Sawan2024:सावन का तीसरा सोमवार कल, इस विधि से करें शिव जी की पूजा, भोलेनाथ होंगे प्रसन्न

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस महीने में पड़ने वाले सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है। सावन का तीसरा सोमवार और भी अधिक खास होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। सावन का तीसरा सोमवार भगवान शिव को समर्पित एक विशेष दिन होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस दिन शिव जी की पूजा करने की विधि और कुछ महत्वपूर्ण मंत्र। Sawan 2024 : प्रतिपदा तिथि शाम 06:03 तक रहेगी फिर द्वितीया तिथि लग जाएगी. इस दिन व्यतीपात और वरीयान योग भी रहेगा. साथ ही आश्लेषा और मघा नक्षत्र भी रहेगा. Sawan Third Somvar 2024 : शिव जी का प्रिय महीना सावन भोलेनाथ के भक्तों के लिए बहुत खास होता है. इस पूरे माह भक्त शिव जी की भक्ति में डूबे होते हैं. सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार व्रत का विशेष महत्व होता है. यह व्रत लड़कियों व महिलाओं के बीच बहुत प्रचलित है. ऐसी मान्यता है कि जो कुंआरी लड़कियां सावन के सोमवार का उपवास करती हैं उनको मनचाहा वर प्राप्त होता है जबकि विवाहित महिलाओं का वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है. ऐसे में सावन का तीसरा सोमवार कब है, Hariyali Teej 2024: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज,तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व सावन का तीसरा सोमवार कब 2024 आपको बता दें कि सावन के तीसरे सोमवार का व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा. सावन सोमवार व्रत और मुहूर्त 2024 : Sawan somvar vrat and muhurat 2024 सावन के तीसरे सोमवार को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. जो शाम 06:03 तक रहेगी फिर द्वितीया तिथि लग जाएगी. इस दिन व्यतीपात और वरीयान योग भी रहेगा. साथ ही आश्लेषा और मघा नक्षत्र भी रहेगा.  पूजा विधि: विशेष ध्यान रखने योग्य बातें: सावन के तीसरे सोमवार के दिन क्या करें: सावन के तीसरे सोमवार के दिन क्या न करें: सावन के तीसरे सोमवार का महत्व: सावन का तीसरा सोमवार भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन में शिव मंत्र : Shiv mantra ॐ नमः शिवाय॥ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ॐ नमो भगवते रूद्राय।ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ ॐ नमः शिवाय: यह सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है।महामृत्युंजय मंत्र: यह मंत्र जीवन और मृत्यु पर विजय दिलाता है।शिव तांडव स्तोत्र: यह स्तोत्र भगवान शिव की शक्ति और शौर्य का वर्णन करता है। शिव जो क्या भोग लगाएं हलवा, दही, भांग, पंचामृत, शहद, दूध, खीर, मालपुआ और ठंडाई आदि का भोग लगा सकते हैं.  (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Nag Panchami 2024:इन गलतियों से बचें और नाग देवता को प्रसन्न करें

Nag Panchami नाग पंचमी का त्योहार हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और मान्यता है कि ऐसा करने से नाग दोष से मुक्ति मिलती है। हालांकि, नाग पंचमी के दिन कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। आइए जानते हैं कि नाग पंचमी के दिन किन गलतियों से बचना चाहिए | हिंदू धर्म में नाग पंचमी के त्योहार का खास महत्व है। नाग पंचमी सावन के महीने में मनाई जाती है। सावन का महीना भगवान शिव और नाग की पूजा के लिए सबसे उत्तम महीना माना गया है। सनातन धर्म में Nag Panchami नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ और नागदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस खास मौके पर कुछ गलतियां भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से अशुभ फल मिलते हैं चलिए जानते हैं… नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024) हिंदू धर्म में Nag Panchami नाग पंचमी का दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ नागदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस शुभ अवसर पर किए पूजा-पाठ और धर्म-कर्म के कार्यों से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं, लेकिन नाग पंचमी के दिन कुछ गलतियां आपके जीवन में बड़ी मुश्किलें और बाधाएं ला सकती है। इसलिए इस दिन इन गलतियों को भूलकर भी ना करें। चलिए जानते हैं कि नाग पंचमी की नाग पंचमी कब हैं और इस दिन क्या नहीं करना चाहिए? साल 2024 में कब है नाग पंचमी, जानें तारीख और शुभ मुहूर्त Nag Panchami 2024 कब है नाग पंचमी 2024?  हर साल सावन मास शुक्ल पक्ष की Nag Panchami पंचमी को नाग पंचमी मनाया जाता है। साल 2023 में 22 अगस्त 2023 को नाग पंचमी पड़ रहा है। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की विशेष पूजा होती है। नागदेव को चावल, फूल, हल्दी और रोली अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही धन-वैभव और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।  Nag Panchami नागपंचमी पर ना करें ये काम दूसरों के बारे में नकारात्मक ना बोलें: मान्यता है कि इस शुभ दिन किसी व्यक्ति के बारे में नकारात्मक बातें नहीं बोलनी चाहिए। दूसरों के बारे में गलत बाते बोलने से समाज में आपकी खराब छवि बनेगी और आपको दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस दिन भूलकर भी किसी के बारे बुरे-शब्दों का इस्तेमाल ना करें। नुकीली चीजों का इस्तेमाल: नाग पंचमी के दिन नुकीली और धारदार चीजों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इस दिन सुई-धागा का भी इस्तेमाल करने से अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन ये काम बिल्कुल ना करें। लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल: नाग पंचमी के विशेष मौके पर लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करना और उसमें खाना बनाना बेहद अशुभ माना गया है। इस दिन लोहे के बर्तनों के उपयोग से जीवन में बैड लक आता है। खेती का काम ना करें: मान्यता है कि नाग पंचमी के अवसर पर खेती की जुताई या मिट्टी नहीं खोदना चाहिए। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है। इस खास मौके पर हरे पेड़-पौधों को भी नहीं काटना चाहिए। सांपो को परेशान ना करें: नाग पंचमी के दिन सांपो को परेशान नहीं करना चाहिए। अगर में घर में कहीं सांप निकल जाए, तो उसे बाहर फेंकने के लिए किसी की मदद लें। लेकिन सांप को मारना नहीं चाहिए। नाग पंचमी मंत्र (Nag Panchami Mantra) ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।। सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले। ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।। ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:। ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।। अनंत वासुकी शेषं पद्मनाभं च मंगलम्शं खपालं ध्रतराष्ट्रकंच तक्षकं कालियं तथा।। ॐ हँ जू स: श्री नागदेवतायेनमोनम:।। ॐ श्री भीलट देवाय नम:।। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Nag Panchami 2024 Date: साल 2024 में कब है नाग पंचमी, जानें तारीख और शुभ मुहूर्त

Nag Panchami 2024: नाग पंचमी का पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख पर्व में से एक है। इस दिन शिव जी के प्रिय नाग देवता की पूजा का विधान है। नाग पंचमी के दिन नाग की पूजा करना उत्तम माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं साल 2024 में नाग पंचमी कब है। मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन सांपों को दूध पिलाने से जातक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। ऐसे में नाग पंचमी के दिन भगवान शिव और नाग देवता की विधिपूर्वक पूजा करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आइए आपको इस लेख में बताएंगे कि नाग पंचमी पर नाग देवता (Nag Panchami Puja Vidhi) की पूजा कैसे करनी चाहिए ? नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024) हिंदू धर्म में नाग पंचमी के त्योहार का खास महत्व है। नाग पंचमी सावन के महीने में मनाई जाती है। सावन का महीना भगवान शिव और नाग की पूजा के लिए सबसे उत्तम महीना माना गया है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता को दूध चढ़ाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन नाग देवता की विधिवत पूजा की जाती है। Nag Panchami 2024 ऐसा माना जाता है कि नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से नाग दोष से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही जो भी इस दिन नाग देवता की पूजा करता है, उसकी मृत्यु कभी सांप के काटने से नहीं होती है। हर साल नाग पंचमी सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। आइए जानते हैं साल 2024 में नाग पंचमी कब मनाई जाएगी। Nag Panchami 2024 Date (नाग पंचमी डेट 2024) नाग पंचमी का पर्व हर साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की Nag Panchami 2024 पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। साल 2024 में नाग पंचमी का त्योहार 9 अगस्त 2024 शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा। इस दिन नाग देवता की पूजा करने से सारी समस्याओं से मुक्ति मिलती है। नाग पंचमी पूजा शुभ मुहूर्त 2024 ( Nag Panchami Puja Shubh Muhurat 2024) नाग पंचमी साल 2024 में 9 अगस्त की सुबह 5 बजे से लेकर 8 बजे तक रहेगा। इस दिन पूजा के लिए 3 घंटे की अवधि मिलेगी। इस समय में पूजा करना शुभ फलदायी होगा। नाग पंचमी पूजा विधि ( Nag Panchami Puja Vidhi) Nag Panchami 2024 नाग पंचमी के दिन सुबह उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। अब स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। सूर्य देव को जल अर्पित कर मंदिर की सफाई करें। गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें। एक चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर नाग देवता की प्रतिमा या मिट्टी से बने हुए सर्प की मूर्ति विराजमान करें। नाग देवता को फूल, चावल, रोली और हल्दी अर्पित करें। इसके बाद दूध अर्पित करें। देशी घी का दीपक जलाकर आरती कर मंत्रों का जप करें। नाग पंचमी व्रत कथा का पाठ जरूर करना चाहिए। अंत में नाग देवता से जीवन में सुख-शांति की कामना करें। नाग पंचमी मंत्र (Nag Panchami Mantra) ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।। सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले। ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।। ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:। ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।। अनंत वासुकी शेषं पद्मनाभं च मंगलम्शं खपालं ध्रतराष्ट्रकंच तक्षकं कालियं तथा।। ॐ हँ जू स: श्री नागदेवतायेनमोनम:।। ॐ श्री भीलट देवाय नम:।। नाग पंचमी महत्व ( Nag Panchami Importance) Nag Panchami 2024:हिंदू मान्यता के अनुसार प्राचीन काल से ही सांपों को देवता के रूप में पूजा जाता रहा है। इसलिए नाग पंचमी के दिन नाग पूजा का बहुत महत्व है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग नाग पंचमी के दिन नाग की पूजा करते हैं, वे सांप के काटने से सुरक्षित रहते हैं। मान्यता है कि इस दिन नाग को दूध से स्नान कराकर उसकी पूजा की जा सकती है और नाग को दूध पिलाने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन घर के प्रवेश द्वार पर सांप की मूर्ति बनाने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि यह घर को सांप के प्रकोप से बचाता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Hariyali Teej 2024:रियाली तीज पर सुहागिन महिलाएं क्या करें और क्या नहीं

Hariyali Teej अगर आप हरियाली तीज का व्रत रख रही हैं तो इस दिन इन गलतियों को करने से पूरी तरह बचें। वरना आपकी पूजा और व्रत दोनों अधूरी रह सकती है। तो आइए जानते हैं कि हरियाली तीज के दिन किन कामों को नहीं करना चाहिए। Hariyali Teej 2024: आज सुहागिनों के सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक हरियाली तीज मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इस व्रत को करने से अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है। Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज के दिन भगवान शिव शंकर और माता पार्वती की पूजा का विधान है। हरियाली तीज हर सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। वहीं व्रत करने वाली महिलाओं को हरियाली तीज के दिन इन कामों को करने से बचना चाहिए वरना आपकी पूजा खंडित हो सकती है। तो आइए जानते हैं कि हरियाली तीज के दिन क्या नहीं करना चाहिए Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाएं भूलकर न करें ये काम Hariyali Teej 2024:सुहागिन महिलाएं हरियाली तीज पर क्या करें: हरियाली तीज के दिन महिलाओं के बीच झूला झूलने का भी प्रचलन है। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। इस दिन खुद से बड़ी सुहागिन महिलाओं के पैर छूकर उनका आशीर्वाद जरूर लेना चाहिए। करें 16 श्रृंगार हरियाली तीज पर 16 श्रृंगार करने का विशेष महत्व है। इसलिए इस दिन सुहागिन महिलाओं को सिंदूर, मंगलसूत्र, चूड़ियों आदि जैसे 16 श्रृंगार को अपने श्रृंगार का हिस्सा बनाना चाहिए। इस दिन महिलाओं के बीच मेंहदी लगाने का भी प्रचलन हैं। निर्जला व्रत का करें संकल्प हरियाली तीज के दिन सुहागिन महिलाओं को सुबह सुर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करने के बाद माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। इस दिन पति-पत्नी का साथ मिलकर शिव-पार्वती की पूजा करना शुभ माना गया है। इसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प करें। हरियाली तीज का महत्व (Hariyali Teej Importance) हरियाली तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। माना जाता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए माता पार्वती के व्रत की शुरुआत हरियाली तीज से ही हुई थी। इस दिन महिलाएं 16 श्रृंगार करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करती हैं। साथ ही इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनने का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाओं के बीच झूला झूलने का भी प्रचलन है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Hariyali Teej 2024: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज,तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

हरियाली तीज, सावन की तीज, तीज पूजा, तीज मुहूर्त, सावन का महीना Hariyali Teej 2024: हिंदू धर्म में हरियाली तीज व्रत का विशेष महत्व है. हरियाली तीज का व्रत पति के दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि लाने के लिए रखा जाता है. इस व्रत में कठिन नियमों का पालन करना होता है. रियाली तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, विशेषकर महिलाओं के लिए। यह त्योहार सावन के महीने में मनाया जाता है और प्रकृति, सौंदर्य और महिलाओं के जीवन को समर्पित है। Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का उत्सव हर साल श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है. वहीं हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है. इस बार Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जाएगी. इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बन रही है, क्योंकि तृतीया ति​थि 6 और 7 अगस्त दोनों दिन है. Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज कब है? हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस बार श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि 6 अगस्त को 07 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 7 अगस्त को रात 10 बजकर 05 मिनट तक मान्य होगी. 6 अगस्त को तृतीया तिथि रात के समय में लग रही है, इस वजह से उस दिन तीज का व्रत नहीं रखा जाएगा. श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि की उदयातिथि 6 अगस्त को न होकर 7 अगस्त को है. उदयातिथि की गणना सूर्योदय से की जाती है. श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि में सूर्योदय 7 अगस्त को 05 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है, इसलिए हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जाएगी. इस आधार पर हरियाली तीज का व्रत 6 अगस्त को न रखकर 7 अगस्त के दिन रखा जाएगा. Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज पर 3 शुभ योग पंचांग के अनुसार हरियाली तीज पर 3 शुभ योग बनेंगे. हरियाली तीज के दिन परिघ योग, शिव योग और रवि योग का निर्माण होगा. हरियाली तीज व्रत के दिन रवि योग रात 8 बजकर 30 मिनट से लेकर अगले दिन 8 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक है. वहीं परिघ योग सुबह से लेकर सुबह 11 बजकर 42 मिनट तक है और उसके बाद शिव योग लगेगा. शिव योग अगले दिन पारण तक रहेगा. हरियाली तीज का महत्व पूजा विधि माता पार्वती को अर्पित करें शृंगार हरियाली तीज का पर्व माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। ऐसे में जो महिला ये व्रत कर रही है, उसे मां पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इससे मां पार्वती अति प्रसन्न होती हैं और साधक को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। राहुकाल में भूलकर भी नहीं करें हरियाली तीज की पूजा ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना जाता है. इसलिए राहुकाल के दौरान यज्ञ, पूजा, पाठ आदि नहीं करते हैं, क्योंकि यह फलित नहीं होते हैं. इसलिए हरियाली तीज के दिन राहुकाल में पूजा नहीं करनी चाहिए. हरियाली तीज पर राहुकाल दोपहर में 02 बजकर 06 मिनट से 03 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. हरियाली तीज में इन बातों का रखें ध्यान हरियाली तीज में व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व सरगी खाते हैं. फिर सूर्योदय के साथ ही निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाएगा. सरगी के समय ही ठीक से पानी पी लेना चाहिए. यदि आपकी सेहत ठीक नहीं है तो आपको निर्जला व्रत करने से बचना चाहिए. क्योकि यह आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है. हरियाली तीज व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के समय माता गौरी को श्रृंगार की सामग्री जरूर अर्पित करें. हरियाली तीज पर क्या नहीं करना चाहिए? हरियाली तीज की रात को व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं को रात को सोना नहीं चाहिए, बल्कि रात भर जागरण करना चाहिए. Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज के दिन महिलाओं को बिल्कुल भी गुस्सा नहीं करना चाहिए. मन को शांत रखकर मां पार्वती को पूजा-अर्चना करना चाहिए. हरियाली तीज के दिन अपने पार्टनर से किसी भी प्रकार का विवाद या फिर झूठ नहीं बोलना चाहिए.  

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Sawan Shivratri 2024:अगस्त में कब है सावन शिवरात्रि? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री से विधि तक सब कुछ

Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि का त्योहार सावन या सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। सावन शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा के लिए दूसरा सबसे बड़ा दिन है। सावन का हर दिन शिव पूजा के लिए शुभ होता है, लेकिन सावन की शिवरात्रि का दिन सबसे अच्छा दिन माना जाता है। इस साल सावन शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेगा।  इस दिन लोग व्रत रखते हैं और शिव-पार्वती की पूजा करते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार मासिक शिवरात्रि 2 अगस्त को मनाई जाएगी।  ऐसे में इस पवित्र दिन पर भग्वान शिव की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करें और लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करें। Sawan Shivratri सावन शिवरात्रि की तिथि  हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 अगस्त को दोपहर 3:26 बजे शुरू हो रही है। यह 3 अगस्त को अपराह्न 3:50 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में सावन शिवरात्रि 2 अगस्त 2024 को होगी और इसी दिन शिवरात्रि की पूजा और व्रत किया जाएगा।  सावन शिवरात्रि पूजा मुहूर्त रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – सायं  07:11 – रात्रि 09:49 तक (2 अगस्त)रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – रात्रि  09:49 – रात्रि 12:27 तक (3 अगस्त)रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – रात्रि 12:27 – प्रातः 03:06 तक (3 अगस्त)रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – प्रातः 03:06 – प्रातः  05:44 तक (3 अगस्त)निशिता काल मुहूर्त –         रात्रि  12:06 – रात्रि 12:49 तक (3 अगस्त)शिवरात्रि पारण समय – प्रातः 05:44 – दोपहर 03:49 तक (3 अगस्त) Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि पर पूजन सामग्री सावन शिवरात्रि के दिन आप नीचे दी गई पूजन सामग्री से पूजा करें।  सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ को लगाएं ये भोग Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि पर पूजन के समय आप भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को खीर, हलवा, ठंडाई, मालपुआ, लस्सी, सफेद बर्फी, सूखा मावा, आदि का भोग लगा सकते हैं।  सावन शिवरात्रि पूजा विधि  सावन शिवरात्रि का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन महीने की Sawan Shivratri शिवरात्रि को बहुत खास माना जाता है क्योंकि शिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का एक विशेष त्योहार है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व है। शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। ऐसे में मनचाहा वर पाने और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस रात महादेव की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि सावन शिवरात्रि का व्रत और भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से अपार कृपा मिलती है। इसके अलावा आप कठिन और असंभव कार्यों को भी पूरा कर सकते हैं। सावन शिवरात्रि की शाम जागरण करने से विशेष लाभ होता है। सावन शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में विशेष फलदायी होती है। (रात में होने वाली पूजा को निशिदा पूजा कहा जाता है।) (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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August pradosh vrat 2024: अगस्त 2024 में प्रदोष व्रत: तिथियां और महत्व

August pradosh vrat 2024 प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। अगस्त 2024 में प्रदोष व्रत की सही तिथियों के लिए आपको किसी पंचांग या स्थानीय पंडित से संपर्क करना चाहिए। August pradosh vrat 2024: प्रदोष का व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। ये व्रत हर मास में दो बार रखा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं अगस्त के महीने में प्रदोष व्रत कब- कब रखा जाएगा इसके महत्व के बारे में। August pradosh vrat 2024: प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित व्रत होता है। ये व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। August pradosh vrat 2024 प्रदोष व्रत के भगवान भोलेनाथ की प्रदोष काल में पूजा की जाती है। प्रदोष का व्रत रखने से और भगवान शिव की पूजा करने से साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है और हर मनोकामना की भी पूर्ति होती है। हर मास में दो प्रदोष व्रत रखा जाता है। ऐसे ही सावन के महीने में भी दो प्रदोष व्रत रखे जाएंगे। सावन मास के प्रदोष व्रत का शास्त्रों में खास महत्व है। आइए जानते हैं अगस्त के महीने में कब- कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत। यहां जानिए सही तिथि और महत्व। August pradosh vrat 2024 (अगस्त प्रदोष व्रत 2024) अगस्त मास का पहला प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल सावन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 01 अगस्त 2024 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 2 अगस्त 2024 को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में अगस्त महीने का पहला प्रदोष व्रत 1 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। August pradosh vrat 2024 पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 2024 पंचांग के अनुसार सावन मास का पहला प्रदोष व्रत 1 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 12 मिनट से 09 बजकर 18 मिनट तक रहने वाला है। अगस्त महीने का दूसरा प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार सावन महीने की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 17 अगस्त को सुबह 08 बजकर 05 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 18 अगस्त को प्रातः 05 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में दूसरा प्रदोष व्रत 17 अगस्त को शनिवार के दिन रखा जाएगा। दूसरे प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 2024 अगस्त महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 17 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 58 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करने से उत्तम फल की प्राप्ति होगी। प्रदोष व्रत का महत्व प्रदोष व्रत August pradosh vrat 2024 भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष काल को शिव का प्रिय काल माना जाता है और इस समय भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत की पूजा विधि प्रदोष व्रत की पूजा विधि काफी सरल होती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा विधि से पूजा की जाती है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, दूध और जल चढ़ाया जाता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Krishna Janmashtami 2024: क्या हैं कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम और पूजा विधि ?

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम (Krishna Janmashtami Vrat Niyam 2024) भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का जन्म हुआ था। इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। भक्तजन इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं, और उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। जन्माष्टमी (Janmashtami) पर भगवान कृष्ण (Shri Krishna) के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। उनके जन्म का समय मध्यरात्रि माना जाता है, इसलिए देर रात तक भजन-कीर्तन और आरती होती है। भक्त इस पावन अवसर पर कान्हा के श्रृंगार में तल्लीन हो जाते हैं। Krishna Janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान कृष्ण (Shri Krishna) प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। लेकिन व्रत रखते समय कुछ नियमों का पालन करना अति आवश्यक है। इसके साथ ही, तुलसी का भी इस दिन विशेष महत्व है। Krishna Janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जश्न मनाता है। यह त्योहार आमतौर पर भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। ह त्योहार हर साल भाद्रपद माह की Krishna Janmashtami कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, 26 अगस्त को रात 3:39 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी जो अगले दिन 27 अगस्त को रात 2:19 बजे समाप्त होगी। हालांकि, भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए उनकी पूजा 26 अगस्त की रात को की जाएगी। साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है? जन्माष्टमी व्रत के नियम जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भक्त विभिन्न नियमों का पालन करते हुए भगवान की पूजा करते हैं। जन्माष्टमी व्रत के कुछ प्रमुख नियम दिए गए हैं यह व्रत भक्तों के लिए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपने भक्ति व्यक्त करने और उनकी आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर होता है। जन्माष्टमी व्रत विधि जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन पर मनाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। व्रत का संकल्प व्रत के नियम पूजा विधि व्रत पारण जन्माष्टमी का महत्व जन्माष्टमी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण को धर्म, कर्म और योग का प्रतीक माना जाता है। उनकी लीलाओं से हमें जीवन जीने का सही मार्ग दिखता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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When is Janmashtami 2024: साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है?

When is Janmashtami साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है? When is Janmashtami 2024 कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। When is Janmashtami 2024: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को When is Janmashtami 2024 जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, द्वापर युग में इसी दिन भगवान विष्णु ने भगवान कृष्ण का अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को मथुरा में हुआ था। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के बालस्वरूप की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और उपवास रखते हैं। जानें साल 2024 में कब मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी और आने वाले पांच सालों में जन्माष्टमी कब है- कार्तिक मास को क्यों कहते हैं दामोदर माह ? साल 2024 में जन्माष्टमी कब है- साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी।  When is Janmashtami 2024 साल 2024 में अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र कब से कब तक- अष्टमी तिथि 26 अगस्त को सुबह 03 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगी और 27 अगस्त को सुबह 02 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त को शाम 03 बजकर 55 मिनट पर प्रारंभ होगा और 27 अगस्त को शाम 03 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगा। निशिथ काल पूजा का समय- 26 अगस्त को रात 12 बजे से लेकर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।व्रत पारण का समय- 27 अगस्त को सुबह 05 बजकर 56 मिनट के बाद होगा।दही हांडी- 27 अगस्त 2024, मंगलवार को होगा। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Sapne Me Chori Dekhna: सपने में चोरी होते देखना,  जानें क्‍या हो सकता है Real Life में

Sapne Me Chori Dekhna सपने में चोरी होना एक आम सपना है, जिसके कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं। यह सपना आपके जागृत जीवन में चल रही भावनाओं, चिंताओं या अनुभवों का प्रतिबिंब हो सकता है। हर इंसान सपने देखता है, कुछ लोग एक रात में कई सपने देख लेते हैं तो किसी को कम सपने आते हैं. कुछ सपने देखने के बाद स्मृति से उतर जाते हैं, वहीं कुछ खतरनाक सपने आपको सोते से जगा कर नींद उड़ा देते हैं. स्वप्न शास्त्र की मानें तो हर सपना जीवन के साथ किसी न किसी रूप से जुड़ा होता है. यहां हम चोरी के ऐसे ही सपनों की बात करेंगे, Sapne Me Chori Dekhna कि आपकी कोई कीमती चीज चोर उठा ले गया, या पड़ोस में डकैती होते देखा, या आप स्वयं चोरी करके भाग रहे हैं अथवा चोरी के आरोप में पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं. आइये जानें कुछ ऐसे ही सपने देखने का तात्पर्य क्या हो सकता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में चोरी होना अक्सर एक अशुभ संकेत माना जाता है। यह संकेत दे सकता है कि: Sapne Me Chori Dekhna आपका पैसा चोरी होने का सपना आप सपना देखते हैं कि आपका पैसों से भरा पर्स चोरी हो गया है! अचानक नींद टूटती है तो आप राहत महसूस करते हैं कि ये तो सपना था, और आपका कुछ भी चोरी नहीं हुआ है. लेकिन स्वप्न शास्त्र की थिसिस कहती है कि इस तरह का सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका वित्तीय नुकसान हो सकता है. इसलिए आपको फिलहाल अपना हर निर्णय काफी सोच-समझ कर लें.  Sapne Me Chori Dekhna सेल फोन चोरी होने का सपना आप देखते हैं कि आपका कीमती मोबाइल चोरी हो गया. इसका एक आशय यह भी हो सकता है कि आप जो भी कह रहे हैं, उस पर किसी और का नियंत्रण है. यह भी संभव है कि कोई आपकी योजना को बिगाड़ने के लिए आपके संचार व्यवस्था पर नजर रख रहा है, ताकि सामने वाली पार्टी पर आपकी गलत इमेज बने, Sapne Me Chori Dekhna और उसका बुरा असर आपके व्यवसाय पर पड़े. एक आशय यह भी हो सकता है कि कोई आपके प्रोफेशन में बिना आपकी सहमति के प्रवेश करने की फिराक में है. ऐसे में हर व्यावसायिक मसले पर सब पर शक की नजर रखना ही समझदारी है. बैंक डकैती का सपना सपने में किसी बैंक पर डकैती पड़ने का सपना देखना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको हर चीज एक तय समय पर मिलती है, अलबत्ता जब आप कड़ी मेहनत कर रहे होते हैं, Sapne Me Chori Dekhna तब आपको उसका उचित प्रतिफल नहीं मिलता. लेकिन इस तरह के सपने देखने के बाद आप निश्चिंत हो सकते हैं कि आज नहीं तो कल आपको आपकी मेहनत का पूरा फल अवश्य मिलेगा. आप धीरज के साथ उचित समय का इंतजार करें. आप अपना काम उसी ईमानदारी के साथ करते रहें. सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखना: शुभ या अशुभ ? गहने चोरी होने के सपने आप सपने में देखते हैं कि आपके घर से कीमती आभूषण चोरी हो गई है, इस सपने का यह संकेत भी हो सकता है कि आपको ऐसे लोगों पर नजर रखने की आवश्यकता है, जो आपको परेशान करने के मौके-दर-मौके तलाश रहा है. क्योंकि आप अपने करियर के शिखर पर चल रहे हैं, जो कुछ लोगों को पच नहीं रहा है. इसमें आपके रिश्तेदार भी हो सकते हैं, पड़ोसी अथवा दोस्त भी हो सकते हैं. जूता चोरी होने का सपना आप सपने में देखते हैं कि ट्रेन में सफर के दौरान या मंदिर में भगवान का दर्शन करने जाने के बाद आपके जूते चोरी हो गये. ये सपने आपकी सेहत से जुड़े हो सकते हैं. अगर आप भागदौड़ वाले कार्य करते हैं अथवा टेंशन वाला काम करते हैं, तो आप कुछ दिनों के लिए रेस्ट करें. दो-तीन दिन बाद अपना कार्य शुरु करें. सपने में चोरी करते हुए पकड़े जाने का आशय! खुद को चोरी करते हुए देखना और फिर रंगे हाथों पकड़े जाने का सपना शुभ संकेत नहीं है. यह सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि निकट भविष्य में कुछ गलत लोगों से आप दोस्ती करने जा रहे हैं, ये दोस्त आपके लिए आये दिन संकट का सबब बन सकते हैं. उनकी संगत में आप गलत रास्ते पर जा सकते हैं. इसलिए सोच-परख कर ही नये दोस्त बनाएं. सपनों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सपने हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति होते हैं। सपने में चोरी होना, हमारे मन में चल रही चिंताओं और डर का प्रतिबिंब हो सकता है। क्या करें: ध्यान रखें: सपनों का अर्थ व्यक्ति से व्यक्ति अलग-अलग होता है। इसलिए किसी एक सपने का अर्थ सभी के लिए समान नहीं होता। अगर आपको लगता है कि आपके सपने आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह ले सकते हैं। सपने का अर्थ किस पर निर्भर करता है: सपने का अर्थ पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप सपने में क्या चोरी होते देख रहे हैं। उदाहरण के लिए: पैसे चोरी होना: आर्थिक नुकसान का संकेत गहने चोरी होना: किसी करीबी व्यक्ति से धोखा मिलने का संकेत फोन चोरी होना: किसी महत्वपूर्ण सूचना के लीक होने का संकेत घर से सामान चोरी होना: असुरक्षा की भावना (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Vastu 2024: घर पर रखें वास्तु की ये 6 चीजें, मां लक्ष्मी की बरसेगी अनुकंपा, जीवन भर रहेगी धन-संपदा बरकरार

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में कुछ विशेष चीजें रखने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं उन 6 चीजों के बारे में जो आपके घर में रखने से जीवन भर धन-संपदा बनी रह सकती है। मां लक्ष्मी: साल 2024 आ चुका है और आज तीसरा दिन है आप सब भी यही सोच रहे होंगे बीते साल जो हुआ सो हुआ अब नया साल 2024 सुख-शांति से बीते और पूरा वर्ष धन-संपदा से संपन्न रहे। ऐसे में आप यह सोच रहे होंगे की धन-संपदा के लिए मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कौन सा उपाय करें जिससे यह वर्ष आर्थिक पक्ष के तौर पर मजबूत रहे। फिलहाल आपको इसके लिए वास्तु से जुड़ी कुछ चीजों को घर लाकर रखना होगा और यदि ये चीजें घर में पहले से मोजूद हैं तो इनकी सही दिशा सुनिश्चित कर इनको वास्तु के हिसाब से घर में रखें। ऐसा करने से आपके घर में धन-संपदा तो बनी ही रहेगी इसी के साथ साल 2024 तक आपके पास पैसों की कमी नहीं रहेगी। तो ध्यान से इन 6 चीजों के बारे में जरूर जान लें और इन्हें अपने घर में वास्तु के अनुसार व्यवस्थित कर लें। मां लक्ष्मी:कुबेर यंत्र या श्री यंत्र आप अपने घर में मां लक्ष्मी की स्थापना पूर्ण विधि वाधान से कर लें अगर मां लक्ष्मी पहले से आपके घर में विराजमान हैं। तो उनकी प्रतिमा के सम्मुख उनके प्रिय श्री यंत्र को लाल कपड़े के नीचे अवश्य रखें। आप चाहें तो अपने घर में कुबेर यंत्र की भी स्थापना कर सकते हैं। लेकिन एक बात का ध्यान रखें इन यंत्रों को किसी योग्य पंडित से सिद्ध करवा कर ही इनकी स्थापना करें। तभी यह अपना प्रभाव दिखाएंगे और आपके घर का वातावरण तो सकारात्मक होगा ही इसी के साथ आपके घर धन का आगमन साल भर होता रहेगा। इन यंत्रों की रोज पूजा करने से आपके सौभाग्य में वृद्धि होगी और हर कार्य में मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से सफलता भी मिलेगी। क्या है सनातन धर्म,कैसे प्रचलन में आया Hinduधर्म नाम, जानिए सनातन का सही अर्थ मां लक्ष्मी :चांदी का बना हाथी साल 2024 में आप अपने घर में चांदी की धातु से बना हाथी लाकर रख सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार चांदी का हाथी अपनी सूंढ़ उठाए हुए वाला ही रखना चाहिए। यह हाथी घर की प्रसिद्धि में चार चांद लगाता है। ऊंची उठी सूंढ़ के कारण यह अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाता है और इसके चलते समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि आप चांदी से बने हाथी को अपने घर में लाकर रखते हैं तो यह आपके रोजगार में आपको लाभ दिलाएगा और यह धन को भी आकर्षित करता है। मिट्टी वाला पानी का घड़ा वास्तु के अनुसार पानी का घड़ा या सुराही को धन के लिहाज से बहुत शुभ माना जाता है। यदि आप इसे घर लाकर इसमें पानी भर के उत्तर दिशा की ओर रखते हैं तो यह आपकी सभी आर्थिक परेशानियों को धीरे-धीरे समाप्त कर देगा। क्योंकि उत्तर दिशा देवताओं की मानी जाती है और जिस घर से देवता प्रसन्न होते हैं वहां मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सदैव के लिए बरकरार रहती है। धातु का बना हुआ कछुआ पौराणिक कथा के अनुसार कछुआ एक प्रकार से भगवान विष्णु का प्रतिनिधित्व करता है और जहां श्री हरि की कृपा रहती है वहां लक्ष्मी जी स्वयं निवास करती हैं। ऐसे में धन प्राप्ति के लिए साल 2024 में आप अपने घर में स्फटिक, चांदी या तांबे की धातु से बना कछुआ अपने घर लाकर रख सकते हैं। वास्तु के अनुसार जिस घर में इन धातुओं से बना कछुआ रखा होता है वहां कभी भी धन की हानी नहीं होती है और रुपयों-पैसों की वर्षा दिन रात होती रहती है। माना जाता है यह कछुआ धन को चुंबक की तरह से खेंचता है और इसे रखने की सही दिशा उत्तर है। मोर पंख आप अपने घर में मोर पंख का गुच्छा लाकर रख सकते हैं। इसे घर में रखने से भगवान श्री कृष्ण के साथ ही साथ मां लक्ष्मी की भी कृपा आपको मिलेगी। माना जाता है की भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख अति प्रिय था। नए साल में यदि आप सुख-समृद्धि चाहते हैं तो घर में मौर पंख लाकर रख सकते हैं। इसी के साथ बच्चों के पढ़ाई वाले कमरे में इसे रखने से उन पर मां सरस्वती की कृपा बनी रहेगी। क्योंकि मोर को शास्त्रों में विद्या की देवी का वाहन बताया गया है। इसी के साथ यह धनिष्ठा नक्षत्र को भी संबोधित करता है। ज्योतिष शास्त्र में धनिष्ठा नक्षत्र को अपार धन-दौलत का नक्षत्र बताया गया है। ऐसे में मौर पंख रखना धन के लिहाज से बहुत लाभदायक रहेगा। दक्षिणावर्ती शंख शंख कई प्रकार के होते हैं लेकिन यदि आप साल 2024 में चाहते हैं कि मां लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहें तो एक दक्षिणावर्ती शंख अपने घर में लाकर रख दें। माना जाता है यह शंख धन की देवी मां लक्ष्मी का सूचक होता है और जिस जगह यह रहता है वहां धन की कभी भी कमी नहीं रहती है। परिस्थिति कितनी भी खराब क्यों न हो कहीं न कहीं से धन का आगमन होता रहता है। कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें: (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Shivling:घर में शिवलिंग स्थापना,कुछ जरूरी नियम ?

हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है और त्रिदेवों में इन्हें भी सर्वोच्च देवता की उपाधि प्राप्त है। यदि आप अपने घर में महादेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और घर में शिवलिंग स्थापित कर रहे हैं। तो इससे जुड़े कुछ खास नियम आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। Shivling: महादेव की कृपा के बिना जीवन अधूरा है ऐसे में उनके भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके निमित्त कुछ न कुछ पूजा अनुष्ठान करते ही रहते हैं। वहीं शिवरात्रि,  प्रदोष व्रत और सोमवार का दिन ये सब शिव कृपा पाने के लिए हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख दिन बताए गए हैं। माना जाता है कि इन दिनों में यदि आप भोलेबाबा की सच्चे मन से आराधना कर लें तो वह शीघ्र अपनी कृपा बरसा देते हैं। 11 प्रकार के अभिषेक से करें शिवजी को प्रसन्न, हर मनोकामना होगी पूर्ण अधिकतर शिव भक्त उनके मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं। वहीं कुछ ऐसे भक्त भी हैं जो अपने घर में शिवलिंग Shivling की स्थापना करते हैं और नित्य शिव पूजन भी करते हैं। अगर आप भी अपने घर में शिवलिंग की स्थापना करना चाहते हैं तो आज हम आपको इससे जुड़े कुछ जरूरी नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। शिवलिंग की स्थापना घर में करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता। यह नियम आज आप भी जान लीजिए। Shivling शिवलिंग स्थापना का शुभ मुहूर्त Shivling शिवलिंग स्थापना की विधि Shivling शिवलिंग की पूजा Shivling शिवलिंग स्थापना के कुछ महत्वपूर्ण नियम घर में शिवलिंग रखने के नियम 

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