Masik Shivratri List: साल 2024 में मासिक शिवरात्रि कब-कब है? जानें तारीख, पूजा विधि-व्रत नियम और महत्व

Masik Shivratri:मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है। हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है. प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. मासिक शिवरात्रि वर्ष के प्रत्येक महीने में एक बार और महाशिवरात्रि वर्ष में एक बार मनाते है, इस दिन व्रत करने से व्यक्ति का हर मुश्किल काम आसान हो जाता है. Masik Shivratri 2024 Date : शिवरात्रि शिव और शक्ति के संगम का एक पर्व है. पंचाग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन यानि चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. यह पर्व न केवल उपासक को अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि उसे क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं को रोकने में भी मदद करता है. मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है. वहीं हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने की मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि की मान्यता प्राप्त है. Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि: Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत विधि Masik Shivratri हर महीने आने वाले कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है. मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जो भक्त Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि करने की इच्छा रखते हैं, उन्हें मासिक शिवरात्रि का प्रारम्भ महाशिवरात्रि के दिन से करना चाहिए, इस व्रत को महिला और पुरुष दोनों कर सकते है. श्रद्धालुओं को शिवरात्रि की रात को जाग कर शिव जी की पूजा करनी चाहिए कब है भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि का महत्व हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि का व्रत बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है. मासिक शिवरात्रि में व्रत, उपवास रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने से सभी मनोमनाएं पूरी होती हैं, इस दिन व्रत करने से हर मुश्किल कार्य आसान हो जाता है और जातक की सारी समस्याएं दूर होती हैं. (Masik Shivratri)मासिक शिवरात्रि के दिन की महिमा के बारे में यह भी कहा जाता है कि वो कन्याएं जो मनोवांछित वर पाना चाहती हैं, इस व्रत को करने के बाद उन्हें उनकी इच्छा अनुसार वर मिलता है और उनके विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं. शिव पुराण के अनुसार जो भी सच्चे मन से इस व्रत को करता है उसकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. मासिक शिवरात्रि के दिन शिव पार्वती की पूजा व्यक्ति को हर तरह के कर्जों से मुक्ति दिलाती है. Masik Shivratri साल 2024 में पड़ने वाले सभी शिवरात्रि की लिस्ट Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Sapne:सपने में दिखे बचपन का दोस्त तो पलट जाती है किस्मत, जानें कब दोस्तों का सपना शुभ कब अशुभ

Sapne:अगर आपको कभी सपने में दोस्त दिखाई दे तो इसका आपके असल जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, विस्तार से जानें हमारे लेख में। दोस्ती एक ऐसा रिश्ता है जिसकी बुनियाद हम खुद रखते हैं और इसीलिए हमारी जिंदगी में दोस्तों की अहमियत बहुत ज्यादा होती है। एक सच्चा दोस्त आपके जीवन की कई परेशानियों को दूर कर सकता है।  ऐसे में अगर आप कभी सपने में दोस्तों को देखते हैं तो असल जीवन में इसका क्या अर्थ लगाया जाता है, इसके बारे में आइए विस्तार से जानते हैं।  Sapne me best friend ko dekhna: सपने में अपने बेस्ट फ्रेंड को देखना  अगर आप सपने में कभी अपने सबसे अच्छे दोस्त को देखते हैं तो ये सपना शुभ संकेतक माना जाता है। स्वप्नशास्त्र की मानें तो ऐसा सपना आने के बाद कुछ नए और अच्छे अनुभव आपको जीवन में हो सकते हैं। ये सपना आपको नई दिशा दिखाने का कार्य करता है, आप सही मार्ग पर आगे बढ़ते हैं और सफलता पाते हैं। इसके साथ ही जैसे एक सच्चा दोस्त मुश्किल परिस्थितियों में आपका साथ देता है, वैसे ही ऐसा सपना आने के बाद जीवन के मुश्किल हालातों में कोई आपका सही मार्गदर्शन कर सकता है।  Sapne me bachpan ke mitra ko dekhna सपने में बचपने के मित्रों को देखना  बचपन के दोस्त हमेशा हमारी अच्छी यादों में शामिल होते हैं। जीवन आगे बढ़ता रहता है लेकिन बचपन के दोस्त हमेशा हमारे जहन में बने रहते हैं। ऐसा में बचपन के दोस्तों को सपने Sapne में देखना शुभता का प्रतीक माना जाता है। ऐसा सपना आने के बाद आपके जीवन में अच्छे बदलाव आ सकते हैं। बचपन के दोस्त सुनहरी यादों की तरह होते हैं, ऐसे में सपने में इनका आना आपके सुनहरे दौर का संकेत भी माना जाता है।  Sapne me apne dosto se bate share karna:सपने में दोस्तों से बातें शेयर करना  अगर आप सपने में अपने किसी दोस्त से बातें शेयर कर रहे हैं, तो इसका अर्थ लगाया जाता है कि आपके मन में कोई बात दबी हुई है जिसे आप कह नहीं पा रहे हैं। संभव है कि आपको कोई ऐसा नहीं मिल रहा जिसके साथ आप बात को साझा कर सकें, इसलिए ऐसा सपना आने के बाद आपको थोड़ा सतर्क हो जाना चाहिए और किसी दोस्त या करीबी रिश्तेदार से अपनी बातें कहनी चाहिए। ऐसा करना आपके मन के बोझ को कम कर सकता है। साथ यह सपना इस बात का भी संकेत माना जाता है कि, आपको भविष्य में अपने करीबियों का सहयोग मिलेगा।  Sapne me mratu dekhna सपने में दोस्त की मृत्यु देखना  अगर आप सपने में अपने किसी मित्र की मृत्यु देखते हैं, तो ये सपना असल जीवन में कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है। आप किसी बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं, ऐसा सपना आने के बाद आपको अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना चाहिए।  Swapna Shastra:सपने में पीछा किया जाना: क्या होता है इसका मतलब ? Sapne me Dost se fight karna सपने में दोस्त के साथ लड़ना यह सपना भी आपके लिए चुनौतियां लेकर आ सकता है। इस सपने का अर्थ होता है कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन में किसी के साथ बहसबाजी में आप फंस सकते हैं। ऐसा सपना आने के बाद आपको बातें कम और काम ज्यादा करना चाहिए। साथ ही वाद-विवाद की स्थिति से दूर रहना चाहिए।  Sapne me dosto ke sath kahi Ghumne jana सपने में दोस्तों के साथ कहीं घूमने जाना  अगर आप सपना देखें कि आप अपने दोस्तों के साथ कहीं घूमने जा रहे हैं, तो इसका अर्थ है आप अपने जीवन में बोरियत महसूस कर रहे हैं। आपको कुछ दिन की छुट्टियां चाहिए जिससे आपका मूड फ्रेश हो सके। ऐसा सपना आने के बाद कुछ समय खुद के लिए निकालकर आप तरोताजा महसूस कर सकते हैं।  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Swapna Shastra: सपने में कोई आपका पीछा करे, तो जानें क्या होता है इसका मतलब

Swapna Shastra:सपने में पीछा किया जाना: क्या होता है इसका मतलब ? sapne mein kisi ka peecha karne ka matlab: अगर कोई सपने में आपका पीछा करता है, तो इसके कई कारण हो सकते हैं। स्वप्न शास्त्र में न सिर्फ ऐसे सपने आने के कारण बताए गए हैं बल्कि इसका ऐसे सपनों से राहत पाने के उपाय भी बताए गए हैं। आइए, जानते हैं। सपने में पीछा किया जाना एक बहुत ही आम अनुभव है, और इसके कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं। यह आपके जागृत जीवन में चल रही भावनाओं, चिंताओं या तनाव का प्रतिबिंब हो सकता है। कोई आपका पीछा कर रहा है। कोई अनजाना-सा साया आपके पीछे दौड़ता आ रहा है। आप उस साए से बचने के लिए भागते जा रहे हैं और भागते ही जा रहे हैं। आप भागते-भागते थक जाते हैं Swapna Shastra लेकिन फिर भी आपके पीछे दौड़ने वाला अनजान शख्स नहीं रूकता। आप अपनी जान बचाने के लिए भागते ही चले जाते हैं। आप पसीनों से भीग चुके हैं और अचानक आपकी आंखे खुल जाती हैं। यह क्या आप! आप अपने आसपास देखते हैं, तो आप राहत की सांस लेते हैं क्योंकि यह तो बस एक डरावना सपना था। क्या आपको भी अक्सर ऐसे सपने आते हैं, जिसमें कोई आपके पीछे दौड़ता है या आपका पीछा करता? अगर आपका जवाब हां है, तो आपको इसका कारण जरूर जान लेना चाहिए। सपने में दिखे हाथी तो समझिए खुल गई आपकी किस्मत, मिलते हैं शुभ संकेत Swapna Shastra:सपने में कोई पीछा करते हुए क्यों नजर आता है? Swapna Shastra आपको भी अगर लगता है कि कोई सपने में आपका पीछा कर रहा है, तो इसका एक कारण यह होता है कि आपको असफल होने का डर सताता है। कई बार ऐसा होता है Swapna Shastra कि हमें करियर में पीछे छूट जाने का डर लगता है या फिर हम किसी और वजह से डरने लगते हैं। यह डर हमें सपने में दिखाई देता है।कभी-कभी हम अपनी कल्पनाओं में एक नई दुनिया बुन लेते हैं, जिससे कई तरह की फैंटेसी होती है, जिससे हमें सपने भी अजीबो-गरीब नजर आते हैं।हमें बीती बातों या तनाव की वजह से भी ऐसे सपने आते हैं, जिससे हमें अक्सर लगता है कि कोई हमारे पीछे दौड़ रहा है। इन सपनों से पीछा कैसे छुड़ाएं Swapna Shastra सपने में पीछा किए जाने के कुछ सामान्य अर्थ: Swapna Shastra सपने के अर्थ को समझने के लिए इन बातों पर ध्यान दें: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Swapna Shastra: सपने में दिखे हाथी तो समझिए खुल गई आपकी किस्मत, मिलते हैं शुभ संकेत

सपने में दिखे हाथी स्वप्न शास्त्र के अनुसार शुभ संकेत सपने में दिखे हाथी सपने हमारे अचेतन मन की झलक होते हैं और अक्सर वे हमारे जीवन की घटनाओं और भावनाओं को दर्शाते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपनों का विश्लेषण करके हम भविष्य के बारे में कुछ संकेत प्राप्त कर सकते हैं। सपने में दिखे हाथी एक शुभ संकेत माना जाता है। हाथी को शक्ति, ज्ञान और लंबी उम्र का प्रतीक माना जाता है। अलग-अलग स्थितियों में हाथी को देखने के अलग-अलग अर्थ होते हैं: Dream Meaning:स्वप्नशास्त्र के अनुसार सपने में हाथी दिखाई देना बहुत शुभ माना जाता है. यह सपना घर में सुख-शांति आने का संकेत देता है. स्वप्न शास्त्र से जानते हैं कि सपने में हाथी देखने का अर्थ Sapne Me Hathi Dekhna: सपने में दिखे हाथी रात में सोते समय ज्यादातर लोगों को सपने आते हैं. कुछ सपने अच्छे होते हैं तो कुछ बेहद खराब. स्वप्नशास्त्र के अनुसार हर सपने का कोई न कोई मतलब जरूर होता है. अगर आपको सपने में हाथी दिखाई देता है तो इसका भी एक खास मतलब है. हाथी को ऐश्वर्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. हाथी का सपना देखना बहुत शुभ माना जाता है. इसे घर में सुख-शांति आने का सूचक माना जाता है. स्वप्न शास्त्र से जानते हैं कि सपने में हाथी देखने का क्या मतलब होता है. अगर बार-बार सपने में दिखता है एक ही इंसान तो ये हो सकता है मतलब सुख-समृद्धि का संकेत देता है हाथी सपने में दिखे हाथी का मतलब है कि आपको जल्द हा मान-सम्मान का लाभ होने वाला है. सपने में खुद को हाथी पर सवार देखते हैं तो इसका मतलब है कि आपको जल्दी तरक्की मिलने वाली है. खासतौर से सपने में अगर ऐरावत हाथी दिखाई दे तो यह किसी बड़ी उपलब्धि का सूचक माना जाता है. इस उपलब्धि की वजह से समाज में आपका रुतबा बढ़ेगा और आपके वैभव में वृद्धि होगी. वहीं सपने में हाथी-हथिनी का जोड़ा दिखाई देता है तो इसका मतलब है कि दांपत्य जीवन में खुशियां आने वाली हैं. सपने में दिखे हाथी धन लाभ का सूचक हाथी सपने में दिखे हाथी अगर कोई गर्भवती स्त्री सपने में हाथी देखती है तो यह भाग्यशाली संतान आगमन का संकेत देता है.मस्त झूमते हुए हाथी का सपना देखने का मतलब है कि आपको जल्द अपनी सभी समस्याओं से छुटकारा मिलने वाला है. सपने में हाथियों का झुंड दिखाई देना आकस्मिक धन लाभ का संकेत देता है. स्वप्न में खड़ा हाथी देखने का मतलब है कि आपके कार्य में कोई बाधा आ सकती है और मुसीबत के वक्त आप अकेले हो सकते हैं. सपने में दिखे हाथी के कुछ अन्य अर्थ: कुल मिलाकर, सपने में हाथी देखना एक शुभ संकेत माना जाता है। यह आपके जीवन में सकारात्मक बदलावों का संकेत हो सकता है। हालांकि, सपनों का अर्थ व्यक्तिगत अनुभवों और संदर्भों के आधार पर भिन्न हो सकता है। यदि आपने सपने में हाथी देखा है तो आप निम्नलिखित बातों पर ध्यान दे सकते हैं:  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Aja Ekadashi 2024: इन गलतियों के कारण टूट सकता है अजा एकादशी का व्रत! श्री हरि हो जाएंगे नाराज

Aja Ekadashi अजा एकादशी 2024: इन गलतियों से बचें, वरना श्री हरि हो जाएंगे नाराज Aja Ekadashi अजा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत को करने से कई तरह के पुण्य मिलते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। लेकिन अगर इस व्रत को करते समय कुछ गलतियाँ की जाएँ तो भगवान विष्णु नाराज हो सकते हैं और व्रत का फल नहीं मिलता है। Aja Ekadashi 2024: अजा एकादशी पर होगा पापों का नाश, जानिए शुभ मुहूर्त और दान का महत्व Aja Ekadashi अजा एकादशी के दिन भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की पूजा होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस दिन कठिन व्रत का पालन करते हैं और विधि अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं उन्हें सुख-शांति की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार अजा एकादशी 29 अगस्त को मनाई जाएगी तो आइए इस तिथि से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं। Aja Ekadashi हिंदू धर्म में सभी एकादशी का अपना एक खास महत्व है। यह बहुत विशेष मानी जाती है। यह दिन भगवान विष्णु (Vishnu ji) की आराधना के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग इस दौरान कठिन व्रत का पालन करते, उन्हें दोगुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही श्री हरि का आशीर्वाद प्राप्त होता है, वहीं कुछ लोग इस दिन (Aja Ekadashi 2024 Date) ऐसी महत्वपूर्ण बातों को अनदेखा कर देते हैं, जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है, तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।अजा एकादशी का व्रत एक पवित्र व्रत है। इस व्रत को विधि-विधान से करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। इन बातों का जरूर रखें ध्यान Aja Ekadashi अजा एकादशी का महत्व: Aja Ekadashi अजा एकादशी व्रत कैसे करें कब है अजा एकादशी? (Bhadrapada Ekadashi 2024) हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ गुरुवार 29 अगस्त को देर रात 1 बजकर 19 मिनट पर होगा। वहीं, इसका समापन शुक्रवार 30 अगस्त को देर रात 01 बजकर 37 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, अजा एकादशी 29 अगस्त 2024 को मनाई जाएगी। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Sapne:अगर बार-बार सपने में दिखता है एक ही इंसान तो ये हो सकता है मतलब

सपने में कई बार हमारे सपने बहुत ही अजीब होते हैं और किसी एक ही इंसान की छवि अलग-अलग तरह से हम देखते हैं। पर अगर एक ही तरह का सपना बार-बार आ रहा है तो उसका मतलब क्या है? बार-बार सपने में एक ही व्यक्ति दिखना एक आम अनुभव है, और इसके कई संभावित अर्थ हो सकते हैं। ये अर्थ व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं पर निर्भर करते हैं। आइए कुछ सामान्य अर्थों पर नज़र डालते हैं: सपने कई बार हमारे दिमाग की छवि को दिखाते हैं। कई बार तो इनका कोई मतलब भी नहीं होता और हमारा दिमाग अलग-अलग चीजों की छवि हमें दिखाता जाता है। ये किसी फिल्म की तरह चलते हैं और अगर इसका मतलब निकालने की कोशिश की जाए तो हो सकता है कि हमारी पर्सनैलिटी के कई राज पता चल जाएं। वैसे तो सपनों का मतलब ज्यादा नहीं निकालना चाहिए, लेकिन अगर एक ही सपना बार-बार देखा जाए तो? अगर किसी एक ही इंसान को आप बार-बार देखें तो उसका क्या किया जाए? अगर कोई एक ही इंसान बार-बार आपके सपने में दिख रहा है तो इसका मतलब वो इंसान आपके बहुत क्लोज रहा है। सपने किसी गहरे लॉस को दिखाता है अगर आप एक ही इंसान को बार-बार अपने सपने में देख रही हैं तो इसका मतलब ये हो सकता है कि कोई इंसान आपके बहुत करीब रहा हो और फिर वो इंसान आपसे दूर हो गया हो। हालांकि, किसी एक इंसान के बारे में ही सपने देखने का ये मतलब नहीं कि आप उससे बहुत ज्यादा अटैच ही रही हों। ऐसा भी हो सकता है कि वो सपना आपकी एंग्जाइटी या फिर स्ट्रेस को दिखा रहा हो जो उस इंसान से जुड़ा हुआ हो या उसके आस-पास के माहौल से जुड़ा हो। उदाहरण के तौर पर अगर किसी स्कूल या कॉलेज फ्रेंड या फिर किसी कलीग के बारे में आप बार-बार सपना देख रही हैं तो हो सकता है कि आपके ऑफिस, स्कूल या कॉलेज में उससे जुड़ा कोई स्ट्रेस का माहौल हो। किसी गहरे लगाव को भी दर्शा सकता है सपना ऐसा भी हो सकता है कि आप उस इंसान से बहुत ज्यादा स्ट्रॉन्ग इमोशनल अटैचमेंट महसूस करने लगी हों जिसका सपना रोज-रोज आता हो। ये आपकी केयर भी दर्शा सकता है कि आप किसी की बहुत ज्यादा केयर करती हों या फिर किसी स्ट्रॉन्ग इमोशनल बॉन्ड या फिर किसी अटैचमेंट को तोड़ चुकी हों। ब्रेकअप के बाद अधिकतर ऐसा होता है। Sleep Talking:क्या आप भी सोते समय नींद में बड़बड़ाते हैं? ये हैं कारण और उपचार गहरे सदमे से उबरने का तरीका हैं सपने जैसा कि हमने बताया कि सपने किसी गहरे लॉस को दिखा सकते हैं वैसे ही ये उस गहरे लॉस से उबरने के लिए सपने बार-बार आते हैं। अब आप इसे अच्छा सपना मान सकती हैं या फिर बुरा ये आपके ऊपर है। इसका मतलब ये हो सकता है कि हम उस इंसान के प्रति अपनी फीलिंग्स को बचाकर रखने की कोशिश कर रहे हैं। माता-पिता भी बार-बार अपने बच्चों से जुड़ा सपना देखते हैं जिन्हें इस तरह की समस्या होती है। अधिकतर ये हमारी भावनाओं से जुड़े होते हैं। अगर कोई सपना एक बार आता है तो दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर कोई सपना बार-बार आ रहा है तो उसका मतलब हमारी भावनाओं से जोड़ा जा सकता है। कई बार हमारे इमोशन्स हम सामने व्यक्त नहीं कर पाते हैं, लेकिन उन इमोशन्स को हम अपने सपनों के जरिए जाहिर कर लेते हैं। कई बार सपने हमारी फीलिंग्स को ठीक करने की कोशिश करते हैं। अगर हम किसी को लेकर गिल्टी फील कर रहे हैं तो ये सपना इस कारण भी आ सकता है अगर आप किसी एक इंसान को लेकर बहुत गिल्टी फील कर रही हों। हो सकता है कि आपको ये लगे कि उस इंसान के साथ आपने कुछ गलत किया है तो आप उसे बार-बार सपने में इंटरेक्शन करते हुए देखेंगी। सपनों को लेकर कई तरह के मीनिंग निकाले जा सकते हैं, लेकिन अगर आप किसी सपने के कारण बहुत ज्यादा डर रही हैं तो उसके लिए आपको किसी एक्सपर्ट से बात करने की जरूरत है। क्या आपके साथ भी ऐसा होता है? अगर हां तो हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।

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Swapna Shastra:सपने में इन 11 चीजों के दिखने के हैं खास मायने, समझें संकेत

Swapna Shastra:सपने हमारी चेतना की एक रहस्यमयी दुनिया हैं, जहां हम अक्सर अजीबोगरीब और अविश्वसनीय चीजें देखते हैं। सदियों से लोग सपनों के अर्थ को समझने की कोशिश करते रहे हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने हमारे मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक स्थिति को दर्शाते हैं। वे भविष्य के बारे में संकेत भी दे सकते हैं। Swapna Shastraसोते समय सपने देखना आम बात है. कहा जाता है कि सपने हमारे अवचेतन मन का हिस्सा होते हैं जो हमें किसी ना किसी बात का संकेत देते हैं. आइए जानते हैं उन सपनों के बारे में जो आपसे कुछ कहने की कोशिश करते हैं और आपको इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. Swapna Shastra आइए जानते हैं सपने में कुछ सामान्य चीजों के दिखने के क्या मायने हो सकते हैं: दुर्घटना का सपना- किसी सड़क दुर्घटना का सपना देखना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको अपने गुस्से पर नियंत्रण रखने और जो कुछ भी आपके इर्द-गिर्द हो रहा है, उसे नजरअंदाज करने की जरूरत है. अपनी कठिन परिस्थितियों का सही तरीके से आकलन कर आगे बढ़ने की कोशिश करें. दुर्घटना का सपना इस तरफ भी इशारा करता है कि आपको जिंदगी में आगे बढ़ने से कोई रोक रहा है. गुब्बारों का सपना– अगर आप गुब्बारे के फूटने का सपना देखते हैं तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि आप अपने सपनों और उम्मीदों को लेकर चिंतित हैं. आपको डर है कि आपकी उम्मीदें टूट जाएंगी. अगर आप गुब्बारों के ऊपर उड़ने का सपना देखते हैं तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि आप अपने जीवन से निराशा दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. काला गुब्बारा जीवन में निराशा का प्रतीक होता है. कौवे का सपना– सपने में कौवे का आना नकारात्मक भावनाओं का प्रतीक माना जाता है. अगर सपने में कौवा आप पर हमला कर रहा है तो इसका मतलब है कि आप अपनी जिंदगी किन्हीं कठिन परिस्थितियों से जूझ रहे हैं. दिवालियापन का सपना- जो लोग अक्सर खुद के दिवालिया होने का सपना देखते हैं, वो दरअसर हर वक्त अपने पैसों के बारे में सोचते रहते हैं. ये सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको अपने पैसों का प्रबंध उचित तरीके से करने की जरूरत है. Swapna Shastra:मृत्यु के 6 महीने पहले मिलने लगते हैं ये तीन संकेत, कभी सपने में तो कभी सामने होती हैं ये घटनाएं   कहीं दूर जाने के सपने देखना– अगर आप कहीं दूर जाने का सपना देखते हैं तो ये इस बात का संकेत है कि आप अपने मौजूदा हालात को संभालने की बजाय उससे भागना चाह रहे हैं. अगर कई चीजों में खुद को फंसा हुआ पाते हैं और एकांत की तलाश में हैं तो भी आपको इस तरह के सपने आ सकते हैं. खाने का सपना देखना– अगर आप खाने का सपना देख रहे हैं तो ये आपकी किसी अधूरी इच्छा का संकेत हो सकता है. खाने के बारे में सपने देखना भावनाओं, आध्यात्मिकता और बुद्धि से संबंधित भी हो सकता है. यह जीवन में कुछ नया करने के लिए हमारी भूख के बारे में बताता है. Swapna Shastra सपने में शैतान का दिखना– सपने में शैतान का दिखना इस बात का संकेत है कि आप अपने जीवन में खुद से ही जूझ रहे हैं. Swapna Shastra ये किसी नकारात्मक स्थिति, अपराधबोध या फिर चिंता का भी प्रतीक हो सकता है. ये इस बात की तरफ भी इशारा करता है कि कोई आपसे आपकी इच्छा के विरुद्ध कोई काम करा रहा है. Swapna Shastra अविवाहित होने का सपना– जिन लोगों को अविवाहित होने का सपना आता है तो ये इस बात का संकेत हो सकता है कि आप अपने रिश्ते में किसी दबाव से गुजर रहे हैं. आप खुद को कहीं ना कहीं फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं और इससे बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे हैं. बिना कपड़ों के होना– कोई लोगों को ऐसे सपने आते हैं कि वो बहुत सारे लोगों के बीच बिना कपड़ों के घूम रहे हैं. ये इस बात का इशारा करता है कि आप लोगों के बीच अपनी छवि को लेकर चिंतित रहते हैं. Swapna Shastraआप हर काम करने से पहले खुद सोच लेते हैं कि लोग क्या सोचेंगे. अगर आपको ये सपना बार-बार आता है तो अपनी स्थिति का सही आकलन करें. शरीर पर चकत्ते का सपना देखना– त्वचा पर चकत्ते और दाने होने का सपना आपके अवचेतन मन का एक संकेत हो सकता है. इसे क्रोध और हताशा का प्रतीक माना जाता है. ये हमें किसी गलत निर्णय का संकेत देता है. किसी को धोखा देने का सपना– किसी अपने को धोखा देने का सपना आपको अपराधबोध महसूस करा सकता है. ये इस बात का संकेत है कि अगर आप वाकई साथी को धोखा दे रहे हैं Swapna Shastra तो आपको सावधान हो जाना चाहिए. अगर आप सपना देखते हैं कि आपका साथी आपको धोखा दे रहा है तो इसका ये मतलब हो सकता है कि अपने रिश्ते को लेकर आपमें असुरक्षा की भावना है.

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Shiva Chalisa:श्रावण मास में पढ़ें पवित्र श्री शिव चालीसा- जय गिरिजा पति दीन दयाला

Shiva Chalisa शिव चालीसा: भोलेनाथ की भक्ति में डूब जाइए Shiva Chalisa आपने जो शिव चालीसा का अंश दिया है, वह निश्चित रूप से भगवान शिव की भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण है। “जय गिरिजा पति दीन दयाला” यह पंक्ति भोलेनाथ के दयालु स्वरूप का वर्णन करती है। Shiva Chalisa:शिव चालीसा का महत्व Shiva Chalisa शिव चालीसा भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक बहुत ही लोकप्रिय स्तोत्र है। यह स्तोत्र भक्तों को शिव भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है और मन को शांत करता है। Shiva Chalisa शिव चालीसा के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं: Shiva Chalisa शिव चालीसा का पाठ कैसे करें Shiva Chalisa ।।दोहा।। श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥ मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥ किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥ तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥ किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥ दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥ प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥ कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥ पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥ सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥ जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥ मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥ धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥ अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥ शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥ नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥ जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥ ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥ पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥ जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥ कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥ ॥दोहा॥ नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान। अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥ 

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Ganesh Chalisa:श्री गणेश चालीसा

Ganesh Chalisa श्री गणेश चालीसा: भगवान गणेश की भक्ति में डूब जाइए Ganesh Chalisa श्री गणेश चालीसा हिंदू धर्म में भगवान गणेश की स्तुति में गाया जाने वाला एक बहुत ही लोकप्रिय स्तोत्र है। यह चालीसा भगवान गणेश के विभिन्न रूपों और उनके गुणों का वर्णन करता है। Ganesh Chalisa भक्त गणेश चालीसा का पाठ करते हुए भगवान गणेश से आशीर्वाद और कृपा प्राप्त करते हैं। Ganesh Chalisa गणेश चालीसा का महत्व Ganesh Chalisaगणेश चालीसा का पाठ कैसे करें Ganesh Chalisa जय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥ जय जय जय गणपति राजू। मंगल भरण करण शुभ काजू॥ जय गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायक बुद्धि विधाता॥ वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावन। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥ राजित मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥ पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥ सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥ धनि शिवसुवन षडानन भ्राता। गौरी ललन विश्व-विधाता॥ ऋद्धि सिद्धि तव चँवर डुलावे। मूषक वाहन सोहत द्वारे॥ कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुचि पावन मंगल कारी॥ एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥ भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरि द्विज रूपा। अतिथि जानि कै गौरी सुखारी। बहु विधि सेवा करी तुम्हारी॥ अति प्रसन्न ह्वै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥ मिलहि पुत्र तुहि बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥ गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥ अस कहि अन्तर्धान रूप ह्वै। पलना पर बालक स्वरूप ह्वै॥ बनि शिशु रुदन जबहि तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरि समाना॥ सकल मगन सुख मंगल गावहिं। नभ ते सुरन सुमन वर्षावहिं॥ शम्भु उमा बहुदान लुटावहिं। सुर मुनि जन सुत देखन आवहिं॥ लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आए शनि राजा॥ निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक देखन चाहत नाहीं॥ गिरजा कछु मन भेद बढ़ायो। उत्सव मोर न शनि तुहि भायो॥ कहन लगे शनि मन सकुचाई। का करिहौ शिशु मोहि दिखाई॥ नहिं विश्वास उमा कर भयऊ। शनि सों बालक देखन कह्यऊ॥ पड़तहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक शिर उड़ि गयो आकाशा॥ गिरजा गिरीं विकल ह्वै धरणी। सो दुख दशा गयो नहिं वरणी॥ हाहाकार मच्यो कैलाशा। शनि कीन्ह्यों लखि सुत को नाशा॥ तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधाए। काटि चक्र सो गज शिर लाए॥ बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ शंकर डारयो॥ नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि वर दीन्हे॥ बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी की प्रदक्षिणा लीन्हा॥ चले षडानन भरमि भुलाई। रची बैठ तुम बुद्धि उपाई॥ चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥ धनि गणेश कहि शिव हिय हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥ तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहस मुख सकै न गाई॥ मैं मति हीन मलीन दुखारी। करहुँ कौन बिधि विनय तुम्हारी॥ भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। लख प्रयाग ककरा दुर्वासा॥ अब प्रभु दया दीन पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥ Ganesh Chalisa दोहा श्री गणेश यह चालीसा पाठ करें धर ध्यान। नित नव मंगल गृह बसै लहे जगत सन्मान॥ सम्वत् अपन सहस्र दश ऋषि पंचमी दिनेश। पूरण चालीसा भयो मंगल मूर्ति गणेश॥

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krishna bhagwan:भगवान कृष्ण क्यों बने थे अर्जुन के सारथी जानिए, महाभारत के बाद की बात

krishna bhagwan भगवान श्री कृष्ण क्यों बने थे अर्जुन के सारथी? महाभारत के बाद की बात krishna bhagwan एक बहुत ही रोचक प्रश्न है! krishna bhagwan महाभारत के युद्ध में भगवान श्री कृष्ण का अर्जुन के सारथी बनना एक ऐतिहासिक घटना है। यह सिर्फ एक सांसारिक घटना नहीं थी, बल्कि इसमें गहरा आध्यात्मिक अर्थ छिपा हुआ था। आइए जानते हैं कुछ कारण जो भगवान श्री कृष्ण के अर्जुन के सारथी बनने के पीछे हो सकते हैं: Mahabharat:महाभारत के बाद की बात Mahabharat महाभारत के युद्ध के बाद भगवान श्री कृष्ण ने अपने भौतिक शरीर का त्याग कर दिया। लेकिन उनकी आत्मा हमेशा मानवता के कल्याण के लिए कार्य करती रही। उन्होंने हमें गीता के रूप में एक अमूल्य उपहार दिया है जो आज भी हमें मार्गदर्शन करता है। Dahi Handi 2024: दही हांडी उत्सव कब? जानिए तिथि और इससे जुड़ी पौराणिक कथा krishna bhagwan पीतांबरधारी चक्रधर भगवान कृष्ण महाभारत युद्ध में सारथी की भूमिका में थे। उन्होंने अपनी यह भूमिका स्वयं चयन की थी। अपने सुदर्शन चक्र से समस्त सृष्टि को क्षण भर में मुट्ठी भर राख बनाकर उड़ा देने वाले या फिर समस्त सृष्टि के पालनकर्ता भगवान कृष्ण महाभारत में अपने प्रिय सखा धनुर्धारी अर्जुन के सारथी बने थे। इस बात से अर्जुन को बड़ा ही अटपटा लग रहा था कि उसके प्रिय सखा कृष्ण रथ को हांकेंगे। सारथी की भूमिका ही नहीं, बल्कि महाभारत रूपी महायुद्ध की पटकथा भी उन्हीं के द्वारा लिखी गई थी और युद्ध से पूर्व ही अधर्म का अंत एवं धर्म की विजय वह सुनिश्चित कर चुके थे। उसके बाद भी उनका सारथी की भूमिका को चुनना अर्जुन को असहज कर देने वाला था।   भगवान कृष्ण सारथी के संपूर्ण कर्म कर रहे थे। एक सारथी की तरह वह सर्वप्रथम पांडुपुत्र अर्जुन को रथ में सम्मान के साथ चढ़ाने के साथ फिर आरूढ़ होते थे और अर्जुन के आदेश की प्रतीक्षा करते थे। हालांकि अर्जुन उन्हीं के आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन के अनुरूप चलते थे, परंतु भगवान कृष्ण अपने इस अभिनय का संपूर्ण समर्पण के साथ निर्वहन करते थे।   युद्ध के अंत में वह पहले अर्जुन को उतार कर ही उतरते थे। भगवान कृष्ण अर्जुन से युद्ध के पूर्व बोले थे, ‘‘हे परंतप अर्जुन! युद्ध की विजय सुनिश्चित करने के लिए भगवती दुर्गा से आशीष लेना उपयुक्त एवं उचित रहेगा। भगवती दुर्गा के आशीर्वाद के पश्चात ही युद्ध प्रारंभ करना चाहिए।’’  सारथी के रूप में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को एक और सलाह दी थी, ‘‘हे धनुर्धारी अर्जुन! मेरे प्रिय हनुमान का आह्वान करो। वह महावीर हैं, अजेय हैं और धर्म के प्रतीक हैं। उन्हें अपने रथ की ध्वजा पर आरूढ़ होने के लिए उनका आह्वान करो।’’  अर्जुन ने यही किया था। सारथी की भूमिका में ही भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में दोनों सेनाओं ने बीच परम रहस्यमयी गीता का गान किया था।’’ भगवान कृष्ण ने सारथी के रूप में अर्जुन के पराक्रम को निखारा ही नहीं, कठिन से कठिनतम क्षणों में उनको सुरक्षित एवं संरक्षित कर अपनी भूमिका को सार्थक किया था। इसलिए तो भीष्म पितामह, अर्जुन को आशीर्वाद देकर बोले, ‘‘हे प्रिय अर्जुन! जिसके सारथी स्वयं भगवान कृष्ण हों, उसे कैसी चिंता! तुम्हारी विजय सुनिश्चित है। तुम ही विजयी होगे-विजयीभव।’’  सारथी भगवान कृष्ण ने अर्जुन को धर्म का पाठ तब पढ़ाया जब महादानी सूर्यपुत्र कर्ण के रथ के पहिए धरती में धंस गए थे और तब कर्ण, अर्जुन को धर्म एवं नीति का पाठ पढ़ा रहा था। उस समय भगवान कृष्ण अर्जुन से बोले, ‘‘हे पार्थ! कर्ण किस मुंह से धर्म की बात कर रहा है। द्रौपदी के चीरहरण के समय, अभिमन्यु के वध के समय, भीम को विष देते समय, लाक्षागृह को जलाने के समय उसका धर्म कहां चला गया था? यही क्षण है कर्ण को समाप्त करने का।’’   भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन से ही कर्ण का अंत संभव हो सका। सारथी के रूप में ही भगवान कृष्ण ने अर्जुन से जयद्रथ का वध करने के लिए व्यूह रचना की थी और अर्जुन जयद्रथ का वध कर सके थे।  भगवान कृष्ण ने सारथी की भूमिका का इस खूबी से निर्वाह किया था कि अर्जुन को लग रहा था यदि कान्हा के हाथों में घोड़ों की लगाम न होती तो पता नहीं मेरा क्या होता? यहां भगवान के दृश्य हाथों में घोड़ों की लगाम थी और अदृश्य हाथों में महाभारत के महायुद्ध की समग्र डोर। महाभारत का युद्ध समाप्त हो गया था। कुरुक्षेत्र में भगवान कृष्ण रथ पर बैठे थे। भगवान कृष्ण के अधरों पर एक निश्छल मुस्कान सदा की तरह बिखरी हुई थी जो आज कुछ और भी गहरी हो गई थी। आज उनके हाव-भाव एवं व्यवहार में कुछ परिवर्तन था।  भगवान कृष्ण krishna bhagwan सदा की तरह रथ से अर्जुन से पहले नहीं उतरे और अर्जुन से बोले, ‘‘पार्थ! आज तुम रथ से पहले उतर जाओ। तुम उतर जाओगे तब मैं उतरता हूं।’’ यह सुनकर अर्जुन को कुछ अटपटा-सा लगा। कान्हा तो बड़े आदर से अर्जुन को रथ से उतारने के बाद उतरते थे, पर आज यह क्या हुआ? भगवान कृष्ण, अर्जुन के रथ से उतरने के पश्चात कुछ देर मौन रहे, फिर वह धीरे से उतरे और अर्जुन के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें रथ से दूर ले गए। उसके पश्चात जो घटा वह उन सर्वज्ञ भगवान कृष्ण के लिए तो परिचित था, परंतु अर्जुन के लिए विस्मयकारी, अकल्पनीय एवं आश्चर्यजनक था। अनायास ही रथ से अग्रि की लपटें निकलने लगीं और वह एक भयंकर विस्फोट करते हुए जलकर खाक हो गया।  Arjunअर्जुन देख रहे थे जो रथ इतने अजेय महारथियों के अंत की कहानी का प्रत्यक्षदर्शी था, आज वह पल भर में नष्ट हो गया। अर्जुन देख रहे थे उस रथ से जुड़े अतीत को, इसी रथ से पूज्य पितामह की देह को अस्त्रों से बींध दिया था। इसी रथ से अनगिनत महारथियों का वध किया था। इसी रथ पर बैठकर उनके प्रिय सखा ने उन्हें गीता का उपदेश दिया था। आज वह राख की ढेरी बन चुका था।   इस घटना से हतप्रभ अर्जुन ने भगवान कृष्ण से कहा, ‘‘हे कान्हा! आपके उतरते ही यह रथ पल भर में भस्मीभूत हो गया। ऐसे कैसे हो गया? इसके पीछे क्या रहस्य है?’’  krishna bhagwan भगवान कृष्ण बोले, ‘‘हे

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Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी…

Durga Chalisa यहां सभी पाठकों के लिए प्रस्तुत है पवित्र श्री दुर्गा चालीसा। नवरात्रि के दिनों के अलावा  भी दुर्गा चालीसा का नित्य पाठ करने से मां दुर्गा अपने भक्त पर प्रसन्न होती हैं और वे  हर तरह के संकट दूर करती हैं।  Durga Chalisa:दुर्गा चालीसा: शक्ति की स्तुति Durga Chalisa दुर्गा चालीसा एक प्रसिद्ध हिंदू स्तोत्र है जो देवी दुर्गा की महिमा का वर्णन करता है। देवी दुर्गा को शक्ति का प्रतीक माना जाता है और उन्हें बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी माना जाता है। इस चालीसा में देवी के विभिन्न रूपों और उनके शक्तिशाली कार्यों का वर्णन किया गया है। Durga Chalisa दुर्गा चालीसा का महत्व Sri Durga Chalisa कब पाठ करें Durga Chalisa दुर्गा चालीसा नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी। तिहूं लोक फैली उजियारी॥ शशि ललाट मुख महाविशाला। नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥ रूप मातु को अधिक सुहावे। दरश करत जन अति सुख पावे॥ तुम संसार शक्ति लै कीना। पालन हेतु अन्न धन दीना॥ अन्नपूर्णा हुई जग पाला। तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥ प्रलयकाल सब नाशन हारी। तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥ शिव योगी तुम्हरे गुण गावें। ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥ रूप सरस्वती को तुम धारा। दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥ धरयो रूप नरसिंह को अम्बा। परगट भई फाड़कर खम्बा॥ रक्षा करि प्रह्लाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥ लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं। श्री नारायण अंग समाहीं॥ क्षीरसिन्धु में करत विलासा। दयासिन्धु दीजै मन आसा॥ हिंगलाज में तुम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी॥ मातंगी अरु धूमावति माता। भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥ श्री भैरव तारा जग तारिणी। छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥ केहरि वाहन सोह भवानी। लांगुर वीर चलत अगवानी॥ कर में खप्पर खड्ग विराजै। जाको देख काल डर भाजै॥ सोहै अस्त्र और त्रिशूला। जाते उठत शत्रु हिय शूला॥ नगरकोट में तुम्हीं विराजत। तिहुंलोक में डंका बाजत॥ शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे। रक्तबीज शंखन संहारे॥ महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघ भार मही अकुलानी॥ रूप कराल कालिका धारा। सेन सहित तुम तिहि संहारा॥ परी गाढ़ संतन पर जब जब। भई सहाय मातु तुम तब तब॥ अमरपुरी अरु बासव लोका। तब महिमा सब रहें अशोका॥ ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी। तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥ प्रेम भक्ति से जो यश गावें। दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥ ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई। जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥ जोगी सुर मुनि कहत पुकारी। योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥ शंकर आचारज तप कीनो। काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥ निशिदिन ध्यान धरो शंकर को। काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥ शक्ति रूप का मरम न पायो। शक्ति गई तब मन पछितायो॥ शरणागत हुई कीर्ति बखानी। जय जय जय जगदम्ब भवानी॥ भई प्रसन्न आदि जगदम्बा। दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥ मोको मातु कष्ट अति घेरो। तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥ आशा तृष्णा निपट सतावें। रिपू मुरख मौही डरपावे॥ शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥ करो कृपा हे मातु दयाला। ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला। जब लगि जिऊं दया फल पाऊं । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥ दुर्गा चालीसा जो कोई गावै। सब सुख भोग परमपद पावै॥ देवीदास शरण निज जानी। करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥ Durga Chalisa ॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥

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Hanuman Chalisa Hindi:श्री हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa श्री हनुमान चालीसा: बजरंगबली की अद्भुत स्तुति Hanuman Chalisa श्री हनुमान चालीसा हिंदू धर्म में भगवान हनुमान की स्तुति में गाया जाने वाला एक बहुत ही लोकप्रिय स्तोत्र है। यह चालीसा भगवान हनुमान के विभिन्न रूपों और उनके गुणों का वर्णन करता है। भक्त हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए भगवान हनुमान से आशीर्वाद और कृपा प्राप्त करते हैं। Hanuman Chalisa हनुमान चालीसा का महत्व Hanuman Chalisa हनुमान चालीसा का पाठ कैसे करें Hanuman Chalisa दोहा : श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊं रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।।  बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार।। Hanuman Chalisa चौपाई : जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुं लोक उजागर।। रामदूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा।। महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी।। कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुंडल कुंचित केसा।। हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। कांधे मूंज जनेऊ साजै। संकर सुवन केसरीनंदन। तेज प्रताप महा जग बन्दन।। विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर।। प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया।। सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा।। भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज संवारे।। लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुबीर हरषि उर लाये।। रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई।। सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं।। सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा।। जम कुबेर दिगपाल जहां ते। कबि कोबिद कहि सके कहां ते।। तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा।। तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना। लंकेस्वर भए सब जग जाना।। जुग सहस्र जोजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू।। प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गये अचरज नाहीं।। दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते।। राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे।। सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डर ना।। आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै।। भूत पिसाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै।। नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा।। संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै।। सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा। और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै।। चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा।। साधु-संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे।। अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता।। राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा।। तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम-जनम के दुख बिसरावै।। अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहां जन्म हरि-भक्त कहाई।। और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्ब सुख करई।। संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।। जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।। जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई।। जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा।। तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय मंह डेरा।।  Hanuman Chalisa दोहा : पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप।।

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