Ram Mandir Ayodhya अयोध्‍या में राम मंदिर बनने और अंतिम बार तोड़े जाने तक का इतिहास

Ram Mandir Ayodhya अयोध्‍या का राम मंदिर Ram Mandir Ayodhya भारत के सबसे विवादास्पद और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण और विध्वंस सदियों से चल रहा एक विवाद रहा है। आइए इस विस्तृत इतिहास को समझने का प्रयास करते हैं। Ram Mandir Ayodhya इतिहासकारों के अनुसार कौशल प्रदेश की प्राचीन राजधानी अवध को कालांतर में अयोध्या और बौद्धकाल में साकेत कहा जाने लगा। अयोध्या मूल रूप से मंदिरों का शहर था। हालांकि यहां आज भी हिन्दू, बौद्ध एवं जैन धर्म से जुड़े मंदिरों के अवशेष देखे जा सकते हैं। जैन मत के अनुसार यहां आदिनाथ सहित 5 तीर्थंकरों का जन्म हुआ था। बौद्ध मत के अनुसार यहां भगवान बुद्ध ने कुछ माह विहार किया था। Ram Mandir Ayodhya अयोध्या को भगवान श्रीराम के पूर्वज विवस्वान (सूर्य) के पुत्र वैवस्वत मनु ने बसाया था, तभी से इस नगरी पर सूर्यवंशी राजाओं का राज महाभारतकाल तक रहा। यहीं पर प्रभु श्रीराम का दशरथ के महल में जन्म हुआ था। महर्षि वाल्मीकि ने भी रामायण में जन्मभूमि की शोभा एवं महत्ता की तुलना दूसरे इन्द्रलोक से की है। धन-धान्य व रत्नों से भरी हुई अयोध्या नगरी की अतुलनीय छटा एवं गगनचुंबी इमारतों के अयोध्या नगरी में होने का वर्णन भी वाल्मीकि रामायण में मिलता है। कहते हैं कि( bhagwan shri ram) भगवान श्रीराम के जल समाधि लेने के पश्चात अयोध्या कुछ काल के लिए उजाड़-सी हो गई थी, लेकिन उनकी जन्मभूमि पर बना महल वैसे का वैसा ही था। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने एक बार पुन: राजधानी अयोध्या का पुनर्निर्माण कराया। इस निर्माण के बाद सूर्यवंश की अगली 44 पीढ़ियों तक इसका अस्तित्व आखिरी राजा, महाराजा बृहद्बल तक अपने चरम पर रहा। कौशलराज बृहद्बल की मृत्यु महाभारत युद्ध में अभिमन्यु के हाथों हुई थी। महाभारत के युद्ध के बाद अयोध्या उजड़-सी हो गई, मगर श्रीराम जन्मभूमि का अस्तित्व फिर भी बना रहा। इसके बाद यह उल्लेख मिलता है कि ईसा के लगभग 100 वर्ष पूर्व उज्जैन के चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य एक दिन आखेट करते-करते अयोध्या पहुंच गए। थकान होने के कारण अयोध्या में सरयू नदी के किनारे एक आम के वृक्ष के नीचे वे अपनी सेना सहित आराम करने लगे। उस समय यहां घना जंगल हो चला था। कोई बसावट भी यहां नहीं थी।Ram Mandir Ayodhya महाराज विक्रमादित्य को इस भूमि में कुछ चमत्कार दिखाई देने लगे। तब उन्होंने खोज आरंभ की और पास के योगी व संतों की कृपा से उन्हें ज्ञात हुआ कि यह श्रीराम की अवध भूमि है। उन संतों के निर्देश से सम्राट ने यहां एक भव्य मंदिर के साथ ही कूप, सरोवर, महल आदि बनवाए। कहते हैं कि उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि पर काले रंग के कसौटी पत्थर वाले 84 स्तंभों पर विशाल मंदिर का निर्माण करवाया था। इस मंदिर की भव्यता देखते ही बनती थी। विक्रमादित्य के बाद के राजाओं ने समय-समय पर इस मंदिर की देख-रेख की। उन्हीं में से एक शुंग वंश के प्रथम शासक पुष्यमित्र शुंग ने भी मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था। पुष्यमित्र का एक शिलालेख अयोध्या से प्राप्त हुआ था जिसमें उसे सेनापति कहा गया है तथा उसके द्वारा दो अश्वमेध यज्ञों के किए जाने का वर्णन है। Ram Mandir Ayodhya अनेक अभिलेखों से ज्ञात होता है कि गुप्तवंशीय चन्द्रगुप्त द्वितीय के समय और तत्पश्चात काफी समय तक अयोध्या गुप्त साम्राज्य की राजधानी थी। गुप्तकालीन महाकवि कालिदास ने अयोध्या का रघुवंश में कई बार उल्लेख किया है। इतिहासकारों के अनुसार 600 ईसा पूर्व अयोध्या में एक महत्वपूर्ण व्यापार केंद्र था। इस स्थान को अंतरराष्ट्रीय पहचान 5वीं शताब्दी में ईसा पूर्व के दौरान तब मिली जबकि यह एक प्रमुख बौद्ध केंद्र के रूप में विकसित हुआ। तब इसका नाम साकेत था। कहते हैं कि चीनी भिक्षु फा-हियान ने यहां देखा कि कई बौद्ध मठों का रिकॉर्ड रखा गया है। यहां पर 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री हेनत्सांग आया था। उसके अनुसार यहां 20 बौद्ध मंदिर थे तथा 3,000 भिक्षु रहते थे और यहां हिन्दुओं का एक प्रमुख और भव्य मंदिर भी था, जहां रोज हजारों की संख्या में लोग दर्शन करने आते थे। Ram Mandir Ayodhya इसके बाद ईसा की 11वीं शताब्दी में कन्नौज नरेश जयचंद आया तो उसने मंदिर पर सम्राट विक्रमादित्य के प्रशस्ति शिलालेख को उखाड़कर अपना नाम लिखवा दिया। पानीपत के युद्ध के बाद जयचंद का भी अंत हो गया। इसके बाद भारतवर्ष पर आक्रांताओं का आक्रमण और बढ़ गया। आक्रमणकारियों ने काशी, मथुरा के साथ ही अयोध्या में भी लूटपाट की और पुजारियों की हत्या कर मूर्तियां तोड़ने का क्रम जारी रखा। लेकिन 14वीं सदी तक वे अयोध्या में राम मंदिर को तोड़ने में सफल नहीं हो पाए। विभिन्न आक्रमणों के बाद भी सभी झंझावातों को झेलते हुए श्रीराम की जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर 14वीं शताब्दी तक बचा रहा। कहते हैं कि सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान यहां मंदिर मौजूद था। 14वीं शताब्दी में हिन्दुस्तान पर मुगलों का अधिकार हो गया और उसके बाद ही राम जन्मभूमि एवं अयोध्या को नष्ट करने के लिए कई अभियान चलाए गए। अंतत: 1527-28 में इस भव्य मंदिर को तोड़ दिया गया और उसकी जगह बाबरी ढांचा खड़ा किया गया। कहते हैं कि मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर के एक सेनापति ने बिहार अभियान के समय अयोध्या में श्रीराम के जन्मस्थान पर स्थित प्राचीन और भव्य मंदिर को तोड़कर एक मस्जिद बनवाई थी, जो 1992 तक विद्यमान रही। बाबरनामा के अनुसार 1528 में अयोध्या पड़ाव के दौरान बाबर ने मस्जिद निर्माण का आदेश दिया था। अयोध्या में बनाई गई मस्जिद में खुदे दो संदेशों से इसका संकेत भी मिलता है। इसमें एक खासतौर से उल्लेखनीय है। इसका सार है, ‘जन्नत तक जिसके न्याय के चर्चे हैं, ऐसे महान शासक बाबर के आदेश पर दयालु मीर बकी ने फरिश्तों की इस जगह को मुकम्मल रूप दिया।’ हालांकि यह भी कहा जाता है कि अकबर और जहांगीर के शासनकाल में हिन्दुओं को यह भूमि एक चबूतरे के रूप से सौंप दी गई थी लेकिन क्रूर शासक औरंगजेब ने अपने पूर्वज बाबर के सपने को पूरा करते हुए यहां भव्य मस्जिद का निर्माण कर उसका नाम बाबरी मस्जिद रख दिया था। Ram Mandir Ayodhya 16वीं शताब्दी से 20वीं शताब्दी तक Ram Mandir Ayodhya आधुनिक

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Pradosh Vrat 2024: कब है भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग

Pradosh Vrat 2024 प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और योग जानने के लिए आपको ज्योतिषीय गणनाओं का सहारा लेना होगा। Pradosh Vrat 2024 सनातन धर्म में प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat 2024) का विशेष महत्व है। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। शनिवार के दिन पड़ने के चलते यह शनि प्रदोष व्रत कहलाएगा। शनि प्रदोष व्रत करने से निसंतान दंपती को संतान की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर साधक श्रद्रा भाव से भगवान शिव संग शनिदेव की पूजा करते हैं। Pradosh Vrat 2024:   प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित है। इस दिन देवों के देव महादेव संग मां पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। धार्मिक मत है कि प्रदोष व्रत करने से साधक के जीवन में व्याप्त समस्त प्रकार के दुख एवं संकट दूर हो जाते हैं। साथ ही जीवन में मंगल का आगमन होता है। अत: साधक श्रद्धा भाव से भगवान शिव संग मां पार्वती की पूजा करते हैं। आइए, भाद्रपद माह के पहले प्रदोष व्रत की तिथि एवं शुभ मुहूर्त जानते हैं- Dahi Handi 2024: दही हांडी उत्सव कब? जानिए तिथि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा Pradosh Vrat 2024 प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 31 अगस्त को देर रात 02 बजकर 25 मिनट से शुरू होगी और अगले यानी 01 सितंबर को देर रात 03 बजकर 40 मिनट पर समाप्त होगी। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। अतः 31 अगस्त को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल यानी पूजा का समय संध्याकाल 06 बजकर 43 मिनट से लेकर रात 08 बजकर 59 मिनट तक है। इस दौरान साधक भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। Pradosh Vrat 2024 शुभ योग ज्योतिषियों की मानें तो भाद्रपद माह के पहले प्रदोष व्रत पर वरीयान योग का निर्माण हो रहा है। इस योग का समापन शाम 05 बजकर 39 मिनट पर होगा। इस दिन गर और वणिज करण का भी शुभ संयोग बन रहा है। साथ ही पुष्य और अश्लेषा नक्षत्र का निर्माण हो रहा है। इस समय में भगवान शिव की पूजा करने से हर कार्य में सफलता मिलती है। पंचांग सूर्योदय – सुबह 05 बजकर 59 मिनट पर सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 43 मिनट पर ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 04 बजकर 29 मिनट से 05 बजकर 14 मिनट तक विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 28 मिनट से 03 बजकर 19 मिनट तक गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 43 मिनट से 07 बजकर 06 मिनट तक निशिता मुहूर्त – रात्रि 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 44 मिनट तक Pradosh Vrat 2024 प्रदोष व्रत का महत्व Pradosh Vrat प्रदोष व्रत की पूजा विधि अन्य महत्वपूर्ण बातें Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि  KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Aja Ekadashi 2024: अजा एकादशी पर होगा पापों का नाश, जानिए शुभ मुहूर्त और दान का महत्व

Aja Ekadashi 2024 हिन्दू परंपरा में एकादशी बेहद महत्वपूर्ण त्यौहार है जो हर माह के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के अगले दिन मनाया जाता है। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन पड़ने वाली एकादशी को अजय एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु की उपासना करने की मान्यता है। कहा जाता है कि अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने तथा दीन-दु:खी, निर्धन लोगों को दान देने से जीवन में सुख, समृद्धि और धन धान्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसी भी मान्यताएं हैं कि एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिलती है।  Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी का महत्व Aja Ekadashi 2024 सनातन परंपरा में अजा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस एकादशी पर व्रत रखने तथा दान देने वाला व्यक्ति सभी सांसारिक सुखों को भोगने के बाद विष्णुलोक को जाता है। भाद्रपद कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली यह एकादशी समस्त पापों का नाश करने वाली तथा अश्वमेघ यज्ञ के बराबर फल देने वाली मानी जाती है। इस दिन विधि विधान के साथ भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए।  इस एकादशी के बारे में बताते हुए भगवान कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था, “अजा एकादशी पर व्रत रखकर विधि विधान से पूजा करने से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्ति पा सकता है और मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है।” इसलिए इस दिन व्रत रखकर पूरे मन के साथ भगवान नारायण की आराधना करने का का खास महत्व है।  Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त  आजा एकादशी की शुरुआत 29 अगस्त 2024 बह 01:18 बजे से होगी। साथ ही इस एकादशी का समापन 30 अगस्त 2024 को सुबह 01:36 बजे पर होगा। हिन्दू धर्म में उदयातिथि मान्य है, इसलिए यह एकादशी 29 अगस्त को मनाई जाएगी।  Aja Ekadashi दान का महत्व  हिन्दू धर्म शास्त्रों में दान बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। सनातन संस्कृति को मानने वाले लोग सदियों से ही दान की महत्ता को समझते आ रहे हैं। लोग मन की शांति, मनोकामना पूर्ति, पुण्य की प्राप्ति, ग्रह-दोषों के प्रभाव से मुक्ति और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दान करते हैं। हिन्दू धर्म में दान का महत्व इसलिए भी ज्यादा है Aja Ekadashi 2024 क्योंकि कहा जाता है कि दान का लाभ सिर्फ जीते जी नहीं बल्कि मृत्यु के बाद भी मिलता है। लेकिन दान का पुण्य फल आपको तभी प्राप्त होता है, जब दान सही समय, सही तरीके और सच्चे मन के साथ पात्र व्यक्ति को दिया गया हो।  दान के महत्व का उल्लेख करते हुए श्रीमद् भगवद्गीता में कहा गया है-  दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे। देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्।। (जो दान कर्तव्य समझकर, किसी फल की आशा के बिना, उचित काल तथा स्थान में और आध्यात्मिक कार्यों में लगे पात्र व्यक्ति को दिया जाता है वही दान सात्विक माना जाता है।)   Aja Ekadashi 2024 अजा एकादशी पर करें इन चीजों का दान  Aja Ekadashi 2024 अन्य त्यौहारों की तरह अजा एकादशी पर भी दान का बड़ा महत्व माना जाता है। कहा जाता है कि इस शुभ दिन पर अन्न और भोजन का दान सर्वोत्तम है। इसलिए एकादशी के पुण्यकारी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के दीन-हीन, निर्धन, दिव्यांग बच्चों को भोजन दान करने के प्रकल्प में सहयोग करके पुण्य के भागी बनें। अजा एकादशी 2024: पापों का नाश और मोक्ष का मार्ग अजा एकादशी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है। इस वर्ष, अजा एकादशी 29 अगस्त, 2024, गुरुवार को पड़ रही है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। Aja Ekadashi शुभ मुहूर्त और पूजा विधि दान का महत्व अजा एकादशी के दिन दान करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है। आप अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र, धन आदि का दान कर सकते हैं। Aja Ekadashi अजा एकादशी का महत्व

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Sleep Talking:क्या आप भी सोते समय नींद में बड़बड़ाते हैं? ये हैं कारण और उपचार

Sleep Talking:जो लोग नींद में बात करते हैं उन्‍हें इस बात का एहसास ही नहीं होता है और उन्‍हें अगले दिन कुछ याद भी नहीं रहता है। नींद में बड़बड़ाने वाला व्‍यक्ति एक समय में 30 सेकेंड से ज्यादा नहीं बोलता है Sleep Talking क्या आपकी नींद भी पार्टनर के नींद में बातें करने की आदत से टूट जाती है? अगर जवाब हां है तो जान लें ये नींद में सपने देखते हुए बातें करना सामान्य नहीं बल्कि एक प्रकार का पैरासोमनिया है। जिसकी मतलब होता है-सोते समय अस्वाभाविक व्यवहार करना। हालांकि डॉक्टर न तो इस समस्या को बीमारी मानते हैं और न ही इसे सामान्‍य श्रेणी में ही रखते हैं। चिकित्‍सकों को नींद में बात करने के बारे में ज्‍यादा जानकारी नहीं है। वहीं जो लोग नींद में बात करते हैं उन्‍हें इस बात का एहसास ही नहीं होता है और उन्‍हें अगले दिन कुछ याद भी नहीं रहता है। नींद में बड़बड़ाने वाला व्‍यक्ति एक समय में 30 सेकेंड से ज्यादा नहीं बोलता है और कुछ देर बोलकर चुप हो जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आखिर नींद में किस वजह से बड़बड़ाते हैं कुछ लोग और क्या है इस समस्या को दूर करने के उपाय।  Sleep Talking किन लोगों को होती है नींद में बड़बड़ाने की आदत?  एक शोध के अनुसार करीब 3 साल से 10 साल के आधे से ज्यादा बच्चे अपनी बातों को नींद में पूरा करते हैं। वहीं 5 फीसदी बड़े भी नींद में बात करते हैं। इतना ही नहीं शोध के अनुसार लड़कों से ज्‍यादा लड़कियां नींद में बड़बड़ाती हैं। Swapna Shastra:मृत्यु के 6 महीने पहले मिलने लगते हैं ये तीन संकेत, कभी सपने में तो कभी सामने होती हैं ये घटनाएं   Sleep Talking नींद में बात करने के कारण तनाव, डिप्रेशन, नींद की कमी, थकान महसूस करना, शराब या किसी दवा के कारण, बुखार के कारण नींद में व्यक्ति बड़बड़ा सकता है। इसके अलावा अगर किसी व्‍यक्‍ति के परिवार में किसी को नींद में बोलने की आदत रही हो तो भी इस वजह से स्‍लीप डिसऑर्डर की समस्या हो सकती है। नींद में बड़बड़ाने की समस्या का उपचार-तनाव-Sleep Talkingनींद में बड़बड़ाने की पीछे सबसे बड़ी वजह तनाव हो सकता है। अगर किसी बात को लेकर आप लगातार चिंता में हैं तो आपको यह समस्या हो सकती है। इससे बचने के लिए अपने दिमाग को आराम दें। अगर आप बहुत ज्यादा बिजी रहते हैं तो अपने लिए थोड़ा सा समय निकालकर कहीं घूम आइए। आरईएम स्लीप बिहैवियर डिसआर्डर- सोते हुए चीखने-चिल्लाने या हाथ-पैर चलाने की आदत डिमेंशिया (निद्रारोग) अथवा पार्किंसन जैसी बीमारियों के लक्षण भी हो सकते हैं। इस बीमारी को ‘आरईएम स्लीप बिहैवियर डिसआर्डर’ कहा जाता है।Sleep Talkingआरईएम नींद का वो चरण है। जहां नींद के दौरान या सपने में जो कुछ भी हो रहा है उसे हम सच समझने लगते हैं। आरईएम के अलावा, दवा का रिएक्शन, तनाव, मानसिक स्वास्थ्य समस्या के कारण भी लोग नींद में बड़बड़ाने लगते हैं। समय पर सोएं- समय पर सोने और जागने से नींद में बड़बड़ाने की आदत से छुटकारा मिल सकता है। ऐसा करने से आपकी नींद पूरी होती है। ध्यान रखें, नींद पूरी न हो पाने पर भी यह समस्या होती है।  एक्‍सरसाइज- अक्सर कई बार बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन ठीक से ना होने के कारण भी नींद में व्यक्ति बड़बड़ाने लगता है। ऐसे में इस समस्या से राहत पाने और शरीर में ब्‍लड सर्कुलेशन को नियमित रखने के ल‍िए नियमित योगा और एक्‍सरसाइज करें।  साइकोथैरेपिस्‍ट की लें मदद-अगर इन सब उपायों को आजमाने के बाद भी आपकी समस्या बनी हुई है तो किसी अच्छे साइकोथैरेपिस्ट से मिल कर सलाह जरूर लें। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Bhadrapad Sankashti Chaturthi 2024: हेरंब संकष्टी चतुर्थी कब ? भाद्रपद माह में बप्पा की पूजा का विशेष महत्व, जानें डेट, मुहूर्त

Sankashti Chaturthi 2024: भाद्रपद हेरंब संकष्टी चतुर्थी अगस्त में ही मनाई जाएगी. गणपति जी (ganesh ji) की कृपा से सारे बिगड़े काम बन जाते हैं. बप्पा के आशीर्वाद से जीवन में खुशहाली आती है भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है जो गणेश जी को समर्पित है। इस दिन भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। यह व्रत विशेष रूप से भाद्रपद माह में मनाया जाता है और इसे “हेरंब संकष्टी चतुर्थी” के नाम से भी जाना जाता है। Bhadrapada Sankashti Chaturthi 2024:  भगवान गणेश (Ganesh ji) को साक्षात् बुद्धि का स्वरूप,  ज्ञान का देवता एवम् सभी बाधाओं या कष्टों को दूर करने वाला देवता माना जाता है. इसे भगवान गणेश की पूजा करने का एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.  हर साल भाद्रपद (Bhado chaturthi) के महीने में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन हेरंब संकष्टी चतुर्थी (Heramba Sankashti Chaturthi) का पर्व मनाया जाता है, जो भगवान गणेश के 32 स्वरूपों में से एक हेरम्ब देवता को समर्पित है. इस साल भाद्रपद माह की हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2024 में कब है, जान लें डेट, पूजा मुहूर्त. Sankashti Chaturthi क्यों है खास भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी? भाद्रपद हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2024 डेट (Bhadrapada Sankashti Chaturthi 2024 Date) भाद्रपद माह की हेरंब संकष्टी चतुर्थी 22 अगस्त 2024 को है. इसी दिन बहुला चौथ (Bahula Chauth) भी मनाई जाएगी. भगवान गणेश को किसी भी पूजा या अनुष्ठान का आरम्भ करने से पहले देवताओं में सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा की जाती है. हेरंब संकष्टी चतुर्थी 2024 मुहूर्त (Heramba Sankashti Chaturthi 2024 Time) पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 22 अगस्त  2024 को दोपहर 01 बजकर 46 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 23 अगस्त 2024 को सुबह 10 बजकर 38 मिनट पर इसका समापन होगा. Dahi Handi 2024: दही हांडी उत्सव कब? जानिए तिथि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा Sankashti Chaturthi हेरंब संकष्टी चतुर्थी पूजा मंत्र हे हेरंब त्वमेह्योहि ह्माम्बिकात्र्यम्बकात्मज सिद्धि-बुद्धि पते त्र्यक्ष लक्षलाभ पितु: पित: नागस्यं नागहारं त्वां गणराजं चतुर्भुजम् भूषितं स्वायुधौदव्यै: पाशांकुशपरश्र्वधै: भाद्रपद संकष्टी चतुर्थी महत्व (Bhadrapada Sankashti Chaturthi Importance) Sankashti Chaturthi भाद्रपद माह में गणपति जी (Ganpati ji) की पूजा का विशेष महत्व है क्योंकि इसी महीने में बप्पा का जन्म हुआ था. भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी मनाई जाती है और ये उत्सव 10 दिन तक चलता है. भादो में बप्पा की पूजा से संकट, कष्ट, रोग, दोष दूर होते हैं. हेरम्ब संकष्टी चतुर्थी की पूजा विधि (Heramba Sankashti Chaturthi Puja vidhi) ध्यान रखने योग्य बातें Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि  KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Dahi Handi 2024: दही हांडी उत्सव कब? जानिए तिथि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा

Dahi Handi 2024 Date: कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हर साल भाद्रपद महीने की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इसके साथ भगवान श्री कृष्ण के जन्ममोत्सव के रूप में दही हांडी उत्सव भी मनाया जाता है। Dahi Handi 2024 यह उत्सव मुख्य रूप से गुजरात, महाराष्ट्र और गोवा में धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्यौहार हमेशा कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है। इस बार जन्माष्टमी 26 अगस्त को और दही हांडी उत्सव 27 अगस्त को मनाया जाएगा।  आइए जानते हैं इस वर्ष कब मनाई जाएगी दही हांडी? Dahi Handi 2024: दही हांडी जिसे गोपालकला (Gopal kala) के नाम से भी जाना जाता है, ये मुख्य रूप से श्रीकृष्ण (Krishna) की लीलाओं से जुड़ा त्योहार है. हर साल कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन दही हांडी का पर्व मनाया जाता है. Dahi Handi 2024 दही हांडी के उत्सव में एक मिट्टी के बर्तन में दही भरकर रस्सी पर लटका दिया जाता है और गोविंदाओं की टोली पिरामिड बनाकर उस हांडी को तोड़ते हैं. आइए जानें इस साल दही हांडी 2024 में कब मनाया जाएगा. दही हांडी 2024 तिथिदही हांडी का त्योहार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी और दही हांडी का त्योहार 27 अगस्त के दिन मनाया जाएगा। Dahi Handi 2024 दही हांडी क्यों मनाई जाती है ? (Why Dahi Handi Celebrate) दही हांडी की परंपरा में भगवान कृष्ण के बचपन की लीलाओं को सामने रखा जाता है. दही हांडी के आयोजन को गोपाल कला या दहिकला भी कहा जाता है. हिंदु धर्म में मान्यता है कि प्राचीन काल में कान्हा घर-घर जाकर चुपके से लोगों की मटकी से माखन चुराकर खाया करते थे. मटकी (हांडी) ऊपर लटकी हो तो उसे फोड़कर माखन चुराते थे. कहते हैं कि जिस घर में कान्हा के कदम पड़ते थे उनके सारे दुख दूर हो जाते थे. मान्यता है कि घर में माखन चोरी के लिए मटकी फोड़ने से घर के दुख दूर हो जाते हैं और खुशियों का वास होता है. Dahi Handi 2024 कैसे मनाई जाती है दही हांडी ? Dahi Handi 2024 दही हांडी उत्सव के दौरान मिट्टी के बर्तन में दही या मक्खन को ऊंचाई पर लटकाया जाता है। फिर पुरुषों और महिलाओं का एक समूह एक मानव पिरामिड बनाता है और मटके को तोड़ने का प्रयास करता है। Dahi Handi 2024 दही हांडी का प्रदर्शन कई स्थानों पर प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले लोगों को गोविंदा कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो भी समूह मटकी तोड़ता है उसे भगवान कृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। Dahi Handi 2024 दही हांडी का इतिहास (Dahi Handi History) पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान कृष्ण बचपन में अपने दोस्तों के साथ माखन मिश्री की चोरी करते थे और अपने मित्रों में बांट देते थे. माखन चोरी से परेशान होकर गोपियां माखन को ऊंचे स्थान पर लटकाना शुरू कर दिया था लेकिन गोपियों का यह प्रयास भी असफल हो गया. नटखट कान्हा अपने दोस्तों की टोली के साथ वहां से भी माखन चुरा लेते थे और बड़े चाव के साथ सबके साथ खाते हैं. भगवान कृष्ण की इन्हीं बाल लीलाओं को दहीं हांडी के उत्सव के रूप में मनाया जाता है. Dahi Handi कृष्ण जन्माष्टमी महत्वभारत में जन्माष्टमी के पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन पूरे विधि-विधान से कृष्ण जी के बाल रूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कृष्ण को विष्णु जी का 8वां अवतार माना जाता है। ऐसे में जन्माष्टमी का व्रत रखने से विष्णु जी की कृपा भी बनी रहती है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Swapna Shastra:मृत्यु के 6 महीने पहले मिलने लगते हैं ये तीन संकेत, कभी सपने में तो कभी सामने होती हैं ये घटनाएं  

Swapna Shastra मौत… जीवन का अंतिम सत्य है, जिसे टाला नहीं जा सकता. कहते हैं जब बच्चे का जन्म होता है, तभी उसके मौत का तारीख भी निर्धारित हो जाती है. ज्योतिष शास्त्र की मानें तो जब किसी की मृत्यु निकट आती है, तब प्रकृति उसे कुछ संकेत देने लग जाती है. आपने भी पूर्वजों से भी सुना होगा कि जब किसी मौत करीब होती है तो उसे अजब-अजब चीजें दिखने लगती हैं. लेकिन, कई बार जाने-अंजाने में लोग इन संकेतों को समझ नहीं पाते. Swapna Shastra जब किसी की मृत्यु करीब होती है तो उसे कम से कम 6 महीने पहले कुछ संकेत मिलने लगते हैं. जैसे बार-बार सपने में मरे हुए परिजनों का आना. उनका उदास चेहरा सपने में देखना या फिर जागते हुए भी आपको अपने बीते हुए कर्म आंखों के सामने साफ तौर पर दिखाई देने लगें. यह आने वाले समय में मृत्यु के संकेत माने गए हैं. इसके अलावा कुछ और संकेत भी हैं… Swapna Shastra इन संकेतों को न करें नजरअंदाज Swapna Shastra अगर घर के बाहर हैं, कहीं बाहर खड़े हैं या घर में छत पर बैठे हैं और कहीं से अचानक आकर काला कौवा आपके सिर पर बैठ जाए या आपके सिर पर चोंच मारने की कोशिश या हमला करे तो यह एक बहुत ही अशुभ संकेत माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि कौए को काल पहले दिख जाता है, इसलिए वह वह आपको एक मरा हुआ व्यक्ति समझकर खाने की कोशिश करता है. Swapna Shastra सपने में कटे अंग देखना Swapna Shastra इसके अलावा अगर आप सपने में अपना कटा हुआ हाथ पैर देखते हैं. अपने किसी परिजन या किसी और का कटा हुआ सिर देखते हैं तो यह भी एक बहुत अशुभ संकेत हैं. Swapna Shastra इसका मतलब हुआ कि आप पर कोई बहुत बड़ी मुसीबत आने वाली है या फिर मृत्यु नजदीक है. इसके अलावा कोई ऐसी गंभीर बीमारी आपको हो सकती है जो आपको मृत्यु के निकट ले जाए. Swapna Shastra कर सकते हैं कुछ उपाय मौत अटल है. मौत को टाला नहीं जा सकता, लेकिन ऐसे कई उपाय हैं, जिससे मौत की पीड़ा को कम किया जा सकता है. कुछ यज्ञ होते हैं व पूजा पाठ होते हैं, जिनको खासतौर पर करने से व्यक्ति बिना कष्ट, दर्द-तकलीफ से स्वर्ग सिधार जाता है. कई धार्मिक ग्रंथों और लोककथाओं में मृत्यु के पहले मिलने वाले संकेतों का उल्लेख किया गया है। ये संकेत व्यक्ति से व्यक्ति और संस्कृति से संस्कृति में भिन्न हो सकते हैं। कुछ सामान्य संकेतों में शामिल हैं: What does science say:विज्ञान क्या कहता है? वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, इन संकेतों की कोई ठोस व्याख्या नहीं है। ये संभव है कि ये संकेत मनोवैज्ञानिक कारकों के कारण हों, जैसे कि चिंता, तनाव, या बीमारी। क्या इन संकेतों पर विश्वास करना चाहिए? यह व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है कि आप इन संकेतों पर विश्वास करते हैं या नहीं। Swapna Shastra कुछ लोग इन संकेतों को आध्यात्मिक अनुभवों के रूप में देखते हैं, जबकि अन्य लोग इन्हें मनोवैज्ञानिक कारकों के कारण होने वाले अनुभवों के रूप में देखते हैं। मृत्यु के बारे में क्या जानना महत्वपूर्ण है? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Sawan Somwar 2024: कब है सावन का अंतिम सोमवार? अभी नोट करें शुभ-अशुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Somwar 2024 date muhurat  Sawan Somwar 2024 भगवान भोलेनाथ का प्रिय माह सावन अब अपने समापन की ओर है. सबसे अच्छी बात ये है कि श्रावण मास का समापन सोमवार के दिन हो रहा है, जो व्रत की दृष्टि से बहुत ही अच्छा माना जाता है. यह इस साल का अंतिम सावन सोमवार व्रत होगा. अंतिम सावन सोमवार के दिन 5 शुभ संयोग बन रहे हैं. वैसे तो आप पूरे साल कभी भी शिव पूजा कर सकते हैं लेकिन सावन सोमवार आपको बार-बार नहीं मिलेगा. अंतिम सावन सोमवार पर आप व्रत और शिव पूजा करके भगवान भोलेनोथ का आशीर्वाद प्राप्त कर लें, वरना इस मौके को चूक गए तो फिर आपको 1 साल तक इंतजार करना होगा. कब है अंतिम सावन सोमवार 2024?Sawan Somwar 2024 इस साल का अंतिम सावन सोमवार व्रत 19 अगस्त को है. अंतिम सावन सोमवार के दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है. वैदिक पंचांग के अनुसार, 19 अगस्त को ही श्रावण तिथि 3:04 एएम से शुरू होगी और रात 11:55 बजे तक रहेगी. सनातन धर्म में सावन के महीने को बेहद शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार सावन महीने की शुरुआत 22 जुलाई से हुई है और इसका समापन 19 अगस्त को होगा। Sawan Somwar 2024 सावन सोमवार का व्रत करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से साधक को मनचाहा वर की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कब है सावन का अंतिम सोमवार? Sawan Somwar 2024 अंतिम सावन सोमवार 2024 मुहूर्त19 अगस्त को अंतिम सावन सोमवार पर शिव पूजा के लिए सबसे उत्तम समय योग के आधार पर 05:53 ए एम से 08:10 ए एम के बीच है. वैसे पूरे दिन बना शोभन योग भी पूजा पाठ के लिए अच्छा है. Sawan Somwar 2024 अंतिम सावन सोमवार 2024 जलाभिषेक समयSawan Somwar 2024 सावन सोमवार के दिन भगवान शिव का जल से अभिषेक करते हैं. अंतिम सावन सोमवार को आप 05:53 ए एम से शिव जी का जलाभिषेक कर सकते हैं. उस दिन रक्षाबंधन का त्योहार दोपहर से मनाया जाएगा, इसलिए आप जलाभिषेक और शिव पूजा का कार्यक्रम सुबह में कर सकते हैं. सावन का अंतिम सोमवार 2024 की डेट और शुभ मुहूर्त (Sawan Ka Antim Somwar 2024 Date Shubh Muhurat) सावन का अंतिम सोमवार व्रत पूर्णिमा पर किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा 19 अगस्त को रात 03 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और 19 अगस्त को रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 25 मिनट से लेकर 05 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। सावन सोमवार पूजा विधि (Sawan Somwar Vrat Puja Vidhi) Sawan Somwar 2024 इस दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। सूर्य देव को जल अर्पित करें। अब मंदिर की सफाई कर गंगाजल के छिड़काव से शुद्ध करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को विराजमान करें। इसके बाद भगवान शिव का गुड़, दही, गंगाजल, दूध, घी और शक्कर समेत आदि चीजों से रुद्राभिषेक करें। मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की चीजें अर्पित करें। Sawan Somwar 2024 देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जप करें। प्रभु से जीवन में सुख-शांति की कामना करें। सफेद मिठाई, हलवा, दही और फल का भोग लगाएं। इस दिन दान करना बेहद शुभ माना जाता है। Sawan Somwar 2024 अंतिम सावन सोमवार पर 5 शुभ संयोगअंतिम सावन सोमवार Sawan Somwar 2024 के दिन 5 शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है. अंतिम सावन सोमवार पर शोभन योग बन रहा है, जो सूर्योदय से लेकर देर रात 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. वहीं रवि योग सुबह में 5 बजकर 53 मिनट से सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. रवि योग में सभी दोषों को दूर करने की क्षमता होती है. अंतिम सावन सोमवार पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो 05:53 ए एम से 08:10 ए एम तक रहेगा. इस योग में आप जो भी कार्य करेंगे, वह सफल सिद्ध हो सकता है. ये तीनों ही योग शुभ कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं. अंतिम सावन सोमवार व्रत पर इन 3 शुभ संयोगों के अलावा सावन Sawan Somwar 2024 पूर्णिमा और रक्षाबंधन भी है. सावन पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. वहीं सावन पूर्णिमा के दिन भद्रा रहित मुहूर्त में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं और हर्षोल्लास के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं. भगवान शिव के मंत्र (Lord Shiv Mantra) 1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।। 2. मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय । मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम: शिवाय ।। 3. नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ।। 4. शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय । श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम: शिवाय ।। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Dream Science:10 ऐसे सपने जो सबको आते हैं, देते हैं शुभ-अशुभ संकेत

Dream Science:स्वप्न हमेशा एक ही कारणों की वजह से नहीं आते, बल्कि इनका अपना अलग मनोविज्ञान होता है।’ यहां प्रस्तुत व्याख्या उस हालत में आए स्वप्नों से संबं‍धित होती है, जब शरीर सो रहा होता है; किंतु आत्मा जाग रही होती है। शोध से सामने आए हैं 10 प्रमुख सपने जो कमोबेश अधिकांश लोगों को आते हैं।  1) गुस्सा- स्वप्न में यह देखना कि आप किसी पर गुस्सा कर रहे हैं, इस बात का सूचक है कि वह आपका प्रिय मित्र है। यदि कोई और व्यक्ति स्वप्न में आप पर गुस्सा करता है, तो इसका मतलब है, वह आपसे सच्चा प्रेम करता है। 2) सेब- स्वप्न में सेब दिखाई देना दीर्घ आयु और व्यापार में सफलता का सूचक है। यदि कोई स्त्री स्वप्न में सेब देखती है, तो उसका अर्थ है कि उसके पुत्र उत्पन्न होगा और वह खूब फूले-फलेगा। 3) स्नान- स्वप्न में शांत, शीतल और स्वच्छ पानी में अपने आपको नहाते हुए देखने का अर्थ है कि आप सफलता और संपन्नता पाएंगे। यदि पानी-मिट्टी वाला या गंदा है, तो दुर्भाग्य का सूचक है। 4) बिल्लियां- स्वप्न में बिल्ली देखना कपट और विश्वासघात का सूचक है। 5) पाताल- स्वप्न में स्वयं को पाताल में देखना भयंकर मुसीबतों और कठिनाइयों का सूचक है। 6) दुर्घटना- स्वप्न में दुर्घटना देखने का अर्थ है कि आप निजी कठिनाइयों से घिर जाएंगे। 7) घं‍टियां- स्वप्न में घंटियां बजते हुए सुनना किसी शुभ समाचार का पूर्व संकेत है। 8) परिचित- स्वप्न में किसी परिचित को देखना अनंत मैत्री और परस्पर प्रेम का सूचक है। 9) व्यभिचार- स्वप्न में व्यभिचार दिखना आने वाली मुसीबतों का लक्षण है। 10) भोजन– यदि कोई व्यक्ति अपने-आपको स्वप्न में बढि़या भोजन करते हुए देखता है, तो यह इस बात का सूचक है कि उसका स्वास्थ्य ठीक रहेगा और भाग्योन्नति होगी। Dream Science क्या दिखते हैं सपनों में रंग, इनके अर्थ कर देंगे आपको दंग सपने हमारी चेतना की एक अद्भुत दुनिया हैं, जहां हम अजीबोगरीब दृश्यों और रंगों का अनुभव करते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि इन रंगों का हमारे सपनों में क्या अर्थ होता है? आइए जानते हैं सपनों में दिखने वाले कुछ प्रमुख रंगों के बारे में: ध्यान रखने योग्य बातें सपनों में रंगों का महत्व सपनों में रंग हमारे मनोवैज्ञानिक अवस्था, भावनाओं और विचारों को दर्शाते हैं। उन्हें समझने से हम अपने भीतर चल रही प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। Dream Science:सपने जब रंगीन आते हैं तो क्या फल देते हैं  सपनों की सुंदर दुनिया हम सभी को रोमांचित करती है। कभी डराती है तो कभी अचरज में डाल देती है। Dream Science कभी कुछ समझ नहीं आता कि यह जो अजीब सा हमने देखा वह क्या था और इसके क्या परिणाम होने वाले हैं।  रंग हमारी जिंदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सपने जब रंगीन आते हैं तो क्या फल देते हैं आइए जानते हैं-  सफेद रंग – – सुख-समृद्धि प्राप्त होगी। बैंगनी रंग – – वैराग्य के भाव उत्पन्न होंगे।  लाल रंग – – रोग नष्ट होंगे। नीला रंग – – संघर्ष के बाद विजय होगी। पीला रंग – – ईर्ष्या-द्वेष समाप्त होगा।  हरा रंग – – सुख-शांति बढ़ेगी। काला रंग – – अशुभ घटना होगी। आसमानी रंग – – मन प्रसन्न रहेगा।  नारंगी रंग – – सुखद कार्यकलाप होंगे। कत्‍थई रंग – – उदासीनता में वृद्धि होगी। गुलाबी रंग – – धन प्राप्त होगा।  काला एवं सफेद रंग- – समस्या से परेशान होंगे।  लाल और हरा रंग- – व्यापार में उन्नति होगी। हरा तथा काला रंग- – धन का नाश होगा। लाल एवं नीला रंग- – साहस एवं पराक्रम बढ़ेगा।  हरा और नारंगी रंग- – धार्मिक स्थल की यात्रा होगी। लाल और पीला रंग- – सौभाग्य प्राप्त होगा।

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Janmashtami 2024: इस दिन घर-घर जन्म लेंगे लड्डू गोपाल, यहां जानें कृष्णा जन्माष्टमी की सही तिथि और पूजा शुभ मुहूर्त

Janmashtami जन्माष्टमी 2024: लड्डू गोपाल का आगमन Krishna Janmashtami 2024: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी एक महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। इस दिन देशभर में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है। तो जानिए इस साल जन्माष्टमी का पर्व कब है। Krishna Janmashtami 2024: हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को Janmashtami जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन देशभर के कृष्ण मंदिर और घरों में कान्हा के जन्मोत्सव की खास तैयारी की जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात 12 बजे बाल गोपाल का जन्म कराया जाता है। कृष्ण जन्मोत्सव की असल रौनक बृज की धरती पर देखने को मिलती है। खासतौर से मथुरा-वृंदावन में दूर-दूर से लोग कृष्ण जन्मोत्सव देखने के लिए यहां जुटते हैं। जन्माष्टमी की मौके पर मथुरा के मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।  कृष्ण जन्माष्टमी 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त बता दें कि इस साल जन्माष्टमी का त्यौहार 26 अगस्त 2024, सोमवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि प्रारंभ 26 अगस्त को मध्य रात्रि 3 बजकर 39 मिनट से होगा। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का समापन 27 अगस्त को मध्य रात्रि 2 बजकर 19 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। हिंदू पंचांग के मुताबिक, रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 26 अगस्त 2024 को दोपहर 3 बजकर 55 मिनट से होगा। रोहिणी नक्षत्र समाप्त 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर होगा। भगवान कृष्ण की पूजा के लिए निशिता पूजा का समय  मध्य रात्रि 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट (27 अगस्त)  तक रहेगा। Janmashtami कृष्णा जन्माष्टमी के दिन इन मंत्रों का करें जाप Janmashtami जन्माष्टमी की पूजा विधि Janmashtami जन्माष्टमी के दिन क्या करें Janmashtami जन्माष्टमी का महत्व जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप लडूड गोपाल की पूजा की जाती है। कहते हैं कि जन्माष्टमी के दिन व्रत रख कान्हा जी की पूजा करने से निःसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही Janmashtami जन्माष्टमी का व्रत रखने से भक्तों के जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और धन-संपन्नता में भी बढ़ोतरी होती है। लड्डू गोपाल: जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल की पूजा का विशेष महत्व है।मथुरा और वृंदावन: इन स्थानों पर जन्माष्टमी का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन पर 90 साल बाद बन रहे हैं 4 शुभ योग का महासंयोग, जानिए किस समय राखी बांधना होगा सबसे अच्छा

Raksha Bandhan 2024: 90 साल बाद का शुभ संयोग आपने बिल्कुल सही सुना है! इस साल रक्षाबंधन बेहद खास होने वाला है। 90 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जब एक साथ चार शुभ योग बन रहे हैं। यह निश्चित रूप से एक उत्सव का कारण है। इस साल Raksha Bandhan रक्षाबंधन पर वर्षों बाद कई योग का शुभ संयोग बन रहा है। ऐसे में इस दिन शुभ मुहूर्त में राखी बांधने से भाई-बहनों को समृद्धि और खुशहाली का साथ मिलेगा। Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह भाई-बहन के खास प्यार के लिए जाना जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांधकर उनसे अपनी सुरक्षा का वचन मांगती हैं। भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। रक्षा बंधन का त्यौहार पूरे भारत में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष रक्षाबंधन 19 अगस्त 2024 को मनाया जाएगा, जो कई शुभ योगों के साथ आ रहा है। kab hai Raksha Bandhan कब है रक्षाबंधन 2024? जानें तारीख और शुभ मुहूर्त रक्षाबंधन का त्यौहार हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर साल श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। साल 2024 में यह त्यौहार 19 अगस्त को मनाया जाएगा। आप यह भी याद रखें कि इस दिन भद्रा काल भी होता है जो राखी बांधने के लिए शुभ समय नहीं होता है। इस से बचते हुए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त यहां दिया गया है। भद्रा काल: 18 अगस्त 2024 की रात 2:21 बजे से 19 अगस्त 2024 को दोपहर 1:24 बजे तक रहेगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त: 19 अगस्त 2024 को दोपहर 1:26 बजे से शाम 6:25 बजे तक रहेगा। Raksha Bandhan रक्षाबंधन 2024 पर बन रहे हैं ये महासंयोग और शुभ योग इस साल करीब 90 साल बाद Raksha Bandhan रक्षाबंधन पर 4 शुभ महासंयोग बन रहे हैं। ये महासंयोग जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आते हैं। राखी बांधते समय क्या करें Raksha Bandhan राखी बांधने के नियम Raksha Bandhan राखी बांधते समय भद्रा काल से बचना चाहिए क्योंकि इस समय राखी बांधना वर्जित है। इस साल भद्रा काल 19 अगस्त को दोपहर 1:24 बजे तक रहेगा, इसलिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही माना जाएगा। Raksha Bandhan रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार और रिश्तों का प्रतीक है। इस त्यौहार को बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भद्रा काल के कारण इस बार राखी बांधने का समय थोड़ा सीमित हो सकता है। इसलिए बहनों को भद्रा काल समाप्त होने के बाद ही राखी बांधनी चाहिए। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और रिश्ते का प्रतीक है। इस साल Raksha Bandhan रक्षाबंधन का त्योहार बेहद खास होने वाला है। इस शुभ अवसर पर आप अपने भाई को राखी बांधकर और उनका आशीर्वाद लेकर अपने रिश्ते को और मजबूत बना सकते हैं। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Raashi 2 राशियों पर हमेशा बरसती है हनुमान जी की कृपा, धन से भरी रहती है तिजोरी

Raashi: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की स्थिति और राशियों का हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। कुछ विशेष राशियों पर देवताओं की कृपा बनी रहती है और वे जीवन में धन, समृद्धि और सफलता प्राप्त करते हैं। हनुमान जी, जो कि बल, बुद्धि और सिद्धियों के देवता हैं, की कृपा पाने वाली कुछ विशेष राशियाँ हैं। इन राशियों के जातकों को जीवन में कई तरह के लाभ मिलते हैं, जिनमें धन और समृद्धि भी शामिल है। Raashi सनातन धर्म में मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा की जाती है। साथ ही मनचाहा वर पाने के लिए मंगलवार का व्रत रखा जाता है। इस व्रत को करने से जातक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ज्योतिषियों की मानें तो हनुमान जी की कृपा 2 राशि के जातकों पर हमेशा रहती है। 1.मेष राशि Mesh raashi मेष राशि के स्वामी मंगल देव हैं। इस राशि के आराध्य राम भक्त हनुमान जी हैं। उनकी कृपा मेष राशि के जातकों पर हमेशा बरसती है। इस राशि के जातकों के लिए शुभ रंग लाल होता है। वहीं, हनुमान जी को लाल रंग अति प्रिय है। जबकि मेष राशि के जातकों के लिए शुभ दिन मंगलवार होता है। सनातन धर्म में मंगलवार का दिन राम भक्त हनुमान जी को समर्पित होता है। इस दिन श्रद्धा भाव से हनुमान जी की पूजा की जाती है। Raashi ज्योतिषियों की मानें तो मेष राशि के जातकों के सभी बिगड़े काम हनुमान जी की कृपा से बन जाते हैं। लेकिन मेष राशि के जातकों को अपनी वाणी पर नियंत्रण रखना चाहिए। इस राशि के जातक गुस्से के तेज होते हैं। कई अवसर पर इनके बने काम बिगड़ जाते हैं। इसके लिए हर मंगलवार के दिन हनुमान जी की पूजा करें। साथ ही हनुमान जी को लाल रंग का चोला अर्पित करें। इन उपायों को करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होगी। मंगल का प्रभाव: मेष राशि का स्वामी मंगल ग्रह है और हनुमान जी भी मंगल के अवतार माने जाते हैं। इसी कारण मेष राशि के जातकों पर हनुमान जी की विशेष कृपा रहती है। साहस और ऊर्जा: मेष राशि के जातक बहुत ही साहसी और ऊर्जावान होते हैं। वे जीवन में हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार रहते हैं। हनुमान जी की कृपा से इनकी ये विशेषताएं और भी मजबूत होती हैं। धन और समृद्धि: मेष राशि के जातक कड़ी मेहनत और लगन से काम करते हैं। हनुमान जी की कृपा से इनके सभी प्रयास सफल होते हैं और वे जीवन में धन और समृद्धि प्राप्त करते हैं। 2. वृश्चिक राशि Vrshchik raashi वृश्चिक राशि के स्वामी भी मंगल देव हैं। इस राशि के आराध्य हनुमान जी हैं। ज्योतिषियों की मानें तो कुंडली में मंगल ग्रह मजबूत होने से जातक अपने जीवन में ऊंचा मुकाम हासिल करता है। समय के साथ जातक की पद-प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। इस राशि के जातकों को सरकारी नौकरी में जल्द सफलता मिलती है। साथ ही निजी कार्य में भी मनमुताबिक सफलता प्राप्त होती है। बजरंबली बली की कृपा से इनके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। अगर जीवन में कोई मुसीबत आती है, तो जल्द ही किसी की सहायता से दूर हो जाती है। वृश्चिक राशि के जातकों को सलाह है कि अपनी वाणी पर कंट्रोल रखें। वाद-विवाद से दूर रहें। रोजाना स्नान-ध्यान के बाद हनुमान चालीसा का पाठ करें। मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर अवश्य ही अर्पित करें। इन उपायों को करने से धन लाभ अवश्य ही प्राप्त होगा। मंगल का प्रभाव: वृश्चिक राशि का स्वामी भी मंगल ग्रह है। इसीलिए मेष राशि की तरह वृश्चिक राशि के जातकों पर भी हनुमान जी की विशेष कृपा रहती है। रहस्यमयी और मेहनती: वृश्चिक राशि के जातक रहस्यमयी और मेहनती होते हैं। वे अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। धन लाभ: हनुमान जी की कृपा से वृश्चिक राशि के जातकों को अचानक धन लाभ होने की संभावना रहती है। वे जीवन में कई तरह के सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। हनुमान जी की कृपा पाने के उपाय: अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जानकारी के लिए है और इसे किसी भी चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। यदि आपको कोई गंभीर मनोवैज्ञानिक समस्या है, तो कृपया एक पेशेवर से संपर्क करें।

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