इस्कॉन मंदिर:भोपाल, मध्यप्रदेश , भारत

ISKCON Temple:इस्कॉन को एक और नाम से जाना जाता है, हरे कृष्णा आंदोलन। ISKCON Temple: Bhopal, Madhya Pradesh, India:मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल को वैसे तो झीलों का शहर कहा जाता है, लेकिन इस शहर में कई ऐसे मंदिर हैं, जोकि आस्था का केंद्र बनते जा रहे हैं। इन्हीं मंदिरों में से एक है पटेल नगर स्थित इस्कॉन मंदिर। इस्कॉन को एक और नाम से जाना जाता है, हरे कृष्णा आंदोलन। पूरा आंदोलन श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित है। मंदिर से हरे कृष्णा मंत्र का प्रचार प्रसार किया जाता है। मंदिर में आध्यात्म की शिक्षा दी जाती है। यह मंदिर आधुनिक सभ्यता के लोगों के लिए एक मॉडल की तरह भी है कि कैसे बिना सुख सुविधाओं के वैदिक सभ्यता में रहा जाता है। मंदिर में बिजली का प्रयोग न के बराबर होता है। पूरे परिसर में कहीं भी कूलर, पंखा या एसी नहीं लगा है। मंदिर आने वाले भक्तों को श्रीमद्भगवद्गीता, शास्त्रों व भगवान के बारें में ज्ञान मिलता है। आध्यात्मिक शांति के लिए यहां दूर-दूर से लोग आते हैं। Iskcon Temple:मंदिर का इतिहास इस्कॉन को पूरा नाम है इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस, यानी अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ। परम पूज्य ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने साल 1966 में न्यूयॉर्क शहर में पहले इस्कॉन मंदिर की स्थापना की थी, जिसके बाद इस मंदिर की श्रृंखला बढ़ती चली गई। उन्होंने 11 साल में ही पूरे विश्व में 108 इस्कॉन मंदिर स्थापित कर दिए थे। वर्तमान समय में विश्व में 500 से अधिक इस्कॉन मंदिर हैं। भोपाल में इस्कॉन मंदिर की स्थापना 2018 में की गई। हालांकि, कम समय में ही इस मंदिर से बड़ी संख्या में भक्त जुड़ गए हैं। पुरी की तर्ज पर भोपाल में इस साल इस्कॉन मंदिर द्वारा भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा भी निकाली गई थी। मंदिर का महत्व माना जाता है कि हरे कृष्णा मंत्र से कलयुग के कलमस से बचा जा सकता है। इस्कॉन मंदिर से जुड़े लोगों को 4 नियमों का पालन करना पड़ता है। जैसे- अवैध स्‍त्री संग संबंध न रखना, मांसाहार न करना, नशा से दूर रहना व जुआ न खेलना। ऐसा माना जाता है कि यह 4 पाप के स्तंभ होते हैं। इन कार्यों को करने से मनुष्‍य भगवान से दूर होता है। माना जाता है कि मंदिर के जरिए भगवान से जुड़ने का रास्ता मिलता है, इसी वजह से देश ही नहीं विदेशों में भी बड़ी संख्या में इस्कॉन के भक्त मिलते हैं। इस्कॉन मंदिर के भक्त सिर्फ चीजों को अपना धर्म मानते हैं- दया, तपस्या, सत्य और शुद्ध मन। मंदिर की वास्तुकला 3 एकड़ भूमि पर इस्कॉन मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। इसका प्रथम भाग बनकर तैयार हो चुका है। इसे बनाने में सबसे ज्यादा लकड़ी का प्रयोग किया गया है। मंदिर में रहने वाले शिष्यों के लिए साथ ही अन्य कमरे लकड़ी से बनाए गए हैं। भगवान के प्रसाद व भोजन तैयार करने के लिए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है। मंदिर में मुख्य रूप से राधा-कृष्ण की भक्ति की जाती है। मंदिर में प्रवेश करते ही एक बड़ा हॉल है, जहां भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा विराजमान है। हॉल की छत भी लकड़ी की बनाई गई है। मंदिर परिसर में रसोई घर व शिष्यों व धर्मगुरुओं के रहने के लिए कमरे बनाए गए हैं। इस्कॉन गौड़ीय-वैष्णव संप्रदाय से संबंधित है, जोकि वैदिक या हिंदू संस्कृति में एक एकेश्वरवादी परंपरा है। हर जीव की वास्तविक चेतना को जागृत करना, मनुष्यों को श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षा देना, भक्ति क्या है? भगवान कौन हैं? हम कौन हैं? हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है? हमारा भगवान का संबंध क्या है? भगवान श्रीकृष्ण से कैसे संबंध को स्थापित किया जाए, यह इस्कॉन मंदिर का मुख्य उद्देश्य है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 04:00 AM – 01:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 08:30 PM मंगल आरती का समय 04:30 AM – 05:00 AM तुलसी आरती का समय 05:00 AM – 05:30 AM उत्थापन आरती का समय 04:00 PM – 04:30 PM संध्या आरती का समय 07:00 PM – 07:30 PM मंदिर का प्रसाद इस्कॉन मंदिर में भगवान राधा कृष्ण को लगने वाला भोग मंदिर में ही तैयार किया जाता है। भक्त अपनी श्रृद्धा अनुसार दानपात्र में राशि दान करते हैं।

इस्कॉन मंदिर:भोपाल, मध्यप्रदेश , भारत Read More »

खटलापुरा मंदिर:भोपाल, मध्यप्रदेश, भारत

यह राम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, यहां मुख्य रूप से भगवान हनुमानजी विराजमान हैं। मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में छोटा तालाब के किनारे स्थि​त प्राचीन खटलापुरा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह राम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। हालांकि, यहां मुख्य रूप से भगवान हनुमानजी विराजमान हैं। मंदिर का ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व यहां आने वाले श्रद्धालुओं को सुखद अहसास की अनुभूति कराता है। हर साल मंदिर में लगने वाला डोल-ग्यारस का मेला एक और मुख्य आकर्षण है। खटलापुरा मंदिर में भगवान राम, शिव, गणेशजी, लक्ष्मण व माता सीता की प्रतिमा भी स्थापित है। हनुमान जयंती पर यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर के पिछले हिस्से में एक घाट है, जहां हर साल पितृपक्ष में लोग विधि विधान से पिंड दान करते हैं और पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करते हैं। तालाब किनारे बना यह मंदिर किसी के भी मन को मोह लेता है। इसी कारण यह स्थल आस्था के साथ साथ पिकनिक स्पॉट भी बनता जा रहा है। Khatlapura Mandir:मंदिर का इतिहास इस मंदिर का इतिहास अयोध्या से जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि मंदिर की स्थापना 1840 में अयोध्या से आए संतों ने की थी। साल 1969 में उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। मंदिर में सबसे पहले हनुमानजी को स्थापित किया गया था। मंदिर विस्तार के बाद यहां अन्य देवी देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गईं। मंदिर के पुजारी बाबा प्रेमदासजी बताते हैं कि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए अखाड़ा बनाया गया था। हालांकि, अब अखाड़े की जगह बजरंग व्यायाम शाला संचालित की जाती है। मंदिर का महत्व हनुमान जयंती पर बजरंगबली के दर्शन से हर कष्ट दूर होते हैं। माना जाता है कि मंदिर में विराजमान हनुमानजी की पूजा अर्चना से भक्तों पर भगवान राम की कृपा बरसती है। नवरात्रि व गणेश चतुर्थी पर भी खटलापुरा मंदिर में विषेष पूजा-अर्चना होती है। भाग्योदय के लिए इस मंदिर में दर्शन करने की मान्यता भी है। मंदिर की वास्तुकला तालाब के किनारे बना खटलापुरा मंदिर मन को शांति की अनुभूति कराता है। मंदिर को वास्तुदोष को देखते हुए बनाया गया है। यहां मुख्य रूप से भगवान हनुमान जी की बड़ी प्रतिमा विराजमान है। इनके साथ मंदिर में शीतला माता, मां दुर्गा, शिवलिंग, राम दरबार, श्रीगणेश, सांई बाबा की प्रतिमा के भी दर्शन होते हैं। परिसर में वर्षों पुराना एक विशालकाय पीपल का पेड़ है। ​मंदिर के पिछले हिस्से में तालाब किनारे एक घाट बना है, जहां हर वर्ष भारी संख्या में गणेश व दुर्गा विसर्जन होता है। मंदिर का समय सुबह मंदिर में होने वाली आरती का समय 06:00 AM – 07:00 AM खटलापुरा मंदिर प्रतिदिन 24 घंटे खुला रहता है 12:00 AM – 12:00 PM मंदिर का प्रसाद खटलापुरा मंदिर में मुख्य रूप से विराजमान हनुमान जी को बेसन के लड्डू व दूध से बने पेड़े का भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त मंदिर में विराजमान अन्य देवी-देवताओं को नारियल, मिश्री, बताशा, फूल आदि अर्पित किया जाता है।

खटलापुरा मंदिर:भोपाल, मध्यप्रदेश, भारत Read More »

Sankashti Chaturthi Vrat Katha:संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा

Sankashti Chaturthi Vrat Katha:संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा एक समय की बात है कि विष्णु भगवान का विवाह लक्ष्‍मीजी के साथ निश्चित हो गया। विवाह की तैयारी होने लगी। सभी देवताओं को निमंत्रण भेजे गए, परंतु गणेशजी को निमंत्रण नहीं दिया, कारण जो भी रहा होअब भगवान विष्णु की बारात जाने का समय आ गया। सभी देवता अपनी पत्नियों के साथ विवाह समारोह में आए। उन सबने देखा कि गणेशजी कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। तब वे आपस में चर्चा करने लगे कि क्या गणेशजी को न्योता नहीं गया है ? या स्वयं गणेशजी ही नहीं आए हैं? सभी को इस बात पर आश्चर्य होने लगा। तभी सबने विचार किया कि विष्णु भगवान से ही इसका कारण पूछा जाए| विष्णु भगवान से पूछने पर उन्होंने कहा कि हमने Sankashti Chaturthi Vrat Katha गणेशजी के पिता भोलेनाथ महादेव को न्योता भेजा है। यदि गणेशजी अपने पिता के साथ आना चाहते तो आ जाते, अलग से न्योता देने की कोई आवश्यकता भी नहीं थीं। दूसरी बात यह है कि उनको सवा मन मूंग, सवा मन चावल, सवा मन घी और सवा मन लड्डू का भोजन दिनभर में चाहिए। यदि गणेशजी नहीं आएंगे तो कोई बात नहीं। दूसरे के घर जाकर इतना सारा खाना-पीना अच्छा भी नहीं लगता। इतनी वार्ता कर ही रहे थे कि किसी एक ने सुझाव दिया- यदि गणेशजी आ भी जाएं तो उनको द्वारपाल बनाकर बैठा देंगे कि आप घर की याद रखना। Sankashti Chaturthi Vrat Katha आप तो चूहे पर बैठकर धीरे-धीरे चलोगे तो बारात से बहुत पीछे रह जाओगे। यह सुझाव भी सबको पसंद आ गया, तो विष्णु भगवान ने भी अपनी सहमति दे दी। होना क्या था कि इतने में गणेशजी वहां आ पहुंचे और उन्हें समझा-बुझाकर घर की रखवाली करने बैठा दिया। बारात चल दी, तब नारदजी ने देखा कि गणेशजी तो दरवाजे पर ही बैठे हुए हैं, तो वे गणेशजी के पास गए और रुकने का कारण पूछा। Sankashti Chaturthi Vrat Katha गणेशजी कहने लगे कि विष्णु भगवान ने मेरा बहुत अपमान किया है। नारदजी ने कहा कि आप अपनी मूषक सेना को आगे भेज दें, तो वह रास्ता खोद देगी जिससे उनके वाहन धरती में धंस जाएंगे, तब आपको सम्मानपूर्वक बुलाना पड़ेगा। अब तो गणेशजी ने अपनी मूषक सेना जल्दी से आगे भेज दी और सेना ने जमीन पोली कर दी। Sankashti Chaturthi Vrat Katha जब बारात वहां से निकली तो रथों के पहिए धरती में धंस गए। लाख कोशिश करें, परंतु पहिए नहीं निकले। सभी ने अपने-अपने उपाय किए, परंतु पहिए तो नहीं निकले, बल्कि जगह-जगह से टूट गए। किसी की समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाए। तब तो नारदजी ने कहा- आप लोगों ने गणेशजी का अपमान करके अच्छा नहीं किया। यदि उन्हें मनाकर लाया जाए तो आपका कार्य सिद्ध हो सकता है और यह संकट टल सकता है। Sankashti Chaturthi Vrat Katha शंकर भगवान ने अपने दूत नंदी को भेजा और वे गणेशजी को लेकर आए। गणेशजी का आदर-सम्मान के साथ पूजन किया, तब कहीं रथ के पहिए निकले। अब रथ के पहिए निकल को गए, परंतु वे टूट-फूट गए, तो उन्हें सुधारे कौन?पास के खेत में खाती काम कर रहा था, उसे बुलाया गया। खाती अपना कार्य करने के पहले ‘श्री गणेशाय नम:’ कहकर गणेशजी की वंदना मन ही मन करने लगा। देखते ही देखते खाती ने सभी पहियों को ठीक कर दिया। वह खाती कहने लगा कि हे देवताओं! Sankashti Chaturthi Vrat Katha आपने सर्वप्रथम गणेशजी को नहीं मनाया होगा और न ही उनकी पूजन की होगी इसीलिए तो आपके साथ यह संकट आया है। हम तो मूरख अज्ञानी हैं, फिर भी पहले गणेशजी को पूजते हैं, उनका ध्यान करते हैं। आप लोग तो देवतागण हैं, फिर भी आप गणेशजी को कैसे भूल गए? अब आप लोग भगवान श्री गणेशजी की जय बोलकर जाएं, तो आपके सब काम बन जाएंगे और कोई संकट भी नहीं आएगा। ऐसा कहते हुए बारात वहां से चल दी और विष्णु भगवान का लक्ष्मीजी के साथ विवाह संपन्न कराके सभी सकुशल घर लौट आए। हे गणेशजी महाराज! आपने विष्णु को जैसो कारज सारियो, ऐसो कारज सबको सिद्ध करजो। बोलो गजानन भगवान की जय।

Sankashti Chaturthi Vrat Katha:संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा Read More »

Ekdant Sankashti Chaturthi 2025:मई 2025 में एकदंत संकष्टी चतुर्थी कब है? नोट करले डेट टाइम, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व उपाय

Ekdant Sankashti Chaturthi 2025:सनातन धर्म में शुभ और मांगलिक काम में सर्वप्रथम महादेव के पुत्र गणपति बप्पा की पूजा होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गणेश जी की उपासना करने से सभी काम सफल होते हैं और कोई बाधा नहीं आती है। वहीं चतुर्थी तिथि पर विघ्नहर्ता की पूजा करना शुभ माना जाता है। इससे साधक को जीवन में सभी सुखों की प्राप्ति होती है हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो बार चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। एक शुक्लपक्ष में तो दूसरा कृष्णपक्ष में। कृष्णपक्ष की चतुर्थी संकष्टी और शुक्लपक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 हिंदी पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन संकष्ठी चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली संकष्टी को एकदन्त संकष्ठी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन भगवान गणेश जी की पूजा उपासना करने से सभी प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती है। ऐसी मान्यता है की इस दिन महिलाएं अपनी संतान के उज्ज्वल भविष्य और उनकी लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत भी रखती हैं। यह व्रत सूर्योंदय से लेकर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही पूरा होता है। Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 आइये जानते है साल 2025 में ज्येष्ठ माह की एकदन्त संकष्टी चतुर्थी व्रत कब है? 16 या 17 मई, जानिए व्रत की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहर्त, पूजा विधि, चंद्रोदय का समय और इस दिन किये जाने वाले उपाय एकदंत संकष्टी चतुर्थी 2025 डेट और शुभ मुहूर्त (Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 Date and Shubh Muhurat) Ekadanta Sankashti Chaturthi 2025 Shubh Muhurat:वैदिक पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 16 मई को सुबह 04 बजकर 02 मिनट पर होगा और अगले दिन यानी 17 मई को सुबह 05 बजकर 13 मिनट पर तिथि खत्म होगी। इस प्रकार से एकदंत संकष्टी चतुर्थी का पर्व 16 मई को मनाया जाएगा। साल 2025 में ज्येष्ठ मास की चतुर्थी तिथि प्रारम्भ होगी 16 मई 2025 को सुबह 04 बजकर 02 मिनट पर और संकष्टी चतुर्थी समाप्त होगी 17 मई 2025 को सुबह 05 बजकर 13 मिनट पर। और उदया तिथि के अनुसार साल 2025 में एकदन्त संकष्टी चतुर्थी 16 मई दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी। और संकष्टी चतुर्थी के दिन चन्द्रोदय होने का समय है रात 10 बजकर 39 मिनट पर शुभ समय (Today Shubh Muhurat) ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 06 मिनट से 04 बजकर 48 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 34 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 07 बजकर 04 मिनट से 07 बजकर 25 मिनट तक निशिता मुहूर्त- रात 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 38 मिनट तक एकदंत संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि (Ekdant Sankashti Chaturthi Puja Vidhi) संकष्टी चतुर्थीं व्रत के दिन करे ये उपाय (Do these measures on the day of Sankashti Chaturthi fast) Sankashti Chaturthi Upay: संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश जी को समर्पित होती है। Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 इस दिन भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए और अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए तरह-तरह के उपाय आदि किया जाता है। शास्त्रो के अनुसार भगवान गणेश जी सभी देवो में प्रथम पूज्य देव माने जाते है। Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 इसलिए इन्हे विन्नहर्ता भी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है की चतुर्थी के दिन किये गए उपाय से सभी मनाकामना पूरी होती है। ऐसी मान्यता है कि ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली एकदंत संकष्टी चतुर्थी के दिन Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 भगवान गणेश जी की पूजा में दूर्वा और गुड़ के 21 लड्डू अर्पित करके ओम वक्रतुंडायनमः मंत्र का जाप करना फलदायी माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में सुख, शांति और धन में वृद्धि के लिए संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी को सुपारी, लौंग और जायफल आदि चढाना चाहिए। और संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी की पूजा में हल्दी से स्वास्तिक बनाया हुआ पान का पत्ता अर्पित करने से सभी कार्य सफल होते है। यदि अपने कैरियर में सफलता पाना चाहते है Ekdant Sankashti Chaturthi 2025 संकष्टी चतुर्थी व्रत के दिन भगवान गणेश जी को गेंदे के फूल अर्पित करना शुभ होता है। भगवान गणेश के मंत्र (Mantras of Lord Ganesha) 1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥ 2. गणपतिर्विघ्नराजो लम्बतुण्डो गजाननः ।द्वैमातुरश्च हेरम्ब एकदन्तो गणाधिपः ॥विनायकश्चारुकर्णः पशुपालो भवात्मजः ।द्वादशैतानि नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्‌ ॥विश्वं तस्य भवेद्वश्यं न च विघ्नं भवेत्‌ क्वचित्‌ ।

Ekdant Sankashti Chaturthi 2025:मई 2025 में एकदंत संकष्टी चतुर्थी कब है? नोट करले डेट टाइम, पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व उपाय Read More »

Tuesday Hanuman Bhog Recipes:मंगलवार को ये 10 मीठी चीजें चढ़ाएं श्री हनुमान को, धन समृद्धि के साथ मिलेगा विजय का आशीर्वाद

Tuesday Hanuman Bhog Recipes:हिंदू धर्म में हनुमानजी का अत्यंत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा, उपासना, मंत्र और पाठ से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यतानुसार, श्रीराम की आज्ञा का पालन करते हुए आज भी हनुमान जी भक्तों की रक्षा और कल्याण के लिए पृथ्वी लोक में वास करते हैं। लोगों की हनुमान जी में इतनी आस्था और विश्वास है कि माना जाता है कि बड़ी से बड़ी समस्या का निवारण हनुमानजी की पूजा से हो जाता है। हनुमानजी की कृपा से ही धन, विजय और आरोग्य की प्राप्ति होती है। Tuesday Hanuman Bhog Recipes ज्योतिषविद्या में हनुमान जी के पूजा के लिए कुछ उपाय बताएं गए हैं, ऐसा माना जाता है कि इन उपायों से जीवन के दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदला जा सकता है। आइए जानते हैं। मंगलवार Tuesday Hanuman Worship के दिन पवनपुत्र श्री राम के प्रिय भक्त हनुमान जी का पूजन करने का विधान है। मंगलवार के दिन बजरंगबली को बूंदी के लड्डू या बूंदी के प्रसाद का भोग Hanuman Prasad Recipes लगाने से वे प्रसन्न होते है। वैसे तो मंगलवार और शनिवार दोनों ही दिन हनुमान Hanuman जी का पूजन करने और उन्हें प्रसन्न करने के लिए मिठाई Sweets, पकवानों का प्रसाद या भोग Bhog लगाएं, तो निश्चित ही उनकी कृपा बरसती है तथा जीवन के हर संकट दूर होते हैं। Tuesday Hanuman Bhog Recipes:यहां पढ़ें हनुमान जी के प्रिय 10 भोग- 10 Best Hanuman Bhog Recipes 1. केसरी बूंदी लड्‍डू Kesari Bundi Laddu सामग्री : 3 कटोरी बेसन (दरदरा पिसा हुआ), 2 कटोरी चीनी, एक छोटा चम्मच इलायची पावडर, काजू अथवा बादाम पाव कटोरी, केसर 5-6 लच्छे, मीठा पीला रंग चुटकी भर, तलने के लिए पर्याप्त मात्रा में देसी घी, पाव कप दूध। विधि : सबसे पहले बेसन को छान लें। उसमें चुटकी भर मीठा पीला रंग मिलाइए और पानी से घोल तैयार कर लीजिए। Tuesday Hanuman Bhog Recipes अब एक तपेले में पानी एवं शकर को मिलाकर एक तार की चाशनी तैयार कर लें। चाशनी में थोड़ा-सा पीला रंग और केसर हाथ से मसलकर डाल दीजिए। साथ ही पिसी इलायची भी डाल दें। एक कड़ाही में घी गर्म करके छेद वाली स्टील की चलनी या झारे की सहायता से थोड़ी-थोड़ी करके सारे घोल की बूंदी बनाते जाइए और चाशनी में डालते जाइए। जब बूंदी पूरी तरह चाशनी पी लें, तब हाथ पर हल्का-सा घी या पानी लगाकर हल्के से दबाते हुए सभी बूंदी के लड्‍डू तैयार कर लें। लड्‍डू बनाते समय सभी पर एक-एक काजू अथवा बादाम लड्‍डू के ऊपर हाथ से दबा दें। Tuesday Hanuman Bhog Recipes घर पर तैयार किए गए इन खास लड्‍डूओं से भोग लगाएं। 2. बेसन लड्डू Besan Laddu  सामग्री : एक कप दरदरा पिसा मोटा बेसन, 4-5 बड़ा चम्मच घी, शकर बूरा एक कप, 1 चम्मच पिसी इलायची, चांदी का वर्क, मेवे की कतरन अंदाज से। विधि : सबसे पहले एक कड़ाही में बेसन लेकर 4-5 चम्मच घी डालें व लगातार चलाते रहें, जब तक कि बेसन हल्का भूरा ना हो जाए। यह भी ध्यान रखें कि बेसन जल न जाएं। अब ठंडा करें। अब शकर बूरा, पिसी इलायची व मेवे की कतरन डालकर चलाते रहें। Tuesday Hanuman Bhog Recipes जब गुनगुना हो जाए तब इसके लड्डू बनाएं और ऊपर से चांदी का वर्क लगाकर भगवान को भोग लगाएं।  3. रसभरी इमरती Imrati Sweets सामग्री : 250 ग्राम छिलकेरहित उड़द की दाल, 50 ग्राम अरारोट, 500 ग्राम शकर, 1 चुटकी केसरिया पीला रंग खाने का, तलने के लिए घी, जलेबी बनाने वाला गोल छेद का रुमाल के बराबर मोटा कपड़ा। विधि : सबसे पहले उड़द की दाल को धोकर 4-5 घंटे पानी में गलाइए। निथारकर मिक्सर में हल्का-सा पानी का छींटा देकर चिकना पीसिए। पिसी हुई दाल में पीला रंग और अरारोट मिलाकर खूब अच्छी तरह फेंटिए (थाली या परात में हथेली की सहायता से फेंटने में आसानी रहेगी)। अब शकर की डेढ़ तार की चाशनी बनाइए। एक समतल कड़ाही लेकर उसमें घी गर्म करें। जलेबी बनाने वाले कपड़े में फेंटी हुई दाल का थोड़ा घोल भरें। मुट्ठी से कपड़ा बंद कर तेज आंच पर गोल-गोल कंगूरेदार इमरती बनाकर कुरकुरी तलिए। झारे से निथारकर इन्हें चाशनी में डुबोकर निकाल लें। लीजिए घर पर बनी रसीली इमरती तैयार है। Tuesday Hanuman Bhog Recipes इस पकवान से भगवान को भोग लगाएं। 4. मलाई-मिश्री लड्‍डू Mlai Mishri Laddu  सामग्री : सूखे खोपरे का बूरा 150 ग्राम, 200 ग्राम मिल्‍क मेड, Tuesday Hanuman Bhog Recipes एक कप गाय के दूध की फ्रेश मलाई, आधा कप गाय का दूध, इलायची पावडर, 5 छोटे चम्मच मिल्‍क पावडर, कुछेक लच्छे केसर। भरावन मसाला सामग्री : 250 ग्राम मिश्री बारीक पिसी हुई, पाव कटोरी पिस्ता कतरन, 1 चम्मच मिल्‍कमेड, दूध मसाला एक चम्मच। विधि : सर्वप्रथम खोपरा बूरा, मिल्क मेड, दूध, मिल्क पावडर और पिसी इलायची को अच्छी तरह मिला लें। तत्पश्चात माइक्रोवेव में 5-7 मिनट तक इसे माइक्रो कर लें। अब भरावन सामग्री को अलग से 1 कटोरे में मिक्स कर लें। 1 छोटी कटोरी में 4-5 केसर के लच्छे कम पानी में गला दें। अब माइक्रोवेव से निकले मिश्रण को 10-15 मिनट तक सूखने दें, फिर उसमें भरावन मसाला सामग्री डालकर मिश्रण को अच्छी तरह मिलाएं और उसके छोटे-छोटे लड्डू बना लें। सभी लड्‍डू तैयार हो जाने पर उनके ऊपर केसर का टीका लगाएं। Tuesday Hanuman Bhog Recipes ऊपर से केसर-पिस्ता से सजाएं और मलाई-मिश्री के लड्‍डू पेश करें। 5. केसरिया मालपुए Kesriya Malpua  सामग्री : एक कप ताजा दूध, एक कप मैदा, एक कप चीनी, एक चम्मच नीबू रस, एक चम्मच सौंफ, तेल (तलने और मोयन के लिए), कुछेक केसर के लच्छे, पाव कटोरी मेवे की कतरन। विधि : सबसे पहले मैदा छानकर उसमें 2 चम्मच तेल का मोयन मिलाकर दूध तथा सौंफ डालकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें। Tuesday Hanuman Bhog Recipes अब एक बर्तन में चीनी, नींबू रस और पानी डालकर चाशनी तैयार कर लें, उसमें केसर के लच्छे डालें और उबालें। तत्पश्चात एक कड़ाही में तेल गरम करके एक कड़छी से घोल डालें और कुरकुरा होने तक तल लें। Tuesday Hanuman Bhog Recipes फिर चाशनी में डुबोकर एक अलग बर्तन में रखते जाएं। ऊपर से मेवे की कतरन बुरकाकर भोग लगाएं।

Tuesday Hanuman Bhog Recipes:मंगलवार को ये 10 मीठी चीजें चढ़ाएं श्री हनुमान को, धन समृद्धि के साथ मिलेगा विजय का आशीर्वाद Read More »

Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai: कब शुरू होगा बड़ा मंगल? जानें इसका महत्व, पूजा विधि और डेट

Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai:ज्येष्ठ महीने के सभी मंगलवारों को भगवान हनुमान Hanuman की विशेष आराधना की जाती है और लोग भंडारे राम कथा सुंदरकांड जैसे मांगलिक काम करवाते हैं। का यह पर्व भगवान हनुमान के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है। इसे बुढ़वा मंगल (Bada Mangal 2025 Start Date) भी कहा जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना करने से भक्तों के सभी कष्टों का अंत होता है। बड़ा मंगल ज्येष्ठ मास के प्रत्येक मंगलवार को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिन्दू पर्व है। यह विशेष रूप से उत्तर भारत में मनाया जाता है। यह पर्व भगवान हनुमान की पूजा के लिए समर्पित है। Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai भक्त इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और उपवास रखते हैं। पंचाग के अनुसार, इस साल बड़ा मंगल 13 मई, 2025 से शुरू होगा। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले सभी मंगलवार बड़े मंगल के रूप में मनाए जाएंगे, तो आइए सभी बड़े मंगल (Bada Mangal 2025) की डेट जानते हैं। Kab Hai Bada Mangal 2025: सनातन धर्म में सप्ताह के सभी दिन का विशेष महत्व है। हर दिन किसी न किसी देवी-देवताओं को समर्पित है। ठीक इसी प्रकार मंगलवार के दिन मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के परम भक्त हनुमान की पूजा करने का विधान है। Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai साथ ही जीवन के संकटों को दूर करने के लिए व्रत किया जाता है। Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ माह के प्रथम मंगलवार को भगवान श्री राम और हनुमान जी की मुलाकात हुई थी। इसलिए ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले सभी मंगलवार को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। इस माह के मंगलवार को बड़ा मंगल और बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है।  बड़े मंगल की डेट (Bada Mangal 2025 Date) बड़ा मंगल का धार्मिक महत्व (Bada Mangal 2025 Significance) Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai:बड़े मंगल का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। ऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में ज्येष्ठ माह के मंगलवार के दिन ही भगवान राम और हनुमान जी की पहली मुलाकात हुई थी। तभी से इस दिन को अत्यंत शुभ और महत्वपूर्ण माना जाता है। एक अन्य कथा के अनुसार, अवध के नवाब शुजा-उद-दौला की पत्नी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, जिसके बाद उन्होंने अलीगंज में हनुमान मंदिर का निर्माण कराया। मंदिर का निर्माण ज्येष्ठ मास में पूरा हुआ, और इसी दिन से इस महीने के सभी मंगलवार को बड़ा मंगल के रूप में मनाने की परंपरा शुरू हुई। बड़ा मंगल आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक है। Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai इस दिन हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग मिलकर भंडारे आयोजित करते हैं और भगवान हनुमान की सेवा करते हैं। Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai:इन चीजों का लगाएं भोग हनुमान जी की पूजा के दौरान उन्हें भोग जरूर लगाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि प्रभु को इमरती का भोग लगाने से वह प्रसन्न होते हैं। हनुमान जी को बेसन के लड्डू प्रिय है। बड़ा मंगल के दिन बजरंगबली को बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। इससे जातक की सभी मनचाही मनोकामनाएं पूरी होती हैं। हनुमान जी पूजा मंत्र (Bada Mangal 2025 Puja Mantra) ॐ हनु हनुमते नमः ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय विश्वरूपाय अमित विक्रमाय प्रकटपराक्रमाय महाबलाय सूर्य कोटिसमप्रभाय रामदूताय स्वाहा। बड़ा मंगल पूजा विधि (Bada Mangal Puja Vidhi) इस दिन सुबह उठकर स्नान करें। सूर्य देव को जल अर्पित करें। चौकी पर पर हनुमान जी की मूर्ति विराजमान करें। उन्हें सिंदूर और फूलों की माला अर्पित करें। देशी घी का दीपक जलाकर आरती करें। इसके बाद लड्डू, फल और मिठाई समेत आदि चीजों का भोग लगाएं। सच्चे मन से सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ करें। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति और संकटों को दूर करने के लिए प्रार्थना करें। श्रद्धा अनुसार गरीब लोगों में धन, अन्न और वस्त्र का दान करें।

Bada Mangal 2025 Mai Kab Hai: कब शुरू होगा बड़ा मंगल? जानें इसका महत्व, पूजा विधि और डेट Read More »

सोमेश्वर महादेव मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

हजारों साल पहले सोमेश्वर की स्थापना यमुना तट पर जंगल और घने वनों के बीच हुई थी। सोमेश्वर महादेव मंदिर भारत के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में यमुना तट पर स्थित है। इस मंदिर की गिनती संगमनगरी के प्राचीन मंदिरों में की जाती है, जिसकी महिमा पौराणिक कालों से बताई जाती है। मान्यता है कि सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना के लिए स्वयं भगवान शिव ने चंद्रमा को इसे स्थापित करने को कहा था और उनके ही कहने पर चंद्र देव ने सोमेश्वर नाथ मंदिर की स्थापना की थी। चंद्रदेव द्वारा स्थापित किये जाने और यहीं उनका कुष्ठरोग ठीक होने की वजह से बड़ी संख्या में श्रद्धालु निरोगी होने की कामना के साथ यहां पूजन-अर्चन करने के लिए आते हैं। Someswarar Temple:मंदिर का इतिहास हजारों साल पहले सोमेश्वर की स्थापना यमुना तट पर जंगल और घने वनों के बीच हुई थी। इस मंदिर की स्थापना स्वयं चंद्रमा द्वारा की गई थी और भगवान शंकर की आराधना कर चंद्रमा को अपने क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। ऐसी पौराणिक कथा बताई जाती है कि राजा दक्ष प्रजापति ने जब चंद्रमा को श्राप दिया तो उससे चंद्रमा कुरूप होकर छय रोग से ग्रसित हो गए, श्राप मुक्त होने के लिए उन्होंने भगवान शिव की ज्योतिर्लिंग की स्थापना कर उनकी आराधना की थी। सोमेश्वर महादेव मंदिर का महत्व सोमेश्वर नाथ मंदिर के बारे में बताया जाता है कि इसके चंद्र कुंड में जो भक्त एक माह तक स्नान कर भगवान भोलेनाथ की आराधना करता है उसे क्षय रोग से मुक्ति मिल जाती है। ग्रंथों की माने तो चंद्रदेव श्राप की वजह से कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गये थे, सोमेश्वर महादेव मंदिर तब भोलेनाथ ने उन्हें इस रोग से मुक्ति का आशीर्वाद दिया था। ऐसी कहा जाता है कि सोमेश्वर नाथ मंदिर के गुंबद पर लगा त्रिशूल पूर्णिमा और अमावस्या को अपनी दिशा बदलता है और जिस तरफ चन्दमा रहता है उधर त्रिशूल घूम जाता है। सोमेश्वर महादेव मंदिर की वास्तुकला सोमेश्वर नाथ मंदिर को नागर शैली में बनाया गया है। मंदिर के शीर्ष पर विशाल शिखर और गुंबद बना है। शिखर के ठीक नीचे गर्भ गृह भगवान भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। मंदिर का गर्भ गृह छोटा है और उसमे संगमरमर लगा है। मंदिर एक प्रवेश द्वार है और ठीक सामने सीढ़ियां बनीं हैं। सोमेश्वर नाथ मंदिर में एक चंद्र कुंड बना है। मंदिर के ऊपर छत्र पर त्रिशूल लगा है जो चंद्रमा के पृथ्वी के चक्कर लगाने के अनुसार ही अपना कोड़ बदलता है। सोमेश्वर महादेव मंदिर का समय मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद सोमेश्वर नाथ मंदिर में शिव जी को फल, ड्राई फ्रूट्स,लड्डू, पेड़े का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु भगवान भोले नाथ को भांग, धतूरा, बेलपत्र और दूध भी चढ़ाते हैं।

सोमेश्वर महादेव मंदिर:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

शंकर विमान मण्डपम:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत

मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसलिए यह ‘शंकर विमान मंडपम’ कहलाता है। शंकर विमान मण्डपम भारत के उत्तर प्रदेश के प्रयागराज शहर में स्थित है। त्रिवेणी संगम के उत्तर में बने इस तीन मंजिला मंदिर को आदि शंकराचार्य की स्मृति में बनाया गया है। शंकर विमान मंडपम भगवान शिव को समर्पित मंदिर है। इसके प्रथम तल कांचिकामकोटि पीठ की आराध्य कामाक्षी देवी को समर्पित है। द्वितीय तल विष्णु भगवान के बाला जी स्वरूप पर आधारित है। शंकर विमान मण्डपम वहीं तृतीय तल योग सहस्त्र लिंग एक पत्थर में है। एक पत्थर में एक हजार शिवलिंग एवं रुद्राक्ष का मंडप बना है। श्रद्धालु मंदिर में पूजन-अर्चना कर अपनी मनोकामना मांगते है, जिसे भोलेनाथ पूरा करते हैं। Shankar Viman Mandapam:शंकर विमान मण्डपम मंदिर का इतिहास शंकर विमान मंडपम की नींव 1969 में रखी गई थी। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर 17 मार्च 1986 को खोला गया। शंकर विमान मंडपम को बनने में करीब 16 साल का समय लगा था। तीन मंजिला मंदिर का निर्माण कांचिकामकोटि 69वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने अपनी गुरु की इच्छापूर्ति के लिए कराया था। मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी कांचिकामकोटि मठ के पास है। मंदिर के दूसरे तथा तीसरे तल से त्रिवेणी संगम का नजारा अद्भुत नज़र आता है, जिसे देखने श्रद्धालु सुबह-शाम पहुंचते हैं। शंकर विमान मण्डपम मंदिर का महत्व चार खण्डों में शंकर विमान मंडपम 130 फीट ऊंचा है। मंदिर में कुमारिल भट्ट, जगतगुरु शंकराचार्य, कामाक्षी देवी (51 शक्तिपीठ समेत) और योगसहस्त्र सहस्त्रयोग लिंग (108 शिवलिंग हैं आसपास) स्थित हैं। शंकर विमान मंडपम मंदिर के प्रत्येक तल पर मुख्य मूर्तियों के कक्ष के बाहर काले रंग के द्वारपाल की मूर्तियां लगी हैं, जिसमें तमिल तथा हिंदी दोनों भाषाओं में श्री द्वारपाल लिखा है। शंकर विमान मंडपम मंदिर की दीवारों तथा छतो पर उकेरी गई मूर्तियां रामायण तथा शिव की कहानियों को बयां करती है। शंकर विमान मण्डपम मंदिर की वास्तुकला प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर बना शंकर विमान मंडपम द्रविड़ शैली में बना है। द्रविड़ संस्कृति में ही मंदिर का प्रवेश बना है, जो कि 16 विशाल खंभो पर बना है। मंदिर का गुंबद ‘विमान’ कहलाता है जिसे सीढ़ी दार पिरामिड की तरह बनाया जाता है जो ऊपर की ओर ज्यामिति रूप से उठा होता है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसलिए यह ‘शंकर विमान मंडपम’ कहलाता है। चार मंजिला इस मंदिर की बनावट दक्षिण भारतीय शैली पर आधारित है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 06:00 AM – 01:00 PM शाम को मंदिर खुलने का समय 04:00 PM – 08:00 PM मंदिर का प्रसाद शंकर विमान मंडपम में शिव जी को फल, ड्राई फ्रूट्स,लड्डू, पेड़े का भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु भगवान भोले नाथ को भांग, धतूरा, बेलपत्र और दूध भी चढ़ाते हैं।

शंकर विमान मण्डपम:प्रयागराज, उत्तरप्रदेश, भारत Read More »

Narad Jayanti 2025 date Hindi:मई महीने की इस तारीख को है नारद जयंती, यहां जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

Narad Jayanti 2025 date Hindi:देवर्षि नारद को श्रुति-स्मृति, इतिहास, पुराण, व्याकरण, वेदांग, संगीत, खगोल-भूगोल, ज्योतिष और योग जैसे कई शास्त्रों का विद्वान माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं इस साल नारद जयंती कि तिथि और शुभ मुहूर्त क्या है… Narad Jayanti 2025 date Hindi:नारद जयंती के बारे में नारद जयंती महान देवर्षि नारद मुनि की जयंती के रूप में मनाई जाती है। यह पर्व ज्येष्ठ मास की कृष्ण पक्ष द्वितीया को आता है। Narad Jayanti 2025 date Hindi नारद मुनि ब्रह्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं और वे देवताओं तथा असुरों के बीच संवाद सेतु हैं। इस दिन भक्ति, संगीत और ज्ञान का विशेष महत्व होता है। Narada Jayanti 2025:नारद जयंती 2025 वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष तिथि में मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन नारद मुनि का जन्म हुआ था। Narad Jayanti 2025 date Hindi आज हम आपको नारद मुनि का सनातन धर्म में महत्व, जन्म कथा और पूजा विधि की जानकारी देंगे लेकिन उससे पहले नारद जयंती से जुड़ी कुछ जरूरी जानकारी आपके साथ साझा कर देते हैं। Date and time of Narada Jayanti:नारद जयंती की तिथि एवं मुहूर्त नारद जयंती तिथि : 13 मई 2025, मंगलवार प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 12 मई, 2025 को 10:25 पी एम बजे से प्रतिपदा तिथि समाप्त – 14 मई, 2025 को 12:35 ए एम बजे तक Importance of Narad Muni in Sanatan Dharma:नारद मुनि का सनातन धर्म में महत्व Narad Jayanti 2025 date Hindi:भगवान विष्णु के परम भक्त और भगवान ब्रह्मा के पुत्र नारद मुनि से जुड़ी पौराणिक कथाएं पुरातन काल से ही कही सुनी जाती रही हैं। नारद जी को भगवान ब्रह्मा के छह पुत्रों में से छठवां पुत्र माना जाता है। नारद मुनि को सभी ऋषियों के बीच देवर्षि का दर्जा प्राप्त है। यानि कि नारद मुनि देवलोक के ऋषि माने जाते हैं। नारद मुनि की महत्ता इसी बात से समझ में आती है कि न सिर्फ देवता ही उनका सम्मान करते थे बल्कि असुरों के बीच भी उनका बेहद मान-सम्मान था। Narad Jayanti 2025 date Hindi भगवान कृष्ण ने नारद मुनि का जिक्र श्रीमद्भगवद्गीता में करते हुए कहा गया है कि, देवर्षीणाम् च नारद: अर्थात देवर्षियों में मैं नारद हूँ। देवर्षि नारद को श्रुति-स्मृति, इतिहास, पुराण, व्याकरण, वेदांग, संगीत, Narad Jayanti 2025 date Hindi खगोल-भूगोल, ज्योतिष और योग जैसे कई शास्त्रों का प्रकांड विद्वान माना जाता है। देवर्षि नारद के सभी उपदेशों का निचोड़ है- सर्वदा सर्वभावेन निश्चिन्तितै: भगवानेव भजनीय:। अर्थात् सर्वदा सर्वभाव से निश्चित होकर केवल भगवान का ही ध्यान करना चाहिए। नारद जयंती शुभ मुहूर्त 2025 – Narad Jayanti auspicious time 2025 ब्रह्म मुहूर्त 04 बजकर 04 मिनट ए एम से 04 बजकर 46 मिनट ए एम तक प्रातः सन्ध्या 04 बजकर 25 ए एम से 05 बजकर 28 मिनट ए एम तक अभिजित मुहूर्त 11 बजकर 46 मिनट ए एम से 12 बजकर 40 मिनट पी एम तक विजय मुहूर्त  02 बजकर 29 मिनट पी एम से 03 बजकर 23 मिनट पी एम तक गोधूलि मुहूर्त  06 बजकर 58 मिनट पी एम से 07 बजकर 19 मिनट पी एम तक सायाह्न सन्ध्या 06 बजकर 59 मिनट पी एम से 08 बजकर 02 मिनट पी एम तक अमृत काल  12 बजकर 14 ए एम, मई 14 से 02 बजकर 01 मिनट  ए एम, तक (14 मई) निशिता मुहूर्त 11 बजकर 52 मिनट पी एम  से 12 बजकर 34 मिनट ए एम, तक (14 मई) नारद जयंती पर क्या करें – What to do on Narad Jayanti इस दिन आप अगर दान करते हैं तो आपको इसका पुण्य फल प्राप्त होगा. माना जाता है Narad Jayanti 2025 date Hindi इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने से पुण्य फल प्राप्त होता है. साथ ही इस दिन जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा भी करना चाहिए, इसे इससे जीवन में सुख समृद्धि आती है.  कौन है नारद मुनि –  Importance of Sage Narad in Sanatan Dharma आपको बता दें कि नारद मुनि ऐसे हैं जिनके हाथ में किसी तरह का अस्त्र नहीं है.  इनके एक हाथ में वीणा और एक में वाद्य यंत्र होता है.  नारद मुनि देवताओं और असुरों के बीच संदेशवाहक के रूप में काम करते हैं. Narad Jayanti 2025 date Hindi इस दिन को पत्रकार दिवस के रूप में भी लोग मनाते हैं.  आपको बता दें कि नारद मुनि ऐसे हैं, जो सभी लोकों में वास करते हैं. इनकी सवारो बादल है.  How was Narad Muni born:नारद मुनि का जन्म कैसे हुआ? पौराणिक शास्त्रों में नारद मुनि को भगवान ब्रह्मा जी का पुत्र बताया गया है। लेकिन भगवान ब्रह्मा के पुत्र रूप में पैदा होने की इस घटना का संबंध नारद मुनि के पूर्व जन्म से भी हैं। मान्यता है कि पूर्व जन्म में नारद मुनि एक गंधर्व थे। उनका नाम हुआ करता था। बेहद सुन्दर काया वाले उपबर्हण को अपने रूप पर बेहद घमंड था। कहा जाता है कि एक बार कुछ अप्सराएँ और गंधर्व गीत और नृत्य से ब्रह्मा जी की उपासना कर रहे थे तब उपबर्हण स्त्रियों के साथ वहां आए और रासलीला में लग गए। जिससे भगवान ब्रह्मा जी उन पर कुपित हो गए और उन्हें श्राप दिया Narad Jayanti 2025 date Hindi कि अगले जन्म में वे एक शूद्र दासी के यहाँ जन्म लेंगे। भगवान ब्रह्मा के श्राप से उपबर्हण का जन्म एक शूद्र दासी के यहाँ हुआ लेकिन बालक उपबर्हण ने बचपन से ही अपना पूरा जीवन भगवान की आराधना और उनकी खोज में लगा दिया। यह देख कर भगवान बहुत प्रसन्न हुए और अगले जन्म में उन्हें ब्रह्मा पुत्र होने का वरदान दिया। समय आने पर इनका जन्म ब्रह्मदेव के मानस पुत्र के रूप में हुआ जो नारद मुनि के नाम से चारों ओर प्रसिद्ध हुए। Donate on Narada Jayanti:नारद जयंती पर करें दान भगवान विष्णु के परम भक्त नारद जी के जन्म दिवस पर दान-पुण्य को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दिन दान जरूर करें। माना जाता है कि इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान-दक्षिणा देने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

Narad Jayanti 2025 date Hindi:मई महीने की इस तारीख को है नारद जयंती, यहां जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त Read More »

Kurma Jayanti 2025 date:कूर्म जयंती कब और कैसे मनाएं आइए इसके महत्व के बारे में जानते हैं…

Kurma Jayanti 2025 date:कब और इसे क्यों मनाई जाती है। आइए इसके महत्व के बारे में जानते हैं… Kurma Jayanti 2025 date:अपनी परंपराओं और विरासत में समृद्ध होने के कारण भारत में कई सारे त्योहार मनाएं जाते हैं, इन्हीं त्योहारों में से एक है, कूर्म जयंती। कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) का त्योहार हिंदूओं के बीच काफी प्रसिद्ध है। इस शुभ दिन पर भगवान विष्णु के कूर्म अवतार यानी उनके दूसरे अवतार की पूजा की जाती है। देश भर में लोग इस त्योहार को जीवन के प्रतीक के रूप में मानते हैं और इसे पूरे उत्साह के साथ मनाते हैं। समृद्धि और लंबी उम्र का आशीर्वाद पाने के लिए भगवान विष्णु के मंदिरों में कई अनुष्ठान और पूजा विधियां की जाती हैं। कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) 2025 तिथि हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) वैशाख महीने के दौरान पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। कूर्म जयंती 2025 की तिथि और तिथि का समय इस प्रकार है: कूर्म जयंती: सोमवार, मई 12, 2025कूर्म जयंती मुहूर्त: 04:34 पी एम से 07:12 पी एम पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: मई 11, 2025 को 08:01 पी एम बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त: मई 12, 2025 को 10:25 पी एम बजे कुर्म जयंती (Importance of Kurma Jayanti ) का महत्व लोग कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) को उस दिन के रूप में मनाते हैं, जब भगवान विष्णु कूर्म (कछुआ) के रूप में अवतरित हुए थे। हिंदू किंवदंतियों के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि इस विशेष दिन पर, भगवान विष्णु ने ‘मंदरांचल पर्वत’ (पहाड़) को अपनी पीठ पर उठा लिया था। ऐसा कहा जाता है कि जब सागर मंथन किया जा रहा था, तब ‘मंदरांचल पर्वत’ का कोई आधार न होने के कारण वह समुद्र में डूबने लगा था, तभी भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार लेकर उसे अपनी पीठ पर रखा। तब से, कूर्म जयंती (Kurma Jayanti) को भगवान कूर्म के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु के इस दूसरे अवतार की हिंदुओं द्वारा अत्यंत भक्ति और महिमा के साथ पूजा की जाती है। Kurma Jayanti 2025 date:कूर्म जयंती (Kurma Jayanti Story) कहानी Kurma Jayanti 2025 date:हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, ‘क्षीर सागर मंथन’ के दौरान, ‘मंदरांचल पर्वत’ को मदानी के रूप में इस्तेमाल किया गया था और नागराज वासुकी को समुद्र मंथन के लिए रस्सी के रूप में लिया गया था। Kurma Jayanti 2025 date भगवान विष्णु ने अमरता का अमृत निकालने के लिए समुद्र मंथन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए असुरों के साथ देवों को बुलाया। लेकिन पहाड़ डूबने लगा, इसलिए भगवान विष्णु एक बड़े कछुए के रूप में प्रकट हुए और उसे अपनी पीठ पर ले गए। अगर कूर्म अवतार न होता तो मंथन की प्रक्रिया विफल हो जाती और देवताओं को 14 दिव्य उपहार नहीं मिलते। इसके अलावा, समुद्र मंथन ने ‘हलाहल’ नाम का एक विष भी निकाला, जिसे भगवान शिव ने ब्रह्मांड को आपदा और विनाश से बचाने के लिए सेवन किया था। Kurma Jayanti 2025 date उस समय से, कूर्म जयंती हिंदुओं के बीच अत्यधिक महत्व रखती है और लोग भगवान विष्णु की महिमा के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। How to celebrate Kurma Jayanti:कुर्मा जयंती कैसे मनाएं? भक्त कुर्मा जयंती को अत्यंत समर्पण और उत्साह के साथ मनाते हैं। Kurma Jayanti 2025 date इस विशेष दिन पर, भगवान विष्णु के विभिन्न मंदिरों में या पूजा स्थल पर विशेष समारोह और पूजा का आयोजन किया जाता है। कूर्मा जयंती के अनुष्ठान क्या हैं:(What are the rituals of Kurma Jayanti) Kurma Jayanti 2025 date अन्य हिंदू त्योहारों के समान, इस दिन सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान करना पवित्र माना जाता है। स्नान करने के बाद, भक्त साफ़ और सुथरे पूजा के वस्त्र पहनते हैं । भक्त भगवान विष्णु को चंदन, तुलसी के पत्ते, कुमकुम, अगरबत्ती, फूल और मिठाई का चढ़ावा चढ़ा कर पूजा और अर्चना करते हैं। श्री कूर्मा जयंती के व्रत का पालन अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। तो, भक्त इस विशेष दिन पर एक मौन व्रत या एक कठोर कुर्मा जयंती का व्रत रखते हैं। जो भक्त उपवास करते हैं, वे दाल या अनाज का सेवन करने से खुद को रोकते हैं और केवल दूध उत्पादों और फलों का सेवन करते हैं। कूर्म जयंती व्रत के पालन के दौरान, पर्यवेक्षक किसी भी तरह के पाप या बुराई करने के लिए प्रतिबंधित होते हैं और झूठ बोलने के लिए भी प्रतिबंधित होते हैं । प्रेक्षकों को रात्रि के समय सोने की अनुमति नहीं होती है। भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए उन्हें अपना पूरा समय मंत्रों को पढ़ने में लगाना चाहिए। विष्णु सहस्रनाम‘ का पाठ करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। एक बार सभी अनुष्ठान समाप्त हो जाने के बाद, भक्त आरती करते हैं। कूर्म जयंती की पूर्व संध्या पर दान करना अत्यधिक फलदायक माना जाता है। Kurma Jayanti 2025 date पर्यवेक्षक को ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और पैसे दान करने चाहिए। कुर्मा जयंती के लिए अनुष्ठान(Rituals for Kurma Jayanti) Kurma Jayanti 2025 date सूर्योदय से पहले पवित्र स्नान करें। साफ-सुथरे या पूजा वस्त्र धारण करें। धूप, तुलसी के पत्ते, चंदन, कुमकुम, फूल और मिठाई लेकर प्रसाद के साथ भगवान विष्णु की पूजा करके प्रार्थना करें। इस दिन व्रत करना बहुत ही शुभ माना जाता है। इसलिए, कई भक्त मौन उपवास या कठोर कूर्म जयंती व्रत करते हैं। व्रत के दौरान दाल या अनाज का सेवन वर्जित है और फलों के साथ केवल दुग्ध उत्पादों का ही सेवन किया जा सकता है। पूर्ण तपस्या करनी चाहिए और प्रेक्षकों को किसी भी प्रकार के पाप कर्म या झूठ बोलने से बचना चाहिए। रात के समय जागरण करें और पूरी रात भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए मंत्रों का जाप करें। प्रसिद्ध ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना बहुत शुभ माना जाता है। सभी रस्में पूरी होने के बाद आरती करें। Kurma Jayanti 2025 date कूर्म जयंती के दिन आप दान या दान कर सकते हैं क्योंकि इससे अत्यधिक फल की प्राप्ति होती है। आप जरूरतमंद या ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े, या धन सहित कुछ भी दान कर सकते हैं। कूर्म जयंती (Kurma Jayanti Mantra) मंत्र ॐ कूर्माय नम:ॐ हां ग्रीं कूर्मासने बाधाम नाशय नाशयॐ आं ह्रीं क्रों कूर्मासनाय नम:ॐ ह्रीं कूर्माय वास्तु पुरुषाय स्वाहा

Kurma Jayanti 2025 date:कूर्म जयंती कब और कैसे मनाएं आइए इसके महत्व के बारे में जानते हैं… Read More »

महालक्ष्मी मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत

इस मंदिर में होलकर काल से चली आ रही परंपरा आज भी देखने को मिलती है। भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के हृदय स्थल राजवाड़ा में महालक्ष्मी मंदिर स्थित है। यह इंदौर के प्राचीन मंदिरों में से एक है। भक्त मंदिर में जो चावल चढ़ाते हैं, उनमें से कुछ चावल मन्नत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं और फिर उसे घर की तिजोरी और दुकान के गल्ले में रखते हैं ताकि वर्षभर बरकत बनी रहे। बताया जाता है कि यह सिलसिला मंदिर की स्थापना के बाद से लगातार जारी है। महालक्ष्मी मंदिर का इतिहास महालक्ष्मी मंदिर करीब 188 साल प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर होलकर कालीन मंदिर की स्थापना 1833 में इंदौर के राजा हरि राव होलकर ने की थी। उस दौर में यहां मंदिर नहीं था, प्रतिमा की स्थापना एक पुराने मकान में की गई थी। होलकर वंश के लोग उस समय नवरात्र और दिवाली पर माता के दर्शन करने आते थे। इसके साथ ही खजाना खोलने से पूर्व भी होलकर राजवंश मां महालक्ष्मी का आशीष लेता था। इस मंदिर में होलकर काल से चली आ रही परंपरा आज भी देखने को मिलती है। Mahalakshmi Temple:मंदिर का महत्व दिवाली के मौके पर भक्त मंदिर पहुंचकर माता लक्ष्मी को पीले चावल देकर अपने घर आने का आमंत्रण देते हैं। भक्त मां लक्ष्मी से प्रार्थना करते हैं कि हमारे घर पधारें और सुख-समृद्धि का आशीष दें। दिवाली के दिन मंदिर के पट सुबह तीन बजे खोल दिए जाते हैं। 11 पंडित मां लक्ष्मी का विशेष अभिषेक करते हैं और फिर श्रृंगार के बाद माता की महाआरती की जाती है। हर साल दीपावली के मौके पर मंदिर में 5 दिवसीय महोत्सव होता है। धनतेरस से शुरू होकर ये महोत्सव भाईदूज पर पूरा होता है। इस मौके पर यहां लाखों दर्शनार्थी मंदिर पहुंचते हैं। होलकर रियासत के दफ्तर में काम करने वाले कर्मचारी और क्षेत्र के व्यापारी अपने दिन की शुरुआत मंदिर में मां लक्ष्मी के दर्शन के साथ करते हैं। मंदिर की वास्तुकला होलकर कालीन महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण पूरी तरह से लकड़ी से हुआ था। 1933 में ये मंदिर तीन मंजिला था, लेकिन बाद में जर्जर होने के कारण ये गिर गया। 1942 में मंदिर जीर्णोद्धार कराया गया, जिसके बाद 2011 में मंदिर का पुन: जीर्णोद्धार कराया गया। इस मंदिर में माता की 21 इंच की प्राचीन मूर्ति प्रतिष्ठित है। गर्भ गृह में बड़े चबूतरे पर माता महालक्ष्मी की भव्य प्रतिमा स्थापित है, जिसके चारों ओर संगमरमर के आठ स्तम्भ लगे हुए हैं। साथ ही भगवान गणेश रिद्धि सिद्धि की काले पत्थरों से बनी मूर्ति है। मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर के तर्ज पर इस मंदिर का विकास किया जा रहा है। मंदिर को मराठा शैली में बनाया गया है। मंदिर के दीवारों पर नक्काशी की गई, जिसे देख कर मन प्रसन्न हो जाता है। मंदिर का समय सुबह मंदिर खुलने का समय 07:00 AM – 12:00 PM सायंकाल मंदिर खुलने का समय 05:00 PM – 10:00 PM सुबह की आरती 07:00 AM – 07:30 AM सायंकाल आरती 07:00 PM – 07:30 PM मंदिर का प्रसाद महालक्ष्मी मंदिर में भक्त मां को फल, ड्राई फ्रूट्स, लड्डू का भोग लगाते हैं। कुछ श्रद्धालु मां को हलवा, चना और पूड़ी का भोग भी लगाते हैं।

महालक्ष्मी मंदिर:इंदौर, मध्य प्रदेश, भारत Read More »

Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी पर भूलकर भी न करें 5 काम, होगी धन की हानि

Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी का दिन बहुत शुभ माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। लोग इस दिन व्रत रखते हैं और पूजा-पाठ करते हैं। कहते हैं कि इस व्रत को रखने से सभी कष्टों का अंत होता है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इसके साथ ही घर में माता लक्ष्मी का वास होता है। इस साल यह एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) 8 मई को रखा जाएगा। Mohini Ekadashi Vrat Niyam: मोहिनी एकादशी पर भक्त उपवास रखकर विष्णु भगवान की आराधना करेंगे। मोहिनी एकादशी पर कुछ कामों को करना अशुभ माना जाता है, जो प्रभु की नाराजगी का कारण भी बन सकते हैं। Mohini Ekadashi Vrat Niyam:  मोहिनी एकादशी का व्रत। सनातन धर्म में मोहिनी एकादशी का अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस शुभ दिन पर भक्त उपवास रखते हैं और द्वादशी तिथि पर पारण करते हैं। इसके अलावा कुछ साधक विशेष पूजा करने के लिए भगवान विष्णु के मंदिर जाते हैं। एकादशी एक महीने में दो बार आती है। एक कृष्ण पक्ष और दूसरी शुक्ल पक्ष। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date एकादशी पर कुछ चीजों को करने से भगवान विष्णु कुपित हो सकते हैं और आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। Mohini Ekadashi per kya na kare:मोहिनी एकादशी पर क्या न करें? 1. चावल- मोहिनी एकादशी पर चावल का सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। मान्यता है Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इस दिन चावल का सेवन करने से दोष लगता है।  2. तुलसी की पत्तियां- तुलसी की पत्तियां भगवान श्री हरि विष्णु को बेहद प्रिय हैं, जिनके बिना भगवान को भोग नहीं लगाया जाता है। इसलिए मोहिनी एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी की पत्तियों को न तो स्पर्श करना चाहिए और न ही इन्हें तोड़ना चाहिए। तुलसी की पत्तियां तोड़ने से मां लक्ष्मी नाराज हो सकती हैं। 3. काले वस्त्र- धर्मिक मान्यताओं के अनुसार, किसी भी शुभ अवसर या फिर पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए। इसलिए मोहिनी एकादशी के दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचें। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date भगवान विष्णु की असीम कृपा पाने के लिए इस दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ रहेगा। 4. मास-मदिरा- मोहिनी एकादशी के दिन भूलकर भी मास-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन तामसिक भोजन का सेवन करने से भगवान विष्णु नराज हो सकते हैं।  5. अपमान- कोशिश करें की इस दिन आप किसी का दिल न दुखाएं और वाद-विवाद से भी बचें। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date किसी का भी अपमान करने से बचें और न ही किसी का मजाक उड़ाएं।  Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी का व्रत बहुत मंगलकारी माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप को समर्पित है। साधक इस दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल मोहिनी एकादशी (Mohini Ekadashi 2025) का व्रत 8 मई को रखा जाएगा। इस दिन माता तुलसी की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date इसलिए सुबह व्रती उठकर पवित्र स्नान के बाद मां तुलसी को जल चढ़ाएं। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date फिर मां के सामने घी का दीपक जलाएं। तुलसी चालीसा, मंत्र का जप करें। आखिरी में आरती करें। पूजा में हुई गलतियों के लिए माफी मांगे। Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date।।तुलसी चालीसा।। श्री तुलसी महारानी, करूं विनय सिरनाय। जो मम हो संकट विकट, दीजै मात नशाय।। नमो नमो तुलसी महारानी, महिमा अमित न जाय बखानी। दियो विष्णु तुमको सनमाना, जग में छायो सुयश महाना।। विष्णुप्रिया जय जयतिभवानि, तिहूँ लोक की हो सुखखानी। भगवत पूजा कर जो कोई, बिना तुम्हारे सफल न होई।। जिन घर तव नहिं होय निवासा, उस पर करहिं विष्णु नहिं बासा। करे सदा जो तव नित सुमिरन, तेहिके काज होय सब पूरन।। कातिक मास महात्म तुम्हारा, ताको जानत सब संसारा। तव पूजन जो करैं कुंवारी, पावै सुन्दर वर सुकुमारी।। कर जो पूजन नितप्रति नारी, सुख सम्पत्ति से होय सुखारी। वृद्धा नारी करै जो पूजन, मिले भक्ति होवै पुलकित मन।। श्रद्धा से पूजै जो कोई, भवनिधि से तर जावै सोई। कथा भागवत यज्ञ करावै, तुम बिन नहीं सफलता पावै।। छायो तब प्रताप जगभारी, ध्यावत तुमहिं सकल चितधारी। तुम्हीं मात यंत्रन तंत्रन, सकल काज सिधि होवै क्षण में।। औषधि रूप आप हो माता, सब जग में तव यश विख्याता, देव रिषी मुनि औ तपधारी, करत सदा तव जय जयकारी।। वेद पुरानन तव यश गाया, महिमा अगम पार नहिं पाया। नमो नमो जै जै सुखकारनि, नमो नमो जै दुखनिवारनि।। नमो नमो सुखसम्पति देनी, नमो नमो अघ काटन छेनी। नमो नमो भक्तन दुःख हरनी, नमो नमो दुष्टन मद छेनी।। नमो नमो भव पार उतारनि, नमो नमो परलोक सुधारनि। नमो नमो निज भक्त उबारनि, नमो नमो जनकाज संवारनि।। नमो नमो जय कुमति नशावनि, नमो नमो सुख उपजावनि। जयति जयति जय तुलसीमाई, ध्याऊँ तुमको शीश नवाई।। निजजन जानि मोहि अपनाओ, बिगड़े कारज आप बनाओ। करूँ विनय मैं मात तुम्हारी, पूरण आशा करहु हमारी।। शरण चरण कर जोरि मनाऊं, निशदिन तेरे ही गुण गाऊं। क्रहु मात यह अब मोपर दाया, निर्मल होय सकल ममकाया।। मंगू मात यह बर दीजै, सकल मनोरथ पूर्ण कीजै। जनूं नहिं कुछ नेम अचारा, छमहु मात अपराध हमारा।। बरह मास करै जो पूजा, ता सम जग में और न दूजा। प्रथमहि गंगाजल मंगवावे, फिर सुन्दर स्नान करावे।। चन्दन अक्षत पुष्प् चढ़ावे, धूप दीप नैवेद्य लगावे। करे आचमन गंगा जल से, ध्यान करे हृदय निर्मल से।। पाठ करे फिर चालीसा की, अस्तुति करे मात तुलसा की। यह विधि पूजा करे हमेशा, ताके तन नहिं रहै क्लेशा।। करै मास कार्तिक का साधन, सोवे नित पवित्र सिध हुई जाहीं। है यह कथा महा सुखदाई, पढ़े सुने सो भव तर जाई।। तुलसी मैया तुम कल्याणी, तुम्हरी महिमा सब जग जानी। भाव ना तुझे माँ नित नित ध्यावे, गा गाकर मां तुझे रिझावे।। यह श्रीतुलसी चालीसा पाठ करे जो कोय। गोविन्द सो फल पावही जो मन इच्छा होय।। डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

Mohini Ekadashi Vrat 2025 Date:मोहिनी एकादशी पर भूलकर भी न करें 5 काम, होगी धन की हानि Read More »