Lakshmi Stotra:मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला दिव्य स्तोत्र

Lakshmi Stotra:(श्री लक्ष्मी स्तोत्र): लक्ष्मी की पूजा में प्रतिदिन लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए, जिसने सभी प्रकार के धन-धान्य प्रदान किए हैं। लक्ष्मी की कृपा से हमें यश, सौभाग्य, आरोग्य, ऐश्वर्य, शील, विद्या, विनय, ईमानदारी और कांति की प्राप्ति होती है। आश्चर्य की बात यह है कि लक्ष्मी स्तोत्र के पाठ से अपार संपत्ति की प्राप्ति होती है। जिसमें श्री महालक्ष्मी की बहुत ही सुंदर पूजा की गई है। हिंदू पौराणिक कथाओं में देवी लक्ष्मी आठ प्रकार की हैं जो दरिद्रता को जलाकर व्यक्ति को धनवान बनाती हैं। भक्तिपूर्वक देवी लक्ष्मी के स्तोत्र का नियमित पाठ करने से सभी बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। हिंदू धर्मग्रंथों में देवी लक्ष्मी के आठ रूपों का वर्णन किया गया है। Lakshmi Stotra लक्ष्मी स्तोत्र का सर्वप्रथम भगवान इंद्र ने देवी श्री लक्ष्मी की स्तुति में पाठ किया था। मूल रूप से पद्म पुराण में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ किया गया था। उनके चार हाथ हिंदू जीवन शैली के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले मानव जीवन के चार लक्ष्यों – धर्म (धार्मिकता और कर्तव्य) काम (सांसारिक इच्छाएं), अर्थ (धन और समृद्धि) और मोक्ष (मुक्ति) का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी हथेलियाँ हमेशा खुली रहती हैं और कभी-कभी उनसे सिक्के गिरते हुए दिखाई देते हैं जो दर्शाता है कि वह धन और समृद्धि प्रदान करने वाली हैं। उन्हें एक सुंदर बगीचे में या नीले-सागर में कमल पर बैठे या खड़े हुए दिखाया गया है। उनके चारों ओर या तो दो या चार सफेद हाथी जल से उनका अभिषेक कर रहे हैं। उनके वाहन यानी सवारी सफेद हाथी और उल्लू हैं। Lakshmi Stotra लक्ष्मी स्तोत्र देवी महा लक्ष्मी की प्रार्थना है जिन्हें “श्री” भी कहा जाता है और जो धन के साथ-साथ शुभता का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। हर दिन श्री महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करने या सुनने से व्यक्ति को सफलता और सांसारिक लाभ प्राप्त होंगे। इस अष्टकम के अंत में ही कहा गया है कि यदि इसे प्रतिदिन एक बार पढ़ा जाए तो महान पाप नष्ट हो जाते हैं। यदि इसे प्रतिदिन दो बार पढ़ा जाए तो धन और समृद्धि सुनिश्चित होती है। यदि इसे प्रतिदिन तीन बार पढ़ा जाए तो महान शत्रु (अहंकार) का नाश होता है। देवी महालक्ष्मी उस शुभ व्यक्ति से हमेशा प्रसन्न रहती हैं। Lakshmi Stotra Ke Labh:लक्ष्मी स्तोत्र के लाभ: Lakshmi Stotra:लक्ष्मी स्तोत्र का जाप वित्तीय समृद्धि, बुद्धि और समझ के लिए किया जाता है। भगवान विष्णु की पत्नी और गतिशील ऊर्जा श्री लक्ष्मी को हिंदुओं द्वारा धन, भाग्य, विलासिता और समृद्धि (भौतिक और आध्यात्मिक दोनों) की देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्हें लाल कपड़ों में दर्शाया गया है और सोने के आभूषणों से सजाया गया है। लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित जाप मन को शांति देता है और आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो लोग गरीबी, असफलता और दुर्भाग्य से पीड़ित हैं, उन्हें तत्काल राहत के लिए लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री लक्ष्मी स्तोत्र हिंदी पाठ:Lakshmi Stotra in Hindi नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि ।सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। सर्वज्ञे सर्ववरदे देवी सर्वदुष्टभयंकरि ।सर्वदु:खहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणी ।परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते ।जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं य: पठेद्भक्तिमान्नर: ।सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ।। एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।द्विकालं य: पठेन्नित्यं धन्यधान्यसमन्वित: ।। त्रिकालं य: पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ।। ।। इति श्री लक्ष्मी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

Lakshmi Stotra:मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला दिव्य स्तोत्र Read More »

Yogini Ekadashi 2025 Date: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Yogini Ekadashi 2025 Date: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो कोई इस दिन व्रत रखकर भगवान की उपासना करता है, उसके हर संकट दूर हो जाते हैं. Yogini Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल भर में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. हर महीने दो एकादशी पड़ती है- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में, हर एकादशी व्रत का अपना अलग महत्व है. वैदिक पंचांग के अनुसार, कुछ दिनों में आषाढ़ मास की शुरुआत होने वाली है. इस महीने की पहली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के दिन भी व्रत रखकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कहते हैं कि इस एकादशी के व्रत से अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि जून में योगिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, व्रत-पूजन के लिए शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है. सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महत्व है। यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। हर महीने में एकादशी दो बार मनाई जाती है। एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को ‘योगिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस एकादशी (Yogini Ekadashi 2025) का उपवास करने से पापों से मुक्ति मिलती है। वहीं, इसकी डेट को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन बनी हुई है, आइए यहां इसकी डेट जानते हैं। कब मनाई जाएगी योगिनी एकादशी 2025? (Yogini Ekadashi 2025 Kab Hai?) हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के अनुसार, तीज-त्योहार मनाए जाते हैं। इसलिए 21 जून को योगिनी एकादशी का उपवास रखा जाएगा। योगिनी एकादशी 2025 पूजा विधि (Yogini Ekadashi 2025 Puja Vidhi) योगिनी एकादशी का महत्व:Importance of Yogini Ekadashi हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है. शास्त्रों के जानकार बताते हैं कि जो कोई किन्हीं कारणों से निर्जला एकादशी का व्रत नहीं रख सकते, वे इस एकादशी का व्रत रखकर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है. इस दिन भगवान को खीर का भोग लगाना चाहिए. इसके अलावा इस दिन ‘ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से बीमारी से मुक्ति मिलती है. योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व (Yogini Ekadashi 2025 Significance) योगिनी एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक इस कठिन उपवास का पालन करते हैं, उन्हें आरोग्य और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है। ऐसे में इस पावन दिन उपवास जरूर करें। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

Yogini Ekadashi 2025 Date: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि Read More »

Murder in Dream:सपने में किसी का खून होते देखना, इसका क्या मतलब होता है ?

Murder in Dream:हर कोई अच्छा और बुरा सपना देखता है, लेकिन बुरे सपने देखने से क्या सच में आपके साथ बुरा होता है या नही स्वप्न शास्त्र में इसके बारे में बताया गया है. Dream Interpretation: सपने हर कोई देखता है. कुछ सपने लोगों को खुश कर देते है तो कुछ सपने चिंता में डाल देते हैं. कई बार सपना देखने के दौरान नींद उड़ जाती है और लोग डर जाते हैं. स्वप्न शास्त्र में कहा गया है कि कई बार जो हम देखते हैं जरुरी नहीं की वो सच हो जाए. आज हम आपको बताने जा रहे है सपने में मर्डर (Murder in Dream) होते देखने का क्या मतलब होता है. आइए जानते हैं. Murder in Dream:खुद की मौत का सपना देखना स्वप्न शास्त्र (Murder in Dream) के मुताबिक अगर अपने सपने में खुद को मरा हुआ देख लिया है तो इसका मतलब ये शुभ संकेत होता है मतलब की आपकी उम्र बढ़ चुकी है. इसके साथ ही आने वाले दिनों में जो मुसीबत आ सकती थी, वो अब टल चुकी है. आने वाले दिनों में आपको धन का लाभ होगा. आपकी सभी मनोकामना पूर्ण होने वाली है. सपने में खुद को सुसाइड करते देखने का मतलब उम्र का बढ़ना होता है. सपने में परिजनों की मौत को देखना:Seeing the death of family members in the dream अगर सपने (Dream) में आप अपने परिजनों में किसी सदस्य की मृत्यु को देखते है तो इसका मतलब ये उनकी उम्र में वृद्धि का शुभ संकेत है. इसके साथ ही उनके जीवन में किसी नई चीज का शुभारंभ होने वाला है. Murder in Dream अगर वो व्यक्ति काफी दिनों से बीमार है तो कुछ ही दिनों में उसके ठीक होने की संभावना है. वही आपको आने वाले दिनों में करियर से जुड़ी कोई अच्छी सूचना मिल सकती है. साथ ही साथ आपकी इनकम में भी इजाफा हो सकता है.   सपने में जहर के सेवन से मरना:Dying by consuming poison in dream अगर आपने सपने में किसी को जहर पीकर मरते देखा तो इसका मतलब की उसकी मौत तड़पकर होगी. ऐसे में इस तरह के सपने को देखने के बाद डरे नहीं, बल्कि सुबह उठकर मंदिर जाए और शिवजी को जल चढ़ाएं. सपने में खुद को रोता हुआ देखना:Seeing yourself crying in a dream अगर आप सपने में खुद को रोता हुआ देखते हैं तो ये बेहद ही शुभ संकेत माना जाता है. इसका मतलब आने वाले दिनों में आपकी कोई भी योजना पूरी हो सकती है. आपको आकस्मिक धन मिल सकता है. सपने में खुद को कब्रिस्तान (Qabristan) के बीच देखने का मतलब भी शुभ संकेत होता है. भावनात्मक तीव्रता और जीवन शक्ति:emotional intensity and vitality रक्त अक्सर जीवन और स्फूर्ति का प्रतीक होता है। सपनों में, यह आपकी भावनात्मक तीव्रता या आपके जागते जीवन में जुनून के स्तर का प्रतिनिधित्व कर सकता है। Murder in Dream आप विशेष रूप से जीवंत, ऊर्जावान या भावनात्मक रूप से आवेशित महसूस कर सकते हैं। जुनून और इच्छा:passion and desire रक्त भी तीव्र जुनून या इच्छाओं को दर्शाता है। ये सपने संकेत दे सकते हैं कि आप किसी चीज़ या व्यक्ति में गहराई से निवेश कर रहे हैं, और आपका अवचेतन मन इन भावनाओं की तीव्रता को उजागर कर रहा है। भावनात्मक घाव:emotional wounds अगर आप अपने सपनों में खून देखते हैं, तो यह भावनात्मक घावों की ओर इशारा कर सकता है जो पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। यह पिछले आघात, अनसुलझे संघर्षों या आपके व्यक्तिगत या पेशेवर जीवन में चल रहे संघर्षों से संबंधित हो सकता है। शारीरिक पीड़ा:physical discomfort कभी-कभी, खून के बारे में सपने शारीरिक परेशानी या स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का प्रकटीकरण हो सकते हैं। हो सकता है कि आपका अवचेतन मन इस कल्पना का उपयोग आपको अपने शरीर की ज़रूरतों पर ध्यान देने के लिए सचेत करने के लिए कर रहा हो। जीवन में बदलाव:change in life रक्त परिवर्तन का एक शक्तिशाली प्रतीक है। यह जीवन और मृत्यु से निकटता से जुड़ा हुआ है, जो इसे परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण संकेतक बनाता है। सपनों में रक्त जीवन में बड़े बदलावों का संकेत दे सकता है, Murder in Dream जैसे कि किसी नई जगह पर जाना, नई नौकरी शुरू करना या जीवन के नए चरण में प्रवेश करना। ये सपने आपको आने वाले बदलावों के लिए तैयार कर सकते हैं और आपको उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। व्यक्तिगत विकास:personal development खून का सपना देखना व्यक्तिगत विकास और परिवर्तन का संकेत हो सकता है। Murder in Dream यह संकेत दे सकता है कि आप विकसित हो रहे हैं और बदल रहे हैं, पुरानी आदतों या विश्वासों को पीछे छोड़ रहे हैं और सोचने और जीने के नए तरीके अपना रहे हैं।

Murder in Dream:सपने में किसी का खून होते देखना, इसका क्या मतलब होता है ? Read More »

Lakshmi Narsingh Stotra:श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र

Lakshmi Narsingh Stotra:लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र (श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र): लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र भगवान महाविष्णु और लक्ष्मी के सबसे शक्तिशाली स्वरूपों में से एक है, जो हिंदू त्रय में रक्षक हैं। संस्कृत में कई मंत्र भगवान नरसिंह की स्तुति और प्रार्थना करते हैं और किसी भी चुने हुए नरसिंह मंत्र का उचित श्रद्धा, परिश्रम और भक्ति के साथ जाप करने से भय दूर हो सकता है और भक्तों को सभी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। नीचे सरल, लेकिन गहन इस स्तोत्र का संग्रह देखें जो कई तरह के लाभ प्रदान कर सकता है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र की रचना श्री आदि शंकराचार्य ने की थी। Lakshmi Narsingh Stotra इस स्तोत्र में क्रोधित भगवान या उग्र नरसिंह को शांत करने के लिए भगवान लक्ष्मी नरसिंह की स्तुति की गई है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र जिसे श्री लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है, लक्ष्मी नरसिंह की स्तुति में 17-श्लोकों वाला स्तोत्र है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें से प्रत्येक श्लोक एक ही वाक्य “लक्ष्मी नरसिंह, मम देहि” के साथ समाप्त होता है जिसका अर्थ है “हे भगवान नरसिंह, कृपया मुझे अपना सहायक हाथ दें”। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र को घर में प्रतिदिन सुनने से व्यक्ति का क्रोध कम होता है और घर में शांति बनी रहती है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र एक महान प्रार्थना है जिसे हर किसी को अपनी दैनिक आध्यात्मिक साधना का हिस्सा बनाना चाहिए। यह स्तोत्र भगवान नरसिंह को समर्पित महामंत्र है। यह स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है जो वैदिक पाठ से लिया गया है। जब स्तोत्र और नरसिंह गायत्री मंत्र के पाठ के बाद लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र का जाप किया जाता है, Lakshmi Narsingh Stotra तो महामंत्र के जाप का लाभ कई गुना बढ़ जाता है। Lakshmi Narsingh Stotra नरसिंह भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। वे आधे मनुष्य और आधे शेर थे। वे हिरण्यकश्यप नामक राक्षस राजा को खत्म करने के लिए प्रकट हुए थे, जिसने अपने बेटे प्रह्लाद को भी नहीं बख्शा क्योंकि उसने उसे पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली शक्ति के रूप में नहीं माना था। Lakshmi Narsingh Stotra:लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र के लाभ सभी प्रकार के कष्टों और समस्याओं का निवारण करता है।अशुभ ग्रहों की स्थिति और अज्ञात पापों/शापों के कारण होने वाले बुरे प्रभावों को दूर करता है।सभी प्रयासों में सफलता।खतरों और परेशानियों को पहले से ही भांप लेने की क्षमता।आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि।बच्चों और किशोरों को बहुत लाभ हो सकता है क्योंकि भगवान नरसिंह उन्हें बुरी नज़र के साथ-साथ बुरे प्रभावों, बुरी आदतों और गुप्त इरादों वाले दोस्तों से भी बचाएंगे।सभी प्रकार के भय और अशांति को दूर करता है। Lakshmi Narsingh Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ आत्मविश्वास खो चुके, विभिन्न समस्याओं से पीड़ित और शत्रुओं से डरने वाले व्यक्ति को नियमित रूप से लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र हिंदी पाठ:Lakshmi Narsingh Stotra in Hindi श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे भोगीन्द्रभोगमणिरञ्जितपुण्यमूर्ते ।योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धिपोत लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। १ ।। ब्रह्मेन्द्ररुद्रमरुदर्ककिरीटकोटि-सङघट्टिताङ्घ्रिकमलामलकान्तिकान्त ।लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। २ ।। संसारघोरगहने चरतो मुरारे मारोग्रभीकरमृगप्रवरार्दितस्य ।आर्तस्य मत्सरनिदाघनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ३ ।। संसारकूपमतिघोरमगाधमूलं सम्प्राप्य दुःखशतसर्पसमाकुलस्य ।दीनस्य देव कृपणापदमागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ४ ।। संसारसागरविशालकरालकाल-नक्रग्रहग्रसननिग्रहविग्रहस्य ।व्यग्रस्य रागरसनोर्मिनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ५ ।। संसारवृक्षमघबीजमनन्तकर्म-शाखाशतं करणपत्रमनङ्गपुष्पम् ।आरुह्य दुःखफलितं पततो दयालो लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ६ ।। संसारसर्पघनवक्त्रभयोग्रतीव्र-दंष्ट्राकरालविषदग्धविनष्टमूर्तेः ।नागारिवाहन सुधाब्धिनिवास शौरे लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ७ ।। संसारदावदहनातुरभीकरोरु-ज्वालावलीभिरतिदग्धतनूरुहस्य ।त्वत्पादपद्मसरसीशरणागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ८ ।। संसारजालपतितस्य जगन्निवास सर्वेन्द्रियार्तबडिशार्थझषोपमस्य ।प्रोत्खण्डितप्रचुरतालुकमस्तकस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ९ ।। संसारभीकरकरीन्द्रकराभिघात-निष्पिष्टमर्मवपुषः सकलार्तिनाश ।प्राणप्रयाणभवभीतिसमाकुलस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। १० ।। अन्धस्य मे हृतविवेकमहाधनस्य चोरैः प्रभो बलिभिरिन्द्रियनामधेयैः ।मोहान्धकूपकुहरे विनिपातितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ११ ।। लक्ष्मीपते कमलनाभ सुरेश विष्णो वैकुण्ठ कृष्ण मधुसूदन पुष्कराक्ष ।ब्रह्मण्य केशव जनार्दन वासुदेव देवेश देहि कृपणस्य करावलम्बम् ।। १२ ।। यन्माययोर्जितवपुः प्रचुरप्रवाह-मग्नार्थमत्र निवहोरुकरावलम्बम् ।लक्ष्मीनृसिंहचरणाब्जमधुव्रतेन स्तोत्रं कृतं सुखकरं भुवि शङ्करेण ।। १३ ।। ।। इति श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

Lakshmi Narsingh Stotra:श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र Read More »

Langoolastra Stotra:लांगूलास्त्र स्तोत्र

Langoolastra Stotra:लांगूलास्त्र स्तोत्र: शक्तिशाली लांगूलास्त्र स्तोत्र (पूंछ जो हथियार है) हनुमान को उनके वीर अंजनेय रूप में आह्वान करता है। लाल फूल और अन्य उपचारों का उपयोग करके रक्त-चंदन से बने विग्रह में देवता की पूजा करनी चाहिए। फिर साधक को पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर एक बार, तीन बार, सात या इक्कीस बार Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। कठोर ब्रह्मचर्य का व्रत रखते हुए यह प्रक्रिया अड़तालीस दिनों तक दोहराई जाती है। ऐसा करने से मारुति की कृपा से साधक के सभी शत्रु कम हो जाते हैं। इंद्रिय-निग्रह के बिना, ऐसी साधनाएँ करना खतरनाक साबित हो सकता है। लांगूलास्त्र स्तोत्र Langoolastra Stotra (लांगूलास्त्र स्तोत्र) हनुमान को समर्पित एक छोटी रचना है, जिसे मध्य युग के दौरान एक ऋषि ने लिखा था। कई हनुमान भक्त हैं; विशेष रूप से भारत के दक्षिणी भाग के लोग अपने सामान्य कल्याण के लिए नियमित रूप से इस लांगुलास्त्र स्तोत्र का मंत्र की तरह जाप करते हैं। यह लांगुलास्त्र स्तोत्र साधना हनुमान भक्त को अपार शक्ति और शक्तियां प्रदान करने वाली भी कही जाती है, जिसमें समस्याओं या पीड़ा का सामना कर रहे अन्य लोगों की बाधाओं और रोगों को दूर करने की शक्ति भी शामिल है। शत्रुओं का नाश करने और जीवन से सभी बाधाओं और रोगों को दूर करने के लिए अत्यंत शक्तिशाली Langoolastra Stotra लांगुलास्त्र स्तोत्र। भगवान हनुमान भगवान शिव के अवतार हैं। Langoolastra Stotra भगवान हनुमान मन की तरह तेज हैं, उनकी गति वायु देवता के बराबर है, उनकी अपनी इंद्रियों पर पूरा नियंत्रण है, वे पवन देव के पुत्र हैं, जो वानर सेना के प्रमुख हैं, राम के दूत हैं, अतुलनीय शक्ति के भंडार हैं, राक्षसों की शक्तियों का नाश करने वाले हैं और खतरों से मुक्ति दिलाते हैं। Langoolastra Stotra:लांगुलास्त्र स्तोत्र के लाभ हनुमान का शत्रु Langoolastra Stotra लांगुलास्त्र भगवान हनुमान जी को समर्पित है। नियमित रूप से लांगुलास्त्र स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में बाधा डालने वाले सभी शत्रुओं का नाश होता है। और व्यक्ति के शत्रु भी मित्र बन जाते हैं! Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र शत्रु हनुमत का पाठ करने से व्यक्ति अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करता है।यदि आप पवित्र गूलर के पेड़ के नीचे बैठकर Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो आप जल्द ही भगवान मारुति की कृपा से अपने सभी शत्रुओं को नष्ट करने में सक्षम होंगे। यदि आप Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो जिसने लक्ष्मण के प्राण बचाए, जिसने अपने तीखे बड़े हाथों से हिलती हुई पूंछ से प्रहार करके रक्षा की, वह आपके सभी कष्टों को दूर करे। किसको यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए: विरोधियों, ज्ञात या अज्ञात शत्रुओं के कृत्यों से पीड़ित व्यक्तियों को नियमित रूप से Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। लांगूलास्त्र स्तोत्र हिंदी पाठ:Langoolastra Stotra in Hindi ॐ हनुमन्तमहावीर वायुतुल्यपराक्रमम् ।मम कार्यार्थमागच्छ प्रणमाणि मुहुर्मुहुः ।। विनियोगः- सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे। ॐ अस्य श्रीहनुमच्छत्रुञ्जयस्तोत्रमालामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, नानाच्छन्दांसि श्री महावीरो हनुमान् देवता मारुतात्मज इति ह्सौं बीजम्, अञ्जनीसूनुरिति ह्फ्रें शक्तिः, ॐ हा हा हा इति कीलकम् श्री राम-भक्ति इति ह्वां प्राणः, श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर इति ह्वां ह्वीं ह्वूं जीव, ममाऽरातिपराजय-निमित्त-शत्रुञ्जय-स्तोत्र-मन्त्र-जपे विनियोगः । करन्यासः- ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते अंगुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं रामदूताय तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लक्ष्मण-प्राणदात्रे मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं अञ्जनीसूनवे अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं सीताशोक-विनाशाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लङ्काप्रासादभञ्जनाय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । हृदयादि-न्यासः- ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते हृदयाय नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं रामदूताय शिरसे स्वाहा ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लक्ष्मण-प्राणदात्रे शिखायै वषट् ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं अञ्जनीसूनवे कवचाय हुम् ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं सीताशोक-विनाशाय नेत्र-त्रयाय वोषट् ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लङ्काप्रासादभञ्जनाय अस्त्राय फट् । ध्यानः- ध्यायेदच् बालदिवाकर द्युतनिभं देवार्रिदर्पापहं देवेन्द्रप्रमुख-प्रशस्तयशसं देदीप्यमानं रुचा ।सुग्रीवादिसमस्तवानरयुतं सुव्यक्त-तत्त्व-प्रियं संरक्तारुण-लोचनं पवनजं पीताम्बरालंकृतम् ।। उद्यन्मार्तण्ड-कोटि-प्रकटरुचियुतं चारुवीरासनस्थं मौञ्जीयज्ञोपवीताभरणरुचिशिखं शोभितं कुंडलाङ्कम् ।भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनादप्रमोदं ध्यायेद् देवं विधेयं प्लवगकुलपतिं गोष्पदी भूतवार्धिम् ।। वज्राङ्गं पिङ्गकेशाढ्यं स्वर्णकुण्डल-मण्डितम् । निगूढमुपसङ्गम्य पारावारपराक्रमम् ।।स्फटिकाभं स्वर्णकान्तिं द्विभुजं च कृताञ्जलिम् । कुण्डलद्वयसंशोभिमुखाम्भोजं हरिं भजे ।।सव्यहस्ते गदायुक्तं वामहस्ते कमण्डलुम् । उद्यद्दक्षिणदोर्दण्डं हनुमन्तं विचिन्तयेत् ।। इस तरह से श्रीहनुमानजी का ध्यान करके “अरे मल्ल चटख” तथा “टोडर मल्ल चटख” का उच्चारण करके हनुमानजी को ‘कपिमुद्रा’ प्रदर्शित करें । ।। माला-मन्त्र ।। “ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें हस्ख्फ्रें ह्सौं नमो हनुमते त्रैलोक्याक्रमण-पराक्रमण-श्रीरामभक्त मम परस्य च सर्वशत्रून् चतुर्वर्णसम्भवान् पुं-स्त्री-नपुंसकान् भूत-भविष्यद्-वर्तमानान् दूरस्थ-समीपस्थान् नाना-नामघेयान् नाना-संकर-जातियान् कलत्र-पुत्र-मित्र-भृत्य-बन्धु-सुहृत्-समेतान् प्रभु-शक्ति-समेतान् धन-धान्यादि-सम्पत्ति-युतान् राज्ञो-राजपुत्र-सरवकान् मंत्री-सचिव-सखीन् आत्यन्ति कान्क्षणेन त्वरया एतद्दिनावधि नानोपायैर्मारय मारय शस्त्रेण छेदय छेदय अग्निना ज्वालय ज्वालय दाहय दाहय अक्षयकुमारवत् पादताक्रमणे शिलातले त्रोटय त्रोटय घातय घातय बंधय बंधय भ्रामय भ्रामय भयातुरान्विसंज्ञान्सद्यः कुरु कुरु भस्मीभूतानुद्धूलय भस्मीभूतानुद्धूलय भक्तजनवत्सल सीताशोकापहारक सर्वत्र मामेनं च रक्ष रक्ष महारुद्रावतार हां हां हुं हुं भूत-संघैः सह भक्षय भक्षय क्रुद्ध चेतसा नखैर्विदारय नखैर्विदारय देशादस्मादुच्चाटय पिशाचवद् भ्रंशय भ्रंशय घे घे हूं फट् स्वाहा ।। 1 ।। ॐ नमो भगवते हनुमते महाबलपराक्रमाय महाविपत्ति-निवारकाय भक्तजन मनःकल्पना कल्पद्रुमाय दुष्टजन-मनोरथ-स्तम्भकाय प्रभञ्जन-प्राणप्रियाय स्वाहा ।। 2 ।। ध्यानः- श्रीमन्तं हनुमन्तमात्तरिपुभिद्भूभृत्तरुभ्राजितं वल्गद्वालधिबद्धवैरिनिचयं चामीकराद्रिप्रभम् ।रोषाद्रक्तपिशङ्ग-नेत्र नलिनं भ्रूमभङ्मङ्गस्फुरत् प्रोद्यच्चण्ड-मयूख-मण्डल-मुखं-दुःखापहं दुःखिनाम् ।। 1 ।। कौपीनं कटिसूत्रमौंज्यजिनयुग्देहं विदेहात्मजाप्राणाधीश-पदारविन्द-निरतं स्वान्तं कृतान्तं द्विषाम् ।ध्यात्वैव समराङ्गणस्थितमथानीय स्वहृत्पङ्कजे संपूजनोक्तविधिना संप्रार्थयेत्प्रार्थितम् ।। 2 ।। ।। मूल-पाठ ।। हनुमन्नञ्जनीसूनो ! महाबलपराक्रम ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 1 ।। मर्कटाधिप ! मार्तण्ड मण्डल-ग्रास-कारक ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 2 ।। अक्षक्षपणपिङ्गाक्षक्षितिजाशुग्क्षयङ्र ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 3 ।। रुद्रावतार ! संसार-दुःख-भारापहारक ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 4 ।। श्रीराम-चरणाम्भोज-मधुपायितमानस ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 5 ।। बालिप्रथमक्रान्त सुग्रीवोन्मोचनप्रभो ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 6 ।। सीता-विरह-वारीश-मग्न-सीतेश-तारक ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 7 ।। रक्षोराज-तापाग्नि-दह्यमान-जगद्वन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 8 ।। ग्रस्ताऽशैजगत्-स्वास्थ्य-राक्षसाम्भोधिमन्दर ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 9 ।। पुच्छ-गुच्छ-स्फुरद्वीर-जगद्-दग्धारिपत्तन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 10 ।। जगन्मनो-दुरुल्लंघ्य-पारावार विलंघन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 11 ।। स्मृतमात्र-समस्तेष्ट-पूरक ! प्रणत-प्रिय ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 12 ।। रात्रिञ्चर-चमूराशिकर्त्तनैकविकर्त्तन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 13 ।।

Langoolastra Stotra:लांगूलास्त्र स्तोत्र Read More »

108 Names of Laxmi ji:मां लक्ष्मी जी के 108 नाम पूर्ण करेंगे सारे काम,दुख और दरिद्रता हो जाएगी दूर

108 Names of Laxmi ji:धार्मिक मान्यता है कि हर शुक्रवार के दिन 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं 108 Names of Laxmi ji तो हर शुक्रवार के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी के 108 नामों का मंत्र जाप अवश्य करें। Maa Lakshmi ke 108 Naam: सनातन धर्म में हर शुक्रवार के दिन धन की देवी 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है 108 Names of Laxmi ji कि हर शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती है। साथ ही आय और सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। 108 Names of Laxmi ji अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो हर शुक्रवार के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी के 108 नामों का मंत्र जाप अवश्य करें। 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी के 108 नामों के मंत्र जाप से दुख और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है। 108 Names of Laxmi ji:मां लक्ष्मी के 108 नाम 1 प्रकृति –  प्रकृति  2 विकृति – दो रूपी प्रकृति 3 विद्या  – बुद्धिमत्ता 4 सर्वभूतहितप्रदा- ऐसा व्यक्ति जो संसार के सारे सुख दे सके  5 श्रद्धा- जिसकी पूजा होती है  6 विभूति-धन की देवी 7 सुरभि- सुगंधा 8 परमात्मिका- सर्वव्यापी देवी 9 वाची- अमृतमयी वाणी  10 पद्मालया- जो कमल पर रहती हैं   11 पद्मा- कमल 12 शुचि- पवित्रता की देवी 13 स्वाहा- शुभ 14 स्वधा- जो अशुभता को दूर करे  15 सुधा – अमृत की देवी 16 धन्या-  17 हिरण्मयी-जो स्वर्ण के समान है  18 लक्ष्मी- धन और समृद्धि की देवी 19 नित्यपुष्ट-जिनसे नित्य शक्ति मिलती है  20 विभा- जिनका चेहरा दीप्तिमान है  21 अदिति- जिनकी चमक सूर्य की तरह है  22 दीत्य-जो प्रार्थना का जवाब देती हैं    23 दीप्ता- लौ की तरह जगमगाने वाली  24 वसुधा-पृथ्वी की देवी 25 वसुधारिणी- पृथ्वी की रक्षक 26 कमला- कमलगंधा 27 कांता- भगवान विष्णु की पत्नी 28 कामाक्षी-आकर्षक आंखों वाली देवी 29 कमलसम्भवा- 108 Names of Laxmi ji जो कमल में से उपस्थित होती है  30 अनुग्रहप्रदा-जो शुभकामनाओं का आशीर्वाद देती है  31 बुद्धि-बुद्धि की देवी 32 अनघा-निष्पाप या शुद्ध  33 हरिवल्लभी-भगवान विष्णु की पत्नी 34 अशोका-दुःख को दूर करने वाली 35 अमृता- अमृत की देवी 36 दीपा- प्रकाशमयी 37 लोकशोकविनाशिनी-सांसारिक संकटों का नाश करने वाली  38 धर्मनिलया-धर्मरक्षिणी  39 करुणा – ममता की मूर्ति  40 लोकमात्रिका-जन-जन की देवी   41 पद्मप्रिया-जिन्हें कमल प्रिय है 42 पद्महस्ता-जिनके हाथ में कमल हैं, और जिनके हाथ कमल की तरह हैं  43 पद्माक्ष्य -जिनकी आंखें कमल के समान है  44 पद्मसुन्दरी- कमल के समान सुंदर 45 पद्मोद्भवा- कमल से उत्पन्न होने वाली देवी  46 पद्ममुखी- कमल के सदृश मुख वाली  47 पद्मनाभप्रिया-पद्मनाभ(भगवान विष्णु) की प्रेमिका  48 रमा- भगवान विष्णु के साथ रमण करने वाली  49 पद्ममालाधरा- कमल की माला पहनने वाली 50 देवी- देवी 51 पद्मिनी- कमल की तरह 52 पद्मसुगन्धिनी- कमल की तरह सुगंध वाली  53 पुण्यगन्धा-दिव्य सुगंधित देवी 54 सुप्रसन्ना- अनुकंपा करने वाली, सदा प्रसन्न चित्त रहने वाली  55 प्रसादाभिमुखी- वरदान और इच्छाओं को अनुदान देने वाली 56 प्रभा- देवी  जिनका आभामंडल दिव्य और चमकदार हो  57 चंद्रवंदना – जिनकी दीप्ति चंद्र के समान हो  58 चंदा- चन्द्र की तरह शांत  59 चन्द्रसहोदरी- चंद्रमा की बहन 60 चतुर्भुजा- चार भुजाओं वाली   61 चन्द्ररूपा-चंद्रमा के समान रूप वाली  62 इंदिरा- सूर्य की तरह चमक वाली  63 इन्दुशीतला-चांद की तरह शीतल  64 अह्लादजननी- प्रसन्नता देने वाली  65 पुष्टि- स्वास्थ्य की देवी 66 शिवा-शुभ देवी 67 शिवाकारी-शुभ का अवतार 68 सत्या-सच्चाई 69 विमला- शुद्ध 70 विश्वजननी- समस्त ब्रह्माण्ड की देवी  71 तुष्टी- तुरंत प्रसन्न होने वाली    72 दारिद्र्यनाशिनी – दरिद्रता दूर करने वाली  73 प्रीता पुष्करिणी –  देवी जिनकी आंखें सुखदायक हैं  74 शांता- शांतिपूर्ण देवी 75 शुक्लांबरा-श्वेत वस्त्र धारण करने वाली  76 भास्करी – सूर्य के समान तेजस्वी  77 बिल्वनिलया- बिल्व वृक्ष में निवास करने वाली  78 वरारोहा – हर वरदान पूर्ण करने वाली  79 यशस्विनी-यश, सुख, प्रसिद्धि और भाग्य की देवी 80 वसुंधरा-धरती माता की बेटी 81 उदरंगा- जिनकी देह सुंदर है  82 हरिनी- जो हिरण की तरह चंचला है  83 हेमामालिनी-स्वर्ण का हार धारण करने वाली  84 धनधान्यकी- स्वास्थ्य प्रदान करने वाली  85 सिद्धि- रक्षक 86 सौम्या : कोमल और आकर्षक   87 शुभप्रभा-जो शुभता प्रदान करे  88 नृपवेशवगाथानंदा- जो महलों में रहती है  89 वरलक्ष्मी- समृद्धि की दाता  90 वसुप्रदा-धन को प्रदान करने वाली 91 शुभा- शुभ देवी 92 हिरण्यप्रका – स्वर्ण प्रिया  93 समुद्रतनया – समुद्र की बेटी 94 जया -विजय की देवी 95 मंगला-मंगल करने वाली  96 देवी –  देवता या देवी 97 विष्णुवक्षा- भगवान विष्णु के सान्निध्य में रहने वाली, उनके ह्रदय में निवास करने वाली    98 विष्णुपत्नी-भगवान विष्णु की पत्नी 99 प्रसन्नाक्षी –  खूबसूरत आंखों वाली  100 नारायण समाश्रिता- नारायण के साथ रहने वाली  101 दारिद्र्य ध्वंसिनी- गरीबी समाप्त करने वाली 102 लक्ष्मी – देवी 103 सर्वोपद्रवनिवारिणी — हर उपद्रव और संकट का निवारण करने वाली  104 नवदुर्गा-नौ दुर्गा के सभी रूप  105 महाकाली- काली देवी 106 ब्रह्मा-विष्णु-शिवात्मिका- ब्रह्मा, विष्णु, शिव की आराध्या  107 त्रिकालज्ञानसम्पन्ना- जिन्हें तीनों कालों की जानकारी हो  108 भुवनेश्वरी- अखिल भुवन यानी ब्रह्मांड की स्वामिनी 

108 Names of Laxmi ji:मां लक्ष्मी जी के 108 नाम पूर्ण करेंगे सारे काम,दुख और दरिद्रता हो जाएगी दूर Read More »

Radha Rani Ke 28 Name:राधा रानी के 28 नाम और उनके अर्थ | जाप से होती है हर मनोकामना की पूर्ति

Radha Rani Ke 28 Name :राधा रानी, हिंदू धर्म में भगवान कृष्ण की प्रेमिका और शक्ति के रूप में पूजित हैं। उनकी भक्ति, कृष्ण भक्ति का एक महत्वपूर्ण आयाम है। राधा रानी के 28 नाम, उनके विभिन्न गुणों और रूपों का वर्णन करते हैं। Radha Rani Ke 28 Name इन नामों का जाप, भक्तों के लिए एक आध्यात्मिक यात्रा का साधन है। यह लेख, राधा रानी के इन 28 नामों का अर्थ और उनके विस्तृत विश्लेषण पर केंद्रित होगा। Radha Rani Ke 28 Name राधा रानी के 28 नाम, मात्र नाम नहीं हैं, बल्कि वे उनके स्वरूप, शक्ति और कृपा के प्रतीक हैं। इन नामों का जाप, भक्तों को राधा रानी के करीब लाता है और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है। Radha Rani Ke 28 Name मान्यता है कि इन नामों का जाप करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। Radha Rani Ke 28 Name:28 नामों का विस्तृत विश्लेषण Radha Rani Ke 28 Name राधा रानी के 28 नामों का अर्थ और उनका विस्तृत विश्लेषण निम्नलिखित है: प्रत्येक नाम का विस्तृत विश्लेषण

Radha Rani Ke 28 Name:राधा रानी के 28 नाम और उनके अर्थ | जाप से होती है हर मनोकामना की पूर्ति Read More »

Swapna Shastra:क्या दोपहर में देखे गए सपने होते हैं सच, जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Swapna Shastra:कई मान्यताओं के अनुसार यह माना गया है कि दोपहर में देखे गए सपने सच होते हैं। स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि किसी भी सपने के सच होने की संभावना उसके समय पर निर्भर करती है। ऐसे में आइए जानते हैं कि किस समय देखे गए सपनों (Swapna Shastra in Hindi) के सच होने की संभावना अधिक होती है। Dream Astrology:स्वप्न शास्त्र में नींद में देखे गए सपनों के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई है. बता दें कि सपनों का मनुष्य के निजी जीवन से गहरा संबंध होता है. इनमें से कुछ सपने शुभ होते हैं Swapna Shastra और कुछ ऐसे भी सपने हैं जिन्हें अशुभ माना जाता है. कई बार हम अनुभव करते हैं कि रात्रि और सुबह के समय देखे गए सपने सच हो जाते हैं. लेकिन कुछ ही लोग जानते हैं कि दोपहर को देखे गए सपनों का क्या अर्थ होता है और इसका क्या परिणाम निकल कर आता है. स्वप्न शास्त्र में इसके विषय में भी विस्तार से जानकारी दी गई है. आइए जानते हैं किस समय सपना दिखाई देने से उनके सच होने की संभावना बढ़ जाती है. क्या कहता है स्वप्न शास्त्र:What is dream science? स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि समय के आधार पर यह तय किया जा सकता है कि सपना सच होगा या नहीं। कई बार जो सपने दिखाई देते हैं, वह सच होते हैं। स्वप्न शास्त्र की मानें, तो रात में 10 बजे से 12 के बीच देखे गए सपने का कोई फल नहीं होता है। क्योंकि वह आमतौर पर दिन में हुई घटनाओं पर आधारित होते हैं। Swapna Shastra वहीं कुछ सपने विचारों पर आधारित होते हैं। वहीं दोपहर में देखा गया सपना केवल विचारों और अचेतन मस्तिष्क की कल्पना पर आधारित होते हैं, इसलिए उनके सच होने की संभावना कम ही होती है। Swapna Shastra Know At What Time Dreams Come True Afternoon Night Or Morning :समय पर आधारित होता है सपने के सच होने की संभावना Swapna Shastra:स्वप्न शास्त्र में बताया गया है कि समय के आधार पर सपने सच होने की संभावनाएं बढ़ जाती है. कई बार जो सपने दिखाई देते हैं, वह सच होते हैं और कुछ ऐसे भी सपने होते हैं जो विचारों पर आधारित होते हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, रात्रि 10:00 बजे से 12:00 के बीच देखे गए सपने का कोई फल नहीं होता है, वह आमतौर पर दिन में हुई घटनाओं पर आधारित होते हैं. स्वप्न शास्त्र में यह भी बताया गया है कि जो सपने रात्री 12:00 बजे से सुबह 03:00 के बीच देखे जाते हैं. उनके सच होने की संभावनाएं अधिक होती है और वह आमतौर पर 1 साल के भीतर सच हो सकते हैं. बता दें कि ब्रह्म मुहूर्त अर्थात सुबह 03:00 से 05:00 बजे के बीच देखे गए सपने अधिकांश समय सच होने लगते हैं. इनका फल 1 से 6 महीने के बीच ही दिखाई देने लगता है. आपको जानकर हैरानी होगी कि जो सपने दोपहर को दिखाई देते हैं, उनका कोई भी अर्थ नहीं होता है और वह सच नहीं होते हैं. वह केवल विचारों और अचेतन मस्तिष्क की कल्पना होती है. सपने सच होने के पीछे क्या है कारण:What is the reason behind dreams coming true ? स्वप्न शास्त्र में यह बताया गया है कि सुबह के समय व्यक्ति अपनी आत्मा से सबसे अधिक जुड़ा होता है. इस दौरान देवीय शक्तियों का प्रभाव भी अधिक होता है, जिसका असर हर जीव पर पड़ता है. Swapna Shastra इसलिए इस दौरान देखे गए सपने व्यक्ति के भविष्य पर भी प्रभाव डालते हैं, जिस वजह से सपनों के सच होने की संभावना बढ़ जाती है. सच होते हैं इस समय देखे गए सपने:Dreams seen at this time come true Swapna Shastra:स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि जो सपने हम रात्रि में 12 बजे से सुबह 03 बजे के बीच में देखते हैं, उनके सच होने की संभावना अधिक होती है। माना गया है कि यह सपने 01 साल के भीतर सच हो सकते हैं। ये है सबसे उत्तम समय:This is the best time ब्रह्म मुहूर्त को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र माना गया है। Swapna Shastra ऐसे में ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 03 बजे से लेकर 05 बजे के बीच देखे गए सपनों के सच होने की संभावना सबसे अधिक होती है। स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि ये सपने 01 से 6 महीने के बीच सच हो सकते हैं।

Swapna Shastra:क्या दोपहर में देखे गए सपने होते हैं सच, जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र Read More »

Butterfly in Dream:सपने में तितली देखना होता है शुभ या अशुभ, जानिये क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Butterfly in Dream:सपने में तितली देखना होता है शुभ या अशुभ, जानिये क्या कहता है स्वप्न शास्त्र Swapna Shastra:रात को सोते समय आपको कुछ न कुछ सपना जरूर आया होगा. कई लोगों को सुबह के समय वो सपना याद रहता है, तो बहुत से लोग सपने को भूल जाते हैं. स्वप्न शास्त्र की माने, तो सोते समय देखे गए हर सपनों का कुछ न कुछ अर्थ जरूर होता है, जिन्हें समय रहते पहचान कर व्यक्ति होने वाली किसी अनहोनी से खुद को बचा सकता है. सपने में तितली दिखने का अर्थ:Meaning of seeing butterfly in dream Butterfly in Dream:बता दें कि, अगर आपने सपने में तितली (Butterfly) को देखा है, तो इससे आपके जीवन पर कुछ न कुछ असर पड़ता है। तो चलिए आज हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे कि, सपने में तितली को देखने का क्या मतलब होता है। इसका आपके जीवन में अच्छा प्रभाव पड़ेगा या फिर आपके साथ कुछ बुरा होगा। तो आइए बिना किसी देरी किए जानते हैं स्वप्न शास्त्र के अनुसार इसका क्या मतलब होता है। तितली को देखना होता है शुभ:Seeing a butterfly is auspicious अगर आपने सपने में किसी विवाहित महिला के घर या फिर आंगन में तितली को उड़ता देखा है, तो यह आपके लिए यह बहुत ही शुभ माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आपको जल्द ही धन की प्राप्ति हो सकती है। आपको अपने व्यवसाय में लाभ होगा साथ ही आपके कारोबार में तरक्की होगी। अगर आपने सपने में बड़ी तितली को देखा है, तो यह संकेत देता है कि, आपके सपने जल्द ही पूरे होने वाले हैं साथ ही आपका लक्ष्य पूरा होगा। स्वप्न शास्त्र Butterfly in Dream के मुताबिक, अगर आप सपने में तितली से भाग रहे हैं, Butterfly in Dream तो इसका अर्थ होता है कि आपके अंदर बहुत सी नकारात्मक चीजों ने वास किया हुआ है। ऐसा करने वाला व्यक्ति अनैतिक और बुरा व्यक्ति है जो कि भगवान से दूर है। खुद को पहचाने:identify yourself Butterfly in Dream:स्वप्न शास्त्रों की जानकारी के मुताबिक अगर आप सपने में तितली से भाग रहे हैं, तो इसका अर्थ होता है कि आपके अंदर बहुत सी नकारात्मक चीजों ने वास किया हुआ है. बता दें कि ऐसा करने वाला व्यक्ति  अनैतिक और बुरा व्यक्ति है जो भगवान से दूर है विभिन्न रंगों की तितली के सपने का अर्थ:Dream meaning of butterfly of different colors सपने में तितली देखने का अर्थ केवल तितली को देखकर ही नहीं, बल्कि उसके रंगों से भी जुड़ा हो सकता है। हर रंग का एक विशेष महत्व होता है, जो आपके जीवन में अलग-अलग संकेत और संदेश प्रदान करता है। सफेद तितली: सफेद रंग शुद्धता, शांति और अध्यात्म का प्रतीक है। अगर आप सपने में सफेद तितली देखते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि आपके जीवन में शांति और आध्यात्मिकता का समय आ रहा है। यह सपना आपको आत्मनिरीक्षण करने और अपनी आंतरिक शांति की खोज में समय देने के लिए प्रेरित करता है। पीली तितली: पीला रंग खुशी, उत्साह और नई शुरुआत का प्रतीक है। सपने में पीली तितली देखना यह संकेत करता है कि आपके जीवन में खुशी और उत्साह के नए अवसर आने वाले हैं। यह आपकी सकारात्मक ऊर्जा और उत्साही दृष्टिकोण को दर्शाता है। नीली तितली: नीला रंग विश्वास, समर्पण और शांति का प्रतीक है। नीली तितली का सपना यह संकेत कर सकता है कि आप अपने जीवन में गहराई और स्थिरता की तलाश में हैं। यह सपना आपके मानसिक और भावनात्मक संतुलन की ओर इशारा करता है। काली तितली: काले रंग का सपना अक्सर डर और अनिश्चितता का प्रतीक होता है। Butterfly in Dream काली तितली देखने का अर्थ यह हो सकता है कि आप अपने जीवन में किसी चिंता या भय का सामना कर रहे हैं। हालांकि, यह सपना यह भी बताता है कि यह समय आत्मनिरीक्षण का है और आपको अपने डर पर काबू पाने की आवश्यकता है। सपने में तितली देखना: धर्म और संस्कृतियों में इसके विभिन्न अर्थ:Seeing a butterfly in a dream: Its different meanings in religions and cultures Butterfly in Dream:सपनों में तितली देखना केवल हमारे व्यक्तिगत जीवन के लिए ही संकेत नहीं देता, बल्कि विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों में भी इसका खास महत्व है। तितली को कई संस्कृतियों में बदलाव, पुनर्जन्म, आत्मा और आध्यात्मिकता का प्रतीक माना गया है। Butterfly in Dream इस भाग में हम जानेंगे कि सपने में तितली देखना दुनिया के अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों में क्या महत्व रखता है और इसके क्या संकेत हो सकते हैं। 1. हिंदू धर्म में तितली का महत्व:Importance of butterfly in Hinduism हिंदू धर्म में तितली को आत्मा और पुनर्जन्म का प्रतीक माना जाता है। यह जीवन के परिवर्तनशील स्वभाव को दर्शाती है, जैसा कि तितली एक कैटरपिलर से गुजरकर सुंदर और स्वतंत्र तितली में परिवर्तित होती है। Butterfly in Dream हिंदू मान्यताओं के अनुसार, सपने में तितली देखना यह संकेत देता है कि आपकी आत्मा आध्यात्मिक यात्रा पर है और आप जीवन के एक नए चरण में प्रवेश करने वाले हैं। तितली का सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि आप अपने अंदर की शक्ति और आध्यात्मिकता को पहचानने की प्रक्रिया में हैं। यह भी माना जाता है कि तितली देवी-देवताओं का आशीर्वाद या उनकी उपस्थिति का प्रतीक हो सकती है, जो यह संदेश देती है कि आपको अपने जीवन में किसी नई दिशा में जाने का समय आ गया है। 2. बौद्ध धर्म में तितली का प्रतीकात्मक अर्थ:Symbolic meaning of butterfly in Buddhism बौद्ध धर्म में तितली को परिवर्तन, लचीलेपन और नश्वरता का प्रतीक माना जाता है। तितली का जीवनचक्र बौद्ध धर्म के उन विचारों से मेल खाता है, जो जीवन की अनिश्चितता और क्षणभंगुरता पर जोर देते हैं। सपने में तितली देखना इस बात का संकेत हो सकता है कि आप अपने जीवन के किसी ऐसे हिस्से को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं, जो अब तक अज्ञात या अनिश्चित था। तितली का सपना बौद्ध धर्म के अनुसार आत्मा के उत्थान और चेतना के उच्चतर स्तरों की ओर यात्रा का प्रतीक हो सकता है। Butterfly in Dream यह आपको जीवन के नश्वर स्वभाव को याद दिलाता है और यह प्रेरित करता है कि हर पल

Butterfly in Dream:सपने में तितली देखना होता है शुभ या अशुभ, जानिये क्या कहता है स्वप्न शास्त्र Read More »

Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra:लांगूलास्त्र शत्रुजन्य हनुमत स्तोत्र

Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra:लांगुलास्त्र शत्रुजन्य हनुमत स्तोत्र: लांगुलास्त्र शत्रुजन्य हनुमत स्तोत्र (पूंछ जो कि शस्त्र है) में हनुमान जी को वीर अंजनेय के रूप में आह्वान किया गया है। लाल पुष्प और अन्य उपचारों का उपयोग करके रक्त-चन्दन से बने विग्रह में देवता की पूजा करनी चाहिए। फिर साधक को पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर एक बार, तीन बार, सात बार या इक्कीस बार स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। कठोर ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए यह प्रक्रिया अड़तालीस दिनों तक दोहराई जाती है। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra ऐसा करने से मारुति की कृपा से साधक के सभी शत्रुओं का शमन होता है। इन्द्रिय-निग्रह के बिना, ऐसी साधनाएँ करना खतरनाक साबित हो सकता है।” Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करने से जीवन से बुरी शक्तियां दूर रहती हैं। भूत-प्रेतों से डरने वाले बच्चों को हनुमान स्तोत्र का नियमित पाठ करना चाहिए, इससे आसपास की सभी नकारात्मक शक्तियां दूर हो जाती हैं। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करने से हनुमान शक्ति प्राप्त होती है और जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति मिलती है। शत्रुओं का नाश करने और जीवन से सभी बाधाओं और रोगों को दूर करने के लिए अत्यंत शक्तिशाली लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र। भगवान हनुमान भगवान शिव के अवतार हैं। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra:भगवान हनुमान मन की तरह तेज हैं, उनकी गति वायु देवता के समान है, वे अपनी इंद्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं, वे पवन देव के पुत्र हैं, वानर सेना के प्रमुख हैं, राम के दूत हैं, अतुलनीय शक्ति के भंडार हैं, राक्षसों की शक्तियों का नाश करने वाले हैं और खतरों से मुक्ति दिलाते हैं। लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र का प्रयोग बहुत बड़ी समस्या होने पर भी किया जाता है। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra इसके जाप से बड़ी समस्या भी दूर हो जाती है और सारा संकट नष्ट हो जाता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। शत्रुओं द्वारा की गई पीड़ा, व्यवहार, चातुर्य, जप, वध आदि से मानस की शांति होती है और फिर सभी प्रकार की बाधाएं समाप्त हो जाती हैं। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra:लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र लाभ Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra:लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र भगवान हनुमान जी को समर्पित है। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र का नियमित पाठ करने से जीवन में बाधा डालने वाले सभी शत्रुओं का नाश होता है। और व्यक्ति के शत्रु भी मित्र बन जाते हैं। लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करता है। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ शारीरिक समस्याओं और मानसिक पीड़ा से पीड़ित व्यक्तियों के लिए लांगुलास्त्र शत्रुजंय हनुमत स्तोत्र अवश्य करना चाहिए। Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra करने से पहले सिद्धि के लिए परामर्श अवश्य लेना चाहिए। लांगूलास्त्र शत्रुजन्य हनुमत स्तोत्र हिंदी पाठLaangulastr Shatrujany Hanumat Stotra in Hindi ।। ॐ हनुमन्तमहावीर वायुतुल्यपराक्रमम् ।मम कार्यार्थमागच्छ प्रणमाणि मुहुर्मुहुः ।। विनियोगः- ॐ अस्य श्रीहनुमच्छत्रुञ्जयस्तोत्रमालामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, नानाच्छन्दांसि श्री महावीरो हनुमान् देवता मारुतात्मज इति ह्सौं बीजम्, अञ्जनीसूनुरिति ह्फ्रें शक्तिः, ॐ हा हा हा इति कीलकम् श्री राम-भक्ति इति ह्वां प्राणः, श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर इति ह्वां ह्वीं ह्वूं जीव, ममाऽरातिपराजय-निमित्त-शत्रुञ्जय-स्तोत्र-मन्त्र-जपे विनियोगः । करन्यासः- • ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते अंगुष्ठाभ्यां नमः ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं रामदूताय तर्जनीभ्यां नमः ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लक्ष्मण-प्राणदात्रे मध्यमाभ्यां नमः ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं अञ्जनीसूनवे अनामिकाभ्यां नमः ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं सीताशोक-विनाशाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लङ्काप्रासादभञ्जनाय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । हृदयादि-न्यासः- • ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते हृदयाय नमः ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं रामदूताय शिरसे स्वाहा ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लक्ष्मण-प्राणदात्रे शिखायै वषट् ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं अञ्जनीसूनवे कवचाय हुम् ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं सीताशोक-विनाशाय नेत्र-त्रयाय वोषट् ।• ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लङ्काप्रासादभञ्जनाय अस्त्राय फट् । ध्यानः- ध्यायेदच् बालदिवाकर द्युतनिभं देवार्रिदर्पापहं देवेन्द्रप्रमुख-प्रशस्तयशसं देदीप्यमानं रुचा ।सुग्रीवादिसमस्तवानरयुतं सुव्यक्त-तत्त्व-प्रियं संरक्तारुण-लोचनं पवनजं पीताम्बरालंकृतम् ।। उद्यन्मार्तण्ड-कोटि-प्रकटरुचियुतं चारुवीरासनस्थं मौञ्जीयज्ञोपवीताभरणरुचिशिखं शोभितं कुंडलाङ्कम् ।भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनादप्रमोदं ध्यायेद् देवं विधेयं प्लवगकुलपतिं गोष्पदी भूतवार्धिम् ।। वज्राङ्गं पिङ्गकेशाढ्यं स्वर्णकुण्डल-मण्डितम् । निगूढमुपसङ्गम्य पारावारपराक्रमम् ।।स्फटिकाभं स्वर्णकान्तिं द्विभुजं च कृताञ्जलिम् । कुण्डलद्वयसंशोभिमुखाम्भोजं हरिं भजे ।।सव्यहस्ते गदायुक्तं वामहस्ते कमण्डलुम् । उद्यद्दक्षिणदोर्दण्डं हनुमन्तं विचिन्तयेत् ।। इस तरह से श्रीहनुमानजी का ध्यान करके “अरे मल्ल चटख” तथा “टोडर मल्ल चटख” का उच्चारण करके हनुमानजी को ‘कपिमुद्रा’ प्रदर्शित करें । ।। माला-मन्त्र ।। “ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें हस्ख्फ्रें ह्सौं नमो हनुमते त्रैलोक्याक्रमण-पराक्रमण-श्रीरामभक्त मम परस्य च सर्वशत्रून् चतुर्वर्णसम्भवान् पुं-स्त्री-नपुंसकान् भूत-भविष्यद्-वर्तमानान् दूरस्थ-समीपस्थान् नाना-नामघेयान् नाना-संकर-जातियान् कलत्र-पुत्र-मित्र-भृत्य-बन्धु-सुहृत्-समेतान् प्रभु-शक्ति-समेतान् धन-धान्यादि-सम्पत्ति-युतान् राज्ञो-राजपुत्र-सरवकान् मंत्री-सचिव-सखीन् आत्यन्ति कान्क्षणेन त्वरया एतद्दिनावधि नानोपायैर्मारय मारय शस्त्रेण छेदय छेदय अग्निना ज्वालय ज्वालय दाहय दाहय अक्षयकुमारवत् पादताक्रमणे शिलातले त्रोटय त्रोटय घातय घातय बंधय बंधय भ्रामय भ्रामय भयातुरान्विसंज्ञान्सद्यः कुरु कुरु भस्मीभूतानुद्धूलय भस्मीभूतानुद्धूलय भक्तजनवत्सल सीताशोकापहारक सर्वत्र मामेनं च रक्ष रक्ष महारुद्रावतार हां हां हुं हुं भूत-संघैः सह भक्षय भक्षय क्रुद्ध चेतसा नखैर्विदारय नखैर्विदारय देशादस्मादुच्चाटय पिशाचवद् भ्रंशय भ्रंशय घे घे हूं फट् स्वाहा ।।१।। ॐ नमो भगवते हनुमते महाबलपराक्रमाय महाविपत्ति-निवारकाय भक्तजन मनःकल्पना कल्पद्रुमाय दुष्टजन-मनोरथ-स्तम्भकाय प्रभञ्जन-प्राणप्रियाय स्वाहा ।।२।। ध्यानः- श्रीमन्तं हनुमन्तमात्तरिपुभिद्भूभृत्तरुभ्राजितं वल्गद्वालधिबद्धवैरिनिचयं चामीकराद्रिप्रभम् ।रोषाद्रक्तपिशङ्ग-नेत्र नलिनं भ्रूमभङ्मङ्गस्फुरत् प्रोद्यच्चण्ड-मयूख-मण्डल-मुखं-दुःखापहं दुःखिनाम् ।। १ ।। कौपीनं कटिसूत्रमौंज्यजिनयुग्देहं विदेहात्मजाप्राणाधीश-पदारविन्द-निरतं स्वान्तं कृतान्तं द्विषाम् ।ध्यात्वैव समराङ्गणस्थितमथानीय स्वहृत्पङ्कजे संपूजनोक्तविधिना संप्रार्थयेत्प्रार्थितम् ।। २ ।। ।। मूल-पाठ ।। हनुमन्नञ्जनीसूनो ! महाबलपराक्रम ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। १ ।। मर्कटाधिप ! मार्तण्ड मण्डल-ग्रास-कारक ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। २ ।। अक्षक्षपणपिङ्गाक्षक्षितिजाशुग्क्षयङ्र ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ३ ।। रुद्रावतार ! संसार-दुःख-भारापहारक ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ४ ।। श्रीराम-चरणाम्भोज-मधुपायितमानस ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ५ ।। बालिप्रथमक्रान्त सुग्रीवोन्मोचनप्रभो ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ६ ।। सीता-विरह-वारीश-मग्न-सीतेश-तारक ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ७ ।। रक्षोराज-तापाग्नि-दह्यमान-जगद्वन ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ८ ।। ग्रस्ताऽशैजगत्-स्वास्थ्य-राक्षसाम्भोधिमन्दर ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ९ ।। पुच्छ-गुच्छ-स्फुरद्वीर-जगद्-दग्धारिपत्तन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। १० ।। जगन्मनो-दुरुल्लंघ्य-पारावार विलंघन ! ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। ११ ।।

Laangulastr Shatrujany Hanumat Stotra:लांगूलास्त्र शत्रुजन्य हनुमत स्तोत्र Read More »

Rinmochan Maha Ganapati Stotram:श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र

श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र हिंदी पाठ:Rinmochan Maha Ganapati Stotram in Hindi  Rinmochan Maha Ganapati Stotram:विनियोग – ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः ।  ऋष्यादि-न्यास – भगवान् शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण-मोचन-गणपति देवतायै नमः हृदि, मम-ऋण-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ । ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र  ॐ स्मरामि देव-देवेश।वक्र-तुण्डं महा-बलम् ।षडक्षरं कृपा-सिन्धु, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 1 ।। महा-गणपतिं देवं, महा-सत्त्वं महा-बलम् ।महा-विघ्न-हरं सौम्यं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 2 ।। एकाक्षरं एक-दन्तं, एक-ब्रह्म सनातनम् ।एकमेवाद्वितीयं च, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 3 ।। शुक्लाम्बरं शुक्ल-वर्णं, शुक्ल-गन्धानुलेपनम् ।सर्व-शुक्ल-मयं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 4 ।। रक्ताम्बरं रक्त-वर्णं, रक्त-गन्धानुलेपनम् ।रक्त-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 5 ।। कृष्णाम्बरं कृष्ण-वर्णं, कृष्ण-गन्धानुलेपनम् ।कृष्ण-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 6 ।। पीताम्बरं पीत-वर्णं, पीत-गन्धानुलेपनम् ।पीत-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 7 ।। नीलाम्बरं नील-वर्णं, नील-गन्धानुलेपनम् ।नील-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 8 ।। धूम्राम्बरं धूम्र-वर्णं, धूम्र-गन्धानुलेपनम् ।धूम्र-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 9 ।। सर्वाम्बरं सर्व-वर्णं, सर्व-गन्धानुलेपनम् ।सर्व-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 10 ।। भद्र-जातं च रुपं च, पाशांकुश-धरं शुभम् ।सर्व-विघ्न-हरं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये ।। 11 ।। Rinmochan Maha Ganapati Stotram:फल-श्रुति – यः पठेत् ऋण-हरं-स्तोत्रं, प्रातः-काले सुधी नरः ।षण्मासाभ्यन्तरे चैव, ऋणच्छेदो भविष्यति ।। इति श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र संपूर्णम् ।। जो व्यक्ति उक्त “ऋण-मोचन-स्तोत्र’ का नित्य प्रातः काल पाठ करता है, उसका छः मास में ऋण-निवारण होता है ।

Rinmochan Maha Ganapati Stotram:श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्र Read More »

Raja Harischandra Ki Katha:सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र इसलिए कहलाए महादानी, जरूर पढ़ें यह कथा

Raja Harischandra Ki Katha:सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र (Raja Harischandra) की कहानी सदियों से अनुकरणीय है। सत्य की चर्चा जब भी कही जाएगी, महाराजा हरिश्चन्द्र का नाम जरूर लिया जायेगा। सूर्यवंशी सत्यव्रत के पुत्र राजा हरिश्चंद्र, जिन्हें उनकी सत्यनिष्ठा के लिए आज भी जाना जाता है। उनकी सत्य के प्रति निष्ठा उनके युगों बाद भी सत्य का प्रतीक बनी हुई है। इनका युग त्रेता माना जाता है। राजा हरिश्चंद्र अयोध्या के प्रसिद्ध सूर्यवंशी राजा थे जो सत्यव्रत के पुत्र थे। ये अपनी सत्यनिष्ठा के लिए अड़िग रहे और इसके लिए इन्हें अनेक कष्ट सहने पड़े। ये बहुत दिनों तक पुत्रहीन रहे पर अंत में अपने कुलगुरु वशिष्ठ के उपदेश से एवं वरुणदेव की उपासना से इन्हे पुत्र प्राप्त हुआ। सत्यवादी हरिश्चंद्र (Raja Harischandra) Raja Harischandra Ki Katha:राजा हरिश्चंद्र सच बोलने और वचन. पालन के लिए मशहूर थे। उनकी प्रसिद्धि चारों तरफ फैली थी। ऋषि विश्वामित्र ने राजा हरिश्चंद्र की प्रसिद्धि सुनी। वे स्वयं इसकी परीक्षा करना चाहते थे। Raja Harischandra Ki Katha राजा हरिश्चंद्र हर हालत में केवल सच का ही साथ देते थे। अपनी इस निष्ठा की वजह से कई बार उन्हें बड़ी–बड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ा लेकिन फिर भी उन्होंने किसी भी हाल में सच का साथ नहीं छोड़ा। वे एक बार जो प्रण ले लेते थे उसे किसी भी कीमत पर पूरा करके ही छोड़ते थे। राजा हरिश्चन्द्र ने सत्य के मार्ग पर चलने के लिये स्वयं तक को बेच दिया था। सपना और सब त्यागना:Dream and give up everything इनकी पत्नी का नाम तारामती था और पुत्र का नाम रोहिताश्व। ये दोनों भी धार्मिक चरित्र के थे। राजा हरिश्चन्द्र ने यदि स्वप्न में भी वाग दान कर दिया यानी वचन दे दिया तो भी पीछे नही हटते थे। Raja Harischandra Ki Katha ऋषि विश्वामित्र की शक्ति से, राजा हरिश्चन्द्र ने सपना देखा कि उन्होंने अपना सारा राजपाट विश्वामित्र को दान में दे दिया है। अगले दिन जब विश्वामित्र उनके महल में आए तो उन्होंने विश्वामित्र को सारा हाल सुनाया और साथ ही अपना राज्य उन्हें सौंप दिया। पांच सौ स्वर्ण मुद्राओं की मांग:Demand for five hundred gold coins जाते–जाते विश्वामित्र ने राजा हरिश्चंद्र से दान उपरांत दक्षिणा में पांच सौ स्वर्ण मुद्राओं की मांग की। विश्वामित्र ने राजा को याद दिलाया कि राजपाट के साथ राज्य का कोष भी वे दान कर चुके हैं और दान की हुई वस्तु को दोबारा दान नहीं किया जाता। तब राजा ने अपनी पत्नी और पुत्र को बेचकर स्वर्ण मुद्राएं हासिल की, लेकिन वो भी पांच सौ नहीं हो पाईं। राजा हरिश्चंद्र ने खुद को भी बेच डाला और सोने की सभी मुद्राएं विश्वामित्र को दान में दे दीं। अपनी मर्यादा को निभाया। राजा हरिश्चंद्र ने खुद को जहां बेचा था, वह श्मशान का चांडाल था। राजा हरिश्चंद्र (Raja Harischandra) के पुत्र की मृत्यु  जो शवदाह के लिए आए मृतक के परिजन से कर लेकर उन्हें अंतिम संस्कार करने देता था। एक रात्रि को सर्प के काटने से राजा के पुत्र की मृत्यु हो गई। असहाय रानी तारा, रोती – बिलखती अपने पुत्र को श्मशान में अन्तिम क्रिया के लिये लेकर जा रही थी। Raja Harischandra Ki Katha काली अंधियारी रात में, जोरों की बारिश हो रही थी। बादल गरज रहे थे, बिजली चमक रही थी, और अभागन माता अपने पुत्र के शव को अकेली श्मशान लेकर पहुंची। वहाँ पर राजा हरिश्चंद्र ने रानी को बिना देखे ही श्मशान कर के लिये आदेश दिया। इतने में, आसमान में बिजली चमकी तो उस बिजली की रोशनी में हरिश्चंद्र को उस अबला स्त्री का चेहरा नजर आया। वह स्त्री उनकी पत्नी तारामती थी और उसके हाथ में उनके पुत्र रोहिताश्व का शव था। Raja Harischandra Ki Katha अपनी पत्नी की यह दशा और पुत्र के शव को देखकर हरिश्चंद्र बेहद भावुक हो उठे। उस दिन उनका एकादशी का व्रत भी था और परिवार की इस हालत ने उन्हें हिलाकर रख दिया। उनकी आंखों में आंसू भरे थे। कर्तव्यपरायण राजा हरिश्चंद्र (Raja Harischandra) Raja Harischandra Ki Katha:लेकिन, फिर भी वह अपने कर्तव्य की रक्षा के लिए आतुर थे। भारी मन से उन्होंने अपनी पत्नी से कहा कि “जिस सत्य की रक्षा के लिए उन्होंने अपना महल, राजपाट तक त्याग दिया, स्वयं और अपने परिवार को बेच दिया, आज यह उसी सत्य की रक्षा की घड़ी है“। राजा हरिश्चंद्र ने अपनी पत्नी से कहा तुम्हे श्मशान में अपने पुत्र के अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित कर देना ही होगा। रानी तारा कर के रूप में अपनी साड़ी का टुकड़ा फाड़ कर देने की कोशिश करती हैं उसी समय आकाशवाणी हुई और स्वयं ईश्वर प्रकट हुए और उन्होंने राजा से कहा “हरिश्चन्द्र! तुमने सत्य को जीवन में धारण करने का उच्चतम आदर्श स्थापित किया है। Raja Harischandra Ki Katha तुम्हारी कर्त्तव्यनिष्ठा महान है, तुम इतिहास में अमर रहोगे।“ और, राजा की ली जाने वाली ‘दान वाली‘ परीक्षा तथा कर्तव्यों के प्रति जिम्मेदारी की जीत बतायी। हरिश्चंद्र ने ईश्वर से कहा “अगर वाकई मेरी कर्तव्यनिष्ठा और सत्य के प्रति समर्पण सही है तो कृपया इस स्त्री के पुत्र को जीवनदान दीजिए”। Raja Harischandra Ki Katha इतने में रोहिताश्व जीवित हो उठा। ईश्वर की अनुमति से विश्वामित्र ने हरिश्चंद्र का राजपाठ भी उन्हें वापस लौटा दिया। महाराज हरिश्चन्द्र ने स्वयं को बेचकर भी सत्यव्रत का पालन किया। यह सत्य एवं धर्म के पालन का एक बेमिसाल उदाहरण है। आज भी महाराजा हरिश्चन्द्र का नाम श्रद्धा और आदर के साथ लिया जाता है।

Raja Harischandra Ki Katha:सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र इसलिए कहलाए महादानी, जरूर पढ़ें यह कथा Read More »