कहानी बालक ध्रुव के ध्रुव तारा बनने की

स्वयंभुव मनु और शतरुपा के दो पुत्र थे-प्रियवत और उत्तानपाद। उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नियां थीं। राजा उत्तानपाद को सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए। यद्पि सुनीति बड़ी रानी थी परन्तु उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था। एक बार सुनीति का पुत्र ध्रुव अपने

कहानी बालक ध्रुव के ध्रुव तारा बनने की Read More »

वामन पुराण: शिव-पार्वती पुत्र था राक्षस अंधक, इस तरह हुआ था जन्म

एक बार भगवान शिव और माता पार्वती घूमते हुए काशी पहुंच गए। वहां पर भगवान शिव अपना मुंह पूर्व दिशा की ओर करके बैठे थे। उसी समय पार्वती ने पीछे से आकर अपने हाथों से भगवान शिव की आंखों को बंद कर दिया। ऐसा करने पर उस पल के लिए पूरे संसार में अंधेरा छा

वामन पुराण: शिव-पार्वती पुत्र था राक्षस अंधक, इस तरह हुआ था जन्म Read More »

पौराणिक गाथा- क्यों पिया श्री कृष्ण ने राधा के पैरों का चरणामृत

चरणामृत से सम्बन्धित एक पौराणिक गाथा काफी प्रसिद्ध है जो हमें श्रीकृष्ण एवं राधाजी के अटूट प्रेम की याद दिलाती है। कहते हैं कि एक बार नंदलाल काफी बीमार पड़ गए। कोई दवा या जड़ी-बूटी उन पर बेअसर साबित हो रही थी। तभी श्रीकृष्ण ने स्वयं ही गोपियों से एक ऐसा उपाय करने को कहा

पौराणिक गाथा- क्यों पिया श्री कृष्ण ने राधा के पैरों का चरणामृत Read More »

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग- कुंभकर्ण के पुत्र को मार कर यहां स्थापित हुए थे भगवान शिव

ऐसे हुई थी यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना कहा जाता है कि कुंभकर्ण के एक पुत्र का नाम भीम था। कुंभकर्ण को कर्कटी नाम की एक महिला पर्वत पर मिली थी। उसे देखकर कुंभकर्ण उस पर मोहित हो गया और उससे विवाह कर लिया। विवाह के बाद कुंभकर्ण लंका लौट आया, लेकिन कर्कटी पर्वत पर ही

भीमशंकर ज्योतिर्लिंग- कुंभकर्ण के पुत्र को मार कर यहां स्थापित हुए थे भगवान शिव Read More »

आखिर क्यों खाया था पांडवों ने अपने मृत पिता के शरीर का मांस

आज हम आपको महाभारत से जुडी एक घटना बताते है जिसमे पांचो पांडवों ने अपने मृत पिता पाण्डु का मांस खाया था उन्होंने ऐसा क्यों किया यह जानने के लिए पहले हमे पांडवो के जनम के बारे में जानना पड़ेगा। पाण्डु के पांच पुत्र युधिष्ठर, भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव थे।  इनमे से युधिष्ठर, भीम और

आखिर क्यों खाया था पांडवों ने अपने मृत पिता के शरीर का मांस Read More »

इस कारण देवर्षि नारद को बनना पड़ा था एक बार बंदर

श्री नारद बड़े ही तपस्वी और ज्ञानी ऋषि हुए जिनके ज्ञान और तप की माता पार्वती भी प्रशंसक थीं। तब ही एक दिन माता पार्वती श्री शिव से नारद मुनि के ज्ञान की तारीफ करने लगीं। शिव ने पार्वती जी को बताया कि नारद बड़े ही ज्ञानी हैं। लेकिन किसी भी चीज का अंहकार अच्छा

इस कारण देवर्षि नारद को बनना पड़ा था एक बार बंदर Read More »

परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया? | Parshuram And Karna Story In Hindi

कर्ण द्वापर युग के महान योद्धा में से एक थे, लेकिन उनको मिला श्राप उनकी मौत का कारण बन गया। कर्ण को उनके जीवन काल में दो श्राप मिले थे। उन्हें पहला श्राप उनके गुरु भगवान परशुराम ने दिया था, जबकि दूसरा श्राप एक ब्राह्मण ने दिया था। कर्ण को बचपन से ही धनुर्धर बनने

परशुराम ने कर्ण को श्राप दिया? | Parshuram And Karna Story In Hindi Read More »

पांडवों की जन्म कथा | Mahabharat Mein Pandav Ka Janm

पांडव हस्तिनापुर के राजा पांडु और उनकी दो पत्नियों कुंती व माद्री के पांच शक्तिशाली और कुशल पुत्र थे। महाभारत में युधिष्ठिर, भीम, अर्जुन, नकुल, और सहदेव – ये पांच पांडव सबसे अधिक सराहना के पात्र रहे हैं। इनके जन्म की कहानी न सिर्फ दिलचस्प है, बल्कि हैरान कर देने वाली भी है। एक बार

पांडवों की जन्म कथा | Mahabharat Mein Pandav Ka Janm Read More »

कर्ण और दुर्योधन की मित्रता | Duryodhan Karan Ki Mitrata

महाभारत की कहानी में सिर्फ दुश्मनी नहीं है, बल्कि इसमें दोस्ती और प्यार के कई किस्से भी शामिल हैं। कर्ण और दुर्योधन की मित्रता भी महाभारत में दोस्ती की मिसाल पेश करती है। इनकी गहरी दोस्ती की कई कहानियां महाभारत में प्रचलित हैं। आइए, जानते हैं उन घटनाओं के बारे में। एक बार की बात

कर्ण और दुर्योधन की मित्रता | Duryodhan Karan Ki Mitrata Read More »

परीक्षित के जन्म की कहानी |  Raja Parikshit Story In Hindi

परीक्षित के जन्म की कथा महाभारत के युद्ध के समय की है। जब द्रौपदी को इस बात की जानकारी मिली कि अश्वत्थामा ने उसके पांचों बेटों की हत्या कर दी है तो उसने अनशन करने की ठान ली। द्रौपदी ने प्रण लिया कि वह अपना अनशन तभी तोड़ेगी जब तक कि अश्वत्थामा के सिर पर

परीक्षित के जन्म की कहानी |  Raja Parikshit Story In Hindi Read More »

रामायण की कहानी: हनुमान जी का जन्म

रामभक्त हनुमान को कई नामों से जाना जाता है, जैसे मारुति नंदन, पवनपुत्र व संकटमोचन आदि। माना जाता है कि वह भगवान शिव के 11वें रूद्र अवतार थे और उनके जन्म का उल्लेख कई पौराणिक कथाओं में मिलता है। इस कहानी में हम हनुमान जी के जन्म से जुड़ी ऐसी ही एक प्रचलित कथा बता

रामायण की कहानी: हनुमान जी का जन्म Read More »

रामायण की कहानी: रामसेतु में गिलहरी का योगदान

माता सीता का हरण होने के बाद, भगवान राम को लंका तक पहुंचने के लिए उनकी वानर सेना जंगल को लंका से जोड़ने के लिए समुद्र के ऊपर पुल बनाने के काम में लग जाती है। पुल बनाने के लिए पत्थर पर भगवान श्रीराम का नाम लिखकर पूरी सेना समुद्र में पत्थर डालती है। भगवान

रामायण की कहानी: रामसेतु में गिलहरी का योगदान Read More »

App Download