Dhumavati Jayanti 2025 Date:धूमावती जयंती कब है? सातवीं महाविद्या की पूजा से दरिद्रता होगी दूर,ये 7 मंत्र गरीबी को करेंगे दूर

Dhumavati Jayanti 2025 Date: ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी तिथि को मां धूमावती की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए हर साल ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी को धूमावती जयंती मनाते हैं. मां धूमावती की पूजा और व्रत करने से दुख और दरिद्रता का नाश होता है, धन-वैभव में बढ़ोत्तरी होती है. तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानते हैं कि धूमावती जयंती कब है? धूमावती जयंती का मुहूर्त क्या है? Dhumavati Jayanti 2025 Date: देवी धूमावती 10 महाविद्याओं में से 7वीं महाविद्या हैं. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, मां धूमावती की उत्पत्ति ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था, इस वजह से हर साल इस तिथि को धूमावती जयंती मनाई जाती है. इस बार धूमावती जयंती पर रवि योग और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है. उस दिन रवि योग निशिता मुहूर्त में बनेगा. इस दिन जो व्यक्ति व्रत रखकर मां धूमावती की पूजा करता है, तो उनकी कृपा से दरिद्रता मिटती है, धन और वैभव की प्राप्ति होती है. धूमावती जयंती 2025 तारीख Dhumavati Jayanti 2025 Date Dhumavati Jayanti देवी धूमावती की पूजा करने वाले व्यक्ति को केतु से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है. इस देवी के आशीर्वाद से सभी प्रकार के संकट और बाधाएं दूर होती हैं. जो अति दरिद्र है, उसे मां धूमावती की पूजा जरूर करनी चाहिए. दृक पंचांग के आधार पर देख जाए तो धूमावती जयंती के लिए आवश्यक ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी ति​थि 2 जून सोमवार को रात 8 बजकर 34 मिनट से प्रारंभ होगी. इस अष्टमी ति​थि का समापन 3 जून दिन मंगलवार को रात 9 बजकर 56 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयाति​थि के आधार पर धूमावती जयंती 3 जून मंगलवार को मनाई जाएगी. धूमावती जयंती 2025 मुहूर्त Dhumavati Jayant 2025 Muhurat 3 जून को Dhumavati Jayanti धूमावती जयंती के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त 04:02 ए एम से 04:43 ए एम तक है. उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:52 ए एम से दोपहर 12:47 पी एम तक है. लाभ-उन्नति मुहूर्त 10:35 ए एम से 12:19 पी एम और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 12:19 पी एम से 02:03 पी एम तक है. उस दिन का निशिता मुहूर्त रात 11:59 पी एम से देर रात 12:40 ए एम तक है. रवि योग में धूमावती जयंती 2025 Ravi yog Me Dhumavati Jayant धूमावती जयंती Dhumavati Jayanti पर रवि योग बन रहा है. रवि योग देर रात 12 बजकर 58 मिनट पर बनेगा और वह अगले दिन 04 जून को सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक रहेगा. इसके अलावा हर्षण योग प्रात:काल से सुबह 08 बजकर 09 मिनट तक रहेगा. फिर वज्र योग बनेगा. उस दिन पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र देर रात 12:58 ए एम तक है, फिर उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है. कौन हैं देवी धूमावती? Koun hai Devi Dhumavati पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी धूमावती का संबंध 10 महाविद्याओं से है. वे सातवीं महाविद्या हैं. धन, वैभव, सुख, समृद्धि के साथ दरिद्रता को दूर करने के लिए देवी धूमावती की पूजा करते हैं. तंत्र साधना में मारण और उच्चाटन के लिए Dhumavati Jayanti देवी धूमावती की पूजा करते हैं. इनकी कृपा से केतु से संबंधित दोष और संकट मिटते हैं. जिस पर देवी धूमावती की कृपा होती है, उसे केतु परेशान नहीं करता है. शत्रुओं पर विजय के लिए भी इनकी पूजा करते हैं. रोग, दोष और कष्ट मिटते हैं. कैसे हुई देवी धूमावती की उत्पत्ति Kaise Huyi Devi Dhumavati Ki Utpati कथा के अनुसार, माता पार्वती और भगवान शिव कैलाश पर्वत पर भ्रमण कर रहे थे. उसी समय माता पार्वती को भूख लग गई. उन्होंने शिव जी से भोजन के लिए कहा. तो भोलेनाथ ने उनको कुछ समय प्रतीक्षा करने के लिए बोला. देखते ही देखते माता पार्वती की भूख इतनी बढ़ गई कि उन्होंने शिव जी को ही निगल गईं. शिव जी के अंदर विष का प्रभाव है, उसका असर माता पार्वती पर होने लगा, जिससे उनका शरीर धूएं के समान विकृत हो गया. माता पार्वती का यह स्वरूप देवी धूमावती के रूप में प्रसिद्ध हुआ. एक कथा यह भी है कि जब देवी सती ने अपने पिता के यज्ञ में अपने शरीर को जला दिया तो उसके धुएं से देवी धूमावती की उत्पत्ति हुई. देवी धूमावती कुमारी हैं. युद्ध में उनको कोई हरा नहीं सका, इसलिए उन्होंने विवाह नहीं किया. उनके विवाह की शर्त थी कि जो युद्ध में उनको परास्त करेगा, उससे ही विवाह करेंगी. धूमावती स्वरूप वर्णन Dhumavati Swaroop Bardan देवी धूमावती Dhumavati Jayanti को एक वृद्ध और कुरूप विधवा स्त्री के रूप में दर्शाया जाता है। अन्य महाविद्याओं के समान वह कोई आभूषण धारण नहीं करती हैं। वह पुराने और मलिन वस्त्र धारण करती हैं। इनके केश पूर्णतः अव्यवस्थित रहते हैं। Dhumavati Jayanti इन्हें दो भुजाओं के साथ चित्रित किया गया है। देवी अपने कम्पित हाथों में, एक सूप रखती हैं और उनका अन्य हाथ वरदान मुद्रा अथवा ज्ञान प्रदायनी मुद्रा में होता है। वह एक बिना अश्व के रथ पर सवारी करती हैं, जिसके शीर्ष पर ध्वज और प्रतीक के रूप में कौआ विराजमान रहता है। धूमावती मूल मंत्र Dhumavati mool mantra ॐ धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा॥ माता धूमावती के अन्य मंत्र 1. मां धूमावती सप्ताक्षर मंत्र धूं धूमावती स्वाहा॥ 2. मां धूमावती अष्टक्षर मंत्र धूं धूं धूमावती स्वाहा॥ 3. मां धूमावती दशाक्षर मंत्र धूं धूं धूं धूमावती स्वाहा॥ 4. मां धूमावती चतुर्दशाक्षर मंत्र धूं धूं धुर धुर धूमावती क्रों फट् स्वाहा॥ 5. मां धूमावती पंचदशाक्षर मंत्र ॐ धूं धूमावती देवदत्त धावति स्वाहा॥ 6. धूमावती गायत्री मंत्र ॐ धूमावत्यै विद्महे संहारिण्यै धीमहि तन्नो धूमा प्रचोदयात्॥

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Mahakal Shani Mrityunjay Stotra:महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र

Mahakal Shani Mrityunjay Stotra:महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र (महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र): किसी जीव का अमर होना असंभव है, लेकिन किसी व्यक्ति की अकाल मृत्यु, नश्वरता को दूर करने में व्यक्ति की एक अलौकिक क्षमता होती है। शनि देव शारीरिक, मानसिक कष्ट के शमन के आधिकारिक स्रोत हैं। आशुतोष शिव जी ने भक्तों के कल्याण के लिए देवी पार्वती के अनुरोध पर, आशुतोष शिव जी ने महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र प्रदान किया और कहा कि नियमित रूप से भक्ति के साथ महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करने से शनि देव सभी रोगों पर कृपा करते हैं। ‘मृत्यु का कारण’ शब्द मृत्यु पर विजय का अर्थ है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra किसी व्यक्ति का अमर होना असंभव है, लेकिन किसी व्यक्ति की मृत्यु पर एक अलौकिक क्षमता होती है। शनि देव शारीरिक, मानसिक कष्ट के शमन के आधिकारिक स्रोत हैं। भक्तों के कल्याण के लिए माता पार्वती के आग्रह पर आशुतोष शिव जी ने महाकाल को शनि मृत्युंजय स्तोत्र सुनाया और कहा कि, Mahakal Shani Mrityunjay Stotra इसका पाठ करने से शनि प्रसन्न होकर समस्त रोगों की पीड़ा दूर कर देते हैं। वह सुख, धन और संतान का भोग करता है तथा अकाल और अपमान से भयभीत हुए बिना पाप रहित हो जाता है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra अंत में शनिदेव की कृपा से वह सत्मार्ग का अनुगामी बन जाता है। आशा है पीड़ित लोग इसका लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित होंगे। यह न केवल सांसारिक सुखों की प्राप्ति बल्कि पारिवारिक सुख की प्राप्ति का भी अनुकरणीय है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra यदि विद्यार्थी या विद्वान व्यक्ति कम से कम 11 स्तोत्र का पाठ करें और ब्राह्मणों को भोजन कराएं तो धन-धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra Ke Labh महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र के लाभ महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का नियमित पाठ करने से व्यक्ति अकाल मृत्यु, शारीरिक कष्ट, मानसिक क्लेश, सुख, धन, संतान सुख आदि से बच जाता है।महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र से शनि को प्रसन्न किया जा सकता है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करना लाभदायक होता है। नियमित 11 बार पाठ करने से व्यक्ति को सुख, धन, समृद्धि, पारिवारिक सुख, धन, संतान और विजय की प्राप्ति होती है। Mahakal Shani Mrityunjay Stotra Kisko Karna Chahiye:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ Mahakal Shani Mrityunjay Stotra जीवन में असफलता के कारण तनाव में रहने वाले व्यक्ति को इस स्थिति से उबरने के लिए नियमित रूप से Mahakal Shani Mrityunjay Stotra महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। महाकाल शनि मृत्युंजय स्तोत्र हिंदी पाठ Mahakal Shani Mrityunjay Stotra in Hindi Mahakal Shani Mrityunjay Stotra विनियोग:- ॐ अस्य श्री महाकाल शनि मृत्युञ्जय स्तोत्र मन्त्रस्य पिप्लाद ऋषिरनुष्टुप्छन्दो महाकाल शनिर्देवता शं बीजं मायसी शक्तिः काल पुरुषायेति कीलकं मम अकाल अपमृत्यु निवारणार्थे पाठे विनियोगः । श्री गणेशाय नमः । Mahakal Shani Mrityunjay Stotra ॐ महाकाल शनि मृत्युंजयाय नमः नीलाद्रीशोभाञ्चितदिव्यमूर्तिः खड्गो त्रिदण्डी शरचापहस्तः ।शम्भुर्महाकालशनिः पुरारिर्जयत्यशेषासुरनाशकारी ॥ 1 ॥ मेरुपृष्ठे समासीनं सामरस्ये स्थितं शिवम्‌ ।प्रणम्य शिरसा गौरी पृच्छतिस्म जगद्धितम्‌ ॥ 2 ॥ ॥ पार्वत्युवाच ॥ भगवन्‌ ! देवदेवेश ! भक्तानुग्रहकारक ! ।अल्पमृत्युविनाशाय यत्त्वया पूर्व सूचितम्‌ ॥ 3 ॥ तदेवत्वं महाबाहो ! लोकानां हितकारकम्‌ ।तव मूर्ति प्रभेदस्य महाकालस्य साम्प्रतम्‌ ॥ 4 ॥ शनेर्मृत्युञ्जयस्तोत्रं ब्रूहि मे नेत्रजन्मनः ।अकाल मृत्युहरणमपमृत्यु निवारणम्‌ ॥ 5 ॥ शनिमन्त्रप्रभेदा ये तैर्युक्तं यत्स्तवं शुभम्‌ ।प्रतिनाम चथुर्यन्तं नमोन्तं मनुनायुतम्‌ ॥ 6 ॥ ॥ श्रीशंकर उवाच ॥ नित्ये प्रियतमे गौरि सर्वलोक-हितेरते ।गुह्याद्गुह्यतमं दिव्यं सर्वलोकोपकारकम्‌ ॥ 7 ॥ शनिमृत्युञ्जयस्तोत्रं प्रवक्ष्यामि तवऽधुना ।सर्वमंगलमांगल्यं सर्वशत्रु विमर्दनम्‌ ॥ 8 ॥ सर्वरोगप्रशमनं सर्वापद्विनिवारणम्‌ ।शरीरारोग्यकरणमायुवरिद्द्धकरं नृणाम्‌ ॥ 9 ॥ यदि भक्तासि मे गौरी गोपनीयं प्रयत्नतः ।गोपितं सर्वतन्त्रेषु तच्छ्रणुष्व महेश्वरी ! ॥ 10 ॥ ऋषिन्यासं करन्यासं देहन्यासं समाचरेत्‌ ।महोग्रं मूर्घ्नि विन्यस्य मुखे वैवस्वतं न्यसेत्‌ ॥ 11 ॥ गले तु विन्यसेन्मन्दं बाह्वोर्महाग्रहं न्यसेत्‌ ।हृदि न्यसेन्महाकालं गुह्ये कृशतनुं न्यसेत्‌ ॥ 12 ॥ जान्वोम्तूडुचरं न्यस्य पादयोस्तु शनैश्चरम् ।एवं न्यासविधि कृत्वा पश्चात्‌ कालात्मनः शनेः ॥ 13 ॥ न्यासं ध्यानं प्रवक्ष्यामि तनौ श्यार्वा पठेन्नरः ।कल्पादियुगभेदांश्च करांगन्यासरुपिणः ॥ 14 ॥ कालात्मनो न्यसेद् गात्रे मृत्युञ्जय ! नमोऽस्तु ते ।मन्वन्तराणि सर्वाणि महाकालस्वरुपिणः ॥ 15 ॥ भावयेत्प्रति प्रत्यंगे महाकालाय ते नमः ।भावयेत्प्रभवाद्यब्दान्‌ शीर्षे कालजिते नमः ॥ 16 ॥ नमस्ते नित्यसेव्याय विन्यसेदयने भ्रुवोः ।सौरये च नमस्तेऽतु गण्डयोर्विन्यसेदृतून्‌ ॥ 17 ॥ श्रावणं भावयेदक्ष्णोर्नमः कृष्णनिभाय च ।महोग्राय नमो भार्दं तथा श्रवणयोर्न्यसेत्‌ ॥ 18 ॥ नमो वै दुर्निरीक्ष्याय चाश्विनं विन्यसेन्मुखे ।नमो नीलमयूखाय ग्रीवायां कार्तिकं न्यसेत्‌ ॥ 19 ॥ मार्गशीर्ष न्यसेद्-बाह्वोर्महारौद्राय ते नमः ।ऊर्द्वलोक-निवासाय पौषं तु हृदये न्यसेत्‌ ॥ 20 ॥ नमः कालप्रबोधाय माघं वै चोदरेन्यसेत्‌ ।मन्दगाय नमो मेढ्रे न्यसेर्द्वफाल्गुनं तथा ॥ 21 ॥ ऊर्वोर्न्यसेच्चैत्रमासं नमः शिवोस्भवाय च ।वैशाखं विन्यसेज्जान्वोर्नमः संवर्त्तकाय च ॥ 22 ॥ जंघयोर्भावयेज्ज्येष्ठं भैरवाय नमस्तथा ।आषाढ़ं पाद्योश्चैव शनये च नमस्तथा ॥ 23 ॥ कृष्णपक्षं च क्रूराय नमः आपादमस्तके ।न्यसेदाशीर्षपादान्ते शुक्लपक्षं ग्रहाय च ॥ 24 ॥ नयसेन्मूलं पादयोश्च ग्रहाय शनये नमः ।नमः सर्वजिते चैव तोयं सर्वांगुलौ न्यसेत्‌ ॥ 25 ॥ न्यसेद्-गुल्फ-द्वये विश्वं नमः शुष्कतराय च ।विष्णुभं भावयेज्जंघोभये शिष्टतमाय ते ॥ 26 ॥ जानुद्वये धनिष्ठां च न्यसेत्‌ कृष्णरुचे नमः ।ऊरुद्वये वारुर्णांन्यसेत्कालभृते नमः ॥ 27 ॥ पूर्वभाद्रं न्यसेन्मेढ्रे जटाजूटधराय च ।पृष्ठउत्तरभाद्रं च करालाय नमस्तथा ॥ 28 ॥ रेवतीं च न्यसेन्नाभो नमो मन्दचराय च ।गर्भदेशे न्यसेद्दस्त्रं नमः श्यामतराय च ॥ 29 ॥ नमो भोगिस्त्रजे नित्यं यमं स्तनयुगे न्यसेत्‌ ।न्येसत्कृत्तिकां हृदये नमस्तैलप्रियाय च ॥ 30 ॥ रोहिणीं भावयेद्धस्ते नमस्ते खड्गधारीणे ।मृगं न्येसतद्वाम हस्ते त्रिदण्डोल्लसिताय च ॥ 31 ॥ दक्षोर्द्ध्व भावयेद्रौद्रं नमो वै बाणधारिणे ।पुनर्वसुमूर्द्ध्व नमो वै चापधारिणे ॥ 32 ॥ तिष्यं न्यसेद्दक्षबाहौ नमस्ते हर मन्यवे ।सार्पं न्यसेद्वामबाहौ चोग्रचापाय ते नमः ॥ 33 ॥ मघां विभावयेत्कण्ठे नमस्ते भस्मधारिणे ।मुखे न्यसेद्-भगर्क्ष च नमः क्रूरग्रहाय च ॥ 34 ॥ भावयेद्दक्षनासायामर्यमाणश्व योगिने ।भावयेद्वामनासायां हस्तर्क्षं धारिणे नमः ॥ 35 ॥ त्वाष्ट्रं न्यसेद्दक्षकर्णे कृसरान्न प्रियाय ते ।स्वातीं न्येसद्वामकर्णे नमो बृह्ममयाय ते ॥ 36 ॥ विशाखां च दक्षनेत्रे नमस्ते ज्ञानदृष्टये ।विष्कुम्भं भावयेच्छीर्षेसन्धौ कालाय ते नमः ॥ 37 ॥ प्रीतियोगं भ्रुवोः सन्धौ महामन्दं ! नमोऽस्तु ते ।नेत्रयोः सन्धावायुष्मद्योगं भीष्माय ते नमः ॥ 38 ॥ सौभाग्यं भावयेन्नासासन्धौ फलाशनाय च ।शोभनं भावयेत्कर्णे सन्धौ पिण्यात्मने नमः ॥ 39 ॥ नमः कृष्णयातिगण्डं हनुसन्धौ विभावयेत्‌ ।नमो निर्मांसदेहाय सुकर्माणं शिरोधरे ॥ 40 ॥ धृतिं न्यसेद्दक्षवाहौ पृष्ठे छायासुताय च ।तन्मूलसन्धौ शूलं च न्यसेदुग्राय ते नमः ॥ 41 ॥ तत्कूर्परे न्यसेदगण्डे नित्यानन्दाय ते नमः ।वृद्धिं तन्मणिबन्धे च कालज्ञाय नमो न्यसेत्‌ ॥ 42 ॥ ध्रुवं तद्ङ्गुली-मूलसन्धौ कृष्णाय ते नमः ।व्याघातं भावयेद्वामबाहुपृष्ठे कृशाय च ॥ 43 ॥ हर्षणं तन्मूलसन्धौ भुतसन्तापिने नमः ।तत्कूर्परे न्यसेद्वज्रं सानन्दाय नमोऽस्तु

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राधा गोविंद मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

यह मंदिर युगल राधा-कृष्ण को समर्पित मंदिर है। राधा गोविंद मंदिर:मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के निपानिया में स्थित है इस्क़ॉन राधा गोविंद मंदिर। यह मंदिर शहर से केवल 11 किलोमीटर की दूरी पर निर्मित भव्य मंदिर है। रविवार और विशेष त्योहार के दिनों में मंदिर में अधिक संख्या में भीड़ होती है। यह मंदिर युगल राधा-कृष्ण को समर्पित है। मंदिर का इतिहास राधा गोविंद मंदिर का इतिहास स्पष्ट नहीं है। इस मंदिर के निर्माण का कार्य सन् 2004 से अस्थायी रूप से शुरू हुआ था। साथ ही भव्य मंदिर के निकट, बड़ा गेस्टहाउस, थीम पार्क और गोविंदा रेस्तरां का निर्माण भी किया गया है। इसका भूमिपूजन 2014 में हुआ था। मंदिर का महत्व राधा गोविंद मंदिर के दर्शन करने से मन को आत्म शांति मिलती है। शांत वातावरण में बना यह मंदिर भक्तों को सुकून प्रदान करता है। त्योहारों के समय मंदिर में बहुत भीड़ रहती है। मंदिर में विशाल आयोजन किया जाता है। भगवान को छप्पन भोग लगाया जाता है। मंदिर के पास जो भोग और भोजन मिलता है वह सात्विक भोजन होता है। जो लोग दर्शन करने आते है वह यहाँ का प्रसाद जरूर खा कर जाते हैं। मंदिर की वास्तुकला मंदिर में पारंपरिक भारतीय मंदिर डिजाइनों से प्रेरित सुंदर वास्तुकला की गयी है। यह जटिल नक्काशी और जीवंत चित्रों से सुसज्जित है। मंदिर की वास्तुकला भारत की समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिकता को दर्शाता है। मंत्रमुग्ध कर देने वाली सुंदर राधा और कृष्ण की मूर्तियाँ पूर्ण रूप से संगमरमर से बनी हैं। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:30 AM – 01:00 PM शाम को मन्दिर खुलने का समय 04:15 PM – 09:00 PM मंगला आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM तुलसी आरती का समय 05:00 AM – 05:30 AM श्रृंगार आरती का समय 07:30 AM – 08:00 AM राजभोग आरती का समय 12:30 PM – 01:00 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 07:30 PM उत्थान आरती का समय 04:15 PM – 04:30 PM मंदिर का प्रसाद राधा गोविंद मंदिर चिरौंजी, माखन मिश्री, लड्डू, मिठाई आदि का भोग लगाया जाता है। साथ ही पुष्प भी अर्पित किए जाते हैं।

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Jyeshtha Masik Durga Ashtami Vrat 2025 Date:कब है ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी, नोट करले डेट टाइम, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व उपाय

Jyeshtha Masik Durga Ashtami Vrat:हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के भक्त उनकी पूजा करते हैं और पूरे दिन व्रत रखते हैं। हिंदू धर्म में इसका विशेष महत्व है, कहा जाता है कि मां दुर्गा के सभी रूपों की विधि-विधान से पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। मासिक दुर्गाष्टमी को मास दुर्गाष्टमी या मासिक दुर्गाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत के महत्व और मान्यताओं के बारे में: इसके अलावा यदि जो लोग मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा की पूजा करते है उनके द्वारा किये गए सभी पाप धुल जाते हैं और मन शुद्ध होता है। इस दिन देवी दुर्गा की पूजा करने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। Jyeshtha Masik Durga Ashtami मान्यता है कि मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा की सच्चे मन से पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। और ग्रहदोष से भी मुक्ति मिलती है। आईये जानते है साल 2025 में ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी कब मनाई जाएगी 02 या 03 जून, जानिए पूजा की सही तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और इस दिन किये जाने वाले उपाय ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी कब है 2025 Jyeshtha Durga Ashtami 2025 Date Muhurat Jyeshtha Masik Durga Ashtami हिंदी पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ मास की शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि प्रारम्भ होगी 02 जून 2025 को रात 08 बजकर 34 मिनट पर और ज्येष्ठ मास की दुर्गा अष्टमी तिथि समाप्त होगी 03 जून 2025 को रात 09 बजकर 56 मिनट पर इसलिए साल 2025 में ज्येष्ठ मासिक दुर्गा अष्टमी 03 जून दिन मंगलवार को मनाई जाएगी। दुर्गा अष्टमी पूजा विधि Durga Ashtami Puja Vidhi Jyeshtha Masik Durga Ashtami दुर्गा अष्टमी माता दुर्गा को समर्पित होती है। इसलिए ज्येष्ठ मासिक दुर्गाष्टमी के दिन व्रती सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करे। और व्रत का संकल्प लें इसके बाद पूजा के स्थान को स्वच्छ करें और माता दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद माता दुर्गा के समक्ष धूप, दीप प्रज्वलित करें और माता दुर्गा को फल, फूल, मिठाई आदि अर्पित करें। और माता दुर्गा का ध्यान करें और माता दुर्गा के मंत्रों का जाप करें. इसके Jyeshtha Masik Durga Ashtami अलावा दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसके बाद कलश का जल पूरे घर में छिड़कें और प्रसाद ग्रहण करने से पहले माता दुर्गा को अर्पित करें। और फिर पूजा समाप्त होने के बाद किसी गरीबों व्यक्ति या किसी और जरूरतमंद लोगों को दान करे। दुर्गा अष्टमी उपाय Durga Asthami Upay यदि आप जीवन की परेशानियों से छुटकारा पाना चाहते है तो मासिक दुर्गाष्टमी के दिन माता दुर्गा को हलवा और उबले हुए चने का भोग लगाएं। और साथ ही 6 सफेद कौड़ियां लेकर उन्हें लाल कपड़े में बांधकर माता दुर्गा के मंदिर में ले जाकर चढ़ाये। Jyeshtha Masik Durga Ashtami यदि आप कौड़ियां ना ले पायें तो 6 कपूर और 36 लौंग लेकर माता दुर्गा को चढ़ाएं। आप की सभी मनोकामना पूरी होगी। यदि आप धन की समस्या से परेशान हैं धन रुकता नही है, तो इसके लिए अष्टमी तिथि के दिन पान के पत्ते पर चंदन से ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे लिखकर माता दुर्गा के चरणों में अर्पित करें। और अगले दिन इस पान के पत्तों को अपनी तिजोरी में रख लें। Jyeshtha Masik Durga Ashtami ऐसा करने से आपको अपनी आर्थिक स्थिति में लाभ मिलेगा। दुर्गा अष्टमी के दिन माता दुर्गा के समक्ष देसी घी का दीपक जलाने के बाद इस मंत्र या देवी सर्व भूतेषु विद्या रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।। का 11 बार जप करने से बच्चे के कैरियर में उन्नति होगी दुर्गा अष्टमी पर ना करे ये काम Jyeshtha Masik Durga Ashtami Per Na kare Ye kaam माता दुर्गा की पूजा में तुलसी, आंवला, दूर्वा, मदार, आक के फूल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। बल्कि पूजा के दौरान माता दुर्गा की एक ही तस्वीर रखनी चाहिए। दुर्गा पूजा के दौरान तामसिक चीजो का सेवन नही करना चाहिए। Shri Durga 108 Name:श्री दुर्गा के 108 नाम Shri Durga 32 Name:माँ दुर्गा के 32 नाम सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम् (Saptashloki Durga Stotra) दुर्गा चालीसा (Durga Chalisa)

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Jamai Sasthi 2025 Date : बंगाल के जमाई षष्ठी के बारे में ये बातें आपको हैरान कर देगी

Jamai Sasthi:भारत एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध देश है। यहां कई अद्भुत त्यौहार मनाए जाते हैं। जितने राज्य हैं, उतनी हीं भाषाएं है, उतनी ही जाति है, उतने ही धर्म है और सभी के उतने ही रिवाज और रस्में हैं। कई तो ऐसे भी त्यौहार है जिनका नाम कई लोगों ने कभी सुना भी नहीं होगा। इन्हीं रोचक त्यौहारों में से एक है बगांल में मनाया जाने वाला त्यौहार ‘जामाई षष्ठी’। कोलकाता में ‘जामाई षष्ठी’  नामक एक खूबसूरत त्यौहार मनाया जाता है। जामाई को कई जगह दामाद, मेहमान इत्यादि भी कहा जाता है। जामाई षष्ठी एक ऐसा त्यौहार है जो जामाई को अपने ससुराल पक्ष से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। यह त्यौहार ससुरालवालों के साथ दमाद के सुंदर बंधन को भी प्रदर्शित करता है। जामाई षष्ठी Jamai Sasthi का पारंपरिक त्यौहार महिलाओं की सामाजिक-धार्मिक तथा कर्तव्य के हिस्से के रूप में पैदा हुआ था। दामाद को ‘जामाई’  और ‘षष्ठी’ ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के छठे दिन को कहते हैं। जिसका अर्थ छठा दिन है।  इस प्रकार यह त्यौहार परंपरागत हिंदू कैलेंडर के ज्येष्ठ महीने में शुक्ल पक्ष के छठे दिन मनाया जाता है। साल 2025 में जमाई षष्ठी कब है? (Jamai Sasthi 2025) प्रत्येक वर्ष जमाई षष्ठी का त्योहार ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। अंग्रेज़ी कैलेंडर के अनुसार Jamai Sasthi जमाई षष्ठी का त्योहार मई तथा जून के महीने में मनाया जाता है। साल 2025 में जमाई षष्ठी 01 जून, दिन- रविवार को मनाया जाएगा। जमाई षष्ठी का शाब्दिक अर्थ क्या है? What is the literal meaning of Jamai Sasthi ? जमाई शब्द का अर्थ है दामाद, जबकी षष्ठी का अर्थ चंद्र मास का छठा दिन से है अर्थात् ज्येष्ठ माह के षष्ठी के दिन मनाए जाने वाले पर्व को जमाई षष्ठी कहा जाता है। जमाई षष्ठी के दिन किए जाने वाले कार्यक्रम:Jamai Sasthi ke din kiye jaane vale karyakram जमाई षष्ठी की तैयारी: Preparation for Jamai Sasthi सास अपने दामाद की स्वागत के लिए इस बड़े दिन की तैयारी पहले से ही शुरू कर देती है। सास अपनी बेटी और दामाद के लिए उपहार, साड़ियाँ और कभी-कभी सोने के गहने भी खरीदती हैं। उसके बाद एक भव्य दावत की योजना बनाई जाती है, जिसमें बंगाली व्यंजनों का सबसे अच्छा स्वाद होता है और इसमें दामाद के पसंदीदा व्यंजनों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। अनुष्ठान और परंपराएँ: Rituals and Traditions बंगालियों के घरों में जमाई षष्ठी का त्योहार बहुत ही उत्साह और हर्षोंल्लास के साथ मनाया जाता है। जमाई षष्ठी उत्सव की शुरुआत देवी षष्ठी की पूजा से होती है, जिसमें सास अपने परिवार की खुशहाली के लिए माता देवी षष्ठी से आशीर्वाद माँगती है। उसके बाद सास अपने जमाई का स्वागत आरती और तिलक लगाकर करती है, जो प्यार और सम्मान का प्रतीक है। सुरक्षा और सौभाग्य के प्रतीक के रूप में सास अपने दामाद के कलाई पर एक पवित्र पीला धागा बाँधती है। जमाई षष्ठी के दिन दामाद का स्वागत: Welcoming the son-in-law on the day of Jamai Sasthi जमाई षष्ठी Jamai Sasthi की शुरुआत में सबसे पहले सास अपने दामाद को गृह प्रवेश करवाती है तथा इस दौरान सास अपने दामाद को तिलक लगाती है और अपने दामाद की कलाई में पीला धागा बांधती है तथा उसके बाद अपने दामाद को कपूर से आरती कर खुशहाल रहने का आशीर्वाद देती है। अंत में दामाद अपने सास का पैर छूकर आशीर्वाद लेता है। जमाई षष्ठी का सबसे प्रतीक्षित हिस्सा निस्संदेह भव्य दावत है तथा इस दिन सास अपने दामाद के लिए खास व्यंजन तैयार करती है जिनमें से शुक्तो, बेगुन भाजा, मिष्टी दोई, लूची, आलूर डोम, विभिन्न तरह का मिठाइयाँ तथा अन्य कई तरह के बंगाली व्यंजन शामिल होता है। जमाई षष्ठी की थाली: Jamai Sashhi Thali जमाई षष्ठी Jamai Sasthi के दिन सास अपने दामाद को एक राजा जैसा सम्मान प्रदान करने के लिए स्वादिष्ट व्यंजनों से भरा एक थाल तैयार करती है। खासकर दोपहर के भोजन में सास अपने दामाद को भात, दाल, पाँच प्रकार की तली हुई सब्जी(भाजी), कोशा मांगशो, इलिश भापा तथा अन्य कई स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाते है। जमाई षष्ठी का महत्व: Importance of Jamai Sasthi जमाई षष्ठी Jamai Sasthi केवल एक त्यौहार नहीं है, बल्कि सास और दामाद के बीच प्यार और खूबसूरत बंधन की अभिव्यक्ति है। मान्यता है कि जमाई षष्ठी का त्योहार मनाने से दोनों परिवारों के बीच मतभेद कम होता है और इस दौरान सास तथा दामाद के बीच के रिश्ते ओर भी मज़बूत होते है। शुभो जमाई षष्ठी! जमाई षष्ठी से जुड़ी कहानी: Story related to Jamai Sasthi 1.पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने अपने घर पर भगवान शिव तथा देवी पार्वती को भोज के लिए आमंत्रित किया था। लेकिन आपस में मन मुटाव होने के कारण माता लक्ष्मी ने देवी पार्वती की स्वागत नहीं की, इससे भगवान शिव नाराज हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु को यह श्राप दिया कि तुम्हें अपना घर छोड़ रास्ते में एक भिखारी की तरह भटकना पड़ेगा। तभी भगवान विष्णु ने एक जमाई(दामाद) का रूप धारण किया और ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की Jamai Sasthi षष्ठी तिथि को माता लक्ष्मी से आशीर्वाद प्राप्त किया। सास से क्षमा माँगने की इस कृतज्ञ से भगवान शिव द्वारा दिए गए श्राप से भगवान विष्णु मुक्त हो जाते है और इस तरह भगवान विष्णु अपने घर वापस लौटने में सक्षम हो जाते है। 2.अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार प्राचीन समय में एक महिला अपने घर का सारा खाना खा लेती थी, और लगातार अपना दोष एक बिल्ली पर लगाती कि उसके घर का खाना बिल्ली खाई है। बिल्ली की सवारी करने वाली माँ षष्ठी उस महिला पर काफी क्रोधित हुई। महिला गर्भवती थी तथा जब महिला के बच्चे धरती पर जन्म लिए तो उनमें से एक बच्चा ग़ायब हो गया, इस दौरान महिला देवी षष्ठी को खुश करने के लिए उनकी पूजा आराधना की। तो देवी षष्ठी महिला को उनका बच्चा वापस कर दी। लेकिन इस घटना की वजह से महिला के ससुराल वाले नाखुश थे, और महिला को अपने माता-पिता से मिलने के लिए मना कर दिए। लेकिन कुछ सालों बाद षष्ठी पूजा के दिन महिला की माता-पिता अपने दामाद तथा बेटी

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Dream Interpretation Money:अगर आपको भी दिखते हैं ऐसे 5 सपने, तो गलती से भी किसी को न बताएं

Dream Interpretation Money : स्वप्न विज्ञान का मानना है कि सपने जीवन में परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं। कहा जाता है कि सपने हमारे जीवन का आईना होते हैं। कहा जाता है कि इंसान जिस तरह की स्थिति से गुजर रहा होता है, उसे वैसे ही सपने आते हैं। स्वप्न विज्ञान के जानकारों का कहना है कि कुछ सपने ऐसे भी होते हैं जिनसे व्यक्ति की आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हमें अक्सर जो सपने आते हैं वह हम तुरंत अपनों के साथ या फिर दोस्तों के साथ साझा कर लेते हैं। लेकिन, स्वप्न शास्त्र इस बात से असहमत है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने को अपने दोस्तों या रिश्तेदारों को नहीं बताना चाहिए। जो सपने आपको आर्थिक लाभ देते हैं यदि वो सपने हम किसी को बता दें तो हमें लाभ के बदले नुकसान हो सकता है। आइए जानते हैं कौन से सपनों को हमें किसी को साझा नहीं करना चाहिए।  सपने हर एक व्यक्ति को आते हैं शायद ही कोई ऐसा हो जिसे सपने नहीं आते हों। सपनों की दुनिया को लेकर स्वप्न शास्त्र में बहुत सी जानकारी दी गई है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने का कुछ न कुछ अर्थ जरुर होता है। हमें अक्सर जो सपने आते हैं वह हम तुरंत अपनों के साथ या फिर दोस्तों के साथ साझा कर लेते हैं। लेकिन, स्वप्न शास्त्र के अनुसार, हर सपने हर किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। Dream Interpretation Money आज हम आपको कुछ ऐसे सपनों के बारे में बताने जा रहे हैं यदि वह आपको आते हैं तो आपको उन्हें किसी और के साथ साझा नहीं करना चाहिए। वरना आपको बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है। Dream Interpretation Money:अगर आपको भी दिखते हैं ऐसे 5 सपने सपने में फूलों का बगीचा देखना:See a flower garden in a dream अगर आपको सपने में फलों का बगीचा दिखाई देता है तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह का सपना देखना अच्छा माना जाता है। इस तरह के सपने आना का अर्थ है कि आपको कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। इस तरह का सपना आर्थिक मुनाफा होना का संकेत देता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर किसी को इस तरह का सपना आता है तो उसे किसी को नहीं बताना चाहिए। वरना इसका प्रभाव कम हो जाता है। चांदी से भरा कलश: A vase full of silver यदि आपको सपने में चांदी से भरा हुआ कलश नजर आता है तो इस तरह का सपने बहुत ही शुभ माना जाता है। Dream Interpretation Money स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस तरह का सपना आना जीवन में अच्छे दिन आने के संकेत देता है। इस तरह का सपना इशारा करता है कि आने वाले भविष्य में आपके अच्छे दिन आने वाले है। इस तरह का सपने आने पर भी दूसरों को इस बारे में न बताएं। सपने में माता पिता को पानी पिलाते देखना:Seeing your parents giving you water in your dream अगर आपको सपने कभी दिखाई पड़े कि आप अपने माता पिता को पानी पिला रहे हैं तो इस तरह का सपना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस तरह का सपना इस बात का संकेत है कि आने वाले भविष्य में आपकी खूब तरक्की होने वाली है। Dream Interpretation Money इस तरह के सपनों को भी किसी के साथ साझा न करें वरना इसका प्रभाव कम होगा। सपने में दिखाई दे भगवान:see god in dreams अगर आपको सपने में भगवान दिखाई देते हैं तो यह इस बात के संकेत है कि आपको जल्द ही कोई गुड न्यूज मिलने वाली है। अगर इस तरह के सपने को आप किसी के साथ साझा करते हैं तो Dream Interpretation Money स्वप्न शास्त्र के अनुसार, आपका बनते काम बिगड़ सकते हैं। इसलिए भूलकर भी इस तरह के सपने किसी के साथ साझा न करें। सपने में खुद की मृत्यु होते देखना:Seeing your own death in a dream अगर आपको सपने में दिखाई देता है कि आपकी मृत्यु हो गई है या Dream Interpretation Money फिर किसी और की मृत्यु हो गई है तो इस तरह के सपने को भी किसी के साथ साझा न करें। ऐसा कहा जाता है कि इस तरह के सपने दूसरों के साथ साझा करने से खुशियों को नजर लग जाती है।

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Mayuresh Stotram मयूरेश स्तोत्र

Mayuresh Stotram : मयूरेश स्तोत्र संस्कृत में है। मयूरेश स्तोत्र ब्रह्मा जी द्वारा रचित है। यह गणेश जी की स्तुति है। मयूरेश भी गणेश जी का ही एक नाम है। मयूरेश स्तोत्र का पाठ करने से भुक्ति और मुक्ति दोनों मिलती है। यह सभी कष्टों का नाश करता है। यह भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी करता है। यह मानसिक और शारीरिक व्याधियों को दूर करता है। यह बहुत ही पवित्र और शक्तिशाली Mayuresh Stotram मयूरेश स्तोत्र है। गणपति भगवान ही एकमात्र ऐसे समर्थ भगवान हैं जो सभी विघ्नों का नाश करते हैं, वे सभी कार्यों को सिद्ध करने वाले हैं, यदि किसी भी पूजा या अनुष्ठान में उन्हें प्रत्यक्षदर्शी बनाया जाए तो पूजा या अनुष्ठान सफल होता है। Mayuresh Stotram वैसे तो गणपति महाराज के अनेक स्तोत्र हैं, लेकिन Mayuresh Stotram मयूर स्तोत्र का महत्व सर्वोपरि है। यह स्तोत्र स्वयं में आत्म-चेतन और आत्मनिर्भर है, इसलिए इसका पाठ पूर्ण सफलता देने वाला है। गृह बाधा निवारण, संतान रोग निवारण, सुख शांति, उन्नति, प्रगति, तथा प्रत्येक क्षेत्र में नियमित शिक्षा के लिए गणपति स्तोत्र श्रेष्ठ माना गया है। इस स्तोत्र का पाठ स्त्री और पुरुष दोनों कर सकते हैं। हमारे जीवन के प्रत्येक दिन, यदि आप गुरु स्वामीनारायण तथा मयूरेश स्तोत्र Mayuresh Stotram से हैं, तो गणपति महाराज जीवन में कोई बाधा नहीं आने देंगे। सभी प्रकार के रोगों और चिंताओं से मुक्ति, शांतिपूर्ण पारिवारिक जीवन, संतान रोगों से मुक्ति, पूर्ण शांति तथा प्रत्येक क्षेत्र में पूर्ण सफलता और उन्नति के लिए Mayuresh Stotram मयूरेश स्तोत्र श्रेष्ठ माना गया है। संसार के सभी साधकों को यह कहने का अधिकार है कि प्रत्येक कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के लिए सर्वप्रथम गणपति ध्यान या पूजन आवश्यक है। देवताओं में भी गणपति की पूजा को सर्वप्रथम स्वीकार किया गया है, इतना ही नहीं भगवान शिव ने भी कहा है कि कार्य की सफलता के लिए गणपति साधना सर्वप्रथम आवश्यक है। मयूरेश स्तोत्र Mayuresh Stotram का पाठ कोई भी व्यक्ति कर सकता है, चाहे वह किसी भी लिंग या आयु का हो। भगवान शिव के पुत्र गणेश को तुरन्त प्रभावकारी माना गया है। इसका पाठ किसी भी चतुर्थी पर लाभकारी होता है, लेकिन अंगारक चतुर्थी पर इसे पढ़ने से फल में वृद्धि होती है। मयूरेश से गणेश की मधुरता से राजा इंद्र प्रसन्न हुए थे, उन्होंने बाधाओं को दूर किया था। मयूरेश स्तोत्र के लाभ मयूरेश स्तोत्र Mayuresh Stotram का नियमित जाप करने से मन को शांति मिलती है और आपके जीवन से सभी बुराइयां दूर रहती हैं और आप स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनते हैं। किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ जो व्यक्ति कोई प्रोजेक्ट शुरू करना चाहता है और सफल आउटपुट चाहता है, उसे Mayuresh Stotram मयूरेश स्तोत्र का जाप करना चाहिए। मयूरेश स्तोत्र हिंदी पाठ Mayuresh Stotram in Hindi चिंता एवं रोग निवारण हेतु दुर्लभ स्तोत्रम् । श्री गणपति भगवान सभी विघ्नों का नाश करने वाले देवता है, यह सभी कार्यो को सिद्ध करने वाले हैं। किसी भी पूजा या अनुष्ठान में गणपति जी को स्थापित करके पूजन या अनुष्ठान किया जाये तो निश्चित ही सफलता प्राप्त होती है। यूँ तो गणपति महाराज के अनेको स्तोत्रम् हैं परंतु मयूर स्तोत्रम् का महत्व सर्वोपरि है। यह स्तोत्र अपने आप में चैतन्य और मन्त्र सिद्ध है, अतः इसका पाठ ही पूर्ण सफलता प्रदान करने वाला है। मयूर स्तोत्रम् का पाठ घर में आने वाली बाधाओ, बच्चों के रोग के निवारण, सुख शांति, उन्नति, प्रगति तथा प्रत्येक क्षेत्र में इसका नियमित पाठ सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस स्तोत्र का पाठ स्त्री एवं पुरुष सामान रूप से कर सकते हैं। सर्व प्रथम स्नान कर आसान को स्पर्श करके मस्तक से लगाएं। पूर्व की तरफ मुँह करके बैठे अपने सामने गणपति यंत्र या मूर्ती स्थापित करें। पूजा शुक्ल पक्ष के बुधवार को प्रारम्भ करें। “वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरु में देव सर्व कार्येशु सर्वदा ।। सर्वप्रथम गुरु जी का पंचोपचार से पूजन करे। उसके बाद गणपति महाराज को प्रणाम करें। “सर्व स्थूलतनुम् गजेन्द्रवदनं लम्बोदरं सुन्दरमप्रस्यन्द्न्मधुगंधलुब्धमधुपव्यालोलगंडस्थलम ।दंताघातविदारितारीरुधिरे: सिन्दुरशोभाकर,वन्दे शैलसुत गणपति सिद्धिप्रदं कामदम ।। सिन्दुराभ त्रिनेत्र प्रथुतरजठर हमेर्दधानस्त्पदमेर्दधानम्दंत पाशाकुशेष्ट-अन्द्दु रुकर्विलसद्विजपुरा विरामम,बालेन्दुद्दौतमौली करिपतिवदनं दानपुरार्र्गन्ड-भौगिन्द्रा बद्धभूप भजत गणपति रक्तवस्त्रान्गरांगम . सुमुखश्चेक़दंतश्च कपिलो गजकर्णक:लम्बोदरश्च विक्तो विघ्ननाशो विनायकःधूम्रकेतु गणध्यक्षो भालचन्द्रो गजानना: द्वादशेतानी नामानि य पठच्छ्रणुयदपि ।विद्धारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथा ।संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्यतस्य ना जायते ।।” तत्पश्चात गणपति महाराज के 12 नामो का स्मरण करे। सुमुखश्च-एकदंतश्च कपिलो गज कर्णक:लम्बोदरश्व विकटो विघ्ननाशो विनायक:धूम्रकेतुर्गणाध्यक्षो भालचन्द्रो गजानन:द्वादशैतानि नामानि य: पठेच्छर्णुयादपिविद्यारम्भे विवाहे च प्रवेशे निर्गमे तथासंग्रामें संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जयते । इसके बाद श्री गणपति जी का पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करके मयुरेश स्त्रोत  का पाठ करे करें। ब्रह्मोवाच पुराणपुरुषं देवं नानाक्रीडाकरं मुदा ।मायाविनं दुर्विभाव्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ परात्परं चिदानन्दं निर्विकारं हृदि स्थितम् ।गुणातीतं गुणमयं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ सृजन्तं पालयन्तं च संहरन्तं निजेच्छया ।सर्वविघन्हरं देवं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ नानादैत्यनिहन्तारं नानारूपाणि विभ्रतम् ।नानायुधधरं भक्त्या मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ इन्द्रादिदेवतावृन्दैरभिष्टुतमहर्निशम् ।सदसद्वयक्तमव्यक्तं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ सर्वशक्तिमयं देवं सर्वरूपधरं विभुम् ।सर्वविद्याप्रवक्तारं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ पार्वतीनन्दनं शम्भोरानन्दपरिवर्धनम् ।भक्तानन्दकरं नित्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ मुनिध्येयं मुनिनुतं मुनिकामप्रपूरकम् ।समाष्टिव्यष्टिरूपं त्वां मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ सर्वाज्ञाननिहन्तारं सर्वज्ञानकरं शुचिम् ।सत्यज्ञानमयं सत्यं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ अनेककोटिब्रह्माण्डनायकं जगदीश्वरम् ।अनन्तविभवं विष्णुं मयूरेशं नमाम्यहम् ॥ मयूरेश उवाच इदं ब्रह्मकरं स्तोत्रं सर्वपापप्रनाशनम् ।सर्वकामप्रदं नृणां सर्वोपद्रवनाशनम् ॥ कारागृहगतानां च मोचनं दिनसप्तकात् ।आधिव्याधिहरं चैव भुक्तिमुक्तिप्रदं शुभम् ॥ मयुरेश स्त्रोत के लिए सावधानिया: अर्घ्य में निम्न 8 वस्तुए होती है ध्यान रखें। दही, दूर्वा, कुशाग्र, पुष्प, अक्षत, कुंकुम, पीली सरसों, सुपारी । इन 8 वस्तुओं को एक पात्र में लेकर गणपति जी को अर्घ्य दिया जाता है। कोई सामग्री न हो तो अक्षत का प्रयोग किया जाता है। घी का दीपक प्रज्वलित करे।

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कंकाली माता मंदिर:भोपाल, मध्यप्रदेश , भारत

हरे भरे जंगलों के बीच आस्था का केंद्र बने इस मंदिर के आसपास शांत वातावरण व ताज़ी हवा सुखद अहसास कराती है। कंकाली माता मंदिर देशभर में मां दुर्गा के कई ऐसे चमत्कारी मंदिर हैं जिनकी महिमा पूरे विश्व में विख्यात है। ऐसा ही एक मंदिर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 20 किलोमीटर दूर रायसेन के गुदावल गांव में स्थित है। इसे कंकाली माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां विराजित मां काली की देशभर में एक मात्र ऐसी प्रतिमा है जिसकी गर्दन एक तरफ करीब 45 डिग्री झुकी हुई है। ऐसी मान्यता है कि दशहरे के दिन मां काली की गर्दन सीधी होती है, जिसे देखने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं, लेकिन ऐसा सौभाग्य हजारों भक्तों में सिर्फ एक को ही प्राप्त होता है। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की ऐसी भीड़ जुटती है कि मानो मेला लगा हो। हरे भरे जंगलों के बीच आस्था का केंद्र बने इस मंदिर के आसपास शांत वातावरण व ताज़ी हवा सुखद अहसास कराती है। कंकाली माता मंदिर का इतिहास इस प्राचीन मंदिर की स्थापना 1731 के आसापास की मानी जाती है। बताया जाता है कि गुदावल गांव के रहने वाले हरलाल मेडा को एक रात सपना आया कि जमीन की नीचे माता की मूर्ति है। जिसके बाद जमीन की खुदाई कराई गई तो मां काली की प्रतिमा मिली, जिसे वहीं स्थापित कर ​दिया गया। तभी से यहां मंदिर विस्तार व पूजा अर्चना का सिलसिला जारी है। दशहरे के दिन मंदिर में विशाल मेला लगता है। नवरात्रि में दशहरे पर मंदिर क्षेत्र के सभी गांव में स्थापित की गईं दुर्गा जी की झाकियां विसर्जन से पहले मंदिर लाई जाती हैं, यहां सभी झाकियों का स्वागत कर मां अम्बे की आरती की जाती है, जिसके बाद झाकियों को विसर्जन के लिए भेज दिया जाता है। मंदिर का महत्व माना जाता है कि मां काली की सीधी गर्दन के दर्शन से बिगड़े काम बन जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन से महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है। महिलाएं अपने उल्टे हाथ से गोबर का निशान लगाती हैं और मनोकामना पूरी होने पर सीधे हाथों के निशान बना दिए जाते हैं। मंदिर में हजारों हाथों के निशान देखने को मिलते हैं। मंदिर में भक्त चुनरी बांधकर मन्नत मांगते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद मंदिर आकर चुनरी खोलते हैं। मंदिर की वास्तुकला कंकाली माता मंदिर में मुख्य रूप से मां काली की पूजा अर्चना की जाती है। यहां 20 भुजाओं वाली देश की पहली तिरछी गर्दन वाली मां काली की मूर्ति विराजमान है। प्रतिमा पांडव कालीन बताई जाती है। मंदिर परिसर में भगवान ब्रहमा, विष्णु व महेश की प्रतिमा भी विराजमान है। कंकाली माता मंदिर परिसर के अंदर के हिस्से में 10 हजार वर्गफीट का एक हॉल बनाया गया है, जिसमें एक भी पिलर नहीं है। यह अपने आप में ही कला का अद्भुत नमूना है। फिलहाल, मंदिर का विस्तार किया जा रहा है, जिसका निर्माण जारी है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 10:00 PM सुबह आरती का समय 08:00 AM – 09:00 AM संध्या आरती का समय 06:00 PM – 06:30 PM मंदिर का प्रसाद कंकाली माता मंदिर में मां काली को नारियल, फूल, चुनरी, मिश्री, लईया, बताशा आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।

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Geeta Bhawan Mandir:गीता भवन मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इस मंदिर में महाभारत, रामायण और पुराणों के चित्रण है Geeta Bhawan Mandir :गीता भवन मंदिर इंदौर मध्यप्रदेश के आगरा मुम्बई रोड, मनोरमागंज में स्थित है। यह वास्तविक रूप से एक मंदिर की तरह है। परन्तु यह मंदिर किसी विशेष संप्रदाय का नहीं है। यहाँ पर सभी धर्मों के लोग आ सकते हैं। क्योंकि यह मंदिर लोगों की भावनाओं को समर्पित है। यहाँ पर सभी धर्मों के लोग एकत्रित होते हैं Geeta Bhawan Mandir :का इतिहास गीता भवन मंदिर का निर्माण सन् 1960 में बाबा लाल मुकुंद द्वारा करवाया गया था। गीता भवन मंदिर गीता भवन ट्रस्ट, इंदौर की सहायक कंपनी द्वारा संचालित होता है। जो कि ट्रस्ट, स्कूल, अस्पताल, हॉस्टल और रिसॉर्ट भी चलाता है। Geeta Bhawan Mandir गीता भवन का विशेष अस्पताल भी गीता भवन मंदिर में स्थित है। Geeta Bhawan Mandir :का महत्व गीता जयंती पर यहाँ विशेष आयोजन होता है। भक्तों की भीड़ उमड़ती है। आपको यहाँ पर साधु संतों के दर्शन भी बड़ी आसानी से हो जायेंगे। गीता भवन मंदिर के प्रवचन चलते ही रहते है। आप यदि यहाँ पर जाते है तो समय निकालकर साधु संतों के प्रवचन का आनंद अवश्य लें। गीता भवन की एक विशेषता इसका पुस्तकालय भी है, जिसमें धार्मिक पुस्तकों, धर्मग्रंथों और अन्य साहित्य का एक बड़ा संग्रह है। यहाँ पर आप अपनी पसंद के अनुसार पुस्तक को पढ़ सकते हैं। गीता भवन में पूरे वर्ष विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिनमें संगीत समारोह, नृत्य प्रदर्शन और थिएटर शो शामिल हैं। मंदिर में अपनी आस्था के अनुसार आप प्रार्थना भी कर सकते है क्योंकि यहाँ पर कई भक्तों के लिए एक विशाल प्रार्थना कक्ष भी है। Geeta Bhawan Mandir :की वास्तुकला गीता भवन मंदिर के वास्तुकला की बात की जाए तो यह एक बड़ी ईमारत है। जहाँ पर सभी धर्मों से सम्बंधित मूर्तियां है। इस भवन में एक शानदार केंद्रीय हॉल है जिसमे महाभारत, रामायण और पुराणों जैसे कथाओं को चित्रों के माध्यम से दिखाया गया है। गीता भवन में आपको एक ही स्थान पर सभी देवी – देवताओं के दर्शन हो जायेंगे। यहाँ सभी भगवानों की बहुत ही सुन्दर प्रतिमाएं स्थापित की गयी हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही आपको विशाल हॉल दिखेगा। चारों तरफ नजरें घुमाने पर आपको बहुत सारे देवी -देवताओं की प्रतिमाओं के साथ दीवालों पर कलाकृति भी दिखाई देगी। मंदिर का समय सुबह मन्दिर का समय 07:00 AM – 07:00 PM मंदिर का प्रसाद गीता भवन मंदिर में सभी धर्मों के भगवान है। इसलिए यहाँ पर भक्त अपनी श्रद्धानुसार प्रसाद अर्पित कर सकते हैं।

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Shani Jayanti 2025 Date : कब है शनि जयंती,साढ़े साती से मुक्ति के लिए करें ये खास उपाय

Shani Jayanti 2025 Date: शनि जयंती पर भगवान शनि की विधिवत पूजा करने के साथ-साथ व्रत रखने का विधान है। आइए जानते हैं शनि जयंती की सही तिथि, मुहूर्त सहित अन्य जानकारी Shani Jayanti 2025 Date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ माह क अमावस्या तिथि को Shani Jayanti शनि जंयती का पर्व मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव और छाया पुत्र शनिदेव का जन्म हुआ था। न्याय के देवता , कर्मफल दाता शनि की इस दिन विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने का विधान है। मान्यता है कि शनि जातकों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। इसलिए व्यक्ति को हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिए। न्याय के देवता शनि की दृष्टि व्यक्ति के जीवन में कम से कम एक बार अवश्य पड़ती है। इसके साथ ही जातकों को शनि साढ़े साती और ढैय्या का सामना करना पड़ता है। बता दें कि उत्तर भारत में शनि जयंती ज्येष्ठ अमावस्या को मनाते हैं और वहीं दक्षिण भारत में वैशाख अमावस्या के दिन मनाते हैं। आइए जानते हैं ज्येष्ठ माह में पड़ने वाली शनि जयंती की सही तिथि, मुहूर्त से लेकर उपाय तक… कब है शनि जयंती 2025? (Shani Jayanti 2025 Date) हिंदू कैलेंडर के अनुसार Shani Jayanti शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाई जाती है. इस वर्ष शनि जयंती 27 मई 2025 को मनाई जाएगी. प्राचीन शास्त्रों के अनुसार, सूर्य देव के पुत्र भगवान शनि का जन्म इसी दिन हुआ था. इसलिए, हर साल ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती मनाई जाती है. इस शुभ दिन पर मंदिरों में भगवान शनि की विशेष पूजा की जाती है. शनि जयंती पर शुभ मुहूर्त shani jayantee par shubh muhurt वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 26 मई को दोपहर 12:11 बजे शुरू होगी और 27 मई को सुबह 8:31 बजे समाप्त होगी. सिर्फ 7 मिनट रहेगा ये खास योग ज्येष्ठ अमावस्या यानि की Shani Jayanti शनि जयंती पर कई शुभ योग बन रहे हैं. सुकर्मा योग सुबह से रात 10:54 बजे तक रहेगा उसके बाद से धृति योग बनेगा तो वहीं सुबह 5:25 बजे से 5:32 बजे तक एक दुर्लभ सर्वार्थ सिद्धि योग भी रहेगा.ये योग सिर्फ 7 मिनट ही रहेगा.इस खास योग में पूजा से आप शनि को प्रसन्न कर सकते हैं इसके अलावा, शिववास योग भी सुबह 8:31 बजे तक रहेगा. मान्यता है कि इस शिववास योग के दौरान, भगवान शिव देवी पार्वती के साथ कैलाश पर्वत पर निवास करते है. पंचांग विवरण शनि जयंती पर करें ये खास उपाय (Shani Jayanti 2025 Upay) शनि जयंती के दिन Shani Jayanti शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न उपाय करना लाभकारी हो सकता है। इस दिन इन उपायों को करके कुंडली से साढ़े साती और ढैय्या के दुष्प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। शनि जयंती के दिन शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करें। शनि जयंती पर पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ हो सकता है। शनि जयंती के दिन काले कपड़े, छाता, लोहे की चीजें, अन्न आदि का दान करें। इससे साढ़े साती के दुष्प्रभाव कम हो सकते हैं।   शनि जयंती के दिन शनि स्तोत्र , शनि मंत्र, शनि चालीसा का पाठ करें। इससे शनि की महादशा के दुष्प्रभाव काफी हद तक कम हो सकते हैं। काले कुत्ते को सरसों के तेल लगी हुई रोटी खिलाएं। ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और शनि दोष से भी मुक्ति मिल सकती है। इस दिन कैसे प्राप्त करें शनि कृपा? How to get Shani’s blessings on this day ? इस दिन आप कर्मफलदाता शनि को प्रसन्न करने के लिए व्रत, पूजा पाठ के साथ-साथ दान अवश्य करें. वहीं जिन जातकों की कुंडली में शनि दोष या उन पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है वो शनि के उपाय जरूर करें. ऐसे जातक इस दिन दान करें, शमी और पीपल के पेड़ की पूजा करें, छाया दान करने, तिल और तेल से शनि देव का अभिषेक करें.वहीं अपाहिजों और बुजुर्गों की सेवा अवश्य करें. माना जाता है कि Shani Jayanti शनिदेव की पूजा करने से व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार जीवन में सफलता मिलती है और सभी प्रकार के दुख और बाधाएं दूर होती हैं. मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा और भक्ति करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं.

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Sapne Me Rudraksha Dekhna:सपने में दिखे ये 7 चिजे तो समझ लेना की महादेव की कृपा होने वाली है

Sapne Me Rudraksha Dekhna:स्वप्नशास्त्र के अनुसार सपने जीवन में परिस्थितियों को प्रभावित कर सकते हैं। सपने हमारे भविष्य को सही आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जीवन में क्या होने वाला है उसके सकेंत पहले से ही मिल जाते हैं। कहते हैं कि इंसान जिस तरह की स्थिति से गुजर रहा होता है, उसे वैसे ही सपने आते हैं। यदि जीवन में कुछ अच्छा होने वाला है तो शुभ सकेंत सपनें में दिखने लगते है Bhagwan Shiv :भगवान शिव से सबंधित चीजें अगर आप कभी सपने में देखते हैं, तो इन सपनों का अर्थ जानने की जिज्ञासा भी आपके मन में जरूर उठी होगी। त्रिशूल, डमरू, सांप आदि का भगवान शिव से संबंध है। ये चीजें सपने में दिखें तो समझ जाइए कुछ न कुछ संकेत इन सपनों में छुपा है। आप में से बहुत से लोग जानते होंगे कि सांप को सपने में देखना अच्छा होता है, लेकिन सांप के साथ शिव जी से संबंधित अन्य चीजें क्या संकेत हमको देती हैं आइए विस्तार से जानते हैं।  सपने में त्रिशूल देखना Sapne me Trishula Dekhna भगवान शिव के एक हाथ में त्रिशूल रहता है। अगर आप कभी सपने में त्रिशूल देख लेते हैं तो ये सपना शुभ संकेतक माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि, जीवन की मुश्किलों का अब अंत हो सकता है। अगर आप कुछ नया शुरू करने वाले थे और उस कार्य में कोई परेशानी पैदा हो रही थी तो वो भी अब दूर हो सकती है। ऐसा सपना आने के बाद आपके आत्मविश्वास में भी वृद्धि देखने को मिलती है।  सपने में सांप Sapne me saap Dekhna भगवान शिव के गले में सर्प की माला है। ऐसे में अगर आप कभी सपने में सांप को देखते हैं तो ये सपना भी अच्छे परिणाम देने वाला माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि Rudraksha आपको अपने विरोधियों पर विजय प्राप्त होगी। इसके साथ ही सांप को सपने में देखना धन लाभ का भी प्रतीक होता है, ऐसा सपना आने के बाद आप कई स्रोतों से धन लाभ पा सकते हैं। आपकी आमदनी में वृद्धि हो सकती है या आप करियर के क्षेत्र में उन्नति पा सकते हैं।  सपने में डमरू Sapne me Damru Dekhna डमरू को सपने में अगर आप कभी देख लें तो समझ जाइए कोई अच्छा बदलाव जीवन में आ सकता है। ऐसा सपना Rudraksha आने के बाद कोई खुशखबरी भी आपको प्राप्त हो सकती है। जो लोग गायन, वादन के क्षेत्र मे हैं अगर वो सपने में डमरू देखते हैं तो, कला के क्षेत्रों में उनको उपलब्धि मिल सकती है।  सपने में चंद्रमा Sapne me Moon Dekhna भगवान शिव के सिर पर अर्द्ध चंद्रमा विराजमान है। अगर आप सपने में कभी आधा चंद्रमा देख लेते हैं तो समझ जाइए बड़ा परिवर्तन जीवन में आ सकता है। आप कुछ ऐसा कार्य करके दुनिया को चकित कर सकते हैं, जिसकी उम्मीद किसी को भी आप से न रही हो।  सपने में बैल Sapne Me Ox Dekhna भोलेनाथ नंदी Rudraksha बैल पर सवारी करते हैं। अगर आपको सपने में कभी बैल दिखाई देता है तो, इस सपने का अर्थ होता है कि आपके बल में वृद्धि होगी। आपके द्वारा किए गये कार्य अब आपको अच्छा रिजल्ट देने लग जाएंगे। साथ ही ऐसा सपना आपके जीवन में शांति और स्थिरता लेकर आ सकता है।  सपने में हिमालय Sapne Me Himalaya Dekhna भगवान शिव Rudraksha का निवास स्थान हिमालय में माना गया है। ऐसे में अगर आप सपने में कभी हिमालय को देखते हैं तो समझ जाइए भगवान शिव की आप पर कृपा है। इस सपने का अर्थ होता है कि सफलता अब आपको जीवन के कई क्षेत्रों में मिल सकती है। साथ ही यह सपना आपकी वैचारिक स्थिरता को भी दिखाता है, यानि ऐसा सपना आने के बाद आपके विचारों में स्पष्टता आएगी, जीवन में आप किसी भी स्थिति में भ्रमित नहीं होंगे।  सपने में रुद्राक्ष Sapne me Rudraksha Dekhna अगर आप सपने में कभी Rudraksha रुद्राक्ष देखें तो ये सपना आपके स्वास्थ्य की ओर इशारा करता है। अगर आप बीमार हैं तो ऐसा सपना आने के बाद आपकी बीमारी दूर हो सकती है, यानि यह सपना आपको आरोग्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

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1200 + Meaning of Dreams in Hindi:ऐसे सपनें जिसे देखने से मिलता है ये फल

Dreams:स्वप्न ज्योतिष के अनुसार नींद में दिखाई देने वाले हर सपने का एक ख़ास संकेत होता है, एक ख़ास फल होता है। आइए जानें 1200 ऐसे सपनो के स्वपन ज्योतिष के अनुसार संभावित फल । स्वप्न ज्योतिष के अनुसार नींद में दिखाई देने वाले हर सपने का एक ख़ास संकेत होता है, एक ख़ास फल होता है। आइए जानें 1200 ऐसे सपनो के स्वपन ज्योतिष के अनुसार संभावित फल । Meaning of Dreams in Hindi 1 अँधा देखना – कार्य में रूकावट आये2 अँधेरा देखना – विपत्ति आये3 अंक देखना – विषम शुभ4 अंक देखना – सम अशुभ5 अंग कटे देखना – स्वास्थ्य लाभ 6 अंग दान करना – उज्जवल भविष्य , पुरस्कार7 अंग रक्षक देखना – चोट लगने का खतरा8 अंगारों पर चलना – शारीरिक कष्ट9 अंगीठी जलती देखना – अशुभ10 अंगीठी बुझी देखना – शुभ 11 अंगुली काटना – परिवार में कलेश12 अंगूठा चूसना – पारवारिक सम्पति में विवाद13 अंगूठी पहनना – सुंदर स्त्री प्राप्त करना14 अंगूर खाना – स्वस्थ्य लाभ15 अंजन देखना – नेत्र रोग 16 अंडे खाना – Dreams पुत्र प्राप्ति17 अख़बार पढ़ना – खरीदना वाद विवाद18 अखरोट देखना – भरपुर भोजन मिले तथा धन वृद्धि हो19 अगरबत्ती अर्पित करना – शुभ20 अगरबत्ती जलती देखना – दुर्घटना हो 21 अगरबत्ती देखना – धार्मिक अनुष्ठान हो22 अचार खाना , बनाना – सिर दर्द, पेट दर्द23 अजगर दिखाई देना – व्यापार में हानि24 अजगर देखना – शुभ25 अजनबी मिलना – अनिष्ट की पूर्व सूचना 26 अजवैन खाना – स्वस्थ्य लाभ27 अजीब वस्तु देखना – प्रियजन के Dreams आने की सूचना28 अट्हास करना – दुखद समाचार मिले29 अदरक खाना – मान सम्मान बढे30 अध्यक्ष बनना – मान हानि 31 अध्यन करना – असफलता मिले32 अध्यापक देखना – सफलता मिले33 अध्र्चन्द्र देखना – औरत से सहयोग मिले34 अनाज देखना – चिंता मिले35 अनानास खाना – पहले परेशानी फिर राहत मिले 36 अनार का रस पीना – प्रचुर धन प्राप्त होना37 अनार के पत्ते खाना – शादी शीघ्र हो38 अनार खाना – (मीठा ) धन मिले39 अनार देखना – धन प्राप्ति के योग40 अन्तेस्ति देखना – परिवार में मांगलिक कार्य 41 अन्य रंग का कुरता देखना – अशुभ42 अपठनीय अक्षर पढना – दुखद समाचार मिले43 अपने आप को अकेला देखना – Dreams लम्बी यात्रा44 अपने को आकाश में उड़ते देखना – सफलता प्राप्त हो45 अपने दांत गिरते देखना – बंधू बांधव को कष्ट हो 46 अपने पर दूसरौ का हमला देखना – लम्बी उम्र47 अपहरण देखना – लम्बी उम्र48 अप्सरा देखना – धन और मान सम्मान की प्राप्ति49 अभिमान करना – अपमानित होना50 अमरुद खाना – धन मिले 51 अमलतास के फूल पीलिया या कोढ़ का रोग होना52 अमावस्या होना – दुःख संकट से छुटकारा53 अरबी देखना – सर दर्द या पेट दर्द54 अरहर खाना – पेट में दर्द55 अरहर देखना – शुभ 56 अर्थी देखना – बीमारी से छुटकारा57 अर्थी देखना – धन लाभ हो58 अलमारी खुली देखना – धन हानि हो59 अलमारी बंद देखना – धन प्राप्ति हो60 अस्त्र देखना – संकट से रक्षा 61 अस्त्र शस्त्र देखना – मुकद्में में हार62 अस्त्र से स्वयं को कटा देखना – शीघ्र कष्ट मिले63 अस्थि देखना – संकट टलना64 आँचल देखना – प्रतियोगिता में विजय65 आँचल में मुँह छिपाना – मान समान की प्राप्ति 66 आँचल से आंसू पोछना – अछा समय आने वाला है67 आंखों में काजल लगाना – शारीरिक कष्ट होना68 आंधी देखना – संकट से छुटकारा69 आंधी में गिरना – सफलता मिलेगी70 आंधी-तूफान देखना – यात्रा में कष्ट होना 71 आंवला खाते देखना – मनोकामना – पूर्ण होना72 आंवला देखना – मनोकामना – पूर्ण न होना73 आंसू देखना – परिवार में मंगल कार्य हो74 आइना – देखना – इच्छा पूरण हो , अछा दोस्त मिले75 आइना – में अपना – मुहं देखना – नौकरी में परेशानी , पत्नी में परेशानी 76 आइसक्रीम खाना – सुख शांति मिले77 आक देखना – शारारिक कष्ट78 आकाश की ओर उड़ना – लम्बी यात्रा हो79 आकाश देखना – पुत्र प्राप्ति80 आकाश में उडऩा लंबी यात्रा करना 81 आकाश में बादल देखना – जल्दी तरक्की होना82 आकाश से गिरना – संकट में फंसना83 आग जला कर भोजन बनाना – धन लाभ , नौकरी में तरक्की84 आग देखना – गलत तरीके से धन की प्राप्ति हो85 आग से कपडा जलना – अनेक दुख मिले , आँखों का रोग 86 आजाद होते देखना – अनेक चिन्ताओ से मुक्ति87 आट्टा देखना – कार्य पूरा हो88 आत्महत्या करना – या देखना – लम्बी आयु89 आभूषण देखना – कोई कार्य पूर्ण होना90 आम खाते देखना – धन और संतान का सुख91 आम खाना – धन प्राप्त होना92 आरा चलता हुआ देखना – संकट शीघ्र समाप्त होगे93 आरा रूका हुआ देखना – नए संकट आने का संकेत94 आरू देखना – प्रसनता की प्राप्ति 95 आलिंगन देखना – औरत का औरत से धन प्राप्ति का संकेत96 आलिंगन देखना – औरत का पुरुष से पति से बेवफाई की सूचना97 आलिंगन देखना – पुरुष का औरत से काम सुख की प्राप्ति98 आलिंगन देखना – पुरुष का पुरुष से शत्रुता बढ़ना99 आलू देखना – भरपूर भोजन मिले100 आवाज सुनना – अछा समय आने वाला है101 आवारागर्दी करना – धन लाभ हो नौकरी मिले 102 आवेदन करना – या लिखना – लम्बी यात्रा हो103 आश्रम देखना – व्यापार में घाटा104 आसमान देखना – ऊचा पद प्राप्त हो105 आसमान में बिजली देखना – कार्य-व्यवसाय में स्थिरता106 आसमान में स्वयं को गिरते देखना – व्यापार में हानि107 आसमान में स्वयं को देखना – अच्छी यात्रा का संकेत108 इंजन चलता देखना – यात्रा हो , शत्रु से सावधान109 इंद्रधनुष देखना – उत्तम स्वास्थ्य 110 इक्का देखना – ईंट का कष्टकारक स्तिथि111 इक्का देखना – चिड़ी का गृह क्लेश ,अतिथि आने की सूचना112 इक्का देखना – पान का पारवारिक क्लेश113 इक्का देखना – हुकम का दुःख व् निराशा मिले114 इडली साम्भर खाते देखना – सभी से सहयोग मिले115 इत्र लगाना – अछे फल की प्राप्ति, मान सम्मान बढेगा116 इन्द्रधनुष देखना – संकट बढे , धन हानि हो117 इमली खाते देखना – औरत के लिए शुभ ,पुरुष के लिए अशुभ118 इमारत देखना – मान सम्मान बढे, धन लाभ हो119 इलाइची देखना – – मान सम्मान की प्राप्ति120 इश्तहार पढना – धोखा मिले, चोरी हो121 इष्ट देव की मूर्ति चोरी

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