Jay Shree Ram:एक तोते की वजह से सीता को श्रीराम से रहना पड़ा था अलग, पढ़ें रामायण की अनोखी कहानी

रामायण की एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, एक तोते की वजह से सीता को श्रीराम(Jay Shree Ram) से अलग रहना पड़ा था। कथा के अनुसार, सीता एक बार अपने सखियों के साथ खेल रही थीं। तभी उन्होंने एक तोते और तोते की पत्नी को बातें करते हुए सुना। तोते की पत्नी कह रही थी कि अयोध्या के राजकुमार राम और सीता का विवाह होगा। सीता को यह सुनकर बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने तोते से पूछा कि वह भविष्य के बारे में कैसे जानता है। तोते ने बताया कि वह महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में रहता है, जहां हर दिन राम और सीता के जीवन के बारे में बताया जाता है। रामायण में श्रीराम (Jay Shree Ram) और सीता के वियोग की कहानी सभी जानते हैं। वनवास से लौटने के बाद एक धोबी के कहने पर सीता को राम से अलग रहना पड़ा था। क्या आपको पता है कि ये सब एक तोते की वजह से हुआ था, जिसने सीता को अपने पति का वियोग झेलने का श्राप दिया था। पढ़ें रामायण की ये अनूठी कथा। सीता को तोते की बातें सुनकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने तोते और तोते की पत्नी को पकड़ लिया और उनसे और भी बातें सुनने लगीं। इस बीच, तोते के पति ने आकर सीता से कहा कि उनकी पत्नी गर्भवती है और वह उसे जाने दें। लेकिन सीता ने उसकी एक न सुनी। इस पर तोते के पति को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने सीता को श्राप दे दिया कि जिस तरह से उसने उनकी पत्नी को गर्भावस्था में अलग कर दिया है, उसी तरह से सीता को भी गर्भावस्था में अपने पति से अलग होना पड़ेगा। इतना कहकर तोते के पति ने प्राण त्याग दिए। Jay shree Ram:प्रभु श्रीराम के जन्म की पौराणिक कथा सीता को इस बात का बहुत दुख हुआ। उन्होंने तोते के पति से माफी मांगी, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। श्राप का असर होने लगा और सीता को अपने पति से अलग होना पड़ा। 14 वर्षों के वनवास के बाद जब राम लौटे तो रावण द्वारा सीता का हरण हो चुका था। राम (Jay Shree Ram) ने सीता को दोषी ठहराया और उन्हें वनवास दे दिया। सीता वन में जाकर रहने लगीं और वहां उन्होंने एक पुत्र को जन्म दिया। कुछ समय बाद, राम को पता चला कि सीता निर्दोष हैं। उन्होंने सीता को वापस ले लिया और अयोध्या में वापस आ गए। लेकिन सीता को अपने पति के साथ रहने में अब कोई खुशी नहीं थी। उन्होंने राम से कहा कि वह वन में ही रहना चाहती हैं। राम ने सीता की इच्छा का सम्मान किया और उन्हें वन में छोड़ दिया। इस प्रकार, एक तोते के श्राप की वजह से सीता को अपने पति से अलग रहना पड़ा। यह एक महत्वपूर्ण सबक है कि हमें कभी भी दूसरों के साथ बुरा व्यवहार नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसका बुरा असर हमें भी हो सकता है।

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Vishnu bhagavanविष्‍णु के 10 अवतार : भगवान श्रीहरि के दशावतार की 10 प्रामाणिक कथाएं….

विष्णु के 10 अवतार हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के 10 अवतारों को दशावतार के रूप में जाना जाता है। इन अवतारों को धर्म की रक्षा और अधर्म के विनाश के लिए लिया गया था। 1.मत्स्य अवतार – मत्स्य अवतार में, विष्णु ने एक विशाल मछली का रूप लिया और प्रलय से पृथ्वी को बचाया। मत्स्य अवतार की कथा पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु Vishnu bhagavanने सृष्टि को प्रलय से बचाने के लिए मत्स्यावतार लिया था। इसकी कथा इस प्रकार है- कृतयुग के आदि में राजा सत्यव्रत हुए। राजा सत्यव्रत एक दिन नदी में स्नान कर जलांजलि दे रहे थे। अचानक उनकी अंजलि में एक छोटी सी मछली आई। उन्होंने देखा तो सोचा वापस सागर में डाल दूं, लेकिन उस मछली ने बोला- आप मुझे सागर में मत डालिए अन्यथा बड़ी मछलियां मुझे खा जाएंगी। तब राजा सत्यव्रत ने मछली को अपने कमंडल में रख लिया। मछली और बड़ी हो गई तो राजा ने उसे अपने सरोवर में रखा, तब देखते ही देखते मछली और बड़ी हो गई।  राजा को समझ आ गया कि यह कोई साधारण जीव नहीं है। राजा ने मछली से वास्तविक स्वरूप में आने की प्रार्थना की। राजा की प्रार्थना सुन साक्षात चारभुजाधारी भगवान विष्णु प्रकट हो गए और उन्होंने कहा कि ये मेरा मत्स्यावतार है। भगवान ने सत्यव्रत से कहा- सुनो राजा सत्यव्रत! आज से सात दिन बाद प्रलय होगी। तब मेरी प्रेरणा से एक विशाल नाव तुम्हारे पास आएगी। तुम सप्त ऋषियों, औषधियों, बीजों व प्राणियों के सूक्ष्म शरीर को लेकर उसमें बैठ जाना, जब तुम्हारी नाव डगमगाने लगेगी, तब मैं मत्स्य के रूप में तुम्हारे पास आऊंगा। उस समय तुम वासुकि नाग के द्वारा उस नाव को मेरे सींग से बांध देना। उस समय प्रश्न पूछने पर मैं तुम्हें उत्तर दूंगा, जिससे मेरी महिमा जो परब्रह्म नाम से विख्यात है, तुम्हारे ह्रदय में प्रकट हो जाएगी। तब समय आने पर मत्स्यरूपधारी भगवान विष्णु ने राजा सत्यव्रत को तत्वज्ञान का उपदेश दिया, जो मत्स्यपुराण नाम से प्रसिद्ध है। 2.कूर्म अवतार – कूर्म अवतार में, विष्णु ने एक कछुए का रूप लिया और समुद्र मंथन में मंदर पर्वत को संभाला। कूर्म अवतार की कथा धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु (Vishnu bhagavan)ने कूर्म (कछुए) का अवतार लेकर समुद्र मंथन में सहायता की थी। भगवान विष्णु के कूर्म अवतार को कच्छप अवतार भी कहते हैं। इसकी कथा इस प्रकार है- एक बार महर्षि दुर्वासा ने देवताओं के राजा इन्द्र को श्राप देकर श्रीहीन कर दिया। इन्द्र जब  भगवान विष्णु के पास गए तो उन्होंने समुद्र मंथन करने के लिए कहा। तब इन्द्र भगवान विष्णु के कहे अनुसार दैत्यों व देवताओं के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने के लिए तैयार हो गए। समुद्र मंथन करने के लिए मंदराचल पर्वत को मथानी एवं नागराज वासुकि को नेती बनाया गया। देवताओं और दैत्यों ने अपना मतभेद भुलाकर मंदराचल को उखाड़ा और उसे समुद्र की ओर ले चले, लेकिन वे उसे अधिक दूर तक नहीं ले जा सके। तब भगवान विष्णु ने मंदराचल को समुद्र तट पर रख दिया। देवता और दैत्यों ने मंदराचल को समुद्र में डालकर नागराज वासुकि को नेती बनाया। किंतु मंदराचल के नीचे कोई आधार नहीं होने के कारण वह समुद्र में डूबने लगा। यह देखकर भगवान विष्णु विशाल कूर्म (कछुए) का रूप धारण कर समुद्र में मंदराचल के आधार बन गए। भगवान कूर्म  की विशाल पीठ पर मंदराचल तेजी से घुमने लगा और इस प्रकार समुद्र मंथन संपन्न हुआ। Vishnu Ji 108 Naam:विष्णु के 108 नाम अर्थ और मंत्र सहित जरूर पढ़ें 3.वराह अवतार – वराह अवतार में, विष्णु ने एक सूअर का रूप लिया और हिरण्याक्ष राक्षस का वध कर पृथ्वी को बचाया। वराह अवतार की कथा धर्म ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने दूसरा अवतार वराह रूप में लिया था। वराह अवतार से जुड़ी कथा इस प्रकार है- पुरातन समय में दैत्य हिरण्याक्ष ने जब पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया तब ब्रह्मा की नाक से भगवान विष्णु वराह रूप में प्रकट हुए। भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर सभी देवताओं व ऋषि-मुनियों ने उनकी स्तुति की। सबके आग्रह पर भगवान वराह ने पृथ्वी को ढूंढना प्रारंभ किया। अपनी थूथनी की सहायता से उन्होंने पृथ्वी का पता लगा लिया और समुद्र के अंदर जाकर अपने दांतों पर रखकर वे पृथ्वी को बाहर ले आए। जब हिरण्याक्ष दैत्य ने यह देखा तो उसने भगवान विष्णु के वराह रूप को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों में भीषण युद्ध हुआ। अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। इसके बाद भगवान वराह ने अपने खुरों से जल को स्तंभित कर उस पर पृथ्वी को स्थापित कर दिया। 4.नृसिंह अवतार – नृसिंह अवतार में, विष्णु ने आधा मनुष्य और आधा सिंह का रूप लिया और हिरण्यकश्यप राक्षस का वध किया। नृसिंह अवतार की कथा भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकशिपु का वध किया था। इस अवतार की कथा इस प्रकार है- धर्म ग्रंथों के अनुसार दैत्यों का राजा हिरण्यकशिपु स्वयं को भगवान से भी अधिक बलवान मानता था। उसे मनुष्य, देवता, पक्षी, पशु, न दिन में, न रात में, न धरती पर, न आकाश में, न अस्त्र से, न शस्त्र से मरने का वरदान प्राप्त था। उसके राज में जो भी भगवान विष्णु की पूजा करता था उसको दंड दिया जाता था। उसके पुत्र का नाम प्रह्लाद था। प्रह्लाद बचपन से ही भगवान विष्णु का परम भक्त था। यह बात जब हिरण्यकशिपु का पता चली तो वह बहुत क्रोधित हुआ और प्रह्लाद को समझाने का प्रयास किया, लेकिन फिर भी जब प्रह्लाद नहीं माना तो हिरण्यकशिपु ने उसे मृत्युदंड दे दिया। हर बार भगवान विष्णु के चमत्कार से वह बच गया। हिरण्यकशिपु की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, वह प्रह्लाद को लेकर धधकती हुई अग्नि में बैठ गई। तब भी भगवान विष्णु की कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। जब हिरण्यकशिपु स्वयं प्रह्लाद को मारने ही वाला था तब भगवान विष्णु नृसिंह का अवतार लेकर खंबे से प्रकट हुए और उन्होंने अपने नाखूनों से हिरण्यकशिपु का वध कर दिया। 5.वामन अवतार – वामन अवतार में, विष्णु ने एक बौने का रूप लिया और बलि राक्षस से तीन पग भूमि का वरदान मांगा। बाद में, उन्होंने तीन पग में तीन

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Vishnu Ji 108 Naam:विष्णु के 108 नाम अर्थ और मंत्र सहित जरूर पढ़ें

Vishnu Ji Ke 108 Naam In Hindi:विष्णु हिंदू धर्म के तीन प्रमुख देवताओं में से एक हैं। उन्हें संहारकर्ता के रूप में जाना जाता है। विष्णु के 108 नाम हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना अर्थ और महत्व है। भगवान विष्णु के 108 नाम । Lord Vishnu 108 Name In Hindi 1. विष्णु- ॐ विष्णवे नमः।- सर्वोत्तम भगवान् 2. लक्ष्मीपति- ॐ लक्ष्मीपतये नमः।- देवी लक्ष्मी के पति 3. कृष्ण- ॐ कृष्णाय नमः।- श्याम 4. वैकुण्ठ- ॐ वैकुण्ठाय नमः।- भगवान विष्णु का घर 5. गरुडध्वजा- ॐ गरुडध्वजाय नमः।- भगवान विष्णु का नाम 6. परब्रह्म- ॐ परब्रह्मणे नमः।- परम निरपेक्ष सत्य 7. जगन्नाथ- ॐ जगन्नाथाय नमः।- ब्रह्मांड के भगवान 8. वासुदेव- ॐ वासुदेवाय नमः।- सबमे वास करने वाले 9. त्रिविक्रम- ॐ त्रिविक्रमाय नमः।-तीनों लोकों के विजेता 10. दैत्यान्तका- ॐ दैत्यान्तकाय नमः।- बुराइयों का नाश करने वाला 11. मधुरि- ॐ मधुरिपवे नमः।- मिठास 12. तार्क्ष्यवाहन- ॐ तार्क्ष्यवाहनाय नमः।- भगवान विष्णु के वाहन का नाम 13. सनातन- ॐ सनातनाय नमः।- शाश्वत प्रभु 14. नारायण- ॐ नारायणाय नमः।- सबको शरण देने वाले 15. पद्मनाभा- ॐ पद्मनाभाय नमः।- कमल के आकार की नाभि वाले भगवान 16. हृषीकेश- ॐ हृषीकेशाय नमः।- सभी इंद्रियों के भगवान 17. सुधाप्रदाय- ॐ सुधाप्रदाय नमः।- सुधा प्रदयः 18. माधव- ॐ माधवाय नमः।- ज्ञान के भंडार Jay shree Ram:प्रभु श्रीराम के जन्म की पौराणिक कथा 19. पुण्डरीकाक्ष- ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमः।- कमल नयन 20. स्थितिकर्ता- ॐ स्थितिकर्त्रे नमः।- भगवान विष्णु का एक नाम 21. परात्परा- ॐ परात्पराय नमः।- श्रेष्ठो में सर्वश्रेष्ठ 22. वनमाली- ॐ वनमालिने नमः।- जो वनो के माली है 23. यज्ञरूपा- ॐ यज्ञरूपाय नमः।- यज्ञरूप 24. चक्रपाणये– ॐ चक्रपाणये नमः।- चक्रधारी 25. गदाधर- ॐ गदाधराय नमः।- गदा धारण करने वाले 26. उपेन्द्र- ॐ उपेन्द्राय नमः।- इंद्र के भाई 27. केशव- ॐ केशवाय नमः।- जिसके बाल सुंदर हैं 28. हंस- ॐ हंसाय नमः।- हम्सा 29. समुद्रमथन– ॐ समुद्रमथनाय नमः।- समुद्रमथन 30. हरये- ॐ हरये नमः।- प्रकृति के भगवान 31. गोविन्द- ॐ गोविन्दाय नमः।- जो गायों और प्रकृति को प्रसन्न करता है 32. ब्रह्मजनक- ॐ ब्रह्मजनकाय नमः।- ब्रह्मजनक 33. कैटभासुरमर्दनाय- ॐ कैटभासुरमर्दनाय नमः।- कैतभासुरमर्दन 34. श्रीधर- ॐ श्रीधराय नमः।- श्री के धारक 35. कामजनकाय- ॐ कामजनकाय नमः।- कामजानक 36. शेषशायिनी- ॐ शेषशायिने नमः।- शेषशायिनी 37. चतुर्भुज- ॐ चतुर्भुजाय नमः।- चार सशस्त्र भगवान 38. पाञ्चजन्यधरा- ॐ पाञ्चजन्यधराय नमः।- पांचजन्यधारा 39. श्रीमत- ॐ श्रीमते नमः।- भगवान विष्णु का नाम 40. शार्ङ्गपाणये- ॐ शार्ङ्गपाणये नमः।- शार्ंगापन 41. जनार्दनाय- ॐ जनार्दनाय नमः।- जो सभी जरूरतमंद लोगों की मदद करता है – करुणा निधान 42. पीताम्बरधराय- ॐ पीताम्बरधराय नमः।- वह जो पीले वस्त्र पहनते है 43. देव- ॐ देवाय नमः।- दिव्य 44. सूर्यचन्द्रविलोचन- ॐ सूर्यचन्द्रविलोचनाय नमः।- सूर्यचंद्रविलोचना 45. मत्स्यरूप- ॐ मत्स्यरूपाय नमः।- भगवान मत्स्य भगवान विष्णु के एक अवतार 46. कूर्मतनवे– ॐ कूर्मतनवे नमः।- भगवान कूर्म भगवान विष्णु के एक अवतार 47. क्रोडरूप- ॐ क्रोडरूपाय नमः।- क्रोडारूपा 48. नृकेसरि- ॐ नृकेसरिणे नमः।- भगवान विष्णु के चौथे अवतार 49. वामन- ॐ वामनाय नमः।- भगवान विष्णु का बौना अवतार 50. भार्गव- ॐ भार्गवाय नमः।- भार्गव 51. राम- ॐ रामाय नमः।- भगवान विष्णु के सातवें अवतार 52. बली- ॐ बलिने नमः।- शक्ति के स्वामी 53. कल्कि- ॐ कल्किने नमः।- कलियुग के अंत में प्रकट होंगे भगवान विष्णु का एक और अवतार 54. हयानना- ॐ हयाननाय नमः।- हयानाना 55. विश्वम्भरा- ॐ विश्वम्भराय नमः।- विश्वम्भर 56. शिशुमारा– ॐ शिशुमाराय नमः।- शिशुमार 57. श्रीकराय- ॐ श्रीकराय नमः।- एक जो श्री देता है 58. कपिल- ॐ कपिलाय नमः।- महान ऋषि कपिला 59. ध्रुव- ॐ ध्रुवाय नमः।- परिवर्तन के बीच में परिवर्तनहीन 60. दत्तत्रेय- ॐ दत्तत्रेयाय नमः।- ब्रह्मांड में महान शिक्षक (गुरु) 61. अच्युता- ॐ अच्युताय नमः।- अचूक भगवान 62. अनन्त- ॐ अनन्ताय नमः।- अनंत प्रभु 63. मुकुन्द- ॐ मुकुन्दाय नमः।- मुक्ति दाता 64. दधिवामना- ॐ दधिवामनाय नमः।- दधिवमन 65. धन्वन्तरी- ॐ धन्वन्तरये नमः।- समुद्र मंथन के बाद प्रकट हुए भगवान विष्णु के आंशिक अवतार 66. श्रीनिवास- ॐ श्रीनिवासाय नमः।- श्री का स्थायी निवास 67. प्रद्युम्न- ॐ प्रद्युम्नाय नमः।- बहुत अमीर 68. पुरुषोत्तम- ॐ पुरुषोत्तमाय नमः।- सर्वोच्च आत्मा 69.श्रीवत्सकौस्तुभधरा- ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमः।- श्रीवास्तव कौस्तुभद्रा: 70. मुरारात- ॐ मुरारातये नमः।- मुरारत 71. अधोक्षजा- ॐ अधोक्षजाय नमः।- जिसकी जीवन शक्ति कभी नीचे की ओर नहीं बहती 72. ऋषभाय- ॐ ऋषभाय नमः।- भगवान विष्णु के अवतार जब वे राजा नाभि के पुत्र के रूप में प्रकट हुए 73. मोहिनीरूपधारी- ॐ मोहिनीरूपधारिणे नमः।- मोहिनीरूपधारी 74. सङ्कर्षण- ॐ सङ्कर्षणाय नमः।- संकर्षण 75. पृथवी- ॐ पृथवे नमः।- पृथ्वी 76. क्षीराब्धिशायिनी- ॐ क्षीराब्धिशायिने नमः।- क्षीरब्धिशायिनी 77. भूतात्म- ॐ भूतात्मने नमः।- भगवान विष्णु का एक नाम 78. अनिरुद्ध- ॐ अनिरुद्धाय नमः।- जिसे रोका नहीं जा सकता 79. भक्तवत्सल- ॐ भक्तवत्सलाय नमः।- जो अपने भक्तों पर प्रेम रखने वाले 80. नर- ॐ नराय नमः।- मार्गदर्शक 81. गजेन्द्रवरद- ॐ गजेन्द्रवरदाय नमः।- गजेंद्र (हाथी) को वरदान देने वाले 82. त्रिधाम्ने- ॐ त्रिधाम्ने नमः।-त्रिधमने 83. भूतभावन- ॐ भूतभावनाय नमः।- भूतभवन 84.श्वेतद्वीपसुवास्तव्याय- ॐ श्वेतद्वीपसुवास्तव्याय नमः।- श्वेताद्वीपसुवस्ताव्यय 85.सनकादिमुनिध्येयाय- ॐ सनकादिमुनिध्येयाय नमः।- संकादिमुनिध्याय 86. भगवत- ॐ भगवते नमः।- भगवान से संबंधित (भगवान:) 87. शङ्करप्रिय- ॐ शङ्करप्रियाय नमः।- शंकरप्रिय 88. नीलकान्त- ॐ नीलकान्ताय नमः।- नीलकंठ 89. धराकान्त- ॐ धराकान्ताय नमः।- धराकांता 90. वेदात्मन- ॐ वेदात्मने नमः।- वेदों की आत्मा भगवान विष्णु में निहित है 91. बादरायण- ॐ बादरायणाय नमः।- बादरायण 92. भागीरथीजन्मभूमि- पादपद्मा ॐ भागीरथीजन्मभूमि पादपद्माय नमः।- भागीरथी-जन्मभूमि-पदपद्म: 93. सतां प्रभवे- ॐ सतां प्रभवे नमः।- सतम-प्रभावे 94. स्वभुवे- ॐ स्वभुवे नमः।- स्वाभुवे 95. विभव- ॐ विभवे नमः।- महिमा और समृद्धि 96. घनश्याम- ॐ घनश्यामाय नमः।- भगवान कृष्ण 97. जगत्कारणाय– ॐ जगत्कारणाय नमः।- जगतकरणाय 98. अव्यय- ॐ अव्ययाय नमः।- विनाश के बिना 99. बुद्धावतार- ॐ बुद्धावताराय नमः।- भगवान विष्णु का एक अवतार 100. शान्तात्म- ॐ शान्तात्मने नमः।- शांतात्मा 101. लीलामानुषविग्रह- ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः।- लीला-मानुष-विग्रह: 102. दामोदर- ॐ दामोदराय नमः।- जिसका पेट तीन रेखाओं से अंकित है 103. विराड्रूप- ॐ विराड्रूपाय नमः।- वीरद्रोपा 104. भूतभव्यभवत्प्रभ- ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमः।- भूतभववतप्रभा 105. आदिदेव- ॐ आदिदेवाय नमः।- देवो के भगवन 106. देवदेव- ॐ देवदेवाय नमः।- देवताओं के देवता 107. प्रह्लादपरिपालक- ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमः।- प्रहलादपरिपालक 108. श्रीमहाविष्णु- ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः।- भगवान विष्णु का नाम Vishnu Ji 108 Naam:भगवान विष्णु के 108 नामों का जाप करने के फायदे कहते हैं यदि नित्य पूजन के समय (Vishnu Ji 108 Naam)भगवान विष्णु के 108 नामों का स्मरण किया जाए, तो इससे आपके चारों ओर सकारात्मक शक्तियों का संचार होता है। जिससे आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। इन नामों का जाप करने से माता लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है।

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Jay shree Ram:प्रभु श्रीराम के जन्म की पौराणिक कथा

प्रभु श्रीराम Ram का जन्म त्रेता युग में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के घर हुआ था। महाराज दशरथ अयोध्या के महान राजा थे, लेकिन उन्हें कोई पुत्र नहीं था। वे पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाना चाहते थे। उन्होंने अपने गुरु वशिष्ठ जी से सलाह ली और यज्ञ का आयोजन किया महाराजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति हेतु यज्ञ आरंभ करने की ठानी। महाराज की आज्ञानुसार श्यामकर्ण घोड़ा चतुरंगिनी सेना के साथ छुड़वा दिया गया। महाराज दशरथ ने समस्त मनस्वी, तपस्वी, विद्वान ऋषि-मुनियों तथा वेदविज्ञ प्रकाण्ड पण्डितों को यज्ञ सम्पन्न कराने के लिये बुलावा भेज दिया। निश्‍चित समय आने पर समस्त अभ्यागतों के साथ महाराज दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ जी तथा अपने परम मित्र अंग देश के अधिपति लोभपाद के जामाता ऋंग ऋषि को लेकर यज्ञ मण्डप में पधारे। इस प्रकार महान यज्ञ का विधिवत शुभारंभ किया गया। सम्पूर्ण वातावरण वेदों की ऋचाओं के उच्च स्वर में पाठ से गूंजने तथा समिधा की सुगन्ध से महकने लगा। समस्त पण्डितों, ब्राह्मणों, ऋषियों आदि को यथोचित धन-धान्य, गौ आदि भेंट कर के सादर विदा करने के साथ यज्ञ की समाप्ति हुई। राजा दशरथ ने यज्ञ के प्रसाद चरा(खीर) को अपने महल में ले जाकर अपनी तीनों रानियों में वितरित कर दिया। प्रसाद ग्रहण करने के परिणामस्वरूप तीनों रानियों ने गर्भधारण किया। Shree Ram Bhagwan Story:भगवान राम के बारे में सुनी-अनसुनी 10 कथाएं यज्ञ के समापन पर, ब्रह्मा जी ने दशरथ को चार पुत्र प्राप्त होने का वरदान दिया। इसके बाद, कौशल्या ने चैत्र शुक्ल नवमी के दिन राम, कैकेयी ने भरत, सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। जब चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र में सूर्य, मंगल शनि, वृहस्पति तथा शुक्र अपने-अपने उच्च स्थानों में विराजमान थे, कर्क लग्न का उदय होते ही महाराज दशरथ की बड़ी रानी कौशल्या के गर्भ से एक शिशु का जन्म हुआ सम्पूर्ण राज्य में आनन्द मनाया जाने लगा। महाराज के चार पुत्रों के जन्म के उल्लास में गन्धर्व गान करने लगे और अप्सराएं नृत्य करने लगीं। देवता अपने विमानों में बैठ कर पुष्प वर्षा करने लगे। महाराज ने उन्मुक्त हस्त से राजद्वार पर आए भाट, चारण तथा आशीर्वाद देने वाले ब्राह्मणों और याचकों को दान दक्षिणा दी। पुरस्कार में प्रजा-जनों को धन-धान्य तथा दरबारियों को रत्न, आभूषण प्रदान किए गए। चारों पुत्रों का नामकरण संस्कार महर्षि वशिष्ठ के द्वारा किया गया तथा उनके नाम रामचन्द्र, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न रखे गए। आयु बढ़ने के साथ ही साथ रामचन्द्र (Ram) गुणों में भी अपने भाइयों से आगे बढ़ने तथा प्रजा में अत्यंत लोकप्रिय होने लगे। उनमें अत्यन्त विलक्षण प्रतिभा थी जिसके परिणामस्वरू अल्प काल में ही वे समस्त विषयों में पारंगत हो गए। उन्हें सभी प्रकार के अस्त्र-शस्त्रों को चलाने तथा हाथी, घोड़े एवं सभी प्रकार के वाहनों की सवारी में उन्हें असाधारण निपुणता प्राप्त हो गई। वे निरन्तर माता-पिता और गुरुजनों की सेवा में लगे रहते थे। उनका अनुसरण शेष तीन भाई भी करते थे। गुरुजनों के प्रति जितनी श्रद्धा भक्ति इन चारों भाइयों में थी उतना ही उनमें परस्पर प्रेम और सौहार्द भी था। महाराज दशरथ का हृदय अपने चारों पुत्रों को देख कर गर्व और आनन्द से भर उठता था। Ram jay shree ram

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Swapna Shastra: आपको भी सपने में दिखते हैं भगवान

सपने में भगवान देखना एक शुभ सपना माना जाता है। यह सपना कई तरह के संकेतों को देता है। यह सपना इस बात का संकेत देता है कि आपका जीवन भगवान की कृपा से सुरक्षित और सुखमय है। यह सपना इस बात का भी संकेत देता है कि आपके जीवन में कोई नई शुरुआत होने वाली है। यह सपना इस बात का भी संकेत देता है कि आप अपनी आध्यात्मिकता में वृद्धि कर रहे हैं। सपने Swapna में भगवान को किस रूप में देखते हैं, उसके आधार पर सपने का अर्थ अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए, यदि आप सपने में भगवान को मुस्कुराते हुए देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका जीवन खुशियों से भरा रहेगा। यदि आप सपने में भगवान को क्रोधित देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपको अपने व्यवहार में सुधार करने की आवश्यकता है। यदि आप सपने में भगवान से बात करते हैं, तो इसका मतलब है कि भगवान आपको कुछ महत्वपूर्ण बात बताने की कोशिश कर रहे हैं। Dream Interpretation:जब आप सपने में किसी को मरते हुए देखते हैं तो इसका क्या मतलब है? सपने में भगवान के दर्शन का अर्थ व्यक्ति की आध्यात्मिकता और उसके धार्मिक विश्वासों पर भी निर्भर करता है। जो लोग धार्मिक हैं, उनके लिए सपने में भगवान के दर्शन एक अद्भुत अनुभव होता है। यह अनुभव उन्हें आध्यात्मिक सुख और शांति प्रदान करता है। Swapna me Bhagwan ko Dekhna सही मार्ग पर चलने का संकेत भगवान का सपने में आना सही मार्ग पर चलने का संकेत भी हो सकता है. ताकि आप ग़लत कार्यों से दूर रहें और धर्म की मार्ग पर चले. Swapna सपने में शिवलिंग को देखना हिंदू धर्म में शिवलिंग को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। यह ब्रह्मांड का केंद्र बिंदु माना जाता है। शिवलिंग को सभी बाधाओं और कष्टों को दूर करने वाला माना जाता है। सपने में शिवलिंग देखना एक शुभ सपना माना जाता है। यह सपना कई तरह के संकेतों को देता है। यह सपना इस बात का संकेत देता है कि आपके जीवन में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होने वाला है। यह सपना Swapna इस बात का भी संकेत देता है कि आपके जीवन में कोई नई शुरुआत होने वाली है। यह सपना इस बात का भी संकेत देता है कि आप अपनी आध्यात्मिकता में वृद्धि कर रहे हैं। Swapna me Ram ji ko Dekhna सपने में राम जी को देखना सपने में भगवान राम को देखने का मतलब होता है कि, आपको भगवान राम की तरह कर्तव्य की मार्ग पर चलना है. भगवान राम सपने में आकर बताने है कि आपको हमेशा सही का साथ देना है. Swapna me maa Durga ko Dekhna सपने में मां दुर्गा को देखना सपने में मां दुर्गा को किस रूप में देखते हैं, उसके आधार पर सपने का अर्थ अलग-अलग होता है। उदाहरण के लिए, यदि आप सपने (Swapna)में मां दुर्गा को लाल रंग के वस्त्र में देखती हैं, तो इसका मतलब है कि आपके जीवन में कोई बड़ी खुशी आने वाली है। यदि आप सपने में मां दुर्गा को मुस्कुराते हुए देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपका जीवन खुशियों से भरा रहेगा। यदि आप सपने में मां दुर्गा को क्रोधित देखते हैं, तो इसका मतलब है कि आपको अपने व्यवहार में सुधार करने की आवश्यकता है।

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Makar Sankranti 2024:वर्ष 2024 में कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व

मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पूरे भारत और नेपाल में भिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।मकर संक्रांति Makar Sankranti के दिन कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। Makar Sankranti 2024 Dateवर्ष 2024 में मकर संक्रांति 15 जनवरी 2024 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव प्रातः 02 बजकर 54 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा। Makar Sankrantiमकर संक्रांति पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक मकर संक्रांति महा पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट तक दूर होते हैं शनि दोषमकर संक्रांति पर भगवान सूर्य की उपासना, दान, गंगा स्नान और शनिदेव की पूजा करने से सूर्य और शनि से संबंधित तमाम तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। दरअसर सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं और शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं,उसमें सूर्य के प्रवेश मात्र से शनि का प्रभाव क्षीण हो जाता है। अयोध्या का पौराणिक महत्व: सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या, जानिए किसने बसाई यह नगरी Makar Sankranti मकर संक्रांति का महत्व मकर संक्रांति के दिन कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। मकर संक्रांति Makar Sankranti का धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में प्रकाश और ज्ञान का उदय होता है। मकर संक्रांति की पौराणिक मान्यताएं मकर संक्रांति (Makar Sankranti)के दिन ही भीष्म पितामह महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में मकर संक्रान्ति को प्राण त्यागे थे। मकर संक्रांति पर देवी यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी और भगीरथ के पूर्वज महाराज सगर के पुत्रों को मुक्ति प्रदान की थी। मकर संक्रांति पर उपायमकर संक्रांति पर कुछ उपाय करने से कष्टों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए ऐसा करने से दस हजार गौ दान का फल प्राप्त होता है। इस दिन ऊनी कपड़े, कम्बल, तिल और गुड़ से बने व्यंजन और खिचड़ी दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। 

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Dream Interpretation:जब आप सपने में किसी को मरते हुए देखते हैं तो इसका क्या मतलब है?

सपने Dream में किसी को मरते हुए देखना अक्सर परिवर्तन या समाप्ति का प्रतीक होता है। यह किसी पुराने रिश्ते, स्थिति या जीवन के चरण के अंत का संकेत दे सकता है। यह नए अवसरों या शुरुआत के लिए भी एक संकेत हो सकता है। यदि आप सपने में किसी को मरते हुए देख रहे हैं, तो यह संभवतः आपकी भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य स्थिति को दर्शाता है। किसी के मरने का सपना देखने के आपके जीवन की स्थिति के आधार पर कई तरह के अर्थ हो सकते हैं, ये सपने परेशान करने वाले हो सकते हैं, लेकिन अंततः भविष्य में दिशा और संभावित विकास में सकारात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। Dream :सपने में जीवित व्यक्ति को मृत अवस्था में देखना परिवर्तन का संकेत  यदि आपको ऐसा कोई भी सपना दिखाई देता है तो समझें कि जल्द ही आप किसी बड़े परवर्तन से गुजरने वाले हैं। दरअसल यह सपना (Dream)इसलिए दिखाई दे सकता है क्योंकि आप किसी तरह के बदलाब की उम्मीद रखते हैं और आप उस बदलाव को हासिल करने में असमर्थ हैं। यह सपना उस व्यक्ति से जुड़ा हो सकता है जिसे आप सपने में मृत अवस्था में देख रहे हैं। आप जिस व्यक्ति के बारे में सपना देख रहे हैं ये उसके जीवन के लिए परिवर्तन का प्रतीक हो सकता है। यह सपना जीवन के एक चरण के अंत और दूसरे की शुरुआत का प्रतिनिधित्व कर सकता है। Dream:सपने में जीवित व्यक्ति को मृत देखना किसी बीमारी का संकेत  ऐसा माना जाता है कि अगर आप सपने में किसी जीवित व्यक्ति को मृत अवस्था में देखते हैं तो आपके घर में किसी बीमारी का आगमन हो सकता है। ऐसा जरूरी नहीं है कि उस व्यक्ति को बीमारी आए जो आपको सपने में दिख रहा है, बल्कि ये किसी भी करीबी की सेहत से जुड़ा हुआ हो सकता है। ऐसे सपने का मतलब है कि आपको अपनी सेहत का और करीबियों की भी सेहत का ध्यान रखने की जरूरत है।  Dream:सपने में जीवित व्यक्ति को मृत देखना उस व्यक्ति से दूरी का संकेत  सपने में किसी जीवित व्यक्ति को मृत के रूप में देखना उस व्यक्ति से दूरी या भावनात्मक अलगाव की भावना का प्रतीक हो सकता है। यह इस बात का संकेत भी हो सकता है की आपके रिश्ते जल्द ही उस व्यक्ति के साथ बिगड़ सकते हैं। ऐसा हमेशा जरूरी नहीं है, लेकिन कुछ लोगों के लिए इस सपने का मतलब किसी करीबी से अलगाव हो सकता है।  Sapne Me Bandar Dekhna: क्या आपको भी सपने में बार-बार दिखाई देते हैं बंदर ? Dream:सपने में जीवित व्यक्ति को मृत देखना किसी बड़े नुकसान का डर यदि आप ऐसा कोई भी सपना देखते हैं तो ये आपके किसी नुकसान के दर को दिखाता है। (सपने में इन 5 चीजों का दिखाई देना माना जाता है बेहद शुभ, जानिए हर एक का मतलब )ऐसे सपने का मतलब यह है कि आपको किसी बड़े नुकसान से गुजरना पड़ सकता है। यह आपके भीतर के भय का प्रतीक हो सकता है। ऐसा संभव है कि आप अपने किसी करीबी की सेहत के लिए इतने ज्यादा चिंतित हैं कि आपको सपने में वह मृत अवस्था में दिखाई दे रहा है। हालांकि यह आपकी कल्पना मात्र है जो ऐसे सपने का कारण बनती है।  Dream:सपने में स्वयं को मृत अवस्था में देखना देता है ये संकेत यदि आपको कोई ऐसा सपना दिखाई देता है जिसमें आप खुद को ही मृत अवस्था  में देख रहे हैं तो ये आपके मानसिक तनाव की वजह से भी हो सकता है। ऐसा भी संभव है कि आपको वास्तविकता में अपनी मृत्यु का भय इतना ज्यादा है कि सपने में आप ऐसी चीजें देख रहे हैं। ये सपना आपकी बढती हुई जिम्मेदारियों का भी संकेत हो सकता है। असल जीवन में आप अपनी जिम्मेदारियों से इतना घिरे हुए हैं कि आपको इस बात का डर सता रहा है कि आप जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं और इसी वजह से ऐसे सपने दिखाई दे रहे हैं।  कुछ संस्कृतियों का मानना है कि ऐसे सपने आपके आध्यात्मिक क्षेत्र की झलक दिखा सकते हैं। किसी जीवित व्यक्ति को मृत अवस्था में देखना आध्यात्मिक दुनिया का एक ऐसा संकेत हो सकता है कि आपको ईश्वर से जुड़ने की जरूरत है।   सपने हमेशा आपके वास्तविक जीवन से संबंध रखें ऐसा जरूरी नहीं होता है, लेकिन कुछ सपने ऐसे हो सकते हैं जो आपके लिए भविष्य का संकेत देते हों। 

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Lohri 2024: लोहड़ी के दिन क्या करें और क्या न करें? यहां जानें

लोहड़ी एक लोकप्रिय हिंदू त्योहार है जो पंजाबी समुदाय द्वारा मनाया जाता है। यह त्योहार मकर संक्रांति से एक दिन पहले मनाया जाता है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है। लोहड़ी का अर्थ है “लौ”। इस दिन लोग एकत्र होकर आग जलाते हैं और उसमें गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की, गुड़ आदि सामग्री अर्पित करते हैं। इस त्योहार का मुख्य उद्देश्य नई फसल की खुशी मनाना और भगवान सूर्य का आभार व्यक्त करना है। लोहड़ी के शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को मिठाइयां देकर लोहड़ी (Lohri) की शुभकामनाएं देते हैं। यह पर्व नए फसल के तैयार होने की खुशी में मनाया जाता है। इस दिन शाम को सब लोग एक जगह इकट्ठा होकर आग जलाते हैं। इस अलाव में अग्नि में गेहूं की बालियां रेवड़ी मूंगफली खील चिक्की गुड़ से निर्मित चीजें अर्पित करते हैं। Lohri 2024 लोहड़ी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर नए वस्त्र धारण करें। फिर घर के आंगन में अग्नि जलाकर उसमें गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की, गुड़ आदि सामग्री अर्पित करें। अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करें और भगवान सूर्य की आराधना करें। हर वर्ष मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी Lohri का पर्व मनाया जाता है। इस त्योहार को पंजाबी समुदाय के लोग बेहद उत्साह के साथ मनाते हैं। इस शुभ अवसर पर लोग एक-दूसरे को मिठाइयां देकर लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हैं। इस दिन कुछ कार्यों को करने की सख्त मनाही है, जिनको करने से व्यक्ति को जीवन में परेशानियों को सामना करना पड़ता है। चलिए आपको बताते हैं लोहड़ी के दिन क्या करें और क्या न करें। लोहड़ी के दिन क्या करें लोहड़ी के अवसर पर गरीब कन्याओं को रेवडी खिलानी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से अन्न की कमी नहीं होती है। Calendar 2024 : साल 2024 के व्रत-त्योहार की तारीखें, होली से लेकर रामनवमी, नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा तक सनातन धर्म में अग्नि शुभता और पवित्रता की प्रतीक है। लोहड़ी के दिन अग्नि देव की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। आर्थिक तंगी से छुटकारा पाने के लिए लाल रंग के कपड़े में गेहूं बांधकर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दें। माना जाता है कि ऐसा करने से सदैव मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। लोहड़ी की पूजा करें। अग्नि को प्रणाम करें। गरीबों को दान दें। गरीब कन्याओं को रेवड़ी खिलाएं। एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएं दें। Lohri 2024: लोहड़ी के दिन क्या न करें लोहड़ी के दिन तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस दिन किसी का अपमान नहीं करना चाहिए। काले वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए। लोहड़ी में अर्पित करने वाले चीजें जैसे कि मूंगफली और रेवड़ी आदि की पहले पूजा करें। लोहड़ी Lohri की अग्नि में झूठी चीजें अर्पित करनी चाहिए। लहसुन, प्याज और मीट का सेवन न करें। काले रंग के कपड़े न पहनें। लड़ाई-झगड़ा न करें। झूठ न बोलें। Lohri 2024:लोहड़ी की पूजा: लोहड़ी के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर नए वस्त्र धारण करें। फिर घर के आंगन में अग्नि जलाकर उसमें गेहूं की बालियां, रेवड़ी, मूंगफली, खील, चिक्की, गुड़ आदि सामग्री अर्पित करें। अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करें और भगवान सूर्य की आराधना करें। डिसक्लेमर: ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’

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Ayodhya:अयोध्या का पौराणिक महत्व: सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या, जानिए किसने बसाई यह नगरी

अयोध्या (Ayodhya)का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। यह माना जाता है कि भगवान राम (ram bhagwan) का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। रामायण, हिंदू धर्म का एक प्रमुख महाकाव्य, अयोध्या में भगवान राम ram की कहानी को बताता है। राम मंदिर के शिलान्यास का हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए बहुत महत्व है। यह एक ऐतिहासिक क्षण होगा, जो हिंदू धर्म के लिए एक नए युग की शुरुआत को चिह्नित करेगा। Ayodhya अयोध्या के धार्मिक महत्व अयोध्या भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र शहरों में से एक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भगवान राम, हिंदू धर्म के सबसे लोकप्रिय देवताओं में से एक का जन्मस्थान है। अयोध्या को सप्तपुरियों में से एक माना जाता है, जो सात पवित्र शहर हैं। ये शहर मोक्ष का मार्ग प्रदान करते हैं। अयोध्या में कई महत्वपूर्ण मंदिर और धार्मिक स्थल हैं। इनमें से कुछ सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में राम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी मंदिर और लक्ष्मण मंदिर शामिल हैं। Ayodhya अयोध्या की स्थापना किसने की ?रामायण के अनुसार सरयू नदी के किनारे बसा अयोध्या Ayodhya नगर सूर्य पुत्र वैवस्वत मनु के द्वारा स्थापना की गई थी। वैवस्वत मनु का जन्म लगभग 6673 ईसा पूर्व में हुआ था। मनु ब्रह्रााजी के पौत्र कश्यप की संतान थे। बाद में मनु के 10 पुत्र हुए जिनमें- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यंत, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध थे। इक्ष्वाकु कुल में कई प्रतापी राजा, मुनि और भगवान हुए है। इक्ष्वाकु कुल में भगवान राम का जन्म हुआ था। Ayodhya अयोध्या की स्थापना कैसे हुई ?  स्कंद पुराण के अनुसार जिस तरह से काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है उसी प्रकार अयोध्या भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर विराजमान है। पौराणिक कथा के अनुसार मनु ने ब्रह्रााजी से अपने लिए एक नगर के निर्माण की बात को लेकर उनके पास पहुंचे तब ब्रह्रााजी जी उन्हें भगवान विष्णु के पास भेजा। तब भगवान विष्णु ने मनु के लिए साकेतधाम का चयन किया। Shree Ram Bhagwan Story:भगवान राम के बारे में सुनी-अनसुनी 10 कथाएं साकेतधाम के चयन के बाद ब्रह्रााजी और मनु के साथ विष्णुजी ने देवताओं के शिल्पकार विश्वकर्मा को भेज दिया। विष्णु जी ने महर्षि वशिष्ठ को भी भेजा। वशिष्ठ मुनि ने सरयू नदी के किनारे लीला भूमि का चयन किया। भूमि चयन के बाद देवशिल्पी नगर के निर्माण की प्रकिया आरंभ की। रामायण में अयोध्या (Ayodhya) का जिक्र कौशल जनपद के रूप में भी किया गया। भगवान राम ram bhagwan के जन्म के समय इस नगर का नाम अवध के रूप जाना जाता था। अयोध्या (Ayodhya) का एक नाम साकेत भी है। अयोध्या के अलावा कपिलवस्तु, वैशाली, मिथिला और कौशल में इक्ष्वाकु वंश के शासकों ने राजपाठ चलाया।   सप्तपुरी हिंदू धर्म में सात पवित्र शहरों को संदर्भित करता है। इन शहरों को मोक्ष प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सप्तपुरियों का उल्लेख कई हिंदू ग्रंथों में मिलता है, जिनमें ऋग्वेद, पुराण और रामायण शामिल हैं। सभी प्राचीन सप्तपुरियां और उनका महत्वमथुरामथुरा यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे। मथुरा का काफी धार्मिक महत्व है।उज्जैनउज्जैन को उज्जयिनी और अवंतिका के नाम से भी जाना जाता है। यह नगर शिप्रा नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां पर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्व स्थित है और प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ लगता है।काशीहिंदू धर्म में काशी का विशेष महत्व है। यह भगवान शिव की नगरी है। यह गंगा नदी के किनारे पर बसा है। यह सप्तपुरियों में से एक है। भोले भंडारी की इस नगरी में काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है।हरिद्वारहरिद्वार भी एक प्रमुख धार्मिक नगरी है। हरिद्वार भी सप्तपुरियों में एक है। यह पर भी प्रयाग की भांति कुंभ मेला लगता है।द्वारिका धामद्वारिका धाम गुजरात में स्थित है। यह भगवान श्रीकृष्ण का धाम है। यह नगर समुद्र के किनारे स्थित है। द्वारिका धाम भी सप्तपुरियों में एक है।कांचीपुरमकांचीपुरम का संबंध देवी पार्वती से है। यह वेगवदी नदी के किनारे बसा हुआ है। कांचीपुरम में बहुत ही धार्मिक स्थल और मंदिर है। यह भी सप्तपुरियों में से एक है।Ayodhya अयोध्या अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। यह धार्मिक नगर सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। अयोध्या नगरी की स्थापना राजा मनु ने किया।

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Vishvamitr:विश्वामित्र ने अपने ही पुत्रों को चांडाल बनने का श्राप क्यों दिया, उनसे कौनसी भूल हुई ?

इस कथा से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें दूसरों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। हमें अपने स्वार्थ को दूसरों के ऊपर नहीं रखना चाहिए। दूसरों की मदद करने से हमें पुण्य प्राप्त होता है और हमारा जीवन सफल होता है। विश्वामित्र Vishvamitr के पुत्रों ने अपने स्वार्थ के कारण शुनःशेप की मदद करने से इंकार कर दिया। इससे उन्हें बुरा परिणाम भुगतना पड़ा। उन्हें कुत्ते का मांस खाने वाली मुष्टिक आदि जातियों में जन्म लेकर पूरे एक हजार वर्षां तक इस पृथ्वी पर रहना पड़ा। ऋचीक मुनि के मझले पुत्र ने खुद को राजा अम्बरीष को यज्ञ बलि के पुरुष के रूप में बेच दिया। महायशस्वी राजा अम्बरीष शुनःशेप को साथ लेकर दोपहर के समय पुष्कर तीर्थ में आये और वहाँ विश्राम करने लगे। जब वे विश्राम करने लगे, उस समय महायशस्वी शुनःशेप ज्येष्ठ पुष्कर में आकर ऋषियों के साथ तपस्या करते हुए अपने मामा विश्वामित्र से मिला। वह अत्यन्त आतुर एवं दीन हो रहा था। उसके मुख पर विषाद छा गया था। वह भूख-प्यास और परिश्रम से दीन हो मुनि की गोद में गिर पड़ा। उसने कहा, न मेरे माता हैं, न पिता, फिर भाई-बन्धु कहाँ से हो सकते हैं? आप ही मेरी रक्षा करें। आप सबके रक्षक तथा अभीष्ट वस्तु की प्राप्ति कराने वाले हैं। ये राजा अम्बरीष कृतार्थ हो जायँ और मैं भी विकार रहित दीर्घायु होकर सर्वोत्तम तपस्या करके स्वर्गलोक प्राप्त कर लूँ, कोई ऐसी कृपा आप करिये। जैसे पिता अपने पुत्र की रक्षा करता है, उसी प्रकार आप मुझे इस पापमूलक विपत्ति से बचाइये। शुनःशेप की वह बात सुनकर महातपस्वी विश्वामित्र Vishvamitr ने उसे सांत्वना दी और अपने पुत्रों से इस प्रकार के वचन कहे। प्राचीन मंदिर Ayodhya शुभ की अभिलाषा रखने वाले पिता जिस पारलौकिक हित के उद्देश्य से पुत्रों को जन्म देते हैं, उसकी पूर्ति का यह समय आ गया है। यह बालक मुनि कुमार मुझसे अपनी रक्षा चाहता है, तुम लोग अपना जीवनमात्र देकर इसका प्रिय करो। तुम सब-के-सब पुण्यात्मा और धर्मपरायण हो, अतः राजा के यज्ञ में पशु बनकर अग्निदेव को तृप्ति प्रदान करो। इससे शुनःशेप सनाथ होगा, राजा का यज्ञ भी बिना किसी विघ्न-बाधा के पूर्ण हो जायगा, देवता भी तृप्त होंगे और तुम्हारे द्वारा मेरी आज्ञा का पालन भी हो जायगा। विश्वामित्र मुनि का वह वचन सुनकर उनके मधुच्छन्द आदि पुत्र अभिमान और अवहेलनापूर्वक वचन कहने लगे। आप अपने बहुत-से पुत्रों को त्यागकर दूसरे के एक पुत्र की रक्षा कैसे करते हैं? जैसे पवित्र भोजन में कुत्ते का मांस पड़ जाय तो वह अग्राह्य हो जाता है, उसी प्रकार जहाँ अपने पुत्रों की रक्षा आवश्यक हो, वहाँ दूसरे के पुत्र की रक्षा के कार्य को हम अकर्त्तव्य के रूप में देखते है। अपने पुत्रों का ऐसा वचन सुनकर विश्वामित्र (Vishvamitr)क्रोध से लाल हो गए और उन्हें शाप दिया कि मेरी आज्ञा का उल्लङ्घन करके जो यह दारुण एवं रोमाञ्चकारी बात तुमने मुँह से निकाली है, इस अपराध के कारण तुम सब लोग भी वसिष्ठ के पुत्रों की भाँति कुत्ते का मांस खाने वाली मुष्टिक आदि जातियों में जन्म लेकर पूरे एक हजार वर्षां तक इस पृथ्वी पर रहोगे।

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Calendar 2024 : साल 2024 के व्रत-त्योहार की तारीखें, होली से लेकर रामनवमी, नवरात्रि, दिवाली और छठ पूजा तक

जनवरी, 2024 को नए साल की शुरुआत हो गई है। अंग्रेजी कैलेंडर (Calendar 2024) के अनुसार, साल का पहला महीना जनवरी से शुरू होता है। इस बार नया साल 2024 सोमवार से शुरू हो रहा है। यह दिन भगवान शिवजी का प्रिय वार है। साथ ही इस बार नए साल के पहले दिन आयुष्मान योग का भी निर्माण हुआ है। आयुष्मान योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। Calendar 2024 हिंदी कैलेंडर के अनुसार हिंदी कैलेंडर के अनुसार, नए साल की शुरुआत पौष माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि और मघा नक्षत्र में होगी। इस दिन सुबह 08:36 मिनट तक मघा नक्षत्र है और फिर बाद पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा। नए साल के शुभ योग नए साल के पहले दिन बहुत ही शुभ और मंगलकारी आयुष्मान योग भी बनेगा। आयुष्मान योग को बहुत ही शुभ और मंगलकारी योग माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में शिवजी की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। Calendar 2024: हिंदू कैलेंडर 2024, जानें सालभर के सभी  व्रत-त्योहारों की लिस्ट नए साल का इंतजार सभी को नए साल के आने का बेसब्री से इंतजार रहता है। साथ ही हर कोई साल में आने वाले प्रमुख व्रत-त्योहार की तारीख को लेकर उत्सुक रहता है। Festivals And Holidays List In 2024: साल 2024 के पहले महीने में सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। फिर 14 फरवरी को बसंत पंचमी, 08 मार्च को महाशिवरात्रि, 25 मार्च को होली, 19 अगस्त को रक्षाबंधन और 01 नवंबर 2024 को दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं साल 2024 में जनवरी से लेकर दिसंबर के महीने में कब-कब और कौन-कौन से व्रत-त्योहार मनाए जाएंगे। साल 2024 के प्रमुख त्योहार और तारीखें Calendar 2024 15 जनवरी  मकर संक्रंति  14 फरवरी बसंत पंचमी   08 मार्च महाशिवरात्रि   25 मार्च   होली 09 अप्रैल चैत्र नवरात्रि                 17 अप्रैल राम नवमी                   10 मई अक्षय तृतीया                 09 अगस्त नाग पंचमी                     19 अगस्त रक्षा बंधन                     26 अगस्त जन्माष्टमी                     07 सितंबर गणेश चतुर्थी                 03 अक्तूबर शरद नवरात्रि             12 अक्तूबर दशहरा                       20 अक्तूबर करवा चौथ                 29 अक्तूबर धनतेरस                     01 नवंबर दिवाली                       07 नवंबर छठ पूजा       साल के पहले महीने यानी जनवरी में मकर संक्रांति, पोंगल और सूर्य के उत्तरायण का त्योहार मनाया जाएगा। फरवरी माह के शुरुआत में षटतिला एकादशी फिर 14 फरवरी को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का बड़ा त्योहार मनाया जाएगा। मार्च के महीने में महाशिवरात्रि फिर 25 मार्च को होली का त्योहार मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार अप्रैल माह में चैत्र नवरात्रि और राम नवमी जैसे बड़े त्योहार आएंगे। मई माह में वैशाख अमावस्या और अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा। जून के महीने में निर्जला एकादशी का त्योहार मनाया जाएगा। इसके अलावा इस माह ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत भी रखा जाएगा। जुलाई के महीने विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा निकाली जाएगी। इसके अलावा चार माह के लिए भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी पर योग निद्रा में चले जाएंगे। अगस्त माह में नाग पंचमी, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और हरियाली तीज जैसे प्रमुख त्योहार होंगे। सितंबर में गणेश चतुर्थी और ओणम जैसे प्रमुख त्योहार मनाएंं जाएंगे। अक्तूबर के महीने में शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाएंगे। 14 अक्तूबर को दशहरा, 20 अक्तूबर को करवा चौथ और 29 अक्तूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। साल 2024 में दिवाली का त्योहार 01 नवंबर को मनाया जाएगा और 7 नवंबर को सूर्य आराधना का महापर्व छठ पूजा होगी। साल के आखिरी महीने यानी दिसंबर में मोक्षदा एकादशी और क्रिसमस का त्योहार मनाया जाएगा। Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यह बताना जरूरी है कि Karmasu.in किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. /

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Sapna:इस वजह से आपके सपने में आता हैं अनजान चेहरा

सपनों (Sapna) में अनजान चेहरे देखना एक आम बात है। कई बार, ये चेहरे हमारे जीवन में किसी व्यक्ति का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं, जिसे हमने कभी नहीं देखा है। ये चेहरे हमारे अवचेतन मन में दबे हुए विचारों, भावनाओं या अनुभवों का भी प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। हमारे अवचेतन मन में दबे हुए विचारों, भावनाओं या अनुभवों का प्रतिनिधित्व: सपने sapna अक्सर हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति होते हैं। अनजान चेहरे हमारे अवचेतन मन में दबे हुए विचारों, भावनाओं या अनुभवों का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर हम किसी चीज से डरते हैं, तो हमारा अवचेतन मन उस डर का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक अनजान चेहरे का सपना देख सकता है। Sapne Me Bandar Dekhna: क्या आपको भी सपने में बार-बार दिखाई देते हैं बंदर ? सपनों की दुनिया में सब कुछ हकीकत लगता है। सपनों के कई जाने पहचाने चेहरे हमारे आस पास रहते हैं, लेकिन कई बार हमारे सपने में कुछ ऐसे चेहरे दिखाई दे जाते हैं, जिन्हें कभी देखा तक नहीं। कभी न कभी आपके सपने में भी कोई अनजाना चेहरा जरूर आया होगा। जानिए आखिर सपने में अनजान चेहरे क्यों दिखाई देते हैं। कई बार सपनों Sapna में अनजाने चेहरे दिखते हैं, जिनसे असल जिंदगी में ना कभी मिले और कही भीड़ में उन्हें देखा। फिर भी सपनों में आ जाते हैं। कभी दोस्त बनकर तो कभी दुश्मन बनकर। अगर आपके सपनों में भी अनजाने चेहरे आ रहे हैं। मतलब जब आप सो रहे हैं और सपने में अनजान चेहरा देख रहे हैं तो कोई शक्ति उस समय आप पर नजर रखें हुए हैं। उस शक्ति के प्रभाव से सपनों में आपकी मुलाकात किसी अनजान व्यक्ति से होती हैं। ये हमारा नहीं बल्कि पैरासाइकोलॉस्टि हेलेन टेलर का मानना है। उनके अनुसार किसी शक्ति के प्रभाव के कारण आपको सपने में अनजान  चेहरे का दिखते हैं। अच्छी शक्तियां आपको होने वाली घटना का संकेत देती है या आपसे कुछ कहने की कोशिश करती हैं। इसके अलावा अगर आप किसी अनजान व्यक्ति से सपने में मिलते हैं तो इसका एक मतलब ये भी है कि आप खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं और आपको किसी की जरूरत है।

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