UTTAR PRADESH

शाहजी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में खम्भे टेढ़े-मढ़े है जिस कारण इसे “टेढ़ा खंभा मंदिर” भी कहा जाता है। शाहजी मंदिर:वृंदावन:उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध नगरी मथुरा, वृन्दावन में शाह जी मंदिर स्थित है। यह मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर को “छोटे राधा रमण मंदिर ” के नाम से भी जाना जाता है। शाहजी मंदिर:वृंदावन इस मंदिर में खम्भे टेढ़े-मढ़े है जिस कारण इसे “टेढ़ा खंभा मंदिर” भी कहा जाता है। राधा जी और श्री कृष्ण के एक साथ विग्रह वाला यह मंदिर विशेष महत्त्व रखता है। मंदिर का इतिहास शाहजी मंदिर का निर्माण 1876 में लखनऊ के व्यापारी शाह कुन्दन लाल और शाह फुन्दन लाल ने करवाया था। वह श्री कृष्ण के अनन्य भक्त थे। इस कारण ही इस मंदिर का नाम शाह जी मंदिर रखा गया। इस मंदिर के निर्माण में आठ साल का समय लगा। भगवान राधा-कृष्ण की मूर्ति द्वारा स्थापित यह मंदिर अपनी अद्भुत ईमारत के कारण दुनिया भर से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मंदिर का महत्व ऐसा कहा जाता है कि बसंत पंचमी के दिन मंदिर के बसंती कमरे में ही श्रीजी ने शाह जी को दर्शन दिए थे। भगवान के दर्शन की आस में भक्त हर साल भारी संख्या में बसंत पंचमी पर इस मंदिर में आते है। इस मंदिर में जन्माष्टमी और गोवर्धन पूजा जैसे त्योहारों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। इन विशेष अवसरों पर मंदिर को फूलों से सजाया जाता है साथ ही रोशनी भी की जाती है। बसंत पंचमी के दिन भगवान बसंती पोशाक पहनकर भक्तों को दर्शन देते है। ऐसा बताया जाता है कि शाह कुंदन लाल जी और फुंदन लाल जी लखनऊ के निवासी थे। उनकी भगवान कृष्ण में अगाध आस्था थी। लखनऊ के नवाब वाजिद अली शाह से इनकी गहरी दोस्ती हुआ करती थी। सन 1858 में जब लड़ाई छिड़ी तो अंग्रेजों द्वारा वाजिद अली शाह को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद शाह परिवार के पूर्वज वृन्दावन में आकर बस गए। यहाँ आने के बाद उन्होंने इस मंदिर की नीव रखी। शाहजी मंदिर:वृंदावन बसंत पंचमी के दिन सन 1876 में यह मंदिर बनकर तैयार हो गया। शाहजी मंदिर:वृंदावन मंदिर में ठाकुर राधारमण लाल जी के श्री विग्रह सबसे पहले इसी कमरे में विराजमान हुए थे। शाहजी मंदिर:वृंदावन तभी से इस बसंती कमरे का विशेष महत्त्व है। इस कमरे के पट हर साल बसंत पंचमी के दिन खुलते है। इसके अलावा श्रावण मास में त्रयोदशी व चतुर्दशी के दिन भी इस कमरे के पट खुलते है और ठाकुर जी अपने भक्तों को दर्शन देते है। मंदिर की वास्तुकला शाह जी मंदिर की वास्तुकला बहुत ही अद्भुत है। सफ़ेद संगमरमर से बने इस मंदिर को देख कर हर कोई आचार्यचकित रह जाता है। इस मंदिर में खम्भे सर्पाकार है जो मंदिर की शोभा को और बढ़ा देते है। इस मंदिर में “बसंती कमरा” भी है जो बहुत ही शानदार है। शाहजी मंदिर:वृंदावन मंदिर के अंदर आकर्षक पेंटिंग भी आपको देखने को मिलेंगी। भगवान के दर्शन के साथ साथ इस मंदिर की वास्तुकला को देख कर हर भक्त आनंदित हो जाता है। मंदिर का समय गर्मियों में शाहजी मंदिर खुलने का सुबह का समय 05:30 AM – 12:30 PM गर्मियों में मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM गर्मियों में शाम को शाहजी मंदिर खुलने का का समय 04:30 PM – 08:30 PM सर्दियों में मंगला आरती का समय 06:30 AM – 07:00 AM सर्दियों में शाहजी मंदिर खुलने का सुबह का समय 08:30 AM – 12:30 PM सर्दियों में शाम को शाहजी मंदिर खुलने का का समय 05:30 PM – 07:30 PM

शाहजी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

राधा श्याम सुंदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

राधा श्याम सुंदर मंदिर:ये मंदिर गौडीय वैष्णव समुदाय के लिए सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। राधा श्याम सुंदर मंदिर:श्री राधा श्याम मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। श्री राधा श्याम मंदिर शहर के लोई बाजार में सेवा कुंज नाम के स्थान पर बना हुआ है। राधा श्याम सुंदर मंदिर ये मंदिर गौडीय वैष्णव समुदाय के लिए सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। वैसे तो वृंदावन में गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के 7 मुख्य मंदिर हैं, लेकिन श्री राधा श्यामसुंदर मंदिर का सभी वैष्णवों के दिलों में एक खास स्थान है। मंदिर वृंदावन धाम, लोई बाजार में सेवा कुंज नाम के स्थान पर स्थित है। राम जनार्दन मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर का इतिहास 1580 ई में भरतपुर राज्य के राजा को अपने खजाने में श्री राधारानी की एक सुंदर मूर्ति मिली। राजा मूर्ति को श्री श्यामानंद प्रभु के कुटीर में ले आए और वसंत पंचमी के दिन श्री श्याम सुंदर के साथ उनका विवाह संपन्न कराया। राधा श्याम सुंदर मंदिर राजा ने जोड़े के लिए एक सुंदर मंदिर भी बनवाया। मंदिर में श्री श्यामसुंदर के सबसे सुंदर और अद्वितीय देवता हैं, जो राधारानी के हृदय से प्रकट हुए थे। द्वारकाधीश गोपाल मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर का महत्व यह विशेष स्थल श्री श्यामानंद प्रभु की भक्ति के लिए विश्व विख्यात है। कहा जाता है कि प्रभु पर श्री राधारानी की व्यक्तिगत कृपा है। गौड़ीय वैष्णव पंथ के सभी प्रमुख आचार्य इस दिव्य मंदिर में उनकी आधिपत्य, राधा श्याम सुंदर मंदिर श्री श्यामसुंदर के दर्शन के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में दर्शन पूजन से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं व भक्तों की सभी मनोकामना पूरी होती है। मंदिर में अत्यंत सौभाग्यशाली ही प्रवेश कर पाता है। मंदिर में प्रार्थना करने का सबसे अच्छा समय वसंत पंचमी के दिन होता है। पंचमी का त्योहार यहां सबसे महत्वपूर्ण रूप में मनाया जाता है। हरसिद्धि माता मंदिर:उज्जैन, मध्य प्रदेश, भारत मंदिर की वास्तुकला श्री राधा श्याम सुंदर मंदिर की वास्तुकला में राजस्थानी कला की झलक देखने को मिलती है। मंदिर में एक बहुत बड़ा खुला क्षेत्र और एक संगमरमर का मंच है। राधा श्यामसुंदर मंदिर में श्री लाला लाली , श्री राधा कुंजबिहारी, श्री राधा श्याम सुंदर जी मूर्तियों के तीन सेट है। इसमें मुख्य देवताओं के विपरीत तरफ वृंदा माता की मूर्ति भी है। गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के आचार्य बलदेव विद्याभूषण के सेव्य ठा. राधाश्यामसुंदर मंदिर में मुख्य सिंहासन पर विराजमान हैं। इनके बाईं ओर श्री श्यामसुंदर व राधारानी प्रतिष्ठित हैं। मनकामेश्वर मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:00 AM – 12:00 PM सुबह मंगला आरती का समय 04:00 AM – 05:00 AM सुबह शृंगार आरती का समय 10:30 AM – 11:00 AM संध्या आरती का समय 06:15 PM – 07:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 10:00 PM सुबह धूप आरती का समय 08:15 AM – 08:30 AM सुबह राज भोग आरती का समय 11:30 AM – 12:00 PM रात में शयन आरती का समय 09:00 PM – 09:30 PM मंदिर का प्रसाद श्री श्याम सुंदर मंदिर में माखन और मिश्री का भोग चढ़ाया जाता है। इसके अलावा भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, पंजीरी का भोग लगाया जाता है।

राधा श्याम सुंदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

राधा दामोदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

भगवान राधा कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन को सात देवताओं की प्राकट्य स्थली भी कहा जाता है। राधा दामोदर मंदिर:भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में मथुरा जिले के श्री वृंदावन धाम में स्थित है। राधा दामोदर मंदिर में गौड़ीय संप्रदाय के साथ अन्य संप्रदायों के भक्तों और अनुयाईयों का आस्था का केंद्र रहा है। राधा दामोदर मंदिर भगवान राधा कृष्ण की लीला भूमि वृंदावन को सात देवताओं की प्राकट्य स्थली भी कहा जाता है। यहां चैतन्य महाप्रभु के शिष्य 6 गोस्वामियों ने अपनी भक्ति के जरिए 7 देवताओं की प्रतिमा को प्रकट किया था। इन्हीं में से एक हैं राधा दामोदर, जिनको श्रीरूप गोस्वामी ने स्थापित किया था। इसकी सेवा की जिम्मेदारी जीव गोस्वामी को दी थी। राधा दामोदर मंदिर की चार परिक्रमाएँ करने से गिरिराज गोवर्धन की परिक्रमा का फल मिलता है। श्री राधा वल्लभ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का इतिहास राधा दामोदर मंदिर करीब साढ़े चार सौ वर्ष पुराना है। संवत 1599 सन् 1542 की माघ शुक्ल दशमी के दिन श्रीरूप गोस्वामी ने यहाँ राधा दामोदर जी के विग्रहों की स्थापना करके, उनकी सेवा का भार जीव गोस्वामी को सौंपा। इसी मंदिर में छह गोस्वामियों, रूप गोस्वामी, सनातन गोस्वामी, भक्त रघुनाथ, जीव गोस्वामी, गोपाल भट्ट, रघुनाथ दास ने अपनी साधना स्थली बनाया। श्री रूपगोस्वामी जी सेवाकुंज के अन्तर्गत यहीं भजन कुटी में वास करते थे। यहीं पर तत्कालीन गोस्वामीगण एवं भक्तजन सम्मिलित होकर इष्टगोष्ठी करते थे और श्री रघुनाथभट्ट जी अपने मधुर कंठ से उस वैष्णव सभा में श्रीमद्भागवत की व्याख्या करते। नीलेश्वर महादेव मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत मंदिर का महत्व राधा दामोदर मंदिर को इस्कॉन मन्दिर के संस्थापक प्रभुपाद महाराज ने अपने वृन्दावन प्रवास के दौरान सर्वप्रथम आराधना का केंद्र बनाया था। ऐसी मान्यता है कि राधा दामोदर मंदिर की परिक्रमा करने से उसमें विराजमान गिरिराज शिला की स्वतः परिक्रमा हो जाती है। इसकी एक किलोमीटर से भी कम की चार परिक्रमाएँ करने से श्रृद्धालु गिरिराज गोवर्धन की 25 किलोमीटर लम्बी परिक्रमा का पुण्य अर्जित कर लेता है। श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर की वास्तुकला राधा दामोदर मंदिर में राजस्थानी शैली की वास्तुकला दिखाई देती है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर राजस्थानी शैली में भव्य गेट बना है। मंदिर के केंद्र में एक खुले आंगन के साथ-साथ खूबसूरती से नक्काशीदार खंभे और एक शानदार चित्रित छत है। गर्भ गृह के सिंहासन में श्री वृन्दावनचन्द्र, श्री छैलचिकनिया, श्री राधाविनोद और श्री राधामाधव आदि विग्रह विराजमान हैं। मंदिर के पीछे श्री जीवगोस्वामी तथा श्री कृष्णदास गोस्वामी की समाधियाँ प्रतिष्ठित हैं। मंदिर के उत्तर भाग में श्रीपाद रूपगोस्वामी की भजन-कुटी और समाधि मन्दिर स्थित हैं। पास ही श्रीभूगर्भ गोस्वामी की समाधि है। पागल बाबा मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 01:00 PM मंगला आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:30 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद राधा दामोदर मंदिर में श्री कृष्ण जी को फल, माखन, मिश्री, ड्राई फ्रूट्स का भोग लगाया जाता है। मंदिर में प्रभु को खीर भी चढ़ाई जाती है। राधा रमण मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

राधा दामोदर मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

पागल बाबा मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

श्री कृष्ण की लीलास्थली के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए इस मंदिर की स्थापना की गई। पागल बाबा मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृन्दावन शहर में स्थित एक ऐतिहासिक मंदिर है। भगवान श्री कृष्ण की प्रेममय लीलास्थली के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए इस नौ मंजिला मंदिर की स्थापना की गई। 221 फीट ऊँचे, सफेद पत्थरों वाले पागल बाबा मंदिर इस मंदिर की स्थापना श्रीमद लीलानंद ठाकुर जी (पागलबाबा) द्वारा की गई। श्रीमद लीलानंद ठाकुर जी महाराज स्वयं पागलबाबा के नाम से प्रसिद्ध थे अतः इस श्री राधा-कृष्ण मंदिर को लोग पागलबाबा मंदिर के नाम से पुकारते हैं। यह अनूठा मंदिर भारतवासियों को तो आकर्षित करता ही है, पागल बाबा मंदिर विदेशी पर्यटकों को भी मुग्ध करता है और भक्ति प्रधान देश की महत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिद्ध भी करता है। मंदिर की देख रेख के लिए पांच लोगों का बोर्ड है। डीएम इसके चेयरमैन हैं। 20 लोगों की कार्य समिति भी है। मंदिर का इतिहास सन् 1969 में श्रीमद लीलानंद ठाकुर जी महाराज ने देश विदेश के पर्यटकों का ध्यान वृंदावन की ओर आकर्षित करने के लिए एक भव्य मंदिर बनाने की परियोजना बनाई। पागल बाबा मंदिर वृंदावन मथुरा मार्ग पर एक विशाल भू-खंड लेकर अल्पावधि में ही, जहाँ केवल सूखा खेत था, वहाँ एक विशाल संगमरमर के नौ मंज़िला मंदिर लीलाधाम की स्थापना की। 24 जुलाई 1980 को लीलानंद ठाकुर जी महाराज ने शरीर का त्याग कर समाधि ले ली। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में सब की इच्छाएं पूरी होती हैं। ऐसा कहा जाता है कि बांके बिहारी खुद अपने भक्त के लिए गवाही देने के लिए चले आए थे। खासतौर पर पूर्णिमा के अवसर पर इस मंदिर में हजारो की तादाद में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। दावा है कि विश्व में यह अपने किस्म का नौ मंजिल वाला पहला मंदिर है। आठ बीघे में मंदिर तो पांच बीघे में यहीं पर गौशाला है। मंदिर परिसर में ही पागल बाबा हॉस्पिटल भी बना है। यहां हजारों रोगियों का रोजाना उपचार किया जाता है। पागलबाबा मंदिर में रोजाना हजारों लोगों की खिचड़ी सेवा की जाती है। मंदिर की वास्तुकला पागलबाबा मंदिर को नागरा शैली में बनाया गया है। पागलबाबा मंदिर मॉडर्न वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है। चारों तरफ शस्य श्यामला हरित भूमिपर श्वेत प्रस्तर जडित अतुलनीय मंदिर भारतवर्ष में अपने ढंग का प्रथम मंदिर है। पागल बाबा मंदिर श्वेत प्रस्तर जड़ित 18 हजार वर्ग फीट और 221 फीट की ऊंचाई वाले इस मंदिर की प्रत्येक मंजिल पर देव प्रतिमा स्थापित हैं। पागल बाबा मंदिर बाबा ने ऐतिहासिक गोपेश्वर महादेव के पास स्थित भूतगली में लीला कुंज का भी निर्माण किया। कालांतर में लीलाकुंज पुराने पागल बाबा के रूप से प्रसिद्धि को प्राप्त हुआ। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 11:30 AM शाम मंदिर खुलने का समय 03:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद पागलबाबा मंदिर में भक्त श्री कृष्ण को माखन मिश्री, पंचामृत और पंजीरी का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा भक्त प्रभु को अपनी श्रद्धा के अनुसार पेड़े, बर्फी का भी भोग लगाते हैं।

पागल बाबा मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत

गोरखपुर की सबसे ऊँची प्रतिमा वाला मंदिर श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है। यह गोरखपुर के बरगदवा में बना हुआ है। इस मंदिर में संकट मोचन हनुमान जी की करीब 31 फुट ऊंची पंचमुखी मूर्ति स्थापित है, जिसका मुंह दक्षिण दिशा की ओर है, इसलिए इसे दक्षिणमुखी पंचमुखी हनुमान मंदिर भी कहा जाता है। स्थानीय श्रद्धालु बताते हैं कि गोरखपुर में पंचमुखी हनुमान जी की ये सबसे ऊंची मूर्ति है। पंचमुखी हनुमान का ये मंदिर बहुत चमत्कारी माना जाता है। मंदिर का इतिहास श्री पंचमुखी हनुमान जी का यह विशालकाय मंदिर 2012 में स्थापित हुआ। तीन मंजिल बने इस मंदिर में हनुमान जी की 31 फुट की प्रतिमा स्थापित है। इसे सर्व कार्य सिद्धक मंदिर ही कहा जाता है। श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर अपने आप में अलग और अनोखा है। इस ऐतिहासिक मंदिर में हनुमानजी के दर्शन के लिए सुबह से शाम तक भक्तों की भीड़ लगी रहती है। मंदिर का महत्व श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में हनुमान जी की 11 परिक्रमा लगाने पर भक्तों की सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं और उनकी सारी इच्छाएं पूरी होती है। हनुमान मंदिर के इस मंदिर को सर्व कार्य सिद्धक मंदिर भी कहा जाता है, श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर ऐसा बताया जाता है जो भक्त सच्ची श्रद्धा से प्रभु की साधना करता है उसका कार्य जरूर सफल होता है। मंदिर की वास्तुकला गोरखपुर में बने श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में अंजनीसुत जी की विशाल प्रतिमा स्थापित है। संकट मोचन महराज कि मूर्ति के हृदय के ठीक सामने श्री राम और माता सीता की मूर्ति विद्यमान है, ऐसा प्रतीत होता है कि संकट मोचन महाराज के हृदय में श्री राम, सीता जी विराजमान है। मंदिर में प्रवेश करते ही वायुपुत्र के चरणों के दर्शन होते हैं, फिर मंदिर के दूसरी मंजिल पर जाते ही समाने रामेष्ट के ह्रदय स्थल के दर्शन होते हैं, जहां सिया-राम विराजमान हैं। मंदिर के तीसरे स्थल से सीधे प्रभु के पंचमुखी स्वरूप के दर्शन होते हैं। मंदिर प्रांगण में महालक्ष्मी नारायण, शिव गौरी, गणेश, कार्तिकेय, नंदी, राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई हैं। मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 12:00 AM – 12:00 AM सायंकाल आरती का समय 07:00 PM – 08:00 PM सुबह की आरती का समय 06:00 AM – 07:00 AM मंदिर का प्रसाद हनुमान जी को प्रसाद के रूप में शुद्ध घी के बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू चढ़ाए जाते हैं। हनुमान के गले में गेंदे व तुलसी की माला सुशोभित रहती हैं। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार पंचमुखी हनुमान जी के चरणों में भोग लगाते हैं।

श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर:गोरखपुर, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

श्री राधा वल्लभ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इसे राधा वल्लभलाल जी मंदिर भी कहा जाता है। श्री राधा वल्लभ मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृन्दावन शहर में एक ऐतिहासिक मंदिर है। इसे राधा वल्लभलाल जी मंदिर भी कहा जाता है, जो मथुरा आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। श्री राधा वल्लभ मंदिर मंदिर के केंद्रीय देवता श्री कृष्ण हैं, जिन्हें श्री राधा वल्लभ के नाम से पूजा जाता है। राधावल्लभ मंदिर में श्री कृष्ण के साथ, एक मुकुट रखा गया है श्री राधा वल्लभ मंदिर जो देवी राधा की उपस्थिति का प्रतीक है। यह मंदिर राधा वल्लभ संप्रदाय से संबंधित है और इसका निर्माण 16वीं शताब्दी में वृंदावन के संत हित हरिवंश महाप्रभु के मार्गदर्शन में किया गया था। राधावल्लभ मंदिर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्थल की सूची में भी है। मंदिर का इतिहास राधावल्लभ मंदिर को हित मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण वर्ष 1585 में हित हरिवंश महाप्रभु के पुत्र श्री वनचंद्र के शिष्य सुंदरदास भटनागर ने करवाया था। श्री राधा वल्लभ मंदिर इतिहासकारों की माने तो राजा मान सिंह ने सबसे पहले इस मंदिर का निर्माण कराने का निर्णय लिया था। लेकिन यह अफवाह सुनकर कि जो कोई भी इस मंदिर का निर्माण करेगा उसकी एक वर्ष के भीतर मृत्यु हो जाएगी, वह पीछे हट गया। हालांकि मंदिर का निर्माण पूरा होने के एक वर्ष के भीतर ही सुंदरदास भटनागर की मृत्यु हो गई और ये अफवाह सच हो गई। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है की राधावल्लभ मंदिर में प्रभु उसी भक्त को दर्शन देते हैं जो सारे पाप कर्मों को त्याग कर निष्कपट होकर सच्चे मन के साथ मंदिर में प्रवेश करता है और जिस भक्त के हृद्य में सच्चे प्रेम और भक्ति की भावना नहीं होती वे लाख कोशिश कर ले उसे कभी दर्शन प्राप्त नही होते। मंदिर की वास्तुकला राधावल्लभ मंदिर वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के पास चट्टान पर स्थित है। यह अपनी आकर्षक वास्तुकला और भव्य सजावट के कारण अलग दिखता है। राधा वल्लभ मंदिर सबसे पुराने और लंबे समय तक जीवित रहने वाले मंदिरों में से एक है। श्री राधा वल्लभ मंदिर राधावल्लभ मंदिर में हिंदू और मुगल वास्तुकला की मिलीजुली शैली देखने को मिलती है। यह राजसी मंदिर लाल सैंडस्टोन के साथ बनाया गया है जो तब केवल शाही इमारतों, उच्च महलों और शाही किलों के निर्माण के लिए उपयोग किया जाता था। राधावल्लभ मंदिर उदार शैली में बनाया गया है, इसकी दीवार 10 फुट मोटी और 2 चरणों में बनी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 09:00 PM मंगला आरती का समय 05:30 AM – 06:00 AM मंदिर का प्रसाद राधावल्लभ मंदिर में प्रभु को फूलों के साथ माखन, मिश्री, पेड़ा और बर्फी का भोग लगाया जाता है।

श्री राधा वल्लभ मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

राधा रमण मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर में श्री कृष्ण के राधा रमण रूप की पूजा की जाती है। राधा रमण मंदिर उत्तर प्रदेश मथुरा के वृंदावन धाम में स्थित है राधा रमण मंदिर। यह हिन्दू मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर में श्री कृष्ण के राधा रमण रूप की पूजा की जाती है। यह मंदिर सप्त देवालय में शामिल है जिसमे राधा वल्लभ मंदिर, राधा मदनमोहन मंदिर, राधा दामोदर मंदिर, राधा श्यामसुंदर मंदिर, राधा गोकुलनंदन मंदिर और राधा गोविंदजी मंदिर भी शामिल है। मंदिर का इतिहास यह मंदिर 500 साल पूर्व का है। इसकी स्थापना गोपाल भट्ट स्वामी ने की थी। गोपाल भट्ट स्वामी जब 30 वर्ष के थे तब वह वृन्दावन आये। चैतन्य महाप्रभु के अचानक चले जाने के बाद उन्होंने सपने में देखा कि भगवान उन्हें उनके दर्शन प्राप्त करने हेतु नेपाल जाने का निर्देश दे रहे है। इस लिए गोपाल भट्ट स्वामी नेपाल चले गए और वहां उन्होंने काली गंडकी नदी में स्नान किया। इस नदी में उन्होंने अपने पानी के बर्तन को डुबोया परन्तु उन्होंने देखा कि कई शालिग्राम उनके बर्तन आ गए है। उन्हें वापस नदी में गिराने की कोशिश भी की लेकिन वह बर्तन में ही रहे। उन्हें 12 शालिग्राम शिलाएँ मिलीं और वे उन्हें अपने साथ वृंदावन ले आये। वही शालिग्राम वृंदावन में स्थापित है। वर्तमान राधा रमन मंदिर का निर्माण 1826 में लखनऊ के शाह बिहारी लालजी के करवाया था। मंदिर का महत्व इस मंदिर में आज भी भगवान कृष्ण के असली सालिग्राम उपस्थित है जो राधारानी के साथ है। राधा रमण मंदिर में राधा जी का विग्रह नहीं है। क्योंकि राधा-रमण का यह विग्रह स्वयंभू है। इस मंदिर में त्योहारों को बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। जिसे देखने के लिए लोग दूर दूर से आते है। पौराणिक कथा के मुताबिक चैतन्य महाप्रभु के शिष्य गोपाल भट्ट गोस्वामी हुआ करते थे उन्होंने अपनी भक्ति और तप द्वारा राधा रमण जी के विग्रह रूप को प्रकट किया। ऐसा भी बताया जाता है कि जब भगवान प्रकट हुए तो गोपाल भट्ट जी ने उनके लिए भोग बनाया। भोग बनाने के लिए उन्होंने हवन की लकड़ियों को रख कर मंत्रोच्चार से ही अग्नि प्रज्वलित की। तब से लेकर आज तक यह अग्नि ऐसे ही प्रज्जवलित हो रही है। राधा रमण मंदिर किसी भी प्रकार से इस अग्नि को बुझाया नहीं जा सका है। आज भी इस मंदिर में राधा रमन जी के लिए भोग इसी अग्नि पर पकाया जाता है। इस मंदिर में माचिस का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। मंदिर की वास्तुकला राधा रमण मंदिर की वास्तुकला आधुनिक हिंदू शैली में बनायीं गयी है। इस मंदिर के अंदर सालिग्राम पत्थर की एक मूल स्वयं-प्रकट मूर्ति है। यह विशाल मंदिर नदी किनारे स्थित है जो इसकी प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाता है। परिसर के भीतर गोपाल भट्ट गोस्वामी की समाधि भी है जो इस मंदिर के निर्माता है। कहा जाता है कि राधा रमण मंदिर में गुरु चैतन्य द्वारा उपयोग किए गए कपड़े भी है। मंदिर का समय गर्मियों में राधारमण जी मन्दिर वृन्दावन खुलने का समय 05:00 AM – 12:15 PM गर्मियों में सुबह मंगला आरती का समय 05:00 AM – 05:30 AM गर्मियों में शाम को राधारमण जी मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 09:00 PM सर्दियों में राधारमण जी मन्दिर वृन्दावन खुलने का समय 05:30 AM – 12:15 PM सर्दियों में शाम को राधारमण जी मंदिर खुलने का समय 06:00 PM – 09:00 PM मंदिर का प्रसाद राधा रमण मंदिर में खिचड़ी का भोग लगाया जाता है। साथ ही पुष्प भी चढ़ाये जाते है।

राधा रमण मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

मनकामेश्वर मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

मनकामेश्वर मंदिर उत्तर प्रदेश सरकार ने मनकामेश्वर मंदिर को एक ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है। मनकामेश्वर मंदिर:त्रिवेणी संगम की नगरी प्रयागराज को सनातन धर्म का केंद्र कहा जाता है। यहां पर कई ऐसे पौराणिक और आध्यात्मिक स्थल मौजूद हैं जो इस नगरी की प्राचीनता और महत्वई को बताते हैं। मनकामेश्वर मंदिर यहां के अनेकों मंदिर रामायण काल और महाभारत काल से जुड़े हैं और इनका वर्णन धर्म ग्रंथों में मिलता है। ऐसा ही एक पौराणिक गंगा,यमुना और सरस्वती के संगम तट पर मौजूद बना है, जिसे मनकामेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मान्यता है कि यहां पर आने वाले भक्तों की भगवान शिव हर मनोकामनाएं पूरी करते हैं। इसलिए यहां पर देश के अलग-अलग राज्यों से लोग आते हैं और भोलेनाथ से मनोकामना मांगते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने मनकामेश्वर मंदिर को एक ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया है। मनकामेश्वर मंदिर का इतिहास मनकामेश्वर मंदिर का निर्माण 1542 ई. में हुआ था, इसका निर्माण राजपूत वंश के राजा मान सिंह प्रथम ने करवाया था। मनकामेश्वर मंदिर का जिक्र स्कंद पुराण और पदम पुराण में कामेश्वर पीठ के तौर पर मिलता है। ऐसा कहा जाता है मनकामेश्वर कि शिव जी कामदेव को भस्म करने के बाद यहां आकर लिंग के रूप में विराजमान हो गए थे। बताया जाता है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम जब वनवास जा रहे थे तो प्रयागराज में अक्षयवट के नीचे अपने भाई लक्ष्मण और माता सीता के साथ रूके थे। यहां से आगे बढ़ने से पहले प्रभु राम ने मंदिर पहुंच कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया था और उन्होंने भगवान शिव से मार्ग में आने वाले बाधाओं से मुक्ति पाने की कामना भी की थी। 14 वर्ष के वनवास के बाद जब श्री राम वापस अयोध्या लौटने लगे तो पुनः यहां पर रुककर भोलेनाथ के दर्शन किये थे। मंदिर का महत्व मान्यता है कि मनकामेश्वर महादेव में 51 सोमवार पूजन अर्चन करने से जीवन में आने वाली सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिल जाती है। मनकामेश्वर मंदिर तंत्र साधना के लिए अलग पहचान है। मंदिर में श्री विद्या की तांत्रिक साधना की शिक्षा भी दी जाती है।ऐसा बताया जाता है कि ऐसा कई बार हुआ है, जब मंदिर परिसर में कोई न हो और वातावरण बिल्कुल शांत हो, उसके बाद भी भगवान शिव के जयकारे सुनाई देते हैं। उन्होंने कहा कि जब मनकामेश्वर भगवान की आरती के बाद सयन की अवस्था में होते हैं तब यहां आस-पास के दिव्य शक्तियां पहरा देती है। मंदिर की वास्तुकला मनकामेश्वर मंदिर का निर्माण हिंदू वास्तुकला के मानदंडों के अनुसार किया गया था और यह राजपूत वास्तुकला की भव्यता को दर्शाता है। मनकामेश्वर मंदिर अष्टकोणीय आकार का है और यह एक बड़े आयताकार प्रांगण से घिरा हुआ है। मंदिर के शीर्ष पर विशाल गुंबद बने हैं। मंदिर के गर्भ गृह में साढ़े तीन फुट का शिवलिंग विराजमान है, जिसे स्वयंभू शिवलिंग कहा जाता है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 10:00 PM सुबह आरती का समय 04:30 AM – 05:30 AM मंदिर का प्रसाद मनकामेश्वर मंदिर में भगवान शिव को फल, दूध, दही लड्डू का भोग लगाया जाता है। साथ ही श्रद्धालु शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा भी चढ़ाते हैं।

मनकामेश्वर मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

श्री जुगल किशोर जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

श्री जुगल किशोर मंदिर भगवान श्री कृष्ण के बचपन और उनकी लीलाओं के लिए जाना जाता है। श्री जुगल किशोर जी मंदिर:भारत के उत्तर प्रदेश का वृंदावन शहर पौराणिक कथाओं में डूबा हुआ है। इसे भगवान श्री कृष्ण के बचपन और उनकी लीलाओं के लिए जाना जाता है। भगवान श्री कृष्णा और राधा जी की लीलाओ का साक्षी श्री धाम वृन्दावन आज भी अपने आप में अनेकों रहस्यों को समाये हुए है। श्री जुगल किशोर मंदिर वृन्दावन में केशी घाट पर स्थित है, श्री जुगल किशोर जी मंदिर जहां भगवान श्री कृष्ण और राधा जी जुगल रूप में विराजमान है। श्री जुगल किशोर मंदिर में शाम के समय दीपक जलाया जाता है, जिससे इस मंदिर की सुंदरता और बढ़ जाती है। मंदिर का इतिहास india’s famous temple श्री जुगल किशोर मंदिर की इतिहास हजारों साल पुराना है। वृन्दावन में सबसे पुराने मंदिरों में से एक श्री जुगल किशोर मंदिर है, इसका निर्माण वर्ष 1627 में किया गया था। इसका निर्माणकर्त्ता नानकरन था। श्री जुगल किशोर मंदिर एक वैष्णव संप्रदाय का मन्दिर है। श्री जुगल किशोर मंदिर गोविन्द देव, मदनमोहन और गोपीनाथ मन्दिर की ही श्रृंखला में चौथा मंदिर है, जो वृन्दावन के निचले सिरे पर प्रसिद्ध केशी घाट के बगल में स्थित है। मंदिर का महत्व यमुना नदी के किनारे श्री कृष्ण ने अश्व दानव केशी का वध किया था, जिस स्थान पर उन्होंने दानव का वध किया उस स्थान पर केशी घाट बना और यहीं श्री जुगल किशोर मंदिर स्थापना हुई। – श्री जुगल किशोर जी मंदिर का मुख्य आकर्षण केशी घाट है, जो वृंदावन में श्रद्धालुओं के लिए पसंदीदा और पवित्र स्नान/स्नान स्थलों में से एक है। – श्री जुगल किशोर मंदिर में शाम के समय केशी घाट पर आए भक्त सैकड़ों की संख्या में दीपक जलातें हैं, जिससे इस घाट और मंदिर की सुंदरता और बढ़ जाती है। मंदिर की वास्तुकला श्री जुगल किशोर जी मंदिर लाल बलुआ पत्थर से निर्मित एक सुंदर संरचना है, ये मंदिर इतना ऊंचा है कि इसे यमुना नदी के पार से भी देखा जा सकता है। श्री जुगल किशोर जी मंदिर की वास्तुकला मदन मोहन मंदिर, श्री जुगल किशोर जी मंदिर श्री गोविंद देव मंदिर और श्री मदन मोहन मंदिर से मिलती है। मंदिर के मुख्य द्वार पर गोवर्धन पर्वत उठाए हुए और अपनी प्रिय सखियों से घिरे हुए भगवान श्री कृष्ण की एक सुंदर मूर्ति है। प्रवेश द्वार को पुष्प और पक्षी रूपांकनों से सजाया गया है। मंदिर का शिखर और वास्तुकला सौंदर्य की दृष्टि से मनभावन हैं।श्री जुगल किशोर जी मंदिर इसका सभा कक्ष अन्य मंदिरों की तुलना में अपेक्षाकृत बड़ा है, जिसका क्षेत्रफल 25 वर्ग फुट है और यह पूर्वी दिशा में स्थित है। उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर छोटे प्रवेश द्वार हैं। श्री जुगल किशोर जी मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 05:00 AM – 12:00 PM सुबह दर्शन का समय 08:30 AM – 10:00 AM शयन आरती का समय 11:45 AM – 12:00 PM शाम का भोग का समय 05:30 PM – 06:00 PM शयन आरती का समय 08:10 PM – 08:30 PM सुबह की आरती और परिक्रमा 05:00 AM – 06:00 AM सुबह भोग का समय 11:30 AM – 11:45 AM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 08:30 PM शाम की परिक्रमा का मसय 07:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद श्री जुगल किशोर जी को फूलों के साथ माखन, मिश्री, पेड़ा और बर्फी का भोग लगाया जाता है।

श्री जुगल किशोर जी मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

पड़िला महादेव मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर को पांडेश्वर नाथ महादेव के नाम से भी जाना जाता है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में वैसे तो बहुत सारे आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल हैं, लेकिन पड़िला महादेव मंदिर का इतिहास अलौकिक है। तीर्थराज प्रयाग के फाफामऊ के थरवई गांव में स्थित इस मंदिर को पांडेश्वर नाथ महादेव के नाम से भी जाना जाता है। बताया जाता है कि पड़िला महादेव मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था। इस मंदिर की गिनती प्रयाग के पंचकोसी परिक्रमा में होती है और यहां स्वयं भू शिवलिंग है। मंदिर का इतिहास पड़िला महादेव मंदिर को 8,000 साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर का नाम पहले माधव मनोहर नाम था। द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान पांडव पड़िला में आकर काफी समय तक रुके थे। इस दौरान पांडवों ने यहां लिंग की पूजा अर्चना की थी। ऐसी मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान श्री कृष्ण के कहने पर पांडवों ने पड़िला महादेव मंदिर में शिवलिंग पर विधि विधान से पूजा-अर्चना कर मन्नत मांगी थी कि हम पांचों भाई सकुशल हस्तिनापुर पहुंचें। पांडवों की यह मन्नत पूरी भी हुई। पांडवों द्वारा हुई इसी पूजा के बाद इसे पांडेश्वरनाथ धाम कहा जाने लगा। मंदिर का महत्व ऐसी मान्यता है कि श्री कृष्ण की सलाह पर यहां पाण्ड्वों ने अपने वनवासकाल के दौरान भगवान शंकर के लिंग की स्थापना की थी। ऐसी मान्यता है कि पड़िला महादेव मंदिर में शिवलिंग सुबह हरा, दोपहर में भूरा और रात में काले रंग का नजर आता है। भगवान भोलेनाथ के इस पवित्र माह में पांडेश्वरनाथ भगवान भोलेनाथ का हर दिन अलग-अलग श्रृंगार किया जाता है। भगवान भोलेनाथ के अनेक रूपों के अनुरूप शिवलिंग पर श्रृंगार किया जाता है। ऐसी मान्यता है कि अगर लगातार 40 दिन तक पांडेश्वर नाथ धाम में भगवान शिव का दर्शन किया जाए, तो दर्शन करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। मंदिर की वास्तुकला पड़िला महादेव मंदिर एक अनूठी स्थापत्य शैली का प्रदर्शन करता है। पूरी तरह से पत्थरों से निर्मित पड़िला महादेव मंदिर नागर शैली में बना है। द्वापर युग में बना यह मंदिर आज भी बिल्कुल वैसा ही है। मंदिर का डिज़ाइन प्राचीन काल की शिल्प कौशल को दर्शाता है, जिससे दिव्यता और पवित्रता का माहौल बनता है। मंदिर के गर्भ गृह के शीर्ष पर विशाल शिखर बना है। छज्जों के रूप में वातायन बनाकर मंडप को महामंडप बनाया गया है। भीतर हवा जाने के लिए वातायन है और मंडप तीन ओर से खुले हैं। मंदिर की दीवारें पुख्ता हैं। मंदिर का समय मंदिर खुलने और बंद होने का समय 05:00 AM – 10:30 PM मंदिर का प्रसाद पांडेश्वर महादेव धाम में भक्त उमापति शिवशंकर को खुश करने के लिए लाल झंडा (निशान) और लाठी चढ़ाते हैं। इसके अलावा मंदिर में आने वाले भक्त फल, फूल, मिठाई के साथ गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग चढ़ाते हैं।

पड़िला महादेव मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

मदन मोहन मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत

इस मंदिर को “श्री राधा मदन मोहन मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। मदन मोहन मंदिर उत्तर प्रदेश मथुरा के पावन नगरी वृन्दावन में स्थित है। यह मंदिर वैष्णव संप्रदाय के प्राचीन मंदिरों में से एक है। सप्तदेवालयों में शामिल मंदिरों में यह मंदिर पहले स्थान पर आता है। औरंगजेब के समय मदन मोहन की मूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए इसे राजस्थान के करौली में स्थानांतरित कर दिया गया था। इस मंदिर को “श्री राधा मदन मोहन मंदिर” के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर का इतिहास मदन मोहन मंदिर का इतिहास पांच हजार साल पुराना है। ऐसा कहा जाता है कि कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। जबकि ऐतिहासिक अभिलेखों के मुताबिक, एक मुल्तान व्यापारी कपूर राम दास ने श्री सनातन गोस्वामी की देखरेख में 15वीं या 16वीं शताब्दी में इस मंदिर को बनवाया था। मंदिर का महत्व मदन मोहन मंदिर की खास बात और है कि यह मंदिर बहुत ही मजबूती से बना हुआ है। औरंगजेब ने इस मंदिर को तोड़ने का बहुत प्रयास किया परन्तु वह इसे तोड़ नहीं पाया। वृन्दावन में भगवान कृष्ण के प्रत्येक मंदिर में प्रतिदिन आरती की जाती है परन्तु मदन मोहन मंदिर में केवल कार्तिक के महीने में ही आरती की जाती है। पांच सौ साल पूर्व चैतन्य महाप्रभु ब्रज वृन्दावन आये तो उन्हें यहाँ पर श्रीकृष्ण की लीलास्थलियों का अनुभास हुआ। वह कुछ समय के बाद बंगाल चले गए। परन्तु उन्होंने अपने अनुयायियों को वृन्दावन में श्रीकृष्ण की लीलास्थलियों को खोजने के लिए भेजा। क्योंकि उस समय वृन्दावन पूर्ण रूप से जंगल बन गया था। चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी वृन्दावन में वास करने लगे। चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी सनातन गोस्वामी एक दिन मथुरा में ओंकार चौबे के घर भिक्षा मांगने गए तो उन्होंने वहां पर 5 साल के बालक को खेलते हुए देखा। उन्होंने चौबे की पत्नी से पूछा की यह बालक आपका है ? माता ने बताया कि यह बालक उन्हें यमुना किनारे खेलता हुआ दिखा, तो उसे अपने घर ले आयी। इसका नाम मदन मोहन है। सनातन गोस्वामी उस बालक को अपने साथ ले गए। वह साधना करने के बाद बिना नमक की बाटी को भोग में ठाकुर जी को अर्पित करते और उस बाटी को बालक को खाने को देते। बालक को बिना नमक की बाटी पसंद नहीं आ रही थी। इस दौरान मुल्तान का एक व्यापारी रामदास कपूर व्यापार हेतु अपनी नाव से यमुना नदी द्वारा आगरा जा रहा था। तभी उसकी नाव खराब हो गयी। नाव ख़राब होने के कारण व्यापारी सनातन गोस्वामी के पास गया। तब सनातन गोस्वामी को मालूम हुआ कि यह नमक का व्यापारी, तो वह समझ गए। जब उस व्यापारी ने गोस्वामी और बालक को देखा,तो मोहित होकर मंदिर निर्माण की इच्छा रखी। मंदिर निर्माण के निर्णय से ही नाव ठीक हो गयी। इसके बाद मंदिर का निर्माण हुआ और मदन मोहन की पूजा होने लगी। मंदिर की वास्तुकला मदन मोहन मंदिर उत्तर भारतीय स्थापत्य शैली में बना हुआ है। यह लाल बलुआ पत्थर से निर्मित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियाँ है। मंदिर में भगवान कृष्ण के साथ राधा रानी और ललिता सखी की प्रतिमा है। यह मंदिर यमुना नदी से 50 फीट ऊंचा है और यमुना में इसकी नींव 70 फीट नीचे तक है। मंदिर का समय गर्मियों में मदन मोहन मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 11:00 AM गर्मियों में शाम में मदन मोहन मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 05:30 PM सर्दियों में मदन मोहन मंदिर खुलने का समय 07:00 AM – 12:00 PM सर्दियों में शाम में मदन मोहन मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद मंदिर में भगवान कृष्ण के प्रिय व्यंजन “अंगा कड़ी” का भोग लगाया जाता है। साथ ही पुष्प भी चढ़ाये जाते है।

मदन मोहन मंदिर:वृंदावन, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

पातालपुरी मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

पातालपुरी मंदिर धरती के नीचे स्थित एक मंदिर है जो इसके नाम से पता चलता है। पातालपुरी मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के प्रयागराज जिले में स्थित है। पातालपुरी मंदिर संगमनगरी के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। पातालपुरी मंदिर धरती के नीचे स्थित एक मंदिर है जो इसके नाम से पता चलता है। पातालपुरी मंदिर और अक्षय वट वृक्ष दोनों एक दूसरे के निकट स्थित है। अक्षय वट वृक्ष के बारे में यह कहा जाता है कि जब तक पूरी दुनिया है, तब तक अक्षय वट वृक्ष खड़ा रहेगा। मंदिर का इतिहास पातालपुरी मंदिर प्रयागराज के इलाहाबाद किले के तहखाने के अन्दर स्थित है। पातालपुरी मंदिर परिसर में छठवीं शताब्दी की मूर्तियां भी स्थापित है। इससे ये मंदिर कितना पुराना है इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। इलाहाबाद किला अकबर ने 1583 में बनवाया था। पातालपुरी मंदिर तक पहुंचने के लिए इलाहाबाद किले से एक सड़क बनाई गई है। मंदिर परिसर में अक्षय वट वृक्ष और सरस्वती कूप स्थित है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि श्री राम, लक्ष्मण और सीता ने मंदिर का दौरा किया था। यहां वह स्थान भी मौजूद है जहां त्रेता युग में माता सीता ने अपने कंगन दान किए थे। इसी के साथ इस मंदिर का उल्लेख चीनी यात्री ह्वेन त्सांग के वृत्तांतों में भी मिलता है। Patalpuri mandir मंदिर का महत्व पातालपुरी मंदिर के परिसर में स्थित अक्षय वट वृक्ष के बारे में बताया जाता है कि यह पेड़ अमर है और जब तक दुनिया है तब तक यह पेड़ खड़ा रहेगा। ऐसा माना जाता है कि पातालपुरी मंदिर में भगवान राम और प्रहलाद आये थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री और लेखक ह्यूएन त्संग ने अपनी भारत की यात्रा के दौरान इस मंदिर का दौरा किया था। पातालपुरी के परिसर में सरस्वती कूप है। यह बहुत गहरा कुआँ है और इसे भरने के प्रयास विफल रहे हैं। ऐसा कहा जाता है कि इसका बारहमासी स्रोत दो पवित्र नदियों के संगम पर है। ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान पर सरस्वती नदी लुप्त हो गई थी। भगवान अपने अर्धनारीश्वर रूप में विराजमान है, साथ ही तीर्थों के राजा प्रयाग की भी प्रतिमा है। यहां भगवान शनि को समर्पित एक अखंड ज्योति है, जो 12 महीने प्रज्वलित होती रहती है। मंदिर की वास्तुकला मंदिर इलाहाबाद किले के अंदर बने तहखाने नुमा स्थान पर बना हुआ है। इतिहासकार बताते हैं कि मुगलकाल में जब अकबर ने यहां किले का निर्माण करवाया था, तो पुराना मंदिर और ऐतिहासिक अक्षयवट वृक्ष पृथ्वी के धरातल से नीचे हो गए। अकबर के शासनकाल में बने इस किले में मुगल वास्तुकला की झलक देखने को मिलती है। पातालपुरी बड़े-बड़े खंभों पर खड़ा हुआ है। यहां पर एक लाइन से आपको देवी देवताओं के दर्शन करते हुए बाहर निकलने का मार्ग बना है। उसके बाद सीढ़ियां बनी हुई है। मंदिर में श्री राम जी, माता सीता जी, लक्ष्मण जी, भैरव बाबा समेत 43 देवी-देवताओं की मूर्तियां विराजमान है। मंदिर का समय पातालपुरी मंदिर खुलने का समय 07:00 AM – 06:30 PM सुबह आरती का समय 07:00 AM – 08:00 AM शाम की आरती का समय 06:00 PM – 06:30 PM मंदिर का प्रसाद पातालपुरी मंदिर में श्रद्धालु फल, मेवा, बेसन के लड्डू का भोग चढ़ाते हैं। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार ड्राई फ्रूट्स और दूध के पेड़े को भी मंदिर में चढ़ाते हैं।

पातालपुरी मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »