Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश के मूषक की रोचक कथा

Ganesh and mushak story in hindi: शास्त्रों और पुराणों में सिंह, मयूर और मूषक को गणेश जी का वाहन बताया गया है। गणेश पुराण के क्रीडाखण्ड (1) – में उल्लेख है कि सतयुग में गणेशजी का वाहन सिंह है। त्रेता युग में उनका वाहन मयूर है। द्वापर युग में उनका वाहन मूषक हैं और कलयुग में वे घोड़े पर आरूढ़ होंगे। आओ जानते हैं कि किस तरह गणेशजी का मूषक वाहन बना। Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर हम सभी भगवान गणेश की पूजा करते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है और उनकी सवारी मूषक यानी चूहा होती है। क्या आप जानते हैं कि गणेश जी और उनके मूषक के बीच का यह रिश्ता इतना खास क्यों है? आइए जानते हैं इस रोचक कथा के बारे में। Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय पहली कथा पूर्वजन्म में मूषक था एक गंधर्व : एक पौराणिक कथा के अनुसार राजा इंद्र के दरबार में क्रौंच नामक गंधर्व था। एक बार इंद्र किसी गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे थे लेकिन क्रौंच किसी और ही मूड में था। वह अप्सराओं से हंसी ठिठोली कर रहा था। इंद्र का ध्यान उस पर गया तो नाराज इंद्र ने उसे चूहा बन जाने का शाप दे दिया। Ganesh ji पराशर ऋषि के आश्रम में मूषक रूप में लिया जन्म इंद्र के श्राप के चलते मूषक के रूप में वह सीधे पराशर ऋषि के आश्रम में आ गिरा। क्रौंच का चंचल स्वभाव तो बदलने से रहा। आते ही उसने भयंकर उत्पात मचा दिया, आश्रम के सारे मिट्टी के पात्र तोड़कर सारा अन्न समाप्त कर दिया। आश्रम की वाटिका उजाड़ डाली, ऋषियों के समस्त वल्कल वस्त्र और ग्रंथ कुतर दिए।  आश्रम की सभी उपयोगी वस्तुएं नष्ट हो जाने के कारण पराशर ऋषि बहुत दुखी हुए और अपने पूर्व जन्म के कर्मों को कोसने लगे कि किस अपकर्म के फलस्वरूप मेरे आश्रम की शांति भंग हो गई है। अब इस चूहे के आतंक से कैसे निजात मिले? तब पराशर ऋषि श्री गणेश की शरण में गए। गणेश जी ने पराशर जी को कहा कि मैं अभी इस मूषक को अपना वाहन बना लेता हूं।  Ganesh ji गणेशजी ने इस तरह किया मूषक को अपने वश में  Ganesh ji गणेश जी ने अपना तेजस्वी पाश फेंका, पाश उस मूषक का पीछा करता पाताल तक गया और उसका कंठ बांध लिया और उसे घसीट कर बाहर निकाल गजानन के सम्मुख उपस्थित कर दिया। पाश की पकड़ से मूर्छित मूषक जब आंख खुली तो भयभीत होकर उसने गणेश जी की आराधना शुरू कर दी और अपने प्राणों की भीख मांगने लगा। Ganesh ji गणेश जी मूषक की स्तुति से प्रसन्न तो हुए लेकिन उन्होंने कहा कि तूने ऋषियों को बहुत कष्ट दिया है। मैंने दुष्टों के नाश एवं साधु पुरुषों के कल्याण के लिए ही अवतार लिया है, लेकिन शरणागत की रक्षा भी मेरा परम धर्म है, इसलिए जो वरदान चाहो मांग लो। ऐसा सुनकर उस उत्पाती मूषक का अहंकार फिर से जाग उठा और वह बोला, ‘मुझे आपसे कुछ नहीं मांगना है, आप चाहें तो मुझसे वर की याचना कर सकते हैं। मूषक की गर्वभरी वाणी सुनकर गणेश जी मन ही मन मुस्कराए और कहा, ‘यदि तेरा वचन सत्य है तो तू मेरा वाहन बन जा। मूषक के तथास्तु कहते ही गणेश जी तुरंत उस पर आरूढ़ हो गए।  भारी भरकम गजानन के भार से दबकर मूषक को प्राणों का संकट बन आया। तब उसने गणेशजी से प्रार्थना की कि वे अपना भार उसके वहन करने योग्य बना लें। इस तरह मूषक का गर्व चूरकर गणेश जी ने उसे अपना वाहन बना लिया। Ganesh ji दूसरी कथा Ganesh ji गजमुखासुर नामक दैत्य ने अपने बाहुबल से देवताओं को बहुत परेशान कर दिया। सभी देवता एकत्रित होकर भगवान गणेश के पास पहुंचे। तब भगवान श्रीगणेश ने उन्हें गजमुखासुर से मुक्ति दिलाने का भरोसा दिलाया। तब श्रीगणेश का गजमुखासुर दैत्य से भयंकर युद्ध हुआ। युद्ध में श्रीगणेश का एक दांत टूट गया। तब क्रोधित होकर श्रीगणेश ने टूटे दांत से गजमुखासुर पर ऐसा प्रहार किया कि वह घबराकर चूहा बनकर भागा लेकिन गणेशजी ने उसे पकड़ लिया। मृत्यु के भय से वह क्षमायाचना करने लगा। तब श्रीगणेश ने मूषक रूप में ही उसे अपना वाहन बना लिया। मूषक का महत्व Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश के मूषक की रोचक कथा Read More »

Hanuman ji:रामायण के बाद हनुमानजी यहां चले गए थे और अब वे इन जगहों पर मिलते हैं…

Hanuman ji :हिंदू शास्त्रों में हनुमान जी को कलयुग का देवता बताया गया है। पौराणिक ग्रथों के अनुसार हनुमान जी को मां सीता से अमरता का वरदान प्राप्त हुआ था। कई धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में इस बात का वर्णन मिलता है कि कलयुग में हनुमान जी कहां निवास करेंगे। दरअसल हनुमान जी के निवास स्थान को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। बजरंगबली रामायण के प्रमुख पात्रों में से एक हैं। साथ ही वह आठ चिरंजीवियों में भी शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि रामायण के बाद श्री राम समेत अन्य सभी पृथ्वीलोक से प्रस्थान कर गए थे, लेकिन हनुमान जी को कलयुग की रक्षा का भार सौंपा गया, जिस कारण वह पृथ्वी पर ही रहे। इसलिए उन्हें कलयुग का जागृत देवता भी कहा जाता है। तो चलिए जानते हैं कि कलयुग में हनुमान जी कहां वास करते हैं। Hanuman ji:चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥ चारों युग में हनुमानजी Hanuman ji के ही परताप से जगत में उजियारा है। हनुमान को छोड़कर और किसी देवी-देवता में चित्त धरने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि आज भी हनुमानजी हमारे बीच इस धरती पर सशरीर मौजूद हैं।हनुमान इस कलियुग में सबसे ज्यादा जाग्रत और साक्षात हैं। कलियुग में हनुमान Hanuman ji की भक्ति ही लोगों को दुख और संकट से बचाने में सक्षम हैं। बहुत से लोग किसी बाबा, देवी-देवता, ज्योतिष और तांत्रिकों के चक्कर में भटकते रहते हैं, क्योंकि वे हनुमान की भक्ति-शक्ति को नहीं पहचानते। ऐसे भटके हुए लोगों का राम ही भला करे। आजो जानते हैं कि हनुमानजी कहां कहां उपस्थित है। Hanuman Ji:जब जीवन में मिले ये संकेत, तो समझ लीजिए आप पर बनी हुई है हनुमान जी की कृपा 1. जहां रामकथा वहां हनुमानजी ”यत्र-यत्र रघुनाथ कीर्तन तत्र कृत मस्तकान्जलि। वाष्प वारि परिपूर्ण लोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तक॥” अर्थात : कलियुग में जहां-जहां भगवान श्रीराम की कथा-कीर्तन इत्यादि होते हैं, वहां हनुमानजी गुप्त रूप से विराजमान रहते हैं। सीताजी के वचनों के अनुसार- अजर-अमर गुन निधि सुत होऊ।। करहु बहुत रघुनायक छोऊ॥ यदि मनुष्य पूर्ण श्रद्घा और विश्वास से इनका आश्रय ग्रहण कर लें तो फिर तुलसीदासजी की भांति उसे भी हनुमान और राम-दर्शन होने में देर नहीं लगती। 2.चित्रकुट के घाट पर हनुमानजी 6वीं सदी के महान संत कवि तुलसीदासजी को हनुमानजी Hanuman ji की कृपा से ही रामजी के दर्शन प्राप्त हुए। कथा है कि हनुमानजी ने तुलसीदासजी से कहा था कि राम और लक्ष्मण चित्रकूट नियमित आते रहते हैं। मैं वृक्ष पर तोता बनकर बैठा रहूंगा, जब राम और लक्ष्मण आएंगे मैं आपको संकेत दे दूंगा। हनुमानजी की आज्ञा के अनुसार तुलसीदासजी चित्रकूट घाट पर बैठ गए और सभी आने- जाने वालों को चंदन लगाने लगे। राम और लक्ष्मण जब आए तो हनुमानजी गाने लगे ‘चित्रकूट के घाट पै, भई संतन के भीर। तुलसीदास चंदन घिसै, तिलक देत रघुबीर।।’ हनुमान के यह वचन सुनते ही तुलसीदास प्रभु राम और लक्ष्मण को निहारने लगे।’ इस प्रकार तुलसीदासजी को रामजी के दर्शन हुए। 3.गंधमादन पर्वत पर हनुमानजी Hanuman ji हनुमानजी Hanuman ji कलियुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं, ऐसा श्रीमद भागवत में वर्णन आता है। उल्लेखनीय है कि अपने अज्ञातवास के समय हिमवंत पार करके पांडव गंधमादन के पास पहुंचे थे। एक बार भीम सहस्रदल कमल लेने के लिए गंधमादन पर्वत के वन में पहुंच गए थे, जहां उन्होंने हनुमान को लेटे देखा और फिर हनुमान ने भीम का घमंड चूर कर दिया था। गंधमादन में ऋषि, सिद्ध, चारण, विद्याधर, देवता, गंधर्व, अप्सराएं और किन्नर निवास करते हैं। वे सब यहां निर्भीक विचरण करते हैं। हिमालय के कैलाश पर्वत के उत्तर में (दक्षिण में केदार पर्वत है) स्थित गंधमादन पर्वत की। यह पर्वत कुबेर के राज्यक्षेत्र में था। सुमेरू पर्वत की चारों दिशाओं में स्थित गजदंत पर्वतों में से एक को उस काल में गंधमादन पर्वत कहा जाता था। आज यह क्षेत्र तिब्बत के इलाके में है। पुराणों के अनुसार जम्बूद्वीप के इलावृत्त खंड और भद्राश्व खंड के बीच में गंधमादन पर्वत कहा गया है, जो अपने सुगंधित वनों के लिए प्रसिद्ध था। 4.श्रीलंका में हनुमान Hanuman ji श्रीलंका के जंगलों में एक आदिवासी समूह से हनुमानजी प्रत्येक 41 साल बाद मिलने आते हैं। सेतु के शोधानुसार श्रीलंका के जंगलों में एक ऐसा कबीलाई समूह रहता है जोकि पूर्णत: बाहरी समाज से कटा हुआ है। इसका संबंध मातंग समाज से है जो आज भी अपने मूल रूप में है। उनका रहन-सहन और पहनावा भी अलग है। उनकी भाषा भी प्रचलित भाषा से अलग है। यह समूह पिदुरुथालागाला पर्वत की तलहटी में स्थित एक छोटे से गांव नुवारा में है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Hanuman ji:रामायण के बाद हनुमानजी यहां चले गए थे और अब वे इन जगहों पर मिलते हैं… Read More »

Radha Ashtami 2024: क्यों मनाते हैं राधा अष्टमी का पर्व? जानें इस त्योहार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

Radha Ashtami:सनातन धर्म में राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2024) पर्व का विशेष महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। इस साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन राधा अष्टमी मनाई जाएगी। कई भक्त जन इस दिन उपवास भी करते हैं। यह दिन राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी के बाद भाद्रपद माह में ही राधा अष्टमी के त्योहार को मनाया जाता है। यह पर्व श्री राधा रानी को समर्पित है। इस खास दिन पर बरसाना समेत देशभर में खास उत्साह देखने को मिलता है। क्या आपको पता है कि हर साल राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2024) क्यों मनाई जाती है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं इसके बारे में। कब है राधा अष्टमी, जानें डेट, पूजा-विधि व महत्व Radha Ashtami:राधा अष्टमी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें Radha Ashtami:राधा अष्टमी का महत्व Radha Ashtami :ये है वजह पौराणिक कथा के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी का जन्म बरसाना में हुआ था। इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस खास पर्व का श्रीकृष्ण भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं। राधा अष्टमी के लिए श्री राधा रानी के मंदिरों को बेहद सुंदर तरीके से सजाया जाता है और राधा रानी की विशेष उपासना की जाती है। Radha Ashtami:राधा अष्टमी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 11 सितंबर को रात 11 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐसे में राधा अष्टमी 11 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में पूजा करने से दोगुना फल प्राप्त होगा। Radha Ashtami:राधा अष्टमी का महत्व जैसे भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित जन्माष्टमी का व्रत किया जाता है। ठीक वैसे ही राधा अष्टमी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राधा रानी की सच्चे मन से पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और पति-पत्नी के रिश्ते में मजबूती आती है। इसके अलावा व्यक्ति को धन, ऐश्वर्य, आयु एवं सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जप ओम ह्रीं श्रीराधिकायै नम:। ओम ह्रीं श्री राधिकायै नम:। नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे। ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।। नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी। रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये।। मंत्रैर्बहुभिर्विन्श्वर्फलैरायाससाधयैर्मखै: किंचिल्लेपविधानमात्रविफलै: संसारदु:खावहै। एक: सन्तपि सर्वमंत्रफलदो लोपादिदोषोंझित:, श्रीकृष्ण शरणं ममेति परमो मन्त्रोड्यमष्टाक्षर।। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Radha Ashtami 2024: क्यों मनाते हैं राधा अष्टमी का पर्व? जानें इस त्योहार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें Read More »

Radha Ashtami 2024:कब है राधा अष्टमी, जानें डेट, पूजा-विधि व महत्व

Radha Ashtami 2024 Date : इस साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन राधा अष्टमी मनाई जाएगी। कई भक्त जन इस दिन उपवास भी करते हैं। यह दिन राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। Radha Ashtami 2024 Date: हर साल भाद्रपद महीने में राधा अष्टमी मनाई जाती है। जन्माष्टमी की तरह ही राधाष्टमी भी बड़े धूम-धाम से मनायी जाती है। इस साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी मनाई जाएगी। कई भक्त जन इस दिन उपवास भी करते हैं। यह दिन राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यताओं के अनुसार, श्री कृष्ण के जन्म के 15 दिन बाद राधा जी का जन्म हुआ था। आइए जानते हैं राधा अष्टमी की डेट, महत्व, मंत्र व पूजन-विधि Rishi Panchami 2024 Date: कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व Radha Ashtami 2024 :कब है राधा अष्टमी? अष्टमी तिथि प्रारम्भ – सितम्बर 10, 2024 को 11:11 पी एम बजे अष्टमी तिथि समाप्त – सितम्बर 11, 2024 को 11:46 पी एम बजे मध्याह्न समय – 11:03 ए एम से 01:32 पी एम अवधि – 02 घण्टे 29 मिनट्स दृक पंचांग के अनुसार, सितम्बर 10, के दिन दोपहर 11:11 बजे से अष्टमी तिथि लग रही है, जिसका समापन सितम्बर 11, के दिन 11:46 पी एम बजे होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, राधा अष्टमी का व्रत 11 सितंबर को रखा जाएगा।  मंत्र- ॐ ह्नीं श्री राधिकायै नमः Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी के दिन निम्नलिखित कार्य करने की प्रथा है: Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी पर क्या न करें: Radha Ashtami 2024 राधा अष्टमी पूजन-विधि पानी में गंगाजल मिलकर स्नान करें भगवान श्री कृष्ण और राधा जी का जलाभिषेक करें माता का पंचामृत सहित गंगाजल से अभिषेक करें अब राधा जी को लाल चंदन, लाल रंग के फूल और श्रृंगार का सामान अर्पित करें मंदिर में घी का दीपक प्रज्वलित करें संभव हो तो व्रत रखें और व्रत लेने का संकल्प करें व्रत कथा का पाठ करें श्री राधा चालीसा का पाठ करें पूरी श्रद्धा के साथ भगवान श्री कृष्ण और राधा जी की आरती करें माता को खीर का भोग लगाएं अंत में क्षमा प्रार्थना करें Radha Ashtami 2024 :राधा अष्टमी का महत्व  इस दिन विवाहित महिलाएं संतान सुख और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए व्रत रखती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जो लोग राधा रानी जी को प्रसन्न कर लेते हैं, उनसे भगवान श्री कृष्ण अपने आप प्रसन्न हो जाते हैं।Radha Ashtami 2024 कहा जाता है कि व्रत करने से घर में मां लक्ष्मी आती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। राधा रानी के बिना भगवान श्री कृष्ण की पूजा भी अधूरी मानी जाती है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Radha Ashtami 2024:कब है राधा अष्टमी, जानें डेट, पूजा-विधि व महत्व Read More »

Rishi Panchami 2024 Date: कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व

Rishi Panchami 2024 Date:ऋषि पंचमी का व्रत बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा कहा जाता है कि इस गति को बनाए रखने से आप उन त्रुटियों को समाप्त कर देंगे जिनके बारे में आपको जानकारी नहीं होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को धार्मिक कार्य करने की मनाही है। उनका कहना है कि जब अवचेतन रूप से भी इस कानून का पालन नहीं किया जाता तो उन्हें बड़ा अपराध बोध होता है। इसी कमी को दूर करने के लिए ऋषि पंचमी का व्रत किया जाता है। इसके अलावा इस व्रत को करने से आपकी मनोकामनाएं भी पूरी होंगी। आइए जानते है ऋषि पंचमी की तिथि, पूजा मुहूर्त,मंत्र और महत्व के बारे में।  ऋषि पंचमी 2024: तिथि, शुभ योग, पूजा विधि और महत्व ऋषि पंचमी 2024 हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है जो भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष ऋषि पंचमी 8 सितंबर, 2024 को मनाई जा रही है। यह व्रत ऋषियों की पूजा करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मनाया जाता है। ऋषि पंचमी 2024 पंचमी तिथि आरंभ:  7 सितम्बर 2024, सायं 05:37  पर पंचमी तिथि समाप्त: 8 सितम्बर 2024 को सायं 07:58 परउदया तिथि के आधार पर ऋषि पंचमी 8 सितंबर 2024, रविवार को मनाई जाएगी। ऋषि पंचमी पूजा मुहूर्त: प्रातः  11:03 से दोपहर 01:34 तक ।ऋषि पंचमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04:31 से 05:17 तक। ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त: प्रातः 11:53  से  दोपहर12:43 तक ऋषि पंचमी 2024 शुभ योगइस वर्ष ऋषि पंचमी के दिन दो शुभ योग बन रहे हैं। सबसे पहले इंद्र योग का प्रशिक्षण दिया जाता है, जो सुबह से देर शाम तक और 12:05 बजे तक  है। वहीं रवि योग दोपहर 3:31 बजे से अगले दिन 9 सितंबर सुबह 6:31 बजे तक रहेगा।रवि योग सभी प्रकार के दोष को दूर करने की क्षमता रखता है क्योंकि यह सूर्य के प्रभाव को अधिक ध्यान में रखता है। ऋषि पंचमी पर स्वाति और विशाखा नक्षत्र है। स्वाति नक्षत्र सुबह से 15:31 बजे तक रहेगा।  ऋषि पंचमी पूजा विधि  Rishi Panchami 2024:महत्व ऋषि पंचमी का व्रत करने से कई लाभ होते हैं, जैसे: Rishi Panchami 2024:ऋषि पंचमी 2024 पूजा मंत्रकश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः दहंतु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः॥ Rishi Panchami 2024 के दिन निम्नलिखित कार्य करने से बचना चाहिए Rishi Panchami 2024 के दिन निम्नलिखित कार्य करने की प्रथा है: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

Rishi Panchami 2024 Date: कब है ऋषि पंचमी? बन रहे 2 शुभ योग, जानें पूजा मुहूर्त, मंत्र और महत्व Read More »

Swapna Shastra: सपने में दिखाई दिया मंदिर या फिर भंडारा? जानें आपके लिए शुभ होगा या अशुभ संकेत

Swapna Shastra:सपने हमारे मन की उथल-पुथल को दर्शाते हैं और अक्सर हमारी भावनाओं, इच्छाओं और चिंताओं को प्रकट करते हैं। सपने में मंदिर या भंडारा देखना आम बात है और इसके कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं। Sapne me Mandir Dekhne ka Matlab: स्वप्न शास्त्र के मुताबिक यदि आपके सपने में मंदिर दिखाई देता है तो, इसका अर्थ है कि आपके किसी कार्य में आ रही बाधा दूर होने वाली है। साथ ही आपके प्रयास सफल होने की उम्मीद बढ़ने लगी है। Sapne me Mandir Dekhne ka Matlab: सोते समय अक्सर हमें कई तरह के सपने दिखाई देते है। स्वप्न शास्त्र की माने तो हर एक सपने का कोई न कोई अर्थ होता है, जो हमें किसी न किसी चीज का संकेत देता है। Swapna Shastra सपना चाहे कोई भी हो, वह अक्सर हमें सोचने पर मजबूर कर देता है। Swapna Shastra इसी कड़ी में हम आपको बता रहे है सपने में मंदिर देखने का अर्थ क्या है? चलिए जानते है सपने में मंदिर दिखाई देना शुभ संकेत है अथवा अशुभ संकेत। सपने में पुराना मंदिर दिखाई देना : स्वप्न शास्त्र के मुताबिक यदि किसी भी व्यक्ति को सपने में पुराना मंदिर दिखाई देता है, तो इसका अर्थ है कि उसकी अपने किसी बिछड़े हुए मित्र अथवा परिजन से मुलाक़ात हो सकती है। Swapna Shastra इसके अलावा आप इसे किसी सरप्राइज मिलने के संकेत के तौर पर भी देख सकते है।  भंडारा दिखाई देना : स्वप्न शास्त्र के मुताबिक यदि किसी भी व्यक्ति को सपने में मंदिर का भंडारा होता दिखाई दे रहा है, तो इसका अर्थ है कि उसे भविष्य में कुछ ऐसा प्राप्त होने वाला है, जो जीवन बदलने वाला होगा। Swapna Shastra अगर खुद को भंडारा खाते देखते है तो इसका अर्थ है आपको अटका हुआ धन वापस मिलेगा।  घंटी बजाते हुए देखना : स्वप्न शास्त्र के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति खुद को मंदिर की घंटी बजाते हुए सपने में देखता है, तो यह शुभ संकेत हैं। इसका अर्थ है कि उसे भविष्य में कोई अच्छी खबर प्राप्त होने वाली है। इसके अलावा संभव है उसका कोई अटका कार्य जल्द पूरा होने वाला है।  Swapna Shastra सपने में मंदिर देखना: Swapna Shastra सपने में भंडारा देखना: कुल मिलाकर, सपने में मंदिर या भंडारा देखना आमतौर पर एक शुभ संकेत होता है। यह आपके जीवन में सकारात्मक बदलावों, आध्यात्मिक विकास और समृद्धि का संकेत दे सकता है। हालांकि, सपने का अर्थ व्यक्ति के व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सपने में मंदिर में अकेले महसूस कर रहे हैं तो यह आपके भीतर एकांत की भावना को दर्शा सकता है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Swapna Shastra: सपने में दिखाई दिया मंदिर या फिर भंडारा? जानें आपके लिए शुभ होगा या अशुभ संकेत Read More »

Hartalika Teej 2024: पत्नी के व्रत के दौरान पति जरूर करें ये काम, न करें ऐसी गलती

Hartalika Teej 2024: व्रत के दौरान महिलाएं कई अन्य नियमों का भी पालन करती हैं. इस दिन पतियों को भी कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस साल हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा. जानते हैं इस लेख में हरतालिका तीज के दिन पति को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Hartalika Teej:हरतालिका तीज एक ऐसा पर्व है जो पति-पत्नी के रिश्ते को और मजबूत बनाता है। इस दिन पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं। ऐसे में पति को भी कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। Hartalika Teej 2024: विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन और अपने पति की दीर्घायु के लिए हरतालिका तीज व्रत रखती हैं. यह एक कठिन व्रत है क्योंकि महिलाएं व्रत के दिन सूर्योदय से लेकर दूसरे दिन सूर्योदय तक अन्न, जल और फल ग्रहण नहीं करती हैं. इस कठिन नियम के अलावा महिलाएं कई अन्य नियमों का भी पालन करती हैं. इस दिन पतियों को भी कुछ नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस साल हरतालिका तीज व्रत 6 सितंबर को रखा जाएगा. जानते हैं इस लेख में हरतालिका तीज के दिन पति को कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए. Hartalika Teej 2024: तीज पर करें छोटा सा उपाय, वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां होगी दूर Hartalika Teej:हरतालिका तीज के दिन पति क्या करें और न करें पति को क्या नहीं करना चाहिए: क्यों महत्वपूर्ण है पति का सहयोग: Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज शुभ मुहूर्त भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि प्रारंभ: 5 सितंबर, गुरुवार, दोपहर 12:21 बजे सेभाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि समाप्त: 6 सितंबर, शुक्रवार, दोपहर 3:01 बजे तकतीज पूजा का समय: सुबह 06:02 बजे से 8:33 बजे तकप्रदोष काल पूजा मुहूर्त: शाम 06:36 बजे से कब है Hartalika Teej हरतालिका तीज 2024? इस साल 6 सितंबर को मनाया जाएगा हरतालिका तीज Hartalika Teej:हरतालिका तीज 2024 का शुभ मुहुर्त क्या है? हरतालिका तीज का शुभ मुहुर्त सुबह 06:02 बजे से 8:33 बजे तक है.

Hartalika Teej 2024: पत्नी के व्रत के दौरान पति जरूर करें ये काम, न करें ऐसी गलती Read More »

Hartalika Teej 2024: तीज पर करें छोटा सा उपाय, वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां होगी दूर

Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस त्योहार पर महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।  Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज के दिन पूजा पूरी करने के बाद पांच बुजुर्ग सुहागिन महिलाओं को साड़ी और बिछिया दान करें. साथ ही उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है. Hartalika Teej 2024: हरतालिका तीज का त्योहार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. यह व्रत इस साल 6 सितंबर को रखा जा रहा है. हरतालिका तीज के दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ व्रत और पूजा करती हैं. Hartalika Teej:कुवांरी लड़किया क्यों रखती हैं व्रत…. अविवाहित लड़कियां भी अच्छे वर की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं. इस व्रत के दौरान सुहागिन महिलाएं माता गौरी से सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं. पूजा के अलावा इस दिन कुछ उपाय भी किए जाते हैं, जिन्हें करने से आप वैवाहिक जीवन में सुख प्राप्त कर सकती हैं. आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में… तीज के दिन करें ये उपाय हरतालिका तीज के दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को सोलह श्रृंगार करके शिव मंदिर में जल चढ़ाती हैं. साथ ही माता पार्वती को लाल रंग की चुनरी चढ़ाएं. इसके बाद ‘ॐ गौरी शंकराय नमः मंत्र’ का जाप करें. अपनी श्रद्धा के अनुसार चुनरी में 7, 11 या 21 रुपए बांधें. पूजा पूरी करने के बाद चुनरी में बंधे पैसों को अपने पास रख लें. मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है. पूजा के बाद जरूर करें काम हरतालिका तीज व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें. अंत में व्रत कथा सुनें और इसके बाद माता पार्वती को खीर का भोग लगाएं. इस खीर को प्रसाद के रूप में अपने पति को भी खिलाएं. इससे पति-पत्नी के बीच संबंध मजबूत होते हैं. साथ ही दांपत्य जीवन खुशहाल होता है. Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय Hartalika Teej 2024:गौरी शंकर की पूजा के बाद सुहागिन महिलाओं को दें ये चीज Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज के दिन पूजा पूरी करने के बाद पांच बुजुर्ग सुहागिन महिलाओं को साड़ी और बिछिया दान करें. साथ ही उनसे सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद लें. इससे दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है. Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज की पूजा विधि Hartalika Teej 2024:हरतालिका तीज का महत्व अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

Hartalika Teej 2024: तीज पर करें छोटा सा उपाय, वैवाहिक जीवन की सारी परेशानियां होगी दूर Read More »

Somvati Amavasya 2024 पर पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय, नहीं सताएगा पितृ दोष का डर

Somvati Amavasya सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण करना और दान करना बहुत शुभ माना जाता है। पितृ दोष से मुक्ति पाने और पितरों की आत्मा की शांति के लिए इस दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं।इस साल भाद्रपद की अमावस्या सोमवार 02 सितंबर 2024 को पड़ रही है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती आमवस्या भी कहा जाएगा है। इस तिथि पर व्रत पूजा-पाठ और स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। इसी के साथ पितरों के निमित्त कुछ उपाय करने से आप इस तिथि पर जीवन में शुभ परिणाम देख सकते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों के लिए समर्पित मानी गई है। ऐसे में आप इस तिथि पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए कुछ उपाय कर सकते हैं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और साधक पर अपनी दया दृष्टि बनाए रखते हैं। तो चलिए जानते हैं कि भाद्रपद में आने वाली सोमवती अमवास्या (Somvati Amavasya 2024) पर आप किस तरह पितरों को तृप्त कर सकते हैं। जरूर करें ये काम (Pitron ko kaise Khush kare) सोमवती अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी में स्नान जरूर करें। अगर आपके आसपास कोई नदी या तालाब नहीं है, तो ऐसे में आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इसी के साथ सोमवती अमावस्‍या पर पीपल के पेड़ का पूजा भी जरूर करें। पूजन के दौरान पीपल के पेड़ की सात परिक्रमा करें और पेड़ के नीचे सरसों के तेल में काले तिल डालकर दीपक जलाएं। शुभ फलों की प्राप्ति के लिए आप पितृ चालीसा (Somvati Amavasya 2024 date) का पाठ कर भी कर सकते हैं। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जरूर करें ये काम (works to get ancestors blessings) सोमवती अमावस्या के दिन पितरों की शांति के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाने के बाद अपनी क्षमता अनुसार, दान-दक्षिणा जरूर देनी चाहिए। Somvati Amavasya इसी के साथ आप जरूरमंद लोगों में काले तिल, जल, दही, शहद, गाय का दूध, गंगाजल, वस्त्र, अन्न का भी दान कर सकते हैं। पितृदोष निवारण हेतु पिंडदान करते समय मंत्रों का जाप करें और धार्मिक ग्रंथों का पाठ भी अवश्य करें। Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi) Somvati Amavasya:पितृ दोष निवारण मंत्र पितरों की शांति के लिए उपाय: दान के लिए शुभ वस्तुएं: Kyu Mnai Jati Hai Somvati Amavasya:क्यों मनाई जाती है सोमवती अमावस्या? सोमवती अमावस्या को चंद्रमा का दिन माना जाता है और चंद्रमा को पितरों का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन पितरों की पूजा करना और उन्हें याद करना बहुत महत्वपूर्ण होता है। पितृ दोष क्या होता है? पितृ दोष एक ज्योतिषीय दोष है जो पितरों के असंतुष्ट होने के कारण होता है। यह दोष व्यक्ति के जीवन में कई तरह की समस्याएं पैदा कर सकता है, जैसे कि विवाह में बाधाएं, धन हानि, स्वास्थ्य समस्याएं आदि। Somvati Amavasya सोमवती अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?

Somvati Amavasya 2024 पर पितरों की शांति के लिए करें ये उपाय, नहीं सताएगा पितृ दोष का डर Read More »

Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय

Ganesh Chaturthi गणेश चतुर्थी हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो भगवान गणेश को समर्पित है। इस साल 2024 में गणेश चतुर्थी 7 सितंबर को मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का खास महत्व है। यह पर्व भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है। इस बार गणेश महोत्सव (Ganesh Chaturthi 2024 Date) की शुरुआत 6 सितंबर दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर होगी। ऐसा कहा जाता है कि भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्नों एवं बाधाओं का नाश होता है। साथ ही जीवन में शुभता का आगमन होता है।  गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी और गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। इस पर्व को भक्त बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। यह ज्ञान, सौभाग्य और समृद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है। यह त्योहार (Ganesh Chaturthi 2024 Date) हर साल भाद्रपद माह में मनाया जाता है, जो दस दिनों तक चलता है। वहीं, इसका समापन गणेश मूर्ति विसर्जन के साथ होगा, तो इसकी शुरुआत से पहले संपूर्ण जानकारी जान लेते हैं। कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? (Ganesh Sthapana Subh Muhurat 2024) Ganesh Chaturthi:वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 6 सितंबर दोपहर 3 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 37 मिनट पर होगा। ऐसे में उदयातिथि को देखते हुए गणेश चतुर्थी का शुभारंभ 7 सितंबर दिन शनिवार को होगा और इसी दिन गणेश जी की प्रतिमा की स्थापना और व्रत की शुरुआत होगी। इसके साथ ही 7 सिंतबर को गणेश चतुर्थी की पूजा (Ganesh Puja Muhurat 2024) सुबह 11 बजकर 03 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 34 मिनट के बीच होगी। गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त Ganesh Chaturthi:गणेश पूजा विधि गणेश पूजा की विधि काफी विस्तृत है। इसमें षोडशोपचार पूजा, आरती, भोग आदि शामिल हैं। पूजा के दौरान गणेश मंत्रों का जाप किया जाता है। Ganesh Chaturthi:गणेश विसर्जन Ganesh Chaturthi:गणेश चतुर्थी के 10 दिन बाद गणेश प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। इस साल विसर्जन की तारीख 17 सितंबर है। विसर्जन के समय भक्त गणेश जी से विदा लेते हुए भावुक हो जाते हैं। गणेश महोत्सव का महत्व गणेश चतुर्थी का महत्व भारतीय संस्कृति में बहुत अधिक है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। भक्त गणेश जी से बुद्धि, विवेक और समृद्धि की कामना करते हैं। अन्य महत्वपूर्ण जानकारी: कब होगा गणेश चतुर्थी का समापन? Ganesh Chaturthi:पंचांग को देखते हुए गणेश चतुर्थी का समापन 17 सितंबर, 2024 दिन मंगलवार को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। वहीं, इसी दिन गणेश जी का विसर्जन किया जाएगा। ऐसा मान्यता है कि जो लोग इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान गणेश का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही उनके परिवार में खुशहाली आती है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्नमाध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

Ganesh Chaturthi 2024: कब शुरू होगा गणेश महोत्सव? जानें स्थापना, पूजा और विसर्जन का समय Read More »

Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi)

Ekadashi 2025: एकादशी तिथि भगवान श्री हरि विष्णु भगवान जी की पूजा अर्चना करने के लिए सबसे शुभ दिन होता है. तो चलिए जानते है साल 2025 में आने वाली समस्त एकादशी तिथियों के बारे में (जनवरी से दिसंबर तक) Ekadashi 2025 एक हिंदू त्योहार है जो हर महीने के शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की ग्यारहवीं तिथि को मनाया जाता है। यह व्रत करने का दिन माना जाता है, जिससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। Ekadashi 2025: एकादशी व्रत का हिन्दू धर्म में बहुत महत्व है. प्रत्येक माह में 2 एकादशी तिथि आती है शुक्ल पक्ष की एकादशी,और कृष्ण पक्ष की एकादशी। हिन्दू कैलेंडर में एकादशी तिथि 11वीं तिथि को बोला जाता है.Ekadashi 2025 इस दिन भगवान् विष्णु की पूजा अर्चना करना से तथा व्रत धारण करने से व्यक्ति समस्त पापों का नाश होता है और अंत में मोक्ष को प्राप्त होता है. साल में लगभग 24 या 25 एकादशी तिथि आती हैं Ekadashi 2025और प्रत्येक एकादशी का नाम अलग अलग होता है और कथा भी अलग अलग होती हैं। ज्योतिष के अनुसार चन्द्रमा की स्थिति के कारण व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब और अच्छी होती है. चंद्रमा की स्थिति को सही करने के लिए एकादशी का व्रत रखा जाता है. Ekadashi 2025 एकादशी व्रत का प्रभाव मन और शरीर दोनों पर पड़ता है।तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का है. Ekadashi 2025 तो चलिए जानते है साल 2025 में पड़ने वाले समस्त एकादशी तिथियों के बारे में. 2025 में लगभग 25 एकादशी आएँगी तो आप यहां पे हर महीने में आने वाली एकादशी तिथि के बारे में जान सकते है. 2025 में जनवरी से दिसंबर (2025 Ekadashi January To December) माह तक आने वाली प्रत्येक एकादशी की सही डेट और समय. साल 2025 की सभी एकादशी (Ekadashi 2025 Date and Time) जनवरी 2025 में एकादशी (10 जनवरी 2025, शुक्रवार) पौष पुत्रदा एकादशी / वैकुण्ठ एकादशी: पौष, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 12:22 अपराह्न, 09 जनवरी, समाप्त – प्रातः 10:19 बजे, 10 जनवरी) (25 जनवरी 2025, शनिवार) षटतिला एकादशी: माघ, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 07:25 अपराह्न, 24 जनवरी, समाप्त – 25 जनवरी, रात्रि 08:31 बजे) फरवरी 2025 एकादशी (8 फ़रवरी 2025, शनिवार) जया एकादशी : माघ, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – रात्रि 09:26 बजे, 07 फरवरी समाप्त – रात्रि 08:15 बजे, फरवरी 08) (24 फरवरी 2025, सोमवार) विजया एकादशी: फाल्गुन, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – 01:55 अपराह्न, 23 फरवरी समाप्त – 01:44 अपराह्न, 24 फरवरी) मार्च 2025 एकादशी 10 मार्च 2025, सोमवार) आमलकी एकादशी: फाल्गुन, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 07:45, मार्च 09 समाप्त – प्रातः 07:44, मार्च 10) (25 मार्च 2025, मंगलवार) पापमोचनी एकादशी: चैत्र, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 05:05, मार्च 25 समाप्त – प्रातः 03:45, मार्च 26) (26 मार्च 2025, बुधवार) वैष्णव पापमोचनी एकादशी: चैत्र, कृष्ण एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 05:05, मार्च 25 समाप्त – प्रातः 03:45, मार्च 26) अप्रैल 2025 में एकादशी (8 अप्रैल 2025, मंगलवार) कामदा एकादशी: चैत्र, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – 08:00 अपराह्न, 07 अप्रैल समाप्त – रात्रि 09:12 बजे, अप्रैल 08) (24 अप्रैल, 2025, गुरुवार) वरुथिनी एकादशी: वैशाख, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 04:43 अपराह्न, 23 अप्रैल समाप्त – 02:32 अपराह्न, 24 अप्रैल) मई2025 में एकादशी (8 मई 2025, गुरूवार) मोहिनी एकादशी: वैशाख, शुक्ल एकादशी (प्रारंभ – प्रातः 10:19 बजे, 07 मई समाप्त – 12:29 PM, 08 मई) (23 मई 2025, शुक्रवार) अपरा एकादशी: ज्येष्ठ, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 01:12 AM, 23 मई समाप्त – रात्रि 10:29 बजे, 23 मई) जून 2025 में एकादशी (6 जून 2025, शुक्रवार) निर्जला एकादशी: ज्येष्ठ, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 02:15 पूर्वाह्न, 06 जून समाप्त – प्रातः 04:47, जून 07) (21 जून 2025, शनिवार) योगिनी एकादशी: आषाढ़, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:18 बजे, 21 जून समाप्त – प्रातः 04:27, जून 22) (22 जून 2025, रविवार) गौना योगिनी एकादशी / वैष्णव योगिनी एकादशी: आषाढ़, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:18 बजे, 21 जून समाप्त – प्रातः 04:27 बजे, 22 जून) जुलाई 2025 में एकादशी (6 जुलाई 2025, रविवार) देवशयनी एकादशी: आषाढ़, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – सायं 06:58 बजे, 05 जुलाई समाप्त – रात्रि 09:14 बजे, 06 जुलाई) (21 जुलाई 2025, सोमवार) कामिका एकादशी: श्रावण, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:12 अपराह्न, 20 जुलाई समाप्त – प्रातः 09:38 बजे, 21 जुलाई) अगस्त2025 में Ekadashi 2025 (5 अगस्त 2025, मंगलवार) श्रावण पुत्रदा एकादशी: श्रावण, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 11:41 पूर्वाह्न, 04 अगस्त, समाप्त – 01:12 अपराह्न, 05 अगस्त) (19 अगस्त 2025, मंगलवार) अजा एकादशी: भाद्रपद, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 05:22 अपराह्न, 18 अगस्त समाप्त – 03:32 अपराह्न, 19 अगस्त) सितम्बर 2025 एकादशी (3 सितम्बर 2025, बुधवार) पार्श्व एकादशी: भाद्रपद, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 03:53 पूर्वाह्न, 03 सितंबर समाप्त – प्रातः 04:21, सितम्बर 04) (17 सितम्बर 2025, बुधवार) इन्दिरा एकादशी: आश्विन, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:21 पूर्वाह्न, 17 सितंबर समाप्त – रात्रि 11:39 बजे, 17 सितम्बर) अक्टूबर 2025 में एकादशी (3 अक्टूबर 2025, शुक्रवार) पापांकुशा एकादशी: आश्विन, शुक्ल एकादशी (आरंभ – 07:10 अपराह्न, 02 अक्टूबर, समाप्त – 06:32 अपराह्न, 03 अक्टूबर) (17 अक्टूबर 2025, शुक्रवार) रमा एकादशी: कार्तिक, कृष्ण एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 10:35 बजे, 16 अक्टूबर समाप्त – 11:12 पूर्वाह्न, 17 अक्टूबर) नवंबर 2025 में एकादशी (2 नवंबर 2025, रविवार) देवउत्थान एकादशी: कार्तिक, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 09:11 बजे, 01 नवम्बर, समाप्त – प्रातः 07:31 बजे, 02 नवम्बर) (15 नवंबर 2025, शनिवार) उत्पन्ना एकादशी: मार्गशीर्ष, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 12:49 पूर्वाह्न, 15 नवंबर,समाप्त – 02:37 पूर्वाह्न, 16 नवंबर) दिसंबर 2025 में Ekadashi (1 दिसंबर 2025, सोमवार) मोक्षदा एकादशी: मार्गशीर्ष, शुक्ल एकादशी (आरंभ – रात्रि 09:29 बजे, 30 नवंबर, समाप्त – 07:01 अपराह्न, 01 दिसम्बर) (15 दिसंबर 2025, सोमवार) सफला एकादशी: पौष, कृष्ण एकादशी (आरंभ – 06:49 अपराह्न, 14 दिसंबर, समाप्त – रात्रि 09:19 बजे, 15 दिसम्बर) (31 दिसंबर 2025, बुधवार) पौष पुत्रदा एकादशी: पौष, शुक्ल एकादशी (प्रारम्भ – प्रातः 07:50 बजे, 30 दिसम्बर, समाप्त – प्रातः 05:00 बजे, 31 दिसम्बर)

Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi) Read More »

Bhagwan Shiv:भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है तो फिर क्या है उनकी अवतरण कथा…

Bhagwan Shiv:हम सबके प्रिय भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है वे स्वयंभू हैं। लेकिन पुराणों में उनकी उत्पत्ति का विवरण मिलता है। विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा भगवान विष्णु की नाभि कमल से पैदा हुए जबकि शिव भगवान विष्णु के माथे के तेज से उत्पन्न हुए बताए गए हैं। विष्णु पुराण के अनुसार माथे के तेज से उत्पन्न होने के कारण ही शिव हमेशा योगमुद्रा में रहते हैं।  श्रीमद् भागवत के अनुसार एक बार जब भगवान विष्णु और ब्रह्मा अहंकार से अभिभूत हो स्वयं को श्रेष्ठ बताते हुए लड़ रहे थे तब एक जलते हुए खंभे से भगवान शिव प्रकट हुए। विष्णु पुराण में वर्णित शिव के जन्म की कहानी शायद भगवान शिव का एकमात्र बाल रूप वर्णन है। इसके अनुसार ब्रह्मा को एक बच्चे की जरूरत थी। उन्होंने इसके लिए तपस्या की। तब अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए। ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उसका कोई नाम नहीं है इसलिए वह रो रहा है।  तब ब्रह्मा ने शिव का नाम ‘रूद्र’ रखा जिसका अर्थ होता है ‘रोने वाला’। शिव तब भी चुप नहीं हुए। इसलिए ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया पर शिव को नाम पसंद नहीं आया और वे फिर भी चुप नहीं हुए। इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए और शिव 8 नामों (रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए। शिव पुराण के अनुसार यह नाम पृथ्वी पर लिखे गए थे। Bhagwan Shiv:शिव के इस प्रकार ब्रह्मा पुत्र के रूप में जन्म लेने के पीछे भी विष्णु पुराण की एक पौराणिक कथा है। इसके अनुसार जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्माण्ड जलमग्न था तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के सिवा कोई भी देव या प्राणी नहीं था। तब केवल विष्णु ही जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे नजर आ रहे थे। Bhagwan Shivतब उनकी नाभि से कमल नाल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा-विष्णु जब सृष्टि के संबंध में बातें कर रहे थे तो शिव जी प्रकट हुए। ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया। तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने दिव्य दृष्टि प्रदान कर ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई। ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से क्षमा मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। Bhagwan Shivशिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें यह आशीर्वाद प्रदान किया। जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की तो उन्हें एक बच्चे की जरूरत पड़ी और तब उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद ध्यान आया। अत: ब्रह्मा ने तपस्या की और बालक शिव बच्चे के रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए। श्रावण मास में पढ़ें पवित्र श्री शिव चालीसा- जय गिरिजा पति दीन दयाला भगवान शिव को अजन्मा माना जाता है। वे सृष्टि के आरंभ से ही विद्यमान हैं, यानी उनका कोई जन्म नहीं हुआ है। वे अनंत, अनादि और अचल हैं। Bhagwan Shiv क्यों कहा जाता है कि भगवान शिव अजन्मा हैं? Bhagwan Shiv:अवतरण कथा न होने के बावजूद शिव पुराण में क्या वर्णित है? Bhagwan Shivहालांकि शिव का कोई जन्म नहीं हुआ है, लेकिन शिव पुराण में उनकी कई कथाएं वर्णित हैं। इन कथाओं में शिव के विभिन्न रूपों और लीलाओं का वर्णन मिलता है। ये कथाएं शिव के विभिन्न गुणों और सिद्धांतों को समझने में मदद करती हैं। Bhagwan Shiv:उदाहरण के लिए: ये कथाएं हालांकि काल्पनिक हैं, लेकिन इनका उद्देश्य शिव के विभिन्न रूपों और लीलाओं के माध्यम से उनके गुणों और सिद्धांतों को समझाना है। निष्कर्ष भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है, वे अजन्मा हैं। शिव पुराण में वर्णित कथाएं हमें शिव के विभिन्न रूपों और लीलाओं के बारे में बताती हैं, लेकिन इनका उद्देश्य शिव के दर्शन को समझना है।

Bhagwan Shiv:भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है तो फिर क्या है उनकी अवतरण कथा… Read More »