राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र (Radha Kriya Kataksh Stotram)

मुनीन्द्र–वृन्द–वन्दिते त्रिलोक–शोक–हारिणिप्रसन्न-वक्त्र-पण्कजे निकुञ्ज-भू-विलासिनिव्रजेन्द्र–भानु–नन्दिनि व्रजेन्द्र–सूनु–संगतेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥१॥ अशोक–वृक्ष–वल्लरी वितान–मण्डप–स्थितेप्रवालबाल–पल्लव प्रभारुणांघ्रि–कोमले ।वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालयेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥२॥ अनङ्ग-रण्ग मङ्गल-प्रसङ्ग-भङ्गुर-भ्रुवांसविभ्रमं ससम्भ्रमं दृगन्त–बाणपातनैः ।निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दनेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥३॥ तडित्–सुवर्ण–चम्पक –प्रदीप्त–गौर–विग्रहेमुख–प्रभा–परास्त–कोटि–शारदेन्दुमण्डले ।विचित्र-चित्र सञ्चरच्चकोर-शाव-लोचनेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥४॥ राधा कृपा कटाक्ष स्त्रोत्र मदोन्मदाति–यौवने प्रमोद–मान–मण्डितेप्रियानुराग–रञ्जिते कला–विलास – पण्डिते ।अनन्यधन्य–कुञ्जराज्य–कामकेलि–कोविदेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥५॥ अशेष–हावभाव–धीरहीरहार–भूषितेप्रभूतशातकुम्भ–कुम्भकुम्भि–कुम्भसुस्तनि ।प्रशस्तमन्द–हास्यचूर्ण पूर्णसौख्य –सागरेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥६॥ मृणाल-वाल-वल्लरी तरङ्ग-रङ्ग-दोर्लतेलताग्र–लास्य–लोल–नील–लोचनावलोकने ।ललल्लुलन्मिलन्मनोज्ञ–मुग्ध–मोहिनाश्रितेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥७॥ सुवर्णमलिकाञ्चित –त्रिरेख–कम्बु–कण्ठगेत्रिसूत्र–मङ्गली-गुण–त्रिरत्न-दीप्ति–दीधिते ।सलोल–नीलकुन्तल–प्रसून–गुच्छ–गुम्फितेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥८॥ नितम्ब–बिम्ब–लम्बमान–पुष्पमेखलागुणेप्रशस्तरत्न-किङ्किणी-कलाप-मध्य मञ्जुले ।करीन्द्र–शुण्डदण्डिका–वरोहसौभगोरुकेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥९॥ अनेक–मन्त्रनाद–मञ्जु नूपुरारव–स्खलत्समाज–राजहंस–वंश–निक्वणाति–गौरवे ।विलोलहेम–वल्लरी–विडम्बिचारु–चङ्क्रमेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥१०॥ अनन्त–कोटि–विष्णुलोक–नम्र–पद्मजार्चितेहिमाद्रिजा–पुलोमजा–विरिञ्चजा-वरप्रदे ।अपार–सिद्धि–ऋद्धि–दिग्ध–सत्पदाङ्गुली-नखेकदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्ष–भाजनम् ॥११॥ मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरित्रिवेद–भारतीश्वरि प्रमाण–शासनेश्वरि ।रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोद–काननेश्वरिव्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोस्तुते ॥१२॥ इती ममद्भुतं-स्तवं निशम्य भानुनन्दिनीकरोतु सन्ततं जनं कृपाकटाक्ष-भाजनम् ।भवेत्तदैव सञ्चित त्रिरूप–कर्म नाशनंलभेत्तदा व्रजेन्द्र–सूनु–मण्डल–प्रवेशनम् ॥१३॥ राकायां च सिताष्टम्यां दशम्यां च विशुद्धधीः ।एकादश्यां त्रयोदश्यां यः पठेत्साधकः सुधीः ॥१४॥ यं यं कामयते कामं तं तमाप्नोति साधकः ।राधाकृपाकटाक्षेण भक्तिःस्यात् प्रेमलक्षणा ॥१५॥ ऊरुदघ्ने नाभिदघ्ने हृद्दघ्ने कण्ठदघ्नके ।राधाकुण्डजले स्थिता यः पठेत् साधकः शतम् ॥१६॥ तस्य सर्वार्थ सिद्धिः स्याद् वाक्सामर्थ्यं तथा लभेत् ।ऐश्वर्यं च लभेत् साक्षाद्दृशा पश्यति राधिकाम् ॥१७॥ तेन स तत्क्षणादेव तुष्टा दत्ते महावरम् ।येन पश्यति नेत्राभ्यां तत् प्रियं श्यामसुन्दरम् ॥१८॥ नित्यलीला–प्रवेशं च ददाति श्री-व्रजाधिपः ।अतः परतरं प्रार्थ्यं वैष्णवस्य न विद्यते ॥१९॥॥ इति श्रीमदूर्ध्वाम्नाये श्रीराधिकायाः कृपाकटाक्षस्तोत्रं सम्पूर्णम ॥

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Ganesh bhagwan:भगवान गणेश को प्रिय हैं ये 5 फूल, पूजा में अर्पित करने से खुशियों से भर जाएगा घर

Ganesh Chaturthi 2024: शास्त्रों के अनुसार गणेश बुद्धि और सिद्धि के देवता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि वह किन फूलों से खुश होंगे। तो पूजा से पहले जान लें कि भगवान गणपति के पसंदीदा पुष्प कौन-से हैं। भगवान गणेश को विभिन्न प्रकार के फूल बहुत प्रिय हैं। इन फूलों को पूजा में अर्पित करने से न केवल भगवान प्रसन्न होते हैं बल्कि घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी होता है। आइए जानते हैं उन 5 फूलों के बारे में जो भगवान गणेश को विशेष रूप से प्रिय हैं: हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा फूलों के बिना अधूरी है। फूलों की सुगंध से जहां वातावरण सुशोभित होता है। वहीं, भगवान भी प्रसन्न होते हैं। वैसे हर देवी-देवता का एक पसंदीदा फूल होता है। अगर उस पुष्प से उनकी पूजा की जाए तो भगवान अधिक प्रसन्न होते हैं।  शास्त्रों के अनुसार गणेश बुद्धि और सिद्धि के देवता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि वह किन फूलों से खुश होंगे। तो पूजा से पहले जान लें कि भगवान गणपति के पसंदीदा पुष्प कौन-से हैं। 1.गुड़हल का फूल (Hibiscus flower) गुड़हल का फूल भगवान गणेश को बहुत प्रिय है। अगर उनकी पूजा में यह पुष्प चढ़ाया जाए तो वह समृद्धि प्रदान करते हैं और दुश्मनों का नाश करते हैं। 2.कमल का फूल(Lotus flower) गणेश जी के लिए महत्व: कमल का फूल भगवान गणेश को ज्ञान और मोक्ष का प्रतीक माना जाता है। महत्व: कमल का फूल शुद्धता और समृद्धि का प्रतीक है। यह भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी को भी अर्पित किया जाता है। 3.अपराजिता फूल (Aparajita Flower) अपराजिता का फूल शनि को बहुत प्रिय है। यह पुष्प गणेश जी को भी अत्यंत प्रिय है। इस फूल से लंबोदर की पूजा करने से विवाद में आ रही बाधा दूर हो जाती है। 4.गेंदे का फूल (Marigold) सभी पूजा में पीले गेंदे का उपयोग किया जाता है। भगवान गणेश को यह फूल प्रिय है। अच्छे स्वास्थ्य के लिए गेंदे के फूल की माला सिद्धिदाता को अर्पित करें। Ganesh Chaturthi Pujan Muhurat: गणेश चतुर्थी के दिन पूजन के लिए ये है शुभ मुहूर्त, जानें गणेश विसर्जन की Date 5. गुलाब का फूल (Rose flower) महत्व: गुलाब का फूल प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक है। इसे विभिन्न रंगों में पाया जाता है और प्रत्येक रंग का अपना अलग महत्व होता है। गणेश जी के लिए महत्व: गुलाब का फूल भगवान गणेश को प्रसन्न करने के लिए एक बहुमुखी फूल है। ध्यान रखने योग्य बातें: दूर्वा अर्पण के साथ लड्डू और मोदक का भोग अवश्य लगाएं Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश की पूजा में लाल रंग के पुष्प, फल, और लाल चंदन का प्रयोग अवश्य करें। श्री गणेश भगवान की पूजा में दूर्वा, फूल, फल, दीपक, अगरबत्ती, चंदन और सिंदूर का भी प्रयोग करें। इसके साथ ही श्रीगणेश को अतिशय प्रिया लड्डू और मोदक का भोग लगाना कभी न भूलें। ककड़ा और केला के अलावा पंजीरी का भोग भी श्रीगणेश को पसंद है। इसका प्रसाद भक्तों में वितरित करने से वे प्रसन्न होते हैं। Shri Ganesh:श्रीगणेश को ये वस्तुएं अर्पित न की जाएं प्रथम पूज्य गणपति भगवान को सफेद रंग के फूल, वस्त्र, सफेद जनेऊ, सफेद चंदन आदि नहीं चढ़ाना चाहिए। Ganesh Chaturthi 2024 श्री गणेश की पूजा में मुरझाए और सूखे फल का प्रयोग न हो। इसी तरह श्रीगणेश को टूटा हुआ खंडित चावल न चढ़ाकर सदैव अक्षत यानि साबुत चावल अर्पित करना चाहिए। भगवान श्रीगणेश को तुलसी भी अर्पित नहीं की जाती। केतकी का पुष्प जिस तरह भालेनाथ को नहीं चढ़ता, वैसे ही श्रीगणेश को भी नहीं चढ़ता। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Ganesh Chaturthi 2024: (Modak ka bhog) भगवान गणेश को क्यों लगाया जाता है मोदक का भोग ,क्या है वजह ?

Modak ka bhog:गणेश चतुर्थी पर मोदक का भोग: एक दिलचस्प कहानी Ganesh Chaturthi 2024:गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना एक बहुत ही लोकप्रिय परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों मोदक गणेश जी को इतना प्रिय है? इस प्रश्न का उत्तर कई प्राचीन कहानियों में छिपा हुआ है। Ganesh ji ko kyo lagate hai Modak ka bhog: भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश उत्सव की शुरुआत होती है. इस दौरान लोग अपने घर गाजे बाजे के साथ बप्पा का स्वागत करते हैं. गणेश उत्सव के दौरान गणेश जी की स्थापना कर लोग विधि विधान से उनकी पूजा करते हैं और बप्पा को मोदक का भोग लगाते हैं. लेकिन बप्पा की पूजा में मोदक भोग लगाना क्यों जरूरी होता है. इसके पीछे की वजह क्या है? Ganesh Chaturthi Modak bhog : गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को उनके प्रिय मोदक का भोग लगाया जाता है. कहा जाता है कि मोदक के बिना गणेश चतुर्थी की पूजा अधूरी मानी जाती है. इस दिन बप्पा को 21 मोदकों का भोग लगया जाता है. वैसे तो लंबोदर को बहुत सी मिठाईयां बहुत सी मिठाइयां पसंद हैं. लेकिन मोदक का भोग लगाना इतना जरूरी क्यों माना जाता है. पुराणों में इससे जुड़ी कहानी का वर्णन मिलता है. Modak ka bhog:एक लोकप्रिय कथा एक कथा के अनुसार, जब देवी पार्वती स्नान कर रही थीं, तब उन्होंने अपने शरीर से उभरे हुए मिट्टी से एक पुत्र की रचना की। उन्होंने उस पुत्र को गणेश नाम दिया और उसे द्वारपाल बना दिया। जब भगवान शिव घर लौटे और उन्हें द्वार पर रोक दिया गया, तो क्रोधित होकर उन्होंने गणेश जी का सिर धड़ से अलग कर दिया। देवी पार्वती के विलाप सुनकर भगवान शिव ने एक हाथी का सिर लेकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया। इस प्रकार गणेश जी का एक हाथी का सिर हो गया। इस घटना के बाद, देवी पार्वती ने गणेश जी को बहुत सारे मिष्ठान खिलाए, जिनमें मोदक भी शामिल थे। कहा जाता है कि मोदक खाने के बाद गणेश जी का गुस्सा शांत हो गया और वह बहुत प्रसन्न हुए। तभी से मोदक को गणेश जी का प्रिय भोग माना जाता है। Modak ka bhog:गणेश जी को खिलाएं मोदक Modak ka bhog:युद्ध के दौरान दांत टूटने की वजह से गणेश जी को भोजन चबाने में परेशानी होने लगी. बप्पा की ऐसी स्थिति को देखकर माता पार्वती ने उनके लिए मोदक तैयार करवाए. मोदक बहुत ही मुलायम होते हैं और उन्हें चबाना भी नहीं पड़ता है. इसलिए गणेश जी ने पेट भर कर मोदक खाए. जिसके बाद से ही मोदक गजानंद का प्रिय व्यंजन बन गया. Kyu lagate hai 21 Modak ka bhog:क्यों लगाते हैं 21 मोदक का भोग? कथा के अनुसार, एक बार जब भगवान शिव, देवी पार्वती और भगवान गणेश जंगल में ऋषि अत्रि की पत्नी देवी अनुसूइया से घर गए थे. यहां पहुंचते ही भगवान शिव और गणेश को भूख लगने लगी, जिसके बाद उन्होंने सभी के लिए भोजन का प्रबंध किया है. खाना खाने के बाद देवी पार्वती और भगवान शिव की भूख शांत हो गई, लेकिन गणपति बप्पा का पेट कुछ भी खाने से भर ही नहीं रहा था. बप्पा की भूख शांत कराने के लिए अनुसूया ने उन्हें सभी प्रकार के व्यंजन खिलाए, लेकिन उनकी भूख शांत ही नहीं हुई. Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश का विग्रह ईशान कोण में स्थापित करें, स्‍थापना से पहले कर लें यह काम; बरसेगी बप्‍पा की कृपा Modak ka bhog:मोदक चढ़ाने की परंपरा Modak ka bhog:गणेश जी की भूख शांत नहीं होने पर देवी अनुसूइया ने सोचा कि शायद कुछ मीठ उनका पेट भरने में मदद कर सकता है. जिसके बाद उन्होंने गणेश जी को मिठाई का एक टुकड़ा दिया और उसे खाते ही गणपति बप्पा को डकार आ गई और उनकी भूख शांत हुई. गणेश जी भूख शांत होते ही भगवान शिव ने भी 21 बार डकार ली और उनकी भूख शांत हो गई. जिसके बाद माता पार्वती के पूछने पर देवी अनुसूइया ने बताया कि वह मिठाई मोदक थी. जिसके बाद से ही गणेश पूजन में मोदक चढ़ाने का परंपरा शुरू हुई. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Dream Astrology: मृत्यु के संकेत होते हैं ये डरावने सपने, देखने पर न करें अनदेखी

Dream Astrology:सपने हमारे मन की गहराईयों को उजागर करते हैं। अक्सर हम डरावने सपने देखते हैं, जिनमें मृत्यु का संकेत मिलता है। ये सपने हमें डरा सकते हैं, लेकिन क्या ये वास्तव में मृत्यु का संकेत होते हैं?  स्वप्न शास्त्र के जानकारों की मानें तो सपने में पेड़ का गिरना शुभ नहीं होता है। ये सपने मृत्यु के संकेत है। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई व्यक्ति सपने में पेड़ को गिरते देखता है या खुद बहुत अधिक ऊंचाई से गिरता है तो ये संकेत है कि उस व्यक्ति की मृत्यु जल्द होने वाली है।  Dream Astrology: सनातन धर्म में स्वप्न शास्त्र का विशेष महत्व है। सपने आगामी भविष्य के संकेत होते हैं। ये सपने कभी शुभ तो कभी अशुभ फल देते हैं। कुछ सपने बेहद खास होते हैं, जो दिल को छू जाते हैं। इन सपनों को देख लोग रोमांचित हो जाते हैं। वहीं, कुछ सपने बेहद डरावने होते हैं। इन सपनों को देख लोग भयभीत हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि उनके साथ जरूर कुछ बुरा होने वाला है। स्वप्न शास्त्रों की जानकारों की मानें तो कई डरावने सपने मृत्यु के संकेत होते हैं। इन सपनों को देखने पर अनदेखी बिल्कुल न करें। आइए, इन सपनों के बारे में सबकुछ जानते हैं वृक्ष (Tree) स्वप्न शास्त्र के जानकारों की मानें तो सपने में पेड़ का गिरना शुभ नहीं होता है। ये सपने मृत्यु के संकेत है। आसान शब्दों में कहें तो अगर कोई व्यक्ति सपने में पेड़ को गिरते देखता है या खुद बहुत अधिक ऊंचाई से गिरता है, तो ये संकेत है कि उस व्यक्ति की मृत्यु जल्द होने वाली है। कौन से सपने होते हैं मृत्यु के संकेत? सभी मृत्यु के सपने एक जैसे नहीं होते। कुछ सपने विशेष रूप से महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं: Dream Astrology:सपनों की व्याख्या कैसे करें? Dream Astrology:सपनों की व्याख्या करना एक जटिल प्रक्रिया है। सपने की सही व्याख्या करने के लिए आपको सपने के सभी विवरणों को याद रखना होगा। इसके अलावा, आपको अपने जीवन की वर्तमान स्थिति और भावनाओं पर भी ध्यान देना होगा। टूटी प्रतिमा Sapne:सपने में भगवान को देखना बेहद शुभ होता है, लेकिन सपने में टूटी हुई प्रतिमा देखना बेहद अशुभ होता है। सपने में टूटी हुई मूर्ति को देखने का मतलब है कि जल्द ही आपको कोई बुरी या अप्रिय खबर मिल सकती है। Swapna Shastra: सपनों में दिखाई देने वाली ये 11 घटनाएं मानी जाती है शुभ काली बिल्ली Sapne:सपने में काली बिल्ली देखना भी शुभ नहीं होता है। अगर कोई व्यक्ति सपने में काली बिल्ली को देखता है, तो उसके साथ कोई अप्रिय घटना हो सकती है। ज्योतिषियों की मानें तो सपने में काली बिल्ली देखना अकाल मृत्यु के भी संकेत होते हैं। Dream Astrology:परछाई अगर कोई व्यक्ति सपने में काली परछाई को देखता है, तो ये संकेत है कि उसके जीवन में कुछ गलत होने वाला है। उस व्यक्ति के साथ बहुत बुरा होने वाला है। ये सपने अकाल मृत्यु के संकेत है। Dream Astrology:ढ़ोल-नगाड़े Dream Astrology:स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में ढोल-नगाड़े बजते देखना या उसकी आवाज सुनाई देना शुभ नहीं होता है। ये सपने मृत्यु के संकेत है। इस सपनों को देखने पर अनदेखी न करें। घर के बड़े-वृद्ध और प्रकांड पंडित या ज्योतिष की आवश्यक सलाह लें। साथ ही देवों के देव महादेव की पूजा करें और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 10/09/2024

Aaj Ka Panchang 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞 ⛅दिनांक – 10 सितम्बर 2024⛅दिन – मंगलवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – सप्तमी रात्रि 11:11 तक तत्पश्चात अष्टमी⛅नक्षत्र – अनुराधा रात्रि 08:04 तक तत्पश्चात ज्येष्ठा⛅योग – विष्कम्भ रात्रि 12:31 सितम्बर 11 तक तत्पश्चात प्रीति⛅राहु काल – दोपहर 03:42 से शाम 05:15 तक⛅सूर्योदय – 06:25 ⛅सूर्यास्त – 06:48⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से दोपहर 01:01 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:13 सितम्बर 11 से रात्रि 01:00 सितम्बर 11 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – ललिता सप्तमी, जयेष्ठ गौरी आह्वाहन⛅विशेष – सप्तमी को ताड़ का फल खाने से रोग बढ़ते हैं और शरीर का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹अपनी प्रकृति अनुसार करें आहार सेवन🔹 🔸मानवीय प्रकृति में जिस दोष की प्रधानता होती है उसके प्रकोपजन्य व्याधियाँ होने की सम्भावना अधिक होती है । इनसे रक्षा के लिए आयुर्वेद के आचार्य महर्षि चरक कहते हैं :विपरीत गुणस्तेषां स्वस्थवृत्तेर्विधिर्हितः । 🔸प्रकृति के विरुद्ध गुण का सेवन ही स्वास्थ्यवर्धक होता है । (च. सं., सूत्रस्थान ७.४१) इसलिए अपनी प्रकृति का निश्चय कर उसके अनुसार आहार-विहार का सेवन करना चाहिए । 🔸सभी आहार द्रव्यों का लाभ प्राप्त करने हेतु पदार्थ जिस दोष को बढ़ाता है उसके शमनकारी पदार्थों का युक्तिपूर्वक संयोग कर सेवन करना हितकर है । जैसे- पालक वायुवर्धक है तो उसके साथ में वायुशामक सोआ डाला जाता है, अदरक, लहसुन, काली मिर्च, हींग आदि द्रव्यों के उपयोग से दालों व सब्जियों के तथा तेल, घी, नमक के द्वारा जौ, मकई आदि अनाजों के वायुवर्धक गुण का शमन किया जाता है । Aaj Ka Panchang 🔹आहार द्वारा वायु को संतुलित कैसे रखें ?🔹 🔸प्रकुपित वायु बल, वर्ण और आयु का नाश कर देती है । मन में अस्थिरता, दीनता, भय, शोक उत्पन्न करती है। 🔸 अकेले वात के प्रकोप से ८० प्रकार के रोग उत्पन्न होते हैं । प्रकुपित वायु का पित्त व कफ के साथ संयोग होने से उत्पन्न होनेवाले रोग असंख्य हैं । वायु अतिशय बलवान व आशुकारी (शीघ्र काम करनेवाली) होने से उससे उत्पन्न होनेवाले रोग भी बलवान व शीघ्र घात करनेवाले होते हैं । अतः वायु को नियंत्रण में रखने के लिए आहार में वायुवर्धक व वायुशामक पदार्थों का युक्तियुक्त उपयोग करना चाहिए । Aaj Ka Panchang 🔹वायुशामक पदार्थ🔹 अनाजों में : साठी के चावल, गेहूँ, बाजरा, तिल दालों में : कुलथी, उड़द सब्जियों में : बथुआ, पुनर्नवा (साटोडी), परवल, कोमल मूली, कोमल (बिना बीज के) बैंगन, पका पेठा, सहजन की फली, भिंडी, सूरन, गाजर, शलगम, पुदीना, हरा धनिया, प्याज, लहसुन, अदरक फलों में : सूखे मेवे, अनार, आँवला, बेल, आम, नारंगी, बेर, अमरूद, केला, अंगूर, मोसम्बी, नारियल, सीताफल, पपीता, शहतूत, लीची, कटहल (पका), फालसा, खरबूजा, तरबूज मसालों में : सोंठ, अजवायन, सौंफ, हींग, काली मिर्च, पीपरामूल, जीरा, मेथीदाना, दालचीनी, जायफल, लौंग, छोटी इलायची । 🔹अन्य वायुशामक पदार्थ🔹 🔸केसर, सेंधा नमक, काला नमक, देशी गाय का दूध एवं घी, सभी प्रकार के तेल [बरें (कुसुम्भ, कुसुम) का तेल छोड़कर ] 🔹वायुवर्धक पदार्थ🔹 अनाजों में : जौ, ज्वार, मकई दालों में : सेम, मटर, राजमा, चना, तुअर, मूँग (अल्प वायुकारक), मोठ, मसूर । सब्जियों में : अरवी, ग्वारफली, सरसों, चौलाई, पालक, पकी मूली, पत्तागोभी, लौकी, ककड़ी, टिंडा फलों में : नाशपाती, जामुन, सिंघाड़ा, कच्चा आम, मूँगफली । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang English mai 10/09/2024 ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Anuradha till 08:04 pm and then Jyestha ⛅Yoga – Vishkambh till 12:31 pm on September 11 and then Preeti ⛅Rahu Kaal – 03:42 pm to 05:15 pm ⛅Sunrise – 06:25 ⛅Sunset – 06:48 ⛅Disha Shool – North direction In⛅Brahma Muhurta – from 04:52 to 05:38 in the morning⛅Abhijit Muhurta – from 12:12 in the afternoon to 01:01 in the afternoon⛅Nishita Muhurta – from 12:13 in the night of September 11 to 01:00 in the night of September 11⛅Vrat festival details – Lalita Saptami, Jayeshtha Gauri Aawahan⛅Special – Eating palm fruit on Saptami increases diseases and destroys the body. (Brahma Vaivart Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 🔹Consume food according to your nature🔹 🔸The defect in human nature When the disease is dominant, the possibility of diseases caused by its outbreak is high. To protect from these, Maharishi Charak, Acharya of Ayurveda says: Viparita Gunastesham Swasthavrittervidhirhitah. 🔸Consumption of qualities contrary to nature is beneficial for health. (Ch. Sam., Sutrasthan 7.41) Therefore, one should decide one’s nature and consume food and lifestyle according to it. 🔸In order to get the benefits of all food substances, the substance should be taken in a healthy manner. It is beneficial to consume the substances that increase the doshas by combining them appropriately. For example, if spinach increases the air, then dill which reduces air is added to it. Use of substances like ginger, garlic, black pepper, asafoetida etc. is used in pulses and vegetables and oil. The Vayu-increasing properties of grains like barley, corn etc. are mitigated by ghee, salt. 🔹How to keep Vayu balanced through diet?🔹 🔸Agitated Vayu destroys strength, complexion and age. There is instability in the mind, weakness, It creates fear and grief. 🔸 80 types of diseases are caused by the outbreak of Vata alone. There are innumerable diseases that arise due to the combination of aggravated air with bile and phlegm. Since air is very strong and quick acting, the diseases that arise from it are also strong and quick to kill. Therefore, to keep the air under control, it is necessary to take necessary precautions. Air-enhancing and air-reducing substances should be used judiciously in the diet. 🔹Fatal sedative🔹 Cereals: Sathi rice, wheat, millet, sesame Pulses: Kulthi, Urad Vegetables: Bathua, Punarnava (Satodhi), Parwal, Tender Radish, Tender (seedless) Brinjal, Ripe Ashgourd, Drumstick Beans, ladyfinger, yam, carrot, turnip, mint, green coriander, onion, garlic, ginger Fruits: dry fruits, pomegranate, amla, bael, mango, orange, plum, guava, banana, grapes, sweet lime, coconut, custard apple, Papaya, mulberry, litchi, jackfruit (ripe), phalsa, muskmelon, watermelon Spices: dry ginger, carom seeds, fennel seeds, asafoetida, black pepper, pipramul, cumin seeds, fenugreek seeds, cinnamon, nutmeg, cloves, cardamom. 🔹Other air-inhibiting substances🔹 🔸Saffron, rock salt, black salt,

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Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, नोट करें सही तारीख, कलश स्थापना विधि व पूजन सामग्री

Shardiya Navratri 2024: चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि (माघ/आषाढ़) आती हैं। शारदीय नवरात्रि अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इस पर्व पर भक्त नौ दिनों तक मां अम्बे की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं Shardiya Navratri 2024 Date: सनातन धर्म में त्योहारों का विशेष महत्व है। नवरात्रि का पर्व भी खास अवसरों में से एक है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। साल में चार बार नवरात्रि का पावन त्योहार आता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि आती है। हालांकि सबसे ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्रि का है। पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विनी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। नवरात्रि के 10वें दिन दशहरा मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि का त्योहार 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी… Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथियां शारदीय नवरात्रि पूजा पर कैसे करें कलश स्थापना, जानें विधि (Shardiya Navratri 2024 Ghatsthapana Vidhi)  1. सुबह उठकर सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साप वस्त्र पहन लें. 2. घर में सफाई करने के बाद मुख्य द्वार की चौखट पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं. 3. पूजा घर को साफ करें और गंगाजल से पवित्र कर लें. 4. अब चौकी लगाएं और माता की प्रतिमा स्थापित करें. 5. फिर उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में कलश की स्थापना करें.  6. कलश स्थापना के लिए जौ के बीज बोएं. फिर कलश में एक तांबे के कलश में पानी और गंगाजल डालें.  7. कलश पर कलावा और आम के पत्ते बांधें. 8. अब कलश में दूब, अक्षत और सुपारी डालें. 9. कलश पर चुनरी और मौली बांध कर एक नारियल रख दें.  10 अब विधि-विधान से मां दुर्गा का पूजन करें.  11. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. 12. आखिरी में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें. Navratri 2024:पूजन सामग्री Navratri 2024 नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा के लिए निम्नलिखित पूजन सामग्री की आवश्यकता होती है पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा (Shardiya Navratri 2024 Maa Durga Sawari)  Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन पर वाहन (Maa Durga Sawari) का विशेष महत्व होता है. इसे शुभ और अशुभता से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में इस साल शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आएंगी. देवी पुराण में पालकी की सवारी को बहुत शुभ माना जाता है. Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri Date & Shubh Muhurat)  हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाता है और शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है. इस साल शारदीय नवरात्रि 03 अक्टूबर, 2024 से शुरू हो रहा है. वहीं समापन 11 अक्टूबर को होगा. इसके अगले दिन 12 अक्टूबर को विजयदशमी का पावन पर्व मनाया जाएगा.  हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 3 अक्टूबर, 2024 को सुबह 12:19 बजे से हो रहा है, जो 4 अक्टूबर को सुबह 2:58 बजे तक है. ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक शारदीय नवरात्रि गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024 आरंभ हो रही है.  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Dream Science:सपने में देखा है सूखा पेड़ तो जानिए क्या होने वाला है ?

Dream Science: स्वप्न शास्त्र के अनुसार आने वाला हर सपना अपने साथ कोई ना कोई संकेत जरूर लेकर आता है। Dream Science: रात में सोते समय हम कई तरह के सपने देखते हैं। ज्यादातर हमें याद नहीं रह पाते हैं। लेकिन ये सपने हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने शुभ-अशुभ दो प्रकार के होते हैं। ऐसे सपनों को जानने के लिए हम उत्सुक रहते हैं कि आखिर उस सपने के पीछे का अर्थ क्या है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आने वाला हर सपना अपने साथ कोई ना कोई संकेत जरूर लेकर आता है। इसी कड़ी में आज हम जानेंगे कि यदि आपको सपने में बांस का पेड़ दिखाई देता है तो इस सपने का क्या अर्थ है Dream Science:बांस का पेड़ देखना यदि आपको सपने में बांस का पेड़ दिखाई देता है तो यह आपके लिए शुभ संकेत होता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस समय का अर्थ है कि आपको कहीं से धन लाभ होने वाला है। वहीं, सपने में बांस तोड़ना अशुभ माना गया है। ऐसा सपना देखने का अर्थ है कि आने वाले समय में आपको परेशानियों का सामना करा पड़ सकता है। Dream Science:बांस का सूखा पेड़ देखना यदि आपको सपने में बांस का सूखा हुआ पेड़ दिखाई देता है तो यह भी अशुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि आपको अपने कार्यक्षेत्र में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, बांस के पेड़ पर चढ़ने का सपना शुभ माना जाता है। यह करियर में सफलता की ओर इशारा करता है। सपने में मेंढक देखना किस बात का है संकेत, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र Dream Science:सपने में सूखा पेड़ देखना अगर आपने सपने में सूखा पेड़ देखा है तो निश्चिंत रहे. इसका अर्थ है कि आपको लाभ होगा. सूखा वृक्ष देखना एक शुभ फलदायी स्वप्न होता है. इसका अर्थ है लाभ मिलना तो आप निश्चिंत हो जाएं आपको आपके सपने के अनुसार जल्द ही लाभ मिलने वाला है. सूखा पेड़ भले ही रिक्त दिखता है, लेकिन इसका अर्थ ठीक विपरीत होता है. इसलिए यह सपना देखने के बाद और अधिक मेहनत में जुट जाना चाहिए. Dream Science:गंदगी के ढेर पर बैठे देखना अगर आपने सपने में खुद को गंदगी के ढेर पर बैठे देखा है तो सतर्क हो जाएं. यह एक अशुभ संकेत है. इसका अर्थ है कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है ऐसे में आप अपने ऊपर ध्यान दीजिए, कार्य-व्यवहार को लेकर सतर्क रहिए. क्योंकि हमारे साथ जो भी होता है वह हमारे ही किए कर्म के आधार का फल होता है.  Dream Science:खुद को रोते देखना अगर आज किसी ने व्यक्ति ने खुद को सपने में रोते देखा है तो इस स्वप्न का फल भी जान लीजिए. दरअसल यह देखने में तो अशुभ होता है, लेकिन इसका फल शुभ मिलता है. सपने में खुद को रोते देखने का अर्थ है कि आपको जल्दी ही कोई अच्छा और शुभ समाचार मिलेगा. कोई लाभ भी मिल सकता है. यह स्वप्न बताता है कि आपके रोने वाले दिन चले गए. Dream Science:सपने में देखा है जलता दिया अगर आपको सपने में दीप जलता हुआ दिखाई दे तो समझ लें कि यह शुभ शुभ संकेत है. इससे आपकी उम्र बढ़ती है. इसके अलावा यह भी मान लें कि आपकी किस्‍मत भी चमकने वाली है.अगर आपको कोई ऐसा सपना आता है जिसमें आग की वजह से आपके कपड़े जल रहे हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आपको कोई महंगा गिफ्ट मिलने जा रहा है. शायद कोई खास व्यक्ति आपको महंगे कपड़े गिफ्ट करने जा रहा है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 09/09/2024

Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 9 सितम्बर 2024⛅दिन – सोमवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – षष्ठी रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात सप्तमी⛅नक्षत्र – विशाखा शाम 06:04 तक तत्पश्चात अनुराधा⛅योग – वैधृति रात्रि 12:33 सितम्बर 10 तक तत्पश्चात विष्कम्भ⛅राहु काल – प्रातः 07:57 से प्रातः 09:31 तक⛅सूर्योदय – 06:24⛅सूर्यास्त – 06:49 ⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक⛅ अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से दोपहर 01:01 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:14 सितम्बर 10 से रात्रि 01:00 सितम्बर 10 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – स्कन्द षष्ठी, सर्वार्थ सिद्धि योग (शाम 06:04 से प्रातः 06:25 सितम्बर 10 तक)⛅विशेष – षष्ठी को नीम-भक्षण (पत्ती फल खाने या दातुन मुंह में डालने) से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹ब्रह्मचर्य : शरीर का तीसरा उपस्तंभ🔹 🔸शरीर, मन, बुद्धि व इन्द्रियो को आहार से पुष्टि, निद्रा, मन, बुद्धि व इऩ्द्रियों को आहार से पुष्टि, निद्रा से विश्रांति व ब्रह्मचर्य से बल की प्राप्ति होती है । ब्रह्मचर्य परं बलम् । ब्रह्मचर्य का अर्थः Aaj Ka Panchang 🔸‘सर्व अवस्थाओं में मन, वचन और कर्म तीनों से मैथुन का सदैव त्याग हो, उसे ब्रह्मचर्य कहते हैं ।’ (याज्ञवल्क्य संहिता) 👉 ब्रह्मचर्य से शरीर को धारण करने वाली सप्तम धातु शुक्र की रक्षा करती है । शुक्र सम्पन्न व्यक्ति स्वस्थ, बलवान, बुद्धिमान व दीर्घायुषी होते हैं । 👉 ब्रह्मचर्य से व्यक्ति कुशाग्र व निर्मल बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति, दृढ़ निश्चय, धैर्य, समझ व सद्विचारों से सम्पन्न तथा आनंदवान होते हैं । 👉 वृद्धावस्था तक उनकी सभी इन्द्रियाँ, दाँत, केश व दृष्टि सुदृढ़ रहती है । रोग सहसा उनके पास नहीं आते । क्वचित् आ भी जायें तो अल्प उपचारों से शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं । 🌹 भगवान धन्वंतरि ने ब्रह्मचर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा हैः 🔸‘अकाल मृत्यु, अकाल वृद्धत्व, दुःख, रोग आदि का नाश करने के सभी उपायों में ब्रह्मचर्य का पालन सर्वश्रेष्ठ उपाय है । यह अमृत के समान सभी सुखों का मूल है यह मैं सत्य कहता हूँ ।’ 🔸जैसे दही में समाविष्ट मक्खन का अंश मंथन प्रक्रिया से दही से अलग हो जाता है, वैसे ही शरीर के प्रत्येक कण में समाहित सप्त धातुओं का सारस्वरूप परमोत्कृष्ट ओज मैथुन प्रक्रिया से शरीर से अलग हो जाता है । ओजक्षय से व्यक्ति असार, दुर्बल, रोगग्रस्त, दुःखी, भयभीत, क्रोधी व चिंतित होता है । Aaj Ka Panchang 🔹शुक्रक्षय के लक्षण (चरक संहिता)🔹 🔸शुक्र के क्षय होने पर व्यक्ति में दुर्बलता, मुख का सूखना, शरीर में पीलापन, शरीर व इन्द्रियों में शिथिलता (अकार्यक्षमता), अल्प श्रम से थकावट व नपुंसकता ये लक्षण उत्पन्न होते हैं । 🔹अति मैथुन से होने वाली व्याधियाँ🔹 🔸ज्वर (बुखार), श्वास, खाँसी, क्षयरोग, पाण्डू, दुर्बलता, उदरशूल व आक्षेपक (Convulsions- मस्तिष्क के असंतुलन से आनेवाली खेंच) आदि । 🔸 ब्रह्मचर्य रक्षा के उपाय 🔸 Aaj Ka Panchang 🔹 ब्रह्मचर्य-पालन का दृढ़ शुभसंकल्प, पवित्र, सादा रहन-सहन, सात्त्विक, ताजा अल्पाहार, शुद्ध वायु-सेवन, सूर्यस्नान, व्रत-उपवास, योगासन, प्राणायाम, ॐकार का दीर्घ उच्चारण, ‘ॐ अर्यामायै नमः’ मंत्र का पावन जप, शास्त्राध्ययन, सतत श्रेष्ठ कार्यों में रत रहना, सयंमी व सदाचारी व्यक्तियों का संग, रात को जल्दी सोकर ब्राह्ममुहूर्त में उठना, प्रातः शीतल जल से स्नान, प्रातः-सांय शीतल जल से जननेन्द्रिय-स्नान, कौपीन धारण, निर्व्यसनता, कुदृश्य-कुश्रवण-कुसंगति का त्याग, पुरुषों के लिए परस्त्री के प्रति मातृभाव, स्त्रियों के लिए परपुरुष के प्रति पितृ या भ्रातृ भाव – इन उपायों से ब्रह्मचर्य की रक्षा होती है । Aaj Ka Panchang 🔸 स्त्रियों के लिए परपुरुष के साथ एकांत में बैठना, गुप्त वार्तालाप करना, स्वच्छंदता से घूमना, भड़कीले वस्त्र पहनना, कामोद्दीपक श्रृंगार करके घूमना – ये ब्रह्मचर्य पालन में बाधक हैं । जितना धर्ममय, परोपकार-परायण व साधनामय जीवन, उतनी ही देहासक्ति क्षीण होने से ब्रह्मचर्य का पालन सहज-स्वाभाविक रूप से हो जाता है । नैष्ठिक ब्रह्मचर्य आत्मानुभूति में परम आवश्यक है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang (English Mai) 9/09/2024 ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Vishakha till 06:04 pm and then Anuradha ⛅Yoga – Vaidhriti till 12:33 pm on September 10 and then Vishkambh ⛅Rahu Kaal – 07:57 am to 09:31 am ⛅Sunrise – 06:24 ⛅Sunset – 06:49 ⛅Disha Shool – East direction In⛅Brahma Muhurta – from 04:52 to 05:38 in the morning ⛅ Abhijeet Muhurta – from 12:12 in the afternoon to 01:01 in the afternoon⛅ Nishita Muhurta – from 12:14 in the night of September 10 to 01:00 in the night of September 10⛅ Vrat festival details – Skanda Shashthi, Sarvartha Siddhi Yoga (from 06:04 PM to 06:25 AM on September 10)⛅Special – By consuming neem (eating leaves and fruits or putting toothpicks in mouth) on Shashthi, one gets lower births. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 🔹Celibacy: The third pillar of the body🔹 🔸The body, mind, intellect and senses are strengthened by food, sleep, the mind, intellect and senses are strengthened by food, rest by sleep and strength by celibacy. Is achieved. Celibacy is the ultimate blessing. Meaning of celibacy: 🔸 ‘Always giving up sexual intercourse through mind, words and actions in all situations is called celibacy.’ (Yagyavalkya Samhita) 👉 Venus, the seventh metal that sustains the body, protects from celibacy. People blessed with Venus are healthy, strong, intelligent and long lived. 👉 Brahmacharya makes a person sharp and clear intellect, has a sharp memory, strong determination, patience, understanding and good thoughts and is happy. 👉 All their senses, teeth, hair and eyesight remain strong till old age. Diseases do not come to them suddenly. Even if they get infected, they get cured soon with simple treatment. 🌹 Lord Dhanvantri has described the glory of celibacy and said: 🔸’Of all the measures to destroy premature death, premature old age, sorrow, disease etc., following celibacy is the best. This is the best solution. It is like nectar and is the root of all happiness. I say this truthfully.’ 🔸Just as the butter present in curd gets separated from curd by churning, similarly the essence of the seven metals is present in every particle of the body. The supreme Ojas gets separated from the body through the process

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Dream Science: सपने में मेंढक देखना किस बात का है संकेत, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Dream Science:सपने में मेंढक देखना एक आम अनुभव है, जिसका विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग अर्थ निकाला जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, मेंढक के सपने आपके जागृत जीवन की कई स्थितियों को दर्शा सकते हैं। Dream Scienceसोने के बाद हमारा मन काल्पनिक चीजों को देखने लगता है, क्यों कि इस दौरान हमारा मन हमारे काबू में नहीं होता है. ऐसे में रात को सोने के बाद हमें न जाने कैसे-कैसे सपने आ जाते हैं, जिसका शायद असलियत में होने ना मुमकिन हो सकता है. Sapne Me Frog Dekhna सपने में मेंढक देखना  क्या आप इस बात को जानते हैं कि क्या सोने के बाद देखे गए सपनों का हमारे वास्तव जीवन से लेना देना होता है. स्वप्न शास्त्र में माना जाता है कि सपनों का अपना अर्थ होता है. ये भविष्य में होने वाली घटनाओं को लेकर संकेत देते हैं. ऐसे ही अगर आपने भी सपने में मेंढक (Frog) को देखा है, तो क्या ये शुभ साकेत है या फिर अशुभ? आइए जानते हैं इस सपने का क्या अर्थ होता है. Swapna Shastra: सपनों में दिखाई देने वाली ये 11 घटनाएं मानी जाती है शुभ Dream Science:माना जाता है शुभ अगर आपने सपने में  मेंढक देखा है तो यह सपना आपके लिए शुभ माना जाता है. स्वप्न शास्त्र की जानकारी के मुताबिक सपने में मेंढक देखने का अर्थ होता है कि आपके जीवन में नई उर्जा और उत्साह का संचार होने वाला है.Dream Science इसके अलावा सपने में मेंढक को टर्रते हुए सुनना अक्सर अच्छी खबर, खुशी, या किसी महत्वपूर्ण घटना की सूचना देता है. स्वप्न शास्त्र की जानकारी के मुताबिक अगर आपने सपने में मेंढक को कूदते-छलांग लगाते हुए देखा है, तो इसका अर्थ होता है कि जीवन में आपको आगे बढ़ने के लिए दर्शाता है. इसके अलावा जीवन में बदलावों को और नई चुनौती का सामना करने को दर्शाता है. बता दें कि अगर आपने सपने में मेंढक का झुंड देखा है, तो यह आपके जीवन में किसी छोटे से विषय को लेकर उथल-पुथल होने का संकेत देता है.  Dream Science सपने में मेंढक देखने के कुछ सामान्य अर्थ सपने में मेंढक के साथ जुड़े अन्य कारक: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् – Shri Rinamochanamahaganapati Stotram

श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्रम् एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसका पाठ ऋण मुक्ति और आर्थिक संकटों से उबरने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र भगवान गणेश को समर्पित है, जो सभी विघ्नों और समस्याओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से ऋणों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। अस्य श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः,अनुष्टुप्छन्दः, श्रीऋणमोचक महागणपतिर्देवता ।मम ऋणमोचनमहागणपतिप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैःक्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम् ।दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रंध्यायेत् शान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम् ॥स्मरामि देव देवेशं वक्रतुण्डं महाबलम् ।षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ॥ १॥एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम् ।एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ २॥महागणपतिं देवं महासत्वं महाबलम् ।महाविघ्नहरं शम्भोः नमामि ऋणमुक्तये ॥ ३॥कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम् ।कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ ४॥रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम् ।रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ५॥पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम् ।पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ६॥धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम् ।होम धूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ७॥भालनेत्रं भालचन्द्रं पाशाङ्कुशधरं विभुम् ।चामरालङ्कृतं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ८॥इदं त्वृणहरं स्तोत्रं सन्ध्यायां यः पठेन्नरः ।षण्मासाभ्यन्तरेणैव ऋणमुक्तो भविष्यति ॥ ९॥इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।ऋणहरस्तोत्रम् ऋणमोचन

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ऋणहरगणेशस्तोत्रम् – RiNaharagaNeshastotram

ऋणहरगणेशस्तोत्रम् एक विशेष स्तोत्र है, जो गणपति जी की कृपा से ऋण मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और व्यक्ति पर धन-धान्य की कृपा होती है। यह स्तोत्र इस प्रकार है: कैलासपर्वते रम्ये शम्भुं चन्द्रार्धशेखरम् ।षडाम्नायसमायुक्तं पप्रच्छ नगकन्यका ॥ १॥पार्वत्युवाच -देवेश परमेशान सर्वशास्त्रार्थपारग ।उपायं ऋणनाशस्य कृपया वद साम्प्रतम् ॥ २॥श्रीशिवः -सम्यक्पृष्टं त्वया भद्रे लोकानां हितकाम्यया ।तत्सर्वं सम्प्रवक्ष्यामि सावधानावधारय ॥ ३॥ॐ अस्य श्रीऋणहरमहागणपतिस्तोत्रस्य सदाशिव ऋषिः-अनुष्टुप्छन्दः- श्रीऋणहर महागणपतिर्देवता ।ग्लौं बीजम् । गः शक्तिः । गों कीलकम् । मम ऋणनाशने जपेविनियोगः- ॐ गणेश अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ऋणं छिन्धि तर्जनीभ्यांनमः । वरेण्यं मध्यमाभ्यां नमः । हुं अनामिकाभ्यां नमः । नमःकनिष्ठिकाभ्यां नमः । फट् करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । एवंहृदयादिन्यासाः ।ध्यानं -सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम् ।ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम् ॥पञ्चपूजाः ।सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ १॥त्रिपुरस्यवधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ २॥हिरण्यकशिप्वादीनां वधार्ते विष्णुनार्चितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ३॥महिषस्य वधे देव्या गणनाथः प्रपूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ४॥तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ५॥भास्करेण गणेशो हि पूजितश्च स्वसिद्धये।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ६॥शशिना कान्तिवृद्ध्यर्थं पूजितो गणनायकः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ७॥पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ८॥इदं ऋणहरं स्तोत्रं तीव्रदारिद्र्यनाशनम् ।एकवारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं समाहितः ॥ ९॥दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेरसमतां व्रजेत् ।फडन्तोऽयं महामन्त्रः सार्धपञ्चदशाक्षरः ॥ १०॥मन्त्रो यथा-ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट् ।इमं मन्त्रं पठेदन्ते ततश्च शुचिभावनः ॥ ११॥एकविंशति सङ्ख्याभिः पुरश्चरणमीरितम् ।सहस्रावर्तनात्सम्यक् षण्मासं प्रियतां व्रजेत् ॥ १२॥बृहस्पतिसमो ज्ञाने धने धनपतिर्भवेत् ।अस्यैवायुतसङ्ख्याभिः पुरश्चरणमीरितम् ॥ १३॥लक्षमावर्तनात्सम्यग्वाञ्छितं फलमाप्नुयात् ।भूतप्रेतपिशाचानां नाशनं स्मृतिमात्रतः ॥ १४॥इति श्रीकृष्णयामलतन्त्रान्तर्गतं ऋणहरगणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

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श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् -Shri Ashtavinayaka Stotram

स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथ मढे चिन्तामणिस्थेवरे ।लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥इति अष्टविनायकस्तोत्रं सम्पूर्णम् । श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् Shri Ashtavinayaka Stotramआपने श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का उल्लेख किया है।अष्टविनायक गणेश जी के आठ स्वरूपों का एक समूह है, जिनकी पूजा महाराष्ट्र में विशेष रूप से की जाती है। ये आठ स्वरूप हैं:1. मोरेश्वर: पुणे के मोरगांव में स्थित।2. सिद्धिविनायक: मुंबई में स्थित।3. विघ्नेश्वर: महाराष्ट्र के लेणी में स्थित।4. बालाजी विनायक:महाराष्ट्र के कल्याण में स्थित।5. वराद विनायक: महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में स्थित।6. गणेशपुरी: महाराष्ट्र के रायगढ़ में स्थित।7. मांगेश:महाराष्ट्र के गोवा में स्थित।8. छत्रपति: महाराष्ट्र के रायगढ़ में स्थित।अष्टविनायक स्तोत्रम् इन आठों स्वरूपों की स्तुति करने वाला एक मंत्र है। यह स्तोत्र भक्तों को इन देवताओं की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में सफलता पाने में मदद करता है। स्तोत्र का महत्वविघ्न निवारण:यह स्तोत्र जीवन में आने वाले सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करने में मदद करता है।सफलता: यह स्तोत्र भक्तों को अपने जीवन में सफलता दिलाता है।ज्ञान:यह स्तोत्र भक्तों को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है।समृद्धि:यह स्तोत्र भक्तों को धन और समृद्धि प्रदान करता है।स्तोत् का पाठ कैसे करेंआप इस स्तोत्र का पाठ किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन इसे सुबह के समय उठकर स्नान करने के बाद करना अधिक फलदायी होता है।

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