Ramdev Chalisa:रामदेव चालीसा

Ramdev Chalisa:रामदेव चालीसा: एक संक्षिप्त परिचय रामदेव चालीसा हिंदू धर्म के एक लोकप्रिय भजन है, जो रामदेव पीर के प्रति समर्पित है। Ramdev Chalisa रामदेव पीर को राजस्थान के एक लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। यह चालीसा उनके जीवन, चमत्कारों और शिक्षाओं का वर्णन करती है। Ramdev Chalisa:रामदेव चालीसा का महत्व Ramdev Chalisa:रामदेव चालीसा का पाठ कैसे करें Ramdev Chalisa:रामदेव चालीसा ॥ दोहा ॥श्री गुरु पद नमन करि,गिरा गनेश मनाय ।कथूं रामदेव विमल यश,सुने पाप विनशाय ॥द्वार केश से आय कर,लिया मनुज अवतार ।अजमल गेह बधावणा,जग में जय जयकार ॥ ॥ चौपाई ॥जय जय रामदेव सुर राया।अजमल पुत्र अनोखी माया॥विष्णु रूप सुर नर के स्वामी।परम प्रतापी अन्तर्यामी॥ ले अवतार अवनि पर आये।तंवर वंश अवतंश कहाये॥संत जनों के कारज सारे।दानव दैत्य दुष्ट संहारे॥ परच्या प्रथम पिता को दीन्हा।दूध परीण्डा मांही कीन्हा॥कुमकुम पद पोली दर्शाये।ज्योंही प्रभु पलने प्रगटाये॥ परचा दूजा जननी पाया।दूध उफणता चरा उठाया॥परचा तीजा पुरजन पाया।चिथड़ों का घोड़ा ही साया॥ परच्या चौथा भैरव मारा।भक्त जनों का कष्ट निवारा॥पंचम परच्या रतना पाया।पुंगल जा प्रभु फंद छुड़ाया॥ परच्या छठा विजयसिंह पाया।जला नगर शरणागत आया॥परच्या सप्तम् सुगना पाया।मुवा पुत्र हंसता भग आया॥ परच्या अष्टम् बौहित पाया।जा परदेश द्रव्य बहु लाया॥भंवर डूबती नाव उबारी।प्रगत टेर पहुँचे अवतारी॥ नवमां परच्या वीरम पाया।बनियां आ जब हाल सुनाया॥दसवां परच्या पा बिनजारा।मिश्री बनी नमक सब खारा॥ परच्या ग्यारह किरपा थारी।नमक हुआ मिश्री फिर सारी॥परच्या द्वादश ठोकर मारी।निकलंग नाड़ी सिरजी प्यारी॥ परच्या तेरहवां पीर परी पधारया।ल्याय कटोरा कारज सारा॥चौदहवां परच्या जाभो पाया।निजसर जल खारा करवाया॥ परच्या पन्द्रह फिर बतलाया।राम सरोवर प्रभु खुदवाया॥परच्या सोलह हरबू पाया।दर्श पाय अतिशय हरषाया॥ परच्या सत्रह हर जी पाया।दूध थणा बकरया के आया॥सुखी नाडी पानी कीन्हों।आत्म ज्ञान हरजी ने दीन्हों॥ परच्या अठारहवां हाकिम पाया।सूते को धरती लुढ़काया॥परच्या उन्नीसवां दल जी पाया।पुत्र पाय मन में हरषाया॥ परच्या बीसवां पाया सेठाणी।आये प्रभु सुन गदगद वाणी॥तुरंत सेठ सरजीवण कीन्हा।उक्त उजागर अभय वर दीन्हा॥ परच्या इक्कीसवां चोर जो पाया।हो अन्धा करनी फल पाया॥परच्या बाईसवां मिर्जो चीहां।सातो तवा बेध प्रभु दीन्हां॥ परच्या तेईसवां बादशाह पाया।फेर भक्त को नहीं सताया॥परच्या चैबीसवां बख्शी पाया।मुवा पुत्र पल में उठ धाया॥ जब-जब जिसने सुमरण कीन्हां।तब-तब आ तुम दर्शन दीन्हां॥भक्त टेर सुन आतुर धाते।चढ़ लीले पर जल्दी आते॥ जो जन प्रभु की लीला गावें।मनवांछित कारज फल पावें॥यह चालीसा सुने सुनावे।ताके कष्ट सकल कट जावे॥ जय जय जय प्रभु लीला धारी।तेरी महिमा अपरम्पारी॥मैं मूरख क्या गुण तब गाऊँ।कहाँ बुद्धि शारद सी लाऊँ॥ नहीं बुद्धि बल घट लव लेशा।मती अनुसार रची चालीसा॥दास सभी शरण में तेरी।रखियों प्रभु लज्जा मेरी॥

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Karwa Chauth 2024: करवा चौथ की पूजा थाली में जरूर करें ये चीजें शामिल, वरना पूजा रह जाएगी अधूरी

करवा चौथ 2024 का व्रत 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जो भारतीय संस्कृति और परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। इस व्रत में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करते हुए दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। करवा चौथ की पूजा विधि में पूजा थाली का विशेष महत्व होता है। अगर पूजा की थाली में सही सामग्री शामिल नहीं होती है, तो पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं कि करवा चौथ की पूजा थाली में कौन-कौन सी चीजें जरूर होनी चाहिए ताकि पूजा का फल प्राप्त हो सके। करवा चौथ की पूजा थाली: महत्व और सामग्री करवा चौथ की पूजा थाली पूरी तरह से शुभ और पवित्र होती है, और इसमें सभी जरूरी चीजों का होना आवश्यक होता है। यह न केवल एक धार्मिक कृत्य है बल्कि पति-पत्नी के बीच के प्रेम और आपसी समर्पण का प्रतीक भी है। इस दिन महिलाएं अपनी पूजा की थाली सजाती हैं, जिसमें कुछ विशेष सामग्रियों का होना जरूरी होता है। करवा चौथ की पूजा थाली में आवश्यक वस्तुएं 1. दीया (दीपक) पूजा थाली में दीया एक महत्वपूर्ण वस्तु है, क्योंकि दीये को प्रकाश और जीवन का प्रतीक माना जाता है। करवा चौथ की रात जब महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, तब दीये का प्रकाश उन्हें शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करता है। दीये का इस्तेमाल व्रत के दौरान अंधकार को दूर करने और सकारात्मकता लाने के लिए किया जाता है। 2. करवा (मिट्टी का बर्तन) करवा चौथ का नाम ही “करवा” से आया है, जो एक मिट्टी का बर्तन होता है। करवा को पानी से भरकर चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह करवा पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसे सुहागिन स्त्रियां पूजा के दौरान भगवान को अर्पित करती हैं और इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। Karwa Chauth:का व्रत इन कार्यों से हो सकता है खंडित, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें 3. चावल और गेहूं के दाने पूजा थाली में चावल और गेहूं के दाने रखना अनिवार्य होता है। चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और इसका प्रयोग हर शुभ कार्य में किया जाता है। गेहूं के दाने समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक होते हैं, जो जीवन में उन्नति और प्रगति का संकेत देते हैं। 4. सिंदूर और कुमकुम सिंदूर और कुमकुम का प्रयोग हिन्दू विवाहिता स्त्रियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। करवा चौथ की पूजा में इसे जरूर शामिल किया जाता है। यह स्त्री के सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का प्रतीक होता है। पूजा थाली में सिंदूर और कुमकुम से सुहागिन स्त्रियां अपनी मांग भरती हैं और अपने पति की सुरक्षा की कामना करती हैं। 5. जल से भरा हुआ कलश जल से भरा हुआ कलश भी पूजा की थाली में रखना आवश्यक होता है। इसे जीवन और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। जब महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, तो जल का प्रयोग किया जाता है। इसे घर की समृद्धि और खुशहाली के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। 6. मिठाई (मिठास का प्रतीक) मिठाई का प्रयोग हर पूजा में किया जाता है, और करवा चौथ की पूजा में भी इसका विशेष महत्व है। इसे पूजा के बाद चंद्रमा और भगवान को अर्पित किया जाता है, और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। मिठाई रिश्तों में मिठास और खुशहाली का प्रतीक मानी जाती है। 7. धूप और अगरबत्ती धूप और अगरबत्ती का प्रयोग पूजा के दौरान वातावरण को शुद्ध और पवित्र करने के लिए किया जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। करवा चौथ की पूजा में इसे जरूर शामिल करना चाहिए, ताकि पूजा विधि पूर्ण हो सके। 8. फूल (प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक) फूलों का इस्तेमाल हर पूजा में होता है, और करवा चौथ की पूजा थाली में भी ताजे फूलों का विशेष महत्व होता है। फूल भगवान को अर्पित किए जाते हैं और इसे सौंदर्य, पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। लाल और पीले रंग के फूल विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। 9. करवा माता की मूर्ति या चित्र करवा चौथ की पूजा में करवा माता की पूजा की जाती है, इसलिए पूजा थाली में करवा माता की मूर्ति या चित्र जरूर होना चाहिए। करवा माता की पूजा से महिलाओं को संतान सुख, समृद्धि और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 10. सुपारी, पान के पत्ते और द्रव्य (रूपया/सिक्का) पान के पत्ते, सुपारी और सिक्का भी करवा चौथ की पूजा थाली में रखा जाता है। पान और सुपारी का प्रयोग हर शुभ कार्य में किया जाता है और यह देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। यह पूजा को पूर्ण और सफल बनाने के लिए आवश्यक होता है। करवा चौथ की पूजा थाली सजाते समय ध्यान रखने योग्य बातें निष्कर्ष करवा चौथ की पूजा थाली में हर सामग्री का विशेष महत्व है। यह पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते को भी और मजबूत बनाती है। पूजा थाली में अगर सभी सामग्रियां ठीक से रखी जाती हैं और पूजा सही तरीके से की जाती है, तो यह व्रत अवश्य फलदायी होता है।

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Karwa Chauth:का व्रत इन कार्यों से हो सकता है खंडित, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें

Karwa Chauth:करवा चौथ का व्रत भारतीय महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह व्रत खासकर उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए उपवास करती हैं। इस व्रत में संपूर्ण निष्ठा और श्रद्धा का होना जरूरी माना जाता है। व्रत का पालन करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह खंडित न हो। आइए जानते हैं कि Karwa Chauth करवा चौथ व्रत में कौन-कौन से कार्य व्रत को खंडित कर सकते हैं और इस दिन क्या करें और क्या न करें। Karwa Chauth:करवा चौथ व्रत को खंडित करने वाले कार्य Karwa Chauth:करवा चौथ के दिन क्या करें Karwa Chauth:करवा चौथ के दिन क्या न करें निष्कर्ष Karwa Chauth:करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें पतिव्रता स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और समृद्धि के लिए उपवास करती हैं। इस व्रत का पालन करते समय सही विधियों और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। व्रत के दौरान नकारात्मकता से दूर रहना, पूजा विधि को पूरी निष्ठा से करना, और चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलना महत्वपूर्ण है।

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Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग) 14/10/2024

Aaj Ka Panchang:🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞⛅दिनांक – 14 अक्टूबर 2024⛅दिन – सोमवार⛅विक्रम संवत् – 2081⛅अयन – दक्षिणायन⛅ऋतु – शरद⛅मास – आश्विन⛅पक्ष – शुक्ल⛅तिथि – एकादशी प्रातः 06:41 तक तत्पश्चात द्वादशी रात्रि 03:42 अक्टूबर 15 तक⛅नक्षत्र – शतभिषा रात्रि 12:43 अक्टूबर 15 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद⛅योग – गण्ड शाम 06:01 तक, तत्पश्चात वृद्धि Aaj Ka Panchang ⛅राहु काल – प्रातः 08:03 से प्रातः 09:31 तक⛅सूर्योदय – 06:36⛅सूर्यास्त – 06:16⛅दिशा शूल – पूर्व दिशा में⛅ब्राह्ममुहूर्त – प्रातः 04:57 से 05:47 तक⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:02 से दोपहर 12:49 तक⛅निशिता मुहूर्त- रात्रि 12:01 अक्टूबर 15 से रात्रि 12:50 अक्टूबर 15 तक⛅ व्रत पर्व विवरण – पापांकुशा एकादशी, पद्मनाभ द्वादशी⛅विशेष – एकादशी को सिम्बी (सेम) व द्वादशी को पूतिका (पोई) खाने से पुत्र का नाश होता है । (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-34) Aaj Ka Panchang 🔹पापांकुशा एकादशी – 14 अक्टूबर 2024🔹 Aaj Ka Panchang 🔹एकादशी में क्या करें, क्या न करें ?🔹 🌹1. एकादशी को लकड़ी का दातुन तथा पेस्ट का उपयोग न करें । नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और उँगली से कंठ शुद्ध कर लें । वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी वर्जित है, अत: स्वयं गिरे हुए पत्ते का सेवन करें । 🌹2. स्नानादि कर के गीता पाठ करें, श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करें । 🌹हर एकादशी को श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है ।राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ।। Aaj Ka Panchang एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से श्री Aaj Ka Panchang विष्णुसहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l 🌹3. `ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश अक्षर मंत्र अथवा गुरुमंत्र का जप करना चाहिए । 🌹4. चोर, पाखण्डी और दुराचारी मनुष्य से बात नहीं करना चाहिए, यथा संभव मौन रहें । 🌹5. एकादशी के दिन भूल कर भी चावल नहीं खाना चाहिए न ही किसी को खिलाना चाहिए । इस दिन फलाहार अथवा घर में निकाला हुआ फल का रस अथवा दूध या जल पर रहना लाभदायक है । 🌹6. व्रत के (दशमी, एकादशी और द्वादशी) – इन तीन दिनों में काँसे के बर्तन, मांस, प्याज, लहसुन, मसूर, उड़द, चने, कोदो (एक प्रकार का धान), शाक, शहद, तेल और अत्यम्बुपान (अधिक जल का सेवन) – इनका सेवन न करें । 🌹7. फलाहारी को गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग इत्यादि सेवन नहीं करना चाहिए । आम, अंगूर, केला, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करना चाहिए । 🌹8. जुआ, निद्रा, पान, परायी निन्दा, चुगली, चोरी, हिंसा, मैथुन, क्रोध तथा झूठ, कपटादि अन्य कुकर्मों से नितान्त दूर रहना चाहिए । 🌹9. भूलवश किसी निन्दक से बात हो जाय तो इस दोष को दूर करने के लिए भगवान सूर्य के दर्शन तथा धूप-दीप से श्रीहरि की पूजा कर क्षमा माँग लेनी चाहिए । 🌹10. एकादशी के दिन घर में झाडू नहीं लगायें । इससे चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है । 🌹11. इस दिन बाल नहीं कटायें । 🌹12. इस दिन यथाशक्ति अन्नदान करें किन्तु स्वयं किसीका दिया हुआ अन्न कदापि ग्रहण न करें । 🌹13. एकादशी की रात में भगवान विष्णु के आगे जागरण करना चाहिए (जागरण रात्र 1 बजे तक) । 🌹14. जो श्रीहरि के समीप जागरण करते समय रात में दीपक जलाता है, उसका पुण्य सौ कल्पों में भी नष्ट नहीं होता है । 🔹 इस विधि से व्रत करनेवाला उत्तम फल को प्राप्त करता है । 🌞🚩🚩 ” ll जय श्री राम ll ” 🚩🚩🌞

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Batuk Bhairav ​​Chalisa:बटुक भैरव चालीसा

Bhairav ​​Chalisa:बटुक भैरव चालीसा: भैरव देवता का स्तुतिगान Bhairav ​​Chalisa:बटुक भैरव चालीसा हिंदू धर्म में एक प्रसिद्ध स्तोत्र है जो भैरव देवता के बाल रूप, बटुक भैरव की स्तुति करता है। भैरव देवता शिव के क्रोध रूप माने जाते हैं Bhairav ​​Chalisa और उन्हें संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। Bhairav ​​Chalisa बटुक भैरव को विशेष रूप से युवाओं और छात्रों द्वारा पूजा जाता है। Bhairav ​​Chalisa:बटुक भैरव चालीसा का महत्व Bhairav ​​Chalisa:बटुक भैरव चालीसा कैसे पढ़ें? बटुक भैरव चालीसा के कुछ लाभ अन्य जानकारी: बटुक भैरव चालीसा (Batuk Bhairav ​​Chalisa) ॥ दोहा ॥विश्वनाथ को सुमिर मन,धर गणेश का ध्यान।भैरव चालीसा रचूं,कृपा करहु भगवान॥ बटुकनाथ भैरव भजू,श्री काली के लाल।छीतरमल पर कर कृपा,काशी के कुतवाल॥ ॥ चौपाई ॥जय जय श्रीकाली के लाला।रहो दास पर सदा दयाला॥भैरव भीषण भीम कपाली।क्रोधवन्त लोचन में लाली॥ कर त्रिशूल है कठिन कराला।गल में प्रभु मुण्डन की माला॥कृष्ण रूप तन वर्ण विशाला।पीकर मद रहता मतवाला॥ रुद्र बटुक भक्तन के संगी।प्रेत नाथ भूतेश भुजंगी॥त्रैलतेश है नाम तुम्हारा।चक्र तुण्ड अमरेश पियारा॥ शेखरचंद्र कपाल बिराजे।स्वान सवारी पै प्रभु गाजे॥शिव नकुलेश चण्ड हो स्वामी।बैजनाथ प्रभु नमो नमामी॥ अश्वनाथ क्रोधेश बखाने।भैरों काल जगत ने जाने॥गायत्री कहैं निमिष दिगम्बर।जगन्नाथ उन्नत आडम्बर॥ क्षेत्रपाल दसपाण कहाये।मंजुल उमानन्द कहलाये॥चक्रनाथ भक्तन हितकारी।कहैं त्र्यम्बक सब नर नारी॥ संहारक सुनन्द तव नामा।करहु भक्त के पूरण कामा॥नाथ पिशाचन के हो प्यारे।संकट मेटहु सकल हमारे॥ कृत्यायु सुन्दर आनन्दा।भक्त जनन के काटहु फन्दा॥कारण लम्ब आप भय भंजन।नमोनाथ जय जनमन रंजन॥ हो तुम देव त्रिलोचन नाथा।भक्त चरण में नावत माथा॥त्वं अशतांग रुद्र के लाला।महाकाल कालों के काला॥ ताप विमोचन अरि दल नासा।भाल चन्द्रमा करहि प्रकाशा॥श्वेत काल अरु लाल शरीरा।मस्तक मुकुट शीश पर चीरा॥ काली के लाला बलधारी।कहाँ तक शोभा कहूँ तुम्हारी॥शंकर के अवतार कृपाला।रहो चकाचक पी मद प्याला॥ शंकर के अवतार कृपाला।बटुक नाथ चेटक दिखलाओ॥रवि के दिन जन भोग लगावें।धूप दीप नैवेद्य चढ़ावें॥ दरशन करके भक्त सिहावें।दारुड़ा की धार पिलावें॥मठ में सुन्दर लटकत झावा।सिद्ध कार्य कर भैरों बाबा॥ नाथ आपका यश नहीं थोड़ा।करमें सुभग सुशोभित कोड़ा॥कटि घूँघरा सुरीले बाजत।कंचनमय सिंहासन राजत॥ नर नारी सब तुमको ध्यावहिं।मनवांछित इच्छाफल पावहिं॥भोपा हैं आपके पुजारी।करें आरती सेवा भारी॥ भैरव भात आपका गाऊँ।बार बार पद शीश नवाऊँ॥आपहि वारे छीजन धाये।ऐलादी ने रूदन मचाये॥ बहन त्यागि भाई कहाँ जावे।तो बिन को मोहि भात पिन्हावे॥रोये बटुक नाथ करुणा कर।गये हिवारे मैं तुम जाकर॥ दुखित भई ऐलादी बाला।तब हर का सिंहासन हाला॥समय व्याह का जिस दिन आया।प्रभु ने तुमको तुरत पठाया॥ विष्णु कही मत विलम्ब लगाओ।तीन दिवस को भैरव जाओ॥दल पठान संग लेकर धाया।ऐलादी को भात पिन्हाया॥ पूरन आस बहन की कीनी।सुर्ख चुन्दरी सिर धर दीनी॥भात भेरा लौटे गुण ग्रामी।नमो नमामी अन्तर्यामी॥ ॥ दोहा ॥जय जय जय भैरव बटुक,स्वामी संकट टार।कृपा दास पर कीजिए,शंकर के अवतार॥ जो यह चालीसा पढे,प्रेम सहित सत बार।उस घर सर्वानन्द हों,वैभव बढ़ें अपार॥

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Shri Balaji Chalisa:बालाजी चालीसा

Balaji Chalisa:बालाजी चालीसा: भक्तों का प्रिय स्तोत्र Balaji Chalisa:बालाजी चालीसा हिंदू धर्म में एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय स्तोत्र है Balaji Chalisa जो भगवान हनुमान के एक विशेष अवतार, बालाजी को समर्पित है। बालाजी को मेहंदीपुर बालाजी के नाम से भी जाना जाता है और उन्हें संकटमोचन के रूप में पूजा जाता है। Balaji Chalisa:बालाजी चालीसा का महत्व Balaji Chalisa:बालाजी चालीसा कैसे पढ़ें? Balaji Chalisa:बालाजी चालीसा के कुछ लाभ अन्य जानकारी: बालाजी चालीसा (Shri Balaji Chalisa) ॥ दोहा ॥श्री गुरु चरण चितलाय,के धरें ध्यान हनुमान।बालाजी चालीसा लिखे,दास स्नेही कल्याण॥ विश्व विदित वर दानी,संकट हरण हनुमान।मैंहदीपुर में प्रगट भये,बालाजी भगवान॥ ॥ चौपाई ॥जय हनुमान बालाजी देवा।प्रगट भये यहां तीनों देवा॥प्रेतराज भैरव बलवाना।कोतवाल कप्तानी हनुमाना॥ मैंहदीपुर अवतार लिया है।भक्तों का उध्दार किया है॥बालरूप प्रगटे हैं यहां पर।संकट वाले आते जहाँ पर॥ डाकनि शाकनि अरु जिन्दनीं।मशान चुड़ैल भूत भूतनीं॥जाके भय ते सब भाग जाते।स्याने भोपे यहाँ घबराते॥ चौकी बन्धन सब कट जाते।दूत मिले आनन्द मनाते॥सच्चा है दरबार तिहारा।शरण पड़े सुख पावे भारा॥ रूप तेज बल अतुलित धामा।सन्मुख जिनके सिय रामा॥कनक मुकुट मणि तेज प्रकाशा।सबकी होवत पूर्ण आशा॥ महन्त गणेशपुरी गुणीले।भये सुसेवक राम रंगीले॥अद्भुत कला दिखाई कैसी।कलयुग ज्योति जलाई जैसी॥ ऊँची ध्वजा पताका नभ में।स्वर्ण कलश हैं उन्नत जग में॥धर्म सत्य का डंका बाजे।सियाराम जय शंकर राजे॥ आन फिराया मुगदर घोटा।भूत जिन्द पर पड़ते सोटा॥राम लक्ष्मन सिय ह्रदय कल्याणा।बाल रूप प्रगटे हनुमाना॥ जय हनुमन्त हठीले देवा।पुरी परिवार करत हैं सेवा॥लड्डू चूरमा मिश्री मेवा।अर्जी दरखास्त लगाऊ देवा॥ दया करे सब विधि बालाजी।संकट हरण प्रगटे बालाजी॥जय बाबा की जन जन ऊचारे।कोटिक जन तेरे आये द्वारे॥ बाल समय रवि भक्षहि लीन्हा।तिमिर मय जग कीन्हो तीन्हा॥देवन विनती की अति भारी।छाँड़ दियो रवि कष्ट निहारी॥ लांघि उदधि सिया सुधि लाये।लक्ष्मन हित संजीवन लाये॥रामानुज प्राण दिवाकर।शंकर सुवन माँ अंजनी चाकर॥ केशरी नन्दन दुख भव भंजन।रामानन्द सदा सुख सन्दन॥सिया राम के प्राण पियारे।जब बाबा की भक्त ऊचारे॥ संकट दुख भंजन भगवाना।दया करहु हे कृपा निधाना॥सुमर बाल रूप कल्याणा।करे मनोरथ पूर्ण कामा॥ अष्ट सिद्धि नव निधि दातारी।भक्त जन आवे बहु भारी॥मेवा अरु मिष्ठान प्रवीना।भैंट चढ़ावें धनि अरु दीना॥ नृत्य करे नित न्यारे न्यारे।रिद्धि सिद्धियां जाके द्वारे॥अर्जी का आदेश मिलते ही।भैरव भूत पकड़ते तबही॥ कोतवाल कप्तान कृपाणी।प्रेतराज संकट कल्याणी॥चौकी बन्धन कटते भाई।जो जन करते हैं सेवकाई॥ रामदास बाल भगवन्ता।मैंहदीपुर प्रगटे हनुमन्ता॥जो जन बालाजी में आते।जन्म जन्म के पाप नशाते॥ जल पावन लेकर घर जाते।निर्मल हो आनन्द मनाते॥क्रूर कठिन संकट भग जावे।सत्य धर्म पथ राह दिखावे॥ जो सत पाठ करे चालीसा।तापर प्रसन्न होय बागीसा॥कल्याण स्नेही, स्नेह से गावे।सुख समृद्धि रिद्धि सिद्धि पावे॥ ॥ दोहा ॥मन्द बुद्धि मम जानके,क्षमा करो गुणखान।संकट मोचन क्षमहु मम,दास स्नेही कल्याण॥

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Shri Pitar Chalisa:श्री पितर चालीसा 

Pitar Chalisa:श्री पितर चालीसा: आपके पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का भाव Pitar Chalisa:श्री पितर चालीसा हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है जो हमारे Pitar Chalisa पूर्वजों या पितरों को समर्पित है। यह चालीसा पितृ पक्ष के दौरान विशेष रूप से गाया जाता है, जो हिंदू कैलेंडर के अनुसार एक महत्वपूर्ण अवधि होती है जब हम अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। Pitar Chalisa:पितर चालीसा का महत्व Pitar Chalisa:पितर चालीसा कैसे पढ़ें? Pitar Chalisa:पितर चालीसा के कुछ लाभ अन्य जानकारी श्री पितर चालीसा एक भक्ति गीत है जो श्री पितर पर आधारित है। कई लोग श्री पितर चालीसा का पाठ पितरों के श्राद्ध के दौरान करते हैं। पितर को पितृ, जो कि परिवार के मृतक पूर्वज होते हैं, के रूप में भी जाना जाता है। ॥ दोहा ॥हे पितरेश्वर आपको,दे दियो आशीर्वाद।चरणाशीश नवा दियो,रखदो सिर पर हाथ॥ सबसे पहले गणपत,पाछे घर का देव मनावा जी।हे पितरेश्वर दया राखियो,करियो मन की चाया जी॥ ॥ चौपाई ॥पितरेश्वर करो मार्ग उजागर।चरण रज की मुक्ति सागर॥परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा।मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा॥ मातृ-पितृ देव मनजो भावे।सोई अमित जीवन फल पावे॥जै-जै-जै पित्तर जी साईं।पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं॥ चारों ओर प्रताप तुम्हारा।संकट में तेरा ही सहारा॥नारायण आधार सृष्टि का।पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का॥ प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते।भाग्य द्वार आप ही खुलवाते॥झुंझुनू में दरबार है साजे।सब देवों संग आप विराजे॥ प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा।कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा॥पित्तर महिमा सबसे न्यारी।जिसका गुणगावे नर नारी॥ तीन मण्ड में आप बिराजे।बसु रुद्र आदित्य में साजे॥नाथ सकल संपदा तुम्हारी।मैं सेवक समेत सुत नारी॥ छप्पन भोग नहीं हैं भाते।शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते॥तुम्हारे भजन परम हितकारी।छोटे बड़े सभी अधिकारी॥ भानु उदय संग आप पुजावै।पांच अँजुलि जल रिझावे॥ध्वज पताका मण्ड पे है साजे।अखण्ड ज्योति में आप विराजे॥ सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी।धन्य हुई जन्म भूमि हमारी॥शहीद हमारे यहाँ पुजाते।मातृ भक्ति संदेश सुनाते॥ जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा।धर्म जाति का नहीं है नारा॥हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई।सब पूजे पित्तर भाई॥ हिन्दु वंश वृक्ष है हमारा।जान से ज्यादा हमको प्यारा॥गंगा ये मरुप्रदेश की।पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की॥ बन्धु छोड़ना इनके चरणाँ।इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा॥चौदस को जागरण करवाते।अमावस को हम धोक लगाते॥ जात जडूला सभी मनाते।नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते॥धन्य जन्म भूमि का वो फूल है।जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है॥ श्री पित्तर जी भक्त हितकारी।सुन लीजे प्रभु अरज हमारी॥निशदिन ध्यान धरे जो कोई।ता सम भक्त और नहीं कोई॥ तुम अनाथ के नाथ सहाई।दीनन के हो तुम सदा सहाई॥चारिक वेद प्रभु के साखी।तुम भक्तन की लज्जा राखी॥ नाम तुम्हारो लेत जो कोई।ता सम धन्य और नहीं कोई॥जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत।नवों सिद्धि चरणा में लोटत॥ सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी।जो तुम पे जावे बलिहारी॥जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे।ताकी मुक्ति अवसी हो जावे॥ सत्य भजन तुम्हारो जो गावे।सो निश्चय चारों फल पावे॥तुमहिं देव कुलदेव हमारे।तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे॥ सत्य आस मन में जो होई।मनवांछित फल पावें सोई॥तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई।शेष सहस्र मुख सके न गाई॥ मैं अतिदीन मलीन दुखारी।करहु कौन विधि विनय तुम्हारी॥अब पित्तर जी दया दीन पर कीजै।अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै॥ ॥ दोहा ॥पित्तरौं को स्थान दो,तीरथ और स्वयं ग्राम।श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां,पूरण हो सब काम॥ झुंझुनू धाम विराजे हैं,पित्तर हमारे महान।दर्शन से जीवन सफल हो,पूजे सकल जहान॥ जीवन सफल जो चाहिए,चले झुंझुनू धाम।पित्तर चरण की धूल ले,हो जीवन सफल महान॥

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Sri Lalita Chalisa:श्री ललिता चालीसा

Lalita Chalisa:श्री ललिता चालीसा: एक विस्तृत दृष्टिकोण Lalita Chalisa:श्री ललिता चालीसा हिंदू धर्म में एक प्रसिद्ध स्तुति है जो देवी ललिता, शक्ति के एक रूप की स्तुति करती है। यह चालीसा देवी के विभिन्न रूपों, उनके गुणों और उनके भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन करती है। ललिता चालीसा एक भक्ति गीत है जो ललिता माता पर आधारित है। Lalita Chalisa ललिता चालीसा एक लोकप्रिय प्रार्थना है जो 40 छन्दों से बनी है। ललिता माता के भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इस चालीसा का पाठ करते हैं। Lalita Chalisa:ललिता देवी कौन हैं? ललिता देवी को शक्ति का सर्वोच्च रूप माना जाता है। Lalita Chalisa उन्हें त्रिपुर सुंदरी, राजराजेश्वरी और शारदा के नाम से भी जाना जाता है। वे सृष्टि, पालन और संहार की देवी हैं। ललिता देवी को अत्यंत शक्तिशाली और दयालु माना जाता है। Lalita Chalisa:श्री ललिता चालीसा का महत्व Lalita Chalisa:श्री ललिता चालीसा का पाठ कैसे करें? Sri Lalita Chalisa:श्री ललिता चालीसा ॥ चौपाई ॥जयति जयति जय ललिते माता।तव गुण महिमा है विख्याता॥तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी।सुर नर मुनि तेरे पद सेवी॥ तू कल्याणी कष्ट निवारिणी।तू सुख दायिनी, विपदा हारिणी॥मोह विनाशिनी दैत्य नाशिनी।भक्त भाविनी ज्योति प्रकाशिनी॥ आदि शक्ति श्री विद्या रूपा।चक्र स्वामिनी देह अनूपा॥ह्रदय निवासिनी-भक्त तारिणी।नाना कष्ट विपति दल हारिणी॥ दश विद्या है रुप तुम्हारा।श्री चन्द्रेश्वरी नैमिष प्यारा॥धूमा, बगला, भैरवी, तारा।भुवनेश्वरी, कमला, विस्तारा॥ षोडशी, छिन्न्मस्ता, मातंगी।ललितेशक्ति तुम्हारी संगी॥ललिते तुम हो ज्योतित भाला।भक्त जनों का काम संभाला॥ भारी संकट जब-जब आये।उनसे तुमने भक्त बचाए॥जिसने कृपा तुम्हारी पायी।उसकी सब विधि से बन आयी॥ संकट दूर करो माँ भारी।भक्त जनों को आस तुम्हारी॥त्रिपुरेश्वरी, शैलजा, भवानी।जय जय जय शिव की महारानी॥ योग सिद्दि पावें सब योगी।भोगें भोग महा सुख भोगी॥कृपा तुम्हारी पाके माता।जीवन सुखमय है बन जाता॥ दुखियों को तुमने अपनाया।महा मूढ़ जो शरण न आया॥तुमने जिसकी ओर निहारा।मिली उसे सम्पत्ति, सुख सारा॥ आदि शक्ति जय त्रिपुर प्यारी।महाशक्ति जय जय, भय हारी॥कुल योगिनी, कुण्डलिनी रूपा।लीला ललिते करें अनूपा॥ महा-महेश्वरी, महा शक्ति दे।त्रिपुर-सुन्दरी सदा भक्ति दे॥महा महा-नन्दे कल्याणी।मूकों को देती हो वाणी॥ इच्छा-ज्ञान-क्रिया का भागी।होता तब सेवा अनुरागी॥जो ललिते तेरा गुण गावे।उसे न कोई कष्ट सतावे॥ सर्व मंगले ज्वाला-मालिनी।तुम हो सर्व शक्ति संचालिनी॥आया माँ जो शरण तुम्हारी।विपदा हरी उसी की सारी॥ नामा कर्षिणी, चिन्ता कर्षिणी।सर्व मोहिनी सब सुख-वर्षिणी॥महिमा तव सब जग विख्याता।तुम हो दयामयी जग माता॥ सब सौभाग्य दायिनी ललिता।तुम हो सुखदा करुणा कलिता॥आनन्द, सुख, सम्पत्ति देती हो।कष्ट भयानक हर लेती हो॥ मन से जो जन तुमको ध्यावे।वह तुरन्त मन वांछित पावे॥लक्ष्मी, दुर्गा तुम हो काली।तुम्हीं शारदा चक्र-कपाली॥ मूलाधार, निवासिनी जय जय।सहस्रार गामिनी माँ जय जय॥छ: चक्रों को भेदने वाली।करती हो सबकी रखवाली॥ योगी, भोगी, क्रोधी, कामी।सब हैं सेवक सब अनुगामी॥सबको पार लगाती हो माँ।सब पर दया दिखाती हो माँ॥ हेमावती, उमा, ब्रह्माणी।भण्डासुर कि हृदय विदारिणी॥सर्व विपति हर, सर्वाधारे।तुमने कुटिल कुपंथी तारे॥ चन्द्र- धारिणी, नैमिश्वासिनी।कृपा करो ललिते अधनाशिनी॥भक्त जनों को दरस दिखाओ।संशय भय सब शीघ्र मिटाओ॥ जो कोई पढ़े ललिता चालीसा।होवे सुख आनन्द अधीसा॥जिस पर कोई संकट आवे।पाठ करे संकट मिट जावे॥ ध्यान लगा पढ़े इक्कीस बारा।पूर्ण मनोरथ होवे सारा॥पुत्र-हीन संतति सुख पावे।निर्धन धनी बने गुण गावे॥ इस विधि पाठ करे जो कोई।दुःख बन्धन छूटे सुख होई॥जितेन्द्र चन्द्र भारतीय बतावें।पढ़ें चालीसा तो सुख पावें॥ सबसे लघु उपाय यह जानो।सिद्ध होय मन में जो ठानो॥ललिता करे हृदय में बासा।सिद्दि देत ललिता चालीसा॥ ॥ दोहा ॥ललिते माँ अब कृपा करो,सिद्ध करो सब काम।श्रद्धा से सिर नाय करे,करते तुम्हें प्रणाम॥

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Sharda Chalisa:शारदा चालीसा

Sharda Chalisa:श्री शारदा चालीसा: ज्ञान की देवी का स्तुतिगान Sharda Chalisa:श्री शारदा चालीसा एक प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्तोत्र है जो ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को समर्पित है। माँ सरस्वती को विद्या, बुद्धि और कला की देवी माना जाता है। यह चालीसा विद्यार्थियों, लेखकों, कलाकारों और सभी ज्ञान चाहने वालों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। Sharda Chalisa:चालीसा का महत्व Sharda Chalisa:चालीसा का पाठ कैसे करें? Sharda Chalisa:शारदा चालीसा Sharda Chalisa:शारदा चालीसा एक भक्ति गीत है जो शारदा माता पर आधारित है। ॥ दोहा ॥मूर्ति स्वयंभू शारदा,मैहर आन विराज।माला, पुस्तक, धारिणी,वीणा कर में साज॥ ॥ चौपाई ॥जय जय जय शारदा महारानी।आदि शक्ति तुम जग कल्याणी॥रूप चतुर्भुज तुम्हरो माता।तीन लोक महं तुम विख्याता॥ दो सहस्र बर्षहि अनुमाना।प्रगट भई शारद जग जाना॥मैहर नगर विश्व विख्याता।जहाँ बैठी शारद जग माता॥ त्रिकूट पर्वत शारदा वासा।मैहर नगरी परम प्रकाशा॥शरद इन्दु सम बदन तुम्हारो।रूप चतुर्भुज अतिशय प्यारो॥ कोटि सूर्य सम तन द्युति पावन।राज हंस तुम्हारो शचि वाहन॥कानन कुण्डल लोल सुहावहि।उरमणि भाल अनूप दिखावहिं॥ वीणा पुस्तक अभय धारिणी।जगत्मातु तुम जग विहारिणी॥ब्रह्म सुता अखंड अनूपा।शारद गुण गावत सुरभूपा॥ हरिहर करहिं शारदा बन्दन।बरुण कुबेर करहिं अभिनन्दन॥शारद रूप चण्डी अवतारा।चण्ड-मुण्ड असुरन संहारा॥ महिषा सुर वध कीन्हि भवानी।दुर्गा बन शारद कल्याणी॥धरा रूप शारद भई चण्डी।रक्त बीज काटा रण मुण्डी॥ तुलसी सूर्य आदि विद्वाना।शारद सुयश सदैव बखाना॥कालिदास भए अति विख्याता।तुम्हारी दया शारदा माता॥ वाल्मीक नारद मुनि देवा।पुनि-पुनि करहिं शारदा सेवा॥चरण-शरण देवहु जग माया।सब जग व्यापहिं शारद माया॥ अणु-परमाणु शारदा वासा।परम शक्तिमय परम प्रकाशा॥हे शारद तुम ब्रह्म स्वरूपा।शिव विरंचि पूजहिं नर भूपा॥ ब्रह्म शक्ति नहि एकउ भेदा।शारद के गुण गावहिं वेदा॥जय जग बन्दनि विश्व स्वरुपा।निर्गुण-सगुण शारदहिं रुपा॥ सुमिरहु शारद नाम अखंडा।व्यापइ नहिं कलिकाल प्रचण्डा॥सूर्य चन्द्र नभ मण्डल तारे।शारद कृपा चमकते सारे॥ उद्भव स्थिति प्रलय कारिणी।बन्दउ शारद जगत तारिणी॥दु:ख दरिद्र सब जाहिं नसाई।तुम्हारी कृपा शारदा माई॥ परम पुनीति जगत अधारा।मातु शारदा ज्ञान तुम्हारा॥विद्या बुद्धि मिलहिं सुखदानी।जय जय जय शारदा भवानी॥ शारदे पूजन जो जन करहीं।निश्चय ते भव सागर तरहीं॥शारद कृपा मिलहिं शुचि ज्ञाना।होई सकल विधि अति कल्याणा॥ जग के विषय महा दु:ख दाई।भजहुँ शारदा अति सुख पाई॥परम प्रकाश शारदा तोरा।दिव्य किरण देवहुँ मम ओरा॥ परमानन्द मगन मन होई।मातु शारदा सुमिरई जोई॥चित्त शान्त होवहिं जप ध्याना।भजहुँ शारदा होवहिं ज्ञाना॥ रचना रचित शारदा केरी।पाठ करहिं भव छटई फेरी॥सत्–सत् नमन पढ़ीहे धरिध्याना।शारद मातु करहिं कल्याणा॥ शारद महिमा को जग जाना।नेति-नेति कह वेद बखाना॥सत्–सत् नमन शारदा तोरा।कृपा दृष्टि कीजै मम ओरा॥ जो जन सेवा करहिं तुम्हारी।तिन कहँ कतहुँ नाहि दु:खभारी॥जो यह पाठ करै चालीसा।मातु शारदा देहुँ आशीषा॥ ॥ दोहा ॥बन्दउँ शारद चरण रज,भक्ति ज्ञान मोहि देहुँ।सकल अविद्या दूर कर,सदा बसहु उरगेहुँ॥ जय-जय माई शारदा,मैहर तेरौ धाम।शरण मातु मोहिं लीजिए,तोहि भजहुँ निष्काम॥

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Ravidas Chalisa:रविदास चालीसा

Ravidas Chalisa:श्री रविदास चालीसा: भक्ति और समता का प्रतीक Ravidas Chalisa:श्री रविदास चालीसा एक प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्तोत्र है जो संत रविदास जी को समर्पित है। संत रविदास जी एक महान संत और कवि थे जिन्होंने भक्ति आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। Ravidas Chalisa उनकी शिक्षाएं समता, भाईचारे और ईश्वर भक्ति पर केंद्रित थीं। Ravidas Chalisa:चालीसा का महत्व Ravidas Chalisa:चालीसा का पाठ कैसे करें? Ravidas Chalisa:रविदास चालीसा ॥ दोहा ॥ बंदौं वीणा पाणि को,देहु आय मोहिं ज्ञान।पाय बुद्धि रविदास को,करौं चरित्र बखान॥ मातु की महिमा अमित है,लिखि न सकत है दास।ताते आयों शरण में,पुरवहु जन की आस॥ ॥ चौपाई ॥ जै होवै रविदास तुम्हारी।कृपा करहु हरिजन हितकारी॥राहू भक्त तुम्हारे ताता।कर्मा नाम तुम्हारी माता॥ काशी ढिंग माडुर स्थाना।वर्ण अछूत करत गुजराना॥द्वादश वर्ष उम्र जब आई।तुम्हरे मन हरि भक्ति समाई॥ रामानन्द के शिष्य कहाये।पाय ज्ञान निज नाम बढ़ाये॥शास्त्र तर्क काशी में कीन्हों।ज्ञानिन को उपदेश है दीन्हों॥ गंग मातु के भक्त अपारा।कौड़ी दीन्ह उनहिं उपहारा॥पंडित जन ताको लै जाई।गंग मातु को दीन्ह चढ़ाई॥ हाथ पसारि लीन्ह चौगानी।भक्त की महिमा अमित बखानी॥चकित भये पंडित काशी के।देखि चरित भव भय नाशी के॥ रल जटित कंगन तब दीन्हाँ।रविदास अधिकारी कीन्हाँ॥पंडित दीजौ भक्त को मेरे।आदि जन्म के जो हैं चेरे॥ पहुँचे पंडित ढिग रविदासा।दै कंगन पुरइ अभिलाषा॥तब रविदास कही यह बाता।दूसर कंगन लावहु ताता॥ पंडित जन तब कसम उठाई।दूसर दीन्ह न गंगा माई॥तब रविदास ने वचन उचारे।पडित जन सब भये सुखारे॥ जो सर्वदा रहै मन चंगा।तौ घर बसति मातु है गंगा॥हाथ कठौती में तब डारा।दूसर कंगन एक निकारा॥ चित संकोचित पंडित कीन्हें।अपने अपने मारग लीन्हें॥तब से प्रचलित एक प्रसंगा।मन चंगा तो कठौती में गंगा॥ एक बार फिरि परयो झमेला।मिलि पंडितजन कीन्हों खेला॥सालिग राम गंग उतरावै।सोई प्रबल भक्त कहलावै॥ सब जन गये गंग के तीरा।मूरति तैरावन बिच नीरा॥डूब गईं सबकी मझधारा।सबके मन भयो दुःख अपारा॥ पत्थर मूर्ति रही उतराई।सुर नर मिलि जयकार मचाई॥रह्यो नाम रविदास तुम्हारा।मच्यो नगर महँ हाहाकारा॥ चीरि देह तुम दुग्ध बहायो।जन्म जनेऊ आप दिखाओ॥देखि चकित भये सब नर नारी।विद्वानन सुधि बिसरी सारी॥ ज्ञान तर्क कबिरा संग कीन्हों।चकित उनहुँ का तुम करि दीन्हों॥गुरु गोरखहि दीन्ह उपदेशा।उन मान्यो तकि संत विशेषा॥ सदना पीर तर्क बहु कीन्हाँ।तुम ताको उपदेश है दीन्हाँ॥मन महँ हार्योो सदन कसाई।जो दिल्ली में खबरि सुनाई॥ मुस्लिम धर्म की सुनि कुबड़ाई।लोधि सिकन्दर गयो गुस्साई॥अपने गृह तब तुमहिं बुलावा।मुस्लिम होन हेतु समुझावा॥ मानी नाहिं तुम उसकी बानी।बंदीगृह काटी है रानी॥कृष्ण दरश पाये रविदासा।सफल भई तुम्हरी सब आशा॥ ताले टूटि खुल्यो है कारा।माम सिकन्दर के तुम मारा॥काशी पुर तुम कहँ पहुँचाई।दै प्रभुता अरुमान बड़ाई॥ मीरा योगावति गुरु कीन्हों।जिनको क्षत्रिय वंश प्रवीनो॥तिनको दै उपदेश अपारा।कीन्हों भव से तुम निस्तारा॥ ॥ दोहा ॥ ऐसे ही रविदास ने,कीन्हें चरित अपार।कोई कवि गावै कितै,तहूं न पावै पार॥ नियम सहित हरिजन अगर,ध्यान धरै चालीसा।ताकी रक्षा करेंगे,जगतपति जगदीशा॥

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Shri Mahavir Chalisa:श्री महावीर चालीसा

Mahavir Chalisa:श्री महावीर चालीसा: जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र Mahavir Chalisa:श्री महावीर चालीसा जैन धर्म का एक प्रसिद्ध और भक्तिमय स्तोत्र है जो भगवान महावीर को समर्पित है। यह चालीसा भक्तों को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है और उन्हें मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। Mahavir Chalisa:चालीसा का महत्व Mahavir Chalisa:चालीसा का पाठ कैसे करें? निष्कर्ष श्री Mahavir Chalisa महावीर चालीसा एक शक्तिशाली स्तोत्र है जो भक्तों को आध्यात्मिक शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करता है। यदि आप जैन धर्म के अनुयायी हैं, तो आपको नियमित रूप से इस चालीसा का पाठ करना चाहिए। Shri Mahavir Chalisa:श्री महावीर चालीसा श्री महावीर चालीसा एक भक्ति गीत है जो श्री Mahavir Chalisa महावीर पर आधारित है। ॥ दोहा॥शीश नवा अरिहन्त को,सिद्धन करूँ प्रणाम।उपाध्याय आचार्य का,ले सुखकारी नाम॥ सर्व साधु और सरस्वती,जिन मन्दिर सुखकार।महावीर भगवान को,मन-मन्दिर में धार॥ ॥ चौपाई ॥जय महावीर दयालु स्वामी।वीर प्रभु तुम जग में नामी॥वर्धमान है नाम तुम्हारा।लगे हृदय को प्यारा प्यारा॥ शांति छवि और मोहनी मूरत।शान हँसीली सोहनी सूरत॥तुमने वेश दिगम्बर धारा।कर्म-शत्रु भी तुम से हारा॥ क्रोध मान अरु लोभ भगाया।महा-मोह तमसे डर खाया॥तू सर्वज्ञ सर्व का ज्ञाता।तुझको दुनिया से क्या नाता॥ तुझमें नहीं राग और द्वेश।वीर रण राग तू हितोपदेश॥तेरा नाम जगत में सच्चा।जिसको जाने बच्चा बच्चा॥ भूत प्रेत तुम से भय खावें।व्यन्तर राक्षस सब भग जावें॥महा व्याध मारी न सतावे।महा विकराल काल डर खावे॥ काला नाग होय फन-धारी।या हो शेर भयंकर भारी॥ना हो कोई बचाने वाला।स्वामी तुम्हीं करो प्रतिपाला॥ अग्नि दावानल सुलग रही हो।तेज हवा से भड़क रही हो॥नाम तुम्हारा सब दुख खोवे।आग एकदम ठण्डी होवे॥ हिंसामय था भारत सारा।तब तुमने कीना निस्तारा॥जन्म लिया कुण्डलपुर नगरी।हुई सुखी तब प्रजा सगरी॥ सिद्धारथ जी पिता तुम्हारे।त्रिशला के आँखों के तारे॥छोड़ सभी झंझट संसारी।स्वामी हुए बाल-ब्रह्मचारी॥ पंचम काल महा-दुखदाई।चाँदनपुर महिमा दिखलाई॥टीले में अतिशय दिखलाया।एक गाय का दूध गिराया॥ सोच हुआ मन में ग्वाले के।पहुँचा एक फावड़ा लेके॥सारा टीला खोद बगाया।तब तुमने दर्शन दिखलाया॥ जोधराज को दुख ने घेरा।उसने नाम जपा जब तेरा॥ठंडा हुआ तोप का गोला।तब सब ने जयकारा बोला॥ मन्त्री ने मन्दिर बनवाया।राजा ने भी द्रव्य लगाया॥बड़ी धर्मशाला बनवाई।तुमको लाने को ठहराई॥ तुमने तोड़ी बीसों गाड़ी।पहिया खसका नहीं अगाड़ी॥ग्वाले ने जो हाथ लगाया।फिर तो रथ चलता ही पाया॥ पहिले दिन बैशाख वदी के।रथ जाता है तीर नदी के॥मीना गूजर सब ही आते।नाच-कूद सब चित उमगाते॥ स्वामी तुमने प्रेम निभाया।ग्वाले का बहु मान बढ़ाया॥हाथ लगे ग्वाले का जब ही।स्वामी रथ चलता है तब ही॥ मेरी है टूटी सी नैया।तुम बिन कोई नहीं खिवैया॥मुझ पर स्वामी जरा कृपा कर।मैं हूँ प्रभु तुम्हारा चाकर॥ तुम से मैं अरु कछु नहीं चाहूँ।जन्म-जन्म तेरे दर्शन पाऊँ॥चालीसे को चन्द्र बनावे।बीर प्रभु को शीश नवावे॥ ॥ सोरठा ॥नित चालीसहि बार,पाठ करे चालीस दिन।खेय सुगन्ध अपार,वर्धमान के सामने। होय कुबेर समान,जन्म दरिद्री होय जो।जिसके नहिं सन्तान,नाम वंश जग में चले।

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Shri Baba Gangaram Chalisa:श्री बाबा गंगाराम चालीसा

Baba Gangaram Chalisa:श्री बाबा गंगाराम चालीसा: भक्ति और आस्था का एक मंत्र Baba Gangaram Chalisa:श्री बाबा गंगाराम चालीसा एक प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक पाठ है, जिसे भक्तगण Baba Gangaram Chalisa बाबा गंगाराम जी की आराधना और उनके आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पढ़ते हैं। यह चालीसा बाबा के जीवन, चमत्कारों और उपदेशों का वर्णन करती है, जो भक्तों को प्रेरणा और मार्गदर्शन देती है। Baba Gangaram Chalisa:चालीसा का महत्व Baba Gangaram Chalisa:चालीसा का पाठ कैसे करें? Shri Baba Gangaram Chalisa:श्री बाबा गंगाराम चालीसा श्री बाबा गंगाराम चालीसा एक भक्ति गीत है जो श्री बाबा गंगाराम पर आधारित है। ॥ दोहा ॥अलख निरंजन आप हैं,निरगुण सगुण हमेश।नाना विधि अवतार धर,हरते जगत कलेश॥ बाबा गंगारामजी,हुए विष्णु अवतार।चमत्कार लख आपका,गूँज उठी जयकार॥ ॥ चौपाई ॥गंगाराम देव हितकारी।वैश्य वंश प्रकटे अवतारी॥पूर्वजन्म फल अमित रहेऊ।धन्य-धन्य पितु मातु भयेउ॥ उत्तम कुल उत्तम सतसंगा।पावन नाम राम अरू गंगा॥बाबा नाम परम हितकारी।सत सत वर्ष सुमंगलकारी॥ बीतहिं जन्म देह सुध नाहीं।तपत तपत पुनि भयेऊ गुसाई॥जो जन बाबा में चित लावा।तेहिं परताप अमर पद पावा॥ नगर झुंझनूं धाम तिहारो।शरणागत के संकट टारो॥धरम हेतु सब सुख बिसराये।दीन हीन लखि हृदय लगाये॥ एहि विधि चालीस वर्ष बिताये।अन्त देह तजि देव कहाये॥देवलोक भई कंचन काया।तब जनहित संदेश पठाया॥ निज कुल जन को स्वप्न दिखावा।भावी करम जतन बतलावा॥आपन सुत को दर्शन दीन्हों।धरम हेतु सब कारज कीन्हों॥ नभ वाणी जब हुई निशा में।प्रकट भई छवि पूर्व दिशा में॥ब्रह्मा विष्णु शिव सहित गणेशा।जिमि जनहित प्रकटेउ सब ईशा॥ चमत्कार एहि भाँति दिखाया।अन्तरध्यान भई सब माया॥सत्य वचन सुनि करहिं विचारा।मन महँ गंगाराम पुकारा॥ जो जन करई मनौती मन में।बाबा पीर हरहिं पल छन में॥ज्यों निज रूप दिखावहिं सांचा।त्यों त्यों भक्तवृन्द तेहिं जांचा॥ उच्च मनोरथ शुचि आचारी।राम नाम के अटल पुजारी॥जो नित गंगाराम पुकारे।बाबा दुख से ताहिं उबारे॥ बाबा में जिन्ह चित्त लगावा।ते नर लोक सकल सुख पावा॥परहित बसहिं जाहिं मन मांही।बाबा बसहिं ताहिं तन मांही॥ धरहिं ध्यान रावरो मन में।सुखसंतोष लहै न मन में॥धर्म वृक्ष जेही तन मन सींचा।पार ब्रह्म तेहि निज में खींचा॥ गंगाराम नाम जो गावे।लहि बैकुंठ परम पद पावे॥बाबा पीर हरहिं सब भाँति।जो सुमरे निश्छल दिन राती॥ दीन बन्धु दीनन हितकारी।हरौ पाप हम शरण तिहारी॥पंचदेव तुम पूर्ण प्रकाशा।सदा करो संतन मँह बासा॥ तारण तरण गंग का पानी।गंगाराम उभय सुनिशानी॥कृपासिंधु तुम हो सुखसागर।सफल मनोरथ करहु कृपाकर॥ झुंझनूं नगर बड़ा बड़ भागी।जहँ जन्में बाबा अनुरागी॥पूरन ब्रह्म सकल घटवासी।गंगाराम अमर अविनाशी॥ ब्रह्म रूप देव अति भोला।कानन कुण्डल मुकुट अमोला॥नित्यानन्द तेज सुख रासी।हरहु निशातन करहु प्रकासी॥ गंगा दशहरा लागहिं मेला।नगर झुंझनूं मँह शुभ बेला॥जो नर कीर्तन करहिं तुम्हारा।छवि निरखि मन हरष अपारा॥ प्रात: काल ले नाम तुम्हारा।चौरासी का हो निस्तारा॥पंचदेव मन्दिर विख्याता।दरशन हित भगतन का तांता॥ जय श्री गंगाराम नाम की।भवतारण तरि परम धाम की॥‘महावीर’ धर ध्यान पुनीता।विरचेउ गंगाराम सुगीता॥ ॥ दोहा ॥सुने सुनावे प्रेम से,कीर्तन भजन सुनाम।मन इच्छा सब कामना,पुरई गंगाराम॥

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