श्री गणेश चतुर्थी व्रत कथा 

पौराणिक एवं प्रचलित श्री गणेश कथा के अनुसार एक बार देवता कई विपदाओं में घिरे थे। तब वह मदद मांगने भगवान शिव के पास आए। उस समय शिव के साथ कार्तिकेय तथा गणेश जी भी बैठे थे। देवताओं की बात सुनकर शिव जी ने कार्तिकेय व गणेश जी से पूछा कि तुम में से कौन देवताओं के कष्टों का

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रामायण की कहानी हनुमान जी का जन्म

रामभक्त हनुमान को कई नामों से जाना जाता है, जैसे मारुति नंदन, पवनपुत्र व संकटमोचन आदि। माना जाता है कि वह भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार थे और उनके जन्म का उल्लेख कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। इस कहानी में हम हनुमान जी के जन्म से जुड़ी ऐसी ही एक प्रचलित कथा बता

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काली की रचना कैसे हुई शिव शंकर भगवान की कथा

प्राचीन काल में राक्षस अपनी तपस्या के बल पर ऐसी शक्तियां प्राप्त कर लेते थे, जिनके सामने टिकना देवताओं के लिए भी मुश्किल हो जाता था। राक्षस अपनी शक्तियों का प्रयोग करके आतंक और भय फैलाते थे। ऐसी ही एक घटना रक्तबीज नाम से राक्षस से जुड़ी है। रक्तबीज का अंत मां काली के हाथों

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शिव और पार्वती का विवाह

भगवान शिव की पत्‍नी मां पार्वती हैं और इन दोनों का जन्म जन्मांतरोंं का संबंध है. पुराणों में इनके विवाह की कई तरह की कथाएं हैं. लोकमान्‍यताओं के अनुसार, शिवजी ने हिमालय के मंदाकिनी क्षेत्र के त्रियुगीनारायण में पार्वती से विवाह किया था. जहां के लोग कहते हैं कि आज भी वहां अग्नि की अखंड

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जगत के पालनहार भगवान विष्णु के निवास स्थान बदरीनाथके खुले कपाट, जानें इससे जुड़ी रोचक बातें

सनातन शास्त्रों की मानें तो कालांतर में बदरीनाथ में देवों के देव महादेव का निवास स्थान था। जगत का पालनहार भगवान विष्णु को यह स्थान बहुत पसंद आया। इसके लिए भगवान विष्णु ने महादेव से निवास के लिए मांग लिया। उस समय महादेव ने विष्णु जी को निवास हेतु बदरीनाथ देकर कैलाश पर चले गए बदरीनाथ मंदिर को बदरीनारायण मंदिर भी कहा जाता है। जो अलकनंदा नदी के किनारे उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह

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जानें, कैसे हुई तुलसी की उत्पत्ति और क्या हैं इसकी पूजा विधि और महत्व

वृंदा के शाप से तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। तब माता लक्ष्मी की याचना पर वृंदा ने शाप वापस लिया और विष्णु जी को शाप मुक्त कर खुद पति जलंधर के साथ सती हो गईं। वृंदा के सती राख से एक पौधा का सृजन हुआ, जिसे तुलसी कहा गया। कालांतर में विष्णु जी ने वृंदा

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दुर्गा अष्टमी की कहानी

नमस्कार दोस्तों, हम आपके सामने एक ऐसी कथा लेकर आ रहे हैं जो पौराणिक और धार्मिक है, जिसे शायद बहुत कम ही लोगों को पता होता है। लेकिन न पता होने के कारण भी हम उस को मानते है। हम जिस त्यौहार को मनाते, उसके विषय मे जानकारी जरूर होनी चाहिए तभी त्यौहार भी अच्छा

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शिव के 10 अवतार के नाम

शिवजी त्रिदेवों में से एक हैं. ब्रह्मदेव जहां सृष्टि के रचयिता माने गए हैं, वहीं विष्णु पालक और शिव संहारक माने गए हैं. विष्णु को हरि और शिव को हर कहा जाता है. धर्मशास्त्रों में हरि के 24 अवतारों का वर्णन है, उसी प्रकार ‘हर’ के 19 अवतारों का उल्लेख है. यहां आज हम आपको

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सूर्य ग्रहण से जुड़ी पौराणिक कथा क्या बताती है, नहीं जानते हैं तो यहां पढ़ें

20 अप्रैल 2023 को सूर्य ग्रहण है. करीब 19 साल बाद मेष राशि में सूर्य ग्रहण रहेगा. क्या आप जानते हैं ग्रहण का संबंध समुद्र मंथन से है. आइए जानते हैं कैसे 20 अप्रैल 2023 को सूर्य ग्रहण है.भारतीय समयानुसार, यह सूर्य ग्रहण इन देशों में सुबह 07 बजकर 05 मिनट से लेकर दोपहर 12

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हिंदू धर्म के 10 पवित्र वृक्ष, जानिए उनका रहस्य

हिंदू धर्म का वृक्ष से गहरा नाता है। हिंदू धर्म को वृक्षों का धर्म कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। क्योंकि हिंदू धर्म में वृक्षों का जो महत्व है वह किसी अन्य धर्म में शायद ही मिले। इस ब्रह्मांड को उल्टे वृक्ष की संज्ञा दी है। पहले यह ब्रह्मांड बीज रूप में था और अब

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रोज 10 मिनट तक रगड़ें नाखून, बालों में दिखेंगे कई बड़े फायदे

नाखून रगड़ने की प्रकिया कोई नई नहीं है. कई सदियों से लोग ऐसा करते आ रहे हैं. एक्यूप्रेशर थैरेपी में भी नाखून रगड़ने को काफी अहमियत दी जाती है. आपने कुछ लोगों को बैठे-बैठे नाखून रगड़ते हुए देखा होगा तो आपके मन में सवाल आता होगा कि आखिर ये व्यक्ति ऐसा क्यों कर रहा है.

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भगवान विष्णु के चरणों से निकला अमृत है गंगा

नीराकार ब्रह्म अर्थात् जलरूप ब्रह्म या द्रवरूप में ब्रह्म कोई ‘नराकार ब्रह्म’ (राम, कृष्ण) को भजता है , तो कोई ‘निराकार ब्रह्म’ को; परन्तु कलियुग में मनुष्य के पाप-तापों की शान्ति ‘नीराकार ब्रह्म’ से ही होती है । हिन्दी में ‘नीर’ जल को कहते हैं । ‘द्रव’ तरल पदार्थ को कहते हैं । अत: नीराकार ब्रह्म

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