लक्ष्मण-मेघनाद का युद्ध । राम-लक्ष्मण को नागपाश में बांधना |Lakshman or Meghnad ka Yudh

एक ही दिन में अपने भाई कुंभकरण और अतिकाय, देवान्तक, नरान्तक, त्रिशिरा, निकुम्भ जैसे वीर पुत्रों की मृत्यु के बाद रावण शौक सागर में डूब जाता है। रावण अपने भाई कुंभकरण और अपने कई वीर पुत्रों की मृत्यु से बहुत दुखी था। वह सोच रहा था कि वह इतने शक्तिशाली योद्धाओं को कैसे हरा सकता है। वह अपने राज्य लंका की दुर्दशा से भी चिंतित था। रावण हैरान होता है कि अतिकाय जैसे महाबली योद्धा के साथ-साथ उसके इतने सारे पुत्रों का वध कोई कैसे कर सकता है। रावण को समझ नहीं आ रहा था कि राम और लक्ष्मण Lakshman इतने शक्तिशाली कैसे हो सकते हैं। वह सोच रहा था कि क्या उसके पास ऐसा कोई अस्त्र है जिससे वह राम और लक्ष्मण को मार सकता है। जिन लंकापति रावण के नाम से देवता असुर, नाग, किन्नर, मानव, सभी कांपते थे। आज वही दो मानव और कुछ वानर उनके नगर में आकर उन पर ही भारी पड़ रहे हैं। रावण को याद आया कि जब वह एक शक्तिशाली योद्धा था, तो उसके नाम से सभी कांपते थे। लेकिन अब वह राम और लक्ष्मण के सामने एक कमजोर योद्धा की तरह लग रहा था। जिन्होंने लंका के अधिकतर सेनानियों को परास्त कर दिया है। रावण को पता था कि अगर वह राम और लक्ष्मण ( Lakshman ) को नहीं हरा पाया, तो उसे अपने राज्य लंका को खोना पड़ेगा। लेकिन तब रावण के नाना माल्यवान और उसका पुत्र इंद्रजीत उसे धीरज बंधाते हैं। रावण के नाना माल्यवान ने उसे समझाया कि वह अभी भी एक शक्तिशाली योद्धा है। उन्होंने उसे आश्वासन दिया कि इंद्रजीत राम और लक्ष्मण को हरा देगा। रावण को हौसला देते हुए और प्रतिशोध की अग्नि में जलता हुआ मेघनाथ रावण को कहता है की मुझे युद्ध में जाने की आज्ञा दीजिए पिताजी ” मेरी भुजाएं अपने भाइयों और काका कुंभकरण के वध का प्रतिशोध लेने के लिए फड़क रही है। कुम्भकरण- रावण संवाद श्रीराम द्वारा कुम्भकरण का वध Ramayan- Kumbhkaran Vadh Story in Hindi इंद्रजीत भी अपने भाइयों और काका कुंभकरण की मृत्यु से बहुत दुखी था। वह राम और लक्ष्मण से बदला लेना चाहता था। मैं अपने सबसे घातक अस्त्रों को लेकर युद्ध भूमि में जाऊंगा और इस युद्ध को आज ही समाप्त कर दूंगा। जिस लक्ष्मण ने मेरे भाइयों का वध किया उसको आज मौत की गोद में सुला कर ही आऊंगा। इंद्रजीत अपने पिता से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगता है। वह वादा करता है कि वह राम और लक्ष्मण को हरा देगा। इंद्रजीत रावण को अति प्रिय था इसलिए रावण स्वयं युद्ध में जाने की बात कहता है। रावण इंद्रजीत से बहुत प्यार करता था। वह नहीं चाहता था कि इंद्रजीत युद्ध में जाए और मारा जाए। लेकिन उसके नाना माल्यवान जी रावण को परामर्श देते हैं कि जब तक सेना में एक भी योद्धा जीवित हो तब तक स्वयं राजा का युद्ध में जाना उचित नहीं होता। माल्यवान ने रावण को समझाया कि जब तक सेना में एक भी योद्धा जीवित है, तब तक राजा का युद्ध में जाना उचित नहीं है। इंद्रजीत एक परम शक्तिशाली होता है, उसे युद्ध में जाने की आज्ञा दीजिए वह निश्चित ही आपको निराश नहीं करेगा। माल्यवान ने रावण को आश्वस्त किया कि इंद्रजीत एक परम शक्तिशाली योद्धा है। वह निश्चित ही राम और लक्ष्मण को हरा देगा। रावण अपने नाना माल्यवान जी का परामर्श मान लेता है और अपनी विशाल सेना के साथ अपने पुत्र इंद्रजीत को युद्ध में जाने की आज्ञा देता है। रावण अपने नाना माल्यवान के परामर्श को मानता है और इंद्रजीत को युद्ध में जाने की आज्ञा देता है। इंद्रजीत का युद्ध भूमि में प्रवेश indrjeet ka yuddh me prabesh लंका की बची हुई सेना लेकर इंद्रजीत युद्ध भूमि में आता है और आते ही अपने धनुष की प्रत्यंचा की डंकार बजाता है। उसके धनुष की प्रत्यंचा की डंकार से आसमान में बिजली कड़कने लगती है। इंद्रजीत अपने शक्तिशाली रूप और कौशल से सभी को प्रभावित करता है। वह अपने धनुष की प्रत्यंचा की डंकार से ही आसमान में बिजली कड़कने लगता है। इससे स्पष्ट होता है कि वह एक बहुत ही शक्तिशाली योद्धा है। इंद्रजीत लक्ष्मण को ललकारने लगता है और कहता है कि मेरे भाई अतिकाय का वध करने वाला लक्ष्मण कहां है? आज मैं अपने सभी भाइयों की मृत्यु का प्रतिशोध लेकर रहूंगा। इंद्रजीत अपने भाई अतिकाय की मृत्यु से बहुत दुखी है। वह लक्ष्मण से बदला लेने के लिए उत्सुक है। लेकिन तभी सुग्रीव इंद्रजीत को रोक लेता है और उससे युद्ध करने के को कहता है लेकिन इंद्रजीत सुग्रीव का उपवास करते हुए उसे बड़ी सरलता से दूर फेंक देते हैं। सुग्रीव इंद्रजीत का सामना करने के लिए आगे आता है, लेकिन इंद्रजीत उसे बड़ी आसानी से पराजित कर देता है। इससे स्पष्ट होता है कि इंद्रजीत एक बहुत ही शक्तिशाली योद्धा है। उसके बाद बजरंगबली हनुमान भी इंद्रजीत से युद्ध करने के लिए सामने आते हैं लेकिन इंद्रजीत उस समय उन पर भी भारी पड़ने लगते। हनुमान भी इंद्रजीत का सामना करने के लिए आगे आते हैं, लेकिन इंद्रजीत उन्हें भी पराजित करने की स्थिति में आ जाता है। इससे स्पष्ट होता है कि इंद्रजीत एक बहुत ही शक्तिशाली योद्धा है। तब हुंकार भरते हुए इंद्रजीत कहता है कि क्या तुम्हारे लक्ष्मण में साहस नहीं है, मुझ से युद्ध करने का। कहां है लक्ष्मण?, क्या वह मेरे सामने आने से डरता है? यदि मृत्यु से इतना ही डर लगता है तो दोनों भाई मुंह में तिनका दबाकर मेरे सामने आत्मसमर्पण कर दो। इंद्रजीत लक्ष्मण Lakshman को ललकारता है और उन्हें डराने की कोशिश करता है। वह जानता है कि लक्ष्मण एक शक्तिशाली योद्धा है, इसलिए वह उन्हें डराकर युद्ध से पीछे हटाना चाहता है। इंद्रजीत की यह ललकार सुनकर लक्ष्मण भी आवेश में आकर श्री राम से युद्ध में जाने की आज्ञा मांगते हैं। लक्ष्मण इंद्रजीत की ललकार से आवेश में आ जाते हैं। वह इंद्रजीत से बदला लेने के लिए युद्ध में जाने का फैसला करते हैं। तब विभीषण जी लक्ष्मण जी को सावधान करते हुए सतर्क रहने के लिए कहते हैं, की भैया लक्ष्मण, इंदरजीत एक मायावी तथा विकट योद्धा है। वह

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Black Cat:सपने में काली बिल्ली देखने का क्या होता है मतलब

सपने में काली बिल्ली (Black Cat) देखने का मतलब शुभ या अशुभ दोनों हो सकता है। यह सपने में बिल्ली के साथ अन्य घटनाओं और सपने देखने वाले व्यक्ति की वर्तमान स्थिति पर निर्भर करता है। रात को सोते समय हर कोई सपना देखता है। सपना देखना हर किसी के लिए आम बात है। लेकिन क्या आपको पता है सपने में देखे गए कुछ चीजों का संकेत शुभ होता है तो कुछ का अशुभ! आज हम सपने में काली बिल्ली देखने के बारे में बात करने वाले हैं।  Sapne me kutta dekhna:सपने में कुत्ता देखना शुभ या अशुभ सपने में बार-बार बिल्ली देखने का मतलब यदि किसी जातक के सपने में काली बिल्ली बार-बार दिखाई देती है, तो ऐसे सपनों का मतलब अशुभ होता है। शकुन शास्त्र के अनुसार, बिल्ली का कहीं भी दिखना अशुभ माना गया है। बिल्ली को एक रहस्यमय और छायादार प्राणी माना जाता है, जो अक्सर बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जा से जुड़ा होता है। इसलिए, सपने में बिल्ली देखने का मतलब अशुभ और हानि का संकेत देती है। ऐसी मान्यता है कि सपने में बिल्ली देखने का मतलब अगर किसी जातक को सपने में बार-बार काली बिल्ली दिखाई दे रही है, तो उसे सावधान रहने की जरूरत है। उसे अपने आसपास होने वाली चीजों पर ध्यान देना चाहिए और किसी भी संभावित खतरे से बचने के लिए तैयार रहना चाहिए। काली बिल्ली का हमला करते देखने का मतलब स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपको सोते समय सपने में काली बिल्ली (Black Cat) को हमला करते हुए देखते हैं, ऐसे सपनों का मतलब अशुभ होता है। ऐसी मान्यता है कि जो जातक इस तरह का सपना देखता है, तो ऐसे में आने वाले समय में कोई बड़ा संकट आ सकता सकता है। इसके साथ ही परिवार के किसी सदस्य की सेहत खराब हो सकती है। कारोबार में धन की हानि हो सकती है। सपने में काली बिल्ली देखने से बचने के उपाय इन उपायों से आपको सपने में काली बिल्ली Black Cat देखने से बचने में मदद मिल सकती है।

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रावण के पुत्रो का अंत। लक्ष्मण द्वारा अतिकाय का वध | Atikai Vadh Ramayan Story in Hindi

रावण का दुख Ravan ka dukh कुंभकरण की मृत्यु की खबर सुनकर लंकापति रावण अत्यंत व्याकुल हो जाता है। वह अपने छोटे भाई की मृत्यु से इतना दुखी होता है कि उसका रोम-रोम कांपने लगता है। वह अपने सिंहासन से उठकर खड़ा हो जाता है और अपने हाथों को जोड़कर कहता है, “यह सत्य नहीं हो सकता, कुंभकरण स्वयं मृत्यु का दूसरा नाम है। ब्रह्मा, विष्णु, महेश भी कुंभकरण की मृत्यु का कारण नहीं बन सकते फिर उसकी मृत्यु कैसे संभव हुई?” रावण के सभासदों में से एक मंत्री कहता है, “महाराज, कुंभकरण को श्री राम ने युद्ध में मारा है।” यह सुनकर रावण का क्रोध और भी बढ़ जाता है। वह कहता है, “अरे मूर्ख! श्री राम ने कुंभकरण को कैसे मारा? कुंभकरण तो एक अजेय योद्धा था। उसने अपनी सोलह हजार वर्ष की नींद से जागकर श्री राम और लक्ष्मण को परास्त करने का संकल्प लिया था। अब वह कैसे मारा जा सकता है?” कुम्भकरण- रावण संवाद श्रीराम द्वारा कुम्भकरण का वध Ramayan- Kumbhkaran Vadh Story in Hindi रावण का दूसरा मंत्री कहता है, “महाराज, श्री राम ने कुंभकरण को अपने बाण से मारा है। कुंभकरण ने श्री राम को मारने के लिए अपना त्रिशूल उठाया था, लेकिन श्री राम ने पहले ही उसे बाण मार दिया।” यह सुनकर रावण और भी अधिक दुखी हो जाता है। वह कहता है, “अब तो असुर जाति का विनाश निश्चित है। कुंभकरण के बिना हमें श्री राम का सामना करना बहुत मुश्किल होगा।” रावण का जेष्ठ पुत्र इंद्रजीत अपने पिता को धीरज बंधाते हुए कहता है, “नहीं पिताजी, केवल काका कुंभकरण के मृत्यु से असुर जाति का विनाश निश्चित हो यह आवश्यक नहीं है। कृपा करके मुझे युद्ध में जाने की आज्ञा दीजिए, मैं आज ही राम और लक्ष्मण के जीवन का अंत करके इस युद्ध को समाप्त कर दूंगा।” रावण इंद्रजीत की बात सुनकर कुछ शांत होता है। वह कहता है, “ठीक है, मैं तुम्हें युद्ध में जाने की आज्ञा देता हूं। जाओ और राम और लक्ष्मण को मारकर असुर जाति की रक्षा करो।” इंद्रजीत अपने पिता को प्रणाम करके युद्ध के मैदान में चला जाता है। रावण पुत्र देवांतक का वध Raavan putr devaantak ka vadh रावण के पुत्र देवांतक, जिन्हें नरांतक भी कहा जाता है, को युद्ध में हनुमान जी ने मारा था। देवांतक एक शक्तिशाली योद्धा था, लेकिन वह हनुमान जी के सामने टिक नहीं सका। रामायण (Ramayan) के विभिन्न संस्करणों में देवांतक के वध का वर्णन अलग-अलग तरीके से किया गया है, लेकिन कहानी का सार एक ही है: युद्ध में प्रवेश कुंभकरण के वध के बाद, रावण ने अपने योद्धाओं को युद्ध के मैदान में भेजा। इन योद्धाओं में देवांतक भी शामिल था। देवांतक ने वानर सेना पर जमकर वार किया और कई वानरों को मार डाला। हनुमान जी से युद्ध देवांतक के शौर्य को देखकर हनुमान जी उससे युद्ध करने के लिए आगे आए। दोनों योद्धाओं के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ। देवांतक ने हनुमान जी पर अपने शक्तिशाली हथियारों से प्रहार किया, लेकिन हनुमान जी ने उन सभी को रोक लिया। देवांतक का अंत हनुमान जी ने अपने गदा से देवांतक पर एक ऐसा प्रहार किया कि वह वहीं मूर्छित होकर गिर पड़ा। इसके बाद हनुमान जी ने देवांतक का सिर धड़ से अलग कर दिया। रावण पुत्र नरांतक का वध युद्ध के मैदान में दोनों योद्धाओं के बीच का युद्ध देखकर सभी हतप्रभ रह जाते हैं। दोनों योद्धा एक दूसरे पर प्रहार करने से पीछे नहीं हट रहे थे। नरांतक एक शक्तिशाली योद्धा था और उसने अंगद को परास्त करने के लिए अपना पूरा दम लगा दिया। लेकिन अंगद भी एक कुशल योद्धा था और वह नरांतक के सभी प्रहारों को विफल कर रहा था। अंत में, काफी समय तक युद्ध के पश्चात नरांतक भूमि पर गिर जाता है। अंगद उस पर लगातार वार पर वार करते हैं और अंत में नरांतक की मृत्यु हो जाती है। नरांतक की मृत्यु से रावण की सेना में हाहाकार मच जाता है। रावण के पुत्र की मृत्यु से वह स्वयं भी बहुत दुखी होता है। नरांतक की मृत्यु से रामायण के युद्ध का रुख बदल जाता है। इस युद्ध से यह स्पष्ट हो जाता है कि रावण की सेना अब राम और लक्ष्मण के सामने टिक नहीं सकती है। रावण पुत्र त्रिश्रा, निकुंभ तथा सेनापति अकम्पन का वध रावण की सेना के सेनापति अकंपन का वध रामायण Ramayan के युद्ध में, रावण की सेना के सेनापति अकंपन एक शक्तिशाली योद्धा थे। उन्होंने वानर सेना पर जमकर वार किया और कई वानरों को मार डाला। सुग्रीव को अकंपन के युद्ध कौशल से बहुत गुस्सा आया और उसने अकंपन से युद्ध करने के लिए आगे आया। दोनों योद्धाओं के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ। अकंपन ने अपनी गदा से सुग्रीव पर कई प्रहार किए, लेकिन सुग्रीव ने सभी प्रहारों को अपनी गदा से रोक लिया। अंत में, सुग्रीव ने अकंपन पर एक ऐसा प्रहार किया कि वह वहीं मूर्छित होकर गिर पड़ा। इसके बाद सुग्रीव ने अकंपन का सिर धड़ से अलग कर दिया। रावण पुत्र त्रिश्रा का वध हनुमान जी एक शक्तिशाली योद्धा थे और उन्होंने रावण की सेना के कई योद्धाओं को मार डाला था। रावण के पुत्र त्रिश्रा भी एक शक्तिशाली योद्धा था और उसने हनुमान जी को परास्त करने के लिए अपना पूरा दम लगा दिया। दोनों योद्धाओं के बीच एक भयंकर मल्लयुद्ध हुआ। त्रिश्रा ने अपनी तलवार से हनुमान जी पर कई प्रहार किए, लेकिन हनुमान जी ने सभी प्रहारों को अपने हाथों से रोक लिया। अंत में, हनुमान जी ने त्रिश्रा को अपने हाथों से पकड़ लिया और उसकी तलवार को छीन लिया। इसके बाद हनुमान जी ने उसी तलवार से त्रिश्रा का वध कर दिया। रावण पुत्र निकुंभ का वध बाली पुत्र अंगद भी एक शक्तिशाली योद्धा थे और उन्होंने रावण की सेना के कई योद्धाओं को मार डाला था। रावण के पुत्र निकुंभ भी एक शक्तिशाली योद्धा था और उसने अंगद को परास्त करने के लिए अपना पूरा दम लगा दिया। दोनों योद्धाओं के बीच एक भयंकर युद्ध हुआ। निकुंभ ने अपनी गदा से अंगद पर कई प्रहार किए, लेकिन अंगद ने सभी प्रहारों को अपनी गदा से

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कुम्भकरण- रावण संवाद श्रीराम द्वारा कुम्भकरण का वध Ramayan- Kumbhkaran Vadh Story in Hindi

प्रथम दिन के युद्ध में रावण श्रीराम से पराजित हो जाता है। यह पराजय रावण के लिए एक बड़ा झटका होती है। वह समझता है कि श्रीराम कोई साधारण योद्धा नहीं हैं। उनकी शक्ति ब्रह्मा, विष्णु, महेश की तरह है। रावण अपनी चिंता को दूर करने के लिए अपने गुप्तचरों को चारों दिशाओं में भेजता है। वह उन्हें आदेश देता है कि वह चारों दिशाओं से असुर शक्ति को संगठित करके लाएं। ताकि राम की वानर सेना को युद्ध में हराया जा सके। तभी रावण के नाना माल्यवान जी वहां पर आते हैं। वे रावण को चिंता में देखकर इसका कारण पूछते हैं। रावण की चिंता का कारण Raavan ki chinta ka kaaran रावण अपनी चिंता का कारण बताते हुए माल्यवान जी से कहता है कि, “नानाजी, मैंने राम को जितना साधारण सोचा था वह उतना साधारण शत्रु नहीं है। आज के युद्ध में उसने मुझे एक योद्धा की तरह नहीं बल्कि एक बालक की तरह परास्त करके भगा दिया है। राम की शक्ति ब्रह्मा, विष्णु, महेश की तरह है। इसलिए उससे युद्ध में जीतने के लिए हमें पृथ्वीलोक की सारी असुर शक्ति की आवश्यकता होगी। इसलिए हमने पृथ्वी के सभी भागों से असुर शक्ति को संगठित करने का आदेश दिया है।” माल्यवान जी की सलाह maalyavaan jee kee salaah माल्यवान जी रावण को समझाते हैं कि, “रावण, तुम चिंता मत करो। राम से युद्ध में जीतना तुम्हारे लिए संभव है। तुम एक शक्तिशाली योद्धा हो और तुम्हारे पास एक बड़ी सेना है। तुम यदि रणनीति से युद्ध करोगे तो तुम राम को पराजित कर सकते हो।” रावण की प्रतिक्रिया raavan kee pratikriya रावण माल्यवान जी की बातों से सहमत होता है। वह उन्हें आश्वासन देता है कि वह राम से युद्ध में जीतने के लिए पूरी तैयारी करेगा। रावण को माल्यवान का परामर्श Ravan ko maalyavaan ka paramarsh रावण प्रथम दिन के युद्ध में श्रीराम से पराजित होकर बहुत चिंतित हो गया। उसने अपने नाना माल्यवान जी को बताया कि वह श्रीराम के बारे में गलत सोचता था। वह कोई साधारण शत्रु नहीं है और उसकी शक्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान है। रावण ने पृथ्वी के सभी भागों से सारी असुर शक्ति को संगठित करने का आदेश दिया था ताकि राम की वानर सेना को हराया जा सके। रामायण युद्ध का पहला दिन। Ramayan Battale 1st Day story in Hindi माल्यवान जी ने रावण को समझाया कि उसे चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। वह एक शक्तिशाली योद्धा है और उसके पास एक बहुत बड़ी सेना है। अगर वह रणनीति के साथ युद्ध करेगा तो वह राम से युद्ध में जीत सकता है। कौन था कुंभकरण kaun tha kumbhakaran कुंभकरण रामायण Ramayan के एक प्रमुख पात्र हैं। वह रावण का छोटा भाई था। वह एक शक्तिशाली और कुशल योद्धा था। वह अपने भयंकर रूप और शक्ति के लिए जाना जाता था। वह एक विशालकाय राक्षस था, जिसके हाथों में दो विशाल तलवारें थीं। कुंभकरण का जन्म ऋषि व्रिश्रवा और राक्षसी कैकसी के पुत्र के रूप में हुआ था। वह रावण, विभीषण और शूर्पनखा का बड़ा भाई था। कुंभकरण को नींद का वरदान प्राप्त था। वह छह महीने तक सोता रहता था और फिर जागता था। वह अपने जीवन में केवल एक बार जागता था। रामायण युद्ध के दौरान, कुंभकरण 60 दिनों तक सोता रहा। जब वह जागा, तो उसने युद्ध में शामिल होने का फैसला किया। वह रावण की सेना का एक महत्वपूर्ण योद्धा था। उसने कई वानर योद्धाओं को मार डाला। अंत में, कुंभकरण का सामना हनुमान से हुआ। हनुमान ने कुंभकरण को मार डाला। कुंभकरण की मृत्यु से रावण की सेना को एक बड़ा झटका लगा। कुंभकरण के व्यक्तित्व के कुछ प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं: कुंभकरण की मृत्यु का महत्व निम्नलिखित है: कुंभकरण का जागना kumbhakaran ka jagana कुंभकरण का जागना रामायण युद्ध का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। कुंभकरण रावण का छोटा भाई था और वह एक शक्तिशाली और कुशल योद्धा था। उसे नींद का वरदान प्राप्त था। वह छह महीने तक सोता रहता था और फिर जागता था। वह अपने जीवन में केवल एक बार जागता था। रामायण Ramayan युद्ध के दौरान, कुंभकरण 60 दिनों तक सोता रहा। जब वह जागा, तो उसने युद्ध में शामिल होने का फैसला किया। वह रावण की सेना का एक महत्वपूर्ण योद्धा था। उसने कई वानर योद्धाओं को मार डाला। अंत में, कुंभकरण का सामना हनुमान से हुआ। हनुमान ने कुंभकरण को मार डाला। कुंभकरण की मृत्यु से रावण की सेना को एक बड़ा झटका लगा। कुंभकरण का जागना निम्नलिखित कारणों से महत्वपूर्ण था: कुंभकरण का जागना कैसे हुआ ऐसे समय में, कुंभकरण जागा। उसने देखा कि रावण की सेना हार रही है। वह अपने भाई, रावण का समर्थन करने के लिए युद्ध में शामिल होने का फैसला किया। कुंभकरण ने युद्ध में कई वानर योद्धाओं को मार डाला। उसने हनुमान को भी चुनौती दी। हनुमान और कुंभकरण का युद्ध बहुत ही भयंकर था। दोनों योद्धाओं ने अपनी पूरी ताकत झोंकी। अंत में, हनुमान ने कुंभकरण को मार डाला। कुंभकरण की मृत्यु से रावण की सेना को एक बड़ा झटका लगा। कुंभकरण द्वारा रावण को उपदेश  कुंभकरण का रावण से उपदेश कुंभकरण रावण का छोटा भाई था। वह एक शक्तिशाली और कुशल योद्धा था। उसे नींद का वरदान प्राप्त था। वह छह महीने तक सोता रहता था और फिर जागता था। वह अपने जीवन में केवल एक बार जागता था। रामायण युद्ध के दौरान, कुंभकरण 60 दिनों तक सोता रहा। जब वह जागा, तो उसने देखा कि रावण की सेना हार रही है। वानर सेना रावण की सेना पर बढ़त बना रही थी। कुंभकरण ने अपने भाई, रावण को उपदेश देते हुए कहा: “हे रावण! तुमने सीता का अपहरण करके एक बड़ा पाप किया है। तुमने धर्म का उल्लंघन किया है। तुम अब पराजय के कगार पर खड़े हो। मैं तुम्हें सलाह देता हूं कि तुम शीघ्र ही सीता को राम को लौटा दो और युद्ध विराम का प्रस्ताव रखो। यदि तुम ऐसा नहीं करोगे, तो तुम्हारा और तुम्हारे राज्य का नाश हो जाएगा। मैं तुम्हें याद दिलाता हूं कि तुम मेरे पिता, ऋषि व्रिश्रवा के शिष्य हो। तुमने उनसे धर्म और न्याय की शिक्षा प्राप्त की है।

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रामायण युद्ध का पहला दिन। Ramayan Battale 1st Day story in Hindi

युद्ध की शुरुआत में, रावण ने अपनी सेना का नेतृत्व अपने सेनापति प्रहस्त को सौंपा। प्रहस्त एक शक्तिशाली योद्धा था और उसने वानर सेना में कोहराम मचा दिया। वह एक-एक करके वानर सेना के योद्धाओं को मारने लगा। Sugreev dwara vajramushti ka vadh सुग्रीव द्वारा वज्रमुष्टि का वध  सुग्रीव द्वारा वज्रमुष्टि का वध रामायण युद्ध के प्रथम दिन की एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस घटना से रावण की सेना में भगदड़ मच गई और वानर सेना को एक बड़ी जीत मिली। वज्रमुष्टि रावण का एक शक्तिशाली योद्धा था। वह अपने भयंकर रूप और शक्ति के लिए जाना जाता था। वह एक विशाल वृक्ष की तरह लंबा था और उसके हाथों में दो विशाल गदाएँ थीं। युद्ध के प्रथम दिन, वज्रमुष्टि ने वानर सेना में कोहराम मचा दिया। वह एक-एक करके वानर सेना के योद्धाओं को मारने लगा। उसकी शक्ति और भयंकर रूप से वानर सेना के योद्धा घबरा गए थे। सुग्रीव ने वज्रमुष्टि को रोकने के लिए आगे बढ़े। उन्होंने वज्रमुष्टि से युद्ध किया और अंत में उसे मार डाला। सुग्रीव ने अपने शक्तिशाली वार से वज्रमुष्टि की एक गदा को तोड़ दिया और दूसरी गदा से उसे मार डाला। वज्रमुष्टि के वध से रावण की सेना में भगदड़ मच गई। वानर सेना के योद्धाओं को विश्वास हो गया कि वे रावण की सेना को परास्त कर सकते हैं। Rawan रावण द्वारा शांति प्रस्ताव अस्वीकार करना। रामायण युद्ध का आरंभ। Battle of Ramayan in Hindi सुग्रीव द्वारा वज्रमुष्टि के वध के परिणाम sugreev dwara vajramushti ke vadh ke parinaam सुग्रीव द्वारा वज्रमुष्टि का वध एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस घटना से रावण की सेना में भगदड़ मच गई और वानर सेना को एक बड़ी जीत मिली। हनुमान के हाथो सेनानायक दुर्मुख का वध (Hanumaan ke haatho senaanaayak durmukh ka vadh) रामायण (Ramayan ) युद्ध के प्रथम दिन, हनुमान ने रावण के सेनापति दुर्मुख का वध किया। यह एक महत्वपूर्ण घटना थी जिसने युद्ध के रुख को बदल दिया। दुर्मुख रावण का एक शक्तिशाली और कुशल योद्धा था। वह अपने भयंकर रूप और शक्ति के लिए जाना जाता था। वह एक विशाल वृक्ष की तरह लंबा था और उसके हाथों में एक विशाल तलवार थी। युद्ध के प्रथम दिन, दुर्मुख ने वानर सेना में कोहराम मचा दिया। वह एक-एक करके वानर सेना के योद्धाओं को मारने लगा। उसकी शक्ति और भयंकर रूप से वानर सेना के योद्धा घबरा गए थे। हनुमान ने दुर्मुख को रोकने के लिए आगे बढ़े। उन्होंने दुर्मुख से युद्ध किया और अंत में उसे मार डाला। हनुमान ने अपने शक्तिशाली वार से दुर्मुख की तलवार को तोड़ दिया और उसे मार डाला। दुर्मुख के वध से रावण की सेना में भगदड़ मच गई। वानर सेना के योद्धाओं को विश्वास हो गया कि वे रावण की सेना को परास्त कर सकते हैं। हनुमान द्वारा दुर्मुख के वध के परिणाम Hanumaan dwara durmukh ke vadh ke parinaam हनुमान द्वारा दुर्मुख का वध एक महत्वपूर्ण घटना थी। इस घटना से युद्ध के रुख को बदल दिया और वानर सेना को एक बड़ी जीत मिली। हनुमान और दुर्मुख का युद्ध Hanuman or durmukh ka yudh हनुमान और दुर्मुख का युद्ध एक भयंकर युद्ध था। दोनों योद्धाओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। हनुमान ने अपने शक्तिशाली वार से दुर्मुख के कई अस्त्र-शस्त्रों को नष्ट कर दिया। दुर्मुख भी हनुमान को घायल करने में सफल रहा। युद्ध बहुत ही लंबा और कठिन था। अंत में, हनुमान ने अपने शक्तिशाली वार से दुर्मुख को मार डाला। दुर्मुख की मृत्यु से रावण की सेना में भगदड़ मच गई। हनुमान द्वारा दुर्मुख के वध का महत्व Hanumaan dvaara durmukh ke vadh ka mahatv दुर्मुख रावण का एक शक्तिशाली और कुशल योद्धा था। उसका वध रावण की सेना के लिए एक बड़ा झटका था। इस घटना से वानर सेना को विश्वास हो गया कि वे रावण की सेना को परास्त कर सकते हैं। हनुमान द्वारा दुर्मुख का वध एक महत्वपूर्ण घटना थी जिसने युद्ध के रुख को बदल दिया। इस घटना से वानर सेना को एक बड़ी जीत मिली और रावण की सेना में भगदड़ मच गई। लक्ष्मण के द्वारा रावण-पुत्र प्रहस्थ का वध Lakshman ke dvaara raavan-putr prahasth ka vadh रामायण Ramayan युद्ध के प्रथम दिन, लक्ष्मण ने रावण के पुत्र प्रहस्त का वध किया। यह एक महत्वपूर्ण घटना थी जिसने युद्ध के रुख को बदल दिया। प्रहस्त रावण का एक शक्तिशाली और कुशल योद्धा था। वह अपने भयंकर रूप और शक्ति के लिए जाना जाता था। वह एक विशाल वृक्ष की तरह लंबा था और उसके हाथों में एक विशाल तलवार थी। युद्ध के प्रथम दिन, प्रहस्त ने वानर सेना में कोहराम मचा दिया। वह एक-एक करके वानर सेना के योद्धाओं को मारने लगा। उसकी शक्ति और भयंकर रूप से वानर सेना के योद्धा घबरा गए थे। लक्ष्मण ने प्रहस्त को रोकने के लिए आगे बढ़े। उन्होंने प्रहस्त से युद्ध किया और अंत में उसे मार डाला। लक्ष्मण ने अपने शक्तिशाली वार से प्रहस्त की तलवार को तोड़ दिया और उसे मार डाला। प्रहस्त के वध से रावण की सेना में भगदड़ मच गई। वानर सेना के योद्धाओं को विश्वास हो गया कि वे रावण की सेना को परास्त कर सकते हैं। लक्ष्मण द्वारा प्रहस्त के वध के परिणाम Lakshman dvaara prahast ke vadh ke parinaam लक्ष्मण और प्रहस्त का युद्ध Battle of Lakshman and Prahastha लक्ष्मण और प्रहस्त का युद्ध एक भयंकर युद्ध था। दोनों योद्धाओं ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। लक्ष्मण ने अपने शक्तिशाली वार से प्रहस्त के कई अस्त्र-शस्त्रों को नष्ट कर दिया। प्रहस्त भी लक्ष्मण को घायल करने में सफल रहा। युद्ध बहुत ही लंबा और कठिन था। अंत में, लक्ष्मण ने अपने शक्तिशाली वार से प्रहस्त को मार डाला। प्रहस्त की मृत्यु से रावण की सेना में भगदड़ मच गई। लक्ष्मण द्वारा प्रहस्त के वध का महत्व Lakshman dvaara prahast ke vadh ka mahatv प्रहस्त रावण का एक शक्तिशाली और कुशल योद्धा था। उसका वध रावण की सेना के लिए एक बड़ा झटका था। इस घटना से वानर सेना को विश्वास हो गया कि वे रावण की सेना को परास्त कर सकते हैं। लक्ष्मण द्वारा प्रहस्त का वध एक महत्वपूर्ण घटना थी जिसने युद्ध के रुख को

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Sapne me kutta dekhna:सपने में कुत्ता देखना शुभ या अशुभ

सपने (dream) में कुत्ता देखना एक सामान्य सपना है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, कुत्ता वफादारी, सुरक्षा और दोस्ती का प्रतीक है। सपने में कुत्ता अलग-अलग अवस्थाओं में दिखाई दे सकता है। इन अवस्थाओं के आधार पर सपने का अर्थ भी अलग-अलग हो सकता है। Dream शुभ संकेत sapne अशुभ संकेत Sapne:सपने में बंदर का दिखना शुभ या अशुभ, जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र कुल मिलाकर, सपने में कुत्ता देखना शुभ या अशुभ दोनों हो सकता है। यह सपने में कुत्ते की स्थिति और उसकी गतिविधियों पर निर्भर करता है। यदि आप सपने Sapne में कुत्ता देखते हैं, तो आपको अपने आसपास के वातावरण और अपनी भावनाओं पर ध्यान देना चाहिए। इससे आपको सपने का सही अर्थ समझने में मदद मिलेगी। यहाँ कुछ अतिरिक्त संकेत दिए गए हैं जो सपने में कुत्ते के अर्थ को समझने में मदद कर सकते हैं: यदि आपके सपने में कुत्ता दिखाई देता है, तो आपको अपने सपने के सभी विवरणों को याद रखने की कोशिश करनी चाहिए। इससे आपको सपने का सही अर्थ समझने में मदद मिलेगी।

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Sapne:सपने में बंदर का दिखना शुभ या अशुभ, जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Sapne सपने में बंदर का दिखना शुभ या अशुभ दोनों हो सकता है। यह सपने में बंदर की स्थिति और उसकी गतिविधियों पर निर्भर करता है सपनों में हम कई तरह की चीजें देखते हैं जो हमें हमारे भविष्य के बारे में भी संकेत देते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में अलग-अलग पशु-पक्षियों को देखने का अर्थ अलग-अलग होता है। सपने में बंदर को खाना चुराते हुए देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपको जल्द ही धन लाभ होने वाला है। सपने में बंदर को मस्ती करते हुए या प्रसन्न अवस्था में देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके किसी शत्रु से मित्रता हो सकती है। बंदर का हसते हुए दिखना Sapne सपने में बंदर को हंसते हुए देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में अच्छा समय शुरू होने वाला है। आपके जीवन में धन, समृद्धि और मान-सम्मान बढ़ने वाला है।  किसी व्यक्ति को सपने (sapne) में बंदर हंसते हुए दिखता है, तो इसका अर्थ है कि उस व्यक्ति का अच्छा समय शुरू होने वाला है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति को भविष्य में धन-लाभ होने वाला है। वहीं, अगर सपने में बंदर को गुस्से में दिखाई दे तो समझ जाइए कि आप पर कोई भारी परेशानी आने वाली है। यह सपना एक अशुभ संकेत है और इसके बाद आपका लोगों से झगड़ा भी हो सकता है। साथ ही मान-सम्मान में कमी भी आ सकती है। बंदर को खाते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर किसी को सपने sapne में बंदर कुछ खाते हुए नजर आता है तो इसे अशुभ संकेत माना गया है। यह सपना बताता है कि आपको भविष्य के लिए सतर्क रहना चाहिए। वहीं अगर कोई व्यक्ति सपने में बंदरों का झुंड देखता है, तो इसका मतलब है कि जल्द ही उसे आर्थिक लाभ मिलने वाला है। बंदरों को लड़ते हुए देखना सपने में बंदर को लड़ते हुए देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में कोई समस्या उत्पन्न हो सकती है। अगर आप सपने में बंदरों को आपस में लड़ते हुए देखते हैं तो इसका मतलब है कि परिवार में किसी कारण दरार पड़ सकती है। इसलिए आपको संभलकर रहने की जरूरत है। अगर आप सपने में बंदर को खाना चुराते देखते हैं, तो इसका मतलब है कि व्यक्ति को जल्द ही धन लाभ होने वाला है। बंदर को तैरते हुए देखना सपने में बंदर को तैरते हुए देखना शुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आप जल्द ही अपने सभी कष्टों और समस्याओं से छुटकारा पा सकते हैं। अगर सपने में कोई बंदर तैरते हुए नजर आ रहा है, तो इसका मतलब है कि जल्द ही आपको जीवन में आ रही किसी समस्या से छुटकारा मिलने वाला है। अगर सपने में आप देखते हैं कि किसी बंदर ने आपको काट लिया है, तो समझ लें कि भविष्य में कोई गंभीर चोट लगने वाली है। सपने में बंदर को आप पर हमला करते हुए देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपके जीवन में किसी प्रकार का खतरा या परेशानी आ सकती है। सपने में बंदर को चोरी करते हुए देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपको आर्थिक नुकसान हो सकता है। सपने में बंदर को क्रोध में देखना अशुभ माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपका किसी से विवाद हो सकता है।

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Rawan रावण द्वारा शांति प्रस्ताव अस्वीकार करना। रामायण युद्ध का आरंभ। Battle of Ramayan in Hindi

Rawan Dwara shree ram रावण द्वारा श्रीराम के शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करना । राम अंगद संवाद। युद्ध का आरंभ (रामायण की संपूर्ण कहानी) रावण को शांति प्रस्ताव पर विचार करने के लिए एक रात का समय देकर युवराज अंगद वापस आ जाते हैं युवराज अंगद रावण के दरबार में शांति प्रस्ताव लेकर जाते हैं। वे रावण को बताते हैं कि श्री राम चाहते हैं कि सीता को वापस कर दिया जाए और युद्ध से बचा जा सके। रावण अंगद की बात सुनकर हंसता है और कहता है कि वह सीता को कभी नहीं छोड़ेगा। रावण के दरबार में हुई सभी गतिविधियों के कारण लंका के सभी प्रियजन सोचने पर मजबूर हो जाते हैं रावण के दरबार में हुई सभी गतिविधियों के कारण लंका के सभी प्रियजन सोचने पर मजबूर हो जाते हैं। वे सोचते हैं कि श्री राम का एक दूत हनुमान पूरी लंका को जला कर चला गया था और दूसरा दूत अंगद सभी योद्धाओं को चुनौती देकर चला गया था, लेकिन कोई उसकी चुनौती का सामना नहीं कर पाया और वह पूरी सभा को लज्जित करके चला गया। अंगद रावण संवाद तथा अंगद का पैर। Angad’s Foot Story in Hindi लंका के प्रियजनों को चिंता होती है लंका के प्रियजनों को चिंता होती है कि श्री राम की सेना बहुत शक्तिशाली है और रावण को पराजित करना बहुत मुश्किल होगा। वे रावण को समझाते हैं कि वह सीता को वापस कर दे और युद्ध से बच जाए। रावण हार मानने को तैयार नहीं होता लेकिन रावण हार मानने को तैयार नहीं होता। वह कहता है कि वह सीता को कभी नहीं छोड़ेगा और वह श्री राम से युद्ध करके ही दम लेगा। लंका में युद्ध की आशंका बढ़ जाती है रावण के इस कथन से लंका में युद्ध की आशंका बढ़ जाती है। सभी लोग भयभीत हो जाते हैं। लंका के प्रियजनों की चिंता का कारण लंका के प्रियजनों की चिंता का कारण यह था कि श्री राम की सेना बहुत शक्तिशाली थी। हनुमान ने पूरी लंका को जला दिया था और अंगद ने सभी योद्धाओं को चुनौती देकर लज्जित कर दिया था। इससे स्पष्ट था कि श्री राम की सेना रावण की सेना से कहीं अधिक शक्तिशाली थी। Rawan रावण के हार मानने से इंकार रावण हार मानने को तैयार नहीं था। वह सीता को कभी नहीं छोड़ना चाहता था। वह जानता था कि श्री राम से युद्ध करना बहुत मुश्किल होगा, लेकिन वह हार मानने वाला नहीं था। लंका में युद्ध की आशंका रावण के हार मानने से इंकार करने से लंका में युद्ध की आशंका बढ़ गई। सभी लोग भयभीत थे। वे नहीं जानते थे कि युद्ध में क्या होगा। नाना माल्यवान द्वारा रावण को समझाना इसी विचार से महाराजा रावण के नानाजी माल्यवान ने रावण को समझाने का प्रयत्न किया कि, हे दशानन,  जिनके केवल दो दूत लंका के सभी योद्धाओं का सर शर्म से झुका कर चले गए हो वह कोई साधारण मानव तो नहीं हो सकता। इसलिए मेरा मत आपको यही है कि इस युद्ध का जो मुख्य कारण आपका सीता को अपनी पत्नी बनाने हठ है, उसे त्याग दीजिए। इसी में लंका तथा असुर जाति की भलाई है । एक सफल राजा वही होता है जो को केवल अपने हित के स्थान पर अपनी प्रजा का हित सर्वोपरी रखे। साथ ही यह भी सोचने योग्य बात है कि शांति प्रस्ताव शत्रु की तरफ से आया है इसलिए तुम्हारा पलड़ा अभी भी भारी माना जाएगा यदि तुम शांति प्रस्ताव स्वीकार कर लेते हो । लेकिन अहंकार के वश में लंकेश रावण तथा उनका पराक्रमी पुत्र इंद्रजीत माल्यवान जी के परामर्श को नकार देते हैं। Rawan रावण का उसके ससुर से संवाद (मय दानव) वहीं दूसरी ओर रावण की पत्नी मंदोदरी अपने पति को लेकर बहुत चिंतित थी इसलिए उन्होंने अपने पिता मय दानव से रावण को समझाने का आग्रह किया। अपनी पुत्री के आग्रह पर रावण के ससुर, मय दानव,  रावण को आने वाली विपत्ति से सचेत करते हुए कहते है की, हे रावण, श्रीराम कोई साधारण मानव नहीं है स्वयं नारायण का अवतार है जोकि असुरों का अंत करने के लिए इस पृथ्वी पर आए हैं। आप यह सपष्ट देख चुके हैं कि समुद्र पर सेतु बंधन जैसे असंभव कार्य को भी उन्होंने संभव करके दिखाया है। उनका केवल एक वानर दूत हनुमान लंका को जलाकर तथा आपके पुत्र अक्षय कुमार का अंत करके चला गया। उनका एक वानर अंगद आपके सभी योद्धाओं के मस्तक अपने पैरों में झुका कर चला गया और कोई कुछ भी नहीं कर पाया। आपको सुमति देने वाला आपका छोटा भाई विभीषण आपके त्याग के कारण आपके शत्रुओं से जा मिला है। यह कोई छोटी बात नहीं है। इसीलिए अभी भी समय है हम चाहे तो स्थिति को सुधार सकते हैं। सीता का मोह त्याग कर उसे उसके पति के पास पहुंचा दीजिए तो यह आने वाला संकट टल जाएगा। अन्यथा उनका सर्वनाश होने को है। लेकिन  अपने अहंकार के कारण रावण ने उनके परामर्श को भी ठुकरा दिए ।  अंत में रावण की माता कैकसी ने भी उसे समझाने का बहुत प्रयत्न किया और कहां की तुम्हारे पिता ने भविष्यवाणी की थी कि भगवान विष्णु एक मानव का अवतार लेकर पृथ्वी पर आयेंगे तब तुम्हारे पुत्र रावण का अहंकार टूट जाएगा किंतु विभीषण के कारण असुर जाति का पूर्ण नाश होने से बच जाएगा। लेकिन अपने प्रतिष्ठा और शान के खिलाफ समझकर रावण ने अपने नाना माल्यवान, ससुर मय दानव और अपनी माताजी कैकसी के परामर्श को ठुकरा दिया। Rawan राम अंगद संवाद । युद्ध का निश्चय  वहीं दूसरी ओर श्रीराम अंगद की प्रशंसा करते हुए कहते हैं कि तुमने एक दूत के कुशल गुणों को सार्थक किया है किस तरह तुमने अपने प्रभावी संचार कौशल द्वारा रावण के सभी योद्धाओं को चुनौती दी तथा अपने स्वामी का संदेश इतने प्रभावी तरीके से उन्हें सुनाया की उनके सभी योद्धाओं को लज्जित करके अपने पैरो में उनके सर झुका दिए। यहां तक लंकापति रावण सबसे उसका मुकुट उसके मस्तक से उतारकर हमारे चरणों में ले आए। लक्ष्मण जी ने भी अंगद के इस साहसपूर्ण कार्य कि बहुत सराहना की। वही सभा में विभीषण के गुप्तचरो द्वारा दिए गए

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अंगद रावण संवाद तथा अंगद का पैर। Angad’s Foot Story in Hindi

अंगद का पैर। रावण और अंगद का संवाद। रावण को अंतिम शांति प्रस्ताव। Ram setu राम सेतु निर्माण के बाद समस्त वानर सेना लंका पहुंचती है राम सेतु निर्माण के बाद समस्त वानर सेना समुद्र को पार करके लंका तक पहुंच जाती है। लंका पहुंचने के बाद श्री राम सुग्रीव को आदेश देते हैं कि वह अपने-अपने पड़ाव यहां डालें। वानर सैनिक वहां पर अपने-अपने तंबू खड़े करने में व्यस्त हो जाते हैं। Rawan रावण अपने गुप्तचरों को श्री राम की सेना में भेजता है राम की सेना लंका में प्रवेश कर चुकी है यह खबर सुनकर लंका के राजा रावण भी आश्चर्य में पड़ जाता है। वह अपने गुप्तचरों को श्री राम की सेना में भेजकर उनके भेद जानने के लिए कहता है। सुख और सारन भेष बदलकर श्री राम की सेना में घुसते हैं रावण के दो गुप्तचर, जिनमें एक रावण का खास सैनिक था जिनके नाम सुख और सारन था, भेष बदलकर श्री राम की सेना में घुस जाते हैं। वे स्वयं को वानर सेना के दो सैनिक के रूप में पेश करते हैं और श्री राम की सेना में घुसने में सफल हो जाते हैं। सुख और सारन श्री राम की सेना का भेद जानने की कोशिश करते हैं सुख और सारन श्री राम की सेना के बीच घूमते हुए उनका दल बल और युद्ध की रणनीति का पता लगाने की कोशिश करते हैं। वे वानर सैनिकों से बात करते हैं और उनसे उनके बल और पराक्रम के बारे में पूछते हैं। सुख और सारन को श्री राम की सेना का भेद नहीं मिल पाता लेकिन वानर सैनिक सुख और सारन को कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी नहीं देते हैं। वे उन्हें बताते हैं कि श्री राम और उनकी सेना बहुत शक्तिशाली है और वे रावण को निश्चित रूप से पराजित करेंगे। वानर सेना का लंका प्रस्थान तथा राम सेतु निर्माण । Ram Setu Nirman Story in Hindi सुख और सारन वापस लंका जाते हैं और रावण को रिपोर्ट करते हैं अंत में, सुख और सारन लंका वापस जाते हैं और रावण को रिपोर्ट करते हैं कि श्री राम और उनकी सेना बहुत शक्तिशाली है। वे रावण को बताते हैं कि श्री राम को पराजित करना बहुत मुश्किल होगा। रावण सुख और सारन की रिपोर्ट सुनकर चिंतित हो जाता है रावण सुख और सारन की रिपोर्ट सुनकर चिंतित हो जाता है। वह जानता है कि श्री राम और उनकी सेना को पराजित करना बहुत मुश्किल होगा। लेकिन वह हार मानने वाला नहीं है। वह श्री राम और उनकी सेना से युद्ध करने के लिए तैयार हो जाता है। Rawan रावण के गुप्तचर  रावण के गुप्तचर सुख और सारन वानर सैनिकों का वेश धारण करके श्री राम की सेना में इधर-उधर घूम रहे थे ताकि उनकी पूरी छावनी की व्युह्रचना रचना का भेद जान सकें। लेकिन विभीषण उन दोनों को पहचान जाते हैं और उन्हें पकड़कर श्री राम के समक्ष लेकर आते हैं। लक्ष्मण, जामवंत, अंगद, और सुग्रीव आदि सभी श्रीराम से आग्रह करते हैं कि उन दोनों गुप्तचरों को मृत्युदंड दिया जाए क्योंकि युद्ध नीति यही कहती है । एक गुप्त चर यदि पकड़ा जाए तो उसके लिए मृत्युदंड का ही विधान है। लेकिन श्री राम, रावण के दोनों को गुप्तचरों का छोड़ने का आदेश देते हैं और कहते हैं कि युद्ध में विजय और पराजय केवल गुप्तचरों पर निर्भर नहीं करते और यदि ऐसा है तो योद्धा का रण कौशल और पराक्रमी होने व्यर्थ है। इसलिए श्रीराम दोनों लोग गुप्तचरों को मुक्त करने का आदेश देते हैं उन दोनों को यह भी कहते हैं कि, यदि तुमने हमारी पूरी छावनी का अवलोकन न किया हो तो तुम अभी भी पूरी छावनी का अवलोकन कर सकते हो बल्कि महाराज विभीषण तुम्हें खुद अवलोकन करवाएंगे। श्रीराम के मुख से ऐसे वाक्य सुनकर दोनों गुप्तचर उनके पैरों में गिर जाते हैं और बोलते हैं कि हे कृपा निधान, हम तो मृत्यु के पात्र हैं, लेकिन फिर भी आप हमें मुक्त कर रहे हैं । वाकई में आप जैसा उदार और दयालु शत्रु हमने आज तक नहीं देखा। यह कहकर दोनों गुप्तचर चले जाते हैं। जब यह खबर रावण को पता चलती है तो वह अपने दोनों गुप्तचरों को धिक्कारता है और कहता है कि तुमने अपने प्राणों के भय से आत्मसमर्पण कर दिया।  Angad अंगद को दूत बनाकर भेजना  अगले दिन श्रीराम की सेना लंका पर चढ़ाई करने के लिए तैयार थी। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने अंतिम बार रावण को अवसर देने का विचार किया। इसलिए उन्होंने एक बार फिर रावण के पास शांति प्रस्ताव भेजने का निश्चय किया। श्री राम की तरफ से रावण को शांति प्रस्ताव देने के लिए बाली पुत्र अंगद को चुना जाता है। जबकि लक्ष्मण जी बजरंगबली हनुमान को दूत बनाकर भेजने का परामर्श देते है लेकिन श्रीराम ने यह सोच कर उन्हें दूत बनाकर नहीं भेजा क्योंकि वह पहले भी रावण के दरबार में जा चुके हैं। इससे रावण को यही लगेगा कि हमारी  सेना में हनुमान के अतिरिक्त कोई वीर वानर नही है। युवराज अंगद को शांति प्रस्ताव लेकर लंका में भेजा जाता है। लंका के द्वार रक्षक अंगद को महाराज रावण के दरबार में ले जाते हैं। रावण के दरबार में अंगद का एक दूत की तरह सम्मान न होने के कारण वह बोलता है।  Angad or Rawan अंगद रावण संवाद हे रावण, मैं श्रीराम का दूत हु इसलिए आपका कर्तव्य था की मुझे एक दूत की तरह सम्मान देकर मेरे लिए एक आसन की व्यवस्था होनी चाहिए थी । किंतु आपने ऐसा नहीं किया इसलिए मेरा यह धर्म बनता है की मैं यहां से लौट जाऊं। लेकिन मेरे ऐसा करने से श्रीराम प्रभु का संदेश आप तक नहीं पहुंच पाएगा। इसीलिए मैं स्वयं ही अपने लिए एक उचित आसन का प्रबंध करता हूं। इतना कहकर अंगद अपनी पूंछ से रावण के सिंहासन जितना ऊंचा आसन बना लेता है , और इस पर बैठकर बोलता है… हे लंकापति रावण, मैं महाराज बाली का पुत्र अंगद हूं। मेरे प्रभु श्री राम ने मुझे आपको अंतिम अवसर के रूप में शांति प्रस्ताव सुनाने के लिए भेजा है । अतः श्रीराम का संदेश ध्यान से सुने ।  हे रावण, आप त्रिलोक विजयी, अत्यंत शक्तिशाली,

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वानर सेना का लंका प्रस्थान तथा राम सेतु निर्माण । Ram Setu Nirman Story in Hindi

रामायण ( Ramayana) के अनुसार, भगवान राम की पत्नी सीता को रावण ने लंका ले जाकर कैद कर लिया था। भगवान राम ने सीता को बचाने के लिए लंका पर आक्रमण करने का फैसला किया। लेकिन लंका भारत से बहुत दूर थी। भगवान राम की सेना को लंका तक पहुंचने के लिए एक पुल की जरूरत थी। भगवान राम ने समुद्र देवता से पुल बनाने की अनुमति मांगी। समुद्र देवता ने पुल बनाने की अनुमति दी, लेकिन उन्होंने कहा कि पुल बनाने के लिए केवल पत्थर ही इस्तेमाल किए जा सकते हैं। विभीषण तथा श्रीराम की पहली भेंट | श्रीराम तथा समुंद्र का संवाद  |वानर सेना का लंका प्रस्थान Ram Setu Nirman राम सेतु का निर्माण | (सम्पूर्ण रामायण की कहानी )अपने जलती हुई पूंछ की आग बुझाने के बाद बजरंगबली हनुमान अंतिम बार माता सीता से मिलने के लिए जाते हैं। माता सीता गहरी चिंता में डूबी हुई थी । जब से उन्हें खबर मिली थी कि रावण ने हनुमान की पूंछ में आग लगा देने का आदेश दिया है। इसलिए माता सीता ने अग्नि देव से प्रार्थना की थी कि वह हनुमान की पूंछ का एक बाल भी ना जलाएं। और हुआ भी यही, के अपने जलती हुए पूंछ से बजरंगबली हनुमान ने रावण की पूरी लंका जला दी लेकिन उनकी पूंछ का एक बाल भी नहीं जला। राम सेतु निर्माण (Ram Setu Nirman ) अतः हनुमान आकर माता सीता को प्रणाम करते हैं और श्री राम के लिए कोई अपना संदेश देने के लिए कहते हैं। माता सीता हनुमान को भेंट के प्रमाण के रूप में यह बात बताती है कि जब इंद्र के पुत्र जयंत ने एक कौवे का रूप लेकर उनके पैर पर चोट मारी थी तब श्रीराम ने कुशा के एक तिनके को मंत्र उपचार के द्वारा उसके पीछे छोड़ा था कि वह तीनों लोगों में घूम कर भी उससे बच नहीं पाया था। अंत में वह खुद श्री राम की शरण में आया तब उसके प्राण बचे थे और तब श्री राम ने उसे एक आंख से काना करके छोड़ दिया था। Shree ram ko sita ki bhet श्रीराम को सीता से भेंट की शुभ समाचार मिलना हनुमान जी माता सीता से मिलने के बाद उनके वचनों को ध्यान से सुनते हैं। माता सीता उनसे बताती हैं कि वे लंका में कैद हैं, लेकिन उनका मन और शरीर स्वस्थ है। वे श्री राम के प्रति अपनी निष्ठा और प्रेम व्यक्त करती हैं। हनुमान जी माता सीता का संदेश सुनकर प्रसन्न होते हैं। वे तुरंत उड़कर श्री राम के पास लौट आते हैं। shree ram or Hanuman श्री राम को हनुमान जी का संदेश सुनाकर प्रसन्न होते हैं हनुमान जी श्री राम के सामने आते हैं और उन्हें माता सीता का संदेश सुनाते हैं। यह सुनकर श्री राम बहुत प्रसन्न होते हैं। वे हनुमान जी को अपने हृदय से लगा लेते हैं और कहते हैं, “हनुमान, तुमने आज मेरा सबसे प्रिय कार्य किया है। अगर तुम सीता का पता नहीं लगाते तो अपने कुल की मर्यादा की रक्षा न कर पाने के कारण मैं अपने पूर्वजों को मुंह दिखाने के काबिल नहीं रहता। आज केवल तुम्हारे कारण ही मुझे सीता के सकुशल होने का संदेश मिला है।” श्री राम लंका पर आक्रमण का निर्णय लेते हैं श्री राम माता सीता के संदेश से यह जान जाते हैं कि रावण ने सीता को कैद कर रखा है। वे लंका पर आक्रमण करने का निर्णय लेते हैं। वे सुग्रीव को आदेश देते हैं कि वह अपनी सेना को तैयार करे। सुग्रीव और वानर सेना श्री राम को सेनापति बनाना चाहते हैं सुग्रीव और वानर सेना श्री राम को सेनापति बनाना चाहते हैं। वे कहते हैं कि श्री राम ही हमारे सेनापति हो सकते हैं। श्री राम के नेतृत्व में हम रावण को हरा सकते हैं। श्री राम सुग्रीव के आग्रह को स्वीकार करते हैं और वानर सेना के सेनापति बन जाते हैं। लंका पर आक्रमण का मार्ग प्रशस्त होता है हनुमान जी के आगमन और श्री राम के सेनापति बनने से लंका पर आक्रमण का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। श्री राम और उनकी वानर सेना लंका पर आक्रमण करने के लिए तैयार हो जाती है। वानर सेना का लंका के लिए प्रस्थान अगले दिन श्रीराम तथा सुग्रीव की पूरी वानर सेना बड़े जोश के साथ लंका के लिए कूच करती है। “हर हर महादेव” के नारे लगाते हुए सारी सेना उत्साह तथा उमंग के साथ आगे बढ़ती है। लंका के लिए प्रस्थान के कुछ ही दिनों बाद सुग्रीव की पूरी वानर सेना समुद्र तट पर पहुंच जाते हैं जहां से लंका तथा उनके बीच केवल सौ योजन का समुद्र लहरा रहा था। समुद्र की लहरों को देखकर जामवंत जी श्री राम से कहते हैं कि, हे प्रभु। सीता माता की खोज के समय भी हम इसी स्थान पर आकर ठहर गए थे । उस समय बजरंगबली हनुमान की शक्तियों के कारण हमारा कार्य सिद्ध हो गया था, लेकिन अब परिस्थिति अलग है क्योंकि इतनी बड़ी वानर सेना का एक साथ समुद्र पार करना असंभव है।  वानर सेना का लंका प्रस्थान तथा राम सेतु निर्माण । Ram Setu Nirman Story in Hindi वहीं दूसरी ओर लंका में रावण का छोटा भाई विभीषण भरी सभा में रावण को यह सन्मति देने का प्रयास करता है कि वह देवी सीता को श्री राम के पास आदर के साथ पहुंचा दें, इसी में सबकी भलाई है । इस पर रावण उसकी हंसी उड़ाते हुए उसका अनादर करता है तथा लात मारकर उसका मुकुट गिरा देता है। विभीषण का मुकुट गिरते ही पूरी सभा उसपर हंसने लगती हैं तब विभीषण कहता है कि, मैं तुम्हारे ऊपर मंडराते हुए काल को देख रहा हूं। स्वयं महाराज द्वारा मेरा समान मेरी मृत्यु के समान है। इसलिए मैं आज से लंका को छोड़कर जा रहा हूं। ShreeRam श्रीराम तथा विभीषण की भेंट यह कहकर विभीषण अपनी माता से भेंट करके श्रीराम के शरण में आने का फैसला करते हैं तथा वह अपने चार मंत्रियों के साथ वायु मार्ग से होते हुए समुंदर के इस पार बसी श्रीराम के छावनी में आते हैं उनसे शरण मांगते हैं। शरणागत वत्सल श्री राम अपने शत्रु के छोटे भाई को

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Sapne:सपने में दिखें ये चीजें तो बिल्कुल ना करें अनदेखी

सपने (Sapne) हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति होते हैं। वे हमारी भावनाओं, इच्छाओं, भय और चिंताओं को दर्शाते हैं। कुछ सपने शुभ होते हैं, जबकि कुछ अशुभ। सपने में दिखने वाली कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिनका हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसी चीजें अगर हमें सपने में दिखाई दें तो हमें उन्हें बिल्कुल अनदेखी नहीं करना चाहिए। कभी आप सपने में  कभी आप किसी जंगल में भटक जाते हैं तो कभी आप देखते हैं कि आप एग्जाम दे रहे हैं या कभी आप सपने में देखते हैं कि आप किसी ऊंची बिल्डिंग से गिर रहे हैं.  हम सब कुछ एक सपना समझकर भूल जाते हैं लेकिन हर सपने का कुछ मतलब होता है. सपने अचेतन अवस्था में बोले गए शब्दों की तरह हैं. सपने में हम जो भी देखते हैं, उसका कोई ना कोई अर्थ जरूर होता है. इन सपनों का संबंध हमारी असल जिंदगी से भी होता है. आइए जानते हैं आखिर ये सपने हमसे क्या कहना चाहते हैं… कई बार हम कुछ ऐसे सपने देखते हैं जो दुर्भाग्य और बुरे वक्त आने का संकेत होते हैं. अगर हम अपने सपनों को समझ लें तो उसके नकारात्मक प्रभाव को कम कर सकते हैं. आइए जानते हैं कौन से हैं वे बुरे सपने. सांप snek को सपने ( Sapne) में देखना अशुभ माना जाता है. अगर आपने अपने सपने में सांप देखे हैं तो सावधान हो जाइए. सपने में सांप दिखने का मतलब है कि आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. सपने में अगर आप अपने किसी करीबी की मौत देखते हैं तो निश्चित तौर पर यह बुरा संकेत है. इसका मतलब है कि आपके निजी और व्यावसायिक रिश्तों में मुसीबतें हैं. लोगों से मिलते वक्त सावधानी बरतें खासकर ऑफिस में. सपने (Sapne) में रोते हैं:  सपने में खुद को रोते हुए या चिल्लाते हुए देखना यह बताता है कि आप अपनी असल जिंदगी में भी परेशान हैं. आपको बेचैनी, दुख, पीड़ा, उलझन, तनाव, अवसाद जैसी भावनाएं घेरे हुए हैं. अगर आप सपने में देखते हैं कि कोई आपका पीछा कर रहा है तो इसका मतलब यह है कि आप अपनी लाइफ में किसी समस्या को सुलझाने के बजाए उससे भाग रहे हैं. आपका मस्तिष्क आपको यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि आपको अपनी जिंदगी की उलझनों का सामना करना चाहिए, उनसे भागना नहीं चाहिए. या फिर आप अगर देखते हैं कि आप भागना चाह रहे हैं लेकिन आपका कदम ही नहीं उठ रहा है तो इसके मायने यह है कि आपके अंदर आत्मविश्वास की बहुत कमी है.हिंदू संस्कृति में बिल्लियों को अशुभ माना गया है और सपने में भी बिल्ली का दिखना अशुभ समझा जाता है.  सपने में बिल्ली दिखने का मतलब है कि आपको किसी से धोखा मिला है या फिर मिलने वाला है.अगर आप खुद को किसी जगह फंसा हुआ या बंद देखते हैं तो भविष्य में भाग्य आपका साथ छोड़ने वाला है. आपके लिए अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को संभालना मुश्किल भरा हो सकता है. कई बार आप बेहद अटपटे से सपने देखते हैं. आप अगर अपने सपने में देखते हैं कि आप न्यूड हैं तो इसकी व्याख्या यह हो सकती है कि आप अपमानित, शर्मिन्दा या फिर आहत हो सकते हैं. आपका अपना कोई आपको नुकसान पहुंचा सकता है. आपके राज खुल सकते हैं और आपको कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है. सपने में न्यूडिटी देखने को आजादी पाने और बंधन तोड़ने की इच्छा से भी देखा जा सकता है. अगर आप सपने में किसी की मौत को देखते हैं तो यह भी एक चेतावनी है. यह स्पष्ट संकेत है कि आपकी जिंदगी में कुछ बुरा हो सकता है. हालांकि अगर मृत व्यक्ति आपको कुछ दे रहा है तो यह आर्थिक लाभ का संकेत माना जाता है. अगर आप सपने में देखते हैं कि आपको कोई चोट पहुंचा रहा है या आपको चोट लग गई है तो इसका मतलब है कि आपको आने वाले वक्त में संघर्ष करना पड़ सकता है. अगर आप खुद को ऊंचाई से गिरते हुए देखते हैं तो यह आपकी जिंदगी की असफलताओं और मुश्किलों की तरफ इशारा कर रहा है. सपने (Sapne)में बच्चे को देखना भी अशुभ संकेत है. इससे किसी परिजन के दूर होने का संकेत समझा जाता है. अगर आप सपने में किसी बच्चे की दुलार करते हुए देखते हैं तो इसका मतलब आपको किसी से धोखा मिल सकता है.

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लंका दहन तथा हनुमान – रावण संवाद । Lanka Dahan Story in Hindi

रामायण के अनुसार, माता सीता को रावण ने लंका ले जाकर कैद कर लिया था। श्री राम और लक्ष्मण अपनी पत्नी सीता की खोज में निकल पड़े। अपनी यात्रा के दौरान, श्री राम और लक्ष्मण कई बाधाओं का सामना करते हैं। उन्हें राक्षसों का सामना करना पड़ता है, जंगलों में भटकना पड़ता है और कई आश्चर्यजनक घटनाओं का सामना करना पड़ता है। माता सीता से आज्ञा लेकर हनुमान जी अशोक वाटिका के फल तोड़कर खाने लगते हैं। वाटिका में हलचल देखकर वहां के पहरेदार आ जाते हैं और हनुमान जी से युद्ध करने लगते हैं। बजरंगबली हनुमान अपनी शक्ति द्वारा खेल खेल में ही पछाड़ देते हैं।  पहरेदार  जाकर अशोक बगिया के रक्षक जम्बूमाली को बुला कर लाते हैं और कहते हैं कि अशोक वाटिका में एक वानर घुस आया है, वह बड़ा ही बलशाली है। जंबूमाली कुछ सैनिकों के साथ आता है और हनुमान जी उसे भी पूरी तरह से पछाड़कर कर भगा देते हैं। जम्बुमाली तथा उस के सैनिकों को एहसास हो जाता है वह कोई साधारण वानर नहीं है। तब जंबू माली महाराज रावण की सभा में जाकर उनको यह सूचना देता है कि अशोक वाटिका में एक हनुमान नाम का वानर घुस आया है जो कि बहुत अधिक शक्तिशाली है जिसने हमारे सभी सैनिकों को पछाड़ दिया है। वह खुद को श्रीराम का दूत कहता है।  Hanumaan Dvaara Raavan-putr Akshay Kumaar ka Vadh हनुमान द्वारा रावण-पुत्र अक्षय कुमार का वध  तब लंकापति Lanka Dahan रावण जम्बूमली को धिक्कारते हुए कहता है कि तुम एक वानर को नहीं पकड़ सके। उसी सभा में बैठे रावण के पुत्र अक्षय कुमार अत्यधिक अभिमान और क्रोध में जम्बू माली को डांटते हैं और अपने पिता रावण से आज्ञा लेकर रावण पुत्र अक्षय कुमार स्वयं हनुमान को पकड़ने के लिए अशोक वाटिका में आता है। रावण के पुत्र अक्षय कुमार तथा हनुमान के बीच युद्ध शुरू हो जाता है। हनुमान जी अक्षय कुमार के सारे प्रहार विफल कर देते हैं। अक्षय कुमार अपने आसुरी विद्या का प्रयोग करके आकाश में जाकर युद्ध करने लगते हैं लेकिन शायद उसे  बजरंगबली हनुमान की शक्ति का अनुमान नहीं था। अंत में हनुमान जी ने आकाश में ही अक्षय कुमार के पैर पकड़कर उसे इतनी जोर से घुमाया कि उसका शरीर टूटकर दो हिस्सो मे बिखर गया। अपने पुत्र अक्षय कुमार की मृत्यु की खबर सुनकर रावण को भी अहसास हो गया था कि हनुमान कोई साधारण वानर नहीं है।  Hanumaan Aur Indrajeet ka Yuddh हनुमान और इंद्रजीत का युद्ध  इस पर रावण का सबसे प्रिय पुत्र इंद्रजीत जो कि सबसे महापराक्रमी  योद्धा था वह प्रतिशोध लेने की बात कहता है और अपने पिता रावण से कहता है कि वह जाकर उस धूर्त वानर को पकड़ेगा। लंकापति रावण अपने प्रिय पुत्र इंद्रजीत पर अधिक विश्वास करते थे इसलिए उन्होंने कहा कि अगर संभव हो तो उस वानर को जीवित ही पकड़ कर लाना। मैं  देखना चाहता हु की ऐसा कौन सा वानर है जिसे लंकेश की शक्ति का भय नहीं। तब इंद्रजीत अपने दल बल के साथ अशोक वाटिका में आ जाते हैं उन्हें देखकर हनुमान जी भी सचेत हो जाते है। हनुमान और रावण के पुत्र इंद्रजीत में युद्ध शुरू हो जाता है दोनों के बीच घमासान युद्ध होता है इंद्रजीत यह  देखता है कि उसके किसी भी बाण का असर महाबली हनुमान पर नहीं हो रहा है, वह खुद विचलित हो जाता है। अंत में इंद्रजीत ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करता है। हालांकि हनुमान जी को स्वयं ब्रह्मदेव से वरदान प्राप्त था कि ब्रह्मास्त्र या कोई भी अस्त्र उन्हें बांध नहीं सकता, लेकिन हनुमान जी यह देखना चाहते थे कि लंका का राजा रावण कौन है जिसने माता सीता का हरण किया है। इसीलिए हनुमान  ब्रह्मास्त्र को प्रणाम करके अपनी इच्छा से उसमें बंध जाते है।  Hanumaan-raavan sanvaad हनुमान -रावण संवाद  तब हनुमान को बांधकर लंकापति रावण के दरबार में लाया जाता है। हनुमान को देखकर लंकापति रावण आश्चर्य में पड़ जाते हैं कि एक साधारण सा  दिखने वाला वानर उनके महाबली पुत्र अक्षय कुमार का वध कर सकता है। लंकापति रावण पूछता है, बोल वानर तू कौन है? किसने तुझे भेजा है? किस उद्देश्य से हमारे राज्य में प्रवेश किया, अशोक वाटिका को उजाड़ा, और किस वजह से तुमने हमारे पुत्र अक्षय कुमार को मार दिया। तब हनुमान जी ने विद्वान की तरह  उत्तर देते हुए रावण से कहा” महाराज मैं तो केवल अशोक वाटिका में लगे हुए फलों को देखकर अपनी भूख को मिटाने आया था, लेकिन आपके  सैनिकों ने मुझ पर हमला किया और मैंने भी उनका उत्तर दिया। आपके जिस  सैनिक ने मुझ पर प्रहार नहीं किया मैंने उसको कुछ भी नहीं किया केवल उन्हीं का संहार किया जिन्होंने मेरे ऊपर आक्रमण किया और इसी वजह से मुझे आपके पुत्र अक्षय कुमार को परलोक भेजना पड़ा। रावण कहता है की “वानर तुम बहुत चतुर हो तुमने अभी तक अपना परिचय नहीं दिया।  विभीषण-हनुमत मिलन | हनुमान तथा माता सीता का संवाद | Vibhishan or Hanumat Milan in Hindi अपना परिचय देते हुए हनुमान जी ने कहा कि मैं वायुपुत्र हनुमान हूं। मैं अपने स्वामी श्री राम का दूत बनकर उनकी पत्नी सीता की खोज में 400 योजन समुद्र लाँघ  कर आया हूँ । मैं सीता माता से भेंट कर चुका हूं।  मैं तो केवल आपके दर्शन हेतु राज दरबार में आया हूं। वरना कोई भी ब्रह्मास्त्र या पाश मुझे बांध नहीं सकता। हनुमान ने यह भी कहा कि मैं चाहता तो अशोक वाटिका से फल खाकर वापस जा सकता था लेकिन मैं यह देखना चाहता था कि महर्षि पुलत्स के वंश में ऐसा कौन है जिसने भगवती सीता नामक पराई स्त्री का हरण करके अपने कुल को कलंकित किया है।  हनुमान द्वारा इस तरह का आक्षेप सुनकर रावण को क्रोध आ जाता है और वह हनुमान को दंडित करने के लिए मृत्युदंड देने के लिए कहता है। तभी सभा से विभीषण जी उठते हैं और महाराजा रावण से निवेदन करते हैं कि महाराज हनुमान एक दूत बनकर आया है और इसका वध नीति और धर्म के अनुसार उचित नहीं है।   लंका दहन | (Lanka Dahan ) कुछ देर विचार करके रावण कहता है कि वानरों को अपनी पूंछ से बहुत लगा

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