Sindoor Tritiya 2025

Sindoor Tritiya 2025 Date And Time: सिंदूर तृतीया उत्सव 2025 तिथि, पूजा का समय, अनुष्ठान और महत्व

Sindoor Tritiya 2025:शारदीय नवरात्रि का तृतीया दिन देवी पार्वती के माँ चंद्रघंटा रूप को समर्पित है, यही तृतीया दिवस सिंदूर तृतीया पर्व के नाम से प्रसिद्ध है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आश्विन शुक्ला तृतीया तिथि को सिंदूर तृतीया मनायी जाती है।

सिंदूर को सुहाग की निशानी माना जाता है। विवाहित होकर भी सिंदूर न लगाना अशुभ माना जाता है। सिंदूर तृतीया के दिन माता रानी को सिंदूर चढ़ाने से सुहागिन स्त्रियों के सौभाग्य में वृद्धि होती है। सिंदूर को देवी पूजा की विशेष सामग्रियों मे शामिल किया जाता है।

सिंदूर तृतीया Sindoor Tritiya 2025 को भक्तों द्वारा नवरात्रि पर्व के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर, भक्त देवी के तीसरे रूप की पूजा करते हैं, जिसका नाम देवी चंद्रघंटा है। उत्तर भारत के राज्यों में, यह दिन काफी महत्व रखता है।

सिंदूर तृतीया Sindoor Tritiya 2025 का अनुष्ठान नवरात्रि के दौरान किया जाता है क्योंकि नवरात्रि का अवसर इस त्योहार के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। सिंदूर (सिंदूर या लाल पाउडर) विभिन्न हिंदू अनुष्ठानों की सबसे आवश्यक और महत्वपूर्ण चीजों में से एक है और देवी दुर्गा की पूजा करते समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। दक्षिण भारत के राज्यों में, सिंदूर तृतीया की रस्म नवरात्रि उत्सव के पहले तीन दिनों के समापन का प्रतीक है।

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Sindoor Tritiya 2025 Date:सिंदूर तृतीया उत्सव 2025 तिथि

Sindoor Tritiya 2025: सिंदूर तृतीया पर्व 24 सितम्बर, 2025 को मनाया जायेगा ।

सिन्दूर तृतीया पूजा विधि:Sindoor Tritiya Puja Method

Sindoor Tritiya 2025 सिन्दूर तृतीया शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन यानी हिंदू कैलेंडर के अनुसार तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह दिन देवी के नौ रूपों में से तीसरे माता देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।

सिन्दूर तृतीया के दिन माता रानी को सिन्दूर चढ़ाने से विवाहित महिलाओं का सौभाग्य बढ़ता है, घर में सुख-शांति आती है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। सिन्दूर देवी पूजा की विशेष वस्तुओं में शामिल है।

Sindoor Tritiya 2025 सिन्दूर तृतीया के दिन लाखों महिलाएं बड़ी धूमधाम से माता रानी की पूजा करती हैं और उनका आशीर्वाद लेती हैं।

सिन्दूर तृतीया का महत्व:Significance of Sindoor Tritiya

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, सिन्दूर तृतीया तृतीया तिथि यानी कि नवरात्रि के तीसरे दिन मनाई जाती है। सिन्दूर तृतीया को महा तृतीया नवरात्रि दुर्गा पूजा, सौभाग्य तीज और गौरी तीज जैसे नामों से भी जाना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं माता को सिन्दूर लगाने के बाद बचे हुए सिन्दूर को प्रसाद के रूप में अपने पास रख लेती हैं। कहा जाता है कि उसी सिन्दूर से घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक चिन्ह बनाना चाहिए जिससे घर में शांति और समृद्धि बनी रहे। यह दिन माता चंद्रघंटा के विवाहित रूप में माता पार्वती का प्रतिनिधित्व करता है।

Sindoor Tritiya 2025

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