Swapna Shastra: सपने में इन 5 चीजों का दिखना मां लक्ष्मी के आगमन का होता है संकेत, अगर दिख जाए तो लग जाती है लॉटरी

Swapna Shastra: सपने में इन 5 चीजों का दिखना मां लक्ष्मी के आगमन का होता है संकेत अच्छे दिन आने से पहले अक्सर हमारे जीवन में कुछ शुभ घटनाएं घटित होती हैं। अगर आपको भी जीवन में सुबह या अचानक कुछ ऐसे बदलाव नजर आते हैं तो समझ जाइए कि सौभाग्य का द्वार खुलने ही वाला है। हालांकि कई सपने अच्छे तो कुछ सपने बुरे और डरा देने वाले भी होते हैं। स्वप्न शास्त्र की मानें तो हर Swapna Shastra सपना कोई ना कोई संकेत देता है। इन्हीं में से एक सपने में बारिश या पानी का दिखना है। आइए ज्योतिषी चिराग बेजान दारुवाला से जानते हैं कि अगर आप सपने में पानी बरसता हुआ देखते हैं तो यह किस तरफ इशारा करता है।  सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ? ध्यान रखें: लॉटरी जीतने की संभावना: (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Devshayani Ekadashi:देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि क्यों जाते हैं पाताल लोक

पद्म पुराण के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी (17 जुलाई) के दिन भगवान विष्णु पाताल लोक जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक वहीं निवास करते हैं। इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं। भगवान विष्णु के इन चार माह तक पाताल गमन के पीछे एक घटना है। विष्णु ने जब वामन रूप धारण कर असुर राज बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी, तब बलि ने उन्हें अपना सर्वस्व दान कर दिया था। और भगवान ने उन्हें पाताल लोक में रहने का आदेश दिया था। भगवान बलि की दानशीलता और वचनबद्धता को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उससे वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा, ‘प्रभु यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे साथ पाताल लोक में निवास करें।’ विष्णु बलि के आग्रह को मना नहीं कर पाए क्योंकि वे वचनबद्ध थे। वे बलि के साथ पाताल चले गए। इधर देवि लक्ष्मी विष्णु के पाताल लोक में जाने पर परेशान हो गईं। उन्होंने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त करवाया। इस पर भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देव प्रबोधनी एकादशी) तक पाताल में निवास करेंगे। विष्णु के पाताल गमन के इस समय को ही चातुर्मास कहते हैं। Devshayani Ekadashi देवशयनी एकादशी से जुड़ी एक अन्य कथा भी है। भगवान विष्णु का शंखचूड़ नाम के एक असुर से लंबे समय तक भयंकर युद्ध चला। अंत में भगवान विजयी हुए। लेकिन इस युद्ध में वे काफी थक गए थे। देवताओं ने आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा कर उनसे निवेदन किया कि आप कुछ समय विश्राम करें और सृष्टि संचालन का भार भगवान शंकर को सौंप दें। देवताओं की विनती पर विष्णु देवलोक के चार प्रहर की अवधि के लिए शयन करने चले गए, जो पृथ्वी लोक के चार माह के बराबर होते हैं। तब से आषाढ़ शुक्ल की एकादशी हरिशयनी एकादशी के नाम से जानी जाती है। देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि पाताल लोक नहीं जाते हैं, बल्कि क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं। यह थोड़ी भ्रामक बात हो सकती है, क्योंकि: देवशयनी एकादशी का महत्व: देवशयनी एकादशी व्रत जुलाई में किस दिन है? जान लें सही तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व निष्कर्ष: Devshayani Ekadashi देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन होते हैं, पाताल लोक में नहीं। यह त्योहार आध्यात्मिक विकास और आत्म-शोध का अवसर प्रदान करता है। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Gold:सोना-चांदी शुभ क्यों होते हैं पूजा में…

सोना और चांदी को पूजा में शुभ मानने के कई कारण हैं: धर्मग्रंथों में सोने को सर्वश्रेष्ठ धातु स्वीकार किया गया है। इसी कारण देवी-देवताओं की मूर्तियां, आभूषण, सिंहासन आदि सोने से बनाए जाते हैं या सोने का आवरण चढ़ाया जाता है। सोने को कभी जंग नहीं लगता और न ही यह धातु विकृत होती है। इसकी कांति सदा बनी रहती है जिस कारण इसे पवित्र माना जाता है। इसी तरह चांदी को भी पवित्र धातु माना गया है। Gold सोना-चांदी आदि धातुएं केवल जल अभिषेक से ही शुद्ध हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार सोना बल और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। यद्यपि मंदिरों में तांबा, पीतल और कांसे के पात्र भी उपयोग में लाए जाते हैं, किंतु एल्युमीनियम, लोहा और स्टील के पात्र पूजा-अर्चना में पूर्णतया वर्जित हैं। Gold धार्मिक महत्व: वैज्ञानिक आधार: चमत्कारी फल देता है चांदी का प्रयोग, जानिए 17 आश्चर्यजनक बातें Gold सामाजिक महत्व: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सोने और चांदी का पूजा में उपयोग व्यक्तिगत श्रद्धा और विश्वास का विषय है। लेकिन, इन धातुओं से जुड़े धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व इनको पूजा के लिए विशेष बनाते हैं।

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Chamatkari Phal चमत्कारी फल देता है चांदी का प्रयोग, जानिए 17 आश्चर्यजनक बातें

चांदी सदियों से सिर्फ अपनी चमक और खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अनेक Chamatkari Phal चमत्कारी गुणों के लिए भी जानी जाती रही है। वैज्ञानिकों और चिकित्सकों द्वारा किए गए शोधों से पता चला है कि चांदी का उपयोग स्वास्थ्य, धन, और समृद्धि लाने के लिए भी किया जा सकता है। चांदी अत्यंत शुभ, शीतल, शांतिदायक और शाही धातु है। यह ऐश्वर्य और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। जीवन में चांदी का अधिकाधिक प्रयोग राजा महाराजा के काल से चला आ रहा है। इन 17 बातों से जानते हैं कि क्यों चांदी है 1. कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए चांदी का इस्तेमाल बेहतर परिणाम देता है लेकिन मेष, सिंह और धनु के लिए चांदी बहुत अच्छी नहीं होती। बाकी के लिए मध्यम है। 2. चांदी के बर्तन जिस घर में होते हैं वहां सुख, वैभव और संपन्नता आती है। अत: घर में पीतल, तांबा और चांदी के ही बर्तन होना चाहिए। लोहे, प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सावन मास के पहले दिन खरीदें यह 10 सामग्री, अच्छे दिनों की होगी शुरुआत 3. ज्योतिष में चांदी का संबंध चंद्रमा और शुक्र से है। चांदी शरीर के जल तत्व और कफ को नियंत्रित करती है। चांदी के प्रयोग से मन मजबूत और दिमाग तेज होता है। साथ ही चांदी के प्रयोग से चंद्रमा की समस्याओं को शांत किया जा सकता है। 4. चांदी के ग्लास में पानी पीने से सर्दी-जुकाम की समस्या दूर होती है तो वहीं चांदी के चम्मच से शहद खाने से शरीर विषमुक्त होता है। जिन लोगों को भावनात्मक परेशानियां ज्यादा हैं, वो चांदी का प्रयोग सावधानी से करें। 5. चांदी के बर्तन में केसर घोलकर माथे पर टीका लगाएं। सुख-शांति, समृद्धि और प्रसिद्धि प्राप्त होगी। यह प्रयोग गुरुवार को करें। 6. चांदी की डिबिया में जड़ : अर्क (अकोड़ा), छाक (छिला), खैर, अपामार्ग, पीपल की जड़, गूलर की जड़ खेजड़े की जड़, दुर्वा एवं कुशा की जड़ को एक चांदी की डिब्बी में रखकर नित्य पूजा करें। जीवन में कभी असफलता नहीं आएगी, नवग्रह शांत रहेंगे सुख सम्पत्ति की बढ़ोतरी होगी। धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटकों में यह टोटका अनुभूत सिद्ध प्रयोग है। 7. राहु के प्रकोप को दूर करने के लिए कम से कम 200 ग्राम ठोस चांदी का एक हाथी बनवाएं और उसे अपने घर में कहीं उचित स्थान पर रखें। बुधग्रह अष्टम में होकर खराब प्रभाव दे रहा है तो चांदी की नथ पहनें। 8. राहु के उपाय के लिए भोजन कक्ष में बैठकर चांदी की थाली में भोजन करें। केतु के अशुभ स्थिति से बचाव हेतु दूध में अंगूठा डालकर उसे चूसना चाहिए। सूर्य और चन्द्र की वस्तु यथा स्वेत वस्त्र, चांदी और तांबा दान करना चाहिए। 9 . यदि संभव हो तो हमेशा चांदी के बर्तन में पानी पिएं। चांदी बर्तन ना हो तो गिलास में पानी भरें और उसमें चांदी की अंगुठी डालकर पानी पीएं। यह प्राचीन, सरल और बहुत चमत्कारी तांत्रिक उपाय है। इससे धन संबंधी मामलों में राहत मिलती है। 10. मेहनत करने के बाद भी फल नहीं मिल रहा है तो किसी भी सोमवार की रात जब चंद्रोदय हो जाए तो उसके बाद अपने पलंग के चारों कोनों में चांदी की कील ठोक दें। चांदी की कील छोटी-छोटी भी लगाई जा सकती है। इस तांत्रिक उपाय से पैसों की समस्याएं दूर होने लगती हैं। 11. यदि आपके पास धन टिकता नहीं है तो महीने के पहले शुक्रवार को चांदी की डिब्बी में काली हल्दी, नागकेसर व सिंदूर को साथ रखकर भगवती लक्ष्मीजी के चरणों से स्पर्श करवाकर धन रखने के स्थान पर रख दें। निश्‍चित ही लाभ होगा। 12. यदि आपका व्यवसाय कम चल रहा है तो महीने के पहले गुरुवार को पीले कपड़े में काली हल्दी, 11 गोमती चक्र, 1 चांदी का सिक्का और 11 कौड़ियां बांधकर 108 बार निम्नलिखित मंत्र का जप कर अपने कार्य स्थल अथवा दुकान आदि के पवित्र स्थान में रख दें।   मंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः। 13. चांदी की कटोरी में थोड़ा सा सूखा धनिया रखकर उसमें चांदी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रखें। इस कटोरी को दुकान या व्यवसायिक स्थल से पूर्व दिशा में रख दें तथा प्रतिदिन प्रात: अगरबत्ती जलाकर इनका पूजन करें। 14. यदि कोई रोग ठीक नहीं हो रहा हो तो गोमती चक्र लेकर चांदी के तार में पिरोएं तथा पलंग के सिरहाने बांध दे। निश्‍चित ही लाभ मिलेगा। 15. घर के उत्तर-पश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा। 16. आप चाहते है अगर उच्च शिक्षा और करियर में प्रगति तो चांदी का चैकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें। यदि आप चाहते हैं व्यापार में प्रगति तो चांदी का छोटा सा ठोस हाथी अपनी जेब में रखें। 17.यदि आप लड़की के विवाह में विलंब हो रहा हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को प्रातः चांदी की एक ठोस गोली चांदी की ही चेन में पिरोकर उसे गंगा जल और कच्चे दूध से पवित्र करने के बाद धूप दीप दिखाएं और फिर शिवलिंग का स्पर्श कराने के बाद गले में धारण कर लें। इसके बाद वहां गरीबों को कुछ मीठा अवश्य खिलाएं।

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SAWAN 2024:सावन मास के पहले दिन खरीदें यह 10 सामग्री, अच्छे दिनों की होगी शुरुआत

SAWAN 2024: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की पूजा और आध्यात्मिकता के लिए समर्पित होता है। इस महीने का पहला दिन, जिसे सावन मास की पहली तारीख कहा जाता है, विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उपाय आरंभ कर देंगे। हम लाए हैं बहुत ही सरल और सटीक उपाय। SAWAN 2024 सावन मास के पहले दिन भगवान शिव की प्रिय सामग्री घर में लाने से शुभता में वृद्धि होती है।   1. गंगाजल: गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह आपके घर को शुद्ध करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। 2. शिवलिंग: भगवान शिव का प्रतीक, शिवलिंग पूजा के लिए आवश्यक है। 3. त्रिशूल: भगवान शिव का त्रिशूल बुरी आत्माओं से रक्षा करता है और सौभाग्य लाता है। त्रिशूल शिव के हाथों में हमेशा होता है। यह 3 देव और 3 लोक का प्रतीक है।  4. रुद्राक्ष: रुद्राक्ष को भगवान शिव का आँसू माना जाता है। इसे पहनने से शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। 5. बेल पत्र: भगवान शिव को बेल पत्र बहुत प्रिय है। 6. धूप: धूप जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 7. कपूर: कपूर आरती और पूजा में उपयोग किया जाता है। यह मन को शांत करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। 8. घी: घी का दीपक जलाने से धन और समृद्धि प्राप्त होती है। 9. नारियल: नारियल भगवान विष्णु और गणेश जी को प्रिय है। 10. फल: भगवान शिव को फल अर्पित करना शुभ होता है। राखी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे की कहानी क्या है? इन 10 सामग्री के अलावा, आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्य धार्मिक सामग्री भी खरीद सकते हैं। SAWAN 2024 सावन मास की पहली तारीख को इन सामग्री को खरीदकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह भी ध्यान रखें:

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Raksha Bandhan:राखी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे की कहानी क्या है?

रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन धूम-धाम से मनाया जाता है, जो इस बार 26 अगस्त को होगा। हर साल बहन अपने भाई की कलाई में विधि अनुसार राखी बांधती है और अपनी रक्षा का वचन मांगती है। रक्षा करने और करवाने के लिए बांधा जाने वाला पवित्र धागा Raksha Bandhan रक्षा बंधन कहलाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए उनके कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा का वचन देते हैं लेकिन क्या आप जानते है कि रक्षाबंधन क्यों बनाया जाता है? चलिए जानते हैं रक्षाबंधन मनाने के पीछे क्या हैं कारण। Raksha Bandhan पहले तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधी जाती थी सदियों से चली आ रही रीति के मुताबिक, बहन भाई को राखी बांधने से पहले प्रकृति की सुरक्षा के लिए तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधती है जिसे वृक्ष-रक्षाबंधन भी कहा जाता है। हालांकि आजकल इसका प्रचलन नही है। राखी सिर्फ बहन अपने भाई को ही नहीं बल्कि वो किसी खास दोस्त को भी राखी बांधती है जिसे वो अपना भाई जैसा समझती है और तो और रक्षाबंधन के दिन पत्नी अपने पति को और शिष्य अपने गुरु को भी राखी बांधते है। Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त Raksha Bandhan भगवान इंद्र को रक्षाबंधन से मिली थी जीत भविष्यपुराण में ऐसा कहा गया है कि देवाताओं और दैत्यों के बीच एक बार युद्ध छिड़ गया, बलि नाम के असुर ने भगवान इंद्र को हरा दिया और अमरावती पर अपना अधिकार जमा लिया। तब इंद्र की पत्नी सची मदद का आग्रह लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंची। भगवान विष्णु ने सची को सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वयल बना कर दिया। भगवान विष्णु ने सची से कहा कि इसे इंद्र की कलाई में बांध देना। सची ने ऐसा ही किया, उन्होंने इंद्र की कलाई में वयल बांध दिया और सुरक्षा व सफलता की कामना की। इसके बाद भगवान इंद्र ने बलि को हरा कर अमरावती पर अपना अधिकार कर लिया। Raksha Bandhan रक्षाबंधन: भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्यौहार Raksha Bandhan रक्षाबंधन, भाई-बहन के बीच प्रेम और स्नेह का पवित्र त्यौहार, श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन, बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उनके रक्षा का वचन लेती हैं और भाई बदले में अपनी बहन की रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन मनाने के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं: Draupadi and Krishna: महाभारत में, जब द्रौपदी को दुर्योधन और उसके भाइयों ने सभा में अपमानित किया, तब भगवान कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया था। इस घटना के प्रतीक के रूप में, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा कृष्ण की कलाई पर बांध दिया था। Kunti and Indra: एक कथा के अनुसार, देवी कुंती ने अपने पुत्रों की रक्षा के लिए इंद्रदेव से रक्षाबंधन प्राप्त किया था। Yama and Yamuna: यमराज, मृत्यु के देवता, अपनी बहन यमुना से बहुत प्रेम करते थे। यमुना ने उन्हें रक्षाबंधन मनाने और भाई-बहन के प्रेम का त्यौहार मनाने के लिए राजी किया। रक्षाबंधन का महत्व: भाई-बहन का प्रेम: रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। सुरक्षा का वचन: भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी बलिदान देना पड़े। सामाजिक बंधन: रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक ही सीमित नहीं है, यह दोस्तों, गुरुओं और शिष्यों के बीच भी मनाया जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत: रक्षाबंधन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है: रक्षा सूत्र बांधना: इस दिन, बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती हैं। मिठाई खिलाना: बहनें अपने भाई को मिठाई खिलाती हैं और उनसे आशीर्वाद लेती हैं। भाई द्वारा उपहार: भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। भोजन: परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर भोजन करते हैं। निष्कर्ष: रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और बलिदान का त्यौहार है। यह एक ऐसा अवसर है जब भाई-बहन अपने रिश्ते को मजबूत करते हैं और एक दूसरे के प्रति अपना समर्थन और प्यार व्यक्त करते हैं।

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Kawad Yatra 2024: 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू, शिवजी की कृपा पाने के लिए यात्रा के दौरान अपनाएं ये नियम

सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई 2024, सोमवार के दिन से हो रही है। ऐसे में Kawad Yatra 2024 कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जिसका समापन 02 अगस्त 2024 को सावन शिवरात्रि पर होगा। सनातन परंपरा में श्रावण मास में की जाने वाली Kawad Yatra 2024 कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना लिए इस पावन यात्रा के लिए निकलते हैं। इस साल सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई 2024, सोमवार के दिन से हो रही है। ऐसे में कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जिसका समापन 02 अगस्त 2024 को सावन शिवरात्रि पर होगा। श्रावण के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है। शिव भक्त कांवड़ को बांधकर कंधों पर लटकाकर अपने मूल स्थान के शिवालय में लाते हैं और फिर यहां के शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार सबसे पहले कावड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। कहते हैं भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर धाम से गंगाजल लेकर आए थे और फिर इस गंगाजल को उन्होंने यूपी के बागपत के पास स्थित ‘पुरा महादेव’ पर चढ़ाया था। भगवान शिव को समर्पित इस कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु पवित्र गंगा जल या फिर किसी नदी विशेष के शुद्ध जल से अपने ईष्ट देव का जलाभिषेक करते हैं। शुचिता, पवित्रता और संकल्प के साथ की गई इस यात्रा से प्रसन्न होकर कल्याण के देवता भगवान शिव अपने भक्तों पर अवश्य कृपा करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन ध्यान रहे कांवड़ यात्रा के कुछ नियम भी होते हैं, जिन्हें तोड़ने पर न सिर्फ यह यात्रा अधूरी रह जाती है उसका पूर्ण फल भी नहीं मिलता। सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ? Kawad Yatra 2024:कांवड़ यात्रा के नियम

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Devshayani Ekadashi 2024: देवशयनी एकादशी व्रत जुलाई में किस दिन है? जान लें सही तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

Devshayani Ekadashi 2024: देवशयनी एकादशी के दिन जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु चार महीनों के लिए निद्रा में चले जाते हैं। इन चार महीनों की अवधि को चातुर्मास के नाम से भी जाना जाता है, यही वजह है कि चतुर्मास की शुरुआत भी देवशयनी एकादशी के दिन से ही होती है। ऐसे में देवशयनी एकादशी के दिन को भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि जुलाई के महीने में देवशयनी एकादशी किस दिन है, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब होगा और इस एकादशी का महत्व क्या है। Devshayani Ekadashi 2024 देवशयनी एकादशी तिथि और पूजा मुहूर्त  हिंदू पचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की Devshayani Ekadashi 2024 एकादशी को देवशयनी एकादशी का पावन व्रत रखा जाता है। साल 2024 में यह तिथि 17 जुलाई को है। हालांकि एकादशी तिथि का आरंभ 16 जुलाई की रात को 8 बजकर 32 मिनट से हो जाएगा और 17 जुलाई को रात 9 बजकर 2 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। इसीलिए उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए एकादशी का व्रत 17 जुलाई को रखा जाना ही शुभ रहेगा। देवशयनी एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 5 बजकर 35 मिनट से शुरू होगा। इसके बाद सुबह 11 बजे तक आप भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना कर सकते हैं।  Kokila Vrat 2024 Date: जुलाई में कब रखा जाएगा Kokila Vrat 2024? नोट कर लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व देवशयनी एकादशी की पूजा विधि: देवशयनी एकादशी पर क्या करें? देवशयनी एकादशी पर क्या न करें? देवशयनी एकादशी से जुड़ी कुछ मान्यताएं: देवशयनी एकादशी के व्रत में क्या खाएं: देवशयनी एकादशी के व्रत में क्या न खाएं: (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sapne Me Bhagwan :सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ?

सपने में भगवान को देखना एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। हिंदू धर्म और स्वप्न शास्त्र में इसकी अनेक व्याख्याएं हैं, जो सपने के विवरण और आपके जागृत जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। सपने में भगवान (Sapne me Bhagwan): सपने में आपने क्या देखा इसकी बात करे तो हर इंसान को कोइ न कोइ सपना अवश्य आता है। सपने अच्छे और बुरे दोनों तरह के होते है अच्छे सपने हमारे जीवन में अच्छा और शुभ संकेत लेके आता है और भूरा सपना अशुभ संकेत देता है। सपने हमारे भविष्य से जुड़े हुए होते है उसका भी हमारे शास्त्रों में अलग महत्व बताया गया है। स्वप्न शास्त्र में कहा गया है की हर सपने के पीछे उनका एक रहस्य छुपा होता है और वो इंसान को आने वाले दिनों में उसके साथ क्या होगा उनके बारे में सूचित करता है। सपने में बिल्ली दिखना: स्वप्न शास्त्र के अनुसार अर्थ और शुभ-अशुभ संकेत सपने में देवी देवताओ का आना बहोत ही शुभ सपना होता है वो हमे सपने में उनका आर्शीवाद देने और कोई खास संकेत देने के लिए आते है। सपने में भगवान को देखना (Sapne mein bhagwan ko dekhna) इंसान के लिए लाभदायी साबित हो सकता है। सपने में भगवान हमे बताते है की आगे भविष्य में हमारे साथ क्या क्या होने वाला है और हमे क्या करना चाहिए। यह सपना आपको सच्चे मार्ग पर लेके जायेगा और भगवान आपकी मदद करेंगे। Sapne Me Bhagwan सपने में भगवान देखने के कुछ संभावित अर्थ: Sapne Me Bhagwan सपने में भगवान को देखने के कुछ विशिष्ट अर्थ: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि: सपने में भगवान की पूजा करना – Sapne Me Bhagwan Ki Pooja Karna इंसान रोज सुबह जल्दी उठकर भगवान की पूजा अवश्य करनी चाहिए क्युकी ऐसा करने से हमारा मन शांत रहता है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। लेकिन सपने में भगवान की पूजा करना (Sapne me bhagwan ki pooja karna) मतलब आपके मन में चल रही उथल पुथल को जल्द ही शांति मिल जाएगी। अगर इंसान किसी बात को लेकर विचारो में उलझा हुवा है तो जल्द ही उसे कोई सुझाव मिल जायेगा और उसका मन शांत हो जायेगा। सपने में भगवान आपको संकेत देते है जल्द ही उसे अपनी परेशानी का हल मिल जायेगा। भगवान की पूजा इंसान के जीवन में बहोत लाभ होते है अगर हमारा मन अच्छा और सच्चा है तो भगवान उस इंसान की सारी परेशानी दूर कर देते है। इस लिए रोज भगवान की पूजा करने के बाद ही हमे हमारे दिन की शरुआत करनी चाहिए जिससे दिन अच्छा जाये। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sapne Me Billi Dekhna: सपने में बिल्‍ली दिखना होता है बहुत शुभ, मिलता है ढेर सारा पैसा

सपने में बिल्ली दिखना: स्वप्न शास्त्र के अनुसार अर्थ और शुभ-अशुभ संकेत सपनों की दुनिया रहस्यों से भरी होती है। इन सपनों में अक्सर कुछ ऐसे भी दृश्य दिखाई देते हैं जिनका हमारे जीवन से गहरा संबंध होता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में दिखने वाली हर चीज का कोई न कोई अर्थ होता है। उसी प्रकार, सपने में बिल्ली दिखना भी शुभ और अशुभ दोनों तरह के संकेत दे सकता है। सपने में दिखें ये 5 चीज, तो समझ लीजिए बदलने वाला है भाग्य, होगा धन लाभ सपने में बिल्ली देखने के शुभ संकेत: सपने में बिल्ली देखने के अशुभ संकेत: सपने में सफेद बिल्‍ली को देखना सपने में सफेद बिल्‍ली का आना लक्ष्‍मी आगमन का संकेत देता है। आपको अचानक कहीं से धन लाभ हो सकता है। या तो कहीं से रुका धन मिल सकता है या फिर आपकी लौटरी लग सकती है। ऐसा सपना आने पर आपको सबसे मां लक्ष्‍मी की पूजा करनी चाहिए और उन्‍हें दूध-मखाने की खीर का भोग लगाना चाहिए। मां आपसे प्रसन्‍न होंगी और आपको शीघ्र ही धन लाभ होगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सपनों का अर्थ हमेशा निश्चित नहीं होता है। सपने में बिल्ली देखने का अर्थ आपके जीवन की वर्तमान स्थिति, आपके विचारों और भावनाओं पर निर्भर करता है। यदि आप सपने में बिल्ली देखने के बाद परेशान या भयभीत महसूस करते हैं तो आपको किसी अनुभवी स्वप्न विश्लेषक से सलाह लेनी चाहिए। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Kokila Vrat 2024 Date: जुलाई में कब रखा जाएगा Kokila Vrat 2024? नोट कर लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सबसे पहले कोकिला व्रत ही किया था. इस व्रत के पुण्य प्रताप से माता सती और महादेव परिणय सूत्र में बंधे थे. धार्मिक मान्यता है कि Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत करने से विवाहित महिलाओं को सुख-सौभाग्य और वंश में वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. यह पावन दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती को समर्पित है। जो व्यक्ति विधि-विधान के साथ ये व्रत रखता है भगवान उसके ऊपर अपनी असीम कृपा बरसाते हैं। Kokila Vrat Kab Hai 2024: हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि पर कोकिला व्रत किया जाता है. यह व्रत देवों के देव भगवान शिव और उनकी अर्धांगिनी माता पार्वती को समर्पित माना गया है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है. कोकिला व्रत करने से अविवाहित महिलाओं को मनचाहा वर मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत के पुण्य प्रताप से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है. अगर आप भी मनचाहा वर पाना चाहती हैं तो ऐसे में इस साल कोकिला व्रत कब रखा जाएगा, यह पता होना आपके लिए जरूरी है. इस साल कोकिला व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका महत्व क्या है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. कब है कोकिला व्रत 2024? (Kokila Vrat 2024 date) कोकिला व्रत इस साल 20 जुलाई, 2024 को रखा जाएगा।आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई को सुबह 5:59 बजे शुरू होगी और 21 जुलाई को सुबह 4:43 बजे समाप्त होगी।व्रत का संकल्प 20 जुलाई को सुबह 5:36 बजे से 6:21 बजे के बीच लिया जा सकता है।भगवान शिव की पूजा 20 जुलाई को प्रदोष काल में शाम 4:33 बजे से 8:08 बजे के बीच की जा सकती है। Kokila Vrat 2024 शुभ मुहूर्त Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत का महत्व Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत की पूजा विधि Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत के नियम यह भी ध्यान रखें (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sawan 2024: शिव जी की पूजा में इन मंत्रों का करें जाप, सभी समस्याओं का होगा निवारण

Sawan 2024: कुछ ही दिनों में सावन माह की शुरुआत होने वाली है। यह माह देवों के देव महादेव की पूजा को समर्पित है। इस माह के हर दिन को भोलेनाथ की पूजा के लिए शुभ माना गया है। मान्यता है कि सावन में शिव जी की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही तरक्की के भी योग बनते हैं। इस माह में चातुर्मास होने के कारण सृष्टि का संचालन शिव जी के हाथों में होता है। ऐसे में उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कई मांगलिक कार्यक्रम किए जाते हैं। साल 22 जुलाई 2024 से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन प्रीति आयुष्मान योग बन रहा है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना रहेगा। ऐसे में यह पूरा दिन शिव जी की आराधना करने के लिए शुभ रहेगा। माना जाता है कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए हमेशा सफेद मदार या आक का फूल चढ़ाना चाहिए। इससे व्यक्ति को धरती लोक से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। हालांकि, महादेव की पूजा उनके मंत्रों के बिना अधूरी मानी जाती है। इसी कड़ी में आइए शिव जी के मंत्रों के बारे में जान लेते है। Sawan 2024 मंत्र जाप करते समय ध्यान रखने योग्य बातें: इन मंत्रों के जाप से भगवान शिव को करें प्रसन्न ॐ नमः शिवायये मंत्र शिवजी का प्रिय मंत्र माना जाता है। पूजा में इसका 108 बार जाप करना चाहिए। इससे दिमाग शात रहता है। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥महादेव के इस मंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। इसका पूजा में जाप करना लाभदायक होता है। सावन में शिवलिंग की इस विधि से करें पूजा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर एक मनोकामना शिव आरोग्य मंत्रमाम् भयात् सवतो रक्ष श्रियम् सर्वदा।आरोग्य देही में देव देव, देव नमोस्तुते।।ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् । तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि। शिव शक्तिशाली मंत्र ऐं ह्रीं श्रीं ‘ऊँ नम: शिवाय:’ श्रीं ह्रीं ऐं। ऊँ हौं जूं स: डिस्क्लेमर : ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Karmasu.in उत्तरदायी नहीं है। 

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