UTTAR PRADESH

सोमेश्वर महादेव मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

हजारों साल पहले सोमेश्वर की स्थापना यमुना तट पर जंगल और घने वनों के बीच हुई थी। सोमेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यमुना तट पर स्थित है। इस मंदिर की गिनती संगमनगरी के प्राचीन मंदिरों में की जाती है, जिसकी महिमा पौराणिक कालों से बताई जाती है। मान्यता है कि सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना के लिए स्वयं भगवान शिव ने चंद्रमा को इसे स्थापित करने को कहा था और उनके ही कहने पर चंद्र देव ने सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना की थी। चंद्रदेव द्वारा स्थापित किये जाने और यहीं उनका कुष्ठरोग ठीक होने की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु निरोगी होने की कामना के साथ यहां पूजन-अर्चन करने के लिए आते हैं। Someswarar Temple:मंदिर का इतिहास हजारों साल पहले सोमेश्वर की स्थापना यमुना तट पर जंगल और घने वनों के बीच हुई थी। इस मंदिर की स्थापना स्वयं चंद्रमा द्वारा की गई थी और भगवान शंकर की आराधना कर चंद्रमा को अपने क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। ऐसी पौराणिक कथा बताई जाती है कि राजा दक्ष प्रजापति ने जब चंद्रमा को श्राप दिया तो उससे चंद्रमा कुरूप होकर छय रोग से ग्रसित हो गए, श्राप मुक्त होने के लिए उन्होंने भगवान शिव की ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर उनकी आराधना की थी। सोमेश्वर महादेव मंदिर का महत्व सोमेश्वर नाथ मंदिर के बारे में बताया जाता है कि इसके चंद्र कुंड में जो भक्त एक माह तक स्नान कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करता है उसे क्षय रोग से मुक्ति मिल जाती है। ग्रंथों की माने तो चंद्रदेव श्राप की वजह से कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गये थे, सोमेश्वर महादेव मंदिर तब भोलेनाथ ने उन्हें इस रोग से मुक्ति का आशीर्वाद दिया था। ऐसी कहा जाता है कि सोमेश्वर नाथ मंदिर के गुंबद पर लगा त्रिशूल पूर्णिमा और अमावस्या को अपनी दिशा बदलता है और जिस तरफ चन्दमा रहता है उधर त्रिशूल घूम जाता है। सोमेश्वर महादेव मंदिर की वास्तुकला सोमेश्वर नाथ मंदिर को नागर शैली में बनाया गया है। मंदिर के शीर्ष पर विशाल शिखर और गुंबद बना है। शिखर के ठीक नीचे गर्भ गृह भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। मंदिर का गर्भ गृह छोटा है और उसमे संगमरमर लगा है। मंदिर एक प्रवेश द्वार है और ठीक सामने सीढ़ियां बनीं हैं। सोमेश्वर नाथ मंदिर में एक चंद्र कुंड बना है। मंदिर के ऊपर छत्र पर त्रिशूल लगा है जो चंद्रमा के पृथ्वी के चक्कर लगाने के अनुसार ही अपना कोड़ बदलता है। सोमेश्वर महादेव मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद सोमेश्वर नाथ मंदिर में शिव जी को फल, ड्राई फ्रूट्स,लड्डू, पेड़े का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु भगवान भोले नाथ को भांग, धतूरा, बेलपत्र और दूध भी चढ़ाते हैं।

सोमेश्वर महादेव मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

शंकर विमान मण्डपम:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसलिए यह ‘शंकर विमान मंडपम’ कहलाता है। शंकर विमान मण्डपम भारत के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में स्थित है। त्रिवेणी संगम के उत्तर में बने इस तीन मंजिला मंदिर को आदि शंकराचार्य की स्मृति में बनाया गया है। शंकर विमान मंडपम भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। इसके प्रथम तल कांचिकामकोटि पीठ की आराध्य कामाक्षी देवी को समर्पित है। द्वितीय तल विष्णु भगवान के बाला जी स्वरूप पर आधारित है। शंकर विमान मण्डपम वहीं तृतीय तल योग सहस्त्र लिंग एक पत्थर में है। एक पत्थर में एक हजार शिवलिंग एवं रुद्राक्ष का मंडप बना है। श्रद्धालु मंदिर में पूजन-अर्चना कर अपनी मनोकामना मांगते है, जिसे भोलेनाथ पूरा करते हैं। Shankar Viman Mandapam:शंकर विमान मण्डपम मंदिर का इतिहास शंकर विमान मंडपम की नींव 1969 में रखी गई थी। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर 17 मार्च 1986 को खोला गया। शंकर विमान मंडपम को बनने में करीब 16 साल का समय लगा था। तीन मंजिला मंदिर का निर्माण कांचिकामकोटि 69वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने अपनी गुरु की इच्छापूर्ति के लिए कराया था। मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी कांचिकामकोटि मठ के पास है। मंदिर के दूसरे तथा तीसरे तल से त्रिवेणी संगम का नजारा अद्भुत नज़र आता है, जिसे देखने श्रद्धालु सुबह-शाम पहुंचते हैं। शंकर विमान मण्डपम मंदिर का महत्व चार खण्डों में शंकर विमान मंडपम 130 फीट ऊंचा है। मंदिर में कुमारिल भट्ट, जगतगुरु शंकराचार्य, कामाक्षी देवी (51 शक्तिपीठ समेत) और योगसहस्त्र सहस्त्रयोग लिंग (108 शिवलिंग हैं आसपास) स्थित हैं। शंकर विमान मंडपम मंदिर के प्रत्येक तल पर मुख्य मूर्तियों के कक्ष के बाहर काले रंग के द्वारपाल की मूर्तियां लगी हैं, जिसमें तमिल तथा हिंदी दोनों भाषाओं में श्री द्वारपाल लिखा है। शंकर विमान मंडपम मंदिर की दीवारों तथा छतो पर उकेरी गई मूर्तियां रामायण तथा शिव की कहानियों को बयां करती है। शंकर विमान मण्डपम मंदिर की वास्तुकला प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर बना शंकर विमान मंडपम द्रविड़ शैली में बना है। द्रविड़ संस्कृति में ही मंदिर का प्रवेश बना है, जो कि 16 विशाल खंभो पर बना है। मंदिर का गुंबद ‘विमान’ कहलाता है जिसे सीढ़ी दार पिरामिड की तरह बनाया जाता है जो ऊपर की ओर ज्यामिति रूप से उठा होता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसलिए यह ‘शंकर विमान मंडपम’ कहलाता है। चार मंजिला इस मंदिर की बनावट दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 01:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद शंकर विमान मंडपम में शिव जी को फल, ड्राई फ्रूट्स,लड्डू, पेड़े का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु भगवान भोले नाथ को भांग, धतूरा, बेलपत्र और दूध भी चढ़ाते हैं।

शंकर विमान मण्डपम:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

अन्नपूर्णा मंदिर:अयोध्या, उत्तरप्रदेश, भारत

3200 वर्ग फुट में फैला अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर का सबसे पुराना मंदिर है। अन्नपूर्णा मंदिर:भारत में माता अन्नपूर्णा के कई सारे मंदिर हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के इंदौर में बने अन्नपूर्णा मंदिर की अपनी अलग पहचान है। 3200 वर्ग फुट में फैला अन्नपूर्णा मंदिर, इंदौर का सबसे पुराना मंदिर है। इस मंदिर की ऊंचाई 100 फुट से भी अधिक है। यह मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है। लोग मान्यता अनुसार यहां मांगने वालो की हर मुराद पूरी होती है। मंदिर न केवल धार्मिक आगंतुकों के लिए है, बल्कि उन लोगों के लिए भी है जो प्राचीन भारतीय कला और हिंदू धर्म के वर्चस्व के बारे में जानना चाहते हैं। Annapurna Temple:मंदिर का इतिहास अन्नपूर्णा मंदिर की स्थापना 63 साल पहले यानी 1959 में हुई। इसकी स्थापना ब्रह्मलीन स्वामी प्रभानंद गिरी महाराज ने की थी। मंदिर से मिली जानकारी के मुताबिक महाराज का जन्म 14 जनवरी 1911 को आंध्रप्रदेश के नंदी कुटकुट स्थान पर हुआ। 15 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ वैराग्य लिया। बाद में स्वामी प्रभानंद गिरी जी उज्जैन होते हुए गुजरात पहुंचे जहां प्रसिद्ध देव स्थल गिरनार पर्वत पर कठोर तपस्या की, वहीं उन्हें भगवती अम्बिका का दर्शन हुआ और वहां से वे इंदौर आ गए। 1955 में इंदौर आने के बाद वे रणजीत हनुमान मंदिर क्षेत्र में निवास करने लगे। अन्नपूर्णा मंदिर में वट वृक्ष के नीचे बैठकर मां अन्नपूर्णा की भक्ति-साधना में लग गए। यहीं आपने अन्नपूर्णा मंदिर बनाने का संकल्प लिया और भक्तों के सहयोग से 22 फरवरी 1959 को समारोहपूर्वक मां अन्नपूर्णा का श्री विग्रह स्थापित कर प्राण-प्रतिष्ठा की। मंदिर का महत्व मां अन्‍नपूर्णा को भोजन की देवी माना जाता है। मंदिर की अद्भुत स्‍थापत्‍य शैली, विश्‍व प्रसिद्ध मदुरै के मीनाक्षी मंदिर से प्रेरित लगती है। बच्चों को धार्मिक शिक्षा देने के लिए ट्रस्ट अन्नपूर्णा विद्यालय, अन्नपूर्णा वेद वेदांग विद्यालय चलाया जाता है। साथ ही आसपास के गरीब बच्चों का 12वीं तक की शिक्षा का शर्च भी मंदिर द्वारा उठाया जाता है। अन्नपूर्णा मंदिर में विराजित तीनों देवियों का दिनभर में तीन बार श्रृंगार किया जाता है यहां देवियों का श्रृंगार कराने के लिए आपको मंदिर के पुजारी से या ऑफिस में संपर्क करना होता है। उनके द्वारा फिर दिन आपको बताया जाता है। जिस दिन श्रृंगार करना होता है उसके एक दिन पहले आपको श्रृंगार की सामग्री और साड़ी देना होती है। मंदिर की वास्तुकला अन्नपूर्णा मंदिर इंदौर का सबसे पुराना मंदिर है। इस मंदिर को 9 वीं शताब्दी में इंडो-आर्यन और द्रविड़ स्थापत्य शैली के संयोजन का उपयोग करके बनाया गया था। यह मंदिर में हिंदू देवी अन्नपूर्णा को समर्पित है। इसमें मां अन्नपूर्णा की तीन फुट ऊंची संगमरमर की मूर्ति है। मंदिर की अविश्वसनीय वास्तुकला शैली मदुरई के विश्व प्रसिद्ध मीनाक्षी मंदिर से प्रभावित है। मंदिर का प्रवेश द्वार बहुत प्रभावशाली है। मंदिर के मुख्य द्वार पर चार बड़े हाथियों की मूर्ति है। मंदिर परिसर के भीतर अन्नपूर्णा, शिव, हनुमान और काल भैरव भगवान को समर्पित मंदिर भी हैं। मंदिर की बाहरी दीवारें अभी भी रंगीन पौराणिक चित्रों में शामिल हैं। मंदिर की दीवारों पर कृष्ण लीला का चित्रण है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM पहला श्रृंगार 05:00 AM – 05:00 AM सुबह की आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM दूसरा श्रृंगार 11:00 AM – 11:00 AM भोग का समय 12:00 PM – 12:00 PM दोपहर में मंदिर खुलने का समय 02:00 PM – 10:00 PM तीसरा श्रृंगार 05:00 PM – 05:00 PM शाम की आरती 07:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद अन्नपूर्णा मंदिर में भक्त मां को ड्राई फ्रूट्स, फल, लड्डू और खीर का भोग चढ़ाते हैं। श्रद्धालु माता को अन्न भी चढ़ाते हैं।

अन्नपूर्णा मंदिर:अयोध्या, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

भूतेश्वर मंदिर:मथुरा, उत्तरप्रदेश, भारत Bhuteshwar Temple: Mathura, Uttar Pradesh, India

भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर दिव्य शिवलिंग के रूप में भी जाना जाता है। भूतेश्वर मंदिर भगवान श्री कृष्ण की पावन नगरी मथुरा में स्थित है भूतेश्वर मंदिर। यह मंदिर शहर के प्राचीन शिव मंदिर में शामिल है। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर दिव्य शिवलिंग के रूप में भी जाना जाता है। इसके अलावा भूतेश्वर महादेव को मथुरा का रक्षक और क्षेत्रपाल भी कहते है। आपको बता दे कि मथुरा में महादेव मंदिर चार हैं। इन्हें मथुरा नगरी के रक्षक माना जाता है। पूर्व में पिघलेश्वर, पश्चिम में भूतेश्वर, उत्तर में गोकर्णेश्वर और दक्षिण में रंगेश्वर दिशा के क्षेत्रपाल माने जाते हैं । प्रतिवर्ष इस मंदिर में भाद्रपद मास के दौरान बृज चौरासी कोस की परिक्रमा आरम्भ होती है और यहीं पर समाप्त होती है। शहर की सीमा के भीतर स्थित यह मंदिर लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। भूतेश्वर मंदिर का इतिहास प्राचीन मान्यताओं और किंवदंतियों के अनुसार, मंदिर की उत्पत्ति मथुरा की स्थापना से ही मानी जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार मथुरा की स्थापना तब हुई जब शत्रुघ्न ने राक्षस मधु का वध किया। शत्रुघ्न भगवान राम के छोटे भाई थे। इस महत्वपूर्ण घटना की स्मृति में भूतेश्वर मंदिर का निर्माण किया गया, जिससे यह शहर का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। ऐसा भी माना जाता है कि भूतेश्वर महादेव के इस प्राचीन शिवलिंग को नाग शासकों द्वारा स्थापित किया था। भूतेश्वर मंदिर का महत्व भूतेश्वर महादेव मंदिर स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों के लिए धार्मिक महत्व रखता है। ऐसा माना जाता है कि भूतेश्वर महादेव मथुरा शहर को बुरी ताकतों से बचाते हैं। मथुरा के लोगों, ब्रजवासियों द्वारा रक्षक के रूप में भूतेश्वर भगवान की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि भूतेश्वर भगवान हर संकटों से उनकी रक्षा करते हैं। भूतेश्वर मंदिर एक शक्तिपीठ है ऐसा कहा जाता है कि यह वह जगह है जहाँ पर माता सती के शरीर के नष्ट होने के बाद उनकी अंगूठी गिरी थी। यह मंदिर सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के पाताल देवी गुफा में राजा कंस द्वारा पूजा की जाती थी। भूतेश्वर मंदिर की वास्तुकला भूतेश्वर मंदिर अद्भुत स्थापत्य शैली द्वारा निर्मित है। इस मंदिर में एक मुख्य गर्भगृह और पाताल देवी गुफा है। मंदिर का गर्भगृह 100 वर्ग मीटर में फैला हुआ है। मंदिर में एक नाली है, जो साइड गेट के बाहरी हिस्से को अंदर से जोड़ती है, जिससे भक्त शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं। इसके अलावा मुख्य प्रवेश द्वार के बाईं ओर कई छोटे-छोटे शिवलिंग हैं। जहाँ भक्त बिना किसी परेशानी के फूल चढ़ा सकते है। मंदिर परिसर में पाताल देवी, काली देवी, गिरिराज महाराज और अन्य सुंदर मंदिर स्थित हैं। मंदिर का समय भूतेश्वर मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 01:00 PM सुबह की आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM शाम को भूतेश्वर मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 10:30 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद भूतेश्वर महादेव को दूध, दही, शहद, जल और पेड़े का भोग लगाया जाता है। साथ ही मंदिर में शिवलिंग पर फूल भी अर्पित किए जाते हैं।

भूतेश्वर मंदिर:मथुरा, उत्तरप्रदेश, भारत Bhuteshwar Temple: Mathura, Uttar Pradesh, India Read More »

प्रियकांत जू मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

प्रिय यानी कि राधा जी और कांत यानी श्री कृष्ण के आधार पर ही इस मंदिर का नाम रखा गया है। प्रियकांत जू मंदिर उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर मथुरा के वृन्दावन में स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण और राधा जी को समर्पित है। मंदिर में राधा कृष्ण की बहुत ही मनमोहक मूर्ति है। भक्त इनके दर्शन कर आनंदित हो जाते है। प्रिय यानी कि राधा जी और कांत यानी श्री कृष्ण के आधार पर ही इस मंदिर का नाम रखा गया है। प्रियकांत जू मंदिर का इतिहास PRIYAKANT JU MANDIR श्री प्रियाकान्त जू मंदिर के निर्माण का संकल्प 2007 में विश्व शांति चैरिटेबल ट्रस्ट ने लिया था। इसके बाद 2009 में श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज द्वारा इसकी स्थापना की गयी थी। 2012 में इस मंदिर निर्माण के प्रथम चरण की शुरुआत हुयी। इस मंदिर को पूर्ण रूप से बनने में सात साल का समय लगा। 8 फरवरी 2016 में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए इस मंदिर को खोला गया। प्रियकांत जू मंदिर का महत्व मंदिर में होली का त्यौहार बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। ब्रज की होली को देखने और इस त्यौहार को मनाने के लिए लोग दूर दूर से आते है। यहाँ आकर वह भी ब्रज के रंग में रंग जाते है। में यदि दर्शन करना चाहते है तो सबसे अच्छा समय शाम का होता है। क्योंकि शाम के समय मंदिर की भव्यता बहुत शानदार होती है। नीली रौशनी से मंदिर जगमगा उठता है और मंदिर में विराजित राधा कृष्ण की जोड़ी का यह स्वरुप देखने में बहुत ही मनमोहक लगता है। प्रियकांत जू मंदिर की वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला मंदिर के बाहर से देखते ही बनती है। यह मंदिर कमल के आकार का बना हुआ है। इस मंदिर की ऊँचाई लगभग 125 फिट है। सड़क के समीप बना यह मंदिर बहुत ही शानदार है। मंदिर के दोनों तरफ फव्वारे लगाए गए है। इस मंदिर में राधा कृष्ण जी के अलावा भोलेनाथ, गणेश जी और हनुमान जी के छोटे छोटे मंदिर है। प्रियकांत जू मंदिर का निर्माण मकराना राजस्थान के संगमरमर से किया गया है। मंदिर का समय प्रियकांत जू मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 12:30 PM मंगला आरती का समय 06:00 AM – 07:00 AM प्रियकांत जू मंदिर के शाम को खुलने का समय 04:30 PM – 08:30 PM राजभोग का समय 11:45 AM – 12:00 PM मंदिर का प्रसाद प्रियकांत जू मंदिर में प्रसाद के रूप में पेड़ा, बूंदी, रेवडी, बेसन सेवैया का भोग लगता है। भगवान को पुष्प भी अर्पित किये जाते है।

प्रियकांत जू मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

गोविंद देवी जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर को “राधा गोविंद देव मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोविंद देवी जी मंदिर श्री कृष्ण की नगरी मथुरा उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में स्थित है। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। इस मंदिर को “राधा गोविंद देव मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर वृंदावन के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह भगवान कृष्ण के गोविंद देव जी स्वरूप को समर्पित मंदिर है।  Govind Dev Ji Temple:मंदिर का इतिहास इस मंदिर का निर्माण सन् 1590 में राजा मानसिंह ने करवाया था। इस मंदिर का निर्माण गुरु और महान कृष्णभक्त श्री कल्याणदास जी की निगरानी में किया गया। मंदिर का पूर्ण खर्च राजा मानसिंह द्वारा ही किया गया था। गोविंद देवी जी मंदिर जब यह मंदिर बना था तो यह सात मंजिला मंदिर था। इस मंदिर के सबसे ऊपरी भाग पर एक विशाल दीपक बनवाया गया था। यह दीपक इतना विशाल था कि इसमें हर रोज 50 किलोग्राम से ज्यादा देसी घी का इस्तेमाल कर इसे जलाया जाता था। इस दीपक की लौ कई किमी तक से भी दिखाई देती थी। मंदिर में जलते इस लौ को देखकर औरंगजेब के मन में ईर्ष्या उत्पन्न हो गयी और वह इस मंदिर की सुंदरता को नष्ट करने का विचार करने लगा। अपनी सेना को भेजकर मंदिर को तुड़वाना चाहा। गोविंद देवी जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत भगवान की कृपा से मंदिर के पुजारी को इस बात का अंदेशा हो गया। उन्होंने तुरंत ही भगवान गोविंद की पुरातन प्रतिमा को वहां से हटा दिया और बहुत दूर ले गए। जयपुर के गोविंद वल्लभ मंदिर में वास्तविक प्रतिमाओं को स्थानांतरित कर दिया गया था। औरंगजेब की सेना इस मंदिर के 4 मंजिल को ही गिरा सकी। मंदिर को खंडित करने का भी प्रयास किया गया। 1873 तक मंदिर उसी अवस्था में रहा। औरंगजेब के जाने के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि जब औरंगजेब ने इस मंदिर को तोड़ दिया था। उसके बाद उस मंदिर में कोई भी भक्त दर्शन करने नहीं जाता था। इस कारण मंदिर खंडहर बन गया था। गोविंद देवी जी मंदिर वहां पर भूतों का निवास हो गया था। परन्तु इन भूत प्रेतों ने किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया था। ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर का पुनः निर्माण भव्यता के साथ करना बहुत ही मुश्किल था। गोविंद देवी जी मंदिर इस मंदिर के निर्माण में यहाँ रहने वाले भूतों का भी योगदान है। वह इसलिए क्योंकि इस मंदिर की कारीगरी इस तरह की है जो कोई भी मनुष्य पांच से दस साल में नहीं बना सकता। मंदिर की वास्तुकला गोविंद देव जी मंदिर की वास्तुकला अन्य मंदिरों से अलग है। गोविंद देवी जी मंदिर यह मंदिर पहले सात मंजिला ईमारत थी। मंदिर में दोनों तरफ शानदार खम्भे बने हुए है जो गर्भगृह तक जाते है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। मंदिर का समय गर्मियों में मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 12:00 PM सर्दियों में गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:30 PM गर्मियों में मंगल आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM गर्मियों में शाम को गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय 05:30 PM – 09:30 PM सर्दियों में शाम को गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 08:30 PM सर्दियों में मंगला आरती का समय 05:00 AM – 06:00 AM मंदिर का प्रसाद गोविंद देव जी मंदिर में लड्डू ,माखन और मिश्री का भोग लगाया जाता है।

गोविंद देवी जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

कात्यायनी पीठ वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

ऐसा कहा जाता है कि यहां माता सती के केश गिरे थे, इसका प्रमाण शास्त्रों में भी मिलता है। कात्यायनी पीठ वृंदावन भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। भगवान कृष्ण की नगरी वृन्दावन में भी, देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक कात्यायनी पीठ स्थित है। यह एक बहुत ही प्राचीन सिद्ध पीठ है जो राधाबाग के पास है। यहाँ माता सती ‘उमा’ तथा भगवन शंकर ‘भूतेश’ के नाम से जाने जाते है। ऐसा कहा जाता है कि यहां माता सती के केश गिरे थे, इसका प्रमाण शास्त्रों में भी मिलता है। देवर्षि श्री वेदव्यास जी ने श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध के 22वें अध्याय में उल्लेख किया है- कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नम:॥ katyayani peeth:मंदिर का इतिहास कात्यायनी पीठ का निर्माण स्वामी केशवानंद ने फरवरी 1923 में करवाया था। इस मंदिर में मां कात्यायनी के साथ पंचानन शिव, विष्णु, सूर्य तथा सिद्धिदाता श्री गणेशकी मूर्तियां हैं । कात्यायनी पीठ वृंदावन लोग मंदिर को मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण देखते ही श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और दिल और दिमाग में शांति पाते हैं। कात्यायनी पीठ में श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा लगी रहती है। बताया जाता है कि राधारानी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए इस शक्तिपीठ की पूजा की थी। कात्यायनी पीठ वृंदावन:मंदिर का महत्व कात्यायनी पीठ में अविवाहित युवक-युवती नवरात्र के मौके पर मनपसंद वर और वधु पाने के लिए कात्यायनी माता का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं और उनकी मन की मुराद पूरी भी होती है। ऐसा कहा जाता है श्री कृष्ण ने कात्यायनी पीठ वृंदावन अपने मामा कंस का वध करने से कात्यायनी मां की पूजा की थी। कंस वध से पहले यमुना किनारे श्री कृष्ण मां कात्यायनी को कुलदेवी मानकर बालू से उनकी प्रतिमा बनाई और पूजा की। उसके बाद कंस का वध किया था। जिन लड़कियों या लड़को की शादी में किसी कारण कोई विलंब हो रहा होता है। कात्यायनी मां की कृपा से उनका भी विवाह जल्द से जल्द हो जाता है। मंदिर की वास्तुकला कात्यायनी पीठ मंदिर एक शांत और वास्तुकला की दृष्टि से अद्भुत मंदिर है। मंदिर की बनावट में राजस्थानी शैली की झलक देखने को मिलती है। मंदिर में एक विशाल परिसर है, जहां भक्त आकर मां की पूजा-अर्चना करते हैं। कात्यायनी पीठ वृंदावन उत्कृष्ट नक्काशी और पेंटिंग इसकी सुंदरता को और बढ़ाती हैं। मंदिर में कई स्तम्भ बने हैं, जिसपर कात्यायनी मां से जुड़े संस्कृत में मंत्र लिखे गए हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 12:00 PM सांय मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 07:30 PM

कात्यायनी पीठ वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

दुर्गा मन्दिर गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत

यहाँ श्रद्धालु करते हैं माँ दुर्गा को रक्त अर्पित Durga Mandir:दुर्गा मन्दिर गोरखपुर भारत के उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक अद्रभुत माँ दुर्गा का मंदिर स्थित है। गोरखपुर शहर के बांसगांव में बने इस दुर्गा मंदिर में देवी को खुश करने के लिए श्रद्धालुओं द्वारा माँ को रक्त अर्पित किया जाता है। दुर्गा मन्दिर गोरखपुर माँ दुर्गा के इस मंदिर की अनोखी परंपरा आज से ही नहीं बल्कि सैकड़ों साल पूर्व से है। वैसे तो पूरे साल दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के दिनों में यहां रक्त चढ़ाने की विशेष परंपरा है। नवमी के दिन माँ दुर्गा को रक्त अर्पित करने की परंपरा को निभाने के लिए देश-विदेश में रहने वाले लोग भी आते हैं। नवजात बच्चों को भी लेकर श्रद्धालु मंदिर में पहुंचते हैं और उनके ललाट से रक्त लेकर माँ को अर्पित करते हैं। मंदिर का इतिहास गोरखपुर के बांसगांव तहसील स्थित दुर्गा मंदिर में पिछले 300 वर्षों से माँ दुर्गा को रक्‍त चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है। यह परंपरा क्षेत्रियों के श्रीनेत वंश के लोगों द्वारा निभाई जाती है। इस परंपरा के तहत 12 दिन के नवजात से लेकर 100 वर्ष के बुजुर्ग तक का रक्त चढ़ाया जाता है। उपनयन संस्कार के पहले तक एक जगह ललाट और जनेऊ धारण करने के बाद युवकों, दुर्गा मन्दिर गोरखपुर अधेड़ों व बुजुर्गों के शरीर से नौ जगहों पर एक ही उस्तरे से चीरा लगाकर खून निकाला जाता है। रक्त को बेलपत्र में लेकर माँ दुर्गा के चरणों में अर्पित किया जाता है और शरीर के कटे हुए हिस्से पर भभूत लगाई जाती है। मंदिर का महत्व माँ दुर्गा के इस मंदिर से जुड़ी ऐसी मान्यता है कि जिन नवजातों के ललाट से रक्त चढ़ाया जाता है, दुर्गा मन्दिर गोरखपुर उन्हें दुर्गा माँ की विशेष कृपा प्राप्त होती हैं। श्रद्धालुओं का कहना है दुर्गा मन्दिर गोरखपुर कि ये माँ के आशीर्वाद का ही फल है कि आज तक किसी को न तो टिटनेस हुआ और न ही घाव भरने के बाद कहीं कटे का निशान पड़ा। मंदिर की वास्तुकला दुर्गा मंदिर की वास्तुकला बहुत ही सुंदर है। मंदिर को नागर शैली में बनाया गया है। सम्पूर्ण मंदिर को वर्गाकार और एक विशाल चबूतरे पर बनाया गया है। दुर्गा मंदिर में माँ के दर्शन के लिए एक प्रवेश द्वार है। वर्ष 2021 में माँ दुर्गा के इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया और श्रद्धालुओं के लिए एक धर्मशाला का भी निर्माण किया गया। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 10:00 PM सायंकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM सुबह की आरती का समय 05:00 AM – 06:00 AM

दुर्गा मन्दिर गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

गोपीनाथ मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर को “राधा गोपीनाथ मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोपीनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश मथुरा के वृन्दावन नगरी में स्थित है। सप्तदेवालयों में शामिल यह मंदिर यमुना नदी के केशीघाट के समीप बना हुआ है। वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर को “राधा गोपीनाथ मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोपीनाथ मंदिर का इतिहास Mandir Shri Gopinath Ji : गोपीनाथ मंदिर में मूर्तियों की पूजा मधुपंडित गोस्वामी द्वारा की जाती थी जो गुरु चैतन्य के बहुत करीबी सहयोगियों में से एक थे। पौराणिक कथा के अनुसार, गोपीनाथजी की मूर्ति लंबे समय तक खोयी हुयी थी। ऐसा कहा जाता है कि परमानंद भट्टाचार्य नाम के एक महान भक्त ने खोई हुई मूर्ति को पुनर्जीवित किया था। एक रात को भगवान गोपीनाथ परमानंद भट्टाचार्य के स्वप्न में आए और उन्होंने वामशीवट नामक पेड़ के नीचे अपने रहने के स्थान का पता बताया। स्वप्न के अनुसार परमानंद उस पेड़ के पास गए और वहां पर मूर्ति को पुनर्जीवित किया। उन्होंने मूर्ति की पूजा करना शुरू कर दिया और बाद में मूर्ति मधुपंडितगोस्वामी को सौंप दी। मंदिर का महत्व ऐसा माना जाता है कि गोपीनाथ मंदिर में विराजित भगवान कृष्ण की मूर्ति चमत्कारी है। इनके दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इस मंदिर का मनमोहक और शांत वातावरण भक्तों को भगवान की ओर आकर्षित करता है। मंदिर की वास्तुकला गोपीनाथ मंदिर लाल पत्थर से निर्मित है। नदी के किनारे होने के कारण मंदिर की सुंदरता और भी बढ़ जाती है। मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा बांसुरी बजाते हुए स्थापित है। भगवान के दाये तरफ प्रिय राधा जी और बाये तरफ अनंग-मंजरी खड़े हुए हैं। उनका साथ देने के लिए ललिता और विशाखा भी है। इस मंदिर में ही आचार्य मधु पंडित की समाधि भी है। यदि आप वृन्दावन गए है एक बार इस मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए। मंदिर का समय गोपीनाथ मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 01:00 PM श्रृंगार आरती 08:30 AM – 09:00 AM शाम में गोपीनाथ मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 09:00 PM शयन आरती 08:00 PM – 08:30 PM मंगला आरती 05:00 AM – 05:30 AM राजभोग आरती 11:30 AM – 12:00 PM संध्या आरती 06:00 PM – 06:30 PM

गोपीनाथ मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

जयपुर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। जयपुर मंदिर वृन्दावन भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुड़ा हुआ एक धार्मिक व ऐतिहासिक नगर है, जो भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित है। यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। वैसे तो वृंदावन में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं लेकिन वृंदावन-मथुरा रोड पर किशोर पुरा में स्थित जयपुर मंदिर की अपनी अलग पहचान है। खास बात ये है कि उत्तर प्रदेश में बने होने के बाद भी जयपुर मंदिर का रख-रखाव राजस्थान सरकार करती है। भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, लेकिन यहां बांके बिहारी के अलग-अलग रूप की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां पर प्रभु के राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल रूप की मूर्तियां विद्यमान हैं। मंदिर का इतिहास जयपुर मंदिर का निर्माण, जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह जी ने 1916 में करवाया था। माधो सिंह जी ने अपने गुरु ब्रह्मचारी श्री गिरिधारीशरण जी के प्रसन्नता हेतु जयपुर से वृंदावन आकर पहले 100 एकड़ जमीन खरीदी, फिर उसके बाद इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इस मंदिर को बनने में करीब 30 साल लगे थे। कई हजार मजदूरों और कुशल कारीगरों ने इस मंदिर का निर्माण किया। मंदिर का महत्व जयपुर मंदिर वृंदावन में श्री कृष्ण का सबसे बड़ा मंदिर है। जानकार बताते हैं कि पूरे बृज मण्डल जयपुर मंदिर से बड़ा दूसरा कोई मंदिर नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि जयपुर मंदिर निर्माण के लिए इस्तेमाल हो रहे पत्थरों को मथुरा से वृंदावन तक लाने के लिए माधो सिंह जी ने मथुरा से वृंदावन तक नई रेलवे लाइन बिछवाई थी। जयपुर मंदिर में राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल जी और उनकी सखियों की मूर्तियां दूसरे तल पर स्थापित हैं, जिनके दर्शन मंदिर के बाहर खड़े भक्त भी आसानी से कर सकते हैं। मंदिर की वास्तुकला जयपुर मंदिर की वास्तुकला में प्राचीन राजस्थानी शैली का उत्कृष्ट कला देखने को मिलती है। जयपुर मंदिर लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर पत्थर से बना है, मंदिर के दीवारों पर नक्काशी की गई है। दो मंजिला बने इस मंदिर में 16 विशाल खंबे बने हैं। जयपुर मंदिर में तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। मुख्य मंदिर के दोनों तरफ पत्थर से तुलसी चौरा बनाया गया है, जिनमे एक साथ 108 दीप जलाने के लिए खूबसूरत नक्काशी दार आले बनाए गए हैं। मंदिर का मुख्य दरवाजा अष्ट धातु से बनाया गया है, जो कि जितना भव्य है उतना ही खूबसूरत भी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM

जयपुर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

गोपेश्वर महादेव मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। गोपेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। गोपेश्वर महादेव मंदिर वंशी बट और यमुना नदी के तट पर बना है जो भगवान भोलेनाथ को समर्पित हैं। गोपेश्वर मंदिर में महादेव अपने भक्तों को दिन में दो स्वरूप में दर्शन देते हैं। जहां भक्त सुबह के समय महादेव का जलाभिषेक करते हैं तो शाम को भोलेनाथ का 16 श्रृंगार कर उन्हें गोपी के रूप में सजाया जाता है। पवित्र यमुना नदी के जल से शिव लिंग को स्नान कराने की धार्मिक प्रथा आज भी इस पवित्र स्थान पर प्रचलित है। भगवान शंकर के गोपी रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में आज भी शिव को नारी के रूप में सजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के परिसर में पीपल का पेड़ स्थित है जो हर मनोकामना को पूरा करता है। इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। मंदिर का इतिहास वृंदावन के गोपेश्वर महादेव के मंदिर में शिव गोपी रूप में विराजमान हैं। ये विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां महादेव का महिलाओं की तरह शृंगार किया जाता है। श्रीकृष्ण वृंदावन में गोपियों के साथ रास लीला किया करते थे तो सभी देवता उन्हें देखने के लिए आतुर रहते थे। भगवान शिव के मन में भी इस महारास में भाग लेने की इच्छा उत्पन्न हुई। जब भगवान शिव ने गोपी रूप धारण करके महारास में हिस्सा लिया तो भगवान श्रीकृष्ण उन्हें पहचान गए। महारास के खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी के साथ मिलकर महादेव के गोपी रूप की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में ठहरने का आग्रह किया। शिव जी ने श्री कृष्ण के आग्रह को स्वीकार किया। तब राधारानी ने शिव जी के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव का नाम दिया। तब से आज तक महादेव का ये रूप वृंदावन में विराजमान है। मंदिर का महत्व गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया जाता हैं और उन्हें गोपियों के रूप में तैयार किया जाता हैं। रासलीला के वक्त शाम को 5 बजे से 9 बजे के दौरान भगवान शिव की पूजा की जाती हैं। मंदिर के परिसर में मौजूद बडा सा पीपल का पेड़ सबकी इच्छाए पूरी करता है इसीलिए इस पेड़ को कल्पवृक्ष कहा जाता है। मंदिर की वास्तुकला वृंदावन में स्थित भगवान शिव के गोपेश्वर महादेव मंदिर में राजस्थानी और नागर शैली का प्रयोग किया गया है। गोपेश्वर महादेव मंदिर का परिसर बहुत बड़ा और भव्य बनाया गया है। मंदिर परिसर में बड़ा आंगन है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर के बगल में एक पीपल का पेड़ है। जिसे कल्पवृक्ष भी कहते है। श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने गोपेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:30 AM – 08:30 AM सांय मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 09:30 PM शाम आरती का समय 07:30 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिव जी को फल,दूध, दही, पेड़े का भोग लगाया जाता है। कुछ भक्त भगवान को जलाभिषेक करते है तो कुछ दूध या शहद से अभिषेक करते है।

गोपेश्वर महादेव मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

श्री रंगनाथ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

रंग जी मंदिर, वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में शामिल है। श्री रंगनाथ मंदिर:उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृन्दावन में श्री रंगनाथ मंदिर स्थित है। इस मंदिर को “रंग जी मंदिर ” के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित है। वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में यह मंदिर शामिल है। इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर के पुजारी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण है। मंदिर का इतिहास सेठ गोबिंद दास और राधा कृष्ण द्वारा श्री रंगनाथ मंदिर की स्थापना की गयी थी। इस मंदिर के निर्माण में स्वामी रंगाचार्य का मार्गदर्शन लिया गया था, जो एक प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और गुरु थे। इस मंदिर का निर्माण कार्य 1845 में आरम्भ हुआ और सन 1851 में यह मंदिर पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो गया था। इस मंदिर को बनने में करीब 6 साल का समय लगा। लगभग 45 लाख रुपये की लागत में यह मंदिर बना था। मंदिर का महत्व रंगनाथ मंदिर के उपस्थित सातवें दरवाजे का नाम वैकुंठ दरवाजा है। केवल वैकुंठ एकादशी के दिन इस दरवाजे को खोला जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जिसने भी इस दरवाजे को पार कर लिया। उसे मोक्ष मिल जाता है। यह मंदिर इस तरह से बनाया गया है कि इस मंदिर में जाने पर ऐसा लगता है जैसे आप दक्षिण के मंदिर का दर्शन कर रहे है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह मूर्ति अयोध्‍या में स्‍थापित थी। जब श्री राम जी का राज्‍याभिषेक हुआ तो वह सभी को दान दे रहे थे। उस समय विभीषण ने उनसे श्रीरंगजी की मूर्ति मांगी और कहा कि वह उस मूर्ति को लंका ले जाना चाहते है। यात्रा के दौरान विभीषण के एक स्थान पर मूर्ति को रख दिया। इसके बाद वह मूर्ति वहां से बिलकुल भी नहीं हिली। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया गया। जो आज श्री रंगनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला इस मंदिर के वास्तुकला की बात करें तो यह मंदिर दक्षिण के श्री रंगम मंदिर के आधार पर बनाया गया है। श्री रंगनाथ मंदिर में आपको दक्षिण और उत्तर भारतीय शैली का मिश्रण देखने को मिलेगा। जो बहुत ही अद्भुत है। यह मंदिर द्रविड वास्तुशिल्प शैली में बनाया गया है। इस मंदिर के गर्भगृह के चारों तरफ 5 आयताकार बाड़े है। इसके पूर्वी और पश्चिमी ओर जयपुर शैली के दो खूबसूरत पत्थर से निर्मित गेट है। मंदिर के पश्चिमी गेट पर एक लकड़ी का रथ है जो कि ब्रह्मोत्सव के समय निकाला जाता है। इस मंदिर में श्रीरंगनाथ जी शेषनाग पर मूर्ति रूप में विराजमान है। उनके चरणों के समीप माता लक्ष्‍मी बैठी है। मंदिर का समय श्री रंगनाथ मंदिर के सुबह दर्शन का समय 08:00 AM – 12:00 PM शाम को श्री रंगनाथ मंदिर के खुलने का समय 03:00 PM – 07:30 PM मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM शाम की मंगला आरती का समय 06:00 PM – 06:30 PM मंदिर का प्रसाद श्री रंगनाथ मंदिर में लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी अर्पित किये जाते है।

श्री रंगनाथ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »