थी – बुधवार, 27 अगस्त सितंबर –आश्विन अमावस्या, सूर्य ग्रहण – रविवार, 21 सितंबरशारदीय नवरात्र, कलश स्थापना – सोमवार, 22 सितंबर अक्टूबर –विजयादशमी, दशहरा, गांधी जयंती – गुरुवार, 2 अक्टूबरकरवा चौथ – शुक्रवार, 10 अक्टूबरधनतेरस – शनिवार, 18 अक्टूबरदीपावली – मंगलवार, 21 अक्टूबरगोवर्धन पूजा, अन्नकूट – बुधवार, 22 अक्टूबरभैया दूज, चित्रगुप्त पूजा – गुरुवार, 23 अक्टूबरनहाय खाय – शनिवार, 25 अक्टूबरखरना – रविवार, 26 अक्टूबरछठ पूजा, संध्या अर्घ्य – सोमवार, 27 अक्टूबरउषा अर्घ्य, पारण का दिन – मंगलवार, 28 अक्टूबर नवंबर –देवोत्थान एकादशी – शनिवार, 01 नवंबरकार्तिक पूर्णिमा व्रत, गुरु नानक जयंती – बुधवार, 5 नवंबर दिसंबर –क्रिसमस – गुरुवार, 25 दिसंबर Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि में कब है अष्टमी, नोट करें तारीख और पूजा की विधि 2025 ke vrat aur tyohar List 2025 में विवाह के मुहूर्त Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि Karmasu.in  किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.  Lakshmi Panchami 2025:लक्ष्मी पंचमी 2025 शुभ तिथि, पूजा विधि और व्रत कथा से पाएं अपार धन-संपदा

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Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि में कब है अष्टमी, नोट करें तारीख और पूजा की विधि

Chaitra Navratri 2025: चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च से होगी और समापन 6 अप्रैल को. इस बार नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 8 दिनों की होगी. अष्टमी तिथि पर मां महागौरी की पूजा, हवन और कन्या पूजन का विधान है. Chaitra Navratri 2025: हिंदू धर्म में नवरात्रि बहुत महत्वपूर्ण होती है. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है. हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है.आइए जानते हैं, नवरात्रि के बारे में: इस साल चैत्र नवरात्रि 30 मार्च से शुरू हो रही है. यह त्योहार हिंदू धर्म में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. नवरात्रि के नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. चैत्र नवरात्रि की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. इस दौरान व्रत रखने और पूजा करने से मां दुर्गा सभी इच्छाएं पूरी करती हैं. आइए जानते हैं कि इस बार चैत्र नवरात्रि कितने दिनों की होगी. हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल Chaitra Navratri 2025 चैत्र नवरात्रि की शुरुआत 30 मार्च, रविवार से होगी और इसका समापन 6 अप्रैल, रविवार को होगा. इस बार तिथियों में बदलाव के कारण अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं, इसलिए नवरात्रि केवल 8 दिन की होगी. ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों की सही तरीके से पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं. Chaitra Navratri 2025 चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 5 अप्रैल 2025, शनिवार को है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है. दुर्गाष्टमी के दिन नौ छोटे कलश स्थापित किए जाते हैं और उनमें देवी दुर्गा की नौ शक्तियों को आमंत्रित किया जाता है. पूजा के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की आराधना की जाती है. चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि शुरू 4 अप्रैल 2025, रात 8 बजकर 12 मिनट पर चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि खत्म 5 अप्रैल 2025, रात 7 बजकर 26 मिनट पर Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि 2025 की अष्टमी तिथि 5 अप्रैल, शनिवार को है. इस दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है और विशेष रूप से दुर्गाष्टमी व्रत रखा जाता है. भक्त इस अवसर पर देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करते हैं और कलश स्थापना के साथ हवन व कन्या पूजन जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते हैं. यह दिन शक्ति, भक्ति और आस्था का प्रतीक माना जाता है. Chaitra Navratri 2025:चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और नवमी कब है: पंडित मोहन कुमार दत्त मित्र ने बताया कि चैत्र नवरात्रि की अष्टमी 05 अप्रैल 2025 को मनाई जाएगी। जबकि राम नवमी या नवमी 06 अप्रैल को है। 30 मार्च को कलश स्थापना की जाएगी और पहला नवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। 31 मार्च 2025 को द्वितीय नवरात्रि व्रत रखा जाएगा। 1 अप्रैल को तीसरा नवरात्रि व्रत रखा जाएगा। 2 अप्रैल 2025, बुधवार को चौथी और पंचमी की पूजा होगी। 3 अप्रैल को षष्ठी तिथि और 4 अप्रैल को सप्तमी तिथि मनाई जाएगी। चैत्र नवरात्रि घट स्थापना का मुहूर्त– कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 30 मार्च 2025, रविवार को सुबह 06 बजकर 13 मिनट से सुबह 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त सुबह 12 बजकर 01 मिनट से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा। घटस्थापना के शुभ चौघड़िया मुहूर्त- लाभ – उन्नति: 09:20 ए एम से 10:53 ए एम अमृत – सर्वोत्तम: 10:53 ए एम से 12:26 पी एम शुभ – उत्तम: 01:59 पी एम से 03:32 पी एम

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Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र सिद्धि कोर्स को पढ़ने का फायदा,धन, समृद्धि और सौभाग्य पाने का दिव्य मार्ग

Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र पाठ करने के लाभ Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र भगवान आदिशंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसे माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने और जीवन में धन, समृद्धि तथा सुख-शांति लाने के लिए पढ़ा जाता है। इस स्तोत्र के पाठ से आर्थिक बाधाएँ दूर होती हैं और जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस लेख में हम कनकधारा स्तोत्र के पाठ करने से मिलने वाले लाभों को विस्तार से समझेंगे। आर्थिक स्थिति में सुधार यदि कोई व्यक्ति निरंतर धन की कमी, कर्ज, व्यापार में हानि या नौकरी में आर्थिक समस्याओं से जूझ रहा हो, तो कनकधारा स्तोत्र का नित्य पाठ करने से आर्थिक समृद्धि आती है। यह स्तोत्र माँ लक्ष्मी को प्रसन्न कर उनके आशीर्वाद को प्राप्त करने में सहायक होता है। कैसे लाभ मिलता है? 2. गरीबी और ऋण से मुक्ति इस स्तोत्र के नियमित पाठ से व्यक्ति गरीबी, ऋण और आर्थिक तंगी से बाहर निकल सकता है। Kanakadhara Stotram कहा जाता है कि जब आदिशंकराचार्य ने यह स्तोत्र पढ़ा था, तो माता लक्ष्मी ने गरीब ब्राह्मण की झोपड़ी में स्वर्ण (कनक) वर्षा कर दी थी। यह घटना इस स्तोत्र की चमत्कारी शक्ति को दर्शाती है। कैसे लाभ मिलता है? 3. भाग्य में वृद्धि और सफलता कई बार लोग मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन भाग्य का साथ नहीं मिलता। ऐसे में कनकधारा स्तोत्र का पाठ भाग्योदय करने वाला सिद्ध होता है। यह स्तोत्र व्यक्ति के कर्मों को शुभ फल देने के लिए माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त करने में सहायक होता है। कैसे लाभ मिलता है? 4. घर में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा कई बार घर में नकारात्मक ऊर्जा, अशांति और कलह बनी रहती है, Kanakadhara Stotram जिससे परिवार के सदस्य मानसिक तनाव में रहते हैं। कनकधारा स्तोत्र का पाठ घर में सकारात्मक ऊर्जा और शांति का संचार करता है। कैसे लाभ मिलता है? 5. विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए लाभकारी जो विद्यार्थी शिक्षा में सफलता पाना चाहते हैं या Kanakadhara Stotram नौकरीपेशा लोग करियर में तरक्की चाहते हैं, उनके लिए भी कनकधारा स्तोत्र अत्यंत फलदायी सिद्ध होता है। कैसे लाभ मिलता है? 6. ग्रह दोष और पितृ दोष की शांति यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शुक्र ग्रह कमजोर हो या पितृ दोष हो, तो उसे जीवन में धन संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कनकधारा स्तोत्र का पाठ करने से इन दोषों का निवारण होता है। Kanakadhara Stotram:कैसे लाभ मिलता है? 7. महिलाओं के लिए विशेष लाभकारी कनकधारा स्तोत्र महिलाओं के लिए विशेष रूप से फलदायी होता है। Kanakadhara Stotram यह स्तोत्र न केवल समृद्धि देता है, बल्कि सौभाग्य और पारिवारिक सुख भी प्रदान करता है। कैसे लाभ मिलता है? 8. आध्यात्मिक उन्नति और मन की शांति जो लोग आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं और मानसिक शांति की तलाश में हैं, Kanakadhara Stotram उनके लिए कनकधारा स्तोत्र का पाठ एक अद्भुत उपाय है। कैसे लाभ मिलता है? कैसे करें कनकधारा स्तोत्र का पाठ? विशेष उपाय: Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र सिद्धि कोर्स

Kanakadhara Stotram:कनकधारा स्तोत्र सिद्धि कोर्स को पढ़ने का फायदा,धन, समृद्धि और सौभाग्य पाने का दिव्य मार्ग Read More »

जयपुर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। जयपुर मंदिर वृन्दावन भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुड़ा हुआ एक धार्मिक व ऐतिहासिक नगर है, जो भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित है। यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। वैसे तो वृंदावन में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं लेकिन वृंदावन-मथुरा रोड पर किशोर पुरा में स्थित जयपुर मंदिर की अपनी अलग पहचान है। खास बात ये है कि उत्तर प्रदेश में बने होने के बाद भी जयपुर मंदिर का रख-रखाव राजस्थान सरकार करती है। भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, लेकिन यहां बांके बिहारी के अलग-अलग रूप की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां पर प्रभु के राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल रूप की मूर्तियां विद्यमान हैं। मंदिर का इतिहास जयपुर मंदिर का निर्माण, जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह जी ने 1916 में करवाया था। माधो सिंह जी ने अपने गुरु ब्रह्मचारी श्री गिरिधारीशरण जी के प्रसन्नता हेतु जयपुर से वृंदावन आकर पहले 100 एकड़ जमीन खरीदी, फिर उसके बाद इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इस मंदिर को बनने में करीब 30 साल लगे थे। कई हजार मजदूरों और कुशल कारीगरों ने इस मंदिर का निर्माण किया। मंदिर का महत्व जयपुर मंदिर वृंदावन में श्री कृष्ण का सबसे बड़ा मंदिर है। जानकार बताते हैं कि पूरे बृज मण्डल जयपुर मंदिर से बड़ा दूसरा कोई मंदिर नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि जयपुर मंदिर निर्माण के लिए इस्तेमाल हो रहे पत्थरों को मथुरा से वृंदावन तक लाने के लिए माधो सिंह जी ने मथुरा से वृंदावन तक नई रेलवे लाइन बिछवाई थी। जयपुर मंदिर में राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल जी और उनकी सखियों की मूर्तियां दूसरे तल पर स्थापित हैं, जिनके दर्शन मंदिर के बाहर खड़े भक्त भी आसानी से कर सकते हैं। मंदिर की वास्तुकला जयपुर मंदिर की वास्तुकला में प्राचीन राजस्थानी शैली का उत्कृष्ट कला देखने को मिलती है। जयपुर मंदिर लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर पत्थर से बना है, मंदिर के दीवारों पर नक्काशी की गई है। दो मंजिला बने इस मंदिर में 16 विशाल खंबे बने हैं। जयपुर मंदिर में तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। मुख्य मंदिर के दोनों तरफ पत्थर से तुलसी चौरा बनाया गया है, जिनमे एक साथ 108 दीप जलाने के लिए खूबसूरत नक्काशी दार आले बनाए गए हैं। मंदिर का मुख्य दरवाजा अष्ट धातु से बनाया गया है, जो कि जितना भव्य है उतना ही खूबसूरत भी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM

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गोपेश्वर महादेव मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। गोपेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। गोपेश्वर महादेव मंदिर वंशी बट और यमुना नदी के तट पर बना है जो भगवान भोलेनाथ को समर्पित हैं। गोपेश्वर मंदिर में महादेव अपने भक्तों को दिन में दो स्वरूप में दर्शन देते हैं। जहां भक्त सुबह के समय महादेव का जलाभिषेक करते हैं तो शाम को भोलेनाथ का 16 श्रृंगार कर उन्हें गोपी के रूप में सजाया जाता है। पवित्र यमुना नदी के जल से शिव लिंग को स्नान कराने की धार्मिक प्रथा आज भी इस पवित्र स्थान पर प्रचलित है। भगवान शंकर के गोपी रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में आज भी शिव को नारी के रूप में सजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के परिसर में पीपल का पेड़ स्थित है जो हर मनोकामना को पूरा करता है। इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। मंदिर का इतिहास वृंदावन के गोपेश्वर महादेव के मंदिर में शिव गोपी रूप में विराजमान हैं। ये विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां महादेव का महिलाओं की तरह शृंगार किया जाता है। श्रीकृष्ण वृंदावन में गोपियों के साथ रास लीला किया करते थे तो सभी देवता उन्हें देखने के लिए आतुर रहते थे। भगवान शिव के मन में भी इस महारास में भाग लेने की इच्छा उत्पन्न हुई। जब भगवान शिव ने गोपी रूप धारण करके महारास में हिस्सा लिया तो भगवान श्रीकृष्ण उन्हें पहचान गए। महारास के खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी के साथ मिलकर महादेव के गोपी रूप की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में ठहरने का आग्रह किया। शिव जी ने श्री कृष्ण के आग्रह को स्वीकार किया। तब राधारानी ने शिव जी के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव का नाम दिया। तब से आज तक महादेव का ये रूप वृंदावन में विराजमान है। मंदिर का महत्व गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया जाता हैं और उन्हें गोपियों के रूप में तैयार किया जाता हैं। रासलीला के वक्त शाम को 5 बजे से 9 बजे के दौरान भगवान शिव की पूजा की जाती हैं। मंदिर के परिसर में मौजूद बडा सा पीपल का पेड़ सबकी इच्छाए पूरी करता है इसीलिए इस पेड़ को कल्पवृक्ष कहा जाता है। मंदिर की वास्तुकला वृंदावन में स्थित भगवान शिव के गोपेश्वर महादेव मंदिर में राजस्थानी और नागर शैली का प्रयोग किया गया है। गोपेश्वर महादेव मंदिर का परिसर बहुत बड़ा और भव्य बनाया गया है। मंदिर परिसर में बड़ा आंगन है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर के बगल में एक पीपल का पेड़ है। जिसे कल्पवृक्ष भी कहते है। श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने गोपेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:30 AM – 08:30 AM सांय मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 09:30 PM शाम आरती का समय 07:30 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिव जी को फल,दूध, दही, पेड़े का भोग लगाया जाता है। कुछ भक्त भगवान को जलाभिषेक करते है तो कुछ दूध या शहद से अभिषेक करते है।

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Mata Durga:सपने में इस रूप में दिखें माता दुर्गा, तो खुल जाएगी किस्मत, धन-धान्य की होगी प्राप्ति

Mata Durga:सपने में मां काली का दिखाई देना शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आपको समस्याओं से जल्द ही छुटकारा मिल सकता है। Sapne Mai Mata Durga Ka Mandir Dekhna:सपने में माता दुर्गा का मंदिर देखना  माता दुर्गा के मंदिर तो माता के सभी भक्त जाते हैं, लेकिन कभी सपने में माता का मंदिर दिख जाए तो इसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि आप धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। माता की कृपा आप पर बनी हुई है और आप सही रास्ते पर अग्रसर हैं। यह सपना आपकी मनोकामनाओं को भी पूरा करने वाला माना गया है। वहीं आपको बार-बार सपने में माता का मंदिर दिख रहा है तो इसका अर्थ है कि, मोह-माया के बंधनों को आप तोड़ सकते हैं और विरक्ति का भाव आपके मन में जाग सकता है।  Snake Dream Meaning: अगर सपने में देखा है सांप, तो समझिए कि जीवन में आने वाली हैं खुशियां Sapne Mai Maa Kali Ko Roudra Roop Mai Dekhna:सपने में मां काली को रौद्र रूप में देखना सपने में मां काली को रौद्र रूप में देखने के सकारात्मक संकेत माने गए हैं। Mata Durga इसका अर्थ ही जीवन में संघर्ष के बाद ही आपको सफलता प्राप्त हो सकती है। Sapne Mai Srangar Kiye Mata Ko Dekhne Ka Matlab:सपने में श्रृंगार किये माता को देखने का मतलब अगर सपने में आप दुर्गा माता को श्रृंगार किये हुए देखते हैं तो ये सपना भी शुभ मान गया है। ये सपना आपके जीवन में आने वाली खुशियों की ओर संकेत करता है। इस सपने के आने के बाद कोई अच्छी खबर आपको मिल सकती है। इसके साथ ही विवाहित लोग इस सपने को देखते हैं तो उनके वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां दूर होती हैं। करियर से जुड़ा कोई अच्छा समाचार भी आपको मिल सकता है।  Sapne Mai Durga Mata Ki Murti Dekhne Ka Arth:सपने में दुर्गा माता की मूर्ति देखने का अर्थ सपने में अगर आप माता दुर्गा की मूर्ति देखते हैं तो इसका अर्थ यह लगाया जाता है कि, जीवन की कोई बड़ी परेशानी दूर हो सकती है। अपने जीवन में जिस संतुलन की आप कामना करते हैं वो आपको प्राप्त होगा। हालांकि सपने में माता की खंडित मूर्ति को देखना अच्छा नहीं माना जाता, ऐसा सपना आने के बाद आपको हर कार्य सोच-समझकर करना चाहिए। अगर आप करियर या पारिवारिक जीवन से जुड़ा कोई निर्णय लेने वाले हैं तो बड़े-बजुर्गों की सलाह के बाद ही आपको आगे बढ़ना चाहिए।  Sapno ka matlab : सपने में खुद को देख लिया है तो आपके साथ होने वाला है यह, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र Sapne Mai Mata Durga Ko Lal Kapdo Mai Dekhna:सपने में माता दुर्गा को लाल कपड़ों में देखना  यह सपना Mata Durga माता की कृपा का संकेत है। ऐसा सपना आने के बाद आपकी Mata Durga कोई दबी ख्वाहिश पूरी हो सकती है। ऐसा सपना अगर अविवाहित लोग देखते हैं तो उन्हें योग्य वर या वधु की प्राप्ति होती है।  आपको भी अगर इन सपनों में से कोई सपना होता है तो समझ जाइए माता की आप पर कृपा है। आपके जीवन में जल्द ही अच्छे बदलाव आ सकते हैं। वहीं, नवरात्रि के दौरान अगर आप माता सपना देखते हैं तो समझ लिजिए अब जीवन की गाड़ी पटरी पर आने वाली है।  Sapne Mai Maa Kali Ki Puja Karne Ke Sanket सपने में मां काली की पूजा करने के संकेत सपने में मां काली की पूजा करना भी शुभ संकेत माना गया है। इसका अर्थ होता है कि निकट भविष्य में आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। वहीं यह भी माना गया है कि आने वाले समय में आपको धन लाभ भी हो सकता है। Sapne Me Mandir Dekhna: सपने में मंदिर और मंदिर की घंटी बजाते देखना इस बात का संकेत, जरूर जानें मतलब Sapne Mai Devi Kali Ki Tasveer Dekhna:सपने में देवी काली की तस्वीर देखना सपने में देवी काली की तस्वीर देखना सकारात्मक संकेत माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आपको कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता मिल सकती है। वहीं अगर सपने में मां काली आपको आशीर्वाद दे रही हैं, तो इसका अर्थ होता है कि जल्द ही आपको आर्थिक तंगी की समस्या से निजात मिल सकती है। Sapne Mai maa kali ka dikhai Dena:सपने में मां काली का दिखाई देना सपने में मां काली का दिखाई देना शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार नकारात्मक शक्तियों का विनाश हो सकता है। Mata Durga यदि कोई बीमार जातक सपने में मां काली को देखता है, Mata Durga तो ऐसे माना गया है कि वह बीमारी से जल्द ही छुटकारा पा सकता है। वहीं यह भी माना गया है कि अगर सपने में मां काली का दर्शन होता है, तो घर में सुख-समृद्धि आ सकती है। Sapne Me Hasna And Khana Khana:सपने में खुद को हंसते हुए देखना हो सकता है किसी खास बात का संकेत

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Papmochani Ekadashi 2025: पापमोचनी एकादशी पर भगवान विष्णु को लगाएं पंजीरी का भोग, बेहद आसान है रेसिपी

Papmochani Ekadashi 2025:एकादशी तिथि को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम मानी जाती है। चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में पापमोचनी एकादशी (Papmochani Ekadashi 2025) व्रत किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर करने का विधान है। इसके बाद दान जरूर करें। आइए जानते हैं कैसे व्रत का पारण? एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में बहुत अहम माना जाता है। मार्च की 25 तारीख को पापमोचनी एकादशी (Papmochni Ekadashi 2025) है, जिसका काफी महत्व है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा और आराधना के लिए समर्पित होता है। एकादशी के दिन भगवान विष्णु को खास भोग (Ekadashi Bhog) लगाया जाता है, जिसमें धनिया की पंजीरी (Dhaniya Panjiri For Ekadashi) एक अहम प्रसाद के रूप में तैयार की जाती है। धनिया की पंजीरी न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी काफी है। एकादशी के दिन इस प्रसाद (Ekadashi Bhog) को बनाने और भगवान विष्णु को अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें आशीर्वाद मिलता है। यह प्रसाद सात्विक होता है और इसे बनाने की विधि भी काफी आसान है। आइए जानते हैं कि एकादशी के दिन भगवान विष्णु के भोग के लिए धनिया की पंजीरी कैसे बनाई जाती है (Dhaniya Panjiri Recipe)। Papavimocani Ekadashi 2025:पापमोचनी एकादशी कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण मुहूर्त धनिया की पंजीरी कैसे बनाएं? (Dhaniya Panjiri Recipe) सामग्री- बनाने की विधि- सबसे पहले धनिया के बीजों को अच्छी तरह से साफ कर लें। फिर इन्हें किसी साफ कपड़े पर फैला कर धूप में सुखाएं। धनिया के बीज पूरी तरह से सूख जाने चाहिए, ताकि वे आसानी से पिस सकें। एक कड़ाही में थोड़ा-सा घी डालें और उसमें सूखे हुए धनिया के बीजों को डालकर भूनें। धनिया को मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उसकी खुशबू न आने लगे और वह हल्का सुनहरा हो जाए। ध्यान रखें कि धनिया जले नहीं, वरना इसका स्वाद खराब हो सकता है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती भुने हुए धनिया को ठंडा होने दें। फिर इसे मिक्सर या ग्राइंडर में पीस लें। धनिया को बारीक पाउडर के रूप में पीसना चाहिए। यदि आप चाहें, तो इसमें थोड़ा-सा कद्दूकस किया हुआ नारियल भी मिला सकते हैं, जो इसके स्वाद को और बढ़ा देगा। अब को भी बारीक पीस लें। एक बड़े कटोरे में पिसा हुआ धनिया, गुड़ का पाउडर, इलायची पाउडर और बचा हुआ घी डालें। Papmochani Ekadashi 2025 इन सभी सामग्रियों को अच्छी तरह से मिलाएं। मिश्रण को हाथों से मलकर अच्छी तरह से मिलाएं, ताकि सभी सामग्रियां आपस में अच्छी तरह मिल जाएं। पंजीरी को एक साफ और सूखे बर्तन में निकाल लें। इसे किशमिश और बादाम से सजा सकते हैं। यह प्रसाद भगवान विष्णु को भोग लगाने के लिए तैयार है। पापमोचनी एकादशी व्रत कथा (Papmochani Ekadashi Vrat Katha) पापमोचनी एकादशी व्रत पारण विधि (Papamochani Ekadashi Vrat Paran Vidhi) Papmochani Ekadashi 2025:द्वादशी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। स्नान करने के बाद भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। प्रभु के मंत्रों के जप करें। फल मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कमान करें। इसके बाद तुलसी मिश्रित जल ग्रहण कर व्रत खोलें और दान करें।   शुभ समय (Today Shubh Muhurat) ब्रह्म मुहूर्त – प्रातः 04 बजकर 44 मिनट से 05 बजकर 31 मिनट तकगोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 34 मिनट से शाम 06 बजकर 58 मिनट तकनिशिता मुहूर्त – देर रात 12 बजकर 03 मिनट से देर रात 12 बजकर 50 मिनट तकअभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं पापमोचनी एकादशी 2025 व्रत पारण टाइम (Papamochani Ekadashi 2025 Vrat Paran Time) Papmochani Ekadashi 2025:एकादशी व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। 26 मार्च को पापमोचनी एकादशी व्रत पारण करने का समय दोपहर 01 बजकर 41 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 08 मिनट तक है। Papmochani Ekadashi 2025 इस दौरान किसी भी समय व्रत का पारण किया जा सकता है। इसके बाद अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान जरूर करना चाहिए। Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi)

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Bajrang Ki Kainchi/बजरंग की कैंची

Bajrang Ki Kainchi:बजरंग की कैंची: यह भी एक चमत्कारी प्रयोग है जो तंत्र और मुसलमानों दोनों को आसानी से काट सकता है, इसमें कोई खतरा नहीं है। बजरंग की कैंची साधना 21 दिन की होती है, अगर आप खुद नहीं कर सकते तो किसी योग्य साधक से भी करवा सकते हैं। इस विद्या से तैयार नींबू को जहां लटकाया जाएगा, वहां किसी भी तरह का भय, भूत-प्रेत नहीं रहेगा। Bajrang Ki Kainchi दुकान में लटकाने से घर में सुख-शांति बनी रहेगी। 3, 5 या 7 बार अभ्यस्त जल छिड़कने के बाद व्यक्ति के नाम का तिलक लगाकर लौंग छिड़ककर खिला दें, उसकी भूत-प्रेत शक्ति नष्ट हो जाएगी। कुछ लोग पिशाच गतिविधियों के प्रति बहुत संवेदनशील होते हैं, उन्हें सुरक्षा उपाय अवश्य अपनाने चाहिए अन्यथा उनका जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाएगा और उनकी जान भी जा सकती है। Bajrang Ki Kainchi बजरंग की कैंची उनके पारिवारिक जीवन को प्रभावित करेगी और परिवार के सदस्यों में कलह होगी। उनका रूप डरावना होगा और लोग उन्हें पहचान भी नहीं पाएंगे। बजरंग की कैंची एक ऐसा स्तोत्र है जो व्यक्ति को भूत-प्रेत, पिशाच प्रभाव और कई अन्य अप्रत्याशित समस्याओं से बचाता है, जब इसे नियम और कायदे के अनुसार जपते हैं। Bajrang Ki Kainchi यह आत्मविश्वास की कमी और शारीरिक समस्याओं से राहत देता है। यह भी कहा जाता है कि जब साधक पर कोई बुरा प्रभाव पड़ता है तो उसके ऊपर एक कवच बन जाता है। जिन लोगों को बुरे सपने आते हैं और किसी भी तरह का अप्राकृतिक वातावरण होता है, Bajrang Ki Kainchi वे बजरंग की कैंची का पाठ करके अपनी रक्षा कर सकते हैं। यह एक सिद्ध प्रणाली है, लेकिन बजरंग की कैंची करने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। बजरंग की कैंची के लाभ Bajrang Ki Kainchi व्यक्ति सभी अप्राकृतिक प्रभावों से मुक्त हो जाता है।उस पर कोई जादू-टोना नहीं किया जा सकता।दुश्मनों को अच्छी तरह से दंडित किया जाता है।काले जादू का कोई प्रभाव नहीं होता।इससे शत्रुओं का पर्दाफाश हो जाता है और साधक उनका ख्याल रख सकता है। कौन करे बजरंग की कैंची का पाठ Bajrang Ki Kainchi भूत-प्रेत, जादू-टोना या अन्य पिशाच प्रभाव से प्रभावित व्यक्ति, जो बीमार हो रहा हो, व्यापार में नुकसान हो रहा हो, नौकरी छूट रही हो या आर्थिक संकट हो रहा हो, उन्हें बजरंग की कैंची का पाठ किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में करना चाहिए, ताकि सफलता मिले। बजरंग की कैंची/Bajrang ki Kainchi पाठ विधिः- हनुमान जी का पूजन कर नित्य 108 निम्न स्तोत्र का पाठ 21 दिन करें, 21वें दिन हनुमान् जी को सिन्दूर, लंगोट, सवा सेर का रोट, नारियल अर्पित करें। लाभः इस विद्या से अभिमन्त्रित नींबू जहाँ लटका दिया जाएगा, वहाँ किसी भी प्रकार का अभिचार, भूत-प्रेतादि नहीं ठहर सकते। दुकान में लटकाने से धन्धा अच्छा चलेगा। भूत-प्रेत लगे व्यक्ति को 3, 5 या 7 बार अभिमन्त्रित जल छिड़कने से व्यक्ति के नाम से मन्त्र पढ़कर लवंग अभिमन्त्रित कर उसे खिला दें, तो उसकी विद्या नष्ट हो जाती है। “फजले बिस्मिल्ला रहमान, अटल खुरजी तेज खुरान । घड़ी-घड़ी में निकलै बान । लालो लाल कमान, राखवाले की जबान । खाक माता खाक पिता । त्रिलोकी की मिसैली । राजा – प्रजा पड़ै मोहिनी । जल देखै, थल कतरै । राजा इन्द्र की आसन कतरै । तलवार की धार कतरै । आकाश पाताल, वायु – मण्डल को कतरै । तेंतीस कोटि देवी- देवताओं को कतरै । शिव – शंकर को कतरै । भीमसेन की गदा कतरै । अर्जुन को बाण कतरै । कृष्ण को सुदर्शन कतरै । सोला हंसा को कतरै । पेट में के बावरे को कतरै । दौलतपुर के डोमा को कतरै । ब्राह्मण के ब्रहम-राक्षस को कतरै । धोबी के जिन को कतरै । भंगी के जिन को कतरै । रमाने के जिन को कतरै । मसान के जिन को कतरै । मेरे नरसिंह से कतरै । गुरु के नरसिंह से कतरै । बौलातन चुड़ैल को कतरै । जहाँ खुरी नौ खण्ड, बारह बंगाले की विद्या जा पहुँचे । अञ्जनी के पूत हनुमान ! तोहे एक लाख अस्सी हजार पीर-पैगम्बरों की दुहाई, दुहाई, दुहाई ।” चेतावनी: हमारे KARMASU.IN लेख का उद्देश्य केवल प्रस्तुत विषय से संबंधित जानकारी प्रदान करना है लेख को पढ़कर यदि कोई व्यक्ति किसी टोने-टोटके,गंडे,ताविज अथवा नक्स आदि का प्रयोग करता है और उसे लाभ नहीं होता या फिर किसी कारण वश हानि होती है, तो उसकी जिम्मेदारी हमारी संथानकी नहीं होगी,क्योकि मेरा उद्देश्य केवल विषय से परिचित कराना है।

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श्री रंगनाथ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

रंग जी मंदिर, वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में शामिल है। श्री रंगनाथ मंदिर:उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृन्दावन में श्री रंगनाथ मंदिर स्थित है। इस मंदिर को “रंग जी मंदिर ” के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित है। वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में यह मंदिर शामिल है। इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर के पुजारी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण है। मंदिर का इतिहास सेठ गोबिंद दास और राधा कृष्ण द्वारा श्री रंगनाथ मंदिर की स्थापना की गयी थी। इस मंदिर के निर्माण में स्वामी रंगाचार्य का मार्गदर्शन लिया गया था, जो एक प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और गुरु थे। इस मंदिर का निर्माण कार्य 1845 में आरम्भ हुआ और सन 1851 में यह मंदिर पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो गया था। इस मंदिर को बनने में करीब 6 साल का समय लगा। लगभग 45 लाख रुपये की लागत में यह मंदिर बना था। मंदिर का महत्व रंगनाथ मंदिर के उपस्थित सातवें दरवाजे का नाम वैकुंठ दरवाजा है। केवल वैकुंठ एकादशी के दिन इस दरवाजे को खोला जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जिसने भी इस दरवाजे को पार कर लिया। उसे मोक्ष मिल जाता है। यह मंदिर इस तरह से बनाया गया है कि इस मंदिर में जाने पर ऐसा लगता है जैसे आप दक्षिण के मंदिर का दर्शन कर रहे है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह मूर्ति अयोध्‍या में स्‍थापित थी। जब श्री राम जी का राज्‍याभिषेक हुआ तो वह सभी को दान दे रहे थे। उस समय विभीषण ने उनसे श्रीरंगजी की मूर्ति मांगी और कहा कि वह उस मूर्ति को लंका ले जाना चाहते है। यात्रा के दौरान विभीषण के एक स्थान पर मूर्ति को रख दिया। इसके बाद वह मूर्ति वहां से बिलकुल भी नहीं हिली। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया गया। जो आज श्री रंगनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला इस मंदिर के वास्तुकला की बात करें तो यह मंदिर दक्षिण के श्री रंगम मंदिर के आधार पर बनाया गया है। श्री रंगनाथ मंदिर में आपको दक्षिण और उत्तर भारतीय शैली का मिश्रण देखने को मिलेगा। जो बहुत ही अद्भुत है। यह मंदिर द्रविड वास्तुशिल्प शैली में बनाया गया है। इस मंदिर के गर्भगृह के चारों तरफ 5 आयताकार बाड़े है। इसके पूर्वी और पश्चिमी ओर जयपुर शैली के दो खूबसूरत पत्थर से निर्मित गेट है। मंदिर के पश्चिमी गेट पर एक लकड़ी का रथ है जो कि ब्रह्मोत्सव के समय निकाला जाता है। इस मंदिर में श्रीरंगनाथ जी शेषनाग पर मूर्ति रूप में विराजमान है। उनके चरणों के समीप माता लक्ष्‍मी बैठी है। मंदिर का समय श्री रंगनाथ मंदिर के सुबह दर्शन का समय 08:00 AM – 12:00 PM शाम को श्री रंगनाथ मंदिर के खुलने का समय 03:00 PM – 07:30 PM मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM शाम की मंगला आरती का समय 06:00 PM – 06:30 PM मंदिर का प्रसाद श्री रंगनाथ मंदिर में लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी अर्पित किये जाते है।

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