Lalita Mahalakshmi Stotra:ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र (श्री ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र): ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र ब्रह्माण्ड पुराण के ललितोपाक्याणम नामक अध्याय में समाहित है। ललिता महालक्ष्मी एक अत्यंत प्रतिष्ठित संस्कृत स्तोत्र है जिसमें देवी ललिता या देवी पार्वती देवी के 300 दिव्य नामों को संबोधित किया गया है। ललिता सहस्त्रनाम के समान, ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र में ऋषि अगस्त्य और भगवान हयग्रीव (घोड़े के सिर वाले भगवान विष्णु का अवतार) के बीच बातचीत का वर्णन किया गया है। ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र को सबसे गुप्त स्तोत्र माना जाता है और इसमें देवी ललिता के तीन सौ नामों का वर्णन है।

ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र Lalita Mahalakshmi Stotra की अनूठी रचना यह है कि ललिता महालक्ष्मी के प्रत्येक बीस नाम 15 अक्षरों में से प्रत्येक से शुरू होते हैं जो पंच दशाक्षरी मंत्र बनाते हैं। Lalita Mahalakshmi Stotra महालक्ष्मी सर्वोच्च देवता हैं जिन्हें त्रिपुर सुंदरी या श्री विद्या या ललिताम्बिका या ललिता के नाम से भी जाना जाता है। महालक्ष्मी लक्ष्मी (सात्विक), सरस्वती (राजसिक) और काली (तामसिक) शक्तियों का संगम हैं। यहाँ, “महा” शब्द संज्ञा “लक्ष्मी” के लिए प्रयुक्त विशेषण नहीं है। जबकि भगवान विष्णु की पत्नी देवी लक्ष्मी हैं, भगवान विष्णु स्वयं श्री विद्या उपासक हैं, अर्थात, वे महालक्ष्मी की पूजा करते हैं।
Lalita Mahalakshmi Stotra:इसका उदाहरण भगवान हयग्रीव द्वारा ऋषि अगस्त्य को ललिता सहस्त्रनाम स्तोत्रम का जाप करने के माध्यम से मिलता है। अपने वास्तविक सार में, महालक्ष्मी वह ब्रह्मांडीय शक्ति है जिसे शक्ति कहा जाता है जो जीवंतता (विष्णु) को बनाए रखती है और साथ ही व्यक्ति को उसकी वास्तविक पहचान (शिव) का एहसास कराती है। महालक्ष्मी सर्वोच्च शक्ति देवी हैं जो आत्म-साक्षात्कार की ओर वास्तविक ज्ञान (बुद्धि) का प्रतीक हैं। उनके दो निचले हाथ अभयम (भ्रामक मार्गदर्शन से सुरक्षा या परिरक्षण) और वरदम (सच्चा मार्गदर्शन प्राप्त करने का आशीर्वाद) का प्रतीक हैं।
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उनके दो ऊपरी हाथों में पवित्र कमल का फूल है, जो हमारे सूक्ष्म शरीर में अदृश्य कमल के अलावा और कुछ नहीं, जिसे “सहस्रार दल पद्मम” (हजार पंखुड़ियों वाला कमल) कहा जाता है, जो छह चक्रों से परे स्थित है। Lalita Mahalakshmi Stotra पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन, माँ ललिता कामदेव के शरीर से उत्पन्न ‘भंडा’ नामक राक्षस का वध करने के लिए प्रकट हुई थीं। इस दिन मंदिरों में भक्तों का तांता लगता है। यह व्रत सभी सुखों को प्रदान करने वाला है, इसलिए इस दिन भगवान ललिता की पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ विशेष रूप से किया जाता है।
Lalita Mahalakshmi Stotra:ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र के लाभ
ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र मनुष्य को शक्ति प्रदान करता है।
ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र का जाप करने से मनुष्य को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।
ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र मंत्र का जाप करने से जीवन की आर्थिक समस्याओं से मुक्ति मिलती है, धन प्राप्ति में आसानी होती है।
इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए
Lalita Mahalakshmi Stotra:जो व्यक्ति लगातार असफलता से पीड़ित हैं, कठिनाइयों से गुजर रहे हैं और अंत नहीं पा रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
श्री ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र:Lalita Mahalakshmi Stotra
वैष्णव-सम्प्रदाय के प्रसिद्ध ग्रन्थ “लक्ष्मी-नारायण-संहिता” से उद्धृत निम्न स्तोत्र शक्ति-साधना से सम्बन्धित है। वैष्णव ग्रन्थ होने के कारण इनकी साधना-प्रणाली ‘वैष्णवाचार’-परक है।
।। श्री नारायणी श्रीरुवाच ।।
ललिताख्य-महा-लक्ष्म्या, नामान्यसंख्यानि वै ।
तथाप्यष्टोत्तर-शतं, स-पादं श्रावय प्रभो ! ।।
हे प्रभो ! ललिता महा-लक्ष्मी के असंख्य नाम हैं ।
तथापि उनके एक सौ पैंतीस नामों को सुनाइए ।
।। श्री पुरुषोत्तमोवाच ।।
मुख्य-नाम्नां प्रपाठेन, फलं सर्वाभिधानकम् ।
भवेदेवेति मुख्यानि, तत्र वक्ष्यामि संश्रृणु ।।
ललिता श्री महा-लक्ष्मीर्लक्ष्मी रमा च पद्मिनी ।
कमला सम्पदीशा च, पद्मालयेन्दिरेश्वरी ।।
परमेशी सती ब्राह्मी, नारायणी च वैष्णवी ।
परमेश्वरी महेशानी, शक्तीशा पुरुषोत्तमी ।।
बिम्बी माया महा-माया, मूल-प्रकृतिरच्युती ।
वासुदेवी हिरण्या च हरिणी च हिरण्मयी ।।
कार्ष्णी कामेश्वरी चापि कामाक्षी भगमालिनी ।
वह्निवासा सुन्दरी च संविच्च विजया जया ।।
मंगला मोहिनी तापी वाराही सिद्धिरीशिता ।
भुक्तिः कौमारिकी बुद्धिश्चामृता दुःखहा प्रसूः ।।
सुभाग्यानन्दिनी संपद्, विमला विंद्विकाभिधा ।
माता मूर्तिर्योगिनी च, चक्रिकार्चा रतिधृती ।।
श्यामा मनोरमा प्रीतिः ऋद्धिः छाया च पूर्णिमा ।
तुष्टिः प्रज्ञा पद्मावती दुर्गा लीला च माणिकी ।।
उद्यमा भारती विश्वा, विभूतिर्विनता शुभा ।
कीर्तिः क्रिया च कल्याणी विद्या कला च कुंकुमा ।।
पुण्या पुराणा वागीशी, वरदा विभवात्मिनी ।
सरस्वती शिवा नादा, प्रतिष्ठा संस्कृता त्रयी ।।
आयुर्जीवा स्वर्ण-रेखा, दक्षा वीरा च रागिनी ।
चपला पंडिता काली, भद्राम्बिका च मानिनी ।।
विशालाक्षी वल्लभा च गोपी नारी नारायणी ।
संतुष्टा च सुषुम्ना च, क्षमा धात्री च वारुणी ।।
गुर्वी साध्वी च गायत्री, दक्षिणा चान्नपूर्णिका ।
राजलक्ष्मीः सिद्धमाता माधवी भार्गवी परो ।।
हारिती राशियानी च, प्राचीनी गौरिका श्रुतिः ।
।। फल-श्रुति ।।
इत्यष्टोत्तर-शतकं, सप्त-विंशतिरित्यपि ।
ललिता-मुख्य-नामानि, कथितानि तव प्रिये ।।
नित्यं यः पठते तस्य, भुक्तिर्मुक्तिः कर-स्थिता ।
स्मृद्धिर्वंशस्य विस्तारः, सर्वानन्दा भवन्ति वै ।।
।। इति श्री ललिता महालक्ष्मी स्तोत्र सम्पूर्णम् ।।
हे प्रिये ! ललिता के मुख्य एक सौ आठ और सत्ताइस नाम तुमसे कहे हैं। जो नित्य इन नामों को पढ़ता है, उसके कुल की सम्पन्नता बढ़ती है, सभी प्रकार के सुख मिलते हैं और भोग-मोक्ष उसके हाथ में रहते हैं अर्थात् साधक सभी भोगों को भोगकर अन्त में मोक्ष पाता है।





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