गोपीनाथ मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर को “राधा गोपीनाथ मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोपीनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश मथुरा के वृन्दावन नगरी में स्थित है। सप्तदेवालयों में शामिल यह मंदिर यमुना नदी के केशीघाट के समीप बना हुआ है। वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर को “राधा गोपीनाथ मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोपीनाथ मंदिर का इतिहास Mandir Shri Gopinath Ji : गोपीनाथ मंदिर में मूर्तियों की पूजा मधुपंडित गोस्वामी द्वारा की जाती थी जो गुरु चैतन्य के बहुत करीबी सहयोगियों में से एक थे। पौराणिक कथा के अनुसार, गोपीनाथजी की मूर्ति लंबे समय तक खोयी हुयी थी। ऐसा कहा जाता है कि परमानंद भट्टाचार्य नाम के एक महान भक्त ने खोई हुई मूर्ति को पुनर्जीवित किया था। एक रात को भगवान गोपीनाथ परमानंद भट्टाचार्य के स्वप्न में आए और उन्होंने वामशीवट नामक पेड़ के नीचे अपने रहने के स्थान का पता बताया। स्वप्न के अनुसार परमानंद उस पेड़ के पास गए और वहां पर मूर्ति को पुनर्जीवित किया। उन्होंने मूर्ति की पूजा करना शुरू कर दिया और बाद में मूर्ति मधुपंडितगोस्वामी को सौंप दी। मंदिर का महत्व ऐसा माना जाता है कि गोपीनाथ मंदिर में विराजित भगवान कृष्ण की मूर्ति चमत्कारी है। इनके दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इस मंदिर का मनमोहक और शांत वातावरण भक्तों को भगवान की ओर आकर्षित करता है। मंदिर की वास्तुकला गोपीनाथ मंदिर लाल पत्थर से निर्मित है। नदी के किनारे होने के कारण मंदिर की सुंदरता और भी बढ़ जाती है। मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा बांसुरी बजाते हुए स्थापित है। भगवान के दाये तरफ प्रिय राधा जी और बाये तरफ अनंग-मंजरी खड़े हुए हैं। उनका साथ देने के लिए ललिता और विशाखा भी है। इस मंदिर में ही आचार्य मधु पंडित की समाधि भी है। यदि आप वृन्दावन गए है एक बार इस मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए। मंदिर का समय गोपीनाथ मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 01:00 PM श्रृंगार आरती 08:30 AM – 09:00 AM शाम में गोपीनाथ मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 09:00 PM शयन आरती 08:00 PM – 08:30 PM मंगला आरती 05:00 AM – 05:30 AM राजभोग आरती 11:30 AM – 12:00 PM संध्या आरती 06:00 PM – 06:30 PM

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Pana Sankranti 2025 Date Hindi : पना संक्रांति कहां मनाई जाती है, इस दिन क्या करते हैं

Pana Sankranti 2025 Date:हिंदू पंचांग के अनुसार, जिस दिन भगवान सूर्य मेष राशि में प्रवेश करते हैं, उस दिन मेष संक्रांति मनाई जाती है। ओडिशा में इसे पना संक्रांति कहा जाता है और इस दिन नए साल का त्योहार भी मनाया जाता है। Pana Sankranti 2025 Date इस वर्ष 14 अप्रैल पना संक्रांति है। इस अवसर पर, ओडिशा के लोग एक दूसरे को पना संक्रांति और नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हैं। साथ ही इस दिन फल, दही, सत्तू और अन्य वस्तुओं से बने शर्बत पीने का भी विधान है। यह भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। जहां उत्तर भारत में बैसाखी मनाई जाती है। वहीं, विशु इस दिन केरल और तमिलनाडु में पुथांडु में मनाया जाता है। जबकि बोहाग बिहू असम में मनाया जाता है। केवल इस दिन, सूरज पूरी तरह से दो अवसरों पर भूमध्य रेखा पर रहता है, जैसे कि मेष संक्रांति और तुला संक्रांति। दिन का नाम पना के नाम पर रखा गया है। यह दिन बहुत खुशी, सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक प्रदर्शनों के साथ मनाया जाता है। Pana Sankranti 2025 Date:पना संक्रांति क्यों कहा जाता है? Pana Sankranti 2025 Date:पना नाम उत्सव के मुख्य घटक से लिया गया है। मुख्य अनुष्ठानों में से एक में पके आम, नारियल, गुड़, दही और पानी जैसी विभिन्न सामग्रियों से बने “पना” नामक एक विशेष पेय की तैयारी और खपत शामिल है। पना को साझाकरण और सामुदायिक बंधन के प्रतीक के रूप में परिवार के सदस्यों, दोस्तों और पड़ोसियों के बीच वितरित किया जाता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची निम्नलिखित है Pana Sankranti ki pouranik katha:पना संक्रांति का पौराणिक कथा जिस दिन इसे मनाया जाता है उसका कारण यह है कि यह सौर वर्ष का पहला दिन है। Pana Sankranti 2025 Date केवल इस दिन, सूरज पूरी तरह से दो मौकों पर भूमध्य रेखा पर रहता है, जैसे कि मेष संक्रांति और तुला संक्रांति। मेष संक्रांति के बाद, सूर्य उत्तरी दिशा में उगता है जहां भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में स्थित है। इसलिए, इस वर्ष से सूर्य के पहले दिन, जो मिशा संक्रांति है। ओडिया की परंपरा के अनुसार, पना संक्रांति को हिंदू देवता हनुमान का जन्मदिन माना जाता है। रामायण में विष्णु अवतार राम के प्रति उनकी प्रेममयी भक्ति पौराणिक है। शिव और सूर्य (सूर्य) भगवान के साथ उनके मंदिर नए साल में पूजनीय हैं। इस दिन हिंदू भगवान मंदिरों में भी जाते हैं। पना संक्रांति का समारोह Pana Sankranti 2025 Date:इस दिन, लोग पना से भरे एक छोटे बर्तन का उपयोग करते हैं या मिश्री का मीठा पेय और तुलसी के पौधे पर पानी डाला जाता है। बर्तन के तल पर एक छेद बनाया जाता है, जो बारिश का प्रतिनिधित्व करते हुए पानी को गिरने देता है। यह त्योहार व्यापक रूप से कुछ शहरों और गांवों में, तटीय क्षेत्रों में, ओडिशा में एक अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है। पना संक्रांति का महत्व (Pana Sankranti Ka Mahatva) पना संक्रांति सौर वर्ष के पहले दिन मनाई जाती है। Pana Sankranti 2025 Date ओडिया की परंपरा के अनुसार पना संक्रांति के दिन ही हनुमान भगवान का जन्मदिन हुआ था। इसलिए इस दिन यहां हनुमान जयंती भी मनाई जाती है। इस दिन भगवान सूर्य उत्तरायण का आधा सफर पूरा कर लेते हैं। अन्य संक्रांति की तरह ही इस दिन भी स्नान-दान, पितरों का तर्पण और मधुसूदन भगवान की पूजा का महत्व बताया गया है। पना संक्रांति पर क्या करते हैं (Pana Sankranti Par Kya Karte Hai) Pana Sankranti 2025 Date:इस दिन सूर्य की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कहते हैं पना संक्रांति के दिन सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सूर्य देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Pana Sankranti 2025 Date इसलिए इस दिन सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए। कहते हैं सूर्य की पूजा करने से व्यक्ति को मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। पना संक्रांति पर करें ये दान (Pana Sankranti Daan) मेष संक्रांति के दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन दान करने से सूर्य देवता प्रसन्न होते हैं। लेकिन दान करने से पहले पवित्र नदी में स्थान जरूर करें। लेकिन अगर नदियों में स्नान नहीं कर सकते हैं तो घर में स्नान के पानी में ही गंगाजल डालकर स्नान करें। Pana Sankranti 2025 Date:खास संदेश  इस पना संक्रांति पर भगवान जगन्नाथ का दिव्य आशीर्वाद आपके जीवन में प्रचुरता और समृद्धि लाए। आपको और आपके परिवार को प्रेम, खुशी और एकजुटता से भरी आनंदमय पना संक्रांति की शुभकामनाएं। जैसे ही सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है, यह आपके जीवन में नई शुरुआत और अवसर लेकर आएगा। पण संक्रांति की शुभकामनाएं! आइए नए सौर माह की शुरुआत का जश्न कृतज्ञता और भक्ति के साथ मनाएं। पण संक्रांति की शुभकामनाएँ! पाना पेय का मीठा स्वाद आपके जीवन को मिठास और आनंद से भर दे। पण संक्रांति की शुभकामनाएँ! इस शुभ दिन पर, भगवान जगन्नाथ आप और आपके प्रियजनों पर अपना आशीर्वाद बरसाएं। पण संक्रांति की शुभकामनाएं! Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : कामदा एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें जरूरी नियम

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Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : कामदा एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें जरूरी नियम

Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi : आज कामदा एकादशी का व्रत है. आज के दिन विष्णु जी की पूजा होती है. कामदा एकादशी के दिन कुछ खास काम करने की मनाही होती है. जानते हैं इससे जुड़े नियम. कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु के वासुदेव रूप की विधिवत पूजा करने का विधान है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को सभी पापों से छुटकारा मिल सकता है।  Kamada Ekadashi:  यह हिंदू संवत्सर की पहली एकादशी है. इसे फलदा एकादशी भी कहा जाता है. सभी एकादशियों में कामदा एकादशी को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है.  कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की वासुदेव रुप का पूजन किया जाता है. Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi इस व्रत को करने से सभी इच्छाओं की पूर्ति होती है. इसका व्रत करने से समस्त पापों का नाश होता है. कामदा एकादशी के कुछ खास नियम होते हैं. जानते हैं कि आज के दिन कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Kamada Ekadashi 2025: कामदा एकादशी हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण व्रतों में से एक मानी जाती है. यह व्रत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है और मान्यता है कि इसे करने से व्यक्ति के सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं. इस व्रत के कुछ जरूरी नियम हैं, जिनका पालन करने से शुभ फल प्राप्त होता है. मान्यता के अनुसार, Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi कामदा एकादशी व्रत को करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पापों से मुक्ति मिलती है. आइए जानते साल 2025 में कामदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा. Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में कब-कब है एकादशी?नोट करें सही डेट एवं पूरी लिस्ट कामदा एकादशी कब है? Kamada Ekadashi 2025 Date पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 7 अप्रैल को रात 8 बजे होगी. वहीं इस शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का समापन 8 अप्रैल को रात 9 बजकर 12 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, 8 अप्रैल को कामदा एकादशी मनाई जाएगी. इसी दिन इसका व्रत और भगवान विष्णु का पूजन भी किया जाएगा. Kamada Ekadashi Ke Din Kya Kare:कामदा एकादशी के दिन क्या करें? Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi:सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. तुलसी, फल-फूल, धूप, दीप और प्रसाद चढ़ाकर भगवान विष्णु की आराधना करें. इस दिन निराहार (बिना खाए) या फलाहार व्रत रखने की परंपरा है. भगवद्गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें , क्योंकि इस दिन श्रीहरि की भक्ति में लीन रहना शुभ माना जाता है. जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन दान करना बहुत पुण्यदायी होता है. इस दिन भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन के साथ जागरण करने से विशेष लाभ मिलता है. द्वादशी के दिन ब्राह्मण भोजन कराने के बाद खुद सात्त्विक भोजन करें. Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय Kamada Ekadashi Ke Din Kya Nhi Kare : कामदा एकादशी के दिन क्या नहीं करें? Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi इस दिन चावल, गेहूं, मसूर दाल, प्याज-लहसुन और मांसाहार से परहेज करें. व्रत के दौरान मन और वाणी की शुद्धता बनाए रखें. इस दिन सत्य बोलना और अच्छे आचरण का पालन करना जरूरी होता है. Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi वाणी पर संयम रखना एकादशी व्रत का मुख्य नियम है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शरीर के किसी भी अंग को काटना वर्जित है. खाने की बर्बादी न करें और भोजन को आदरपूर्वक ग्रहण करें. Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती कामदा एकादशी का महत्व | Kamada Ekadashi Significance Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi:मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को सभी दुखों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. यह व्रत पापों का नाश करने वाला और पुण्य फल देने वाला माना जाता है. यह व्रत मनोकामनाओं को पूरा करने और सुख-समृद्धि लाने में मदद करता है.यह व्रत मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भी लाभकारी है. कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है. इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है. कामदा एकादशी का महत्व Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi:एकादशी के प्रकार एकादशी दो प्रकार की होती है। 1 सम्पूर्णा 2. विद्धा1) सम्पूर्णा – जिस तिथि में केवल एकादशी तिथि होती है अन्य किसी तिथि का उसमे मिश्रण नहीं होता उसे सम्पूर्णा एकादशी कहते है। 2) विद्धा एकादशी पुनः दो प्रकार की होती है2. A) पूर्वविद्धा – दशमी मिश्रित एकादशी को पूर्वविद्धा एकादशी कहते हैं। यदि एकादशी के दिन अरुणोदय काल (सूरज निकलने से 1घंटा 36 मिनट का समय) में यदि दशमी का नाम मात्र अंश भी रह गया तो ऐसी Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi एकादशी पूर्वविद्धा दोष से दोषयुक्त होने के कारण वर्जनीय है यह एकादशी दैत्यों का बल बढ़ाने वाली है। पुण्यों का नाश करने वाली है। वासरं दशमीविधं दैत्यानां पुष्टिवर्धनम ।मदीयं नास्ति सन्देह: सत्यं सत्यं पितामहः ॥ [पद्मपुराण]दशमी मिश्रित एकादशी दैत्यों के बल बढ़ाने वाली है इसमें कोई भी संदेह नहीं है। 2. B) परविद्धा – द्वादशी मिश्रित एकादशी को परविद्धा एकादशी कहते हैं।द्वादशी मिश्रिता ग्राह्य सर्वत्र एकादशी तिथि।द्वादशी मिश्रित एकादशी सर्वदा ही ग्रहण करने योग्य है। इसलिए भक्तों को परविद्धा एकादशी ही रखनी चाहिए। ऐसी एकादशी का पालन करने से भक्ति में वृद्धि होती है। Kamada Ekadashi Date 2025 Hindi दशमी मिश्रित एकादशी से तो पुण्य क्षीण होते हैं। एकादशी ये उपरोक्त मत वैष्णव, गौड़ीय वैष्णव एवं इस्कॉन संप्रदाय के मतानुसार है। आज कामदा एकादशी पर पढ़ें यह व्रत कथा, पापों से मिलती है मुक्ति Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Sapne me bichhu dekhna:सपने में बिच्छू सहित दिखें ये 5 चीज, तो समझ लीजिए चमकने वाली है आपकी किस्मत

Sapne me bichhu dekhna:सपने में हम कुछ भी देख सकते हैं। सपनों पर किसी का वश नहीं होता है। लेकिन, स्वप्न शास्त्र में कुछ सपने ऐसे बताए गए हैं जिनका आना बहुत ही शुभ माना गया है। इस तरह के सपनों का अर्थ है Sapne me bichhu dekhna कि आपको आने वाले समय में मां लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होगा। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में गुलाब का फूल समेत 5 चीजे दिखाई देना आपके अमीर बनने का संकेत हो सकता है। आइए जानते हैं सपने में यदि नीचे बताई गई 5 चीजें दिखाई दे रही हैं तो इसका अर्थ क्या है। Sapne me bichhu dekhna:हर किसी का सपना होता है कि वह बहुत अमीर बन जाए। इसके लिए व्यक्ति काफी मेहनत भी करता है। मेहनत के साथ साथ किस्मत का साथ देना भी बहुत जरूरी है। कई बार व्यक्ति को जो सपने दिखाई देते हैं Sapne me bichhu dekhna वह भी धन लाभ और अमीर बनने के संकेत देते हैं। स्वप्न शास्त्र में ऐसे सपनों के बारे में विस्तार से बताया गया है। जिन्हें देखने से पता चलता है कि आपके जीवन में कुछ अच्छा होने वाला है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में यदि ये 5 चीजें दिखाई दे जाएं तो इसका अर्थ है कि आपकी किस्मत चमकने वाली है। मां लक्ष्मी का आपके घर में वास होने जा रहा है। Devi Devtao Ko Sapne Me Dekhna:देवी-देवताओं को सपने में देखना सपने में अगर आप देवी- देवताओं को देखते हैं, तो यह एक बेहद शुभ संकेत है। Sapne me bichhu dekhna इसका मतलब है कि आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। साथ ही धनलाभ हो सकता है। किसी योजना में सफलता मिल सकती है। Sapne me Madumakhi ka Chhata ka Dikhna:सपने में मधुमक्खी का छत्ता का दिखना स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में मधुमक्खी का छत्ता दिखना बेहद शुभ माना जाता है। इसका मतलब है कि आपकी इनकम में जबदस्त बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही आप कारोबार हैं तो आपके व्यापार का विस्तार हो सकता है। पेड़ पर फल देखना:Sapne me fruit Dekhna सपने में फल से लदा पेड़ देखना शुभ माना जाता है। साथ ही इसका मतलब है कि आपको कही से धन की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही घर में कोई मांगलिक या धार्मिक कार्यक्रम हो सकता है। वहीं आपका कोई अटका हुआ काम बन सकता है। सपने में काला बिच्छू देखना Sapne Me Kala Bichhu Dekhna कुछ लोग सपने में बिच्छू या सांप देखकर डर जाते हैं। लेकिन स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में बिच्छु को देखना बेहद शुभ माना जाता है। साथ ही इसका मतलब है कि आपको इस सपने को देखने के बाद रुके हुए कार्य पूरे होने के भी आसार रहते हैं। तोता सपने में दिखना Sapne Me Tota Dikhna Sapne me bichhu dekhna:स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में तोता का दिखना शुभ फलदायी माना जाता है। इसका मतलब है कि आपको नौकरी और व्यापार में तरक्की मिलेगी। साथ ही जीवन में आपको सभी तरह कि सुख समृद्धि प्राप्त होगी।

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Baisakhi Festival 2025: पंजाब से जुड़ी इस फसल कटाई के पर्व की खास बातें

Baisakhi Festival 2025:वैशाखी त्यौहार सिख धर्म के पवित्र त्यौहारों में से एक है। वैशाखी त्यौहार हर साल 13 या 14 अप्रैल को मनाया जाता है और सौर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। वैशाखी जिसे बैसाखी के नाम से भी जाना जाता है। जो भारतीय उपमहाद्वीप के अन्य क्षेत्रों जैसे पोइला बोइशाख, बोहाग बिहू, विशु, पुथंडु और अन्य क्षेत्रों में बैशाख के पहले दिन मनाए जाते हैं। वैशाखी विशेष रूप से पंजाब और उत्तर भारत के राज्य में मनाया जाता है। सिख समुदाय के लिए वैशाखी का एक विशेष अर्थ है क्योंकि यह खालसा की स्थापना का प्रतीक है। इस दिन, दसवें और अंतिम गुरु – गुरु गोबिंद सिंह ने सिखों को खालसा या शुद्ध लोगों में संगठित किया। ऐसा करके, उन्होंने उच्च और निम्न के मतभेदों को समाप्त कर दिया और स्थापित किया कि सभी मनुष्य एक समान हैं। Baisakhi Festival 2025:बैसाखी बैसाखी को हर साल देशभर में उत्साह एवं जोश के साथ मनाया जाता है। साल 2025 में कब है बैसाखी का पर्व? कैसे मनाते है बैसाखी? जानने के लिए पढ़ें। बैसाखी के त्यौहार को प्रतिवर्ष वैशाख के महीने में मनाया जाता है। Baisakhi Festival 2025 वैसे तो साल भर अनेक व्रत, पर्व एवं त्यौहार मनाये जाते हैं। बैसाखी को वैसाखी,वैशाखी या फसल त्यौहार और नए वसंत के के प्रतीक के रूप में अत्यंत उत्साह एवं धूमधाम के साथ मनाया जाता है। हिंदुओं द्वारा बैसाखी के पर्व को नए साल के रूप में अधिकांश भारत में मनाया जाता है।  बैसाखी 2025 की तिथि एवं मुहूर्त बैसाखी का त्यौहार कब और क्यों मनाया जाता है? पंचांग के अनुसार, बैसाखी के दिन आकाश में विशाखा नक्षत्र होता है। पूर्णिमा में विशाखा नक्षत्र होने के कारण ही इस माह को बैसाखी कहते हैं। अन्य शब्दों में कहें तो, वैशाख महीने के प्रथम दिन को बैसाखी कहा जाता है। Baisakhi Festival 2025 बैसाखी से पंजाबी नववर्ष का आरंभ होता है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, बैसाखी को हर साल 13 अप्रैल या 14 अप्रैल के दिन मनाया जाता है। Baisakhi Festival 2025:बैसाखी का महत्व Baisakhi Festival 2025 बैसाखी का पर्व सामाजिक और सांस्कृतिक के साथ आर्थिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण है। खालसा पंथ का स्थापना दिवस होने के कारण जहां यह सिक्खों के लिए पवित्र दिन है, वहीं हिंदूओं के लिए भी कई मायनों से खास है। ऐसी मान्यता है कि बैसाख माह में भगवान बद्रीनाथ की यात्रा की शुरुआत होती है। पद्म पुराण में, बैसाखी के दिन स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। सूर्य के मेष राशि में परिवर्तन करने यानि मेष संक्रांति होने के कारण यह ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होता है। सौर नववर्ष का आरंभ भी इसी दिन से होता है। बैसाखी का पर्व उन तीन त्योहारों में से एक है जिसे सिखों के तीसरे गुरु, गुरु अमर दास द्वारा मनाया गया था। बैसाखी को अंतिम सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह के राज्याभिषेक के साथ-साथ सिख धर्म के खालसा पंथ की नींव के तौर पर मनाया जाता है, इसलिए इसे सिख धर्म के लिए विशेष माना गया है। देशभर में बैसाखी को फसल के मौसम के अंत का प्रतीक माना जाता है Baisakhi Festival 2025 जो किसानों के लिए विशेष रूप से समृद्धि का समय है। वैसाखी के नाम से भी प्रसिद्ध है और यह खुशी और उत्सव का पर्व है। यह त्यौहार मुख्य रूप से पंजाब और हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण होता है। बड़ी सिख आबादी के द्वारा बैसाखी बहुत ऊर्जा और जोश के साथ मनाई जाती है।  यह त्यौहार पश्चिम बंगाल में पोहेला बोइशाख, तमिलनाडु में पुथंडु, असम में बोहाग बिहु, पूरामुद्दीन केरल, उत्तराखंड में बिहू, ओडिशा में महा विष्णु संक्रांति और आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादी के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है। किसानों का त्यौहार बैसाखी इस पर्व के दिन सूर्य की स्थिति में परिवर्तन होने के कारण धूप तेज होने लगती है, साथ ही गर्मी का आरंभ हो जाता है। सूरज की गर्माहट से रबी की फसल पक जाती है इसलिए किसानों के द्वारा इसे एक उत्सव की तरह मनाया जाता है। अप्रैल के महीने में सर्दी पूरी तरह समाप्त हो चुकी होती है और गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। इस त्यौहारको मौसम में होने वाले कुदरती बदलाव के कारण भी मनाया जाता है. बैसाखी से जुड़ीं पौराणिक मान्यता Baisakhi Festival 2025:ऐसा पौराणिक मान्यता है कि गुरु तेग बहादुर जो सिखों के 9वें गुरु है, वो औरंगज़ेब के साथ युद्ध करते हुए शहीद हो गए थे। उस समय तेग बहादुर मुगलों द्वारा हिन्दुओं पर किए जा रहे अत्याचार के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे। इस युद्ध में उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र गुरु गोबिन्द सिंह अगले गुरु बने। सन् 1650 में पंजाब मुगलों, अत्याचारियों और भ्रष्टाचारियों का अत्याचार झेल रहा था। Baisakhi Festival 2025 उस समय समाज में लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा था और लोगों को न्याय की कही उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी।  ऐसी विपरीत परिस्थितियों में गुरू गोबिन्द सिंह ने सभी लोगों में अत्याचार के ख़िलाफ़ आवाज उठाने और उनमें साहस भरने का कार्य किया था। उन्होंने आनंदपुर में सिखों के संगठन का निर्माण करने के लिए लोगों का आवाह्न किया। Baisakhi Festival 2025 इस सभा में ही उन्होंने तलवार उठाकर लोगों से ये सवाल किया कि आप में से वे बहादुर योद्धा कौन हैं जो बुराई के ख़िलाफ शहीद होने के लिए तैयार हैं। उस समय सभा में से पाँच योद्धा सामने आए और इन्ही पांच योद्धाओं को “पंच प्यारे” कहा गया जिन्हे खालसा पंथ का नाम दिया गया। बैसाखी कैसे मनाते है? बैसाखी को मुख्य रूप से किसी गुरुद्वारे या किसी खुले स्थान पर मनाया जाता है Baisakhi Festival 2025 जिसमें भांगड़ा और गिद्दा आदि नृत्यु करते हैं। इस पर्व को निम्नलिखित तरीके से मनाया जाता है।  इस दिन लोग प्रातःकाल उठकर गुरूद्वारे में जाकर प्रार्थना करते हैं। बैसाखी में गुरुद्वारे में गुरुग्रंथ साहिब जी के स्थान को जल और दूध से शुद्ध किया जाता है। उसके बाद पवित्र किताब को ताज के साथ उसके स्थान पर रखा जाता है। इसके बाद किताब को पढ़ा जाता है और अनुयायी ध्यानपूर्वक गुरू की वाणी सुनते हैं। इस दिन श्रद्धालुयों के लिए विशेष प्रकार का अमृत तैयार किया जाता है जो बाद में बाँटा जाता है। परंपरा के अनुसार,अनुयायी एक पंक्ति

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June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची निम्नलिखित है

June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्यौहार आने वाले हैं, जो हमारे जीवन में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। इन त्यौहारों में मिथुन संक्रांति पितृ दिवस, संकष्टी गणेश चतुर्थी, पूर्णिमा, कबीर जयंती, पूर्णिमा, सत्य व्रत, गंगा दशहरा, विश्व पर्यावरण दिवस, और कई अन्य महत्वपूर्ण त्यौहार शामिल हैं। ये त्यौहार न केवल हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ते हैं, बल्कि हमें आध्यात्मिक ज्ञान और शांति की प्राप्ति भी कराते हैं। इन त्यौहारों के महत्व और उनके पीछे की कहानियों को जानने से हमें अपनी जड़ों को समझने और अपनी संस्कृति को समृद्ध बनाने में मदद मिलती है। यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि ये त्यौहार क्यों मनाए जाते हैं और उनके पीछे की पौराणिक कथाएं क्या हैं। इन त्यौहारों के दौरान, लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं, और आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करते हैं। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इन त्यौहारों का महत्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से भी है। ये त्यौहार हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझने और समृद्ध बनाने में मदद करते हैं।  इस लेख में, हम आपको जून 2025 में आने वाले विशेष व्रत और त्यौहारों की एक पूरी लिस्ट प्रदान करेंगे, साथ ही हम आपको इन त्यौहारों के महत्व, उनके पीछे की कहानियों, और उनके आयोजन के तरीकों के बारे में भी बताएंगे…. June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list:जून 2025 में प्रमुख व्रत और त्योहारों की विस्तृत जानकारी हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति भी लाते हैं। आइए देखें जून 2025 में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों का विवरण। जून 2025 में प्रमुख व्रत और त्योहारों की विस्तृत जानकारी हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व होता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list यह धार्मिक अनुष्ठान न केवल आध्यात्मिक उन्नति के लिए आवश्यक हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शांति भी लाते हैं। आइए देखें जून 2025 में आने वाले महत्वपूर्ण व्रत और त्योहारों का विवरण। 1 जून (रविवार) – षष्ठी व्रत षष्ठी व्रत का संबंध भगवान स्कंद (कार्तिकेय) से होता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इसे विशेष रूप से संतान प्राप्ति और उनके उत्तम स्वास्थ्य के लिए रखा जाता है। 2 जून (सोमवार) – सोमवार व्रत यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इसे करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और इच्छाओं की पूर्ति होती है। 3 जून (मंगलवार) – वृषभ व्रत, दुर्गाष्टमी व्रत, धूमावती जयंती वृषभ व्रत: वृषभ राशि के जातकों के लिए यह दिन विशेष शुभ होता है। दुर्गाष्टमी व्रत: मां दुर्गा की कृपा प्राप्त करने के लिए अष्टमी के दिन यह व्रत रखा जाता है। धूमावती जयंती: यह दिन देवी धूमावती को समर्पित है, जो तंत्र साधना करने वालों के लिए विशेष महत्व रखती हैं। 4 जून (बुधवार) – महेश नवमी यह पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है और विशेष रूप से माहेश्वरी समाज द्वारा मनाया जाता है। 5 जून (गुरुवार) – गंगा दशहरा, विश्व पर्यावरण दिवस गंगा दशहरा: इस दिन गंगा नदी स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थी। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list गंगा स्नान और दान-पुण्य करने से पापों का नाश होता है। विश्व पर्यावरण दिवस: पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 6 जून (शुक्रवार) – निर्जला एकादशी निर्जला एकादशी व्रत को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना जाता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखा जाता है, जिससे हजारों एकादशी व्रत का पुण्य प्राप्त होता है। 7 जून (शनिवार) – बकरीद (ईद-उल-अज़हा) यह इस्लाम धर्म का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे कुर्बानी के रूप में मनाया जाता है। 8 जून (रविवार) – प्रदोष व्रत शिव जी की उपासना के लिए यह व्रत रखा जाता है। June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list इसे करने से सभी दोष समाप्त होते हैं। 10 जून (मंगलवार) – सत्य व्रत, पूर्णिमा व्रत, वैट सावित्री पूर्णिमा सत्य व्रत: यह व्रत सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने और पूजा करने के लिए किया जाता है। पूर्णिमा व्रत: पूर्णिमा तिथि को चंद्र देव की पूजा की जाती है। वैट सावित्री पूर्णिमा: यह व्रत सुहागिन स्त्रियों द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है। 11 जून (बुधवार) – देव स्नान पूर्णिमा, कबीर जयंती देव स्नान पूर्णिमा: इस दिन भगवान जगन्नाथ का विशेष अभिषेक किया जाता है। कबीर जयंती: संत कबीर का जन्म इसी दिन हुआ था, June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list जो समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे। 14 जून (शनिवार) – संकष्टी गणेश चतुर्थी गणपति बप्पा की कृपा पाने के लिए यह व्रत रखा जाता है। इसे करने से संकट दूर होते हैं। 15 जून (रविवार) – मिथुन संक्रांति, पितृ दिवस मिथुन संक्रांति: यह दिन सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश करने का संकेत देता है और विशेष धार्मिक कार्य किए जाते हैं। पितृ दिवस: पितरों (पूर्वजों) को सम्मान देने के लिए यह दिन मनाया जाता है। 18 जून (बुधवार) – कालाष्टमी, बुधाष्टमी व्रत कालाष्टमी: भगवान काल भैरव की पूजा इस दिन की जाती है। बुधाष्टमी व्रत: यह व्रत विशेष रूप से बुध ग्रह से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए किया जाता है। 21 जून (शनिवार) – योगिनी एकादशी यह व्रत पापों के नाश के लिए श्रेष्ठ माना जाता है और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। 23 जून (सोमवार) – सोम प्रदोष व्रत, मास शिवरात्रि सोम प्रदोष व्रत: शिव जी की कृपा पाने के लिए यह व्रत किया जाता है। मास शिवरात्रि: इस दिन विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना की जाती है। 24 जून (मंगलवार) – रोहिणी व्रत यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है June 2025 Hindu Calendar Vrat tyohar list और विशेष रूप से जैन धर्म के अनुयायियों द्वारा किया जाता है। 25 जून (बुधवार) – अमावस्या अमावस्या को पितृ तर्पण और श्राद्ध कर्म करने का विशेष महत्व होता है। 26 जून (गुरुवार) – गुप्त नवरात्र प्रारंभ, चंद्र दर्शन गुप्त नवरात्र: यह तंत्र साधकों

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बजरंग बाण | Bajrang Baan

Bajrang Baan (बजरंग बाण) : भौतिक मनोकामनाओं की पूर्ति के लिये बजरंग बाण/Bajrang Baan का अमोघ विलक्षण प्रयोग करे, अपने इष्ट कार्य की सिद्धि के लिए मंगल अथवा शनिवार के दिन हनुमानजी के सामने लाल आसन पर बैठकर 108 बार पाठ करे। जप के प्रारम्भ में यह संकल्प अवश्य लें कि आपका कार्य जब भी होगा, Bajrang Baan अब शुद्ध उच्चारण से हनुमान जी की छवि पर ध्यान केन्द्रित करके बजरंग बाण का जाप प्रारम्भ करें। “श्रीराम” से लेकर “सिद्ध करैं हनुमान” तक एक बैठक में ही इसकी एक माला जप करनी है। गूगुल की सुगन्ध देकर जिस घर में बगरंग बाण/Bajrang Baan का नियमित पाठ होता है, वहाँ दुर्भाग्य, दारिद्रय, भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य शारीरिक कष्ट आ ही नहीं सकते, समयाभाव में जो व्यक्ति नित्य पाठ करने में असमर्थ हो, Bajrang Baan उन्हें कम से कम प्रत्येक मंगलवार को यह जप अवश्य करना चाहिए। दीप दान Bajrang Baan हनुमान जी के अनुष्ठान मे अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। Bajrang Baan पाँच अनाजों (गेहूँ, चावल, मूँग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएँ। Bajrang Baan बत्ती के लिए अपनी लम्बाई के बराबर कलावे का एक तार लें अथवा एक कच्चे सूत को लम्बाई के बराबर काटकर लाल रंग में रंग लें। इस धागे को पाँच बार मोड़ लें। इस प्रकार के धागे की बत्ती को सुगन्धित तिल के तेल में डालकर प्रयोग करें। समस्त पूजा काल में यह दिया जलता रहना चाहिए। हनुमानजी के लिये गूगुल की धूनी की भी व्यवस्था रखें। Bajrang Baan:बजरंग बाण ध्यान श्रीराम अतुलित बलधामं हेमशैलाभदेहं।दनुज वन कृशानुं, ज्ञानिनामग्रगण्यम्।। सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं।रघुपति प्रियभक्तं वातजातं नमामि।। दोहा निश्चय प्रेम प्रतीति ते, विनय करैं सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।। चौपाई जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी।। जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै।। जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि विस्तारा।। आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका।। जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा।। बाग उजारि सिन्धु मंह बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा।। अक्षय कुमार को मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा।। लाह समान लंक जरि गई। जै जै धुनि सुर पुर में भई।। अब विलंब केहि कारण स्वामी। कृपा करहु प्रभु अन्तर्यामी।। जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होई दुख करहु निपाता।। जै गिरधर जै जै सुख सागर। सुर समूह समरथ भट नागर।। ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले। वैरहिं मारू बज्र सम कीलै।। गदा बज्र तै बैरिहीं मारौ। महाराज निज दास उबारों।। सुनि हंकार हुंकार दै धावो। बज्र गदा हनि विलम्ब न लावो।। ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीसा। ॐ हुँ हुँ हुँ हनु अरि उर शीसा।। सत्य होहु हरि सत्य पाय कै। राम दुत धरू मारू धाई कै।। जै हनुमन्त अनन्त अगाधा। दुःख पावत जन केहि अपराधा।। पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत है दास तुम्हारा।। वन उपवन जल-थल गृह माहीं। तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं।। पाँय परौं कर जोरि मनावौं। अपने काज लागि गुण गावौं।। जै अंजनी कुमार बलवन्ता। शंकर स्वयं वीर हनुमंता।। बदन कराल दनुज कुल घालक। भूत पिशाच प्रेत उर शालक।। भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल वीर मारी मर।। इन्हहिं मारू, तोंहि शमथ रामकी। राखु नाथ मर्याद नाम की।। जनक सुता पति दास कहाओ। ताकी शपथ विलम्ब न लाओ।। जय जय जय ध्वनि होत अकाशा। सुमिरत होत सुसह दुःख नाशा।। उठु-उठु चल तोहि राम दुहाई। पाँय परौं कर जोरि मनाई।। ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनु हनुमंता।। ॐ हं हं हांक देत कपि चंचल। ॐ सं सं सहमि पराने खल दल।। अपने जन को कस न उबारौ। सुमिरत होत आनन्द हमारौ।। ताते विनती करौं पुकारी। हरहु सकल दुःख विपति हमारी।। ऐसौ बल प्रभाव प्रभु तोरा। कस न हरहु दुःख संकट मोरा।। हे बजरंग, बाण सम धावौ। मेटि सकल दुःख दरस दिखावौ।। हे कपिराज काज कब ऐहौ। अवसर चूकि अन्त पछतैहौ।। जन की लाज जात ऐहि बारा। धावहु हे कपि पवन कुमारा।। जयति जयति जै जै हनुमाना। जयति जयति गुण ज्ञान निधाना।। जयति जयति जै जै कपिराई। जयति जयति जै जै सुखदाई।। जयति जयति जै राम पियारे। जयति जयति जै सिया दुलारे।। जयति जयति मुद मंगलदाता। जयति जयति त्रिभुवन विख्याता।। ऐहि प्रकार गावत गुण शेषा। पावत पार नहीं लवलेषा।। राम रूप सर्वत्र समाना। देखत रहत सदा हर्षाना।। विधि शारदा सहित दिनराती। गावत कपि के गुन बहु भाँति।। तुम सम नहीं जगत बलवाना। करि विचार देखउं विधि नाना।। यह जिय जानि शरण तब आई। ताते विनय करौं चित लाई।। सुनि कपि आरत वचन हमारे। मेटहु सकल दुःख भ्रम भारे।। एहि प्रकार विनती कपि केरी। जो जन करै लहै सुख ढेरी।। याके पढ़त वीर हनुमाना। धावत बाण तुल्य बनवाना।। मेटत आए दुःख क्षण माहिं। दै दर्शन रघुपति ढिग जाहीं।। पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की।। डीठ, मूठ, टोनादिक नासै। परकृत यंत्र मंत्र नहीं त्रासे।। भैरवादि सुर करै मिताई। आयुस मानि करै सेवकाई।। प्रण कर पाठ करें मन लाई। अल्प-मृत्यु ग्रह दोष नसाई।। आवृत ग्यारह प्रतिदिन जापै। ताकी छाँह काल नहिं चापै।। दै गूगुल की धूप हमेशा। करै पाठ तन मिटै कलेषा।। यह बजरंग बाण जेहि मारे। ताहि कहौ फिर कौन उबारे।। शत्रु समूह मिटै सब आपै। देखत ताहि सुरासुर काँपै।। तेज प्रताप बुद्धि अधिकाई। रहै सदा कपिराज सहाई।। दोहा प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै। सदा धरैं उर ध्यान।। तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान।।

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Hanuman Jayanti kab ki hai: हनुमान जयंती कब है? नोट कर लें सही तिथि और पूजा विधि

Hanuman Jayanti kab ki hai: हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बजरंग बली हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और हनुमान जी पूजा करने से जीवन से सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है, तो आइए जानते हैं कि इस साल कब मनाई जाएगी हनुमान जयंती. Hanuman Jayanti Date and Importance: हनुमान जन्मोत्सव हिंदू धर्म में एक पवित्र पर्व है, जो भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार संकट मोचन हनुमान जी आज भी धरती पर विद्यमान हैं और भक्तों के कष्टों को हरने वाले देवता माने जाते हैं। हर साल यह पर्व चैत्र माह की शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। Hanuman Jayanti kab ki hai इस दिन श्री राम और हनुमान जी का सच्चे मन से स्मरण करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। श्री हनुमान जन्मोत्सव या हनुमान जयंती श्री राम भक्त, वानर राज, वीर हनुमान जी के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। श्री हनुमंत शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक हैं, वह जादुई शक्तियों, भूत, प्रेत एवं बुरी आत्माओं पर विजय प्राप्त करने वाले देव के रूप मे पूजे जाते हैं। Lord Hanuman: मंगलवार के दिन ऐसे करें हनुमान जी की पूजा, जीवन के संकटों से मिलेगा छुटकारा हनुमान जयंती भारत के विभिन्न क्षेत्रों मे अलग-अलग समय पर मनाई जाती है, उत्तर भारत मे यह त्यौहार मुख्य रूप से चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है। हनुमान जयंती के दिन उपवास रखने वाले व्यक्ति को एक दिन ब्रह्मचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए। हनुमान जयंती तिथि |Hanuman Jayanti 2025 Date हिंदू पंचांग के अनुसार, हनुमान जयंती यानी चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 12 अप्रैल को सुबह 3 बजकर 21 मिनट पर होगी. साथ ही तिथि का समापन अगले दिन 13 अप्रैल को सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा. Hanuman Jayanti kab ki hai उदया तिथि के अनुसार, हनुमान जयंती 12 अप्रैल को मनाई जाएगी. श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत Hanuman Jayanti kab ki hai:हनुमान जन्मोत्सव 2025 कब है? इस वर्ष 12 अप्रैल 2025 को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पूर्णिमा तिथि 12 अप्रैल को सुबह 3:21 बजे से शुरू होकर 13 अप्रैल सुबह 5:51 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार हनुमान जन्मोत्सव 12 अप्रैल को मनाया जाएगा। हनुमान जयंती पूजा विधि |Hanuman Jayanti Puja Vidhi Hanuman Jayanti kab ki hai हनुमान जयंती के दिन हनुमान जी के साथ भगवान राम और माता सीता की पूजा की जाती है. इस दिन सुबह उठकर स्नान कर लाल रंग के वस्त्र पहने. उसके बाद हनुमान जी को सिंदूर, लाल रंग के फूल, तुलसी दल, चोला और बूंदी के लड्डू का प्रसाद अर्पित करें. उसके बाद मंत्र जाप करें. फिर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें. अंत में आरती करें और सभी में प्रसाद वितरित करें. April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें हनुमान जयंती का महत्व |Hanuman Jayanti Significance Hanuman Jayanti kab ki hai हिंदू धर्म में हनुमान जी को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है. कहते हैं वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, Hanuman Jayanti kab ki hai जिससे उसके जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं. इस दिन पूजा में उन्हें फूल, माला, सिंदूर चढ़ाने के साथ बूंदी या बेसन के लड्डू, तुलसी दल अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं. पूजा विधि         “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः॥ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्॥” हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें। आरती कर प्रसाद वितरित करें। हनुमान जन्मोत्सव के इस शुभ अवसर पर विधिपूर्वक पूजा करने से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है Hanuman Jayanti kab ki hai और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।  Bandi Mochan Hanuman Stotra | बंदी मोचन हनुमान स्तोत्र

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Jain Festival 2025 Calendar 2025: में कब-कब मनाए जाएंगे जैन धर्म के प्रमुख त्योहार, महावीर स्वामी के बारे में जानें ये ख़ास बातें

Jain Festival 2025 Calendar 2025 : महावीर जयंती इस साल चार अप्रैल को है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती जैन समुदाय का विशेष पर्व होता है. इस जयंती को भगवान महावीर स्वामी के जन्म के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे. उनका जन्म ईसा पूर्व 599 वर्ष माना जाता है. Jain Festival 2025 Calendar 2025 उनके पिता राजा सिद्धार्थ और माता रानी त्रिशला थीं और बचपन में उनका नाम वर्द्धमान था. Mahavir Jayanti 2025: महावीर जयंती 2025 कब है? Jain Festival 2025 Calendar 2025 महावीर जयंती हिंदू चंद्र कैलेंडर में चैत्र महीने के 13वें दिन आती है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में मार्च या अप्रैल में आती है। इस वर्ष, महावीर जयंती 10 अप्रैल, 2025 (गुरुवार) को मनाई जाएगी। Jain calendar 2025 Festival: जैन धर्म, अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह जैसे महान सिद्धांतों पर आधारित, विश्व के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है। इस धर्म के संस्थापक ऋषभदेव माने जाते हैं। जैन धर्म का एक विशेष कैलेंडर होता है, Jain Festival 2025 Calendar 2025 जिसमें उनके सभी व्रत और त्योहारों की जानकारी दी जाती है। जैसे हिंदू कैलेंडर में त्योहारों का उल्लेख होता है, वैसे ही जैन कैलेंडर में भी विभिन्न व्रत और पर्वों की तिथियां निर्धारित होती हैं। यहां 2025 के जैन कैलेंडर में महत्वपूर्ण व्रत और पर्वों के बारे में जानकारी है। जैन कैलेंडर के 12 महीने हिंदू कैलेंडर की तरह ही जैन कैलेंडर में भी 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीना 30 दिनों का होता है। इन 12 महीनों के नाम, कार्तक, मगसर, पोष, महा, फागन, चैत्र, वैशाख, जेठ, आषाढ़, श्रावण, भादरवो और आसो है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 जैन धर्म का नववर्ष दिवाली के अगले दिन से शुरू होता है। यह दिन वीर निर्वाण संवत के अनुसार वर्ष का पहला दिन माना जाता है। जैन धर्म के अनुयायी अपने व्रत और त्योहारों को आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मिक शुद्धि के लिए मनाते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2025 में जैन धर्म के कौन से त्योहार किस दिन मनाए जाएंगे।  जैन धर्म किन चीज़ों पर आधारित है? हिंदू धर्म की तरह जैन धर्म का भी कोई संस्थापक नहीं है. जैन धर्म 24 तीर्थंकरों के जीवन और शिक्षा पर आधारित है. तीर्थंकर यानी वो आत्माएं जो मानवीय पीड़ा और हिंसा से भरे इस सांसारिक जीवन को पार कर आध्यात्मिक मुक्ति के क्षेत्र में पहुंच गई हैं. सभी जैनियों के लिए 24वें तीर्थंकर महावीर जैन का ख़ास महत्व है. महावीर इन आध्यात्मिक तपस्वियों में से अंतिम तीर्थंकर थे. लेकिन, जहां औरों की ऐतिहासिकता अनिश्चित है वहीं, महावीर जैन के बारे में पक्के तौर पर कहा जा सकता है कि उन्होंने इस धरती पर जन्म लिया. अहिंसा के इस उपदेशक का जन्म क्षत्रिय जाति में हुआ. वो गौतम बुद्ध के समकालीन थे. Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती का उत्सव  Jain Festival 2025 Calendar 2025:महावीर जयंती को दुनिया भर में जैन धर्मावलंबियों द्वारा जीवंत उत्सव और गहरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस उत्सव में आम तौर पर ये शामिल होते हैं: जुलूस और रथ यात्राएँ : कई शहरों और कस्बों में भव्य जुलूस निकाले जाते हैं, जिन्हें रथ यात्रा के नाम से जाना जाता है। Jain Festival 2025 Calendar 2025 भगवान महावीर की मूर्तियों को भव्य रूप से सजाए गए रथों पर ले जाया जाता है, साथ में भक्त भजन गाते हैं, धार्मिक गीत गाते हैं और पारंपरिक नृत्य करते हैं। मंदिर भ्रमण और प्रार्थना : जैन धर्मावलंबी जैन मंदिरों (देरासार) में प्रार्थना करने और धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेने के लिए जाते हैं। भगवान महावीर की मूर्तियों का विशेष अभिषेक (औपचारिक स्नान) किया जाता है। व्याख्यान और प्रवचन: धार्मिक नेता और विद्वान भगवान महावीर के जीवन और शिक्षाओं पर व्याख्यान और प्रवचन देते हैं। ये सत्र जैन दर्शन के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं और श्रोताओं को अपने दैनिक जीवन में इसके सिद्धांतों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। धर्मार्थ गतिविधियाँ और सामुदायिक सेवा: इस शुभ दिन पर, जैन लोग विभिन्न धर्मार्थ गतिविधियों में संलग्न होते हैं, जैसे कि जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और दवाएँ दान करना। वे रक्तदान शिविर और निःशुल्क चिकित्सा जाँच शिविर भी आयोजित करते हैं। पशु आश्रयों को अक्सर सहायता दी जाती है, और जानवरों को बचाने और उनकी रक्षा करने के प्रयास किए जाते हैं। उपवास और ध्यान: कई जैन लोग महावीर जयंती पर उपवास रखते हैं, भोजन से परहेज करते हैं या केवल कुछ प्रकार के भोजन का सेवन करते हैं। वे आंतरिक शांति और आध्यात्मिक विकास की तलाश में ध्यान और चिंतन के लिए भी समय समर्पित करते हैं। बूचड़खानों से पशुओं को मुक्त करना: बूचड़खानों में जाने वाले पशुओं को मुक्त करना एक विशेष रूप से प्रभावशाली प्रथा है। करुणा का यह कार्य अहिंसा के सिद्धांत का प्रतीक है और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा के लिए जैन प्रतिबद्धता को मजबूत करता है। सजावट और रोशनी: जैन मंदिरों और घरों को रंग-बिरंगे झंडों, फूलों और रोशनी से सजाया जाता है, जिससे उत्सव का माहौल बनता है। किसी भी जीव को नुकसान पहुँचाए बिना तैयार किए गए विशेष जैन व्यंजन परोसे जाते हैं। 2025: जैन धर्म के प्रमुख पर्व-त्योहार Jain Festival 2025 Calendar 2025 2 जनवरी 2025 यतीन्द्र सुरेश्वर दिवस   गुरुवार 02 जनवरी 2025 त्रिस्तुति     गुरुवार 06 जनवरी 2025 श्री राजेंद्र सूरीश्वर दिवस सोमवार 26 जनवरी 2025  शीतलनाथ जन्म तप   रविवार 27 जनवरी 2025 मेरु त्रयोदशी     सोमवार 27 जनवरी 2025  आदिनाथ निर्वाण कल्याणक  सोमवार 28 जनवरी 2025 ऋषभदेव मोक्ष   मंगलवार 02 फरवरी 2025  दशलक्षण (3/3) प्रारम्भ रविवार 04 फरवरी 2025 मर्यादा महोत्सव   मंगलवार 11 फरवरी 2025  श्री जीतेन्द्र रथ यात्रा  मंगलवार 11 फरवरी 2025   दशलक्षण (3/3) समाप्त  मंगलवार 07 मार्च 2025   अष्टान्हिका (3/3) प्रारम्भ   शुक्रवार 14 मार्च 2025  अष्टान्हिका (3/3) समाप्त शुक्रवार 02 अप्रैल 2025  दशलक्षण (1/3) प्रारम्भ बुधवार 04 अप्रैल 2025 आयंबिल ओली प्रारंभ शुक्रवार 10 अप्रैल 2025 महावीर जयंती  गुरुवार 11 अप्रैल 2025 दशलक्षण (1/3) समाप्त     शुक्रवार 12 अप्रैल 2025  आयंबिल ओली अंत  शनिवार 07 मई 2025 श्री महावीर स्वामी कैवल्य ज्ञान दिवस बुधवार 13 मई 2025 ज्येष्ठ जिनवार व्रत प्रारंभ मंगलवार 24 मई 2025  श्री अनंतनाथ जन्म तप शनिवार 11 जून 2025 

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Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai : अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत कब है? जानें डेट, पूजन व व्रत पारण का समय

Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai: कामदा एकादशी व्रत चैत्र नवरात्रि के राम नवमी के बाद की पहली एकादशी है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह एकादशी आमतौर पर मार्च या अप्रैल महीने में आती है। Kamada Ekadashi 2025: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कामदा एकादशी व्रत रखा जाएगा। यह अप्रैल माह का पहला एकादशी व्रत होगा। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। इस बार Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि व रवि योग बनने से इस दिन का महत्व बढ़ रहा है। जानें अप्रैल माह की पहली एकादशी कब है और पूजन व व्रत पारण का शुभ मुहूर्त- कब है कामदा एकादशी | Kamada Ekadashi 2025 Date  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 7 अप्रैल की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो जाएगी और इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 8 अप्रैल को 5 बजकर 42 मिनट पर होगा. ऐसे में कामदा एकादशी का व्रत 8 अप्रैल, मंगलवार के दिन रखा जाएगा.  कब किया जाएगा कामदा एकादशी का पारण (Kamada Ekadashi Paran Time)  Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai कामदा एकादशी का पारण (Paran) द्वादशी तिथि पर होता है. ऐसे में 9 अप्रैल बुधवार के दिन कामदा एकादशी व्रत का पारण किया जाएगा. व्रत पारण करने यानी व्रत समाप्त करने का शुभ मुहूर्त 9 अप्रैल सुबह 7 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगा और 9 बजकर 52 मिनट तक रहेगा. इस समयावधि में एकादशी व्रत का पारण करना शुभ होगा. Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त कामदा एकादशी की पूजा विधि | Kamada Ekadashi Puja Vidhi  कामदा एकादशी Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai के दिन सुबह-सवेरे उठकर स्नान पश्चात व्रत का प्रण लिया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है. पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस रंग को श्रीहरि का प्रिय रंग कहा जाता है. पीले रंग के वस्त्र पहनना, चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाना, पीले फूल, पीले फल और पीले फल को पूजा में शामिल करना बेहद शुभ होता है. एकादशी की पूजा (Ekadashi Puja) में भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जाता है. पूजा करते हुए एकादशी की व्रत कथा पढ़ी जाती है, आरती होती है, भोग लगाने के बाद पूजा संपन्न की जाती है और भगवान विष्णु के आशीर्वाद की कामना की जाती है.  April 2025 vrat tyohar list:अप्रैल 2025 के व्रत त्योहार की लिस्ट, हनुमान जयंती, अक्षय तृतीया कब जानें कामदा एकादशी पूजन मुहूर्त- ब्रह्म मुहूर्त- 04:32 ए एम से 05:18 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:58 ए एम से 12:48 पी एम विजय मुहूर्त- 02:30 पी एम से 03:20 पी एम अमृत काल- 06:13 ए एम से 07:55 ए एम सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम रवि योग- 06:03 ए एम से 07:55 ए एम कामदा एकादशी का महत्व- हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, कामदा एकादशी व्रत रखने से कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai राक्षस योनि से मुक्ति मिलने की मान्यता है। जगत के पालन हार भगवान विष्णु की कृपा से सभी पाप मिट जाते हैं। कामदा एकादशी व्रत पारण का मुहूर्त- कामदा एकादशी व्रत का पारण 09 अप्रैल 2025 को किया जाएगा। Kamada Ekadashi 2025 Kab Hai एकादशी व्रत पारण का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 02 मिनट से सुबह 08 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। पारण तिति के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय रात 10 बजकर 55 मिनट है। may 2025 vrat tyohar list: मई 2025 व्रत और त्योहारों की संपूर्ण सूची एवं महत्व (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Swapna Shastra Ke Mutabik Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna:पने में मां दुर्गा को देखने से मिलते हैं ये शुभ संकेत, जीवन में हो सकते हैं ये बदलाव

Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna: माता दुर्गा को सपने में अलग-अलग रूपों में देखने का क्या अर्थ होता है, इसके बारे में विस्तार से जानें हमारे लेख में। सपने में कई तरह के अनुभव हमें होते हैं। स्वप्नशास्त्र की मानें तो हर सपना हमको कुछ न कुछ संकेत देता है। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि अगर सपने में आपको दुर्गा माता, अलग-अलग रूपों में दिखती है तो इसका क्या अर्थ लगाया जाता है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna ये सपना कैसे हमारे जीवन में परिवर्तन ला सकता है आइए विस्तार से जानते हैं।  Sapne Me Durga Mata ka Mandir Dekhna:सपने में माता दुर्गा का मंदिर देखना  माता दुर्गा के मंदिर तो माता के सभी भक्त जाते हैं, लेकिन कभी सपने में माता का मंदिर दिख जाए तो इसे बेहद शुभ संकेत माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि आप धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna माता की कृपा आप पर बनी हुई है और आप सही रास्ते पर अग्रसर हैं। यह सपना आपकी मनोकामनाओं को भी पूरा करने वाला माना गया है। वहीं आपको बार-बार सपने में माता का मंदिर दिख रहा है तो इसका अर्थ है कि, मोह-माया के बंधनों को आप तोड़ सकते हैं और विरक्ति का भाव आपके मन में जाग सकता है।  Sapne Me Srangar Kiye Mata Ko Dekhne Ka Matlab:सपने में श्रृंगार किये माता को देखने का मतलब अगर सपने में आप दुर्गा माता को श्रृंगार किये हुए देखते हैं तो ये सपना भी शुभ मान गया है। ये सपना आपके जीवन में आने वाली खुशियों की ओर संकेत करता है। इस सपने के आने के बाद कोई अच्छी खबर आपको मिल सकती है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna इसके साथ ही विवाहित लोग इस सपने को देखते हैं तो उनके वैवाहिक जीवन में आ रही परेशानियां दूर होती हैं। करियर से जुड़ा कोई अच्छा समाचार भी आपको मिल सकता है।  Dreams About Hairs : सपने में काले सफेद बाल देखना देता है भविष्य में होने वाली इन घटनाओं का संकेत सपने में दुर्गा माता की मूर्ति देखने का अर्थ Sapne Mai Durga Mata Ki Murti Dekhne Ka Arth सपने में अगर आप माता दुर्गा की मूर्ति देखते हैं तो इसका अर्थ यह लगाया जाता है कि, जीवन की कोई बड़ी परेशानी दूर हो सकती है। अपने जीवन में जिस संतुलन की आप कामना करते हैं वो आपको प्राप्त होगा। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna हालांकि सपने में माता की खंडित मूर्ति को देखना अच्छा नहीं माना जाता, ऐसा सपना आने के बाद आपको हर कार्य सोच-समझकर करना चाहिए। अगर आप करियर या पारिवारिक जीवन से जुड़ा कोई निर्णय लेने वाले हैं तो बड़े-बजुर्गों की सलाह के बाद ही आपको आगे बढ़ना चाहिए।  Lion Dream Interpretation: सपने में शेर को देखना देता है कुछ विशेष संकेत, बदल सकती है किस्मत मिलते हैं ये शुभ संकेत Milte hai Ye Subh Sanket स्वप्न शास्त्र की मानें तो सपने में मां दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति देखना अधिक शुभ माना गया है। इस सपने का अर्थ यह है कि जीवन में लंबे समय से चली आ रही परेशानियों से छुटकारा मिलने वाला है। इसके अलावा मानसिक समस्या भी जल्द ही खत्म हो सकती है। इसके अलावा यदि आपने सपने में मां दुर्गा के मंदिर को देखा है, तो यह सपना शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ यह है कि आप आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से सक्रिय हो रहे हैं। इस तरह के सपने देखने से मां दुर्गा की कृपा आप पर बनी हुई है Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna और साथ ही मनचाही मनोकामनाएं पूरी होने वाली हैं। यदि आपने सपने में मां दुर्गा को श्रृंगार के साथ देखा है, तो यह सपना शुभ माना जाता है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna इस सपने से जीवन में खुशियों के संकेत मिलते हैं। विवाहित लोगों को इस तरह के सपने देखने से जीवन में चल रही समस्याएं खत्म होती हैं। सपने में मां दुर्गा को लाल साड़ी में देखना शुभ माना जाता है। इस सपने से जीवन में अच्छे बदलाव के संकेत मिलते हैं Snake Dream Meaning: अगर सपने में देखा है सांप, तो समझिए कि जीवन में आने वाली हैं खुशियां Sapne Mai Mata Durga Ko Lal Kapdo Mai Dekhna:सपने में माता दुर्गा को लाल कपड़ों में देखना  यह सपना माता की कृपा का संकेत है। ऐसा सपना आने के बाद आपकी कोई दबी ख्वाहिश पूरी हो सकती है। ऐसा सपना अगर अविवाहित लोग देखते हैं तो उन्हें योग्य वर या वधु की प्राप्ति होती है।  आपको भी अगर इन सपनों में से कोई सपना होता है तो समझ जाइए माता की आप पर कृपा है। Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna आपके जीवन में जल्द ही अच्छे बदलाव आ सकते हैं। वहीं, Durga Mata Ko Sapne Me Dekhna नवरात्रि के दौरान अगर आप माता सपना देखते हैं तो समझ लिजिए अब जीवन की गाड़ी पटरी पर आने वाली है।  Mata Durga:सपने में इस रूप में दिखें माता दुर्गा, तो खुल जाएगी किस्मत, धन-धान्य की होगी प्राप्ति

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Ram Navami Kab hai 2025:आने वाले साल में कब है, राम नवमी पर करें इन मंत्रों का जाप, नोट कर लें सही तिथि, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी को भगवान श्रीराम के अवतरण दिवस के रूप मे मानते है। यह पर्व हिंदू पंचांग के प्रथम माह चैत्र के शुक्ला पक्ष की नवमी के दिन आता है तथा यह उत्सव चैत्र नवरात्रि का नौवें दिन के रूप मे भी मनाया जाता है। श्री राम का प्राकट्य अभिजित नक्षत्र में दोपहर बारह बजे हुआ था। भगवान श्रीराम को भारत मे एक आदर्श पुरुष के रूप मे माना जाता है, Ram Navami Kab hai 2025:इस कारण उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम कहा जाता है, तथा उनके उच्चतम प्रशासनिक कौशल को राम-राज्य के नाम से संबोधित किया जाता है। राम नवमी के दिन भक्त पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र की जन्मभूमि अयोध्या की पवित्र नदी सरयू में डुबकी लगाते हैं। तथा भक्त भगवान श्री राम, उनकी पत्नी माता सीता, उनके छोटे भाई श्री लक्ष्मण और श्री राम भक्त हनुमान जी से संबंधित भजन, कीर्तन, रामायण पाठ, उपवास, शोभा यात्रा और रथ यात्रा का आयोजन किया जाता हैं। माना जाता है कि, श्री गोस्वामी तुलसीदास जी ने इस दिन राम चरित मानस की रचना आरंभ की थी। Ram Navami 2025: राम नवमी का पर्व हर साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था, जिन्हें विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान राम ने धरती पर अधर्म का नाश करने और धर्म की पुनः स्थापना के लिए अवतार लिया था। इस दिन को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ माना जाता है। Ram Navami Kab hai 2025 राम नवमी का पर्व हर हिंदू परिवार में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, लेकिन अयोध्या में इसकी भव्यता देखते ही बनती है।  राम नवमी के दिन करें ये काम, बरसेगी मां दुर्गा की कृपा ramnavmi Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी 2025 तिथि इस साल  चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का प्रारम्भ 5 अप्रैल की शाम को 07:26 बजे होगा और समाप्त 6 अप्रैल की शाम 07:22 बजे होगा। ऐसे में इस साल राम नवमी का पर्व 6 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र नवरात्रि का समापन भी होगा, इसलिए यह दिन और अधिक पावन माना जाएगा। Ram Navami puja subh muhurat पूजा का शुभ मुहूर्त राम नवमी के दिन मध्याह्न पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:08 बजे से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। यह अवधि 2 घंटे 31 मिनट की रहेगी। हालांकि, मान्यता के अनुसार भगवान श्रीराम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था, इसलिए 12:34 का समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है और इस समय पूजन और अभिषेक करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। राम नवमी के दिन पढ़ें ये व्रत कथा, भगवान राम की बरसेगी कृपा Ram Navami puja mantra:राम नवमी पूजा मंत्र इस दिन श्रीराम के विभिन्न मंत्रों का जाप करने का विशेष महत्व होता है। “ॐ श्री रामचन्द्राय नमः”“ॐ रां रामाय नमः” श्रीराम तारक मंत्र “श्री राम, जय राम, जय जय राम” श्रीराम गायत्री मंत्र “ॐ दाशरथये विद्महे, सीतावल्लभाय धीमहि। तन्नो रामः प्रचोदयात्॥” इस दिन इन मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। रामनवमी कथा Ram Navami Puja vidhi:पूजा विधि  Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने और सूर्यदेव को जल अर्पित करने का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत का संकल्प लेने के बाद घर के मंदिर को अच्छे से साफ कर भगवान राम की प्रतिमा स्थापित की जाती है। Ram Navami Kab hai 2025 दोपहर 12 बजे के करीब श्रीराम का गंगाजल, पंचामृत और शुद्ध जल से अभिषेक किया जाता है।  पूजा में तुलसी पत्ता और कमल का फूल रखना शुभ माना जाता है। फिर षोडशोपचार विधि से भगवान राम की पूजा की जाती है और खीर, फल एवं अन्य मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। इस दिन राम रक्षा स्तोत्र, सुंदरकांड और रामायण का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। अंत में आरती करने के बाद प्रसाद का वितरण किया जाता है और भक्तों को आशीर्वाद दिया जाता है। आज राम नवमी पर इस सरल विधि से करें हवन, प्रभु श्री राम के साथ मां सिद्धिदात्री भी होंगी प्रसन्न राम नवमी पूजा (Lord Ram puja vidhi) Ram Navami Kab hai 2025:राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर राम जी का ध्यान करें। इसका बाद पूजा स्थल पर चौकी बिछाकर भगवान राम के साथ-साथ माता सीता, लक्ष्मण और भगवान हनुमान की मूर्ति या फिर तस्वीर स्थापित करें। Ram Navami Kab hai 2025 सभी को चंदन, रोली, धूप, फूल माला आदि अर्पित करें।इसके बाद अलग-अगल तरह के फल अर्पित करें। साथ ही इस दिन पर रामायण, रामचरितमानस और रामरक्षास्तोत्र का पाठ करना भी काफी लाभदायक माना जाता है। अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें और सभी लोगों में प्रसाद बांटें।

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