Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू हो रही है शारदीय नवरात्रि? जानें कलश स्थापना मुहूर्त, दुर्गा अष्टमी, महानवमी का दिन

Shardiya Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024, 3 अक्टूबर, 2024 से शुरू हो रही है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है जो माँ दुर्गा को समर्पित है। इस नौ दिनों के उत्सव में माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ पितृ पक्ष के समापन के बाद यानी आश्विन आमवस्या के बाद ही होता है. आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होता है. यह नवरात्रि शरद ऋतु में आती है, इसलिए इसे शारदीय नवरात्रि कहते हैं. एक नवरात्रि चैत्र माह में आती है, उसे चैत्र नवरात्रि के नाम से जानते हैं. इन दो नवरा​त्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि भी होती हैं. शारदीय नवरात्रि के समय में कोलकाता में प्रसिद्ध दुर्गा पूजा का आयोजन होता है. शारदीय नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधि विधान से पूजा करते हैं. दुर्गा अष्टमी या महा अष्टमी के दिन कन्या पूजा, नवमी को हवन और दशमी के दिन शारदीय नवरात्रि का समापन हो जाता है. Shardiya Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 का शुभारंभ वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा ति​थि का प्रारंभ 2 अक्टूबर को देर रात 12:18 बजे से होगा. यह तिथि 4 अक्टूबर को तड़के 02:58 बजे तक मान्य रहेगी. ऐसे में उदयाति​थि के आधार पर इस साल शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ 3 अक्टूबर दिन गुरुवार से हो रहा है. Navratri 2024 Date:दुर्गा अष्टमी 2024 कब है? दुर्गा अष्टमी आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. इस साल दुर्गा अष्टमी 11 अक्टूबर दिन शुक्रवार को है. उस दिन कन्या पूजा की जाएगी. Navratri 2024 Date:नवरात्रि के दौरान क्या करें? Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 कलश स्थापना मुहूर्त Navratri 2024 Date:3 अक्टूबर से शुरू हो रहे शारदीय नवरात्रि का कलश स्थापना करने के लिए दो शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं. कलश स्थापना के लिए सुबह में शुभ मुहूर्त 6 बजकर 15 मिनट से सुबह 7 बजकर 22 मिनट तक है. सुबह में घट स्थापना के लिए आपको 1 घंटा 6 मिनट का समय प्राप्त होगा. इसके अलावा दोपहर में भी कलश स्थापना का मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त में है. यह सबसे अच्छा समय माना जाता है. दिन में आप 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट के बीच कभी भी कलश स्थापना कर सकते हैं. दोपहर में आपको 47 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी महानवमी 2024 कब है? इस साल महा नवमी भी 11 अक्टूबर को ही है. महानवमी का हवन 12 अक्टूबर शनिवार को होगा. Navratri 2024 Date:शारदीय नवरात्रि 2024 कैलेंडर शारदीय नवरात्रि का पहला दिन: 3 अक्टूबर, गुरुवार: घटस्थापना, शैलपुत्री पूजाशारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन: 4 अक्टूबर, शुक्रवार: ब्रह्मचारिणी पूजाशारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन: 5 अक्टूबर, शनिवार: चंद्रघंटा पूजाशारदीय नवरात्रि का चौथा दिन: 6 अक्टूबर, रविवार: विनायक चतुर्थीशारदीय नवरात्रि का पांचवा दिन: 7 अक्टूबर, सोमवार: कूष्मांडा पूजाशारदीय नवरात्रि का छठा दिन: 8 अक्टूबर, मंगलवार: स्कंदमाता पूजाशारदीय नवरात्रि का सातवां दिन: 9 अक्टूबर, बुधवार: कात्यायनी पूजाशारदीय नवरात्रि का आठवां दिन: 10 अक्टूबर, गुरुवार: कालरात्रि पूजाशारदीय नवरात्रि का नौवां दिन: 11 अक्टूबर, शुक्रवार: दुर्गा अष्टमी, महागौरी पूजाशारदीय नवरात्रि का दसवां दिन: 12 अक्टूबर, शनिवार: नवमी हवन, दुर्गा विसर्जन, विजयादशमी, दशहरा, शस्त्र पूजा Navratri 2024:नवरात्रि का महत्व Navratri 2024:नवरात्रि का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाते हैं और माँ दुर्गा की पूजा करते हैं। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Types of Havan and Yagya in Hindu Rituals According to Vedas and Puranas

Types of Havan and Yagya in Hindu Rituals According to Vedas and Puranas In Hinduism, Havan and Yagya are sacred fire rituals deeply rooted in Vedic traditions and the Puranas. These rituals are central to many ceremonies, ranging from personal purification to large-scale societal benefits. They invoke divine forces and create spiritual vibrations to cleanse the environment and individuals. Havan and Yagya rituals, when performed with specific mantras, help achieve specific goals. This post will explore various types of Havans and Yagyas, their significance, and the associated mantras. What is Havan and Yagya? Havan and Yagya Both involve chanting sacred Vedic mantras and offerings to the fire god, Agni, who is considered the carrier of these offerings to other deities. Types of Havan and Yagya According to the Vedas and Puranas Conclusion Havans and Yagyas are not merely religious rituals; they are potent spiritual tools that can cleanse the mind, body, and environment while invoking divine blessings. Each type of Havan or Yagya, when performed with the proper mantras and intentions, can bring about transformation and healing in various aspects of life. Rooted in the rich tradition of the Vedas and Puranas, these sacred fire ceremonies remain a vital part of Hindu religious practices, providing individuals with a direct connection to the divine. How to Book a Havan or Yagya Service Online At Karmasu, we offer personalized and community-based Havan and Yagya services performed by expert priests, both online and offline. Whether you’re seeking spiritual cleansing, prosperity, health, or protection, you can choose from a range of rituals tailored to your needs. Feel free to contact us or visit our website to learn more and book a ritual that suits your spiritual goals! CALL NOW – 9129388891 Keywords: Types of Havan, Types of Yagya, Hindu rituals, Vedic mantras, Fire rituals, Spiritual cleansing, Vedas and Puranas, Online Havan services, Karmasu Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी…

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दीपावली पूजा मंत्र (Deepawali Puja Mantras)

Deepawali Puja Mantras 1. गोवत्स द्वादशी मंत्र Deepawali Puja Mantras :अर्घ्य मंत्रक्षीरोदार्नवसंभूते सुरासुरनमस्कृते।सर्वदेवमये मातर्गृहाण्घ्यं नमो नमः॥ निवेदन मंत्रगोवत्स द्वादशी निवेदन मंत्र सुरभि त्वं जगन्मातरदेवी विष्णुपदे स्थिता।सर्वदेवमये ग्रसं मया दत्तमिदं ग्रसा॥ प्रार्थना मंत्रसर्वदेवमये देवि सर्वदेवैरलंकृते।मातरमाभिलाषितं सफलं कुरु नंदिनी॥ Deepawali Puja Mantra मन्त्र अर्थ – हे समस्त देवताओं द्वारा अलङ्कृत माता! नन्दिनी! मेरा मनोरथ पुर्ण करो। 2. यमदीप मंत्रमृत्युना पाषादण्डभ्यं कालेन श्यामया सहः।त्रयोदश्यां दीपदानत्सुर्यजः प्रियतम मम॥ मंत्र अर्थ – त्रयोदशी के दिन मैं यह दीपक सूर्य पुत्र यानि यमदेव को अर्पित करता हूं। वे मुझे मृत्युपाश से मुक्त करें और मेरा कल्याण करें। 3. अभ्यंग स्नान मंत्रसीतालोष्टासमायुक्ता सकान्तकदलन्विता।हर पापमपामार्ग भ्रम्यमानः पुनः पुनः॥ मंत्र का अर्थ – हे कांटेदार भूसी के फूल वाला पौधा, जो जुती हुई भूमि की मिट्टी, कांटों और पत्तियों से युक्त है; मेरे पापों को नष्ट कर दो. 4. नरक चतुर्दशी दीपदान मंत्रदत्तो दीपश्चतुर्दश्याम नरकाप्रीतये मया।चतुर्वर्तिसामायुक्तः सर्वपापनुत्तये॥ मंत्र अर्थ – इस चतुर्दशी के दिन, नर्क देवता की प्रसन्नता के लिए और सभी पापों के नाश के लिए मैं यह चार मुख वाला, चार बातियों वाला दीपक अर्पित करता हूं। 5. लक्ष्मी मंत्रॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः॥ मंत्र अर्थ – मैं धन और समृद्धि की देवी देवी लक्ष्मी को नमस्कार करता हूं। 6. बाली नमस्कार मंत्रबलिराजा नमस्तुभ्यं दैत्यदानववंदिता।इन्द्रशत्रोअमरते विष्णुसन्निध्यदो भव॥बलिमुद्दिश्य दीयन्ते दानानि कुरुनन्दना।यानि तन्यक्षान्याहुर्मयैवं सम्प्रदर्शितम्॥ मन्त्र का अर्थ – दैत्य तथा दानवों से पूजित हे बलिराज, आपको नमस्कार है। हे इन्द्रशत्रो, हे अमराराते, विष्णु के सानिध्य को देने वाला हो।हे कुरुनन्दन, बलि को उद्देश्य कर जो दान दिये जाते हैं वे अक्षय को प्राप्त होते हैं। मैंने इस प्रकार प्रदर्शित किया है। 7. गोवर्धन मंत्रगोवर्धन धराधर गोकुलत्राणकारक:।बहुबाहुकृतच्छया गावं कोटिप्रदो भव॥ मंत्र का अर्थ – हे गोवर्धन, जो पृथ्वी का समर्थन करता है! आप गोकुल के रक्षक हैं. भगवान श्री कृष्ण ने आपको अपनी भुजाओं पर उठा लिया था। मुझे करोड़ों गौएँ प्रदान करें। 8. गौ मंत्रलक्ष्मीर्य लोकापालं धेनुरूपेण संस्थिता।घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु॥ Deepawali Puja Mantras:मंत्र का अर्थ – हे गाय, जो स्वयं गाय के रूप में लक्ष्मी है और जो यज्ञ के लिए घी प्रदान करती है, मेरे पापों को नष्ट कर दे। 9. यम द्वितीया मंत्रएह्येहि मार्तण्डजा पाशहस्ता यमान्तकलोकधर्मरेषा।भ्रातृद्वितीयकृतदेवपूजं गृहाणा चार्घ्यं भगवन्नमोस्तु ते॥ Deepawali Puja Mantras मन्त्र का अर्थ – हे मार्तण्डज – सूर्य से उत्पन्न हुए, हे पाशहस्त – हाथ में पाश धारण करने वाले, हे यम, हे अन्तक, हे लोकधर, हे अमरेश, भातृद्वितीया में की हुई देवपूजा और अर्घ्य को ग्रहण करो। हे भगवन् आपको नमस्कार है। 10. मार्गपाली मंत्रमार्गपाली नमस्तेस्तु सर्वलोकसुखप्रदे।विधेयैः पुत्रदारद्यैः पुनरेहि व्रतस्य मे॥ मंत्र का अर्थ – हे मार्ग पर चलने वाले उत्सव, सभी जीवित प्राणियों को खुशी प्रदान करते हुए, मैं आपको प्रणाम करता हूं। मेरे संकल्पित धार्मिक अनुष्ठान (व्रत) के लिए दोबारा आना। Deepawali Puja Mantras

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सपने में दिख जाये गणपति जी की मूर्ति तो समज लीजिये होगा ऐसा – Sapne Me Dikhe Ganpati Ji Ki Murti To Samajh Lijiye Hoga Aesa.

Ganpati Ji Ki Murti:सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना एक शुभ संकेत माना जाता है। हिंदू धर्म में, गणपति जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है, यानी वे सभी बाधाओं को दूर करते हैं। इसलिए, सपने में उनकी मूर्ति देखना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपके जीवन में आने वाली सभी मुश्किलें दूर होने वाली हैं। Ganpati Ji Ki Murti:सपने का अर्थ व्यक्ति के व्यक्तिगत अनुभवों और भावनाओं पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर आप सपने में गणपति जी की मूर्ति को पूजा करते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आप अपनी आध्यात्मिकता को गहरा बनाना चाहते हैं। अगर आप सपने में गणपति जी की मूर्ति को टूटते हुए देखते हैं, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आप किसी समस्या का सामना कर रहे हैं। यदि आपने सपने में गणपति जी की Ganpati Ji Ki Murti मूर्ति देखी है, तो इसका मतलब है कि आपको सकारात्मक रहना चाहिए और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए। गणपति जी की कृपा से आप निश्चित रूप से सफल होंगे। Ganpati Ji Ki Murti:सपने में गणपति जी की मूर्ति: दोस्तों आज बात करने वाले है ऐसे सपने की जिससे आपके जीवन के सारे विघ्न दूर हो जायेगे। सपने में देवी देवताओ का आना बहुत ही शुभ माना जाता है क्युकी सपने में भगवान इंसान को आशीर्वाद और कुछ अच्छे संकेत देने के लिए आते है। Ganpati Ji Ki Murti सपने में इंसान जो भी देखता है उसका कोई न कोई रहस्य अवश्य होता है क्युकी सपने इंसान के भविष्य से जुड़े हुवे होते है। इसी तरह सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) जीवन में कोई संकेत जरूर देता है आइये जानते है आपके लिए क्या संकेत है। Ganpati Ji Ki Murti:इंसान के लिए सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) बहुत ही शुभ सपना है। क्युकी गणपति जी हिन्दू धर्म के प्रथम पूजनीय देव है किसी भी शुभ कार्य की शरुआत करने से पहले गणपति जी की पूजा की जाती है। गणपति जी विघ्नहर्ता है उसकी पूजा करने से आपके सभी कार्य शुभ होते है और सफल होते है। सच्चे मन से गणपति जी की पूजा अर्चना करने से जीवन में समृद्धि आती है और आप आने वाले विघ्न भी दूर हो जाते है। Ganpati Ji Ki Murti इंसान के जीवन में अगर कोई मुसीबत आये तो उसे गणेश जी पूजा करनी चाहिए जिससे मुसीबत दूर हो जाये गणपति जी सच्चे भक्तो की प्राथना सुनते है और उनका आशीर्वाद उन्हें दते है। सपनो की दुनिया (Sapno ki duniyaa) में आज बात करने वाले है विघ्नहर्ता श्री गणेश की जिसकी पूजा से सारी मुसीबते दूर जाती है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) आपके जीवन में अच्छे बदलाव की और इशारा करता है। गणपति जी आपको सपने में क्या क्या संकेत देने आये है आइये इसके बारे में जानते है। गणपति जी की मूर्ति आपको अलग अलग अवस्था में दिखाई दे सकती है आइये जानते है इस सपने से आपको क्या संकेत मिलता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना मतलब – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Dekhna Matlab पुराने शास्त्रों के आधारित यह सपना आपको संकेत देता है की इंसान के जीवन में खुशिया आने वाली है। सपने में गणपति जी की मूर्ति देखना (Sapne me ganpati ji ki murti dekhna) बेहद शुभ माना गया है। इस सपने से इंसान को यह संकेत मिलता है की आने वाले दिनों में बड़ी खुशखबर मिलने वाली है। ख़ुशी के इस समाचार से इंसान के जीवन में परेशानिया कम हो जाएगी और परिवार भी खुश रहेगा। Dream Astrology: मृत्यु के संकेत होते हैं ये डरावने सपने, देखने पर न करें अनदेखी सपने में गणपति जी की मूर्ति को मोदक का भोग लगाना – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Ko Modak Ka Bhog Lagana शास्त्रों के अनुसार यह सपना आपको संकेत देता है जल्द ही इंसान के जीवन से सारे दुःख दूर हो जायेंगे। सपने में गणपति जी की मूर्ति को मोदक का भोग लगाना (Sapne me ganpati ji ki murti ko modak ka bhog lagana) इस बात का इशारा है की आपको पारिवारिक समस्या से छुटकारा मिलने वाला है परिवार में चल रही समस्या जल्द ही दूर हो जाएगी। यह सपना आपके लिए शुभ संकेत है। गणपति जी को मोदक बहुत प्रिय है इस लिए उन्हें मोदक का भोग लगाया जाता है। सपने में मोदक देखना (Sapne me modak dekhna) भी अच्छा सपना होता है मोदक का अर्थ होता है ख़ुशी इससे जीवन में ख़ुशी आती है और गणपति जी का आशीर्वाद भी मिलता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति का विसर्जन देखना – Sapne Me Ganpati Ji Ki Murti Ka Visarjan Dekhna Ganpati Ji Ki Murti:स्वप्न शास्त्र में लिखा है की बाप्पा का विसर्जन देखना आने वाले दिनों में बुरा होने का इशारा करता है। सपने में गणपति जी की मूर्ति का विसर्जन देखना (Sapne me ganpati ji ki murti ka visarjan dekhna) इंसान को अशुभ संकेत देता है इंसान को व्यापार में धनहानि होगी। यह सपना आपको भविष्य में निराशा आने की और इशारा करता है और आपको चिंता में डाल सकता है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Parivartini Ekadashi 2024: परिवर्तिनी एकादशी आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजन विधि और उपाय

Parivartini Ekadashi 2024: परिवर्तिनी एकादशी का व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकदाशी तिथि को रखा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु करवट बदलते हैं इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस एकादशी को पद्मा एकादशी और पार्श्व एकादशी भी कहा जाता है. Parivartini Ekadashi 2024: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा या परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा की जाती है. हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी पर भगवान विष्णु विश्राम के दौरान करवट बदलते हैं. इसी वजह से इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है. परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 14 सितंबर यानी आज रखा जा रहा है.  परिवर्तिनी एकादशी शुभ मुहूर्त (Parivartini Ekadashi 2024 Shubh Muhurat) Parivartini Ekadashi 2024:भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 13 सितंबर यानी कल रात 10 बजकर 30 मिनट पर शुरू हो चुकी है और तिथि का समापन 14 सितंबर यानी आज रात 8 बजकर 41 मिनट पर होगा. उदयातिथि के अनुसार, आज ही परिवर्तिनी एकादशी मनाई जा रही है.  परिवर्तिनी एकादशी पूजन विधि (Parivartini Ekadashi Pujan Vidhi) Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी पर प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देवता को जल अर्पित करें. इसके बाद पीले वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु और गणेश जी की पूजा करें. श्री हरि को पीले फूल, पंचामृत और तुलसी दल अर्पित करें. गणेश जी को मोदक और दूर्वा अर्पित करें. पहले गणेश जी और फिर श्री हरि के मंत्रों का जाप करें. इसके बाद किसी निर्धन व्यक्ति को जल, अन्न-वस्त्र, या छाते का दान करें. इस दिन अन्न का सेवन बिल्कुल न करें. जलाहार या फलाहार ही ग्रहण करें. परिवर्तिनी एकादशी उपाय (Parivartini Ekadashi Upa) 1. पीले कपड़े दान करें परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है. मान्यता है Parivartini Ekadashi 2024 कि इस दिन जरूरतमंदों को पीले कपड़ों का दान करना शुभ होता है. ऐसा करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है. वहीं, शुभ फलों की प्राप्ति होती है. 2. चांदी के सिक्के चढ़ाएं Parivartini Ekadashi 2024 परिवर्तिनी एकादशी के दिन पूजन के समय भगवान विष्णु को चांदी के कुछ सिक्के चढ़ाएं और पूजा के बाद उन सिक्कों को लाल रंग के कपड़े में लपेटकर तिजोरी में पैसे वाले स्थान पर रख दें. आर्थिक समस्याएं समाप्त हो जाएंगी.  3. केसर युक्त दूध से अभिषेक करें परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और लक्ष्मी मां की पूजा करने का विधान है और इस दिन भगवान विष्णु का अभिषेक केसर युक्त दूध से करें. ऐसा करने से घर में सुख,सौभाग्य का आगमन होता है.

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 14/09/2024

Aaj Ka Panchang Aaj Ka Panchang 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 14 सितम्बर 2024⛅दिन – शनिवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि –  एकादशी रात्रि 08:41 तक तत्पश्चात द्वादशी⛅नक्षत्र – उत्तराषाढ़ा रात्रि 08:32 तक तत्पश्चात श्रवण⛅योग – शोभन शाम 06:18 तक तत्पश्चात अतिगण्ड Aaj Ka Panchang ⛅राहु काल – प्रातः 09:30 से प्रातः 11:03 तक⛅सूर्योदय – 06:26⛅सूर्यास्त – 06:44⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:39 तक⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:10 से दोपहर 12:59 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:12 सितम्बर 15 से रात्रि 12:58 सितम्बर 15 तकव्रत पर्व विवरण – परिवर्तनी पद्मा एकादशी, हिंदी दिवस, सर्वार्थ सिद्धि योग (रात्रि 08:32 से प्रातः 06:26 सितम्बर 15 तक)⛅विशेष – एकादशी को सिम्बी (सेम) खाने से पुत्र का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹एकादशी व्रत के लाभ🔹 🔸एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । 🔸 जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 जो पुण्य गौ-दान, सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । 🔸 एकादशी व्रत करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं । इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । 🔸 धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । 🔸 कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है । 🔸 परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है । पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ । भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang English Mai 14/09/2024 Aaj Ka Panchang ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Uttarashadha till 08:32 pm and then Shravan ⛅Yoga – Shobhan till 06:18 pm then Atigand ⛅Rahu Kaal – 09:30 am to 11:03 am ⛅Sunrise – 06:26 ⛅Sunset – 06:44 ⛅Direction Shool – East direction in⛅Brahma Muhurta – from 04:52 to 05:39 in the morning⛅Abhijit Muhurta – from 12:10 in the afternoon to 12:59 in the afternoon⛅Nishita Muhurta – from 12:12 in the night of September 15 to 12:58 in the night of September 15Vrat Parv Vidhi – Parivartani Padma Ekadashi, Hindi Diwas, Sarvartha Siddhi Yoga (from 08:32 pm to 06:26 am on September 15)⛅Special – Eating Simbi (beans) on Ekadashi leads to the destruction of the son. (Brahma Vaivart Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 🔹Benefits of Ekadashi fast🔹 🔸There is no other virtue like the virtue of Ekadashi fast. 🔸 The virtue that one gets by donating during a solar eclipse is many times more than the virtue one gets by fasting on Ekadashi. 🔸 The virtue that one gets by donating cow, gold, and performing Ashwamedha Yagna is more than the virtue one gets by fasting on Ekadashi. 🔸 The ancestors of those who observe Ekadashi fast are freed from low births and shower happiness on their family members. Therefore, there is happiness and peace in the house of those who observe this fast. Aaj Ka Panchang🔸 Wealth, grains, sons etc. increase. 🔸 Fame increases, Devotion and faith increase, which makes life full of joy. 🔸 One attains the pleasure of God. In the past, King Nahush, Ambarisha, King Gadhi etc. whoever observed Ekadashi fast, got all the wealth of this earth. Lord Shiva told Narada: There is no doubt that by observing Ekadashi fast, the sins of a man’s seven births are destroyed. Fasting, cow donation etc. on Ekadashi day are infinitely meritorious. 🌞🚩 🚩 ” ll Jai Shri Ram ll ” 🚩🚩🌞

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श्री दीनबंधु अष्टकम (Shri Dinabandhu Ashtakam)

Shri Dinabandhu Ashtakam Shri Dinabandhu Ashtakam:श्री दीनबंधु अष्टकम भगवान विष्णु के प्रसिद्ध अष्टकमों में से एक है। ॥ श्री दीनबन्ध्वष्टकम् ॥यस्मादिदं जगदुदेति चतुर्मुखाद्यंयस्मिन्नवस्थितमशेषमशेषमूले।यत्रोपयाति विलयं च समस्तमन्तेदृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥1॥ चक्रं सहस्रकरचारु करारविन्देगुर्वी गदा दरवरश्च विभाति यस्य।पक्षीन्द्रपृष्ठपरिरोपितपादपद्मो।दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥2॥ येनोद्धृता वसुमती सलिले निमग्ना नग्नाच पाण्डववधूः स्थगिता दुकूलैः।संमोचितो जलचरस्य मुखाद्गजेन्द्रो।दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥3॥ यस्यार्द्रदृष्टिवशतस्तु सुराः समृद्धिंकोपेक्षणेन दनुजा विलयं व्रजन्ति।भीताश्चरन्ति च यतोऽर्कयमानिलाद्या।दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥4॥ गायन्ति सामकुशला यमजं मखेषुध्यायन्ति धीरमतयो यतयो विविक्ते।पश्यन्ति योगिपुरुषाः पुरुषं शरीरे।दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥5॥ आकाररूपगुणयोगविवर्जितोऽपि मददभक्तानुकम्पननिमित्तगृहीतमूर्तिः।यः सर्वगोऽपि कृतशेषशरीरशय्यो।दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥6॥ यस्याङ्घ्रिपङ्कजमनिद्रमुनीन्द्रवृन्दैराराध्यते भवदवानलदाहशान्त्यै।सर्वापराधमविचिन्त्य ममाखिलात्मा।दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥7॥ यन्नामकीर्तनपरः श्वपचोऽपि नूनंहित्वाखिलं कलिमलं भुवनं पुनाति।दग्ध्वा ममाघमखिलं करुणेक्षणेन।दृग्गोचरो भवतु मेऽद्य स दीनबन्धुः॥8॥ दीनबन्ध्वष्टकं पुण्यंब्रह्मानन्देन भाषितम्।यः पठेत् प्रयतो नित्यंतस्य विष्णुः प्रसीदति॥9॥ ॥ इति श्रीमत्परमहंसस्वामिब्रह्मानन्दविरचितं श्रीदीनबन्ध्वष्टकं सम्पूर्णम् ॥

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Shiv aarti lyrics:शिव आरती – ॐ जय शिव ओंकारा (Shiv Aarti – Om Jai Shiv Omkara)

shiv aarti lyrics ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ एकानन चतुराननपंचानन राजे ।हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे ।त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ अक्षमाला वनमाला,मुण्डमाला धारी ।चंदन मृगमद सोहै,भाले शशिधारी ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे ।सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ कर के मध्य कमंडलचक्र त्रिशूलधारी ।सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका ।प्रणवाक्षर में शोभितये तीनों एका ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे ।कहत शिवानंद स्वामीसुख संपति पावे ॥ॐ जय शिव ओंकारा…॥ Shiv aarti lyrics shiv aarti lyrics english Om Jai Shiv Omkara Har Jai Shiv OmKara।Brahma Vishnu Sadashiv Ardhaangi Dhaara॥ Ekanan Chaturanan Panchanan Raajey।Hansanan Garurasan Vrishvaahan Saajey॥ Do Bhuj Chaar Chaturbhuj Das Bhuj Te Sohey।Teeno Roop Nirakhta Tribhuvan Jan Mohey॥ Akshmala Banmala Mundmala Dhaari।Chandan Mrigmad Sohay Bholay Shubhkari॥ Shwetambar Pitambar Baagambar Angey।Sankadik Brahmadik Bhutadik Sangey॥ Karkey Madhya Kamandal Chakra Trishul Dharta।Jagkarta Jagbharta Jagsanhaarkarta॥ Brahma Vishnu Sada Shiv Jaanat Aviveka।Pranvaakshar Madhye Ye Teeno Eka॥ Trigun Shivji Ki Aarti Jo Koi Nar Gaavey।Kahat Shivanand Swami Manvaanchit Phal Paavey॥ Om Jai Shiv Omkara Har Jai Shiv OmKara।Brahma Vishnu Sadashiv Ardhaangi Dhaara॥ श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti)

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श्री गणेश आरती (Shri Ganesh Aarti)

Ganesh Aarti जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ एक दंत दयावंत,चार भुजा धारी ।माथे सिंदूर सोहे,मूसे की सवारी ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ पान चढ़े फल चढ़े,और चढ़े मेवा ।लड्डुअन का भोग लगे,संत करें सेवा ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ अंधन को आंख देत,कोढ़िन को काया ।बांझन को पुत्र देत,निर्धन को माया ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ ‘सूर’ श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Ek Dant Daya Want,Char Bhuuja Dhari ।Mathe Sindor Shoye,Muse Ki Sawari ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Pan Chadhe Phool Chadhe,Aur Chadhe Mewa ।Laduan Ko Bhog Lage,Sant Kare Sewa ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Andhan Ko Aankh Det,Kodhin Ko Kaya ।Bajhan Ko Purta Det,Nirdhan Ko Maya॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ ‘sur’ Shaam Sharan Aaye,Safal Ki Jiye Sewa ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ Jai Ganesh Jai Ganesh,Jai Ganesg Deva ।Mata Jaki Parwati,Pita Maha Deva ॥ हनुमान आरती (Hanuman Aarti)

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हनुमान आरती (Hanuman Aarti)

Hanuman Aarti ॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥ ॥ आरती ॥आरती कीजै हनुमान लला की ।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥ जाके बल से गिरवर काँपे ।रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥अंजनि पुत्र महा बलदाई ।संतन के प्रभु सदा सहाई ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ दे वीरा रघुनाथ पठाए ।लंका जारि सिया सुधि लाये ॥लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।जात पवनसुत बार न लाई ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ लंका जारि असुर संहारे ।सियाराम जी के काज सँवारे ॥लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।लाये संजिवन प्राण उबारे ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ पैठि पताल तोरि जमकारे ।अहिरावण की भुजा उखारे ॥बाईं भुजा असुर दल मारे ।दाहिने भुजा संतजन तारे ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।जय जय जय हनुमान उचारें ॥कंचन थार कपूर लौ छाई ।आरती करत अंजना माई ॥आरती कीजै हनुमान लला की ॥ जो हनुमानजी की आरती गावे ।बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥लंक विध्वंस किये रघुराई ।तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥ आरती कीजै हनुमान लला की ।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥॥ इति संपूर्णंम् ॥ आरती श्री वृषभानुसुता – राधा आरती (Radha Aarti: Aarti Shri Vrashbhanusuta Ki)

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आरती श्री वृषभानुसुता – राधा आरती (Radha Aarti: Aarti Shri Vrashbhanusuta Ki)

आरती श्री वृषभानुसुता की,मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,विमल विवेकविराग विकासिनि ।पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥ मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,मधुर मनोहर मूरति सोहनि ।अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि,प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥ संतत सेव्य सत मुनि जनकी,आकर अमित दिव्यगुन गनकी ।आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,अति अमूल्य सम्पति समता की ॥॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥ । आरती श्री वृषभानुसुता की । कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि,चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि ।जगजननि जग दुखनिवारिणि,आदि अनादिशक्ति विभुता की ॥॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥ आरती श्री वृषभानुसुता की,मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki,Manjul Moorti Mohan Mamta Ki ॥ Trividh Tapayut Sansrti Nashini,Vimal Vivekavirag Vikasini ।Paavan Prabhu Pad Preeti Prakashini,Sundartam Chhavi Sundarta Ki ॥॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥ Muni Man Mohan Mohan Mohani,Madhur Manohar Moorati Sohani ।Aviralaprem Amiy Ras Dohani,Priya Ati Sada Sakhi Lalita Ki ॥॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥ Santat Sevy Sat Muni Janaki,Aakar Amit Divyagun Ganaki ।Aakarshini Krishn Tan Manki,Ati Amooly Sampati Samata Ki ॥॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥ । Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki. । Krishnatmika, Krishn Sahacharini,Chinmayavrinda Vipin Viharini ।Jagjanani Jag Dukhanivarini,Aadi Anadishakti Vibhuta Ki ॥॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki,Manjul Moorti Mohan Mamta Ki ॥ शिव आरती – ॐ जय शिव ओंकारा (Shiv Aarti – Om Jai Shiv Omkara)

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 11/09/2024

Aaj Ka Panchang 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 11 सितम्बर 2024⛅दिन – बुधवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – अष्टमी रात्रि 11:46 तक तत्पश्चात नवमी⛅नक्षत्र – ज्येष्ठा रात्रि 09:22 तक तत्पश्चात मूल⛅योग – प्रीति रात्रि 11:55 तक तत्पश्चात आयुष्मान⛅राहु काल – दोपहर 12:36 से दोपहर 02:09 तक⛅सूर्योदय – 06:28 ⛅सूर्यास्त – 06:44⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:39 तक⛅ अभिजीत मुहूर्त – कोई नहीं⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:13 सितम्बर 12 से रात्रि 12:59 सितम्बर 12 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – बुधवारी अष्टमी (सूर्योदय से रात्रि 11:45 तक), राधा अष्टमी, महालक्ष्मी व्रत शुरू, दूर्वा अष्टमी, जयेष्ठ गौरी पूजा, मासिक दुर्गाष्टमी⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है | इस दिन स्त्री-सहवास और तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) 💫सुखमय जीवन की अनमोल कुंजियाँ💫 🔹शत्रुओं की बदनीयत विफल करने हेतु🔹 Aaj Ka Panchang 🔸जो शत्रुओं से घिरा है वह सद्गुरु के द्वार पर जब आरती होती हो तो उसका दर्शन करे, उसके सामने शत्रुओं की दाल नहीं गलेगी । Aaj Ka Panchang 🔹नजर दोष निवारण के लिए🔹 🔸घर में किसीको नजर लगी हो तो घर के आँगन में तुलसी का पौधा (गमले में या जैसी व्यवस्था हो) लगाकर उसके सामने रोज सायंकाल में दीपक प्रज्वलित करें । 🔹लक्ष्मीप्राप्ति हेतु करें यह प्रयोग🔹 🔸धन का लाभ नहीं हो रहा हो तो, शुक्रवार से गोधूलि वेला में पूजाघर में या तुलसी के पौधे के सामने नित्य देशी गाय के घी का दीपक जलायें । 🔹विवाह की बाधा दूर करने का उपाय🔹 🔸यदि किसी कन्या का विवाह न हो पा रहा हो तो पूर्णिमा को वटवृक्ष की १०८ परिक्रमा करने से विवाह की बाधा दूर हो जाती है । गुरुवार को बड़ या पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करने से भी विवाह की बाधा दूर होती है । 🔹दर्द- निवारण हेतु अनुभूत रामबाण प्रयोग🔹 🔸शरीर में जितनी जगह दर्द हो रहा है उसके अनुरूप प्याज लेकर कुचल लें । सोने से पहले सरसों का तेल और आवश्यकतानुसार हल्दी मिलाकर प्याज को भून लें । फिर सहने योग्य गरम रहते हुए इसे दर्द के स्थान पर कपड़े से बाँध लें । बिस्तर, कपड़े आदि खराब न हों इसलिए ऊपर से पॉलीथीन बाँध सकते हैं । इस अनुभूत रामबाण प्रयोग को कुछ दिन करने से दर्द में लाभ होता है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang English Mai: 11/09/2024 Aaj Ka Panchang 🌞~ Today’s Hindu Panchang ~🌞⛅Date – 11 September 2024⛅Day – Wednesday⛅Vikram Samvat – 2081⛅Ayan – Dakshinayan⛅Season – Sharad⛅Month – Bhadrapada⛅Paksha – Shukla⛅Tithi – Ashtami till 11:46 pm then Navami⛅Nakshatra – Jyeshtha till 09:22 pm then Moola⛅Yoga – Preeti till 11:55 pm then Ayushman⛅Rahu Kaal – from 12:36 pm to 02:09 pm⛅Sunrise – 06:28 ⛅Sunset – 06:44⛅Disha Shool – in the north direction⛅Brahma Muhurta – in the morning 04:52 to 05:39⛅ Abhijeet Muhurat – None⛅ Nishita Muhurat – 12:13 am September 12 to 12:59 am September 12⛅ Vrat festival details – Budhwari Ashtami (from sunrise to 11:45 pm), Radha Ashtami, Mahalakshmi fast begins, Durva Ashtami, Jyeshtha Gauri Puja, Masik Durgashtami⛅ Special – Eating coconut on Ashtami destroys intelligence. Sexual intercourse with a woman and eating and applying sesame oil is prohibited on this day. (Brahmavaivart Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 💫Precious keys to a happy life💫 🔹To foil the ill intentions of enemies🔹 Aaj Ka Panchang🔸The one who is surrounded by enemies should see the aarti being performed at the door of the Sadguru, the enemies will not succeed in front of him. 🔹To remove the evil eye🔹 🔸If someone in the house is affected by the evil eye, then plant a Tulsi plant (in a pot or as per the arrangement) in the courtyard of the house and light a lamp in front of it every evening. 🔹Do this experiment to attain Lakshmi🔹 🔸If you are not getting any benefit of money, then from Friday onwards, light a lamp of Desi Cow Ghee in the Puja room or in front of the Tulsi plant every day at dusk. 🔹Remedy for removing obstacles in marriage🔹 🔸If a girl is not getting married, then doing 108 rounds of Banyan tree on the full moon day removes the obstacles in marriage. Offering water to Banyan or Peepal tree on Thursday also removes obstacles in marriage. 🔹Tested panacea for pain relief🔹 🔸Take onion and crush it according to the part of the body where you are having pain. Before going to sleep, mix mustard oil and turmeric as per requirement and fry the onion. Then while it is bearable hot, tie it with a cloth at the place of pain. You can tie polythene on top so that the bed, clothes etc. do not get spoiled. Doing this proven panacea for a few days gives relief in pain. 🌞🚩🚩 ” ll Jai Shri Ram ll ” 🚩🚩🌞

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