हरे भरे जंगलों के बीच आस्था का केंद्र बने इस मंदिर के आसपास शांत वातावरण व ताज़ी हवा सुखद अहसास कराती है।
कंकाली माता मंदिर देशभर में मां दुर्गा के कई ऐसे चमत्कारी मंदिर हैं जिनकी महिमा पूरे विश्व में विख्यात है। ऐसा ही एक मंदिर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 20 किलोमीटर दूर रायसेन के गुदावल गांव में स्थित है। इसे कंकाली माता मंदिर के नाम से जाना जाता है। यहां विराजित मां काली की देशभर में एक मात्र ऐसी प्रतिमा है जिसकी गर्दन एक तरफ करीब 45 डिग्री झुकी हुई है।
ऐसी मान्यता है कि दशहरे के दिन मां काली की गर्दन सीधी होती है, जिसे देखने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी लोग आते हैं, लेकिन ऐसा सौभाग्य हजारों भक्तों में सिर्फ एक को ही प्राप्त होता है। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की ऐसी भीड़ जुटती है कि मानो मेला लगा हो। हरे भरे जंगलों के बीच आस्था का केंद्र बने इस मंदिर के आसपास शांत वातावरण व ताज़ी हवा सुखद अहसास कराती है।
कंकाली माता मंदिर का इतिहास
इस प्राचीन मंदिर की स्थापना 1731 के आसापास की मानी जाती है। बताया जाता है कि गुदावल गांव के रहने वाले हरलाल मेडा को एक रात सपना आया कि जमीन की नीचे माता की मूर्ति है। जिसके बाद जमीन की खुदाई कराई गई तो मां काली की प्रतिमा मिली, जिसे वहीं स्थापित कर दिया गया। तभी से यहां मंदिर विस्तार व पूजा अर्चना का सिलसिला जारी है।
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दशहरे के दिन मंदिर में विशाल मेला लगता है। नवरात्रि में दशहरे पर मंदिर क्षेत्र के सभी गांव में स्थापित की गईं दुर्गा जी की झाकियां विसर्जन से पहले मंदिर लाई जाती हैं, यहां सभी झाकियों का स्वागत कर मां अम्बे की आरती की जाती है, जिसके बाद झाकियों को विसर्जन के लिए भेज दिया जाता है।
मंदिर का महत्व
माना जाता है कि मां काली की सीधी गर्दन के दर्शन से बिगड़े काम बन जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां दर्शन से महिलाओं की सूनी गोद भर जाती है। महिलाएं अपने उल्टे हाथ से गोबर का निशान लगाती हैं और मनोकामना पूरी होने पर सीधे हाथों के निशान बना दिए जाते हैं। मंदिर में हजारों हाथों के निशान देखने को मिलते हैं। मंदिर में भक्त चुनरी बांधकर मन्नत मांगते हैं और मन्नत पूरी होने के बाद मंदिर आकर चुनरी खोलते हैं।
मंदिर की वास्तुकला
कंकाली माता मंदिर में मुख्य रूप से मां काली की पूजा अर्चना की जाती है। यहां 20 भुजाओं वाली देश की पहली तिरछी गर्दन वाली मां काली की मूर्ति विराजमान है। प्रतिमा पांडव कालीन बताई जाती है। मंदिर परिसर में भगवान ब्रहमा, विष्णु व महेश की प्रतिमा भी विराजमान है। कंकाली माता मंदिर परिसर के अंदर के हिस्से में 10 हजार वर्गफीट का एक हॉल बनाया गया है, जिसमें एक भी पिलर नहीं है। यह अपने आप में ही कला का अद्भुत नमूना है। फिलहाल, मंदिर का विस्तार किया जा रहा है, जिसका निर्माण जारी है।
मंदिर का समय
सुबह मंदिर खुलने का समय
06:00 AM – 10:00 PM
सुबह आरती का समय
08:00 AM – 09:00 AM
संध्या आरती का समय
06:00 PM – 06:30 PM
मंदिर का प्रसाद
कंकाली माता मंदिर में मां काली को नारियल, फूल, चुनरी, मिश्री, लईया, बताशा आदि का प्रसाद चढ़ाया जाता है।





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