Dhanteras ke din deepak kaha jalaye : धनतेरस के दिन इन जगहों पर दीपक जलाने से घर में होगा मां लक्ष्मी का वास!

deepak:lighting lamp on dhanteras : हिंदू धर्म में धनतेरस के पर्व से साथ ही रोशनी का त्योहार माने जाने वाले 5 दिन के उत्सव दिवाली की शुरुआत हो जाती है. धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए लोग तरह तरह की खरीदारी करते हैं और अपने घर को दीपक से सजाते हैं. deepak:धनतेरस पर दीप जलाने की परंपरा माँ लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि का स्वागत करने के लिए की जाती है, ताकि घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। यहाँ कुछ विशेष स्थान दिए जा रहे हैं जहाँ दीपक जलाने से घर में माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है: इस वर्ष कब है धनतेरस? (Dhanteras 2024 Date) deepak:वैदिक पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ मंगलवार 29 अक्टूबर 2024 की सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर होगा, और त्रयोदशी तिथि का समापन अगले दिन बुधवार 30 अक्टूबर 2024 की दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर होगा. उदया तिथि के अनुसार, इस वर्ष धनतेरस का त्योहार 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा. धनतेरस के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त (Dhanteras 2024 Puja Shubh Muhurat) हिंदू पंचांग के अनुसार, धनतेरस पूजा के लिए शुभ मुहूर्त की शुरुआत मंगलवार 29 अक्टूबर शाम 6 बजकर 31 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा, इस बार धनतेरस की पूजा के लिए कुल 1 घंटा 41 मिनट का समय मिलेगा. 1. मुख्य द्वार पर दीपक deepak 2. पूजा स्थल या मंदिर में 3. तिजोरी या धन रखने की जगह 4. रसोईघर में 5. पानी की टंकी के पास 6. द्वार पर मांडवा या तुलसी के पौधे के पास 7. छत पर दीपक 8. घर के प्रत्येक कोने में 9. द्वार पर रंगोली के साथ दीपक deepak 10. बगीचे या आंगन में इन विशेष स्थानों पर दीपक जलाने से घर में माँ लक्ष्मी का वास होता है और सुख-समृद्धि बनी रहती है। ध्यान रहे कि दीपक नियमित रूप से जलते रहें ताकि माँ लक्ष्मी की कृपा अनवरत बनी रहे।

Dhanteras ke din deepak kaha jalaye : धनतेरस के दिन इन जगहों पर दीपक जलाने से घर में होगा मां लक्ष्मी का वास! Read More »

Diwali Celebrations: दिवाली पर घर को सजाने के लिए रंगोली के ये डिजाइन हैं बेस्ट

Diwali Celebrations:दिवाली साल के मुख्य सबसे बड़े त्योहारों में से एक है. इस दिन हर तरफ लाइटिंग, जगमगाते हुए दीपक, आतिशबाजी, घरों में व्यंजनों की खुशबू दिल खुश कर देती है. इस बार दिवाली का फेस्टिवल 31 अक्टूबर को सेलिब्रेट किया जाएगा. आप इस खास दिन अपने आंगन में मां लक्ष्मी का स्वागत करने के लिए खूबसूरत और आसान Diwali Celebrations रंगोली डिजाइन बना सकते हैं. तो चलिए देख लेते हैं. दिवाली के दिन अगर ज्यादा समय नहीं है तो अपने आंगन में गेंदे और गुलाब के फूलों से ये फटाफट बनने वाली रंगोली डिजाइन बना सकती हैं. कुछ फूलों की पत्तियों को तोड़ लें तो कुछ फूलों का साबुत रखें, बीच में गोलाई बनाकर पत्तियां बना दें और फिर उसके ऊपर गेंदे के फूलों से गोलाई बनाएं. खाली बैकग्राउंड को फूलों की पंखुड़ियों से भरकर रंगोली कंप्लीट करें. रात में जब इस रंगोली पर दिए जलाएंगे तो यह बेहद खूबसूरत दिखेगी.  दिवाली पर घर को सजाने के लिए रंगोली एक प्रमुख परंपरा है, जिससे घर में सकारात्मकता और शुभता का वातावरण बनता है। यहाँ कुछ बेहतरीन रंगोली डिज़ाइन्स दिए जा रहे हैं जो दिवाली पर विशेष रूप से सुंदर और आकर्षक लगते हैं: 1. फूलों की रंगोली Diwali Celebrations 2. मोर रंगोली डिज़ाइन Diwali Celebrations 3. गणेश जी का डिज़ाइन Diwali Celebrations 4. मांडला रंगोली डिज़ाइन Diwali Celebrations 5. दीपक और कमल डिज़ाइन Diwali Celebrations 6. धन लक्ष्मी रंगोली डिज़ाइन Diwali 2024 Date and Time : दीपावली कब है, जानें धनतेरस, दिवाली, भाई दूज की सही तारीख 7. राधा-कृष्ण रंगोली 8. साधारण ज्योमेट्रिक डिज़ाइन Diwali Celebrations 9. पारंपरिक रंगोली 10. 3D रंगोली डिज़ाइन दिवाली पर रंगोली बनाते समय इसे दीपों और फूलों से सजाएं ताकि यह और भी आकर्षक लगे। ये डिज़ाइन न केवल सुंदर लगते हैं बल्कि घर में सुख-शांति और समृद्धि भी लाते हैं।

Diwali Celebrations: दिवाली पर घर को सजाने के लिए रंगोली के ये डिजाइन हैं बेस्ट Read More »

Don’t make these mistakes on Diwali: दिवाली के दिन भूल से भी न करें ये गलतियां, जानें क्या करें और क्या नहीं ?

Diwali Puja ke Niyam: दिवाली, हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार है. इस दिन हम सभी लक्ष्मी माता की पूजा करते हैं और घरों को रोशनी से जगमगाते हैं. लेकिन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, दिवाली के दिन कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. आइए जानते हैं दिवाली के दिन क्या करें और क्या नहीं? Diwali 2024 : दिवाली हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसे पूरे भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता है. इस दिन लक्ष्मी पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, जो सुख-समृद्धि लाने के उद्देश्य से किए जाते हैं. Diwali दिवाली के शुभ मौके पर माता लक्ष्मी की और गणेश जी की विधि विधान से पूजा का नियम हैं. मान्यता के अनुसार, इस दिन माता लक्ष्मी और गणेश जी पूजा और दान पुण्य करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है. लेकिन इस दिन विधिवत पूजा करने के साथ कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी माना जाता है. आइए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जानते हैं कि दिवाली के दिन क्या करना जरूरी होता है और किन कामों को करने से बचना चाहिए. दिवाली के दिन शुभता और सकारात्मकता बनाए रखने के लिए कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। इस दिन कुछ गलतियाँ होती हैं जिनसे बचना चाहिए, ताकि पर्व का पूर्ण लाभ मिल सके। आइए जानते हैं कि दिवाली के दिन क्या करें और क्या नहीं। Diwali Pe kya kare:क्या करें Diwali Pe Kya Nahi Kare:क्या नहीं करें इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर आप दिवाली का आनंद पूरी शुभता और सकारात्मकता के साथ उठा सकते हैं। दिवाली की पूजा विधि शुभ मूहुर्त और विधानों का पालन करके सम्पन्न की जाती है, जिसमें माँ लक्ष्मी, भगवान गणेश और अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। यहाँ पर एक सरल पूजा विधि दी जा रही है: Diwali 2024: इस दिन मनाई जाएगी दीपावली, जानें शुभ मुहूर्त और ऐतिहासिक महत्व Diwali Ke Din Pujan Sammgri:दिवाली पूजन सामग्री: Diwali Puja Vidhi:दिवाली पूजन विधि:

Don’t make these mistakes on Diwali: दिवाली के दिन भूल से भी न करें ये गलतियां, जानें क्या करें और क्या नहीं ? Read More »

धनतेरस पर खास उपाय: पूरे साल रहें निरोगी और खुशहाल

धनतेरस पर खास उपाय: पूरे साल रहें निरोगी और खुशहाल धनतेरस का त्यौहार न केवल धन और समृद्धि का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे जीवन में स्वास्थ्य और शांति बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण समय भी है। यदि आप इस धनतेरस पर कुछ खास उपाय अपनाते हैं, तो सालभर निरोगी और खुशहाल जीवन जी सकते हैं। इस ब्लॉग पोस्ट में हम आपके साथ कुछ ऐसे खास और सरल Health Tips for Dhanteras साझा करेंगे, जो आपको पूरे साल एनर्जी और स्वास्थ्य से भरपूर बनाए रखेंगे। 1. धातु का बर्तन खरीदें (Buy Metal Utensils on Dhanteras) धनतेरस पर धातु (Metal) का बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। यह न केवल समृद्धि का प्रतीक है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। विशेषकर तांबे और पीतल के बर्तनों में पानी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी होता है। Copper और Brass बर्तन में पानी पीने से पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर में पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है। Keyword: Dhanteras Metal Benefits, Health Tips for Dhanteras, तांबे के बर्तन के फायदे 2. धन्वंतरि पूजा (Dhanvantari Puja for Health) धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा (Dhanvantari Puja) करना शुभ माना जाता है। भगवान धन्वंतरि आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं और उनकी पूजा करने से शरीर निरोगी रहता है। स्वास्थ्य की देवी मानी जाने वाली तुलसी के पौधे का भी पूजा में प्रयोग करें। यह उपाय रोगों से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। Keyword: Dhanteras Puja Benefits, Dhanvantari Worship, आयुर्वेदिक पूजा धनतेरस 3. आयुर्वेदिक स्नान (Ayurvedic Bath for Health) इस धनतेरस पर नीम, तुलसी, हल्दी और गंगाजल को स्नान के पानी में मिलाकर स्नान करें। इस आयुर्वेदिक स्नान (Ayurvedic Bath) से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है और स्किन भी ग्लो करती है। नीम और तुलसी के गुणों से त्वचा के रोग दूर होते हैं और हल्दी से शरीर की अशुद्धियाँ निकलती हैं। Keyword: Ayurvedic Bath Benefits, Neem Bath Dhanteras, Health Tips on Dhanteras 4. घी का दीपक जलाएं (Light a Ghee Lamp) धनतेरस की रात को घर में घी का दीपक जलाएं। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और वातावरण शुद्ध होता है। माना जाता है कि घी का दीपक (Ghee Lamp) जलाने से रोगों से मुक्ति मिलती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। Keyword: Ghee Lamp Benefits, Dhanteras Rituals, Positive Energy Tips 5. तुलसी का पौधा लगाएं (Plant a Tulsi for Health) तुलसी का पौधा न केवल एक पवित्र पौधा है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद है। धनतेरस पर तुलसी का पौधा लगाने से पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। तुलसी के पत्तों का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है। Keyword: Tulsi Benefits, Health Tips Dhanteras, तुलसी के फायदे 6. रात में चांदी का गिलास पास रखें (Keep Silver Glass Near Bed) रात में अपने बिस्तर के पास चांदी का गिलास रखें। चांदी (Silver) शरीर को ठंडक प्रदान करती है और नींद में सुधार करती है। यह मेटल स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माना जाता है और इसके संपर्क से तनाव कम होता है। Keyword: Silver Health Benefits, Dhanteras Silver Tips, चांदी के फायदे 7. आरोग्य यंत्र की स्थापना (Place Arogya Yantra for Health) धनतेरस पर आरोग्य यंत्र (Arogya Yantra) की स्थापना करने से वर्षभर स्वास्थ्य में सुधार होता है। इसे पूजा स्थल में स्थापित करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और घर में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर रहती हैं। Keyword: Arogya Yantra Benefits, Health Yantra Dhanteras, आरोग्य यंत्र के लाभ निष्कर्ष धनतेरस (Dhanteras) पर इन छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर आप अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य में सुधार कर सकते हैं। भगवान धन्वंतरि की कृपा से और इन हेल्दी रिचुअल्स (Healthy Rituals) को अपनाकर इस वर्ष को निरोगी, सुखी और खुशहाल बना सकते हैं। धनतेरस का यह अवसर आपको न सिर्फ आर्थिक समृद्धि बल्कि अच्छे स्वास्थ्य का वरदान भी दे सकता है। इस धनतेरस पर स्वास्थ्य और समृद्धि का स्वागत करें और सालभर खुशहाल जीवन जीएं। Happy Dhanteras!

धनतेरस पर खास उपाय: पूरे साल रहें निरोगी और खुशहाल Read More »

Diwali 2024: इस दिन मनाई जाएगी दीपावली, जानें शुभ मुहूर्त और ऐतिहासिक महत्व

Diwali 2024:दीपावली, जिसे दिवाली भी कहा जाता है, भारत का एक प्रमुख और बेहद खास त्योहार है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और अज्ञानता पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। Diwali 2024 दीपावली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है और इसे रोशनी, रंगोली, मिठाइयाँ और पटाखों से सजाया जाता है। Diwali 2024 इस दिन लोग अपने घरों को दीपों और रंगीन लाइट्स से सजाते हैं, लक्ष्मी पूजा करते हैं, और परिवार व दोस्तों के साथ इस पावन पर्व का आनंद उठाते हैं। Diwali 2024:पौराणिक कथाओं के अनुसार, दीपावली के दिन भगवान राम, माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर अयोध्या लौटे थे, और उनके स्वागत के लिए नगरवासियों ने दीप जलाए थे। यह दिन इसलिए भी खास माना जाता है कि इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है, ताकि घर में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहे। दीपावली का पांच दिनों का यह त्योहार धनतेरस से शुरू होता है और भाई दूज पर समाप्त होता है। इस दौरान लोग अपने रिश्तेदारों, मित्रों को उपहार देते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं, और साथ में खुशियाँ मनाते हैं। Diwali 2024 Date and Time : दीपावली कब है, जानें धनतेरस, दिवाली, भाई दूज की सही तारीख दिवाली 2024 कब है? (When is Diwali 2024 दिवाली हमेशा कार्तिक अमावस्या की रात्रि के समय मनाई जाती है। दीपोत्सव हमेशा रात में ही किया जाता है। इस साल कार्तिक अमावस्या 31 अक्टूबर को दिन में 2 बजकर 40 मिनट से लग रही है, दीपावली के त्यौहार में रात्रि के समय अमावस्या होना जरूरी है। 1 नवम्बर की रात्रि को अमावस्या तिथि समाप्त हो जाएगी। साथ ही इसमें उदया तिथि की मान्यता नहीं होती; इसलिए इस साल दीपावली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। दीपावली का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व दीपावली का धार्मिक महत्व रामायण से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि इस दिन Diwali 2024 भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण चौदह वर्षों का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने उनके स्वागत में पूरे नगर को दीपों से सजाया था और तभी से दीपावली का पर्व मनाया जाने लगा। इसके साथ ही, इस दिन भगवान विष्णु ने नरकासुर का वध कर 16,000 कन्याओं को उसके कैद से मुक्त कराया था, इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का दिन भी कहा जाता है। लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त (Laxmi puja 2024 shubh muhurat) दीपावली के अवसर पर धन की देवी माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। लोग इस दिन माँ लक्ष्मी से अपने घर में धन, समृद्धि और शांति की कामना करते हैं। इस बार लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त 31 अक्टूबर 2024 को शाम 5 बजे से रात्रि 10 बजकर 30 मिनट तक है। कहा जाता है कि कार्तिक मास की अमावस्या पर समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इस दिन देवी लक्ष्मी की पूजा का खास महत्व है। Diwali 2024 इस दिन माता लक्ष्मी घर-घर जाकर अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और धन-दौलत का आशीर्वाद देती हैं। भगवान गणेश और माता लक्ष्मी को लगाएं ये भोग माता लक्ष्मी और भगवान गणेश को भोग में खीर, बूंदी के लड्डू, सिंघाड़ा, अनार, नारियल, पान का पत्ता, हलवा, मखाने, सफेद रंग की मिठाई, खील, चूरा, इलायची दाने का भोग लगाएं। दीपावली का सामाजिक महत्व दीपावली सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज को एकजुट करने वाला पर्व भी है। इस पर्व के पहले लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं, उन्हें सजाते हैं और विभिन्न प्रकार के पकवान तैयार करते हैं। यह पर्व परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशी मनाने का भी अवसर है। लोग एक-दूसरे को मिठाइयाँ और उपहार देते हैं, Diwali 2024 जिससे रिश्तों में मिठास और निकटता बढ़ती है। इसके साथ ही लोग इस दिन लोग जरूरतमंदों का भी ध्यान रखते हैं, इस दिन लोग उन जरूरतमंदों की सहायता करते हैं जो अपनी आर्थिक परेशानियों के कारण इस उत्सव में पूरे मन के साथ भाग नहीं ले पाते। इस दिन लोग जरूरतंमंदों को दीये, कपड़े, पटाखे, पूजा का समान और मिठाई आदि उपहार में देते हैं, ताकि हर घर खुशियों की दीपवाली मनाई जा सके। सामाजिक दृष्टि से दीपावली एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। दीपों के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि जीवन में चाहे कितना भी अंधकार हो, एक छोटा सा दीप भी उसे दूर कर सकता है। यह हमें यह सिखाता है कि हमें अपने जीवन में हर प्रकार के नकारात्मकता और बुराई को हटाकर अच्छाई की ओर बढ़ना चाहिए। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Diwali 2024: इस दिन मनाई जाएगी दीपावली, जानें शुभ मुहूर्त और ऐतिहासिक महत्व Read More »

Bhagwan Shri Sheetalnath Ji Chalisa:चालीसा: भगवान श्री शीतलनाथ जी

Shri Sheetalnath Ji Chalisa:शीतलनाथ जी की चालीसा:विभिन्न संप्रदायों में भिन्न चालीसें: जैन धर्म के भीतर विभिन्न संप्रदाय हैं, और प्रत्येक संप्रदाय के अपने विशिष्ट स्तोत्र और चालीसें हो सकती हैं। Shri Sheetalnath Ji Chalisa:लोकप्रियता: सभी देवताओं के लिए समान रूप से प्रचलित चालीसें नहीं होतीं। लिखित स्रोतों की सीमित उपलब्धता: सभी चालीसें लिखित रूप में उपलब्ध नहीं होतीं, कई बार ये मौखिक परंपराओं के माध्यम से पीढ़ी दर पीढ़ी передаई जाती हैं। Shri Sheetalnath Ji Chalisa:हम कैसे आगे बढ़ सकते हैं? आपके पास चालीसे का कोई हिस्सा या भाव है जो आपको याद है? Shri Sheetalnath Ji Chalisa:अधिक विशिष्ट जानकारी आप किस संप्रदाय के अनुयायी हैं? आपको किस प्रकार की चालीसा चाहिए Shri Sheetalnath Ji Chalisa (भावनात्मक, ज्ञानवर्धक, या किसी विशेष उद्देश्य के लिए)? शीतलनाथ जी के बारे में सामान्य जानकारी शीतलनाथ जी जैन धर्म के तीर्थंकर हैं। उन्हें शांति और शीतलता के देवता माना जाता है। Shri Sheetalnath Ji Chalisa उनकी पूजा करने से मन को शांति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। Bhagwan Shri Sheetalnath Ji:चालीसा: भगवान श्री शीतलनाथ जी शीतल हैं शीतल वचन, चन्दन से अधिकाय।कल्प वृक्ष सम प्रभु चरण, हैं सबको सुखकाय॥ जय श्री शीतलनाथ गुणाकर, महिमा मंडित करुणासागर।भाद्दिलपुर के दृढरथ राय, भूप प्रजावत्सल कहलाये॥ रमणी रत्न सुनन्दा रानी, गर्भ आये श्री जिनवर ज्ञानी।द्वादशी माघ बदी को जन्मे, हर्ष लहर उठी त्रिभुवन में॥ उत्सव करते देव अनेक, मेरु पर करते अभिषेक।नाम दिया शिशु जिन को शीतल, भीष्म ज्वाल अध् होती शीतल॥ एक लक्ष पुर्वायु प्रभु की, नब्बे धनुष अवगाहना वपु की।वर्ण स्वर्ण सम उज्जवलपीत, दया धर्मं था उनका मीत॥ निरासक्त थे विषय भोगो में, रत रहते थे आत्म योग में।एक दिन गए भ्रमण को वन में, करे प्रकृति दर्शन उपवन में॥ लगे ओसकण मोती जैसे, लुप्त हुए सब सूर्योदय से।देख ह्रदय में हुआ वैराग्य, आत्म राग में छोड़ा राग॥ तप करने का निश्चय करते, ब्रह्मर्षि अनुमोदन करते।विराजे शुक्र प्रभा शिविका में, गए सहेतुक वन में जिनवर॥ संध्या समय ली दीक्षा अश्रुण, चार ज्ञान धारी हुए तत्क्षण।दो दिन का व्रत करके इष्ट, प्रथामाहार हुआ नगर अरिष्ट॥ दिया आहार पुनर्वसु नृप ने, पंचाश्चार्य किये देवों ने।किया तीन वर्ष तप घोर, शीतलता फैली चहु और॥ कृष्ण चतुर्दशी पौषविख्यता, केवलज्ञानी हुए जगात्ग्यता।रचना हुई तब समोशरण की, दिव्यदेशना खिरी प्रभु की॥ आतम हित का मार्ग बताया, शंकित चित्त समाधान कराया।तीन प्रकार आत्मा जानो, बहिरातम अन्तरातम मानो॥ निश्चय करके निज आतम का, चिंतन कर लो परमातम का।मोह महामद से मोहित जो, परमातम को नहीं माने वो॥ वे ही भव भव में भटकाते, वे ही बहिरातम कहलाते।पर पदार्थ से ममता तज के, परमातम में श्रद्धा कर के॥ जो नित आतम ध्यान लगाते, वे अंतर आतम कहलाते।गुण अनंत के धारी हे जो, कर्मो के परिहारी है जो॥ लोक शिखर के वासी है वे, परमातम अविनाशी है वे।जिनवाणी पर श्रद्धा धर के, पार उतारते भविजन भव से॥ श्री जिन के इक्यासी गणधर, एक लक्ष थे पूज्य मुनिवर।अंत समय में गए सम्म्मेदाचल, योग धार कर हो गए निश्चल॥ अश्विन शुक्ल अष्टमी आई, मुक्तिमहल पहुचे जिनराई।लक्षण प्रभु का कल्पवृक्ष था, त्याग सकल सुख वरा मोक्ष था॥ शीतल चरण शरण में आओ, कूट विद्युतवर शीश झुकाओ।शीतल जिन शीतल करें, सबके भव आतप।अरुणा के मन में बसे, हरे सकल संताप॥

Bhagwan Shri Sheetalnath Ji Chalisa:चालीसा: भगवान श्री शीतलनाथ जी Read More »

Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा

Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा: कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा हिंदू धर्म में चित्रगुप्त देवता की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। चित्रगुप्त जी को सभी मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाला माना जाता है। वे यमराज के सचिव हैं Chitragupt Chalisa और मृत्यु के बाद हर व्यक्ति के कर्मों के आधार पर उसके स्वर्ग या नर्क जाने का निर्णय लेते हैं। Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा का महत्व Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा के प्रमुख बिंदु Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा कैसे गाएं? चित्रगुप्त चालीसा को श्रद्धा और भक्ति भाव से गाया जाना चाहिए। Chitragupt Chalisa आप किसी अनुभवी व्यक्ति से मार्गदर्शन ले सकते हैं या फिर ऑनलाइन उपलब्ध वीडियो और ऑडियो का सहारा ले सकते हैं। यहां कुछ टिप्स दिए गए हैं जो आपको चित्रगुप्त चालीसा गाते समय मदद कर सकते हैं: Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा ॥ दोहा ॥सुमिर चित्रगुप्त ईश को, सतत नवाऊ शीश।ब्रह्मा विष्णु महेश सह, रिनिहा भए जगदीश॥करो कृपा करिवर वदन, जो सरशुती सहाय।चित्रगुप्त जस विमलयश, वंदन गुरूपद लाय॥ ॥ चौपाई ॥जय चित्रगुप्त ज्ञान रत्नाकर।जय यमेश दिगंत उजागर॥ अज सहाय अवतरेउ गुसांई।कीन्हेउ काज ब्रम्ह कीनाई॥ श्रृष्टि सृजनहित अजमन जांचा।भांति-भांति के जीवन राचा॥ अज की रचना मानव संदर।मानव मति अज होइ निरूत्तर॥ ४ ॥ भए प्रकट चित्रगुप्त सहाई।धर्माधर्म गुण ज्ञान कराई॥ राचेउ धरम धरम जग मांही।धर्म अवतार लेत तुम पांही॥ अहम विवेकइ तुमहि विधाता।निज सत्ता पा करहिं कुघाता॥ श्रष्टि संतुलन के तुम स्वामी।त्रय देवन कर शक्ति समानी॥ ८ ॥ पाप मृत्यु जग में तुम लाए।भयका भूत सकल जग छाए॥ महाकाल के तुम हो साक्षी।ब्रम्हउ मरन न जान मीनाक्षी॥ धर्म कृष्ण तुम जग उपजायो।कर्म क्षेत्र गुण ज्ञान करायो॥ राम धर्म हित जग पगु धारे।मानवगुण सदगुण अति प्यारे॥ १२ ॥ विष्णु चक्र पर तुमहि विराजें।पालन धर्म करम शुचि साजे॥ महादेव के तुम त्रय लोचन।प्रेरकशिव अस ताण्डव नर्तन॥ सावित्री पर कृपा निराली।विद्यानिधि माँ सब जग आली॥ रमा भाल पर कर अति दाया।श्रीनिधि अगम अकूत अगाया॥ २० ॥ ऊमा विच शक्ति शुचि राच्यो।जाकेबिन शिव शव जग बाच्यो॥ गुरू बृहस्पति सुर पति नाथा।जाके कर्म गहइ तव हाथा॥ रावण कंस सकल मतवारे।तव प्रताप सब सरग सिधारे॥ प्रथम् पूज्य गणपति महदेवा।सोउ करत तुम्हारी सेवा॥ २४ ॥ रिद्धि सिद्धि पाय द्वैनारी।विघ्न हरण शुभ काज संवारी॥ व्यास चहइ रच वेद पुराना।गणपति लिपिबध हितमन ठाना॥ पोथी मसि शुचि लेखनी दीन्हा।असवर देय जगत कृत कीन्हा॥ लेखनि मसि सह कागद कोरा।तव प्रताप अजु जगत मझोरा॥ २८ ॥ विद्या विनय पराक्रम भारी।तुम आधार जगत आभारी॥ द्वादस पूत जगत अस लाए।राशी चक्र आधार सुहाए॥ जस पूता तस राशि रचाना।ज्योतिष केतुम जनक महाना॥ तिथी लगन होरा दिग्दर्शन।चारि अष्ट चित्रांश सुदर्शन॥ ३२ ॥ राशी नखत जो जातक धारे।धरम करम फल तुमहि अधारे॥ राम कृष्ण गुरूवर गृह जाई।प्रथम गुरू महिमा गुण गाई॥ श्री गणेश तव बंदन कीना।कर्म अकर्म तुमहि आधीना॥ देववृत जप तप वृत कीन्हा।इच्छा मृत्यु परम वर दीन्हा॥ ३६ ॥ धर्महीन सौदास कुराजा।तप तुम्हार बैकुण्ठ विराजा॥ हरि पद दीन्ह धर्म हरि नामा।कायथ परिजन परम पितामा॥ शुर शुयशमा बन जामाता।क्षत्रिय विप्र सकल आदाता॥ जय जय चित्रगुप्त गुसांई।गुरूवर गुरू पद पाय सहाई॥ ४० ॥ जो शत पाठ करइ चालीसा।जन्ममरण दुःख कटइ कलेसा॥ विनय करैं कुलदीप शुवेशा।राख पिता सम नेह हमेशा॥ ॥ दोहा ॥ज्ञान कलम, मसि सरस्वती, अंबर है मसिपात्र।कालचक्र की पुस्तिका, सदा रखे दंडास्त्र॥पाप पुन्य लेखा करन, धार्यो चित्र स्वरूप।श्रृष्टिसंतुलन स्वामीसदा, सरग नरक कर भूप॥ ॥ इति श्री चित्रगुप्त चालीसा समाप्त॥

Chitragupt Chalisa:चित्रगुप्त चालीसा Read More »

Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा

Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा: भैरव बाबा की स्तुति Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा हिंदू धर्म में भैरव बाबा की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। भैरव बाबा को शिव के क्रोध रूप के रूप में पूजा जाता है और उन्हें रक्षा और न्याय के देवता माना जाता है। Bhairav Chalisa भैरव चालीसा में भैरव बाबा के विभिन्न रूपों और उनकी शक्तियों का वर्णन किया गया है। Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा का महत्व Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा के प्रमुख बिंदु Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा कैसे गाएं? Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा को श्रद्धा और भक्ति भाव से गाया जाना चाहिए। आप किसी अनुभवी व्यक्ति से मार्गदर्शन ले सकते हैं या फिर ऑनलाइन उपलब्ध वीडियो और ऑडियो का सहारा ले सकते हैं। Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा ॥ दोहा ॥श्री गणपति गुरु गौरी पदप्रेम सहित धरि माथ ।चालीसा वंदन करोश्री शिव भैरवनाथ ॥ श्री भैरव संकट हरणमंगल करण कृपाल ।श्याम वरण विकराल वपुलोचन लाल विशाल ॥ ॥ चौपाई ॥जय जय श्री काली के लाला ।जयति जयति काशी-कुतवाला ॥ जयति बटुक-भैरव भय हारी ।जयति काल-भैरव बलकारी ॥ जयति नाथ-भैरव विख्याता ।जयति सर्व-भैरव सुखदाता ॥ भैरव रूप कियो शिव धारण ।भव के भार उतारण कारण ॥ भैरव रव सुनि हवै भय दूरी ।सब विधि होय कामना पूरी ॥ शेष महेश आदि गुण गायो ।काशी-कोतवाल कहलायो ॥ जटा जूट शिर चंद्र विराजत ।बाला मुकुट बिजायठ साजत ॥ कटि करधनी घुंघरू बाजत ।दर्शन करत सकल भय भाजत ॥ जीवन दान दास को दीन्ह्यो ।कीन्ह्यो कृपा नाथ तब चीन्ह्यो ॥ वसि रसना बनि सारद-काली ।दीन्ह्यो वर राख्यो मम लाली ॥ धन्य धन्य भैरव भय भंजन ।जय मनरंजन खल दल भंजन ॥ कर त्रिशूल डमरू शुचि कोड़ा ।कृपा कटाक्ष सुयश नहिं थोडा ॥ जो भैरव निर्भय गुण गावत ।अष्टसिद्धि नव निधि फल पावत ॥ रूप विशाल कठिन दुख मोचन ।क्रोध कराल लाल दुहुं लोचन ॥ अगणित भूत प्रेत संग डोलत ।बम बम बम शिव बम बम बोलत ॥ रुद्रकाय काली के लाला ।महा कालहू के हो काला ॥ बटुक नाथ हो काल गंभीरा ।श्‍वेत रक्त अरु श्याम शरीरा ॥ करत नीनहूं रूप प्रकाशा ।भरत सुभक्तन कहं शुभ आशा ॥ रत्‍न जड़ित कंचन सिंहासन ।व्याघ्र चर्म शुचि नर्म सुआनन ॥ तुमहि जाइ काशिहिं जन ध्यावहिं ।विश्वनाथ कहं दर्शन पावहिं ॥ जय प्रभु संहारक सुनन्द जय ।जय उन्नत हर उमा नन्द जय ॥ भीम त्रिलोचन स्वान साथ जय ।वैजनाथ श्री जगतनाथ जय ॥ महा भीम भीषण शरीर जय ।रुद्र त्रयम्बक धीर वीर जय ॥ अश्‍वनाथ जय प्रेतनाथ जय ।स्वानारुढ़ सयचंद्र नाथ जय ॥ निमिष दिगंबर चक्रनाथ जय ।गहत अनाथन नाथ हाथ जय ॥ त्रेशलेश भूतेश चंद्र जय ।क्रोध वत्स अमरेश नन्द जय ॥ श्री वामन नकुलेश चण्ड जय ।कृत्याऊ कीरति प्रचण्ड जय ॥ रुद्र बटुक क्रोधेश कालधर ।चक्र तुण्ड दश पाणिव्याल धर ॥ करि मद पान शम्भु गुणगावत ।चौंसठ योगिन संग नचावत ॥ करत कृपा जन पर बहु ढंगा ।काशी कोतवाल अड़बंगा ॥ देयं काल भैरव जब सोटा ।नसै पाप मोटा से मोटा ॥ जनकर निर्मल होय शरीरा ।मिटै सकल संकट भव पीरा ॥ श्री भैरव भूतों के राजा ।बाधा हरत करत शुभ काजा ॥ ऐलादी के दुख निवारयो ।सदा कृपाकरि काज सम्हारयो ॥ सुन्दर दास सहित अनुरागा ।श्री दुर्वासा निकट प्रयागा ॥ श्री भैरव जी की जय लेख्यो ।सकल कामना पूरण देख्यो ॥ ॥ दोहा ॥जय जय जय भैरव बटुक स्वामी संकट टार ।कृपा दास पर कीजिए शंकर के अवतार ॥

Bhairav Chalisa:भैरव चालीसा Read More »

Kaila Devi Chalisa:कैला देवी चालीसा

Kaila Devi Chalisa:कैला देवी चालीसा: एक विस्तृत विश्लेषण Kaila Devi Chalisa:कैला देवी चालीसा हिंदू धर्म में माता कैला देवी की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। यह चालीसा देवी के विभिन्न रूपों और उनकी शक्तियों का वर्णन करता है। Kaila Devi Chalisa माता कैला देवी को शक्ति की देवी माना जाता है और उनसे भक्त विभिन्न प्रकार की मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। Kaila Devi Chalisa:कैला देवी चालीसा का महत्व Kaila Devi Chalisa:कैला देवी चालीसा के प्रमुख बिंदु यहां कुछ टिप्स दिए गए हैं जो आपको कैला देवी चालीसा गाते समय मदद कर सकते हैं: Kaila Devi Chalisa:कैला देवी चालीसा नवदुर्गा, नवरात्रि, नवरात्रे, नवरात्रि, माता की चौकी, देवी जागरण, Kaila Devi Chalisa जगराता, शुक्रवार दुर्गा तथा अष्टमी के शुभ अवसर पर श्री कैला देवी मंदिर करौली में गाये जाने वाला श्री कैला मैया का प्रसिद्ध चालीसा। ॥ दोहा ॥जय जय कैला मात हेतुम्हे नमाउ माथ ॥शरण पडूं में चरण मेंजोडूं दोनों हाथ ॥ आप जानी जान होमैं माता अंजान ॥क्षमा भूल मेरी करोकरूँ तेरा गुणगान ॥ ॥ चौपाई ॥जय जय जय कैला महारानी ।नमो नमो जगदम्ब भवानी ॥ सब जग की हो भाग्य विधाता ।आदि शक्ति तू सबकी माता ॥ दोनों बहिना सबसे न्यारी ।महिमा अपरम्पार तुम्हारी ॥ शोभा सदन सकल गुणखानी ।वैद पुराणन माँही बखानी ॥4॥ जय हो मात करौली वाली ।शत प्रणाम कालीसिल वाली ॥ ज्वालाजी में ज्योति तुम्हारी ।हिंगलाज में तू महतारी ॥ तू ही नई सैमरी वाली ।तू चामुंडा तू कंकाली ॥ नगर कोट में तू ही विराजे ।विंध्यांचल में तू ही राजै ॥8॥ धौलागढ़ बेलौन तू माता ।वैष्णवदेवी जग विख्याता ॥ नव दुर्गा तू मात भवानी ।चामुंडा मंशा कल्याणी ॥ जय जय सूये चोले वाली ।जय काली कलकत्ते वाली ॥ तू ही लक्ष्मी तू ही ब्रम्हाणी ।पार्वती तू ही इन्द्राणी ॥12॥ सरस्वती तू विद्या दाता ।तू ही है संतोषी माता ॥ अन्नपुर्णा तू जग पालक ।मात पिता तू ही हम बालक ॥ तू राधा तू सावित्री ।तारा मतंग्डिंग गायत्री ॥ तू ही आदि सुंदरी अम्बा ।मात चर्चिका हे जगदम्बा ॥16॥ एक हाथ में खप्पर राजै ।दूजे हाथ त्रिशूल विराजै ॥ कालीसिल पै दानव मारे ।राजा नल के कारज सारे ॥ शुम्भ निशुम्भ नसावनि हारी ।महिषासुर को मारनवारी ॥ रक्तबीज रण बीच पछारो ।शंखासुर तैने संहारो ॥20॥ ऊँचे नीचे पर्वत वारी ।करती माता सिंह सवारी ॥ ध्वजा तेरी ऊपर फहरावे ।तीन लोक में यश फैलावे ॥ अष्ट प्रहर माँ नौबत बाजै ।चाँदी के चौतरा विराजै ॥ लांगुर घटूअन चलै भवन में ।मात राज तेरौ त्रिभुवन में ॥24॥ घनन घनन घन घंटा बाजत ।ब्रह्मा विष्णु देव सब ध्यावत ॥ अगनित दीप जले मंदिर में ।ज्योति जले तेरी घर-घर में ॥ चौसठ जोगिन आंगन नाचत ।बामन भैरों अस्तुति गावत ॥ देव दनुज गन्धर्व व किन्नर ।भूत पिशाच नाग नारी नर ॥28॥ सब मिल माता तोय मनावे ।रात दिन तेरे गुण गावे ॥ जो तेरा बोले जयकारा ।होय मात उसका निस्तारा ॥ मना मनौती आकर घर सै ।जात लगा जो तोंकू परसै ॥ ध्वजा नारियल भेंट चढ़ावे ।गुंगर लौंग सो ज्योति जलावै ॥32॥ हलुआ पूरी भोग लगावै ।रोली मेहंदी फूल चढ़ावे ॥ जो लांगुरिया गोद खिलावै ।धन बल विद्या बुद्धि पावै ॥ जो माँ को जागरण करावै ।चाँदी को सिर छत्र धरावै ॥ जीवन भर सारे सुख पावै ।यश गौरव दुनिया में छावै ॥36॥ जो भभूत मस्तक पै लगावे ।भूत-प्रेत न वाय सतावै ॥ जो कैला चालीसा पढ़ता।नित्य नियम से इसे सुमरता ॥ मन वांछित वह फल को पाता ।दुःख दारिद्र नष्ट हो जाता ॥ गोविन्द शिशु है शरण तुम्हारी ।रक्षा कर कैला महतारी ॥40॥ ॥ दोहा ॥संवत तत्व गुण नभ भुज सुन्दर रविवार ।पौष सुदी दौज शुभ पूर्ण भयो यह कार ॥॥ इति कैला देवी चालीसा समाप्त ॥

Kaila Devi Chalisa:कैला देवी चालीसा Read More »

Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa:श्री राणी सती दादी चालीसा

Rani Sati Dadi Ji Chalisa:श्री राणी सती दादी चालीसा Rani Sati Dadi Ji Chalisa:श्री राणी सती दादी चालीसा एक धार्मिक स्तुति है जो हिंदू धर्म में विशेषकर राजस्थान के क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है। यह चालीसा श्री राणी सती दादी, जिन्हें नारायणी देवी भी कहा जाता है, की स्तुति में लिखी गई है। Rani Sati Dadi Ji Chalisa माना जाता है कि श्री राणी सती दादी महाभारत काल में उत्तरा थीं और उन्हें भगवान श्री कृष्ण ने वरदान दिया था कि कलयुग में वे नारायाणी के नाम से श्री सती दादी के रूप में विख्यात होंगी। Rani Sati Dadi Ji Chalisa:चालीसा का महत्व Rani Sati Dadi Ji Chalisa:चालीसा में क्या होता है? श्री राणी सती दादी चालीसा में दादी जी के जीवन, उनके कार्यों और उनके महत्व के बारे में वर्णन किया जाता है। इसमें उनके गुणों, कृपा और चमत्कारों का वर्णन भी होता है। भक्त इस चालीसा का पाठ करते हुए दादी जी से अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की प्रार्थना करते हैं। Rani Sati Dadi Ji Chalisa:चालीसा का पाठ कैसे करें? Shri Rani Sati Dadi Ji:श्री राणी सती दादी ॥ दोहा ॥श्री गुरु पद पंकज नमन,दुषित भाव सुधार,राणी सती सू विमल यश,बरणौ मति अनुसार,काम क्रोध मद लोभ मै,भरम रह्यो संसार,शरण गहि करूणामई,सुख सम्पति संसार॥ ॥ चौपाई ॥नमो नमो श्री सती भवानी।जग विख्यात सभी मन मानी ॥ नमो नमो संकट कू हरनी।मनवांछित पूरण सब करनी ॥ नमो नमो जय जय जगदंबा।भक्तन काज न होय विलंबा ॥ नमो नमो जय जय जगतारिणी।सेवक जन के काज सुधारिणी ॥4 दिव्य रूप सिर चूनर सोहे ।जगमगात कुन्डल मन मोहे ॥ मांग सिंदूर सुकाजर टीकी ।गजमुक्ता नथ सुंदर नीकी ॥ गल वैजंती माल विराजे ।सोलहूं साज बदन पे साजे ॥ धन्य भाग गुरसामलजी को ।महम डोकवा जन्म सती को ॥8 तनधनदास पति वर पाये ।आनंद मंगल होत सवाये ॥ जालीराम पुत्र वधु होके ।वंश पवित्र किया कुल दोके ॥ पति देव रण मॉय जुझारे ।सति रूप हो शत्रु संहारे ॥ पति संग ले सद् गती पाई ।सुर मन हर्ष सुमन बरसाई ॥12 धन्य भाग उस राणा जी को ।सुफल हुवा कर दरस सती का ॥ विक्रम तेरह सौ बावन कूं ।मंगसिर बदी नौमी मंगल कूं ॥ नगर झून्झूनू प्रगटी माता ।जग विख्यात सुमंगल दाता ॥ दूर देश के यात्री आवै ।धुप दिप नैवैध्य चढावे ॥16 उछाङ उछाङते है आनंद से ।पूजा तन मन धन श्रीफल से ॥ जात जङूला रात जगावे ।बांसल गोत्री सभी मनावे ॥ पूजन पाठ पठन द्विज करते ।वेद ध्वनि मुख से उच्चरते ॥ नाना भाँति भाँति पकवाना ।विप्र जनो को न्यूत जिमाना ॥20 श्रद्धा भक्ति सहित हरसाते ।सेवक मनवांछित फल पाते ॥ जय जय कार करे नर नारी ।श्री राणी सतीजी की बलिहारी ॥ द्वार कोट नित नौबत बाजे ।होत सिंगार साज अति साजे ॥ रत्न सिंघासन झलके नीको ।पलपल छिनछिन ध्यान सती को ॥24 भाद्र कृष्ण मावस दिन लीला ।भरता मेला रंग रंगीला ॥ भक्त सूजन की सकल भीङ है ।दरशन के हित नही छीङ है ॥ अटल भुवन मे ज्योति तिहारी ।तेज पूंज जग मग उजियारी ॥ आदि शक्ति मे मिली ज्योति है ।देश देश मे भवन भौति है ॥28 नाना विधी से पूजा करते ।निश दिन ध्यान तिहारो धरते ॥ कष्ट निवारिणी दुख: नासिनी ।करूणामयी झुन्झुनू वासिनी ॥ प्रथम सती नारायणी नामा ।द्वादश और हुई इस धामा ॥ तिहूं लोक मे कीरति छाई ।राणी सतीजी की फिरी दुहाई ॥32 सुबह शाम आरती उतारे ।नौबत घंटा ध्वनि टंकारे ॥ राग छत्तीसों बाजा बाजे ।तेरहु मंड सुन्दर अति साजे ॥ त्राहि त्राहि मै शरण आपकी ।पुरी मन की आस दास की ॥ मुझको एक भरोसो तेरो ।आन सुधारो मैया कारज मेरो ॥36 पूजा जप तप नेम न जानू ।निर्मल महिमा नित्य बखानू ॥ भक्तन की आपत्ति हर लिनी ।पुत्र पौत्र सम्पत्ति वर दीनी ॥ 40 पढे चालीसा जो शतबारा ।होय सिद्ध मन माहि विचारा ॥ टिबरिया ली शरण तिहारी।क्षमा करो सब चूक हमारी ॥ ॥ दोहा ॥दुख आपद विपदा हरण,जन जीवन आधार ।बिगङी बात सुधारियो,सब अपराध बिसार ॥॥ मात श्री राणी सतीजी की जय ॥

Shri Rani Sati Dadi Ji Chalisa:श्री राणी सती दादी चालीसा Read More »

Dhanteras 2024: जानिए कब है धनतेरस, पूजा और खरीदारी का शुभ मुहूर्त

Dhanteras 2024:धनतेरस का त्योहार दीपावली से दो दिन पहले मनाया जाता है और यह विशेष रूप से धन और स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए पूजा और खरीदारी का दिन माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, जिन्हें चिकित्सा और आरोग्य का देवता माना जाता है, की पूजा की जाती है। इसके साथ ही धन के देवता कुबेर और माँ लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है, ताकि समृद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिले। Dhanteras 2024:धनतेरस के दिन विशेष रूप से सोना, चांदी, बर्तन, या अन्य धातु के सामान खरीदने का रिवाज है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सामान घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है। इसे “धन त्रयोदशी” भी कहा जाता है, क्योंकि यह कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को आता है। Dhanteras 2024:धनतेरस पर पूजा और विधि-विधान:  यह त्योहार खुशहाली, समृद्धि और सेहतमंद जीवन का प्रतीक माना जाता है. हिंदू पंचांग के अनुसार, Dhanteras धनतेरस का त्योहार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इस साल धनतेरस का पर्व 29 अक्तूबर 2024 को मनाया जाएगा. धनतेरस जिसे ‘धन त्रयोदशी’ के नाम से भी जाना जाता है.  धनतेरस का नाम ‘धन’ और ‘तेरस’ से बना है, जिसमें धन का मतलब संपत्ति और समृद्धि है और तेरस का अर्थ हिंदू कैलेंडर की 13वीं तिथि है. इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है. साथ ही यह दिन कुबेर और लक्ष्मी माता की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है. Dhanteras :1 घंटा 42 मिनट होगा तक रहेगा का धनतेरस पूजा समय नतेरस की त्रियोदशी तिथि 29 अक्तूबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट से शुरू हो जाएगी जो 30 अक्तूबर दोपहर एक बजकर 15 मिनट खत्म होगी. इस दिन प्रदोष काल शाम 5 बजकर 38 मिनट से रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा. धनतेरस के लिए 29 अक्तूबर को गोधूली काल शाम 6 बजकर 31 मिनट से रात 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. यानी धनतेरस के पूजन के लिए एक घंटा 42 मिनट का समय रहेगा. धनतेरस के दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है. जिसमें खरीदारी करना शुभ माना जाता है. पहला खरीदारी मुहूर्त 29 अक्तूबर की सुबह 6 बजकर 31 मिनट से 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. वहीं दूसरा मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा. दीवाली से ठीक पहले Dhanteras धनतेरस के दिन सोना, चांदी, बर्तन, गहने, या अन्य कीमती सामान खरीदने का विशेष महत्व बताया गया है. मान्यता है कि इस दिन जो भी चीजें खरीदी जाती हैं, वह घर में समृद्धि और धन का आगमन करती हैं. कुछ लोग इस दिन नए वाहन, संपत्ति या अन्य महत्वपूर्ण चीजों की भी खरीदारी करते हैं. इसके साथ ही आज के समय में इलेक्ट्रॉनिक्स और नए उपकरण धनतेरस पर खरीदना शुभ माना जाता है. Dhanteras :धनतेरस पर क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिएधनतेरस पर सोने और चांदी या बर्तन की खरीदारी करनी चाहिए. इसके साथ ही भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए. घर की साफ-सफाई और सजावट करनी चाहिए. वहीं धनतेरस के दिन किसी से न कर्ज लेना चाहिए और ना ही कर्ज देना भी चाहिए. इस दिन अशुद्ध स्थानों पर पूजा नहीं करनी चाहिए. इसके साथ ही क्रोध और नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

Dhanteras 2024: जानिए कब है धनतेरस, पूजा और खरीदारी का शुभ मुहूर्त Read More »

Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा

Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा: सिंधी समुदाय का आराध्य देवता Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा सिंधी समुदाय के आराध्य देवता श्री झूलेलाल की स्तुति में गाया जाने वाला एक भक्ति गीत है। श्री झूलेलाल को वरुण देव का अवतार माना जाता है Shri Jhulelal Chalisa और उन्हें संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा का महत्व Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा का अर्थ श्री झूलेलाल चालीसा में श्री झूलेलाल के विभिन्न रूपों और उनके महान कार्यों का वर्णन किया गया है। इसमें भक्त श्री झूलेलाल से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मोक्ष की प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं। Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा का जाप श्री झूलेलाल चालीसा का जाप सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। इसे एकाग्रचित होकर और मन में श्री झूलेलाल की छवि लेकर जाप करना चाहिए। Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा ॥ दोहा ॥जय जय जल देवता,जय ज्योति स्वरूप ।अमर उडेरो लाल जय,झुलेलाल अनूप ॥ ॥ चौपाई ॥रतनलाल रतनाणी नंदन ।जयति देवकी सुत जग वंदन ॥ दरियाशाह वरुण अवतारी ।जय जय लाल साईं सुखकारी ॥ जय जय होय धर्म की भीरा ।जिन्दा पीर हरे जन पीरा ॥ संवत दस सौ सात मंझरा ।चैत्र शुक्ल द्वितिया भगऊ वारा ॥4॥ ग्राम नसरपुर सिंध प्रदेशा ।प्रभु अवतरे हरे जन कलेशा ॥ सिन्धु वीर ठट्ठा राजधानी ।मिरखशाह नऊप अति अभिमानी ॥ कपटी कुटिल क्रूर कूविचारी ।यवन मलिन मन अत्याचारी ॥ धर्मान्तरण करे सब केरा ।दुखी हुए जन कष्ट घनेरा ॥8॥ पिटवाया हाकिम ढिंढोरा ।हो इस्लाम धर्म चाहुँओरा ॥ सिन्धी प्रजा बहुत घबराई ।इष्ट देव को टेर लगाई ॥ वरुण देव पूजे बहुंभाती ।बिन जल अन्न गए दिन राती ॥ सिन्धी तीर सब दिन चालीसा ।घर घर ध्यान लगाये ईशा ॥12॥ गरज उठा नद सिन्धु सहसा ।चारो और उठा नव हरषा ॥ वरुणदेव ने सुनी पुकारा ।प्रकटे वरुण मीन असवारा ॥ दिव्य पुरुष जल ब्रह्मा स्वरुपा ।कर पुष्तक नवरूप अनूपा ॥ हर्षित हुए सकल नर नारी ।वरुणदेव की महिमा न्यारी ॥16॥ जय जय कार उठी चाहुँओरा ।गई रात आने को भौंरा ॥ मिरखशाह नऊप अत्याचारी ।नष्ट करूँगा शक्ति सारी ॥ दूर अधर्म, हरण भू भारा ।शीघ्र नसरपुर में अवतारा ॥ रतनराय रातनाणी आँगन ।खेलूँगा, आऊँगा शिशु बन ॥20॥ रतनराय घर ख़ुशी आई ।झुलेलाल अवतारे सब देय बधाई ॥ घर घर मंगल गीत सुहाए ।झुलेलाल हरन दुःख आए ॥ मिरखशाह तक चर्चा आई ।भेजा मंत्री क्रोध अधिकाई ॥ मंत्री ने जब बाल निहारा ।धीरज गया हृदय का सारा ॥24॥ देखि मंत्री साईं की लीला ।अधिक विचित्र विमोहन शीला ॥ बालक धीखा युवा सेनानी ।देखा मंत्री बुद्धि चाकरानी ॥ योद्धा रूप दिखे भगवाना ।मंत्री हुआ विगत अभिमाना ॥ झुलेलाल दिया आदेशा ।जा तव नऊपति कहो संदेशा ॥28॥ मिरखशाह नऊप तजे गुमाना ।हिन्दू मुस्लिम एक समाना ॥ बंद करो नित्य अत्याचारा ।त्यागो धर्मान्तरण विचारा ॥ लेकिन मिरखशाह अभिमानी ।वरुणदेव की बात न मानी ॥ एक दिवस हो अश्व सवारा ।झुलेलाल गए दरबारा ॥32॥ मिरखशाह नऊप ने आज्ञा दी ।झुलेलाल बनाओ बन्दी ॥ किया स्वरुप वरुण का धारण ।चारो और हुआ जल प्लावन ॥ दरबारी डूबे उतराये ।नऊप के होश ठिकाने आये ॥ नऊप तब पड़ा चरण में आई ।जय जय धन्य जय साईं ॥36॥ वापिस लिया नऊपति आदेशा ।दूर दूर सब जन क्लेशा ॥ संवत दस सौ बीस मंझारी ।भाद्र शुक्ल चौदस शुभकारी ॥ भक्तो की हर आधी व्याधि ।जल में ली जलदेव समाधि ॥ जो जन धरे आज भी ध्याना ।उनका वरुण करे कल्याणा ॥40॥ ॥ दोहा ॥चालीसा चालीस दिन पाठ करे जो कोय ।पावे मनवांछित फल अरु जीवन सुखमय होय ॥॥ ॐ श्री वरुणाय नमः ॥

Shri Jhulelal Chalisa:श्री झूलेलाल चालीसा Read More »