Apara Ekadashi 2026 Mein Kab Hai: सनातन वैदिक पंचांग के अनुसार, चंद्रमा के घटते और बढ़ते चरणों के आधार पर हर महीने में दो एकादशी तिथियां आती हैं, जिन्हें हम शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष की एकादशी के नाम से जानते हैं। इस तरह पूरे एक साल में कुल 24 एकादशियां पूरे भारत में मनाई जाती हैं। इन सभी एकादशियों का अपना-अपना एक बहुत ही गहरा और अलग धार्मिक महत्व है, लेकिन इन सबमें भगवान श्री हरि विष्णु को तुरंत प्रसन्न करने और अपार ईश्वरीय पुण्य कमाने के लिए apara ekadashi 2026 को सबसे अधिक शक्तिशाली और चमत्कारिक माना जाता है।
इस पावन एकादशी को भारत के विभिन्न हिस्सों में कई अन्य पवित्र नामों से भी पुकारा जाता है, जैसे कि ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी, भद्रकाली एकादशी और जलक्रीड़ा एकादशी। संस्कृत व्याकरण में ‘अपरा’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ही ‘असीमित’ या ‘अपार’ होता है। इसका बहुत ही स्पष्ट और सीधा अर्थ यह है कि जो भी व्यक्ति पूरे सच्चे हृदय और वैदिक निष्ठा के साथ apara ekadashi 2026 का यह पवित्र उपवास करता है, उसे अपने जीवन में अपार सुख, भौतिक संपत्ति और अंत में मोक्ष की असीम प्राप्ति होती है।
तारीख और सही समय (Date and Time)

हिंदू धर्म के किसी भी उपवास को करने वाले श्रद्धालु के मन में सबसे पहला सवाल यही होता है कि इस साल व्रत की एकदम सही और सटीक तिथि क्या है। वैदिक पंचांग की गहन और सटीक गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष apara ekadashi 2026 का यह पावन पर्व 13 मई 2026, दिन बुधवार को पूरे देश में अत्यंत उल्लास, श्रद्धा और गहरी भक्ति-भाव के साथ मनाया जाएगा।
एकादशी तिथि का शुभ आरंभ: 12 मई 2026 को दोपहर 02 बजकर 52 मिनट पर होगा।
एकादशी तिथि का पूर्ण समापन: 13 मई 2026 को दोपहर 01 बजकर 29 मिनट पर होगा। हमारे सनातन धर्म में हमेशा सूर्योदय के समय मौजूद तिथि (जिसे उदया तिथि कहा जाता है) को ही पूरे दिन के उपवास के लिए सबसे शुद्ध और फलदायी माना जाता है, इसलिए यह मुख्य व्रत 13 मई 2026 को ही रखा जाएगा।
पूजा का सटीक शुभ मुहूर्त:Exact Auspicious Time of Puja
किसी भी वैदिक अनुष्ठान, मंत्र जाप और देवी-देवताओं की पूजा की पूर्ण सफलता के लिए उसका बिल्कुल सही समय पर होना बेहद आवश्यक होता है। अगर हम इस पवित्र दिन के apara ekadashi 2026 shubh muhurat की बात करें, तो पंचांग में पूजा के लिए कई अत्यंत शुभ और पूर्ण रूप से जाग्रत समय विस्तार से बताए गए हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04 बजकर 08 मिनट से लेकर 04 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 33 मिनट से लेकर 03 बजकर 27 मिनट तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07 बजकर 02 मिनट से लेकर 07 बजकर 23 मिनट तक होगा।
निशिता मुहूर्त: रात 11 बजकर 56 मिनट से लेकर मध्यरात्रि 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा। Apara Ekadashi 2026 अपने व्रत की शत-प्रतिशत सफलता और भगवान विष्णु का असीम आशीर्वाद सुनिश्चित करने के लिए आपको इसी apara ekadashi 2026 shubh muhurat के दौरान अपनी मुख्य पूजा और आराधना संपन्न करनी चाहिए।
Jhulan Yatra Utsav 2026: झूलन यात्रा तिथि, पौराणिक कथा, महत्व और प्रमुख कृष्ण मंदिरों में झूलन उत्सव की धूम….
Jhulan Yatra Utsav 2026 Mein kab Hai : सनातन धर्म और वैष्णव परंपरा में भगवान श्री कृष्ण और आदि शक्ति…
Nag Panchami 2026 Subh Muhurat And Puja Vidhi : कब मनाई जाएगी नाग पंचमी जानिए तिथि, पूजा विधि और महत्व….
Nag Panchami 2026 : सनातन धर्म और हमारी प्राचीन भारतीय परंपरा में त्योहारों का संबंध केवल पूजा-पाठ से नहीं, बल्कि…
Surya Grahan 2026 Date And Time : साल के सबसे बड़े सूर्य ग्रहण का समय, सूतक काल, दृश्यता और राशियों पर प्रभाव….
Surya Grahan 2026 Mein kab Hai : ब्रह्मांड की अनंत गहराइयों में कई अद्भुत खगोलीय घटनाएं घटित होती हैं, जो…
व्रत के कड़े नियम और अनुष्ठान की विधि: Strict Rules of Fasting And Method of Rituals
सनातन शास्त्रों में apara ekadashi 2026 के नियम अत्यंत सख्त बताए गए हैं, लेकिन ये कड़े नियम इंसान की आत्मशुद्धि के लिए बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली भी होते हैं। इस महान व्रत का पालन एक दिन पहले यानी दशमी तिथि (12 मई) की शाम से ही शुरू हो जाता है।
दशमी तिथि को सूर्यास्त होने के बाद आपको किसी भी प्रकार का भारी अन्न या तामसिक भोजन बिल्कुल ग्रहण नहीं करना चाहिए।
अगले दिन सुबह यानी apara ekadashi 2026 के दिन सूर्योदय से काफी पहले उठकर किसी पवित्र नदी में या अपने घर पर ही गंगाजल मिले हुए शुद्ध पानी से स्नान करें और स्वच्छ पीले रंग के वस्त्र धारण करें।
घर के पूजा स्थल की पूर्व दिशा में एक लकड़ी की साफ चौकी पर पीले रंग का पवित्र कपड़ा बिछाएं और उस पर साक्षात भगवान विष्णु की सुंदर मूर्ति या तस्वीर पूरी श्रद्धा के साथ स्थापित करें।
भगवान के सामने शुद्ध देसी घी का एक बड़ा दीया जलाएं, सुगन्धित अगरबत्ती दिखाएं और उन्हें पीला चंदन, पान, सुपारी, लौंग, ताजे मौसमी फल और पवित्र गंगाजल अर्पित करें। एक बात का विशेष ध्यान हमेशा रखें कि तुलसी के पत्तों के बिना भगवान विष्णु की कोई भी पूजा या भोग बिल्कुल अधूरा माना जाता है।
एकादशी के पूरे दिन पूर्ण रूप से सात्विक आचरण और शुद्ध विचार रखें। Apara Ekadashi 2026 किसी भी प्रकार का अनाज, चावल, लहसुन, प्याज या तामसिक भोजन पकाना और खाना सख्त वर्जित है।
इस पावन दिन विष्णु सहस्रनाम का सस्वर पाठ करना अत्यंत ही लाभकारी और शुभ फलों को देने वाला माना जाता है। इसके अलावा किसी से झूठ न बोलें और अकारण क्रोध से पूरी तरह से बचें।
apara ekadashi 2026 की पूजा समाप्त करने के बाद भगवान की आरती करें और श्रद्धापूर्वक व्रत कथा का पाठ करें या अपने परिवार के साथ बैठकर सुनें।
Top rated products
Gayatri Mantra Jaap for Wisdom and Knowledge
View Details₹5,100.00Sawan Vishesh Rudrabhishek Puja at Turantnath Dham, Gola Gokarannath | Online Booking | KARMASU
Original price was: ₹5,100.00.₹3,100.00Current price is: ₹3,100.00.Kaal Sarp Dosh Puja Online – राहु-केतु के दोष से पाएं मुक्ति
View Details₹5,100.00Saraswati Mantra Chanting for Intelligence & Academic Success
View Details₹11,000.00Surya Gayatri Mantra Jaap Online
View Details₹1,000.00
प्रेरणादायक पौराणिक व्रत कथा:inspirational mythological fasting story
हिंदू धर्म में बिना कथा सुने कोई भी एकादशी व्रत अपना पूर्ण फल प्रदान नहीं करता है। प्राचीन पुराणों में वर्णित apara ekadashi 2026 की कथा अत्यंत भावुक करने वाली और ईश्वरीय न्याय को बहुत गहराई से दर्शाने वाली है।
पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में महिध्वज नाम का एक शासक हुआ करता था, जो स्वभाव से बहुत ही दयालु, धर्मात्मा और हमेशा न्याय करने वाला था। लेकिन उसका छोटा भाई वज्रध्वज उससे बहुत अधिक ईर्ष्या करता था और उसका स्वभाव राजा के बिल्कुल विपरीत यानी अत्यंत क्रूर था। एक दिन दुष्ट वज्रध्वज ने धोखे से अपने बड़े भाई राजा महिध्वज की बेरहमी से हत्या कर दी और उसके शव को एक पुराने पीपल के पेड़ के नीचे दफना दिया।
अकाल मृत्यु और अपने ही भाई द्वारा धोखे से मारे जाने के कारण राजा की आत्मा को मोक्ष प्राप्त नहीं हुआ और वह एक भयंकर प्रेत बनकर उसी पीपल के पेड़ के आस-पास राहगीरों को भटकाने और परेशान करने लगी। एक दिन उसी रास्ते से एक महान और पहुंचे हुए सिद्ध ऋषि गुजर रहे थे। जब उनका सामना उस भटकती हुई प्रेत आत्मा से हुआ, तो ऋषि ने अपनी अलौकिक शक्तियों से उसके प्रेत बनने का पूरा कारण विस्तार से जान लिया। उस दयालु ऋषि ने राजा की आत्मा को इस भयंकर प्रेत योनि से हमेशा के लिए मुक्त करने का एक दृढ़ संकल्प लिया।
राजा की पूर्ण मुक्ति के लिए, ऋषि ने स्वयं पूरे वैदिक विधि-विधान से अपरा एकादशी का कठोर उपवास रखा। और जब द्वादशी का शुभ दिन आया, तो ऋषि ने अपने व्रत से प्राप्त हुआ सारा ईश्वरीय पुण्य उस राजा की आत्मा को अर्पित कर दिया (दान कर दिया)। इस महापुण्य के जादुई प्रभाव से राजा को तुरंत प्रेत योनि से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया और वह सीधे वैकुंठ धाम (मोक्ष) को प्राप्त हुआ।
एक अन्य मान्यता के अनुसार, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं धर्मराज युधिष्ठिर को इस महान उपवास के अद्भुत फायदे बताए थे। मान्यता है कि जो भी व्यक्ति apara ekadashi 2026 की यह कथा सुनता है, वह अपने सभी पिछले और वर्तमान पापों से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है।
व्रत के जादुई आध्यात्मिक और भौतिक लाभ:Magical Spiritual and Physical Benefits of Fasting
अगर आप अपने जीवन में लगातार आर्थिक कष्टों, असाध्य बीमारियों या पिछले जन्मों के किसी भारी दोष से बुरी तरह पीड़ित हैं, तो apara ekadashi 2026 आपके लिए एक अचूक और जादुई समाधान है। हमारे धार्मिक ग्रंथों और ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की सच्चे मन से पूजा करने और व्रत रखने से मनुष्य को वही भारी पुण्य मिलता है जो एक विशाल अश्वमेध यज्ञ करने से, पवित्र कार्तिक मास में गंगा स्नान करने से या फिर एक हजार गायों का निस्वार्थ दान करने से प्राप्त होता है।
यह व्रत व्यक्ति को ब्रह्महत्या, परनिंदा (दूसरों की बुराई करना) और प्रेत योनि जैसे भयंकर पापों और पुराने श्रापों से पूरी तरह मुक्त कर देता है। इसके साथ ही यह आपको…..









KARMASU