Lalita Mahalakshmi Stotra:श्री ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र,समस्त इच्छाओं की पूर्ति का महामंत्र

Lalita Mahalakshmi Stotra:ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र (श्री ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र): ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र ब्रह्माण्ड पुराण के ललितोपाक्याणम नामक अध्याय में समाहित है। ललिता महालक्ष्मी एक अत्यंत प्रतिष्ठित संस्कृत स्तोत्र है जिसमें देवी ललिता या देवी पार्वती देवी के 300 दिव्य नामों को संबोधित किया गया है। ललिता सहस्त्रनाम के समान, ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र में ऋषि अगस्त्य और भगवान हयग्रीव (घोड़े के सिर वाले भगवान विष्णु का अवतार) के बीच बातचीत का वर्णन किया गया है। ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र को सबसे गुप्त स्तोत्र माना जाता है और इसमें देवी ललिता के तीन सौ नामों का वर्णन है। ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र Lalita Mahalakshmi Stotra की अनूठी रचना यह है कि ललिता महालक्ष्मी के प्रत्येक बीस नाम 15 अक्षरों में से प्रत्येक से शुरू होते हैं जो पंच दशाक्षरी मंत्र बनाते हैं। Lalita Mahalakshmi Stotra महालक्ष्मी सर्वोच्च देवता हैं जिन्हें त्रिपुर सुंदरी या श्री विद्या या ललिताम्बिका या ललिता के नाम से भी जाना जाता है। महालक्ष्मी लक्ष्मी (सात्विक), सरस्वती (राजसिक) और काली (तामसिक) शक्तियों का संगम हैं। यहाँ, “महा” शब्द संज्ञा “लक्ष्मी” के लिए प्रयुक्त विशेषण नहीं है। जबकि भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी हैं, भगवान विष्णु स्वयं श्री विद्या उपासक हैं, अर्थात, वे महालक्ष्मी की पूजा करते हैं। Lalita Mahalakshmi Stotra:इसका उदाहरण भगवान हयग्रीव द्वारा ऋषि अगस्त्य को ललिता सहस्त्रनाम स्तोत्रम का जाप करने के माध्यम से मिलता है। अपने वास्तविक सार में, महालक्ष्मी वह ब्रह्मांडीय शक्ति है जिसे शक्ति कहा जाता है जो जीवंतता (विष्णु) को बनाए रखती है और साथ ही व्यक्ति को उसकी वास्तविक पहचान (शिव) का एहसास कराती है। महालक्ष्मी सर्वोच्च शक्ति देवी हैं जो आत्म-साक्षात्कार की ओर वास्तविक ज्ञान (बुद्धि) का प्रतीक हैं। उनके दो निचले हाथ अभयम (भ्रामक मार्गदर्शन से सुरक्षा या परिरक्षण) और वरदम (सच्चा मार्गदर्शन प्राप्त करने का आशीर्वाद) का प्रतीक हैं। उनके दो ऊपरी हाथों में पवित्र कमल का फूल है, जो हमारे सूक्ष्म शरीर में अदृश्य कमल के अलावा और कुछ नहीं, जिसे “सहस्रार दल पद्मम” (हजार पंखुड़ियों वाला कमल) कहा जाता है, जो छह चक्रों से परे स्थित है। Lalita Mahalakshmi Stotra पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन, माँ ललिता कामदेव के शरीर से उत्पन्न ‘भंडा’ नामक राक्षस का वध करने के लिए प्रकट हुई थीं। इस दिन मंदिरों में भक्तों का तांता लगता है। यह व्रत सभी सुखों को प्रदान करने वाला है, इसलिए इस दिन भगवान ललिता की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से किया जाता है। Lalita Mahalakshmi Stotra:ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र के लाभ ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र मनुष्य को शक्ति प्रदान करता है।ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र का जाप करने से मनुष्य को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र मंत्र का जाप करने से जीवन की आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है, धन प्राप्ति में आसानी होती है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए Lalita Mahalakshmi Stotra:जो व्यक्ति लगातार असफलता से पीड़ित हैं, कठिनाइयों से गुजर रहे हैं और अंत नहीं पा रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र:Lalita Mahalakshmi Stotra वैष्णव-सम्प्रदाय के प्रसिद्ध ग्रन्थ “लक्ष्मी-नारायण-संहिता” से उद्धृत निम्न स्तोत्र शक्ति-साधना से सम्बन्धित है। वैष्णव ग्रन्थ होने के कारण इनकी साधना-प्रणाली ‘वैष्णवाचार’-परक है। ।। श्री नारायणी श्रीरुवाच ।। ललिताख्य-महा-लक्ष्म्या, नामान्यसंख्यानि वै ।तथाप्यष्टोत्तर-शतं, स-पादं श्रावय प्रभो ! ।। हे प्रभो ! ललिता महा-लक्ष्मी के असंख्य नाम हैं ।तथापि उनके एक सौ पैंतीस नामों को सुनाइए । ।। श्री पुरुषोत्तमोवाच ।। मुख्य-नाम्नां प्रपाठेन, फलं सर्वाभिधानकम् ।भवेदेवेति मुख्यानि, तत्र वक्ष्यामि संश्रृणु ।। ललिता श्री महा-लक्ष्मीर्लक्ष्मी रमा च पद्मिनी ।कमला सम्पदीशा च, पद्मालयेन्दिरेश्वरी ।। परमेशी सती ब्राह्मी, नारायणी च वैष्णवी ।परमेश्वरी महेशानी, शक्तीशा पुरुषोत्तमी ।। बिम्बी माया महा-माया, मूल-प्रकृतिरच्युती ।वासुदेवी हिरण्या च हरिणी च हिरण्मयी ।। कार्ष्णी कामेश्वरी चापि कामाक्षी भगमालिनी ।वह्निवासा सुन्दरी च संविच्च विजया जया ।। मंगला मोहिनी तापी वाराही सिद्धिरीशिता ।भुक्तिः कौमारिकी बुद्धिश्चामृता दुःखहा प्रसूः ।। सुभाग्यानन्दिनी संपद्, विमला विंद्विकाभिधा ।माता मूर्तिर्योगिनी च, चक्रिकार्चा रतिधृती ।। श्यामा मनोरमा प्रीतिः ऋद्धिः छाया च पूर्णिमा ।तुष्टिः प्रज्ञा पद्मावती दुर्गा लीला च माणिकी ।। उद्यमा भारती विश्वा, विभूतिर्विनता शुभा ।कीर्तिः क्रिया च कल्याणी विद्या कला च कुंकुमा ।। पुण्या पुराणा वागीशी, वरदा विभवात्मिनी ।सरस्वती शिवा नादा, प्रतिष्ठा संस्कृता त्रयी ।। आयुर्जीवा स्वर्ण-रेखा, दक्षा वीरा च रागिनी ।चपला पंडिता काली, भद्राम्बिका च मानिनी ।। विशालाक्षी वल्लभा च गोपी नारी नारायणी ।संतुष्टा च सुषुम्ना च, क्षमा धात्री च वारुणी ।। गुर्वी साध्वी च गायत्री, दक्षिणा चान्नपूर्णिका ।राजलक्ष्मीः सिद्धमाता माधवी भार्गवी परो ।। हारिती राशियानी च, प्राचीनी गौरिका श्रुतिः । ।। फल-श्रुति ।। इत्यष्टोत्तर-शतकं, सप्त-विंशतिरित्यपि ।ललिता-मुख्य-नामानि, कथितानि तव प्रिये ।। नित्यं यः पठते तस्य, भुक्तिर्मुक्तिः कर-स्थिता ।स्मृद्धिर्वंशस्य विस्तारः, सर्वानन्दा भवन्ति वै ।। ।। इति श्री ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।। हे प्रिये ! ललिता के मुख्य एक सौ आठ और सत्ताइस नाम तुमसे कहे हैं। जो नित्य इन नामों को पढ़ता है, उसके कुल की सम्पन्नता बढ़ती है, सभी प्रकार के सुख मिलते हैं और भोग-मोक्ष उसके हाथ में रहते हैं अर्थात् साधक सभी भोगों को भोगकर अन्त में मोक्ष पाता है।

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Lalita Panchakam Stotram:ललिता पंचकम –एक अलौकिक स्तोत्र, जो जीवन को दिव्यता से भर दे

Lalita Panchakam Stotram:ललिता पंचकम (ललिता पंचकम): ललिता पंचकम की शुरुआत प्रथा स्मारमी ललिता वदनारविंदम से होती है, जो देवी ललिता त्रिपुरसुंदरी का भक्ति मंत्र है और गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित है। माँ ललिता त्रिपुरसुंदरी श्रीचक्र (श्रीयंत्र) की अधिष्ठात्री देवी हैं। षोडशी के रूप में देवी त्रिपुरा को सोलह वर्ष की कन्या के रूप में दर्शाया गया है, और माना जाता है कि वे सोलह प्रकार की इच्छाओं का प्रतीक हैं। माँ त्रिपुरा को षोडशी, ललिता और राजराजेश्वरी भी कहा जाता है। ललिता पंचकम के लाभों का वर्णन फल स्तुति में किया गया है और इसके अनुसार जो लोग ललिता पंचकम का पाठ करके देवी ललिता की पूजा करते हैं, उन्हें देवी सौभाग्य, समृद्धि और प्रसिद्धि का आशीर्वाद देती हैं। Lalita Panchakam Stotram:ललिता पंचकम के लाभ Lalita Panchakam Stotram:ललिता पंचकम किसी भी तंत्र या मंत्र से अधिक शक्तिशाली है।भगवान हयग्रीव ने मुक्ति के लिए शुद्धतम इरादे से ललिता पंचकम का जाप किया।यदि पूर्णिमा के दिन ललिता पंचकम का जाप किया जाए तो सभी रोग दूर हो जाते हैं और लंबी आयु की गारंटी होती है।यदि इसका जाप किया जाए तो एक करोड़ गंगा स्नान का लाभ मिलता है।एक करोड़ लिंग की स्थापना का लाभ मिलता है।अकाल के समय एक करोड़ ब्राह्मणों को भोजन कराने का लाभ मिलता है। एक करोड़ छात्रों को पढ़ाने का लाभ मिलता है। Lalita Panchakam Stotram:यदि आपको बुखार है, तो बस अपने सिर को छूएं और इन 1000 नामों का जाप करें, बुखार उतर जाएगा और गायब हो जाएगा।रोगों से मुक्ति के लिए पवित्र भस्म को छूएं और इन 1000 नामों का जाप करें, और भस्म (विभूति) धारण करने से सभी रोग ठीक हो जाएंगे।ग्रह दोष (ग्रह दोष, शनि दोष आदि) से बचने के लिए, एक बर्तन में पानी रखें, और 1000 नामों का जाप करते हुए और अपने ऊपर पानी छिड़कते हुए ग्रहों से सभी समस्याओं का समाधान करें। पुत्र की प्राप्ति के लिए, एक महिला इन 1000 नामों का जाप कर सकती है और देवी माँ को मक्खन चढ़ा सकती है।मंत्रियों या राजाओं, यदि आप उन्हें प्रभावित करना चाहते हैं, तो राजा के महल की ओर मुंह करके इन 1000 नामों का जाप करें – राजा आपके पास आएंगे और आपकी ज़रूरत पूछेंगे। यदि आप इसका जाप करते हैं, तो आप काले जादू से प्रभावित नहीं हो सकते। यदि आप इसे 6 महीने तक रोजाना पढ़ते हैं, तो देवी लक्ष्मी आपके घर में स्थायी रूप से निवास करेंगी। इस पंचकम का पाठ किसे करना चाहिए:जो लोग काले जादू, टोना और अन्य तांत्रिक क्रियाओं के प्रभाव में हैं, उन्हें नियमित रूप से ललिता पंचकम का पाठ करना चाहिए। ललिता पञ्चकम् हिंदी:Lalita Panchakam Stotram प्रात: स्मरामि ललितावदनारविन्दं विम्बाधरं पृथुलमौक्तिकशोभिनासम् ।आकर्णदीर्घनयनं मणिकुण्डलाढयं मंदस्मितं मृगमदोज्ज्वलभालदेशम् ।। 1 ।। प्रातर्भजामि ललिताभुजकल्पवल्लीं रक्तांगगुलीयलसदंगुलिपल्लवाढयाम् ।माणिक्यहेमवलयांगदशोभमानां पुण्ड्रेक्षुचापकुसुमेषुसृणीदधानाम् ।। 2 ।। प्रातर्नमामि ललिताचरणारविन्दं भक्तेष्टदाननिरतं भवसिन्धुपोतम् ।पद्मासनादिसुरनायकपूजनीयं पद्मांकुशध्वजसुदर्शनलांछनाढ़यम् ।। 3 ।। प्रात: स्तुवे परशिवां ललितां भवानीं त्र्य्यन्तवेधविभवां करुणानवधाम् ।विश्वस्य सृष्टिविलयस्थितिहेतुभूतां विधेश्वरीं निगमवांगमनसातिदूराम् ।। 4 ।। प्रातर्वदामि ललिते तव पुण्यनाम कामेश्वरीति कमलेति महेश्वरीति ।श्रीशाम्भविती जगतां जननी परेति वाग्देवतेति वचसा त्रिपुरेश्वरीति ।। 5 ।। य: श्लोकपञ्चकमिदं ललिताम्बिकाया: सौभाग्यदं सुललितं पठति प्रभाते ।तस्मै ददाति ललिता झटिति प्रसन्ना विद्यां श्रियं विमलसौख्यमनन्तकीर्तिम् ।। 6 ।। ।। इति ललिता पंचकम सम्पूर्णम् ।।

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Satyanarayan Vrat Katha:श्री सत्यनारायण भगवान व्रत कथा संपूर्ण हिंदी में,जानें पूजन विधि

Satyanarayan Vrat Katha:शास्त्रों में बताया गया है कि सत्यनारायण व्रत कथा का पाठ करने से व्यक्ति को हजार यज्ञ करने के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सत्यनारायण भगवान व्रत कथा में भगवान विष्णु के सत्य स्वरूप के बारे में बताया गया है। इस व्रत का पाठ करने से घर में सुख समृद्धि का वास होता है और भगवान विष्णु की कृपा बना रहती है। सत्यनारायण कथा का महत्व:Importance of Satyanarayan Vrat Katha भगवान सत्यनारायण का उल्लेख स्कंद पुराण में मिलता है। स्कन्द पुराण में भगवान विष्णु ने नारद को इस व्रत का महत्व बताया है। ऐसा माना जाता है कि जो भी व्यक्ति सत्य को ईश्वर मानकर, निष्ठा के साथ इस व्रत और कथा का श्रवण करता है उसे मनमुताबिक फल की प्राप्ति होती है। पुराणों में यहां तक कहा गया है कि सत्यनारायण कथा कराने से हजारों वर्ष किए गए यज्ञ के बराबर फल मिलता है।   कब कराई जा सकती है कथा:When can the story be conducted? महीने की एकादशी, बृहस्पतिवार और हर महीने की पूर्णिमा तिथि को विष्णु जी का पूजन करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इसलिए इन विशेष दिनों में सत्यनारायण की कथा पढ़ना और सुनना शुभ माना जाता है। सत्यनारायण व्रत पूजन:Satyanarayan fast worship सत्यनारायण व्रत के दौरान पूरे दिन उपवास रखना चाहिए। व्रत के दिन सुबह स्नान करके साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। शुभ मुहूर्त में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके सत्यनारायण भगवान का पूजन करें। संध्या काल में पंडित को बुलाकर सत्यनारायण की कथा श्रवण करनी चाहिए। चौकी पर कलश रखकर भगवान विष्णु की मूर्तियां सत्यनारायण की फोटो रखकर पूजन करना चाहिए। भगवान को भोग में चरणामृत, पान, तिल, रोली, कुमकुम, फल, फूल, सुपारी और दुर्गा आदि अर्पित करें। सत्यनारायण भगवान की कथा सुनने के लिए परिवार के साथ- साथ अन्य भक्तों को भी शामिल करें। अंत में सभी लोगों में कथा का प्रसाद बांटे। Satyanarayan Vrat Katha:श्री सत्यनारायण भगवान व्रत कथा Satyanarayan Vrat Katha:सत्यनारायण व्रत कथा का पहला अध्याय एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, 88,000 ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती है? तथा उनका उद्धार कैसे होगा? हे मुनि श्रेष्ठ ! कोई ऐसा तप बताइए जिससे थोड़े समय में ही पुण्य मिलें और मनवांछित फल भी मिल जाए। इस प्रकार की कथा सुनने की हम इच्छा रखते हैं। सर्व शास्त्रों के ज्ञाता सूतजी बोले: हे वैष्णवों में पूज्य ! आप सभी ने प्राणियों के हित की बात पूछी है इसलिए मैं एक ऐसे श्रेष्ठ व्रत को आप लोगों को बताऊंगा जिसे नारद जी ने लक्ष्मीनारायण जी से पूछा था और लक्ष्मीपति ने मनिश्रेष्ठ नारद जी से कहा था। आप सब इसे ध्यान से सुनिए | एक समय की बात है, योगीराज नारदजी दूसरों के हित की इच्छा लिए अनेकों लोको में घूमते हुए मृत्युलोक में आ पहुंचे। यहां उन्होंने अनेक योनियों में जन्मे प्राय: सभी मनुष्यों को अपने कर्मों द्वारा अनेकों दुखों से पीड़ित देखा। उनका दुख देख नारदजी सोचने लगे कि कैसा यत्न किया जाए जिसके करने से निश्चित रुप से मानव के दुखों का अंत हो जाए। इसी विचार पर मनन करते हुए वह विष्णुलोक में गए। वहाँ वह देवों के ईश नारायण की स्तुति करने लगे जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म थे, गले में वरमाला पहने हुए थे। स्तुति करते हुए नारद जी बोले, हे भगवान! आप अत्यंत शक्ति से संपन्न हैं, मन तथा वाणी भी आपको नहीं पा सकती हैं। आपका आदि, मध्य तथा अंत नहीं है। निर्गुण स्वरुप सृष्टि के कारण भक्तों के दुख को दूर करने वाले है, आपको मेरा नमस्कार है। नारदजी की स्तुति सुन विष्णु भगवान बोले, हे मुनिश्रेष्ठ! आपके मन में क्या बात है? आप किस काम के लिए पधारे हैं? उसे नि:संकोच कहो। इस पर नारद मुनि बोले कि मृत्युलोक में अनेक योनियों में जन्मे मनुष्य अपने कर्मों के द्वारा अनेको दुख से दुखी हो रहे हैं। हे नाथ! आप मुझ पर दया रखते हैं तो बताइए कि वो मनुष्य थोड़े प्रयास से ही अपने दुखों से कैसे छुटकारा पा सकते है। श्रीहरि बोले, हे नारद! मनुष्यों की भलाई के लिए तुमने बहुत अच्छी बात पूछी है। जिसके करने से मनुष्य मोह से छूट जाता है, वह बात मैं कहता हूं, उसे सुनो। स्वर्ग लोक व मृत्युलोक दोनों में एक दुर्लभ उत्तम व्रत है जो पुण्य देने वाला है। आज प्रेमवश होकर मैं उसे तुमसे कहता हूं। श्रीसत्यनारायण भगवान का यह व्रत अच्छी तरह विधानपूर्वक करके मनुष्य तुरंत ही यहाँ सुख भोग कर, मरने पर मोक्ष पाता है। श्रीहरि के वचन सुन नारदजी बोले कि उस व्रत का फल क्या है? और उसका विधान क्या है? यह व्रत किसने किया था? इस व्रत को किस दिन करना चाहिए? सभी कुछ विस्तार से बताएं। नारद की बात सुनकर श्रीहरि बोले, दुख व शोक को दूर करने वाला यह सभी स्थानों पर विजय दिलाने वाला है। मानव को भक्ति व श्रद्धा के साथ शाम को श्रीसत्यनारायण की पूजा धर्म परायण होकर ब्राह्मणों व बंधुओं के साथ करनी चाहिए। भक्ति भाव से ही नैवेद्य, केले का फल, घी, दूध और गेहूँ का आटा सवाया लें। गेहूं के स्थान पर साठी का आटा, शक्कर तथा गुड़ लेकर व सभी भक्षण योग्य पदार्थो को मिलाकर भगवान का भोग लगाएँ। ब्राह्मणों सहित बंधु-बांधवों को भी भोजन कराएं, उसके बाद स्वयं भोजन करें। भजन, कीर्तन के साथ भगवान की भक्ति में लीन हो जाएं। इस तरह से सत्य नारायण भगवान का यह व्रत करने पर मनुष्य की सारी इच्छाएँ निश्चित रुप से पूरी होती हैं। इस कलि काल अर्थात कलियुग में मृत्युलोक में मोक्ष का यही एक सरल उपाय बताया गया है। ॥श्री सत्यनारायण व्रत कथा का पहला अध्याय संपूर्ण॥ बोलिए श्री सत्यनारायण भगवान की जय। Satyanarayan Vrat Katha:सत्यनारायण भगवान की व्रत कथा का दूसरा अध्याय सूत जी बोले, हे ऋषियों ! जिसने पहले समय में इस व्रत को किया था उसका इतिहास कहता हूं, ध्यान से सुनो! सुंदर काशीपुरी नगरी में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण रहता था। भूख प्यास से परेशान वह धरती पर घूमता रहता था। ब्राह्मणों से प्रेम से प्रेम करने वाले भगवान ने एक दिन

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Bhandara in Dream:सपने में भंडारा देखना शुभ संकेत है या अशुभ,समझ लीजिए जीवन में दूर होने वाले है सभी..

Bhandara in Dream:सपने में भंडारा होते हुए देखने का अर्थ है कि आपका जीवन जल्द ही धन-धान्य से परिपूर्ण होने वाला है। इसलिए ऐसा सपना देखना शुभ माना जाता है। सोते हुए सपना देखना एक आम बात है। अक्सर लोग सपने में खुद को अजीबोगरीब स्थिति में पाते हैं। कई बार ये सपने हमारी सोच का भी नतीजा होते हैं, लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि हम जिन चीजों के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचते, Bhandara in Dream वह भी हमें सपने में दिखाई दे जाती हैं। ऐसे में लोग सोच में पड़ जाते हैं कि आखिर उन्हें इस तरह के सपने क्यों आए हैं। स्वप्न शास्त्र में सपनों का गहराई से अध्ययन किया जाता है। जानकारों की मानें तो व्यक्ति जो भी चीजें सपने में देखता है, उसका कोई-ना-कोई अर्थ जरूर होता है। ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि सपने हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं, यह हमें आने वाले समय का इशारा देते हैं। Bhandara in Dream स्वप्न शास्त्र के मुताबिक अगर आप सपने में ये चीजें देखते हैं तो इसका मतलब है कि आपकी जिंदगी के सभी कष्ट दूर होने वाले हैं। Dream Interpretation :हम सभी लोग अपने जीवन में सोते समय कई प्रकार के सपने देखते हैं. कुछ लोगों के सपने अच्छे होते हैं और कुछ लोगों को डरावने सपने आते हैं. स्वप्न शास्त्र (Swapn Shastra) के अनुसार सपनों से व्यक्ति के जीवन में गहरा प्रभाव पड़ता है. इन सपनों से हमे आने वाले समय के लिए कई अच्छे और बुरे संकेत मिलते हैं. ज्यादातर सपने उन लोगों को आते हैं, जिनकी नींद बहुत हल्की होती है. गहरी नींद में सोने वाले लोगों को सपने कम दिखाई देते हैं. हालांकि सपने देखना किसी व्यक्ति के वश में नहीं होता है. एक तरह का धार्मिक सामुहिक भोजन भंडारा कहलाता है. ये अधिकतर देवी-देवता के हवन, यज्ञ या फिर अनुष्ठान के बाद प्रसाद के रूप में कराया जाता है. हम में से बहुत से लोगों ने अपने जीवन में कभी न कभी भंडारा जरूर खाया होगा, लेकिन यदि सपने में हम भंडारा होते हुए देखते हैं या अपने आप को उस भंडारे में खाना खाते हुए देखते हैं तो इसे स्वप्न शास्त्र में बहुत शुभ माना गया है. Bhandara in Dream ऐसा माना जाता है कि सपने में भंडारा देखने से ये आपके आने वाले भविष्य में धन लाभ होने का संकेत देता है. इसी प्रकार सपने में किसी महल को देखना भी बहुत शुभ माना जाता है. महल का सपना देखने का अर्थ है कि आपको जल्द ही कहीं ना कहीं से धन प्राप्त होने वाला है और यह संकेत है कि आने वाले दिनों में आपकी आर्थिक तंगी भी दूर हो जाएगी. स्वप्न शास्त्र में सपनों को लेकर बहुत सी बातें बताई गई हैं, जिनमें से एक है Bhandara in Dream अपना दांत टूटते हुए देखना. यदि सपने में आप अपना खुद का दांत टूटते हुए देखते हैं तो इसका मतलब है कि आप की दरिद्रता जल्द ही दूर हो जाएगी और आपके जीवन में खुशियां आने वाली हैं. सपने में भंडारा देखना:Bhandara in Dream रात को प्रत्येक व्यक्ति को कई प्रकार के सपने आते है कुछ सपने ऐसे होते है जिनका व्यक्ति के भविष्य में कोई न कोई सम्बन्ध अवश्य होता है। अगर आपका द्वारा देखा गया सपना शुभ है तो भविष्य में आपको उस सपने के शुभ फल प्राप्त होंगे। Bhandara in Dream अगर आपको सपने में भंडारा दिखाई देता है या आप सपने में भंडारा खाते हुए खुद को देखते है या आप सपने में भंडारा कर रहे है तो इन सभी सपनो का एक ही मतलब होता है ये सपना शुभ है। इस सपने के निकट भविष्य में शुभ परिणाम प्राप्त होंगे। इस सपने के कई प्रकार के शुभ फल निकट भविष्य में प्राप्त होंगे। जिनकी चर्चा इस ब्लॉग में विस्तार से करेंगे। Seeing Bhandara in the dream or eating Bhandara in the dream or eating Bhandara in the dream:सपने में भंडारा देखना या सपने में भंडारा करना या सपने में भंडारा खाना यदि आप सपने में भंडारा देखते है तो ये सपना बहुत शुभ है इस सपने के अनुसार आपके ऊपर ईश्वर की कृपा होने वाली है और आपका अच्छा समय आने वाला है आपका भाग्य उदय होने वाला है। Bhandara in Dream आपको अपनी लाइफ में तरक्की प्राप्त होने वाली है। यदि आप सपने में भंडारा खाते हुए खुद को देखते है तो ये सपना शुभ है इस सपने के अनुसार आपको निकट भविष्य में करियर में तरक्की प्राप्त होगी। आपको करियर में सफलता प्राप्त होगी। आपको नौकरी में प्रमोशन मिलने के योग बनेंगे। करियर के मामले में आपका अच्छा समय शुरू होने वाला है। यदि आप सपने में भंडारा करते हुए स्वयं को देखते है तो इस सपने के अनुसार आपके पास धन आने वाला है। आपके पास धन आएगा। आपके पास अच्छी मात्रा में धन आएगा। आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो जाएगी। आपकी आर्थिक उन्नति होगी। आपके सुख साधन की वस्तुओ में वृद्धि होगी। आपकी इनकम में वृद्धि होगी। सपने में यदि आप भंडारा देखते है तो इस सपने के अनुसार आपके मान सम्मान में वृद्धि होने वाली है। Bhandara in Dream आपको समाज में मान सम्मान प्राप्त होगा। आपके मान सम्मान में वृद्धि होगी। समाज में आपकी इज्जत बढ़ने वाली है। अतः ये सपना बहुत शुभ है। सपने में भंडारा देखना का एक अर्थ यह है की अगर आप व्यापारी है तो आपको व्यापार में धन लाभ होगा। आपको व्यापार में उन्नति प्राप्त होगी। आप निकट भविष्य में बड़े बिज़नेसमेन बन जाएंगे। अतः व्यापारियों के लिए भी ये सपना बहुत शुभ है। सपने में भंडारा देखने का एक और अर्थ यह की है आने वाले निकट भविष्य में आपका स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा। आप स्वास्थ्य रहेंगे। आपका अच्छा समय शुरू होने वाला है। अतः स्वास्थ्य की दृष्टि से भी ये सपना शुभ है। सपने में भंडारा देखना बहुत शुभ सपना है Bhandara in Dream इस सपने के अनुसार आपके परिवार में शुभ और मांगलिक कार्य शुरू होने वाले है। निकट भविष्य में आपके परिवार में शुभ कार्य प्रारम्भ होंगे और परिवार में सभी रुके हुए कार्य अब पूरे हो जाएंगे। परिवार में खुशहाली आएगी। सपने भंडारा देखना बहुत शुभ सपना

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Yogini ekadashi vrat katha: योगिनी एकादशी का व्रत इस कथा के बिना है अधूरा

Yogini ekadashi vrat katha in hindi:धार्मिक मान्यता है कि योगिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करने से जातक को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही श्री हरि की कृपा प्राप्त होती है और शुभ फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि Yogini ekadashi vrat katha एकादशी व्रत बिना कथा का पाठ करने से अधूरा माना जाता है। आइए पढ़ते हैं योगिनी एकादशी की व्रत कथा। योगिनी एकादशी व्रत कथा (Yogini Ekadashi Vrat Katha) पौराणिक कथा के अनुसार, स्वर्ग लोक में कुबेर नाम का राजा रहता था। वह शिव भक्त था। रोजाना महादेव की पूजा किया करता था। उसका हेम नाम का माली था, जो हर दिन पूजा के लिए फूल लाता था। माली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था। Yogini ekadashi vrat katha वह बेहद सुंदर थी। एक बार जब सुबह माली मानसरोवर से फूल तोड़कर लाया, लेकिन कामासक्त होने की वजह से वह अपनी स्त्री से हास्य-विनोद करने लगा।राजा को उपासना करने में देरी हो गई, जिसकी वजह से वह क्रोधित हुआ। ऐसे में राजा ने माली को श्राप दे दिया। उन्होंने कहा कि तुमने ईश्वर की भक्ति से ज्यादा कामासक्ति को प्राथमिकता दी है, तुम्हारा स्वर्ग से पतन होगा और तुम धरती पर स्त्री वियोग और कुष्ठ रोग का सामना करोगे। इसके बाद वह धरती पर आ गिरा, जिसकी वजह से उसे कुष्ठ रोग हो गया और उसकी स्त्री भी चली गई। वह कई वर्षों तक धरती पर कष्टों का सामना करता रहा। एक बार माली को मार्कण्डेय ऋषि के दर्शन हुए। उसने अपने जीवन की सभी परेशानियों को बताया।ऋषि माली को बातों को सुनकर आश्चर्य हुआ। ऐसे में मार्कण्डेय ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी के व्रत के महत्व के बारे में बताया। Yogini ekadashi vrat katha मार्कण्डेय ने कहा कि इस व्रत को करने से तुम्हारे जीवन के सभी पाप खत्म होंगे और तुम पुनः भगवत कृपा से स्वर्ग लोक को प्राप्त करोगे। माली ने ठीक ऐसा ही किया। भगवान विष्णु ने उसके समस्त पापों को क्षमा करके उसे पुनः स्वर्ग लोक में स्थान प्रदान किया। योगिनी एकादशी कब है: हिंदू पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 जून 2025 को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ होगी और 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में इस साल योगिनी एकादशी 21 जून 2025 को रखा जाएगा। योगिनी एकादशी का महत्व: योगिनी एकादशी निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति व खुशहाली आती है। भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने से पहले इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा खास मानी गई है। Yogini Ekadashi 2024 Vrat Katha: एकादशी तिथि सभी शुभ तिथियों में से एक है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। हर माह में 2 बार एकादशी व्रत किया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को Yogini ekadashi vrat katha योगिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। Yogini ekadashi vrat katha इस दिन भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत कथा पाठ जरूर करना चाहिए।  योगिनी एकादशी पूजन मुहूर्त 2025:Yogini Ekadashi Puja Muhurta 2025: ब्रह्म मुहूर्त- 04:04 ए एम से 04:44 ए एम अभिजित मुहूर्त- 11:55 ए एम से 12:51 पी एम विजय मुहूर्त- 02:43 पी एम से 03:39 पी एम गोधूलि मुहूर्त- 07:21 पी एम से 07:41 पी एम अमृत काल- 01:12 पी एम से 02:41 पी एम योगिनी एकादशी व्रत पारण मुहूर्त: योगिनी एकादशी व्रत का पारण 22 जून 2025 को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 47 मिनट से शाम 04 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। पारण के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय सुबह 09 बजकर 41 मिनट है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह और कथन केवल सामान्य सूचना के लिए हैं। KARMASU.IN यहां इस लेख फीचर में लिखी गई बातों का समर्थन नहीं करता है। इस लेख में निहित जानकारी विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों/दंतकथाओं से संग्रहित की गई हैं। पाठकों से अनुरोध है कि लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें। KARMASU.IN अंधविश्वास के खिलाफ है।

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Lakshmi Narasimha Stotra:भगवान नृसिंह और माता लक्ष्मी की संयुक्त कृपा प्राप्त करने वाला स्तोत्र

Lakshmi Narasimha Stotra:लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र (श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र): यह भगवान महाविष्णु और लक्ष्मी की सबसे शक्तिशाली अभिव्यक्तियों में से एक है, जो हिंदू त्रय में रक्षक हैं। संस्कृत में कई मंत्र भगवान नरसिंह की स्तुति और प्रार्थना करते हैं और किसी भी चुने हुए नरसिंह मंत्र का उचित श्रद्धा, परिश्रम और भक्ति के साथ जाप करने से भय दूर हो सकता है और भक्तों को सभी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। नीचे सरल, लेकिन गहन लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र का एक संग्रह देखें जो कई तरह के लाभ प्रदान कर सकता है। इस स्तोत्र की रचना श्री आदि शंकराचार्य ने की थी। Lakshmi Narasimha Stotra इस स्तोत्र में क्रोधित भगवान या उग्र नरसिंह को शांत करने के लिए भगवान लक्ष्मी नरसिंह की स्तुति की गई है। इस स्तोत्र को श्री लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र के रूप में भी जाना जाता है, यह Lakshmi Narasimha Stotra लक्ष्मी नरसिंह की स्तुति में 17-श्लोकों वाला स्तोत्र है। Lakshmi Narasimha Stotra लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें से प्रत्येक श्लोक एक ही वाक्य “लक्ष्मी नरसिंह, मम देहि” के साथ समाप्त होता है जिसका अर्थ है “हे भगवान नरसिंह, कृपया मुझे अपना सहायक हाथ दें”। जब इसे घर में प्रतिदिन सुना जाता है तो व्यक्ति का क्रोध कम होता है और घर में शांति आती है। यह एक महान प्रार्थना है जिसे हर किसी की दैनिक आध्यात्मिक साधना का हिस्सा होना चाहिए। यह स्तोत्र भगवान नरसिंह को समर्पित महा मंत्र है। Lakshmi Narasimha Stotra लक्ष्मी स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है जो वैदिक पाठ से लिया गया है। जब स्तोत्र और नरसिंह गायत्री मंत्र के पाठ के बाद इसका जाप किया जाता है, तो महा मंत्र के जाप का लाभ कई गुना बढ़ जाता है। नरसिंह भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। वे आधे मनुष्य और आधे शेर थे। वे हिरण्यकश्यप नामक राक्षस राजा को खत्म करने के लिए प्रकट हुए थे, जिसने अपने बेटे प्रह्लाद को भी नहीं बख्शा क्योंकि उसने उसे पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली शक्ति के रूप में नहीं माना था। Lakshmi Narasimha Stotra:लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र के लाभ: सभी प्रकार के कष्टों और समस्याओं का निवारण करता है।प्रतिकूल ग्रहों की स्थिति और अज्ञात पापों/शापों के कारण होने वाले बुरे प्रभावों को दूर करता है।सभी प्रयासों में सफलता।खतरों और परेशानियों को पहले से ही भांप लेने की क्षमता।आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि।बच्चों और किशोरों को बहुत लाभ हो सकता है क्योंकि भगवान नरसिंह उन्हें बुरी नज़र के साथ-साथ बुरे प्रभावों, बुरी आदतों और गुप्त इरादों वाले दोस्तों से भी बचाएंगे।सभी प्रकार के भय और अशांति को दूर करता है। Lakshmi Narasimha Stotra:इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: आत्मविश्वास खो चुके, विभिन्न समस्याओं से पीड़ित और दुश्मनों से डरने वाले व्यक्ति को इस स्तोत्र का नियमित रूप से पाठ करना चाहिए। श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र हिंदी पाठ:Lakshmi Narasimha Stotra in Hindi श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे भोगींद्रभोगमणिराजित पुण्यमूर्ते ।योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धिपोत लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 1 ॥ ब्रह्मेंद्ररुद्रमरुदर्ककिरीटकोटि संघट्टितांघ्रिकमलामलकांतिकांत ।लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 2 ॥ संसारदावदहनाकरभीकरोरु-ज्वालावलीभिरतिदग्धतनूरुहस्य ।त्वत्पादपद्मसरसीरुहमागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 3 ॥ संसारजालपतिततस्य जगन्निवास सर्वेंद्रियार्थ बडिशाग्र झषोपमस्य ।प्रोत्कंपित प्रचुरतालुक मस्तकस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 4 ॥ संसारकूमपतिघोरमगाधमूलं संप्राप्य दुःखशतसर्पसमाकुलस्य ।दीनस्य देव कृपया पदमागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 5 ॥ संसारभीकरकरींद्रकराभिघात निष्पीड्यमानवपुषः सकलार्तिनाश ।प्राणप्रयाणभवभीतिसमाकुलस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 6 ॥ संसारसर्पविषदिग्धमहोग्रतीव्र दंष्ट्राग्रकोटिपरिदष्टविनष्टमूर्तेः ।नागारिवाहन सुधाब्धिनिवास शौरे लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 7 ॥ संसारवृक्षबीजमनंतकर्म-शाखायुतं करणपत्रमनंगपुष्पम् ।आरुह्य दुःखफलितः चकितः दयालो लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 8 ॥ संसारसागरविशालकरालकाल नक्रग्रहग्रसितनिग्रहविग्रहस्य ।व्यग्रस्य रागनिचयोर्मिनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 9 ॥ संसारसागरनिमज्जनमुह्यमानं दीनं विलोकय विभो करुणानिधे माम् ।प्रह्लादखेदपरिहारपरावतार लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 10 ॥ संसारघोरगहने चरतो मुरारे मारोग्रभीकरमृगप्रचुरार्दितस्य ।आर्तस्य मत्सरनिदाघसुदुःखितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 11 ॥ बद्ध्वा गले यमभटा बहु तर्जयंत कर्षंति यत्र भवपाशशतैर्युतं माम् ।एकाकिनं परवशं चकितं दयालो लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 12 ॥ लक्ष्मीपते कमलनाभ सुरेश विष्णो यज्ञेश यज्ञ मधुसूदन विश्वरूप ।ब्रह्मण्य केशव जनार्दन वासुदेव लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 13 ॥ एकेन चक्रमपरेण करेण शंख-मन्येन सिंधुतनयामवलंब्य तिष्ठन् ।वामेतरेण वरदाभयपद्मचिह्नं लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 14 ॥ अंधस्य मे हृतविवेकमहाधनस्य चोरैर्महाबलिभिरिंद्रियनामधेयैः ।मोहांधकारकुहरे विनिपातितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 15 ॥ प्रह्लादनारदपराशरपुंडरीक-व्यासादिभागवतपुंगवहृन्निवास ।भक्तानुरक्तपरिपालनपारिजात लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलंबम् ॥ 16 ॥ लक्ष्मीनृसिंहचरणाब्जमधुव्रतेन स्तोत्रं कृतं शुभकरं भुवि शंकरेण ।ये तत्पठंति मनुजा हरिभक्तियुक्ता-स्ते यांति तत्पदसरोजमखंडरूपम् ॥ 17 ॥ ॥ इति श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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Lakshmi Stotra:मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला दिव्य स्तोत्र

Lakshmi Stotra:(श्री लक्ष्मी स्तोत्र): लक्ष्मी की पूजा में प्रतिदिन लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए, जिसने सभी प्रकार के धन-धान्य प्रदान किए हैं। लक्ष्मी की कृपा से हमें यश, सौभाग्य, आरोग्य, ऐश्वर्य, शील, विद्या, विनय, ईमानदारी और कांति की प्राप्ति होती है। आश्चर्य की बात यह है कि लक्ष्मी स्तोत्र के पाठ से अपार संपत्ति की प्राप्ति होती है। जिसमें श्री महालक्ष्मी की बहुत ही सुंदर पूजा की गई है। हिंदू पौराणिक कथाओं में देवी लक्ष्मी आठ प्रकार की हैं जो दरिद्रता को जलाकर व्यक्ति को धनवान बनाती हैं। भक्तिपूर्वक देवी लक्ष्मी के स्तोत्र का नियमित पाठ करने से सभी बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। हिंदू धर्मग्रंथों में देवी लक्ष्मी के आठ रूपों का वर्णन किया गया है। Lakshmi Stotra लक्ष्मी स्तोत्र का सर्वप्रथम भगवान इंद्र ने देवी श्री लक्ष्मी की स्तुति में पाठ किया था। मूल रूप से पद्म पुराण में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ किया गया था। उनके चार हाथ हिंदू जीवन शैली के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले मानव जीवन के चार लक्ष्यों – धर्म (धार्मिकता और कर्तव्य) काम (सांसारिक इच्छाएं), अर्थ (धन और समृद्धि) और मोक्ष (मुक्ति) का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी हथेलियाँ हमेशा खुली रहती हैं और कभी-कभी उनसे सिक्के गिरते हुए दिखाई देते हैं जो दर्शाता है कि वह धन और समृद्धि प्रदान करने वाली हैं। उन्हें एक सुंदर बगीचे में या नीले-सागर में कमल पर बैठे या खड़े हुए दिखाया गया है। उनके चारों ओर या तो दो या चार सफेद हाथी जल से उनका अभिषेक कर रहे हैं। उनके वाहन यानी सवारी सफेद हाथी और उल्लू हैं। Lakshmi Stotra लक्ष्मी स्तोत्र देवी महा लक्ष्मी की प्रार्थना है जिन्हें “श्री” भी कहा जाता है और जो धन के साथ-साथ शुभता का भी प्रतिनिधित्व करती हैं। हर दिन श्री महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करने या सुनने से व्यक्ति को सफलता और सांसारिक लाभ प्राप्त होंगे। इस अष्टकम के अंत में ही कहा गया है कि यदि इसे प्रतिदिन एक बार पढ़ा जाए तो महान पाप नष्ट हो जाते हैं। यदि इसे प्रतिदिन दो बार पढ़ा जाए तो धन और समृद्धि सुनिश्चित होती है। यदि इसे प्रतिदिन तीन बार पढ़ा जाए तो महान शत्रु (अहंकार) का नाश होता है। देवी महालक्ष्मी उस शुभ व्यक्ति से हमेशा प्रसन्न रहती हैं। Lakshmi Stotra Ke Labh:लक्ष्मी स्तोत्र के लाभ: Lakshmi Stotra:लक्ष्मी स्तोत्र का जाप वित्तीय समृद्धि, बुद्धि और समझ के लिए किया जाता है। भगवान विष्णु की पत्नी और गतिशील ऊर्जा श्री लक्ष्मी को हिंदुओं द्वारा धन, भाग्य, विलासिता और समृद्धि (भौतिक और आध्यात्मिक दोनों) की देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्हें लाल कपड़ों में दर्शाया गया है और सोने के आभूषणों से सजाया गया है। लक्ष्मी स्तोत्र का नियमित जाप मन को शांति देता है और आपके जीवन से सभी बुराइयों को दूर रखता है और आपको स्वस्थ, धनवान और समृद्ध बनाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए: जो लोग गरीबी, असफलता और दुर्भाग्य से पीड़ित हैं, उन्हें तत्काल राहत के लिए लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री लक्ष्मी स्तोत्र हिंदी पाठ:Lakshmi Stotra in Hindi नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि ।सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। सर्वज्ञे सर्ववरदे देवी सर्वदुष्टभयंकरि ।सर्वदु:खहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणी ।परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते ।जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं य: पठेद्भक्तिमान्नर: ।सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ।। एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।द्विकालं य: पठेन्नित्यं धन्यधान्यसमन्वित: ।। त्रिकालं य: पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ।। ।। इति श्री लक्ष्मी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Yogini Ekadashi 2025 Date: कब रखा जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Yogini Ekadashi 2025 Date: आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मान्यता है कि जो कोई इस दिन व्रत रखकर भगवान की उपासना करता है, उसके हर संकट दूर हो जाते हैं. Yogini Ekadashi 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल भर में 24 एकादशी के व्रत रखे जाते हैं. हर महीने दो एकादशी पड़ती है- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में, हर एकादशी व्रत का अपना अलग महत्व है. वैदिक पंचांग के अनुसार, कुछ दिनों में आषाढ़ मास की शुरुआत होने वाली है. इस महीने की पहली एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हैं. इस एकादशी के दिन भी व्रत रखकर भगवान विष्णु की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. कहते हैं कि इस एकादशी के व्रत से अनेक प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलती है. ऐसे में चलिए जानते हैं कि जून में योगिनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, व्रत-पूजन के लिए शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है. सनातन धर्म में एकादशी व्रत का बहुत ज्यादा महत्व है। यह भगवान विष्णु की पूजा के लिए समर्पित है। हर महीने में एकादशी दो बार मनाई जाती है। एक शुक्ल पक्ष और दूसरी कृष्ण पक्ष में। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को ‘योगिनी एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। कहा जाता है कि इस एकादशी (Yogini Ekadashi 2025) का उपवास करने से पापों से मुक्ति मिलती है। वहीं, इसकी डेट को लेकर लोगों में थोड़ी कन्फ्यूजन बनी हुई है, आइए यहां इसकी डेट जानते हैं। कब मनाई जाएगी योगिनी एकादशी 2025? (Yogini Ekadashi 2025 Kab Hai?) हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 21 जून को सुबह 07 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसकी समाप्ति 22 जून को सुबह 04 बजकर 27 मिनट पर होगी। हिंदू धर्म में उदया तिथि के अनुसार, तीज-त्योहार मनाए जाते हैं। इसलिए 21 जून को योगिनी एकादशी का उपवास रखा जाएगा। योगिनी एकादशी 2025 पूजा विधि (Yogini Ekadashi 2025 Puja Vidhi) योगिनी एकादशी का महत्व:Importance of Yogini Ekadashi हिंदू धर्म में योगिनी एकादशी का विशेष महत्व है. शास्त्रों के जानकार बताते हैं कि जो कोई किन्हीं कारणों से निर्जला एकादशी का व्रत नहीं रख सकते, वे इस एकादशी का व्रत रखकर पुण्य प्राप्त कर सकते हैं. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की उपासना करने से विशेष फल प्राप्त होता है. इस दिन भगवान को खीर का भोग लगाना चाहिए. इसके अलावा इस दिन ‘ओम् नमो भगवते वासुदेवाय नमः’ इस मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए. मान्यता है कि ऐसा करने से बीमारी से मुक्ति मिलती है. योगिनी एकादशी का धार्मिक महत्व (Yogini Ekadashi 2025 Significance) योगिनी एकादशी व्रत का हिंदू धर्म में बहुत ज्यादा महत्व है। इस व्रत को रखने से व्यक्ति को सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसा कहा जाता है कि जो साधक इस कठिन उपवास का पालन करते हैं, उन्हें आरोग्य और सुख-समृद्धि का वरदान मिलता है। ऐसे में इस पावन दिन उपवास जरूर करें। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Murder in Dream:सपने में किसी का खून होते देखना, इसका क्या मतलब होता है ?

Murder in Dream:हर कोई अच्छा और बुरा सपना देखता है, लेकिन बुरे सपने देखने से क्या सच में आपके साथ बुरा होता है या नही स्वप्न शास्त्र में इसके बारे में बताया गया है. Dream Interpretation: सपने हर कोई देखता है. कुछ सपने लोगों को खुश कर देते है तो कुछ सपने चिंता में डाल देते हैं. कई बार सपना देखने के दौरान नींद उड़ जाती है और लोग डर जाते हैं. स्वप्न शास्त्र में कहा गया है कि कई बार जो हम देखते हैं जरुरी नहीं की वो सच हो जाए. आज हम आपको बताने जा रहे है सपने में मर्डर (Murder in Dream) होते देखने का क्या मतलब होता है. आइए जानते हैं. Murder in Dream:खुद की मौत का सपना देखना स्वप्न शास्त्र (Murder in Dream) के मुताबिक अगर अपने सपने में खुद को मरा हुआ देख लिया है तो इसका मतलब ये शुभ संकेत होता है मतलब की आपकी उम्र बढ़ चुकी है. इसके साथ ही आने वाले दिनों में जो मुसीबत आ सकती थी, वो अब टल चुकी है. आने वाले दिनों में आपको धन का लाभ होगा. आपकी सभी मनोकामना पूर्ण होने वाली है. सपने में खुद को सुसाइड करते देखने का मतलब उम्र का बढ़ना होता है. सपने में परिजनों की मौत को देखना:Seeing the death of family members in the dream अगर सपने (Dream) में आप अपने परिजनों में किसी सदस्य की मृत्यु को देखते है तो इसका मतलब ये उनकी उम्र में वृद्धि का शुभ संकेत है. इसके साथ ही उनके जीवन में किसी नई चीज का शुभारंभ होने वाला है. Murder in Dream अगर वो व्यक्ति काफी दिनों से बीमार है तो कुछ ही दिनों में उसके ठीक होने की संभावना है. वही आपको आने वाले दिनों में करियर से जुड़ी कोई अच्छी सूचना मिल सकती है. साथ ही साथ आपकी इनकम में भी इजाफा हो सकता है.   सपने में जहर के सेवन से मरना:Dying by consuming poison in dream अगर आपने सपने में किसी को जहर पीकर मरते देखा तो इसका मतलब की उसकी मौत तड़पकर होगी. ऐसे में इस तरह के सपने को देखने के बाद डरे नहीं, बल्कि सुबह उठकर मंदिर जाए और शिवजी को जल चढ़ाएं. सपने में खुद को रोता हुआ देखना:Seeing yourself crying in a dream अगर आप सपने में खुद को रोता हुआ देखते हैं तो ये बेहद ही शुभ संकेत माना जाता है. इसका मतलब आने वाले दिनों में आपकी कोई भी योजना पूरी हो सकती है. आपको आकस्मिक धन मिल सकता है. सपने में खुद को कब्रिस्तान (Qabristan) के बीच देखने का मतलब भी शुभ संकेत होता है. भावनात्मक तीव्रता और जीवन शक्ति:emotional intensity and vitality रक्त अक्सर जीवन और स्फूर्ति का प्रतीक होता है। सपनों में, यह आपकी भावनात्मक तीव्रता या आपके जागते जीवन में जुनून के स्तर का प्रतिनिधित्व कर सकता है। Murder in Dream आप विशेष रूप से जीवंत, ऊर्जावान या भावनात्मक रूप से आवेशित महसूस कर सकते हैं। जुनून और इच्छा:passion and desire रक्त भी तीव्र जुनून या इच्छाओं को दर्शाता है। ये सपने संकेत दे सकते हैं कि आप किसी चीज़ या व्यक्ति में गहराई से निवेश कर रहे हैं, और आपका अवचेतन मन इन भावनाओं की तीव्रता को उजागर कर रहा है। भावनात्मक घाव:emotional wounds अगर आप अपने सपनों में खून देखते हैं, तो यह भावनात्मक घावों की ओर इशारा कर सकता है जो पूरी तरह से ठीक नहीं हुए हैं। यह पिछले आघात, अनसुलझे संघर्षों या आपके व्यक्तिगत या पेशेवर जीवन में चल रहे संघर्षों से संबंधित हो सकता है। शारीरिक पीड़ा:physical discomfort कभी-कभी, खून के बारे में सपने शारीरिक परेशानी या स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का प्रकटीकरण हो सकते हैं। हो सकता है कि आपका अवचेतन मन इस कल्पना का उपयोग आपको अपने शरीर की ज़रूरतों पर ध्यान देने के लिए सचेत करने के लिए कर रहा हो। जीवन में बदलाव:change in life रक्त परिवर्तन का एक शक्तिशाली प्रतीक है। यह जीवन और मृत्यु से निकटता से जुड़ा हुआ है, जो इसे परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण संकेतक बनाता है। सपनों में रक्त जीवन में बड़े बदलावों का संकेत दे सकता है, Murder in Dream जैसे कि किसी नई जगह पर जाना, नई नौकरी शुरू करना या जीवन के नए चरण में प्रवेश करना। ये सपने आपको आने वाले बदलावों के लिए तैयार कर सकते हैं और आपको उन्हें अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। व्यक्तिगत विकास:personal development खून का सपना देखना व्यक्तिगत विकास और परिवर्तन का संकेत हो सकता है। Murder in Dream यह संकेत दे सकता है कि आप विकसित हो रहे हैं और बदल रहे हैं, पुरानी आदतों या विश्वासों को पीछे छोड़ रहे हैं और सोचने और जीने के नए तरीके अपना रहे हैं।

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Lakshmi Narsingh Stotra:श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र

Lakshmi Narsingh Stotra:लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र (श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र): लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र भगवान महाविष्णु और लक्ष्मी के सबसे शक्तिशाली स्वरूपों में से एक है, जो हिंदू त्रय में रक्षक हैं। संस्कृत में कई मंत्र भगवान नरसिंह की स्तुति और प्रार्थना करते हैं और किसी भी चुने हुए नरसिंह मंत्र का उचित श्रद्धा, परिश्रम और भक्ति के साथ जाप करने से भय दूर हो सकता है और भक्तों को सभी अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। नीचे सरल, लेकिन गहन इस स्तोत्र का संग्रह देखें जो कई तरह के लाभ प्रदान कर सकता है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र की रचना श्री आदि शंकराचार्य ने की थी। Lakshmi Narsingh Stotra इस स्तोत्र में क्रोधित भगवान या उग्र नरसिंह को शांत करने के लिए भगवान लक्ष्मी नरसिंह की स्तुति की गई है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र जिसे श्री लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र के नाम से भी जाना जाता है, लक्ष्मी नरसिंह की स्तुति में 17-श्लोकों वाला स्तोत्र है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनमें से प्रत्येक श्लोक एक ही वाक्य “लक्ष्मी नरसिंह, मम देहि” के साथ समाप्त होता है जिसका अर्थ है “हे भगवान नरसिंह, कृपया मुझे अपना सहायक हाथ दें”। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र को घर में प्रतिदिन सुनने से व्यक्ति का क्रोध कम होता है और घर में शांति बनी रहती है। लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र एक महान प्रार्थना है जिसे हर किसी को अपनी दैनिक आध्यात्मिक साधना का हिस्सा बनाना चाहिए। यह स्तोत्र भगवान नरसिंह को समर्पित महामंत्र है। यह स्तोत्र एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है जो वैदिक पाठ से लिया गया है। जब स्तोत्र और नरसिंह गायत्री मंत्र के पाठ के बाद लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र का जाप किया जाता है, Lakshmi Narsingh Stotra तो महामंत्र के जाप का लाभ कई गुना बढ़ जाता है। Lakshmi Narsingh Stotra नरसिंह भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं। वे आधे मनुष्य और आधे शेर थे। वे हिरण्यकश्यप नामक राक्षस राजा को खत्म करने के लिए प्रकट हुए थे, जिसने अपने बेटे प्रह्लाद को भी नहीं बख्शा क्योंकि उसने उसे पृथ्वी पर सबसे शक्तिशाली शक्ति के रूप में नहीं माना था। Lakshmi Narsingh Stotra:लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र के लाभ सभी प्रकार के कष्टों और समस्याओं का निवारण करता है।अशुभ ग्रहों की स्थिति और अज्ञात पापों/शापों के कारण होने वाले बुरे प्रभावों को दूर करता है।सभी प्रयासों में सफलता।खतरों और परेशानियों को पहले से ही भांप लेने की क्षमता।आत्मविश्वास और साहस में वृद्धि।बच्चों और किशोरों को बहुत लाभ हो सकता है क्योंकि भगवान नरसिंह उन्हें बुरी नज़र के साथ-साथ बुरे प्रभावों, बुरी आदतों और गुप्त इरादों वाले दोस्तों से भी बचाएंगे।सभी प्रकार के भय और अशांति को दूर करता है। Lakshmi Narsingh Stotra:किसको करना चाहिए यह स्तोत्र का पाठ आत्मविश्वास खो चुके, विभिन्न समस्याओं से पीड़ित और शत्रुओं से डरने वाले व्यक्ति को नियमित रूप से लक्ष्मी नरसिंह स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र हिंदी पाठ:Lakshmi Narsingh Stotra in Hindi श्रीमत्पयोनिधिनिकेतन चक्रपाणे भोगीन्द्रभोगमणिरञ्जितपुण्यमूर्ते ।योगीश शाश्वत शरण्य भवाब्धिपोत लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। १ ।। ब्रह्मेन्द्ररुद्रमरुदर्ककिरीटकोटि-सङघट्टिताङ्घ्रिकमलामलकान्तिकान्त ।लक्ष्मीलसत्कुचसरोरुहराजहंस लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। २ ।। संसारघोरगहने चरतो मुरारे मारोग्रभीकरमृगप्रवरार्दितस्य ।आर्तस्य मत्सरनिदाघनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ३ ।। संसारकूपमतिघोरमगाधमूलं सम्प्राप्य दुःखशतसर्पसमाकुलस्य ।दीनस्य देव कृपणापदमागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ४ ।। संसारसागरविशालकरालकाल-नक्रग्रहग्रसननिग्रहविग्रहस्य ।व्यग्रस्य रागरसनोर्मिनिपीडितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ५ ।। संसारवृक्षमघबीजमनन्तकर्म-शाखाशतं करणपत्रमनङ्गपुष्पम् ।आरुह्य दुःखफलितं पततो दयालो लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ६ ।। संसारसर्पघनवक्त्रभयोग्रतीव्र-दंष्ट्राकरालविषदग्धविनष्टमूर्तेः ।नागारिवाहन सुधाब्धिनिवास शौरे लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ७ ।। संसारदावदहनातुरभीकरोरु-ज्वालावलीभिरतिदग्धतनूरुहस्य ।त्वत्पादपद्मसरसीशरणागतस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ८ ।। संसारजालपतितस्य जगन्निवास सर्वेन्द्रियार्तबडिशार्थझषोपमस्य ।प्रोत्खण्डितप्रचुरतालुकमस्तकस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ९ ।। संसारभीकरकरीन्द्रकराभिघात-निष्पिष्टमर्मवपुषः सकलार्तिनाश ।प्राणप्रयाणभवभीतिसमाकुलस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। १० ।। अन्धस्य मे हृतविवेकमहाधनस्य चोरैः प्रभो बलिभिरिन्द्रियनामधेयैः ।मोहान्धकूपकुहरे विनिपातितस्य लक्ष्मीनृसिंह मम देहि करावलम्बम् ।। ११ ।। लक्ष्मीपते कमलनाभ सुरेश विष्णो वैकुण्ठ कृष्ण मधुसूदन पुष्कराक्ष ।ब्रह्मण्य केशव जनार्दन वासुदेव देवेश देहि कृपणस्य करावलम्बम् ।। १२ ।। यन्माययोर्जितवपुः प्रचुरप्रवाह-मग्नार्थमत्र निवहोरुकरावलम्बम् ।लक्ष्मीनृसिंहचरणाब्जमधुव्रतेन स्तोत्रं कृतं सुखकरं भुवि शङ्करेण ।। १३ ।। ।। इति श्री लक्ष्मी नृसिंह स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।

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Langoolastra Stotra:लांगूलास्त्र स्तोत्र

Langoolastra Stotra:लांगूलास्त्र स्तोत्र: शक्तिशाली लांगूलास्त्र स्तोत्र (पूंछ जो हथियार है) हनुमान को उनके वीर अंजनेय रूप में आह्वान करता है। लाल फूल और अन्य उपचारों का उपयोग करके रक्त-चंदन से बने विग्रह में देवता की पूजा करनी चाहिए। फिर साधक को पीपल के पेड़ के नीचे बैठकर एक बार, तीन बार, सात या इक्कीस बार Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। कठोर ब्रह्मचर्य का व्रत रखते हुए यह प्रक्रिया अड़तालीस दिनों तक दोहराई जाती है। ऐसा करने से मारुति की कृपा से साधक के सभी शत्रु कम हो जाते हैं। इंद्रिय-निग्रह के बिना, ऐसी साधनाएँ करना खतरनाक साबित हो सकता है। लांगूलास्त्र स्तोत्र Langoolastra Stotra (लांगूलास्त्र स्तोत्र) हनुमान को समर्पित एक छोटी रचना है, जिसे मध्य युग के दौरान एक ऋषि ने लिखा था। कई हनुमान भक्त हैं; विशेष रूप से भारत के दक्षिणी भाग के लोग अपने सामान्य कल्याण के लिए नियमित रूप से इस लांगुलास्त्र स्तोत्र का मंत्र की तरह जाप करते हैं। यह लांगुलास्त्र स्तोत्र साधना हनुमान भक्त को अपार शक्ति और शक्तियां प्रदान करने वाली भी कही जाती है, जिसमें समस्याओं या पीड़ा का सामना कर रहे अन्य लोगों की बाधाओं और रोगों को दूर करने की शक्ति भी शामिल है। शत्रुओं का नाश करने और जीवन से सभी बाधाओं और रोगों को दूर करने के लिए अत्यंत शक्तिशाली Langoolastra Stotra लांगुलास्त्र स्तोत्र। भगवान हनुमान भगवान शिव के अवतार हैं। Langoolastra Stotra भगवान हनुमान मन की तरह तेज हैं, उनकी गति वायु देवता के बराबर है, उनकी अपनी इंद्रियों पर पूरा नियंत्रण है, वे पवन देव के पुत्र हैं, जो वानर सेना के प्रमुख हैं, राम के दूत हैं, अतुलनीय शक्ति के भंडार हैं, राक्षसों की शक्तियों का नाश करने वाले हैं और खतरों से मुक्ति दिलाते हैं। Langoolastra Stotra:लांगुलास्त्र स्तोत्र के लाभ हनुमान का शत्रु Langoolastra Stotra लांगुलास्त्र भगवान हनुमान जी को समर्पित है। नियमित रूप से लांगुलास्त्र स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में बाधा डालने वाले सभी शत्रुओं का नाश होता है। और व्यक्ति के शत्रु भी मित्र बन जाते हैं! Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र शत्रु हनुमत का पाठ करने से व्यक्ति अपने शत्रु पर विजय प्राप्त करता है।यदि आप पवित्र गूलर के पेड़ के नीचे बैठकर Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो आप जल्द ही भगवान मारुति की कृपा से अपने सभी शत्रुओं को नष्ट करने में सक्षम होंगे। यदि आप Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करते हैं, तो जिसने लक्ष्मण के प्राण बचाए, जिसने अपने तीखे बड़े हाथों से हिलती हुई पूंछ से प्रहार करके रक्षा की, वह आपके सभी कष्टों को दूर करे। किसको यह स्तोत्र पढ़ना चाहिए: विरोधियों, ज्ञात या अज्ञात शत्रुओं के कृत्यों से पीड़ित व्यक्तियों को नियमित रूप से Langoolastra Stotra लांगूलास्त्र स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। लांगूलास्त्र स्तोत्र हिंदी पाठ:Langoolastra Stotra in Hindi ॐ हनुमन्तमहावीर वायुतुल्यपराक्रमम् ।मम कार्यार्थमागच्छ प्रणमाणि मुहुर्मुहुः ।। विनियोगः- सीधे हाथ में जल लेकर विनियोग पढ़कर जल भूमि पर छोड़ दे। ॐ अस्य श्रीहनुमच्छत्रुञ्जयस्तोत्रमालामन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, नानाच्छन्दांसि श्री महावीरो हनुमान् देवता मारुतात्मज इति ह्सौं बीजम्, अञ्जनीसूनुरिति ह्फ्रें शक्तिः, ॐ हा हा हा इति कीलकम् श्री राम-भक्ति इति ह्वां प्राणः, श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर इति ह्वां ह्वीं ह्वूं जीव, ममाऽरातिपराजय-निमित्त-शत्रुञ्जय-स्तोत्र-मन्त्र-जपे विनियोगः । करन्यासः- ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते अंगुष्ठाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं रामदूताय तर्जनीभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लक्ष्मण-प्राणदात्रे मध्यमाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं अञ्जनीसूनवे अनामिकाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं सीताशोक-विनाशाय कनिष्ठिकाभ्यां नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लङ्काप्रासादभञ्जनाय करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । हृदयादि-न्यासः- ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं हनुमते हृदयाय नमः ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं रामदूताय शिरसे स्वाहा ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लक्ष्मण-प्राणदात्रे शिखायै वषट् ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं अञ्जनीसूनवे कवचाय हुम् ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं सीताशोक-विनाशाय नेत्र-त्रयाय वोषट् ।ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें ह्स्त्रौं ह्स्ख्फ्रें ह्सौं लङ्काप्रासादभञ्जनाय अस्त्राय फट् । ध्यानः- ध्यायेदच् बालदिवाकर द्युतनिभं देवार्रिदर्पापहं देवेन्द्रप्रमुख-प्रशस्तयशसं देदीप्यमानं रुचा ।सुग्रीवादिसमस्तवानरयुतं सुव्यक्त-तत्त्व-प्रियं संरक्तारुण-लोचनं पवनजं पीताम्बरालंकृतम् ।। उद्यन्मार्तण्ड-कोटि-प्रकटरुचियुतं चारुवीरासनस्थं मौञ्जीयज्ञोपवीताभरणरुचिशिखं शोभितं कुंडलाङ्कम् ।भक्तानामिष्टदं तं प्रणतमुनिजनं वेदनादप्रमोदं ध्यायेद् देवं विधेयं प्लवगकुलपतिं गोष्पदी भूतवार्धिम् ।। वज्राङ्गं पिङ्गकेशाढ्यं स्वर्णकुण्डल-मण्डितम् । निगूढमुपसङ्गम्य पारावारपराक्रमम् ।।स्फटिकाभं स्वर्णकान्तिं द्विभुजं च कृताञ्जलिम् । कुण्डलद्वयसंशोभिमुखाम्भोजं हरिं भजे ।।सव्यहस्ते गदायुक्तं वामहस्ते कमण्डलुम् । उद्यद्दक्षिणदोर्दण्डं हनुमन्तं विचिन्तयेत् ।। इस तरह से श्रीहनुमानजी का ध्यान करके “अरे मल्ल चटख” तथा “टोडर मल्ल चटख” का उच्चारण करके हनुमानजी को ‘कपिमुद्रा’ प्रदर्शित करें । ।। माला-मन्त्र ।। “ॐ ऐं श्रीं ह्वां ह्वीं ह्वूं स्फ्रें ख्फ्रें हस्ख्फ्रें ह्सौं नमो हनुमते त्रैलोक्याक्रमण-पराक्रमण-श्रीरामभक्त मम परस्य च सर्वशत्रून् चतुर्वर्णसम्भवान् पुं-स्त्री-नपुंसकान् भूत-भविष्यद्-वर्तमानान् दूरस्थ-समीपस्थान् नाना-नामघेयान् नाना-संकर-जातियान् कलत्र-पुत्र-मित्र-भृत्य-बन्धु-सुहृत्-समेतान् प्रभु-शक्ति-समेतान् धन-धान्यादि-सम्पत्ति-युतान् राज्ञो-राजपुत्र-सरवकान् मंत्री-सचिव-सखीन् आत्यन्ति कान्क्षणेन त्वरया एतद्दिनावधि नानोपायैर्मारय मारय शस्त्रेण छेदय छेदय अग्निना ज्वालय ज्वालय दाहय दाहय अक्षयकुमारवत् पादताक्रमणे शिलातले त्रोटय त्रोटय घातय घातय बंधय बंधय भ्रामय भ्रामय भयातुरान्विसंज्ञान्सद्यः कुरु कुरु भस्मीभूतानुद्धूलय भस्मीभूतानुद्धूलय भक्तजनवत्सल सीताशोकापहारक सर्वत्र मामेनं च रक्ष रक्ष महारुद्रावतार हां हां हुं हुं भूत-संघैः सह भक्षय भक्षय क्रुद्ध चेतसा नखैर्विदारय नखैर्विदारय देशादस्मादुच्चाटय पिशाचवद् भ्रंशय भ्रंशय घे घे हूं फट् स्वाहा ।। 1 ।। ॐ नमो भगवते हनुमते महाबलपराक्रमाय महाविपत्ति-निवारकाय भक्तजन मनःकल्पना कल्पद्रुमाय दुष्टजन-मनोरथ-स्तम्भकाय प्रभञ्जन-प्राणप्रियाय स्वाहा ।। 2 ।। ध्यानः- श्रीमन्तं हनुमन्तमात्तरिपुभिद्भूभृत्तरुभ्राजितं वल्गद्वालधिबद्धवैरिनिचयं चामीकराद्रिप्रभम् ।रोषाद्रक्तपिशङ्ग-नेत्र नलिनं भ्रूमभङ्मङ्गस्फुरत् प्रोद्यच्चण्ड-मयूख-मण्डल-मुखं-दुःखापहं दुःखिनाम् ।। 1 ।। कौपीनं कटिसूत्रमौंज्यजिनयुग्देहं विदेहात्मजाप्राणाधीश-पदारविन्द-निरतं स्वान्तं कृतान्तं द्विषाम् ।ध्यात्वैव समराङ्गणस्थितमथानीय स्वहृत्पङ्कजे संपूजनोक्तविधिना संप्रार्थयेत्प्रार्थितम् ।। 2 ।। ।। मूल-पाठ ।। हनुमन्नञ्जनीसूनो ! महाबलपराक्रम ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 1 ।। मर्कटाधिप ! मार्तण्ड मण्डल-ग्रास-कारक ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 2 ।। अक्षक्षपणपिङ्गाक्षक्षितिजाशुग्क्षयङ्र ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 3 ।। रुद्रावतार ! संसार-दुःख-भारापहारक ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 4 ।। श्रीराम-चरणाम्भोज-मधुपायितमानस ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 5 ।। बालिप्रथमक्रान्त सुग्रीवोन्मोचनप्रभो ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 6 ।। सीता-विरह-वारीश-मग्न-सीतेश-तारक ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 7 ।। रक्षोराज-तापाग्नि-दह्यमान-जगद्वन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 8 ।। ग्रस्ताऽशैजगत्-स्वास्थ्य-राक्षसाम्भोधिमन्दर ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 9 ।। पुच्छ-गुच्छ-स्फुरद्वीर-जगद्-दग्धारिपत्तन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 10 ।। जगन्मनो-दुरुल्लंघ्य-पारावार विलंघन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 11 ।। स्मृतमात्र-समस्तेष्ट-पूरक ! प्रणत-प्रिय ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 12 ।। रात्रिञ्चर-चमूराशिकर्त्तनैकविकर्त्तन ।लोलल्लांगूलपातेन ममाऽतरीन् निपातय ।। 13 ।।

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108 Names of Laxmi ji:मां लक्ष्मी जी के 108 नाम पूर्ण करेंगे सारे काम,दुख और दरिद्रता हो जाएगी दूर

108 Names of Laxmi ji:धार्मिक मान्यता है कि हर शुक्रवार के दिन 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं 108 Names of Laxmi ji तो हर शुक्रवार के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी के 108 नामों का मंत्र जाप अवश्य करें। Maa Lakshmi ke 108 Naam: सनातन धर्म में हर शुक्रवार के दिन धन की देवी 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर देव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है 108 Names of Laxmi ji कि हर शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में कभी धन की कमी नहीं होती है। साथ ही आय और सौभाग्य में अपार वृद्धि होती है। अतः साधक श्रद्धा भाव से मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। 108 Names of Laxmi ji अगर आप भी धन की देवी मां लक्ष्मी की कृपा के भागी बनना चाहते हैं, तो हर शुक्रवार के दिन पूजा के समय मां लक्ष्मी के 108 नामों का मंत्र जाप अवश्य करें। 108 Names of Laxmi ji मां लक्ष्मी के 108 नामों के मंत्र जाप से दुख और दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो जाती है। 108 Names of Laxmi ji:मां लक्ष्मी के 108 नाम 1 प्रकृति –  प्रकृति  2 विकृति – दो रूपी प्रकृति 3 विद्या  – बुद्धिमत्ता 4 सर्वभूतहितप्रदा- ऐसा व्यक्ति जो संसार के सारे सुख दे सके  5 श्रद्धा- जिसकी पूजा होती है  6 विभूति-धन की देवी 7 सुरभि- सुगंधा 8 परमात्मिका- सर्वव्यापी देवी 9 वाची- अमृतमयी वाणी  10 पद्मालया- जो कमल पर रहती हैं   11 पद्मा- कमल 12 शुचि- पवित्रता की देवी 13 स्वाहा- शुभ 14 स्वधा- जो अशुभता को दूर करे  15 सुधा – अमृत की देवी 16 धन्या-  17 हिरण्मयी-जो स्वर्ण के समान है  18 लक्ष्मी- धन और समृद्धि की देवी 19 नित्यपुष्ट-जिनसे नित्य शक्ति मिलती है  20 विभा- जिनका चेहरा दीप्तिमान है  21 अदिति- जिनकी चमक सूर्य की तरह है  22 दीत्य-जो प्रार्थना का जवाब देती हैं    23 दीप्ता- लौ की तरह जगमगाने वाली  24 वसुधा-पृथ्वी की देवी 25 वसुधारिणी- पृथ्वी की रक्षक 26 कमला- कमलगंधा 27 कांता- भगवान विष्णु की पत्नी 28 कामाक्षी-आकर्षक आंखों वाली देवी 29 कमलसम्भवा- 108 Names of Laxmi ji जो कमल में से उपस्थित होती है  30 अनुग्रहप्रदा-जो शुभकामनाओं का आशीर्वाद देती है  31 बुद्धि-बुद्धि की देवी 32 अनघा-निष्पाप या शुद्ध  33 हरिवल्लभी-भगवान विष्णु की पत्नी 34 अशोका-दुःख को दूर करने वाली 35 अमृता- अमृत की देवी 36 दीपा- प्रकाशमयी 37 लोकशोकविनाशिनी-सांसारिक संकटों का नाश करने वाली  38 धर्मनिलया-धर्मरक्षिणी  39 करुणा – ममता की मूर्ति  40 लोकमात्रिका-जन-जन की देवी   41 पद्मप्रिया-जिन्हें कमल प्रिय है 42 पद्महस्ता-जिनके हाथ में कमल हैं, और जिनके हाथ कमल की तरह हैं  43 पद्माक्ष्य -जिनकी आंखें कमल के समान है  44 पद्मसुन्दरी- कमल के समान सुंदर 45 पद्मोद्भवा- कमल से उत्पन्न होने वाली देवी  46 पद्ममुखी- कमल के सदृश मुख वाली  47 पद्मनाभप्रिया-पद्मनाभ(भगवान विष्णु) की प्रेमिका  48 रमा- भगवान विष्णु के साथ रमण करने वाली  49 पद्ममालाधरा- कमल की माला पहनने वाली 50 देवी- देवी 51 पद्मिनी- कमल की तरह 52 पद्मसुगन्धिनी- कमल की तरह सुगंध वाली  53 पुण्यगन्धा-दिव्य सुगंधित देवी 54 सुप्रसन्ना- अनुकंपा करने वाली, सदा प्रसन्न चित्त रहने वाली  55 प्रसादाभिमुखी- वरदान और इच्छाओं को अनुदान देने वाली 56 प्रभा- देवी  जिनका आभामंडल दिव्य और चमकदार हो  57 चंद्रवंदना – जिनकी दीप्ति चंद्र के समान हो  58 चंदा- चन्द्र की तरह शांत  59 चन्द्रसहोदरी- चंद्रमा की बहन 60 चतुर्भुजा- चार भुजाओं वाली   61 चन्द्ररूपा-चंद्रमा के समान रूप वाली  62 इंदिरा- सूर्य की तरह चमक वाली  63 इन्दुशीतला-चांद की तरह शीतल  64 अह्लादजननी- प्रसन्नता देने वाली  65 पुष्टि- स्वास्थ्य की देवी 66 शिवा-शुभ देवी 67 शिवाकारी-शुभ का अवतार 68 सत्या-सच्चाई 69 विमला- शुद्ध 70 विश्वजननी- समस्त ब्रह्माण्ड की देवी  71 तुष्टी- तुरंत प्रसन्न होने वाली    72 दारिद्र्यनाशिनी – दरिद्रता दूर करने वाली  73 प्रीता पुष्करिणी –  देवी जिनकी आंखें सुखदायक हैं  74 शांता- शांतिपूर्ण देवी 75 शुक्लांबरा-श्वेत वस्त्र धारण करने वाली  76 भास्करी – सूर्य के समान तेजस्वी  77 बिल्वनिलया- बिल्व वृक्ष में निवास करने वाली  78 वरारोहा – हर वरदान पूर्ण करने वाली  79 यशस्विनी-यश, सुख, प्रसिद्धि और भाग्य की देवी 80 वसुंधरा-धरती माता की बेटी 81 उदरंगा- जिनकी देह सुंदर है  82 हरिनी- जो हिरण की तरह चंचला है  83 हेमामालिनी-स्वर्ण का हार धारण करने वाली  84 धनधान्यकी- स्वास्थ्य प्रदान करने वाली  85 सिद्धि- रक्षक 86 सौम्या : कोमल और आकर्षक   87 शुभप्रभा-जो शुभता प्रदान करे  88 नृपवेशवगाथानंदा- जो महलों में रहती है  89 वरलक्ष्मी- समृद्धि की दाता  90 वसुप्रदा-धन को प्रदान करने वाली 91 शुभा- शुभ देवी 92 हिरण्यप्रका – स्वर्ण प्रिया  93 समुद्रतनया – समुद्र की बेटी 94 जया -विजय की देवी 95 मंगला-मंगल करने वाली  96 देवी –  देवता या देवी 97 विष्णुवक्षा- भगवान विष्णु के सान्निध्य में रहने वाली, उनके ह्रदय में निवास करने वाली    98 विष्णुपत्नी-भगवान विष्णु की पत्नी 99 प्रसन्नाक्षी –  खूबसूरत आंखों वाली  100 नारायण समाश्रिता- नारायण के साथ रहने वाली  101 दारिद्र्य ध्वंसिनी- गरीबी समाप्त करने वाली 102 लक्ष्मी – देवी 103 सर्वोपद्रवनिवारिणी — हर उपद्रव और संकट का निवारण करने वाली  104 नवदुर्गा-नौ दुर्गा के सभी रूप  105 महाकाली- काली देवी 106 ब्रह्मा-विष्णु-शिवात्मिका- ब्रह्मा, विष्णु, शिव की आराध्या  107 त्रिकालज्ञानसम्पन्ना- जिन्हें तीनों कालों की जानकारी हो  108 भुवनेश्वरी- अखिल भुवन यानी ब्रह्मांड की स्वामिनी 

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