Dream: सपने में गाय का दिखना किन बातों का है संकेत? जानें इस सपने का सही अर्थ

सपने हमारे जीवन से जुड़ी सफलता और असफलता का भी संकेत देते हैं. सपने में यदि गाय दिखाई दे तो इसका क्या अर्थ होता है? आइए जानते हैं. जीवन में घटित होने वाली अच्छी और बुरी चीजों के बारे में हमें पहले से ही संकेत मिलने लगते हैं. समय रहते यदि इन चीजों के सही अर्थ जान लें तो बड़ी असफलताओं और हानि से भी बचा जा सकता है. सोते समय हम जो भी सपना देखते हैं, उसके खास मतलब भी होते हैं. इसलिए सपने में दिखाई देने वाली चीजों को नजरअंदाज न करें. इनके अर्थ को समझने की कोशिश करें क्योंकि ये चीजें कभी-कभी आपकी किस्मत बदलने का संकेत भी हो सकती हैं. स्वप्न शास्त्र के अनुसार गाय को यदि सपने में देखते हैं तो इसके गंभीर अर्थ होते हैं. गाय को अति पवित्र माना गया है. शास्त्रों में कामधेनु गाय का वर्णन मिलता है. पौराणिक कथा के अनुसार कामधेनु गाय की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी. समुद्र मंथन देवता और असुरों के मध्य हुआ था. समुद्र मंथन से अमृत कलश के साथ अन्य 14 रत्न प्राप्त हुए थे. जिसमें से एक कामधेनु गाय भी थी. हिंदू धर्म में गाय को पवित्र और वातावरण को ऊर्जामय बनाने वाला भी माना गया है. पशुधन में गाय को विशेष महत्व प्रदान किया गया है. सपने में गाय का दिखनासपने में गाय का दिखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार अत्यंत शुभ माना गया है. गाय का दिखना इस बात का भी संकेत है कि आपको जीवन में सुखों की प्राप्ति होने वाली है. इसके साथ ही सपने में सफेद रंग की गाय दिखाई दे तो इसका मतलब ये है कि सफेद रंग से जुड़ी चीजों से लाभ मिलने वाला है. जो लोग सफेद रंग से जुड़ी वस्तुओं का व्यापार आदि करते हैं, उन्हें विशेष लाभ होता है. इसके साथ ही यदि गाय के साथ बछड़ा भी दिखाई देता है तो ये अत्यंत शुभ फल देना वाला माना गया है. इस सपने का अर्थ होता है कि आने वाले दिनों में धन से जुड़ी चीजों में वृद्धि होने वाली है. इसे एक शुभ शगुन के तौर पर माना जाता है. सावन के महीने में इस सपने को देखना बहुत शुभ माना जाता है. सपने में गाय दिखना सपने में गाय या बछिया या बछड़ा देखना शुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ है कि आने वाला समय आपके अनुकूल हो सकता है। उनकी सभी समस्याओं का अंत हो सकता है और लाभ हो सकता है।  सपने में गाय के थन से दूध पीनासपने में यदि आप स्वयं को गाय के थन से दूध पीते देखते हैं तो यह एक अच्छा संकेत है। इस प्रकार का स्वप्न यह संकेत देता है कि भोजन से संबंधित जो भी समस्याएं हैं, वह जल्दी ही खत्म हो सकती हैं। इसका अर्थ है कि घर में हमेशा सुख समृद्धि बनी रहेगी।  सपने में गाय का बछड़ा दिखनासपने में गाय का बछड़ा दिखना धनलाभ का संकेत माना गया है। इसका एक अन्य अर्थ यह भी है कि जल्द ही जीवन में खुशियां आ सकती हैं।

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Diwali 2023 Date: इस साल कब है दिवाली, जानें तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

दिवाली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इस दिन भगवान राम, माता सीता और भगवान लक्ष्मण 14 साल के वनवास के बाद आए थे। इस साल दिवाली के लिए आपको थोड़ा लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। आइए जानते हैं साल 2023 में कब है दिवाली का पर्व। दीपावली या दिवाली रोशनी का त्योहार है और साल के सबसे ज्यादा मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है। जैसा कि रामायण में बताया गया है, इस दिन है जब भगवान राम, देवी सीता और भगवान लक्ष्मण 14 साल वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। दिवाली का पर्व धनतेरस से शुरू होता है और भाई दूज तक रहता है। आइए जानते हैं इस साल कब है दिवाली का त्योहार। दिवाली का शुभ मुहूर्तपंचांग के अनुसार, दिवाली का त्योहार हर साल कार्तिक मास के 15वें दिन अमावस्या को मनाई जाएगी। इस साल दिवाली का पर्व देशभर में 12 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा का भी विशेष महत्व है। 12 नवंबर को अमावस्या तिथि का आरंभ 12 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से प्रारंभ होगी और 13 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 57 मिनट पर समाप्त होगी। दिवाली 2023 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त लक्ष्मी पूजा (प्रदोष काल समय) – शाम 05.39 – रात 07.35 (12 नवंबर 2023) वृषभ काल – शाम 05:39 – रात 07:35 लक्ष्मी पूजा (निशिता काल समय) – 12 नवंबर 2023, रात 11:39- 13 नवंबर 2023, प्रात: 12:32 सिंह लग्न – प्रात: 12:10 – प्रात: 02:27 (13 नवंबर 2023) जानें दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का महत्वदिवाली के दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है।। मान्यताओं के अनुसार, जब मुहूर्त में लक्ष्मी जी का पूजन किया जाता है तो लक्ष्मी जी वहां ठहर जाती हैं। इसलिए लक्ष्मी पूजा के लिए यह सबसे उत्तम समय माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि जिस व्यक्ति के पास ज्ञान होता है इसके पास धन भी रहता है। इसलिए भगवान गणेश की पूजा की जाती है। साथ ही ऐसा कहा जाता है कि अमावस्या तिथि के दिन अगर माता लक्ष्मी किसी पर प्रसन्न हो जाती है तो उसे आरोग्य की प्राप्ति होती है। दिवाली 2023 पांच दिन का दीपोत्सव  दिवाली का त्योहार पांच दिन तक मनाया जाता है, इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन दिवाली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवे दिन भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है. हर दिन का अपना अलग महत्व है. पांच दिन तक घर-आंगन में दीप जलाए जाते हैं और खुशियां मनाई जाती है. दिवाली क्यों मनाई जाती है दिवाली का त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक है. धर्म ग्रंथों के अनुसार दिवाली के दिन श्रीराम लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद और 14 साल का वनवास पूरा कर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे. अयोध्या नरेश के श्रीराम के स्वागत के लिए इस दिन अयोध्या नगरी सहित पूरे भारत में दीप जलाए गए थे. इसी दिन से हर साल कार्तिक अमावस्या पर दिवाली मनाई जाने लगी. इस दिन घरों को रोशन कर मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और सुख, समृद्धि, धन की कामना करते हैं.

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Navratri 2023 जानें नवरात्रि में देवी मां का क्यों किया जाता है 16 श्रृंगार, महिलाएं भी ऐसे होती हैं तैयार

शारदीय नवरात्रि का त्योहार मां शक्ति के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है. कहते हैं इन 9 दिनों में मां की सच्चे मन से आराधना करने से जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. इस साल कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्रि: इस साल शारदीय नवरात्रि 15 अक्टूबर 2023, रविवार से प्रारंभ होंगे और 23 अक्टूबर को समापन होगा। 24 अक्टूबर 2023, मंगलवार को विजयादशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। इस साल शारदीय नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी 22 अक्टूबर 2023 को है. इस दिन कन्या पूजन और मां महागौरी की उपासना होती है. वहीं शारदीय नवरात्रि की महानवमी 23 अक्टूबर 2023 को है. इस दिन मां सिद्धिदात्रि की पूजा के साथ, कन्या पूजा, हवन किया जाता है. और माता के दर्शन के लिए मंदिरों में जाकर सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं. वहीं इस समय माता की पूजा के लिए देवी मां का 16 श्रृंगार किया जाता है. नवरात्रि के पर्व पर महिलाएं भी देवी मां की पूजा के लिए खूब सज धज कर तैयार होती हैं. नवरात्रि में महिलाएं भी मां को खुश करने के लिए सोलह श्रृंगार करती हैं. आइए जानते हैं मां को खुश करने के लिए कौन से सोहल श्रृंगार किए जाते हैं और इनके पीछे क्या कारण है. फूलों का श्रृंगारसोलह श्रृंगार में फूलों से श्रृंगार करना शुभ माना जाता है. फूलों की महक मन को ताजगी प्रदान करती है. ऐसे में महिलाएं मां को भी फूलों से सजाती हैं और खुद भी फूलों का श्रृंगार करती हैं. बिंदी भारतीय महिलाएं अपने माथे के बीचों-बीच बिंदी लगाती है. महिलाओं की सुंदरता बढ़ाने के साथ इसे उऩके परिवार कीसमृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है. मेहंदीत्योहार हो या घर में कोई शुभ कार्य, महिलाएं अपने हाथों- पैरों मे मेहंदी जरूर रचाती हैं. मेहंदी के बिना हर सुहागन स्त्री काश्रृंगार अधूरा माना जाता है. मांग में सिंदूरमांग में सिंदूर लगाना सुहाग की निशानी है. वहीं सिंदूर लगाने से चेहरे पर निखार आता है. इसके अपने वैज्ञानिक फायदे भी होते हैं. मान्यता है कि मांग में सिंदूर लगाने से शरीर में विद्युत ऊर्जा को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है. गले में मंगल सूत्रमोती और स्वर्ण से युक्त मंगल सूत्र या हार पहनने से ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को रोकने में मदद मिलती है. कहते हैं कि इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है. गले में स्वर्ण आभूषण पहनने से हृदय रोग संबंधी रोग नहीं होते हैं. हृदय की धड़कन नियंत्रित रहती है. वहीं मोती चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करते हैं. इससे मन चंचल नहीं होता है. नवरात्रि के समय मां को आभूषण पहनाएं जाते हैं और महिलाएं भी ज्वैलरी पहनती हैं. कानों में कुंडलमान्यता है कि कान में आभूषण या बाली पहनने से मानसिक तनाव नहीं होता है. कर्ण छेदन से आंखों की रोशनी तेज होती है. यह सिर का दर्द कम करने में भी सहायक होता है. माथे पर स्वर्ण टिकामाथे पर स्वर्ण टिका महिलाओं की सुंदरता बढ़ाता है. कंगन या चूड़ियांकहते हैं कि हाथों में कंगन या चूड़ियां पहनने से रक्त का संचार ठीक रहता है. इससे थकान नहीं होती है. साथ ही यह हॉर्मोंस को भी बैलेंस्ड रखता है शेर कैसे बना मां दुर्गा का वाहन? | Sher Maa Durga Ki Sawaari बाजूबंदइसे पहनने से भुजाओं में रक्त प्रवाह ठीक बना रहता है. कहते हैं कि इससे दर्द से मुक्ति मिलती है. वहीं इससे सुंदरता में निखार आता है. कमरबंदमान्यता है कि इसे पहनने से पेट संबंधी दिक्क्तें कम होती हैं. कई बीमारियों से बचाव होता है. पायलपायल पैरों की सुंदरता में चार चांद लगाती हैं. वहीं इनको पहनने से पैरों से निकलने वाली शारीरिक विद्युत ऊर्जा शरीर में संरक्षित होती है. कहते हैं कि चांदी की पायल पैरों की हड्डियों को मजबूत बनाती हैं. बिछियाबिछिया को सुहाग की एक प्रमुख निशानी के तौर पर माना जाता है लेकिन इसका प्रयोग पैरों की सुंदरता तक ही सीमित नहीं है. बिछिया नर्वस सिस्टम और मांसपेशियां को मजबूत बनाए रखने में भी मददगार होती है. नथनीनथनी चेहरे की सुंदरता में चार चांद लगाती है. यह एक प्रमुख श्रृंगार है लेकिन इसका वैज्ञानिक महत्व भी है. नाक में स्वर्ण का तार या आभूषण पहनने से महिलाओं में दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ती है. अंगूठीअंगूठी पहनने से रक्त का संचार शरीर में सही बना रहता है. इससे हाथों की सुंदरता बढ़ती है. इससे पहनने से आलस कम आता है. काजलकहते हैं कि काजल आंखों की सुरंदता को बढ़ाता है. वहीं आंखों की रोशनी भी तेज करने में सहायक होता है. इससे नेत्र संबंधी रोग दूर होते हैं. मेकअपफेस पर ब्यूटी प्रोडक्ट्स लगाने से चेहरे की सुंदरता बढ़ती है. वहीं इससे महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और उनमें एनर्जी बनी रहती है.

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Honey in Dream Meaning:सपने में शहद देखना इसका मतलब क्या है 

कुछ सपने अच्छे तो कुछ बुरे होते हैं। वहीं कई सपने बेहद खास होते हैं। खासकर अविवाहितों के लिए ये सपने ढेर सारी खुशियां लेकर आते हैं। अगर आप भी इन सपनों को देखते हैं तो समझ लें कि आपके घर जल्द शहनाई बजने वाली है।सपनों का वास्तविक जीवन से गहरा नाता होता है। इनमें कुछ अच्छे तो कुछ बुरे होते हैं। वहीं, कई सपने बेहद खास होते हैं। खासकर, अविवाहितों के लिए ये सपने ढेर सारी खुशियां लेकर आते हैं। अगर आप भी इन सपनों को देखते हैं, तो समझ लें कि आपके घर जल्द शहनाई बजने वाली है। आसान शब्दों में कहें तो आपकी शादी बहुत जल्द होने वाली है। साथ ही शादी में आ रही बाधाएं भी दूर हो जाएंगी। आइए, इन सपनों के बारे में विस्तार से जानते हैं- सपने में खुद को देख लिया है तो आपके साथ होने वाला है यह, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र सपने में शहद देखना इसका मतलब क्या है ?  जिस प्रकार सेहत को शुभ माना जाता है उसी प्रकार अगर यह आपको अपने सपने में दिखाई दे रहा है तो आपको शहद को अपने सपने में देखना शुभ माना जाता है । यह सपना आपकी स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है । यदि आप बीमार है तो आप जब बीमार मुक्त होने वाले हैं । यह सपना बीमारी से छुटकारा पाने का इशारा है । इसलिए आपको इस सपने से खुश होना चाहिए । अगर आप किसी चीज के बारे में सोच कर परेशान हो रहे हो तो यह आपको निश्चिंत होने की बात है | सपने में शहद खाना : शहद खाने का सपना देखना लाभदायक जाता है । आने वाले दिनों में आपके घर में खुशियां आने वाली है । आपके घर मेहमान आ सकते हैं जैसे आपके घर में खुशियों का वातावरण हो सकता है । जिस प्रकार आपको शहद खाना आपके सेहत के लिए लाभदायक होता है उसी प्रकार यह आपके सपनों के लिए भी लाभदायक है | सपने में हनी कोंब देखना :  हनी कोंब को सपने में देखना आर्थिक स्थिति मजबूत होने का इशारा है । आपकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होने वाली है । इसकी ओर यह सपना हमें सूचना देता है । इसलिए आपको इस सपने से खुश होना चाहिए । अगर आपको शहद का छत्ता दिखाई दे रहा है तो इसका यह मतलब होता है कि आप की आर्थिक स्थिति मजबूत होने वाली है और आपको आने वाले समय में पैसों की अनबन से छुटकारा मिलने वाला है | सपने में शहद बनाना : शहद बनाने का सपना देखना शुभ माना जाता है । आने वाले दिनों में आप किसी नए कार्य की शुरुआत कर सकते हैं । इस कार्य से आपको भरपूर लाभ होने वाला है । इसलिए आपको इस सपने से खुश होना चाहिए । शहद बनाना कोई आम बात नहीं है इसी प्रकार यह सपना अगर आपको आता है तो यह एक शुभ सपना माना गया है | सपने में शहद में मधुमक्खी देखना यदि आप सपने में मधुमक्खी को शहद में देखते हैं तो यह अशुभ माना जाता है । आने वाले दिनों में आपके कार्य में रुकावट आने वाली है । रुकावट आने से आपके कार्य में आपको असफलता का स्वाद चखना पड़ सकता है । इसलिए यह सपना अशुभ माना जाता है । जिस प्रकार शहद चिपचिपा होता है और इसमें कोई भी कीड़ा भी अगर छू लेता है तो वह चिपचिपा जाता है इसी प्रकार अगर आप को शहद में मधुमक्खी दिखाई दे रही है तो यह इस बात का संकेत है कि आपके होने वाले काम में अनबन हो सकती है और आपको बहुत तकलीफ हो सकती है | सपने में शहद खरीदना यदि आप सपनों में शहद खरीदते हुए दिखाई देते हैं तो यह सपना आर्थिक रूप से फायदा होने का इशारा करता है । आपके क्षेत्र में अपना समय पैसा देंगे उसमें आपको अच्छे रिटर्न्स प्राप्त होने वाले हैं । इसलिए आपको इस सपने से खुश होना चाहिए । अगर आप शहद को अपने सपने में खरीद रहे हो तो इसका मतलब यह है कि आप बहुत मीठा काम कर रहे हो यानी कि आप जो भी काम करोगे उससे आपको फायदा जरूर होने वाला है चाहे वह किसी प्रकार का इन्वेस्टमेंट हो या किसी प्रकार का जोखिम हो | सपने में शहद बेचना यदि आप सपने में शहद बेचते हुए दिखाई देते हैं तो यह सपना अशुभ माना जाता है । यह सपना आर्थिक स्थिति कमजोर होने का इशारा करता है । आने वाले दिनों में आपको अपने कार्य में नुकसान उठाना पड़ सकता है । आपके आर्थिक समस्या बढ़ने वाली है इसकी सूचना देता है । अगर आपको ऐसा लग रहा है कि आप की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है तो आपको ज्यादा परेशान होने की आवश्यकता नहीं है आप शांत दिमाग से उसे ठीक कर सकते हो बस आपको अपने आप पर काबू रखना है | सपने में बहुत सारा शहद देखना बहुत सारा शहर अपने ख्वाब में देखना शुभ माना जाता है । यह सपना सुख शांति और मजबूत आर्थिक स्थिति होने का इशारा करता है । आप परेशान मुक्त होने वाले हैं और आपको मन की शांति प्राप्त होने वाली है । इसी के साथ आर्थिक स्थिति आपकी बेहतर होने वाली है, इसकी ओर भी यह सपना इशारा करता है । सपने में शहद का खराब होना यदि आप शहद को खराब होते हुए देखते हैं तो यह अशुभ माना जाता है । आपका रिश्ता किसी के साथ खराब होने वाला है । यह सपना रिश्तों में खटास उत्पन्न होने का इशारा करता है । आमतौर पर शहद खराब नहीं होता है उसी प्रकार से यदि आपको अपने सपने में शहद खराब होते हुए दिखाई दे रहा है तो यह अचानक से होने वाले नुकसान को दर्शाता है | दोस्तों यह के सपने में शहद को देखना आपके सेहत के लिए और आपके आने वाले जीवन में होने वाले बदलाव के बारे में जानकारी देता है |  यदि आपको सपने में शहद यानी की हनी दिखाई देना कैसा होता है यह पता चल गया है तो आप हमें नीचे कमेंट में

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Sapno ka matlab : सपने में खुद को देख लिया है तो आपके साथ होने वाला है यह, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

अकसर लोग सपने में चीजें देखकर डर जाते हैं. चलिए बताते हैं सपनों खुद को या किसी चीज को देखने पर ज्योतिषी शास्त्र क्या कहता है. हर रात नींद के आगोश में जाने पर हम तरह तरह के सपने देखते हैं. यूं देखा जाए तो सपने हमारी मनोदशा का आईना होते हैं और यही सपने हमारे आने वाले कल का प्रतिबिंब बनाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में भी कहा गया है कि सपने आने वाले दिनों के शुभ और अशुभ फलों का संकेत देते हैं. कई बार हम सपने देखकर डर जाते हैं लेकिन असल में वो सपने आने वाले अच्छे दिनों की निशानी होते हैं. सपने अच्छे और बुरे दोनों तरह के हो सकते हैं, इनको सही से समझ कर हम और आप आने वाले दिनों के बारे में जान सकते हैं. चलिए जानते हैं भविष्य में सुखद फल और शुभ संकेत वाले कुछ शुभ सपनों के बारे में.  ये सपने होते हैं शुभ सपने में हाथी के साथ महावत को देखना शुभ होता है. इससे धन को लेकर शुभ समाचार मिलते हैं.  मछली मां लक्ष्मी का प्रतीक है और अगर आप सपने में छली देखे या खुद को मछली पकड़ते देखे तो ये जिंदगी में लक्ष्मी के आगमन का संकेत हो सकता है. सपने में बांसुरी देखना दांपत्य जीवन में सुख और मधुरता का समय आने का संकेत है. सपने में अगर आपको सड़क पर पड़े पैसे, सिक्के या नोट मिल जाएं तो यह आने वाले दिनों में धन प्राप्ति का संकेत है.  सपने में सर्कस देखना भी धन प्राप्ति का संकेत है, इससे  संकेत मिलता है कि आपको आने वाले दिनों में कुछ भौतिक सुख प्राप्त होने वाले हैं.  सपने में अगर आप किसी मृत व्यक्ति से बात कर रहे हैं तो डरने की बजाय खुश हो जाइए क्योंकि ये शुभ सपना है और आगे जाकर आपको ढेर सारा धन मिलने वाला है.  अगर आप सपने में खुद को माणिक्य या माणिक की माला या अंगूठी पहने देखें तो समझिए कि आपका भाग्योदय होने वाला है.  अगर सपने में आप खुद को किसी ऊंची और बड़ी दीवार पर बैठा हुआ देख रहे हैं तो इसका मतलब है कि आने वाले जीवन में आपको जबरदस्त तरक्की और पदोन्नति मिलने वाली है.  अगर सपने में आप किसी को पुष्प गुच्छ देते दिखे तो समझना चाहिए कि आने वाले दिनों में आपको किसी की विरासत मिलने वाली है.

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इंदिरा एकादशी व्रत : व्रत विधि और प्रचलित पौराणिक कथा

यह एकादशी हमेशा श्राद्ध पक्ष में आती है इसलिए इस व्रत का फल पितरों की शांति से जोड़ा गया है। लेकिन इसके अलावा भी इंदिरा एकादशी व्रत करने के अनेक पुण्य लाभ हैं।  प्रचलित पौराणिक कथा  महाभारत काल में धर्मराज युधिष्ठिर भगवान श्रीकृष्ण से कहने लगे, भगवान! आश्विन कृष्ण एकादशी का क्या नाम है? कृपया आप मुझे इसकी विधि तथा फल बताएं। इस पर भगवान श्रीकृष्ण कहने लगे कि इस एकादशी का नाम इंदिरा एकादशी है। यह एकादशी पापों को नष्ट करने वाली तथा पितरों को अधोगति से मुक्ति देने वाली होती है और फिर आगे भगवान इसकी कथा सुनाते हैं। जिसके अनुसार प्राचीनकाल में सतयुग के समय में महिष्मति नाम की एक नगरी में इंद्रसेन नाम का एक प्रतापी राजा धर्मपूर्वक अपनी प्रजा का पालन करते हुए शासन करता था। कहते हैं कि उस राजा को किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी। पुत्र, पौत्र और धन आदि से संपन्न वह राजा सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु जी का परम भक्त था। एक दिन राजा सुखपूर्वक अपनी सभा में बैठा था कि अचानक आकाश मार्ग से महर्षि नारद उतरकर उसकी सभा में आए। उन्हें देखते ही राजा हाथ जोड़कर खड़ा हो गया और उनका अपनी सभा में स्वागत किया। सुख से बैठकर मुनि ने राजा से पूछा कि हे राजन! आपके सातों अंग कुशलपूर्वक तो हैं? तुम्हारी बुद्धि धर्म में और तुम्हारा मन विष्णु भक्ति में तो रहता है? नारद मुनि की ऐसी बातें सुनकर पहले तो राजा कुछ भौंचक्का रह गए लेकिन फिर विनम्रता से बताया। तभी राजा ने प्रश्न किया कि हे महर्षि! आपकी कृपा से मेरे राज्य में सब कुशल है। किसी को किसी प्रकार का कोई कष्ट नहीं है। हमारे यहां सभी धार्मिक कार्य भी सही तरीके से हो रहे हैं। आप कृपा करके अपने आगमन का कारण कहिए। तब ऋषि कहने लगे कि हे राजन! जो दृश्य मैं देखकर आ रहा हूं उसे तुम्हें बताना बेहद आवश्यक है। ऋषि आगे बोले, मैं एक समय ब्रह्मलोक से यमलोक को गया, वहां श्रद्धापूर्वक यमराज से पूजित होकर मैंने धर्मशील और सत्यवान धर्मराज की प्रशंसा की। उसी यमराज की सभा में महान ज्ञानी और धर्मात्मा तुम्हारे पिता को एकादशी का व्रत भंग होने के कारण देखा। तुम्हारे जैसे विद्वान राजा के पिता को ऐसे स्थान पर देखकर मैं हैरान हो गया। मेरा यहां आने का यही कारण है राजन्। तुम्हारे पिता ने तुम्हारे लिए एक संदेश भेजा है। उन्होंने कहा कि पूर्व जन्म में कोई विघ्न हो जाने के कारण मैं यमराज के निकट रह रहा हूं, सो हे पुत्र यदि तुम आश्विन कृष्ण इंदिरा एकादशी का व्रत मेरे निमित्त करो तो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है। पितरों की आत्मा की शांति के लिए इसी मान्यता के आधार आज तक पितरों की आत्मा की शांति के लिए एवं उनके उद्धार के लिए इंदिरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। संदेश पाने के बाद जिज्ञासु राजा ने नारद मुनि से इस एकादशी के व्रत को करने की विधि पूछी। Indira Ekadashi 2023: कब है इंदिरा एकादशी व्रत? जानिए इसका महत्व और शुभ मुहूर्त व्रत विधि उत्तर में नारद बोले, ‘आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की दशमी के दिन प्रात:काल उठकर श्रद्धापूर्वक स्नान करें और फिर अपने पितरों का श्राद्ध करें और एक बार भोजन करें। प्रात:काल होने पर एकादशी के दिन दातून आदि करके स्नान करें, फिर व्रत के नियमों को भक्तिपूर्वक ग्रहण करते हुए प्रतिज्ञा करें कि मैं आज संपूर्ण भोगों को त्याग कर निराहार एकादशी का व्रत करूंगा। शालिग्राम की मूर्ति की पूजा पूजा के लिए शालिग्राम की मूर्ति को स्थापित करें। शालिग्राम की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराना चाहिए और फिर पूजा के दौरान भोग लगाना चाहिए। पूजा समाप्त होने पर शालिग्राम की मूर्ति की आरती भी करनी चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराएं पूजा के दौरान कहें ‘हे अच्युत! हे पुंडरीकाक्ष! मैं आपकी शरण हूं, आप मेरी रक्षा कीजिए। पूजा के बाद नियमों का खास ध्यान रखते हुए ब्राह्मणों का भोजन तैयार करें और उन्हें भोजन कराएं, साथ ही दक्षिणा भी दें। ऐसा माना जाता है कि कोई भी मनुष्य यदि इंदिरा एकादशी की तिथि को आलस्य रहित होकर इस एकादशी का व्रत करता है, उसके पितरों को अवश्य स्वर्गलोक प्राप्त होता है। इंदिरा एकादशी की व्रत कथा सतयुग में इंद्रसेन नाम के एक राजा माहिष्मती नामक क्षेत्र में शासन करते थे। इंद्रसेन भगवान विष्णु के परम भक्त और धर्मपरायण राजा थे। वह सुचारू रूप से राज-काज कर रहे थे। एक दिन अचानक देवर्षि नारद का उनकी राज सभा में आगमन हुआ। राजा ने देवर्षि नारद का स्वागत सत्कार कर उनके आगमन का कारण पूछा। देवर्षि नारद जी ने बताया कि कुछ दिन पूर्व वो यमलोक गए थे वहां पर उनकी भेंट राजा इंद्रसेन के पिता से हुई। राजन आपके पिता ने आपके लिए संदेश भेजा है। उन्होंने कहा कि जीवन काल में एकादशी का व्रत भंग हो जाने के कारण उन्हें अभी तक मुक्ति नहीं मिली है और उन्हें यमलोक में ही रहना पड़ रहा है। मेरे पुत्र और संतान से कहिएगा कि यदि वो आश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी का व्रत रखें तो उसके भाग से मुझे मुक्ति मिल जाएगी। नारद मुनि की बात सुनकर राजा इंद्रसेन ने व्रत का विधान पूछा और व्रत करने का संकल्प लिया। राजा ने पितृ पक्ष की एकादशी तिथि पर विधि पूर्वक व्रत का पालन किया। पितरों के निमित्त मौन रह कर ब्राह्मण भोज और गौ दान किया। इस प्रकार राजा इंद्रसेन के व्रत और पूजन के भाग से उनके पिता को यमलोक से मुक्ति और बैकुंठ लोक की प्राप्ति हुई। उस दिन से ही इस व्रत का नाम इंदिरा एकादशी पड़ गया। पितृ पक्ष में पड़ने वाली इस इंदिरा एकादशी के व्रत से पितरों को अधोगति से मुक्ति मिलती है और आपको उनका आशीर्वाद।

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Indira Ekadashi 2023: कब है इंदिरा एकादशी व्रत? जानिए इसका महत्व और शुभ मुहूर्त

इंदिरा एकादशी श्राद्ध पक्ष की एकादशी है और इस एकादशी में भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है। इस व्रत के धार्मिक कर्म दशमी से ही शुरू हो जाते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार, अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को इंदिरा एकादशी व्रत रखा जाता है। इस साल ये एकादशी मंगलवार, 10 अक्टूबर को पड़ रही है। हिंदू धर्म में इस व्रत का काफी अधिक महत्व है। पितृ पक्ष के दौरान पड़ने वाली इंदिरा एकादशी को पितरों के उद्धार के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसा माना जाता है की इस व्रत के करने से हमारे पितरों के पाप धुलते हैं और उन्हें यम लोक से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है। तिथि एवं मुहूर्त एकादशी की तिथि 9 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 36 मिनट से शुरू होगी और 10 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार एकादशी का व्रत 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। 11 अक्टूबर को पारण होगा, जिसका मुहूर्त सुबह 06:19 बजे से 08:38 बजे तक है। व्रतियों को इस दो घंटों में पारण कर लेना चाहिए। कैसे करें व्रत? यह श्राद्ध पक्ष की एकादशी है और इस एकादशी में भगवान शालिग्राम की पूजा की जाती है। इस व्रत के धार्मिक कर्म दशमी से ही शुरू हो जाते हैं। दशमी के दिन नदी में तर्पण आदि कर ब्राह्मण भोज कराएं और उसके बाद स्वयं भी भोजन ग्रहण करें। दशमी पर सूर्यास्त के बाद भोजन न करें। एकादशी के दिन प्रात:काल उठकर व्रत का संकल्प लें और भगवान विष्णु का पूजन करने के बाद दोपहर में पुन: श्राद्ध-तर्पण कर ब्राह्मणों को भोजन कराएं। अगले दिन यानी द्वादशी को पूजन के बाद दान-दक्षिणा दें और पारण करें। इंदिरा एकादशी व्रत कथा जानिए इंदिरा एकादशी की व्रत कथा में क्या कहा गया है।  शास्त्रों के अनुसार महिष्मतिपुरी के राजा इन्द्रसेन एक धार्मिक व्यक्ति थे.वे हमेशा ही अपनी प्रजा के भले के बारे में सोचते थे और भले का कार्य ही करते थे। इसके साथ साथ उनकी ईश्वर में भी अटूट आस्था एवं श्रद्धा थी ,एक बार नारद मुनि भ्रमण  करते हुए उनके दरबार में पधारे ,राजा ने उन्हें देखते ही हाथ जोड़ कर उनका स्वागत किया और उनका पूजन किया।  राजा ने महर्षि के आने की वजह पूछी । तो नारद मुनि ने जवाब दिया ,हे राजन ! मेरे वचनो को ध्यान से सुनो, मैं एक समय ब्रह्म लोक से याम लोक गया। मैंने यमराज से सत्यवान धर्मराज की प्रशंसा की,उसी यमराज की सभा में धर्मात्मा एकादशी व्रत को भांग होने की वजह को देखा,उन्होंने संदेशा दिया पूर्व जन्म में कोई विघ्न हो जाने के कारण मै यमराज के निकट रहा ,इसीलिए पुत्र इंदिरा एकादशी – Indira Ekadashi का व्रत करो तो मुझे स्वर्ग की प्राप्ति होगी और मुझे मोक्ष भी मिल जायेगा।  नारद की बात को सुन कर राजा ने अपने बांधवो तथा दासों से साथ इस व्रत को किया जिसके पुण्य प्रभाव से राजा के पिता विष्णु लोक को गए। राजा इन्द्रसेन भी एकादशी का व्रत कर अपने पुत्र को बैठा कर स्वर्ग लोक गए ,राजा इन्द्रसेन के नाम पर ही इस एकादशी का नाम इंदिरा एकादशी पड़ा।  इंदिरा एकादशी का महत्व पितृ पक्ष  में पड़ने वाकई इस एकादशी का एक विशिष्ठ प्रकार का महत्त्व मन जाता है यह एकादशी का व्रत अश्विनी मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाया जाता है ऐसा माना जाता है की इस व्रत के करने से हमरे पितरो को उनके पाप कर्मो से मुक्ति मिलती है और उन्हें यम लोक से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग की प्राप्ति होती है ,इस कृत के बारे में खुद भगवन श्री कृष्ण ने बतया की यह  व्रत धर्मराज युधिष्ठिर को बताया जाता है  इंदिरा एकादशी की पूजा विधि एकादशी व्रत में दिन में सिर्फ एक बार ही भोजन करना होता है  इस व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है  व्रत करने के लिया स्नानं कर खुद को व्रत के लिए संकापित करे  विधि पूर्वक श्राद्ध सम्पन करे एवं प्रत्येक ब्राह्मण को भोजन व दक्षिणा प्रदान करे  पितरो के नाम से दान दिया हुआ अन्न पिंड गाय को खिलाएं  भगवन विष्णु को धुप ,फूल,मिठाई फल चढ़ाएं  एकादशी के अगले दिन द्वादशी के दिन पूजा कर ब्राह्मणो को भोजन करवाएं  और अपने परिवार के साथ भोजन करते समय मौन रहे। 

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STORY OF KALI MATA मां दुर्गा ने क्यों लिया था काली माता का अवतार? जानें यह पौराणिक कथा

शास्‍त्रों के अनुसार मां भगवती ने दुष्‍टों का अंत करने के लिए विकराल रूप धारण किया था जिन्‍हें मां काली के नाम से जाना जाता है. इनकी आराधना से मनुष्य के सभी भय दूर हो जाते हैं.मां दुर्गा का विकराल रूप हैं मां काली और यह बात सब जातने हैं कि दुष्‍टों का संहार करने के लिए मां ने यह रूप धरा था. शास्‍त्रों में मां के इस रूप को धारण करने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं और उनका व्‍याखान भी वहां मिलता है. हिंदू धर्म में देवी देवताओं में मां दुर्गा का विशेष स्थान है। मान्यता है कि दुर्गा माता की आराधना करने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। सनातन धर्म ग्रंथों के अनुसार देवी देवताओं ने सृष्टि को बचाए रखने के लिए समय-समय पर कई अवतार लिए हैं। इसी प्रकार मां भगवती दुर्गा देवी ने भी दुष्टों का संहार करने के लिए अनेक अवतार लिए थे। नवरात्रि के 9 दिनों में दुर्गा माता के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। जिसमें काली माता के स्वरूप का विशेष महत्व है। पौराणिक ग्रंथों में काली माता अवतार के बारे में कई कथाएं प्रचलित हैं। तो आइए जानते हैं पंडित इंद्रमणि घनस्याल से दुर्गा मां के काली माता अवतार लेने के पीछे की पौराणिक कथा के बारे में। इसलिए मां दुर्गा ने लिया था काली माता का अवतार पंडित इंद्रमणि घनस्याल बताते हैं कि एक दारुक नाम का असुर था। दारुक ने कई वर्षों तक तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया था। ब्रह्माजी ने प्रसन्न होकर दारुक को मनचाहा वरदान दिया। ब्रह्माजी द्वारा वरदान मिलने पर दारुक देवों और ब्राह्मणों को प्रताड़ित करने लगा। उसके बाद दारुक ने सभी धार्मिक अनुष्ठान, हवन इत्यादि कार्य बंद करवा दिए और स्वर्ग पर भी अपना अधिकार जमा लिया। तब सभी देवता एकत्रित होकर ब्रह्मा और विष्णु जी के पास गए और दारुक के द्वारा किए गए कृत्यों के बारे में बताया। तब ब्रह्माजी ने देवताओं से कहा कि दारुक का अंत केवल एक स्त्री ही कर सकती है अर्थात दारुक एक स्त्री के हाथों ही पराजित हो सकता है। तब सभी देवता ब्रह्माजी और विष्णु के साथ स्त्री रूप में प्रकट हुए और दारुक से युद्ध करने के लिए गए।‌ लेकिन दारुक ब्रह्माजी के द्वारा दिए गए वरदान के कारण अत्यंत बलशाली हो गया था। इसलिए उसने सभी देवताओं को परास्त कर दिया। उसके बाद सभी देवता ब्रह्मा जी और विष्णु के साथ शिव जी के पास गए और असुर दारुक के बारे में शिवजी को बताया। महादेव ने पार्वती की तरफ इशारा किया, पार्वती ने अपने एक अंश को शिवजी के शरीर में अदृश्य तरीके से प्रवेश कराया। माता पार्वती का वह अंश भगवान शिव के गले में मौजूद विष से अपना आकार धारण करने लगा। भगवान शिव के गले में विष होने के कारण उस अंश ने काले रंग के वर्ण में परिवर्तित होना शुरु कर दिया। भगवान शिव ने खोला तीसरा नेत्र उसके बाद भगवान शिव ने उस अंश को अपने शरीर में महसूस करके अपना तीसरा नेत्र खोला। उनके नेत्र खोलने से एक काले वर्ण की स्त्री काली माता के रूप में प्रकट हुई। काली माता के माथे पर भी तीसरा नेत्र था। उनका रूप बहुत ही ज्यादा विकराल था। काली माता के कंठ में कराल विष का चिन्ह था। काली माता ने अनेक प्रकार के आभूषण धारण कर रखे थे। उनके हाथ में एक त्रिशूल भी था। काली माता के इस अवतार को देखकर सभी देवता डर कर भागने लगे। माना जाता है कि काली माता के हुंकार मात्र से ही दारुक और अन्य असुर जलकर भस्म हो गए थे। सपने में आग दिखाई देना भविष्य में होने वाली इस घटना का देता है संकेत, जानिए भगवान शिव ने लिया बालक का रूप काली माता के क्रोध की ज्वाला से संपूर्ण लोक अग्नि में भस्म होने लगा। पूरी सृष्टि को जलता देख भगवान शिव ने एक बालक का रूप धारण किया और भगवान शिव शमशान में जाकर बालक स्वरूप में रोने लगे। जब काली माता की दृष्टि भगवान शिव के बालस्वरूप पर पड़ी तो उनमें ममता और वात्सल्य का भाव जाग गया। काली माता ने उस बालक को अपने कलेजे से लगाया और उसे स्तनपान कराने लगी। तब शिव रूपी उस बालक ने दूध के साथ साथ काली माता के पूरे क्रोध को भी पी लिया था। माना जाता है कि माता के क्रोध से 8 मूर्तियां उत्पन्न हुई जिन्हें क्षेत्रपाल के नाम से जाना जाता है।

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17 September 2023 Aaj Ka Panchang आज का पंचांग

आज का पंचांग ~ 🌞🌤️ दिनांक – 17 सितम्बर 2023🌤️ दिन – रविवार🌤️ संवत्सर–पिंगल🌤️ विक्रम संवत – 2080 (गुजरात – 2079)🌤️ शक संवत – 1945🌤️ कलियुगाब्द-–5125🌤️ अयन – दक्षिणायन🌤️ ऋतु – शरद ॠतु🌤️ मास – भाद्रपद🌤️ पक्ष – शुक्ल🌤️ तिथि – द्वितीया सुबह 11:08 तक तत्पश्चात तृतीया🌤️ नक्षत्र – हस्त सुबह 10:02 तक तत्पश्चात चित्रा🌤️ योग – ब्रह्म 18 सितम्बर प्रातः 04:28 तक तत्पश्चात इन्द्र🌤️ राहुकाल – शाम 04:39 से शाम 06:11 तक🌞 सूर्योदय- 05:46🌤️ सूर्यास्त- 18:14_स्थानीय समयानुसार राहुकाल सूर्यास्त सूर्योदय समय में अंतर सम्भव है।👉 दिशाशूल- पश्चिम दिशा में🔥 अग्निवास🔥02+01+01=04÷4=00 पृथ्वी लोक में।✅✅🔱 शिववास🔱 02+02+5=07÷7 =00 श्मशान वासे। ❌❌🚩 व्रत पर्व विवरण – षणशीति-कन्या संक्रांति (पुण्यकाल:दोपहर 01:43 से सूर्यास्त तक💥 विशेष- द्वितीया को बृहती (छोटा बैगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34)💥 रविवार के दिन स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)💥 रविवार के दिन मसूर की दाल, अदरक और लाल रंग का साग नहीं खाना चाहिए।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75.90)💥 रविवार के दिन काँसे के पात्र में भोजन नहीं करना चाहिए। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, श्रीकृष्ण खंडः 75)💥 स्कंद पुराण के अनुसार रविवार के दिन बिल्ववृक्ष का पूजन करना चाहिए। इससे ब्रह्महत्या आदि महापाप भी नष्ट हो जाते हैं। 🌷 हरितालिका तीज 🌷🙏🏻 भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरितालिका तीज का व्रत किया जाता है। इस बार ये व्रत 18 सितम्बर, सोमवार को है। विधि-विधान से हरितालिका तीज का व्रत करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है, वहीं विवाहित महिलाओं को अखंड सौभाग्य मिलता है। इस व्रत की विधि इस प्रकार है-🌷 विधिइस दिन महिलाएं निर्जल (बिना कुछ खाए-पिए) रहकर व्रत करती हैं। इस व्रत में बालूरेत से भगवान शंकर व माता पार्वती का मूर्ति बनाकर पूजन किया जाता है। घर को साफ-स्वच्छ कर तोरण-मंडप आदि से सजाएं। एक पवित्र चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती एवं उनकी सखी की आकृति (प्रतिमा) बनाएं।🙏🏻 प्रतिमाएं बनाते समय भगवान का स्मरण करें। देवताओं का आह्वान कर षोडशोपचार पूजन करें। व्रत का पूजन रात भर चलता है। महिलाएं जागरण करती हैं और कथा-पूजन के साथ कीर्तन करती हैं। प्रत्येक प्रहर में भगवान शिव को सभी प्रकार की वनस्पतियां जैसे बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण किया जाता है। आरती और स्तोत्र द्वारा आराधना की जाती है।🌷 भगवती-उमा की पूजा के लिए ये मंत्र बोलें-ऊं उमायै नम:, ऊं पार्वत्यै नम:, ऊं जगद्धात्र्यै नम:, ऊं जगत्प्रतिष्ठयै नम:, ऊं शांतिरूपिण्यै नम:, ऊं शिवायै नम:🌷 भगवान शिव की आराधना इन मंत्रों से करें-ऊं हराय नम:, ऊं महेश्वराय नम:, ऊं शम्भवे नम:, ऊं शूलपाणये नम:, ऊं पिनाकवृषे नम:, ऊं शिवाय नम:, ऊं पशुपतये नम:, ऊं महादेवाय नम:🙏🏻 पूजा दूसरे दिन सुबह समाप्त होती है, तब महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं और अन्न ग्रहण करती हैं।🌷 ससुराल में कोई तकलीफ 🌷👩🏻 किसी सुहागन बहन को ससुराल में कोई तकलीफ हो तो शुक्ल पक्ष की तृतीया को उपवास रखें… उपवास माने एक बार बिना नमक का भोजन कर के उपवास रखें .. भोजन में दाल चावल सब्जी रोटी नहीं खाएं, दूध रोटी खा लें ..शुक्ल पक्ष की तृतीया को.. अमावस्या से पूनम तक की शुक्ल पक्ष में जो तृतीया आती है उसको ऐसा उपवास रखें… नमक बिना का भोजन(दूध रोटी) , एक बार खाएं बस…… अगर किसी बहन से वो भी नहीं हो सकता पूरे साल का तो केवल*होग➡ माघ महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया➡ वैशाख शुक्ल तृतीया और भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया जरुर ऐसे ३ तृतीया का उपवास जरुर करें … नमक का उपयोग न करें …. जरुर लाभ होगा…💥 विशेष – 18 सितम्बर 2023 सोमवार को भाद्रपद मास की शुक्ल तृतीया है।🙏🏻🌷🍀🌼🌹🌻🌸🌺💐🙏🏻पंचक26 सितम्बर 2023 दिन मंगलवार रात्रि 08:28 बजे से 30 सितम्बर 2023 दिन शनिवार को रात्रि 09:08 बजे तक ।एकादशी25 सितम्बर 2023 दिन सोमवार पद्मा एकादशी (स्मार्त व्रत) ।26 सितम्बर 2023 दिन मंगलवार पद्मा एकादशी (वैष्णव व्रत) ।प्रदोष27 सितम्बर 2023 दिन बुधवार प्रदोष व्रत ।पूर्णिमा28 सितम्बर 2023 दिन गुरुवार अनन्त चतुर्दशी पूर्णिमा व्रत ।29 सितम्बर 2023 दिन शुक्रवार स्नान दान पूर्णिमा। श्राद्धपक्ष आरम्भ। 17 September 2023 Aaj Ka Panchang english me Jai Shri Ram 🌞 ~ Today’s Almanac ~ 🌞🌤️ Date – 17 September 2023🌤️ Day – Sunday🌤️ Samvatsara-Pingal🌤️ Vikram Samvat – 2080 (Gujarat – 2079)🌤️ Shak Samvat – 1945🌤️ Kaliyugabd ––5125🌤️ Ayan – Dakshinayan🌤️ Season – Autumn🌤️ Month – Bhadrapada 🌤️ Side – Shukla🌤️ Date – Dwitiya till 11:08 am followed by Tritiya🌤️ Nakshatra – Hasta till 10:02 am and then Chitra🌤️ Yoga – Brahma till 04:28 am on 18th September and then Indra🌤️ Rahukaal – 04:39 PM to 06:11 PM🌞 Sunrise- 05:46🌤️ Sunset- 18:14_According to local time, difference in Rahukaal sunset and sunrise time is possible.👉 Dishashul- in the west direction🔥Agnivaas🔥 02+01+01=04÷4=00 in the earth.✅🔱 Shivvas🔱 02+02+5=07÷7 =00 Cremation grounds.🚩 Fast festival details – Shanashiti-Kanya Sankranti (Punyakaal: 01:43 pm to sunset💥 Special- Eating Brihati (small brinjal or brinjal) is prohibited on Dwitiya. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-34)💥 Sex with a woman and eating and applying sesame oil are prohibited on 💥 Sunday. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-38) 💥 Lentils, ginger and red colored vegetables should not be eaten on Sunday. (Brahmavaivarta Purana, Shri Krishna section: 75.90)💥 One should not eat food in bronze utensils on Sunday. (Brahmavaivarta Purana, Shri Krishna Volume: 75)💥 According to Skanda Purana, Bilva tree should be worshiped on Sunday. By this the great sins like Brahmahatya etc. are also destroyed. 🌷 Haritalika Teej 🌷🙏🏻 Haritalika Teej fast is observed on the third day of Shukla Paksha of Bhadrapada month. This time this fast is on 18th September, Monday. By observing the fast of Haritalika Teej as per the rituals, unmarried girls get the groom of their choice, while married women get unbroken good fortune. The method of this fast is as follows- 🌷 MethodOn this day women observe Nirjal (without learning anything) fast. In this fast, the idol of Lord Shankar and Mother Parvati is worshipped. Clean the house and decorate it with Toran-Mandap etc. A sacred temple contains the idols (statues) of Ganesha, Parvati and his Sakhi along with Ganga water, Riddhi-Siddhi in pure soil. 🙏🏻 Remember

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सपने में आग दिखाई देना भविष्य में होने वाली इस घटना का देता है संकेत, जानिए

स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने यूं ही नहीं आते, हर सपने का कुछ न कुछ अर्थ जरूर होता है। सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में पहले से ही सतर्क कर देते हैं। सपने शुभ भी हो सकते हैं और अशुभ भी। यहां हम बात करेंगे आग से संबंधित सपनों के बारे में, जिसके आने के कई मायने हो सकते हैं। जानिए सपने में आग देखना शुभ होता है या अशुभ… अगर सपने में आपको अपना घर जलते हुए दिखाई देता है तो इससे घबराएं नहीं ये सपना शुभ माना गया है। कहते हैं कि किसी अविवाहित को ये सपना दिखाई देता है तो इसका मतलब उसे मनचाहा जीवनसाथी मिलेगा और अगर विवाहित लोगों को ये सपना दिखाई देता है तो इसका मतलब सर्वगुण संपन्‍न संतान की प्राप्ति होगी। यदि आप खुद को आग में जलता हुआ देखते हैं तो इसका मतलब आपका भविष्य शानदार रहेगा। यदि सपने में आप खुद को आग में जलता हुआ देखते हैं तो इससे उम्र बढ़ जाती है। इसके अलावा इस सपने से ये भी पता चलता है कि मां लक्ष्मी की अपार कृपा से आपको सुख-समृद्धि मिलेगी। अगर आपको सपने में किसी भी तरह का धुआं दिखाई देता है तो यह समझ लें कि आपके नए दुश्मन बनेंगे। हो सकता है कि आने वाले समय में आपको व्यापार में भी हानि हो जाए। ये सपना बीमारी होने का भी संकेत देता है। अगर आप सपने में हवन या पूजा की अग्नि देखते हैं तो आपकी परेशानियां जल्‍दी ही दूर होने वाली हैं। ये सपना बताता है कि जल्‍दी ही आपके जीवन में सुख और शांति का वास होगा। यदि आप सपने में किसी को आग से जलता हुआ देखें तो यह सपना खराब माना जाता है। इसका अर्थ है कि आपको व्‍यापार में नुकसान होने वाला है। वहीं अगर किसी वस्‍तु को आग में जलता हुआ देखें तो इसका मतलब आपको पित्त संबंधी रोग होने की संभावना है। सपने में अगर आप खुद को या फिर किसी दूसरे को आग पकड़ता हुए देखें तो इसका मतलब है कि आपका फिजूल खर्चा हो सकता है।  ऑफिस या दुकान में आग देखना  सपने में आग देखना सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह की घटनाओं की ओर इशारा करती है. इसके लिए मायने ये रखता है कि आप सपने में आग लगने की घटना कहां होने की देख रहे हैं. बता दें कि, यदि आप सपने में अपनी दुकान या ऑफिस को जलता हुए देखते हैं तो ये आपकी तरक्की की ओर इशारा करती है. अगर आप बिजनेशमैन हैं तो व्यापार में लाभ हो सकता है और यदि आप नौकरीपेशा हैं तो प्रमोशन या वेतन वृद्धि संभव है. खुद को आग में फंसा देखना सपने में यदि आप भयंकर आग को देखते हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. दरअसल इस तरह के मतलब का अर्थ है कि आपका मानसिक तनाव अब समाप्ति की ओर है. आपको विदेश यात्रा का योग बन सकता है. इसके अलावा यदि आप खुद को सपने में आग के बीच खुद को फंसा देखते हैं और खुद को बचा नहीं पा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपके शरीर में पित्त की समस्या बढ़ सकती है. बेहतर है कि ऐसा सपना देखने पर चेकअप जरूर कराएं. खुद को आग बुझाते देखना सपने में आग बुझाते देखना जीवन में आने वाली नकारात्मक घटनाओं की ओर इशारा है. ऐसे में जरूरी है कि एहतियात के साथ काम लें. बता दें कि यदि आप इस तरह का सपना देखते हैं तो इसका मतलब है कि किसी के साथ आपके रिश्तों में खटास आ सकती है. इस तरह की स्थिति परिवार के सदस्यों के साथ भी हो सकती है. इसके लिए बेहतर है कि आप खुद पर संयम बनाकर रखें. अपने घर में लगी आग देखना सपने में यदि आप खुद के ही घर में आग लगी देखें तो चिंता करने के बजाह आपको खुश होने की जरूरत है. हालांकि इस तरह का सपना देखते ही कई लोग घबरा भी जाते हैं. बता दें कि, यदि आप सपने में अपने घर को जलता देखते हैं तो संकट दूर होने की ओर इशारा है. दरअसल इस तरह के संकेत का मतलब है कि जल्द ही आपके घर नन्हा मेहमान आने वाला है. यदि आप अविवाहित हैं तो मनपसंद जीवनसाथी की खोज पूर्ण हो सकती है.

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सपने में पानी देखना शुभ होता है या अशुभ, जानें अर्थ

स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि आपको सपने में पानी दिखता है तो इसका क्या अर्थ होता है। क्या सपने में पानी दिखना शुभ होता है या फिर अशुभ। जानें स्वप्न शास्त्र में इस बात को लेकर क्या बात कही गई। व्यक्ति जब गहरी नींद में होता है तो वह सपने देखता है। व्यक्ति सपने में न जाने से कहां से कहां पहुंच जाता है, पर जब उठता है तो खुद को बेड पर ही पाता है। हालांकि देखे हुए सपने का कोई न कोई मतलब जरूर निकलता है। ऐसे में यदि आपको सपने में पानी से जुड़ी चीजें दिखती हैं तो उनका क्या मतलब होता है? तो चलिए जानते हैं कि इन सपनों का क्या अर्थ होता है और साथ ही जानेंगे कि ये सपने शुभ होते हैं या फिर अशुभ। सपने में तालाब देखने का अर्थ सपने में यदि आप तालाब देखते हैं तो स्वप्न शास्त्र में इसे भी शुभ माना गया है। सपने में तालाब को देखना शुभ होता है। यदि तालाब का पानी साफ दिखता है तो ये शुभ होता है। यदि आप ने तालाब में या किसी भी जगह पर गंदा पानी देखा है तो ये अशुभ होता है। सपने में पानी दिखने का मतलब 1. सपने में बरसात के पानी का दिखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में बरसात के पानी का दिखना शुभ प्रतीक माना जाता है। इसका मतलब है, कि आपको बहुत जल्द कोई बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है या आपको किसी काम में सफलता मिलने की उम्मीद हैं। 2. सपने में बाढ़ के पानी का दिखना  बाढ़जीवन को अस्त-व्यस्त कर देता है। यदि आपको सपने में बाढ़ का पानी दिख रहा है, तो समझ जाए आपके जीवन में बहुत जल्द कष्ट आ सकता है या आपको कहीं से बुरी खबर मिल सकती हैं। 3.सपने में कुएं के पानी का दिखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में कुएं के पानी का देखना शुभ संकेत माना जाता है। यदि आपको सपने में कुएं का पानी दिखाई दें, तो आपको बहुत जल्द कहीं से शुभ समाचार मिल सकता है या धन का भी लाभ हो सकता हैं। 4. सपने में नदी का पानी दिखाई देना स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में नदी का पानी दिखाई देने से पुरानी इच्छा बहुत जल्द पूरी हो सकती है। आपको जीवन में कोई सुनहरा अवसर मिल सकता है या आपको करियर में आगे बढ़ने का चांस भी मिल सकता हैं। यदि आप स्वयं को नदी में तैरते करते हुए देखें, तो यह भी शुभ माना जाता है। 5. सपने में समुद्र का पानी दिखाई देना सपने में समुद्र का पानी दिखाई देना शुभ नहीं माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार ऐसा सपना जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव की तरफ इशारा करता है। ऐसा सपना देखने का मतलब भविष्य में आपको किसी के साथ झगड़ा हो सकता है। यदि आपको सपने में समुद्र का पानी दिखाई दें, तो आप अपनी वाणी पर नियंत्रण रखने की कोशिश करें। क्योंकि यह बहुत बड़े विवाद की वजह बन सकती है।

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सपने में खुद की मृत्यु देखने का मतलब होता है बेहद खास, जानें-इससे जुड़ी रोचक बातें

सपने आगामी भविष्य के संकेत होते हैं। इसमें कई सपने अच्छे होते हैं तो कई सपने बुरे होते हैं। वहीं कई सपने बेहद डरावने होते हैं। इन सपनों को देख व्यक्ति घबरा जाता है। खासकर सपने में खुद की मृत्यु देखना तो और भी डरावना होता है। सपने का वास्तविक जीवन से गहरा संबंध होता है। ये आगामी भविष्य के संकेत होते हैं। इसमें कई सपने अच्छे होते हैं, तो कई सपने बुरे होते हैं। वहीं, कई सपने बेहद डरावने होते हैं। इन सपनों को देख व्यक्ति घबरा जाता है। खासकर, सपने में खुद की मृत्यु देखना तो और भी डरावना होता है। लोग सपने में खुद की मृत्यु देख डर जाते हैं। अगर आप भी सपने में खुद की मृत्यु या किसी अनजान व्यक्ति की मृत्यु देखते हैं, तो इन सपनों का मतलब बहुत खास होता है। आइए, इन सपनों के बारे में सबकुछ जानते हैं क्या आप ने भी सपने में देखी है खुद की शादी? जानें क्या है इसका मतलब अगर आप सपने में किसी मृत व्यक्ति को देखते हैं, तो ये संकेत है कि उस व्यक्ति से आपका बेहद खास लगाव है। वहीं, बार-बार मृत व्यक्ति का सपना देखना शुभ नहीं होता है। ये संकेत है कि आने वाले समय में कोई बड़ी मुसीबत आ सकती है। अगर आप सपने में खुद की मृत्यु देखते हैं, तो ये शुभ संकेत है। इस सपने का मतलब यह है कि आपकी उम्र लंबी होने वाली है। आसान शब्दों में कहें तो जीवन में व्याप्त सभी परेशानियां दूर होने वाली हैं। अगर आप विषम परिस्थिति से गुजर रहे हैं, तो सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। साथ ही जीवन में कोई बड़ी खुशखबरी मिलने वाली है। स्वप्न शास्त्र की मानें तो सपने में बीमार व्यक्ति को देखना या बीमार व्यक्ति की मृत्यु के सपने देखना नुकसानदेह नहीं होता है। इस सपने का मतलब होता है कि जल्द बीमार व्यक्ति की सेहत में सुधार होने वाला है। सपने में स्वर्गवासी पिता का देखना सकारात्मक संकेत होता है। सपने में स्वर्गवासी पिता से बात करना या पिता को देखना शुभ होता है। इस सपने का मतलब होता है कि आपके जीवन में खुशियां आने वाली हैं। इस सपने का यह भी अर्थ होता है कि जल्द घर में कोई उत्सव का आयोजन होने वाला है। अगर आप सपने में किसी बीमार व्यक्ति की मौत देखते हैं तो आपको बिल्कुल भी घबराने की जरूरत नहीं है. स्वप्नशास्त्र के अनुसार, यह सपना उस व्यक्ति की सेहत में सुधार होने का संकेत देता है. किसी की मौत का सपना देखना शुभ माना जाता है. अगर सपने में आपको आपके पूर्वज दिखाई देते हैं तो इसका संकेत है कि या तो उनकी कोई इच्छा अतृप्त रह गई है या फिर वो आपको किसी आगामी घटना का आभास करा रहे हैं. अगर आप सपने में खुद को बीमार होते हुए देखता है तो स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना अशुभ होता है. इस सपने का अर्थ है कि आने वाले समय में आपको बहुत सारे कष्टों का सामना करना पड़ सकता है. आपको धन की हानि भी ह सकती है.

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