Jagannath Bhagwan:जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़े ये रोचक तथ्य, जब 9 दिनों की यात्रा पर निकलते हैं भगवान

जगन्नाथ रथ यात्रा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस रथ यात्रा का आयोजन प्रतिवर्ष उड़ीसा के जगन्नाथ मंदिर से होता है। यह रथ यात्रा हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। ऐसा माना जाता है कि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि के दिन भगवान श्री कृष्ण यानी कि भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ 9 दिनों की यात्रा पर निकलते हैं। इस साल भी यह यात्रा 12 जुलाई, सोमवार से शुरू होकर आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, यानी देवशयनी एकादशी 20 जुलाई, मंगलवार के दिन समाप्त होगी। हर साल इस यात्रा में भक्तों का तांता लग जाता है, लेकिन इस बार कोरोना वायरस की वजह से भक्तों को इस यात्रा में शामिल होने का अवसर नहीं मिल पाएगा और मंदिर के कुछ सीमित पुजारियों के द्वारा इस रस्म को पूरा किया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ जी का विशाल रथ 9 दिनों के लिए बाहर यात्रा पर निकलता है। इस यात्रा में सबसे आगे बलभद्र का रथ चलता है जिसे तालध्वज कहा जाता है। मध्य में सुभद्रा जी का रथ चलता है जिसे दर्पदलन या पद्म रथ कहा जाता है। सबसे अंत में भगवान जगन्नाथ का रथ चलता है Jagannath Bhagwan:मौसी के घर जाते हैं भगवान जगन्नाथ मान्यतानुसार इस यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ मुख्य मंदिर से निकलकर अपनी मौसी के घर जाते हैं। पुरी स्थित गुंडिचा मंदिर को उनकी मौसी का घर माना जाता है। कहा जाता है कि इसी मंदिर में 9 दिन तक भगवान अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी के साथ निवास करते हैं। पंडित श्री माधव चंद्र महापात्रा जी ने हमें बताया कि वास्तव में गुंडिचा मंदिर में ही Jagannath Bhagwan भगवान जगन्नाथ जी का अवतरण हुआ था और ये उनका जन्म स्थल माना जाता है। रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की मूर्तियों को तीन अलग-अलग दिव्य रथों पर रखकर नगर भ्रमण कराया जाता है। इस दौरान जगन्नाथ मंदिर में भगवान का स्थान खाली हो जाता है। केवल रुकमणी जी, जो माता लक्ष्मी का अवतार हैं वही मुख्य जगन्नाथ मंदिर में विराजमान रहती हैं। इन 9 दिनों में संपूर्ण पूजा पाठ गुंडिचा मंदिर में ही संपन्न होता है तथा भगवान वहीं निवास करते हैं। Jagannath Bhagwan:कैसे हुई रथ परंपरा प्रारंभ जब राजा इंद्रद्युम ने जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियां बनवाई तो रानी गुंडिचा ने मूर्तियां बनाते हुए मूर्तिकार विश्वकर्मा और मूर्तियों को देख लिया जिसके चलते मूर्तियां अधूरी ही रह गई तब आकाशवाणी हुई कि भगवान इसी रूप में स्थापित होना चाहते हैं। इसके बाद राजा ने इन्हीं अधूरी मूर्तियों को मंदिर में स्थापित कर दिया। उस वक्त भी आकाशवाणी हुई कि भगवान जगन्नाथ साल में एक बार अपनी जन्मभूमि मथुरा जरूर आएंगे। स्कंदपुराण के उत्कल खंड के अनुसार राजा इंद्रद्युम ने आषाढ़ शुक्ल द्वितीया के दिन प्रभु के उनकी जन्मभूमि जाने की व्यवस्था की। तभी से यह परंपरा रथयात्रा के रूप में चली आ रही है। Jagannath Rath Yatra 2024:इस दिन गुंडीचा मंदिर पहुंचेंगे भगवान जगन्नाथ कितने दिन रुकते हैं मौसी के घर रथों का निर्माण रथों का निर्माण नीम की पवित्र अखंडित लकड़ी से होता है, जिसे दारु कहते हैं। रथों के निर्माण में किसी भी प्रकार के कील, कांटों और धातु का उपयोग नहीं करते हैं। रथों के निर्माण के लिए काष्ठ का चयन बसंत पंचमी पर होता है और निर्माण कार्य अक्षया तृतीया पर प्रारंभ होता है। महत्वपूर्ण पड़ाव रथ यात्रा का धार्मिक महत्व कुछ रोचक तथ्य

Jagannath Bhagwan:जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़े ये रोचक तथ्य, जब 9 दिनों की यात्रा पर निकलते हैं भगवान Read More »

Jagannath Rath Yatra 2024:इस दिन गुंडीचा मंदिर पहुंचेंगे भगवान जगन्नाथ कितने दिन रुकते हैं मौसी के घर

जगन्नाथ रथ यात्रा जगन्नाथ रथ यात्रा भारत के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। यह भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की वार्षिक यात्रा का उत्सव है। यह यात्रा ओडिशा के पुरी में जगन्नाथ मंदिर से शुरू होती है और गुंडीचा मंदिर तक जाती है। यह यात्रा 10 दिनों तक चलती है और इस दौरान लाखों भक्त रथों को खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं। रथ यात्रा का महत्व: रथ यात्रा का कार्यक्रम: यहां कुछ रोचक तथ्य दिए गए हैं जो आपको जगन्नाथ रथ यात्रा के बारे में जानना चाहिए: भगवान जगन्नाथ का महाप्रसादभगवान जगन्नाथ जी छह बार महाप्रसाद चढ़ाया जाता है. भोजन में सात विभिन्न प्रकार के चावल, चार प्रकार की दाल, नौ प्रकार की सब्जियां और अनेक प्रकार की मिठाइयां परोसी जाती हैं. मीठे व्यंजन तैयार करने के लिए यहां शक्कर की बजाए अच्छे किस्म का गुड़ प्रयोग में लाया जाता है. आलू टमाटर और फूलगोभी का उपयोग मंदिर में नहीं होता है. कब से शुरू होगी यात्रा-वैदिक पंचांग के अनुसार, जगन्नाथ रथ यात्रा 07 जुलाई को सुबह 08 बजकर 05 मिनट से शुरू होगी.– यह यात्रा सुबह 09 बजकर 27 मिनट तक निकाली जाएगी.– इसके बाद यात्रा दोपहर 12 बजकर 15 मिनट से फिर से शुरू होगी.– इस बार यात्रा 01 बजकर 37 मिनट पर विश्राम लेगी.– इसके बाद शाम 04 बजकर 39 मिनट से यात्रा शुरू होगी.– अब यह यात्रा 06 बजकर 01 मिनट तक चलेगी. कैसे हुई इस यात्रा की शुरुआतभगवान जगन्नाथ की यात्रा सदियों से चली आ रही है. ऐसा कहा जाता है कि इसकी शुरुआत 12वीं शताब्‍दी में हुई थी. एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार बहन सुभद्रा ने अपने भाइयों कृष्‍ण और बलराम से कहा कि वे नगर को देखना चाहती हैं. इसके बाद अपनी बहन की इच्छा पूरी करने के​ लिए दोनों भाइयों ने बड़े ही प्‍यार से एक रथ तैयार करवाया. इस रथ में तीनों भाई- बहन सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकले थे और भ्रमण पूरा करने के बाद वापस पुरी लौटे. तभी से यह परंपरा चली आ रही है. मौसी के घर कितने दिन रुकते हैं?जब भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन के साथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं तो रास्ते में गुंडिचा में मौसी के घर भी जाते हैं. माना जाता है कि मौसी के घर पर तीनों भाई- बहन खूब पकवान खाते हैं. जिससे उनकी तबियत खराब हो जाती है और वो अज्ञातवास में चले जाते हैं. वे मौसी के यहां पूरे 7 दिनों तक रुकते हैं और स्वस्थ्य होने के बाद पुरी वापस लौटते हैं.

Jagannath Rath Yatra 2024:इस दिन गुंडीचा मंदिर पहुंचेंगे भगवान जगन्नाथ कितने दिन रुकते हैं मौसी के घर Read More »

संस्कृत में टमाटर को क्या कहते हैं :नहीं सुना होगा इसका ऐसा नाम Tomato in sanskrit

संस्कृत में टमाटर: नामों की विस्तृत व्याख्या और उदाहरण Tomato in sanskrit पिछले उत्तर में, मैंने संस्कृत में प्याज के लिए अनेक संस्कृत नामों का उल्लेख किया था। अब, मैं टमाटर नामों को विस्तार से समझाऊंगा और कुछ उदाहरण भी दूंगा: 1. अमृतोदभव: 2. रक्तवर्ण: 3. पेरूवृक्षफल: 4. तामलफल: 5. बंगालवृक्षफल: 6. टमाटर: 7. अग्निमंथ: 8. लालभिंडी: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विभिन्न क्षेत्रों और कालखंडों में टमाटर के लिए विभिन्न नाम उपयोग किए जाते थे। उदाहरण के लिए: संस्कृत में तामलफल: टमाटर के लिए एक रोचक नाम तामलफल संस्कृत में टमाटर के लिए एक असामान्य लेकिन दिलचस्प नाम है। आइए इसका अर्थ और उपयोग को गहराई से समझते हैं: निष्कर्ष: तामलफल टमाटर के लिए एक असामान्य लेकिन काव्यात्मक नाम है। यह टमाटर के स्वाद और सुगंध की तुलना एक परिचित मसाले से करता है।

संस्कृत में टमाटर को क्या कहते हैं :नहीं सुना होगा इसका ऐसा नाम Tomato in sanskrit Read More »

संस्कृत में प्याज के अनेक नाम जानकर हो जायेंगे हैरान :KARMASU

संस्कृत में प्याज के अनेक नाम: onion meaning in Sanskrit 1. पलाण्डु: यह शब्द “पल” (पानी) और “अण्डु” (अंडा) से मिलकर बना है। यह प्याज के गोलाकार आकार और उसके अंदर स्तरों को दर्शाता है, जो एक अंडे के समान होते हैं। उदाहरण: “शून्यगृहे पलाण्डुं कृष्णं पचति देवी।” (देवी रसोईघर में प्याज पका रही है।) 2. कृष्णावल: यह शब्द “कृष्ण” (काला) और “अवल” (पंक्ति) से मिलकर बना है। यह प्याज के गहरे रंग और उसके स्तरों को दर्शाता है, जो एक काले रंग की पंक्ति की तरह दिखते हैं। उदाहरण: “भोजनं कृष्णावलेन सह खादति।” (वह प्याज के साथ भोजन खाता है।) 3. रोहिता: यह शब्द “रक्त” (लाल) से लिया गया है। यह प्याज के लाल रंग को दर्शाता है। उदाहरण: “रोहितां शाके चिकित्सकः प्रयोजयति।” (चिकित्सक भोजन में लाल प्याज का उपयोग करता है।) 4. श्वेतरोहिता: यह शब्द “श्वेत” (सफेद) और “रोहिता” (लाल) से मिलकर बना है। यह सफेद प्याज के लाल रंग के छिलके को दर्शाता है। उदाहरण: “श्वेतरोहितायाः शाकं स्वादिष्टं भवति।” (सफेद प्याज की सब्जी स्वादिष्ट होती है।) 5. लवणकन्द: यह शब्द “लवण” (नमक) और “कन्द” (कंद) से मिलकर बना है। यह प्याज के स्वाद को दर्शाता है, जो थोड़ा नमकीन होता है और इसका एक भूमिगत कंद होता है। उदाहरण: “लवणकन्दं भोजने उपयुज्यते।” (प्याज का उपयोग भोजन में किया जाता है।) 6. गुरुव्याकरणटीका: यह एक विनोदी नाम है जो प्याज के स्तरों को व्याकरण के ग्रंथों में अध्यायों की तरह दर्शाता है। उदाहरण: “शाककौशलं गुरुव्याकरणटीकया सह तुल्यं भवति।” (प्याज पकाने की कला व्याकरण के ग्रंथों के अध्ययन के समान है।) 7. उका: यह शब्द प्याज की तीखी गंध को दर्शाता है। उदाहरण: “उकागन्धः श्वासं रुन्धति।” (प्याज की गंध सांस लेने में बाधा डालती है।) यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये सभी नाम विभिन्न क्षेत्रों और कालखंडों में उपयोग किए जाते थे।

संस्कृत में प्याज के अनेक नाम जानकर हो जायेंगे हैरान :KARMASU Read More »

Sapne:सपने में दिखें ये 5 चीज, तो समझ लीजिए बदलने वाला है भाग्य, होगा धन लाभ

स्वप्न शास्त्र के अनुसार, कुछ सपनों को शुभ माना जाता है, जिनके देखने से यह माना जाता है कि आपके भाग्य में बदलाव आने वाला है और धन लाभ होने की संभावना है। तोता : स्वप्न शास्त्र बताता है कि यदि आपको भी अपने Sapne सपने में तोता दिखाई देता है तो इसका मतलब है कि आपको जल्द ही कहीं से धन मिलने वाला है. सपने में तोते का दिखाई देना शुभ माना जाता है. मधुमक्खी का छत्ता : स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि सपने में आपको मधुमक्खी का छत्ता दिखाई दे तो यह आपके लिए शुभ संकेत माना जाएगा. इसका अर्थ है कि जल्द ही आपकी आय में बढ़ोत्तरी होने वाली है, जिसके कारण आप अपना आने वाला समय सुख और ऐशो आराम से व्यतीत करेंगे. देवी-देवताओं को Sapne सपने में देखना : स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आप अपने सपने में देवी या देवता को देखते हैं तो यह संकेत है कि आने वाले दिनों में आपको अपने किए गए कार्यों में सफलता अवश्य प्राप्त होगी. साथ ही यह संकेत करता है कि आपकी आमदनी के स्रोत बढ़ेंगे और आपको अचानक धन प्राप्ति होगी. फलों से लदा पेड़ : स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि आपको अपने सपनों में फलों से लदा हुआ पेड़ या बहुत सारे पेड़ दिखाई दें तो ये आपके लिए एक शुभ संकेत है. यह सपना संकेत करता है कि आने वाले भविष्य में आपको बहुत सारा धन प्राप्त होने वाला है और आप जल्द ही अमीर हो सकते हैं. काला बिच्छू देखना : यदि सपने में आपको काले रंग का बिच्छू दिखाई देता है तो यह आपके लिए एक शुभ संकेत है. यह सपना संकेत करता है कि जल्द ही आपको कहीं से धन संपत्ति मिलने वाली है और आपका आने वाला जीवन सुखमय व्यतीत होने वाला है. सपने में चींटी देखने का मतलब ? जानें यह शुभ या अशुभ संकेत Sapne सपने में देखने पर शुभ मानी जाती हैं: माँ लक्ष्मी: सपने में माँ लक्ष्मी का दर्शन धन प्राप्ति का शुभ संकेत माना जाता है। सोना: सपने में सोना देखना भी धन लाभ का प्रतीक है। फलों से लदा हुआ पेड़: सपने में फलदार पेड़ देखना शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। झाड़ू: सपने में झाड़ू देखना भी धन लाभ का संकेत माना जाता है। बारिश: सपने में बारिश देखना भी शुभ माना जाता है और यह आर्थिक लाभ का प्रतीक हो सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सपनों का अर्थ हमेशा निश्चित नहीं होता है और इनकी व्याख्या व्यक्ति की विशिष्ट परिस्थितियों और सपने के अन्य विवरणों के आधार पर भिन्न हो सकती है। यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि सपने केवल संकेत होते हैं और वे भविष्य की भविष्यवाणी नहीं करते हैं। आपके भाग्य का निर्माण आपके कर्मों और प्रयासों से होता है। अगर आप इन शुभ सपनों में से कोई भी सपना देखते हैं, तो यह सकारात्मक सोच रखने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करने का एक अच्छा समय है।

Sapne:सपने में दिखें ये 5 चीज, तो समझ लीजिए बदलने वाला है भाग्य, होगा धन लाभ Read More »

Hindu Dharma:हिन्दू धर्म में क्या है 4 अंक का महत्व? जानें आपसे कैसे जुड़ा है ये नंबर

Hindu Dharma:हिन्दू धर्म में 4 अंक का अत्यधिक महत्व है। यह संख्या अनेक महत्वपूर्ण अवधारणाओं और पहलुओं से जुड़ी हुई है, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं: Hindu Dharmaहिन्दू धर्म में अंकों का बहुत महत्व माना गया है हर एक अंक से जुड़ी कोई न कोई विशेषता शास्त्रों में वर्णित है जिसके आधार पर उस अंक का प्रभाव भी व्यक्ति के जीवन पर देखने को मिलता है। जहां एक ओर हर अंक का न सिर्फ ज्योतिष में स्थान मौजूद है बल्कि उसकी धार्मिकता भी शास्त्रों में बताई गई है। ठीक ऐसे ही 4 अंक को ज्योतिष शास्त्र में दिव्य माना गया है, वहीं धार्मिक दृष्टि से भी इस अंक का गहरा अर्थ बताया गया है। 1. चार युग: हिन्दू काल गणना के अनुसार, सृष्टि चार युगों में विभाजित है: 2. चार वेद: Hindu Dharma हिन्दू धर्म के चार मुख्य ग्रंथ हैं: 3. चार पुरुषार्थ: मनुष्य जीवन के चार मुख्य लक्ष्य हैं: 4. Hindu Dharma अन्य महत्वपूर्ण पहलू: भगवान श्रीराम को रामचंद्र जी क्यों कहा जाता है, जानिए यह पौराणिक कथा आपसे कैसे जुड़ा है 4 अंक: Hindu Dharma हिन्दू धर्म में 4 अंक का महत्व आपके जीवन के अनेक पहलुओं से जुड़ा हो सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 4 अंक का महत्व व्यक्ति की जन्मकुंडली और अन्य ज्योतिषीय कारकों के आधार पर भिन्न हो सकता है। आप भी इस लेख में दी गई जानकारी के माध्यम से यह जान सकते हैं कि आखिर हिन्दू धर्म में क्यों खास माना जाता है 4 अंक और क्या है इसका महत्व एवं इससे जुड़ी विशेषता। अगर हमारी स्टोरीज से जुड़े आपके कुछ सवाल हैं, तो वो आप हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। हम आप तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से। डिस्क्लेमर  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

Hindu Dharma:हिन्दू धर्म में क्या है 4 अंक का महत्व? जानें आपसे कैसे जुड़ा है ये नंबर Read More »

Sapne:सपने में चींटी देखने का मतलब ? जानें यह शुभ या अशुभ संकेत

सपनों की व्याख्या सदैव जटिल और विवादास्पद रही है। विभिन्न संस्कृतियों और मतों में सपनों के अर्थों को लेकर भिन्न मान्यताएं प्रचलित हैं। सपने में चींटी देखने का अर्थ भी विभिन्न स्रोतों और दृष्टिकोणों से भिन्न-भिन्न रूप से समझा जाता है। हिंदू स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में चींटी देखना शुभ संकेत माना जाता है। यह धन, समृद्धि, उन्नति और सफलता का प्रतीक है। हम कई तरह के सपने देखते हैं. इनमें से कुछ Sapne सपने सुबह उठने पर भूल जाते हैं. वहीं कई सपने ऐसे होते हैं जो हमें सोचने के लिए मजबूर कर देते हैं. अगर आपको सपने में चींटी दिखाई देती है तो समझ जाइए कि इसके पीछे एक बेहद ही खास बात छिपी हुई है. ऐसे में जानिए सपने में चींटी देखने का क्या मतलब हैः Sapne कड़ी मेहनत और लगनसपने में चींटी देखना शुभ माना गया है. सपने में चींटी देखने का मतलब यह हो सकता है कि आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत और लगन से काम करने की आवश्यकता है. चींटियां अपनी कड़ी मेहनत और लगन के लिए प्रसिद्ध हैं. आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए दूसरों के साथ सहयोग करने की आवश्यकता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, ऐसे सपने का मतलब है कि चूंक चींटियां धैर्यवान होती हैं इसलिए आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए धैर्य रखने और लगातार प्रयास करने की आवश्यकता है. सपने में इन चीजों का दिखाई देना माना जाता है बेहद शुभ, जानिए हर एक का मतलब Sapne धन और समृद्धि का प्रतीक चींटियों को समृद्धि और धन का प्रतीक माना जाता है. सपने में चींटी देखने का मतलब यह हो सकता है कि आपके जीवन में समृद्धि और धन आने वाला है. सपने में चींटी देखने का मतलब यह हो सकता है कि आपका स्वास्थ्य अच्छा होगा और आप जीवन में खुश रहेंगे. Sapne सपने में चींटी का झुंड देखनाअगर आपने सपने में चींटी का झुंड देखा है तो यह एक अशुभ सपना माना जाता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, बहुत सारी चींटी के बीच खुद को देखने का मतलब होता है कि आप किसी बहुत बड़ी मुसीबत से घिरने वाले हैं. इसका मतलब है कि अलग-अलग प्रकार की परेशानी आपके घर में आने वाली है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यह सपना ज्यादा से ज्यादा लोगों के साथ साझा कर देना चाहिए ताकि इसका असर कम हो जाए. सपने में लाल चींटी को देखनास्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आप अपने Sapne सपने में कुछ लाल चींटी को अपने आसपास देखा है तो यह एक अशुभ सपना है. आपको अपने व्यापार या नौकरी में कुछ नुकसान देखने को मिलेगा. इसके अलावा रिश्तेदारी यार प्यार मोहब्बत में भी नुकसान हो सकता है. (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

Sapne:सपने में चींटी देखने का मतलब ? जानें यह शुभ या अशुभ संकेत Read More »

Skanda Sashti Vrat 2024: स्कंद षष्ठी पर इस शुभ मुहूर्त में विधान से करें पूजा, घर में बनी रहेगी खुशहाली!

Skanda Sashti स्कंद षष्ठी, जिसे षष्ठी या कुमार षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान कार्तिकेय, भगवान शिव और पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र, का जन्मोत्सव है। यह त्योहार प्रति वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। स्कंद षष्ठी 2024 तिथियां और समय दिनांक तिथि प्रारंभ तिथि समाप्त हिन्दू मास जनवरी 16, 2024, मंगलवार 02:16 AM, जनवरी 16 11:57 PM, जनवरी 16 पौष फरवरी 14, 2024, बुधवार 12:09 AM, फरवरी 14 10:12 AM, फरवरी 15 माघ मार्च 15, 2024, शुक्रवार 11:25 PM, मार्च 14 10:09 PM, मार्च 15 फाल्गुन अप्रैल 13, 2024, शनिवार 12:04 AM अप्रैल 13 11:43 AM, अप्रैल 14 चैत्र मई 13, 2024, सोमवार 02:03 AM, मई 13 02:50 AM, मई 14 वैशाख जून 11, 2024, मंगलवार 05:27 PM, जून 11 07:16 PM, जून 12 ज्येष्ठ जुलाई 11, 2024, बृहस्पतिवार 10:03 AM, जुलाई 11 12:32 PM, जुलाई 12 आषाढ़ अगस्त 10, 2024, शनिवार 03:14 AM, अगस्त 10 05:44 AM, अगस्त 11 श्रावण सितम्बर 9, 2024, सोमवार 07:58 PM, सितम्बर 08 09:53 PM, सितम्बर 09 भाद्रपद अक्टूबर 8, 2024, मंगलवार 11:17 AM, अक्टूबर 08 12:14 PM, अक्टूबर 09 आश्विन नवम्बर 7, 2024, बृहस्पतिवार 12:41 AM, नवम्बर 07 12:34 AM, नवम्बर 08 कार्तिक दिसम्बर 6, 2024, शुक्रवार 12:07 PM, दिसम्बर 06 11:05 PM, दिसम्बर 07 मार्गशीर्ष Skanda Sashti Vrat स्कंद षष्ठी पर ऐसे करें पूजा इन बातों का रखें खास ध्यान Skanda Sashti Vrat महत्व:भगवान कार्तिकेय की पूजा: स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय की पूजा करने और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर प्रदान करता है।बुद्धि और ज्ञान: भगवान कार्तिकेय को बुद्धि और ज्ञान का देवता माना जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से ज्ञान और विद्या प्राप्ति में सहायता मिलती है।विजय: भगवान कार्तिकेय को देवसेनापति भी कहा जाता है। इस दिन उनकी पूजा करने से विजय प्राप्ति में सहायता मिलती है।कष्टों का नाश: स्कंद षष्ठी व्रत रखने और भगवान कार्तिकेय की पूजा करने से समस्त कष्टों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।यह भी जानें: स्कंद षष्ठी के दिन कुछ लोग 24 घंटे का निर्जला व्रत भी रखते हैं।स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाता है। योगिनी एकादशी : ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति का व्रत  स्कंद षष्ठी के पीछे का इतिहास भगवान कार्तिकेयन को दक्षिण भारत में हिंदुओं द्वारा भगवान गणेश के छोटे भाई के रूप में माना जाता है, हालांकि उन्हें उत्तर भारत में हिंदुओं का बड़ा भाई माना जाता है। भगवान कार्तिकेय के जन्म और सुरपद्म की हत्या के आसपास एक पौराणिक कथा है। एक बार, तीन राक्षसों, सुरपदमन, सिम्हामुखन और तारकासुरन ने दुनिया भर में तबाही मचाई। सुरपदमन को भगवान शिव से वरदान मिला था कि शिव की क्षमताएं ही उन्हें नष्ट कर देंगी। इससे उसकी ताकत इतनी बढ़ गई कि वह और उसके भाई-बहन मानवता और देवों के लिए खतरा बन गए। जैसा कि देवता इन राक्षसों से खुद को मुक्त करना चाहते हैं, वे भगवान शिव के पास जाते हैं, जो केवल उस राक्षस को हरा सकते हैं। हालाँकि, मिशन उनके लिए और अधिक कठिन हो गया क्योंकि शिव एक गहरी एकाग्रता में लीन थे। परिणामस्वरूप, देवों ने शिव के कामुक जुनून को उत्तेजित करने और इस तरह उन्हें ध्यान से विचलित करने के लिए प्रेम के देवता, मनमाता को भेजा। ममता की एकाग्रता तब भंग हुई जब उन्होंने अपना पुष्पसारम (फूलों का बाण) भगवान शिव की ओर छोड़ा। इससे शासक भड़क गया और उसने मिनामाता को जलाकर राख कर दिया। बाद में, सभी देवों के कहने पर, शिव ने मनमाता को पुनर्जीवित किया और अपनी सभी दानव-हत्या क्षमताओं से संपन्न एक बच्चे को जन्म देने के लिए चुना। भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख से छह चिंगारी निकाली, जिन्हें अग्नि के देवता सरवण नदी के ठंडे पानी में ले गए, जहां छह चिंगारी छह पवित्र बच्चों के रूप में प्रकट हुईं। कार्तिका बहनें (नक्षत्र कार्तिका या प्लीएड्स के छह सितारों में से) नाम की छह कन्याओं ने इन शिशुओं की देखभाल करने की सहमति दी। जब माता पार्वती ने आकर तालाब में पल रहे छह बच्चों को दुलार किया, तो वे छह मुख, बारह हाथ और दो पैरों वाले एक बच्चे में मिल गए। इस भव्य आकृति को कार्तिकेय नाम दिया गया था। माता पार्वती ने उनकी योग्यता, पराक्रम और तमिल में वेल नामक भाला प्रदान किया। जैसे-जैसे वह बड़े होते गए कार्तिकेयन एक दार्शनिक और योद्धा के रूप में विकसित हुए। वह ज्ञान और करुणा का अवतार बन गया और युद्ध की एक विशाल समझ रखता था। उन्होंने और उनके सहयोगियों ने सुरपद्मन और उनके भाइयों के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। भगवान ने सुरपदमन के भाइयों सिम्हामुखन और तारकासुरन की हत्या राक्षसों के शहर जाने के रास्ते में की थी। फिर भगवान और शैतान के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसके दौरान उन्होंने सुरपद्मन के वेल को काट दिया। सुरपद्मन की लाश से एक मोर और एक मुर्गा निकला, पूर्व सिद्धांत के वाहन (वाहन) के रूप में सेवा कर रहा था और बाद में उसके झंडे पर बुराई पर विजय के संकेत के रूप में था। कार्तिकेय ने Skanda Sashti Vrat षष्ठी को सुरपद्म को हराया। इसके अतिरिक्त, यह माना जाता है कि जब सुरपद्मन को गंभीर चोटें आईं, तो उसने भगवान से उसे बख्शने की भीख मांगी। इसलिए मुरुगा ने उसे इस शर्त पर मोर में बदल दिया कि वह सदा के लिए उसका वाहन बना रहेगा। स्कंद षष्ठी मंत्र: स्कंद षष्ठी व्रत में शक्तिशाली स्कंद षष्ठी मंत्र का जाप करें। निम्न शक्तिशाली स्कंद षष्ठी मंत्र का प्रतिदिन 108 बार जाप करें:- ॐ सरवणभावाय नमः थुथिपोर्कु वल्विनाइपोम थूनबम्पोम नेन्जिल पाथिपोर्कु सेल्वम पलिथुक कैथीथोंगम निश्चयियम कैकूडम निमलार अरुल कण्थर षष्ठी कवचम ठनै स्कंद षष्ठी: निष्कर्ष स्कंद षष्ठी तमिलनाडु और कुछ अन्य राज्यों में मनाया जाने वाला दस दिवसीय त्योहार है। इन दिनों, तिरुचेंदूर में भगवान सुब्रमण्य को समर्पित मंदिर में एक भव्य उत्सव आयोजित किया जाता है, और त्योहार को पूरा करने के लिए, सूरा संहार, या भगवान स्कंद द्वारा राक्षसों के वध की घटना को आज भी दोहराया जाता है। इस दिन, भक्त इस भव्य आयोजन को देखने के लिए आते हैं और भगवान स्कंद का आशीर्वाद लेते हैं।

Skanda Sashti Vrat 2024: स्कंद षष्ठी पर इस शुभ मुहूर्त में विधान से करें पूजा, घर में बनी रहेगी खुशहाली! Read More »

Sawan 2024: सावन में शिवलिंग की इस विधि से करें पूजा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर एक मनोकामना

Sawan सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने में शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। Sawan सावन 2024 में शिवलिंग पूजा की विधि दी गई है: सामग्री: विधि: Sawan शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् । तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि। कुछ विशेष बातें: इन उपायों से आपकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी और भगवान शिव आप पर सदैव अपनी कृपा रखेंगे। सावन महीने में रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति ? अतिरिक्त जानकारी: Sawan सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना है। इस महीने में शिवलिंग की पूजा करने से आपको निश्चित रूप से शुभ फल प्राप्त होंगे। डिस्क्लेमर  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

Sawan 2024: सावन में शिवलिंग की इस विधि से करें पूजा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर एक मनोकामना Read More »

Sapne:सपने में इन चीजों का दिखाई देना माना जाता है बेहद शुभ, जानिए हर एक का मतलब

किन सपनों को देखना होता है अशुभ, क्या हैं इनकी अशुभता से बचने के उपाय यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सपनों की व्याख्या व्यक्तिपरक होती है और एक व्यक्ति के लिए जो शुभ Sapne सपना हो सकता है, वह दूसरे के लिए भिन्न हो सकता है। सपनों का अर्थ निकालने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी भावनाओं और सपने के संदर्भ पर ध्यान दें। Sapne:अतिरिक्त शुभ सपने: Sapne शुभ सपनों का अनुभव करने के लिए उपाय: यह भी याद रखना महत्वपूर्ण है कि यदि आप स्वस्थ जीवनशैली जीते हैं, सकारात्मक विचार रखते हैं और नियमित रूप से ध्यान करते हैं, तो आपको सकारात्मक और शुभ सपने अधिक आएंगे। डिस्क्लेमर ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

Sapne:सपने में इन चीजों का दिखाई देना माना जाता है बेहद शुभ, जानिए हर एक का मतलब Read More »

Sapna:किन सपनों को देखना होता है अशुभ, क्या हैं इनकी अशुभता से बचने के उपाय

सपनों की व्याख्या सदियों से एक जटिल विषय रहा है और विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं में इनकी व्याख्या अलग-अलग होती है। कुछ सपने जिन्हें अक्सर अशुभ माना जाता है, उनमें शामिल हैं: सोते हुए सपने तो हम सभी देखते हैं। कभी-कभी हम सपनों की सुखद दुनिया में खो जाते हैं तो कई Sapna सपने ऐसे भी होते हैं जो नींद से जगा देते हैं और हम बुरी तरह डर जाते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, किसी भी स्वप्न का संबंध हमारे जीवन में घटने वाली घटनाओं के साथ भी होता है। सपने हमें शुभ या अशुभ का संकेत देते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि जो स्वप्न देखकर हम डर जाएं वह अशुभ हो और जो स्वप्न देखकर हमें सुखद एहसास हो वह शुभ हो इसका अर्थ कुछ और भी हो सकता है। अगर हम कोई भी स्वप्न देखते हैं तो हमें उसके बारे में जानने की जिज्ञासा होती है। स्वप्न शास्त्र में सपनों के अर्थ बताए जाते हैं, जिनके अनुसार कुछ सपनों को अशुभ माना जाता है। यदि ऐसे स्वप्न दिखाई दें तो मान्यता है कि कुछ उपायों को करने से उनके अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से होते हैं अशुभ स्वप्न और क्या हैं उनके बुरे प्रभाव से बचने के उपाय। यदि आप बाढ़ या फिर गंदा पानी देखते हैं तो यह सपना शुभ नहीं माना जाता है। इसी तरह से सपने में सूर्यास्त (डूबता हुआ सूरज) देखना शुभ नहीं माना जाता है। मान्यता है कि ये सपने आपके जीवन में किसी अशुभ घटना का संकेत हो सकते हैं। सपने में समुद्र देखना भी अशुभ स्वप्न माना जाता है। यदि आपको सपने में समुद्र दिखाई दे तो अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने का प्रयास करना चाहिए। मान्यता है कि यह स्वप्न किसी से वाद-विवाद होने का संकेत देता है।  Sapna कौन से सपने होते हैं अशुभ: दांत गिरना: यह मृत्यु या किसी प्रियजन के खोने का संकेत हो सकता है। बाल झड़ना: यह धन हानि या मानहानि का संकेत हो सकता है। नदी में डूबना: यह गंभीर बीमारी या दुर्भाग्य का संकेत हो सकता है। शव देखना: यह मृत्यु या परिवार में किसी सदस्य की बीमारी का संकेत हो सकता है। अपनी मृत्यु देखना: यह जीवन में बड़े बदलाव या कठिनाइयों का संकेत हो सकता है। भूत या प्रेत देखना: यह डर, चिंता या नकारात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है। खून देखना: यह हिंसा, क्रोध या खतरे का संकेत हो सकता है। आग लगना: यह विनाश, हानि या प्रतिकूलता का संकेत हो सकता है। घर गिरना: यह परिवार में कलह या व्यावसायिक असफलता का संकेत हो सकता है। सांप काटना: यह धोखा, विश्वासघात या किसी शत्रु से खतरे का संकेत हो सकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि Sapna सपनों की व्याख्या व्यक्तिपरक होती है और एक व्यक्ति के लिए जो अशुभ सपना हो सकता है, वह दूसरे के लिए शुभ हो सकता है। सपनों का अर्थ निकालने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपनी भावनाओं और सपने के संदर्भ पर ध्यान दें। Sawan 2024: दुर्लभ संयोग से भरा हुआ है जाने क्या है महत्वपूर्ण बाते ? Sapna यदि आप अशुभ सपना देखते हैं, तो आप कुछ उपाय कर सकते हैं: सबसे पहले, सकारात्मक रहें। याद रखें कि सपने केवल सपने होते हैं और वे हमेशा सच नहीं होते हैं। सुबह उठकर सपने को किसी को न बताएं। अपने सिर पर हाथ रखकर तीन बार “ॐ नमो नारायणाय” मंत्र का जाप करें। स्नान करके सूर्यदेव को जल अर्पित करें। हनुमानजी की पूजा करें। किसी गरीब को भोजन दान करें। यदि सपना बहुत भयानक हो, तो आप किसी ज्योतिषी या आध्यात्मिक गुरु से सलाह ले सकते हैं। प्रातः उठकर शिव मंदिर जाना चाहिए और भगवान शिव का पूजन व अभिषेक करना चाहिए। किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए। इसके अलावा Sapna सपनों के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए दुर्गासप्तशती का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि इससे आपके जीवन के कष्ट दूर होते हैं और ईश्वर आपकी रक्षा करते हैं। डिस्क्लेमर ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

Sapna:किन सपनों को देखना होता है अशुभ, क्या हैं इनकी अशुभता से बचने के उपाय Read More »

Shiv mantra:सावन महीने में रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति ?

सावन महीने में मंत्र जाप: कष्टों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और मंत्र जाप के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए मंत्र जाप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। सावन का महीना देवों के देव महादेव को अति प्रिय है। इस महीने में प्रत्येक दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा-उपासना की जाती है। साथ ही सावन सोमवार पर भगवान शिव के निमित्त व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने से साधक के सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। साथ ही व्यक्ति विशेष को उनकी मनोकामना के अनुरूप फल की प्राप्ति होती है। अतः साधक यथा शक्ति तथा भक्ति भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। शास्त्रों में निहित है कि सृष्टि के रचयिता भगवान शिव महज जलाभिषेक से प्रसन्न हो जाते हैं। इसके लिए सावन के महीने में प्रतिदिन भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें। साथ ही रोजाना पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करें। इन मंत्रों के जाप से साधक को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। आइए, मंत्र जाप करते हैं- Shiv mantra भगवान शिव के मंत्र शिव मूल मंत्र ॐ नमः शिवाय॥ रूद्र मंत्र ॐ नमो भगवते रूद्राय । Shiv mantra रूद्र गायत्री मंत्र ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ Shiv mantra महामृत्युंजय मंत्र ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ शिव प्रार्थना मंत्र करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं । विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥ शिव नमस्कार मंत्र शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।। Sawan 2024: दुर्लभ संयोग से भरा हुआ है जाने क्या है महत्वपूर्ण बाते ? श‍िव नामावली मंत्र श्री शिवाय नम: श्री शंकराय नम: श्री महेश्वराय नम: श्री सांबसदाशिवाय नम: श्री रुद्राय नम: ॐ पार्वतीपतये नम: ॐ नमो नीलकण्ठाय नम: शिव आवाहन मंत्र ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन । तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती ।। वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने । नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने । आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। त्र्यंबकाय नमस्तुभ्यं पंचस्याय नमोनमः । नमोब्रह्मेन्द्र रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। नमो दोर्दण्डचापाय मम मृत्युम् विनाशय ।। देवं मृत्युविनाशनं भयहरं साम्राज्य मुक्ति प्रदम् । नमोर्धेन्दु स्वरूपाय नमो दिग्वसनाय च । नमो भक्तार्ति हन्त्रे च मम मृत्युं विनाशय ।। अज्ञानान्धकनाशनं शुभकरं विध्यासु सौख्य प्रदम् । नाना भूतगणान्वितं दिवि पदैः देवैः सदा सेवितम् ।। सर्व सर्वपति महेश्वर हरं मृत्युंजय भावये ।। शिव स्तुति मंत्र ॐ नमो हिरण्यबाहवे हिरण्यवर्णाय हिरण्यरूपाय हिरण्यपतए अंबिका पतए उमा पतए पशूपतए नमो नमः ईशान सर्वविद्यानाम् ईश्वर सर्व भूतानाम् ब्रह्मादीपते ब्रह्मनोदिपते ब्रह्मा शिवो अस्तु सदा शिवोहम तत्पुरुषाय विद्महे वागविशुद्धाय धिमहे तन्नो शिव प्रचोदयात् महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धिमहे तन्नों शिव प्रचोदयात् नमस्ते अस्तु भगवान विश्वेश्वराय महादेवाय त्र्यंबकाय त्रिपुरान्तकाय त्रिकाग्नी कालाय कालाग्नी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजयाय सर्वेश्वराय सदशिवाय श्रीमान महादेवाय नमः ॐ ॐ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। Shiv mantra मंत्र जाप करते समय कुछ ध्यान रखने योग्य बातें: यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी मंत्र का जाप करने से पहले उसका अर्थ और उच्चारण विधि जान लेना आवश्यक है। आप किसी विद्वान ब्राह्मण या गुरु से भी मंत्र के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। डिसक्लेमर: ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’

Shiv mantra:सावन महीने में रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति ? Read More »