Sawan Shivratri 2024: कब है सावन शिवरात्रि ? जानें तिथि, Importance And Jalabhishek का उत्तम मुहूर्त

Sawan Shivratri 2024 Date: भगवान शिव को समर्पित सावन 22 जुलाई से शुरू हो गया है, यह 19 अगस्त को समाप्त होगा। सावन शिवरात्रि के दिन घरों और शिवालयों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि सावन Sawan Shivratri 2024 शिवरात्रि के दिन व्रत करने व भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। जानें इस साल कब है सावन शिवरात्रि व भगवान शिव के पूजन के मुहूर्त Sawan Shivratri 2024 सावन शिवरात्रि 2024 कब है: हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है। इसे मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं। सावन में आने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है। इस साल सावन शिवरात्रि 2 अगस्त 2024, शुक्रवार को है। Sawan Shivratri 2024 सावन शिवरात्रि 2024 पूजा का उत्तम मुहूर्त- सावन शिवरात्रि के दिन निशिता काल में पूजन करना सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन निशिता काल 03 अगस्त को सुबह 12 बजकर 06 मिनट से सुबह 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। जलाभिषेक की शुभ अवधि 42 मिनट की है। Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त चारों पहर की पूजा का समय- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 07:10 पी एम से 09:48 पी एम रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:48 पी एम से 12:27 ए एम, अगस्त 03 रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:27 ए एम से 03:05 ए एम, अगस्त 03 रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:05 ए एम से 05:43 ए एम, अगस्त 03 Sawan Shivratri 2024 सावन शिवरात्रि 2024 व्रत पारण का समय- चतुर्दशी तिथि 02 अगस्त 2024 को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट से शुरू होगी जो कि 03 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। सावन शिवरात्रि व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाएगा। सावन शिवरात्रि व्रत पारण का शुभ समय 04 अगस्त को 09:29 ए एम से 11:09 ए एम तक रहेगा। सावन शिवरात्रि पूजा सामग्रीसावन शिवरात्रि के शुभ दिन पर महादेव की पूजा करने के लिए कुछ सामग्रियों को जरूर शामिल करना चाहिए। आप पूजा के बर्तन, पंच मिष्ठान्न, बेलपत्र, धतूरा, भांग, बेर, गुलाल, सफेद चंदन,  पंच फल, दक्षिणा, गन्ने का रस, शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा शुद्ध घी, शहद, पंच रस, गंगाजल, जल, दूध दही, कपूर, धूप, दीप, रूई और मां पार्वती के श्रृंगार की सामग्री को भी रखें। जलाभिषेक की विधि सावन शिवरात्रि की तिथि पर सूर्योदय से पहले स्नान कर लें और साफ वस्त्रों को धारण करें। इसके बाद आप निशिता काल मुहूर्त में शिवलिंग का दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ने के रस आदि से अभिषेक करें। Sawan Shivratri 2024 इस दौरान गंगाजल में काला तिल मिलाकर 108 बार महामृत्युजंय मंत्र का जाप करें और शिवलिंग पर अर्पित करें। बाद में आप महादेव को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करते जाएं। सामान अर्पित करने के बाद आप आटे का चौमुखी दीपक जलाएं और शिव मंत्र, शिव चालीसा का पाठ करें। सावन शिवरात्रि महत्व: सावन शिवरात्रि पर ध्यान दें डिस्क्लेम  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Swapna Shastra 2024:सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखना: शुभ या अशुभ ?

Dream Interpretation:सोते समय सपना देखना एक सामान्य प्रक्रिया है. सपने में अक्सर वही चीजें देखी जाती हैं, जो दिन भर में आपके साथ घटी हों परंतु कई बार कुछ ऐसे सपने दिखाई देते हैं I जिनका हमारी दिनचर्या से कोई संबंध नहीं होता. ये सपने आपको आने वाले भविष्य में होने वाली प्रिय-अप्रिय घटना की तरफ संकेत करते हैं. इन सपनों से अच्छा और बुरा दोनों तरह का संकेत मिलता है. Swapna Shastra 2024 यदि आप सपने में खुद को पूजा करते हुए देखते हैं तो यह भी आपके लिए बड़ा संकेत माना जाता है. इस विषय में स्वप्न शास्त्र में विस्तार से बताया गया है. सपनों की दुनिया रहस्यों से भरी होती है। कई बार हम ऐसे सपने देखते हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं। सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखना भी एक ऐसा ही सपना है जिसके बारे में लोगों के मन में कई तरह के प्रश्न उठते हैं। Sapne Me Bhagwan :सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ? Swapna Shastra 2024 क्या यह सपना शुभ है या अशुभ? इसका जवाब है कि यह सपना पूरी तरह से सपने के विवरणों पर निर्भर करता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखने के कई अर्थ हो सकते हैं, जिनमें से कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक भी हैं। सकारात्मक अर्थ: नकारात्मक अर्थ: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सपनों का अर्थ हमेशा निश्चित नहीं होता है। Swapna Shastra 2024 सपने का सही अर्थ जानने के लिए, आपको सपने के सभी विवरणों पर ध्यान देना होगा, जैसे कि आप किस देवता की पूजा कर रहे थे, आप कैसा महसूस कर रहे थे, और सपने का वातावरण कैसा था। Swapna Shastra 2024 मंदिर में पूजा करते देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति खुद को सपने में मंदिर में पूजा करते हुए देखता है तो यह संकेत है कि आपकी कोई बड़ी इच्छा पूरी होने वाली है. इस सपने का अर्थ है Swapna Shastra 2024 कि आप जल्द ही उस मंदिर के दर्शन करने जा सकते हैं. इस तरह के सपने का यह भी अर्थ निकाला जाता है कि आप लंबे समय से उस मंदिर के दर्शन करना चाह रहे हैं परंतु जा नहीं पा रहे.

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Sawan 2024:11 प्रकार के अभिषेक से करें शिवजी को प्रसन्न, हर मनोकामना होगी पूर्ण

सावन के महीने में रुद्राभिषेक का खास महत्व होता है। भगवान शिव को रुद्राभिषेक बहुत प्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान भोलेनाथ का सावन में रुद्राभिषेक करने से इंसान के सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं। Rudrabhishek Pujan in Sawan: श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। भगवान शिव की पूजा अर्चना में रुद्राभिषेक का काफी महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल Sawan 2024 सावन मास 22 जुलाई 2024 से शुरू हो रहा है जो 19  अगस्त 2024 को समाप्त होगा। सावन के महीने में रुद्राभिषेक का खास महत्व होता है। भगवान शिव को रुद्राभिषेक बहुत प्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान भोलेनाथ का सावन में रुद्राभिषेक करने से इंसान के सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्हें ग्रह दोष से भी मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं रुद्राभिषेक के विधान और महत्व के बारे में।  Sawan 2024 शिवजी को प्रसन्न करने के लिए आप विभिन्न प्रकार के अभिषेक कर सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख अभिषेक इस प्रकार हैं: 1. दूध: दूध से अभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और पापों का नाश होता है। 2. घी: घी से अभिषेक करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और रोगों का नाश होता है। 3. शहद: शहद से अभिषेक करने से बुद्धि और विद्या प्राप्त होती है। 4. दही: दही से अभिषेक करने से ग्रहों की शांति होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। 5. गंगाजल: गंगाजल से अभिषेक करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 6. पंचामृत: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर) से अभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 7. बेल: बेलपत्र से अभिषेक करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। 8. भांग: भांग से अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मन शांत होता है। 9. धतूरा: धतूरे से अभिषेक करने से भगवान शिव भक्तों की रक्षा करते हैं। 10. आंकड़ा: आंकड़े से अभिषेक करने से विघ्नों का नाश होता है और सफलता प्राप्त होती है। 11. चंदन: चंदन से अभिषेक करने से मन को शीतलता प्राप्त होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। अभिषेक करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए: Sawan 2024 सावन मास में भगवान शिव की पूजा करने और उनका अभिषेक करने से आपको अवश्य ही शुभ फल प्राप्त होंगे। घर पर कैसे करें रुद्राभिषेक कई धार्मिक ग्रंथों में रुद्राभिषेक की महिमा का वर्णन मिलता है। मान्यता है यदि आप भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करते हैं तो आपकी एक या 2 नहीं बल्कि 18 प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन माह का सोमवार , प्रदोष या Sawan 2024 शिवरात्रि कोई भी दिन हो सभी मान्य तिथियों में शिव का रुद्राभिषेक जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाता है और मोक्ष के द्वार खोलता है।  रुद्राभिषेक का विशेष है महत्वसावन में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह की पूजा-अर्चना की जाती है. सावन में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है लेकिन कई भक्त इसे करवाने में Sawan 2024 असमर्थ रहते हैं. ऐसे भक्तों को अपनी सभी मनोकामना पूरी करने और कष्टों से मुक्ति पाने के एक सरल उपाय करना चाहिए है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ को 11 किलो चावल, 11 बेलपत्र और 11 बादाम अर्पण करना चाहिए और सच्चे मन से अपनी मनोकामना पूर्ति या फिर कष्ट निवारण के लिए प्रार्थना करना चाहिए।  शिवलिंग न होने पर कैसे करें रुद्राभिषेक शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना सबसे उत्तम माना गया है। यदि आप रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो मंदिर में स्थित शिवलिंग पर भी रुद्राभिषेक कर सकते हैं। यदि आपने घर में शिवलिंग स्थापित कर रखा है Sawan 2024 तो भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है। यदि घर में शिवलिंग न हो तो आप अंगूठे को शिवलिंग का स्वरूप मानकर उसका अभिषेक भी कर सकते हैं।  Sanatan Dharma 2024:क्या है सनातन धर्म,कैसे प्रचलन में आया Hinduधर्म नाम, जानिए सनातन का सही अर्थ Sawan 2024 रुद्राभिषेक से मिलने वाले फल यदि शिवलिंग का अभिषेक घी की धारा से करें तो वंश बढ़ता है।शिवलिंग पर गाय के दूध से अभिषेक करने से आरोग्य जीवन प्राप्त होता है। शिवलिंग पर शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होता है। शिवलिंग पर भस्म अभिषेक करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।यदि आपको कोई पुराना रोग है तो शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करने से वह समाप्त होती है। 

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Sanatan Dharma 2024:क्या है सनातन धर्म,कैसे प्रचलन में आया Hinduधर्म नाम, जानिए सनातन का सही अर्थ

सनातन धर्म: आध्यात्मिक ज्ञान की शाश्वत यात्रा (Sanatan Dharma: The Eternal Journey of Spiritual Knowledge) सनातन धर्म (Sanatan Dharma) संसार के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक, सनातन धर्म, भारत की आत्मा है। “सनातन” का अर्थ है “शाश्वत” या “हमेशा के लिए चलने वाला” और “धर्म” का अर्थ है “कर्तव्य,” “मार्गदर्शक सिद्धांत,” या “जीवन का तरीका।” इसलिए, सनातन धर्म को “शाश्वत कर्तव्य का मार्ग” या “शाश्वत जीवन का सिद्धांत” के रूप में समझा जा सकता है। यह एक संगठित धर्म नहीं है, बल्कि विभिन्न दर्शनों, परंपराओं, और आध्यात्मिक पथों का एक संगम है। सनातन धर्म की जड़ें वेदों में निहित हैं, जो प्राचीन ग्रंथ हैं जिन्हें हिंदू धर्म का आधार माना जाता है। वेद कर्म (कर्तव्य), धर्म (सही आचरण), ज्ञान (ज्ञान प्राप्ति), और मोक्ष (मुक्ति) के सिद्धांतों का वर्णन करते हैं। सत्यम शिवम सुंदरम ‘यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें।’- (ऋग्वेद-3-18-1) सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो। जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही Sanatan Dharma सनातन कही गई है। जैसे सत्य सनातन है। ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है, मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर्म भी सत्य है। वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है और जिसका कभी भी अंत नहीं होगा वह ही सनातन या शाश्वत है। जिनका न प्रारंभ है और जिनका न अंत है उस सत्य को ही सनातन कहते हैं। यही सनातन धर्म का सत्य है। वैदिक या हिंदू धर्म को इसलिए सनातन धर्म कहा जाता है, क्योंकि यही एकमात्र धर्म है जो ईश्वर, आत्मा और मोक्ष को तत्व और ध्यान से जानने का मार्ग बताता है। मोक्ष का कांसेप्ट इसी धर्म की देन है। एकनिष्ठता, ध्यान, मौन और तप सहित यम-नियम के अभ्यास और जागरण का मोक्ष मार्ग है अन्य कोई मोक्ष का मार्ग नहीं है। मोक्ष से ही आत्मज्ञान और ईश्वर का ज्ञान होता है। यही सनातन धर्म का सत्य है। सनातन धर्म के मूल तत्व सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, दान, जप, तप, यम-नियम आदि हैं जिनका शाश्वत महत्व है। अन्य प्रमुख धर्मों के उदय के पूर्व वेदों में इन सिद्धान्तों को प्रतिपादित कर दिया गया था। कैसे मिला हिंदू नाम असल में हिंदू नाम विदेशियों द्वारा दिया गया है। जब मध्य काल में तुर्क और ईरानी भारत आए तो उन्होंने सिंधु घाटी से प्रवेश किया। सिंधु एक संस्कृत नाम है। उनकी भाषा में ‘स’ शब्द न होने के कारण वह सिंधू कहने में असमर्थ थे। इसलिए उन्होंने सिंधू शब्द के उच्चारण के स्थान पर हिंदू कहना शुरू किया। इस तरह से सिंधु का नाम हिंदू हो गया। उन्होंने यहां के निवासियों को हिंदू कहना शुरू किया और इसी तरह हिंदुओं के देश को हिंदुस्तान का नाम मिला। SABAN 2024:शुरू हुआ सावन का पावन महीना, पहला सोमवार आज, भगवान भोलेनाथ की इस विधि से करें पूजा अर्चना ।।ॐ।।असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योर्तिगमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।।- वृहदारण्य उपनिषद भावार्थ : अर्थात हे ईश्वर मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो। जो लोग उस परम तत्व परब्रह्म परमेश्वर को नहीं मानते हैं वे असत्य में गिरते हैं। असत्य से मृत्युकाल में अनंत अंधकार में पड़ते हैं। उनके जीवन की गाथा भ्रम और भटकाव की ही गाथा सिद्ध होती है। वे कभी अमृत्व को प्राप्त नहीं होते। मृत्यु आए इससे पहले ही सनातन धर्म के सत्य मार्ग पर आ जाने में ही भलाई है। अन्यथा अनंत योनियों में भटकने के बाद प्रलयकाल के अंधकार में पड़े रहना पड़ता है। ।।ॐ।। पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।- ईश उपनिषद भावार्थ : सत्य दो धातुओं से मिलकर बना है सत् और तत्। सत का अर्थ यह और तत का अर्थ वह। दोनों ही सत्य है। अहं ब्रह्मास्मी और तत्वमसि। अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ और तुम ही ब्रह्म हो। यह संपूर्ण जगत ब्रह्ममय है। ब्रह्म पूर्ण है। Sanatan Dharma यह जगत् भी पूर्ण है। पूर्ण जगत् की उत्पत्ति पूर्ण ब्रह्म से हुई है। पूर्ण ब्रह्म से पूर्ण जगत् की उत्पत्ति होने पर भी ब्रह्म की पूर्णता में कोई न्यूनता नहीं आती। वह शेष रूप में भी पूर्ण ही रहता है। Sanatan Dharma यही सनातन सत्य है। जो तत्व सदा, सर्वदा, निर्लेप, निरंजन, निर्विकार और सदैव स्वरूप में स्थित रहता है उसे सनातन या शाश्वत सत्य कहते हैं। वेदों का ब्रह्म और गीता का स्थितप्रज्ञ ही शाश्वत सत्य है। जड़, प्राण, मन, आत्मा और ब्रह्म शाश्वत सत्य की श्रेणी में आते हैं। सृष्टि व ईश्वर (ब्रह्म) अनादि, अनंत, सनातन और सर्वविभु हैं। जड़ पांच तत्व से दृश्यमान है- आकाश, वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी। यह सभी शाश्वत सत्य की श्रेणी में आते हैं। Sanatan Dharma यह अपना रूप बदलते रहते हैं किंतु समाप्त नहीं होते। प्राण की भी अपनी अवस्थाएं हैं: प्राण, अपान, समान और यम। उसी तरह आत्मा की अवस्थाएं हैं: जाग्रत, स्वप्न, सुसुप्ति और तुर्या। ज्ञानी लोग ब्रह्म को निर्गुण और सगुण कहते हैं। उक्त सारे भेद तब तक विद्यमान रहते हैं जब तक ‍कि आत्मा मोक्ष प्राप्त न कर ले। यही सनातन धर्म का सत्य है। ब्रह्म महाआकाश है तो आत्मा घटाकाश। आत्मा का मोक्ष परायण हो जाना ही ब्रह्म में लीन हो जाना है इसीलिए कहते हैं कि ब्रह्म सत्य है जगत मिथ्‍या यही सनातन सत्य है। और इस शाश्वत सत्य को जानने या मानने वाला ही सनातनी कहलाता है। हिंदुत्व : ईरानी अर्थात पारस्य देश के पारसियों की धर्म पुस्तक ‘अवेस्ता’ में ‘हिन्दू’ और ‘आर्य’ शब्द का उल्लेख मिलता है। दूसरी ओर अन्य इतिहासकारों का मानना है कि चीनी यात्री हुएनसांग के समय में हिंदू शब्द की उत्पत्ति ‍इंदु से हुई थी। इंदु शब्द चंद्रमा का पर्यायवाची है। भारतीय ज्योतिषीय गणना का आधार चंद्रमास ही है। अत: चीन के लोग भारतीयों को ‘इन्तु’ या ‘हिंदू’ कहने लगे। कुछ विद्वान कहते हैं कि हिमालय से हिन्दू शब्द की उत्पत्ति हुई है। हिन्दू कुश पर्वत इसका उदाहरण है। हिन्दू शब्द कोई अप्रभंश शब्द नहीं है अन्यथा सिंधु नदि को भी हिन्दू नहीं कहा

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SABAN 2024:शुरू हुआ सावन का पावन महीना, पहला सोमवार आज, भगवान भोलेनाथ की इस विधि से करें पूजा अर्चना

SABAN 2024 आज से सावन का पावन महीना शुरू हो गया है. आज पहला सोमवार है. हिन्दू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है यह महीना भगवान शिव को काफी प्रिय है औय सावन का यह महीना भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए पूरी तरह से समर्पित होता है इस महीने का शिवभक्त बेसब्री से इंतजार करते है क्योंकि भगवान भोले का कृपा पाने के लिए यह महीना सबसे सर्वोत्तम माना गया है मान्यता है कि सावन के पावन महीने में विधिपूर्वक भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने और उनके निमित्त व्रत रखने से वे अपने सभी भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं. SABAN 2024 बाबा भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती का भी भक्तों को आशीर्वाद मिलता है. बता दें, हिन्दू देवताओं में भगवान शिव को सर्वोच्च भगवान माना जाता है भगवान सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवी-देवताओं में से भी एक है. वे अपने गले में अक्सर वासुकी नाग धारण किए हुए रहते हैं जो यह दर्शाता है कि वे हिंदू धर्म में सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक है. भगवान भोलेनाथ के अन्य रूपों में शिवलिंग की पूजा अर्चना की जाती है शिवलिंग की पूजा सबसे पवित्र मानी गई है. भक्त अपने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न को करने के लिए शिवलिंग की पूजा करते हैं सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा करने को लेकर शिवपुराण में विशे महत्व बताए गए हैं. SABAN 2024 सावन के महीने में शिवभक्त शिव मदिंरों में पहुंचकर पूजा अर्चना करते है और अपनी मनोकामनाएं भगवान शिव से करते हैं कई लोग अपने घरों में ही भगवान शिव की पूजा करते हैं.  इस बार का सावन बेहद खास माना जा रहा है. इस बार सावन महीने की शुरूआत सोमवार के दिन ही हो गया है. और इसका समापन भी सोमवार के दिन ही होगा. बता दें, सावन महीने का वह पहला दिन आज 22 जुलाई यानी सोमवार से शुरू हो चुका है. सावन का यह पवित्र महीना 19 अगस्त को खत्म होगा. इस दिन भी सोमवार ही पड़ रहा है.   SABAN 2024 सावन में शिव पूजा का महत्व मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से सारी नकारात्मकता दूर भाग जाती है. शनि दोष भी दूर हो जाता है. बता दें, सावन में सोमवार को सोमवारी और मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. सोमवार का दिन भगवान शिव को पूरी तरह से समर्पित होता है इसद दिन भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग की विशेष पूजा करने का विधान है. सावन के प्रत्येक सोमवार को देवों के देव महादेव की आराधना और विधिवत पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से मनोवांछित फल मिलता है और विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होती है. सावन में अगर आप भी भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी असीम कृपा पाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए सही विधि, पूजा सामग्री और पूजा करने के नियमों का पता होना अति आवश्यक है. तो आइए हम आपको विस्तार से बताते हैं कि सावन के पावन महीने में भगवान शिव को पूजा करने की विधि, नियम और पूजन सामाग्री के बारे में.. SABAN 2024 भगवान शिव की पूजा सोमवार को क्यों होती है बता दें, सोमवार का दिन भगवान शिव के हैं उनके भक्त उनकी किसी भी दिन पूजा अर्चना कर सकते हैं लेकिन भगवान शिव की पूजा सोमवार के दिन करने से शिव भक्त और उसके परिवार को बहुत लाभ प्राप्त होते हें. पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव ने एक बार सोमवार के दिन चंद्रमा देवता को श्राप से बचाया था, इसी कारण सोमवार का नाम चंद्र (सोम) के नाम पर रखा गया. उसी समय से सोमवार के दिन शिव पूजा के विधान की शुरूआत हुई. मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं. अपने भक्तों के द्वारा सिर्फ केवल एक गिलास पानी चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं. शिव पूजा के लिए सामग्री मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद आसान है. अगर आप घर में भगवान शिव की पूजा अर्चना कर रहे है तो आपको सभी अनुष्ठानों के साथ उचित पूजा करने के लिए कुछ जरूरी चीजों की आवश्यकता होगी. इसमें आपको कच्ची दूध, जल (गंगा जल भी हो सकता है), चंदन, बेल पत्र, धतूरे के फूल, फल सहित, दही, शहद, जनेऊ, सफेद मुकुट फूल, अगरबत्ती या धूपबत्ती, घी, पंच पात्र, कपूर, भस्म, पीतल का दीपक, नारियल, साफ कपड़ा, घंटी की जरूरत होगी.  सावन माह में कालाष्टमी: शुभ तिथि, पूजा विधि और महत्व कैसे करें भगवान शिव की पूजाः भगवान शिव की पूजा सोमवार के दिन इस विधि से करनी चाहिए.  सुबह-सबेरे जल्दी से उठ जाएं उसके बाद स्नान करके साफ सुथरे कपड़े पहनें. पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें और वहां भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें. और पूजा के दौरान बाबा भोलेनाथ को फूल, बिल्वपत्र, धूप-दीप अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव के शिवलिंग का अभिषेक दूध, जल, दही, शहद और गंगाजल से करें. SABAN 2024 अभिषेक के दौरान आप ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. और अभिषेक के बाद शिवलिंग को स्वच्छ कपड़े से पोछकर साफ कर लें. इसके बाद भगवान शिव को भोग के रुप में मिठाई, फूल, फल चढ़ाएं. आप बाबा भोलेनाथ को उनकी प्रिय चीजें जैसे पान, भांग और बेलपत्र आदि भी चढ़ा सकते हैं. पूजा के दौरान आप शिवलिंग के पास दिया या दूपक जरूर जलाएं. यह भगवान शिव के द्वारा दिए गए बुद्धि और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक होता है.  इसके पश्चात आप महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें. प्रत्यके सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. और अंत में आप आरती करके प्रार्थना करें और उनका SABAN 2024 आशीर्वाद लेकर पूजा का समापन करें और अपने परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रसाद का वितरण करें. आपको बता दें, भगवान शिव की पूजा के दौरान किसी भी चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग न करें, क्योंकि बाबा भोलेनाथ शाकाहारी हैं. आप सावन के पावन महीने में पूजा के दिन मांसाहार और शराब का सेवन करने से

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Kalashtami 2024:सावन माह में कालाष्टमी: शुभ तिथि, पूजा विधि और महत्व

सावन में मंगलकारी कालाष्टमी! पाएं शिव कृपा, जानें पूजा विधि व शुभ मुहूर्त (Sawan mein Mangalkari Kalashtami! Payein Shiv Krupa, Janen Puja Vidhi wa Shubh Muhurt) सावन माह की कालाष्टमी भगवान काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। Kalashtami 2024 मासिक कालाष्टमी का व्रत अपने आप में विशेष माना गया है। साधक इस दिन भैरव बाबा की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त काल भैरव की पूजा सच्ची श्रद्धा के साथ करते हैं वे उनकी सदैव रक्षा करते हैं। साथ ही भय और बाधाओं को दूर करने में उनकी मदद करते हैं। इस माह यह पर्व 28 जुलाई को मनाया जाएगा। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को Kalashtami 2024 कालाष्टमी मनाई जाती है. मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी को भैरवाष्टमी भी कहा जाता है, क्योंकि यह काल भैरव, जिनको भैरवनाथ भी कहा जाता है, को समर्पित है. काल भैरव को भगवान शिव का उग्र स्वरूप माना जाता है, इसलिए इस दिन भगवान शिव और उनके स्वरूप काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी विशेष पूजा अर्चना की जाती है. देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि क्यों जाते हैं पाताल लोक  कालाष्टमी को सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। यह पावन दिन भगवान काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि कालाष्टमी हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस शुभ समय में पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें दुख-दरिद्रता से छुटकारा मिलता है। मासिक कालाष्टमी शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार अष्टमी तिथि 27 जुलाई, 2024 को रात 9 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी, जिसका समापन 28 जुलाई, 2024 को रात 7 बजकर 27 पर होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार कालाष्टमी 28 जुलाई को मनाया जाएगा. मासिक कालाष्टमी की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और गंगाजल से धो लें।भगवान काल भैरव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।काल भैरव को दीप, नैवेद्य, फूल, धूप, और फल अर्पित करें।”ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।व्रत कथा पढ़ें या सुनें।रात भर जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।दूसरे दिन सुबह, सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। Kalashtami 2024 कालाष्टमी का महत्व Kalashtami 2024 कालाष्टमी का व्रत भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने का एक विशेष अवसर है।मान्यता है कि इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।कालाष्टमी का व्रत भय, रोग, और संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। Kalashtami 2024 भैरव बाबा प्रसन्न कैसे करें इस दिन भगवान बटुक भैरव को कच्चा दूध अर्पित करें और काल भैरव को शराब अर्पित करें. बता दें कि कई लोग इस दिन उन्हें शराब का भोग लगाते हैं. इसके अलावा हलुआ, पूरी और मदिरा उनके प्रिय भोग हैं. इमरती, जलेबी और 5 तरह की मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं.  Kalashtami 2024:कालाष्टमी इस पर विशेष ध्यान दें जो लोग व्रत नहीं रख सकते हैं, वे भी इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा कर सकते हैं।पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।भगवान काल भैरव को तामसिक भोग नहीं लगाना चाहिए।पूजा के दौरान मन को शांत रखें और भक्तिभाव से भगवान का ध्यान करें। कालाष्टमी के दिन भूलकर भी न करें ये कार्य (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Sawan 2024: Celebrate a Blessed सावन माह 22 जुलाई से होगा शुरू, दुर्लभ संयोगों से बनेगा खास !

Sawan 2024: Celebrate a Blessed Month with 5 Mondays & Divine Yogas ! सावन का पावन महीना 22 जुलाई 2024 से सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त 2024 को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा। इस साल सावन मास 5 सोमवार और 2 प्रदोष व्रत लेकर आएगा। सावन 2024: 5 सोमवार और दिव्य योगों से बना होगा अति विशेष | सावन 2024 स्पेशल दुर्लभ संयोगों से इस बार सावन बेहद खास बन रहा है: धार्मिक महत्व Sawan Somwar Dates 2024 : सनातन धर्म में श्रावण मास का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। श्रावण मास में महादेव की पूजा बड़े ही भक्ति भाव से की जाती है। Sawan 2024 इस बार का श्रावण मास दो दुर्लभ संयोगों से भरा हुआ है। आचार्य दिवाकर मिश्रा के अनुसार इस बार श्रावण मास सोमवार 22 जुलाई से ( Sawan 2024 Start Date ) से प्रारभ हो रहा है और पूरे श्रावण में 5 सोमवार के दिन पड़ेंगे। ऐसे में श्रावण मास में भक्तों के लिए दुर्लभ संयोग है। भगवान शिव के दिन सोमवार को प्रीति आयुष्मान योग के साथ सवार्थसिद्धि योग भी बन रहा है। इसको लेकर ऐसी मान्यता है कि इस योग में जो व्यक्ति पूजा करता है, उसको भगवान शिव से कई गुणा फल की प्राप्ति होती है। ज्योर्तिविदों के अनुसार सावन का महिना भगवान शिव का प्रिय महीना है और इस पूरे माह भगवान शिव की पूजा आराधना की जाती है और श्रद्धालु पूरे माह व्रत भी रखते है। सावन मास के पहले दिन खरीदें यह 10 सामग्री, अच्छे दिनों की होगी शुरुआत Sawan 2024: सभी शिव मंदिरों में होंगे विभिन्न आयोजन प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी राजस्थान के सभी शिव मंदिरों में सावन मास के दौरान विभिन्न आयोजन होंगे। मंदिरों में सावन मास की तैयारियां भी शुरू होने लगी है। लालसोट के घाटेश्वरनाथ महादेव मंदिर, चंद्रेश्वरनाथ महादेव मंदिर, मायला कुआं के पंचेश्वरनाथ महादेव मंदिर एवं मालेश्वर महादेव मंदिर समेत सभी शिव मंदिरों में इस दौरान कावड़ियों द्वारा जलाभिषेक किया जाएगा। इसके अलावा फूल बंगला झांकी, विशेष पूजा अर्चना एवं भजन संध्या समेत विभिन्न आयोजन भी संपन्न होंगे। Sawan 2024 बिल्व पत्र चढ़ाने का महत्व भगवान शिव को भक्त प्रसन्न करने के लिए बिल्व पत्र चढ़ाते है। Sawan 2024 इस संबंध में पौराणिक कथा के अनुसार जब 89 हजार ऋषियों ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए परमपिता ब्रह्मा से पूछा तो ब्रह्मदेव ने बताया कि महादेव 100 कमल के फूल चढ़ाने पर इतने प्रसन्न नहीं होते जितना कि एक नील कमल चढ़ाने पर होते हैं, वैसे ही 1000 नील कमल के बराबर एक बिल्व पत्र, 1000 बिल्व पत्र चढ़ाने के बराबर एक समी पत्र का महत्व होता है। 3. ग्रहों की विशेष स्थिति: इस बार सावन मास में ग्रहों की स्थिति भी बहुत ही अनुकूल है। इन ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण इस साल सावन मास और भी अधिक फलदायी बन रहा है। 4. महत्व: सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है। इस महीने में उनकी पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, सावन मास पवित्रता और आध्यात्मिकता का महीना भी माना जाता है। निष्कर्ष: पांच सोमवार, शुभ योगों और ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण सावन 2024 अत्यंत विशेष और फलदायी होने वाला है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं। इसलिए, इस अवसर का लाभ उठाएं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें। Sawan Vrat Tyohar 2024: सावन मास के व्रत और त्योहार 22 जुलाई सोमवार सावन आरंभ 24 जुलाई बुधवार संकष्टी चतुर्थी 25 जुलाई गुरुवार नाग पंचमी 29 जुलाई सावन का दूसरा सोमवार 31 जुलाइ बुधवार कामिका एकादशी 02 अगस्त शुक्रवार मासिक शिवरात्रि 04 अगस्त रविवार हरियाली अमावस्या 05 अगस्त सावन का तीसरा सोमवार 06 अगस्त मंगलवार मंगला गौरी तीज 07 अगस्त बुधवार हरियाली तीज 09 अगस्त शुक्रवार नाग पंचमी (शास्त्रीय) 12 अगस्त सावन का चौथा सोमवार 16 अगस्त शुक्रवार पुत्रदा एकादशी 19 अगस्त सोमवार रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan 2024 Date ) (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sankashti Chaturthi List: 2024 संकष्टी चतुर्थी: भगवान POWER FULL गणेश का आशीर्वाद और मोक्ष प्राप्ति का पर्व

Sankashti Chaturthi 2024 List: संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है, जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर लोग भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi URL) भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन, भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी मनाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन, भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी मनाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं. संकष्टी चतुर्थी, हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार, भगवान गणेश को समर्पित है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। भगवान गणेश, बुद्धि, बल और विवेक के देवता, अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को दूर करते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता और संकटमोचन भी कहा जाता है। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है “संकट को हरने वाली चतुर्थी“। इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर अपने दुखों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। पुराणों के अनुसार, चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2024 में संकष्टी चतुर्थी: संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि: संकष्टी चतुर्थी का महत्व: इस दिन गणपति जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से बुद्धि, विवेक और ज्ञान प्राप्त होता है। Sankashti Chaturthi कब है संकष्टी चतुर्थी ? संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है, जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर लोग भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, वहीं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना करने के लिए विशेष दिन माना गया है. शास्त्रों के अनुसार माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी बहुत शुभ होती है. यह दिन भारत के उत्तरी और दक्षिणी राज्यों में ज्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है. धर्म की खबरें Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी के अलग-अलग नाम भगवान गणेश को समर्पित इस त्योहार में श्रद्धालु अपने जीवन की कठिनाईओं और बुरे समय से मुक्ति पाने के लिए उनकी पूजा-अर्चना और उपवास करते हैं. संकष्टी चतुर्थी को कई अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. कई जगहों पर इसे संकट हारा कहते हैं तो कहीं-कहीं सकट चौथ के नाम से जाना जाता है. यदि किसी महीने में यह पर्व मंगलवार के दिन पड़ता है तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है. अंगारकी चतुर्थी 6 महीनों में एक बार आती है और इस दिन व्रत करने से जातक को पूरे संकष्टी का लाभ मिल जाता है. दक्षिण भारत में लोग इस दिन को बहुत उत्साह और उल्लास से मनाते हैं. गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें Sankashti Chaturthi:2024 में संकष्टी चतुर्थी कब कब है? 29 जनवरी 2024 दिन सोमवार को संकष्टी चतुर्थी 28 फरवरी 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी 28 मार्च 2024 दिन गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी 27 अप्रैल 2024 दिन शनिवार को संकष्टी चतुर्थी 26 मई 2024 दिन रविवार को संकष्टी चतुर्थी 25 जून 2024 दिन मंगलवार को अंगारकी चतुर्थी 24 जुलाई 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी 22 अगस्त 2024 दिन गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी 21 सितंबर 2024 दिन शनिवार को संकष्टी चतुर्थी 20 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को संकष्टी चतुर्थी 18 नवंबर 2024 दिन सोमवार को संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Gurupurnima 2024:गुरुपूर्णिमा पर संस्कृत में शुभकामना सन्देश : Happy gurupurnima wishes in sanskrit

गुरुपूर्णिमा पर संस्कृत में शुभकामना सन्देश happy gurupurnima wishes in sanskrit गुरुपूर्णिमा के इस पावन अवसर पर, मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। गुरु को ज्ञान, आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्गदर्शक माना जाता है। वे ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं और अज्ञान के अंधकार को दूर करते हैं। इस शुभ दिन पर, हम अपने गुरुओं के प्रति अपनी कृतज्ञता और आदर व्यक्त करते हैं। यहाँ कुछ संस्कृत शुभकामनाएं दी गई हैं जिनका उपयोग आप अपने गुरुओं और प्रियजनों को भेजने के लिए कर सकते हैं: (गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही शिव हैं। गुरु ही परमेश्वर हैं।) (गुरु ही धर्म हैं, गुरु ही परमगुरु हैं। गुरु ही ज्ञान और विद्या के दाता हैं। गुरु ही गुरुओं के गुरु हैं।) (हे गुरुदेव! आप ही भवसागर से पार जाने का द्वार हैं।) (शिष्य अपने कल्याण के लिए गुरु के चरणों में शरण लेता है।) (गुरु दक्षिणा ज्ञानदान है।) आप इन शुभकामनाओं में अपनी भावनाओं और विचारों को भी शामिल कर सकते हैं। गुरुपूर्णिमा हमें शिक्षा और ज्ञान के महत्व को याद दिलाता है। यह हमें अपने गुरुओं का सम्मान करने और उनके द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का पालन करने का अवसर प्रदान करता है। इस शुभ अवसर पर, मैं सभी को गुरुपूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। ॐ गुरुभ्यो नमः गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं संदेश – Happy Guru Purnima Wishes In Hindi गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आप अपने अभिभावकों, शुभचिंतकों और गुरुओं के साथ गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं संदेश को साझा कर पाएंगे, जो आपके गुरुओं का सम्मान करेंगी। Happy Guru Purnima Wishes In Hindi में कुछ इस प्रकार दी गई हैं: गुरु जी है आपको मेरा नमस्कार, आपके ज्ञान से ही मेरा हुआ है व्यापक विस्तार।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। गुरु की उपस्थिति में ही मानव अज्ञानता के अंधकार से आज़ादी पाकर, ज्ञान के प्रकाश में प्रवेश करता है।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। एक सच्चा गुरु ही सही अर्थों में मानव के जीवन में आत्मविश्वास का बीजारोपण करता है।आपको गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाएं। गुरु की उपस्थिति ही मानव को निर्भय बनाती है और मानव जीवन में साहस का संचार करती है।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। एक गुरु की उपस्थिति ही किसी भी सभ्य समाज के लिए प्रेरणा बनने का कार्य करती है।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। गुरु पूर्णिमा का महत्व: Guru Purnima 2024:गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि: गुरु पूर्णिमा का संदेश: गुरु पूर्णिमा हमें सिखाती है कि ज्ञान और आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु का मार्गदर्शन कितना महत्वपूर्ण है। यह दिन हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके द्वारा दिए गए शिक्षाओं का पालन करने की प्रेरणा देता है।

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Guru Purnima 2024: गुरु पूर्णिमा के दिन बना रहा दुर्लभ संयोग, जॉब, करियर और विवाह की अड़चनें होंगी दूर

गुरु पूर्णिमा का पर्व साल 2024 में 21 जुलाई, 2024 रविवार के दिन पड़ रहा है. इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है. इस तिथि पर महाभारत के रचयिता ऋषि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था इसीलिए इस दिन को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. साथ ही इस तिथि को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. गुरु पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ संयोग हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो पूरे दिन रहने वाला है। इसके अलावा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र भोर से लेकर मध्यरात्रि 12 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही प्रीति योग, विष्कुंभ योग का निर्माण हो रहा है। ग्रहों की स्थिति की बात करें, तो कर्क राशि में सूर्य और शुक्र विराजमान है, जिससे दोनों ग्रहों की युति से शुक्रादित्य योग बन रहा है। वृषभ राशि में मंगल और गुरु बृहस्पति विराजमान रहेंगे। इसके साथ ही राहु मीन में, केतु कन्या राशि में और शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में है, जिससे शश राजयोग बन रहा है। इसके साथ ही बुध सिंह राशि में और चंद्रमा मकर राशि विराजमान रहेंगे। गुरु के वृषभ राशि में रहने से कुबेर राजयोग बन रहा है। इसके साथ ही सूर्य और शनि षडाष्टक योग का निर्माण कर रहे हैं। गुरुपूर्णिमा का महत्व (वेदों और पुराणों के अनुसार श्लोक सहित): गुरुपूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा या वेद व्यास जयंती भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन, हम गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता और आदर व्यक्त करते हैं। वेदों और पुराणों में गुरु को ज्ञान, आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्गदर्शक बताया गया है। गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरुपूर्णिमा के महत्व को दर्शाते हुए कुछ श्लोक: गुरुपूर्णिमा के दिन, लोग अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पूजा करते हैं, उपहार देते हैं, और ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनसे आशीर्वाद लेते हैं। गुरु पूर्णिमा 2024 तिथि (Guru Purnima 2024 Tithi)- गुरु पूर्णिमा के दिन से कई राशियों की किस्मत खुलने वाली है इन राशियों की जॉब, करियर और विवाह में चल रही दिक्कतों का अंत हो जाएगा. जानें कौन सी हैं वो लकी राशियां जिन को गुरु पूर्णिमा के दिन से फायदा होगा. मेष राशि: वृषभ राशि: मिथुन राशि: कर्क राशि: सिंह राशि: कन्या राशि: तुला राशि: वृश्चिक राशि: धनु राशि:

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Guru Purnima 2024:गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें

आज भारत भर में Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जा रहा है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहते हैं तथा इस दिन गुरु पूजा का विधान है। चारों वेदों के प्रथम व्याख्याता महर्षि वेद व्यास जी का पूजन आज के दिन किया जाता है। आइए जानते हैं आज क्या काम किए जा सकते है और क्या नहीं करें- Guru Purnima गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें आज के दिन महर्षि वेद व्यास जी के समक्ष घी का दीया जलाएं, साथ ही भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें। पीपल में जल चढ़ा कर घी का दीपक प्रज्वलित करके श्री‍हरि विष्णु जी का ध्यान करें। पितरों के नाम तर्पण करें। आज श्रीमद्‍भागवदगीता का पाठ करें। भगवान सत्यनारायण पूजन करके कथा वाचन करें। गुरु पूर्णिमा का दिन विद्या या सिद्धि की दृष्‍टि से बहुत खास है, अत: इस दिन नया सीखने का कार्य प्रारंभ करें। केसर का तिलक लगाएं। मंदिर में पीली वस्तुओं का दान करें।  यदि कोई गुरु हो तो गुरु से मंत्र प्राप्त करें। पीली वस्तुओं का सेवन करें। घर के बड़े-बुजुर्गों तथा अपने गुरु, शिक्षक के पैर छुएं तथा भेंट अवश्य दें। गुरु पूजन से बृहस्पति दोष समाप्त हो जाता है, अत: देवगुरु बृहस्पति का पूजन तथा उनके मंत्रों का जाप करें।  गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरूदेवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥ मंत्र का जान करें। Guru Purnima 2024: 20 या 21 जुलाई? कब है गुरु पूर्णिमा ?  Guru Purnima क्या न करें  किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य न करें। क्रोध, ईर्ष्या, किसी का अपमान न करें।  मांस, मटन, मदिरा से दूर रहें। स्त्री प्रसंग से दूर रहें। किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न करें। यात्रा न करें। सुख सुविधा का त्याग करें। यदि आपने व्रत रखा हैं तो किसी भी तरह की बहस से दूर रहें। गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें: गुरु पूजन: Guru Purnima धार्मिक कार्यक्रम: दान-पुण्य: अन्य कार्य: गुरु पूर्णिमा के दिन क्या न करें गुरु पूर्णिमा के दिन किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावनाओं को मन में नहीं आने देना चाहिए। झूठ बोलना, चोरी करना, और किसी को हानि पहुंचाना जैसे पापपूर्ण कार्य नहीं करने चाहिए। गुरुओं का अपमान नहीं करना चाहिए। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Guru Purnima 2024: 20 या 21 जुलाई? कब है गुरु पूर्णिमा ? 

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई दिन शनिवार को शाम 05 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि की समाप्ति अगले दिन 21 जुलाई, 2024 दिन रविवार को दोपहर 03 बजकर 46 मिनट पर होगी। उदयातिथि को देखते हुए गुरु पूर्णिमा का पर्व 21 जुलाई को मनाया जाएगा। Kawad Yatra 2024: 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू, शिवजी की कृपा पाने के लिए यात्रा के दौरान अपनाएं ये नियम गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष, गुरु पूर्णिमा 21 जुलाई 2024 को रविवार के दिन मनाई जाएगी।……Guru Purnima Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का महत्व Guru Purnima गुरु पूर्णिमा के उत्सव Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का संदेश Guru Purnima गुरु पूर्णिमा हमें ज्ञान, शिक्षा और गुरुओं के महत्व को याद दिलाता है। यह हमें सिखाता है कि हमेशा अपने गुरुओं का सम्मान करें और उनसे ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करें। भगवान विष्णु के मंत्र 1. ॐ नमोः नारायणाय।। 2. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय।। 3. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।। 4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम् विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्।।

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