SABAN 2024:शुरू हुआ सावन का पावन महीना, पहला सोमवार आज, भगवान भोलेनाथ की इस विधि से करें पूजा अर्चना

SABAN 2024 आज से सावन का पावन महीना शुरू हो गया है. आज पहला सोमवार है. हिन्दू धर्म में सावन का महीना बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है यह महीना भगवान शिव को काफी प्रिय है औय सावन का यह महीना भगवान भोलेनाथ की पूजा के लिए पूरी तरह से समर्पित होता है इस महीने का शिवभक्त बेसब्री से इंतजार करते है क्योंकि भगवान भोले का कृपा पाने के लिए यह महीना सबसे सर्वोत्तम माना गया है मान्यता है कि सावन के पावन महीने में विधिपूर्वक भगवान शंकर की पूजा-अर्चना करने और उनके निमित्त व्रत रखने से वे अपने सभी भक्तों की सभी मनोकामना पूरी करते हैं. SABAN 2024 बाबा भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती का भी भक्तों को आशीर्वाद मिलता है. बता दें, हिन्दू देवताओं में भगवान शिव को सर्वोच्च भगवान माना जाता है भगवान सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवी-देवताओं में से भी एक है. वे अपने गले में अक्सर वासुकी नाग धारण किए हुए रहते हैं जो यह दर्शाता है कि वे हिंदू धर्म में सबसे शक्तिशाली देवताओं में से एक है. भगवान भोलेनाथ के अन्य रूपों में शिवलिंग की पूजा अर्चना की जाती है शिवलिंग की पूजा सबसे पवित्र मानी गई है. भक्त अपने भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न को करने के लिए शिवलिंग की पूजा करते हैं सावन के महीने में शिवलिंग की पूजा करने को लेकर शिवपुराण में विशे महत्व बताए गए हैं. SABAN 2024 सावन के महीने में शिवभक्त शिव मदिंरों में पहुंचकर पूजा अर्चना करते है और अपनी मनोकामनाएं भगवान शिव से करते हैं कई लोग अपने घरों में ही भगवान शिव की पूजा करते हैं.  इस बार का सावन बेहद खास माना जा रहा है. इस बार सावन महीने की शुरूआत सोमवार के दिन ही हो गया है. और इसका समापन भी सोमवार के दिन ही होगा. बता दें, सावन महीने का वह पहला दिन आज 22 जुलाई यानी सोमवार से शुरू हो चुका है. सावन का यह पवित्र महीना 19 अगस्त को खत्म होगा. इस दिन भी सोमवार ही पड़ रहा है.   SABAN 2024 सावन में शिव पूजा का महत्व मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की विधिवत पूजा करने से सारी नकारात्मकता दूर भाग जाती है. शनि दोष भी दूर हो जाता है. बता दें, सावन में सोमवार को सोमवारी और मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है. सोमवार का दिन भगवान शिव को पूरी तरह से समर्पित होता है इसद दिन भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग की विशेष पूजा करने का विधान है. सावन के प्रत्येक सोमवार को देवों के देव महादेव की आराधना और विधिवत पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से मनोवांछित फल मिलता है और विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होती है. सावन में अगर आप भी भगवान शिव को प्रसन्न कर उनकी असीम कृपा पाना चाहते हैं, तो आपको इसके लिए सही विधि, पूजा सामग्री और पूजा करने के नियमों का पता होना अति आवश्यक है. तो आइए हम आपको विस्तार से बताते हैं कि सावन के पावन महीने में भगवान शिव को पूजा करने की विधि, नियम और पूजन सामाग्री के बारे में.. SABAN 2024 भगवान शिव की पूजा सोमवार को क्यों होती है बता दें, सोमवार का दिन भगवान शिव के हैं उनके भक्त उनकी किसी भी दिन पूजा अर्चना कर सकते हैं लेकिन भगवान शिव की पूजा सोमवार के दिन करने से शिव भक्त और उसके परिवार को बहुत लाभ प्राप्त होते हें. पौराणिक कथा के मुताबिक, भगवान शिव ने एक बार सोमवार के दिन चंद्रमा देवता को श्राप से बचाया था, इसी कारण सोमवार का नाम चंद्र (सोम) के नाम पर रखा गया. उसी समय से सोमवार के दिन शिव पूजा के विधान की शुरूआत हुई. मान्यता है कि बाबा भोलेनाथ शीघ्र ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं. अपने भक्तों के द्वारा सिर्फ केवल एक गिलास पानी चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं. शिव पूजा के लिए सामग्री मान्यता है कि भगवान शिव को प्रसन्न करना बेहद आसान है. अगर आप घर में भगवान शिव की पूजा अर्चना कर रहे है तो आपको सभी अनुष्ठानों के साथ उचित पूजा करने के लिए कुछ जरूरी चीजों की आवश्यकता होगी. इसमें आपको कच्ची दूध, जल (गंगा जल भी हो सकता है), चंदन, बेल पत्र, धतूरे के फूल, फल सहित, दही, शहद, जनेऊ, सफेद मुकुट फूल, अगरबत्ती या धूपबत्ती, घी, पंच पात्र, कपूर, भस्म, पीतल का दीपक, नारियल, साफ कपड़ा, घंटी की जरूरत होगी.  सावन माह में कालाष्टमी: शुभ तिथि, पूजा विधि और महत्व कैसे करें भगवान शिव की पूजाः भगवान शिव की पूजा सोमवार के दिन इस विधि से करनी चाहिए.  सुबह-सबेरे जल्दी से उठ जाएं उसके बाद स्नान करके साफ सुथरे कपड़े पहनें. पूजा स्थल को अच्छे से साफ करें और वहां भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें. और पूजा के दौरान बाबा भोलेनाथ को फूल, बिल्वपत्र, धूप-दीप अर्पित करें. इसके बाद भगवान शिव के शिवलिंग का अभिषेक दूध, जल, दही, शहद और गंगाजल से करें. SABAN 2024 अभिषेक के दौरान आप ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. और अभिषेक के बाद शिवलिंग को स्वच्छ कपड़े से पोछकर साफ कर लें. इसके बाद भगवान शिव को भोग के रुप में मिठाई, फूल, फल चढ़ाएं. आप बाबा भोलेनाथ को उनकी प्रिय चीजें जैसे पान, भांग और बेलपत्र आदि भी चढ़ा सकते हैं. पूजा के दौरान आप शिवलिंग के पास दिया या दूपक जरूर जलाएं. यह भगवान शिव के द्वारा दिए गए बुद्धि और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक होता है.  इसके पश्चात आप महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें. प्रत्यके सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों को आशीर्वाद देते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं. और अंत में आप आरती करके प्रार्थना करें और उनका SABAN 2024 आशीर्वाद लेकर पूजा का समापन करें और अपने परिवार के सभी सदस्यों के बीच प्रसाद का वितरण करें. आपको बता दें, भगवान शिव की पूजा के दौरान किसी भी चमड़े की वस्तुओं का प्रयोग न करें, क्योंकि बाबा भोलेनाथ शाकाहारी हैं. आप सावन के पावन महीने में पूजा के दिन मांसाहार और शराब का सेवन करने से

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Kalashtami 2024:सावन माह में कालाष्टमी: शुभ तिथि, पूजा विधि और महत्व

सावन में मंगलकारी कालाष्टमी! पाएं शिव कृपा, जानें पूजा विधि व शुभ मुहूर्त (Sawan mein Mangalkari Kalashtami! Payein Shiv Krupa, Janen Puja Vidhi wa Shubh Muhurt) सावन माह की कालाष्टमी भगवान काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह माह में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। Kalashtami 2024 मासिक कालाष्टमी का व्रत अपने आप में विशेष माना गया है। साधक इस दिन भैरव बाबा की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भक्त काल भैरव की पूजा सच्ची श्रद्धा के साथ करते हैं वे उनकी सदैव रक्षा करते हैं। साथ ही भय और बाधाओं को दूर करने में उनकी मदद करते हैं। इस माह यह पर्व 28 जुलाई को मनाया जाएगा। प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को Kalashtami 2024 कालाष्टमी मनाई जाती है. मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी को भैरवाष्टमी भी कहा जाता है, क्योंकि यह काल भैरव, जिनको भैरवनाथ भी कहा जाता है, को समर्पित है. काल भैरव को भगवान शिव का उग्र स्वरूप माना जाता है, इसलिए इस दिन भगवान शिव और उनके स्वरूप काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी विशेष पूजा अर्चना की जाती है. देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि क्यों जाते हैं पाताल लोक  कालाष्टमी को सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक माना जाता है। यह पावन दिन भगवान काल भैरव की पूजा के लिए समर्पित है। ऐसा माना जाता है कि कालाष्टमी हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस शुभ समय में पूजा-पाठ करते हैं, उन्हें दुख-दरिद्रता से छुटकारा मिलता है। मासिक कालाष्टमी शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार अष्टमी तिथि 27 जुलाई, 2024 को रात 9 बजकर 20 मिनट पर शुरू होगी, जिसका समापन 28 जुलाई, 2024 को रात 7 बजकर 27 पर होगी. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार कालाष्टमी 28 जुलाई को मनाया जाएगा. मासिक कालाष्टमी की पूजा विधि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।घर के मंदिर या पूजा स्थान को साफ करें और गंगाजल से धो लें।भगवान काल भैरव की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।काल भैरव को दीप, नैवेद्य, फूल, धूप, और फल अर्पित करें।”ॐ काल भैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें।व्रत कथा पढ़ें या सुनें।रात भर जागरण करें और भजन-कीर्तन करें।दूसरे दिन सुबह, सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। Kalashtami 2024 कालाष्टमी का महत्व Kalashtami 2024 कालाष्टमी का व्रत भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने का एक विशेष अवसर है।मान्यता है कि इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।कालाष्टमी का व्रत भय, रोग, और संकटों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। Kalashtami 2024 भैरव बाबा प्रसन्न कैसे करें इस दिन भगवान बटुक भैरव को कच्चा दूध अर्पित करें और काल भैरव को शराब अर्पित करें. बता दें कि कई लोग इस दिन उन्हें शराब का भोग लगाते हैं. इसके अलावा हलुआ, पूरी और मदिरा उनके प्रिय भोग हैं. इमरती, जलेबी और 5 तरह की मिठाइयां भी अर्पित की जाती हैं.  Kalashtami 2024:कालाष्टमी इस पर विशेष ध्यान दें जो लोग व्रत नहीं रख सकते हैं, वे भी इस दिन भगवान काल भैरव की पूजा कर सकते हैं।पूजा करते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।भगवान काल भैरव को तामसिक भोग नहीं लगाना चाहिए।पूजा के दौरान मन को शांत रखें और भक्तिभाव से भगवान का ध्यान करें। कालाष्टमी के दिन भूलकर भी न करें ये कार्य (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Sawan 2024: Celebrate a Blessed सावन माह 22 जुलाई से होगा शुरू, दुर्लभ संयोगों से बनेगा खास !

Sawan 2024: Celebrate a Blessed Month with 5 Mondays & Divine Yogas ! सावन का पावन महीना 22 जुलाई 2024 से सोमवार से शुरू होकर 19 अगस्त 2024 को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगा। इस साल सावन मास 5 सोमवार और 2 प्रदोष व्रत लेकर आएगा। सावन 2024: 5 सोमवार और दिव्य योगों से बना होगा अति विशेष | सावन 2024 स्पेशल दुर्लभ संयोगों से इस बार सावन बेहद खास बन रहा है: धार्मिक महत्व Sawan Somwar Dates 2024 : सनातन धर्म में श्रावण मास का विशेष धार्मिक महत्व है। इसे साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। श्रावण मास में महादेव की पूजा बड़े ही भक्ति भाव से की जाती है। Sawan 2024 इस बार का श्रावण मास दो दुर्लभ संयोगों से भरा हुआ है। आचार्य दिवाकर मिश्रा के अनुसार इस बार श्रावण मास सोमवार 22 जुलाई से ( Sawan 2024 Start Date ) से प्रारभ हो रहा है और पूरे श्रावण में 5 सोमवार के दिन पड़ेंगे। ऐसे में श्रावण मास में भक्तों के लिए दुर्लभ संयोग है। भगवान शिव के दिन सोमवार को प्रीति आयुष्मान योग के साथ सवार्थसिद्धि योग भी बन रहा है। इसको लेकर ऐसी मान्यता है कि इस योग में जो व्यक्ति पूजा करता है, उसको भगवान शिव से कई गुणा फल की प्राप्ति होती है। ज्योर्तिविदों के अनुसार सावन का महिना भगवान शिव का प्रिय महीना है और इस पूरे माह भगवान शिव की पूजा आराधना की जाती है और श्रद्धालु पूरे माह व्रत भी रखते है। सावन मास के पहले दिन खरीदें यह 10 सामग्री, अच्छे दिनों की होगी शुरुआत Sawan 2024: सभी शिव मंदिरों में होंगे विभिन्न आयोजन प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी राजस्थान के सभी शिव मंदिरों में सावन मास के दौरान विभिन्न आयोजन होंगे। मंदिरों में सावन मास की तैयारियां भी शुरू होने लगी है। लालसोट के घाटेश्वरनाथ महादेव मंदिर, चंद्रेश्वरनाथ महादेव मंदिर, मायला कुआं के पंचेश्वरनाथ महादेव मंदिर एवं मालेश्वर महादेव मंदिर समेत सभी शिव मंदिरों में इस दौरान कावड़ियों द्वारा जलाभिषेक किया जाएगा। इसके अलावा फूल बंगला झांकी, विशेष पूजा अर्चना एवं भजन संध्या समेत विभिन्न आयोजन भी संपन्न होंगे। Sawan 2024 बिल्व पत्र चढ़ाने का महत्व भगवान शिव को भक्त प्रसन्न करने के लिए बिल्व पत्र चढ़ाते है। Sawan 2024 इस संबंध में पौराणिक कथा के अनुसार जब 89 हजार ऋषियों ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए परमपिता ब्रह्मा से पूछा तो ब्रह्मदेव ने बताया कि महादेव 100 कमल के फूल चढ़ाने पर इतने प्रसन्न नहीं होते जितना कि एक नील कमल चढ़ाने पर होते हैं, वैसे ही 1000 नील कमल के बराबर एक बिल्व पत्र, 1000 बिल्व पत्र चढ़ाने के बराबर एक समी पत्र का महत्व होता है। 3. ग्रहों की विशेष स्थिति: इस बार सावन मास में ग्रहों की स्थिति भी बहुत ही अनुकूल है। इन ग्रहों की अनुकूल स्थिति के कारण इस साल सावन मास और भी अधिक फलदायी बन रहा है। 4. महत्व: सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय होता है। इस महीने में उनकी पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं, पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, सावन मास पवित्रता और आध्यात्मिकता का महीना भी माना जाता है। निष्कर्ष: पांच सोमवार, शुभ योगों और ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण सावन 2024 अत्यंत विशेष और फलदायी होने वाला है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं। इसलिए, इस अवसर का लाभ उठाएं और भगवान शिव की पूजा-अर्चना करें। Sawan Vrat Tyohar 2024: सावन मास के व्रत और त्योहार 22 जुलाई सोमवार सावन आरंभ 24 जुलाई बुधवार संकष्टी चतुर्थी 25 जुलाई गुरुवार नाग पंचमी 29 जुलाई सावन का दूसरा सोमवार 31 जुलाइ बुधवार कामिका एकादशी 02 अगस्त शुक्रवार मासिक शिवरात्रि 04 अगस्त रविवार हरियाली अमावस्या 05 अगस्त सावन का तीसरा सोमवार 06 अगस्त मंगलवार मंगला गौरी तीज 07 अगस्त बुधवार हरियाली तीज 09 अगस्त शुक्रवार नाग पंचमी (शास्त्रीय) 12 अगस्त सावन का चौथा सोमवार 16 अगस्त शुक्रवार पुत्रदा एकादशी 19 अगस्त सोमवार रक्षाबंधन ( Raksha Bandhan 2024 Date ) (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Sankashti Chaturthi List: 2024 संकष्टी चतुर्थी: भगवान POWER FULL गणेश का आशीर्वाद और मोक्ष प्राप्ति का पर्व

Sankashti Chaturthi 2024 List: संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है, जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर लोग भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi URL) भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन, भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी मनाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं. संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) भगवान गणेश को समर्पित एक हिंदू त्योहार है, जो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है. इस दिन, भक्त भगवान गणेश की पूजा करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. माना जाता है कि संकष्टी चतुर्थी मनाने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के कष्ट दूर करते हैं. संकष्टी चतुर्थी, हिंदू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार, भगवान गणेश को समर्पित है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। भगवान गणेश, बुद्धि, बल और विवेक के देवता, अपने भक्तों की सभी परेशानियों और विघ्नों को दूर करते हैं, इसलिए उन्हें विघ्नहर्ता और संकटमोचन भी कहा जाता है। संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है “संकट को हरने वाली चतुर्थी“। इस दिन भक्त भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर अपने दुखों से मुक्ति प्राप्त करते हैं। पुराणों के अनुसार, चतुर्थी के दिन गौरी पुत्र गणेश की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। 2024 में संकष्टी चतुर्थी: संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि: संकष्टी चतुर्थी का महत्व: इस दिन गणपति जी की पूजा करने से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं। संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की पूजा और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर है। इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखने से बुद्धि, विवेक और ज्ञान प्राप्त होता है। Sankashti Chaturthi कब है संकष्टी चतुर्थी ? संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के चौथे दिन मनाई जाती है. हिन्दू पंचांग के अनुसार चतुर्थी हर महीने में दो बार आती है, जिसे लोग बहुत श्रद्धा से मनाते हैं. संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखकर लोग भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करते है. पूर्णिमा के बाद आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं, वहीं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं. संकष्टी चतुर्थी को भगवान गणेश की आराधना करने के लिए विशेष दिन माना गया है. शास्त्रों के अनुसार माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी बहुत शुभ होती है. यह दिन भारत के उत्तरी और दक्षिणी राज्यों में ज्यादा धूम-धाम से मनाया जाता है. धर्म की खबरें Sankashti Chaturthi संकष्टी चतुर्थी के अलग-अलग नाम भगवान गणेश को समर्पित इस त्योहार में श्रद्धालु अपने जीवन की कठिनाईओं और बुरे समय से मुक्ति पाने के लिए उनकी पूजा-अर्चना और उपवास करते हैं. संकष्टी चतुर्थी को कई अलग-अलग नामों से भी जाना जाता है. कई जगहों पर इसे संकट हारा कहते हैं तो कहीं-कहीं सकट चौथ के नाम से जाना जाता है. यदि किसी महीने में यह पर्व मंगलवार के दिन पड़ता है तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है. अंगारकी चतुर्थी 6 महीनों में एक बार आती है और इस दिन व्रत करने से जातक को पूरे संकष्टी का लाभ मिल जाता है. दक्षिण भारत में लोग इस दिन को बहुत उत्साह और उल्लास से मनाते हैं. गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें Sankashti Chaturthi:2024 में संकष्टी चतुर्थी कब कब है? 29 जनवरी 2024 दिन सोमवार को संकष्टी चतुर्थी 28 फरवरी 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी 28 मार्च 2024 दिन गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी 27 अप्रैल 2024 दिन शनिवार को संकष्टी चतुर्थी 26 मई 2024 दिन रविवार को संकष्टी चतुर्थी 25 जून 2024 दिन मंगलवार को अंगारकी चतुर्थी 24 जुलाई 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी 22 अगस्त 2024 दिन गुरुवार को संकष्टी चतुर्थी 21 सितंबर 2024 दिन शनिवार को संकष्टी चतुर्थी 20 अक्टूबर 2024 दिन रविवार को संकष्टी चतुर्थी 18 नवंबर 2024 दिन सोमवार को संकष्टी चतुर्थी 18 दिसंबर 2024 दिन बुधवार को संकष्टी चतुर्थी (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Gurupurnima 2024:गुरुपूर्णिमा पर संस्कृत में शुभकामना सन्देश : Happy gurupurnima wishes in sanskrit

गुरुपूर्णिमा पर संस्कृत में शुभकामना सन्देश happy gurupurnima wishes in sanskrit गुरुपूर्णिमा के इस पावन अवसर पर, मैं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। गुरु को ज्ञान, आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्गदर्शक माना जाता है। वे ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं और अज्ञान के अंधकार को दूर करते हैं। इस शुभ दिन पर, हम अपने गुरुओं के प्रति अपनी कृतज्ञता और आदर व्यक्त करते हैं। यहाँ कुछ संस्कृत शुभकामनाएं दी गई हैं जिनका उपयोग आप अपने गुरुओं और प्रियजनों को भेजने के लिए कर सकते हैं: (गुरु ब्रह्मा हैं, गुरु विष्णु हैं, गुरु ही शिव हैं। गुरु ही परमेश्वर हैं।) (गुरु ही धर्म हैं, गुरु ही परमगुरु हैं। गुरु ही ज्ञान और विद्या के दाता हैं। गुरु ही गुरुओं के गुरु हैं।) (हे गुरुदेव! आप ही भवसागर से पार जाने का द्वार हैं।) (शिष्य अपने कल्याण के लिए गुरु के चरणों में शरण लेता है।) (गुरु दक्षिणा ज्ञानदान है।) आप इन शुभकामनाओं में अपनी भावनाओं और विचारों को भी शामिल कर सकते हैं। गुरुपूर्णिमा हमें शिक्षा और ज्ञान के महत्व को याद दिलाता है। यह हमें अपने गुरुओं का सम्मान करने और उनके द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का पालन करने का अवसर प्रदान करता है। इस शुभ अवसर पर, मैं सभी को गुरुपूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। ॐ गुरुभ्यो नमः गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं संदेश – Happy Guru Purnima Wishes In Hindi गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आप अपने अभिभावकों, शुभचिंतकों और गुरुओं के साथ गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं संदेश को साझा कर पाएंगे, जो आपके गुरुओं का सम्मान करेंगी। Happy Guru Purnima Wishes In Hindi में कुछ इस प्रकार दी गई हैं: गुरु जी है आपको मेरा नमस्कार, आपके ज्ञान से ही मेरा हुआ है व्यापक विस्तार।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। गुरु की उपस्थिति में ही मानव अज्ञानता के अंधकार से आज़ादी पाकर, ज्ञान के प्रकाश में प्रवेश करता है।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। एक सच्चा गुरु ही सही अर्थों में मानव के जीवन में आत्मविश्वास का बीजारोपण करता है।आपको गुरुपूर्णिमा की शुभकामनाएं। गुरु की उपस्थिति ही मानव को निर्भय बनाती है और मानव जीवन में साहस का संचार करती है।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। एक गुरु की उपस्थिति ही किसी भी सभ्य समाज के लिए प्रेरणा बनने का कार्य करती है।आपको गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं। गुरु पूर्णिमा का महत्व: Guru Purnima 2024:गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें गुरु पूर्णिमा की पूजा विधि: गुरु पूर्णिमा का संदेश: गुरु पूर्णिमा हमें सिखाती है कि ज्ञान और आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए गुरु का मार्गदर्शन कितना महत्वपूर्ण है। यह दिन हमें अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और उनके द्वारा दिए गए शिक्षाओं का पालन करने की प्रेरणा देता है।

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Guru Purnima 2024: गुरु पूर्णिमा के दिन बना रहा दुर्लभ संयोग, जॉब, करियर और विवाह की अड़चनें होंगी दूर

गुरु पूर्णिमा का पर्व साल 2024 में 21 जुलाई, 2024 रविवार के दिन पड़ रहा है. इस दिन का हिंदू धर्म में विशेष महत्व बताया गया है. इस तिथि पर महाभारत के रचयिता ऋषि वेद व्यास जी का जन्म हुआ था इसीलिए इस दिन को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है. साथ ही इस तिथि को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है. गुरु पूर्णिमा पर बन रहा दुर्लभ संयोग हिंदू पंचांग के अनुसार, गुरु पूर्णिमा के दिन सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो पूरे दिन रहने वाला है। इसके अलावा उत्तराषाढ़ा नक्षत्र भोर से लेकर मध्यरात्रि 12 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। इसके साथ ही प्रीति योग, विष्कुंभ योग का निर्माण हो रहा है। ग्रहों की स्थिति की बात करें, तो कर्क राशि में सूर्य और शुक्र विराजमान है, जिससे दोनों ग्रहों की युति से शुक्रादित्य योग बन रहा है। वृषभ राशि में मंगल और गुरु बृहस्पति विराजमान रहेंगे। इसके साथ ही राहु मीन में, केतु कन्या राशि में और शनि अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में है, जिससे शश राजयोग बन रहा है। इसके साथ ही बुध सिंह राशि में और चंद्रमा मकर राशि विराजमान रहेंगे। गुरु के वृषभ राशि में रहने से कुबेर राजयोग बन रहा है। इसके साथ ही सूर्य और शनि षडाष्टक योग का निर्माण कर रहे हैं। गुरुपूर्णिमा का महत्व (वेदों और पुराणों के अनुसार श्लोक सहित): गुरुपूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा या वेद व्यास जयंती भी कहा जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन, हम गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता और आदर व्यक्त करते हैं। वेदों और पुराणों में गुरु को ज्ञान, आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्गदर्शक बताया गया है। गुरु अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश प्रदान करते हैं। गुरुपूर्णिमा के महत्व को दर्शाते हुए कुछ श्लोक: गुरुपूर्णिमा के दिन, लोग अपने गुरुओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए पूजा करते हैं, उपहार देते हैं, और ज्ञान प्राप्त करने के लिए उनसे आशीर्वाद लेते हैं। गुरु पूर्णिमा 2024 तिथि (Guru Purnima 2024 Tithi)- गुरु पूर्णिमा के दिन से कई राशियों की किस्मत खुलने वाली है इन राशियों की जॉब, करियर और विवाह में चल रही दिक्कतों का अंत हो जाएगा. जानें कौन सी हैं वो लकी राशियां जिन को गुरु पूर्णिमा के दिन से फायदा होगा. मेष राशि: वृषभ राशि: मिथुन राशि: कर्क राशि: सिंह राशि: कन्या राशि: तुला राशि: वृश्चिक राशि: धनु राशि:

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Guru Purnima 2024:गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें, क्या न करें

आज भारत भर में Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जा रहा है। आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहते हैं तथा इस दिन गुरु पूजा का विधान है। चारों वेदों के प्रथम व्याख्याता महर्षि वेद व्यास जी का पूजन आज के दिन किया जाता है। आइए जानते हैं आज क्या काम किए जा सकते है और क्या नहीं करें- Guru Purnima गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें आज के दिन महर्षि वेद व्यास जी के समक्ष घी का दीया जलाएं, साथ ही भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें। पीपल में जल चढ़ा कर घी का दीपक प्रज्वलित करके श्री‍हरि विष्णु जी का ध्यान करें। पितरों के नाम तर्पण करें। आज श्रीमद्‍भागवदगीता का पाठ करें। भगवान सत्यनारायण पूजन करके कथा वाचन करें। गुरु पूर्णिमा का दिन विद्या या सिद्धि की दृष्‍टि से बहुत खास है, अत: इस दिन नया सीखने का कार्य प्रारंभ करें। केसर का तिलक लगाएं। मंदिर में पीली वस्तुओं का दान करें।  यदि कोई गुरु हो तो गुरु से मंत्र प्राप्त करें। पीली वस्तुओं का सेवन करें। घर के बड़े-बुजुर्गों तथा अपने गुरु, शिक्षक के पैर छुएं तथा भेंट अवश्य दें। गुरु पूजन से बृहस्पति दोष समाप्त हो जाता है, अत: देवगुरु बृहस्पति का पूजन तथा उनके मंत्रों का जाप करें।  गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरूदेवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥ मंत्र का जान करें। Guru Purnima 2024: 20 या 21 जुलाई? कब है गुरु पूर्णिमा ?  Guru Purnima क्या न करें  किसी भी प्रकार का मांगलिक कार्य न करें। क्रोध, ईर्ष्या, किसी का अपमान न करें।  मांस, मटन, मदिरा से दूर रहें। स्त्री प्रसंग से दूर रहें। किसी भी प्रकार का तामसिक भोजन न करें। यात्रा न करें। सुख सुविधा का त्याग करें। यदि आपने व्रत रखा हैं तो किसी भी तरह की बहस से दूर रहें। गुरु पूर्णिमा के दिन क्या करें: गुरु पूजन: Guru Purnima धार्मिक कार्यक्रम: दान-पुण्य: अन्य कार्य: गुरु पूर्णिमा के दिन क्या न करें गुरु पूर्णिमा के दिन किसी से झगड़ा नहीं करना चाहिए। किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावनाओं को मन में नहीं आने देना चाहिए। झूठ बोलना, चोरी करना, और किसी को हानि पहुंचाना जैसे पापपूर्ण कार्य नहीं करने चाहिए। गुरुओं का अपमान नहीं करना चाहिए। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Guru Purnima 2024: 20 या 21 जुलाई? कब है गुरु पूर्णिमा ? 

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 20 जुलाई दिन शनिवार को शाम 05 बजकर 59 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि की समाप्ति अगले दिन 21 जुलाई, 2024 दिन रविवार को दोपहर 03 बजकर 46 मिनट पर होगी। उदयातिथि को देखते हुए गुरु पूर्णिमा का पर्व 21 जुलाई को मनाया जाएगा। Kawad Yatra 2024: 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू, शिवजी की कृपा पाने के लिए यात्रा के दौरान अपनाएं ये नियम गुरु पूर्णिमा, जिसे व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिन्दू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस वर्ष, गुरु पूर्णिमा 21 जुलाई 2024 को रविवार के दिन मनाई जाएगी।……Guru Purnima Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का महत्व Guru Purnima गुरु पूर्णिमा के उत्सव Guru Purnima गुरु पूर्णिमा का संदेश Guru Purnima गुरु पूर्णिमा हमें ज्ञान, शिक्षा और गुरुओं के महत्व को याद दिलाता है। यह हमें सिखाता है कि हमेशा अपने गुरुओं का सम्मान करें और उनसे ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास करें। भगवान विष्णु के मंत्र 1. ॐ नमोः नारायणाय।। 2. ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय।। 3. ॐ श्री विष्णवे च विद्महे वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।। 4. शान्ताकारम् भुजगशयनम् पद्मनाभम् सुरेशम् विश्वाधारम् गगनसदृशम् मेघवर्णम् शुभाङ्गम्। लक्ष्मीकान्तम् कमलनयनम् योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुम् भवभयहरम् सर्वलोकैकनाथम्।।

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Swapna Shastra: सपने में इन 5 चीजों का दिखना मां लक्ष्मी के आगमन का होता है संकेत, अगर दिख जाए तो लग जाती है लॉटरी

Swapna Shastra: सपने में इन 5 चीजों का दिखना मां लक्ष्मी के आगमन का होता है संकेत अच्छे दिन आने से पहले अक्सर हमारे जीवन में कुछ शुभ घटनाएं घटित होती हैं। अगर आपको भी जीवन में सुबह या अचानक कुछ ऐसे बदलाव नजर आते हैं तो समझ जाइए कि सौभाग्य का द्वार खुलने ही वाला है। हालांकि कई सपने अच्छे तो कुछ सपने बुरे और डरा देने वाले भी होते हैं। स्वप्न शास्त्र की मानें तो हर Swapna Shastra सपना कोई ना कोई संकेत देता है। इन्हीं में से एक सपने में बारिश या पानी का दिखना है। आइए ज्योतिषी चिराग बेजान दारुवाला से जानते हैं कि अगर आप सपने में पानी बरसता हुआ देखते हैं तो यह किस तरफ इशारा करता है।  सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ? ध्यान रखें: लॉटरी जीतने की संभावना: (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Devshayani Ekadashi:देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि क्यों जाते हैं पाताल लोक

पद्म पुराण के अनुसार आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी (17 जुलाई) के दिन भगवान विष्णु पाताल लोक जाते हैं और देवउठनी एकादशी तक वहीं निवास करते हैं। इसे हरिशयनी एकादशी भी कहते हैं। भगवान विष्णु के इन चार माह तक पाताल गमन के पीछे एक घटना है। विष्णु ने जब वामन रूप धारण कर असुर राज बलि से तीन पग भूमि दान में मांगी थी, तब बलि ने उन्हें अपना सर्वस्व दान कर दिया था। और भगवान ने उन्हें पाताल लोक में रहने का आदेश दिया था। भगवान बलि की दानशीलता और वचनबद्धता को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उससे वरदान मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा, ‘प्रभु यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मेरे साथ पाताल लोक में निवास करें।’ विष्णु बलि के आग्रह को मना नहीं कर पाए क्योंकि वे वचनबद्ध थे। वे बलि के साथ पाताल चले गए। इधर देवि लक्ष्मी विष्णु के पाताल लोक में जाने पर परेशान हो गईं। उन्होंने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर भगवान विष्णु को पाताल लोक से मुक्त करवाया। इस पर भगवान विष्णु ने राजा बलि को वरदान दिया कि हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देव प्रबोधनी एकादशी) तक पाताल में निवास करेंगे। विष्णु के पाताल गमन के इस समय को ही चातुर्मास कहते हैं। Devshayani Ekadashi देवशयनी एकादशी से जुड़ी एक अन्य कथा भी है। भगवान विष्णु का शंखचूड़ नाम के एक असुर से लंबे समय तक भयंकर युद्ध चला। अंत में भगवान विजयी हुए। लेकिन इस युद्ध में वे काफी थक गए थे। देवताओं ने आषाढ़ शुक्ल एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा कर उनसे निवेदन किया कि आप कुछ समय विश्राम करें और सृष्टि संचालन का भार भगवान शंकर को सौंप दें। देवताओं की विनती पर विष्णु देवलोक के चार प्रहर की अवधि के लिए शयन करने चले गए, जो पृथ्वी लोक के चार माह के बराबर होते हैं। तब से आषाढ़ शुक्ल की एकादशी हरिशयनी एकादशी के नाम से जानी जाती है। देवशयनी एकादशी पर श्रीहरि पाताल लोक नहीं जाते हैं, बल्कि क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं। यह थोड़ी भ्रामक बात हो सकती है, क्योंकि: देवशयनी एकादशी का महत्व: देवशयनी एकादशी व्रत जुलाई में किस दिन है? जान लें सही तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व निष्कर्ष: Devshayani Ekadashi देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन होते हैं, पाताल लोक में नहीं। यह त्योहार आध्यात्मिक विकास और आत्म-शोध का अवसर प्रदान करता है। (Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें.)

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Gold:सोना-चांदी शुभ क्यों होते हैं पूजा में…

सोना और चांदी को पूजा में शुभ मानने के कई कारण हैं: धर्मग्रंथों में सोने को सर्वश्रेष्ठ धातु स्वीकार किया गया है। इसी कारण देवी-देवताओं की मूर्तियां, आभूषण, सिंहासन आदि सोने से बनाए जाते हैं या सोने का आवरण चढ़ाया जाता है। सोने को कभी जंग नहीं लगता और न ही यह धातु विकृत होती है। इसकी कांति सदा बनी रहती है जिस कारण इसे पवित्र माना जाता है। इसी तरह चांदी को भी पवित्र धातु माना गया है। Gold सोना-चांदी आदि धातुएं केवल जल अभिषेक से ही शुद्ध हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार सोना बल और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है। यद्यपि मंदिरों में तांबा, पीतल और कांसे के पात्र भी उपयोग में लाए जाते हैं, किंतु एल्युमीनियम, लोहा और स्टील के पात्र पूजा-अर्चना में पूर्णतया वर्जित हैं। Gold धार्मिक महत्व: वैज्ञानिक आधार: चमत्कारी फल देता है चांदी का प्रयोग, जानिए 17 आश्चर्यजनक बातें Gold सामाजिक महत्व: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सोने और चांदी का पूजा में उपयोग व्यक्तिगत श्रद्धा और विश्वास का विषय है। लेकिन, इन धातुओं से जुड़े धार्मिक, वैज्ञानिक और सामाजिक महत्व इनको पूजा के लिए विशेष बनाते हैं।

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Chamatkari Phal चमत्कारी फल देता है चांदी का प्रयोग, जानिए 17 आश्चर्यजनक बातें

चांदी सदियों से सिर्फ अपनी चमक और खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अनेक Chamatkari Phal चमत्कारी गुणों के लिए भी जानी जाती रही है। वैज्ञानिकों और चिकित्सकों द्वारा किए गए शोधों से पता चला है कि चांदी का उपयोग स्वास्थ्य, धन, और समृद्धि लाने के लिए भी किया जा सकता है। चांदी अत्यंत शुभ, शीतल, शांतिदायक और शाही धातु है। यह ऐश्वर्य और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती है। जीवन में चांदी का अधिकाधिक प्रयोग राजा महाराजा के काल से चला आ रहा है। इन 17 बातों से जानते हैं कि क्यों चांदी है 1. कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वालों के लिए चांदी का इस्तेमाल बेहतर परिणाम देता है लेकिन मेष, सिंह और धनु के लिए चांदी बहुत अच्छी नहीं होती। बाकी के लिए मध्यम है। 2. चांदी के बर्तन जिस घर में होते हैं वहां सुख, वैभव और संपन्नता आती है। अत: घर में पीतल, तांबा और चांदी के ही बर्तन होना चाहिए। लोहे, प्लास्टिक या स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। सावन मास के पहले दिन खरीदें यह 10 सामग्री, अच्छे दिनों की होगी शुरुआत 3. ज्योतिष में चांदी का संबंध चंद्रमा और शुक्र से है। चांदी शरीर के जल तत्व और कफ को नियंत्रित करती है। चांदी के प्रयोग से मन मजबूत और दिमाग तेज होता है। साथ ही चांदी के प्रयोग से चंद्रमा की समस्याओं को शांत किया जा सकता है। 4. चांदी के ग्लास में पानी पीने से सर्दी-जुकाम की समस्या दूर होती है तो वहीं चांदी के चम्मच से शहद खाने से शरीर विषमुक्त होता है। जिन लोगों को भावनात्मक परेशानियां ज्यादा हैं, वो चांदी का प्रयोग सावधानी से करें। 5. चांदी के बर्तन में केसर घोलकर माथे पर टीका लगाएं। सुख-शांति, समृद्धि और प्रसिद्धि प्राप्त होगी। यह प्रयोग गुरुवार को करें। 6. चांदी की डिबिया में जड़ : अर्क (अकोड़ा), छाक (छिला), खैर, अपामार्ग, पीपल की जड़, गूलर की जड़ खेजड़े की जड़, दुर्वा एवं कुशा की जड़ को एक चांदी की डिब्बी में रखकर नित्य पूजा करें। जीवन में कभी असफलता नहीं आएगी, नवग्रह शांत रहेंगे सुख सम्पत्ति की बढ़ोतरी होगी। धन लक्ष्मी प्राप्ति के टोटकों में यह टोटका अनुभूत सिद्ध प्रयोग है। 7. राहु के प्रकोप को दूर करने के लिए कम से कम 200 ग्राम ठोस चांदी का एक हाथी बनवाएं और उसे अपने घर में कहीं उचित स्थान पर रखें। बुधग्रह अष्टम में होकर खराब प्रभाव दे रहा है तो चांदी की नथ पहनें। 8. राहु के उपाय के लिए भोजन कक्ष में बैठकर चांदी की थाली में भोजन करें। केतु के अशुभ स्थिति से बचाव हेतु दूध में अंगूठा डालकर उसे चूसना चाहिए। सूर्य और चन्द्र की वस्तु यथा स्वेत वस्त्र, चांदी और तांबा दान करना चाहिए। 9 . यदि संभव हो तो हमेशा चांदी के बर्तन में पानी पिएं। चांदी बर्तन ना हो तो गिलास में पानी भरें और उसमें चांदी की अंगुठी डालकर पानी पीएं। यह प्राचीन, सरल और बहुत चमत्कारी तांत्रिक उपाय है। इससे धन संबंधी मामलों में राहत मिलती है। 10. मेहनत करने के बाद भी फल नहीं मिल रहा है तो किसी भी सोमवार की रात जब चंद्रोदय हो जाए तो उसके बाद अपने पलंग के चारों कोनों में चांदी की कील ठोक दें। चांदी की कील छोटी-छोटी भी लगाई जा सकती है। इस तांत्रिक उपाय से पैसों की समस्याएं दूर होने लगती हैं। 11. यदि आपके पास धन टिकता नहीं है तो महीने के पहले शुक्रवार को चांदी की डिब्बी में काली हल्दी, नागकेसर व सिंदूर को साथ रखकर भगवती लक्ष्मीजी के चरणों से स्पर्श करवाकर धन रखने के स्थान पर रख दें। निश्‍चित ही लाभ होगा। 12. यदि आपका व्यवसाय कम चल रहा है तो महीने के पहले गुरुवार को पीले कपड़े में काली हल्दी, 11 गोमती चक्र, 1 चांदी का सिक्का और 11 कौड़ियां बांधकर 108 बार निम्नलिखित मंत्र का जप कर अपने कार्य स्थल अथवा दुकान आदि के पवित्र स्थान में रख दें।   मंत्र- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः। 13. चांदी की कटोरी में थोड़ा सा सूखा धनिया रखकर उसमें चांदी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति रखें। इस कटोरी को दुकान या व्यवसायिक स्थल से पूर्व दिशा में रख दें तथा प्रतिदिन प्रात: अगरबत्ती जलाकर इनका पूजन करें। 14. यदि कोई रोग ठीक नहीं हो रहा हो तो गोमती चक्र लेकर चांदी के तार में पिरोएं तथा पलंग के सिरहाने बांध दे। निश्‍चित ही लाभ मिलेगा। 15. घर के उत्तर-पश्चिम के कोण (वायव्य कोण) में सुन्दर से मिट्टी के बर्तन में कुछ सोने-चांदी के सिक्के, लाल कपड़े में बांध कर रखें। फिर बर्तन को गेहूं या चावल से भर दें। ऐसा करने से घर में धन का अभाव नहीं रहेगा। 16. आप चाहते है अगर उच्च शिक्षा और करियर में प्रगति तो चांदी का चैकोर टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें। यदि आप चाहते हैं व्यापार में प्रगति तो चांदी का छोटा सा ठोस हाथी अपनी जेब में रखें। 17.यदि आप लड़की के विवाह में विलंब हो रहा हो तो शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को प्रातः चांदी की एक ठोस गोली चांदी की ही चेन में पिरोकर उसे गंगा जल और कच्चे दूध से पवित्र करने के बाद धूप दीप दिखाएं और फिर शिवलिंग का स्पर्श कराने के बाद गले में धारण कर लें। इसके बाद वहां गरीबों को कुछ मीठा अवश्य खिलाएं।

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