Masik Shivratri 2025 List:साल 2025 में कब-कब है मासिक शिवरात्रि,जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मंत्र

Masik Shivratri 2025 List: हिंदू धर्म में मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि दोनों का ही विशेष महत्व होता है। पंचांग के अनुसार, मासिक शिवरात्रि का व्रत हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाता है, जबकि मासिक शिवरात्रि का पर्व साल में एक बार में मनाया जाता है। मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा की जाती है। इस दिन मनोवांछित फल की प्राप्ति के लिए भक्त व्रत रखते हैं। ऐसी मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भक्तों की सभी परेशानियां दूर होती हैं। ऐसे में अगर नए साल में आप भी Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने वाले हैं तो साल 2025 में मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri 2025 List) की सही डेट एवं पूरी लिस्ट नोट कर लें। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं. शास्त्रों के अनुसार, देवी लक्ष्मी, सरस्वती, इंद्राणी, गायत्री, सावित्रि और माता पार्वती ने शिवरात्रि का व्रत किया था और शिव कृपा से अनंत फल प्राप्त किए थे. धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव का देवी पार्वती से विवाह चतुर्दशी की रात्रि में हुआ था. इसलिए मासिक शिवरात्रि पर रात्रि में पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है. Masik Shivratri Puja Vidhi मासिक शिवरात्रि पूजा विधि शिव मंत्र Shiv Mantra बेहद खास होती है मासिक शिवरात्रि Monthly Shivratri is very special भविष्य पुराण के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मासिक शिवरात्रि पड़ने के कारण ये तिथि बेहद खास होती है. इस तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं. इस दिन भगवान शिव की पूजा के साथ- साथ शिव परिवार के सभी सदस्यों की उपासना की जाती है. सुख-शांति की कामना से शिव का पूजन किया जाता है और उनके निमित्त व्रत रखा जाता है. इस दिन शिवलिंग पर पुष्प चढ़ाने तथा शिव मंत्रों के जप का विशेष महत्व है. इस दिन पूरे विधि-विधान से शिवजी का पूजन और व्रत किया जाता है. Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत के प्रभाव से व्यक्ति काम, क्रोध, लोभ और मोह आदि के बंधन से मुक्त हो जाता है. मासिक शिवरात्रि व्रत के लाभ Masik Shivratri Vrat labh ऐसी मान्यता है कि शिव मंत्रों का जाप शिवालय या घर के पूर्व भाग में बैठकर करने से अधिक फल प्राप्त होता है. मासिक शिवरात्रि की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराकर स्वयं भोजन करना चाहिए. मासिक शिवरात्रि का व्रत जो भी भक्त पूरे श्रद्धाभाव से करता है, उसके माता-पिता के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. साथ ही स्वयं के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उस व्यक्ति जीवन को जीवन के सारे सुख प्राप्त होते हैं. इस व्रत की महिमा से व्यक्ति दीर्घायु, ऐश्वर्य, आरोग्य और संतान आदि प्राप्त करता है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. 2025 की मासिक शिवरात्रि की पूरी लिस्ट (Masik Shivratri 2025 List) 27 जनवरी 2025, सोमवार मासिक शिवरात्रि (माघ)26 फरवरी 2025, बुधवार महा शिवरात्रि (फाल्गुन)27 मार्च 2025, बृहस्पतिवार मासिक शिवरात्रि (चैत्र)26 अप्रैल 2025, शनिवार मासिक शिवरात्रि (वैशाख)25 मई 2025, रविवार मासिक शिवरात्रि (ज्येष्ठ)23 जून 2025, सोमवार मासिक शिवरात्रि (आषाढ़)23 जुलाई 2025, बुधवार श्रावण शिवरात्रि (श्रावण)21 अगस्त 2025, बृहस्पतिवार मासिक शिवरात्रि (भाद्रपद)19 सितंबर 2025, शुक्रवार मासिक शिवरात्रि (आश्विन)19 अक्तूबर 2025, रविवार मासिक शिवरात्रि (कार्तिक)18 नवंबर 2025, मंगलवार मासिक शिवरात्रि (मार्गशीर्ष)18 दिसंबर 2025, बृहस्पतिवार मासिक शिवरात्रि (पौष)

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 Somvati Amavasya 2025 Date:वट सावित्री पर बना सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग, जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

Somvati Amavasya:हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व होता है। इस दिन सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए रखती हैं। आइए जानते हैं वट सावित्री व्रत की तिथि, शुभ योग और शुभ मुहूर्त… Somvati Amavasya 2025 me Kab hai:धार्मिक दृष्टि से ज्येष्ठ माह (Jyeshtha Month 2025) का विशेष महत्व माना गया है। इस माह में बड़ा मंगल और निर्जला एकादशी जैसे पर्व आते हैं। इसी तरह ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि भी बहुत ही खास है। इस तिथि को आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य अर्जन के लिए काफी शुभ माना गया है। इसी के साथ अमावस्या तिथि पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है।  Vat Savitri Vrat 2025 Date: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत हर वर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। ये व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाल जीवन के लिए रखती हैं। Somvati Amavasya इस दिन वट (बरगद) के पेड़ की पूजा की जाती है और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनने का खास महत्व होता है। लेकिन 2025 में वट सावित्री व्रत की तिथि को लेकर थोड़ा संशय बना हुआ है, क्योंकि इस साल अमावस्या दो दिन पर पड़ रही है। ऐसे में आइए जानते हैं इस साल कब रखा जाएगा वट सावित्री का व्रत। साथ ही, जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और शुभ योग। वट सावित्री व्रत की तिथि:date of vat savitri fast पंचांग के अनुसार, 2025 में ज्येष्ठ अमावस्या 26 मई को दोपहर 12:12 बजे से शुरू होकर 27 मई की सुबह खत्म हो रही है। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस दिन दोपहर के समय Somvati Amavasya अमावस्या हो, उसी दिन व्रत करना शुभ माना जाता है। इसलिए, इस साल वट सावित्री का व्रत 26 मई 2025 दिन सोमवार को रखा जाएगा। Somvati Amavasya:कब है ज्येष्ठ अमावस्या ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से शुरू हो रही है। वहीं इस तिथि का समापन 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर होने जा रहा है। ऐसे में ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि सोमवार, 26 मई को मनाई जाएगी। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा, जो मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए खास मानी गई है।  इस कार्यों से मिलते हैं शुभ परिणाम These actions yield auspicious results अमावस्या के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद गरीबों और जरूरतमंद लोगों को दान-पुण्य करना बेहद शुभ माना जाता है। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव नहीं है, तो आप घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। Somvati Amavasya इसके साथ ही पितरों के आशीर्वाद के लिए अमावस्या पर पिंड दान और श्राद्ध कर्म भी जरूर करना चाहिए। प्रसन्न होंगे पितृ Father will be happy सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ का पूजन करें और भी जरूर करें। पूजन के दौरान पीपल के पेड़ की सात बार परिक्रमा करनी चाहिए और पेड़ के नीचे सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाना चाहिए। इसी के साथ आपको सोमवती अमावस्या पर पितृ चालीसा (Somvati Amavasya 2025) का पाठ भी कर सकते हैं, जिससे पितरों का कृपा आपके ऊपर बनी रहे। करें इन चीजों का दान:Donate these things सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya Daan) के दिन दान का भी विशेष महत्व है। ऐसे में आप पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए गरीबों व जरूरतमंद लोगों में अन्न, धन और वस्त्रों का दान कर सकते हैं। इसी के साथ इस दिन पर सफेद रंग की चीजें जैसे चावल, दही, मिश्री, खीर और सफेद कपड़ों का दान किया जा सकता है। इससे आपको महादेव की कृपा प्राप्ति हो सकती है। 

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Apara Ekadashi Vrat Niyam:एकादशी के दिन क्या करे क्या न करे,कैसे मिलेगी खूब उन्नति, धन-संपत्ति में भी होगी बढ़ोतरी

Apara Ekadashi Vrat Niyam: एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। अगर आपके जीवन में कई परेशानियां चल रही हैं तो एकादशी के दिन इन उपायों को जरूर करें। Apara Ekadashi 2025: अपार धन और प्रसिद्धि प्रदान करने वाला अपरा एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह (Jyeshtha ekadshi) की भीषण गर्मी में रखा जाता है. इस व्रत के प्रभाव से जातक की अधूरी इच्छाएं पूरी होती है साथ ही वह मृत्यु के बाद बैकुंठ लोक को जाता है. एकादशी व्रत 4 तरह से रखा जाता है (How to do Ekadashi Vrat Niyam) धार्मिक ग्रंथों में चार तरह से एकादशी व्रत रखने का वर्णन है. जिसमें जलाहार, क्षीरभोजी, फलाहारी, नक्तभोजी जलाहर- सिर्फ जल ग्रहण करते हुये एकादशी व्रत करना. क्षीरभोजी- क्षीर मतलब दुग्ध पदार्थऔ र पौधों के दूधिया रस के सेवन कर एकादशी का व्रत करना. फलाहारी- केवल फलों का सेवन करते हुए एकादशी व्रत करना. नक्तभोजी- सूर्यास्त से ठीक पहले दिन में एक समय फलाहार और व्रत से संबंधित पदार्थ ग्रहण करना. Vrat Niyam इसमें साबूदाना, शकरकंद आदि शामिल हैं. अपरा एकादशी पर क्या दान करें? (Apara Ekadashi 2024 Daan List) अपरा एकादशी के दिन अन्न का दान करें। मान्यता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अन्न की कभी कमी नहीं होती। Vrat Niyam इसके अलावा चावल और मक्का का भी दान किया जा सकता है। अगर आप कुंडली में गुरु कमजोर की समस्या का सामना कर रहे हैं, तो अपरा एकादशी के दिन पीले वस्त्र का दान करें। क्योंकि भगवान विष्णु को पीला रंग प्रिय है। इसके अलावा अपरा एकादशी के दिन दूध और दही का दान करें। Vrat Niyam माना जाता है कि इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और जीवन में आने वाली सभी परेशानियों से मुक्ति मिलती है। अपरा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद श्रद्धा अनुसार धन का दान करें। इससे श्री हरि और मां लक्ष्मी का कृपा प्राप्त होती है और धन से तिजोरी भरी रहती है। अपरा एकादशी व्रत में क्या खाना चाहिए (Apara ekadashi vrat me kya khaye) एकादशी व्रत भगवान विष्णु (Vishnu ji) को समर्पित है. इस व्रत का 24 घंटे पालन किया जाता है. अपरा एकादशी व्रत में साधक साबूदाना, बादाम, नारियल,  शकरकंद, कुट्टू, आलू, काली मिर्च, सेंधा नमक, सिंघाड़े का आटा, राजगीरे का आटा, चीनी आदि का सेवन कर सकते हैं. ये एकादशी के नक्तभोजी व्रत नियम में आते हैं. आध्यात्मिकता में प्रगति करने के लिए एकादशी एक बहुत शक्तिशाली व्रत है. एकादशी व्रत में क्या न खाएं (Ekadashi vrat what to not eat) Vrat Niyam एकादशी व्रत के दिन घर में चावल न बनाएं. व्रती और परिवार वाले इस दिनमांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन न करें. अपरा एकादशी के दिन जरूर करें ये विशेष उपाय 1. अगर आप अपने जीवन में खूब उन्नति करना चाहते हैं तो आज के दिन एक जटा वाला नारियल लेकर उस पर लाल मौली या कलावा बांधकर श्री हरि का ध्यान करते हुए उसे बहते जल में प्रवाहित कर दें।  2. अगर आप अपनी धन-संपत्ति में बढ़ोतरी करना चाहते हैं तो आज के दिन एक सफेद धागे में पीले फूल पिरोकर उसकी माला बनाएं और भगवान विष्णु को अर्पित करें साथ ही भगवान के सामने हाथ जोड़कर प्रणाम करें।  3. अगर आप अपने जीवन में खुशियां ही खुशियां लाना चाहते हैं तो Vrat Niyam आज के दिन श्री विष्णु मंदिर में जाकर शहद की शीशी दान करें और भगवान के आगे घी का दीपक जलाकर ॐ नमो भगवते नारायणाय मंत्र का 11 बार जप करें। 4. अगर आप अपने बच्चे की सफलता सुनिश्चित करना चाहते हैं तो आज के दिन स्नान आदि के बाद पीले रंग के कपड़े पहनकर भगवान विष्णु को केसर का तिलक लगाइए। अगर केसर ना हो तो आप हल्दी का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। साथ ही भगवान को तिलक लगाने के बाद अपने बच्चे को भी तिलक लगाएं।  5. अगर आप अपने सभी कामों में मातापिता का सहयोग पाना चाहते हैं तो आज के दिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और तुलसी माता को हाथ जोड़कर प्रणाम करें। 6. अगर आप बिजनेस के किसी काम से यात्रा करने जा रहे हैं और अपनी यात्रा से काम में लाभ पाना चाहते हैं तो आज के दिन अपने स्नान के पानी में थोड़ासा गंगाजल और कुछ सफेद तिल के दाने मिलाकर स्नान करें और स्नान के बाद भगवान के आगे हाथ जोड़कर कोई पीले रंग का रुमाल या अन्य कोई पीले रंग का छोटासा कपड़ा लेकर आज पूरे दिन अपने पास रखें। 7. अगर आप किसी खास काम के लिए कुछ प्लानिंग कर रहे हैं और उस प्लानिंग में आप सक्सेस होना चाहते हैं Vrat Niyam तो आज के दिन बरगद के पेड़ में जल चढ़ाएं और जल चढ़ाने से जमीन में जो मिट्टी गिली हो उससे अपने मस्तक पर तिलक लगाएं।  8. अगर आप अपने व्यवहार से दूसरे लोगों को प्रभावित करना चाहते हैं तो Vrat Niyam आज के दिन विष्णु जी के सामने घी का दीपक जलाएं। साथ ही भगवान को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं और भोग लगाने के कुछ देर बाद ही उन लड्डूओं को प्रसाद के रूप में घर के सब सदस्यों और आसपास के लोगों में बांट दें साथ ही थोड़ासा प्रसाद स्वयं भी ग्रहण करें।  9. अगर आप परिवार में सबके बीच बेहतर तालमेल बनाये रखना चाहते हैं तो आज के दिन भगवान विष्णु को माखन मिश्री का भोग लगाएं और श्री विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के आगे बैठकर श्री हरि श्री हरि के नाम का 108 बार जप करें। 10. अगर आपके बच्चे आपकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं देते और उसके चलते आप थोड़े परेशान रहते हैं तो आज के दिन एक डिब्बी में थोड़ासा केसर लेकर उस पर ॐ नमो भगवते नारायणाय मंत्र का 11बार जप करें और उस डिब्बी में से थोड़ा Vrat Niyam केसर लेकर भगवान को तिलक लगाएं । फिर उस डिब्बी को अपने पास संभालकर 45 दिनों के लिये रख लें । 45 दिनों के बाद उस केसर को स्वयं तिलक के रूप में इस्तेमाल कर लें। 11. अगर आप अपने व्यापार को निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर होते देखना चाहते हैं तो Vrat Niyam आज के दिन किसी ब्राहमण को आदर सहित घर पर

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Namkaran Sanskar in Australia: How to Book Your Baby’s Naming Ceremony Online with KARMASU

Namkaran Sanskar is not just about naming your child—it’s a sacred ritual that invokes divine blessings for a healthy, prosperous, and meaningful life. For Indian families living in Australia, performing this important Vedic ceremony can be challenging due to the unavailability of traditional priests and proper guidance. That’s where KARMASU bridges the gap—bringing authentic Namkaran Sanskar services online, conducted by learned Vedic priests, tailored for NRIs in cities like Melbourne, Sydney, Brisbane, Adelaide, and Perth. 🌸 Why is Namkaran Sanskar Important? According to Hindu traditions: This ritual invites spiritual energy and cultural identity into the baby’s life. 🛕 How KARMASU Helps You Perform Namkaran in Australia KARMASU offers:✅ Certified Vedic priests✅ Online Zoom/Google Meet ceremonies✅ Personalized puja rituals based on baby’s birth details✅ Digital Namkaran certificate✅ Optional Kundli creation (Vedic horoscope) 🧾 What’s Included in the Online Namkaran Package? 📍 Who Can Book This Service? Whether you’re in: KARMASU provides customized support for all Hindu communities—North Indian, South Indian, Nepali, etc. 💰 Charges All services include:✅ Live puja✅ Digital prasad (PDFs & audio blessings)✅ 1-on-1 session with the priest 📲 How to Book with KARMASU? 📞 WhatsApp support: +91-9129388891 (Global helpline) ✨ Conclusion Even while living abroad, you can stay deeply rooted in your Vedic traditions. With KARMASU, celebrate your baby’s Namkaran Sanskar in Australia with the same devotion and joy as you would in India. 📌 Book your online Namkaran now with KARMASU and bless your child with a spiritually rich beginning.

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How to Book Online Satyanarayan Puja in Melbourne

Satyanarayan Puja, a revered Hindu ritual dedicated to Lord Vishnu, brings peace, prosperity, and positivity into our homes. For devotees in Melbourne, Australia, performing this sacred puja is now easier than ever—thanks to online puja services offered by platforms like KARMASU. Whether you’re celebrating a special occasion or seeking divine blessings, here’s how you can book an online Satyanarayan Puja in Melbourne from the comfort of your home. 🛕 Step 1: Choose a Trusted Platform Like KARMASU Look for a platform that offers: 👉 Why KARMASU?KARMASU is a one-stop Hindu spiritual hub offering online pujas with authentic Vedic rituals and personalized mantras—perfectly tailored for NRIs and devotees abroad. 📆 Step 2: Select the Date & Time (Based on Auspicious Muhurat) We recommend choosing: 📦 Step 3: Choose Your Puja Kit (Optional) If you want to do the puja at home with the priest online, you can: 🔴 Step 4: Attend the Live Puja via Zoom/Google Meet On the chosen day: 📜 You’ll also receive a digital puja certificate and Satyanarayan Katha PDF as prasad. 💰 Charges & Inclusions Typical cost: AUD $61 – $151, depending on: All bookings include:✅ Vedic pandit✅ Personalized puja✅ Live participation✅ Blessings for family 📲 How to Book with KARMASU 📞 Or WhatsApp: +91-9129388891 (24×7 Support) 🌏 Serving NRIs Across Australia: ✅ Sydney✅ Melbourne✅ Brisbane✅ Adelaide✅ Perth 🙏 Final Words Spirituality knows no boundaries. With KARMASU, even thousands of kilometers away from India, you can stay connected to your roots and perform auspicious rituals with full devotion. 📌 Book your Satyanarayan Puja in Melbourne today and invite divine peace into your home.

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Apara Ekadashi Vrat Katha:अपरा एकादशी पर जरूर पढ़ें व्रत कथा, मिलेगा अपार धन और पापों से छुटकारा !

Apara Ekadashi Vrat Katha: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी के नाम से जाना जाता है. Vrat Katha इस दिन पूजा के दौरान अपरा एकादशी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. आइए पढ़ें अपरा एकादशी व्रत की कथा. Apara Ekadashi Katha: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है. एकादशी तिथि जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है. हर महीने में 2 बार एकादशी व्रत रखा जाता है. एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है. इस तिथि पर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-व्रत करने की मान्यता है. इस Vrat Katha व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं. एकादशी पूजा के दौरान एकादशी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए. एकादशी (Vrat Katha) व्रत कथा पढ़ने से इस व्रत का पूर्ण फल मिलता है. ऐसी मान्यता है कि कथा का पाठ करने से पूजा सफल होती है और श्रीहरि विष्णु प्रसन्न होते हैं. आइए जानते हैं अपरा एकादशी व्रत कथा के बारे में. अपरा एकादशी व्रत कथा (Apara Ekadashi Vrat Katha) युधिष्ठिर ने पूछा- जनार्दन ! ज्येष्ठके कृष्णपक्षमें किस नामकी एकादशी होती है ? मैं उसका माहात्म्य सुनना चाहता हूं। उसे बताने की कृपा कीजिये । भगवान् श्रीकृष्ण बोले- राजन् ! तुमने सम्पूर्ण लोकोंके हितके लिये बहुत उत्तम बात पूछी है। राजेन्द्र ! इस एकादशीका नाम ‘अपरा’ है। यह बहुत पुण्य प्रदान करने वाली और बड़े-बड़े पातकोंका नाश करनेवाली है। Vrat Katha ब्रह्महत्यासे दबा हुआ, गोत्रकी हत्या करनेवाला, गर्भस्थ बालक को मारने वाला, परनिन्दक तथा परस्त्रीलम्पट पुरुष भी अपरा एकादशी के सेवन से निश्चय ही पाप रहित हो जाता है। जो झूठी गवाही देता, माप-तोलमें धोखा देता, बिना जाने ही नक्षत्रों की गणना करता और कूटनीति से आयुर्वेद का ज्ञाता बनकर वैद्य का काम करता है- ये सब नरकमें निवास करने वाले प्राणी हैं। परन्तु अपरा एकादशी के सेवनसे ये भी पापरहित हो जाते हैं। यदि व क्षत्रिय क्षात्रधर्मका परित्याग करके युद्धसे भागता है, तो वह क्षत्रियोचित धर्म से भ्रष्ट होनेके कारण घोर नरकमें पड़ता है। जो शिष्य विद्या प्राप्त करके स्वयं ही गुरुकी निन्दा करता है, वह भी महापातकों से युक्त होकर भयङ्कर नरक में गिरता है। किन्तु अपरा एकादशीके सेवनसे ऐसे मनुष्य भी सद्गतिको प्राप्त होते हैं। Apara Ekadashi 2025 Date:मई में कब रखा जाएगा अपरा एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व माघमें जब सूर्य मकर राशिपर स्थित हों, उस समय प्रयाग में स्नान करनेवाले मनुष्यों को जो पुण्य होता है, काशी में शिवरात्रिका व्रत करनेसे जो पुण्य प्राप्त होता है, गया में पिण्डदान करके पितरों को तृप्ति प्रदान करनेवाला पुरुष जिस पुण्यका भागी होता है, बृहस्पति के सिंहराशिपर स्थित होनेपर गोदावरीमें स्रान करनेवाला मानव जिस फलको प्राप्त करता है, बदरिकाश्रमकी यात्रा के समय भगवान् केदार के दर्शन से तथा बदरीतीर्थ के सेवन से जो पुण्य फल उपलब्ध होता है तथा सूर्यग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में दक्षिणा सहित यज्ञ करके हाथी, घोड़ा और सुवर्ण-दान करनेसे जिस फलकी प्राप्ति होती है; Vrat Katha अपरा एकादशी के सेवनसे भी मनुष्य वैसे ही फल प्राप्त करता है। ‘अपरा’ को उपवास करके भगवान् वामन की पूजा करनेसे मनुष्य सब पापों से मुक्त हो श्रीविष्णुल्लेकमें प्रतिष्ठित होता है। इसको पढ़ने और सुननेसे सहस्त्र गोदान का फल मिलता है। युधिष्ठिर ने कहा- जनार्दन । ‘अपरा’का सारा माहात्य मैंने सुन लिया, अब ज्येष्ठ के शुक्ल पक्ष में जो एकादशी है उसका वर्णन कीजिये । भगवान् श्रीकृष्ण बोले- राजन् ! इसका वर्णन परम धर्मात्मा सत्यवतीनन्दन व्यासजी करेंगे; क्योंकि ये सम्पूर्ण शास्त्रों के तत्त्वज्ञ और वेद-वेदाङ्गोंके पारङ्गत विद्वान् हैं। तब वेदव्यासजी कहने लगे – दोनों ही पक्षोंकी एकादशियोंको भोजन न करे । द्वादशीको स्त्रान आदि से पवित्र हो फूलों से भगवान् के शव की पूजा करके नित्य कर्म समाप्त होनेके पश्चात् पहले ब्राह्मणों को भोजन देकर अन्तमें स्वयं भोजन करे। राजन् ! जननाशौच और मरणा शौच में भी एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिये । यह सुनकर भीम सेन बोले- परम बुद्धिमान् पितामह । मेरी उत्तम बात सुनिये । राजा युधिष्ठिर, माता न कुन्ती, द्रौपदी, अर्जुन, नकुल और सहदेव-ये एकादशीको कभी भोजन नहीं करते तथा मुझसे भी ने हमेशा यही कहते हैं कि ‘भीमसेन ! तुम भी एकादशी को न खाया करो।’ किन्तु मैं इन लोगों से यही कह दिया करता हूं कि ‘मुझसे भूख नहीं सही जाएगी ।’

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Apara Ekadashi 2025 Date:मई में कब रखा जाएगा अपरा एकादशी का व्रत? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Apara Ekadashi:भगवान विष्णु की महिमा निराली है। भगवान विष्णु अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाते हैं। उनकी कृपा से भक्तजनों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। उनकी कृपा से धन संबंधी परेशानी दूर हो जाती है। साथ ही जीवन में सुखों का आगमन होता है। एकादशी तिथि (Apara Ekadashi 2025 Date) पर पूजा-पाठ के बाद दान करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। Apara Ekadashi Kab hai:अपरा एकादशी का सनातन धर्म में खास महत्व है। यह पर्व हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन साधक जगत के पालनहार भगवान विष्णु और देवी मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। साथ ही लक्ष्मी नारायण जी के निमित्त एकादशी का व्रत रखते हैं। सनातन शास्त्रों में निहित है कि अपरा एकादशी व्रत करने से साधक द्वारा जन्म-जन्मांतर में किए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही साधक पर लक्ष्मी नारायण जी की कृपा बरसती है। आइए, अपरा एकादशी (Apara Ekadashi 2025 Date) के बारे में सबकुछ जानते हैं- अपरा एकादशी कब है? Apara Ekadashi 2025 date पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है. ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 23 मई को देर रात 1 बजकर 12 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, इस तिथि का समापन 23 मई को रात 10 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत 23 मई को रखा जाएगा. अपरा एकादशी की पूजा विधि | Apara Ekadashi ki Puja Vidhi दशमी तिथि की रात्रि में सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें. एकादशी के दिन प्रातः सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें. स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है. स्वच्छ वस्त्र धारण करें. पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. उन्हें पीले वस्त्र अर्पित करें. चंदन, फूल, धूप और दीप जलाकर उनकी पूजा करें. तुलसी दल अवश्य अर्पित करें. भगवान विष्णु को फल, मिठाई और तुलसी डालकर भोग लगाएं. भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें, जैसे “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”. विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी होता है. अपरा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें. भगवान विष्णु की आरती गाएं. अपनी क्षमतानुसार गरीबों को वस्त्र, भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करें. द्वादशी तिथि में सूर्योदय के बाद व्रत खोलें. अपरा एकादशी पारण (Apara Ekadashi Paran Timing) साधक 24 मई को पारण कर सकते हैं। 24 मई को पारण सुबह 05 बजकर 26 मिनट से लेकर शाम 08 बजकर 11 मिनट के मध्य पारण कर सकते हैं। इस दौरान साधक स्नान-ध्यान कर लक्ष्मी नारायण जी की पूजा करें। वहीं, पूजा के बाद अन्न और धन का दान कर व्रत खोलें। अपरा एकादशी शुभ योग (Apara Ekadashi Shubh Muhurat) ज्योतिषियों की मानें तो ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी की तिथि पर प्रीति और आयुष्मान का निर्माण हो रहा है। इसके साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बनेगा। इन योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होगी।  पंचांग सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 26 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 07 बजकर 10 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 04 मिनट से 04 बजकर 45 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 35 मिनट से 03 बजकर 30 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 08 मिनट से 07 बजकर 29 मिनट तक निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक अपरा एकादशी का महत्व | Apara Ekadashi Significance अपरा एकादशी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है. साथ ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जो गंगा स्नान, स्वर्ण दान, भूमि दान और गौ दान के समान है. धन-धान्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मान-सम्मान और यश बढ़ता है. मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है. यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है.

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Sapne Mein Paise Dekhna:सपने में पैसों का दिखना शुभ है या अशुभ, जानें क्या शुरु होंगे अच्छे दिन या होगा बैड लक

Sapne Mein Paise Dekhna:सपनों की दुनिया बहुत ही विचित्र और मायावी है लेकिन, सपनों की इस मायावी दुनिया का आपके भविष्य और वर्तमान दोनों से संबंध है। सपने कई बार हमे हमारे भविष्य जानने में मदद करते हैं। आज हम आपको स्वप्न शास्त्र में बताए गए धन से संबंधित ऐसे सपनों के बारे में बताने जा रहे हैं कि जो आपको बताएंगे की आना वाला समय आपके लिए शुभ या अशुभ कैसा रहेगा। आइए जानते हैं सपनों में पैसे देखने का क्या है अर्थ। Dreams About Money Meaning:सपनों की अपनी एक अलग दुनिया है। लेकिन, क्या आप जानते हैं सपनों की सपनों की इस मायावी दुनिया का आपके वर्तमान जीवन से भी संबंध होता है। भविष्य में आपके जीवन में क्या बदलाव आएगा और यह बदलाव आपके लिए कैसा रहेगा। इसका पता आपको आने वाले सपनों से लग जाता है। आज हम आपको Paise पैसों से जुड़े कुछ ऐसे सपनों के बारे में बताने जा रहे हैं जो आपके लिए शुभ और अशुभ दोनों रहेंगे। आइए जानते हैं सपनों में पैसे देखने का क्या है मतलब। पैसों Paise के सपने, धन और वित्त के बारे में विचारों को दर्शाते हैं. वे हमारी अंतर्निहित वित्तीय चिंताओं को दिखा सकते हैं. ये सपने चेतन और अवचेतन के बीच सेतु बनते हैं. पैसों के बारे में आपके सपनों का क्या मतलब है. कल्पना करें कि आप धन प्राप्त करने का सपना देख रहे हैं और अपने आप को ऐसे परिदृश्य में पा रहे हैं जहां आपको बहुत सारे सौंपे जाते है. कहा जाता है कि यह सपना सफलता के लिए आत्म-मूल्य और तत्परता की मजबूत भावना को प्रतिबिंबित कर सकता है. यह दर्शाता है कि आप अपने मूल्य को पहचानने और अपने जीवन में सकारात्मक बदलावों को अपनाने के लिए तैयार हैं. इसके अलावा, यह सपना नए अवसरों को स्वीकार करने के प्रति आपके खुलेपन को भी दर्शा सकता है. सपने में किसी से पैसे लेने का मतलब Sapne Mai Kisi se Paise Lene Ka Matlab कई बार लोगों को ऐसे सपने भी आते हैं कि कोई व्यक्ति उन्हें नोट दे रहा है। इस तरह के सपनों को स्वप्न शास्त्र में बहुत ही शुभ माना गया है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह के सपने आने का मतलब है कि आपको जल्द ही अचानक से धन लाभ मिल सकता है। साथ ही इस तरह के सपने आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाले भी रहेंगे। इस तरह के सपनों का अर्थ है कि आप यदि पिछले लंबे समय से आर्थिक तंगी झेल रहे हैं तो उसमें आपको थोड़ी राहत मिलेगी। सपने में सिक्के दिखाई देना का मतलब Sapne Mai Coin Dikhai Dena Ka Matlab स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपको सपने में Paise सिक्के देखते हैं या फिर सिक्कों को खड़कते देखते हैं तो इस तरह के सपने शुभ संकेत नहीं देते हैं। इस तरह के सपनों का आर्थिक है कि आने वाला समय आपके लिए काफी कष्टकारी रहने वाला है। आपको Paise आर्थिक हानि का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के सपने आने पर आपको किसी जरूरतमंद कुछ धनराशि दान करनी चाहिए। या फिर आप किसी मंदिर में भी दान कर सकते हैं। सपने में फटे पुराने नोट दिखाई देना Sapne Mai Fate Purane Note Dikhai Dena स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आप सपने में फटे हुए नोट देखते हैं तो इस तरह के सपनों को भी स्वप्न शास्त्र में अशुभ माना गया है। इस तरह के सपनों का अर्थ है कि आने वाला समय आपके लिए काफी मुश्किल भरा होने वाला है। Paise आपको करियर से जुड़े कुछ उतार चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस तरह के सपने आने पर आपको सबसे पहले किसी जरुरमंद व्यक्ति को उनकी जरूरत की कोई चीज भेट करनी चाहिए। सपने में धन चोरी होते दिखाई देना Sapne Me Dhan Chori Hote Dikhai Dena सपने में यदि आप देखते हैं कि आपका धन कोई चोरी कर रहा है तो इस तरह के सपनों को स्वप्न शास्त्र में शुभ माना गया है। Paise इस तरह के सपने आने का अर्थ है कि आपको आने वाले कुछ ही दिनों में बड़ी मात्रा में धन प्राप्त होगी। साथ ही आपके जो काम पिछले काफी समय से अटके हुए थे वह अब पूरे हो जाएंगे। Paise इस तरह के सपने आने पर आपको किसी के साथ इन्हें साझा नहीं करना चाहिए। बल्कि, आपको अगले दिन तुरंत भगवान के मंदिर में जाकर दर्शन करके आना चाहिए।

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Matangi Hridaya Stotra:मातंगी हृदय स्तोत्र

Matangi Hridaya Stotra:मातंगी हृदय स्तोत्र Matangi Hridaya Stotra:एकदा कौतुकाविष्टा भैरवं भूतसेवितम् ।भैरवी परिपप्रच्छ सर्वभूतहिते रता ॥ १ ॥ श्री भैरव्युवाच । भगवन्सर्वधर्मज्ञ भूतवात्सल्यभावन ।अहं तु वेत्तुमिच्छामि सर्वभूतोपकारम् ॥ २ ॥ केन मन्त्रेण जप्तेन स्तोत्रेण पठितेन च ।सर्वथा श्रेयसां प्राप्तिर्भूतानां भूतिमिच्छताम् ॥ ३ ॥ श्री भैरव उवाच । शृणु देवि तव स्नेहात्प्रायो गोप्यमपि प्रिये ।कथयिष्यामि तत्सर्वं सुखसम्पत्करं शुभम् ॥ ४ ॥ पठतां शृण्वतां नित्यं सर्वसम्पत्तिदायकम् ।विद्यैश्वर्यसुखाव्याप्तिमङ्गलप्रदमुत्तमम् ॥ ५ ॥ मातङ्ग्या हृदयं स्तोत्रं दुःखदारिद्र्यभञ्जनम् ।मङ्गलं मङ्गलानां च अस्ति सर्वसुखप्रदम् ॥ ६ ॥ ओं अस्य श्रीमातङ्गीहृदयस्तोत्रमन्त्रस्य दक्षिणामूर्तिरृषिः –विराट् छन्दः – श्री मातङ्गी देवता – ह्रीं बीजं – क्लीं शक्तिः – ह्रूं कीलकं ।सर्ववाञ्छितार्थसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥ ऋष्यादिन्यासः । दक्षिणामूर्तिऋषये नमः शिरसि ।विराट्छन्दसे नमः मुखे ।मातङ्गीदेवतायै नमः हृदि ।ह्रीं बीजाय नमः गुह्ये ।हूं शक्तये नमः पादयोः ।क्लीं कीलकाय नमः नाभौ ।विनियोगाय नमः सर्वाङ्गे ।इति ऋष्यादिन्यासः ॥ करन्यासः । ओं ह्रीं अङ्गुष्ठाभ्यां नमः ।ओं क्लीं तर्जनीभ्यां नमः ।ओं ह्रूं मध्यमाभ्यां नमः ।ओं ह्रीं अनामिकाभ्यां नमः ।ओं क्लीं कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ओं ह्रूं करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । अङ्गन्यासः । ओं ह्रीं हृदयाय नमः ।ओं क्लीं शिरसे स्वाहा ।ओं ह्रूं शिखायै वषट् ।ओं ह्रीं नेत्रत्रयाय वौषट् ।ओं क्लीं कवचाय हुम् ।ओं ह्रूं अस्त्राय फट् । ॥ ध्यानम् ॥ श्यामां शुभ्रां सुफालां त्रिकमलनयनां रत्नसिंहासनस्थांभक्ताभीष्टप्रदात्रीं सुरनीकरकरासेव्यकञ्जाङ्घ्रियुग्माम् ।नीलाम्भोजातकान्तिं निशिचरनिकरारण्यदावाग्निरूपांमातङ्गीमावहन्तीमभिमतफलदां मोदिनीं चिन्तयामि ॥ ७ ॥ नमस्ते मातङ्ग्यै मृदुमुदिततन्वै तनुमतांपरश्रेयोदायै कमलचरणध्यानमनसां ।सदा संसेव्यायै सदसि विबुधैर्दिव्यधिषणैःदयार्द्रायै देव्यै दुरितदलनोद्दण्ड मनसे ॥ ८ ॥ परं मातस्ते यो जपति मनुमेवोग्रहृदयःकवित्वं कल्पानां कलयति सुकल्पः प्रतिपदम् ।अपि प्रायो रम्याऽमृतमयपदा तस्य ललितानटी चाद्या वाणी नटन रसनायां च फलिता ॥ ९ ॥ तव ध्यायन्तो ये वपुरनुजपन्ति प्रवलितंसदा मन्त्रं मातर्नहि भवति तेषां परिभवः ।कदम्बानां माल्यैरपि शिरसि युञ्जन्ति यदि येभवन्ति प्रायस्ते युवतिजनयूथस्ववशगाः ॥ १० ॥ सरोजैः साहस्रैः सरसिजपदद्वन्द्वमपि येसहस्रं नामोक्त्वा तदपि च तवाङ्गे मनुमितं ।पृथङ्नाम्ना तेनायुतकलितमर्चन्ति प्रसृतेसदा देवव्रातप्रणमितपदाम्भोजयुगलाः ॥ ११ ॥ तव प्रीत्यैर्मातर्ददति बलिमादाय सलिलंसमत्स्यं मांसं वा सुरुचिरसितं राजरुचितम् ।सुपुण्यायै स्वान्तस्तव चरणप्रेमैकरसिकाःअहो भाग्यं तेषां त्रिभुवनमलं वश्यमखिलम् ॥ १२ ॥ लसल्लोलश्रोत्राभरणकिरणक्रान्तिललितंमितस्मेरज्योत्स्नाप्रतिफलितभाभिर्विकरितं ।मुखाम्भोजं मातस्तव परिलुठद्भ्रूमधुकरंरमा ये ध्यायन्ति त्यजति न हि तेषां सुभवनम् ॥ १३ ॥ परः श्रीमातङ्ग्या जपति हृदयाख्यः सुमनसाम्-अयं सेव्यः सुद्योऽभिमतफलदश्चातिललितः ।नरा ये शृण्वन्ति स्तवमपि पठन्तीममनुनिशंन तेषां दुष्प्राप्यं जगति यदलभ्यं दिविषदाम् ॥ १४ ॥ धनार्थी धनमाप्नोति दारार्थी सुन्दरीः प्रियाः ।सुतार्थी लभते पुत्रं स्तवस्यास्य प्रकीर्तनात् ॥ १५ ॥ विद्यार्थी लभते विद्यां विविधां विभवप्रदां ।जयार्थी पठनादस्य जयं प्राप्नोति निश्चितम् ॥ १६ ॥ नष्टराज्यो लभेद्राज्यं सर्वसम्पत्समाश्रितं ।कुबेरसमसम्पत्तिः स भवेद्धृदयं पठन् ॥ १७ ॥ किमत्र बहुनोक्तेन यद्यदिच्छति मानवः ।मातङ्गीहृदयस्तोत्रपठनात्सर्वमाप्नुयात् ॥ १८ ॥ ॥ इति श्री दक्षिणामूर्तिसंहितायां Matangi Hridaya Stotra मातंगी हृदय स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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मातंगी स्तोत्र:Matangi Stotra

मातंगी स्तोत्र:Matangi Stotra Matangi Stotra:नमामि वरदां देवीं सुमुखीं सर्वसिद्धिदाम् ।सूर्यकोटिनिभां देवीं वह्निरूपां व्यवस्थिताम् ॥ १ ॥ रक्तवस्त्र नितम्बां च रक्तमाल्योपशोभिताम् ।गुंजाहारस्तनाढ्यान्तां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ २ ॥ मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनाकर्ष दायिनी ।मुण्ड कर्त्रिं शरावामां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ३ ॥ स्वयम्भुकुसुम प्रीतां ऋतुयोनिनिवासिनीम् ।शवस्थां स्मेरवदनां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ४ ॥ रजस्वला भवेन्नित्यं पूजेष्टफलदायिनी ।मद्यप्रियं रतिमयीं परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ५॥ शिवविष्णुविरञ्चीनां साद्यां बुद्धिप्रदायिनीम् ।असाध्यं साधिनीं नित्यां परंज्योतिस्वरूपिणीम् ॥ ६॥ रात्रौ पूजा बलियुतां गोमांस रुधिरप्रियाम् ।नानाऽलङ्कारिणीं रौद्रीं पिशाचगणसेविताम् ॥ ७ ॥ इत्यष्टकं पठेद्यस्तु ध्यानरूपां प्रसन्नधीः ।शिवरात्रौ व्रतेरात्रौ वारूणी दिवसेऽपिवा ॥ ८ ॥ पौर्णमास्याममावस्यां शनिभौमदिने तथा ।सततं वा पठेद्यस्तु तस्य सिद्धि पदे पदे ॥ ९ ॥ ॥ एकजटा कल्पलतिका शिवदीक्षायान्तर्गतम् मातंगी स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Sapne Mai Suar Dekhna:सपने में सफेद सूअर को देखना, सफेद गंदा सूअर देखना, बहुत सारे सूअर देखना, जंगली सूअर

Sapne Mai Suar Dekhna:दोस्तों हमरे जीवन में बहुत से जीव ऐसे है जिनके बारे में हम बिना जाने उस जीव से घृणा करते है । और वो जीव हमारे लिए बहुत ज्यादा फायदेमंद होता है, जैसे सूअर को हम घृणा की नजर से देखते है ,हम सुनते आए है की सूअर अशुभ जानवर है । लेकिन बतादूँ दोस्तों भगवान की बनाई हुई कोई भी चीज अशुभ या अनुपयोगी नहीं होती है । सूअर गंदगी को खतम करने वातावरण को शुद्ध बनाता है। सूअर को बदनामी का  मिला हुआ है । ये शब्द बहुत बार इंसान की लिए भी काम में लिया जाता है । जब कोई इंसान खाना खाता है वह खाने को चारों और बिखेर देता है अपने पूरे शरीर पर खाना बिखेर लेता है तब हम उसे सूअर की उपमा देते है और कहते है, कैसे सूअर की तरह खाना खा रहा है । किसी आलसी आदमी को हम सूअर नाम से संबोधित करते है ।बात करते है, सपने की तो दोस्तों सपने में सूअर देखना स्व्पनशास्त्र के अनुसार शुभ संकेत नहीं माना जाता है, सपने में सूअर देखना बुरे लोगों के साथ दोस्ती का संकेत देता है ।  सपने में सूअर देखना sapne mai suar dekhna यदि आप अपने सपने में किसी सूअर को देखते है तो ये सपना आपके लिए अशुभ माना जाता है । Sapne Mai Suar Dekhna स्व्पनशास्त्र के सानुसार सपने में सूअर देखना इस बात का संकेत देता है की आने वाले दिनों में आप किसी बुरे और बदनामी वाले संकट में फसने वाले है । या आने वाले समय में आपकी जिंदगी में बहुत बुरे लोगों का प्रवेश होने वाला है । और वो बुरे लोग आपकी आपके जीवन को बहुत ही ज्यादा कठिन बनाने वाले है । इस प्रकार अगर सपने में सूअर देखना बहुत बड़ी परेसानी का न्योता देता है । अगर सपने में आप अपने बेडरूम में सूअर की तस्वीर लगाते हुए देखते है तो ये सपना आपके मन के अंदर आने वाले बुरे विचारों की और संकेत करता है । ये सपना बताता है की आने वाले समय में आपकी बूढ़ी भ्रष्ट होने वाली है, जिसके कारण आपके चरित्र में दाग लग सकते है । सपने में सफ़ेद सूअर देखना Sapne me white suar dekhna यदि हम सपने में सफेद सुअर देखते हैं तो इसका अर्थ है कि आने वाला समय बहुत ही अच्छा गुजरने वाला है। Sapne Mai Suar Dekhna अर्थात यह एक बहुत ही शुभ सपना है। यह हमारे अच्छे स्वास्थ की तरफ इशारा करता है। जिसका मतलब है कि जो भी बीमारी अथवा कुछ चिंताएं हमें काफ़ी समय से परेशान कर रही हैं वह बहुत जल्द दूर होने वाली है। और आने वाले समय में आप शारीरिक रूप में बहुत ज्यादा मजबूत होने वाले हैं। सफेद सुअर को सहलाते हुए देखना Sapne Mai Suar Dekhna यदि आप सफेद सूअर को अपने हाथों से सहलाते हुए देखते हैं तो यह बहुत ही अच्छा सपना है। इसका यह अर्थ है कि आने वाले समय में आप आर्थिक रूप से भी मजबूत होने वाले हैं। क्योंकि कई धर्मों में सुअर को बहुत ज्यादा शुभ माना जाता है। Sapne Mai Suar Dekhna अतः यह एक बहुत ही शुभ सपना है जो हर दृष्टिकोण से आपके संबल को मजबूत करने का कार्य करेगा। दूसरी तरफ यदि आप सपने में सफेद सुअर देखते हैं तो इसका यह अर्थ है कि आपका भाग्य बहुत अच्छा होने वाला है। यह आपके भाग्य में कुछ बहुत ही बढ़िया चीज लिखी हुई है जो आपको मिलने वाली है। सपने में सूअर को देखना भाग्य से जोड़कर देखा जाता है। सपने में सुअर का बच्चा देखना यदि आप सपने में सुअर का बच्चा देखते है तो इसका मतलब है Sapne Mai Suar Dekhna की आप को भविष्य में कोई छोटा मोटा लाभ हो सकता है। या कोई कार्य काफ़ी समय से नहीं हो रहा है वो बहुत जल्द हो सकता है। यह सपना जीवन में छोटी छोटी खुशियों के दस्तक देने की तरफ भी इशारा करता है। सपने में सुअर को मारना Sapne Me Suar Ko Marna Sapne Mai Suar Dekhna यदि आप कोई ऐसा सपना देखते हो जिसमें आप सब के सूअर को मार रहे हैं तो यह अच्छा सपना नहीं है क्योंकि सफेद सूअर को भाग्य से जोड़कर या धन से जोड़कर देखा जाता है नशे में यदि आप सपने में उसे मारता हुआ देख रहे हैं तो आप अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने वाले हैं अर्थात भविष्य में आप ऐसा कार्य करने वाले हैं जिससे आपको हानि हो सकती है ऐसा कोई भी कार्य करने से बचें जिसमें बहुत ज्यादा रिस्क हो। सपने में सफेद गंदा सूअर देखना यदि आप सपने में सफेद सूअर को कीचड़ में हुआ या फिर मल खाते हुआ देखते हैं तो इसका यह अर्थ है Sapne Mai Suar Dekhna कि आने वाले समय में आपको किसी तरह की कोई बेज्जती झेलनी पड़ सकती है। या आपके द्वारा किए गए कार्य को समाज अप्रिशिएट नहीं करेगा। आपके किसी कार्य को लेकर आपकी इज्ज़त पर दाग लग सकता है।

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Vat Savitri 2025 in UP:पहली बार रख रही हैं वट सावित्री व्रत ? तो यहां जानें पूजा विधि से लेकर संपूर्ण सामग्री

Vat Savitri 2025 in UP:इस साल 26 मई 2025 को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। आप पहली बार वट सावित्री व्रत रखने वाली हैं तो आपको वट सावित्री व्रत के पूजन सामग्री, पूजा मुहूर्त, कथा, पूजन की विधि आदि के बारे में सही से जानना चाहिए. इसके बारे में केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं विस्तार से. Vat Savitri Vrat 2025: वट सावित्री हिंदू धर्म का प्रमुख त्योहार है, जिसे हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन मुख्य रूप से बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है। Vat Savitri 2025 in UP इसके अलावा सुहागिनें पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और तरक्की के लिए निर्जला उपावस भी रखती है। मान्यता है कि इसी दिन देवी सावित्री ने अपनी कठोर तपस्या से पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे। इसलिए इस तिथि पर उनकी पूजा और त्याग का स्मरण किया जाता है। यदि वट सावित्री के दिन सच्चे भाव से वट वृक्ष की उपासना की जाए, तो वैवाहिक जीवन सुखमय और रिश्तों में प्रेम बढ़ता है। भारत में हर साल इस व्रत को बड़े प्रेम और उल्लास के साथ मनाया जाता है। Vat Savitri 2025 in UP हालांकि इसकी खास रौनक उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में देखने को मिलती है। यहां सभी महिलाएं एकजुट होकर वट वृक्ष की पूजा करते हुए कथा सुनती हैं। Vat Savitri 2025 in UP इसे बड़मावस, बरगदाही और वट अमावस्या भी कहते हैं। इस साल 26 मई 2025 को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। ऐसे में आइए इस दिन की पूजा विधि और सामग्री के बारे में विस्तार से जानते हैं। Vat Savitri 2025 in UP Vrat ki Puja Samagri List वट सावित्री व्रत की पूजा सामग्री लिस्ट 1. रक्षा सूत्र, कच्चा सूत,2. बरगद का फल, बांस का बना पंखा,3. कुमकुम, सिंदूर, फल, फूल, रोली, चंदन4. अक्षत्, दीपक, गंध, इत्र, धूप5. सुहाग सामग्री, सवा मीटर कपड़ा, बताशा, पान, सुपारी6. सत्यवान, देवी सावित्री की मूर्ति7. वट सावित्री व्रत कथा और पूजा विधि की पुस्तक8. पानी से भरा कलश, नारियल, मिठाई, मखाना आदि9. घर पर बने पकवान, भींगा चना, मूंगफली, पूड़ी, गुड़,10. एक वट वृक्ष वट सावित्री व्रत की पूजा विधि Vat Savitri Vrat Ki Puja Vidhi वट सावित्री के दिन महिलाएं सुबह स्नान करें। फिर साफ लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनें। इस दौरान पूरा सोलह श्रृंगार अवश्य करें। अब वट वृक्ष के पास सावित्री और सत्यवान की तस्वीर को स्थापित कर दें। इसके बाद वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें। कुछ ताजा फूल चढ़ाएं। अक्षत, भीगा चना व गुड़ अर्पित करें। अब आप वट के वृक्ष पर सूत लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करें। परिक्रमा पूरी करने के बाद वृक्ष का प्रणाम करें।  अब हाथ में चने लेकर वट सावित्री की कथा पढ़ें।  अंत में फल और वस्त्रों का दान करें और पूजा में हुई भूल की क्षमा मांगे। वट सावित्री व्रत कथा Vat Savitri Vrat Katha स्कंद पुराण में वट सावित्री व्रत की कथा के बारे में वर्णन मिलता है, Vat Savitri 2025 in UP जिसमें देवी सावित्री के पतिव्रता धर्म के बारे में बताया गया है. देवी सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था, लेकिन वे अल्पायु थे. एक बार नारद जी ने इसके बारे में देवी सावित्री को बता दिया और उनकी मृत्यु का दिन भी बता दिया. सावित्री अपने पति के जीवन की रक्षा के लिए व्रत करने लगती हैं. वे अपने पति, सास और सुसर के साथ जंगल में रहती थीं. जिस दिन सत्यवान के प्राण निकलने वाले थे, उस दिन वे जंगल में लकड़ी काटने गए थे, तो उनके साथ सावित्री भी गईं. उस दिन सत्यवान के सिर में तेज दर्द होने लगा और वे वहीं पर बरगद के पेड़ के नीचे लेट गए. Vat Savitri 2025 in UP देव सावित्री ने पति के सिर को गोद में रख लिया. कुछ समय में यमराज वहां आए और सत्यवान के प्राण हरकर ले जाने लगे. उनके पीछे-पीछे सावित्री भी चल दीं. यमराज ने उनको समझाया कि सत्यवान अल्पायु थे, इस वजह से उनका समय आ गया था. Vat Savitri 2025 in UP तुम वापस घर चली जाओ. पृथ्वी पर लौट जाओ. लेकिन सावित्री नहीं मानीं. उनके पतिव्रता धर्म से खुश होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए, जिससे सत्यवान फिर से जीवित हो उठे. ज्येष्ठ अमावस्य तिथि को यह घटनाक्रम हुआ था और अपने पतिव्रता धर्म के लिए देवी सावित्री प्रसिद्ध हो गईं. उसके बाद से ज्येष्ठ अमावस्य को ज्येष्ठ देवी सावित्री की पूजा की जाने लगी. वट वृक्ष में त्रिदेव का वास होता है और सत्यवान को वट वृक्ष के नीचे ही जीवनदान मिला था. इस वज​​ह से इस व्रत में वट वृक्ष, सत्यवान और देवी सावित्री की पूजा करते हैं.

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