गीता भवन:ऋषिकेश, उत्तराखंड, भारत

गीता भवन स्वर्गाश्रम जहाँ से दिखता है गंगा आरती का अद्भुत नज़ारा देवभूमि उत्तराखंड के ऋषिकेश में पावन गंगा नदी के किनारे स्थित है ‘गीता भवन स्वर्गाश्रम’। यह एक बहुत बड़ा परिसर है। यहाँ पर भक्तों को रखने के लिए निःशुल्क व्यवस्था की जाती है। गीता भवन में 1000 से भी ज्यादा कक्ष उपलब्ध है। गंगा नदी में स्नान करने और गंगा आरती में शामिल होने के लिए दूर- दूर से भक्त आते हैं और में रुकते है। यहाँ पर भक्तों के ध्यान और प्रवचन सुनने के लिए भी सुविधाएं दी जाती है। मंदिर का इतिहास गीता भवन की स्थापना आज़ादी से पूर्व सन 1944 में गंगा नदी के किनारे की गई थी। यह आश्रम यहाँ गीता प्रेस गोरखपुर की शाखा के रूप में कार्यरत है। गीता प्रेस द्वारा यहाँ पर पुस्तकों की भी सुविधा है। गीताभवन को ऋषिकेश आने वाले भक्तों को निशुल्क रहने,खाने ,ध्यान – साधना करने और प्रवचन के लिए अच्छी सुविधाएं मिल सके। इस उदेश्य से इस भवन की स्थापना की गई थी। मंदिर का महत्व गीताभवन में एक बार में 2000 से ज्यादा भक्तों को रहने की व्यवस्था है। यहाँ पर निशुल्क रहा जा सकता है। इस जगह पर वैसे तो साल भर ही भीड़ रहती है। परन्तु यहाँ गर्मियों के समय में ज्यादा सत्संग होते है जिस कारण भक्त ज्यादा संख्या में आते है। गीताभवन के ठीक सामने ही गंगा घाट है जिस कारण भक्त गंगा आरती का आनंद भी ले सकते है। आप परिसर में ध्यान लगा सकते हैं और संतों के प्रवचन भी सुन सकते हैं। गंगा घाट पर स्नान के लिए यहाँ पर समय को लेकर किसी भी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं है। भक्त अपने समयानुसार स्नान के लिए जा सकते है। यहाँ पर चलने वाले प्रवचनों को सुनने के लिए लोग दूर-दूर से आते है। और अपने साथ एक अत्याधमिक ऊर्जा लेकर ही जाते हैं। मंदिर की वास्तुकला गीता भवन ऋषिकेश के सबसे प्राचीन तीर्थ परिसरों में से एक है। इस भवन की दीवारों पर सुप्रसिद्ध महाकाव्य श्री गीताजी और रामायण की रचनाएं अंकित हैं। इसके अलावा परिसर में एक ध्यान कक्ष है। यहाँ पर भक्त प्रार्थना करने के लिए एकत्रित होते है। परिसर में मिठाइयां, शाकाहारी भोजन, खाने के सामान की भी दुखने है। जहाँ पर सस्ती कीमतों पर सामान मिलता है। इसके अलावा आयुर्वेदिक दवाएं भी यहाँ मिलती है। जो कि गंगा जल से बनाईं जाती है। परिसर में लक्ष्मी-नारायण मंदिर भी है। गीता भवन मंदिर का समय गीता भवन खुलने का समय 04:00 AM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद गीता भवन में लक्ष्मी नारायण का मंदिर है। इस मंदिर में फल, फूल ,मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है।

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माया देवी मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत

माया देवी मंदिर भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। माया देवी मंदिर:हरिद्वार का लोकप्रिय माया देवी मंदिर भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह मंदिर हिंदू देवी माया को समर्पित है। इस मंदिर को तीन शक्तिपीठों में शामिल होने का गौरव भी प्राप्त है। माना जाता है कि देवी सती का हृदय और नाभि इसी स्थान पर स्थापित हैं। आदि शक्ति का एक रूप मानी जाने वाली देवी माया के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में भक्तों भीड़ एकत्रित होती है। खासकर नवरात्र और कुंभ मेले के दौरान इस मंदिर में ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है। कई भक्तों का यह भी मानना है कि इस पवित्र स्थल पर प्रार्थना करने से व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त कर सकता है। लोगों का मानना है कि हरिद्वार की प्राथमिक देवी के रूप में मानी जाने वाली माया देवी का एक विशेष महत्त्व है। देवी माता की एक झलक देखे बिना कोई भी तीर्थ यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है। हरिद्वार को पहले ‘मायापुरी’ भी कहा जाता था। प्राचीन मंदिर होने के कारण इस मंदिर की संरचना भी हरिद्वार के तीन सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, जो अभी भी कायम है। इसके अलावा नारायण-शिला और भैरव मंदिर हैं। देवी माया के साथ, पवित्र मंदिर में देवी कामाख्या और देवी काली की मूर्तियाँ हैं – जिन्हें आदि पराशक्ति के विभिन्न रूप माना जाता है। माया देवी मंदिर का इतिहास 11वीं शताब्दी में माया देवी मंदिर का निर्माण किया गया था। क्योंकि हरिद्वार में 11वीं शताब्दी में यह मंदिर अस्तित्व में आया। माया देवी मंदिर धार्मिक महत्व के साथ साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। पवित्र गंगा के तट पर स्थित इस मंदिर द्वारा कई राजवंशों के उत्थान और पतन को देखा गया है। कई बार इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। इस प्राचीन मंदिर में पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और भक्ति की भावना को जीवित रखा है। वर्षो बाद भी यह मंदिर नारायण-शिला मंदिर और भैरव मंदिर के साथ अभी भी मजबूती से खड़ा है। माया देवी मंदिर का महत्व माया देवी मंदिर में दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से हरिद्वार आते है। इस मंदिर में पूजा अर्चना करने की विशेष मान्यता यह है कि यहां पर मांगी गई समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है। विशेषकर महिलाएं जो भी मनोकामना लेकर इस मंदिर में दर्शन को आती है। वह यहां से खाली नहीं जातीं। उनकी मनोकामना अवश्य ही पूरी होती है। माया देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से पहला शक्तिपीठ है, जो हरिद्वार शहर के मध्य में स्थित है। इस मंदिर की कहानी भगवान शिव और माता सती से सम्बंधित है। समस्त शक्तिपीठों की उत्पत्ति का केंद्र हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मायादेवी मंदिर है। माता सती ने यहीं बैठकर योगाग्नि से अपने शरीर का त्याग किया था। माया देवी मंदिर की वास्तुकला माया देवी मंदिर उत्तरी भारत की पारंपरिक वास्तुकला को दर्शाता है। इस मंदिर में पारंपरिक और आधुनिक शैलियों का एक अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है। मंदिर की संरचना साधारण होने के बावजूद भी मंदिर में प्लास्टर वाली मूर्तियां है जो विभिन्न मुद्राओं को चित्रित करती हैं। मुख्य गर्भगृह के अंदर, तीन मूर्तियाँ स्थापित हैं। इसके केंद्र में माया देवी, बाईं ओर देवी काली, और दाईं ओर देवी कामाख्या विराजित हैं। इसके अलावा, मंदिर में दो अन्य देवियाँ भी हैं, जिन्हें देवी शक्ति का रूप माना जाता है। चामुंडा की एक धातु की मूर्ति और शीतला देवी को समर्पित एक उप-मंदिर भी है। भक्त मंदिर परिसर के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। वह हर देवी देवताओं से आशीर्वाद लेते हैं। माया देवी मंदिर का समय मंदिर का सुबह का समय 06:30 AM – 12:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 03:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद माया देवी मंदिर में फल, नारियल, मिठाई, फूल और अगरबत्ती अर्पित की जाती है।

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Sawan Month 2025 start date and End date: कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना, जानें व्रत तिथि, पूजन विधि…

Sawan Month 2025 start date:भगवान शिव की अराधना का सबसे पवित्र महीना सावन हिंदू धर्म के लोगों के लिए बेहद खास होता है। इस दौरान भक्त सावन सोमवार व्रत रखते हैं। चलिए आपको बताते हैं 2025 में सावन महीना कब से शुरू हो रहा है। Sawan 2025 Date (सावन कब से शुरू है 2025): सावन के महीने को श्रावण मास के नाम से भी जानते हैं। इस महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। हिंदू पंचांग अनुसार ये साल का पांचवां महीना होता है। जो जुलाई-अगस्त में पड़ता है। इस दौरान सावन सोमवार व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। सावन के महीने में हर साल लाखों श्रद्धालु ज्योर्तिलिंग के दर्शन के लिए जाते हैं। इस महीने में भक्त कांवड़ यात्रा भी निकालते हैं। चलिए आपको बताते हैं इस साल यानी 2025 में सावन कब से लग रहा है। Sawan Puja Rituals: सावन का महीना पूरी तरह भगवान शिव को समर्पित होता है, जिसे शिवभक्त पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं। इस दौरान भक्त रोज़ाना भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, लेकिन सावन के सोमवार का विशेष महत्व होता है। इस दिन शिव भक्त उपवास रखते हैं और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि अर्पित कर जलाभिषेक करते हैं। माना जाता है कि सावन सोमवार का व्रत करने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर इच्छा पूरी करते हैं। Sawan Month 2025 start date:सनातन परंपरा के अनुसार, देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस अवधि में सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। यह समय ‘चातुर्मास’ कहलाता है, जो पूरी तरह धर्म, तप, व्रत और संयम का प्रतीक है। ऐसे में सावन का महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है। भगवान शिव की आराधना से जीवन की समस्याएं दूर होती हैं और सुख-शांति की प्राप्ति होती है। अब भक्तों को इंतज़ार है सावन के शुभारंभ की तारीख का, जब वे पूरे भक्ति भाव से भोलेनाथ की आराधना में जुट सकें। Sawan Month 2025 start date and End date:कब से शुरू हो रहा है सावन का महीना  Sawan Month 2025 start date वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन का महीना 11 जुलाई 2025 से शुरू होगा। इससे पहले 10 जुलाई को आषाढ़ पूर्णिमा है, जो 10 जुलाई की रात 1:36 बजे से शुरू होकर 11 जुलाई की रात 2:06 बजे तक रहेगी।  सनातन परंपरा में उदया तिथि को मान्यता दी जाती है, इसी कारण श्रावण मास की प्रतिपदा तिथि 11 जुलाई की रात 11:07 मिनट से आरम्भ होकर 12 जुलाई की रात 2:08 मिनट तक रहेगी। और इसीलिए 11 जुलाई से सावन माह की शुरुआत मानी जाएगी। सावन माह पर योग:Yoga on the month of Sawan Sawan Month 2025 start date इस बार सावन के पहले ही दिन एक विशेष योग बन रहा है, जिसे शिववास योग कहा जाता है। इस शुभ संयोग में भगवान शिव माता पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे। Sawan Month 2025 start date मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा और जलाभिषेक करने से साधक को सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। सावन के सोमवार व्रत की तिथियां :Dates of Monday fast of Sawan 14 जुलाई – पहला सोमवार व्रत21 जुलाई – दूसरा सोमवार व्रत28 जुलाई – तीसरा सोमवार व्रत04 अगस्त – चौथा और अंतिम सोमवार व्रतइसके बाद 09 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ यह पावन महीना समाप्त होगा। Sawan Month 2025 start date इसी दिन रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा।  पूजा विधि Puja vidhi सावन माह का धार्मिक लाभ : Religious benefits of Sawan month Sawan Month 2025 start date सावन माह हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और यह विशेष रूप से भगवान शिव की उपासना का समय होता है। इस माह में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र आदि चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और पापों का नाश होता है। सावन सोमवार का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दांपत्य जीवन सुखमय बनता है। इस समय ध्यान, जप, व्रत और दान करने से आत्मिक शुद्धि होती है और पूर्व जन्मों के पाप भी नष्ट होते हैं। यह माह व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक उत्थान के लिए अत्यंत लाभकारी होता है।

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Sapne Me Ghar Dekhna:सपने में मकान दिखाई देना शुभ होता है या अशुभ ? जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne me Ghar Dekhna:हर किसी का सपना होता है कि उसका एक घर हो, जहां वह परिवार के साथ अपनी दुनिया बसा सके। कभी कभी लोगों को घर खरीदते या बनते देखने के सपने भी आते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि सपने में घर खरीदना या बनते देखने का क्या संकेत होता है। स्वपन शास्त्र में इसके बारे में बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए जानते हैं सपने में घर या मकान बनता दिखाई देने के संकेत क्या हैं…. Dreams About Home:सपने जीवन का अभिन्न हिस्सा होते हैं और हर सपना आपके दैनिक जीवन की किसी ना किसी घटना या स्थान से संबंधित होते हैं। सपना देखना एक सामान्य क्रिया है लेकिन स्वपन शास्त्र में सपना महज एक संयोग नहीं है बल्कि जीवन में होने वाली घटनाओं के बारे में संकेत देते हैं। प्राचीन काल में राजा महाराजा अपने शासन काल में स्वपन विशेषज्ञ रखते थे, ताकि वह अपने सपने के रहस्यों के बारे में जान सकें। कई बार सपनों में लोग अपना खुद का घर बनते या खरीदते हुए देखते हैं, जिसमें वह अपने परिवार के साथ सुकून से रह सके। आज हम आपको ऐसे ही सपनों के अर्थ के बारे में बताने जा रहे हैं… Sapne Me Ghar Dekhna:सपने में मकान देखना स्वप्न शास्त्र अनुसार यदि सपने में आप मकान बनते हुए देखते हैं तो यह एक शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपको कोई मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं। साथ ही आपको आकस्मिक धनलाभ की प्राप्ति हो सकती है। वहीं अगर आप बेरोजगार हैं तो आपका रिश्ता पक्का हो सकता है। साथ ही आप जिस कष्ट में हैं, उससे आपको मुक्ति मिल सकती है। वहीं आप किसी यात्रा पर भी जा सकते हैं। नया मकान खरीदने का सपना देखना:dreaming of buying a new house Sapne Me Ghar Dekhna:यदि आप मकान या फ्लैट खरीदने का सपना देखते हैं तो यह बेहद शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपको नौकरी में मनचाही जगह ट्रांसफर हो सकता है। साथ ही अगर आप व्यापारी हैं, तो आपको कोरोबार में धनलाभ हो सकता है। वहीं आप व्यापार में नया निवेश भी कर सकते हैं। यह सपना सुख- समृद्धि में बढ़ोतरी का संकेत देता है। सपने में जमीन खरीदना:buying land in dream स्वप्न शास्त्र अनुसार यदि आप सपने में Sapne Me Ghar Dekhna जमीन खरीदते हैं तो यह एक शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आप भविष्य में खूब तरक्की करेंगे और समाज में एक नाम व पहचान बनाने में कामयाब होंगे। साथ ही इसके अलावा यह सपना आर्थिक रूप से मजबूत होने की ओर भी इशारा करता है। संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है। सपने में पैतृक घर देखना:Seeing ancestral house in dream अगर आपको सपनों में पैतृक घर या घर का कुछ हिस्सा दिखाई दिया है तो यह शुभ संकेत माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि आपकी आने वाली जिंदगी में कुछ अच्छा होने वाला है और परिवार के लोगों का आपको पूरा साथ मिलेगा। Sapne Me Ghar Dekhna साथ ही गृहस्थ जीवन से शुभ समाचार भी मिल सकता है। सपने में टूटा घर देखना:Seeing a broken house in a dream अगर आप सपनों में कोई टूटा हुआ घर या मकान देख रहे हैं तो यह अशुभ संकेत माना जाता है। इसका अर्थ होता है कि आपको अपनी सेहत का ध्यान रखना होगा और आप जिस क्षेत्र में काम कर रहे हैं, वहां आपको सतर्कता बरतनी होगी अन्यथा आपको धन हानि हो सकती है। सपने में दुकान खरीदना:buying a shop in dream यदि आप दुकान खरीदने का सपना देखते हैं, तो यह बेहद शुभ है। इसका मतलब है Sapne Me Ghar Dekhna कि आपको आने वाले दिनों में अच्छा धनलाभ हो सकता है। वहीं अगर आपका धन कहीं फंसा हुआ है तो वो मिल सकता है। साथ ही आपको सभी परेशानियों से मुक्ति मिलने वाली है और आपके अटके हुए काम भी बनने वाले हैं। आपको कोई शुभ सूचना भी मिल सकती है।

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Gayatri Jayanti 2025 Date: गायत्री जयंती कब है?रहेगा भद्रा का साया, सही डेट, मुहूर्त और पूजा की विधि, यहां जानें

Gayatri Jayanti 2025 Kab Hai: ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को माता गायत्री प्रकट हुई थी. ऐसे में इस तिथि पर गायत्री जयंती का पर्व मनाने का विधान है. इस दिन क्या योग बन रहे हैं, भद्रा का साया होगा या नहीं, शुभ मुहूर्ते क्या रहने वाला है, आइए जानें. Gayatri Jayanti 2025: भारतीय संस्कृति की जननी कही जाने वाली मां गायत्री का जन्मोत्सव ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है. इसे गायत्री जयंती भी कहते हैं. हिंदू धर्म में मां गायत्री को वेदमाता(Vedmata) कहा जाता है क्योंकि सभी वेदों (Veda) की उत्पत्ति इन्हीं से हुई है. आइए जानते हैं गायत्री जयंती 2025 में कब है ? नोट करें डेट, पूजा मुहूर्त और महत्व. गायत्री जयंती 2025 डेट (Gayatri Jayanti 2025 Date) वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 06 जून की देर रात 02 बजकर 15 मिनट पर शुरू हो रही है और तिथि का समापन 07 जून को सुबह 04 बजकर 47 मिनट पर हो रहा है. इस तरह उदयाति​थि में गायत्री जयंती  06 जून को मनाई जाएगी. Mata Gayatri Aarti:माता गायत्री आरती गायत्री जयंती 2024 मुहूर्त (Gayatri Jayanti 2024 Muhurat) गायत्री जयंती पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह के 04 बजकर 02 बजे से लेकर 04 बजकर 42 बजे तक होगा. गायत्री जयंती पर शुभ समय यानी अभिजीत मुहूर्त की शुरुआत सुबह के 11 बजकर 52 मिनट पर होगी.  गायत्री जयंती पर अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक बना रहेगा. Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा क्यों मनाई जाती है गायत्री जयंती ? (Why we celebrate Gayatri Jayanti) गायत्री संहिता में लिखा है ‘भासते सततं लोके गायत्री त्रिगुणात्मिका॥’यानी गायत्री माता सरस्वती, लक्ष्मी एवं काली का प्रतिनिधित्व करती हैं. मां गायत्री से आयु, प्राण, प्रजा, पशु, कीर्ति, धन एवं ब्रह्मवर्चस के सात प्रतिफल अथर्ववेद में बताए गए हैं. इनकी पूजा करने पर व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख और सौभाग्य की प्राप्ति होती है. लंबी आयु का वरदान मिलता है. गायत्री जयंती महत्व (Gayatri Jayanti Significance) शास्त्रों के अनुसार इस पृथ्वी पर प्रत्येक जीव के भीतर मां गायत्री प्राण-शक्ति के रूप में विद्यमान है, यही कारण है माता गायत्री को सभी शक्तियों का आधार माना गया है.  Gayatri Jayanti मान्यता है कि गायत्री जयंती के दिन ज्ञान की देवी गायत्री से की पूजा करने से वेदों का अध्यन करने के समान पुण्य मिलता है, परिवार में एकता बढ़ती है सुख का वास होता है, ज्ञान में वृद्धि होती है. गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) ॐ भूर् भुवः स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात् ॥ गायत्री जयंती 2025 पर शुभ संयोग:Auspicious coincidence on Gayatri Jayanti 2025 ध्यान दें ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर Gayatri Jayanti गायत्री जयंती और निर्जला एकादशी व्रत का अद्भुत और सुंदर संयोग हो रहा है. इस दिन जो भी साधक मां गायत्री की पूजा के साथ साथ अगर निर्जला एकादशी के व्रत का संकल्प करता है तो उसे सभी 24 एकादशी का पुण्य प्राप्त होता है.  गायत्री जयंती 2025 पर भद्रा:Bhadra on Gayatri Jayanti 2025 गायत्री जयंती 2025 पर भद्रा का साया होगा. यह भद्रा पाताल लोक की है जिसका शुरुआत दोपहर के 03 बजकर 31 मिनट पर हो जाएगी और 7 जून को सुबह के 04 बजकर 47 मिनट तक यह बनी रहेगी. भद्रा का वास पाताल है. भद्रा का साया जब तक होगा किसी भी तरह के शुभ कार्य को नहीं किया जाएगा.  वेदमाता गायत्री:Vedamata Gayatri माता गायत्री वेदमाता हैं, मान्यता है कि चारों वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद व सामवेद की उत्पत्ति गायत्री माता से ही हुई है. ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेव भी  माता गायत्री की आराधना कर उनकी कृपा पाते हैं. पौराणिक मान्यता है कि पंचमुखी माता गायत्री की कुल 10 भुजाएं हैं. गायत्री मंत्र का जाप करने से मन शांत होता है और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है. गायत्री मंत्र के जाप से साधक सकारात्मकता, बुद्धि के साथ ही ज्ञान की प्राप्ति कर पाता है. ये है गायत्री मंत्र- ॐ भूर्भुवः स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्.

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Vilakku Pooja 2025 Date:विलक्कु पूजा विधि, महत्त्व और लाभ

Vilakku Pooja 2025:विलक्कु पूजा, भाग्य और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी का प्रतीक है। एक समय में बड़ी संख्या में महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से महालक्ष्मी की पूजा दीप जलाकर किया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और दुनिया में शांति आती है। थिरु विलक्कु पूजा Vilakku Pooja , ज्यादातर शुक्रवार को या तो सुबह या शाम को दीपक जलाकर की जाती है। यह मुख्य रूप से तमिल महीनों, चिथिरई और वैगासी के दौरान की जाती है, और यह पवित्र दीप पूजा अमावस और पूर्णिमा के दिनों में भी की जा सकती है। Vilakku Pooja विलक्कु पूजा: परिचय विलक्कु पूजा Vilakku Pooja में एक पारंपरिक दीपक (कुथु विलक्कु) को सजाकर, उसमें घी या तिल का तेल भरकर, दीपक जलाया जाता है। यह पूजा घर में या मंदिर में एकल या सामूहिक रूप से की जा सकती है। विशेष अवसरों पर, 108 या 1008 दीपकों के साथ सामूहिक पूजा का आयोजन भी होता है। विलक्कु पूजा कौन करता है? Who performs Vilakku puja? दक्षिण भारत – तमिलनाडु में, अधिकांश गृहिणियां इस तिरुविलक्कू पूजा को 108 जाप के साथ घर पर नियमित रूप से करतीं हैं। दीपक की मंद-मंद चमक मंदिर तथा मंदिर के कमरे को रोशन करती है, जिससे वातावरण शुद्ध और निर्मल रहता है। विलक्कु पूजा क्यों की जाती है?:Why is Vilakku puja performed? दक्षिण भारतीय हिंदुओं के घरों में थिरु-विलक्कू प्रतिदिन जलाया जाता है, क्योंकि थिरु-विलक्कू को माँ महालक्ष्मी का रूप माना जाता है, जो भाग्य और धन की देवी हैं। दिव्य मां लक्ष्मी देवी की कृपा पाने के लिए महिला भक्तों द्वारा थिरुविलक्कू पूजा की जाती है। यह पूजा परिवार के सदस्यों की भलाई के लिए की जाती है Vilakku Pooja और यह प्रत्येक सदस्य के लिए अच्छाई लाती है। Vilakku Pooja ऐसा माना जाता है कि जो लोग ईमानदारी से मंदिरों में दीया जलाकर थिरु विलक्कू पूजा करते हैं, मां महालक्ष्मी भी उस शुभ कार्यक्रम में उपस्थित होंगी, और वह दीप पूजा में भाग लेने वालों को आशीर्वाद देती हैं। पूजा की विधि:Vilakku puja Vidhi 1. पूर्व तैयारी 2. दीपक की स्थापना 3. पूजा की प्रक्रिया विलक्कु पूजा 2025 की तिथियाँ:Vilakku Puja 2025 Dates विलक्कु पूजा Vilakku Pooja मुख्यतः शुक्रवार को की जाती है, और 2025 में इसकी प्रमुख तिथियाँ निम्नलिखित हैं:​ 108 पोत्री (स्तुति) विलक्कु पूजा के दौरान 108 पोत्री का पाठ किया जाता है, जिसमें देवी की विभिन्न रूपों में स्तुति की जाती है। यह पाठ श्रद्धा और भक्ति के साथ किया जाना चाहिए। विलक्कु पूजा एक सरल और प्रभावशाली पूजा विधि है जो देवी लक्ष्मी और शक्ति की आराधना के माध्यम से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है। इस पूजा को नियमित रूप से करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है।

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Batuk Bhairav Jayanti 2025 Date:जानियें कब और कैसे करें बटुक भैरव जयंती की पूजा ?

Batuk Bhairav Jayanti 2025 Date:बटुक भैरव भगवान शंकर का बाल रूप और सबसे भयानक, विकराल और प्रचंड रूप है. कहते हैं कि बटुक भैरव की पूजा करने से विरोधियों और शत्रुओं का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता. Batuk Bhairav Jayanti 2025 : हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी को बटुक भैरव जयंती मनाई जाती है. इस साल  5 जून 2025, गुरूवार को बटुक भैरव जयंती मनाई जाएगी. इस दिन भोलेनाथ (Lord Shiva) ने भैरव के रूप में अवतार लिया था. शास्त्रों में इस बात का वर्णन है कि वेदों में जिस परम पुरुष का नाम रूद्र है तंत्र शास्त्र में उसी का भैरव के नाम से वर्णन किया गया है. आपको बता दें कि शिव पुराण (Shiv Puran) में भैरव को भगवान शिव का पूर्ण रूप बताया गया है. विद्वानी भगवान शंकर और भैरवनाथ में कोई अंतर नहीं मानते. बटुक भैरव भगवान शंकर का बाल रूप और सबसे भयानक, विकराल और प्रचंड रूप है. कहते हैं कि बटुक भैरव की पूजा करने से विरोधियों और शत्रुओं का कोई भी षड्यंत्र सफल नहीं होता. How is the form of Lord Shri Batuk Bhairav:कैसा है भगवान श्री बटुक भैरव का स्वरूप ? Batuk Bhairav Jayanti:कुछ साधक भगवान के बटुक भैरव रूप को शुद्ध आत्मा का प्रतिनिधित्व करने वाला उसका प्रतीकात्मक रूप मानते हैं। बटुक भैरव भगवन शिव का बाल रूप है जो अतिकोमल है और जिसका रंग गोरा है। इसलिये इन्हे गोरा भैरव के नाम से भी जाना जाता हैं। बालक रुपी भगवान बटुक भैरव की देह की कान्ति स्फटिक की तरह चमकदार है। केश घुंघराले और चमकता हुआ मुख। कमर और पैरों में किंकिणी, नूपुर आदि नव मणियों के अलंकार सज्ज्ति हैं। उनके तीन नेत्र है। भव्य और उज्जवल मुख है। सदा प्रसन्न-चित्त दिखते है। उन्होने हाथों में शूल और दण्ड धारण किए हुए हैं। How to worship Batuk Bhairav:कैसे करें बटुक भैरव की पूजा? बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti) के दिन भगवान बटुक भैरव की पूजा किये जाने का विधान है। इस साधक को भगवान बटुक भैरव के मन्दिर जाकर उनकी पूजा करनी चाहिये। पूजा की विधि इस प्रकार है – प्रात:काल नित्यक्रिया से निवृत्त होकर गंगा नदी में स्नान करें यदि गंगा स्नान सम्भव ना होतो स्नान के जल में गंगा जल डालकर स्नान करें। फिर स्वच्छ सफ़ेद वस्त्र धारण करें। स्नान के बाद व्रत का संकल्प करें। भगवान बटुक भैरव के मंदिर जाकर पूजा करें। Batuk Bhairav Jayanti यदि ऐसा सम्भव ना हो तो शिवालय जाकर भी पूजा कर सकते है। भगवान बटुक भैरव देव को सफ़ेद फूल और केला अर्पित करे। लड्डू और पंचामृत चढ़ाएं। यह सब चढ़ाते हुये इस मंत्र का जाप करते रहें। मंत्र – “ॐ बटुक भैरवाय नमः”। फिर बटुक भैरव स्तोत्र (श्री बटुक भैरव अष्टोत्तर शत-नामावली ) का पाठ करें। आरती करें। गरीबों को प्रसाद बाँटें। इसके बाद बाहर आकर कुत्ते को दूध अवश्य पिलायें। साथ ही पुआ या हलवा भी खिलायें। Significance of Batuk Bhairav Jayanti:बटुक भैरव जयंती का महत्व बटुक भैरव जयंती (Batuk Bhairav Jayanti) के दिन उत्तर भारत में बहुत से बटुक भैरव मंदिरों विशेष पूजा और अनुष्ठानों किये जाते है। तंत्रवाद में विश्वास करने वाले तांत्रिकों द्वारा भगवान शिव के रूप बटुक भैरव और काल भैरव की पूजा की जाती है। इस दिन Batuk Bhairav Jayanti भगवान बटुक भैरव की विधि अनुसार पूजा करने से The story of the origin of Batuk Bhairav:बटुक भैरव की उत्पत्ति की कथा पौराणिक कथाओं के अनुसार अति प्राचीन काल में आपद नाम का एक राक्षस था। Batuk Bhairav Jayanti उसने कठिन तपस्या के द्वारा यह वरदान प्राप्त कर लिया था कि उसे कोई भी देवी-देवता नही मार सकेगा। उसकी मृत्यु सिर्फ पाँच वर्ष की आयु वाला कोई बालक ही कर सकेगा। यह वर पाने के बाद आपद निरंकुश हो गया और तीनों लोकों में उसका अत्याचार बहुत बढ़ गया। देवी – देवता और मनुष्य सभी उसके अत्याचार से परेशान हो गये थे। आपद के द्वारा प्रताडित देवी – देवताओं ने जाकर भगवान शिव से प्रार्थना करी कि वो उनकी आपद से रक्षा करें। तब भगवान शिव जी ने पांच वर्ष के बालक रूप में बटुक भैरव को प्रकट किया। Batuk Bhairav Jayanti इस प्रकार से बटुक भैरव की उत्पत्ति हुई। इसके बाद भगवान बटुक भैरव ने आपद नामक राक्षस का वध करा। उसके बाद से ऐसा कहा जाता है कि इस कलियुग में यदि आपके उपर कोई मुसीबत आये तो बटुक भैरव का ध्यान करें। बटुक भैरव की पूजा करने से मिलता है लाभ:Benefits of worshiping Batuk Bhairav इस बार बटुक भैरव जयंती मनाई जा रही है. Batuk Bhairav Jayanti जयंती पड़ने से इसका महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है. कहा जाता है कि रविवार को भगवान बटुक भैरव की सच्चे मन से साधना और आराधना करने वाले साधक को बुद्धि, बल, विद्या और मान सम्मान की प्राप्ति होती है. Batuk Bhairav Jayanti ज्योतिषियों के मुताबिक राहु केतु के संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए भी बटुक की साधना बहुत ही ज्यादा फलदाई है. बटुक भैरव जयंती के दिन करें उपाय:Remedies to be taken on the day of Batuk Bhairav ​​Jayanti

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Sundar kand Path lyrics in hindi:संपूर्ण सुंदरकांड पाठ हिंदी में, जामवंत के बचन सुहाए, सुनि हनुमंत हृदय अति भाए…

Sundar kand Path lyrics in hindi: Sundarkand का हर मंगलवार को करना चाहिए, ऐसा करने से जीवन में सभी दुख दूर हो जाते हैं। Sundar kand Path:रामचरित मानस का हिस्सा है जो सुंदरकांड बजरंगबली हनुमानजी को समर्पित है। सुंदरकांड हिंदू धर्म में रामचरितमानस का विशेष महत्व है, और उसके सुंदरकांड अध्याय को अत्यंत शुभ और शक्तिशाली माना जाता है। सुंदरकांड श्रीराम कथा का वह भाग है जिसमें भगवान हनुमान की वीरता, भक्ति और बुद्धिमत्ता का अद्भुत वर्णन है। इस पाठ को नियमित रूप से पढ़ने से जीवन में कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं आध्यात्मिक, मानसिक, सुंदरकांड भावनात्मक और भौतिक रूप से। सुंदरकांड का पाठ करने से व्यक्ति का साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव भी कम हो जाता है। संपूर्ण सुंदरकांड पाठ: सुंदरकांड का पाठ नियमित करना चाहिए। हर दिन सुंदरकांड का पाठ नहीं कर सकते तो शनिवार और मंगलवार को जरूर इसका पाठ करना चाहिए। सुंदरकांड रामचरित मानस का हिस्सा है जो वीर हनुमानजी की महिमा का बखान करता है। इसके पाठ करने मात्र से मंगल की प्रतिकूल स्थिति और शनि की साढेसाती एवं ढैय्या का प्रभाव दूर हो जाता है। सुंदरकांड इतना ही नहीं यह संकट और परेशानी से भी उबारने वाला है। सुंदरकांड इसलिए सुंदरकांड हनुमान जयंती के अलावा हर शनिवार और मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए। सुंदरकांड तो आइए हनुमानजी का ध्यान करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरंभ करते हैं। सुंदरकांड आसन।।कथा प्रारम्भ होत है। सुनहुँ वीर हनुमान।।आसान लीजो प्रेम से। करहुँ सदा कल्याण।। सुंदरकांड पाठ से पहले करें हनुमानजी का ध्यानशान्तं शाश्वतमप्रमेयमनघं निर्वाणशान्तिप्रदं,ब्रह्माशम्भुफणीन्द्रसेव्यमनिशं वेदान्तवेद्यं विभुम्,रामाख्यं जगदीश्वरं सुरगुरुं मायामनुष्यं हरिं,वन्देऽहं करुणाकरं रघुवरं भूपालचूड़ामणिम्।।1।। नान्या स्पृहा रघुपते हृदयेऽस्मदीयेसत्यं वदामि च भवानखिलान्तरात्मा।भक्तिं प्रयच्छ रघुपुङ्गव निर्भरां मेकामादिदोषरहितं कुरु मानसं च।।2।। अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहंदनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशंरघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।।3।। Sundar kand Path:सुंदरकांड का पाठ आरंभ जामवंत के बचन सुहाए। सुनि हनुमंत हृदय अति भाए।।तब लगि मोहि परिखेहु तुम्ह भाई। सहि दुख कंद मूल फल खाई।।जब लगि आवौं सीतहि देखी। होइहि काजु मोहि हरष बिसेषी।।यह कहि नाइ सबन्हि कहुँ माथा। चलेउ हरषि हियँ धरि रघुनाथा।।सिंधु तीर एक भूधर सुंदर। कौतुक कूदि चढ़ेउ ता ऊपर।।बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।जिमि अमोघ रघुपति कर बाना। एही भाँति चलेउ हनुमाना।।जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी।।दो0- हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम।।1।। जात पवनसुत देवन्ह देखा। जानैं कहुँ बल बुद्धि बिसेषा।।सुरसा नाम अहिन्ह कै माता। पठइन्हि आइ कही तेहिं बाता।।आजु सुरन्ह मोहि दीन्ह अहारा। सुनत बचन कह पवनकुमारा।।राम काजु करि फिरि मैं आवौं। सीता कइ सुधि प्रभुहि सुनावौं।।तब तव बदन पैठिहउँ आई। सत्य कहउँ मोहि जान दे माई।।कबनेहुँ जतन देइ नहिं जाना। ग्रससि न मोहि कहेउ हनुमाना।।जोजन भरि तेहिं बदनु पसारा। कपि तनु कीन्ह दुगुन बिस्तारा।।सोरह जोजन मुख तेहिं ठयऊ। तुरत पवनसुत बत्तिस भयऊ।।जस जस सुरसा बदनु बढ़ावा। तासु दून कपि रूप देखावा।।सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा। अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा।।बदन पइठि पुनि बाहेर आवा। मागा बिदा ताहि सिरु नावा।।मोहि सुरन्ह जेहि लागि पठावा। बुधि बल मरमु तोर मै पावा।।दो0-राम काजु सबु करिहहु तुम्ह बल बुद्धि निधान।आसिष देह गई सो हरषि चलेउ हनुमान।।2।। निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।जीव जंतु जे गगन उड़ाहीं। जल बिलोकि तिन्ह कै परिछाहीं।।गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।सोइ छल हनूमान कहँ कीन्हा। तासु कपटु कपि तुरतहिं चीन्हा।।ताहि मारि मारुतसुत बीरा। बारिधि पार गयउ मतिधीरा।।तहाँ जाइ देखी बन सोभा। गुंजत चंचरीक मधु लोभा।।नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।। सैल बिसाल देखि एक आगें। ता पर धाइ चढेउ भय त्यागें।।उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।गिरि पर चढि लंका तेहिं देखी। कहि न जाइ अति दुर्ग बिसेषी।।अति उतंग जलनिधि चहु पासा। कनक कोट कर परम प्रकासा।।छं=कनक कोट बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना।चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना।।गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथिन्ह को गनै।।बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै।।1।।बन बाग उपबन बाटिका सर कूप बापीं सोहहीं।नर नाग सुर गंधर्ब कन्या रूप मुनि मन मोहहीं।। कहुँ माल देह बिसाल सैल समान अतिबल गर्जहीं।नाना अखारेन्ह भिरहिं बहु बिधि एक एकन्ह तर्जहीं।।2।।करि जतन भट कोटिन्ह बिकट तन नगर चहुँ दिसि रच्छहीं।कहुँ महिष मानषु धेनु खर अज खल निसाचर भच्छहीं।।एहि लागि तुलसीदास इन्ह की कथा कछु एक है कही।रघुबीर सर तीरथ सरीरन्हि त्यागि गति पैहहिं सही।।3।।दो0-पुर रखवारे देखि बहु कपि मन कीन्ह बिचार।अति लघु रूप धरौं निसि नगर करौं पइसार।।3।।.मसक समान रूप कपि धरी। लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी।।नाम लंकिनी एक निसिचरी। सो कह चलेसि मोहि निंदरी।।जानेहि नहीं मरमु सठ मोरा। मोर अहार जहाँ लगि चोरा।।मुठिका एक महा कपि हनी। रुधिर बमत धरनीं ढनमनी।।पुनि संभारि उठि सो लंका। जोरि पानि कर बिनय संसका।।जब रावनहि ब्रह्म बर दीन्हा। चलत बिरंचि कहा मोहि चीन्हा।।बिकल होसि तैं कपि कें मारे। तब जानेसु निसिचर संघारे।।तात मोर अति पुन्य बहूता। देखेउँ नयन राम कर दूता।।दो0-तात स्वर्ग अपबर्ग सुख धरिअ तुला एक अंग।तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।।4।।.प्रबिसि नगर कीजे सब काजा। हृदयँ राखि कौसलपुर राजा।।गरल सुधा रिपु करहिं मिताई। गोपद सिंधु अनल सितलाई।।गरुड़ सुमेरु रेनू सम ताही। राम कृपा करि चितवा जाही।।अति लघु रूप धरेउ हनुमाना। पैठा नगर सुमिरि भगवाना।।मंदिर मंदिर प्रति करि सोधा। देखे जहँ तहँ अगनित जोधा।।गयउ दसानन मंदिर माहीं। अति बिचित्र कहि जात सो नाहीं।।सयन किए देखा कपि तेही। मंदिर महुँ न दीखि बैदेही।।भवन एक पुनि दीख सुहावा। हरि मंदिर तहँ भिन्न बनावा।।दो0-रामायुध अंकित गृह सोभा बरनि न जाइ।नव तुलसिका बृंद तहँ देखि हरषि कपिराइ।।5।।.लंका निसिचर निकर निवासा। इहाँ कहाँ सज्जन कर बासा।।मन महुँ तरक करै कपि लागा। तेहीं समय बिभीषनु जागा।।राम राम तेहिं सुमिरन कीन्हा। हृदयँ हरष कपि सज्जन चीन्हा।।एहि सन हठि करिहउँ पहिचानी। साधु ते होइ न कारज हानी।।बिप्र रुप धरि बचन सुनाए। सुनत बिभीषण उठि तहँ आए।।करि प्रनाम पूँछी कुसलाई। बिप्र कहहु निज कथा बुझाई।।की तुम्ह हरि दासन्ह महँ कोई। मोरें हृदय प्रीति अति होई।।की तुम्ह रामु दीन अनुरागी। आयहु मोहि करन बड़भागी।।दो0-तब हनुमंत कही सब राम कथा निज नाम।सुनत जुगल तन पुलक मन मगन सुमिरि गुन ग्राम।।6।।.सुनहु पवनसुत रहनि हमारी। जिमि दसनन्हि महुँ जीभ बिचारी।।तात कबहुँ मोहि जानि अनाथा। करिहहिं कृपा भानुकुल नाथा।।तामस तनु कछु साधन नाहीं। प्रीति न पद सरोज मन माहीं।।अब मोहि भा भरोस हनुमंता। बिनु हरिकृपा मिलहिं नहिं संता।।जौ रघुबीर अनुग्रह कीन्हा।

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Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi :मंगलवार को हनुमान जी के इन नामों का करें जप, सभी संकट जल्द होंगे दूर

Hanuman Ji Ke 108 Name:मंगलवार के दिन राम जी के भक्त हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही कार्यों में आ रही बाधा को दूर करने के लिए व्रत भी किया है। मान्यता है कि बजरंगबली की उपासना करने से कभी धन का अभाव नहीं रहता है और घर में खुशियों का आगमन होता है। ऐसे में मंगलवार के दिन बजरंगबली की पूजा के दौरान उनके Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi नामों का जप करें। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi:हनुमानजी के कई नाम है और हर नाम के पीछे कुछ ना कुछ रहस्य है। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi हनुमानजी के लगभग 108 नाम बताए जाते हैं। वैसे प्रमुख रूप से हनुमानजी के 12 नाम बताए जाते हैं। बलशालियों में सर्वश्रेष्ठ है हनुमानजी। कलिकाल में उन्हीं की भक्ति से भक्त का उद्धार होता है। Hanuman Ji Ke 108 Name जो जपे हनुमानजी का नाम संकट कटे मिटे सब पीड़ा और पूर्ण हो उसके सारे काम। तो आओ जानते हैं कि हनुमानजी के नामों का रहस्य। 1. मारुति : हनुमानजी का बचपना का यही नाम है। यह उनका असली नाम भी माना जाता है।  2. अंजनी पुत्र : हनुमान की माता का नाम अंजना था। इसीलिए उन्हें अंजनी पुत्र या आंजनेय भी कहा जाता है। 3. केसरीनंदन : हनुमानजी के पिता का नाम केसरी था इसीलिए उन्हें केसरीनंदन भी कहा जाता है। 4. हनुमान : जब बालपन में मारुति ने सूर्य को अपने मुंह में भर लिया था तो इंद्र ने क्रोधित होकर बाल हनुमान पर अपने वज्र से वार किया। वह वज्र जाकर मारुति की हनु यानी कि ठोड़ी पर लगा। इससे उनकी ठोड़ी टूट गई इसीलिए उन्हें हनुमान कहा जाने लगा। 4. पवन पुत्र : उन्हें वायु देवता का पुत्र भी माना जाता है, इसीलिए इनका नाम पवन पुत्र हुआ। Hanuman Ji Ke 108 Name उस काल में वायु को मारुत भी कहा जाता था। मारुत अर्थात वायु, इसलिए उन्हें मारुति नंदन भी कहा जाता है। वैसे उनमें पवन के वेग के समान उड़ने की शक्ति होने के कारण भी यह नाम दिया गया। 6. शंकरसुवन : हनुमाजी को शंकर सुवन अर्थात उनका पुत्र भी माना जाता है क्योंकि वे रुद्रावतार थे। 7. बजरंगबली : वज्र को धारण करने वाले और वज्र के समान कठोर अर्थात बलवान शरीर होने के कारण उन्हें वज्रांगबली कहा जाने लगा। अर्थात वज्र के समान अंग वाले बलशाली। लेकिन यह शब्द ब्रज और अवधि के संपर्क में आकर बजरंगबली हो गया। बोलचाल की भाषा में बना बजरंगबली भी सुंदर शब्द है। 8. कपिश्रेष्ठ : हनुमानजी का जन्म कपि नामक वानर जाति में हुआ था। रामायणादि ग्रंथों में हनुमानजी और उनके सजातीय बांधव सुग्रीव अंगदादि के नाम के साथ ‘वानर, कपि, शाखामृग, प्लवंगम’ आदि विशेषण प्रयुक्त किए गए। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi उनकी पुच्छ, लांगूल, बाल्धी और लाम से लंकादहन इसका प्रमाण है कि वे वानर थे। रामायण में वाल्मीकिजी ने जहां उन्हें विशिष्ट पंडित, राजनीति में धुरंधर और वीर-शिरोमणि प्रकट किया है, Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi वहीं उनको लोमश ओर पुच्छधारी भी शतश: प्रमाणों में व्यक्त किया है। अत: सिद्ध होता है कि वे जाति से वानर थे। 9. वानर यूथपति : हनुमानजी को वानर यूथपति भी कहा जाता था। वानर सेना में हर झूंड का एक सेनापति होता था जिसे यूथपति कहा जाता था। अंगद, दधिमुख, मैन्द- द्विविद, नल, नील और केसरी आदि कई यूथपति थे।  10. रामदूत : प्रभु श्रीराम का हर काम करने वाले दूत। 11. पंचमुखी हनुमान : पातल लोक में अहिरावण का वध करने जब वे गए तो वहां पांच दीपक उन्हें पांच जगह पर पांच दिशाओं में मिले जिसे अहिरावण ने मां भवानी के लिए जलाए थे। Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi इन पांचों दीपक को एक साथ बुझाने पर अहिरावन का वध हो जाएगा इसी कारण हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धरा। उत्तर दिशा में वराह मुख, दक्षिण दिशा में नरसिंह मुख, पश्चिम में गरुड़ मुख, आकाश की तरफ हयग्रीव मुख एवं पूर्व दिशा में हनुमान मुख।  Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi :मंगलवार को हनुमान जी के इन नामों का करें जप, सभी संकट जल्द होंगे दूर इस रूप को धरकर उन्होंने वे पांचों दीप बुझाए तथा अहिरावण का वध कर राम,लक्ष्मण को उस से मुक्त किया। मरियल नामक दानव को मारने के लिए भी यह रूप धरा था। दोहा :  उर प्रतीति दृढ़, सरन ह्वै, पाठ करै धरि ध्यान। बाधा सब हर, करैं सब काम सफल हनुमान॥  स्तुति :  हनुमान अंजनी सूत् र्वायु पुत्रो महाबलः। रामेष्टः फाल्गुनसखा पिङ्गाक्षोऽमित विक्रमः॥ उदधिक्रमणश्चैव सीता शोकविनाशनः। लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा॥ एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मनः। सायंकाले प्रबोधे च यात्राकाले च यः पठेत्॥ तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्। यहां पढ़ें हनुमानजी के 12 चमत्कारिक नाम 1. हनुमान हैं (टूटी हनु). 2. अंजनी सूत, (माता अंजनी के पुत्र). 3. वायुपुत्र, (पवनदेव के पुत्र). 4. महाबल, (एक हाथ से पहाड़ उठाने और एक छलांग में समुद्र पार करने वाले महाबली). 5. रामेष्ट (राम जी के प्रिय). 6. फाल्गुनसख (अर्जुन के मित्र). 7. पिंगाक्ष (भूरे नेत्र वाले). 8. अमितविक्रम, ( वीरता की साक्षात मूर्ति)  9. उदधिक्रमण (समुद्र को लांघने वाले). 10. सीताशोकविनाशन (सीताजी के शोक को नाश करने वाले). 11. लक्ष्मणप्राणदाता (लक्ष्मण को संजीवनी बूटी द्वारा जीवित करने वाले). 12.. दशग्रीवदर्पहा (रावण के घमंड को चूर करने वाले). Hanuman Ji Ke 108 Name in Hindi:हनुमान जी के 108 नाम 1.भीमसेन सहायकृते 2. कपीश्वराय 3. महाकायाय 4. कपिसेनानायक 5. कुमार ब्रह्मचारिणे 6. महाबलपराक्रमी 7. रामदूताय 8. वानराय 9. केसरी सुताय 10. शोक निवारणाय 11. अंजनागर्भसंभूताय 12. विभीषणप्रियाय 13. वज्रकायाय 14. रामभक्ताय 15. लंकापुरीविदाहक 16. सुग्रीव सचिवाय 17. पिंगलाक्षाय 18. हरिमर्कटमर्कटाय 19. रामकथालोलाय 20. सीतान्वेणकर्त्ता 21. वज्रनखाय 22. रुद्रवीर्य 23. वायु पुत्र 24. रामभक्त 25. वानरेश्वर 26. ब्रह्मचारी 27. आंजनेय 28. महावीर 29. हनुमत 30. मारुतात्मज 31. तत्वज्ञानप्रदाता 32. सीता मुद्राप्रदाता 33. अशोकवह्रिकक्षेत्रे 34. सर्वमायाविभंजन 35. सर्वबन्धविमोत्र 36. रक्षाविध्वंसकारी 37. परविद्यापरिहारी 38. परमशौर्यविनाशय 39. परमंत्र निराकर्त्रे 40. परयंत्र प्रभेदकाय 41. सर्वग्रह निवासिने 42. सर्वदु:खहराय 43. सर्वलोकचारिणे 44. मनोजवय 45. पारिजातमूलस्थाय 46. सर्वमूत्ररूपवते 47. सर्वतंत्ररूपिणे 48. सर्वयंत्रात्मकाय 49. सर्वरोगहराय 50. प्रभवे 51. सर्वविद्यासम्पत 52. भविष्य चतुरानन 53. रत्नकुण्डल पाहक 54. चंचलद्वाल 55. गंधर्वविद्यात्त्वज्ञ 56. कारागृहविमोक्त्री 57. सर्वबंधमोचकाय 58. सागरोत्तारकाय 59. प्रज्ञाय 60. प्रतापवते 61. बालार्कसदृशनाय

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Lord Shiva things In Dream:शिवजी को सपने में दिखने का क्या है मतलब ?

Lord Shiva things In Dream:अक्सर हम रात को सोते समय सपने देखते हैं। हम में से ज्यादातर लोग सपनों में वही देखते हैं जो असल में हमारे जीवन में हो रहा होता है। या हम क्या सोच रहे थे। इसी तरह अगर आप सपने में कोई मंदिर या कोई देवता देख रहे हैं तो उसके बीच में कोई शुभ या अशुभ कारण है। आपको बता दें कि स्वप्न शास्त्र में सपनों के अर्थ बताए गए हैं। Sapne mein Dikhe bhagwan Shiv:ऐसे में अगर आप सपने में कोई देवता देखते हैं तो उसके भी अलग-अलग अर्थ होते हैं। भगवान शिव का प्रिय महीना सावन चल रहा है। यदि सावन के महीने में आपको सपने में भगवान शिव या उनसे जुड़ी चीजें दिखें तो इसका कोई न कोई अर्थ अवश्य होता है। सपने में भगवान शिव आते हैं और सभी संकटों को दूर करने का संकेत देते हैं। आइए जानते हैं सपने में भगवान शिव या उनसे संबंधित वस्तुएं देखने का क्या अर्थ है।  Swapna Shastra Sapne Me Shivling Damru Trishul Dekhna Know Lord Shiva things In Dream Meaning In Hindi शिवलिंग का स्वप्न:Dream of Shivalinga Lord Shiva things In Dream अगर सपने में भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग का आपने दर्शन किया है तो यह बहुत ही शुभ संकेत है। इससे व्यक्ति के सभी दुखों की समाप्ति होती है और भगवान शिव का आशीर्वाद सदैव जातक पर बना रहता है। सपने में भगवान शिव को देखना:Seeing Lord Shiva in dreams यदि आपने सपने में भगवान शिव को देखा है Lord Shiva things In Dream तो यह स्पष्ट है कि आपके जीवन की परेशानियां बहुत जल्द दूर होने वाली हैं। सके साथ ही अगर आप सपने में शिवलिंग देखते हैं तो यह सपना भी बहुत शुभ माना जाता है। यह सपना प्रगति, प्रगति और प्रसिद्धि की प्राप्ति का संकेत माना जाता है। सपने में शिव पार्वती को एक साथ देखना:Seeing Shiva and Parvati together in dreams यदि आप शिव और पार्वती को एक साथ देखते हैं तो इसका मतलब है कि आपके दरवाजे पर नए अवसर हैं। जल्द ही आपको लाभ, यात्रा, अन्न और खाद्यान्न प्राप्त करने, धन और बहुतायत के समाचार सुनने को मिलेंगे। शिव और पार्वती को एक साथ देखना एक अच्छा शगुन है। सपने में शिव को नृत्य करते हुए देखना:Seeing Shiva dancing in dream शिव तांडव को आक्रामकता और जुनून का प्रतीक माना जाता है। लेकिन अगर आप सपने में शिव को नाचते हुए देखते हैं तो इसका मतलब है कि आपकी समस्या का जल्द ही समाधान हो जाएगा। यह यह भी दर्शाता है कि आप धन प्राप्त करेंगे लेकिन कुछ संघर्ष के बाद। शिव मंदिर के बारे में सपने देखना:Dreaming about Shiva temple Lord Shiva things In Dream यदि आप शिव मंदिर के बारे में सपना देखते हैं, तो यह दर्शाता है कि आपको दो पुत्रों की प्राप्ति होगी। एक सपने में मंदिर का मतलब किसी बीमारी से उबरना भी हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति माइग्रेन के सिरदर्द से पीड़ित है, Lord Shiva things In Dream तो सपने में उसके मंदिर लोहे में बदल जाते हैं, इसका मतलब है कि उसे अपनी बीमारी का इलाज मिल जाएगा। सपने में किसी के मंदिर की व्याख्या भी धन के रूप में की जा सकती है। शिव के त्रिशूल के बारे में सपना देखना:Dreaming about Shiva’s trident शिव का त्रिशूल दर्शाता है कि शिव सभी 3 अवस्थाओं से ऊपर हैं-जागना, स्वप्न देखना और सोना, फिर भी वे सभी 3 अवस्थाओं को बनाए रखते हैं। यदि आप त्रिशूल के बारे में सपना देखते हैं, तो इसका भूत, वर्तमान और भविष्य या जन्म, जीवन और मृत्यु की पीड़ा से कुछ संबंध है। त्रिशूल जो आपको सभी समस्याओं और कष्टों से छुटकारा दिलाता है। तो यह एक अच्छा शगुन है। शिव के चंद्रमा के बारे में सपना देखना:Dreaming about Shiva’s Moon शिव पर अर्धचंद्राकार ज्ञान का प्रतीक है। यदि आप चंद्रमा का सपना देखते हैं, Lord Shiva things In Dream तो इसका मतलब है कि आपको जीवन में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे। इस सपने का संबंध आपके शिक्षा क्षेत्र से हो सकता है। भगवान शिव का तीसरा नेत्र:third eye of lord shiva तीसरा नेत्र सतर्कता और जागरूकता से जुड़ा है। इसके बारे में सपने देखने का मतलब जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का संकेत है। शिव के डमरू के बारे में सपने देखना- डमरू ब्रह्मांड का प्रतीक है Lord Shiva things In Dream जो हमेशा विस्तार और पतन कर रहा है। दारमरू ध्वनि का भी प्रतीक है। इसके बारे में सपने देखने का अर्थ है आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में ऊर्जा का सकारात्मक प्रवाह।

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Sapne Me Shivling Dekhna:सपने में पार्थिव शिवलिंग देखने का मतलब जानिए, इस मामले में होता है बेहद लाभकारी

Shivling Dekhna:कई बार सपने में शिवलिंग हमें लगातार दिखाई देता है जिसे देखने के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं कि इसका क्या मतलब हो सकता है? अगर आपको कभी सपने में भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग का दर्शन हो तो आपको खुश हो जाना चाहिए। क्योंकि यह सपना आपके लिए बेहद शुभ है। Shivling Darshan: हिंदू धर्म में स्वप्नशास्त्र का बेहद महत्व है। ऐसा माना जाता है कि सपने हमें भविष्य से जुड़े संकेत देते हैं। कई बार सपने में शिवलिंग हमें लगातार दिखाई देता है, जिसे देखने के बाद लोगों के मन में कई सवाल उठते हैं कि इसका क्या मतलब हो सकता है? Shivling Dekhna अगर आपको कभी सपने में भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग का दर्शन हो, तो आपको खुश हो जाना चाहिए। क्योंकि यह सपना आपके लिए बेहद शुभ है। तो आइए स्वप्नशास्त्र के अनुसार, जानते हैं सपने में शिवलिंग दिखने का महत्व- Sapne Me Shivling Dekhna:सपने में शिवलिंग का दिखना सपने में यदि आपने शिवलिंग को देखा तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा मानते हैं कि यदि सपने में आपको Shivling Dekhna शिवलिंग दिखाई दे तो निजी जीवन में आपका कोई बहुप्रतीक्षित कार्य बनने वाला है। ऐसा कहते हैं कि आपको उस कार्य में सफलता मिलना तय और भोले बाबा का हाथ आपके ऊपर है। सपने में शिवलिंग की पूजा करते देखना:Seeing worshiping Shivling in the dream यदि आपने सपने में खुद को शिवलिंग की पूजा करते देखा है तो समझ लीजिए आपके जीवन से सभी प्रकार के अशुभ तत्‍वों का नाश होने वाला है। ऐसा सपना अच्‍छा समय आने का और पुरानी परेशानियां दूर होने का संकेत देता है। यह सपना किसी की अधूरी इच्‍छा पूरी होने का और मनोकामना पूर्ति का संकेत देता है। सपने में सपरिवार भगवान शिव की पूजा करना:Worshiping Lord Shiva with family in the dream यदि आप खुद को अपने परिवार के साथ शिवजी की पूजा करते देखते हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आप अपने काम में पूरे त्‍याग, समर्पण और ईमानदारी के साथ लगे रहते हैं।Shivling Dekhna ऐसा सपना आना बताता है कि कार्यक्षेत्र में आपकी आने वाली परेशानियां जल्‍द ही दूर होने वाली हैं। आपके जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्‍य आने वाला है। ऐसा सपना उन्‍नति और सुख सौभाग्‍य का प्रतीक माना जाता है। सपने में सफेद शिवलिंग देखना:Seeing white Shivling in dream अगर आपको सपने में यदि सफेद शिवलिंग के दर्शन हों तो यह इस बात का संकेत माना जाता है कि आने वाले वक्‍त में आपको या फिर आपके परिवार के किसी सदस्‍य को गंभीर रोग से छुटकारा मिल सकता है और आपके जीवन में कुछ अच्‍छा होने वाला है। सपने में शिव मंदिर की सीढ़ियां चढ़ना:Climbing the stairs of Shiva temple in a dream सपने में शिव मंदिर की सीढ़ियां चढ़ना भी असल जीवन में बहुत ही शुभ संकेत देता है। इसका अर्थ है कि आप अपने जीवन में सुख शांति की ओर बढ़ रहे हैं। संघर्ष का दौर आपके जीवन से समाप्‍त होने वाला है और जल्‍द ही आपके जीवन में स्‍थायित्‍व आने वाला है और सब कुछ आपके अनुसार होने वाला है। पुर्वजन्म से है जुड़ा है सपना:The dream is connected to the previous birth अगर आपको सपने में Shivling Dekhna शिवलिंग के दर्शन होते हैं, तो इसका संबंध पुर्वजन्म से भी हो सकता है। धार्मिक मान्यता है कि इस सपने से यह भी पता चलता है कि आपको आपके बुरे कर्मों की सजा मिल चुकी है। अब आपका बुरा समय खत्म हो गया है। साथ ही आपका भाग्योदय जल्द होने वाला है। सपने में शिवलिंग दिखने पर करें यह उपाय:Do this remedy if you see Shivling in your dream स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपको सपने में शिवलिंग के दर्शन होते हैं, तो आपको अगली सुबह शिव मंदिर जाना चाहिए। इसके बाद भोलेनाथ की विधिवत पूजा – अर्चना करनी चाहिए। साथ ही शिव जी के पंचाक्षर स्तोत्र का पाठ या फिर किसी मंत्र का जाप करना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं, तो आपके सपनों का शुभ परिणाम दोगुना हो जाएगा।

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Maa Annapurna Stotram:माँ अन्नपूर्णा स्तोत्र

Maa Annapurna Stotram in Hindi माँ अन्नपूर्णा स्तोत्र हिंदी पाठ Maa Annapurna Stotram:नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्यरत्नाकरीनिर्धूताखिलघोरपावनकरी प्रत्यक्षमाहेश्वरी ।प्रालेयाचलवंशपावनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ १ ॥ नानारत्नविचित्रभूषणकरी हेमाम्बराडम्बरीमुक्ताहारविलम्बमानविलसद्वक्षोजकुम्भान्तरी ।काश्मीरागरुवासिताङ्गरुचिरे काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ २ ॥ योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मार्थनिष्ठाकरीचन्द्रार्कानलभासमानलहरी त्रैलोक्यरक्षाकरी ।सर्वैश्वर्यसमस्तवाञ्छितकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ३ ॥ कैलासाचलकन्दरालयकरी गौरी उमा शङ्करीकौमारी निगमार्थगोचरकरी ओङ्कारबीजाक्षरी ।मोक्षद्वारकपाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ४ ॥ दृश्यादृश्यविभूतिवाहनकरी ब्रह्माण्डभाण्डोदरीलीलानाटकसूत्रभेदनकरी विज्ञानदीपाङ्कुरी ।श्रीविश्वेशमनःप्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ५ ॥ उर्वीसर्वजनेश्वरी भगवती मातान्नपूर्णेश्वरीवेणीनीलसमानकुन्तलहरी नित्यान्नदानेश्वरी ।सर्वानन्दकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ६ ॥ आदिक्षान्तसमस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरीकाश्मीरात्रिजलेश्वरी त्रिलहरी नित्याङ्कुरा शर्वरी ।कामाकाङ्क्षकरी जनोदयकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ७ ॥ देवी सर्वविचित्ररत्नरचिता दाक्षायणी सुन्दरीवामं स्वादुपयोधरप्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी ।भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ८ ॥ चन्द्रार्कानलकोटिकोटिसदृशा चन्द्रांशुबिम्बाधरीचन्द्रार्काग्निसमानकुन्तलधरी चन्द्रार्कवर्णेश्वरी ।मालापुस्तकपाशासाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ ९ ॥ क्षत्रत्राणकरी महाऽभयकरी माता कृपासागरीसाक्षान्मोक्षकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरश्रीधरी ।दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरीभिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी ॥ १० ॥ अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्करप्राणवल्लभे ।ज्ञानवैराग्यसिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वति ॥ ११ ॥ माता च पार्वती देवी पिता देवो महेश्वरः ।बान्धवाः शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम् ॥ १२ ॥ Maa Annapurna Stotram ॥ इति श्री अन्नपूर्णा स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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