October Chandra Grahan 2023: इस ग्रहण से पहले ही बंद हो जाएंगे मंदिर, 12 राशियों में होगी जबरदस्त उथल- पुथल, पढ़ें अपनी राशि का हाल

इस साल अक्टूबर में दो ग्रहण लगने जा रहे हैं। यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण होगा, जो 14 अक्टूबर को लगेगा। इसके बाद 28 और 29 अक्टूबर की रात को चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण का ज्योतिषिय दृष्टि से खास महत्व होचा है। यह विभिन्न राशियों पर प्रभाव तो डालता ही है साथ ही धार्मिक नजरिए से भी खास होते हैं। ग्रहण से पहले सूतक लग जाते हैं, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण का सूतक अलग-अलग होता है। सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण से 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले लग जाता है। सूतक काल शुरू होते ही पूजा पाठ बंद कर दिए जाते हैं। मंदिरों के कपाट बंद हो जाते हैं। मंदिरों में कोई प्रवेश कर पूजा नहीं कर सकता है। आंध्र प्रदेश का तिरूमाला मंदिर भी ग्रहण के कारण 28 अक्टूबर की शाम को बंद हो जाएगा। शाम 7 बजे के बाद किसी को इसमें दर्शन नहीं करने दिए जाएंगे।  इस साल का अंतिम चंद्र ग्रहण 29 अक्टूबर को 01 बजकर 06 रात को शुरू होगा और तड़के 02 बजकर 22 मिनट पर खत्म हो जाएगा। भारत में ग्रहण की अवधि 1 घंटा 16 मिनट की होगी। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा और इसका सूतक काल मान्य होगा। इसलिए एक दिन पहले से सूतक काल लग जाएगा और 28 अक्टूबर को मंदिरों के कपाट शाम 7 बजे से बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद ग्रहण के बाद ही मंदिर खोला जाएगा। कई जगह शाम चंद्र ग्रहण और इसके सूतक 4:05 बजे लग जाएगा, इसलिए इस समय मंदिर में दर्शन करने न जाएं।  यह अगले दिन 29 अक्टूबर को सुबह खोला जाएगा। सूर्य ग्रहण की बात करें तो भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा। साल का दूसरा सूर्यग्रहण 14 अक्टूबर 2023 को लगेगा। यह ग्रहण भारतीयसमयानुसार, सूर्यग्रहण रात 08 बजकर 34 मिनट से आरंभ होगा और मध्यरात्रि 02 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। यह भारत में नहीं उत्तरी अमेरिका, कनाडा, मैक्सिको, अर्जेटीना, कोलंबिया, पेरू, क्यूबा, जमैका, हैती, ब्राजील, बहामास, एंटीगुआ, उरुग्वे, उत्तरी अमेरिका, बारबाडोस आदि स्थानों पर नजर आएगा।  Chandra Grahan 2023: कब है साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? जानिए सूतक काल का समय और धार्मिक महत्व 12 राशियों में होगी जबरदस्त उथल- पुथल, पढ़ें अपनी राशि का हाल अक्टूबर माह में 15 दिनों के भीतर सूर्य व चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण की घटना तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है। अक्टूबर माह में 15 दिनों के भीतर सूर्य व चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। सूर्य ग्रहण की घटना तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुजरता है, जबकि चंद्र ग्रहण में पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरती है। 14 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण और 28 अक्टूबर को चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। आइए जानते हैं, सूर्य और चंद्र ग्रहण लगने से कैसा रहेगा सभी राशियों का हाल। मेष राशि- वाणी में सौम्यता रहेगी। फिर भी संयत रहें। क्रोध व आवेश के अतिरेक से बचें। नौकरी में कार्यक्षेत्र में परिवर्तन हो सकता है। बाधा का सामना करना पड़ सकता है। वृष राशि- मन में शांति व प्रसन्नता रहेगी। जीवन साथी के स्वास्थ्य में सुधार होगा। नौकरी में परिवर्तन की संभावना बन रही हैं। किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। मिथुन राशि- मन प्रसन्न रहेगा। आत्मविश्वास भी बहुत रहेगा। नौकरी में तरक्की के मौके मिलेंगे। परंतु कार्यक्षेत्र में बदलाव हो सकता है। परिश्रम अधिक रहेगा। कर्क राशि- मन परेशान रहेगा। धैर्यशीलता बनाए रखने का प्रयास करें। जीवन साथी का साथ मिलेगा। किसी मित्र के सहयोग से आय में वृद्धि हो सकती है। सचेत रहें। सिंह राशि- मन अशांत रहेगा। मानसिक तनाव से बचें। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। परिवार के साथ यात्रा पर जाने का कार्यक्रम बन सकता है। आय में वृद्धि होगी। कन्या राशि- आत्मविश्वास में कमी रहेगी। परिवार के साथ किसी धार्मिक स्थान पर जा सकते हैं। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। कारोबार के लिए विदेश जा सकते हैं। तुला राशि- मन परेशान रहेगा। शैक्षिक कार्यों में बाधा आ सकती हैं। सचेत रहें। कारोबार में लाभ के अवसर मिलेंगे। पिता से धन की प्राप्ति हो सकती है। वृश्चिक राशि- मन परेशान रहेगा। संयत रहें। क्रोध के अतिरेक से बचें। कारोबार में वृद्धि होगी। भागदौड़ भी अधिक रहेगी। परिवार की सेहत का ध्यान रखें। धनु राशि- मन परेशान रहेगा। आत्मसंयत रहें। भावनाओं को वश में रखें। पिता का साथ मिलेगा। वाहन के रख-रखाव तथा वस्त्रों आदि पर खर्च बढ़ सकते हैं। मकर राशि- मन प्रसन्न तो रहेगा। परंतु आत्मविश्वास में कमी भी रहेगी। बातचीत में संतुलित रहें। शैक्षिक कार्यों में सफल रहेंगे। परिश्रम अधिक रहेगा। मित्रों का सहयोग मिलेगा। कुंभ राशि- मन में उतार-चढ़ाव रहेंगे। आत्मविश्वास तो भरपूर रहेगा। माता की सेहत का ध्यान रखें। परिवार का साथ मिलेगा। शैक्षिक कार्यों में बाधा आ सकती है। मीन राशि- आत्मविश्वास भरपूर रहेगा। परंतु नकारात्मक विचारों से बचें। शैक्षिक कार्यों में सफलता मिलेगी। मान-सम्मान में वृद्धि भी होगी। पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा।

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Chandra Grahan 2023: कब है साल का आखिरी चंद्र ग्रहण? जानिए सूतक काल का समय और धार्मिक महत्व

October 2023: साल 2023 का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। मान्यतानुसार सूतक काल से चंद्र ग्रहण तक कुछ विशेष कार्यों को नहीं करना चाहिए। Chandra Grahan 2023: अक्टूबर महीने में साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। । साल 2023 का पहला चंद्र ग्रहण 5 मई 2023 को लगा था, लेकिन भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं दिया था। साल का दूसरा चंद्रग्रहण 28 अक्टूबर 2023 को लगने जा रहा है और यह भारत में  दिखाई देगा। इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। इस दौरान जातकों को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए। बता दें कि जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी एक सीधी रेखा में आ जाते हैं, तब चंद्र ग्रहण लगता है। इसका ज्योतिषीय और वैज्ञानिक दोनों ही दृष्टि से विशेष महत्व है। चलिए साल के अंतिम चंद्र ग्रहण का समय और सूतक काल के बारे में जानते हैं। चंद्रग्रहण का समय: साल 2023 का आखिरी चंद्र ग्रहण 28 अक्टूबर को रात 11 बजकर 32 मिनट से शुरू होगा और 29 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 36 मिनट पर समाप्त होगा। सूतक काल का समय: साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा। इसलिए चंद्र ग्रहण का सूतक काल भी 9 घंटे पहले से आरंभ हो जाएगा। सूतक काल के दौरान शुभ कार्यों को वर्जित माना गया है।  कहां-कहां नजर आएगा चंद्र ग्रहण?  भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया,यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, एशिया, हिंद महासागर, अटलांटिक, आर्कटिक और अंटार्कटिका, दक्षिणी प्रशांत महासागर में चंद्रग्रहण दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण से जुड़ी खास बातें: चंद्र ग्रहण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए इस दौरान गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए।ग्रहण के दौरान घर में पके हुए भोजन में तुलसी का पत्ता डाल देना चाहिए। मान्यता है कि तुलसी का पत्ता नहीं डालने से नकारात्मक शक्तियों के कारण खाना दूषित हो जाता है।चंद्र ग्रहण के दौरान भोजन का सेवन ना करें। हालांकि, बीमार व्यक्ति, बच्चे और बड़े-बुजुर्ग भोजन कर सकते हैं।धार्मिक मान्यता है कि चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद सबसे पहले स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनना चाहिए।इसके बाद घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें।

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Valmiki Jayanti 2023: कब है वाल्मिकी जयंती? नोट करें डेट और जानें इसका पौराणिक महत्व

Valmiki Jayanti 2023: सनातन धर्म में महर्षि वाल्मीकी को पहला कवि माना जाता है और उन्होंने ही हिंदूओं के महाकाव्य रामायण की रचना की थी. Valmiki Jayanti 2023: दुनिया की विभिन्न भाषाओं में जो उच्च कोटि के महाकाव्य हैं उनमें महर्षि वाल्मीकी द्वारा रचित रामायण का विशेष स्थान है. हिंदू धर्म में रामायण एक ऐसा ग्रंथ है जो कि लगभग हर घर में मिलेगा और इसका पूजन किया जाता है. कहते हैं कि रामायण का पाठ करने से व्यक्ति को पॉजिटिविटी मिलती है और जीवन में आ रही परेशानियों से बाहर आने में ​मदद मिलती है. इस ग्रंथ की रचना महर्षि वाल्मीकी ने की थी और इसलिए हिंदू धर्म में वाल्मीकी जयंती का खास महत्व माना गया है. इस जयंती को वाल्मीकी समाज सहित सभी वर्गों के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. आइए जानते हैं इस साल कब है वाल्मीकी जयंती? वाल्मीकी जयंती 2023 कब है? हर साल आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि के दिन वाल्मीकी जयंती मनाई जाती है और इसी दिन शरद पूर्णिमा भी होती है. पंचांग के अनुसार इस साल आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि 28 अक्टूबर को सुबह 4 बजकर 17 पर शुरू होगी और 29 अक्टूबर को देर रात 1 बजकर 53 पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार इस साल 28 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा के दिन वाल्मीकी जयंती मनाई जाएगी. थिरुवनमियूर में है महर्षि वाल्मीकि का मंदिर चेन्नई के थिरुवनमियूर में महर्षि वाल्मीकि मंदिर 1300 साल से भी ज्यादा पुराना एक मंदिर है। इसे मारकंडेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण चोल शासनकाल के दौरान किया गया था। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की पूजा करने के लिए ऋषि वाल्मीकि मारकंडेश्वर मंदिर में पूजा की थी। बाद में इस जगह का नाम थिरुवाल्मिकियूर रखा गया, जो अब थिरुवनमियूर में बदल गया है। वाल्मीकी जयंती का महत्व महर्षि वाल्मीकी ने हिंदुओं को सबसे बड़े महाकाव्य रामायण की रचना की थी जो कि हर घर में रखा जाता है. वाल्मीकी जयंती के पर्व को बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है. इस दिन कई सामाजिक व धार्मिक आयो​जन किए जाते हैं. महर्षि वाल्मीकी के जन्म को लेकर कई तरह की मान्यताएं हैं. प्रचलित मान्यता के अनुसार वाल्मी​कि का जन्म महर्षि कश्यप और देवी अदिति के 9वें पुत्र और उनकी पत्नी चर्षिणी से हुआ था. कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने ही दुनिया में सबसे पहले श्लोक ​की रचना की थी. वाल्मीकि जी को एक लेकर एक प्रचलित कहानी ये भी है ​कि जब भगवान राम ने माता सीता का त्याग किया था तो माता सीता ने महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही निवास किया था. इसी आश्रम में ही उन्होंने लव-कुश को जन्म दिया था. इसलिए लोगों के बीच वाल्मीकि जयंती का विशेष महत्व है. मान्यता है कि म​हर्षि वाल्मीकि के पास इतनी मजबूत ध्यान शक्ति थी कि वे एक बार ध्यान में लीन हो गए थे और उनके शरीर के ऊपर दीमन में घर बना लिया था और फिर भी उनका ध्यान भंग नहीं हुआ. महर्षि वाल्मीकि से जुड़ा इतिहास म​हर्षि वाल्मीकि को लेकर इतिहास में कई कहानियां प्रचलित हैं और पौराणिक कथाओं के अनुसार वाल्मीकि का नाम रत्नाकर था और वे एक डाकू थे. लेकिन बाद में जब उन्हें इस बात का ज्ञान हुआ कि वे गलत रास्ते पर हैं तब उन्होंने इस रास्ते को छोड़ धर्म का मार्ग अपनाया था. उन्हें देवर्षि नारद ने राम नाम का जप करने की सलाह दी थी. जिसके बाद वाल्मीकि जी राम नाम में लीन होकर एक तपस्वी बन गए. उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ही ब्रह्मा जी ने उन्हें ज्ञान का भंडार दिया और फिर उन्होंने रामायण लिखी.

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Karwa Chauth 2023 Date: इस दिन सुहागिन महिलाएं रखेंगी करवा चौथ का व्रत, जानें सही डेट, मुहूर्त और महत्व

Karwa Chauth 2023: हिंदू धर्म में करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व है। इस व्रत को रखने से पति की आयु लंबी होती है। तो आइए जानते हैं इस बार विवाहित महिलाएं कब करवा चौथ का व्रत रखेंगी। सुहागिनों के सबसे बड़े पर्व में से एक करवा चौथ इस साल 1 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन करवा चौथ का व्रत रखा जाता है। करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं दिनभर बिना अन्न और जल के उपवास रखती हैं और फिर रात में चांद को देखने के बाद ही अपना व्रत खोलती हैं। इस व्रत में चांद और करवा माता के साथ शिव परिवार की पूजा की जाती है। कहते हैं कि करवा चौथ व्रत को रखने से न केवल पति दीर्घायु होते हैं बल्कि दांपत्य जीवन में भी खुशहाली और मिठास बनी रहती है। करवा चौथ व्रत कथा: पतिव्रता करवा धोबिन की कथा! (Karwa Chauth Vrat Katha) करवा चौथ व्रत 2023 पूजा शुभ मुहूर्त कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि आरंभ-  31 अक्टूबर को रात 9 बजकर 30 मिनट से  कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि समाप्त- 1 नवंबर 2023 को रात 9 बजकर 19 तक  करवा चौथ व्रत तिथि-  1 नवंबर 2023 करवा चौथ व्रत पूजा मुहूर्त- 1 नवंबर को शाम 5 बजकर 44 मिनट से 7 बजकर 02 मिनट तक करवा चौथ 2023 चंद्रोदय का समय- 1 नवंबर 2023 को  8 बजकर 26 मिनट पर करवा चौथ व्रत का महत्व करवा चौथ से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है। करवा चौथ के दिन उपवास रखने और विधि विधान से साथ पूजा करने से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। साथ ही पति-पत्नी का रिश्ता और अधिक अटूट हो जाता है।  करवा चौथ का व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं रात में चांद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से पानी पीकर ही अपना व्रत खोलती हैं। 

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Karwa Chauth 2023: करवा चौथ कब है? सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी चंद्रमा की पूजा, जानें मुहूर्त, अर्घ्य समय और पारण

Karwa Chauth 2023 date: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, करवा चौथ का व्रत हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है. उस दिन कार्तिक संकष्टी चतुर्थी होती है, जिसे वक्रतुंड संकष्टी चतुर्थी कहते हैं. करवा चौथ के दिन सुहागन महिलाएं और विवाह योग्य युवतियां अपने जीवनसाथी की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इस व्रत में चंद्रमा की पूजा करना और अर्घ्य देना जरूरी है. इसके बिना करवा चौथ का व्रत पूरा नहीं होता है. करवा चौथ 2023 कब है?वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 31 अक्टूबर दिन मंगलवार को रात 09 बजकर 30 मिनट से प्रारंभ हो रही है. य​ह तिथि 01 नवंबर बुधवार को रात 09 बजकर 19 मिनट पर खत्म होगी. उदयातिथि और चतुर्थी के चंद्रोदय के आधार पर करवा चौथ व्रत 1 नवंबर बुधवार को रखा जाएगा. इस दिन व्रती को 13 घंटे 42 मिनट तक निर्जला व्रत रखना होगा. व्रत सुबह 06 बजकर 33 मिनट से रात 08 बजकर 15 मिनट तक होगा. करवा चौथ व्रत कथा | Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi करवा चौथ 2023 का पूजा मुहूर्त क्या है?जो महिलाएं 01 नवंबर बुधवार को करवा चौथ का व्रत रखेंगी, उनको शाम में पूजा के लिए 1 घंटा 18 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा. करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 36 मिनट से शाम 06 बजकर 54 मिनट तक है. करवा चौथ 2023 पर चंद्रमा पूजन और अर्घ्य का समय क्या है?करवा चौथ के दिन चंद्रोदय रात 08 बजकर 15 मिनट पर होगा. इस समय से आप चंद्रमा पूजन के साथ अर्घ्य दे सकते हैं. चंद्रमा को अर्घ्य देने पर व्रत पूरा होता है. करवा चौथ 2023 पारण समयकरवा चौथ व्रत का पारण चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद किया जाता है. पति के हाथों जल ​पीकर व्रत को पूरा करते हैं. 1 नवंबर को रात 08:15 बजे के बाद आप कभी भी पारण कर सकती हैं. तीन योग में है करवा चौथ 2023इस साल करवा चौथ पर 3 योग बन रहे हैं. इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:33 बजे से प्रारंभ हो रहा है, जो अगले दिन प्रात: 04:36 बजे तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि को शुभ योग माना जाता हैं. इसमें किए गए कार्य सफल सिद्ध होते हैं. उस दिन प्रात:काल से दोपहर 02 बजकर 07 मिनट तक परिघ योग है, उसके बाद से ​शिव योग प्रारंभ होगा, जो अगले दिन तक रहेगा. करवा चौथ के दिन मृगशिरा नक्षत्र सुबह से लेकर अगले दिन 2 नंवबर को सुबह 04:36 बजे तक है.

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Hanuman Ji:जब जीवन में मिले ये संकेत, तो समझ लीजिए आप पर बनी हुई है हनुमान जी की कृपा

Hanuman Ji: हनुमान जी को भगवान राम के परम भक्त के रूप में जाना जाता है। तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में भगवान हनुमान के कई गुणों का विस्तृत वर्णन किया है। उनके चरित्र के चलते ही गोस्वामी तुलसीदास ने हनुमान जी को ‘सकल गुण निधानं’ कहा है। कुछ ऐसे संकेत बताए गए हैं जिनके मिलने पर आप यह जान सकते हैं कि आपके ऊपर हनुमान जी की कृपा बनी हुई है। आइए जानते हैं वह कौन-से संकेत हैं। निर्भय होता है जीवन अगर आपके जीवन में किसी प्रकार का डर नहीं है और आप पूरी सच्चाई के साथ अपना जीवन जी रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपके ऊपर संकटमोचन हनुमान जी की विशेष कृपा बनी हुई है। क्योंकि जिस भक्त पर हनुमान जी प्रसन्न रहते हैं उसका जीवन भयमुक्त बीतता है। Hanuman ji:रामभक्‍त हनुमान को किसने दिया था अमर होने का वरदान? पढ़ें ये पौराणिक कथा काम में नहीं आती कोई बाधा जब व्यक्ति के किसी काम में बाधा न आए। साथ ही उसे हर कार्य में सफलता की प्राप्ति हो रही है तो, यह भी इस बात की ओर संकेत करता है कि हनुमान जी की कृपा आपके ऊपर बनी हुई है। जब हाथ में दिखे मंगल रेखा अगर आपके हाथों में मंगल रेखा साफ दिखाई देने लगे तो इसका अर्थ है कि बजरंगबली आपसे प्रसन्न हैं। ऐसा होने पर कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी। घर के किसी भी सदस्य को किसी प्रकार का रोग या पीड़ा नहीं होगी।   शनि दशा का नहीं होता प्रभाव अगर व्यक्ति पर किसी प्रकार से शनि की साढ़े साती, ढैया या अन्य किसी भी प्रकार की शनि पीड़ा का असर नहीं होता तो समझा जाता है कि उस व्यक्ति पर हनुमान जी की विशेष कृपा बनी हुई है। जगन्नाथ का मंदिर : जगन्नाथपुरी में ही सागर तट पर बेदी हनुमान का प्राचीन एवं प्रसिद्ध मंदिर है। कहावत है कि महाप्रभु जगन्नाथ में वीर मारुति को यहां समुद्र को नियंत्रित करने हेतु नियुक्त किया था, परंतु जब-तब हनुमान भी जगन्नाथ-बलभद्र एवं सुभद्रा के दर्शनों का लोभ संवरण नहीं कर पाते थे, सम्प्रति समुद्र भी उनके पीछे नगर में प्रवेश कर जाता। केसरीनंदन की इस आदत से परेशान हो जगन्नाथ महाप्रभु ने हनुमान को यहां स्वर्ण बेड़ी से आबद्ध कर दिया।

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Papankusha Ekadashi 2023: कब है पापांकुशा एकादशी? जानें सही तिथि, विष्णु पूजा का मुहूर्त, हरि कृपा से मिटेंगे सारे पाप

Papankusha Ekadashi 2023: पापांकुशा एकादशी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन श्रीहरि की पूजा करने से व्यक्ति पाप मुक्त हो जाता है. जानें पापांकुशा एकादशी की डेट, मुहूर्त और महत्व अक्टूबर में दो एकादशी पड़ेंगी इंदिरा एकादशी और पापांकुशा एकादशी. आश्विन शुक्ल एकादशी के दिन इच्छित फल की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु का पूजन करना चाहिए. अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन व्रत करने वालों को यमलोक की यातनाएं नहीं सेहनी पड़ती. आइए जानते हैं अक्टूबर में पापांकुशा एकादशी व्रत की डेट, मुहूर्त और महत्व Kab Hai Papankusha Ekadashi 2023 Kab Hai Papankusha Ekadashi 2023:  पापांकुशा एकादशी का व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के पापों का प्रायश्चित होता है. हरि कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है. जो व्यक्ति पापांकुशा एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करता है, उसे 100 सूर्य यज्ञ और 1 हजार अश्वमेध यज्ञ करने के समान पुण्य फल प्राप्त होता है. भगवान विष्णु के आशीर्वाद से व्यक्ति की मनोकामनाएं पूरी होती है.  इस साल पापांकुशा एकादशी व्रत कब है? पापांकुशा एकादशी व्रत का पूजा मुहूर्त और महत्व क्या है? कब है पापांकुशा एकादशी 2023पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 24 अक्टूबर दिन मंगलवार को दोपहर 03 बजकर 14 मिनट से प्रारंभ होगी. इस तिथि की समाप्ति 25 अक्टूबर दिन बुधवार को दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर होगी. उदयातिथि के आधार पर इस साल पापांकुशा एकादशी व्रत 25 अक्टूबर को रखा जाना उत्तम है. 3 शुभ योग में है पापांकुशा एकादशी व्रतइस साल पापांकुशा एकादशी का व्रत 3 शुभ योग में है. पापांकुशा एकादशी के दिन रवि योग, वृद्धि योग और ध्रुव योग बन रहे हैं. उस दिन रवि योग सुबह 06 बजकर 28 मिनट से प्रारंभ हो रहा है और दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक मान्य रहेगा. वहीं वृद्धि योग प्रात:काल से प्रारंभ होगा और वह दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से ध्रुव योग शुरू होगा, रात तक है. पापांकुशा एकादशी 2023 पूजा मुहूर्त25 अक्टूबर को पापांकुशा एकादशी व्रत की पूजा आप सूर्योदय के बाद से कर सकते हैं क्योंकि उस समय से रवि योग और वृद्धि योग रहेगा. ये दोनों ही शुभ योग हैं. वृद्धि योग में आप जो भी कार्य करते हैं, उसके फल में वृद्धि होती है. रवि योग सूर्य के प्रभाव वाला होता है. व्रत के दिन आप पूजा के लिए राहुकाल का त्याग करें. उस दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 01 बजकर 29 मिनट तक है. राहुकाल में एकादशी की पूजा न करें. पापांकुशा एकादशी पर भद्रा और पंचकपापांकुशा एकादशी के दिन भद्रा और पंचक भी है. उस​ दिन भद्रा सुबह 06 बजकर 28 मिनट से शुरू हो रही है और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगी. भद्रा का वास धरती पर है तो इस समय में कोई शुभ कार्य न करें. पापांकुशा एकादशी पर पूरे दिन पंचक है. पापांकुशा एकादशी व्रत का महत्वपौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आपने जाने या अनजाने में कोई भी पाप किया है तो उसके प्रायश्चित के लिए पापांकुशा एकादशी का व्रत रखकर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करें. उनकी कृपा से आपके पाप मिट जाएंगे. इस दिन आप अपनी क्षमता के अनुसार दान करके पुण्य फल प्राप्त कर सकते हैं. पापांकुशा एकादशी पर अन्न, जल, तिल, गाय, भूमि, सोना आदि का दान करना चाहिए. पापांकुशा एकादशी 2023 व्रत पारण समय (Papankusha Ekadashi 2023 Vrat Parana Time) पापांकुशा एकादशी व्रत का पारण 26 अक्टूबर 2023 को सुबह 06 बजकर 28 मिनट पर से  सुबह 08 बजकर 43 मिनट तक शुभ मुहूर्त है. पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय 09:44 तक रेहगी पापांकुशा एकादशी महत्व (Papankusha Ekadashi Significance) पापांकुशा एकादशी का व्रत अपने नाम स्वरूप जातक को पाप से मुक्ति दिलाता है. मान्यता है कि पापांकुशा एकादशी का निराहार व्रत करने से श्रीहरि भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं और भक्तों को कभी धन-दौलत, सुख, सौभाग्य की कमी नहीं होने देते. पापांकुशा एकादशी पूजा विधि (Papankusha Ekadashi Puja Vidhi) एकादशी तिथि पर सुबह उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए. संकल्प अपनी शक्ति के अनुसार ही लेना चाहिए यानी एक समय फलाहार का या फिर बिना भोजन का, संकल्प लेने के बाद घट स्थापना की जाती है और उसके ऊपर श्रीविष्णुजी की मूर्ति रखी जाती है. इस व्रत को करने वाले व्यक्ति को रात्रि में विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए. इस व्रत का समापन द्वादशी तिथि की सुबह ब्राह्मणों को अन्न का दान और दक्षिणा देने के बाद होता है.

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सपने में कभी गाय देखी है,सपने में गाय दिखना माना जाता है बहुत शुभ

सपने में गाय देखना एक खास संकेत देता है. गाय दिखना बहुत शुभ माना जाता है. ये इस पर भी निर्भर करता है कि आपको सपने में किस तरह की गाय दिखाई देती है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार रात के समय गहरी नींद में आने वाले सपने हमें अपने भविष्य में होने वाले शुभ या अशुभ संकेतों के बारे में बताते हैं. कई बार हमें ऐसे सपने दिखाई देते हैं, जो उठने के बाद भी हमारे दिमाग में रह जाते हैं और कुछ जिन्हें हम पूरी तरह से भूल जाते हैं. ऐसे सपनों को जानने के लिए हम उत्सुक रहते हैं कि आखिर उस सपने के पीछे का अर्थ क्या है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार आने वाला हर सपना अपने साथ कोई ना कोई संकेत जरूर लेकर आता है. हर सपने का कोई ना कोई अर्थ जरूर निकलता है. अगर आप उस अर्थ को जान लें तो हो सकता है कि आने वाला समय आपके लिए शुभ हो जाए, इसलिए हर व्यक्ति को अपने आने वाले सपनों को नजरअंदाज करने के बजाय, उसके मतलब को समझने की कोशिश करनी चाहिए. यदि आपको सपने में गाय दिखाई देती है तो इस सपने का क्या अर्थ है? यदि सपने में व्यक्ति गाय को खुद की ओर आता देखता है तो इस स्वप्न को शुभ मानिए। इस सपने को देखने के बाद सुबह आपको कोई शुभ समाचार मिल सकता है। साथ ही घर में सुख-समृद्धि भी आती है। मालूम हो कि ऐसी स्थिति में गाय देखना धन आगमन का भी संदेश होता है। Dream Interpretation अगर आपको सपने में सफेद गाय दिखाई देती है तो इसका मतलब है कि भविष्य में आपको कई तरह की खुशियां मिलने वाली हैं. आपके परिवार में कुछ अच्छी खबर सुनने को मिलने वाली है. सपने में सफेद गाय दिखना बेहद शुब संकेत माना जाता है. सपने में गाय का बछड़ा देखना भी बहुत अच्छा माना जाता है. यह सपना बताता है कि आने वाले दिनों में आपकी आर्थिक स्थिति पहले से ज्यादा मजबूत होने वाली है. आप जिस भी काम में हाथ डालेंगे उसमें आपको सफलता मिलेगी. यह सपना बताता है कि आपके जीवन से परेशानियां जल्दी ही समाप्त होने वाली हैं. गाय का सपने में आना एक गंभीर अर्थ लिए हुए है. शास्त्रों के मुताबिक गाय को एक पवित्र पशु माना गया है. साथ ही इसे कामधेनु का रूप भी मानते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ 14 अन्य रत्नों की प्राप्ति हुई थी, जिनमें से एक कामधेनु गाय थी, इसलिए गाय को पशुधन भी कहा जाता है और हिंदू धर्म में इसे विशेष दर्जा दिया गया है.

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दशहरे पर पहले क्या करना चाहिए? दुर्गा विसर्जन या फिर भगवान राम की पूजा

दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहा जाता है, हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो हर साल अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। दशहरा के दो मुख्य धार्मिक कथाएं हैं। एक कथा के अनुसार, भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था, जो एक राक्षस राजा था जो लंका पर शासन करता था। दूसरी कथा के अनुसार, देवी दुर्गा ने इसी दिन महिषासुर, एक राक्षस को मार डाला था जो देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार कर रहा था। दुर्गा विसर्जन का शुभ मुहूर्त : 24 अक्टूबर 2023, मंगलवार को प्रात:काल 06:27 से 08:42 बजे के बीच दशहरे का विजय मुहूर्त : दोपहर 01:58 से 02:43 बजे के बीच दशहरा को मनाने के कई तरीके हैं। कुछ लोग देवी दुर्गा या भगवान राम की पूजा करते हैं। अन्य लोग रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों को जलाते हैं। दशहरा के दिन कई जगहों पर भव्य मेलों और समारोहों का आयोजन किया जाता है। दशहरा भारत के अलावा नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में भी मनाया जाता है। 2023 में, दशहरा 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा। दशहरा के कुछ प्रमुख अनुष्ठान और समारोह इस प्रकार हैं: दशहरा एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाता है। यह एक ऐसा दिन है जब लोग अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने और अच्छे के लिए काम करने का संकल्प लेते हैं।

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Hanuman ji:रामभक्‍त हनुमान को किसने दिया था अमर होने का वरदान? पढ़ें ये पौराणिक कथा

Hanuman Ji Puja: हिंदू धर्म में हनुमान जी भगवान श्री राम के सबसे बड़े भक्त और समर्पण के प्रतीक हैं. हनुमान जी ने अपना पूरा जीवन श्री राम को समर्पित कर दिया था. हनुमान जी को महावीर, बजरंगबली, पवन पुत्र, अंजनेय समेत कई नामों से पुकारा जाता है. राम भक्त हनुमान की वीरता और साहस की कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं. मान्यता है कि कलयुग में अगर धरती पर कोई ईश्वर है, तो वे केवल हनुमान जी है. हनुमान जी को चिरंजीवी होने का वरदान मिला हुआ है. वाल्मीकि रामायण में हनुमान के अमर होने का वर्णन किया गया है. आइये जानते हैं हनुमान जी को किसने अमर होने का वरदान दिया था. Hanuman ji:हनुमानजी बंदर या वानर थे या किसने दिया हनुमान को अमर होने का वरदान? वाल्मीकि रामायण के अनुसार, रावण का वध करने और लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद प्रभु श्री राम अयोध्या लौटे, तब उन्होंने युद्ध में साथ देने वाले सभी वीरों को उपहार दिया. विभीषण, अंगद और सुग्रीव समेत कई वीरों को उपहार मिला. इस दौरान हनुमान जी ने भगवान श्री राम से याचना करते हुए कहा कि ‘यावद् रामकथा वीर चरिष्यति महीतले। तावच्छरीरे वत्स्युन्तु प्राणामम न संशय:।। यानि, हे राम! इस लोक पर जब तक राम कथा प्रचलित रहे, तब तक मेरे प्राण शरीर में बसे रहें.

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Hanuman ji:दोपहर में क्यों नहीं करते हनुमान जी की पूजा? क्या है सही समय? यहां जानें सब कुछ

Lord Hanuman Puja: हिंदू धर्म में लगभग सभी देवी देवताओं की पूजा पाठ के लिए समय निश्चित किया गया है. माना जाता है कि सही समय पर पूजा पाठ करने से व्यक्ति को शुभता प्राप्त होती है. हनुमान जी की पूजा का समय भी निश्चित है. बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है, कि हनुमान जी की पूजा किस समय करनी चाहिए? जिससे पूजा का शुभ फल प्राप्त हो. हिंदू धर्म शास्त्रों में बताया गया है, कि हनुमान जी की पूजा सुबह अथवा शाम के वक्त ही करनी चाहिए. हिंदू धर्म पुराणों के अनुसार बजरंगबली की पूजा करने से कुंडली में मौजूद निर्बल ग्रह प्रबल होते हैं, और शुभ फल देते हैं. शनि की महादशा और साढ़ेसाती को दूर करने के लिए भी हनुमान जी की पूजा करना लाभकारी होता है, लेकिन दोपहर के समय हनुमान जी की पूजा कभी भी ना करें, शास्त्रों में इसके पीछे की रोचक कथा बताई जाती है. Hanuman ji :हनुमानजी के 108 नाम, लेकिन जानिए 11 खास नामों का रहस्य प्रातःकाल ऐसे लें हनुमानजी का नाम रामचरितमानस के सुंदरकांड में हनुमान जी कहते हैं “प्रात नाम जो लेई हमारा, तेहि दिन ताहि न मिलहि आहारा।” यानी प्रातः काल में जो उनका नाम लेता है उसे दिनभर आहार नहीं मिलता. असल में हनुमान जी वानर रूप धारी हैं, और साथ ही देवता भी हैं, और देवताओं का नाम बिना स्नान और पवित्र हुए बिना नहीं लिया जाना चाहिए. इसलिए हनुमान जी का नाम लेना और पूजन करना है तो प्रातः काल स्नान करके पवित्र होने के बाद ही पवित्र भाव से ही उनका नाम लिया जाना चाहिए. ऐसा करने से कोई दोष नहीं लगता और हनुमान जी की कृपा भी प्राप्त होती है. हनुमानजी की पूजा का समय और लाभहनुमानजी की पूजा संध्या के समय करना भी शुभ मंगलकारी होता है। ज्योतिषीय उपायों में बताया जाता है कि रात में 8 बजे के बाद घी का दीप जलाकर हनुमान चालीसा अथवा सुंदरकांड का पाठ किया जाए तो यह बहुत ही शुभ फलदायी होता है। हनुमान जन्मोत्सव यानी हनुमान जयंती का दिन हो या अन्य दिन शाम के समय हनुमानजी की पूजा करें तो मन में किसी प्रकार का क्लेश और भय नहीं रहता है। प्रतिकूल ग्रह दशाओं से निकला भी व्यक्ति के लिए आसान हो जाता है। इसलिए दोपहर में हनुमानजी की पूजा नहीं होतीहनुमानजी की पूजा के बारे में ऐसी मान्यता है कि दोपहर के समय हनुमानजी की पूजा करने से पूजा का फल नहीं मिलता है। क्योंकि इस समय की गई पूजा को हनुमानजी स्वीकार नहीं करते हैं। इसकी वजह यह है कि हनुमानजी दोपहर के समय भारत में नहीं रहते हैं। इस समय विभीषणजी को दिए वचन के अनुसार हनुमानजी लंका चले जाते हैं। इसलिए इनकी पूजा दोपहर के समय नहीं की जाती है। इसलिए दोपहर की पूजा नहीं स्वीकारते हनुमानजीविभीषणजी हनुमानजी से बड़ा स्नेह रखते थे। इन्होंने हनुमानजी से आग्रह किया, हे हनुमानजी आप हमारे साथ लंका में ही निवास कीजिए। लेकिन राम भक्त हनुमानजी भगवान राम से दूर कैसे रह सकते थे। इसलिए इन्होंने लंका में रहने से मना कर दिया। लेकिन विभीषणजी को एक वचन दे दिया, क्योंकि वह विभीषणजी के स्नेह को भी ठुकराना नहीं चाहते थे। हनुमानजी ने विभीषणजी से कहा कि वह नियमित रूप से दिन में दोपहर के समय लंका आएंगे और फिर वापस चले जाएंगे। शाम के समय हनुमानजी लंका से लौटकर आ जाते हैं। इसलिए शाम के समय हनुमानजी की पूजा फलदायी होती है।

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Navratri 2023 9 Day: नवरात्रि के नौवें दिन ऐसे करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें-विधि और महत्व

 Navratri 2023 9 Day मार्कण्डेय पुराण में मां को अष्ट सिद्धि भी कहा गया है। इसका अर्थ यह है कि मां सिद्धिदात्री अणिमा महिमा प्राकाम्य गरिमा लघिमा प्राप्ति ईशित्व और वशित्व अष्ट सिद्धि का संपूर्ण स्वरूपा हैं। Navratri 2023 9 Day: चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा-उपासना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री की भक्ति-उपासना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके लिए साधक श्रद्धा और भक्ति भाव से मां सिद्धिदात्री की पूजा करते हैं। साथ ही माता के निमित्त व्रत उपवास भी करते हैं। इस दिन पूजा संपन्न होने के पश्चात कन्या पूजन का भी विधान है। आइए, मां सिद्धिदात्री की पूजा विधि और महत्व जानते हैं मां का स्वरूप मां सिद्धिदात्री चार भुजा धारी हैं। एक हाथ में कमल पुष्प, तो दूजे में गदा धारण की हैं। वहीं, तीसरे में चक्र, तो चौथे में शंख धारण की हैं। सिंह उनकी सवारी है। मां सिद्धिदात्री समस्त संसार का कल्याण करती हैं। इसके लिए उन्हें जगत जननी भी कहते हैं। महत्व वेदों, पुराणों एवं शास्त्रों में मां की महिमा का वर्णन निहित है। मार्कण्डेय पुराण में मां की महिमा का गुणगान विशेषकर है। मार्कण्डेय पुराण में मां को अष्ट सिद्धि भी कहा गया है। इसका अर्थ यह है कि मां अणिमा, महिमा, प्राकाम्य गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, ईशित्व और वशित्व अष्ट सिद्धि का संपूर्ण स्वरूपा हैं। पूजा विधि इस दिन सुबह ब्रह्म बेला में उठकर सबसे पहले आदिशक्ति और जगत जननी मां दुर्गा को प्रणाम करें। इसके पश्चात, घर की साफ-सफाई कर नित्य कर्मों से निवृत हो जाएं। अब गंगाजल युक्त पानी से स्नान-ध्यान करें और आमचन कर नवीन वस्त्र धारण करें। इसके तत्पश्चात, मां सिद्धिदात्री की स्तुति निम्न मंत्र से करें- या देवी सर्वभू‍तेषु माँ सिद्धिदात्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:। अब मां सिद्धिदात्री की पूजा फल, फूल, धूप, दीप, कुमकुम, तिल, जौ, चावल आदि से करें। मां को प्रसाद में हलवा-पूरी भेंट करें। अंत में आरती अर्चना कर जीवन में तरक्की, उन्नति, सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। दिनभर उपवास रखें। संध्याकाल में आरती कर फलाहार करें। अगले दिन स्नान ध्यान कर सामान्य दिनों की तरह पूजा करें। इसके पश्चात, ब्राह्मणों को दान देकर व्रत खोलें।

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