Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा

Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा: ज्ञान और प्रकाश की देवी का स्तुति गीत Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा वेदों की सबसे महत्वपूर्ण मंत्रों में से एक, गायत्री मंत्र की महिमा का वर्णन करने वाला एक भक्ति गीत है। यह चालीसा देवी गायत्री के विभिन्न रूपों, लीलाओं और गुणों का वर्णन करती है। Gayatri Chalisa इसे पढ़ने या सुनने से मन शांत होता है, बुद्धि तेज होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा का महत्व Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा के कुछ प्रमुख बिंदु Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा का पाठ कैसे करें? Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा का पाठ करते समय मन को शांत रखें और देवी गायत्री की भक्ति में लीन हो जाएं। आप इसे सुबह या शाम के समय कर सकते हैं। यहां एक उदाहरण दिया गया है: Gayatri Chalisa:गायत्री चालीसा ॥ दोहा ॥हीं श्रीं, क्लीं, मेधा, प्रभा, जीवन ज्योति प्रचण्ड ।शांति, क्रांति, जागृति, प्रगति, रचना शक्ति अखण्ड ॥जगत जननि, मंगल करनि, गायत्री सुखधाम ।प्रणवों सावित्री, स्वधा, स्वाहा पूरन काम ॥ ॥ चालीसा ॥भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी ।गायत्री नित कलिमल दहनी ॥१॥ अक्षर चौबिस परम पुनीता ।इनमें बसें शास्त्र, श्रुति, गीता ॥ शाश्वत सतोगुणी सतरुपा ।सत्य सनातन सुधा अनूपा ॥ हंसारुढ़ सितम्बर धारी ।स्वर्णकांति शुचि गगन बिहारी ॥४॥ पुस्तक पुष्प कमंडलु माला ।शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला ॥ ध्यान धरत पुलकित हिय होई ।सुख उपजत, दुःख दुरमति खोई ॥ कामधेनु तुम सुर तरु छाया ।निराकार की अदभुत माया ॥ तुम्हरी शरण गहै जो कोई ।तरै सकल संकट सों सोई ॥८॥ सरस्वती लक्ष्मी तुम काली ।दिपै तुम्हारी ज्योति निराली ॥ तुम्हरी महिमा पारन पावें ।जो शारद शत मुख गुण गावें ॥ चार वेद की मातु पुनीता ।तुम ब्रहमाणी गौरी सीता ॥ महामंत्र जितने जग माहीं ।कोऊ गायत्री सम नाहीं ॥१२॥ सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै ।आलस पाप अविघा नासै ॥ सृष्टि बीज जग जननि भवानी ।काल रात्रि वरदा कल्यानी ॥ ब्रहमा विष्णु रुद्र सुर जेते ।तुम सों पावें सुरता तेते ॥ तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे ।जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे ॥१६॥ महिमा अपरम्पार तुम्हारी ।जै जै जै त्रिपदा भय हारी ॥ पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना ।तुम सम अधिक न जग में आना ॥ तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा ।तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेषा ॥ जानत तुमहिं, तुमहिं है जाई ।पारस परसि कुधातु सुहाई ॥२०॥ तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई ।माता तुम सब ठौर समाई ॥ ग्रह नक्षत्र ब्रहमाण्ड घनेरे ।सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे ॥ सकलसृष्टि की प्राण विधाता ।पालक पोषक नाशक त्राता ॥ मातेश्वरी दया व्रत धारी ।तुम सन तरे पतकी भारी ॥२४॥ जापर कृपा तुम्हारी होई ।तापर कृपा करें सब कोई ॥ मंद बुद्घि ते बुधि बल पावें ।रोगी रोग रहित है जावें ॥ दारिद मिटै कटै सब पीरा ।नाशै दुःख हरै भव भीरा ॥ गृह कलेश चित चिंता भारी ।नासै गायत्री भय हारी ॥२८ ॥ संतिति हीन सुसंतति पावें ।सुख संपत्ति युत मोद मनावें ॥ भूत पिशाच सबै भय खावें ।यम के दूत निकट नहिं आवें ॥ जो सधवा सुमिरें चित लाई ।अछत सुहाग सदा सुखदाई ॥ घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी ।विधवा रहें सत्य व्रत धारी ॥३२॥ जयति जयति जगदम्ब भवानी ।तुम सम और दयालु न दानी ॥ जो सदगुरु सों दीक्षा पावें ।सो साधन को सफल बनावें ॥ सुमिरन करें सुरुचि बड़भागी ।लहैं मनोरथ गृही विरागी ॥ अष्ट सिद्घि नवनिधि की दाता ।सब समर्थ गायत्री माता ॥३६॥ ऋषि, मुनि, यती, तपस्वी, जोगी ।आरत, अर्थी, चिंतित, भोगी ॥ जो जो शरण तुम्हारी आवें ।सो सो मन वांछित फल पावें ॥ बल, बुद्घि, विघा, शील स्वभाऊ ।धन वैभव यश तेज उछाऊ ॥ सकल बढ़ें उपजे सुख नाना ।जो यह पाठ करै धरि ध्याना ॥४०॥ ॥ दोहा ॥यह चालीसा भक्तियुत, पाठ करे जो कोय ।तापर कृपा प्रसन्नता, गायत्री की होय ॥

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Khatu Shyam Chalisa:खाटू श्याम चालीसा

Khatu Shyam Chalisa:खाटू श्याम चालीसा: भक्ति का अद्भुत संगम Khatu Shyam Chalisa:खाटू श्याम चालीसा भगवान श्री श्याम, जो भगवान कृष्ण के अवतार माने जाते हैं, की स्तुति में लिखा गया एक अत्यंत लोकप्रिय भक्ति गीत है। यह चालीसा भगवान श्याम के विभिन्न रूपों, लीलाओं और गुणों का वर्णन करती है। इसे पढ़ने या सुनने से मन शांत होता है और भक्तों में भगवान श्याम के प्रति अगाध श्रद्धा जागृत होती है। Khatu Shyam Chalisa:खाटू श्याम चालीसा का महत्व Khatu Shyam Chalisa:खाटू श्याम चालीसा के कुछ प्रमुख बिंदु Khatu Shyam Chalisa:खाटू श्याम चालीसा का पाठ कैसे करें? खाटू श्याम चालीसा का पाठ करते समय मन को शांत रखें और भगवान श्याम की भक्ति में लीन हो जाएं। आप इसे सुबह या शाम के समय कर सकते हैं। यहां एक उदाहरण दिया गया है: Khatu Shyam Chalisa:खाटू श्याम चालीसा ॥ दोहा॥श्री गुरु चरणन ध्यान धर,सुमीर सच्चिदानंद ।श्याम चालीसा भजत हूँ,रच चौपाई छंद । ॥ चौपाई ॥श्याम-श्याम भजि बारंबारा ।सहज ही हो भवसागर पारा ॥ इन सम देव न दूजा कोई ।दिन दयालु न दाता होई ॥ भीम सुपुत्र अहिलावाती जाया ।कही भीम का पौत्र कहलाया ॥ यह सब कथा कही कल्पांतर ।तनिक न मानो इसमें अंतर ॥बर्बरीक विष्णु अवतारा ।भक्तन हेतु मनुज तन धारा ॥ बासुदेव देवकी प्यारे ।जसुमति मैया नंद दुलारे ॥ मधुसूदन गोपाल मुरारी ।वृजकिशोर गोवर्धन धारी ॥ सियाराम श्री हरि गोबिंदा ।दिनपाल श्री बाल मुकुंदा ॥ दामोदर रण छोड़ बिहारी ।नाथ द्वारिकाधीश खरारी ॥ राधाबल्लभ रुक्मणि कंता ।गोपी बल्लभ कंस हनंता ॥ 10 मनमोहन चित चोर कहाए ।माखन चोरि-चारि कर खाए ॥ मुरलीधर यदुपति घनश्यामा ।कृष्ण पतित पावन अभिरामा ॥ मायापति लक्ष्मीपति ईशा ।पुरुषोत्तम केशव जगदीशा ॥ विश्वपति जय भुवन पसारा ।दीनबंधु भक्तन रखवारा ॥ प्रभु का भेद न कोई पाया ।शेष महेश थके मुनिराया ॥ नारद शारद ऋषि योगिंदरर ।श्याम-श्याम सब रटत निरंतर ॥ कवि कोदी करी कनन गिनंता ।नाम अपार अथाह अनंता ॥ हर सृष्टी हर सुग में भाई ।ये अवतार भक्त सुखदाई ॥ ह्रदय माहि करि देखु विचारा ।श्याम भजे तो हो निस्तारा ॥ कौर पढ़ावत गणिका तारी ।भीलनी की भक्ति बलिहारी ॥ 20 सती अहिल्या गौतम नारी ।भई श्रापवश शिला दुलारी ॥ श्याम चरण रज चित लाई ।पहुंची पति लोक में जाही ॥ अजामिल अरु सदन कसाई ।नाम प्रताप परम गति पाई ॥ जाके श्याम नाम अधारा ।सुख लहहि दुःख दूर हो सारा ॥ श्याम सलोवन है अति सुंदर ।मोर मुकुट सिर तन पीतांबर ॥ गले बैजंती माल सुहाई ।छवि अनूप भक्तन मान भाई ॥ श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती ।श्याम दुपहरि कर परभाती ॥ श्याम सारथी जिस रथ के ।रोड़े दूर होए उस पथ के ॥ श्याम भक्त न कही पर हारा ।भीर परि तब श्याम पुकारा ॥ रसना श्याम नाम रस पी ले ।जी ले श्याम नाम के ही ले ॥ 30 संसारी सुख भोग मिलेगा ।अंत श्याम सुख योग मिलेगा ॥ श्याम प्रभु हैं तन के काले ।मन के गोरे भोले-भाले ॥ श्याम संत भक्तन हितकारी ।रोग-दोष अध नाशे भारी ॥ प्रेम सहित जब नाम पुकारा ।भक्त लगत श्याम को प्यारा ॥ खाटू में हैं मथुरावासी ।पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी ॥ सुधा तान भरि मुरली बजाई ।चहु दिशि जहां सुनी पाई ॥ वृद्ध-बाल जेते नारि नर ।मुग्ध भये सुनि बंशी स्वर ॥ हड़बड़ कर सब पहुंचे जाई ।खाटू में जहां श्याम कन्हाई ॥ जिसने श्याम स्वरूप निहारा ।भव भय से पाया छुटकारा ॥ ॥ दोहा ॥श्याम सलोने संवारे,बर्बरीक तनुधार ।इच्छा पूर्ण भक्त की,करो न लाओ बार॥ इति श्री खाटू श्याम चालीसा ॥

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Shri Krishna Chalisa:श्री कृष्ण चालीसा

Shri Krishna Chalisa:श्री कृष्ण चालीसा: भक्ति का अमृत श्री कृष्ण चालीसा भगवान श्री कृष्ण की स्तुति में लिखा गया एक भक्ति गीत है। यह चालीसा भगवान कृष्ण के विभिन्न रूपों, लीलाओं और गुणों का वर्णन करती है। इसे पढ़ने या सुनने से मन शांत होता है और भक्ति भाव जागृत होता है। Shri Krishna Chalisa:श्री कृष्ण चालीसा का महत्व Shri Krishna Chalisa:श्री कृष्ण चालीसा के कुछ प्रमुख बिंदु Shri Krishna Chalisa:श्री कृष्ण चालीसा का पाठ कैसे करें? Shri Krishna Chalisa:श्री कृष्ण चालीसा का पाठ करते समय मन को शांत रखें और भगवान कृष्ण की भक्ति में लीन हो जाएं। आप इसे सुबह या शाम के समय कर सकते हैं। यहां एक उदाहरण दिया गया है: Shri Krishna Chalisa:श्री कृष्ण चालीसा ॥ दोहा॥बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम ।अरुण अधर जनु बिम्बफल,नयन कमल अभिराम ॥ पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख,पीताम्बर शुभ साज ।जय मनमोहन मदन छवि,कृष्णचन्द्र महाराज ॥ ॥ चौपाई ॥जय यदुनन्दन जय जगवन्दन ।जय वसुदेव देवकी नन्दन ॥ जय यशुदा सुत नन्द दुलारे ।जय प्रभु भक्तन के दृग तारे ॥ जय नट-नागर नाग नथैया ।कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया ॥ पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो ।आओ दीनन कष्ट निवारो ॥ वंशी मधुर अधर धरी तेरी ।होवे पूर्ण मनोरथ मेरो ॥ आओ हरि पुनि माखन चाखो ।आज लाज भारत की राखो ॥ गोल कपोल, चिबुक अरुणारे ।मृदु मुस्कान मोहिनी डारे ॥ रंजित राजिव नयन विशाला ।मोर मुकुट वैजयंती माला ॥ कुण्डल श्रवण पीतपट आछे ।कटि किंकणी काछन काछे ॥ नील जलज सुन्दर तनु सोहे ।छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे ॥10 मस्तक तिलक, अलक घुंघराले ।आओ कृष्ण बांसुरी वाले ॥ करि पय पान, पुतनहि तारयो ।अका बका कागासुर मारयो ॥ मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला ।भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला ॥ सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई ।मसूर धार वारि वर्षाई ॥ लगत-लगत ब्रज चहन बहायो ।गोवर्धन नखधारि बचायो ॥ लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई ।मुख महं चौदह भुवन दिखाई ॥ दुष्ट कंस अति उधम मचायो ।कोटि कमल जब फूल मंगायो ॥ नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें ।चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें ॥ करि गोपिन संग रास विलासा ।सबकी पूरण करी अभिलाषा ॥ केतिक महा असुर संहारयो ।कंसहि केस पकड़ि दै मारयो ॥20 मात-पिता की बन्दि छुड़ाई ।उग्रसेन कहं राज दिलाई ॥ महि से मृतक छहों सुत लायो ।मातु देवकी शोक मिटायो ॥ भौमासुर मुर दैत्य संहारी ।लाये षट दश सहसकुमारी ॥ दै भिन्हीं तृण चीर सहारा ।जरासिंधु राक्षस कहं मारा ॥ असुर बकासुर आदिक मारयो ।भक्तन के तब कष्ट निवारियो ॥ दीन सुदामा के दुःख टारयो ।तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो ॥ प्रेम के साग विदुर घर मांगे ।दुर्योधन के मेवा त्यागे ॥ लखि प्रेम की महिमा भारी ।ऐसे श्याम दीन हितकारी ॥ भारत के पारथ रथ हांके ।लिए चक्र कर नहिं बल ताके ॥ निज गीता के ज्ञान सुनाये ।भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये ॥30 मीरा थी ऐसी मतवाली ।विष पी गई बजाकर ताली ॥ राना भेजा सांप पिटारी ।शालिग्राम बने बनवारी ॥ निज माया तुम विधिहिं दिखायो ।उर ते संशय सकल मिटायो ॥ तब शत निन्दा करी तत्काला ।जीवन मुक्त भयो शिशुपाला ॥ जबहिं द्रौपदी टेर लगाई ।दीनानाथ लाज अब जाई ॥ तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला ।बढ़े चीर भै अरि मुँह काला ॥ अस नाथ के नाथ कन्हैया ।डूबत भंवर बचावत नैया ॥ सुन्दरदास आस उर धारी ।दयादृष्टि कीजै बनवारी ॥ नाथ सकल मम कुमति निवारो ।क्षमहु बेगि अपराध हमारो ॥ खोलो पट अब दर्शन दीजै ।बोलो कृष्ण कन्हैया की जै ॥40 ॥ दोहा ॥यह चालीसा कृष्ण का,पाठ करै उर धारि।अष्ट सिद्धि नवनिधि फल,लहै पदारथ चारि॥

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Dream Interpretation: सपने में इस तरह दिखें पैसे तो होता है धन लाभ, जानें इसके शुभ-अशुभ संकेत

Dream Interpretation:सपने हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा होते हैं, और कई बार हमारे अवचेतन मन की इच्छाओं, डर और आशाओं को प्रकट करते हैं। पुरानी मान्यताओं और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सपनों का एक खास महत्त्व होता है, और वे भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं का संकेत भी दे सकते हैं। खासकर जब बात पैसे या धन से संबंधित सपनों की हो, तो इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। धन से जुड़ी सपने हमें सुख, संपन्नता या आर्थिक स्थिति से संबंधित संकेत देते हैं। आइए जानते हैं कि सपने में पैसे देखना शुभ या अशुभ संकेत क्या दर्शाते हैं। 1. सपने में नकद धन देखना जब किसी व्यक्ति को सपने में नकद पैसे दिखाई देते हैं, तो इसे आमतौर पर शुभ संकेत माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नकद धन का सपना यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में व्यक्ति को आर्थिक लाभ हो सकता है। Dream Interpretation यह सपना इस बात का प्रतीक होता है कि आपका परिश्रम और मेहनत रंग लाने वाली है, और आपको धन लाभ प्राप्त हो सकता है। अगर आप किसी व्यापार में हैं या नौकरी में हैं, तो यह सपना इंगित करता है कि आपके प्रयासों का अच्छा परिणाम जल्द ही मिलेगा। 2. सपने में सोने के सिक्के देखना सोने के सिक्कों को सपने में देखना बेहद शुभ माना जाता है। यह सपना इस बात का संकेत देता है कि व्यक्ति को न केवल आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि उसके जीवन में सुख-समृद्धि और वैभव भी आएगा। सोना संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक होता है, और इसे देखना यह दर्शाता है कि आपके जीवन में आर्थिक स्थिरता आने वाली है। Dream Interpretation साथ ही, यह सपना आपके सामाजिक और पारिवारिक संबंधों में भी उन्नति का संकेत देता है। 3. सपने में पैसे खोना अगर सपने में आपको ऐसा महसूस होता है कि आपने पैसे खो दिए हैं, तो इसे अशुभ संकेत माना जाता है। इसका मतलब है कि आपको निकट भविष्य में आर्थिक नुकसान हो सकता है। Dream Interpretation यह सपना आपको यह चेतावनी देता है कि आपको अपने वित्तीय मामलों में अधिक सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। इस प्रकार के सपने व्यक्ति की चिंताओं और असुरक्षाओं को भी प्रकट करते हैं, और यह इंगित करता है कि आप अपनी आर्थिक स्थिति के प्रति चिंतित हैं। 4. सपने में किसी को पैसे देना जब आप सपने में किसी को पैसे दे रहे होते हैं, तो यह सपना मिश्रित संकेत देता है। एक तरफ, यह इस बात का प्रतीक हो सकता है कि आप किसी की सहायता करने के लिए तत्पर हैं, जो एक सकारात्मक संकेत है। दूसरी ओर, यह सपना इस बात की भी ओर संकेत कर सकता है कि आप अपने संसाधनों को बिना सोचे-समझे खर्च कर रहे हैं। इसलिए, यह सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। 5. सपने में पैसे चोरी होना सपने में अगर आप देखते हैं कि आपके पैसे चोरी हो गए हैं, तो यह भी एक अशुभ संकेत होता है। यह सपना इस बात का प्रतीक है कि आपके जीवन में किसी प्रकार की धोखाधड़ी या छल का सामना करना पड़ सकता है। Dream Interpretation यह सपना आपको सतर्क करता है कि आपको अपने आसपास के लोगों और परिस्थितियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। यह सपना आपको यह चेतावनी भी देता है कि आप किसी के छलावे में न फंसें। 6. सपने में कागजी मुद्रा देखना कागजी मुद्रा, यानी नोटों को सपने में देखना भी धन लाभ का संकेत होता है। यह सपना इस बात का प्रतीक है कि आपको आर्थिक रूप से लाभ मिल सकता है। अगर आप कर्ज़ में हैं, तो यह सपना संकेत देता है कि Dream Interpretation आपका कर्ज जल्द ही चुकाया जा सकता है। इसके साथ ही, यह सपना आपको यह भी प्रेरित करता है कि आप अपने वित्तीय लक्ष्यों की ओर ध्यान दें और योजनाबद्ध तरीके से कार्य करें। 7. सपने में पैसे गिनना अगर आप सपने में पैसे गिनते हुए नजर आते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आप अपने जीवन में आर्थिक स्थिरता पाने के लिए प्रयत्नशील हैं। यह सपना आपकी वित्तीय स्थिति के प्रति आपकी जागरूकता और चिंताओं को दर्शाता है। Dream Interpretation साथ ही, यह इस बात का प्रतीक हो सकता है कि आप जल्द ही एक महत्वपूर्ण आर्थिक निर्णय लेने वाले हैं। अगर आपने सही निर्णय लिया, तो आपको आर्थिक लाभ हो सकता है। 8. सपने में बहुत सारी दौलत देखना जब कोई व्यक्ति सपने में बहुत सारी दौलत, जैसे कि सोना, चांदी या नोटों का अंबार देखता है, तो इसे बेहद शुभ माना जाता है। यह सपना इस बात का प्रतीक है Dream Interpretation कि आपका भविष्य उज्जवल है और आपको अपार धन-संपत्ति की प्राप्ति हो सकती है। यह सपना यह भी संकेत देता है कि आपके जीवन में सफलता और समृद्धि का दौर आने वाला है। 9. सपने में गहने देखना गहनों को सपने में देखना भी धन लाभ का संकेत होता है। विशेष रूप से, अगर आप सोने या चांदी के गहने सपने में देखते हैं, तो यह इस बात का संकेत है कि आपको जल्द ही धन प्राप्त हो सकता है। यह सपना समृद्धि और वैभव का प्रतीक होता है। इसके अलावा, यह आपके पारिवारिक जीवन में भी सुख-समृद्धि का संकेत देता है। 10. सपने में किसी से उधार लेना अगर आप सपने में किसी से उधार ले रहे हैं, तो यह इस बात का संकेत हो सकता है Dream Interpretation कि आप अपने जीवन में किसी आर्थिक संकट का सामना कर सकते हैं। यह सपना आपको चेतावनी देता है कि आपको अपने वित्तीय मामलों में संयम और सोच-विचार से काम लेना चाहिए। निष्कर्ष: सपनों में पैसे या धन से संबंधित संकेतों का गहरा अर्थ होता है। वे आपके आर्थिक जीवन और मानसिक स्थिति को प्रतिबिंबित करते हैं। हालांकि, हर सपना व्यक्ति विशेष के अनुभव और मानसिक अवस्था पर आधारित होता है, Dream Interpretation इसलिए सपनों का अर्थ भी अलग-अलग हो सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सपनों का विश्लेषण करते समय व्यक्ति को अपने जीवन की परिस्थितियों और मानसिकता को ध्यान में

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Sita Chalisa:सीता चालीसा

Sita Chalisa:सीता चालीसा: आदर्श पत्नी और देवी का गुणगान Sita Chalisa:सीता चालीसा हिंदू धर्म में माता सीता की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। माता सीता को आदर्श पत्नी और देवी का दर्जा प्राप्त है। यह चालीसा भक्तों को माता सीता के करीब लाने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक माध्यम है। Sita Chalisa:सीता चालीसा का महत्व Sita Chalisa:सीता चालीसा पढ़ने का तरीका Sita Chalisa:सीता चालीसा ॥ दोहा ॥बन्दौ चरण सरोज निज जनक लली सुख धाम,राम प्रिय किरपा करें सुमिरौं आठों धाम ॥कीरति गाथा जो पढ़ें सुधरैं सगरे काम,मन मन्दिर बासा करें दुःख भंजन सिया राम ॥ ॥ चौपाई ॥राम प्रिया रघुपति रघुराई,बैदेही की कीरत गाई ॥ चरण कमल बन्दों सिर नाई,सिय सुरसरि सब पाप नसाई ॥ जनक दुलारी राघव प्यारी,भरत लखन शत्रुहन वारी ॥ दिव्या धरा सों उपजी सीता,मिथिलेश्वर भयो नेह अतीता ॥4 सिया रूप भायो मनवा अति,रच्यो स्वयंवर जनक महीपति ॥ भारी शिव धनु खींचै जोई,सिय जयमाल साजिहैं सोई ॥ भूपति नरपति रावण संगा,नाहिं करि सके शिव धनु भंगा ॥ जनक निराश भए लखि कारन,जनम्यो नाहिं अवनिमोहि तारन ॥8 यह सुन विश्वामित्र मुस्काए,राम लखन मुनि सीस नवाए ॥ आज्ञा पाई उठे रघुराई,इष्ट देव गुरु हियहिं मनाई ॥ जनक सुता गौरी सिर नावा,राम रूप उनके हिय भावा ॥ मारत पलक राम कर धनु लै,खंड खंड करि पटकिन भू पै ॥12 जय जयकार हुई अति भारी,आनन्दित भए सबैं नर नारी ॥ सिय चली जयमाल सम्हाले,मुदित होय ग्रीवा में डाले ॥ मंगल बाज बजे चहुँ ओरा,परे राम संग सिया के फेरा ॥ लौटी बारात अवधपुर आई,तीनों मातु करैं नोराई ॥16 कैकेई कनक भवन सिय दीन्हा,मातु सुमित्रा गोदहि लीन्हा ॥ कौशल्या सूत भेंट दियो सिय,हरख अपार हुए सीता हिय ॥ सब विधि बांटी बधाई,राजतिलक कई युक्ति सुनाई ॥ मंद मती मंथरा अडाइन,राम न भरत राजपद पाइन ॥20 कैकेई कोप भवन मा गइली,वचन पति सों अपनेई गहिली ॥ चौदह बरस कोप बनवासा,भरत राजपद देहि दिलासा ॥ आज्ञा मानि चले रघुराई,संग जानकी लक्षमन भाई ॥ सिय श्री राम पथ पथ भटकैं,मृग मारीचि देखि मन अटकै ॥24 राम गए माया मृग मारन,रावण साधु बन्यो सिय कारन ॥ भिक्षा कै मिस लै सिय भाग्यो,लंका जाई डरावन लाग्यो ॥ राम वियोग सों सिय अकुलानी,रावण सों कही कर्कश बानी ॥ हनुमान प्रभु लाए अंगूठी,सिय चूड़ामणि दिहिन अनूठी ॥28 अष्ठसिद्धि नवनिधि वर पावा,महावीर सिय शीश नवावा ॥ सेतु बाँधी प्रभु लंका जीती,भक्त विभीषण सों करि प्रीती ॥ चढ़ि विमान सिय रघुपति आए,भरत भ्रात प्रभु चरण सुहाए ॥ अवध नरेश पाई राघव से,सिय महारानी देखि हिय हुलसे ॥32 रजक बोल सुनी सिय बन भेजी,लखनलाल प्रभु बात सहेजी ॥ बाल्मीक मुनि आश्रय दीन्यो,लवकुश जन्म वहाँ पै लीन्हो ॥ विविध भाँती गुण शिक्षा दीन्हीं,दोनुह रामचरित रट लीन्ही ॥ लरिकल कै सुनि सुमधुर बानी,रामसिया सुत दुई पहिचानी ॥36 भूलमानि सिय वापस लाए,राम जानकी सबहि सुहाए ॥ सती प्रमाणिकता केहि कारन,बसुंधरा सिय के हिय धारन ॥ अवनि सुता अवनी मां सोई,राम जानकी यही विधि खोई ॥ पतिव्रता मर्यादित माता,सीता सती नवावों माथा ॥40 ॥ दोहा ॥जनकसुत अवनिधिया राम प्रिया लवमात,चरणकमल जेहि उन बसै सीता सुमिरै प्रात ॥

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Parvati Chalisa:पार्वती चालीसा

Parvati Chalisa:पार्वती चालीसा: शक्ति और आशीर्वाद का मंत्र Parvati Chalisa:पार्वती चालीसा हिंदू धर्म में माता पार्वती की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। माता पार्वती को शक्ति और सौंदर्य की देवी माना जाता है। यह चालीसा भक्तों को माता पार्वती के करीब लाने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का एक माध्यम है। Parvati Chalisa:पार्वती चालीसा का महत्व Parvati Chalisa:पार्वती चालीसा पढ़ने का तरीका Parvati Chalisa:पार्वती चालीसा ॥ दोहा ॥जय गिरी तनये दक्षजेशम्भू प्रिये गुणखानि ।गणपति जननी पार्वतीअम्बे! शक्ति! भवानि ॥ ॥ चौपाई ॥ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे ।पंच बदन नित तुमको ध्यावे ॥ षड्मुख कहि न सकत यश तेरो ।सहसबदन श्रम करत घनेरो ॥ तेऊ पार न पावत माता ।स्थित रक्षा लय हिय सजाता ॥ अधर प्रवाल सदृश अरुणारे ।अति कमनीय नयन कजरारे ॥ ललित ललाट विलेपित केशर ।कुंकुंम अक्षत शोभा मनहर ॥ कनक बसन कंचुकि सजाए ।कटी मेखला दिव्य लहराए ॥ कंठ मदार हार की शोभा ।जाहि देखि सहजहि मन लोभा ॥ बालारुण अनंत छबि धारी ।आभूषण की शोभा प्यारी ॥ नाना रत्न जड़ित सिंहासन ।तापर राजति हरि चतुरानन ॥ इन्द्रादिक परिवार पूजित ।जग मृग नाग यक्ष रव कूजित ॥ 10 गिर कैलास निवासिनी जय जय ।कोटिक प्रभा विकासिनी जय जय ॥ त्रिभुवन सकल कुटुंब तिहारी ।अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी ॥ हैं महेश प्राणेश तुम्हारे ।त्रिभुवन के जो नित रखवारे ॥ उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब ।सुकृत पुरातन उदित भए तब ॥ बूढ़ा बैल सवारी जिनकी ।महिमा का गावे कोउ तिनकी ॥ सदा श्मशान बिहारी शंकर ।आभूषण हैं भुजंग भयंकर ॥ कण्ठ हलाहल को छबि छायी ।नीलकण्ठ की पदवी पायी ॥ देव मगन के हित अस किन्हो ।विष लै आपु तिनहि अमि दिन्हो ॥ ताकी तुम पत्नी छवि धारिणी ।दुरित विदारिणी मंगल कारिणी ॥ देखि परम सौंदर्य तिहारो ।त्रिभुवन चकित बनावन हारो ॥ 20 भय भीता सो माता गंगा ।लज्जा मय है सलिल तरंगा ॥ सौत समान शम्भू पहआयी ।विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी ॥ तेहि कों कमल बदन मुरझायो ।लखी सत्वर शिव शीश चढ़ायो ॥ नित्यानंद करी बरदायिनी ।अभय भक्त कर नित अनपायिनी ॥ अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनी ।माहेश्वरी हिमालय नन्दिनी ॥ काशी पुरी सदा मन भायी ।सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी ॥ भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री ।कृपा प्रमोद सनेह विधात्री ॥ रिपुक्षय कारिणी जय जय अम्बे ।वाचा सिद्ध करि अवलम्बे ॥ गौरी उमा शंकरी काली ।अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली ॥ सब जन की ईश्वरी भगवती ।पतिप्राणा परमेश्वरी सती ॥ 30 तुमने कठिन तपस्या कीनी ।नारद सों जब शिक्षा लीनी ॥ अन्न न नीर न वायु अहारा ।अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा ॥ पत्र घास को खाद्य न भायउ ।उमा नाम तब तुमने पायउ ॥ तप बिलोकी ऋषि सात पधारे ।लगे डिगावन डिगी न हारे ॥ तब तब जय जय जय उच्चारेउ ।सप्तऋषि निज गेह सिद्धारेउ ॥ सुर विधि विष्णु पास तब आए ।वर देने के वचन सुनाए ॥ मांगे उमा वर पति तुम तिनसों ।चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों ॥ एवमस्तु कही ते दोऊ गए ।सुफल मनोरथ तुमने लए ॥ करि विवाह शिव सों भामा ।पुनः कहाई हर की बामा ॥ जो पढ़िहै जन यह चालीसा ।धन जन सुख देइहै तेहि ईसा ॥ 40 ॥ दोहा ॥कूटि चंद्रिका सुभग शिर,जयति जयति सुख खा‍निपार्वती निज भक्त हित,रहहु सदा वरदानि ।॥ इति श्री पार्वती चालीसा ॥

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Rohini Vrat 2025:रोहिणी व्रत,तिथियाँ पूजा विधि और महत्व

Rohini Vrat:रोहिणी व्रत 2025 में: तिथियाँ, पूजा विधि और महत्व Rohini Vrat:रोहिणी व्रत तिथियाँ 2025Rohini Vrat:रोहिणी व्रत मुख्य रूप से भगवान श्रीकृष्ण और माता रोहिणी को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जो ज्येष्ठाओं के अनुसार समृद्धि, सुख और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। यह व्रत चंद्रमा की रोहिणी नक्षत्र में पड़ने वाली तिथियों पर किया जाता है। आइए जानते हैं 2025 में रोहिणी व्रत की तिथियाँ Rohini Vrat:रोहिणी व्रत का महत्वरोहिणी व्रत का महत्व खासकर महिलाओं के लिए अधिक होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से पति की आयु लंबी होती है, दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और घर में समृद्धि आती है। इस व्रत का पालन मुख्य रूप से जैन धर्म की महिलाओं द्वारा किया जाता है, लेकिन हिंदू धर्म में भी इसका काफी महत्व है। कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, तो रोहिणी नक्षत्र का विशेष महत्व था। इसलिए इसे भगवान श्रीकृष्ण के पूजन से भी जोड़ा जाता है। यह व्रत विशेष रूप से माताओं द्वारा अपने पुत्रों की लंबी आयु और परिवार की सुख-शांति के लिए किया जाता है। Rohini Vrat:रोहिणी व्रत पूजा विधि Rohini Vrat:रोहिणी व्रत की कथाप्राचीन कथा के अनुसार, एक समय की बात है जब एक राजा अपनी प्रजा को सुखी और समृद्ध बनाने के लिए अनेक धार्मिक कृत्य करता था। एक दिन राजा को ज्ञात हुआ कि उसकी प्रजा में एक महिला को निरंतर कष्टों का सामना करना पड़ रहा है। राजा ने उस महिला को बुलाकर उसका दुःख पूछा। महिला ने बताया कि उसने कई व्रत किए, पर उसका जीवन अभी भी कठिनाइयों से भरा है। तब राजा ने अपने गुरु से सलाह ली, जिन्होंने रोहिणी व्रत का पालन करने की सलाह दी। महिला ने श्रद्धापूर्वक रोहिणी व्रत किया, और कुछ समय बाद उसका जीवन सुख-समृद्धि से भर गया। उसी समय से रोहिणी व्रत को स्त्रियाँ परिवार के कल्याण, समृद्धि और सुख की प्राप्ति के लिए करती हैं। Rohini Vrat:रोहिणी व्रत के लाभ निष्कर्षरोहिणी व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह व्रत न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी संतुलित और समृद्ध बनाता है। व्रत का पालन श्रद्धा और नियमों के साथ करना आवश्यक है ताकि इसका पूरा लाभ प्राप्त हो सके। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Rohini Vrat 2024: कब और क्यों मनाया जाता है रोहिणी व्रत? नियमों का ध्यान रखने से सफल होगी पूजा

Rohini Vrat 2024:रोहिणी व्रत पूजा विधि अक्टूबर 2024 Rohini Vrat 2024:रोहिणी व्रत का महत्वRohini Vrat 2024:रोहिणी व्रत का महत्व जैन धर्म में विशेष रूप से माना जाता है। इस व्रत को मुख्यतः स्त्रियाँ अपने पति और परिवार की दीर्घायु, सुख-समृद्धि, और कल्याण के लिए करती हैं। इस व्रत की महत्ता इसलिए भी अधिक है Rohini Vrat OCTOBER 2024 क्योंकि इसे करने से व्रती को पुण्य की प्राप्ति होती है और समस्त कष्टों का निवारण होता है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य की आराधना के साथ किया जाता है, जो 12वें तीर्थंकर हैं। भगवान वासुपूज्य की कृपा से व्रत करने वालों को मोक्ष मार्ग पर बढ़ने का आशीर्वाद मिलता है। अक्टूबर 2024 में रोहिणी व्रत की तिथिअक्टूबर 2024 में रोहिणी व्रत की तिथि 21 अक्टूबर है। रोहिणी नक्षत्र की अवधि के दौरान यह व्रत किया जाता है, जो कि ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा से संबंधित एक प्रमुख नक्षत्र है। Rohini Vrat 2024:रोहिणी व्रत पूजा विधि 1. व्रत की तैयारीव्रत की शुरुआत से पहले घर को साफ-सुथरा करना चाहिए। पूजा स्थान को अच्छे से स्वच्छ कर लें और वहां भगवान वासुपूज्य की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और भगवान वासुपूज्य की प्रतिमा को विराजमान करें। इसके बाद पूजा सामग्री को व्यवस्थित करें, जिसमें धूप, दीप, अक्षत (चावल), कुमकुम, पुष्प, फल, और मिठाई आदि शामिल होते हैं। 2. स्नान और शुद्धिकरणव्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और शुद्ध वस्त्र धारण करने चाहिए। शारीरिक और मानसिक शुद्धता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके बाद भगवान वासुपूज्य को ध्यान में रखते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। 3. भगवान वासुपूज्य की पूजाभगवान वासुपूज्य की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं और धूप लगाएं। इसके बाद भगवान का अभिषेक करें, जो कि पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर) से किया जाता है। अभिषेक के बाद भगवान को स्वच्छ जल से स्नान कराएं और उन्हें वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद पुष्प, फल, और मिठाई अर्पित करें। भगवान के चरणों में अक्षत और कुमकुम चढ़ाएं। 4. व्रत कथा का श्रवण या पाठपूजा के दौरान या उसके बाद रोहिणी व्रत की कथा का पाठ किया जाता है। यह कथा भगवान वासुपूज्य के जीवन, उनकी साधना और मोक्ष प्राप्ति की कहानी को बयां करती है। इस कथा को सुनने या पढ़ने से मन में श्रद्धा और विश्वास बढ़ता है और व्रती को व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। 5. ध्यान और प्रार्थनाकथा के बाद व्रती को भगवान वासुपूज्य का ध्यान करते हुए उनसे अपने परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करनी चाहिए। प्रार्थना में श्रद्धा भाव से “ॐ वासुपूज्य नमः” मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का 108 बार जाप करना अत्यधिक शुभ माना जाता है। 6. व्रत का पालनइस दिन निराहार या फलाहार रहना चाहिए। व्रती दिन भर उपवास करते हैं और केवल जल ग्रहण कर सकते हैं या फलाहार कर सकते हैं। यदि किसी कारणवश निराहार रहना संभव न हो तो, सात्विक आहार का सेवन कर सकते हैं। इस व्रत का पालन पूरी श्रद्धा और समर्पण भाव से किया जाना चाहिए। Rohini Vrat 2024:रोहिणी व्रत में क्या करें और क्या न करें Rohini Vrat 2024:क्या करें: Rohini Vrat 2024:क्या न करें: Rohini Vrat 2024:रोहिणी व्रत का पुण्य फल रोहिणी व्रत का पालन करने से व्रती को अनेक प्रकार के पुण्य फल प्राप्त होते हैं। इससे जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। भगवान वासुपूज्य की कृपा से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति की ओर अग्रसर होने का अवसर मिलता है। व्रत का पालन करने से घर-परिवार में खुशहाली और प्रेम का वातावरण बनता है। विशेष रूप से विवाहित स्त्रियाँ इस व्रत को करती हैं ताकि उनके पति की दीर्घायु हो और उनका वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहे। निष्कर्ष Rohini Vrat 2024:रोहिणी व्रत जैन धर्म में अत्यधिक महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। यह व्रत भगवान वासुपूज्य की आराधना के साथ किया जाता है और इसे करने से व्रती के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। अक्टूबर 2024 में 21 तारीख को यह व्रत मनाया जाएगा, और इसे पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करने से व्यक्ति को निश्चित ही पुण्य की प्राप्ति होती है।

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पहली बार करवा चौथ का व्रत रख रही हैं? जानिए इसके महत्व, परंपराएं और पूरी विधि

पहली बार करवा चौथ का व्रत रख रही हैं? जानिए इसके महत्व, परंपराएं और पूरी विधि करवा चौथ, भारतीय संस्कृति का एक खास और महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए मनाती हैं। यह त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। अगर आप पहली बार करवा चौथ का व्रत रख रही हैं, तो आपके लिए यह एक बेहद खास और यादगार अनुभव होने वाला है। इस ब्लॉग में हम आपको करवा चौथ व्रत के महत्व, परंपराओं, पूजा विधि और कुछ उपयोगी टिप्स के बारे में जानकारी देंगे। करवा चौथ का महत्व करवा चौथ पति-पत्नी के रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व है। इसमें महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखकर अपने पति की लंबी आयु और जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं। यह सिर्फ एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि प्रेम, आस्था और समर्पण का प्रतीक है। खासकर उन महिलाओं के लिए जो पहली बार यह व्रत रख रही हैं, यह अवसर एक अनूठा अनुभव होता है, जो उनके वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत को और भी खास बनाता है। पहली बार करवा चौथ व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए जरूरी बातें अगर आप इस साल पहली बार का व्रत रख रही हैं, तो कुछ जरूरी परंपराएं और बातें जानना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। पहली बार करवा चौथ रखने वाली महिलाओं के लिए कुछ खास टिप्स करवा चौथ से जुड़े कुछ रोचक तथ्य निष्कर्ष पहली बार का व्रत रखना आपके जीवन का एक महत्वपूर्ण और यादगार पल होगा। इस व्रत में पति-पत्नी के रिश्ते का प्यार, समर्पण और विश्वास झलकता है। इस दिन की हर परंपरा का अपना एक खास महत्व है, जिसे अपनाकर आप इस त्योहार को और भी खास बना सकती हैं। करवा चौथ के इस पावन पर्व पर आपके रिश्ते में और भी मिठास और मजबूती आए, यही शुभकामनाएं हैं। क्या आप भी पहली बार का व्रत रख रही हैं? अपनी तैयारियों और अनुभवों को हमारे साथ कमेंट में शेयर करें! Frequently Asked Questions (FAQs) Q1. क्या पहली बार का व्रत रखना कठिन होता है?पहली बार व्रत रखना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, खासकर अगर आपने पहले कभी निर्जला व्रत नहीं रखा है। लेकिन सरगी के दौरान पौष्टिक भोजन और दिन में आराम करने से इसे आसान बनाया जा सकता है। Q2. क्या सरगी लेना अनिवार्य है?सरगी लेना शुभ माना जाता है और यह आपकी सास द्वारा दिया जाता है। इसे लेना अनिवार्य तो नहीं, लेकिन यह आपके व्रत की शुरुआत को सकारात्मक बनाता है। Q3. क्या पहली बार व्रत रखने पर विशेष नियम होते हैं?पहली बार व्रत रखने पर कोई विशेष नियम नहीं होते, लेकिन व्रत का पालन पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ करना चाहिए। Keywords for SEO: करवा चौथ का महत्व, करवा चौथ पूजा विधि, पहली बार करवा चौथ व्रत, सरगी, सोलह श्रृंगार, करवा चौथ व्रत कथा, चंद्रमा की पूजा, करवा चौथ टिप्स

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Shani Dev Chalisha:शनि देव चालीसा

Shani Dev Chalisha:श्री शनि देव चालीसा: शनि ग्रह के देवता की स्तुति Shani Dev Chalisha:श्री शनि देव चालीसा हिंदू धर्म में शनि ग्रह के देवता की स्तुति में गाया जाने वाला एक लोकप्रिय भक्ति गीत है। शनि देव को न्याय के देवता भी माना जाता है और वे ग्रहों के राजा भी हैं। Shani Dev Chalisha यह चालीसा शनि देव की शक्ति, उनके गुणों और उनके भक्तों पर कृपा करने की क्षमता का वर्णन करती है। Shani Dev Chalisha:शनि चालीसा का महत्व Shani Dev Chalisha:शनि चालीसा का पाठ कैसे करें? नोट: यदि आप शनि चालीसा का अर्थ जानना चाहते हैं तो आप किसी धार्मिक गुरु या विद्वान से संपर्क कर सकते हैं। Shani Dev Chalisha:शनि देव चालीसा ॥ दोहा ॥श्री शनिश्चर देवजी,सुनहु श्रवण मम् टेर।कोटि विघ्ननाशक प्रभो,करो न मम् हित बेर॥ ॥ सोरठा ॥तव स्तुति हे नाथ,जोरि जुगल कर करत हौं।करिये मोहि सनाथ,विघ्नहरन हे रवि सुव्रन। ॥ चौपाई ॥शनिदेव मैं सुमिरौं तोही। विद्या बुद्धि ज्ञान दो मोही॥तुम्हरो नाम अनेक बखानौं। क्षुद्रबुद्धि मैं जो कुछ जानौं॥ अन्तक, कोण, रौद्रय मनाऊँ। कृष्ण बभ्रु शनि सबहिं सुनाऊँ॥पिंगल मन्दसौरि सुख दाता। हित अनहित सब जग के ज्ञाता॥ नित जपै जो नाम तुम्हारा। करहु व्याधि दुःख से निस्तारा॥राशि विषमवस असुरन सुरनर। पन्नग शेष सहित विद्याधर॥ राजा रंक रहहिं जो नीको। पशु पक्षी वनचर सबही को॥कानन किला शिविर सेनाकर। नाश करत सब ग्राम्य नगर भर॥ डालत विघ्न सबहि के सुख में। व्याकुल होहिं पड़े सब दुःख में॥नाथ विनय तुमसे यह मेरी। करिये मोपर दया घनेरी॥ मम हित विषम राशि महँवासा। करिय न नाथ यही मम आसा॥जो गुड़ उड़द दे बार शनीचर। तिल जव लोह अन्न धन बस्तर॥ दान दिये से होंय सुखारी। सोइ शनि सुन यह विनय हमारी॥नाथ दया तुम मोपर कीजै। कोटिक विघ्न क्षणिक महँ छीजै॥ वंदत नाथ जुगल कर जोरी। सुनहु दया कर विनती मोरी॥कबहुँक तीरथ राज प्रयागा। सरयू तोर सहित अनुरागा॥ कबहुँ सरस्वती शुद्ध नार महँ। या कहुँ गिरी खोह कंदर महँ॥ध्यान धरत हैं जो जोगी जनि। ताहि ध्यान महँ सूक्ष्म होहि शनि॥ है अगम्य क्या करूँ बड़ाई। करत प्रणाम चरण शिर नाई॥जो विदेश से बार शनीचर। मुड़कर आवेगा निज घर पर॥ रहैं सुखी शनि देव दुहाई। रक्षा रवि सुत रखैं बनाई॥जो विदेश जावैं शनिवारा। गृह आवैं नहिं सहै दुखारा॥ संकट देय शनीचर ताही। जेते दुखी होई मन माही॥सोई रवि नन्दन कर जोरी। वन्दन करत मूढ़ मति थोरी॥ ब्रह्मा जगत बनावन हारा। विष्णु सबहिं नित देत अहारा॥हैं त्रिशूलधारी त्रिपुरारी।विभू देव मूरति एक वारी॥ इकहोइ धारण करत शनि नित।वंदत सोई शनि को दमनचित॥जो नर पाठ करै मन चित से।सो नर छूटै व्यथा अमित से॥ हौं सुपुत्र धन सन्तति बाढ़े।कलि काल कर जोड़े ठाढ़े॥पशु कुटुम्ब बांधन आदि से।भरो भवन रहिहैं नित सबसे॥ नाना भाँति भोग सुख सारा।अन्त समय तजकर संसारा॥पावै मुक्ति अमर पद भाई।जो नित शनि सम ध्यान लगाई॥ पढ़ै प्रात जो नाम शनि दस।रहैं शनिश्चर नित उसके बस॥पीड़ा शनि की कबहुँ न होई।नित उठ ध्यान धरै जो कोई॥ जो यह पाठ करैं चालीसा।होय सुख साखी जगदीशा॥चालिस दिन नित पढ़ै सबेरे।पातक नाशै शनी घनेरे॥ रवि नन्दन की अस प्रभुताई।जगत मोहतम नाशै भाई॥याको पाठ करै जो कोई।सुख सम्पति की कमी न होई॥ निशिदिन ध्यान धरै मनमाहीं।आधिव्याधि ढिंग आवै नाहीं॥ ॥ दोहा ॥पाठ शनिश्चर देव को,कीहौं ‘विमल’ तैयार।करत पाठ चालीस दिन,हो भवसागर पार॥ जो स्तुति दशरथ जी कियो,सम्मुख शनि निहार।सरस सुभाषा में वही,ललिता लिखें सुधार॥

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Bhagavad Geeta Chalisa:भगवद गीता चालीसा

Bhagavad Geeta:भगवद गीता चालीसा: एक भ्रामक अवधारणा Bhagavad Geeta:भगवद गीता चालीसा जैसी कोई विशिष्ट चालीसा हिंदू धर्म के प्राचीन ग्रंथों या परंपराओं में उल्लिखित नहीं है। क्यों? क्या हो सकता है? आप क्या कर सकते हैं? निष्कर्ष: Bhagavad Geeta:जब तक आपके पास भगवद गीता चालीसा का कोई विशिष्ट स्रोत या प्रमाण नहीं है, Bhagavad Geeta तब तक यह मान लेना उचित होगा कि यह एक आधुनिक रचना है या कोई भ्रम है। ॥ चौपाई ॥ प्रथमहिं गुरुको शीश नवाऊँ।हरिचरणों में ध्यान लगाऊँ॥गीत सुनाऊँ अद्भुत यार।धारण से हो बेड़ा पार॥ अर्जुन कहै सुनो भगवाना।अपने रूप बताये नाना॥उनका मैं कछु भेद न जाना।किरपा कर फिर कहो सुजाना॥ जो कोई तुमको नित ध्यावे।भक्तिभाव से चित्त लगावे॥रात दिवस तुमरे गुण गावे।तुमसे दूजा मन नहीं भावे॥ तुमरा नाम जपे दिन रात।और करे नहीं दूजी बात॥दूजा निराकार को ध्यावे।अक्षर अलख अनादि बतावे॥ दोनों ध्यान लगाने वाला।उनमें कुण उत्तम नन्दलाला॥अर्जुन से बोले भगवान्।सुन प्यारे कछु देकर ध्यान॥ मेरा नाम जपै जपवावे।नेत्रों में प्रेमाश्रु छावे॥मुझ बिनु और कछु नहीं चावे।रात दिवस मेरा गुण गावे॥ सुनकर मेरा नामोच्चार।उठै रोम तन बारम्बार॥जिनका क्षण टूटै नहिं तार।उनकी श्रद्घा अटल अपार॥ मुझ में जुड़कर ध्यान लगावे।ध्यान समय विह्वल हो जावे॥कंठ रुके बोला नहिं जावे।मन बुधि मेरे माँही समावे॥ लज्जा भय रु बिसारे मान।अपना रहे ना तन का ज्ञान॥ऐसे जो मन ध्यान लगावे।सो योगिन में श्रेष्ठ कहावे॥ जो कोई ध्यावे निर्गुण रूप।पूर्ण ब्रह्म अरु अचल अनूप॥निराकार सब वेद बतावे।मन बुद्धी जहँ थाह न पावे॥ जिसका कबहुँ न होवे नाश।ब्यापक सबमें ज्यों आकाश॥अटल अनादि आनन्दघन।जाने बिरला जोगीजन॥ ऐसा करे निरन्तर ध्यान।सबको समझे एक समान॥मन इन्द्रिय अपने वश राखे।विषयन के सुख कबहुँ न चाखे॥ सब जीवों के हित में रत।ऐसा उनका सच्चा मत॥वह भी मेरे ही को पाते।निश्चय परमा गति को जाते॥ फल दोनों का एक समान।किन्तु कठिन है निर्गुण ध्यान॥जबतक है मन में अभिमान।तबतक होना मुश्किल ज्ञान॥ जिनका है निर्गुण में प्रेम।उनका दुर्घट साधन नेम॥मन टिकने को नहीं अधार।इससे साधन कठिन अपार॥ सगुन ब्रह्म का सुगम उपाय।सो मैं तुझको दिया बताय॥यज्ञ दानादि कर्म अपारा।मेरे अर्पण कर कर सारा॥ अटल लगावे मेरा ध्यान।समझे मुझको प्राण समान॥सब दुनिया से तोड़े प्रीत।मुझको समझे अपना मीत॥ प्रेम मग्न हो अति अपार।समझे यह संसार असार॥जिसका मन नित मुझमें यार।उनसे करता मैं अति प्यार॥ केवट बनकर नाव चलाऊँ।भव सागर के पार लगाऊँ॥यह है सबसे उत्तम ज्ञान।इससे तू कर मेरा ध्यान॥ फिर होवेगा मोहिं सामान।यह कहना मम सच्चा जान॥जो चाले इसके अनुसार।वह भी हो भवसागर पार॥

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Shri Brahma Chalisa:(श्री ब्रह्मा चालीसा)

Brahma Chalisa:श्री ब्रह्मा चालीसा: सृष्टि के रचयिता की स्तुति Brahma Chalisa:श्री ब्रह्मा चालीसा हिंदू धर्म में भगवान ब्रह्मा की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। Brahma Chalisa ब्रह्मा जी को सृष्टि के रचयिता माना जाता है और वे हिंदू त्रिमूर्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह चालीसा भगवान ब्रह्मा के गुणों, कृपा और शक्ति का वर्णन करती है। Brahma Chalisa:श्री ब्रह्मा चालीसा का महत्व Brahma Chalisa:श्री ब्रह्मा चालीसा का पाठ कैसे करें? नोट: यदि आप श्री ब्रह्मा चालीसा का अर्थ जानना चाहते हैं Brahma Chalisa तो आप किसी धार्मिक गुरु या विद्वान से संपर्क कर सकते हैं। ॥ दोहा ॥जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू,चतुरानन सुखमूल।करहु कृपा निज दास पै,रहहु सदा अनुकूल॥ तुम सृजक ब्रह्माण्ड के,अज विधि घाता नाम।विश्वविधाता कीजिये,जन पै कृपा ललाम॥ ॥ चौपाई ॥जय जय कमलासान जगमूला।रहहु सदा जनपै अनुकूला॥रुप चतुर्भुज परम सुहावन।तुम्हें अहैं चतुर्दिक आनन॥ रक्तवर्ण तव सुभग शरीरा।मस्तक जटाजुट गंभीरा॥ताके ऊपर मुकुट बिराजै।दाढ़ी श्वेत महाछवि छाजै॥ श्वेतवस्त्र धारे तुम सुन्दर।है यज्ञोपवीत अति मनहर॥कानन कुण्डल सुभग बिराजहिं।गल मोतिन की माला राजहिं॥ चारिहु वेद तुम्हीं प्रगटाये।दिव्य ज्ञान त्रिभुवनहिं सिखाये॥ब्रह्मलोक शुभ धाम तुम्हारा।अखिल भुवन महँ यश बिस्तारा॥ अर्द्धांगिनि तव है सावित्री।अपर नाम हिये गायत्री॥सरस्वती तब सुता मनोहर।वीणा वादिनि सब विधि मुन्दर॥ कमलासन पर रहे बिराजे।तुम हरिभक्ति साज सब साजे॥क्षीर सिन्धु सोवत सुरभूपा।नाभि कमल भो प्रगट अनूपा॥ तेहि पर तुम आसीन कृपाला।सदा करहु सन्तन प्रतिपाला॥एक बार की कथा प्रचारी।तुम कहँ मोह भयेउ मन भारी॥ कमलासन लखि कीन्ह बिचारा।और न कोउ अहै संसारा॥तब तुम कमलनाल गहि लीन्हा।अन्त बिलोकन कर प्रण कीन्हा॥ कोटिक वर्ष गये यहि भांती।भ्रमत भ्रमत बीते दिन राती॥पै तुम ताकर अन्त न पाये।ह्वै निराश अतिशय दुःखियाये॥ पुनि बिचार मन महँ यह कीन्हा।महापघ यह अति प्राचीन॥याको जन्म भयो को कारन।तबहीं मोहि करयो यह धारन॥ अखिल भुवन महँ कहँ कोई नाहीं।सब कुछ अहै निहित मो माहीं॥यह निश्चय करि गरब बढ़ायो।निज कहँ ब्रह्म मानि सुखपाये॥ गगन गिरा तब भई गंभीरा।ब्रह्मा वचन सुनहु धरि धीरा॥सकल सृष्टि कर स्वामी जोई।ब्रह्म अनादि अलख है सोई॥ निज इच्छा इन सब निरमाये।ब्रह्मा विष्णु महेश बनाये॥सृष्टि लागि प्रगटे त्रयदेवा।सब जग इनकी करिहै सेवा॥ महापघ जो तुम्हरो आसन।ता पै अहै विष्णु को शासन॥विष्णु नाभितें प्रगट्यो आई।तुम कहँ सत्य दीन्ह समुझाई॥ भ्ौटहु जाई विष्णु हितमानी।यह कहि बन्द भई नभवानी॥ताहि श्रवण कहि अचरज माना।पुनि चतुरानन कीन्ह पयाना॥ कमल नाल धरि नीचे आवा।तहां विष्णु के दर्शन पावा॥शयन करत देखे सुरभूपा।श्यायमवर्ण तनु परम अनूपा॥ सोहत चतुर्भुजा अतिसुन्दर।क्रीटमुकट राजत मस्तक पर॥गल बैजन्ती माल बिराजै।कोटि सूर्य की शोभा लाजै॥ शंख चक्र अरु गदा मनोहर।शेष नाग शय्या अति मनहर॥दिव्यरुप लखि कीन्ह प्रणामू।हर्षित भे श्रीपति सुख धामू॥ बहु विधि विनय कीन्ह चतुरानन।तब लक्ष्मी पति कहेउ मुदित मन॥ब्रह्मा दूरि करहु अभिमाना।ब्रह्मारुप हम दोउ समाना॥ तीजे श्री शिवशंकर आहीं।ब्रह्मरुप सब त्रिभुवन मांही॥तुम सों होई सृष्टि विस्तारा।हम पालन करिहैं संसारा॥ शिव संहार करहिं सब केरा।हम तीनहुं कहँ काज धनेरा॥अगुणरुप श्री ब्रह्मा बखानहु।निराकार तिनकहँ तुम जानहु॥ हम साकार रुप त्रयदेवा।करिहैं सदा ब्रह्म की सेवा॥यह सुनि ब्रह्मा परम सिहाये।परब्रह्म के यश अति गाये॥ सो सब विदित वेद के नामा।मुक्ति रुप सो परम ललामा॥यहि विधि प्रभु भो जनम तुम्हारा।पुनि तुम प्रगट कीन्ह संसारा॥ नाम पितामह सुन्दर पायेउ।जड़ चेतन सब कहँ निरमायेउ॥लीन्ह अनेक बार अवतारा।सुन्दर सुयश जगत विस्तारा॥ देवदनुज सब तुम कहँ ध्यावहिं।मनवांछित तुम सन सब पावहिं॥जो कोउ ध्यान धरै नर नारी।ताकी आस पुजावहु सारी॥ पुष्कर तीर्थ परम सुखदाई।तहँ तुम बसहु सदा सुरराई॥कुण्ड नहाइ करहि जो पूजन।ता कर दूर होई सब दूषण॥

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