September 2025

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Shri Lalita Kavacha:श्रीललिताकवचम्

Shri Lalita Kavacha:श्रीललिताकवचम् । नारदपुराणान्तर्गते । सनत्कुमार उवाच-अथ ते कवचं देव्या वक्ष्ये नवरतात्मकम् ।येन देवासुरनरजयी स्यात्साधकः सदा ॥ १॥ सर्वतः सर्वदाऽऽत्मानं ललिता पातु सर्वगा ।कामेशी पुरतः पातु भगमाली त्वनन्तरम् ॥ २॥ दिशं पातु तथा दक्षपार्श्वं मे पातु सर्वदा ।नित्यक्लिन्नाथ भेरुण्डा दिशं मे पातु कौणपीम् ॥ ३॥ तथैव पश्चिमं भागं रक्षताद्वह्निवासिनी ।महावज्रेश्वरी नित्या वायव्ये मां सदावतु

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Lalitadevi Kavacham: ललितादेवीकवचम्

Lalitadevi Kavacham: ललितादेवीकवचम् अथ ते कवचं देव्या वक्ष्ये नवरतात्मकम् ।येन देवासुरनरजयी स्यात्साधकः सदा ॥ ८९-२३॥ सर्वतः सर्वदाऽऽत्मानं ललिता पातु सर्वगा ।कामेशी पुरतः पातु भगमाली त्वनन्तरम् ॥ ८९-२४॥ दिशं पातु तथा दक्षपार्श्वं मे पातु सर्वदा ।नित्यक्लिन्नाथ भेरुण्डा दिशं मे पातु कौणपीम् ॥ ८९-२५॥ तथैव पश्चिमं भागं रक्षताद्वह्निवासिनी ।महावज्रेश्वरी नित्या वायव्ये मां सदावतु ॥ ८९-२६॥ वामपार्श्वं सदा

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Maa Chandraghanta

Maa Chandraghanta:मां चंद्रघंटा का मंत्र, प्रार्थना, स्तुति, ध्यान, स्तोत्र, कवच और आरती

Maa Chandraghanta देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। भगवान शिव से विवाह के बाद देवी महागौरी ने अपने माथे को आधा चंद्र से सजाना शुरू किया और जिसके कारण देवी पार्वती को देवी चंद्रघंटा के नाम से जाना जाने लगा। नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है

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Maa Chandraghanta

Navratri 3rd day Maa Chandraghanta puja vidhi aarti: नवरात्रि के तीसरे दिन होती है मां चंद्रघंटा की पूजा, नोट कर लें पूजन विधि और आरती

Maa Chandraghanta puja vidhi: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है और इसका तीसरा दिन मां दुर्गा के तृतीय स्वरूप, मां चंद्रघंटा को समर्पित है। देवी भागवत पुराण के अनुसार, मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांत, सौम्य और ममतामयी है, जो अपने भक्तों को सुख-समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इस बार द्वितीया और

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Chandra Darshan

Ashwin Chandra Darshan 2025 date : चंद्र दर्शन कब है, पूजन विधि,महत्व

Ashwin Chandra Darshan: चंद्र दर्शन अमावस्या के उपरांत चंद्र देव के पुनः आगमन एवं उनके दर्शन की परंपरा है। हिंदू धर्म में सूर्य दर्शन की ही तरह चंद्र दर्शन का भी अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस दिन श्रद्धालु चंद्र देव की पूजा एवं विशेष प्रार्थना करते हैं। अमावस्या के तुरंत बाद चंद्रमा का दर्शन करना

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Sindoor Tritiya 2025

Sindoor Tritiya 2025 Date And Time: सिंदूर तृतीया उत्सव 2025 तिथि, पूजा का समय, अनुष्ठान और महत्व

Sindoor Tritiya 2025:शारदीय नवरात्रि का तृतीया दिन देवी पार्वती के माँ चंद्रघंटा रूप को समर्पित है, यही तृतीया दिवस सिंदूर तृतीया पर्व के नाम से प्रसिद्ध है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ला तृतीया तिथि को सिंदूर तृतीया मनायी जाती है। सिंदूर को सुहाग की निशानी माना जाता है। विवाहित होकर भी सिंदूर न लगाना अशुभ माना जाता है।

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Durga Sahasranama Stotram:दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम्

Durga Sahasranama Stotram:दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ॥ श्रीः ॥ ॥ श्री दुर्गायै नमः ॥ ॥ अथ श्री दुर्गासहस्रनामस्तोत्रम् ॥ नारद उवाच – कुमार गुणगम्भीर देवसेनापते प्रभो । सर्वाभीष्टप्रदं पुंसां सर्वपापप्रणाशनम् ॥ १॥ गुह्याद्गुह्यतरं स्तोत्रं भक्तिवर्धकमञ्जसा । मङ्गलं ग्रहपीडादिशान्तिदं वक्तुमर्हसि ॥ २॥ स्कन्द उवाच – श‍ृणु नारद देवर्षे लोकानुग्रहकाम्यया । यत्पृच्छसि परं पुण्यं तत्ते वक्ष्यामि कौतुकात् ॥ ३॥ माता

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Rishikrita Katyayani Stutih: ऋषिकृता कात्यायनीस्तुतिः

Rishikrita Katyayani Stutih: ऋषिकृता कात्यायनीस्तुतिः अन्य दुर्गाध्यानानि । ॥ कात्यायनी ॥ कात्यायनी दशभुजा देवी ही महिषासुर मर्दिनी है । प्रथम कल्पमें उग्रचण्डा रूप में, द्वितीय कल्प में १६ भुजा भद्रकाली रूप मेंतथा तृतीय कल्प में कात्यायनी ने दश भुजा रूप धारण करकेमहिषासुर का वध किया । कात्यायनी मुनि के द्वारा स्तुति करने परबिल्व वृक्ष के

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Brahmacharini Mantra

माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्र: Devi Brahmacharini Mantra

माँ ब्रह्मचारिणी के मंत्र के बारे में:About the mantra of Mother Brahmacharini Brahmacharini Mantra: मां दुर्गा के नौ अवतारों में दूसरे अवतार को मां ब्रह्मचारिणी के नाम से जाना जाता है। मां दुर्गा के इस अवतार की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। ब्रह्मचारिणी का शाब्दिक अर्थ है, ‘तप का आचरण करने वाली।’

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Brahmacharini

Devi Brahmacharini Puja Vidhi: देवी ब्रह्मचारिणी की कैसे करें पूजा, पढ़ें मंत्र, विधि और प्रसाद

Devi Brahmacharini Puja Vidhi: देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार , संयम की वृद्धि होती है। जीवन की कठिन समय मे भी उसका मन कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता है। देवी अपने साधकों की मलिनता, दुर्गणों व दोषों को खत्म करती है। देवी की कृपा से सर्वत्र सिद्धि तथा

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Vishwakarma Puja

Vishwakarma Puja 2025 Date And Time: विश्वकर्मा पूजा तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि – जानें सब कुछ

Vishwakarma Puja:हर साल भाद्रपद मास में सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने पर विश्वकर्मा पूजा (Vishwakarma Puja 2025) मनाई जाती है। यह पर्व विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो औजारों, मशीनों, कारखानों और वाहनों से जुड़ा काम करते हैं। इस दिन भगवान विश्वकर्मा, जो दुनिया के पहले इंजीनियर और वास्तुकार

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Maa Saraswati

Maa Saraswati: मंत्र, वंदना, आरती और नाम

Maa Saraswati: ज्ञान, संगीत, कला, ज्ञान और विद्या की हिंदू देवी हैं। वह सरस्वती, लक्ष्मी और पार्वती की त्रिमूर्ति का हिस्सा है। यह त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश को क्रमशः ब्रह्मांड को बनाने, बनाए रखने और नष्ट करने (पुनर्जीवित करने) में मदद करती है। देवी भागवत के अनुसार, देवी सरस्वती भगवान ब्रह्मा की पत्नी हैं।

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