VRINDAVAN

प्रियकांत जू मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

प्रिय यानी कि राधा जी और कांत यानी श्री कृष्ण के आधार पर ही इस मंदिर का नाम रखा गया है। प्रियकांत जू मंदिर उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर मथुरा के वृन्दावन में स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण और राधा जी को समर्पित है। मंदिर में राधा कृष्ण की बहुत ही मनमोहक मूर्ति है। भक्त इनके दर्शन कर आनंदित हो जाते है। प्रिय यानी कि राधा जी और कांत यानी श्री कृष्ण के आधार पर ही इस मंदिर का नाम रखा गया है। प्रियकांत जू मंदिर का इतिहास PRIYAKANT JU MANDIR श्री प्रियाकान्त जू मंदिर के निर्माण का संकल्प 2007 में विश्व शांति चैरिटेबल ट्रस्ट ने लिया था। इसके बाद 2009 में श्री देवकी नन्दन ठाकुर जी महाराज द्वारा इसकी स्थापना की गयी थी। 2012 में इस मंदिर निर्माण के प्रथम चरण की शुरुआत हुयी। इस मंदिर को पूर्ण रूप से बनने में सात साल का समय लगा। 8 फरवरी 2016 में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए इस मंदिर को खोला गया। प्रियकांत जू मंदिर का महत्व मंदिर में होली का त्यौहार बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। ब्रज की होली को देखने और इस त्यौहार को मनाने के लिए लोग दूर दूर से आते है। यहाँ आकर वह भी ब्रज के रंग में रंग जाते है। में यदि दर्शन करना चाहते है तो सबसे अच्छा समय शाम का होता है। क्योंकि शाम के समय मंदिर की भव्यता बहुत शानदार होती है। नीली रौशनी से मंदिर जगमगा उठता है और मंदिर में विराजित राधा कृष्ण की जोड़ी का यह स्वरुप देखने में बहुत ही मनमोहक लगता है। प्रियकांत जू मंदिर की वास्तुकला मंदिर की वास्तुकला मंदिर के बाहर से देखते ही बनती है। यह मंदिर कमल के आकार का बना हुआ है। इस मंदिर की ऊँचाई लगभग 125 फिट है। सड़क के समीप बना यह मंदिर बहुत ही शानदार है। मंदिर के दोनों तरफ फव्वारे लगाए गए है। इस मंदिर में राधा कृष्ण जी के अलावा भोलेनाथ, गणेश जी और हनुमान जी के छोटे छोटे मंदिर है। प्रियकांत जू मंदिर का निर्माण मकराना राजस्थान के संगमरमर से किया गया है। मंदिर का समय प्रियकांत जू मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 12:30 PM मंगला आरती का समय 06:00 AM – 07:00 AM प्रियकांत जू मंदिर के शाम को खुलने का समय 04:30 PM – 08:30 PM राजभोग का समय 11:45 AM – 12:00 PM मंदिर का प्रसाद प्रियकांत जू मंदिर में प्रसाद के रूप में पेड़ा, बूंदी, रेवडी, बेसन सेवैया का भोग लगता है। भगवान को पुष्प भी अर्पित किये जाते है।

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गोविंद देवी जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर को “राधा गोविंद देव मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोविंद देवी जी मंदिर श्री कृष्ण की नगरी मथुरा उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में स्थित है। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय का मंदिर है। इस मंदिर को “राधा गोविंद देव मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर वृंदावन के प्राचीन मंदिरों में से एक है। यह भगवान कृष्ण के गोविंद देव जी स्वरूप को समर्पित मंदिर है।  Govind Dev Ji Temple:मंदिर का इतिहास इस मंदिर का निर्माण सन् 1590 में राजा मानसिंह ने करवाया था। इस मंदिर का निर्माण गुरु और महान कृष्णभक्त श्री कल्याणदास जी की निगरानी में किया गया। मंदिर का पूर्ण खर्च राजा मानसिंह द्वारा ही किया गया था। गोविंद देवी जी मंदिर जब यह मंदिर बना था तो यह सात मंजिला मंदिर था। इस मंदिर के सबसे ऊपरी भाग पर एक विशाल दीपक बनवाया गया था। यह दीपक इतना विशाल था कि इसमें हर रोज 50 किलोग्राम से ज्यादा देसी घी का इस्तेमाल कर इसे जलाया जाता था। इस दीपक की लौ कई किमी तक से भी दिखाई देती थी। मंदिर में जलते इस लौ को देखकर औरंगजेब के मन में ईर्ष्या उत्पन्न हो गयी और वह इस मंदिर की सुंदरता को नष्ट करने का विचार करने लगा। अपनी सेना को भेजकर मंदिर को तुड़वाना चाहा। गोविंद देवी जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत भगवान की कृपा से मंदिर के पुजारी को इस बात का अंदेशा हो गया। उन्होंने तुरंत ही भगवान गोविंद की पुरातन प्रतिमा को वहां से हटा दिया और बहुत दूर ले गए। जयपुर के गोविंद वल्लभ मंदिर में वास्तविक प्रतिमाओं को स्थानांतरित कर दिया गया था। औरंगजेब की सेना इस मंदिर के 4 मंजिल को ही गिरा सकी। मंदिर को खंडित करने का भी प्रयास किया गया। 1873 तक मंदिर उसी अवस्था में रहा। औरंगजेब के जाने के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया गया। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि जब औरंगजेब ने इस मंदिर को तोड़ दिया था। उसके बाद उस मंदिर में कोई भी भक्त दर्शन करने नहीं जाता था। इस कारण मंदिर खंडहर बन गया था। गोविंद देवी जी मंदिर वहां पर भूतों का निवास हो गया था। परन्तु इन भूत प्रेतों ने किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाया था। ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर का पुनः निर्माण भव्यता के साथ करना बहुत ही मुश्किल था। गोविंद देवी जी मंदिर इस मंदिर के निर्माण में यहाँ रहने वाले भूतों का भी योगदान है। वह इसलिए क्योंकि इस मंदिर की कारीगरी इस तरह की है जो कोई भी मनुष्य पांच से दस साल में नहीं बना सकता। मंदिर की वास्तुकला गोविंद देव जी मंदिर की वास्तुकला अन्य मंदिरों से अलग है। गोविंद देवी जी मंदिर यह मंदिर पहले सात मंजिला ईमारत थी। मंदिर में दोनों तरफ शानदार खम्भे बने हुए है जो गर्भगृह तक जाते है। यह मंदिर बहुत ही खूबसूरती से बनाया गया है। मंदिर का समय गर्मियों में मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 12:00 PM सर्दियों में गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:30 PM गर्मियों में मंगल आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM गर्मियों में शाम को गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय 05:30 PM – 09:30 PM सर्दियों में शाम को गोविंद देव जी का मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 08:30 PM सर्दियों में मंगला आरती का समय 05:00 AM – 06:00 AM मंदिर का प्रसाद गोविंद देव जी मंदिर में लड्डू ,माखन और मिश्री का भोग लगाया जाता है।

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कात्यायनी पीठ वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

ऐसा कहा जाता है कि यहां माता सती के केश गिरे थे, इसका प्रमाण शास्त्रों में भी मिलता है। कात्यायनी पीठ वृंदावन भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। भगवान कृष्ण की नगरी वृन्दावन में भी, देवी के 51 शक्तिपीठों में से एक कात्यायनी पीठ स्थित है। यह एक बहुत ही प्राचीन सिद्ध पीठ है जो राधाबाग के पास है। यहाँ माता सती ‘उमा’ तथा भगवन शंकर ‘भूतेश’ के नाम से जाने जाते है। ऐसा कहा जाता है कि यहां माता सती के केश गिरे थे, इसका प्रमाण शास्त्रों में भी मिलता है। देवर्षि श्री वेदव्यास जी ने श्रीमद् भागवत के दशम स्कंध के 22वें अध्याय में उल्लेख किया है- कात्यायनि महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नन्दगोपसुतं देवि पतिं मे कुरु ते नम:॥ katyayani peeth:मंदिर का इतिहास कात्यायनी पीठ का निर्माण स्वामी केशवानंद ने फरवरी 1923 में करवाया था। इस मंदिर में मां कात्यायनी के साथ पंचानन शिव, विष्णु, सूर्य तथा सिद्धिदाता श्री गणेशकी मूर्तियां हैं । कात्यायनी पीठ वृंदावन लोग मंदिर को मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण देखते ही श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और दिल और दिमाग में शांति पाते हैं। कात्यायनी पीठ में श्रद्धालुओं की भीड़ हमेशा लगी रहती है। बताया जाता है कि राधारानी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए इस शक्तिपीठ की पूजा की थी। कात्यायनी पीठ वृंदावन:मंदिर का महत्व कात्यायनी पीठ में अविवाहित युवक-युवती नवरात्र के मौके पर मनपसंद वर और वधु पाने के लिए कात्यायनी माता का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं और उनकी मन की मुराद पूरी भी होती है। ऐसा कहा जाता है श्री कृष्ण ने कात्यायनी पीठ वृंदावन अपने मामा कंस का वध करने से कात्यायनी मां की पूजा की थी। कंस वध से पहले यमुना किनारे श्री कृष्ण मां कात्यायनी को कुलदेवी मानकर बालू से उनकी प्रतिमा बनाई और पूजा की। उसके बाद कंस का वध किया था। जिन लड़कियों या लड़को की शादी में किसी कारण कोई विलंब हो रहा होता है। कात्यायनी मां की कृपा से उनका भी विवाह जल्द से जल्द हो जाता है। मंदिर की वास्तुकला कात्यायनी पीठ मंदिर एक शांत और वास्तुकला की दृष्टि से अद्भुत मंदिर है। मंदिर की बनावट में राजस्थानी शैली की झलक देखने को मिलती है। मंदिर में एक विशाल परिसर है, जहां भक्त आकर मां की पूजा-अर्चना करते हैं। कात्यायनी पीठ वृंदावन उत्कृष्ट नक्काशी और पेंटिंग इसकी सुंदरता को और बढ़ाती हैं। मंदिर में कई स्तम्भ बने हैं, जिसपर कात्यायनी मां से जुड़े संस्कृत में मंत्र लिखे गए हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 12:00 PM सांय मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 07:30 PM

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गोपीनाथ मंदिर वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर को “राधा गोपीनाथ मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोपीनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश मथुरा के वृन्दावन नगरी में स्थित है। सप्तदेवालयों में शामिल यह मंदिर यमुना नदी के केशीघाट के समीप बना हुआ है। वैष्णव संप्रदाय के इस मंदिर को “राधा गोपीनाथ मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। गोपीनाथ मंदिर का इतिहास Mandir Shri Gopinath Ji : गोपीनाथ मंदिर में मूर्तियों की पूजा मधुपंडित गोस्वामी द्वारा की जाती थी जो गुरु चैतन्य के बहुत करीबी सहयोगियों में से एक थे। पौराणिक कथा के अनुसार, गोपीनाथजी की मूर्ति लंबे समय तक खोयी हुयी थी। ऐसा कहा जाता है कि परमानंद भट्टाचार्य नाम के एक महान भक्त ने खोई हुई मूर्ति को पुनर्जीवित किया था। एक रात को भगवान गोपीनाथ परमानंद भट्टाचार्य के स्वप्न में आए और उन्होंने वामशीवट नामक पेड़ के नीचे अपने रहने के स्थान का पता बताया। स्वप्न के अनुसार परमानंद उस पेड़ के पास गए और वहां पर मूर्ति को पुनर्जीवित किया। उन्होंने मूर्ति की पूजा करना शुरू कर दिया और बाद में मूर्ति मधुपंडितगोस्वामी को सौंप दी। मंदिर का महत्व ऐसा माना जाता है कि गोपीनाथ मंदिर में विराजित भगवान कृष्ण की मूर्ति चमत्कारी है। इनके दर्शन मात्र से ही श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इस मंदिर का मनमोहक और शांत वातावरण भक्तों को भगवान की ओर आकर्षित करता है। मंदिर की वास्तुकला गोपीनाथ मंदिर लाल पत्थर से निर्मित है। नदी के किनारे होने के कारण मंदिर की सुंदरता और भी बढ़ जाती है। मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा बांसुरी बजाते हुए स्थापित है। भगवान के दाये तरफ प्रिय राधा जी और बाये तरफ अनंग-मंजरी खड़े हुए हैं। उनका साथ देने के लिए ललिता और विशाखा भी है। इस मंदिर में ही आचार्य मधु पंडित की समाधि भी है। यदि आप वृन्दावन गए है एक बार इस मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए। मंदिर का समय गोपीनाथ मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 01:00 PM श्रृंगार आरती 08:30 AM – 09:00 AM शाम में गोपीनाथ मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 09:00 PM शयन आरती 08:00 PM – 08:30 PM मंगला आरती 05:00 AM – 05:30 AM राजभोग आरती 11:30 AM – 12:00 PM संध्या आरती 06:00 PM – 06:30 PM

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जयपुर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। जयपुर मंदिर वृन्दावन भगवान श्रीकृष्ण की लीला से जुड़ा हुआ एक धार्मिक व ऐतिहासिक नगर है, जो भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा ज़िले में स्थित है। यह स्थान श्री कृष्ण की कुछ अलौकिक बाल लीलाओं का केन्द्र माना जाता है। वैसे तो वृंदावन में एक से बढ़कर एक मंदिर हैं लेकिन वृंदावन-मथुरा रोड पर किशोर पुरा में स्थित जयपुर मंदिर की अपनी अलग पहचान है। खास बात ये है कि उत्तर प्रदेश में बने होने के बाद भी जयपुर मंदिर का रख-रखाव राजस्थान सरकार करती है। भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है, लेकिन यहां बांके बिहारी के अलग-अलग रूप की प्रतिमाएं स्थापित हैं। यहां पर प्रभु के राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल रूप की मूर्तियां विद्यमान हैं। मंदिर का इतिहास जयपुर मंदिर का निर्माण, जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह जी ने 1916 में करवाया था। माधो सिंह जी ने अपने गुरु ब्रह्मचारी श्री गिरिधारीशरण जी के प्रसन्नता हेतु जयपुर से वृंदावन आकर पहले 100 एकड़ जमीन खरीदी, फिर उसके बाद इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया। इस मंदिर को बनने में करीब 30 साल लगे थे। कई हजार मजदूरों और कुशल कारीगरों ने इस मंदिर का निर्माण किया। मंदिर का महत्व जयपुर मंदिर वृंदावन में श्री कृष्ण का सबसे बड़ा मंदिर है। जानकार बताते हैं कि पूरे बृज मण्डल जयपुर मंदिर से बड़ा दूसरा कोई मंदिर नहीं है। ऐसा भी कहा जाता है कि जयपुर मंदिर निर्माण के लिए इस्तेमाल हो रहे पत्थरों को मथुरा से वृंदावन तक लाने के लिए माधो सिंह जी ने मथुरा से वृंदावन तक नई रेलवे लाइन बिछवाई थी। जयपुर मंदिर में राधा माधव, आनंद बिहारी और हंस गोपाल जी और उनकी सखियों की मूर्तियां दूसरे तल पर स्थापित हैं, जिनके दर्शन मंदिर के बाहर खड़े भक्त भी आसानी से कर सकते हैं। मंदिर की वास्तुकला जयपुर मंदिर की वास्तुकला में प्राचीन राजस्थानी शैली का उत्कृष्ट कला देखने को मिलती है। जयपुर मंदिर लाल बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर पत्थर से बना है, मंदिर के दीवारों पर नक्काशी की गई है। दो मंजिला बने इस मंदिर में 16 विशाल खंबे बने हैं। जयपुर मंदिर में तीन प्रवेश द्वार बनाए गए हैं। मुख्य मंदिर के दोनों तरफ पत्थर से तुलसी चौरा बनाया गया है, जिनमे एक साथ 108 दीप जलाने के लिए खूबसूरत नक्काशी दार आले बनाए गए हैं। मंदिर का मुख्य दरवाजा अष्ट धातु से बनाया गया है, जो कि जितना भव्य है उतना ही खूबसूरत भी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM

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गोपेश्वर महादेव मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। गोपेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। गोपेश्वर महादेव मंदिर वंशी बट और यमुना नदी के तट पर बना है जो भगवान भोलेनाथ को समर्पित हैं। गोपेश्वर मंदिर में महादेव अपने भक्तों को दिन में दो स्वरूप में दर्शन देते हैं। जहां भक्त सुबह के समय महादेव का जलाभिषेक करते हैं तो शाम को भोलेनाथ का 16 श्रृंगार कर उन्हें गोपी के रूप में सजाया जाता है। पवित्र यमुना नदी के जल से शिव लिंग को स्नान कराने की धार्मिक प्रथा आज भी इस पवित्र स्थान पर प्रचलित है। भगवान शंकर के गोपी रूप में प्रसिद्ध इस मंदिर में आज भी शिव को नारी के रूप में सजाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर के परिसर में पीपल का पेड़ स्थित है जो हर मनोकामना को पूरा करता है। इस मंदिर में भगवान शिव की पुरुष और स्त्रियों की शक्ति के संगम को बताया गया हैं। मंदिर का इतिहास वृंदावन के गोपेश्वर महादेव के मंदिर में शिव गोपी रूप में विराजमान हैं। ये विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां महादेव का महिलाओं की तरह शृंगार किया जाता है। श्रीकृष्ण वृंदावन में गोपियों के साथ रास लीला किया करते थे तो सभी देवता उन्हें देखने के लिए आतुर रहते थे। भगवान शिव के मन में भी इस महारास में भाग लेने की इच्छा उत्पन्न हुई। जब भगवान शिव ने गोपी रूप धारण करके महारास में हिस्सा लिया तो भगवान श्रीकृष्ण उन्हें पहचान गए। महारास के खत्म होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी के साथ मिलकर महादेव के गोपी रूप की पूजा की और उनसे इस रूप में ब्रज में ठहरने का आग्रह किया। शिव जी ने श्री कृष्ण के आग्रह को स्वीकार किया। तब राधारानी ने शिव जी के गोपी के रूप को गोपेश्वर महादेव का नाम दिया। तब से आज तक महादेव का ये रूप वृंदावन में विराजमान है। मंदिर का महत्व गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग का विशेष श्रृंगार किया जाता हैं और उन्हें गोपियों के रूप में तैयार किया जाता हैं। रासलीला के वक्त शाम को 5 बजे से 9 बजे के दौरान भगवान शिव की पूजा की जाती हैं। मंदिर के परिसर में मौजूद बडा सा पीपल का पेड़ सबकी इच्छाए पूरी करता है इसीलिए इस पेड़ को कल्पवृक्ष कहा जाता है। मंदिर की वास्तुकला वृंदावन में स्थित भगवान शिव के गोपेश्वर महादेव मंदिर में राजस्थानी और नागर शैली का प्रयोग किया गया है। गोपेश्वर महादेव मंदिर का परिसर बहुत बड़ा और भव्य बनाया गया है। मंदिर परिसर में बड़ा आंगन है, जहां श्रद्धालु भगवान शिव और श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करते हैं। ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर के बगल में एक पीपल का पेड़ है। जिसे कल्पवृक्ष भी कहते है। श्री कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने गोपेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण करवाया था। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह आरती का समय 07:30 AM – 08:30 AM सांय मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 09:30 PM शाम आरती का समय 07:30 PM – 08:30 PM मंदिर का प्रसाद गोपेश्वर महादेव मंदिर में शिव जी को फल,दूध, दही, पेड़े का भोग लगाया जाता है। कुछ भक्त भगवान को जलाभिषेक करते है तो कुछ दूध या शहद से अभिषेक करते है।

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श्री रंगनाथ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

रंग जी मंदिर, वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में शामिल है। श्री रंगनाथ मंदिर:उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृन्दावन में श्री रंगनाथ मंदिर स्थित है। इस मंदिर को “रंग जी मंदिर ” के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर में भगवान विष्णु जी की मूर्ति स्थापित है। वृन्दावन के सबसे बड़े मंदिरों में यह मंदिर शामिल है। इस मंदिर की खास बात यह है कि मंदिर के पुजारी दक्षिण भारतीय ब्राह्मण है। मंदिर का इतिहास सेठ गोबिंद दास और राधा कृष्ण द्वारा श्री रंगनाथ मंदिर की स्थापना की गयी थी। इस मंदिर के निर्माण में स्वामी रंगाचार्य का मार्गदर्शन लिया गया था, जो एक प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान और गुरु थे। इस मंदिर का निर्माण कार्य 1845 में आरम्भ हुआ और सन 1851 में यह मंदिर पूर्ण रूप से बनकर तैयार हो गया था। इस मंदिर को बनने में करीब 6 साल का समय लगा। लगभग 45 लाख रुपये की लागत में यह मंदिर बना था। मंदिर का महत्व रंगनाथ मंदिर के उपस्थित सातवें दरवाजे का नाम वैकुंठ दरवाजा है। केवल वैकुंठ एकादशी के दिन इस दरवाजे को खोला जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन जिसने भी इस दरवाजे को पार कर लिया। उसे मोक्ष मिल जाता है। यह मंदिर इस तरह से बनाया गया है कि इस मंदिर में जाने पर ऐसा लगता है जैसे आप दक्षिण के मंदिर का दर्शन कर रहे है। पौराणिक कथाओं के अनुसार यह मूर्ति अयोध्‍या में स्‍थापित थी। जब श्री राम जी का राज्‍याभिषेक हुआ तो वह सभी को दान दे रहे थे। उस समय विभीषण ने उनसे श्रीरंगजी की मूर्ति मांगी और कहा कि वह उस मूर्ति को लंका ले जाना चाहते है। यात्रा के दौरान विभीषण के एक स्थान पर मूर्ति को रख दिया। इसके बाद वह मूर्ति वहां से बिलकुल भी नहीं हिली। बाद में उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया गया। जो आज श्री रंगनाथ मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर की वास्तुकला इस मंदिर के वास्तुकला की बात करें तो यह मंदिर दक्षिण के श्री रंगम मंदिर के आधार पर बनाया गया है। श्री रंगनाथ मंदिर में आपको दक्षिण और उत्तर भारतीय शैली का मिश्रण देखने को मिलेगा। जो बहुत ही अद्भुत है। यह मंदिर द्रविड वास्तुशिल्प शैली में बनाया गया है। इस मंदिर के गर्भगृह के चारों तरफ 5 आयताकार बाड़े है। इसके पूर्वी और पश्चिमी ओर जयपुर शैली के दो खूबसूरत पत्थर से निर्मित गेट है। मंदिर के पश्चिमी गेट पर एक लकड़ी का रथ है जो कि ब्रह्मोत्सव के समय निकाला जाता है। इस मंदिर में श्रीरंगनाथ जी शेषनाग पर मूर्ति रूप में विराजमान है। उनके चरणों के समीप माता लक्ष्‍मी बैठी है। मंदिर का समय श्री रंगनाथ मंदिर के सुबह दर्शन का समय 08:00 AM – 12:00 PM शाम को श्री रंगनाथ मंदिर के खुलने का समय 03:00 PM – 07:30 PM मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM शाम की मंगला आरती का समय 06:00 PM – 06:30 PM मंदिर का प्रसाद श्री रंगनाथ मंदिर में लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। साथ ही फूल भी अर्पित किये जाते है।

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शाहजी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में खम्भे टेढ़े-मढ़े है जिस कारण इसे “टेढ़ा खंभा मंदिर” भी कहा जाता है। शाहजी मंदिर:वृंदावन:उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध नगरी मथुरा, वृन्दावन में शाह जी मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर को “छोटे राधा रमण मंदिर ” के नाम से भी जाना जाता है। शाहजी मंदिर:वृंदावन इस मंदिर में खम्भे टेढ़े-मढ़े है जिस कारण इसे “टेढ़ा खंभा मंदिर” भी कहा जाता है। राधा जी और श्री कृष्ण के एक साथ विग्रह वाला यह मंदिर विशेष महत्त्व रखता है। मंदिर का इतिहास शाहजी मंदिर का निर्माण 1876 में लखनऊ के व्यापारी शाह कुन्दन लाल और शाह फुन्दन लाल ने करवाया था। वह श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे। इस कारण ही इस मंदिर का नाम शाह जी मंदिर रखा गया। इस मंदिर के निर्माण में आठ साल का समय लगा। भगवान राधा-कृष्ण की मूर्ति द्वारा स्थापित यह मंदिर अपनी अद्भुत ईमारत के कारण दुनिया भर से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर का महत्व ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मंदिर के बसंती कमरे में ही श्रीजी ने शाह जी को दर्शन दिए थे। भगवान के दर्शन की आस में भक्त हर साल भारी संख्या में बसंत पंचमी पर इस मंदिर में आते है। इस मंदिर में जन्माष्टमी और गोवर्धन पूजा जैसे त्योहारों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। इन विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों से सजाया जाता है साथ ही रोशनी भी की जाती है। बसंत पंचमी के दिन भगवान बसंती पोशाक पहनकर भक्तों को दर्शन देते है। ऐसा बताया जाता है कि शाह कुंदन लाल जी और फुंदन लाल जी लखनऊ के निवासी थे। उनकी भगवान कृष्ण में अगाध आस्था थी। लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह से इनकी गहरी दोस्ती हुआ करती थी। सन 1858 में जब लड़ाई छिड़ी तो अंग्रेजों द्वारा वाजिद अली शाह को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद शाह परिवार के पूर्वज वृन्दावन में आकर बस गए। यहाँ आने के बाद उन्होंने इस मंदिर की नीव रखी। शाहजी मंदिर:वृंदावन बसंत पंचमी के दिन सन 1876 में यह मंदिर बनकर तैयार हो गया। शाहजी मंदिर:वृंदावन मंदिर में ठाकुर राधारमण लाल जी के श्री विग्रह सबसे पहले इसी कमरे में विराजमान हुए थे। शाहजी मंदिर:वृंदावन तभी से इस बसंती कमरे का विशेष महत्त्व है। इस कमरे के पट हर साल बसंत पंचमी के दिन खुलते है। इसके अलावा श्रावण मास में त्रयोदशी व चतुर्दशी के दिन भी इस कमरे के पट खुलते है और ठाकुर जी अपने भक्तों को दर्शन देते है। मंदिर की वास्तुकला शाह जी मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। सफ़ेद संगमरमर से बने इस मंदिर को देख कर हर कोई आचार्यचकित रह जाता है। इस मंदिर में खम्भे सर्पाकार है जो मंदिर की शोभा को और बढ़ा देते है। इस मंदिर में “बसंती कमरा” भी है जो बहुत ही शानदार है। शाहजी मंदिर:वृंदावन मंदिर के अंदर आकर्षक पेंटिंग भी आपको देखने को मिलेंगी। भगवान के दर्शन के साथ साथ इस मंदिर की वास्तुकला को देख कर हर भक्त आनंदित हो जाता है। मंदिर का समय गर्मियों में शाहजी मंदिर खुलने का सुबह का समय 05:30 AM – 12:30 PM गर्मियों में मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM गर्मियों में शाम को शाहजी मंदिर खुलने का का समय 04:30 PM – 08:30 PM सर्दियों में मंगला आरती का समय 06:30 AM – 07:00 AM सर्दियों में शाहजी मंदिर खुलने का सुबह का समय 08:30 AM – 12:30 PM सर्दियों में शाम को शाहजी मंदिर खुलने का का समय 05:30 PM – 07:30 PM

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राधा श्याम सुंदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

राधा श्याम सुंदर मंदिर:ये मंदिर गौडीय वैष्णव समुदाय के लिए सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। राधा श्याम सुंदर मंदिर:श्री राधा श्याम मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। श्री राधा श्याम मंदिर शहर के लोई बाजार में सेवा कुंज नाम के स्थान पर बना हुआ है। राधा श्याम सुंदर मंदिर ये मंदिर गौडीय वैष्णव समुदाय के लिए सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। वैसे तो वृंदावन में गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के 7 मुख्य मंदिर हैं, लेकिन श्री राधा श्यामसुंदर मंदिर का सभी वैष्णवों के दिलों में एक खास स्थान है। मंदिर वृंदावन धाम, लोई बाजार में सेवा कुंज नाम के स्थान पर स्थित है। राम जनार्दन मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर का इतिहास 1580 ई में भरतपुर राज्य के राजा को अपने खजाने में श्री राधारानी की एक सुंदर मूर्ति मिली। राजा मूर्ति को श्री श्यामानंद प्रभु के कुटीर में ले आए और वसंत पंचमी के दिन श्री श्याम सुंदर के साथ उनका विवाह संपन्न कराया। राधा श्याम सुंदर मंदिर राजा ने जोड़े के लिए एक सुंदर मंदिर भी बनवाया। मंदिर में श्री श्यामसुंदर के सबसे सुंदर और अद्वितीय देवता हैं, जो राधारानी के हृदय से प्रकट हुए थे। द्वारकाधीश गोपाल मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर का महत्व यह विशेष स्थल श्री श्यामानंद प्रभु की भक्ति के लिए विश्व विख्यात है। कहा जाता है कि प्रभु पर श्री राधारानी की व्यक्तिगत कृपा है। गौड़ीय वैष्णव पंथ के सभी प्रमुख आचार्य इस दिव्य मंदिर में उनकी आधिपत्य, राधा श्याम सुंदर मंदिर श्री श्यामसुंदर के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन पूजन से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं व भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। मंदिर में अत्यंत सौभाग्यशाली ही प्रवेश कर पाता है। मंदिर में प्रार्थना करने का सबसे अच्छा समय वसंत पंचमी के दिन होता है। पंचमी का त्योहार यहां सबसे महत्वपूर्ण रूप में मनाया जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर की वास्तुकला श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर की वास्तुकला में राजस्थानी कला की झलक देखने को मिलती है। मंदिर में एक बहुत बड़ा खुला क्षेत्र और एक संगमरमर का मंच है। राधा श्यामसुंदर मंदिर में श्री लाला लाली , श्री राधा कुंजबिहारी, श्री राधा श्याम सुंदर जी मूर्तियों के तीन सेट है। इसमें मुख्य देवताओं के विपरीत तरफ वृंदा माता की मूर्ति भी है। गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के आचार्य बलदेव विद्याभूषण के सेव्य ठा. राधाश्यामसुंदर मंदिर में मुख्य सिंहासन पर विराजमान हैं। इनके बाईं ओर श्री श्यामसुंदर व राधारानी प्रतिष्ठित हैं। मनकामेश्वर मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:00 AM – 12:00 PM सुबह मंगला आरती का समय 04:00 AM – 05:00 AM सुबह शृंगार आरती का समय 10:30 AM – 11:00 AM संध्या आरती का समय 06:15 PM – 07:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 10:00 PM सुबह धूप आरती का समय 08:15 AM – 08:30 AM सुबह राज भोग आरती का समय 11:30 AM – 12:00 PM रात में शयन आरती का समय 09:00 PM – 09:30 PM मंदिर का प्रसाद श्री श्याम सुंदर मंदिर में माखन और मिश्री का भोग चढ़ाया जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, पंजीरी का भोग लगाया जाता है।

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राधा दामोदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

भगवान राधा कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन को सात देवताओं की प्राकट्य स्थली भी कहा जाता है। राधा दामोदर मंदिर:भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। राधा दामोदर मंदिर में गौड़ीय संप्रदाय के साथ अन्य संप्रदायों के भक्तों और अनुयाईयों का आस्था का केंद्र रहा है। राधा दामोदर मंदिर भगवान राधा कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन को सात देवताओं की प्राकट्य स्थली भी कहा जाता है। यहां चैतन्य महाप्रभु के शिष्य 6 गोस्वामियों ने अपनी भक्ति के जरिए 7 देवताओं की प्रतिमा को प्रकट किया था। इन्हीं में से एक हैं राधा दामोदर, जिनको श्रीरूप गोस्वामी ने स्थापित किया था। इसकी सेवा की जिम्मेदारी जीव गोस्वामी को दी थी। राधा दामोदर मंदिर की चार परिक्रमाएँ करने से गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा का फल मिलता है। श्री राधा वल्लभ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का इतिहास राधा दामोदर मंदिर करीब साढ़े चार सौ वर्ष पुराना है। संवत 1599 सन् 1542 की माघ शुक्ल दशमी के दिन श्रीरूप गोस्वामी ने यहाँ राधा दामोदर जी के विग्रहों की स्थापना करके, उनकी सेवा का भार जीव गोस्वामी को सौंपा। इसी मंदिर में छह गोस्वामियों, रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, भक्त रघुनाथ, जीव गोस्वामी, गोपाल भट्ट, रघुनाथ दास ने अपनी साधना स्थली बनाया। श्री रूपगोस्वामी जी सेवाकुंज के अन्तर्गत यहीं भजन कुटी में वास करते थे। यहीं पर तत्कालीन गोस्वामीगण एवं भक्तजन सम्मिलित होकर इष्टगोष्ठी करते थे और श्री रघुनाथभट्ट जी अपने मधुर कंठ से उस वैष्णव सभा में श्रीमद्भागवत की व्याख्या करते। नीलेश्वर महादेव मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत मंदिर का महत्व राधा दामोदर मंदिर को इस्कॉन मन्दिर के संस्थापक प्रभुपाद महाराज ने अपने वृन्दावन प्रवास के दौरान सर्वप्रथम आराधना का केंद्र बनाया था। ऐसी मान्यता है कि राधा दामोदर मंदिर की परिक्रमा करने से उसमें विराजमान गिरिराज शिला की स्वतः परिक्रमा हो जाती है। इसकी एक किलोमीटर से भी कम की चार परिक्रमाएँ करने से श्रृद्धालु गिरिराज गोवर्धन की 25 किलोमीटर लम्बी परिक्रमा का पुण्य अर्जित कर लेता है। श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर की वास्तुकला राधा दामोदर मंदिर में राजस्थानी शैली की वास्तुकला दिखाई देती है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर राजस्थानी शैली में भव्य गेट बना है। मंदिर के केंद्र में एक खुले आंगन के साथ-साथ खूबसूरती से नक्काशीदार खंभे और एक शानदार चित्रित छत है। गर्भ गृह के सिंहासन में श्री वृन्दावनचन्द्र, श्री छैलचिकनिया, श्री राधाविनोद और श्री राधामाधव आदि विग्रह विराजमान हैं। मंदिर के पीछे श्री जीवगोस्वामी तथा श्री कृष्णदास गोस्वामी की समाधियाँ प्रतिष्ठित हैं। मंदिर के उत्तर भाग में श्रीपाद रूपगोस्वामी की भजन-कुटी और समाधि मन्दिर स्थित हैं। पास ही श्रीभूगर्भ गोस्वामी की समाधि है। पागल बाबा मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 01:00 PM मंगला आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद राधा दामोदर मंदिर में श्री कृष्ण जी को फल, माखन, मिश्री, ड्राई फ्रूट्स का भोग लगाया जाता है। मंदिर में प्रभु को खीर भी चढ़ाई जाती है। राधा रमण मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

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पागल बाबा मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

श्री कृष्ण की लीलास्थली के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए इस मंदिर की स्थापना की गई। पागल बाबा मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृन्दावन शहर में स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। भगवान श्री कृष्ण की प्रेममय लीलास्थली के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए इस नौ मंजिला मंदिर की स्थापना की गई। 221 फीट ऊँचे, सफेद पत्थरों वाले पागल बाबा मंदिर इस मंदिर की स्थापना श्रीमद लीलानंद ठाकुर जी (पागलबाबा) द्वारा की गई। श्रीमद लीलानंद ठाकुर जी महाराज स्वयं पागलबाबा के नाम से प्रसिद्ध थे अतः इस श्री राधा-कृष्ण मंदिर को लोग पागलबाबा मंदिर के नाम से पुकारते हैं। यह अनूठा मंदिर भारतवासियों को तो आकर्षित करता ही है, पागल बाबा मंदिर विदेशी पर्यटकों को भी मुग्ध करता है और भक्ति प्रधान देश की महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध भी करता है। मंदिर की देख रेख के लिए पांच लोगों का बोर्ड है। डीएम इसके चेयरमैन हैं। 20 लोगों की कार्य समिति भी है। मंदिर का इतिहास सन् 1969 में श्रीमद लीलानंद ठाकुर जी महाराज ने देश विदेश के पर्यटकों का ध्यान वृंदावन की ओर आकर्षित करने के लिए एक भव्य मंदिर बनाने की परियोजना बनाई। पागल बाबा मंदिर वृंदावन मथुरा मार्ग पर एक विशाल भू-खंड लेकर अल्पावधि में ही, जहाँ केवल सूखा खेत था, वहाँ एक विशाल संगमरमर के नौ मंज़िला मंदिर लीलाधाम की स्थापना की। 24 जुलाई 1980 को लीलानंद ठाकुर जी महाराज ने शरीर का त्याग कर समाधि ले ली। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में सब की इच्छाएं पूरी होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि बांके बिहारी खुद अपने भक्त के लिए गवाही देने के लिए चले आए थे। खासतौर पर पूर्णिमा के अवसर पर इस मंदिर में हजारो की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। दावा है कि विश्व में यह अपने किस्म का नौ मंजिल वाला पहला मंदिर है। आठ बीघे में मंदिर तो पांच बीघे में यहीं पर गौशाला है। मंदिर परिसर में ही पागल बाबा हॉस्पिटल भी बना है। यहां हजारों रोगियों का रोजाना उपचार किया जाता है। पागलबाबा मंदिर में रोजाना हजारों लोगों की खिचड़ी सेवा की जाती है। मंदिर की वास्तुकला पागलबाबा मंदिर को नागरा शैली में बनाया गया है। पागलबाबा मंदिर मॉडर्न वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है। चारों तरफ शस्य श्यामला हरित भूमिपर श्वेत प्रस्तर जडित अतुलनीय मंदिर भारतवर्ष में अपने ढंग का प्रथम मंदिर है। पागल बाबा मंदिर श्वेत प्रस्तर जड़ित 18 हजार वर्ग फीट और 221 फीट की ऊंचाई वाले इस मंदिर की प्रत्येक मंजिल पर देव प्रतिमा स्थापित हैं। पागल बाबा मंदिर बाबा ने ऐतिहासिक गोपेश्वर महादेव के पास स्थित भूतगली में लीला कुंज का भी निर्माण किया। कालांतर में लीलाकुंज पुराने पागल बाबा के रूप से प्रसिद्धि को प्राप्त हुआ। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 11:30 AM शाम मंदिर खुलने का समय 03:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद पागलबाबा मंदिर में भक्त श्री कृष्ण को माखन मिश्री, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा भक्त प्रभु को अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, बर्फी का भी भोग लगाते हैं।

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श्री राधा वल्लभ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इसे राधा वल्लभलाल जी मंदिर भी कहा जाता है। श्री राधा वल्लभ मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृन्दावन शहर में एक ऐतिहासिक मंदिर है। इसे राधा वल्लभलाल जी मंदिर भी कहा जाता है, जो मथुरा आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। श्री राधा वल्लभ मंदिर मंदिर के केंद्रीय देवता श्री कृष्ण हैं, जिन्हें श्री राधा वल्लभ के नाम से पूजा जाता है। राधावल्लभ मंदिर में श्री कृष्ण के साथ, एक मुकुट रखा गया है श्री राधा वल्लभ मंदिर जो देवी राधा की उपस्थिति का प्रतीक है। यह मंदिर राधा वल्लभ संप्रदाय से संबंधित है और इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में वृंदावन के संत हित हरिवंश महाप्रभु के मार्गदर्शन में किया गया था। राधावल्लभ मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्थल की सूची में भी है। मंदिर का इतिहास राधावल्लभ मंदिर को हित मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण वर्ष 1585 में हित हरिवंश महाप्रभु के पुत्र श्री वनचंद्र के शिष्य सुंदरदास भटनागर ने करवाया था। श्री राधा वल्लभ मंदिर इतिहासकारों की माने तो राजा मान सिंह ने सबसे पहले इस मंदिर का निर्माण कराने का निर्णय लिया था। लेकिन यह अफवाह सुनकर कि जो कोई भी इस मंदिर का निर्माण करेगा उसकी एक वर्ष के भीतर मृत्यु हो जाएगी, वह पीछे हट गया। हालांकि मंदिर का निर्माण पूरा होने के एक वर्ष के भीतर ही सुंदरदास भटनागर की मृत्यु हो गई और ये अफवाह सच हो गई। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है की राधावल्लभ मंदिर में प्रभु उसी भक्त को दर्शन देते हैं जो सारे पाप कर्मों को त्याग कर निष्कपट होकर सच्चे मन के साथ मंदिर में प्रवेश करता है और जिस भक्त के हृद्य में सच्चे प्रेम और भक्ति की भावना नहीं होती वे लाख कोशिश कर ले उसे कभी दर्शन प्राप्त नही होते। मंदिर की वास्तुकला राधावल्लभ मंदिर वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के पास चट्टान पर स्थित है। यह अपनी आकर्षक वास्तुकला और भव्य सजावट के कारण अलग दिखता है। राधा वल्लभ मंदिर सबसे पुराने और लंबे समय तक जीवित रहने वाले मंदिरों में से एक है। श्री राधा वल्लभ मंदिर राधावल्लभ मंदिर में हिंदू और मुगल वास्तुकला की मिलीजुली शैली देखने को मिलती है। यह राजसी मंदिर लाल सैंडस्टोन के साथ बनाया गया है जो तब केवल शाही इमारतों, उच्च महलों और शाही किलों के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता था। राधावल्लभ मंदिर उदार शैली में बनाया गया है, इसकी दीवार 10 फुट मोटी और 2 चरणों में बनी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 09:00 PM मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM मंदिर का प्रसाद राधावल्लभ मंदिर में प्रभु को फूलों के साथ माखन, मिश्री, पेड़ा और बर्फी का भोग लगाया जाता है।

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