Ath Chaurasi Siddh Chalisa:अथ चौरासी सिद्ध चालीसा – गोरखनाथ मठ

Ath Chaurasi Siddh Chalisa:अथ चौरासी सिद्ध चालीसा: गोरखनाथ मठ की शक्तिशाली स्तुति Ath Chaurasi Siddh Chalisa:अथ चौरासी सिद्ध चालीसा एक अत्यंत प्रभावशाली और पवित्र स्तुति है जो गोरखनाथ मठ से जुड़ी हुई है। इस चालीसा में 84 सिद्धों की महिमा का वर्णन किया गया है Ath Chaurasi Siddh Chalisa और माना जाता है कि इसका नियमित जाप करने से कई तरह के लाभ मिलते हैं। Ath Chaurasi Siddh Chalisa:चौरासी सिद्ध कौन हैं? चौरासी सिद्ध योगी और सिद्ध पुरुष थे जिन्होंने अपने तपस्या और योग साधना के बल पर सिद्धि प्राप्त की थी।Ath Chaurasi Siddh Chalisa इन सिद्धों को भगवान शिव के परम भक्त माना जाता है और इन्हें अनेक चमत्कारी शक्तियां प्राप्त थीं। Ath Chaurasi Siddh Chalisa:अथ चौरासी सिद्ध चालीसा का महत्व Ath Chaurasi Siddh Chalisa:अथ चौरासी सिद्ध चालीसा का जाप अथ चौरासी सिद्ध चालीसा का जाप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। Ath Chaurasi Siddh Chalisa इसे एकाग्रचित होकर और मन में चौरासी सिद्धों की छवि लेकर जाप करना चाहिए। Ath Chaurasi Siddh Chalisa:गोरखनाथ मठ का महत्व गोरखनाथ मठ नाथ सम्प्रदाय का एक प्रमुख मठ है। इस मठ को गुरु गोरखनाथ ने स्थापित किया था। Ath Chaurasi Siddh Chalisa यह मठ योग, तंत्र और अध्यात्म के केंद्र के रूप में जाना जाता है। निष्कर्ष अथ चौरासी सिद्ध चालीसा एक अत्यंत शक्तिशाली और पवित्र स्तुति है। इसका नियमित जाप करने से भक्तों को कई तरह के लाभ मिलते हैं। यदि आप आध्यात्मिक विकास करना चाहते हैं या जीवन में आ रही समस्याओं से छुटकारा पाना चाहते हैं, तो आप अथ चौरासी सिद्ध चालीसा का जाप कर सकते हैं। Ath Chaurasi Siddh Chalisa:अथ चौरासी सिद्ध चालीसा – गोरखनाथ मठ दोहा –श्री गुरु गणनायक सिमर,शारदा का आधार । कहूँ सुयश श्रीनाथ का,निज मति के अनुसार । श्री गुरु गोरक्षनाथ के चरणों में आदेश ।जिनके योग प्रताप को ,जाने सकल नरेश । चौपाईजय श्रीनाथ निरंजन स्वामी,घट घट के तुम अन्तर्यामी । दीन दयालु दया के सागर,सप्तद्वीप नवखण्ड उजागर । आदि पुरुष अद्वैत निरंजन,निर्विकल्प निर्भय दुःख भंजन । अजर अमर अविचल अविनाशी,ऋद्धि सिद्धि चरणों की दासी । बाल यती ज्ञानी सुखकारी,श्री गुरुनाथ परम हितकारी । रूप अनेक जगत में धारे,भगत जनों के संकट टारे । सुमिरण चौरंगी जब कीन्हा,हुये प्रसन्न अमर पद दीन्हा । सिद्धों के सिरताज मनावो,नव नाथों के नाथ कहावो । जिनका नाम लिये भव जाल,आवागमन मिटे तत्काल । आदि नाथ मत्स्येन्द्र पीर,घोरम नाथ धुन्धली वीर । कपिल मुनि चर्पट कण्डेरी,नीम नाथ पारस चंगेरी । परशुराम जमदग्नी नन्दन,रावण मार राम रघुनन्दन । कंसादिक असुरन दलहारी,वासुदेव अर्जुन धनुधारी । अचलेश्वर लक्ष्मण बल बीर,बलदाई हलधर यदुवीर । सारंग नाथ पीर सरसाई,तुङ़्गनाथ बद्री बलदाई । भूतनाथ धारीपा गोरा,बटुकनाथ भैरो बल जोरा । वामदेव गौतम गंगाई,गंगनाथ घोरी समझाई । रतन नाथ रण जीतन हारा,यवन जीत काबुल कन्धारा । नाग नाथ नाहर रमताई,बनखंडी सागर नन्दाई । बंकनाथ कंथड़ सिद्ध रावल,कानीपा निरीपा चन्द्रावल । गोपीचन्द भर्तृहरी भूप,साधे योग लखे निज रूप । खेचर भूचर बाल गुन्दाई,धर्म नाथ कपली कनकाई । सिद्धनाथ सोमेश्वर चण्डी,भुसकाई सुन्दर बहुदण्डी । अजयपाल शुकदेव व्यास,नासकेतु नारद सुख रास । सनत्कुमार भरत नहीं निंद्रा,सनकादिक शारद सुर इन्द्रा । भंवरनाथ आदि सिद्ध बाला,ज्यवन नाथ माणिक मतवाला । सिद्ध गरीब चंचल चन्दराई,नीमनाथ आगर अमराई । त्रिपुरारी त्र्यम्बक दुःख भंजन,मंजुनाथ सेवक मन रंजन । भावनाथ भरम भयहारी,उदयनाथ मंगल सुखकारी । सिद्ध जालन्धर मूंगी पावे,जाकी गति मति लखी न जावे । ओघड़देव कुबेर भण्डारी,सहजई सिद्धनाथ केदारी । कोटि अनन्त योगेश्वर राजा,छोड़े भोग योग के काजा । योग युक्ति करके भरपूर,मोह माया से हो गये दूर । योग युक्ति कर कुन्ती माई,पैदा किये पांचों बलदाई । धर्म अवतार युधिष्ठिर देवा,अर्जुन भीम नकुल सहदेवा । योग युक्ति पार्थ हिय धारा,दुर्योधन दल सहित संहारा । योग युक्ति पंचाली जानी,दुःशासन से यह प्रण ठानी । पावूं रक्त न जब लग तेरा,खुला रहे यह सीस मेरा । योग युक्ति सीता उद्धारी,दशकन्धर से गिरा उच्चारी । पापी तेरा वंश मिटाऊं,स्वर्ण लङ़्क विध्वंस कराऊँ । श्री रामचन्द्र को यश दिलाऊँ,तो मैं सीता सती कहाऊँं । योग युक्ति अनुसूया कीनों,त्रिभुवन नाथ साथ रस भीनों । देवदत्त अवधूत निरंजन,प्रगट भये आप जग वन्दन । योग युक्ति मैनावती कीन्ही,उत्तम गति पुत्र को दीनी । योग युक्ति की बंछल मातू,गूंगा जाने जगत विख्यातू । योग युक्ति मीरा ने पाई,गढ़ चित्तौड़ में फिरी दुहाई । योग युक्ति अहिल्या जानी,तीन लोक में चली कहानी । सावित्री सरसुती भवानी,पारबती शङ़्कर सनमानी । सिंह भवानी मनसा माई,भद्र कालिका सहजा बाई । कामरू देश कामाक्षा योगन,दक्षिण में तुलजा रस भोगन । उत्तर देश शारदा रानी,पूरब में पाटन जग मानी । पश्चिम में हिंगलाज विराजे,भैरव नाद शंखध्वनि बाजे । नव कोटिक दुर्गा महारानी,रूप अनेक वेद नहिं जानी । काल रूप धर दैत्य संहारे,रक्त बीज रण खेत पछारे । मैं योगन जग उत्पति करती,पालन करती संहृति करती । जती सती की रक्षा करनी,मार दुष्ट दल खप्पर भरनी । मैं श्रीनाथ निरंजन दासी,जिनको ध्यावे सिद्ध चौरासी । योग युक्ति विरचे ब्रह्मण्डा,योग युक्ति थापे नवखण्डा । योग युक्ति तप तपें महेशा,योग युक्ति धर धरे हैं शेषा । योग युक्ति विष्णू तन धारे,योग युक्ति असुरन दल मारे । योग युक्ति गजआनन जाने,आदि देव तिरलोकी माने । योग युक्ति करके बलवान,योग युक्ति करके बुद्धिमान । योग युक्ति कर पावे राज,योग युक्ति कर सुधरे काज । योग युक्ति योगीश्वर जाने,जनकादिक सनकादिक माने । योग युक्ति मुक्ती का द्वारा,योग युक्ति बिन नहिं निस्तारा । योग युक्ति जाके मन भावे,ताकी महिमा कही न जावे । जो नर पढ़े सिद्ध चालीसा,आदर करें देव तेंतीसा । साधक पाठ पढ़े नित जोई,मनोकामना पूरण होई । धूप दीप नैवेद्य मिठाई,रोट लंगोट को भोग लगाई । दोहा –रतन अमोलक जगत में,योग युक्ति है मीत । नर से नारायण बने,अटल योग की रीत । योग विहंगम पंथ को,आदि नाथ शिव कीन्ह । शिष्य प्रशिष्य परम्परा,सब मानव को दीन्ह । प्रातः काल स्नान कर,सिद्ध चालीसा ज्ञान ।

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Khatu Shyam Chalisa Khatu Dham Sikar:खाटू श्याम चालीसा, खाटू धाम सीकर

Khatu Shyam:भक्तों के बीच अनेक खाटू चालीसा प्रसिद्ध हैं, इनमे से सीकर के खाटू श्याम मंदिर में गाए जाने वाला श्री श्याम चालीसा प्रमुख है। खाटू श्याम चालीसा के लिरिक्स नीचे पढ़े जा सकते हैं। Khatu Shyam:खाटू श्याम चालीसा: भक्ति और आस्था का प्रतीक Khatu Shyam:खाटू श्याम चालीसा हिंदू धर्म में भगवान श्याम के प्रति भक्ति और श्रद्धा का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। यह चालीसा विशेष रूप से राजस्थान के खाटू श्याम जी के मंदिर से जुड़ी हुई है। भगवान श्याम को कृष्ण का अवतार माना जाता है और उन्हें युवा, आकर्षक और करुणामय देवता के रूप में पूजा जाता है। Khatu Shyam:खाटू श्याम चालीसा का महत्व खाटू श्याम चालीसा का जाप भक्तों के जीवन में कई तरह के लाभकारी प्रभाव डालता है।Khatu Shyam माना जाता है कि इसका नियमित जाप करने से: Khatu Shyam:खाटू श्याम चालीसा का अर्थ खाटू श्याम चालीसा में भगवान श्याम के विभिन्न रूपों और लीलाओं का वर्णन किया गया है। भक्त भगवान श्याम से अपनी समस्याओं का समाधान और आशीर्वाद मांगते हैं। Khatu Shyam:खाटू श्याम जी का मंदिर खाटू श्याम जी का मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित है। यह मंदिर भगवान श्याम को समर्पित है और देश भर से लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। Khatu Shyam:खाटू श्याम चालीसा का जाप खाटू श्याम चालीसा का जाप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। इसे एकाग्रचित होकर और मन में भगवान श्याम की छवि लेकर जाप करना चाहिए। निष्कर्ष खाटू श्याम चालीसा भगवान श्याम के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है। इसका नियमित जाप करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। Khatu Shyam Chalisa Khatu Dham Sikar:खाटू श्याम चालीसा, खाटू धाम सीकर ॥ दोहा॥श्री गुरु पदरज शीशधर प्रथम सुमिरू गणेश ॥ध्यान शारदा ह्रदयधर भजुँ भवानी महेश ॥ चरण शरण विप्लव पड़े हनुमत हरे कलेश ।श्याम चालीसा भजत हुँ जयति खाटू नरेश ॥ ॥ चौपाई ॥वन्दहुँ श्याम प्रभु दुःख भंजन ।विपत विमोचन कष्ट निकंदन ॥ सांवल रूप मदन छविहारी ।केशर तिलक भाल दुतिकारी ॥ मौर मुकुट केसरिया बागा ।गल वैजयंति चित अनुरागा ॥ नील अश्व मौरछडी प्यारी ।करतल त्रय बाण दुःख हारी ॥4 सूर्यवर्च वैष्णव अवतारे ।सुर मुनि नर जन जयति पुकारे ॥ पिता घटोत्कच मोर्वी माता ।पाण्डव वंशदीप सुखदाता ॥ बर्बर केश स्वरूप अनूपा ।बर्बरीक अतुलित बल भूपा ॥ कृष्ण तुम्हे सुह्रदय पुकारे ।नारद मुनि मुदित हो निहारे ॥8 मौर्वे पूछत कर अभिवन्दन ।जीवन लक्ष्य कहो यदुनन्दन ॥ गुप्त क्षेत्र देवी अराधना ।दुष्ट दमन कर साधु साधना ॥ बर्बरीक बाल ब्रह्मचारी ।कृष्ण वचन हर्ष शिरोधारी ॥ तप कर सिद्ध देवियाँ कीन्हा ।प्रबल तेज अथाह बल लीन्हा ॥12 यज्ञ करे विजय विप्र सुजाना ।रक्षा बर्बरीक करे प्राना ॥ नव कोटि दैत्य पलाशि मारे ।नागलोक वासुकि भय हारे ॥ सिद्ध हुआ चँडी अनुष्ठाना ।बर्बरीक बलनिधि जग जाना ॥ वीर मोर्वेय निजबल परखन ।चले महाभारत रण देखन ॥16 माँगत वचन माँ मोर्वि अम्बा ।पराजित प्रति पाद अवलम्बा ॥ आगे मिले माधव मुरारे ।पूछे वीर क्युँ समर पधारे ॥ रण देखन अभिलाषा भारी ।हारे का सदैव हितकारी ॥ तीर एक तीहुँ लोक हिलाये ।बल परख श्री कृष्ण सँकुचाये ॥20 यदुपति ने माया से जाना ।पार अपार वीर को पाना ॥ धर्म युद्ध की देत दुहाई ।माँगत शीश दान यदुराई ॥ मनसा होगी पूर्ण तिहारी ।रण देखोगे कहे मुरारी ॥ शीश दान बर्बरीक दीन्हा ।अमृत बर्षा सुरग मुनि कीन्हा ॥24 देवी शीश अमृत से सींचत ।केशव धरे शिखर जहँ पर्वत ॥ जब तक नभ मण्डल मे तारे ।सुर मुनि जन पूजेंगे सारे ॥ दिव्य शीश मुद मंगल मूला ।भक्तन हेतु सदा अनुकूला ॥ रण विजयी पाण्डव गर्वाये ।बर्बरीक तब न्याय सुनाये ॥28 सर काटे था चक्र सुदर्शन ।रणचण्डी करती लहू भक्षन ॥ न्याय सुनत हर्षित जन सारे ।जग में गूँजे जय जयकारे ॥ श्याम नाम घनश्याम दीन्हा ।अजर अमर अविनाशी कीन्हा ॥ जन हित प्रकटे खाटू धामा ।लख दाता दानी प्रभु श्यामा ॥32 खाटू धाम मौक्ष का द्वारा ।श्याम कुण्ड बहे अमृत धारा ॥ शुदी द्वादशी फाल्गुण मेला ।खाटू धाम सजे अलबेला ॥ एकादशी व्रत ज्योत द्वादशी ।सबल काय परलोक सुधरशी ॥ खीर चूरमा भोग लगत हैं ।दुःख दरिद्र कलेश कटत हैं ॥36 श्याम बहादुर सांवल ध्याये ।आलु सिँह ह्रदय श्याम बसाये ॥ मोहन मनोज विप्लव भाँखे ।श्याम धणी म्हारी पत राखे ॥ नित प्रति जो चालीसा गावे ।सकल साध सुख वैभव पावे ॥ श्याम नाम सम सुख जग नाहीं ।भव भय बन्ध कटत पल माहीं ॥40 ॥ दोहा॥त्रिबाण दे त्रिदोष मुक्ति दर्श दे आत्म ज्ञान ।चालीसा दे प्रभु भुक्ति सुमिरण दे कल्यान ॥ खाटू नगरी धन्य हैं श्याम नाम जयगान ।अगम अगोचर श्याम हैं विरदहिं स्कन्द पुरान ॥

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Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा

Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा: धन के देवता की स्तुति Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा हिंदू धर्म में धन के देवता कुबेर की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। कुबेर को धन का देवता माना जाता है और उनका आशीर्वाद धन-दौलत और समृद्धि लाने वाला माना जाता है। Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा का महत्व Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा का अर्थ Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा में कुबेर के विभिन्न रूपों और उनके महान कार्यों का वर्णन किया गया है। इसमें भक्त कुबेर से धन, वैभव और समृद्धि की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा का जाप कुबेर चालीसा का जाप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। Kuber Chalisa इसे एकाग्रचित होकर और मन में कुबेर की छवि लेकर जाप करना चाहिए। Kuber Chalisa:कुबेर चालीसा ॥ दोहा ॥जैसे अटल हिमालय,और जैसे अडिग सुमेर ।ऐसे ही स्वर्ग द्वार पे,अविचल खडे कुबेर ॥ विघ्न हरण मंगल करण,सुनो शरणागत की टेर ।भक्त हेतु वितरण करो,धन माया के ढेर ॥ ॥ चौपाई ॥जै जै जै श्री कुबेर भण्डारी ।धन माया के तुम अधिकारी ॥ तप तेज पुंज निर्भय भय हारी ।पवन वेग सम सम तनु बलधारी ॥ स्वर्ग द्वार की करें पहरे दारी ।सेवक इंद्र देव के आज्ञाकारी ॥ यक्ष यक्षणी की है सेना भारी ।सेनापति बने युद्ध में धनुधारी ॥4॥ महा योद्धा बन शस्त्र धारैं ।युद्ध करैं शत्रु को मारैं ॥ सदा विजयी कभी ना हारैं ।भगत जनों के संकट टारैं ॥ प्रपितामह हैं स्वयं विधाता ।पुलिस्ता वंश के जन्म विख्याता ॥ विश्रवा पिता इडविडा जी माता ।विभीषण भगत आपके भ्राता ॥8॥ शिव चरणों में जब ध्यान लगाया ।घोर तपस्या करी तन को सुखाया ॥ शिव वरदान मिले देवत्य पाया ।अमृत पान करी अमर हुई काया ॥ धर्म ध्वजा सदा लिए हाथ में ।देवी देवता सब फिरैं साथ में ॥ पीताम्बर वस्त्र पहने गात में ।बल शक्ति पूरी यक्ष जात में ॥12॥ स्वर्ण सिंहासन आप विराजैं ।त्रिशूल गदा हाथ में साजैं ॥ शंख मृदंग नगारे बाजैं ।गंधर्व राग मधुर स्वर गाजैं ॥ चौंसठ योगनी मंगल गावैं ।ऋद्धि-सिद्धि नित भोग लगावैं ॥ दास दासनी सिर छत्र फिरावैं ।यक्ष यक्षणी मिल चंवर ढूलावैं ॥16॥ ऋषियों में जैसे परशुराम बली हैं ।देवन्ह में जैसे हनुमान बली हैं ॥ पुरुषों में जैसे भीम बली हैं ।यक्षों में ऐसे ही कुबेर बली हैं ॥ भगतों में जैसे प्रहलाद बड़े हैं ।पक्षियों में जैसे गरुड़ बड़े हैं ॥ नागों में जैसे शेष बड़े हैं ।वैसे ही भगत कुबेर बड़े हैं ॥20॥ कांधे धनुष हाथ में भाला ।गले फूलों की पहनी माला ॥ स्वर्ण मुकुट अरु देह विशाला ।दूर-दूर तक होए उजाला ॥ कुबेर देव को जो मन में धारे ।सदा विजय हो कभी न हारे ॥ बिगड़े काम बन जाएं सारे ।अन्न धन के रहें भरे भण्डारे ॥24॥ कुबेर गरीब को आप उभारैं ।कुबेर कर्ज को शीघ्र उतारैं ॥ कुबेर भगत के संकट टारैं ।कुबेर शत्रु को क्षण में मारैं ॥ शीघ्र धनी जो होना चाहे ।क्युं नहीं यक्ष कुबेर मनाएं ॥ यह पाठ जो पढ़े पढ़ाएं ।दिन दुगना व्यापार बढ़ाएं ॥28॥ भूत प्रेत को कुबेर भगावैं ।अड़े काम को कुबेर बनावैं ॥ रोग शोक को कुबेर नशावैं ।कलंक कोढ़ को कुबेर हटावैं ॥ कुबेर चढ़े को और चढ़ादे ।कुबेर गिरे को पुन: उठा दे ॥ कुबेर भाग्य को तुरंत जगा दे ।कुबेर भूले को राह बता दे ॥32॥ प्यासे की प्यास कुबेर बुझा दे ।भूखे की भूख कुबेर मिटा दे ॥ रोगी का रोग कुबेर घटा दे ।दुखिया का दुख कुबेर छुटा दे ॥ बांझ की गोद कुबेर भरा दे ।कारोबार को कुबेर बढ़ा दे ॥ कारागार से कुबेर छुड़ा दे ।चोर ठगों से कुबेर बचा दे ॥36॥ कोर्ट केस में कुबेर जितावै ।जो कुबेर को मन में ध्यावै ॥ चुनाव में जीत कुबेर करावैं ।मंत्री पद पर कुबेर बिठावैं ॥ पाठ करे जो नित मन लाई ।उसकी कला हो सदा सवाई ॥ जिसपे प्रसन्न कुबेर की माई ।उसका जीवन चले सुखदाई ॥40॥ जो कुबेर का पाठ करावै ।उसका बेड़ा पार लगावै ॥ उजड़े घर को पुन: बसावै ।शत्रु को भी मित्र बनावै ॥ सहस्त्र पुस्तक जो दान कराई ।सब सुख भोद पदार्थ पाई ॥ प्राण त्याग कर स्वर्ग में जाई ।मानस परिवार कुबेर कीर्ति गाई ॥44॥ ॥ दोहा ॥शिव भक्तों में अग्रणी,श्री यक्षराज कुबेर ।हृदय में ज्ञान प्रकाश भर,कर दो दूर अंधेर ॥ कर दो दूर अंधेर अब,जरा करो ना देर ।शरण पड़ा हूं आपकी,दया की दृष्टि फेर ॥ नित्त नेम कर प्रातः ही,पाठ करौं चालीसा ।तुम मेरी मनोकामना,पूर्ण करो जगदीश ॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु,संवत चौसठ जान ।अस्तुति चालीसा शिवहि,पूर्ण कीन कल्याण ॥

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Annapurna Chalisa:अन्नपूर्णा चालीसा

Annapurna Chalisa:अन्नपूर्णा चालीसा: भक्ति और भोजन की देवी का स्तुति Annapurna Chalisa:अन्नपूर्णा चालीसा हिंदू धर्म में माता अन्नपूर्णा की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। माता अन्नपूर्णा को अन्न की देवी माना जाता है और उनका आशीर्वाद घर में सुख-समृद्धि और अन्न का अभाव न होने का कारण माना जाता है। Annapurna Chalisa:अन्नपूर्णा चालीसा का महत्व Annapurna Chalisa:अन्नपूर्णा चालीसा का अर्थ अन्नपूर्णा चालीसा में माता अन्नपूर्णा के विभिन्न रूपों और उनके महान कार्यों का वर्णन किया गया है। इसमें भक्त माता से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मोक्ष की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। Annapurna Chalisa:अन्नपूर्णा चालीसा का जाप अन्नपूर्णा चालीसा का जाप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। इसे एकाग्रचित होकर और मन में माता अन्नपूर्णा की छवि लेकर जाप करना चाहिए। Annapurna Chalisa:अन्नपूर्णा चालीसा ॥ माँ अन्नपूर्णा चालीसा ॥॥ दोहा ॥विश्वेश्वर पदपदम की रज निज शीश लगाय ।अन्नपूर्णे, तव सुयश बरनौं कवि मतिलाय । ॥ चौपाई ॥नित्य आनंद करिणी माता,वर अरु अभय भाव प्रख्याता ॥ जय ! सौंदर्य सिंधु जग जननी,अखिल पाप हर भव-भय-हरनी ॥ श्वेत बदन पर श्वेत बसन पुनि,संतन तुव पद सेवत ऋषिमुनि ॥काशी पुराधीश्वरी माता,माहेश्वरी सकल जग त्राता ॥ वृषभारुढ़ नाम रुद्राणी,विश्व विहारिणि जय ! कल्याणी ॥ पतिदेवता सुतीत शिरोमणि,पदवी प्राप्त कीन्ह गिरी नंदिनि ॥ पति विछोह दुःख सहि नहिं पावा,योग अग्नि तब बदन जरावा ॥ देह तजत शिव चरण सनेहू,राखेहु जात हिमगिरि गेहू ॥ प्रकटी गिरिजा नाम धरायो,अति आनंद भवन मँह छायो ॥नारद ने तब तोहिं भरमायहु,ब्याह करन हित पाठ पढ़ायहु ॥ 10 ॥ ब्रहमा वरुण कुबेर गनाये,देवराज आदिक कहि गाये ॥ सब देवन को सुजस बखानी,मति पलटन की मन मँह ठानी ॥ अचल रहीं तुम प्रण पर धन्या,कीहनी सिद्ध हिमाचल कन्या ॥ निज कौ तब नारद घबराये,तब प्रण पूरण मंत्र पढ़ाये ॥ करन हेतु तप तोहिं उपदेशेउ,संत बचन तुम सत्य परेखेहु ॥ गगनगिरा सुनि टरी न टारे,ब्रहां तब तुव पास पधारे ॥ कहेउ पुत्रि वर माँगु अनूपा,देहुँ आज तुव मति अनुरुपा ॥ तुम तप कीन्ह अलौकिक भारी,कष्ट उठायहु अति सुकुमारी ॥ अब संदेह छाँड़ि कछु मोसों,है सौगंध नहीं छल तोसों ॥ करत वेद विद ब्रहमा जानहु,वचन मोर यह सांचा मानहु ॥ 20 ॥ तजि संकोच कहहु निज इच्छा,देहौं मैं मनमानी भिक्षा ॥ सुनि ब्रहमा की मधुरी बानी,मुख सों कछु मुसुकाय भवानी ॥ बोली तुम का कहहु विधाता,तुम तो जगके स्रष्टाधाता ॥ मम कामना गुप्त नहिं तोंसों,कहवावा चाहहु का मोंसों ॥ दक्ष यज्ञ महँ मरती बारा,शंभुनाथ पुनि होहिं हमारा ॥ सो अब मिलहिं मोहिं मनभाये,कहि तथास्तु विधि धाम सिधाये ॥ तब गिरिजा शंकर तव भयऊ,फल कामना संशयो गयऊ ॥चन्द्रकोटि रवि कोटि प्रकाशा,तब आनन महँ करत निवासा ॥ माला पुस्तक अंकुश सोहै,कर मँह अपर पाश मन मोहै ॥ अन्न्पूर्णे ! सदापूर्णे,अज अनवघ अनंत पूर्णे ॥ 30 ॥ कृपा सागरी क्षेमंकरि माँ,भव विभूति आनंद भरी माँ ॥ कमल विलोचन विलसित भाले,देवि कालिके चण्डि कराले ॥ तुम कैलास मांहि है गिरिजा,विलसी आनंद साथ सिंधुजा ॥ स्वर्ग महालक्ष्मी कहलायी,मर्त्य लोक लक्ष्मी पदपायी ॥ विलसी सब मँह सर्व सरुपा,सेवत तोहिं अमर पुर भूपा ॥ जो पढ़िहहिं यह तव चालीसा,फल पाइंहहि शुभ साखी ईसा ॥ प्रात समय जो जन मन लायो,पढ़िहहिं भक्ति सुरुचि अघिकायो ॥ स्त्री कलत्र पति मित्र पुत्र युत,परमैश्रवर्य लाभ लहि अद्भुत ॥ राज विमुख को राज दिवावै,जस तेरो जन सुजस बढ़ावै ॥पाठ महा मुद मंगल दाता,भक्त मनोवांछित निधि पाता ॥ 40 ॥ ॥ दोहा ॥जो यह चालीसा सुभग,पढ़ि नावैंगे माथ ।तिनके कारज सिद्ध सब,साखी काशी नाथ ॥

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Dream interpretation:क्या आपको भी आता है बच्चे के जन्म का सपना? जानें इसका मतलब

Dream interpretation:बच्चे का जन्म से जुड़ा सपना देखना एक गहरी और अर्थपूर्ण घटना मानी जाती है, जिसका मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टिकोण से अलग-अलग महत्व हो सकता है। सपनों में दिखाई देने वाले घटनाक्रम अक्सर हमारी आंतरिक भावनाओं, चिंताओं और आशाओं का प्रतिबिंब होते हैं। बच्चे के जन्म का सपना कई बार सकारात्मक और नए अवसरों का प्रतीक हो सकता है, तो कभी-कभी यह किसी व्यक्तिगत परिवर्तन या नई शुरुआत का संकेत हो सकता है। इस लेख में हम सपने में बच्चे के जन्म का मतलब और इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। 1. नए अवसरों का प्रतीक(Dream interpretation) बच्चे का जन्म जीवन में नई संभावनाओं, परियोजनाओं या अवसरों का संकेत हो सकता है। Dream interpretation जिस तरह से बच्चा जीवन में एक नया अध्याय खोलता है, उसी तरह सपना भी यह बता सकता है कि आपके जीवन में कोई नई शुरुआत हो सकती है। यदि आप किसी नए काम, परियोजना या संबंध के बारे में विचार कर रहे हैं, तो यह सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि यह आपके लिए सही समय है। इस तरह के सपने उन लोगों में आम होते हैं जो किसी बड़े परिवर्तन के कगार पर होते हैं, जैसे करियर में बदलाव, नए व्यवसाय की शुरुआत, या किसी रचनात्मक परियोजना की शुरुआत। यह सपना आपको बताने की कोशिश कर सकता है कि आप इन नई चुनौतियों के लिए तैयार हैं और आपको इन अवसरों को अपनाने के लिए साहस दिखाना चाहिए। 2. नए जीवन का प्रतीक(Dream interpretation) बच्चा स्वयं एक नए जीवन का प्रतीक होता है। जब आप सपने में बच्चे के जन्म को देखते हैं, तो यह दर्शाता है कि आप किसी नए जीवन की शुरुआत की ओर अग्रसर हैं। यह नया जीवन शाब्दिक रूप से एक बच्चे का जन्म हो सकता है, या फिर यह किसी नए अनुभव, नई जिम्मेदारियों या नई व्यक्तिगत पहचान को दर्शा सकता है। यह सपना खासकर उन लोगों के लिए अर्थपूर्ण हो सकता है जो माता-पिता बनने की सोच रहे हैं या गर्भावस्था के बारे में विचार कर रहे हैं। मनोविज्ञान के अनुसार, ऐसे सपने यह भी संकेत दे सकते हैं कि आप अपनी जिंदगी में किसी नए अनुभव के लिए मानसिक रूप से तैयार हो रहे हैं। यह नया अनुभव आपकी व्यक्तिगत, पेशेवर, या आध्यात्मिक यात्रा से जुड़ा हो सकता है। 3. रचनात्मकता और नई परियोजनाएं बच्चे का सपना रचनात्मकता का भी प्रतीक होता है। जिस तरह एक माता-पिता बच्चे को जन्म देते हैं, उसी तरह से हम अपने विचारों और रचनात्मकता को भी जन्म देते हैं। यह सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपकी रचनात्मक क्षमताएं अपने चरम पर हैं और आप कुछ नया बनाने या विकसित करने के लिए तैयार हैं। Dream interpretation यदि आप एक लेखक, कलाकार, या उद्यमी हैं, तो यह सपना आपको प्रेरित कर सकता है कि आप अपनी योजनाओं को साकार करें। 4. जीवन में परिवर्तन का प्रतीक बच्चे का जन्म जीवन में बड़े परिवर्तनों का संकेत भी हो सकता है। यह परिवर्तन मानसिक, भावनात्मक या शारीरिक स्तर पर हो सकता है। यह सपना इस बात की चेतावनी भी हो सकता है कि आपके जीवन में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव आने वाले हैं और आपको उनके लिए तैयार रहना चाहिए। यह परिवर्तन आपके व्यक्तिगत संबंधों, करियर, या आत्म-समझ से संबंधित हो सकते हैं। मनोविश्लेषण के अनुसार, ऐसे सपने यह संकेत भी देते हैं कि व्यक्ति जीवन के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, जहाँ वह अधिक जिम्मेदारियों का सामना करने वाला है। Dream interpretation यह बदलाव कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन यह व्यक्ति के विकास और आत्म-साक्षात्कार के लिए आवश्यक होता है। 5. माँ बनने की इच्छा या चिंता(Dream interpretation) जो महिलाएं माँ बनने की सोच रही होती हैं या गर्भावस्था के बारे में चिंतित होती हैं, उनके लिए बच्चे के जन्म का सपना काफी सामान्य होता है। यह सपना उनकी इच्छाओं, चिंताओं और भावनाओं का प्रतिबिंब हो सकता है। यह सपना इस बात का भी संकेत हो सकता है कि आप माँ बनने के लिए मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार हो रही हैं,Dream interpretation या फिर आप इस बारे में चिंता कर रही हैं कि क्या आप एक अच्छी माँ बन पाएंगी। पुरुषों के मामले में, इस तरह का सपना उनके माता-पिता बनने के अनुभव और उस जिम्मेदारी के बारे में उनकी भावनाओं को दर्शा सकता है। यह उनके अंदर पिता बनने की इच्छा या इस नई भूमिका को निभाने की चुनौती का संकेत हो सकता है। 6. आध्यात्मिक संकेत(Dream interpretation) कई संस्कृतियों में, बच्चे का सपना आध्यात्मिक जागृति या आत्मा की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यह सपना दिखा सकता है कि आप अपनी आध्यात्मिक यात्रा पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर हैं। बच्चा शुद्धता, मासूमियत और नए आरंभ का प्रतीक होता है। ऐसे सपने का मतलब हो सकता है कि आप अपने जीवन में किसी आध्यात्मिक परिवर्तन का अनुभव करने वाले हैं, या फिर आप अपनी पुरानी नकारात्मक आदतों से मुक्ति पाने की कोशिश कर रहे हैं। 7. प्राकृतिक मानसिक प्रक्रिया बच्चे के जन्म का सपना कभी-कभी प्राकृतिक मानसिक प्रक्रिया का भी हिस्सा हो सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो हाल ही में किसी नए अनुभव या घटना से गुजरे हों। मनोविज्ञान में, सपनों को मन की उन इच्छाओं और विचारों के रूप में देखा जाता है जो जागृत अवस्था में हमारे चेतन मन में नहीं आ पाते। Dream interpretation यह सपना भी आपके मन के उन हिस्सों की झलक हो सकता है जिन्हें आप खुद नहीं पहचान पाते हैं। निष्कर्ष बच्चे का जन्म का सपना विभिन्न अर्थों से भरा हो सकता है। यह आपके जीवन में नई शुरुआत, परिवर्तन, जिम्मेदारियों या रचनात्मकता का संकेत हो सकता है। यह सपना आपको यह भी बता सकता है कि आप अपने जीवन में किसी महत्वपूर्ण परिवर्तन के लिए तैयार हो रहे हैं। चाहे यह सपना किसी नए अवसर की ओर इशारा करता हो या किसी आंतरिक परिवर्तन का प्रतीक हो, यह आपके जीवन में एक सकारात्मक संकेत हो सकता है। ऐसे सपने को समझने के लिए आपको अपने जीवन की वर्तमान स्थिति, विचारों और भावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर

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Dhanteras 2024 Date : 29 या 30 अक्टूबर, कब है धनतेरस का पर्व, जानें धनतेरस की सही तारीख, पूजा मुहूर्त और महत्व

Dhanteras 2024 :धनतेरस 2024 की तारीख और शुभ मुहूर्त जानने के लिए यहां जानकारी दी जा रही है। हिंदू धर्म में धनतेरस का विशेष महत्व है, क्योंकि यह त्योहार दीपावली के महोत्सव की शुरुआत करता है। इस दिन भगवान धनवंतरि और देवी लक्ष्मी की पूजा की जाती है। धनतेरस का पर्व धन-संपदा, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है। इस दिन लोग सोने, चांदी, बर्तन और नए सामानों की खरीदारी भी करते हैं। Dhanteras 2024:धनतेरस 2024 की तारीख Dhanteras 2024 :दीपावली का पर्व 5 दिनों का होता है, जिसकी शुरुआत धनतेरस से होती है और भाई दूज को समापन होता है। धनतेरस का पर्व हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाया जाता है। धनतेरस के दिन आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के जनक भगवान धन्वंतरि के साथ माता लक्ष्मी और कुबेर देवता की पूजा अर्चना की जाती है Dhanteras 2024 और इस त्योहार के अगले दिन छोटी दिवाली या नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, भगवान धन्वंतरि की पूजा उपासना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और व्यक्ति ऊर्जावान रहता है।Dhanteras 2024 लेकिन साल 2024 में धनतेरस को लेकर बहुत असमंजस की स्थिति बनी हुई है, कुछ लोगों का कहना है कि धनतेरस का पर्व 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा तो कुछ लोग 30 अक्टूबर को यह पर्व मनाएंगे इसलिए आज हम आपको धनतेरस की सही तिथि के बारे में बताने जा रहे हैं। Dhanteras 2024 ka mahetwa:धनतेरस का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस यानी कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इस वजह से इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी तिथि के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु क अंशावतार माना जाता है। इस शुभ दिन पर भगवान धन्वंतरि के साथ विष्णु प्रिया माता लक्ष्मी, धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान है। भगवान धन्वंतरि जब समुद्र मंथन से प्रकट हुए थे, उनके हाथ में अमृत कलश होने की वजह से इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है। धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू, धनिया आदि खरीदना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि धनतेरस के दिन खरीदारी करने से धन में 13 गुणा वृद्धि होती है। साथ ही इस दिन वाहन और जमीन व प्रॉपर्टी आदि का सौदा भी कर सकते हैं। धनतेरस दो शब्दों से मिलकर बना है, पहला धन और दूसरा तेरस, जिसका अर्थ है कि धन का तेरह गुणा। भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने के कारण इस दिन को वैद्य समाज धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाता है। kab hai Dhanteras 2024 parv:कब है धनतेरस 2024 का पर्व? त्रयोदशी तिथि का आरंभ – 29 अक्टूबर, सुबह 10 बजकर 31 मिनट सेत्रयोदशी तिथि का समापन – 30 अक्टूबर, दोपहर 1 बजकर 15 मिनट तकउदया तिथि के अनुसार, धनतेरस का पर्व दिन मंगलवार 29 अक्टूबर 2024 को मनाया जाएगा। धनतेरस की पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है, भगवान धन्वंतरि की पूजा उपासना करने के साथ साथ दीपदान भी किया जाता है। साथ ही घर के मेन गेट, छत, नल के पास एक एक दीपक भी जलाया जाता है। घर के बाहर भी दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जलाया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। Dhanteras 2024 mai kharidne ka subh muhurat:धनतेरस खरीदारी का शुभ मुहूर्तपहला खरीदारी का मुहूर्त – धनतेरस के दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है, इस योग में खरीदारी करना बहुत शुभ रहेगा। यह योग सुबह 6 बजकर 31 मिनट से अगले दिन तक 10 बजकर 31 मिनट पर रहेगा। इस योग में की गई खरीदारी करने से चीजों में तीन गुणा वृद्धि होती है। दूसरा खरीदारी का मुहूर्त – धनतेरस के दिन अभिजीत मुहूर्त बन रहा है और इस योग में खरीदारी करने से शुभ फल की प्राप्ति होगी। 29 अक्टूबर के दिन 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट के बीच खरीदारी करें। Diwali 2024 Date and Time : दीपावली कब है, जानें धनतेरस, दिवाली, भाई दूज की सही तारीख Dhanteras 2024 puja vidhi:धनतेरस पूजा विधि धनतेरस पर भगवान धनवंतरि, मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। घरों को दीपों से सजाया जाता है, और प्रदोष काल (शाम के समय) में पूजा का विशेष महत्व होता है। यहां धनतेरस की पूजा विधि और कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं: Dhanteras 2024 per kya kharide:क्या खरीदें धनतेरस पर? धनतेरस के दिन नए सामानों की खरीदारी की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस दिन लोग मुख्य रूप से बर्तन, सोना-चांदी और आभूषण खरीदते हैं, लेकिन इसके अलावा भी कई वस्तुएं शुभ मानी जाती हैं: Dhanteras 2024:धनतेरस से जुड़े कुछ विशेष उपाय

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Saraswati Chalisa:सरस्वती चालीसा

Saraswati Chalisa:श्री सरस्वती चालीसा: ज्ञान की देवी की स्तुति Saraswati Chalisa:श्री सरस्वती चालीसा ज्ञान, संगीत और कला की देवी माता सरस्वती की स्तुति में गाया जाने वाला एक प्रसिद्ध चालीसा है। Saraswati Chalisa यह चालीसा विद्यार्थियों, लेखकों, कलाकारों और सभी उन लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो ज्ञान और बुद्धि प्राप्त करना चाहते हैं। Saraswati Chalisa:श्री सरस्वती चालीसा का महत्व Saraswati Chalisa:श्री सरस्वती चालीसा का पाठ कैसे करें? Saraswati Chalisa:श्री सरस्वती चालीसा के कुछ लाभ Saraswati Chalisa:सरस्वती चालीसा ॥ दोहा ॥जनक जननि पद्मरज,निज मस्तक पर धरि ।बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि ॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव,महिमा अमित अनंतु।दुष्जनों के पाप को,मातु तु ही अब हन्तु ॥ ॥ चालीसा ॥जय श्री सकल बुद्धि बलरासी ।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी ॥ जय जय जय वीणाकर धारी ।करती सदा सुहंस सवारी ॥ रूप चतुर्भुज धारी माता ।सकल विश्व अन्दर विख्याता ॥4 जग में पाप बुद्धि जब होती ।तब ही धर्म की फीकी ज्योति ॥ तब ही मातु का निज अवतारी ।पाप हीन करती महतारी ॥ वाल्मीकिजी थे हत्यारा ।तव प्रसाद जानै संसारा ॥ रामचरित जो रचे बनाई ।आदि कवि की पदवी पाई ॥8 कालिदास जो भये विख्याता ।तेरी कृपा दृष्टि से माता ॥ तुलसी सूर आदि विद्वाना ।भये और जो ज्ञानी नाना ॥ तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा ।केव कृपा आपकी अम्बा ॥ करहु कृपा सोइ मातु भवानी ।दुखित दीन निज दासहि जानी ॥12 पुत्र करहिं अपराध बहूता ।तेहि न धरई चित माता ॥ राखु लाज जननि अब मेरी ।विनय करउं भांति बहु तेरी ॥ मैं अनाथ तेरी अवलंबा ।कृपा करउ जय जय जगदंबा ॥ मधुकैटभ जो अति बलवाना ।बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना ॥16 समर हजार पाँच में घोरा ।फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा ॥ मातु सहाय कीन्ह तेहि काला ।बुद्धि विपरीत भई खलहाला ॥ तेहि ते मृत्यु भई खल केरी ।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी ॥ चंड मुण्ड जो थे विख्याता ।क्षण महु संहारे उन माता ॥20 रक्त बीज से समरथ पापी ।सुरमुनि हदय धरा सब काँपी ॥ काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा ।बारबार बिन वउं जगदंबा ॥ जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा ।क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा ॥ भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई ।रामचन्द्र बनवास कराई ॥24 एहिविधि रावण वध तू कीन्हा ।सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा ॥ को समरथ तव यश गुन गाना ।निगम अनादि अनंत बखाना ॥ विष्णु रुद्र जस कहिन मारी ।जिनकी हो तुम रक्षाकारी ॥ रक्त दन्तिका और शताक्षी ।नाम अपार है दानव भक्षी ॥28 दुर्गम काज धरा पर कीन्हा ।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा ॥ दुर्ग आदि हरनी तू माता ।कृपा करहु जब जब सुखदाता ॥ नृप कोपित को मारन चाहे ।कानन में घेरे मृग नाहे ॥ सागर मध्य पोत के भंजे ।अति तूफान नहिं कोऊ संगे ॥32 भूत प्रेत बाधा या दुःख में ।हो दरिद्र अथवा संकट में ॥ नाम जपे मंगल सब होई ।संशय इसमें करई न कोई ॥ पुत्रहीन जो आतुर भाई ।सबै छांड़ि पूजें एहि भाई ॥ करै पाठ नित यह चालीसा ।होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा ॥36 धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै ।संकट रहित अवश्य हो जावै ॥ भक्ति मातु की करैं हमेशा ।निकट न आवै ताहि कलेशा ॥ बंदी पाठ करें सत बारा ।बंदी पाश दूर हो सारा ॥ रामसागर बाँधि हेतु भवानी ।कीजै कृपा दास निज जानी ॥40 ॥दोहा॥मातु सूर्य कान्ति तव,अन्धकार मम रूप ।डूबन से रक्षा करहु,परूँ न मैं भव कूप ॥ बलबुद्धि विद्या देहु मोहि,सुनहु सरस्वती मातु ।राम सागर अधम को,आश्रय तू ही देदातु ॥

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Narmada Chalisa, Jai Jai Jai Narmada Bhawani:नर्मदा चालीसा – जय जय नर्मदा भवानी

Narmada Chalisa:नर्मदा चालीसा: पवित्र नर्मदा नदी की स्तुति Narmada Chalisa:नर्मदा माता हिंदू धर्म में एक बहुत ही पवित्र नदी मानी जाती है। इसे ‘रेवा’ के नाम से भी जाना जाता है। नर्मदा चालीसा इसी पवित्र नदी की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। Narmada Chalisa:नर्मदा चालीसा का महत्व Narmada Chalisa:नर्मदा चालीसा का पाठ कैसे करें? नर्मदा चालीसा के कुछ लाभ Narmada Chalisa, Jai Jai Jai Narmada Bhawani:नर्मदा चालीसा – जय जय नर्मदा भवानी श्री नर्मदा चालीसा:॥ दोहा॥देवि पूजित, नर्मदा,महिमा बड़ी अपार ।चालीसा वर्णन करत,कवि अरु भक्त उदार॥ इनकी सेवा से सदा,मिटते पाप महान ।तट पर कर जप दान नर,पाते हैं नित ज्ञान ॥ ॥ चौपाई ॥जय-जय-जय नर्मदा भवानी,तुम्हरी महिमा सब जग जानी । अमरकण्ठ से निकली माता,सर्व सिद्धि नव निधि की दाता । कन्या रूप सकल गुण खानी,जब प्रकटीं नर्मदा भवानी । सप्तमी सुर्य मकर रविवारा,अश्वनि माघ मास अवतारा ॥4 वाहन मकर आपको साजैं,कमल पुष्प पर आप विराजैं । ब्रह्मा हरि हर तुमको ध्यावैं,तब ही मनवांछित फल पावैं । दर्शन करत पाप कटि जाते,कोटि भक्त गण नित्य नहाते । जो नर तुमको नित ही ध्यावै,वह नर रुद्र लोक को जावैं ॥8 मगरमच्छा तुम में सुख पावैं,अंतिम समय परमपद पावैं । मस्तक मुकुट सदा ही साजैं,पांव पैंजनी नित ही राजैं । कल-कल ध्वनि करती हो माता,पाप ताप हरती हो माता । पूरब से पश्चिम की ओरा,बहतीं माता नाचत मोरा ॥12 शौनक ऋषि तुम्हरौ गुण गावैं,सूत आदि तुम्हरौं यश गावैं । शिव गणेश भी तेरे गुण गवैं,सकल देव गण तुमको ध्यावैं । कोटि तीर्थ नर्मदा किनारे,ये सब कहलाते दु:ख हारे । मनोकमना पूरण करती,सर्व दु:ख माँ नित ही हरतीं ॥16 कनखल में गंगा की महिमा,कुरुक्षेत्र में सरस्वती महिमा । पर नर्मदा ग्राम जंगल में,नित रहती माता मंगल में । एक बार कर के स्नाना,तरत पिढ़ी है नर नारा । मेकल कन्या तुम ही रेवा,तुम्हरी भजन करें नित देवा ॥20 जटा शंकरी नाम तुम्हारा,तुमने कोटि जनों को है तारा । समोद्भवा नर्मदा तुम हो,पाप मोचनी रेवा तुम हो । तुम्हरी महिमा कहि नहीं जाई,करत न बनती मातु बड़ाई । जल प्रताप तुममें अति माता,जो रमणीय तथा सुख दाता ॥24 चाल सर्पिणी सम है तुम्हारी,महिमा अति अपार है तुम्हारी । तुम में पड़ी अस्थि भी भारी,छुवत पाषाण होत वर वारि । यमुना मे जो मनुज नहाता,सात दिनों में वह फल पाता । सरस्वती तीन दीनों में देती,गंगा तुरत बाद हीं देती ॥28 पर रेवा का दर्शन करकेमानव फल पाता मन भर के । तुम्हरी महिमा है अति भारी,जिसको गाते हैं नर-नारी । जो नर तुम में नित्य नहाता,रुद्र लोक मे पूजा जाता । जड़ी बूटियां तट पर राजें,मोहक दृश्य सदा हीं साजें ॥32 वायु सुगंधित चलती तीरा,जो हरती नर तन की पीरा । घाट-घाट की महिमा भारी,कवि भी गा नहिं सकते सारी । नहिं जानूँ मैं तुम्हरी पूजा,और सहारा नहीं मम दूजा । हो प्रसन्न ऊपर मम माता,तुम ही मातु मोक्ष की दाता ॥35 जो मानव यह नित है पढ़ता,उसका मान सदा ही बढ़ता । जो शत बार इसे है गाता,वह विद्या धन दौलत पाता । अगणित बार पढ़ै जो कोई,पूरण मनोकामना होई । सबके उर में बसत नर्मदा,यहां वहां सर्वत्र नर्मदा ॥40 ॥ दोहा ॥भक्ति भाव उर आनि के,जो करता है जाप । माता जी की कृपा से,दूर होत संताप॥॥ इति श्री नर्मदा चालीसा ॥

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Sheetala Chalisa:शीतला चालीसा

Sheetala Chalisa:शीतला माता चालीसा:शीतला माता की स्तुति Sheetala Chalisa:शीतला माता को रोगों की देवी के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि वे रोगों से रक्षा करती हैं Sheetala Chalisa और बुखार, चेचक आदि जैसी बीमारियों से छुटकारा दिलाती हैं। शीतला माता की पूजा विशेष रूप से बसंत पंचमी के दिन की जाती है। शीतला माता चालीसा उनकी स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। Sheetala Chalisa:शीतला माता चालीसा का महत्व Sheetala Chalisa:शीतला माता चालीसा का पाठ कैसे करें? Sheetala Chalisa:शीतला माता चालीसा के कुछ लाभ Sheetala Chalisa:शीतला चालीसा ॥ दोहा॥जय जय माता शीतला ,तुमहिं धरै जो ध्यान ।होय विमल शीतल हृदय,विकसै बुद्धी बल ज्ञान ॥ घट-घट वासी शीतला,शीतल प्रभा तुम्हार ।शीतल छइयां में झुलई,मइयां पलना डार ॥ ॥ चौपाई ॥जय-जय-जय श्री शीतला भवानी ।जय जग जननि सकल गुणधानी ॥ गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित ।पूरण शरदचंद्र समसाजित ॥ विस्फोटक से जलत शरीरा ।शीतल करत हरत सब पीड़ा ॥ मात शीतला तव शुभनामा ।सबके गाढे आवहिं कामा ॥4॥ शोक हरी शंकरी भवानी ।बाल-प्राणक्षरी सुख दानी ॥ शुचि मार्जनी कलश करराजै ।मस्तक तेज सूर्य सम साजै ॥ चौसठ योगिन संग में गावैं ।वीणा ताल मृदंग बजावै ॥ नृत्य नाथ भैरौं दिखलावैं ।सहज शेष शिव पार ना पावैं ॥8॥ धन्य धन्य धात्री महारानी ।सुरनर मुनि तब सुयश बखानी ॥ ज्वाला रूप महा बलकारी ।दैत्य एक विस्फोटक भारी ॥ घर घर प्रविशत कोई न रक्षत ।रोग रूप धरी बालक भक्षत ॥ हाहाकार मच्यो जगभारी ।सक्यो न जब संकट टारी ॥12॥ तब मैंय्या धरि अद्भुत रूपा ।कर में लिये मार्जनी सूपा ॥ विस्फोटकहिं पकड़ि कर लीन्हो ।मूसल प्रमाण बहुविधि कीन्हो ॥ बहुत प्रकार वह विनती कीन्हा ।मैय्या नहीं भल मैं कछु कीन्हा ॥ अबनहिं मातु काहुगृह जइहौं ।जहँ अपवित्र वही घर रहि हो ॥16॥ अब भगतन शीतल भय जइहौं ।विस्फोटक भय घोर नसइहौं ॥ श्री शीतलहिं भजे कल्याना ।वचन सत्य भाषे भगवाना ॥ पूजन पाठ मातु जब करी है ।भय आनंद सकल दुःख हरी है ॥ विस्फोटक भय जिहि गृह भाई ।भजै देवि कहँ यही उपाई ॥20॥ कलश शीतलाका सजवावै ।द्विज से विधीवत पाठ करावै ॥ तुम्हीं शीतला, जगकी माता ।तुम्हीं पिता जग की सुखदाता ॥ तुम्हीं जगद्धात्री सुखसेवी ।नमो नमामी शीतले देवी ॥ नमो सुखकरनी दु:खहरणी ।नमो- नमो जगतारणि धरणी ॥24॥ नमो नमो त्रलोक्य वंदिनी ।दुखदारिद्रक निकंदिनी ॥ श्री शीतला , शेढ़ला, महला ।रुणलीहृणनी मातृ मंदला ॥ हो तुम दिगम्बर तनुधारी ।शोभित पंचनाम असवारी ॥ रासभ, खर , बैसाख सुनंदन ।गर्दभ दुर्वाकंद निकंदन ॥28॥ सुमिरत संग शीतला माई,जाही सकल सुख दूर पराई ॥ गलका, गलगन्डादि जुहोई ।ताकर मंत्र न औषधि कोई ॥ एक मातु जी का आराधन ।और नहिं कोई है साधन ॥ निश्चय मातु शरण जो आवै ।निर्भय मन इच्छित फल पावै ॥32॥ कोढी, निर्मल काया धारै ।अंधा, दृग निज दृष्टि निहारै ॥ बंध्या नारी पुत्र को पावै ।जन्म दरिद्र धनी होइ जावै ॥ मातु शीतला के गुण गावत ।लखा मूक को छंद बनावत ॥ यामे कोई करै जनि शंका ।जग मे मैया का ही डंका ॥36॥ भगत ‘कमल’ प्रभुदासा ।तट प्रयाग से पूरब पासा ॥ ग्राम तिवारी पूर मम बासा ।ककरा गंगा तट दुर्वासा ॥ अब विलंब मैं तोहि पुकारत ।मातृ कृपा कौ बाट निहारत ॥ पड़ा द्वार सब आस लगाई ।अब सुधि लेत शीतला माई ॥40॥ ॥ दोहा ॥यह चालीसा शीतला,पाठ करे जो कोय ।सपनें दुख व्यापे नही,नित सब मंगल होय ॥ बुझे सहस्र विक्रमी शुक्ल,भाल भल किंतू ।जग जननी का ये चरित,रचित भक्ति रस बिंतू ॥॥ इति श्री शीतला चालीसा ॥

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Shri Lakshmi Chalisa:श्री लक्ष्मी चालीसा

Shri Lakshmi Chalisa:श्री लक्ष्मी चालीसा: धन और समृद्धि की देवी का स्तुति गान Shri Lakshmi Chalisa:श्री लक्ष्मी चालीसा माँ लक्ष्मी, धन की देवी की स्तुति में गाया जाने वाला एक प्रसिद्ध चालीसा है। यह चालीसा भक्तों को धन, समृद्धि, सुख और शांति प्रदान करने के लिए माना जाता है। Shri Lakshmi Chalisa माना जाता है कि नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं और धन की देवी की कृपा प्राप्त होती है। Shri Lakshmi Chalisa:श्री लक्ष्मी चालीसा का महत्व Shri Lakshmi Chalisa:श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ कैसे करें? Shri Lakshmi Chalisa:श्री लक्ष्मी चालीसा के कुछ लाभ Shri Lakshmi Chalisa:क्या आप श्री लक्ष्मी चालीसा के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं? जैसे कि इसके कुछ विशेष मंत्र या माँ लक्ष्मी के विभिन्न रूप? Shri Lakshmi Chalisa:श्री लक्ष्मी चालीसा ॥ दोहा॥मातु लक्ष्मी करि कृपा,करो हृदय में वास ।मनोकामना सिद्घ करि,परुवहु मेरी आस ॥ ॥ सोरठा॥यही मोर अरदास,हाथ जोड़ विनती करुं ।सब विधि करौ सुवास,जय जननि जगदंबिका ॥ ॥ चौपाई ॥सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही ।ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही ॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी ।सब विधि पुरवहु आस हमारी ॥ जय जय जगत जननि जगदम्बा ।सबकी तुम ही हो अवलम्बा ॥ तुम ही हो सब घट घट वासी ।विनती यही हमारी खासी ॥ जगजननी जय सिन्धु कुमारी ।दीनन की तुम हो हितकारी ॥ विनवौं नित्य तुमहिं महारानी ।कृपा करौ जग जननि भवानी ॥ केहि विधि स्तुति करौं तिहारी ।सुधि लीजै अपराध बिसारी ॥ कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी ।जगजननी विनती सुन मोरी ॥ ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता ।संकट हरो हमारी माता ॥ क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो ।चौदह रत्न सिन्धु में पायो ॥ 10 चौदह रत्न में तुम सुखरासी ।सेवा कियो प्रभु बनि दासी ॥ जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा ।रुप बदल तहं सेवा कीन्हा ॥ स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा ।लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा ॥ तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं ।सेवा कियो हृदय पुलकाहीं ॥ अपनाया तोहि अन्तर्यामी ।विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी ॥ तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी ।कहं लौ महिमा कहौं बखानी ॥ मन क्रम वचन करै सेवकाई ।मन इच्छित वांछित फल पाई ॥तजि छल कपट और चतुराई ।पूजहिं विविध भांति मनलाई ॥ और हाल मैं कहौं बुझाई ।जो यह पाठ करै मन लाई ॥ ताको कोई कष्ट नोई ।मन इच्छित पावै फल सोई ॥ 20 त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि ।त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी ॥ जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै ।ध्यान लगाकर सुनै सुनावै ॥ ताकौ कोई न रोग सतावै ।पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै ॥ पुत्रहीन अरु संपति हीना ।अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना ॥ विप्र बोलाय कै पाठ करावै ।शंका दिल में कभी न लावै ॥ पाठ करावै दिन चालीसा ।ता पर कृपा करैं गौरीसा ॥ सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै ।कमी नहीं काहू की आवै ॥ बारह मास करै जो पूजा ।तेहि सम धन्य और नहिं दूजा ॥ प्रतिदिन पाठ करै मन माही ।उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं ॥ बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई ।लेय परीक्षा ध्यान लगाई ॥ 30 करि विश्वास करै व्रत नेमा ।होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा ॥ जय जय जय लक्ष्मी भवानी ।सब में व्यापित हो गुण खानी ॥ तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं ।तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं ॥ मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै ।संकट काटि भक्ति मोहि दीजै ॥ भूल चूक करि क्षमा हमारी ।दर्शन दजै दशा निहारी ॥ बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी ।तुमहि अछत दुःख सहते भारी ॥ नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में ।सब जानत हो अपने मन में ॥ रुप चतुर्भुज करके धारण ।कष्ट मोर अब करहु निवारण ॥ केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई ।ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई ॥ ॥ दोहा॥त्राहि त्राहि दुख हारिणी,हरो वेगि सब त्रास ।जयति जयति जय लक्ष्मी,करो शत्रु को नाश ॥ रामदास धरि ध्यान नित,विनय करत कर जोर ।मातु लक्ष्मी दास पर,करहु दया की कोर ॥

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Vinay Chalisa – Baba Neeb Karori:विनय चालीसा – नीब करौरी बाबा

Baba Neeb Karori:नीब करौरी बाबा की विनय चालीसा: एक संक्षिप्त परिचय Baba Neeb Karori:नीब करौरी बाबा एक प्रसिद्ध संत थे, जिनके अनुयायी उन्हें भगवान हनुमान का अवतार मानते हैं। उनकी कृपा पाने के लिए भक्त उनके विभिन्न मंत्रों और चालीसों का जाप करते हैं। Baba Neeb Karori इनमें से एक है विनय चालीसा। Baba Neeb Karori:विनय चालीसा का महत्व Baba Neeb Karori:विनय चालीसा का पाठ कैसे करें? Baba Neeb Karori:विनय चालीसा के कुछ लाभ Vinay Chalisa – Baba Neeb Karori:विनय चालीसा – नीब करौरी बाबा ॥ दोहा ॥मैं हूँ बुद्धि मलीन अति ।श्रद्धा भक्ति विहीन ॥करूँ विनय कछु आपकी ।हो सब ही विधि दीन ॥ ॥ चौपाई ॥जय जय नीब करोली बाबा ।कृपा करहु आवै सद्भावा ॥ कैसे मैं तव स्तुति बखानू ।नाम ग्राम कछु मैं नहीं जानूँ ॥ जापे कृपा द्रिष्टि तुम करहु ।रोग शोक दुःख दारिद हरहु ॥ तुम्हरौ रूप लोग नहीं जानै ।जापै कृपा करहु सोई भानै ॥4॥ करि दे अर्पन सब तन मन धन ।पावै सुख अलौकिक सोई जन ॥ दरस परस प्रभु जो तव करई ।सुख सम्पति तिनके घर भरई ॥ जय जय संत भक्त सुखदायक ।रिद्धि सिद्धि सब सम्पति दायक ॥ तुम ही विष्णु राम श्री कृष्णा ।विचरत पूर्ण कारन हित तृष्णा ॥8॥ जय जय जय जय श्री भगवंता ।तुम हो साक्षात् हनुमंता ॥ कही विभीषण ने जो बानी ।परम सत्य करि अब मैं मानी ॥ बिनु हरि कृपा मिलहि नहीं संता ।सो करि कृपा करहि दुःख अंता ॥ सोई भरोस मेरे उर आयो ।जा दिन प्रभु दर्शन मैं पायो ॥12॥ जो सुमिरै तुमको उर माहि ।ताकि विपति नष्ट ह्वै जाहि ॥ जय जय जय गुरुदेव हमारे ।सबहि भाँति हम भये तिहारे ॥ हम पर कृपा शीघ्र अब करहु ।परम शांति दे दुःख सब हरहु ॥ रोक शोक दुःख सब मिट जावै ।जपै राम रामहि को ध्यावै ॥16॥ जा विधि होई परम कल्याणा ।सोई सोई आप देहु वरदाना ॥ सबहि भाँति हरि ही को पूजे ।राग द्वेष द्वंदन सो जूझे ॥ करै सदा संतन की सेवा ।तुम सब विधि सब लायक देवा ॥ सब कुछ दे हमको निस्तारो ।भवसागर से पार उतारो ॥20॥ मैं प्रभु शरण तिहारी आयो ।सब पुण्यन को फल है पायो ॥ जय जय जय गुरुदेव तुम्हारी ।बार बार जाऊं बलिहारी ॥ सर्वत्र सदा घर घर की जानो ।रूखो सूखो ही नित खानो ॥ भेष वस्त्र है सादा ऐसे ।जाने नहीं कोउ साधू जैसे ॥24॥ ऐसी है प्रभु रहनी तुम्हारी ।वाणी कहो रहस्यमय भारी ॥ नास्तिक हूँ आस्तिक ह्वै जावै ।जब स्वामी चेटक दिखलावै ॥ सब ही धर्मन के अनुयायी ।तुम्हे मनावै शीश झुकाई ॥ नहीं कोउ स्वारथ नहीं कोउ इच्छा ।वितरण कर देउ भक्तन भिक्षा ॥28॥ केही विधि प्रभु मैं तुम्हे मनाऊँ ।जासो कृपा-प्रसाद तव पाऊँ ॥ साधु सुजन के तुम रखवारे ।भक्तन के हो सदा सहारे ॥ दुष्टऊ शरण आनी जब परई ।पूरण इच्छा उनकी करई ॥ यह संतन करि सहज सुभाऊ ।सुनी आश्चर्य करई जनि काउ ॥32॥ ऐसी करहु आप अब दाया ।निर्मल होई जाइ मन और काया ॥ धर्म कर्म में रूचि होई जावे ।जो जन नित तव स्तुति गावै ॥ आवे सद्गुन तापे भारी ।सुख सम्पति सोई पावे सारी ॥ होय तासु सब पूरन कामा ।अंत समय पावै विश्रामा ॥36॥ चारि पदारथ है जग माहि ।तव कृपा प्रसाद कछु दुर्लभ नाही ॥ त्राहि त्राहि मैं शरण तिहारी ।हरहु सकल मम विपदा भारी ॥ धन्य धन्य बड़ भाग्य हमारो ।पावै दरस परस तव न्यारो ॥ कर्महीन अरु बुद्धि विहीना ।तव प्रसाद कछु वर्णन कीन्हा ॥40॥ ॥ दोहा ॥श्रद्धा के यह पुष्प कछु ।चरणन धरी सम्हार ॥कृपासिन्धु गुरुदेव प्रभु ।करी लीजै स्वीकार ॥

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Baglamukhi Chalia:बगलामुखी चालीसा

Baglamukhi Chalia:बगलामुखी चालीसा: शत्रु नाश और सिद्धि का मंत्र Baglamukhi Chalia:बगलामुखी चालीसा एक शक्तिशाली स्तुति है जो हिंदू धर्म में देवी बगलामुखी को समर्पित है। Baglamukhi Chalia देवी बगलामुखी को शत्रु नाश करने वाली देवी माना जाता है Baglamukhi Chalia और उनके भक्तों को विजय और सफलता प्रदान करने वाली मानी जाती हैं। Baglamukhi Chalia:बगलामुखी चालीसा का महत्व Baglamukhi Chalia:बगलामुखी चालीसा का पाठ कैसे करें ध्यान रखने योग्य बातें Baglamukhi Chalia:बगलामुखी चालीसा ॥ दोहा ॥सिर नवाइ बगलामुखी,लिखूं चालीसा आज ॥ कृपा करहु मोपर सदा,पूरन हो मम काज ॥ ॥ चौपाई ॥जय जय जय श्री बगला माता ।आदिशक्ति सब जग की त्राता ॥ बगला सम तब आनन माता ।एहि ते भयउ नाम विख्याता ॥ शशि ललाट कुण्डल छवि न्यारी ।असतुति करहिं देव नर-नारी ॥ पीतवसन तन पर तव राजै ।हाथहिं मुद्गर गदा विराजै ॥ 4 ॥ तीन नयन गल चम्पक माला ।अमित तेज प्रकटत है भाला ॥ रत्न-जटित सिंहासन सोहै ।शोभा निरखि सकल जन मोहै ॥ आसन पीतवर्ण महारानी ।भक्तन की तुम हो वरदानी ॥ पीताभूषण पीतहिं चन्दन ।सुर नर नाग करत सब वन्दन ॥ 8 ॥ एहि विधि ध्यान हृदय में राखै ।वेद पुराण संत अस भाखै ॥ अब पूजा विधि करौं प्रकाशा ।जाके किये होत दुख-नाशा ॥ प्रथमहिं पीत ध्वजा फहरावै ।पीतवसन देवी पहिरावै ॥ कुंकुम अक्षत मोदक बेसन ।अबिर गुलाल सुपारी चन्दन ॥ 12 ॥ माल्य हरिद्रा अरु फल पाना ।सबहिं चढ़इ धरै उर ध्याना ॥ धूप दीप कर्पूर की बाती ।प्रेम-सहित तब करै आरती ॥ अस्तुति करै हाथ दोउ जोरे ।पुरवहु मातु मनोरथ मोरे ॥ मातु भगति तब सब सुख खानी ।करहुं कृपा मोपर जनजानी ॥ 16 ॥ त्रिविध ताप सब दुख नशावहु ।तिमिर मिटाकर ज्ञान बढ़ावहु ॥ बार-बार मैं बिनवहुं तोहीं ।अविरल भगति ज्ञान दो मोहीं ॥ पूजनांत में हवन करावै ।सा नर मनवांछित फल पावै ॥ सर्षप होम करै जो कोई ।ताके वश सचराचर होई ॥ 20 ॥ तिल तण्डुल संग क्षीर मिरावै ।भक्ति प्रेम से हवन करावै ॥ दुख दरिद्र व्यापै नहिं सोई ।निश्चय सुख-सम्पत्ति सब होई ॥ फूल अशोक हवन जो करई ।ताके गृह सुख-सम्पत्ति भरई ॥ फल सेमर का होम करीजै ।निश्चय वाको रिपु सब छीजै ॥ 24 ॥ गुग्गुल घृत होमै जो कोई ।तेहि के वश में राजा होई ॥ गुग्गुल तिल संग होम करावै ।ताको सकल बंध कट जावै ॥ बीलाक्षर का पाठ जो करहीं ।बीज मंत्र तुम्हरो उच्चरहीं ॥ एक मास निशि जो कर जापा ।तेहि कर मिटत सकल संतापा ॥ 28 ॥ घर की शुद्ध भूमि जहं होई ।साध्का जाप करै तहं सोई ॥ सेइ इच्छित फल निश्चय पावै ।यामै नहिं कदु संशय लावै ॥ अथवा तीर नदी के जाई ।साधक जाप करै मन लाई ॥ दस सहस्र जप करै जो कोई ।सक काज तेहि कर सिधि होई ॥ 32 ॥ जाप करै जो लक्षहिं बारा ।ताकर होय सुयशविस्तारा ॥ जो तव नाम जपै मन लाई ।अल्पकाल महं रिपुहिं नसाई ॥ सप्तरात्रि जो पापहिं नामा ।वाको पूरन हो सब कामा ॥ नव दिन जाप करे जो कोई ।व्याधि रहित ताकर तन होई ॥ 36 ॥ ध्यान करै जो बन्ध्या नारी ।पावै पुत्रादिक फल चारी ॥ प्रातः सायं अरु मध्याना ।धरे ध्यान होवैकल्याना ॥ कहं लगि महिमा कहौं तिहारी ।नाम सदा शुभ मंगलकारी ॥ पाठ करै जो नित्या चालीसा ।तेहि पर कृपा करहिं गौरीशा ॥ 40 ॥ ॥ दोहा ॥सन्तशरण को तनय हूं,कुलपति मिश्र सुनाम ।हरिद्वार मण्डल बसूं ,धाम हरिपुर ग्राम ॥ उन्नीस सौ पिचानबे सन् की,श्रावण शुक्ला मास ।चालीसा रचना कियौ,तव चरणन को दास ॥

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