Shardiya Navratri 2024 Date: कब से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, नोट करें सही तारीख, कलश स्थापना विधि व पूजन सामग्री

Shardiya Navratri 2024: चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि (माघ/आषाढ़) आती हैं। शारदीय नवरात्रि अश्विन माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। इस पर्व पर भक्त नौ दिनों तक मां अम्बे की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं Shardiya Navratri 2024 Date: सनातन धर्म में त्योहारों का विशेष महत्व है। नवरात्रि का पर्व भी खास अवसरों में से एक है। नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। साल में चार बार नवरात्रि का पावन त्योहार आता है। चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि आती है। हालांकि सबसे ज्यादा महत्व शारदीय नवरात्रि का है। पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विनी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। नवरात्रि के 10वें दिन दशहरा मनाया जाता है। इस साल शारदीय नवरात्रि का त्योहार 3 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक मनाया जाएगा। Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी… Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथियां शारदीय नवरात्रि पूजा पर कैसे करें कलश स्थापना, जानें विधि (Shardiya Navratri 2024 Ghatsthapana Vidhi)  1. सुबह उठकर सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और साप वस्त्र पहन लें. 2. घर में सफाई करने के बाद मुख्य द्वार की चौखट पर आम के पत्तों का तोरण लगाएं. 3. पूजा घर को साफ करें और गंगाजल से पवित्र कर लें. 4. अब चौकी लगाएं और माता की प्रतिमा स्थापित करें. 5. फिर उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में कलश की स्थापना करें.  6. कलश स्थापना के लिए जौ के बीज बोएं. फिर कलश में एक तांबे के कलश में पानी और गंगाजल डालें.  7. कलश पर कलावा और आम के पत्ते बांधें. 8. अब कलश में दूब, अक्षत और सुपारी डालें. 9. कलश पर चुनरी और मौली बांध कर एक नारियल रख दें.  10 अब विधि-विधान से मां दुर्गा का पूजन करें.  11. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. 12. आखिरी में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद का वितरण करें. Navratri 2024:पूजन सामग्री Navratri 2024 नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा की पूजा के लिए निम्नलिखित पूजन सामग्री की आवश्यकता होती है पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा (Shardiya Navratri 2024 Maa Durga Sawari)  Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के आगमन पर वाहन (Maa Durga Sawari) का विशेष महत्व होता है. इसे शुभ और अशुभता से जोड़कर देखा जाता है. ऐसे में इस साल शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा पालकी में सवार होकर आएंगी. देवी पुराण में पालकी की सवारी को बहुत शुभ माना जाता है. Navratri 2024:शारदीय नवरात्रि 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त (Shardiya Navratri Date & Shubh Muhurat)  हिंदू पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि का त्योहार हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू हो जाता है और शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन दशहरा मनाया जाता है. इस साल शारदीय नवरात्रि 03 अक्टूबर, 2024 से शुरू हो रहा है. वहीं समापन 11 अक्टूबर को होगा. इसके अगले दिन 12 अक्टूबर को विजयदशमी का पावन पर्व मनाया जाएगा.  हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 3 अक्टूबर, 2024 को सुबह 12:19 बजे से हो रहा है, जो 4 अक्टूबर को सुबह 2:58 बजे तक है. ऐसे में उदया तिथि के मुताबिक शारदीय नवरात्रि गुरुवार, 3 अक्टूबर 2024 आरंभ हो रही है.  Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Dream Science:सपने में देखा है सूखा पेड़ तो जानिए क्या होने वाला है ?

Dream Science: स्वप्न शास्त्र के अनुसार आने वाला हर सपना अपने साथ कोई ना कोई संकेत जरूर लेकर आता है। Dream Science: रात में सोते समय हम कई तरह के सपने देखते हैं। ज्यादातर हमें याद नहीं रह पाते हैं। लेकिन ये सपने हमें भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते हैं। स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने शुभ-अशुभ दो प्रकार के होते हैं। ऐसे सपनों को जानने के लिए हम उत्सुक रहते हैं कि आखिर उस सपने के पीछे का अर्थ क्या है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आने वाला हर सपना अपने साथ कोई ना कोई संकेत जरूर लेकर आता है। इसी कड़ी में आज हम जानेंगे कि यदि आपको सपने में बांस का पेड़ दिखाई देता है तो इस सपने का क्या अर्थ है Dream Science:बांस का पेड़ देखना यदि आपको सपने में बांस का पेड़ दिखाई देता है तो यह आपके लिए शुभ संकेत होता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, इस समय का अर्थ है कि आपको कहीं से धन लाभ होने वाला है। वहीं, सपने में बांस तोड़ना अशुभ माना गया है। ऐसा सपना देखने का अर्थ है कि आने वाले समय में आपको परेशानियों का सामना करा पड़ सकता है। Dream Science:बांस का सूखा पेड़ देखना यदि आपको सपने में बांस का सूखा हुआ पेड़ दिखाई देता है तो यह भी अशुभ माना जाता है। इस सपने का अर्थ होता है कि आपको अपने कार्यक्षेत्र में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, बांस के पेड़ पर चढ़ने का सपना शुभ माना जाता है। यह करियर में सफलता की ओर इशारा करता है। सपने में मेंढक देखना किस बात का है संकेत, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र Dream Science:सपने में सूखा पेड़ देखना अगर आपने सपने में सूखा पेड़ देखा है तो निश्चिंत रहे. इसका अर्थ है कि आपको लाभ होगा. सूखा वृक्ष देखना एक शुभ फलदायी स्वप्न होता है. इसका अर्थ है लाभ मिलना तो आप निश्चिंत हो जाएं आपको आपके सपने के अनुसार जल्द ही लाभ मिलने वाला है. सूखा पेड़ भले ही रिक्त दिखता है, लेकिन इसका अर्थ ठीक विपरीत होता है. इसलिए यह सपना देखने के बाद और अधिक मेहनत में जुट जाना चाहिए. Dream Science:गंदगी के ढेर पर बैठे देखना अगर आपने सपने में खुद को गंदगी के ढेर पर बैठे देखा है तो सतर्क हो जाएं. यह एक अशुभ संकेत है. इसका अर्थ है कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है ऐसे में आप अपने ऊपर ध्यान दीजिए, कार्य-व्यवहार को लेकर सतर्क रहिए. क्योंकि हमारे साथ जो भी होता है वह हमारे ही किए कर्म के आधार का फल होता है.  Dream Science:खुद को रोते देखना अगर आज किसी ने व्यक्ति ने खुद को सपने में रोते देखा है तो इस स्वप्न का फल भी जान लीजिए. दरअसल यह देखने में तो अशुभ होता है, लेकिन इसका फल शुभ मिलता है. सपने में खुद को रोते देखने का अर्थ है कि आपको जल्दी ही कोई अच्छा और शुभ समाचार मिलेगा. कोई लाभ भी मिल सकता है. यह स्वप्न बताता है कि आपके रोने वाले दिन चले गए. Dream Science:सपने में देखा है जलता दिया अगर आपको सपने में दीप जलता हुआ दिखाई दे तो समझ लें कि यह शुभ शुभ संकेत है. इससे आपकी उम्र बढ़ती है. इसके अलावा यह भी मान लें कि आपकी किस्‍मत भी चमकने वाली है.अगर आपको कोई ऐसा सपना आता है जिसमें आग की वजह से आपके कपड़े जल रहे हैं तो यह इस बात का संकेत है कि आपको कोई महंगा गिफ्ट मिलने जा रहा है. शायद कोई खास व्यक्ति आपको महंगे कपड़े गिफ्ट करने जा रहा है. Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 09/09/2024

Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 9 सितम्बर 2024⛅दिन – सोमवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – षष्ठी रात्रि 09:53 तक तत्पश्चात सप्तमी⛅नक्षत्र – विशाखा शाम 06:04 तक तत्पश्चात अनुराधा⛅योग – वैधृति रात्रि 12:33 सितम्बर 10 तक तत्पश्चात विष्कम्भ⛅राहु काल – प्रातः 07:57 से प्रातः 09:31 तक⛅सूर्योदय – 06:24⛅सूर्यास्त – 06:49 ⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक⛅ अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से दोपहर 01:01 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:14 सितम्बर 10 से रात्रि 01:00 सितम्बर 10 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – स्कन्द षष्ठी, सर्वार्थ सिद्धि योग (शाम 06:04 से प्रातः 06:25 सितम्बर 10 तक)⛅विशेष – षष्ठी को नीम-भक्षण (पत्ती फल खाने या दातुन मुंह में डालने) से नीच योनियों की प्राप्ति होती है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹ब्रह्मचर्य : शरीर का तीसरा उपस्तंभ🔹 🔸शरीर, मन, बुद्धि व इन्द्रियो को आहार से पुष्टि, निद्रा, मन, बुद्धि व इऩ्द्रियों को आहार से पुष्टि, निद्रा से विश्रांति व ब्रह्मचर्य से बल की प्राप्ति होती है । ब्रह्मचर्य परं बलम् । ब्रह्मचर्य का अर्थः Aaj Ka Panchang 🔸‘सर्व अवस्थाओं में मन, वचन और कर्म तीनों से मैथुन का सदैव त्याग हो, उसे ब्रह्मचर्य कहते हैं ।’ (याज्ञवल्क्य संहिता) 👉 ब्रह्मचर्य से शरीर को धारण करने वाली सप्तम धातु शुक्र की रक्षा करती है । शुक्र सम्पन्न व्यक्ति स्वस्थ, बलवान, बुद्धिमान व दीर्घायुषी होते हैं । 👉 ब्रह्मचर्य से व्यक्ति कुशाग्र व निर्मल बुद्धि, तीव्र स्मरणशक्ति, दृढ़ निश्चय, धैर्य, समझ व सद्विचारों से सम्पन्न तथा आनंदवान होते हैं । 👉 वृद्धावस्था तक उनकी सभी इन्द्रियाँ, दाँत, केश व दृष्टि सुदृढ़ रहती है । रोग सहसा उनके पास नहीं आते । क्वचित् आ भी जायें तो अल्प उपचारों से शीघ्र ही ठीक हो जाते हैं । 🌹 भगवान धन्वंतरि ने ब्रह्मचर्य की महिमा का वर्णन करते हुए कहा हैः 🔸‘अकाल मृत्यु, अकाल वृद्धत्व, दुःख, रोग आदि का नाश करने के सभी उपायों में ब्रह्मचर्य का पालन सर्वश्रेष्ठ उपाय है । यह अमृत के समान सभी सुखों का मूल है यह मैं सत्य कहता हूँ ।’ 🔸जैसे दही में समाविष्ट मक्खन का अंश मंथन प्रक्रिया से दही से अलग हो जाता है, वैसे ही शरीर के प्रत्येक कण में समाहित सप्त धातुओं का सारस्वरूप परमोत्कृष्ट ओज मैथुन प्रक्रिया से शरीर से अलग हो जाता है । ओजक्षय से व्यक्ति असार, दुर्बल, रोगग्रस्त, दुःखी, भयभीत, क्रोधी व चिंतित होता है । Aaj Ka Panchang 🔹शुक्रक्षय के लक्षण (चरक संहिता)🔹 🔸शुक्र के क्षय होने पर व्यक्ति में दुर्बलता, मुख का सूखना, शरीर में पीलापन, शरीर व इन्द्रियों में शिथिलता (अकार्यक्षमता), अल्प श्रम से थकावट व नपुंसकता ये लक्षण उत्पन्न होते हैं । 🔹अति मैथुन से होने वाली व्याधियाँ🔹 🔸ज्वर (बुखार), श्वास, खाँसी, क्षयरोग, पाण्डू, दुर्बलता, उदरशूल व आक्षेपक (Convulsions- मस्तिष्क के असंतुलन से आनेवाली खेंच) आदि । 🔸 ब्रह्मचर्य रक्षा के उपाय 🔸 Aaj Ka Panchang 🔹 ब्रह्मचर्य-पालन का दृढ़ शुभसंकल्प, पवित्र, सादा रहन-सहन, सात्त्विक, ताजा अल्पाहार, शुद्ध वायु-सेवन, सूर्यस्नान, व्रत-उपवास, योगासन, प्राणायाम, ॐकार का दीर्घ उच्चारण, ‘ॐ अर्यामायै नमः’ मंत्र का पावन जप, शास्त्राध्ययन, सतत श्रेष्ठ कार्यों में रत रहना, सयंमी व सदाचारी व्यक्तियों का संग, रात को जल्दी सोकर ब्राह्ममुहूर्त में उठना, प्रातः शीतल जल से स्नान, प्रातः-सांय शीतल जल से जननेन्द्रिय-स्नान, कौपीन धारण, निर्व्यसनता, कुदृश्य-कुश्रवण-कुसंगति का त्याग, पुरुषों के लिए परस्त्री के प्रति मातृभाव, स्त्रियों के लिए परपुरुष के प्रति पितृ या भ्रातृ भाव – इन उपायों से ब्रह्मचर्य की रक्षा होती है । Aaj Ka Panchang 🔸 स्त्रियों के लिए परपुरुष के साथ एकांत में बैठना, गुप्त वार्तालाप करना, स्वच्छंदता से घूमना, भड़कीले वस्त्र पहनना, कामोद्दीपक श्रृंगार करके घूमना – ये ब्रह्मचर्य पालन में बाधक हैं । जितना धर्ममय, परोपकार-परायण व साधनामय जीवन, उतनी ही देहासक्ति क्षीण होने से ब्रह्मचर्य का पालन सहज-स्वाभाविक रूप से हो जाता है । नैष्ठिक ब्रह्मचर्य आत्मानुभूति में परम आवश्यक है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang (English Mai) 9/09/2024 ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Vishakha till 06:04 pm and then Anuradha ⛅Yoga – Vaidhriti till 12:33 pm on September 10 and then Vishkambh ⛅Rahu Kaal – 07:57 am to 09:31 am ⛅Sunrise – 06:24 ⛅Sunset – 06:49 ⛅Disha Shool – East direction In⛅Brahma Muhurta – from 04:52 to 05:38 in the morning ⛅ Abhijeet Muhurta – from 12:12 in the afternoon to 01:01 in the afternoon⛅ Nishita Muhurta – from 12:14 in the night of September 10 to 01:00 in the night of September 10⛅ Vrat festival details – Skanda Shashthi, Sarvartha Siddhi Yoga (from 06:04 PM to 06:25 AM on September 10)⛅Special – By consuming neem (eating leaves and fruits or putting toothpicks in mouth) on Shashthi, one gets lower births. (Brahmavaivarta Purana, Brahma Khand: 27.29-34) 🔹Celibacy: The third pillar of the body🔹 🔸The body, mind, intellect and senses are strengthened by food, sleep, the mind, intellect and senses are strengthened by food, rest by sleep and strength by celibacy. Is achieved. Celibacy is the ultimate blessing. Meaning of celibacy: 🔸 ‘Always giving up sexual intercourse through mind, words and actions in all situations is called celibacy.’ (Yagyavalkya Samhita) 👉 Venus, the seventh metal that sustains the body, protects from celibacy. People blessed with Venus are healthy, strong, intelligent and long lived. 👉 Brahmacharya makes a person sharp and clear intellect, has a sharp memory, strong determination, patience, understanding and good thoughts and is happy. 👉 All their senses, teeth, hair and eyesight remain strong till old age. Diseases do not come to them suddenly. Even if they get infected, they get cured soon with simple treatment. 🌹 Lord Dhanvantri has described the glory of celibacy and said: 🔸’Of all the measures to destroy premature death, premature old age, sorrow, disease etc., following celibacy is the best. This is the best solution. It is like nectar and is the root of all happiness. I say this truthfully.’ 🔸Just as the butter present in curd gets separated from curd by churning, similarly the essence of the seven metals is present in every particle of the body. The supreme Ojas gets separated from the body through the process

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Dream Science: सपने में मेंढक देखना किस बात का है संकेत, जानें क्या कहता है स्वप्न शास्त्र

Dream Science:सपने में मेंढक देखना एक आम अनुभव है, जिसका विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों में अलग-अलग अर्थ निकाला जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार, मेंढक के सपने आपके जागृत जीवन की कई स्थितियों को दर्शा सकते हैं। Dream Scienceसोने के बाद हमारा मन काल्पनिक चीजों को देखने लगता है, क्यों कि इस दौरान हमारा मन हमारे काबू में नहीं होता है. ऐसे में रात को सोने के बाद हमें न जाने कैसे-कैसे सपने आ जाते हैं, जिसका शायद असलियत में होने ना मुमकिन हो सकता है. Sapne Me Frog Dekhna सपने में मेंढक देखना  क्या आप इस बात को जानते हैं कि क्या सोने के बाद देखे गए सपनों का हमारे वास्तव जीवन से लेना देना होता है. स्वप्न शास्त्र में माना जाता है कि सपनों का अपना अर्थ होता है. ये भविष्य में होने वाली घटनाओं को लेकर संकेत देते हैं. ऐसे ही अगर आपने भी सपने में मेंढक (Frog) को देखा है, तो क्या ये शुभ साकेत है या फिर अशुभ? आइए जानते हैं इस सपने का क्या अर्थ होता है. Swapna Shastra: सपनों में दिखाई देने वाली ये 11 घटनाएं मानी जाती है शुभ Dream Science:माना जाता है शुभ अगर आपने सपने में  मेंढक देखा है तो यह सपना आपके लिए शुभ माना जाता है. स्वप्न शास्त्र की जानकारी के मुताबिक सपने में मेंढक देखने का अर्थ होता है कि आपके जीवन में नई उर्जा और उत्साह का संचार होने वाला है.Dream Science इसके अलावा सपने में मेंढक को टर्रते हुए सुनना अक्सर अच्छी खबर, खुशी, या किसी महत्वपूर्ण घटना की सूचना देता है. स्वप्न शास्त्र की जानकारी के मुताबिक अगर आपने सपने में मेंढक को कूदते-छलांग लगाते हुए देखा है, तो इसका अर्थ होता है कि जीवन में आपको आगे बढ़ने के लिए दर्शाता है. इसके अलावा जीवन में बदलावों को और नई चुनौती का सामना करने को दर्शाता है. बता दें कि अगर आपने सपने में मेंढक का झुंड देखा है, तो यह आपके जीवन में किसी छोटे से विषय को लेकर उथल-पुथल होने का संकेत देता है.  Dream Science सपने में मेंढक देखने के कुछ सामान्य अर्थ सपने में मेंढक के साथ जुड़े अन्य कारक: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें

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श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रम् – Shri Rinamochanamahaganapati Stotram

श्री ऋणमोचन महागणपति स्तोत्रम् एक अत्यंत प्रभावशाली स्तोत्र है, जिसका पाठ ऋण मुक्ति और आर्थिक संकटों से उबरने के लिए किया जाता है। यह स्तोत्र भगवान गणेश को समर्पित है, जो सभी विघ्नों और समस्याओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इस स्तोत्र का पाठ करने से ऋणों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। अस्य श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रस्य शुक्राचार्य ऋषिः,अनुष्टुप्छन्दः, श्रीऋणमोचक महागणपतिर्देवता ।मम ऋणमोचनमहागणपतिप्रसादसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ॥रक्ताङ्गं रक्तवस्त्रं सितकुसुमगणैः पूजितं रक्तगन्धैःक्षीराब्धौ रत्नपीठे सुरतरुविमले रत्नसिंहासनस्थम् ।दोर्भिः पाशाङ्कुशेष्टाभयधरमतुलं चन्द्रमौलिं त्रिणेत्रंध्यायेत् शान्त्यर्थमीशं गणपतिममलं श्रीसमेतं प्रसन्नम् ॥स्मरामि देव देवेशं वक्रतुण्डं महाबलम् ।षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये ॥ १॥एकाक्षरं ह्येकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम् ।एकमेवाद्वितीयं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ २॥महागणपतिं देवं महासत्वं महाबलम् ।महाविघ्नहरं शम्भोः नमामि ऋणमुक्तये ॥ ३॥कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम् ।कृष्णसर्पोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये ॥ ४॥रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम् ।रक्तपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ५॥पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम् ।पीतपुष्पप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ६॥धूम्राम्बरं धूम्रवर्णं धूम्रगन्धानुलेपनम् ।होम धूमप्रियं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ७॥भालनेत्रं भालचन्द्रं पाशाङ्कुशधरं विभुम् ।चामरालङ्कृतं देवं नमामि ऋणमुक्तये ॥ ८॥इदं त्वृणहरं स्तोत्रं सन्ध्यायां यः पठेन्नरः ।षण्मासाभ्यन्तरेणैव ऋणमुक्तो भविष्यति ॥ ९॥इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे श्रीऋणमोचनमहागणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।ऋणहरस्तोत्रम् ऋणमोचन

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ऋणहरगणेशस्तोत्रम् – RiNaharagaNeshastotram

ऋणहरगणेशस्तोत्रम् एक विशेष स्तोत्र है, जो गणपति जी की कृपा से ऋण मुक्ति पाने के लिए किया जाता है। इस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से आर्थिक संकट दूर होते हैं और व्यक्ति पर धन-धान्य की कृपा होती है। यह स्तोत्र इस प्रकार है: कैलासपर्वते रम्ये शम्भुं चन्द्रार्धशेखरम् ।षडाम्नायसमायुक्तं पप्रच्छ नगकन्यका ॥ १॥पार्वत्युवाच -देवेश परमेशान सर्वशास्त्रार्थपारग ।उपायं ऋणनाशस्य कृपया वद साम्प्रतम् ॥ २॥श्रीशिवः -सम्यक्पृष्टं त्वया भद्रे लोकानां हितकाम्यया ।तत्सर्वं सम्प्रवक्ष्यामि सावधानावधारय ॥ ३॥ॐ अस्य श्रीऋणहरमहागणपतिस्तोत्रस्य सदाशिव ऋषिः-अनुष्टुप्छन्दः- श्रीऋणहर महागणपतिर्देवता ।ग्लौं बीजम् । गः शक्तिः । गों कीलकम् । मम ऋणनाशने जपेविनियोगः- ॐ गणेश अङ्गुष्ठाभ्यां नमः । ऋणं छिन्धि तर्जनीभ्यांनमः । वरेण्यं मध्यमाभ्यां नमः । हुं अनामिकाभ्यां नमः । नमःकनिष्ठिकाभ्यां नमः । फट् करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः । एवंहृदयादिन्यासाः ।ध्यानं -सिन्दूरवर्णं द्विभुजं गणेशं लम्बोदरं पद्मदले निविष्टम् ।ब्रह्मादिदेवैः परिसेव्यमानं सिद्धैर्युतं तं प्रणमामि देवम् ॥पञ्चपूजाः ।सृष्ट्यादौ ब्रह्मणा सम्यक् पूजितः फलसिद्धये ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ १॥त्रिपुरस्यवधात् पूर्वं शम्भुना सम्यगर्चितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ २॥हिरण्यकशिप्वादीनां वधार्ते विष्णुनार्चितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ३॥महिषस्य वधे देव्या गणनाथः प्रपूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ४॥तारकस्य वधात् पूर्वं कुमारेण प्रपूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ५॥भास्करेण गणेशो हि पूजितश्च स्वसिद्धये।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ६॥शशिना कान्तिवृद्ध्यर्थं पूजितो गणनायकः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ७॥पालनाय च तपसां विश्वामित्रेण पूजितः ।सदैव पार्वतीपुत्रः ऋणनाशं करोतु मे ॥ ८॥इदं ऋणहरं स्तोत्रं तीव्रदारिद्र्यनाशनम् ।एकवारं पठेन्नित्यं वर्षमेकं समाहितः ॥ ९॥दारिद्र्यं दारुणं त्यक्त्वा कुबेरसमतां व्रजेत् ।फडन्तोऽयं महामन्त्रः सार्धपञ्चदशाक्षरः ॥ १०॥मन्त्रो यथा-ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट् ।इमं मन्त्रं पठेदन्ते ततश्च शुचिभावनः ॥ ११॥एकविंशति सङ्ख्याभिः पुरश्चरणमीरितम् ।सहस्रावर्तनात्सम्यक् षण्मासं प्रियतां व्रजेत् ॥ १२॥बृहस्पतिसमो ज्ञाने धने धनपतिर्भवेत् ।अस्यैवायुतसङ्ख्याभिः पुरश्चरणमीरितम् ॥ १३॥लक्षमावर्तनात्सम्यग्वाञ्छितं फलमाप्नुयात् ।भूतप्रेतपिशाचानां नाशनं स्मृतिमात्रतः ॥ १४॥इति श्रीकृष्णयामलतन्त्रान्तर्गतं ऋणहरगणपतिस्तोत्रं सम्पूर्णम् ।

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श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् -Shri Ashtavinayaka Stotram

स्वस्ति श्रीगणनायको गजमुखो मोरेश्वरः सिद्धिदः बल्लाळस्तु विनायकस्तथ मढे चिन्तामणिस्थेवरे ।लेण्याद्रौ गिरिजात्मजः सुवरदो विघ्नेश्वरश्चोझरे ग्रामे रांजणसंस्थितो गणपतिः कुर्यात् सदा मङ्गलम् ॥इति अष्टविनायकस्तोत्रं सम्पूर्णम् । श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् Shri Ashtavinayaka Stotramआपने श्री अष्टविनायक स्तोत्रम् का उल्लेख किया है।अष्टविनायक गणेश जी के आठ स्वरूपों का एक समूह है, जिनकी पूजा महाराष्ट्र में विशेष रूप से की जाती है। ये आठ स्वरूप हैं:1. मोरेश्वर: पुणे के मोरगांव में स्थित।2. सिद्धिविनायक: मुंबई में स्थित।3. विघ्नेश्वर: महाराष्ट्र के लेणी में स्थित।4. बालाजी विनायक:महाराष्ट्र के कल्याण में स्थित।5. वराद विनायक: महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में स्थित।6. गणेशपुरी: महाराष्ट्र के रायगढ़ में स्थित।7. मांगेश:महाराष्ट्र के गोवा में स्थित।8. छत्रपति: महाराष्ट्र के रायगढ़ में स्थित।अष्टविनायक स्तोत्रम् इन आठों स्वरूपों की स्तुति करने वाला एक मंत्र है। यह स्तोत्र भक्तों को इन देवताओं की कृपा प्राप्त करने और अपने जीवन में सफलता पाने में मदद करता है। स्तोत्र का महत्वविघ्न निवारण:यह स्तोत्र जीवन में आने वाले सभी प्रकार के विघ्नों को दूर करने में मदद करता है।सफलता: यह स्तोत्र भक्तों को अपने जीवन में सफलता दिलाता है।ज्ञान:यह स्तोत्र भक्तों को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है।समृद्धि:यह स्तोत्र भक्तों को धन और समृद्धि प्रदान करता है।स्तोत् का पाठ कैसे करेंआप इस स्तोत्र का पाठ किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन इसे सुबह के समय उठकर स्नान करने के बाद करना अधिक फलदायी होता है।

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 07/09/2024

Aaj Ka Panchang… Aaj Ka Panchang🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 7 सितम्बर 2024⛅दिन – शनिवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – भाद्रपद⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – चतुर्थी शाम 05:37 तक तत्पश्चात पंचमी⛅नक्षत्र – चित्रा दोपहर 12:34 तक तत्पश्चात स्वाति⛅योग – ब्रह्म रात्रि 11:17 तक तत्पश्चात इंद्र⛅राहु काल – प्रातः 09:31 से प्रातः 11:04 तक⛅सूर्योदय – 06:27⛅सूर्यास्त – 06:49 ⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:52 से 05:38 तक⛅ अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:12 से 01:02 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:14 सितम्बर 08 से रात्रि 01:01 सितम्बर 08 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – गणेश चतुर्थी (चंद्र दर्शन निषिद्ध, चन्द्रास्त – रात्रि 09.27), गणेश महोत्सव प्रारम्भ, सर्वार्थ सिद्धि योग (दोपहर 12:24 से प्रातः 06:24 सितम्बर 08 तक)⛅विशेष – चतुर्थी को मूली खाने से धन-नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 🔹अपने हाथ में ही अपना आरोग्य🔹 Aaj Ka Panchang 🔸१) सभी अंगों में पुष्टिदायक तेल की मालिश अवश्य करानी चाहिए सिर में कान में और पैरों में तो विशेष रूप से करानी चाहिए । कराने से वायु तथा कफ मिटता है, थकान मिटती है, शक्ति तथा सुख की प्राप्ति होती है, नींद अच्छी आती है, शरीर का वर्ण सुधरता है, शरीर में कोमलता आती है, आयुष्य की वृद्धि होती है तथा देह की पुष्टि होती है । 🔸(२) सिर में मालिश किया हुआ तेल सभी इन्द्रियों को तृप्त करता है, दृष्टि को बल देता है, सिर के दर्दों को मिटाता है। बाल में तेल पहुँचने से बाल घने, लम्बे तथा मुलायम होते हैं । लंबे समय तक टिकते हैं और बाल काले बने रहते हैं तथा सिर को भी भरा हुआ रखता है । 🔸(३) नित्य कान में तेल डालने से कान में रोग या मैल नहीं होता । गले के बाजू की नाड़ी तथा दाढ़ी अकड नहीं जाती । बहुत ऊँचे से सुनना या बहरापन नहीं होता । कान में रस आदि पदार्थ डालने हों तो भोजन से पहले डालना हितकर है । 🔸(४) पैरों पर तेल मसलने से पाँव मजबूत होते हैं। नींद अच्छी आती है, आँख स्वच्छ रहती है तथा पैर झूठे नहीं पड़ जाते, श्रम से अकड़ नहीं जाते, संकोच प्राप्त नहीं करते तथा फटते भी नहीं । जिस तरह गरुड़ के पास साँप नहीं जाते उसी तरह कसरत के अभ्यासी और तेल की मालिश करानेवाले के पास रोग नहीं जाते । नहाते समय तेल का उपयोग किया हो तो वह तेल रोंगटों के छिद्रों, शिराओं के समूह तथा धमनियों के द्वारा सम्पूर्ण शरीर को तृप्त करता है तथा बल प्रदान करता है । 🔸(५) जिस तरह मूल में सिंचित वृक्षों के पत्ते आदि वृद्धि प्राप्त करते हैं उसी तरह अंगों पर तेल मलवानेवाले मानवों की तेल से सिंचित धातुएँ पुष्टि प्राप्त करती हैं । 🔸(६) बुखार से पीड़ित, कब्जियतवाले, जिसने जुलाब लिया हो, जिसे उल्टी हुई हो, उसे कभी भी तेल की मालिश नहीं करनी चाहिये । 🔸(७) मुँह पर तेल मलने से आँखें मजबूत होती हैं, गाल पुष्ट होते हैं, फोड़े तथा फुन्सियाँ नहीं होती और मुँह कमल के समान सुशोभित होता है । 🔸(८) जो मनुष्य प्रतिदिन आँवले से स्नान करता है उसके बाल जल्दी सफेद नहीं होते और वह सौ वर्ष तक जीवित रहता है । 🔸(९) दर्पण में देहदर्शन करना यह मंगलरूप है, कांतिकारक है, पुष्टिदाता है, बल तथा आयुष्य को बढ़ाने वाला है और पाप तथा अलक्ष्मी का नाश करनेवाला । 🔸(१०) जो मनुष्य सोते समय बिजोरे के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ चाटता है वह सुखपूर्वक सो सकता है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞 Aaj Ka Panchang English Me (आज का पंचांग) 07/09/2024 ~ Today’s Hindu Calendar ⛅Nakshatra – Chitra till 12:34 pm, then Swati ⛅Yoga – Brahma till 11:17 pm, then Indra ⛅Rahu Kaal – 09:31 am to 11:04 am ⛅Sunrise – 06:27 ⛅Sunset – 06:49 ⛅Disha Shool – in the east direction ⛅Brahmamuhurta – morning 04:52 to 05:38⛅ Abhijeet Muhurta – 12:12 to 01:02 in the afternoon⛅ Nishita Muhurta – 12:14 in the night of September 08 to 01:01 in the night of September 08⛅ Vrat festival details – Ganesh Chaturthi (Moon sighting prohibited , Moonset – 09.27 p.m.), Ganesh Mahotsav begins, Sarvartha Siddhi Yoga (from 12:24 p.m. to 06:24 a.m. Sept. 08)⛅Special – Eating radish on Chaturthi leads to loss of wealth. (Brahmavaivart Puran, Brahma Khand: 27.29- 34) Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 🔹Your health is in your own hands🔹 🔸1) Massage of nourishing oil should be done in all the body parts, especially in the head, ears and feet. By doing this, gas and phlegm are removed, tiredness is removed, strength and happiness are attained, sleep is good, complexion of the body improves, body becomes soft, lifespan increases and the body is strengthened. 🔸 (2) Oil massaged on the head satisfies all the senses, strengthens the eyesight, removes headaches. When oil reaches the hair, the hair becomes thick, long and soft. It lasts for a long time and the hair becomes shiny. They remain black and also keep the head full. 🔸(3) By putting oil in the ears regularly, there is no disease or dirt in the ears. The nerves on the side of the neck and the beard do not become stiff. There is no difficulty in hearing from very loud noises or deafness. If you want to put juice or other things in your ears, it is better to put them before eating. 🔸(4) Rubbing oil on your feet strengthens them. Sleep is good, eyes remain clean and feet do not lie down, do not become stiff due to exertion, do not become stiff and do not tear. Just as snakes do not go near Garuda, similarly snakes do not go near a person who practices exercise and gets oil massage. Diseases do not come near you. If oil is used while bathing, then that oil satisfies the entire body through the pores of the goosebumps, the veins and the arteries and provides strength. 🔸(5) Just as the leaves of a tree irrigated from the roots Just as the body parts of a person who has

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Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश का विग्रह ईशान कोण में स्थापित करें, स्‍थापना से पहले कर लें यह काम; बरसेगी बप्‍पा की कृपा

Ganesh Chaturthi 2024:श्री गणेश जी की प्रतिमा को ईशान कोण में स्थापित करने से वास्तु के अनुसार घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है। Ganesh Chaturthi:बुद्धिऔर रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक सृष्टि के प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश का आह्वान ओम एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात, इस मंत्र से आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। प्रथम पूज्य गणपति भगवान को सफेद रंग के फूल, वस्त्र, सफेद जनेऊ, सफेद चंदन आदि नहीं चढ़ाना चाहिए। केतकी का पुष्प जिस तरह भालेनाथ को नहीं चढ़ता, वैसे ही श्रीगणेश को भी नहीं चढ़ता। (Ganesh Chaturthi 2024)। बुद्धि और रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक सृष्टि के प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की चतुर्थी आसन्न है। अतएव, श्रीगणेश के विग्रह की स्थापना व पूजन-अर्चन से संबंधित मूलभूत जानकारियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। धार्मिक-विधान और वास्तुशास्त्र की दृष्टि से श्रीगणेश का विग्रह ईशान कोण में स्थपित किया जाना चाहिए। जिस चौकी पर बप्पा को विराजमान करना है, पहले उसे गंगाजल छिड़ककर शुद्ध अवश्य कर लेना चाहिए। Bhagwan Shri Ganesh:भगवान श्रीगणेश के मूलमंत्र के जाप से अविलंब दिव्य कृपा संस्कारधानी के धार्मिक विषयों के ज्ञाताओं ने बताया कि श्रीगणेश का आह्वान ओम एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ति प्रचोदयात, इस मंत्र से किया जाना चाहिए। भगवान श्रीगणेश के इस मूलमंत्र के जाप से अविलंब दिव्य कृपा और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है। Ganesh Chaturthi 2024:ईशान कोण में क्यों स्थापित करें? Ganesh Chaturthi 2024:स्थापना से पहले क्या करें? स्थापना के समय ध्यान रखने योग्य बातें Ganesh Chaturthi 2024:गणेश जी की पूजा Shri Ganesh Bhagwan:श्री गणेश की दाहिनी ओर माता गौरी का आह्वान करना चाहिए Ganesh Chaturthi 2024:ओम भूर्भुवः स्वः सिद्धिबुद्धिसहिताय गणपतये नमः, गणपतिमावाहयामि, स्थापयामि, पूजयामि च, इस मंत्र से आह्वान करते हुए हाथ के अक्षत को श्रीगणेश के विग्रह पर चढ़ा देना चाहिए। पुनः अक्षत लेकर श्री गणेश की दाहिनी ओर माता गौरी का आह्वान करना चाहिए। Ganesh Chaturthi 2024:तीन बार आचमन करते हुए माथे पर तिलक लगाएं Ganesh Chaturthi 2024:श्री गणेश भगवान की प्रतिमा की पूर्व दिशा में कलश-स्थापना करें। गणपति की प्रतिमा के दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि को भी स्थापित करें और साथ में एक-एक सुपारी रखें। अपने ऊपर जल छिड़कते हुए ओम पुण्डरीकाक्षाय नमः मंत्र का जाप करें। भगवान गणेश को प्रणाम करें और तीन बार आचमन करते हुए माथे पर तिलक लगाएं। Ganesh Chaturthi Pujan Muhurat: गणेश चतुर्थी के दिन पूजन के लिए ये है शुभ मुहूर्त, जानें गणेश विसर्जन की Date दूर्वा अर्पण के साथ लड्डू और मोदक का भोग अवश्य लगाएं Ganesh Chaturthi 2024:श्रीगणेश की पूजा में लाल रंग के पुष्प, फल, और लाल चंदन का प्रयोग अवश्य करें। श्री गणेश भगवान की पूजा में दूर्वा, फूल, फल, दीपक, अगरबत्ती, चंदन और सिंदूर का भी प्रयोग करें। इसके साथ ही श्रीगणेश को अतिशय प्रिया लड्डू और मोदक का भोग लगाना कभी न भूलें। ककड़ा और केला के अलावा पंजीरी का भोग भी श्रीगणेश को पसंद है। इसका प्रसाद भक्तों में वितरित करने से वे प्रसन्न होते हैं। 10 दिवसीय पूजन में ओम गं गणपतये नम: मंत्र जपें श्रीगणेश चतुर्थी से अनंत चतुदर्शी तक 10 दिवसीय गणपति-पूजन में भगवान गणेश के मंत्र ओम गं गणपतये नमः का जाप करने से सुख, शांति, स्वास्थ्य व समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसी तरह वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विध्नं कुरूमे देव सर्वकार्येषु सर्वदा और गजाननंत भूतगणदि सेविंतं कपित्थजम्बूफलचारूभक्षणम, उमासुतं शोक विनाशकारकम, नमामि विध्नेश्वर पाक पंकजम, मंत्र को नित उच्चारण करने से श्रीगणेश का आशीर्वाद प्राप्त होता है। जय गणेश-जय गणेश देवा, माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा, इस आरती का सस्वर पाठ करने से घर में खुशहाली आती है। Shri Ganesh:श्रीगणेश को ये वस्तुएं अर्पित न की जाएं प्रथम पूज्य गणपति भगवान को सफेद रंग के फूल, वस्त्र, सफेद जनेऊ, सफेद चंदन आदि नहीं चढ़ाना चाहिए। Ganesh Chaturthi 2024 श्री गणेश की पूजा में मुरझाए और सूखे फल का प्रयोग न हो। इसी तरह श्रीगणेश को टूटा हुआ खंडित चावल न चढ़ाकर सदैव अक्षत यानि साबुत चावल अर्पित करना चाहिए। भगवान श्रीगणेश को तुलसी भी अर्पित नहीं की जाती। केतकी का पुष्प जिस तरह भालेनाथ को नहीं चढ़ता, वैसे ही श्रीगणेश को भी नहीं चढ़ता। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Swapna Shastra: सपनों में दिखाई देने वाली ये 11 घटनाएं मानी जाती है शुभ

Swapna Shastra: सोने के बाद आत्मा शरीर से बाहर निकलकर यहां-वहां घूमती है और बाद में शरीर में प्रवेश कर जाती है। उस समय शरीर कोमा की स्थिति में होता है। लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है ये आज भी शोध का विषय है। Swapna Shastra:सपने हमेशा से ही रहस्यों से भरे रहे हैं। हमारे समाज में सपनों का बहुत महत्व है। कई लोग मानते हैं कि सपने हमारे भविष्य के बारे में संकेत देते हैं। सपनों का अध्ययन करने वाले शास्त्रों के अनुसार कुछ सपने शुभ होते हैं और इनके देखने से जीवन में खुशहाली आती है। Swapna Shastra: आज रात में मुझे बहुत अजीब सपना आया। मैंने सुना है सुबह के सपने सच होते हैं। मैं सपनों में डर गया था। आपने अक्सर अपने आस-पास के लोगों को ऐसा ही कुछ कहते हुए सुना होगा। दरअसल सपनों का मनोविज्ञान हमेशा से इंसानों के लिए कौतूहल का विषय रहा है। दार्शनिक, वैज्ञानिक और मनोचिकित्सक सभी ने सपनों की व्याख्या अलग-अलग तरह से की है। यूनान के दार्शनिक हिप्पोक्रेटस का मानना था कि सोने के बाद आत्मा शरीर से बाहर निकलकर यहां-वहां घूमती है और बाद में शरीर में प्रवेश कर जाती है। उस समय शरीर कोमा की स्थिति में होता है। लेकिन इस बात में कितनी सच्चाई है ये आज भी शोध का विषय है। लेकिन ज्योतिष के अनुसार सपनों में दिखाई देने वाली हर चीज कुछ न कुछ इशारा करती है। आइये जानते हैं सपनों की सच्चाई। Swapna Shastra:सपने में पानी का इस तरह दिखाई देना होता है शुभ-अशुभ स्वप्न शास्त्र Swapna Shastra के अनुसार अगर आप सपने में बारिश होते हुए देखते हैं तो ये आपके लिए एक शुभ संकेत है। इसका अर्थ धन और भौतिक लाभ से होता है। ऐसा सपना इशारा करता है कि आपको शुभ समाचार मिलने वाला है और आपके अटके हुए काम पूरे होने वाले हैं। वहीं, अगर आप सपने में झमाझम बारिश देखते हैं तो इसका अर्थ है मां लक्ष्मी आप पर प्रसन्न होने वाली हैं। व्यापार और नौकरी में तरक्की की प्रबल संभावना है। यदि किसी व्यक्ति ने सपने में साफ पानी देखा है तो यह सपना एक शुभ सपना माना जाता है। इसका अर्थ है नौकरी पेशा लोगों को उन्नति मिलने वाली है। घर में किसी तरह के धार्मिक या मांगलिक कार्य का आयोजन होने वाला है। Swapna Shastra:समुद्र का पानी होता अशुभ संकेत Swapna Shastra:अगर आप सपने में समुद्र का पानी देखते हैं तो ये अशुभ माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार इस तरह के सपने देखने के बाद मनुष्य को वाहन सावधानी पूर्वक चलाना चाहिए और ऊंचाई वाली जगहों पर सावधानी से जाना चाहिए। ये सपना भविष्य में सावधानी बरतने की तरफ इशारा करता है। Swapna Shastra: सपने में दिखाई दिया मंदिर या फिर भंडारा? जानें आपके लिए शुभ होगा या अशुभ संकेत Swapna Shastra:सपने में गुलाब का फूल देखना Sapne kyu ate hai:स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आप अपने सपने में गुलाब का फूल देखते हैं तो ये आपके लिए शुभ माना जाता है। ये आपके जीवन में आने वाली सकारात्मकता का संकेत है। ऐसे सपनों का ये अर्थ भी होता है कि जल्द ही आपके मन की कोई इच्छा पूरी होने वाली है। सपने में डूब जाना Swapna Shastra:स्वप्न शास्त्र के अनुसार अगर आप ऐसा सपना देखते हैं जिसमें आप गहरे पानी में डूब रहे हैं। ये इस बात का संकेत है कि आप किसी डर या दुख में हैं। सपने में अपने आपको उस व्यक्ति को उन घटनाओं के बारे में सोचना बंद करना चाहिए जो गुजर चुकी हैं। आपको किसी भी तरह की चिंता नहीं करनी चाहिए और अपने मन को शांत करने का प्रयास करना चाहिए। खुद को दरिद्र रूप में देखना आप सपने में खुद को गरीब दरिद्र देखते हैं तो आपके लिए ये स्वप्न अच्छा है। आपको इससे परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे स्वप्न का मतलब आपके धन में वृद्धि होना है। ये अटके हुए धन के वापस मिलने का भी संकेत है। सपने में तोता देखना अगर आपको सपने में तोता नजर आता है, तो इसका मतलब है कि आपको कोई अच्छा समाचार मिलने वाला है। आपके जीवन में सुख की शुरूआत होने वाली है। तोता हमेशा से सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। सपने में पहाड़ पर चढ़ना सपनों में पहाड़ चढ़ने का मतलब आप जीवन में उन्नति करने वाले हैं। इस तरह के सपने हमेशा सफलता के शिखर पर जाने की ओर इशारा करते हैं। सपने में फलों का पेड़ दिखाई देना अगर आप सपनों में फलों से लदा हुआ वृक्ष देखते हैं तो ये आपके जीवन में आने वाली ढेर सारी खुशियों की ओर इशारा करता है। फल-फूल खुशी का प्रतीक माने गए हैं। फूलों से लदा पेड़ खुशियों के आगमन का ही संकेत माना जाता है। मृत्यु देखना अगर आप सपनों में अपने किसी भी परिजन की मृत्यु होते हुए देखते हैं तो समझिए उनकी आयु में वृद्धि हो गई है। हिन्दू शास्त्रों में इस तरह के सपनों को गलत नहीं माना जाता। शिव पार्वती को देखना भगवान शिव-पार्वती जिन्हें सपनों में एक साथ दिखाई देते हैं। उनके लिए शुभ माना जाता है। खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए जिनका विवाह नहीं हो रहा है। सपने में शिव-पार्वती के दर्शन होना जल्दी विवाह होने का संकेत भवन का निर्माण देखना Good dreams सपनों में भवन का निर्माण दिखाई देने का मलतब है आपके जीवन में उन्नति होने वाली है। आपको धन की प्राप्ति होने वाली है। झाड़ू का दिखना हिंदू शास्त्रों के अनुसार, सपने में झाड़ू का दिखाई देने शुभ संकेत होता है। झाड़ू को लक्षमी का प्रतीक माना जाता है। इसका सीधा संकेत है आपको धन लाभ होने वाला है। Swapna Shastra:सबसे दुर्लभ सपना क्या है Swapna Shastra:अधिकांश विशेषज्ञों का मानना ​​है कि स्पष्ट सपने सबसे दुर्लभ प्रकार के सपने हैं। सपने देखते समय आप सचेत रहते हैं कि आप सपना देख रहे हैं लेकिन आप सपने देखते रहते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, 55 प्रतिशत लोग अपने जीवन में कम से कम एक बार इस प्रकार के सपनों का अनुभव करते हैं। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह

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Parivartini Ekadashi 2024: कब है परिवर्तिनी एकादशी ? जानें तिथि, मुहूर्त और महत्व

Parivartini Ekadashi 2024 परिवर्तिनी एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी शैया बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं।  Parivartini Ekadashi:धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष में भगवान विष्णु 4 मास के लिए योग निद्रा में गए हुए हैं। वहीं, भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन करवट लेंगे। इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी के अलावा पदमा एकादशी, जलझूलनी एकादशी जैसे नामों से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करने के साथ व्रत रखने से हर तरह के पापों से मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।  Parivartini Ekadashi परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा अर्चना करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं कि परिवर्तनी एकादशी कब मनाई जाएगी।  Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी 2024 तिथि  भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि आरंभ: 13, सितंबर, शुक्रवार, रात्रि 10:30 बजे भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि समाप्त: 14 सितंबर, शनिवार, रात्रि 08:41 पर उदया तिथि के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी 14 सितंबर 2024 शनिवार को है।जैसा कि सब जानते हैं कि चातुर्मास में विष्णु जी योग निद्रा में रहते हैं और उनका शयनकाल रहता है। ऐसे में  Parivartini Ekadashi पर विष्णु जी करवट बदलते हैं। इस व्रत के पुण्य-प्रताप से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है, साथ ही जीवन में खुशियों का आगमन होता है।  Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी 2024 मुहूर्त   Parivartini Ekadashi पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 14 सितंबर 2024 को रात 08 बजकर 41 मिनट तक रहेगी। एकादशी के दिन श्री हरि विष्णु की पूजा का मुहूर्त प्रातः 07:38  से प्रातः 09:11 तक रहेगा। इसके बाद राहुकाल शुरू हो जाएगा। Ekadashi 2025: जनवरी से दिसंबर तक की सही डेट और मुहूर्त (Ekadashi in 2025 in Hindi)  Parivartini Ekadashi :परिवर्तिनी एकादशी व्रत पारण समय   Parivartini Ekadashi:परिवर्तिनी एकादशी का व्रत पारण समय:  15 सितंबर, रविवार, प्रातः 06:06 से प्रातः 08:34 मिनट के बीच Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी व्रत की विधि  Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी का महत्व Parivartini Ekadashi 2024:परिवर्तिनी एकादशी का व्रत कैसे करें? Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Ganesh Stuti(गणेश स्तुति)

Ganesh Stuti गणेश स्तुति: किसी भी कार्य की शुरुआत से पहले गणेश श्लोक का जाप करने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और आपका जीवन स्वस्थ, समृद्ध और समृद्ध बनता है। उन्हें गणपति के नाम से भी जाना जाता है। गण का अर्थ है समूह। ब्रह्मांड परमाणुओं और विभिन्न ऊर्जाओं का एक समूह है। यदि इन विविध समूहों को नियंत्रित करने वाला कोई सर्वोच्च कानून नहीं होता तो यह ब्रह्मांड अराजकता में होता। इन सभी परमाणुओं और ऊर्जाओं के समूहों के स्वामी गणेश हैं। वे सर्वोच्च चेतना हैं जो सभी में व्याप्त हैं और इस ब्रह्मांड में व्यवस्था लाते हैं। भगवान गणेश का सिर आत्मा का प्रतीक है, जिसे मानवता की अंतिम वास्तविकता माना जाता है और उनका मानव शरीर माया का प्रतीक है, जो सांसारिक अस्तित्व का जाल है। शिव पुराण के अनुसार, शुभ और लाभ भगवान गणेश के दो पुत्र हैं। शुभ और लाभ क्रमशः शुभता और लाभ के अवतार हैं। शुभ देवी ऋद्धि के पुत्र थे और लाभ देवी सिद्धि के पुत्र थे। श्री गणेश की स्तुति की महिमा “नारदपुराण” में पाई जाती है। गणेश स्तुति का नियमित पाठ करने वाले साधकों को विद्या, धन प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जब जीवन में चारों ओर विपत्ति न हो, संकट न आए, गौरीपुत्र गजानन की पूजा से तुरंत प्रभाव मिलता है। भगवान गणेश की सात्विक साधनाएं बहुत सरल और प्रभावी हैं। इसमें अधिक विधान की आवश्यकता नहीं होती। मन में भावना रखने मात्र से ही गणेश अपने भक्त को हर संकट से उबार लेते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग दिखाते हैं। Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी : भगवान गणेश के मूषक की रोचक कथा Ganesh Stuti:गणेश स्तुति के लाभ:भगवान गणेश ज्ञान, सफलता और सिद्धि के देवता हैं। गणपति को आमंत्रित करने के लिए कई मंत्रों का जाप किया जा सकता है। इन मंत्रों को सिद्धि मंत्र भी कहा जाता है। ये गणेश मंत्र ऊर्जा और भगवान गणेश की शक्ति से भरपूर हैं। सच्ची श्रद्धा से गणेश मंत्र का जाप करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। यदि किसी व्यक्ति पर भारी कर्ज है, तो उस पर आर्थिक संकट आएंगे – दिन दुखद है। फिर गणेश जी की पूजा करने के बाद नियमित रूप से गणेश कुबेर मंत्र का जाप करने से व्यक्ति का कर्ज उतरना शुरू हो जाता है और धन के नए स्रोत प्राप्त होते हैं जिससे व्यक्ति का भाग्य चमकने लगता है।किसको करना चाहिए गणेश स्तुति का पाठ:जो लोग भारी कर्ज में डूबे हुए हैं और दिन-ब-दिन कर्जदार होते जा रहे हैं, उन्हें नियमित रूप से इस गणेश स्तुति का पाठ करना चाहिए। Ganesh Stuti:गणेश स्तुति: गणपति बप्पा मोरया! गणेश स्तुति Ganesh Stuti हिंदू धर्म में भगवान गणेश की स्तुति करने के लिए गाए जाने वाले मंत्र और भजन होते हैं। गणेश जी को विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है और माना जाता है कि वे किसी भी नए काम की शुरुआत से पहले पूजित होने पर सफलता प्रदान करते हैं। Ganesh Stuti गणेश स्तुति के कुछ लोकप्रिय मंत्र और भजन: Ganesh Stuti गणेश स्तुति के लाभ कब करें गणेश स्तुति? आप किसी भी समय गणेश स्तुति कर सकते हैं। लेकिन विशेष रूप से सुबह के समय या पूजा के समय गणेश स्तुति करना अधिक फलदायी होता है। गणेश स्तुति कैसे करें? नियमित रूप से: नियमित रूप से गणेश स्तुति करने से अधिक लाभ मिलता है। मन एकाग्र करके: गणेश जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर मन एकाग्र करके स्तुति करें। भावना के साथ: स्तुति करते समय मन में भक्ति भाव रखें। Ganesh Stuti(गणेश स्तुति) गणेश स्तुति/Ganesh Stuti श्लोक ॐ गजाननं भूंतागणाधि सेवितम्, कपित्थजम्बू फलचारु भक्षणम्। उमासुतम् शोक विनाश कारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पादपंकजम्॥ स्तुति गाइये गनपति जगबंदन। संकर-सुवन भवानी नंदन ॥ 1 ॥ गाइये गनपति जगबंदन। सिद्धि-सदन, गज बदन, बिनायक। कृपा-सिंधु, सुंदर सब-लायक ॥ 2 ॥ गाइये गनपति जगबंदन। मोदक-प्रिय, मुद-मंगल-दाता। बिद्या-बारिधि, बुद्धि बिधाता ॥ 3 ॥ गाइये गनपति जगबंदन। मांगत तुलसिदास कर जोरे। बसहिं रामसिय मानस मोरे ॥ 4 ॥ गाइये गनपति जगबंदन।

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