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Shri Krishnacharitra Manjari: श्रीकृष्णचारित्रमञ्जरी

Shri Krishnacharitra Manjari: श्रीकृष्णचारित्रमञ्जरी विष्णुर्ब्रह्मादिदेवैः क्षितिभरहरणे प्रार्थितः प्रादुरासीद् देवक्यां नन्दनन्दी शिशुवधविहितां पूतनां यो जघान ।उत्थानौत्सुक्यकाले रथचरणगतं चासुरं पादघातै- श्चक्रावर्तं च मात्रा गुरुरिति निहितो भूतले सोऽवतान्माम् ॥ १॥ यो मातुर्जृम्भमाणो जगदिदमखिलं दर्शयन्नङ्करूढो गर्गेणाचीर्णनामा कृतरुचिरमहाबाललीलो वयस्यैः ।गोपीगेहेषु भाण्डस्थितमुरुदयया क्षीरदध्यादि मुष्णन् मृन्ना भक्षीति मातुः स्ववदनगजगद्भासयन् भासतां मे ॥ २॥ दध्नोमत्रस्य भङ्गादुपगमितरुषा नन्दपत्न्याऽथ बद्धः कृच्छ्रेणोलूखले यो धनपतितनयौ मोचयामास शापात्

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Krishna Chandra Ashtakam: कृष्णचन्द्राष्टकम्

Krishna Chandra Ashtakam: कृष्णचन्द्राष्टकम् Krishna Chandra: अम्बुदाञ्जनेन्द्रनीलनिन्दिकान्तिडम्बरः कुङ्कुमोद्यदर्कविद्युदंशुदिव्यदम्बरः ।श्रीमदङ्गचर्चितेन्दुपीतनाक्तचन्दनः स्वाङ्घ्रिदास्यदोऽस्तु मे स बल्लवेन्द्रनन्दनः ॥ १॥ गण्डताण्डवातिपण्डिताण्डजेशकुण्डल- श्चन्द्रपद्मषण्डगर्वखण्डनस्यमण्डलः ।बल्लवीषु वर्धितात्मगूढभावबन्धनः स्वाङ्घ्रिदास्यदोऽस्तु मे स बल्लवेन्द्रनन्दनः ॥ २॥ नित्यनव्यरूपवेषहर्दकेलिचेष्टितः केलिनर्मसार्मदायिमित्रवृन्दवेष्टितः ।स्वीयकेलिकाननांशुनिर्जितेन्द्रनन्दनः स्वाङ्घ्रिदास्यदोऽस्तु मे स बल्लवेन्द्रनन्दनः ॥ ३॥ प्रेमहेममण्डितात्मबन्धुताभिनन्दितः क्सौणिलग्नभाललोकपालपालिवन्दितः ।नित्यकालसृष्टविप्रगौरवालिवन्दनः स्वाङ्घ्रिदास्यदोऽस्तु मे स बल्लवेन्द्रनन्दनः ॥ ४॥ लीलयेन्द्रकालियोष्णकंसवत्सघातक- स्तत्तदात्मकेलिवृष्टिपुष्टभक्तचातकः ।वीर्यशीललिलायात्मघोसवासिनन्दनः स्वाङ्घ्रिदास्यदोऽस्तु मे स बल्लवेन्द्रनन्दनः ॥ ५॥ Shri Krishnachandrashtakam 2:

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Shri Krishnachandrashtakam 2: श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् २

Shri Krishnachandrashtakam 2: श्रीकृष्णचन्द्राष्टकम् २ Krishnachandrashtakam: श्रीकेवलरामप्रणीतम्वनभुवि विहरन्तौ तच्छविं वर्णयन्तौसुहृदमनुसरन्तौ दुर्हृदं सूदयन्तौ ।उपयमुनमटन्तौ वेणुनादं सृजन्तौभज हृदय हसन्तौ रामकृष्णौ लसन्तौ ॥ १॥ कलयसि भवरीतिं नैव चेद्भूरिभूतिंयमकृतनिगृहीतिं तर्हि कृत्वा विनीतिम् ।जहिहि मुहुरनीतिं जायमानप्रतीतिंकुरु मधुरिपुगीतिं रे मनो मान्यगीतिम् ॥ २॥ द्विपपरिवृढदन्तं यः समुत्पाट्य सान्तंसदसि परिभवन्तं लीलया हन्त सान्तम् ।स्वजनमसुखयन्तं कंसमाराद्भ्रमन्तंसकलहृदि वसन्तं चिन्तयामि प्रभुं तम् ॥ ३॥ गर्भगतकृष्णस्तुतिः Garbhgatakrishnastutih

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Hartalika Teej

Hartalika Teej 2025 Date: 25 या 26 अगस्त, कब है हरतालिका तीज, जानिए शुभ मुहूर्त और जरूरी बातें

Hartalika Teej 2025: हरतालिका तीज का पर्व विशेष महत्व माना जाता है जो माता गौरी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एक उत्तम तिथि है। यह व्रत मुख्य रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा किया जाता है। पूजा के दौरान महिलाएं मां पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करती हैं जिससे उन्हें अखंड सौभाग्य का

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Varaha Jayanti

Varaha Jayanti 2025 date: वराह जयंती 2025: बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव

Varaha Jayanti 2025 date:वराह जयंती भगवान विष्णु के तीसरे अवतार, वराह, के शक्तिशाली वराह रूप का उत्सव है। विष्णु का यह अवतार बुराई पर अच्छाई की अंतिम विजय और ब्रह्मांडीय संतुलन की पुनर्स्थापना का प्रतीक है। प्राचीन इतिहास के अनुसार, भगवान विष्णु ने पृथ्वी को बचाने के लिए वराह रूप धारण किया था, जो राक्षस

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Shri Krishnachaturvimshati Stotram: श्रीकृष्णचतुर्विंशतिस्तोत्रम्

Shri Krishnachaturvimshati Stotram: श्रीकृष्णचतुर्विंशतिस्तोत्रम् केशवं केशिमथनं वासुकेर्नोगशायिनम् ।रासक्रीडाविलासाढ्यं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ १॥ नारायणं नरहरिं नारदादिभिरर्चितम् ।तारकं भवबन्धानां कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ २॥ माधवं मधुरावासं भूधरोद्धारकं विभुम् ।आधारं सर्वभूतानां कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ३॥ गोविन्दमिन्दुवदनं श्रीवन्द्यचरणाम्बुजम् ।नवेन्दीवरसङ्काशं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ४॥ विष्णुमुष्णीषभूषाढ्यं जिष्णुं दानवमर्दनम् ।तृष्णाभयप्रभेत्तारं कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम् ॥ ५॥ (कृष्णाभयप्रभेत्तारं) मधुसूदनं विधिनुतं बुधमानसवासितम्

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Krishnagiti Namavalih : कृष्णगीति नामावलिः

Krishnagiti Namavalih : कृष्णगीति नामावलिः (अवलम्बः – महाकवि मानवेदराजेन विरचिता कृष्णगीति) Krishnagiti हरिः श्री गणपतये नमः अविघ्नमस्तु ।नमः शिवायै च नमः शिवाय ।ॐ नमो नारायणाय ।ॐ सरस्वत्यै नमः ।ॐ श्री गुरुभ्यो नमः ।श्रिकृष्णाय परब्रह्मणे नमः ।नमोस्तुते महायोगिन् प्रपन्नमनुशाधि मां ।यथा त्वत् चरणांभोजे रतिस्यादनपायिनी ॥Serial No. Names (Part Shloka-padyam pAdam number)क्रमांक नाम (भागः पद्यम्-श्लोकः/ पादम् संख्या)विष्णु-कृष्ण

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Krishna Giti or Krishna NatakaM of Manaveda Raja: कृष्णगीति अथवा कृष्णनाटकम

Krishna Giti or Krishna NatakaM of Manaveda Raja: कृष्णगीति अथवा कृष्णनाटकम् जगति सुकृतिलोकैर्नन्दितानन्दिताशा कळविरणितवंशीभासमानासमाना ।पशुपयुवतिभोग्या देवतादेवता सा सजलजलदपाळीमेचका मे चकास्तु ॥ १॥प्रेम्णालं लाळ्यमानः सदयमिह सदा नन्दसंज्ञेन पित्रा रामेण ज्यायसा वा विवशमतियशोदाख्यया वा जनन्या ।आदीव्यन् दिव्यगव्या विबुधपारे(परि)वृढो रिष्टदाताघमोक्षं पुष्णन् कृष्णो गुरुर्मे परमपदसमुद्भासको बोभवीतु ॥ २॥सौवर्णाद्भुतभूषणोज्ज्वलवपुः संवीतपीताम्बरो नीलाम्भोदनिभो भुजैधृ(र्धृ)तगदाशङ्खारिपङ्केरुहैः ।भ्राजिष्णुर्गुरुवायुमन्दिरविरोचिष्णुः स विष्णुः स्वयं धृष्णुर्विश्वजनोपतापहरणे काव्यं मम ख्यापयेत्

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Krishnakriya ShaTka Gitam: कृष्णक्रियाषट्कगीतम्

Krishnakriya ShaTka Gitam: कृष्णक्रियाषट्कगीतम् विनिद्र जिवोऽहं गहन त्रासंसंसार अनले विधुर वासंअनन्तपुरष जगन्निवासअत्रागच्छ स्वामी अत्रागच्छ ॥ १॥ एकाकी विहारं च सर्व क्रियाएकाकी कर्मो धर्मश्च सकलंअनन्तपुरष जगन्निवासअत्रागच्छ स्वामी अत्रागच्छ ॥ २॥ पचामी पाकोहं यथा सामर्ध्यंफल जलेन सह वृन्दा नाथअनन्तपुरुष जगन्निवासअत्रागच्छ स्वामी अत्रागच्छ ॥ ३॥ Shrikrishna Karpura Stotram: श्रीकृष्णकर्पूरस्तोत्रम् करोमि देव ते शय्यारचितंआनन्ददायनी प्रियासहितंअनन्तपुरुष जगन्निवासअत्रागच्छ स्वामी अत्रागच्छ ॥

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Shri Krishnakundashtakam: श्रीकृष्णकुण्डाष्टकम्

Shri Krishnakundashtakam: श्रीकृष्णकुण्डाष्टकम् किं तपश्चचार तीर्थलक्षमक्षयं पुरा सुप्रसीदति स्म कृष्ण एव सदरं यतः ।यत्र वासमाप साधु तत्समस्तदुर्लभे तत्र कृष्णकुण्ड एव संस्थितिः स्तुतास्तु नः ॥ १॥ यद्यरिष्टदानवोऽपि दानदो महानिधे- रस्मदादिदुर्मतिभ्य इत्यहोवसीयते ।यो मृतिच्छलेन यत्र मुक्तिमद्भुतां व्यधात् तत्र कृष्णकुण्ड एव संस्थितिः स्तुतास्तु नः ॥ २॥ Shrikrishna Karpura Stotram: श्रीकृष्णकर्पूरस्तोत्रम् गोवधस्य निष्कृतिस्त्रिलोकतीर्थकोटिभी राधयेत्यवादि तेन ता हरिः समाह्वयन् ।यत्र

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फोन

Sapne Mein Mobile Tutna: सपने में अपने फोन के टूटने का सपना देखते हैं तो इसका क्या मतलब होता है ?

फोन के टूटने का सपना देखते हैं क्या आपने कभी सोचा है कि आपका अवचेतन मन आपके फ़ोन के टूटने की तस्वीरें क्यों बनाता है? सपनों के अपने छिपे हुए अर्थ होते हैं, और वे अक्सर हमारे गहरे विचारों, आशंकाओं और इच्छाओं को दर्शाते हैं। अगर आप अपने फ़ोन के टूटने का सपना देख रहे

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Kushotpatini Amavasya

Kushotpatini Amavasya 2025 Date: कुशोत्पाटिनी अमावस्या : कुश घास को एकत्र करने के क्या हैं नियम और तरीका

Kushotpatini Amavasya 2025 Date: भाद्रपद मास की अमावस्या को अत्यंत शुभ माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भाद्रपद मास की कुशोत्पाटिनी अमावस्या क्यों खास है. आइए जानते हैं इस अमावस्या का पौराणिक महत्व और इस दिन क्या करना शुभ रहेगा. Kushotpatini Amavasya 2025: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्व दिया गया

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