SAWAN 2024:सावन मास के पहले दिन खरीदें यह 10 सामग्री, अच्छे दिनों की होगी शुरुआत

SAWAN 2024: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की पूजा और आध्यात्मिकता के लिए समर्पित होता है। इस महीने का पहला दिन, जिसे सावन मास की पहली तारीख कहा जाता है, विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उपाय आरंभ कर देंगे। हम लाए हैं बहुत ही सरल और सटीक उपाय। SAWAN 2024 सावन मास के पहले दिन भगवान शिव की प्रिय सामग्री घर में लाने से शुभता में वृद्धि होती है।   1. गंगाजल: गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह आपके घर को शुद्ध करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। 2. शिवलिंग: भगवान शिव का प्रतीक, शिवलिंग पूजा के लिए आवश्यक है। 3. त्रिशूल: भगवान शिव का त्रिशूल बुरी आत्माओं से रक्षा करता है और सौभाग्य लाता है। त्रिशूल शिव के हाथों में हमेशा होता है। यह 3 देव और 3 लोक का प्रतीक है।  4. रुद्राक्ष: रुद्राक्ष को भगवान शिव का आँसू माना जाता है। इसे पहनने से शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। 5. बेल पत्र: भगवान शिव को बेल पत्र बहुत प्रिय है। 6. धूप: धूप जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 7. कपूर: कपूर आरती और पूजा में उपयोग किया जाता है। यह मन को शांत करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। 8. घी: घी का दीपक जलाने से धन और समृद्धि प्राप्त होती है। 9. नारियल: नारियल भगवान विष्णु और गणेश जी को प्रिय है। 10. फल: भगवान शिव को फल अर्पित करना शुभ होता है। राखी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे की कहानी क्या है? इन 10 सामग्री के अलावा, आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्य धार्मिक सामग्री भी खरीद सकते हैं। SAWAN 2024 सावन मास की पहली तारीख को इन सामग्री को खरीदकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह भी ध्यान रखें:

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Raksha Bandhan:राखी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे की कहानी क्या है?

रक्षाबंधन हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन धूम-धाम से मनाया जाता है, जो इस बार 26 अगस्त को होगा। हर साल बहन अपने भाई की कलाई में विधि अनुसार राखी बांधती है और अपनी रक्षा का वचन मांगती है। रक्षा करने और करवाने के लिए बांधा जाने वाला पवित्र धागा Raksha Bandhan रक्षा बंधन कहलाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की रक्षा के लिए उनके कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती हैं और भाई बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा का वचन देते हैं लेकिन क्या आप जानते है कि रक्षाबंधन क्यों बनाया जाता है? चलिए जानते हैं रक्षाबंधन मनाने के पीछे क्या हैं कारण। Raksha Bandhan पहले तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधी जाती थी सदियों से चली आ रही रीति के मुताबिक, बहन भाई को राखी बांधने से पहले प्रकृति की सुरक्षा के लिए तुलसी और नीम के पेड़ को राखी बांधती है जिसे वृक्ष-रक्षाबंधन भी कहा जाता है। हालांकि आजकल इसका प्रचलन नही है। राखी सिर्फ बहन अपने भाई को ही नहीं बल्कि वो किसी खास दोस्त को भी राखी बांधती है जिसे वो अपना भाई जैसा समझती है और तो और रक्षाबंधन के दिन पत्नी अपने पति को और शिष्य अपने गुरु को भी राखी बांधते है। Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त Raksha Bandhan भगवान इंद्र को रक्षाबंधन से मिली थी जीत भविष्यपुराण में ऐसा कहा गया है कि देवाताओं और दैत्यों के बीच एक बार युद्ध छिड़ गया, बलि नाम के असुर ने भगवान इंद्र को हरा दिया और अमरावती पर अपना अधिकार जमा लिया। तब इंद्र की पत्नी सची मदद का आग्रह लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंची। भगवान विष्णु ने सची को सूती धागे से एक हाथ में पहने जाने वाला वयल बना कर दिया। भगवान विष्णु ने सची से कहा कि इसे इंद्र की कलाई में बांध देना। सची ने ऐसा ही किया, उन्होंने इंद्र की कलाई में वयल बांध दिया और सुरक्षा व सफलता की कामना की। इसके बाद भगवान इंद्र ने बलि को हरा कर अमरावती पर अपना अधिकार कर लिया। Raksha Bandhan रक्षाबंधन: भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्यौहार Raksha Bandhan रक्षाबंधन, भाई-बहन के बीच प्रेम और स्नेह का पवित्र त्यौहार, श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन, बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधकर उनके रक्षा का वचन लेती हैं और भाई बदले में अपनी बहन की रक्षा का वचन देते हैं। रक्षाबंधन मनाने के पीछे कई धार्मिक और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं: Draupadi and Krishna: महाभारत में, जब द्रौपदी को दुर्योधन और उसके भाइयों ने सभा में अपमानित किया, तब भगवान कृष्ण ने उनकी रक्षा का वचन दिया था। इस घटना के प्रतीक के रूप में, द्रौपदी ने अपनी साड़ी का एक टुकड़ा कृष्ण की कलाई पर बांध दिया था। Kunti and Indra: एक कथा के अनुसार, देवी कुंती ने अपने पुत्रों की रक्षा के लिए इंद्रदेव से रक्षाबंधन प्राप्त किया था। Yama and Yamuna: यमराज, मृत्यु के देवता, अपनी बहन यमुना से बहुत प्रेम करते थे। यमुना ने उन्हें रक्षाबंधन मनाने और भाई-बहन के प्रेम का त्यौहार मनाने के लिए राजी किया। रक्षाबंधन का महत्व: भाई-बहन का प्रेम: रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। सुरक्षा का वचन: भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देते हैं, चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी बलिदान देना पड़े। सामाजिक बंधन: रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक ही सीमित नहीं है, यह दोस्तों, गुरुओं और शिष्यों के बीच भी मनाया जाता है। बुराई पर अच्छाई की जीत: रक्षाबंधन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक भी है। रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता है: रक्षा सूत्र बांधना: इस दिन, बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र (राखी) बांधती हैं। मिठाई खिलाना: बहनें अपने भाई को मिठाई खिलाती हैं और उनसे आशीर्वाद लेती हैं। भाई द्वारा उपहार: भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। भोजन: परिवार के सदस्य एक साथ मिलकर भोजन करते हैं। निष्कर्ष: रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और बलिदान का त्यौहार है। यह एक ऐसा अवसर है जब भाई-बहन अपने रिश्ते को मजबूत करते हैं और एक दूसरे के प्रति अपना समर्थन और प्यार व्यक्त करते हैं।

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Kawad Yatra 2024: 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू, शिवजी की कृपा पाने के लिए यात्रा के दौरान अपनाएं ये नियम

सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई 2024, सोमवार के दिन से हो रही है। ऐसे में Kawad Yatra 2024 कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जिसका समापन 02 अगस्त 2024 को सावन शिवरात्रि पर होगा। सनातन परंपरा में श्रावण मास में की जाने वाली Kawad Yatra 2024 कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना लिए इस पावन यात्रा के लिए निकलते हैं। इस साल सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई 2024, सोमवार के दिन से हो रही है। ऐसे में कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जिसका समापन 02 अगस्त 2024 को सावन शिवरात्रि पर होगा। श्रावण के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है। शिव भक्त कांवड़ को बांधकर कंधों पर लटकाकर अपने मूल स्थान के शिवालय में लाते हैं और फिर यहां के शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार सबसे पहले कावड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। कहते हैं भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर धाम से गंगाजल लेकर आए थे और फिर इस गंगाजल को उन्होंने यूपी के बागपत के पास स्थित ‘पुरा महादेव’ पर चढ़ाया था। भगवान शिव को समर्पित इस कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु पवित्र गंगा जल या फिर किसी नदी विशेष के शुद्ध जल से अपने ईष्ट देव का जलाभिषेक करते हैं। शुचिता, पवित्रता और संकल्प के साथ की गई इस यात्रा से प्रसन्न होकर कल्याण के देवता भगवान शिव अपने भक्तों पर अवश्य कृपा करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन ध्यान रहे कांवड़ यात्रा के कुछ नियम भी होते हैं, जिन्हें तोड़ने पर न सिर्फ यह यात्रा अधूरी रह जाती है उसका पूर्ण फल भी नहीं मिलता। सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ? Kawad Yatra 2024:कांवड़ यात्रा के नियम

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Devshayani Ekadashi 2024: देवशयनी एकादशी व्रत जुलाई में किस दिन है? जान लें सही तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

Devshayani Ekadashi 2024: देवशयनी एकादशी के दिन जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु चार महीनों के लिए निद्रा में चले जाते हैं। इन चार महीनों की अवधि को चातुर्मास के नाम से भी जाना जाता है, यही वजह है कि चतुर्मास की शुरुआत भी देवशयनी एकादशी के दिन से ही होती है। ऐसे में देवशयनी एकादशी के दिन को भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि जुलाई के महीने में देवशयनी एकादशी किस दिन है, इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब होगा और इस एकादशी का महत्व क्या है। Devshayani Ekadashi 2024 देवशयनी एकादशी तिथि और पूजा मुहूर्त  हिंदू पचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की Devshayani Ekadashi 2024 एकादशी को देवशयनी एकादशी का पावन व्रत रखा जाता है। साल 2024 में यह तिथि 17 जुलाई को है। हालांकि एकादशी तिथि का आरंभ 16 जुलाई की रात को 8 बजकर 32 मिनट से हो जाएगा और 17 जुलाई को रात 9 बजकर 2 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। इसीलिए उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए एकादशी का व्रत 17 जुलाई को रखा जाना ही शुभ रहेगा। देवशयनी एकादशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त 5 बजकर 35 मिनट से शुरू होगा। इसके बाद सुबह 11 बजे तक आप भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा आराधना कर सकते हैं।  Kokila Vrat 2024 Date: जुलाई में कब रखा जाएगा Kokila Vrat 2024? नोट कर लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व देवशयनी एकादशी की पूजा विधि: देवशयनी एकादशी पर क्या करें? देवशयनी एकादशी पर क्या न करें? देवशयनी एकादशी से जुड़ी कुछ मान्यताएं: देवशयनी एकादशी के व्रत में क्या खाएं: देवशयनी एकादशी के व्रत में क्या न खाएं: (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sapne Me Bhagwan :सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ?

सपने में भगवान को देखना एक अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक अनुभव माना जाता है। हिंदू धर्म और स्वप्न शास्त्र में इसकी अनेक व्याख्याएं हैं, जो सपने के विवरण और आपके जागृत जीवन की परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। सपने में भगवान (Sapne me Bhagwan): सपने में आपने क्या देखा इसकी बात करे तो हर इंसान को कोइ न कोइ सपना अवश्य आता है। सपने अच्छे और बुरे दोनों तरह के होते है अच्छे सपने हमारे जीवन में अच्छा और शुभ संकेत लेके आता है और भूरा सपना अशुभ संकेत देता है। सपने हमारे भविष्य से जुड़े हुए होते है उसका भी हमारे शास्त्रों में अलग महत्व बताया गया है। स्वप्न शास्त्र में कहा गया है की हर सपने के पीछे उनका एक रहस्य छुपा होता है और वो इंसान को आने वाले दिनों में उसके साथ क्या होगा उनके बारे में सूचित करता है। सपने में बिल्ली दिखना: स्वप्न शास्त्र के अनुसार अर्थ और शुभ-अशुभ संकेत सपने में देवी देवताओ का आना बहोत ही शुभ सपना होता है वो हमे सपने में उनका आर्शीवाद देने और कोई खास संकेत देने के लिए आते है। सपने में भगवान को देखना (Sapne mein bhagwan ko dekhna) इंसान के लिए लाभदायी साबित हो सकता है। सपने में भगवान हमे बताते है की आगे भविष्य में हमारे साथ क्या क्या होने वाला है और हमे क्या करना चाहिए। यह सपना आपको सच्चे मार्ग पर लेके जायेगा और भगवान आपकी मदद करेंगे। Sapne Me Bhagwan सपने में भगवान देखने के कुछ संभावित अर्थ: Sapne Me Bhagwan सपने में भगवान को देखने के कुछ विशिष्ट अर्थ: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि: सपने में भगवान की पूजा करना – Sapne Me Bhagwan Ki Pooja Karna इंसान रोज सुबह जल्दी उठकर भगवान की पूजा अवश्य करनी चाहिए क्युकी ऐसा करने से हमारा मन शांत रहता है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। लेकिन सपने में भगवान की पूजा करना (Sapne me bhagwan ki pooja karna) मतलब आपके मन में चल रही उथल पुथल को जल्द ही शांति मिल जाएगी। अगर इंसान किसी बात को लेकर विचारो में उलझा हुवा है तो जल्द ही उसे कोई सुझाव मिल जायेगा और उसका मन शांत हो जायेगा। सपने में भगवान आपको संकेत देते है जल्द ही उसे अपनी परेशानी का हल मिल जायेगा। भगवान की पूजा इंसान के जीवन में बहोत लाभ होते है अगर हमारा मन अच्छा और सच्चा है तो भगवान उस इंसान की सारी परेशानी दूर कर देते है। इस लिए रोज भगवान की पूजा करने के बाद ही हमे हमारे दिन की शरुआत करनी चाहिए जिससे दिन अच्छा जाये। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sapne Me Billi Dekhna: सपने में बिल्‍ली दिखना होता है बहुत शुभ, मिलता है ढेर सारा पैसा

सपने में बिल्ली दिखना: स्वप्न शास्त्र के अनुसार अर्थ और शुभ-अशुभ संकेत सपनों की दुनिया रहस्यों से भरी होती है। इन सपनों में अक्सर कुछ ऐसे भी दृश्य दिखाई देते हैं जिनका हमारे जीवन से गहरा संबंध होता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में दिखने वाली हर चीज का कोई न कोई अर्थ होता है। उसी प्रकार, सपने में बिल्ली दिखना भी शुभ और अशुभ दोनों तरह के संकेत दे सकता है। सपने में दिखें ये 5 चीज, तो समझ लीजिए बदलने वाला है भाग्य, होगा धन लाभ सपने में बिल्ली देखने के शुभ संकेत: सपने में बिल्ली देखने के अशुभ संकेत: सपने में सफेद बिल्‍ली को देखना सपने में सफेद बिल्‍ली का आना लक्ष्‍मी आगमन का संकेत देता है। आपको अचानक कहीं से धन लाभ हो सकता है। या तो कहीं से रुका धन मिल सकता है या फिर आपकी लौटरी लग सकती है। ऐसा सपना आने पर आपको सबसे मां लक्ष्‍मी की पूजा करनी चाहिए और उन्‍हें दूध-मखाने की खीर का भोग लगाना चाहिए। मां आपसे प्रसन्‍न होंगी और आपको शीघ्र ही धन लाभ होगा। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सपनों का अर्थ हमेशा निश्चित नहीं होता है। सपने में बिल्ली देखने का अर्थ आपके जीवन की वर्तमान स्थिति, आपके विचारों और भावनाओं पर निर्भर करता है। यदि आप सपने में बिल्ली देखने के बाद परेशान या भयभीत महसूस करते हैं तो आपको किसी अनुभवी स्वप्न विश्लेषक से सलाह लेनी चाहिए। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Kokila Vrat 2024 Date: जुलाई में कब रखा जाएगा Kokila Vrat 2024? नोट कर लें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए सबसे पहले कोकिला व्रत ही किया था. इस व्रत के पुण्य प्रताप से माता सती और महादेव परिणय सूत्र में बंधे थे. धार्मिक मान्यता है कि Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत करने से विवाहित महिलाओं को सुख-सौभाग्य और वंश में वृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. यह पावन दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती को समर्पित है। जो व्यक्ति विधि-विधान के साथ ये व्रत रखता है भगवान उसके ऊपर अपनी असीम कृपा बरसाते हैं। Kokila Vrat Kab Hai 2024: हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा तिथि पर कोकिला व्रत किया जाता है. यह व्रत देवों के देव भगवान शिव और उनकी अर्धांगिनी माता पार्वती को समर्पित माना गया है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य का वरदान प्राप्त होता है. कोकिला व्रत करने से अविवाहित महिलाओं को मनचाहा वर मिलता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत के पुण्य प्रताप से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी मिलता है. अगर आप भी मनचाहा वर पाना चाहती हैं तो ऐसे में इस साल कोकिला व्रत कब रखा जाएगा, यह पता होना आपके लिए जरूरी है. इस साल कोकिला व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इसका महत्व क्या है, आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं. कब है कोकिला व्रत 2024? (Kokila Vrat 2024 date) कोकिला व्रत इस साल 20 जुलाई, 2024 को रखा जाएगा।आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई को सुबह 5:59 बजे शुरू होगी और 21 जुलाई को सुबह 4:43 बजे समाप्त होगी।व्रत का संकल्प 20 जुलाई को सुबह 5:36 बजे से 6:21 बजे के बीच लिया जा सकता है।भगवान शिव की पूजा 20 जुलाई को प्रदोष काल में शाम 4:33 बजे से 8:08 बजे के बीच की जा सकती है। Kokila Vrat 2024 शुभ मुहूर्त Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत का महत्व Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत की पूजा विधि Kokila Vrat 2024 कोकिला व्रत के नियम यह भी ध्यान रखें (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sawan 2024: शिव जी की पूजा में इन मंत्रों का करें जाप, सभी समस्याओं का होगा निवारण

Sawan 2024: कुछ ही दिनों में सावन माह की शुरुआत होने वाली है। यह माह देवों के देव महादेव की पूजा को समर्पित है। इस माह के हर दिन को भोलेनाथ की पूजा के लिए शुभ माना गया है। मान्यता है कि सावन में शिव जी की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही तरक्की के भी योग बनते हैं। इस माह में चातुर्मास होने के कारण सृष्टि का संचालन शिव जी के हाथों में होता है। ऐसे में उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कई मांगलिक कार्यक्रम किए जाते हैं। साल 22 जुलाई 2024 से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन प्रीति आयुष्मान योग बन रहा है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना रहेगा। ऐसे में यह पूरा दिन शिव जी की आराधना करने के लिए शुभ रहेगा। माना जाता है कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए हमेशा सफेद मदार या आक का फूल चढ़ाना चाहिए। इससे व्यक्ति को धरती लोक से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। हालांकि, महादेव की पूजा उनके मंत्रों के बिना अधूरी मानी जाती है। इसी कड़ी में आइए शिव जी के मंत्रों के बारे में जान लेते है। Sawan 2024 मंत्र जाप करते समय ध्यान रखने योग्य बातें: इन मंत्रों के जाप से भगवान शिव को करें प्रसन्न ॐ नमः शिवायये मंत्र शिवजी का प्रिय मंत्र माना जाता है। पूजा में इसका 108 बार जाप करना चाहिए। इससे दिमाग शात रहता है। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥महादेव के इस मंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। इसका पूजा में जाप करना लाभदायक होता है। सावन में शिवलिंग की इस विधि से करें पूजा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर एक मनोकामना शिव आरोग्य मंत्रमाम् भयात् सवतो रक्ष श्रियम् सर्वदा।आरोग्य देही में देव देव, देव नमोस्तुते।।ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् । तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि। शिव शक्तिशाली मंत्र ऐं ह्रीं श्रीं ‘ऊँ नम: शिवाय:’ श्रीं ह्रीं ऐं। ऊँ हौं जूं स: डिस्क्लेमर : ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Karmasu.in उत्तरदायी नहीं है। 

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Sapne:सपने में दिख जाए बाघ, तो हो जाएं सावधान वरना होगा भारी नुकासान

रात को सोते समय हर व्यक्ति सपना देखता है। उस सपने में कुछ सपना शुभ होता है तो अशुभ। लेकिन क्या आपको पता है सपना देखने का मतलब क्या होता है। कई लोग सपने में जंगली जानवर को देखते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में जंगली जानवर को देखने का मतलब….. रात को सोते समय हर व्यक्ति सपना देखता है। उस सपने में कुछ सपना शुभ होता है तो अशुभ। लेकिन क्या आपको पता है सपना देखने का मतलब क्या होता है। कई लोग Sapne सपने में जंगली जानवर को देखते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में जंगली जानवर को देखने का मतलब आपको पता है। अगर नहीं तो आज इस खबर में जानेंगे सपने में बाघ देखने का मतलब क्या होता है। सपने में बाघ  का देखना शुभ होता है या अशुभ आइये विस्तार से जानते हैं। सपने में दिखें ये 5 चीज, तो समझ लीजिए बदलने वाला है भाग्य, होगा धन लाभ Sapne:सपने में बाघ देखने का मतलब स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में बाघ देखने का अलग-अलग मतलब होता है। यदि रात को सोते समय सपने में बाघ दिखाई देता है, तो ऐसे सपने आपके लिए शुभ होता है। कहा जाता है कि इस तरह के सपना देखने से रुका हुआ कार्य पूर्ण हो जाता है। जो भी कार्य करने के बारे में सोच रहे हैं उस कार्य में सफलता मिलेगी। Sapne:सपने में बाघ को हमला करते देखना आपकी आंतरिक चिंताएं और संघर्ष: सपने में बाघ का हमला आपकी आंतरिक चिंताओं, भय या क्रोध का प्रतीक हो सकता है। यदि आप वास्तविक जीवन में तनावपूर्ण या चिंतित महसूस कर रहे हैं, तो यह सपना आपके अवचेतन मन का एक तरीका हो सकता है कि आप इन भावनाओं को व्यक्त करें। बाहरी खतरे या चुनौतियां: कुछ मामलों में, सपने में बाघ का हमला आपके जीवन में किसी वास्तविक खतरे या चुनौती का प्रतिनिधित्व कर सकता है। यदि आप किसी कठिन परिस्थिति का सामना कर रहे हैं, तो यह सपना आपको उस स्थिति का सामना करने और उससे लड़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। Sapne सपने में बाघ को मांस खाते हुए देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आप Sapne सपने में बाघ में बाघ को मांस खाते हुए देखते हैं, तो ऐसे सपने बहुत ही शुभ होता है। कहा जाता है कि इस तरह  के सपने देखने का मतलब आपके शत्रु आपसे जल्द ही हार मानने वाले हैं। इसके साथ ही आपको अपने शत्रु पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। Sapne:सपने में बाघ को मारते हुए देखना यदि आप अपने सपने में बाघ को मारते हुए देखते हैं, तो ऐसे Sapne सपने हमें इस बात का संकेत देता है कि हमें आपस में मिलकर रहना चाहिए। इसके साथ ही आपको अपने गुस्से पर नियंत्रण करना चाहिए।

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Durgashtami2024:हर महीने की अष्टमी पर करना चाहिए देवी पूजा और व्रत, बीमारियों से बचने के लिए बनी है ये परंपरा ?

पौष महीने की अष्टमी पर शक्ति पूजा से प्रसन्न होती हैं देवी दुर्गा, सेहत के लिए भी अच्छा है इस दिन व्रत-उपवास करना Durgashtami2024अष्टमी तिथि की स्वामी देवी दुर्गा होती हैं। इसलिए हर महीने के शुक्लपक्ष में इस तिथि पर शक्ति पूजा और व्रत-उपवास करने का विधान पुराणों में बताया गया है। शक्ति पूजा के साथ नियम से व्रत या उपवास किया जाए तो सेहत भी अच्छा रहता है। इससे बीमारियां भी दूर होती हैं और उम्र बढ़ती है। हर महीने मौसम में थोड़े बदलाव होते हैं। जिससे बीमारियों का संक्रमण होता है। इसलिए ऋषियों हर व्रत-उपवास की परंपरा बनाई। जिससे पाचन अच्छा रहता है और शरीर में बीमारियों से लड़ने की ताकत बढ़ती है। Durgashtami2024:मासिक दुर्गाष्टमी का शुभ मुहूर्त मासिक दुर्गाष्टमी के दिन अभिजीत मुहूर्त में मां दुर्गा की पूजा करना शुभ माना जाता है। Durgashtami2024:मासिक दुर्गाष्टमी के उपाय मासिक दुर्गाष्टमी के दिन कुछ उपाय करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। Durgashtami2024:पौष महीने में देवी आराधनापौष महीने में शीत ऋतु होती है। इस महीने में बीमारियों से बचने के लिए सूर्य पूजा की जाती है। साथ ही पुराणों में इसके लिए देवी पूजा के लिए अष्टमी तिथि तय की गई है। पौष महीने में की गई शक्ति आराधना से हर तरह की परेशानियां दूर होती हैं। 2022 के पहले महीने में आने वाली मासिक Durgashtami2024 दुर्गा अष्टमी को शक्ति की आराधना जरूर करनी चाहिए ताकि सालभर मुश्किलों से लड़ने की ताकत मिले और देवी मां की कृपा हमेशा बनी रहे। स्कंद षष्ठी पर इस शुभ मुहूर्त में विधान से करें पूजा, घर में बनी रहेगी खुशहाली! Durgashtami2024:शक्ति पूजा की विधि Durgashtami2024:शक्ति की आराधना के लिए मंत्र जाप करेंया देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥ अष्टमी व्रत का महत्वमान्यता है कि हर हिंदू मास में शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को दुर्गा अष्टमी का व्रत किया जाता है। इस व्रत का देवी दुर्गा का मासिक व्रत भी कहा जाता है। आमतौर पर हिंदू कैलेंडर में अष्टमी दो बार आती है। एक कृष्ण पक्ष में दूसरी शुक्ल पक्ष में। शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर खासतौर से देवी दुर्गा का पूजा और व्रत किया जाता है।

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Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Raksha Bandhan 2024: रक्षा बंधन, भाई-बहन के अटूट प्रेम का त्योहार है, जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी रक्षा का वचन लेती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का वचन देते हैं। यह त्योहार भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और बंधन को मजबूत करता है। राखी बांधने के साथ ही मिठाईयां बांटी जाती हैं और घर में उत्सव का माहौल होता है। रक्षा बंधन सिर्फ एक त्योहार मात्र नहीं है, ये भाइयों और बहनों के बीच के संबंध को मजबूत करने का एक बहुत खूबसूरत जरिया भी है। रक्षाबंधन से जुड़ी एक खास बात बहुत कम लोगों को मालूम होता है कि भद्राकाल में राखी नहीं बांधनी चाहिए। शास्त्र और मुहूर्त शास्त्र में भद्रा काल को अशुभ माना गया है। ऐसे में राखी बांधने का शुभ मुहूर्त जानना बहुत जरूरी होता है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि इस साल श्रावण मास की पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन किस दिन पड़ रहा है। साथ ही ये भी जानेंगे कि भद्राकाल कब समाप्त हो रहा है और राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या है? रक्षाबंधन तिथिहिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाएगा। और सरल करके लिखें तो ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 19 अगस्त 2024 को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 19 अगस्त को प्रातः 03:04  शुरू होगा और इसका समापन 19 अगस्त को मध्य रात्रि 11:55 पर समाप्त होगा। राखी बांधने का शुभ मुहूर्तहिंदू पंचांग के अनुसार राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:30 से रात्रि 09:07 तक रहेगा। कुल मिलाकर शुभ मुहूर्त 07 घंटे 37 मिनट का होगा। भद्राकालभद्राकाल – पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ के साथ भद्रा की शुरुआतभद्राकाल की समाप्ति – 19 अगस्त 2024 को दोपहर 1:30 पर भद्रा मुख – 19 अगस्त को प्रातः 10:53 से दोपहर 12:37 तकभद्रा पूंछ – 19 अगस्त को प्रातः 09:51 से प्रातः 10:53 तक भद्राकाल में नहीं बांधी जाती है राखीभद्राकाल को शुभ नहीं माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है, जिसमें राखी बांधना भी शामिल है। राखी बांधना एक पवित्र कार्य है और इसे शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। भद्राकाल में राखी बांधने से भाई-बहन के रिश्ते में तनाव आ सकता है और मनोकामनाएं पूरी नहीं हो सकती हैं। इसलिए, रक्षा बंधन का त्योहार मनाते समय भद्राकाल का ध्यान रखना चाहिए और राखी केवल शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए। कौन है भद्रा?पौराणिक कथाओं के अनुसार भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन हैं। भद्रा का स्वभाव क्रोधी है। जब भद्रा का जन्म हुआ तो वह जन्म लेने के फौरन बाद ही पूरे सृष्टि को अपना निवाला बनाने लगी थीं। इस तरह से भद्रा के कारण जहां भी शुभ और मांगलिक कार्य, यज्ञ और अनुष्ठान होते वहां समस्याएं आने लगती हैं। इस कारण से जब भद्रा लगती है तब किसी भी तरह का शुभ कार्य नहीं किया जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत आधा हिस्सा भद्रा काल होता है। यही वजह है कि रक्षाबंधन के दिन भद्रा का साया होने के कारण राखी नहीं बांधी जाती है। हिमाचल में यहां स्‍वयंभू प्रकट शिवलिंग में विराजे हैं बाबा भूतनाथ ज्योतिष में भद्रा काल का महत्वज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार चंद्रमा की राशि से भद्रा का वास तय किया जाता है। गणना के मुताबिक चंद्रमा जब कुंभ राशि, कर्क राशि, सिंह राशि या मीन राशि में होता है, तब भद्रा पृथ्वी में निवास करके मनुष्यों को क्षति पहुंचाती है। वहीं मिथुन राशि, मेष राशि, वृषभ राशि और वृश्चिक राशि में जब चंद्रमा रहता है तब भद्रा स्वर्गलोक में रहती है एवं देवताओं के कार्यों में विघ्न डालती है। जब चंद्रमा धनु राशि, कन्या राशि, तुला राशि या मकर राशि में होता है तो भद्रा का वास पाताल लोक में माना गया है। भद्रा जिस भी लोक में रहती है वहीं प्रभावी रहती है। रक्षाबंधन 2024 (तिथि, भद्रा काल और शुभ मुहूर्त) श्रावण पूर्णिमा तिथि आरंभ- 19 अगस्त 2024 को सुबह 03:04श्रावण पूर्णिमा तिथि समापन- 19 अगस्त 2024 को मध्य रात्रि 11:55 राखी बांधने का शुभ मुहूर्त आरंभ – दोपहर 01:30 के बादराखी बांधने का शुभ मुहूर्त  समापन- रात्रि 09:07 तक भद्राकाल – पूर्णिमा तिथि के प्रारंभ के साथ भद्रा की शुरुआतभद्राकाल की समाप्ति – 19 अगस्त 2024 को दोपहर 1:30 पर भद्रा मुख – 19 अगस्त को प्रातः 10:53 से दोपहर 12:37 तकभद्रा पूंछ – 19 अगस्त को प्रातः 09:51 से प्रातः 10:53 तक

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Baba Bhootnath:हिमाचल में यहां स्‍वयंभू प्रकट शिवलिंग में विराजे हैं बाबा भूतनाथ

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका इतिहास 5वीं शताब्दी का बताया जाता है।यहाँ स्वयंभू शिवलिंग है, जो कि धरती से निकला हुआ माना जाता है।यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। भगवान शिव हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। ऐसा ही स्वयं-भू प्रकट शिवलिंग का रूप है बाबा भूतनाथ का। मंडी शहर के बीचों बीच शिखारा शैली में बने बाबा के मंदिर में हर रोज भक्तों की भीड़ रहती है। Baba Bhootnath:बाबा भूतनाथ मंदिर, मंडी, हिमाचल प्रदेश भगवान शिव हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। ऐसा ही स्वयं-भू प्रकट शिवलिंग का रूप है Baba Bhootnathबाबा भूतनाथ का। मंडी शहर के बीचों बीच शिखारा शैली में बने बाबा के मंदिर में हर रोज भक्तों की भीड़ रहती है। सावन माह में यहां हर सोमवार को विशेष पूजा अर्चना और भंडारे का आयोजन होता है। 1527 ई में बने इस मंदिर का रूप आज भी जस का तस है। मंदिर के अंदर प्राचीन वाद्य यंत्र भी रखे गए हैं और प्राचीन मूर्तियां भी हैं। यहां सुबह पांच बजे और रोज शाम को आरती का आयोजन होता है। साथ ही दूध, दहीं, शहद, बिल व भांग पत्र से पूजा का विशेष लाभ भक्तों को मिलता है। मंडी शहर के साथ-साथ देश व विदेश से श्रद्धालु भी बाबा भूतनाथ के दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं। Baba Bhootnath:यह है मान्यता बताया जाता है कि प्राचीन समय में एक ग्वाला अपनी गाय को चराने के लिए मंडी आता था, तो गाय एक स्थान पर खड़ी हो जाती और उसके थनों से अपने आप ही उस स्थान पर दूध निकलने लगता। यह बात चारों और फैल गई। इसी बीच उक्त समय के राजा अजबेर सेन को भगवान शिव ने सपने में आकर कहा कि उक्त स्थान पर उनका शिवलिंग हैं। सपना आने के अगले दिन ही जब राजा ने वहां खोदाई करवाई तो स्वयं-भू प्रकट शिवलिंग वहां मिला। इसके बाद राजा ने यहां शिखरा शैली में एक मंदिर का निर्माण करवाया और तब से आज दिन तक मंडी शहर के अलावा देश भर के लोगों की आस्था का केंद्र बाबा भूतनाथ का मंदिर माना जाता है। बाबा भूतनाथ के बारे में कुछ रोचक तथ्य बाबा भूतनाथ मंदिर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल शादी में आ रही है दिक्कतें तो जरुर कर लें जुलाई में इस दिन शिव जी की आराधना बाबा भूतनाथ मंदिर, जयपुर, राजस्थान बाबा भूतनाथ मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश इनके अलावा भी भारत में कई जगहों पर बाबा भूतनाथ के मंदिर हैं।

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