Hariyali Teej 2024: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज,तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व

हरियाली तीज, सावन की तीज, तीज पूजा, तीज मुहूर्त, सावन का महीना Hariyali Teej 2024: हिंदू धर्म में हरियाली तीज व्रत का विशेष महत्व है. हरियाली तीज का व्रत पति के दीर्घायु और वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि लाने के लिए रखा जाता है. इस व्रत में कठिन नियमों का पालन करना होता है. रियाली तीज हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, विशेषकर महिलाओं के लिए। यह त्योहार सावन के महीने में मनाया जाता है और प्रकृति, सौंदर्य और महिलाओं के जीवन को समर्पित है। Hariyali Teej 2024: हरियाली तीज का उत्सव हर साल श्रावण मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है. वहीं हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को रखा जाता है. इस बार Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जाएगी. इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं. इस बार हरियाली तीज की तारीख को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बन रही है, क्योंकि तृतीया ति​थि 6 और 7 अगस्त दोनों दिन है. Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज कब है? हरियाली तीज श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस बार श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि 6 अगस्त को 07 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और 7 अगस्त को रात 10 बजकर 05 मिनट तक मान्य होगी. 6 अगस्त को तृतीया तिथि रात के समय में लग रही है, इस वजह से उस दिन तीज का व्रत नहीं रखा जाएगा. श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि की उदयातिथि 6 अगस्त को न होकर 7 अगस्त को है. उदयातिथि की गणना सूर्योदय से की जाती है. श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि में सूर्योदय 7 अगस्त को 05 बजकर 46 मिनट पर हो रहा है, इसलिए हरियाली तीज 7 अगस्त को मनाई जाएगी. इस आधार पर हरियाली तीज का व्रत 6 अगस्त को न रखकर 7 अगस्त के दिन रखा जाएगा. Hariyali Teej 2024:हरियाली तीज पर 3 शुभ योग पंचांग के अनुसार हरियाली तीज पर 3 शुभ योग बनेंगे. हरियाली तीज के दिन परिघ योग, शिव योग और रवि योग का निर्माण होगा. हरियाली तीज व्रत के दिन रवि योग रात 8 बजकर 30 मिनट से लेकर अगले दिन 8 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक है. वहीं परिघ योग सुबह से लेकर सुबह 11 बजकर 42 मिनट तक है और उसके बाद शिव योग लगेगा. शिव योग अगले दिन पारण तक रहेगा. हरियाली तीज का महत्व पूजा विधि माता पार्वती को अर्पित करें शृंगार हरियाली तीज का पर्व माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। ऐसे में जो महिला ये व्रत कर रही है, उसे मां पार्वती को 16 शृंगार की सामग्री अर्पित करनी चाहिए। इससे मां पार्वती अति प्रसन्न होती हैं और साधक को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद देती हैं। राहुकाल में भूलकर भी नहीं करें हरियाली तीज की पूजा ज्योतिष शास्त्र में राहुकाल को अशुभ माना जाता है. इसलिए राहुकाल के दौरान यज्ञ, पूजा, पाठ आदि नहीं करते हैं, क्योंकि यह फलित नहीं होते हैं. इसलिए हरियाली तीज के दिन राहुकाल में पूजा नहीं करनी चाहिए. हरियाली तीज पर राहुकाल दोपहर में 02 बजकर 06 मिनट से 03 बजकर 46 मिनट तक रहेगा. हरियाली तीज में इन बातों का रखें ध्यान हरियाली तीज में व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व सरगी खाते हैं. फिर सूर्योदय के साथ ही निर्जला व्रत प्रारंभ हो जाएगा. सरगी के समय ही ठीक से पानी पी लेना चाहिए. यदि आपकी सेहत ठीक नहीं है तो आपको निर्जला व्रत करने से बचना चाहिए. क्योकि यह आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकता है. हरियाली तीज व्रत रखने वाली महिलाएं पूजा के समय माता गौरी को श्रृंगार की सामग्री जरूर अर्पित करें. हरियाली तीज पर क्या नहीं करना चाहिए? हरियाली तीज की रात को व्रत रखने वाली सुहागिन महिलाओं को रात को सोना नहीं चाहिए, बल्कि रात भर जागरण करना चाहिए. Hariyali Teej 2024 हरियाली तीज के दिन महिलाओं को बिल्कुल भी गुस्सा नहीं करना चाहिए. मन को शांत रखकर मां पार्वती को पूजा-अर्चना करना चाहिए. हरियाली तीज के दिन अपने पार्टनर से किसी भी प्रकार का विवाद या फिर झूठ नहीं बोलना चाहिए.  

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Sawan Shivratri 2024:अगस्त में कब है सावन शिवरात्रि? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री से विधि तक सब कुछ

Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि का त्योहार सावन या सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। सावन शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा के लिए दूसरा सबसे बड़ा दिन है। सावन का हर दिन शिव पूजा के लिए शुभ होता है, लेकिन सावन की शिवरात्रि का दिन सबसे अच्छा दिन माना जाता है। इस साल सावन शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेगा।  इस दिन लोग व्रत रखते हैं और शिव-पार्वती की पूजा करते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार मासिक शिवरात्रि 2 अगस्त को मनाई जाएगी।  ऐसे में इस पवित्र दिन पर भग्वान शिव की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करें और लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करें। Sawan Shivratri सावन शिवरात्रि की तिथि  हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 अगस्त को दोपहर 3:26 बजे शुरू हो रही है। यह 3 अगस्त को अपराह्न 3:50 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में सावन शिवरात्रि 2 अगस्त 2024 को होगी और इसी दिन शिवरात्रि की पूजा और व्रत किया जाएगा।  सावन शिवरात्रि पूजा मुहूर्त रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – सायं  07:11 – रात्रि 09:49 तक (2 अगस्त)रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – रात्रि  09:49 – रात्रि 12:27 तक (3 अगस्त)रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – रात्रि 12:27 – प्रातः 03:06 तक (3 अगस्त)रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – प्रातः 03:06 – प्रातः  05:44 तक (3 अगस्त)निशिता काल मुहूर्त –         रात्रि  12:06 – रात्रि 12:49 तक (3 अगस्त)शिवरात्रि पारण समय – प्रातः 05:44 – दोपहर 03:49 तक (3 अगस्त) Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि पर पूजन सामग्री सावन शिवरात्रि के दिन आप नीचे दी गई पूजन सामग्री से पूजा करें।  सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ को लगाएं ये भोग Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि पर पूजन के समय आप भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को खीर, हलवा, ठंडाई, मालपुआ, लस्सी, सफेद बर्फी, सूखा मावा, आदि का भोग लगा सकते हैं।  सावन शिवरात्रि पूजा विधि  सावन शिवरात्रि का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन महीने की Sawan Shivratri शिवरात्रि को बहुत खास माना जाता है क्योंकि शिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का एक विशेष त्योहार है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व है। शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। ऐसे में मनचाहा वर पाने और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस रात महादेव की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि सावन शिवरात्रि का व्रत और भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से अपार कृपा मिलती है। इसके अलावा आप कठिन और असंभव कार्यों को भी पूरा कर सकते हैं। सावन शिवरात्रि की शाम जागरण करने से विशेष लाभ होता है। सावन शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में विशेष फलदायी होती है। (रात में होने वाली पूजा को निशिदा पूजा कहा जाता है।) (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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August pradosh vrat 2024: अगस्त 2024 में प्रदोष व्रत: तिथियां और महत्व

August pradosh vrat 2024 प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। अगस्त 2024 में प्रदोष व्रत की सही तिथियों के लिए आपको किसी पंचांग या स्थानीय पंडित से संपर्क करना चाहिए। August pradosh vrat 2024: प्रदोष का व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। ये व्रत हर मास में दो बार रखा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं अगस्त के महीने में प्रदोष व्रत कब- कब रखा जाएगा इसके महत्व के बारे में। August pradosh vrat 2024: प्रदोष का व्रत भगवान शिव को समर्पित व्रत होता है। ये व्रत हर महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। August pradosh vrat 2024 प्रदोष व्रत के भगवान भोलेनाथ की प्रदोष काल में पूजा की जाती है। प्रदोष का व्रत रखने से और भगवान शिव की पूजा करने से साधक को संतान सुख की प्राप्ति होती है और हर मनोकामना की भी पूर्ति होती है। हर मास में दो प्रदोष व्रत रखा जाता है। ऐसे ही सावन के महीने में भी दो प्रदोष व्रत रखे जाएंगे। सावन मास के प्रदोष व्रत का शास्त्रों में खास महत्व है। आइए जानते हैं अगस्त के महीने में कब- कब रखा जाएगा प्रदोष व्रत। यहां जानिए सही तिथि और महत्व। August pradosh vrat 2024 (अगस्त प्रदोष व्रत 2024) अगस्त मास का पहला प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल सावन मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 01 अगस्त 2024 को दोपहर 03 बजकर 28 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 2 अगस्त 2024 को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में अगस्त महीने का पहला प्रदोष व्रत 1 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। August pradosh vrat 2024 पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 2024 पंचांग के अनुसार सावन मास का पहला प्रदोष व्रत 1 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07 बजकर 12 मिनट से 09 बजकर 18 मिनट तक रहने वाला है। अगस्त महीने का दूसरा प्रदोष व्रत हिंदू पंचांग के अनुसार सावन महीने की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 17 अगस्त को सुबह 08 बजकर 05 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 18 अगस्त को प्रातः 05 बजकर 51 मिनट पर होगा। ऐसे में दूसरा प्रदोष व्रत 17 अगस्त को शनिवार के दिन रखा जाएगा। दूसरे प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त 2024 अगस्त महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 17 अगस्त 2024 को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06 बजकर 58 मिनट से 09 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में पूजा करने से उत्तम फल की प्राप्ति होगी। प्रदोष व्रत का महत्व प्रदोष व्रत August pradosh vrat 2024 भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। प्रदोष काल को शिव का प्रिय काल माना जाता है और इस समय भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत की पूजा विधि प्रदोष व्रत की पूजा विधि काफी सरल होती है। इस दिन भगवान शिव की पूजा विधि से पूजा की जाती है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, दूध और जल चढ़ाया जाता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Krishna Janmashtami 2024: क्या हैं कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम और पूजा विधि ?

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम (Krishna Janmashtami Vrat Niyam 2024) भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का जन्म हुआ था। इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। भक्तजन इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं, और उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। जन्माष्टमी (Janmashtami) पर भगवान कृष्ण (Shri Krishna) के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। उनके जन्म का समय मध्यरात्रि माना जाता है, इसलिए देर रात तक भजन-कीर्तन और आरती होती है। भक्त इस पावन अवसर पर कान्हा के श्रृंगार में तल्लीन हो जाते हैं। Krishna Janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान कृष्ण (Shri Krishna) प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। लेकिन व्रत रखते समय कुछ नियमों का पालन करना अति आवश्यक है। इसके साथ ही, तुलसी का भी इस दिन विशेष महत्व है। Krishna Janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जश्न मनाता है। यह त्योहार आमतौर पर भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। ह त्योहार हर साल भाद्रपद माह की Krishna Janmashtami कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, 26 अगस्त को रात 3:39 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी जो अगले दिन 27 अगस्त को रात 2:19 बजे समाप्त होगी। हालांकि, भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए उनकी पूजा 26 अगस्त की रात को की जाएगी। साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है? जन्माष्टमी व्रत के नियम जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भक्त विभिन्न नियमों का पालन करते हुए भगवान की पूजा करते हैं। जन्माष्टमी व्रत के कुछ प्रमुख नियम दिए गए हैं यह व्रत भक्तों के लिए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपने भक्ति व्यक्त करने और उनकी आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर होता है। जन्माष्टमी व्रत विधि जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन पर मनाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। व्रत का संकल्प व्रत के नियम पूजा विधि व्रत पारण जन्माष्टमी का महत्व जन्माष्टमी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण को धर्म, कर्म और योग का प्रतीक माना जाता है। उनकी लीलाओं से हमें जीवन जीने का सही मार्ग दिखता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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When is Janmashtami 2024: साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है?

When is Janmashtami साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है? When is Janmashtami 2024 कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। When is Janmashtami 2024: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को When is Janmashtami 2024 जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, द्वापर युग में इसी दिन भगवान विष्णु ने भगवान कृष्ण का अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को मथुरा में हुआ था। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के बालस्वरूप की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और उपवास रखते हैं। जानें साल 2024 में कब मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी और आने वाले पांच सालों में जन्माष्टमी कब है- कार्तिक मास को क्यों कहते हैं दामोदर माह ? साल 2024 में जन्माष्टमी कब है- साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी।  When is Janmashtami 2024 साल 2024 में अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र कब से कब तक- अष्टमी तिथि 26 अगस्त को सुबह 03 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगी और 27 अगस्त को सुबह 02 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त को शाम 03 बजकर 55 मिनट पर प्रारंभ होगा और 27 अगस्त को शाम 03 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगा। निशिथ काल पूजा का समय- 26 अगस्त को रात 12 बजे से लेकर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।व्रत पारण का समय- 27 अगस्त को सुबह 05 बजकर 56 मिनट के बाद होगा।दही हांडी- 27 अगस्त 2024, मंगलवार को होगा। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Sapne Me Chori Dekhna: सपने में चोरी होते देखना,  जानें क्‍या हो सकता है Real Life में

Sapne Me Chori Dekhna सपने में चोरी होना एक आम सपना है, जिसके कई अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं। यह सपना आपके जागृत जीवन में चल रही भावनाओं, चिंताओं या अनुभवों का प्रतिबिंब हो सकता है। हर इंसान सपने देखता है, कुछ लोग एक रात में कई सपने देख लेते हैं तो किसी को कम सपने आते हैं. कुछ सपने देखने के बाद स्मृति से उतर जाते हैं, वहीं कुछ खतरनाक सपने आपको सोते से जगा कर नींद उड़ा देते हैं. स्वप्न शास्त्र की मानें तो हर सपना जीवन के साथ किसी न किसी रूप से जुड़ा होता है. यहां हम चोरी के ऐसे ही सपनों की बात करेंगे, Sapne Me Chori Dekhna कि आपकी कोई कीमती चीज चोर उठा ले गया, या पड़ोस में डकैती होते देखा, या आप स्वयं चोरी करके भाग रहे हैं अथवा चोरी के आरोप में पुलिस के हत्थे चढ़ गए हैं. आइये जानें कुछ ऐसे ही सपने देखने का तात्पर्य क्या हो सकता है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में चोरी होना अक्सर एक अशुभ संकेत माना जाता है। यह संकेत दे सकता है कि: Sapne Me Chori Dekhna आपका पैसा चोरी होने का सपना आप सपना देखते हैं कि आपका पैसों से भरा पर्स चोरी हो गया है! अचानक नींद टूटती है तो आप राहत महसूस करते हैं कि ये तो सपना था, और आपका कुछ भी चोरी नहीं हुआ है. लेकिन स्वप्न शास्त्र की थिसिस कहती है कि इस तरह का सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपका वित्तीय नुकसान हो सकता है. इसलिए आपको फिलहाल अपना हर निर्णय काफी सोच-समझ कर लें.  Sapne Me Chori Dekhna सेल फोन चोरी होने का सपना आप देखते हैं कि आपका कीमती मोबाइल चोरी हो गया. इसका एक आशय यह भी हो सकता है कि आप जो भी कह रहे हैं, उस पर किसी और का नियंत्रण है. यह भी संभव है कि कोई आपकी योजना को बिगाड़ने के लिए आपके संचार व्यवस्था पर नजर रख रहा है, ताकि सामने वाली पार्टी पर आपकी गलत इमेज बने, Sapne Me Chori Dekhna और उसका बुरा असर आपके व्यवसाय पर पड़े. एक आशय यह भी हो सकता है कि कोई आपके प्रोफेशन में बिना आपकी सहमति के प्रवेश करने की फिराक में है. ऐसे में हर व्यावसायिक मसले पर सब पर शक की नजर रखना ही समझदारी है. बैंक डकैती का सपना सपने में किसी बैंक पर डकैती पड़ने का सपना देखना इस बात का संकेत हो सकता है कि आपको हर चीज एक तय समय पर मिलती है, अलबत्ता जब आप कड़ी मेहनत कर रहे होते हैं, Sapne Me Chori Dekhna तब आपको उसका उचित प्रतिफल नहीं मिलता. लेकिन इस तरह के सपने देखने के बाद आप निश्चिंत हो सकते हैं कि आज नहीं तो कल आपको आपकी मेहनत का पूरा फल अवश्य मिलेगा. आप धीरज के साथ उचित समय का इंतजार करें. आप अपना काम उसी ईमानदारी के साथ करते रहें. सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखना: शुभ या अशुभ ? गहने चोरी होने के सपने आप सपने में देखते हैं कि आपके घर से कीमती आभूषण चोरी हो गई है, इस सपने का यह संकेत भी हो सकता है कि आपको ऐसे लोगों पर नजर रखने की आवश्यकता है, जो आपको परेशान करने के मौके-दर-मौके तलाश रहा है. क्योंकि आप अपने करियर के शिखर पर चल रहे हैं, जो कुछ लोगों को पच नहीं रहा है. इसमें आपके रिश्तेदार भी हो सकते हैं, पड़ोसी अथवा दोस्त भी हो सकते हैं. जूता चोरी होने का सपना आप सपने में देखते हैं कि ट्रेन में सफर के दौरान या मंदिर में भगवान का दर्शन करने जाने के बाद आपके जूते चोरी हो गये. ये सपने आपकी सेहत से जुड़े हो सकते हैं. अगर आप भागदौड़ वाले कार्य करते हैं अथवा टेंशन वाला काम करते हैं, तो आप कुछ दिनों के लिए रेस्ट करें. दो-तीन दिन बाद अपना कार्य शुरु करें. सपने में चोरी करते हुए पकड़े जाने का आशय! खुद को चोरी करते हुए देखना और फिर रंगे हाथों पकड़े जाने का सपना शुभ संकेत नहीं है. यह सपना इस बात का संकेत हो सकता है कि निकट भविष्य में कुछ गलत लोगों से आप दोस्ती करने जा रहे हैं, ये दोस्त आपके लिए आये दिन संकट का सबब बन सकते हैं. उनकी संगत में आप गलत रास्ते पर जा सकते हैं. इसलिए सोच-परख कर ही नये दोस्त बनाएं. सपनों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो सपने हमारे अवचेतन मन की अभिव्यक्ति होते हैं। सपने में चोरी होना, हमारे मन में चल रही चिंताओं और डर का प्रतिबिंब हो सकता है। क्या करें: ध्यान रखें: सपनों का अर्थ व्यक्ति से व्यक्ति अलग-अलग होता है। इसलिए किसी एक सपने का अर्थ सभी के लिए समान नहीं होता। अगर आपको लगता है कि आपके सपने आपके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं, तो किसी मनोवैज्ञानिक से सलाह ले सकते हैं। सपने का अर्थ किस पर निर्भर करता है: सपने का अर्थ पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि आप सपने में क्या चोरी होते देख रहे हैं। उदाहरण के लिए: पैसे चोरी होना: आर्थिक नुकसान का संकेत गहने चोरी होना: किसी करीबी व्यक्ति से धोखा मिलने का संकेत फोन चोरी होना: किसी महत्वपूर्ण सूचना के लीक होने का संकेत घर से सामान चोरी होना: असुरक्षा की भावना (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Vastu 2024: घर पर रखें वास्तु की ये 6 चीजें, मां लक्ष्मी की बरसेगी अनुकंपा, जीवन भर रहेगी धन-संपदा बरकरार

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में कुछ विशेष चीजें रखने से धन-संपत्ति में वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं उन 6 चीजों के बारे में जो आपके घर में रखने से जीवन भर धन-संपदा बनी रह सकती है। मां लक्ष्मी: साल 2024 आ चुका है और आज तीसरा दिन है आप सब भी यही सोच रहे होंगे बीते साल जो हुआ सो हुआ अब नया साल 2024 सुख-शांति से बीते और पूरा वर्ष धन-संपदा से संपन्न रहे। ऐसे में आप यह सोच रहे होंगे की धन-संपदा के लिए मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कौन सा उपाय करें जिससे यह वर्ष आर्थिक पक्ष के तौर पर मजबूत रहे। फिलहाल आपको इसके लिए वास्तु से जुड़ी कुछ चीजों को घर लाकर रखना होगा और यदि ये चीजें घर में पहले से मोजूद हैं तो इनकी सही दिशा सुनिश्चित कर इनको वास्तु के हिसाब से घर में रखें। ऐसा करने से आपके घर में धन-संपदा तो बनी ही रहेगी इसी के साथ साल 2024 तक आपके पास पैसों की कमी नहीं रहेगी। तो ध्यान से इन 6 चीजों के बारे में जरूर जान लें और इन्हें अपने घर में वास्तु के अनुसार व्यवस्थित कर लें। मां लक्ष्मी:कुबेर यंत्र या श्री यंत्र आप अपने घर में मां लक्ष्मी की स्थापना पूर्ण विधि वाधान से कर लें अगर मां लक्ष्मी पहले से आपके घर में विराजमान हैं। तो उनकी प्रतिमा के सम्मुख उनके प्रिय श्री यंत्र को लाल कपड़े के नीचे अवश्य रखें। आप चाहें तो अपने घर में कुबेर यंत्र की भी स्थापना कर सकते हैं। लेकिन एक बात का ध्यान रखें इन यंत्रों को किसी योग्य पंडित से सिद्ध करवा कर ही इनकी स्थापना करें। तभी यह अपना प्रभाव दिखाएंगे और आपके घर का वातावरण तो सकारात्मक होगा ही इसी के साथ आपके घर धन का आगमन साल भर होता रहेगा। इन यंत्रों की रोज पूजा करने से आपके सौभाग्य में वृद्धि होगी और हर कार्य में मां लक्ष्मी के आशीर्वाद से सफलता भी मिलेगी। क्या है सनातन धर्म,कैसे प्रचलन में आया Hinduधर्म नाम, जानिए सनातन का सही अर्थ मां लक्ष्मी :चांदी का बना हाथी साल 2024 में आप अपने घर में चांदी की धातु से बना हाथी लाकर रख सकते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार चांदी का हाथी अपनी सूंढ़ उठाए हुए वाला ही रखना चाहिए। यह हाथी घर की प्रसिद्धि में चार चांद लगाता है। ऊंची उठी सूंढ़ के कारण यह अपना सकारात्मक प्रभाव दिखाता है और इसके चलते समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि आप चांदी से बने हाथी को अपने घर में लाकर रखते हैं तो यह आपके रोजगार में आपको लाभ दिलाएगा और यह धन को भी आकर्षित करता है। मिट्टी वाला पानी का घड़ा वास्तु के अनुसार पानी का घड़ा या सुराही को धन के लिहाज से बहुत शुभ माना जाता है। यदि आप इसे घर लाकर इसमें पानी भर के उत्तर दिशा की ओर रखते हैं तो यह आपकी सभी आर्थिक परेशानियों को धीरे-धीरे समाप्त कर देगा। क्योंकि उत्तर दिशा देवताओं की मानी जाती है और जिस घर से देवता प्रसन्न होते हैं वहां मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि सदैव के लिए बरकरार रहती है। धातु का बना हुआ कछुआ पौराणिक कथा के अनुसार कछुआ एक प्रकार से भगवान विष्णु का प्रतिनिधित्व करता है और जहां श्री हरि की कृपा रहती है वहां लक्ष्मी जी स्वयं निवास करती हैं। ऐसे में धन प्राप्ति के लिए साल 2024 में आप अपने घर में स्फटिक, चांदी या तांबे की धातु से बना कछुआ अपने घर लाकर रख सकते हैं। वास्तु के अनुसार जिस घर में इन धातुओं से बना कछुआ रखा होता है वहां कभी भी धन की हानी नहीं होती है और रुपयों-पैसों की वर्षा दिन रात होती रहती है। माना जाता है यह कछुआ धन को चुंबक की तरह से खेंचता है और इसे रखने की सही दिशा उत्तर है। मोर पंख आप अपने घर में मोर पंख का गुच्छा लाकर रख सकते हैं। इसे घर में रखने से भगवान श्री कृष्ण के साथ ही साथ मां लक्ष्मी की भी कृपा आपको मिलेगी। माना जाता है की भगवान श्री कृष्ण को मोर पंख अति प्रिय था। नए साल में यदि आप सुख-समृद्धि चाहते हैं तो घर में मौर पंख लाकर रख सकते हैं। इसी के साथ बच्चों के पढ़ाई वाले कमरे में इसे रखने से उन पर मां सरस्वती की कृपा बनी रहेगी। क्योंकि मोर को शास्त्रों में विद्या की देवी का वाहन बताया गया है। इसी के साथ यह धनिष्ठा नक्षत्र को भी संबोधित करता है। ज्योतिष शास्त्र में धनिष्ठा नक्षत्र को अपार धन-दौलत का नक्षत्र बताया गया है। ऐसे में मौर पंख रखना धन के लिहाज से बहुत लाभदायक रहेगा। दक्षिणावर्ती शंख शंख कई प्रकार के होते हैं लेकिन यदि आप साल 2024 में चाहते हैं कि मां लक्ष्मी आपसे प्रसन्न रहें तो एक दक्षिणावर्ती शंख अपने घर में लाकर रख दें। माना जाता है यह शंख धन की देवी मां लक्ष्मी का सूचक होता है और जिस जगह यह रहता है वहां धन की कभी भी कमी नहीं रहती है। परिस्थिति कितनी भी खराब क्यों न हो कहीं न कहीं से धन का आगमन होता रहता है। कुछ अन्य महत्वपूर्ण बातें: (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Shivling:घर में शिवलिंग स्थापना,कुछ जरूरी नियम ?

हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है और त्रिदेवों में इन्हें भी सर्वोच्च देवता की उपाधि प्राप्त है। यदि आप अपने घर में महादेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और घर में शिवलिंग स्थापित कर रहे हैं। तो इससे जुड़े कुछ खास नियम आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। Shivling: महादेव की कृपा के बिना जीवन अधूरा है ऐसे में उनके भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके निमित्त कुछ न कुछ पूजा अनुष्ठान करते ही रहते हैं। वहीं शिवरात्रि,  प्रदोष व्रत और सोमवार का दिन ये सब शिव कृपा पाने के लिए हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख दिन बताए गए हैं। माना जाता है कि इन दिनों में यदि आप भोलेबाबा की सच्चे मन से आराधना कर लें तो वह शीघ्र अपनी कृपा बरसा देते हैं। 11 प्रकार के अभिषेक से करें शिवजी को प्रसन्न, हर मनोकामना होगी पूर्ण अधिकतर शिव भक्त उनके मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं। वहीं कुछ ऐसे भक्त भी हैं जो अपने घर में शिवलिंग Shivling की स्थापना करते हैं और नित्य शिव पूजन भी करते हैं। अगर आप भी अपने घर में शिवलिंग की स्थापना करना चाहते हैं तो आज हम आपको इससे जुड़े कुछ जरूरी नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। शिवलिंग की स्थापना घर में करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता। यह नियम आज आप भी जान लीजिए। Shivling शिवलिंग स्थापना का शुभ मुहूर्त Shivling शिवलिंग स्थापना की विधि Shivling शिवलिंग की पूजा Shivling शिवलिंग स्थापना के कुछ महत्वपूर्ण नियम घर में शिवलिंग रखने के नियम 

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Sawan Shivratri 2024: कब है सावन शिवरात्रि ? जानें तिथि, Importance And Jalabhishek का उत्तम मुहूर्त

Sawan Shivratri 2024 Date: भगवान शिव को समर्पित सावन 22 जुलाई से शुरू हो गया है, यह 19 अगस्त को समाप्त होगा। सावन शिवरात्रि के दिन घरों और शिवालयों में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि सावन Sawan Shivratri 2024 शिवरात्रि के दिन व्रत करने व भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्त की मनोकामना पूर्ण होती है। जानें इस साल कब है सावन शिवरात्रि व भगवान शिव के पूजन के मुहूर्त Sawan Shivratri 2024 सावन शिवरात्रि 2024 कब है: हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाई जाती है। इसे मासिक शिवरात्रि भी कहते हैं। सावन में आने वाली शिवरात्रि को सावन शिवरात्रि कहा जाता है। इस साल सावन शिवरात्रि 2 अगस्त 2024, शुक्रवार को है। Sawan Shivratri 2024 सावन शिवरात्रि 2024 पूजा का उत्तम मुहूर्त- सावन शिवरात्रि के दिन निशिता काल में पूजन करना सबसे उत्तम माना गया है। इस दिन निशिता काल 03 अगस्त को सुबह 12 बजकर 06 मिनट से सुबह 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। जलाभिषेक की शुभ अवधि 42 मिनट की है। Raksha Bandhan 2024: कब है रक्षा बंधन? जान लें क्या है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त चारों पहर की पूजा का समय- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 07:10 पी एम से 09:48 पी एम रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:48 पी एम से 12:27 ए एम, अगस्त 03 रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:27 ए एम से 03:05 ए एम, अगस्त 03 रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:05 ए एम से 05:43 ए एम, अगस्त 03 Sawan Shivratri 2024 सावन शिवरात्रि 2024 व्रत पारण का समय- चतुर्दशी तिथि 02 अगस्त 2024 को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट से शुरू होगी जो कि 03 अगस्त को दोपहर 03 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। सावन शिवरात्रि व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाएगा। सावन शिवरात्रि व्रत पारण का शुभ समय 04 अगस्त को 09:29 ए एम से 11:09 ए एम तक रहेगा। सावन शिवरात्रि पूजा सामग्रीसावन शिवरात्रि के शुभ दिन पर महादेव की पूजा करने के लिए कुछ सामग्रियों को जरूर शामिल करना चाहिए। आप पूजा के बर्तन, पंच मिष्ठान्न, बेलपत्र, धतूरा, भांग, बेर, गुलाल, सफेद चंदन,  पंच फल, दक्षिणा, गन्ने का रस, शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा शुद्ध घी, शहद, पंच रस, गंगाजल, जल, दूध दही, कपूर, धूप, दीप, रूई और मां पार्वती के श्रृंगार की सामग्री को भी रखें। जलाभिषेक की विधि सावन शिवरात्रि की तिथि पर सूर्योदय से पहले स्नान कर लें और साफ वस्त्रों को धारण करें। इसके बाद आप निशिता काल मुहूर्त में शिवलिंग का दूध, दही, शहद, घी, शक्कर, गन्ने के रस आदि से अभिषेक करें। Sawan Shivratri 2024 इस दौरान गंगाजल में काला तिल मिलाकर 108 बार महामृत्युजंय मंत्र का जाप करें और शिवलिंग पर अर्पित करें। बाद में आप महादेव को उनकी प्रिय चीजें अर्पित करते जाएं। सामान अर्पित करने के बाद आप आटे का चौमुखी दीपक जलाएं और शिव मंत्र, शिव चालीसा का पाठ करें। सावन शिवरात्रि महत्व: सावन शिवरात्रि पर ध्यान दें डिस्क्लेम  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Swapna Shastra 2024:सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखना: शुभ या अशुभ ?

Dream Interpretation:सोते समय सपना देखना एक सामान्य प्रक्रिया है. सपने में अक्सर वही चीजें देखी जाती हैं, जो दिन भर में आपके साथ घटी हों परंतु कई बार कुछ ऐसे सपने दिखाई देते हैं I जिनका हमारी दिनचर्या से कोई संबंध नहीं होता. ये सपने आपको आने वाले भविष्य में होने वाली प्रिय-अप्रिय घटना की तरफ संकेत करते हैं. इन सपनों से अच्छा और बुरा दोनों तरह का संकेत मिलता है. Swapna Shastra 2024 यदि आप सपने में खुद को पूजा करते हुए देखते हैं तो यह भी आपके लिए बड़ा संकेत माना जाता है. इस विषय में स्वप्न शास्त्र में विस्तार से बताया गया है. सपनों की दुनिया रहस्यों से भरी होती है। कई बार हम ऐसे सपने देखते हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देते हैं। सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखना भी एक ऐसा ही सपना है जिसके बारे में लोगों के मन में कई तरह के प्रश्न उठते हैं। Sapne Me Bhagwan :सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ? Swapna Shastra 2024 क्या यह सपना शुभ है या अशुभ? इसका जवाब है कि यह सपना पूरी तरह से सपने के विवरणों पर निर्भर करता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद को पूजा-पाठ करते देखने के कई अर्थ हो सकते हैं, जिनमें से कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक भी हैं। सकारात्मक अर्थ: नकारात्मक अर्थ: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि सपनों का अर्थ हमेशा निश्चित नहीं होता है। Swapna Shastra 2024 सपने का सही अर्थ जानने के लिए, आपको सपने के सभी विवरणों पर ध्यान देना होगा, जैसे कि आप किस देवता की पूजा कर रहे थे, आप कैसा महसूस कर रहे थे, और सपने का वातावरण कैसा था। Swapna Shastra 2024 मंदिर में पूजा करते देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति खुद को सपने में मंदिर में पूजा करते हुए देखता है तो यह संकेत है कि आपकी कोई बड़ी इच्छा पूरी होने वाली है. इस सपने का अर्थ है Swapna Shastra 2024 कि आप जल्द ही उस मंदिर के दर्शन करने जा सकते हैं. इस तरह के सपने का यह भी अर्थ निकाला जाता है कि आप लंबे समय से उस मंदिर के दर्शन करना चाह रहे हैं परंतु जा नहीं पा रहे.

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Sawan 2024:11 प्रकार के अभिषेक से करें शिवजी को प्रसन्न, हर मनोकामना होगी पूर्ण

सावन के महीने में रुद्राभिषेक का खास महत्व होता है। भगवान शिव को रुद्राभिषेक बहुत प्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान भोलेनाथ का सावन में रुद्राभिषेक करने से इंसान के सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं। Rudrabhishek Pujan in Sawan: श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। भगवान शिव की पूजा अर्चना में रुद्राभिषेक का काफी महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल Sawan 2024 सावन मास 22 जुलाई 2024 से शुरू हो रहा है जो 19  अगस्त 2024 को समाप्त होगा। सावन के महीने में रुद्राभिषेक का खास महत्व होता है। भगवान शिव को रुद्राभिषेक बहुत प्रिय है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान भोलेनाथ का सावन में रुद्राभिषेक करने से इंसान के सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्हें ग्रह दोष से भी मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं रुद्राभिषेक के विधान और महत्व के बारे में।  Sawan 2024 शिवजी को प्रसन्न करने के लिए आप विभिन्न प्रकार के अभिषेक कर सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख अभिषेक इस प्रकार हैं: 1. दूध: दूध से अभिषेक करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और पापों का नाश होता है। 2. घी: घी से अभिषेक करने से धन-धान्य की प्राप्ति होती है और रोगों का नाश होता है। 3. शहद: शहद से अभिषेक करने से बुद्धि और विद्या प्राप्त होती है। 4. दही: दही से अभिषेक करने से ग्रहों की शांति होती है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है। 5. गंगाजल: गंगाजल से अभिषेक करने से सभी पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 6. पंचामृत: पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर) से अभिषेक करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 7. बेल: बेलपत्र से अभिषेक करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं। 8. भांग: भांग से अभिषेक करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और मन शांत होता है। 9. धतूरा: धतूरे से अभिषेक करने से भगवान शिव भक्तों की रक्षा करते हैं। 10. आंकड़ा: आंकड़े से अभिषेक करने से विघ्नों का नाश होता है और सफलता प्राप्त होती है। 11. चंदन: चंदन से अभिषेक करने से मन को शीतलता प्राप्त होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। अभिषेक करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए: Sawan 2024 सावन मास में भगवान शिव की पूजा करने और उनका अभिषेक करने से आपको अवश्य ही शुभ फल प्राप्त होंगे। घर पर कैसे करें रुद्राभिषेक कई धार्मिक ग्रंथों में रुद्राभिषेक की महिमा का वर्णन मिलता है। मान्यता है यदि आप भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करते हैं तो आपकी एक या 2 नहीं बल्कि 18 प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन माह का सोमवार , प्रदोष या Sawan 2024 शिवरात्रि कोई भी दिन हो सभी मान्य तिथियों में शिव का रुद्राभिषेक जन्म जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाता है और मोक्ष के द्वार खोलता है।  रुद्राभिषेक का विशेष है महत्वसावन में भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह की पूजा-अर्चना की जाती है. सावन में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है लेकिन कई भक्त इसे करवाने में Sawan 2024 असमर्थ रहते हैं. ऐसे भक्तों को अपनी सभी मनोकामना पूरी करने और कष्टों से मुक्ति पाने के एक सरल उपाय करना चाहिए है. ज्योतिषाचार्य के अनुसार सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखकर भगवान भोलेनाथ को 11 किलो चावल, 11 बेलपत्र और 11 बादाम अर्पण करना चाहिए और सच्चे मन से अपनी मनोकामना पूर्ति या फिर कष्ट निवारण के लिए प्रार्थना करना चाहिए।  शिवलिंग न होने पर कैसे करें रुद्राभिषेक शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करना सबसे उत्तम माना गया है। यदि आप रुद्राभिषेक करना चाहते हैं तो मंदिर में स्थित शिवलिंग पर भी रुद्राभिषेक कर सकते हैं। यदि आपने घर में शिवलिंग स्थापित कर रखा है Sawan 2024 तो भी रुद्राभिषेक किया जा सकता है। यदि घर में शिवलिंग न हो तो आप अंगूठे को शिवलिंग का स्वरूप मानकर उसका अभिषेक भी कर सकते हैं।  Sanatan Dharma 2024:क्या है सनातन धर्म,कैसे प्रचलन में आया Hinduधर्म नाम, जानिए सनातन का सही अर्थ Sawan 2024 रुद्राभिषेक से मिलने वाले फल यदि शिवलिंग का अभिषेक घी की धारा से करें तो वंश बढ़ता है।शिवलिंग पर गाय के दूध से अभिषेक करने से आरोग्य जीवन प्राप्त होता है। शिवलिंग पर शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होता है। शिवलिंग पर भस्म अभिषेक करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है।यदि आपको कोई पुराना रोग है तो शिवलिंग पर शहद से अभिषेक करने से वह समाप्त होती है। 

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Sanatan Dharma 2024:क्या है सनातन धर्म,कैसे प्रचलन में आया Hinduधर्म नाम, जानिए सनातन का सही अर्थ

सनातन धर्म: आध्यात्मिक ज्ञान की शाश्वत यात्रा (Sanatan Dharma: The Eternal Journey of Spiritual Knowledge) सनातन धर्म (Sanatan Dharma) संसार के सबसे प्राचीन धर्मों में से एक, सनातन धर्म, भारत की आत्मा है। “सनातन” का अर्थ है “शाश्वत” या “हमेशा के लिए चलने वाला” और “धर्म” का अर्थ है “कर्तव्य,” “मार्गदर्शक सिद्धांत,” या “जीवन का तरीका।” इसलिए, सनातन धर्म को “शाश्वत कर्तव्य का मार्ग” या “शाश्वत जीवन का सिद्धांत” के रूप में समझा जा सकता है। यह एक संगठित धर्म नहीं है, बल्कि विभिन्न दर्शनों, परंपराओं, और आध्यात्मिक पथों का एक संगम है। सनातन धर्म की जड़ें वेदों में निहित हैं, जो प्राचीन ग्रंथ हैं जिन्हें हिंदू धर्म का आधार माना जाता है। वेद कर्म (कर्तव्य), धर्म (सही आचरण), ज्ञान (ज्ञान प्राप्ति), और मोक्ष (मुक्ति) के सिद्धांतों का वर्णन करते हैं। सत्यम शिवम सुंदरम ‘यह पथ सनातन है। समस्त देवता और मनुष्य इसी मार्ग से पैदा हुए हैं तथा प्रगति की है। हे मनुष्यों आप अपने उत्पन्न होने की आधाररूपा अपनी माता को विनष्ट न करें।’- (ऋग्वेद-3-18-1) सनातन का अर्थ है जो शाश्वत हो, सदा के लिए सत्य हो। जिन बातों का शाश्वत महत्व हो वही Sanatan Dharma सनातन कही गई है। जैसे सत्य सनातन है। ईश्वर ही सत्य है, आत्मा ही सत्य है, मोक्ष ही सत्य है और इस सत्य के मार्ग को बताने वाला धर्म ही सनातन धर्म भी सत्य है। वह सत्य जो अनादि काल से चला आ रहा है और जिसका कभी भी अंत नहीं होगा वह ही सनातन या शाश्वत है। जिनका न प्रारंभ है और जिनका न अंत है उस सत्य को ही सनातन कहते हैं। यही सनातन धर्म का सत्य है। वैदिक या हिंदू धर्म को इसलिए सनातन धर्म कहा जाता है, क्योंकि यही एकमात्र धर्म है जो ईश्वर, आत्मा और मोक्ष को तत्व और ध्यान से जानने का मार्ग बताता है। मोक्ष का कांसेप्ट इसी धर्म की देन है। एकनिष्ठता, ध्यान, मौन और तप सहित यम-नियम के अभ्यास और जागरण का मोक्ष मार्ग है अन्य कोई मोक्ष का मार्ग नहीं है। मोक्ष से ही आत्मज्ञान और ईश्वर का ज्ञान होता है। यही सनातन धर्म का सत्य है। सनातन धर्म के मूल तत्व सत्य, अहिंसा, दया, क्षमा, दान, जप, तप, यम-नियम आदि हैं जिनका शाश्वत महत्व है। अन्य प्रमुख धर्मों के उदय के पूर्व वेदों में इन सिद्धान्तों को प्रतिपादित कर दिया गया था। कैसे मिला हिंदू नाम असल में हिंदू नाम विदेशियों द्वारा दिया गया है। जब मध्य काल में तुर्क और ईरानी भारत आए तो उन्होंने सिंधु घाटी से प्रवेश किया। सिंधु एक संस्कृत नाम है। उनकी भाषा में ‘स’ शब्द न होने के कारण वह सिंधू कहने में असमर्थ थे। इसलिए उन्होंने सिंधू शब्द के उच्चारण के स्थान पर हिंदू कहना शुरू किया। इस तरह से सिंधु का नाम हिंदू हो गया। उन्होंने यहां के निवासियों को हिंदू कहना शुरू किया और इसी तरह हिंदुओं के देश को हिंदुस्तान का नाम मिला। SABAN 2024:शुरू हुआ सावन का पावन महीना, पहला सोमवार आज, भगवान भोलेनाथ की इस विधि से करें पूजा अर्चना ।।ॐ।।असतो मा सदगमय, तमसो मा ज्योर्तिगमय, मृत्योर्मा अमृतं गमय।।- वृहदारण्य उपनिषद भावार्थ : अर्थात हे ईश्वर मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो, अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो। जो लोग उस परम तत्व परब्रह्म परमेश्वर को नहीं मानते हैं वे असत्य में गिरते हैं। असत्य से मृत्युकाल में अनंत अंधकार में पड़ते हैं। उनके जीवन की गाथा भ्रम और भटकाव की ही गाथा सिद्ध होती है। वे कभी अमृत्व को प्राप्त नहीं होते। मृत्यु आए इससे पहले ही सनातन धर्म के सत्य मार्ग पर आ जाने में ही भलाई है। अन्यथा अनंत योनियों में भटकने के बाद प्रलयकाल के अंधकार में पड़े रहना पड़ता है। ।।ॐ।। पूर्णमद: पूर्णमिदं पूर्णात् पूर्णमुदच्यते। पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।- ईश उपनिषद भावार्थ : सत्य दो धातुओं से मिलकर बना है सत् और तत्। सत का अर्थ यह और तत का अर्थ वह। दोनों ही सत्य है। अहं ब्रह्मास्मी और तत्वमसि। अर्थात मैं ही ब्रह्म हूँ और तुम ही ब्रह्म हो। यह संपूर्ण जगत ब्रह्ममय है। ब्रह्म पूर्ण है। Sanatan Dharma यह जगत् भी पूर्ण है। पूर्ण जगत् की उत्पत्ति पूर्ण ब्रह्म से हुई है। पूर्ण ब्रह्म से पूर्ण जगत् की उत्पत्ति होने पर भी ब्रह्म की पूर्णता में कोई न्यूनता नहीं आती। वह शेष रूप में भी पूर्ण ही रहता है। Sanatan Dharma यही सनातन सत्य है। जो तत्व सदा, सर्वदा, निर्लेप, निरंजन, निर्विकार और सदैव स्वरूप में स्थित रहता है उसे सनातन या शाश्वत सत्य कहते हैं। वेदों का ब्रह्म और गीता का स्थितप्रज्ञ ही शाश्वत सत्य है। जड़, प्राण, मन, आत्मा और ब्रह्म शाश्वत सत्य की श्रेणी में आते हैं। सृष्टि व ईश्वर (ब्रह्म) अनादि, अनंत, सनातन और सर्वविभु हैं। जड़ पांच तत्व से दृश्यमान है- आकाश, वायु, जल, अग्नि और पृथ्वी। यह सभी शाश्वत सत्य की श्रेणी में आते हैं। Sanatan Dharma यह अपना रूप बदलते रहते हैं किंतु समाप्त नहीं होते। प्राण की भी अपनी अवस्थाएं हैं: प्राण, अपान, समान और यम। उसी तरह आत्मा की अवस्थाएं हैं: जाग्रत, स्वप्न, सुसुप्ति और तुर्या। ज्ञानी लोग ब्रह्म को निर्गुण और सगुण कहते हैं। उक्त सारे भेद तब तक विद्यमान रहते हैं जब तक ‍कि आत्मा मोक्ष प्राप्त न कर ले। यही सनातन धर्म का सत्य है। ब्रह्म महाआकाश है तो आत्मा घटाकाश। आत्मा का मोक्ष परायण हो जाना ही ब्रह्म में लीन हो जाना है इसीलिए कहते हैं कि ब्रह्म सत्य है जगत मिथ्‍या यही सनातन सत्य है। और इस शाश्वत सत्य को जानने या मानने वाला ही सनातनी कहलाता है। हिंदुत्व : ईरानी अर्थात पारस्य देश के पारसियों की धर्म पुस्तक ‘अवेस्ता’ में ‘हिन्दू’ और ‘आर्य’ शब्द का उल्लेख मिलता है। दूसरी ओर अन्य इतिहासकारों का मानना है कि चीनी यात्री हुएनसांग के समय में हिंदू शब्द की उत्पत्ति ‍इंदु से हुई थी। इंदु शब्द चंद्रमा का पर्यायवाची है। भारतीय ज्योतिषीय गणना का आधार चंद्रमास ही है। अत: चीन के लोग भारतीयों को ‘इन्तु’ या ‘हिंदू’ कहने लगे। कुछ विद्वान कहते हैं कि हिमालय से हिन्दू शब्द की उत्पत्ति हुई है। हिन्दू कुश पर्वत इसका उदाहरण है। हिन्दू शब्द कोई अप्रभंश शब्द नहीं है अन्यथा सिंधु नदि को भी हिन्दू नहीं कहा

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