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ShrIKrishna Kavacham or Trailokyavijayam Kavacham:श्रीकृष्ण अथवा त्रैलोक्यविजयं नामकवचम्

ShrIKrishna Kavacham or Trailokyavijayam Kavacham: श्रीकृष्ण अथवा त्रैलोक्यविजयं नामकवचम् नारद उवाच । भगवञ्छ्रोतुमिच्छामि किं मन्त्रं भगवान्हरः ।कृपया-ऽदात् परशुरामाय स्तोत्रं च वर्म च ॥ १॥कोवाऽस्य मन्त्रस्याराध्यः किं फलं कवचस्य च ।स्तवनस्य फलं किं वा तद्भवान्वक्तुमर्हसि ॥ २॥ ShrIKrishna Kavacham नारायण उवाच । मन्त्राराध्यो हि भगवान् परिपूर्णतमः स्वयम् ।गोलोकनाथः श्रीकृष्णो गोप-गोपीश्वरः प्रभुः ॥ ३॥ त्रैलोक्यविजयं नाम कवचं

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Shrikrishna Karpura Stotram: श्रीकृष्णकर्पूरस्तोत्रम्

Shrikrishna Karpura Stotram: श्रीकृष्णकर्पूरस्तोत्रम् कर्पूरं पूररेफैर्विरहितमवनी वामनेत्रेन्दुभूषं कृष्णायेदं पदं यः प्रजपति सुजनष्ठद्रयं योजयित्वा ।नानासौख्यादिभोगैः सह स विहरते दीर्घजीवी पृथिव्या- मन्ते गोलोकवासो भवति हरिरसे लीनचित्तस्य तस्य ॥ १॥ ध्यायत्रून्रूपं त्वदीयं हृदि विमलमुखं शान्तचित्तो जनो यो- मन्दं मन्दं स्मरन् सन् तव सुमनुवरं पूर्णमर्थं विचार्य ।भोः कृष्ण त्वद्विलीनं निखिलजगदिदं भावयन् सुप्रहृष्टो- जीवन्मुक्तः प्रशान्तः प्रभवति स नरो लोकपूज्यः सुरेश

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ShrIkRiShNakarNAmRitam:श्रीकृष्णकर्णामृतम्

ShrIkRiShNakarNAmRitam:श्रीकृष्णकर्णामृतम् ॥ प्रथमाश्वासः ॥चिन्तामणिर्जयति सोमगिरिर्गुरुर्मेशिक्षागुरुश्च भगवान् शिखिपिञ्छमौलिः ।यत्पादकल्पतरुपल्लवशेखरेषुलीलास्वयंवररसं लभते जयश्रीः ॥ १.१॥ अस्ति स्वस्तरुणीकराग्रविगलत्कल्पप्रसूनाप्लुतंवस्तुप्रस्तुतवेणुनादलहरीनिर्वाणनिर्व्याकुलम् ।स्रस्तस्रस्तनिरुद्धनीविविलसद्गोपीसहस्रावृतंहस्तन्यस्तनतापवर्गमखिलोदारं किशोराकृति ॥ १.२॥ चातुर्यैकनिधानसीमचपलाऽपाङ्गच्छटामन्दरंलावण्यामृतवीचिलालितदृशं लक्ष्मीकटक्षादृतम् ।कालिन्दीपुलिनाङ्गणप्रणयिनं कामावताराङ्कुरंबालं नीलममी वयं मधुरिमस्वाराज्यमाराध्नुमः ॥ १.३॥ बर्होत्तंसविलासिकुन्तलभरं माधुर्यमग्नाननंप्रोन्मीलन्नवयौवनं प्रविलसद्वेणुप्रणादामृतम् ।आपीनस्तनकुड्मलाभिरभितो गोपीभिराराधितंज्योतिश्चेतसि नश्चकास्ति जगतामेकाभिरामाद्भुतम् ॥ १.४॥ मधुरतरस्मितामृतविमुग्धमुखाम्बुरुहंमदशिखिपिञ्छलाञ्छितमनोज्ञकचप्रचयम् ।विषयविषामिषग्रसनगृध्नुषि चेतसि मेविपुलविलोचनं किमपि धाम चकास्ति चिरम् ॥ १.५॥ मुकुलायमाननयनाम्बुजं विभोर्मुरलीनिनादमकरन्दनिर्भरम् ।मुकुरायमाणमृदुगण्डमण्डलं मुखपङ्कजं मनसि मे विजृम्भताम् ॥ १.६॥

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ku~njavihAryaShTakam 2: कुञ्जविहार्यष्टकम् २

ku~njavihAryaShTakam 2: कुञ्जविहार्यष्टकम् २ द्वितीयं श्रीकुञ्जविहार्यष्टकंनमः कुञ्जविहारिणे ।अविरतरतिबन्धुस्मेरताबन्धुरश्रीः कबलित इव राधापाङ्गभङ्गीतरङ्गैः ।मुदितवदनचन्द्रश्चन्द्रिकापीतधारी मुदिरमधुरकान्तिर्भाति कुञ्जे विहारी ॥ १॥ ततसुषिरघनानां नादमानद्धभाजां जनयति तरुणीनां मण्डले मण्डितानाम् ।तटभुवि नटराजक्रीडया भानुपुत्र्याः विदधदतुलचारिर्भाति कुञ्जे विहारी ॥ २॥ शिखिनिगलितषड्जेकोकिले पञ्चमाढ्ये स्वयमपि नववंश्योद्दामयन् ग्राममुख्यम् ।धृतमृगमदगन्धः सुष्ठुगान्धारसंज्ञं त्रिभुवनधृतिहारिर्भाति कुञ्जे विहारी ॥ ३॥ अनुपमकरशाखोपात्तराधाङ्गुलीको लघु लघु कुसुमानां पर्यटन् वाटिकायाम् ।सरभसमनुगीतश्चित्रकण्ठीभिरुच्चैः व्रजनवयुवतीभिर्भाति कुञ्जे विहारी ॥ ४॥

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Pithori Amavasya

Pithori Amavasya: पिठोरी अमावस्या 2025 कब है ?

Pithori Amavasya: पिठोरी अमावस्या 2025 कब है? जानें इस विशेष व्रत की तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत कथा, जो माताएं संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। पिठोरी अमावस्या भाद्रपद मास की अमावस्या को मनाई जाती है। इस दिन माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए पिठौरियों

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Masik Shivratri

Masik Shivratri 2025: अगस्त में कब है मासिक शिवरात्रि? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा का महत्व

Masik Shivratri 2025: भक्तों के लिए मासिक शिवरात्रि भगवान शिव की कृपा पाने का एक पावन अवसर होता है. हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. यह व्रत और पूजा विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है. सावन माह की शिवरात्रि के बाद अब भाद्रपद मास की

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Karpanyapanjikastotram:कार्पण्यपञ्जिकास्तोत्रम्

Karpanyapanjikastotram:कार्पण्यपञ्जिकास्तोत्रम् ध्यानः ।कोणेनाक्ष्णोः पृथुरुचिः मिथो हारिणा लिह्यमाना- वेकैकेन प्रचुरपुलकेनोपगुढौ भुजेन । गौरीश्यामौ वसनयुगलं श्यामगौरं वसानौ राधाकृष्णौ स्मरविलसितोद्दामतृष्णौ स्मरामि ॥ १॥ अथ श्रीकार्पण्यपञ्जिकास्तोत्रंश्रीवृन्दावनेशौ जयतः तिष्ठन् वृन्दाटवीकुञ्जे विज्ञप्तिं विदधत्यसौ ।वृन्दाटवीशयोः पादपद्मेषु कृपनो जनः ॥ १॥ नवेन्दीवरसन्दोहसौन्दर्यास्कन्दनप्रभम् ।चारुगोरोचनागर्वगौरवग्रासिगौरभाम् ॥ २॥ शातकुम्भकदम्बश्रीविडम्बिस्फुरदम्बरम् ।हरता किंशुकस्यांशून् अंशुकेन विराजिताम् ॥ ३॥ सर्वकैशोरवद्वृन्दचूडारूढहरिण्मणिम् ।गोष्ठाशेषकिशोरीणां धम्मिल्लोत्तंसमल्लिकाम् ॥ ४॥ श्रीशमुख्यात्मरूपणां रूपातिशयिविग्रहम् ।रमोज्ज्वलव्रजवधूव्रजविस्मापिसौष्ठवाम् ॥ ५॥ Karpanyapanjikastotram

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Shri Kartika Damodara Stotram: कार्तिक दामोदर स्तोत्रम्

Shri Kartika Damodara Stotram: कार्तिक दामोदर स्तोत्रम् Kartika Damodara Stotram:। मत्स्यावतार, कूर्मावतार, वराहावतार ।मत्स्याकृतिधरजय देवेश वेदविबोधककूर्मस्वरूप ।मन्दरगिरिधरसूकररूप भूमिविधारक जय देवेश ॥ १॥ । नृसिंहावतार, वामनावतार, परशुरामावतार ।काञ्चनलोचननरहरिरूप दुष्टहिरण्यकभञ्जन जय भोः । जय जय वामन बलिविध्वंसिन् दुष्टकुलान्तकभार्गवरूप ॥ २॥ । रामावतार, कृष्णावतार ।जयविश्रवसः सुतविध्वंसिन् जय कंसारे यदुकुलतिलक ।जयवृन्दावनचर देवेश देवकीनन्दन नन्दकुमार ॥ ३॥ । कृष्णावतार ।जय

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Karana Shatka Gitam: कारणषट्कगीतम्

Karana Shatka Gitam: कारणषट्कगीतम् Karana Shatka Gitam: मम जीवनस्य जीवनंउद्भाषितं नित्यशोभनंत्वमेव देवं त्वमेव सर्वंहृदि स्थिते सदा धारणंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ १॥ मम हृदयस्य हृदयंसद्भाषितं नित्य सदयंत्वमेव पूर्णं त्वमेव स्वर्णंप्रेमं आनन्दं अद्भुदयंहे कृष्ण हे माधव हे देव त्वंसर्व कारणस्य कारणम् ॥ २॥ मम विचारस्य विचारंसद्भाव-हॄद्भाव-सञ्चारंत्वमेव सत्यं त्वमेव नित्यंस्मृति-ज्ञानं सर्वाधारंहे कृष्ण

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Dream Interpretation

Dream Interpretation: सपने में दिखने वाली ये चीजें देती हैं शुभ संकेत, जल्द मिल सकती है अच्छी खबर

Dream Interpretation: कई बार सपनों में हमें ऐसे संकेत मिल जाते हैं जो हमारे भविष्य के बारे में बताते हैं. जानते हैं कि किन चीजों का सपना देखना जीवन में बहुत अच्छा माना जाता है. Swapna Shastra in Hindi: स्वप्न शास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई ना कोई अर्थ जरूर होता है. Dream Interpretation स्वप्न

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Dream Interpretation

Krishna Janmashtami Puja Niyam: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की संपूर्ण पूजा विधि, सभी 16 चरणों के सरल वैदिक मंत्रों के साथ

Krishna Janmashtami Puja Vidhi Mantra In Hindi: कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कई भक्त भगवान कृष्ण का षोडशोपचार पूजन करते हैं। ये पूजा सामान्य पूजा से थोड़ी बड़ी होती है। विशेषतौर पर वैष्णव संप्रदाय के लोग इस पूजा को करते हैं। यहां देखें जन्माष्टमी पूजा विधि एवं मंत्र। Krishna Janmashtami Puja Vidhi Mantra In Hindi: कृष्ण जन्माष्टमी का

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Vedsar Shiv Stava

Vedsar Shiv Stava: श्री वेदसार शिव स्तव:

Vedsar Shiv Stava: वेदसार शिव स्तव (श्री वेदसार शिव स्तव): वेदसार शिव स्तव एक स्तोत्र (हिंदू भजन) है जो हिंदू भगवान शिव की शक्ति और सौंदर्य का वर्णन करता है। इसे पारंपरिक रूप से लंका के असुर राजा और शिव के भक्त रावण से जोड़ा जाता है। इस स्तोत्र की नौवीं और दसवीं दोनों चौपाइयों

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