Mahalakshmi Stotra:महालक्ष्मी स्तोत्र

Mahalakshmi Stotra:महालक्ष्मी स्तोत्र एक भक्ति भजन है, जो भगवान विष्णु की पत्नी देवी महालक्ष्मी के प्रति आस्था और भक्ति की घोषणा है। उन्हें लाल वस्त्रों में और सोने के आभूषणों से सुसज्जित दिखाया गया है। उनके चेहरे पर शांत और सुखदायक भाव हैं और उन्हें हमेशा अपने हाथ में कमल लिए देखा जाता है, जो उन्हें सुंदरता का प्रतीक दर्शाता है। महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ सबसे पहले भगवान इंद्र ने देवी श्री लक्ष्मी की स्तुति में किया था, जो मूल रूप से पद्म पुराण में देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए प्रकट हुई थीं। उनके चार हाथ हिंदू जीवन शैली के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले मानव जीवन के चार लक्ष्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं – धर्म (धार्मिकता और कर्तव्य) काम (सांसारिक इच्छाएँ), अर्थ (धन और समृद्धि) और मोक्ष (मुक्ति)। उनकी हथेलियाँ हमेशा खुली रहती हैं और कभी-कभी उनमें से सिक्के गिरते हुए दिखाई देते हैं, जो दर्शाता है कि वह धन और समृद्धि की दाता हैं। उन्हें एक सुंदर बगीचे में या नीले-सागर में कमल पर बैठे या खड़े दिखाया गया है। उनके चारों ओर दो या चार सफेद हाथी जल से उनका अभिषेक कर रहे हैं। उनके वाहन यानी सवारी सफेद हाथी और उल्लू हैं। महालक्ष्मी स्तोत्र देवी महा लक्ष्मी की प्रार्थना है जिन्हें “श्री” भी कहा जाता है और जो धन के साथ-साथ शुभता का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रतिदिन श्री Mahalakshmi Stotra महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करने या सुनने से व्यक्ति को सफलता और सांसारिक लाभ प्राप्त होंगे। इस अष्टकम के अंत में ही कहा गया है कि यदि इसे प्रतिदिन एक बार पढ़ा जाए तो महान पाप नष्ट हो जाते हैं। यदि इसे प्रतिदिन दो बार पढ़ा जाए तो धन और समृद्धि सुनिश्चित होती है। यदि इसे प्रतिदिन तीन बार पढ़ा जाए तो महान शत्रु (अहंकार) का नाश होता है। देवी महालक्ष्मी उस शुभ व्यक्ति से सदैव प्रसन्न रहती हैं। Mahalakshmi Stotra ke labh:महालक्ष्मी स्तोत्र के लाभ: वित्तीय समृद्धि, बुद्धि और समझ के लिए महालक्ष्मी स्तोत्र। भगवान विष्णु की पत्नी और गतिशील ऊर्जा श्री लक्ष्मी को हिंदुओं द्वारा धन, भाग्य, विलासिता और समृद्धि (भौतिक और आध्यात्मिक दोनों) की देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्हें लाल वस्त्रों में चित्रित किया गया है और सोने के आभूषणों से सुसज्जित किया गया है।Mahalakshmi Stotra:महालक्ष्मी स्तोत्र का नियमित जाप मन को शांति देता है और आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो लोग गरीबी, असफलता और दुर्भाग्य से पीड़ित हैं, उन्हें तत्काल राहत के लिए महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। महालक्ष्मी स्तोत्र हिंदी पाठ:Mahalakshmi Stotra in Hindi नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि ।सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। सर्वज्ञे सर्ववरदे देवी सर्वदुष्टभयंकरि ।सर्वदु:खहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणी ।परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते ।जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं य: पठेद्भक्तिमान्नर: ।सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ।। एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।द्विकालं य: पठेन्नित्यं धन्यधान्यसमन्वित: ।। त्रिकालं य: पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ।। ।। इति महालक्ष्मी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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33 koti gods names list:33 करोड़ नहीं 33 प्रकार के हैं देवता, जानिए कौन-कौन शामिल हैं 33 कोटि देवताओं में

33 koti gods:एक मान्यता प्रचलित है कि हिन्दू धर्म में कुल 33 करोड़ देवी-देवता माने हैं, जबकि ये बात सही नहीं है। हिन्दु धर्म में 33 करोड़ नहीं 33 कोटि यानी 33 प्रकार के देवता हैं। जानिए इस मान्यता से जुड़ी खास बातें… हिन्दू धर्मग्रंथों में 33 करोड़ नहीं, बल्कि 33 कोटि देवताओं का जिक्र है। यहां कोटि शब्द का अर्थ करोड़ नहीं, बल्कि प्रकार या श्रेणी है। संस्कृत शब्द कोटि के दो अर्थ हैं — करोड़ और प्रकार। इसी वजह से शब्द का गलत अनुवाद करके लोगों ने यह समझ लिया कि हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवता हैं। हिंदू ग्रंथो में 33 कोटि देवी देवता का जिक्र है. कोटि शब्द संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका सही अर्थ “प्रकार” है 33 koti gods यानी की हिंदू धर्म में 33 प्रकार के देवी देवता होते हैं. जबकि कोटि शब्द को कहीं कहीं करोड़ भी कहा जाता है इसी वजह से हिंदू धर्म में ये भ्रांति फैली कि हिंदू धर्म में 33 कोटि यानी 33 करोड़ देवी देवता होते हैं. सनातन धर्म इस संसार का सबसे प्राचीन धर्म माना जाता है, जिसमें अनेकों देवी देवताओं की पूजा की जाती है. 33 koti gods अनेकों त्यौहार और धार्मिक मान्यताओं का पालन किया जाता है. सनातन धर्म में कुल कितने देवी देवता हैं, ये प्रश्न हमेशा लोगों की जिज्ञासा रहा है.क्योंकि सनातन धर्म को लेकर लोगों में कुछ भ्रांतियां फैली हुई हैं. जिनमें से सबसे बड़ी भ्रांति है कि 33 koti gods हिंदू धर्म में 33 करोड़ देवी -देवता हैं. आज के समय में भी ज्यादातर लोगों का यही मानना है कि हिंदुओं के 33 करोड़ देवी- देवता होते हैं. आइए जानते हैं, क्या वाकई में हिंदुओ के 33 करोड़ देवी देवता होते हैं? सनातन धर्म का प्राचीन इतिहास रहा है, ये कितना पुराना है या कब से अस्तित्व में आया कोई नहीं जानता.इसी तरह संस्कृत भी बहुत पुरानी भाषा मानी जाती है यही हमारे वेदों की भाषा है, सनातन धर्म में पहले संस्कृत भाषा ही प्रचलन में थी इसका प्रमाण हमारे वेद और उपनिषद हैं जो कि संस्कृत में लिखे गए हैं. हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता और रामायण भी संस्कृत में ही लिखे गए थे. बाद में हिंदी भाषा अस्तित्व में आई और दुनिया भर में फैले हिन्दुओं ने इसे अपनी भाषा के रूप में अपनाया और संस्कृत जिसे बड़े स्तर पर हिंदू लोगों ने अपनाया तभी से धीरे धीरे संस्कृत भाषा पीछे छूटती रही और लोग संस्कृत भूलते गए. इसी वजह से हिंदू धर्म के सभी पवित्र ग्रंथों का संस्कृत भाषा से हिंदी भाषा में अनुवाद किया जाने लगा. क्या है कोटि का अर्थ?:What is the meaning of Koti? कोटि के संस्कृत में दो अर्थ होते हैं – 33 koti gods एक करोड़ और दूसरा सर्वोच्च लेकिन आम बोलचाल की भाषा में कोटि शब्द को करोड़ के रूप में देखा गया, जिससे यह माना जाने लगा कि हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की संख्या 33 करोड़ है. हालांकि यहां कोटि का अर्थ सर्वोच्च है। ऐसे में चलिए जानते हैं कि 33 कोटि देवी-देवता कौन-से हैं। 33 koti gods names list:ग्रंथों में 33 देवताओं के बारे में लिखा है। ये 33 देवता अलग-अलग कोटियों या श्रेणियों में बताए हैं- 33 koti gods:मान्यताओं के अनुसार 33 कोटि देवताओं में 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, इंद्र और प्रजापति आते हैं. कहीं कहीं इसमें इंद्र व प्रजापति की जगह दो अश्विनी कुमारों को शामिल किया गया है. ये हैं 33 कोटि देवी-देवता:These are 33 crore Gods and Goddesses 8 वासु – 1. आप 2. ध्रुव 3. सोम 4. धर 5. अनिल 6. अनल 7. प्रत्यूष 8. प्रभाष 11 रुद्र: 1.मनु 2.मन्यु 3.शिव 4.महत 5.ऋतुध्वज 6.महिनस 7.उम्रतेरस 8.काल 9.वामदेव 10.भव 11.धृत-ध्वज 12.आदित्य : 1. अंशुमान 2. अर्यमन 3. इंद्र 4. त्वष्टा 5. धातु 6. पर्जन्य 7. पूषा 8. भग 9. मित्र 10. वरुण 11. वैवस्वत 12. विष्णु इंद्र प्रजापति (इंद्र और प्रजापति या अश्विनी कुमार):Indra and Prajapati or Ashwini Kumar) इंद्र देवताओं के राजा माने जाते हैं, जो मेघ, वर्षा और युद्ध के देवता हैं। प्रजापति ब्रह्मा का एक रूप माने जाते हैं, जो सृष्टि के रचयिता हैं। कई शास्त्रों में इनके स्थान पर अश्विनी कुमारों को 33 कोटि देवताओं में शामिल किया गया है। ये दोनों जुड़वां देवता हैं और आयुर्वेद से जुड़े हैं।

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History Of Kedarnath Temple:नर-नारायण और पांडवों से जुड़ा है केदारनाथ का इतिहास, आदिगुरु शंकराचार्य ने कराया था मंदिर का जिर्णोद्धार

History Of Kedarnath Temple:शिव जी का पांचवां ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में है। इसका नाम है केदारनाथ। ये मंदिर उत्तराखंड के चारधामों में भी शामिल है। शिव जी के इस धाम का इतिहास भगवान विष्णु के अवतार नर-नारायण, पांडव और आदिगुरु शंकराचार्य से जुड़ा है। ये मंदिर हिमालय क्षेत्र में है, इस वजह से शीत ऋतु के समय करीब 6 महीने बंद रहता है और ग्रीष्म ऋतु के समय भक्तों के लिए खोला जाता है। जानिए पांचवें ज्योतिर्लिंग से जुड़ी खास बातें… History Of Kedarnath Temple:नर-नारायण के तप से प्रसन्न होकर प्रकट हुए थे शिव जी पांडवों से जुड़ी है केदारनाथ की मान्यता:The belief of Kedarnath is related to Pandavas. History Of Kedarnath महाभारत के समय यानी द्वापर युग में केदार क्षेत्र में शिव जी ने पांडवों को बेल रूप में दर्शन दिए थे। वर्तमान मंदिर का निर्माण आदि गुरु शंकराचार्य ने 8वीं-9वीं सदी में करवाया था। ये मंदिर उत्तराखंड के चार धामों में से एक है। मंदिर समुद्र तल से करीब 3,583 मीटर की ऊंचाई पर है। ये मंदिर हिमालय क्षेत्र में है, इस कारण शीत ऋतु के दिनों में बंद रहता है। गुरु शंकराचार्य ने कराया था मंदिर का जिर्णोद्धार:Guru Shankaracharya had renovated the temple मान्यता है कि ये केदारनाथ धाम में स्वयंभू शिवलिंग स्थापित है। स्वयंभू शिवलिंग का अर्थ है जो स्वयं प्रकट हुआ है। History Of Kedarnath केदारनाथ मंदिर का निर्माण पांडव राजा जनमेजय ने करवाया था। बाद में आदि गुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर का जिर्णोद्धार करवाया। मंदिर से जुड़ी अन्य खास बातें:Other special things related to the temple केदारनाथ मंदिर में सोना लगाने का इतिहास:History of applying gold in Kedarnath temple केदारनाथ मंदिर में सोना लगाने के इतिहास का जिक्र नहीं मिलता है. हालांकि ऐसा दावा किया जाता है कि History Of Kedarnath केदारनाथ मंदिर के निर्माण के बाद से 12 वीं शताब्दी तक यहां सोना-चांदी लगाया जाता था, इसके बाद यह प्रथा खत्म हो गई. पिछले साल जब यहां सोने की परत चढ़ाने काम काम शुरू हुआ था उससे पहले यहां दीवारों पर चांदी की परत चढ़ी थी. जब सोने की परत का काम शुरू हुआ तो पुजारियों ने विरोध किया था. उस वक्त केदार सभा के पूर्व अध्यक्ष महेश बगवाड़ी ने कहा था कि मंदिर की दीवारों पर सोना चढ़ाना हिंदू मान्यताओं और परंपराओं के अनुरूप है. उस वक्त BKTC के चेयरमैन अजेंद्र अजय ने भी कहा था कि यह सामान्य प्रक्रिया है, पहले छत लकड़ी से बनती थी, फिर पत्थर से बनी, इसके बाद तांबें की प्लेंटे आईं. उन्होंने विरोध को साजिश बताया था. महाभारत में है केदारनाथ का जिक्र:Kedarnath is mentioned in Mahabharata History Of Kedarnath केदारनाथ का इतिहास बेहद पुराना है, महाभारत में भी इसका जिक्र मिलता है, ऐसा दावा किया जाता है कि मंदिर का निर्माण पांडवों ने कराया था. इसके पीछे यहां एक किवदंती भी है, ऐसा कहा जाता है कि महाभारत युद्ध के बाद गौत्र बंधुओं की हत्या के पाप से मुक्ति के लिए पांडव भगवान शंकर के पास केदारघाटी गए. भोलेनाथ ने पांडवों को दर्शन न देने के लिए भैंसे का रूप रख लिया और जानवरों के बीच छिप गए. उन्हें ढूंढने के लिए भीम ने विशाल रूप रखकर घाटी के दोनों ओर पैर जमा लिए. जब भगवान शंकर पहचान लिए गए तो वह धरती में समाने लगे, तभी भीम ने उनका पृष्ठ भाग पकड़ लिया. इसके बाद भोलेनाथ ने प्रसन्न होकर पांडवों को दर्शन दिए. History Of Kedarnath केदारनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ के इसी पृष्ठ भाग का पूजन होता है.

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शत्रुघ्न मंदिर:ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत

भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न ने यहाँ की थी मौन तपस्या देवभूमि ऋषिकेश के गंगा नदी के किनारे राम झूला के पास स्थित है शत्रुघ्न मंदिर। यह मंदिर प्राचीन और प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न के नाम पर बनाया गया है। मंदिर शत्रुघ्न को समर्पित है। इस मंदिर में मुख्य रूप से बद्री नारायण की मूर्ती विराजमान है। इस कारण इस मंदिर को “बद्री नारायण मंदिर” के नाम से भी जानते है। आपको बता दे कि भारत में केवल 2 ही स्थानों पर शत्रुघ्न के मंदिर हैं। एक तो केरल के थ्रिसूर जिले में है और दूसरा उत्तराखंड के ऋषिकेश में। शत्रुघ्न मंदिर का इतिहास शत्रुघ्न मंदिर को 8 वीं सदी में अदि गुरु शंकराचार्य ने बनवाया था। ऋषिकेश में मुनि के रेती को मुनियों की तपोभूमि कहते है। पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शत्रुघ्न ने इसी स्थान पर मौन तपस्या की थी। जिस कारण इस स्थान को मौन की रेती के नाम से जानते थे। और अब इस जगह को मुनी की रेती के नाम से जाना जाता है। रावण के परिवार के लवणासुर का वध भगवान शत्रुघ्न द्वारा हुआ था। जिससे शत्रुघ्न को ब्रह्म दोष लग गया था। इस ब्रह्म दोष के निवारण के लिए वह ऋषिकेश आए थे और ऋषिकेश के इस स्थल पर उन्होंने मौन तपस्या की। तभी से यह मंदिर शत्रुघ्न मंदिर के नाम से जाना जाने लगा। मंदिर का महत्व मंदिर में प्रत्येक पर्व को बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। परन्तु जन्माष्टमी और रामनवमी दो मुख्य पर्व है जिसे इस मंदिर में बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस विशेष अवसर पर लोग दूर दूर से मंदिर में दर्शनों के लिए आते है। शत्रुघ्न का मंदिर कम होने के कारण भी यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। इस मंदिर के दर्शन और यहाँ के शांत वातावरण का अनुभव करने के लिए भी भक्त इस मंदिर में आते है। मंदिर की वास्तुकला मुख्य मंदिर में शत्रुघ्न के रूप में बद्री नारायण जी विराजित है। उनके साथ भगवान राम – सीता और लक्ष्मण की परतिमएं भी स्थापित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु जी भी विराजमान है। मंदिर के ठीक सामने ही गंगा घाट है। इस घाट को शत्रुघ्न घाट भी कहा जाता है। इस घाट की गंगा आरती अपने आप में बहुत अद्भुत है। यह घाट रामझूला और जानकी सेतु के मध्य स्थित है। गंगा आरती के समय ये ओर राम झूला रौशनी से जगमगाता है और इस घाट के दूसरी तरफ जानकी सेतु का दृश्य बहुत ही सुन्दर दिखाई देता है। मंदिर का समय शत्रुघ्न मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 07:30 AM मंदिर का प्रसाद शत्रुघ्न मंदिर में फल, फूल, सूखा मेवा, मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है।

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दक्षिण काली मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत

यह एक ऐसा मंदिर है जहां स्थापित माता की मूर्ति का मुख तो पूरब की ओर है, लेकिन मंदिर का नाम दक्षिण काली है। दक्षिण काली मंदिर आमतौर पर किसी मंदिर का नाम वहां स्थापित भगवान या उस स्थान के नाम पर रखा जाता है। लेकिन उत्तराखंड के हरिद्वार में एक ऐसा मंदिर है जहां स्थापित माता की मूर्ति का मुख तो पूरब की ओर है, लेकिन मंदिर का नाम दक्षिण काली है। शहर के नील धारा क्षेत्र में चंडी देवी मंदिर मार्ग पर स्थित प्राचीन दक्षिण काली मंदिर सिद्धपीठ है। इसकी महिमा कोलकाता में स्थित दक्षिणेश्वर मंदिर से कम नहीं है। देश में ऐसे सिर्फ 2 ही मंदिर हैं। मंदिर के नाम के साथ यहां की एक और खास बात है। पूरे देश में नवरात्रि 9 दिन की होती है, लेकिन यहां नवरात्रि पूरे 15 दिन तक मनाई जाती है। मां काली को समर्पित इस मंदिर में शनिवार को विशेष पूजा अर्चना ​की जाती है, जिससे माता प्रसन्न होकर अपने भक्तों के सारे कष्ट दूर कर देती हैं। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। इस मंदिर में आए बिना तंत्र साधकों की साधना को पूरा नहीं माना जाता है। दक्षिण काली मंदिर का इतिहास बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना विक्रम संवत 351 में हुई। इसका विवरण स्कंध पुराण में भी किया गया है। कलकत्ता के काली व शिवभक्त गुरु कमराज ने मां की मूर्ति को यहां स्थापित किया था। इसलिए इस धाम को कमराज पीठ, अमरा गुरु और दक्षिण काली के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, नील धारा क्षेत्र में ही माता कमराज के सपने में आईं और 108 नरमुंडों से मंदिर निर्माण की स्थापना की बात कही। जब कमराज ने पूछा कि इतने सारे नरमुंड वह कहां से लाएंगे, तो माता ने बताया कि इस जगह पर महामशान है। यहां आने वाले मुर्दों को जीवित कर उनकी इच्छा से 108 नरमुंडों की बलि दो। बताया जाता है कि 108 नरमुंडों के ऊपर ही मंदिर का निर्माण किया गया है। हालांकि, माता की मूर्ति कहां से आई, इसकी कोई जानकारी नहीं है। कहा जाता है कि माता की यह प्रतिमा लाखों सालों से यहां है, जोकि स्वयंभू है। यानी अपने आप प्रकट हुई है। इस मंदिर का सागर मंथन से भी कनेक्शन है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, सागर मंथन के दौरान जब कालकूट विष निकला तब महादेव ने संसार की रक्षा के लिए पूरा विष अपने कंठ में धारण कर लिया। जिसके बाद महादेव ने विष के असर को कम करने के लिए कजरीवन में बह रह गंगा जी में स्नान किया था। बताया जाता है कि भगवान के स्नान के बाद विष के कारण कजरीवन में गंगा जी की धारा नीली हो गई। गंगा की इसी धारा को ही नीलधारा कहा गया। इसी नीलधारा के तट पर विराजमान हैं मां काली। दक्षिण काली मंदिरका महत्व माना जाता है कि खुद काल भैरव दक्षिण काली मंदिर की रक्षा करते हैं। कहा जाता है कि मंदिर के आसपास काले व सफेद रंग के नाग-नागिन के जोड़े रहते हैं, जोकि सिर्फ सावन के दिनों में दिखाई देते हैं। शनिवार के दिन इस मंदिर में मां काली की अराधना करने से बड़े से बड़ा विघ्न दूर हो जाता है। ऐसी मान्‍यता है कि इस मंदिर में तंत्र साधक विशेष साधना करते हैं जिससे प्रसन्‍न होकर मां काली उन्‍हें अपना आशीर्वाद देती हैं। यहां नील धारा क्षेत्र में गंगा की धारा में स्‍नान करने पर सभी प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं। दक्षिण काली मंदिरकी वास्तुकला गंगा की धारा मंदिर के दक्षिण की ओर से बहती है, इसलिए मंदिर का नाम दक्षिण काली मंदिर पड़ा। नील पर्वत माला व गंगा की तलहटी में मां काली विराजमान है। मंदिर के आसपास का वातावरण काफी शांत है। इसी वजह से यहां आने वाले भक्तों का तनाव व परेशानी दूर हो जाती है। मंदिर के गर्भगृह में मां काली की मूर्ति विराजमान है। गर्भगृह के कोने में ही एक प्राचीन त्रिशूल लगा है, जोकि 2700 साल पुराना बताया जाता है। मंदिर के एक ओर नील पर्वत है तो दूसरी ओर मां गंगा की नील धारा। दक्षिण काली मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 10:00 PM सुबह की आरती का समय 06:00 AM – 07:00 AM शाम की आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद दक्षिण काली मंदिर में शनिवार को माता को पसंदीदा खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त माता को नारियल, गुलाब के फूल, काला जामुन, मीठा पान आदि अर्पित किया जाता है।

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Ganga Dussehra 2025 Date: गंगा दशहरा कब है? नोट कर लें डेट, पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त

Ganga Dussehra : हिंदू धर्म में गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान और दान-पुण्य के कार्यों का बड़ा महत्व है। यह दिन पापों से मुक्ति और मोक्ष के साथ पितरों को प्रसन्न करने के लिए बेहद खास माना जाता है। Ganga Dussehra 2025 Date :प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा मनाया जाता है। हिंदू धर्म में गंगा दशहरा के दिन गंगा नदी में स्नान और दान-पुण्य के कार्यों का बड़ा महत्व है। यह दिन पापों से मुक्ति और मोक्ष के साथ पितरों को प्रसन्न करने के लिए बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन ही मां गंगा का स्वर्गलोक से पृथ्वीलोक पर आगमन हुआ था। मां गंगा ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। मां गंगा को संपूर्ण विश्व में सबसे पवित्र नदी माना जाता है। यह भी पढ़ें: Ganga Dussehra 2025: गंगा दशहरा पर करें पितृ चालीसा का पाठ, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद हर साल ज्येष्ठ के महीने में गंगा दशहरा Ganga Dussehra के पर्व को बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इसी वजह से इस दिन गंगा दशहरा का त्योहार मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से साधक को सभी पापों से छुटकारा मिलता है और मां गंगा की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन स्नान करने के बाद दीपदान जरूर करना चाहिए और गरीब लोगों में दान करें। ऐसा माना जाता है कि गंगा दशहरा (Ganga Dussehra 2025 Kab Hai) के दिन दान करने से मां गंगा का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मां गंगा की कृपा से जीवन में सदैव अन्न और धन से भंडार भरे रहते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कब मनाया जाएगा गंगा दशहरा का पर्व। गंगा दशहरा 2025 डेट और  शुभ मुहूर्त 2025 डेट  (Ganga Dussehra 2025Date and Shubh Muhurat) Ganga Dussehra वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 04 जून को देर रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 06 जून को देर रात 02 बजकर 15 मिनट पर होगा। ऐसे में 05 जून को गंगा दशहरा का पर्व उत्साह के साथ मनाया जाएगा। Ganga Dussehra Puja Vidhi:गंगा दशहरा पूजा-विधि: गंगा दशहरा के दिन सूर्योदय से पहले उठें। संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करें या पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। स्नानादि के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें। पीतल के लोटे में जल भरकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। आप चाहे तो गंगा दशहरा के दिन व्रत भी रख सकते हैं। शिव-गौरी और गंगा माता की विधि-विधान से पूजा-आराधना करें। भगवान शिव, मां दुर्गा, गंगा माता समेत सभी देवी-देवताओं की आरती उतारें। पूजा समाप्त होने के बाद परिवार के सदस्यों के बीच प्रसाद वितरण करें। पूजा सामग्री की लिस्ट- पूजा के लिए गंगाजल, पान का पत्ता, आम का पत्ता, अक्षत, कुमकुम, दूर्वा, कुश, सुपारी, फल, फूल, नारियल, अनाज,सूत, कलश समेत सभी पूजन-सामग्री एकत्रित कर लें। सूर्योदय और सूर्यास्त का समय सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 23 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 07 बजकर 17 मिनट पर चंद्रोदय- दोपहर 02 बजकर 08 मिनट पर चंद्रास्त- 06 जून को देर रात 02 बजे शुभ समय (Today Shubh Muhurat) ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 02 मिनट से 04 बजकर 42 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 30 मिनट से 03 बजकर 22 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 15 मिनट से 07 बजकर 35 मिनट तक निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 40 मिनट तक करें इन चीजों का दान गंगा दशहरा के दिन दान करने का खास महत्व है। इस दिन कपडों, मौसमी फल, धन, भोजन, शरबत से भरा मिट्टी का कलश समेत आदि चीजों का दान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चीजों का दान करने से साधक को धन की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में शुभ परिणाम देखने को मिलते हैं।

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Sapne Me Chipkali Dekhne Ka Kya Matlab Hota Hai :सपने में छिपकली का दिखना शुभ है या अशुभ,जानें क्‍या है ऐसे सपनों का अर्थ

Sapne Me Chipkali Dekhne Ka Kya Matlab Hota Hai : सपनों की दुनिया में हर चीज का एक गहरा अर्थ होता है और छिपकली का सपना भी उसी में से एक है। अगर आपने सपने में छिपकली को देखा है तो इसका संबंध पैसों से भी है और इसे भविष्‍य को लेकर एक चेतावनी भी माना जाता है। सपने में छिपकली Chipkali को देखने का संबंध आपकी आर्थिक स्थिति से जुड़ा है। छिपकली का आना आपके जीवन में आने वाली समस्‍याओं की ओर इशारा करता है। यानी कि सपने में छिपकली का आना शुभ नहीं माना जाता है। तो आइए जानते हैं छिपकली से जुड़े ऐसे सपनों का क्‍या होता है अर्थ। Swapan Shastra Dream Interpretation Of Lizard Sapne Me Chipkali Dekhne Ka Kya Matlab Hota Hai Lizard Dream Meaning:क्या कहता है ऐसा सपना अगर आपने सपने में छिपकली को घर में घुसते हुए देखा है, तो यह संकेत अच्छा नहीं माना जाता। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में आपको किसी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। वहीं अगर आपने सपने में मरी हुई छिपकली Chipkali देखी है, तो डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इस सपने को शुभ माना जाता है। यह संकेत है कि आपकी कोई मुसीबत जल्द खत्म होने वाली है। Sapne Me Chipkali Dekhna: सपनों पर किसी व्‍यक्ति का कोई नियंत्रण नहीं होता, बस कुछ सपने आने वाले समय का आईना माने जाते हैं। ऐसा ही एक सपना छिपकली से जुड़ा होता है। स्‍वप्‍न शास्‍त्र के अनुसार, छिपकली का सपने में दिखना शुभ नहीं माना जाता है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में आपके जीवन में धन और करियर कारोबार से जुड़ी समस्‍याएं पैदा होने वाली हैं। आपका कोई काम बनते-बनते बिगड़ सकता है। सपने में छिपकली Chipkali देखना अच्‍छा नहीं माना जाता है और यह बताता है कि आपके जीवन में कुछ परेशानी आ सकती है, लेकिन, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने सपने में छिपकली को कैसे देखा है। तो आइए जानते हैं छिपकली से जुड़े अलग-अलग सपनों के अर्थ। छिपकली को गिरते देखना Watching a lizard fall सपने में छिपकली Chipkali को खुद के ऊपर गिरते देखकर कोई भी डर सकता है। यह सपना असल में शुभ नहीं माना जाता है। ये सपना इस बात की ओर संकेत करता है कि आपके जीवन में जल्द ही कोई मुसीबत आने वाली है। ऐसे में व्यक्ति को सावधान हो जाना चाहिए। सपने में छिपकली को कीट पतंगे मारते हुए देखना Seeing a lizard killing insects in a dream सपने में छिपकली Chipkali को कीट पतंगे मारकर उसका भोजन करते हुए देखना अच्छा नहीं माना जाता। स्वप्न शास्त्र कहता है कि ऐसा सपना आने पर आपको पैसों की दिक्कत हो सकती है। इसका मतलब है कि आपको आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए अगर आपको ऐसा सपना आए तो सावधान रहें और अपने खर्चों पर नियंत्रण करना शुरू कर दें। सपने में खुद को छिपकली को मारते हुए देखना:Seeing yourself killing a lizard in a dream स्वप्न शास्त्र कहता है कि सपने में छिपकली Chipkali को मारना अच्छा होता है, इसका मतलब है कि आपकी लाइफ में जो भी दिक्कतें चल रही हैं, वे अब खत्म होने वाली हैं। सपने में छिपकली Chipkali को मारने का मतलब है कि आपके जीवन में चल रही परेशानियों का जल्द ही अंत होने वाला है। आपको समझने की आवश्‍यकता है कि अब आपके जीवन में चल रही समस्‍याओं का अंत होने वाला है। अगर आपको ऐसा सपना आता है, तो समझ लीजिए कि आपकी मुश्किलें कम होने वाली हैं। सपने में छिपकली को घर में घुसते देखना:Seeing a lizard entering the house in a dream अगर आप सपने में छिपकली को घर में आते देखते हैं, तो यह एक चेतावनी है। इसका अर्थ है कि आपके या फिर आपके परिवार के ऊपर कोई बड़ी समस्‍या आने वाली है। ऐसे में आपको विशेष रूप से सावधान हो जाना चाहिए और घर व ऑफिस हर जगह अपने काम को बहुत ही सावधानी के साथ करना चाहिए। ऐसे सपने आकर आपको चेतावनी देते हैं। सपने में बहुत सारी छिपकलियां देखना:Seeing a lot of lizards in a dream सपने में बहुत सारी छिपकलियां एक साथ देखना बहुत ही अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आने वाले समय में बहुत सी समस्‍याएं आपके सामने एक साथ आ सकती हैं। आपको अपने कार्यक्षेत्र में वर्क प्रेशर और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है। इन समस्‍याओं की वजह से आप आने वाले समय में कई बीमारियों से घिर सकते हैं। ऐसा सपना आने पर आपको हर काम सावधानी के साथ करना चाहिए। सपने में छिपकली को भगाते हुए देखना:Seeing a lizard being chased away in a dream सपने में छिपकली से डरना या उसे भगाना शुभ माना जाता है। इसका मतलब है कि आप अपनी जिंदगी की परेशानियों को दूर करने में सफल होंगे। स्वप्न शास्त्र में ऐसा कहा गया है कि आप आपके जीवन में जिन समस्‍याओं को झेल रहे हैं उनका डटकर सामना करते हुए आप उनसे जल्‍द ही छुटकारा पाने वाले हैं। आपके जीवन में सुख बढ़ने के दिन आ गए हैं और आपकी समस्‍याओं का अंत होगा।

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Shani Dev Bhog:नाराज शनि को करना है प्रसन्न,तो लगाएं इन चीजों का भोग ,मिलेंगे कई शुभ परिणाम

Shani Dev Bhog: शनि देव को प्रसन्न कर उनकी कृपा पाने के कई उपाय ज्योतिष में बताए गए हैं, जिससे शुभ परिणाम मिलते हैं. शनि देव की पूजा में उनकी प्रिय चीजों का भोग लगाने से भी भगवान शनि प्रसन्न होते हैं. Shani Dev Bhog: हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं की पूजा के कुछ विशेष नियम होते हैं. विधि और नियमपूर्वक पूजा करने से ही देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और पूजा-पाठ का शुभ फल प्राप्त होता है. पूजा-पाठ से जुड़े कई नियमों में एक है ‘भोग’. पूजा के दौरान भगवान को उनकी प्रिय चीजों का भोग जरूर लगाना चाहिए. पूजा में भोग लगाने को जरूरी प्रकिया माना जाता है. साथ ही भोग लगाते समय नियमों का पालन भी करना चाहिए. बात करें शनि देव की तो, शनि देव को प्रसन्न करने के भी कई उपाय बताए गए हैं. माना जाता है कि शनिवार के दिन भगवान शनि की पूजा करने और उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और शनि के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं. आइये जानते हैं शनि देव की पूजा में किन चीजों का भोग लगाना चाहिए. शनि देव के प्रिय भोग (Shani Dev ke Bhog) शनि देव को कुछ विशेष चीजों का भोग लगाया जाता है. शनि देव Shani Dev Bhog की पूजा करते समय भोग में आप गुड़, काली उड़द दाल की खिचड़ी, काले तिल से बनी चीजें, मीठी पुड़ी, गुलाब जामुन आदि चीजों का भोग लगा सकते हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रहे कि भोग शुद्ध और सात्विक हो. इन चीजों का भोग लगाने से शनि देव प्रसन्न होते हैं. साथ ही कुंडली से शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा का प्रभाव भी कम होता है. इन बातों का रखें ध्यान (Shani Dev Puja Niyam) न खरीदें ये चीजें शनिवार के दिन सरसों का तेल खरीदने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तेल खरीदने से इंसान को जीवन में कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा लोहे का सामान खरीदने से भी बचें। न करें ये कामशनिवार का दिन शनिदेव का प्रिय होता है। इस दिन कुछ बातों का अवश्य ध्यान रखें। Shani Dev Bhog शनिवार को बाल काटना, नाखून काटना, बाल धोना भी वर्जित है।इन मंत्रों का करें जापशनि गायत्री मंत्रओम भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्शनि आह्वान मंत्रनीलाम्बरः शूलधरः किरीटी गृध्रस्थित स्त्रस्करो धनुष्टमान् |चतुर्भुजः सूर्य सुतः प्रशान्तः सदास्तु मह्यां वरदोल्पगामी || शनि देव को भोग लगाने के मंत्र (Shani Dev Bhog Mantra) Shani Dev Bhog शनि देव को भोग लगाने के बाद बाद काली तुलसी की माला से ऊँ शं शनैश्चराय नम: मंत्र का 108 बार जाप करें. इसके बाद तिल या सरसों के तेल का दीप जलाएं और शनि देव की आरती करें- शनि देव आरती (Shani Dev Aarti in Hindi) जय-जय श्रीशनिदेव भक्तन हितकारी।सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ।। जय-जय ।।श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ।। जय-जय ।।क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी ।मुक्तन की माला गले शोभित बलिहार ।। जय-जय ।।मोदक मिष्ठान पान चढ़त है सुपारी ।लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ।। जय-जय ।।देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी ।विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ।। जय-जय ।।

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Mahamrityunjay Stotra:महामृत्युंजय स्तोत्र

Mahamrityunjay Stotra महामृत्युंजय स्तोत्र: ऐसा माना जाता है कि महामृत्युंजय स्तोत्र आपको गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकता है। वेदों में सबसे पुराने स्तोत्रों में से एक के रूप में प्रतिष्ठित, महामृत्युंजय जाप, ऋग्वेद का एक श्लोक है, और भगवान शिव के रुद्र अवतार को संबोधित करता है। यह आपके जीवन को लम्बा करने में भी मदद करता है। Mahamrityunjay Stotra जब इस मंत्र का नियमित रूप से सच्ची श्रद्धा के साथ जाप किया जाता है, तो यह पारिवारिक कलह, संपत्ति के बंटवारे और वैवाहिक तनाव को दूर करने में मदद कर सकता है। महामृत्युंजय स्तोत्र में अपार उपचार शक्तियाँ हैं। इसे हिंदुओं का सबसे आध्यात्मिक प्रयास माना जाता है। शिव सत्य हैं और वे पारलौकिक भगवान हैं। शिव के अनुयायी मानते हैं कि वे स्वयंभू हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना आसान है और वे अक्सर अपने भक्तों को वरदान देते हैं। चाहे वह धन, वित्त, स्वास्थ्य या खुशी से संबंधित हो, वे आपकी सभी इच्छाओं को पूरा करेंगे और आपको आपके कष्टों से मुक्ति दिलाएंगे। शिव पुराण में इसके उल्लेख के पीछे दो संस्करण हैं। सबसे पहले इस Mahamrityunjay Stotra महामृत्युंजय स्तोत्र के बारे में जाना जाता है, जिसे केवल ऋषि मार्कंडेय जानते थे, जिन्हें भगवान शिव ने स्वयं इस मंत्र का वरदान दिया था। अब सवाल यह उठता है कि शिव की पूजा कैसे करें? सतयुग में मूर्ति पूजा लाभकारी थी, लेकिन कलयुग में केवल मूर्ति के सामने प्रार्थना करना पर्याप्त नहीं है। यहां तक ​​कि भविष्य पुराणों में भी सुख और मन की शांति के लिए मंत्र जाप के महत्व के बारे में बताया गया है। इसी तरह, शिव के मंत्र- महामृत्युंजय स्तोत्र का प्रतिदिन जाप करने से आपको अच्छा स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और लंबी आयु प्राप्त होगी। यह सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है और विपत्तियों से बचाता है। Mahamrityunjay Stotra Ke Labh:महामृत्युंजय स्तोत्र के लाभ: यदि आपकी कुंडली में मास, गोचर, दशा, अंतर्दशा या किसी अन्य प्रकार की समस्या है, तो महामृत्युंजय स्तोत्र आपको इससे छुटकारा दिलाने में मदद करेगा। यदि आप किसी रोग या व्याधि से पीड़ित हैं, तो यह मंत्र आपकी मदद करेगा। यह जीवन को लम्बा करने में भी मदद करता है और यदि आप इस मंत्र का पूरी ईमानदारी और विश्वास के साथ जाप करते हैं, तो यह असामयिक मृत्यु को रोक सकता है या मृत्यु को एक निश्चित अवधि के लिए टाल सकता है। महामृत्युंजय स्तोत्र का जाप पारिवारिक कलह, संपत्ति के बंटवारे और महामारी के कारण लोगों की मृत्यु की स्थिति में भी मदद करता है। यदि आप किसी आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं या व्यापार में घाटा उठा रहे हैं, तो महामृत्युंजय स्तोत्र का जाप आपको लाभ पहुँचाएगा। Mahamrityunjay Stotra महामृत्युंजय स्तोत्र में उपचारात्मक शक्तियाँ हैं; ऐसा माना जाता है कि Mahamrityunjay Stotra महामृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करने से दिव्य कंपन पैदा होते हैं जो उपचार करते हैं और मृत्यु से जुड़े भय को दूर करने में मदद करते हैं, जिससे आप मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। इसलिए, इसे मोक्ष मंत्र भी कहा जाता है। किसे करना चाहिए यह स्तोत्र Kise Karna Chahiye Es Stotra जिन व्यक्तियों को असाध्य रोग या पुरानी बीमारियाँ हैं, लगातार खराब स्वास्थ्य है, उन्हें वैदिक नियम के अनुसार Mahamrityunjay Stotra महामृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। महामृत्युंजय स्तोत्र हिंदी पाठ:Mahamrityunjay Stotra in Hindi ॐ अस्य श्री सदाशिवस्तोत्र मन्त्रस्य मार्कंडेय ऋषिः अनुष्टुप्छन्दः श्री साम्ब सदाशिवो देवता गौरी शक्ति: मम सर्वारिष्ट निवृत्ति पूर्वक शरीरारोग्य सिद्धयर्थे मृत्युंज्यप्रीत्यर्थे च पाठे विनियोग: ॥ ॐ रुद्रं पशुपतिं स्थाणुं नीलकण्ठमुमापतिम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ नीलकण्ठं विरुपाक्षं निर्मलं निर्भयं प्रभुम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ कालकण्ठं कालमूर्तिं कालज्ञं कालनाशनम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ वामदेवं महादेवं शंकरं शूलपाणिनम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ देव देवं जगन्नाथं देवेशं वृषभध्वजम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ गंगाधरं महादेवं लोकनाथं जगद्गुरुम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ भस्म धूलित सर्वांगं नागाभरण भूषितम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ आनन्दं परमानन्दं कैवल्य पद दायकम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ स्वर्गापवर्गदातारं सृष्टि स्थित्यंत कारणम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ प्रलय स्थिति कर्तारमादि कर्तारमीश्वरम् ।नमामि शिरसा देवं किन्नो मृत्यु: करिष्यति ॥ मार्कण्डेय कृतंस्तोत्रं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।तस्य मृत्युभयं नास्ति सत्यं सत्यं वदाम्यहम् ॥ सत्यं सत्यं पुन: सत्यं सत्यमेतदि होच्यते ।प्रथमं तु महादेवं द्वितीयं तु महेश्वरम ॥ तृतीयं शंकरं देवं चतुर्थं वृषभध्वजम् ।पंचमं शूलपाणिंच षष्ठं कामाग्निनाशनम् ॥ सप्तमं देवदेवेशं श्रीकण्ठं च तथाष्टमम् ।नवममीश्वरं चैव दशमं पार्वतीश्वरम् ॥ रुद्रं एकादशं चैव द्वादशं शिवमेव च ।एतद् द्वादश नामानि त्रिसन्ध्यं य: पठेन्नरः ॥ ब्रह्मघ्नश्च कृतघ्नश्च भ्रूणहा गुरुतल्पग: ।सुरापानं कृतघन्श्च आततायी च मुच्यते ॥ बालस्य घातकश्चैव स्तौति च वृषभ ध्वजम् ।मुच्यते सर्व पापेभ्यो शिवलोकं च गच्छति । ॥ इति महामृत्युंजय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Mahaganpati Stotra:महागणपति स्तोत्र

Mahaganpati Stotra महागणपति स्तोत्र: भगवान महागणपति को सभी देवी-देवताओं में सबसे शक्तिशाली माना जाता है। उन्हें कई उपाधियाँ और विशेषण दिए गए हैं। इन्हें आरंभ के देवता और बाधाओं को दूर करने वाले के रूप में भी जाना जाता है। कई धार्मिक और धर्मनिरपेक्ष अवसरों पर उनकी पूजा की जाती है, खासकर किसी उद्यम की शुरुआत में जैसे कि वाहन खरीदना या कोई उद्यम शुरू करना। उन्हें चार भुजाओं और हाथी के सिर वाले एक घड़े के रूप में दर्शाया गया है, जो एक चूहे पर सवार हैं। महागणपति स्तोत्र Mahaganpati Stotra भगवान महागणपति की पूजा करने का एक बहुत ही शक्तिशाली तरीका है, भगवान महागणपति की पूजा आपकी सभी समस्याओं को हल करने का एक बहुत अच्छा उपाय है। महागणपति स्तोत्र सभी के लिए बहुत मददगार है और आप महागणपति स्तोत्र की मदद से अपनी सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं और इस उपाय की मदद से आप अपने लिए सभी खुशियाँ पा सकते हैं। यह महागणपति स्तोत्र सभी के लिए बेहद फायदेमंद है और आप इस उपाय की मदद से अपनी सभी समस्याओं को हल कर सकते हैं। Mahaganpati Stotra:महागणपति स्तोत्र के लाभ: Mahaganpati Stotra:भगवान महागणपति को ब्रह्मा, विष्णु और शिव से जुड़ा माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि अन्य सभी देवता भगवान महागणपति से ही प्रेरित हुए हैं। भगवान महागणपति की कृपा से व्यक्ति का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनता है। ऐसा व्यक्ति सभी कष्टों पर विजय पाने में सक्षम होता है। Mahaganpati Stotra भगवान महागणपति के पास अपार ज्ञान है और वे सभी कष्टों को दूर करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यता के अनुसार, किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए भगवान महागणपति की पूजा की जाती है। शास्त्रों में भगवान महागणपति की आराधना करने के कई तरीके बताए गए हैं। महागणपति स्तोत्र Mahaganpati Stotra का उपयोग नारद पुराण में किया जाता है और यह भगवान महागणपति के सबसे प्रभावशाली महागणपति स्तोत्रों में से एक है। जैसा कि मैंने पहले ही बताया कि यह सभी प्रकार की समस्याओं को दूर करता है। प्रतिदिन महागणपति स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्त हो जाता है और सभी दुखों का नाश होता है। भगवान महागणपति के भिन्न-भिन्न नामों का उच्चारण करना चाहिए, जैसे वक्रतुंड, एकदंत, कृष्ण पिंगाक्ष, गजवक्र, लंबोदर, चतु विकट, विघ्न हर्ता मंगल कर्ता, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति आदि। इन बारह नामों का पूजन दिन के प्रत्येक तीन काल में करना चाहिए। इससे मनुष्य को हर प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है, सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है। यह बहुत ही शक्तिशाली उपाय है। Mahaganpati Stotra kisko karna chahiye:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ जो व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है, उसे बेहतर परिणाम के लिए महागणपति स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए। महागणपति स्तोत्र हिंदी पाठ:Mahaganpati Stotra in Hindi योगं योगविदां विधूतविविधव्यासंगशुद्धा शयप्रादुर्भूतसुधारसप्रस्रमरध्यानास्पदाध्यासिनाम् ।आनन्दप्लवमानबोधमधुरामोदच्छटामेदुरं तं भूमानमुपास्महे परिणतं दन्तावलास्यात्मना ।। 1 ।। तारश्रीपरशक्तिकामवसुधारुपानुगं यं विदुस्तस्मै स्यात्प्रणतिर्गुणाधिपतये यो रागिणाऽभ्यथ्र्यते ।आमन्त्र्य प्रथमं वरेति वरदेत्यार्तेन सर्वं जनं स्वामिन्मे वशमानयेति सततं स्वाहादिभि: पूजित: ।। 2 ।। कल्लोलाञ्चलचुम्बिताम्बुदतताविक्षुद्रवाम्भो निधौ द्वीपे रत्नमये सुरद्रुमवनामोदैकमेदस्विनि ।मूले कल्पतरोर्महापणिमये पीठेऽक्षराम्भोरुहे षट्कोणाकलित-त्रिकोणरचनासत्कीर्णकेऽमुं भजे ।। 3 ।। चक्रप्रासरसालकार्मुकगदासद्विजपूरद्विज ब्रीहाग्रोत्पलपाशपंकजकरं शुंडाग्रजाग्रद्घटम ।आश्लिष्टं प्रियया सरोजकरया रत्नस्फुरद्भूषया माणिक्यप्रतिमं महागणपतिं विश्र्वेशमाशास्महे ।। 4 ।। दानाम्भ: परिमेदुरप्रस्रमरव्यालम्बिरोलम्बभ्रत्सिन्दूरारुणगंडमण्डलयुगव्याजात्प्रशस्तिद्वयम् ।त्रैलोक्येष्टविधानवर्णसुभंग य: पद्मरागोपमं धत्ते स श्रियमातनोतु सततं देवो गणानां पति: ।। 5 ।। भ्राम्यन्मन्दरघूर्णनापरवशक्षीराब्धिवीचिच्छटासच्छायाश्र्चलचामरव्यतिकरश्रीगर्वसवंकषा: ।दिक्कांताघनसारचन्दनरसासाराश्रयन्तां मन: स्वच्छन्दप्रसरप्रलिप्तवियतो हेरम्बदन्तत्विष: ।। 6 ।। मुक्ताजालकरम्बितप्रविकसन्माणिक्यपुंजच्छटाकांता: कम्बुकदम्बचुम्बितवनाभोगप्रवालोपमा: ।ज्योत्स्नापूरतरंगमन्थरतरत्सन्ध्यावयवश्रिचरं हेरम्बस्य जयन्ति दन्तकिरणाकीर्णा: शरीरत्विष: ।। 7 ।। शुंडाग्राकलितेन हेमकमलशेनावर्जितेन क्षरन्नानारत्नचयेन साधकजनान्संभावयन्कोटिश: ।दानामोदविनोदलुब्धमधुपप्रोत्सारणाविर्भवत्कर्णान्दोलनचखेलनो विजयते देवो गणग्रामणी: ।। 8 ।। हेरम्बं प्रणमामि यस्य पुरत: शाण्डिल्यमूले श्रिया बिभ्रत्याम्बुरुहे समं मधुरिपुस्ते शंखचक्रे वहन् ।न्यग्रोधस्य तले सहाद्रिसुतया शंभुस्तथा दक्षिणे विभ्राण: परशुं त्रिशूलमितया देव्या धरण्या सह ।। 9 ।। पश्र्चात्पिप्पलमाश्रितो रतिपतिर्देवस्य रत्योत्पले बिभ्रत्या सममैक्षवं धनूरिषून्पौष्पान्वहन्पंच च ।वामे चक्रगदाधर: स भगवान्क्रोड: प्रियंगोस्तले हस्तोद्च्छुकशालि-मंजरिकाया देव्या धरण्या सह ।। 10 ।। षट्कोणाश्रिषु षट्सु पंकजमुखा: पाशांकुशाभयवरान्बिभ्रणा: प्रमदासखा: पृथुमहाशोणाश्मपुंजत्विष: ।आमोद: पुरत: प्रमोदसुमुखौ तं चाभितो दुर्मुख: पश्र्चात्पार्श्र्वगतोऽस्य विघ्न इति यो यो विघ्नकर्तेति च ।। 11 ।। आमोदादिगणेश्वरप्रियतमास्तत्रैव नित्यं स्थिता: कांताश्लेषरसज्ञमन्थरदृश: नित्यं स्थिता: कांताश्लेषरसज्ञमन्थरदृश: सिद्धि: समृद्धिस्तत: ।कान्तिर्या मदनावतीत्यपि तथा कल्पेषु या गीयते साऽन्या यापि मदद्रवा तदपरा द्राविण्यभू: पूजिता: ।। 12 ।। आश्लिष्टा वसुधेत्यथो वसुमती ताभ्यां सितालोहितौ वर्षन्तौ वसुपार्श्र्वयोर्विलसतस्तौ शंखपद्मौ निधी ।अंगान्यन्वथ मातरश्च परित: शुक्रादयोऽब्जाश्रयास्तद्वाहमो कुलिशादय: परिपतत्कालानल-ज्योतिष: ।। 13 ।। इत्थं विष्णुशिवादितत्त्वतनवे श्रीवक्रतुंडाय हुंकाराक्षिप्तसमस्तदैत्यपृतनाव्राताय दीप्तत्विषे ।आनन्दैकरसावबोधलहरीविध्वस्तसर्वोर्मये सर्वत्र प्रथमानमुग्धमहसे तस्मै परस्मै नम: ।। 14 ।। सेवाहेवाकिदेवासुरनरनिकरस्फारकीटोरकोटीकोटिव्याटीकमानद्युमणिसममणिश्रेणिभावेणिकानाम ।राजन्नीराजनश्रीमुखचरणखद्योतविद्योतमान: श्रेय: स्थेय: स देयान्मम विमलदृशो बन्धुरं सिन्धुरास्य: ।। 15 ।। एतेन प्रकटरहस्यमन्त्रमालागर्भेण स्फुटतरसंविदा स्तवेन ।य: स्तौति प्रचुरतरं महागणेशं तस्येयं भवति वशंवदा त्रिलोकी ।। 16 ।। ।। इति महागणपति स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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If You See These 8 Things In The Dreams Will Be Happy Life:सपनों में दिखाई देने वाली ये आठ घटनाएं मानी जाती है शुभ

If You See These 8 Things In The Dreams Will Be Happy Life: हम सभी जीवन में कई तरह के सपने देखते हैं और उनका मतलब क्या है, यह जानने की हमारे अंदर उत्सुकता रहती है। स्वप्नशास्त्र के अनुसार, हर सपना हमारे जीवन में होने वाली घटनाओं का संकेत देता है। अगर इन सपनों का थोड़ा सा विश्लेषण कर लें, तो हम आने वाली चुनौतियों का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। आइए आपसे ऐसे ही कुछ अच्छे-बुरे सपनों के बारे में जानकारी देते हैं जिन्हें देखकर लोग उलझन में हैं जबकि ये सपने बड़े ही शुभ होते हैं। If You See These 8 Things In The Dreams Will Be Happy Life समुद्र का पानी होता अशुभ संकेत: sea ​​water is a bad sign The Dreams Will Be Happy Life:अगर आप सपने में समुद्र का पानी देखते हैं तो ये अशुभ माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने देखने के बाद मनुष्य को वाहन सावधानी पूर्वक चलाना चाहिए और ऊंचाई वाली जगहों पर सावधानी से जाना चाहिए। ये सपना भविष्य में सावधानी बरतने की तरफ इशारा करता है। सपने में गुलाब का फूल देखना:seeing roses in dream स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आप अपने सपने में गुलाब का फूल देखते हैं तो ये आपके लिए शुभ माना जाता है। The Dreams Will Be Happy Life ये आपके जीवन में आने वाली सकारात्मकता का संकेत है। ऐसे सपनों का ये अर्थ भी होता है कि जल्द ही आपके मन की कोई इच्छा पूरी होने वाली है। सपने में डूब जाना:drown in dream स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आप ऐसा सपना देखते हैं जिसमें आप गहरे पानी में डूब रहे हैं। ये इस बात का संकेत है कि आप किसी डर या दुख में हैं। सपने में अपने आपको उस व्यक्ति को उन घटनाओं के बारे में सोचना बंद करना चाहिए जो गुजर चुकी हैं। The Dreams Will Be Happy Life आपको किसी भी तरह की चिंता नहीं करनी चाहिए और अपने मन को शांत करने का प्रयास करना चाहिए। खुद को दरिद्र रूप में देखना:see yourself poor आप सपने में खुद को गरीब दरिद्र देखते हैं तो आपके लिए ये स्वप्न अच्छा है। The Dreams Will Be Happy Life आपको इससे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे स्वप्न का मतलब आपके धन में वृद्धि होना है। ये अटके हुए धन के वापस मिलने का भी संकेत है। सपने में तोता देखना:seeing a parrot in a dream अगर आपको सपने में तोता नजर आता है, तो इसका मतलब है कि आपको कोई अच्छा समाचार मिलने वाला है। आपके जीवन में सुख की शुरूआत होने वाली है। तोता हमेशा से सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। सपने में पहाड़ पर चढ़ना:climbing a mountain in a dream सपनों में पहाड़ चढ़ने का मतलब आप जीवन में उन्नति करने वाले हैं। The Dreams Will Be Happy Life इस तरह के सपने हमेशा सफलता के शिखर पर जाने की ओर इशारा करते हैं। सपने में फलों का पेड़ दिखाई देना:Seeing a fruit tree in a dream अगर आप सपनों में फलों से लदा हुआ वृक्ष देखते हैं तो ये आपके जीवन में आने वाली ढेर सारी खुशियों की ओर इशारा करता है। फल-फूल खुशी का प्रतीक माने गए हैं। फूलों से लदा पेड़ खुशियों के आगमन का ही संकेत माना जाता है। मृत्यु देखना:see death The Dreams Will Be Happy Life अगर आप सपनों में अपने किसी भी परिजन की मृत्यु होते हुए देखते हैं तो समझिए उनकी आयु में वृद्धि हो गई है। हिन्दू शास्त्रों में इस तरह के सपनों को गलत नहीं माना जाता। शिव पार्वती को देखना:seeing shiv parvati भगवान शिव-पार्वती जिन्हें सपनों में एक साथ दिखाई देते हैं। उनके लिए शुभ माना जाता है। The Dreams Will Be Happy Life खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए जिनका विवाह नहीं हो रहा है। सपने में शिव-पार्वती के दर्शन होना जल्दी विवाह होने का संकेत भवन का निर्माण देखना:watch the construction of a building सपनों में भवन का निर्माण दिखाई देने का मलतब है आपके जीवन में उन्नति होने वाली है। आपको धन की प्राप्ति होने वाली है। झाड़ू का दिखना:appearance of broom हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सपने में झाड़ू का दिखाई देने शुभ संकेत होता है। The Dreams Will Be Happy Life झाड़ू को लक्षमी का प्रतीक माना जाता है। इसका सीधा संकेत है आपको धन लाभ होने वाला है। सपने में नेवले का दिखना:Seeing mongoose in dream सपनों में नेवले का दिखना शुभ माना जाता है। धर्म शास्त्रों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार नेवला नजर आने का मतलब है हमारे आर्थिक पक्ष का मजबूत होना। ज्योतिष में सपने क्या हैं:what are dreams in astrology “हमारे सपने हमें हमारे अचेतन में रहने वाले गहन ज्ञान में टैप करने में मदद करते हैं जो हमें और अंतर्दृष्टि प्रदान कर सकते हैं जो हमें हमारे ज्योतिष चार्ट के माध्यम से अपने बारे में जो कुछ भी सीख सकते हैं, उस पर विचार करने की अनुमति देते हैं।” ज्योतिष और सपने दोनों ही वास्तव में हमारी आत्म-जागरूकता और मानस में टैप करने के तरीके हैं हमें अजीबोगरीब सपने क्यों आते रहते हैं:Why do we keep having strange dreams The Dreams Will Be Happy Life यदि आप अजीब सपने देख रहे हैं, तो यह तनाव, चिंता या नींद की कमी के कारण हो सकता है। अजीब सपने देखना बंद करने के लिए, तनाव के स्तर को प्रबंधित करने और नींद की दिनचर्या से चिपके रहने का प्रयास करें। यदि आप एक अजीब सपने से जागते हैं, तो गहरी सांस लेने या आराम करने वाली गतिविधि का उपयोग करके सो जाएं। स्वप्नदोष के लिए कौन सा ग्रह जिम्मेदार है:Which planet is responsible for nightmares राहु सपनों का अधिपति ग्रह है और कुंडली में नौवां भाव सपनों का स्थान है। स्पष्ट रूप से, नौवें घर में ग्रह और राहु के साथ उनका संबंध यह निर्धारित करता है कि आपको किस प्रकार के सपने देखने को मिलेंगे। यदि नौवें भाव के ग्रह राहु के शत्रु हैं और विशेष रूप से कमजोर हैं, तो आपको भयानक बुरे सपने आएंगे। सबसे दुर्लभ सपना क्या है:what is the rarest dream The Dreams Will Be Happy Life:अधिकांश विशेषज्ञों का

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why celebrated mahesh navami:महेश नवमी क्यों मनाई जाती है, पढ़ें कथा

महेश नवमी क्या है? (What is  Mahesh Navami) why celebrated mahesh navami:महेश नवमी (Mahesh Navami), ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर मनाया जाने वाला पर्व, महेश्वरी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है। यह भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा का दिन है और समुदाय की उत्पत्ति को चिन्हित करता है। इस दिन विशेष प्रार्थनाएं और अनुष्ठान होते हैं, और महेश्वरी समुदाय के सदस्य “बाबा की झांकी” भी करते हैं। महेश नवमी माहेश्वरी समाज का प्रमुख पर्व है। ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को यह पर्व मनाया जाता है। माहेश्वरी समाज की उत्पति भगवान शिव के वरदान से इसी दिन हुई। महेश नवमी के दिन देवाधिदेव शिव व जगतजननी मां पार्वती की आराधना की जाती है। यहां पढ़ें महेश नवमी की कथा- कथा : एक खडगलसेन राजा थे। प्रजा राजा से प्रसन्न थी। राजा व प्रजा धर्म के कार्यों में संलग्न थे, पर राजा को कोई संतान नहीं होने के कारण राजा दु:खी रहते थे। राजा ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से कामेष्टि यज्ञ करवाया। why celebrated mahesh navami ऋषियों-मुनियों ने राजा को वीर व पराक्रमी पुत्र होने का आशीर्वाद दिया, लेकिन साथ में यह भी कहा 20 वर्ष तक उसे उत्तर दिशा में जाने से रोकना। नौवें माह प्रभु कृपा से पुत्र उत्पन्न हुआ। राजा ने धूमधाम से नामकरण संस्कार करवाया और उस पुत्र का नाम सुजान कंवर रखा। वह वीर, तेजस्वी व समस्त विद्याओं में शीघ्र ही निपुण हो गया। why celebrated mahesh navami एक दिन एक जैन मुनि उस गांव में आए। उनके धर्मोपदेश से कुंवर सुजान बहुत प्रभावित हुए। why celebrated mahesh navami उन्होंने जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण कर ली और प्रवास के माध्यम से जैन धर्म का प्रचार-प्रसार करने लगे। धीरे-धीरे लोगों की जैन धर्म में आस्था बढ़ने लगी। स्थान-स्थान पर जैन मंदिरों का निर्माण होने लगा। एक दिन राजकुमार शिकार खेलने वन में गए और अचानक ही राजकुमार उत्तर दिशा की ओर जाने लगे। why celebrated mahesh navami सैनिकों के मना करने पर भी वे नहीं माने। उत्तर दिशा में सूर्य कुंड के पास ऋषि यज्ञ कर रहे थे। वेद ध्वनि से वातावरण गुंजित हो रहा था। यह देख राजकुमार क्रोधित हुए और बोले- ‘मुझे अंधरे में रखकर उत्तर दिशा में नहीं आने दिया’ और उन्होंने सभी सैनिकों को भेजकर यज्ञ में विघ्न उत्पन्न किया। इस कारण ऋषियों ने क्रोधित होकर उनको श्राप दिया और वे सब पत्थरवत हो गए। राजा ने यह सुनते ही प्राण त्याग दिए। उनकी रानियां सती हो गईं। why celebrated mahesh navami राजकुमार सुजान की पत्नी चन्द्रावती सभी सैनिकों की पत्नियों को लेकर ऋषियों के पास गईं और क्षमा-याचना करने लगीं। ऋषियों ने कहा कि हमारा श्राप विफल नहीं हो सकता, पर भगवान भोलेनाथ व मां पार्वती की आराधना करो। why celebrated mahesh navami सभी ने सच्चे मन से भगवान की प्रार्थना की और भगवान महेश व मां पार्वती ने अखंड सौभाग्यवती व पुत्रवती होने का आशीर्वाद दिया। चन्द्रावती ने सारा वृत्तांत बताया और सबने मिलकर 72 सैनिकों को जीवित करने की प्रार्थना की। महेश भगवान पत्नियों की पूजा से प्रसन्न हुए और सबको जीवनदान दिया। why celebrated mahesh navami भगवान शंकर की आज्ञा से ही इस समाज के पूर्वजों ने क्षत्रिय कर्म छोड़कर वैश्य धर्म को अपनाया। why celebrated mahesh navami समस्त माहेश्वरी समाज इस दिन श्रद्धा व भक्ति से भगवान शिव व मां पार्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। इसलिए आज भी ‘माहेश्वरी समाज’ के नाम से इसे जाना जाता है।  महेश नवमी के फायदे (Mahesh Navami Benefits) 1.महेश नवमी (Mahesh Navami) हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।  2.इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 3.महेश नवमी के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, भांग और बेलपत्र चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और बीमारियों से मुक्ति मिलती है।  3.इस दिन 21 बेलपत्र पर ‘ॐ’ लिखकर चढ़ाने से इच्छित फल प्राप्त होता है।  4.महेश नवमी का व्रत करने से शिव-पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।  5.इस दिन दान-पुण्य करने से भी पुण्य फल मिलता है। महेश नवमी व्रत (Mahesh Navami Vrat) को मनाने के प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं | प्रातः स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। निकटतम शिव मंदिर जाकर भगवान शिव को दूध, फूल, बेल पत्र अर्पित करें और ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। व्रत के दौरान एक समय भोजन करें। भोजन में फलाहार या सात्विक आहार लें। प्याज, लहसुन, मांस, मदिरा आदि का सेवन न करें। दिन भर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें। शिव चालीसा, शिव पुराण आदि का पाठ करें। महेश नवमी की कथा सुनें। महेश नवमी की व्रत कथा सुनने से आपको भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होगी। सायंकाल शिव मंदिर जाकर महाआरती में शामिल हों। शिव जी की वंदना का गायन करें। रात्रि में जागरण करें। भगवान शिव के गुणों का स्मरण करते हुए भजन-कीर्तन करें। अगले दिन प्रातः स्नान के बाद व्रत का पारण करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान-दक्षिणा दें। महेश नवमी (Mahesh Navami) के दिन भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती (Goddess Parvati) की विधिवत पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत विशेष रूप से माहेश्वरी समाज के लिए महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का आविर्भाव हुआ था, इसलिए इसे महाशिवजयंती भी कहा जाता है।

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