Ashwin Chandra Darshan: चंद्र दर्शन अमावस्या के उपरांत चंद्र देव के पुनः आगमन एवं उनके दर्शन की परंपरा है। हिंदू धर्म में सूर्य दर्शन की ही तरह चंद्र दर्शन का भी अत्यधिक धार्मिक महत्व है। इस दिन श्रद्धालु चंद्र देव की पूजा एवं विशेष प्रार्थना करते हैं। अमावस्या के तुरंत बाद चंद्रमा का दर्शन करना अत्यंत शुभ माना गया है।
पुराणों में चंद्र देव को पूजनीय देवताओं में से एक माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चंद्रमा को मन का निर्देशक माना जाता है। चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देव की पूजा अर्चना करना मानसिक शांति के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है, Chandra Darshan इसलिए हिंदू धर्म में इस तिथि का विशेष महत्व है। तो चलिए जानते हैं कि वैशाख मास में चंद्रदर्शन कब है, और इस तिथि का महत्व व अनुष्ठान क्या हैं:-
Chandra Darshan Kab Manaya Jayega: चंद्र दर्शन कब मनाया जायेगा?
अमावस्या के बाद अगले दिन या दूसरे दिन को चन्द्र दर्शन दिवस कहा जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास का चंद्रदर्शन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर 23 सितम्बर 2025, मंगलवार को मनाया जायेगा।
चंद्र दर्शन का समय 05:53 पी एम से 06:33 पी एम तक रहेगा।
जिसकी कुल अवधि 00 घण्टा 40 मिनट्स होगी।
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Kyo Manate Hai Chandra Darshan:क्यों मनाते हैं चंद्र दर्शन?
चंद्रमा ‘नवग्रहों’ में से एक ग्रह है और पृथ्वी पर जनजीवन को प्रभावित करता है। Chandra Darshan ऐसा माना जाता है कि जिस व्यक्ति पर चंद्र देव का आशीर्वाद रहता है, उसे सफलता और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए भक्त, सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूजा व व्रत रखते हैं।
चंद्र दर्शन का महत्व:Importance of Chandra Darshan
अमावस्या के बाद अगले दिन या दूसरे दिन को चन्द्र दर्शन दिवस कहा जाता है। यह पूजा कई मायनों में लाभकारी और कल्याणकारी मानी जाती है। चंद्र दर्शन के दिन चंद्रमा की पूजा से मन को शांति मिलती है।
साथ ही जीवन में सफलता के अनेक रास्ते खुलते हैं, साथ ही सद्बुद्धि की भी प्राप्ति होती है। वहीं जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा निम्न या अशुभ स्थिति में मौजूद होता है उन्हें अपने जीवन में तमाम परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। Chandra Darshan इसलिए कहा जाता है कि ऐसी कुंडली वाले लोग यदि चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देवता की उपासना के साथ व्रत रखते हैं तो चंद्र से उत्पन्न होने वाले उनके ग्रह दोष शांत हो जाते हैं।
चंद्र दर्शन पूजन विधि:Chandra Darshan Puja Vidhi
अगर आप चंद्र दर्शन तिथि के दिन चंद्र देव की कृपा प्राप्त प्राप्ति के लिए चंद्र देव की विधिपूर्वक पूजा अर्चना करना चाहते हैं तो यह आपके लिए है। इस पूजा को करने से चंद्र देव की कृपा और आशीष आप पर बना रहता है। तो चलिए विस्तार पूर्वक इस पूजा विधि के बारे में जानते हैं।
चंद्र तिथि के दिन सुबह उठकर चंद्र देव का स्मरण करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद स्नान आदि कार्यों से निवृत होकर पूरे विधि-विधान से घर के मंदिर में पूजा-पाठ करें।
पूजा के समय चंद्र दर्शन की व्रत कथा अवश्य सुनें। इसके बाद पूरा दिन फलाहार करके व्रत रखें।
शास्त्रों के अनुसार, चंद्र दर्शन की तिथि के दिन, शाम के समय चंद्र देव की पूजा की जाती है। चंद्र देव को सबसे पहले अर्घ्य दें, इसके बाद उन्हें पुष्प, दीप, नैवेद्य, रोली और अक्षत अर्पित करें और चंद्र देवता को खीर का प्रसाद अर्पित करें।
चंद्र भगवान की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करें- “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृत तत्वाय धीमहि, तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्” चंद्रमा की विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद व्रत का पारण करें।
चंद्र दर्शन पर दान देना भी एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, इसके बिना आपका व्रत संपूर्ण नहीं होता है।
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What to do on the day of Chandra Darshan:चंद्र दर्शन के दिन क्या करें?
इस दिन ब्राह्मणों को कपड़े, चावल और चीनी समेत अन्य चीजों का दान करना फलदायी माना जाता है।
साथ ही व्रत रखने वाले उपासक इस बात का ध्यान रखें कि चंद्र देव के दर्शन और उनकी पूजा के बाद ही व्रत का पारण करें। इससे आपके जीवन में जीवन में शीतलता और शांति आएगी।
जल में अपनी छाया देखकर चंद्र देव पर जल अर्पित करें। इससे मानसिक विकारों से मुक्ति मिल सकती है और मन शांत होता है।
यदि आपकी माता का स्वास्थ्य ख़राब रहता है, तो चंद्र दर्शन के दिन चंद्र देव शतावरी की जड़ अर्पित करें। इससे उन्हें स्वास्थ्य लाभ हो सकता है.
सौभाग्य की प्राप्ति के लिए चंद्र देव को चांदी का सिक्का अर्पित करें और उसे अपनी तिजोरी में रखें। इससे सौभाग्य व समृद्धि में वृद्धि होती है।
What not to do on the day of Chandra Darshan:चंद्र दर्शन के दिन क्या न करें?
इस दिन किसी की बुराई न करें, किसी को अपशब्द न कहें और किसी का दिल न दुखाएं
चंद्र दर्शन के दिन झूठ नहीं बोलना चाहिए, इससे चंद्रमा की कृपा कम होती है।
इस दिन वाद-विवाद या लड़ाई-झगड़े से बचना चाहिए।
चंद्र दर्शन के दिन मांस-मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।
इस दिन चोरी या अन्य अपराधों से बचना चाहिए।









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