Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती

Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक, मानसिक, और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं। संकटा माता को संकटों को हरने वाली देवी माना जाता है। उनकी आराधना से भक्त को जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने के फायदे 1. Sankata Mata Aarti संकटों और बाधाओं से मुक्ति 2. सुख-समृद्धि में वृद्धि 3. स्वास्थ्य लाभ 4. भय और नकारात्मकता का नाश 5. परिवारिक सुख और सामंजस्य 6. आध्यात्मिक जागरूकता 7. मनोकामनाओं की पूर्ति 8. शत्रुओं पर विजय 9. धार्मिक पुण्य का संचय आरती का समय और विधि सारांश Sankata Mata Aarti:संकटा माता की आरती करने से व्यक्ति को न केवल संकटों से मुक्ति मिलती है, बल्कि जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का आगमन भी होता है। माता की कृपा से भक्त का जीवन सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है और वह हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। Sankata Mata Aarti:संकटा माता आरती जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ नहिं कोउ तुम समान जग दाता,सुर-नर-मुनि सब टेरी ।कष्ट निवारण करहु हमारा,लावहु तनिक न देरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ काम-क्रोध अरु लोभन के वशपापहि किया घनेरी ।सो अपराधन उर में आनहु,छमहु भूल बहु मेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ हरहु सकल सन्ताप हृदय का,ममता मोह निबेरी ।सिंहासन पर आज बिराजें,चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ खप्पर, खड्ग हाथ में धारे,वह शोभा नहिं कहत बनेरी ॥ब्रह्मादिक सुर पार न पाये,हारि थके हिय हेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ असुरन्ह का वध किन्हा,प्रकटेउ अमत दिलेरी ।संतन को सुख दियो सदा ही,टेर सुनत नहिं कियो अबेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ गावत गुण-गुण निज हो तेरी,बजत दुंदुभी भेरी ।अस निज जानि शरण में आयऊं,टेहि कर फल नहीं कहत बनेरी ॥जय जय संकटा भवानी..॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।भव बंधन में सो नहिं आवै,निशदिन ध्यान धरीरी ॥ जय जय संकटा भवानी,करहूं आरती तेरी ।शरण पड़ी हूँ तेरी माता,अरज सुनहूं अब मेरी ॥

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Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती

Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के अनेक आध्यात्मिक और जीवनशैली से जुड़े लाभ हैं। एकादशी का व्रत और आरती विष्णु भगवान और उनकी अवतार स्वरूपा माता एकादशी को समर्पित होती है। यह भक्ति, ध्यान, और अनुशासन का प्रतीक है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने के लाभ 1. पापों का नाश 2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 3. आध्यात्मिक बल और मानसिक शांति 4. सांसारिक सुख-समृद्धि में वृद्धि 5. भक्ति और विश्वास में वृद्धि 6. स्वास्थ्य में सुधार 7. मोक्ष और पुनर्जन्म से मुक्ति 8. धार्मिक और पारिवारिक एकता 9. विष्णु भगवान की कृपा आरती का समय और विधि सारांश Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती करने से मन, शरीर, और आत्मा को शांति मिलती है। यह आरती व्यक्ति को आध्यात्मिक ऊंचाइयों पर ले जाती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। Ekadashi Mata Ki Aarti:एकादशी माता की आरती ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥ॐ जय एकादशी…॥ तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥ॐ जय एकादशी…॥ पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥ॐ जय एकादशी…॥ नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥ॐ जय एकादशी…॥ विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥ॐ जय एकादशी…॥ चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥ॐ जय एकादशी…॥ शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥ॐ जय एकादशी…॥ योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥ॐ जय एकादशी…॥ अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥ॐ जय एकादशी…॥ पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥ॐ जय एकादशी…॥ देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥ॐ जय एकादशी…॥ परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥ॐ जय एकादशी…॥ जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥ॐ जय एकादशी…॥

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Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती

Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान की आरती करने से अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। महावीर भगवान जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर हैं और उनकी आराधना आत्मिक शांति, संयम, और जीवन में सादगी लाने में सहायक मानी जाती है। आरती के निम्नलिखित लाभ हैं: 1. आत्मिक शांति और ध्यान में वृद्धि 2. संयम और सहनशीलता का विकास 3. सकारात्मक ऊर्जा का संचार 4. धार्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव 5. पापों का नाश और पुण्य का संचय 6. अहिंसा और सत्य की प्रेरणा Mahaveer Bhagwan Arti 7. Mahaveer Bhagwan Arti रोगों से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ 8. परिवार में शांति और सुख-समृद्धि आरती का समय और विधि: श्री महावीर भगवान की आरती से व्यक्ति का जीवन अध्यात्म, अहिंसा और सत्य की राह पर चलता है, जो जीवन को पूर्णता और समृद्धि प्रदान करता है। Shri Mahaveer Bhagwan Arti:श्री महावीर भगवान आरती जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,त्रिशला के जाये ।कुण्डलपुर अवतार लिया,प्रभु सुर नर हर्षाये ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ देव इन्द्र जन्माभिषेक कर,उर प्रमोद भरिया ।रुप आपका लख नहिं पाये,सहस आंख धरिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये,घर में बाल यती ।राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब,ममता मोह हती ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ बारह वर्ष छद्मावस्था में,आतम ध्यान किया।घाति-कर्म चूर-चूर,प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ पावापुर के बीच सरोवर,आकर योग कसे ।हने अघातिया कर्म शत्रु सब,शिवपुर जाय बसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ भूमंडल के चांदनपुर में,मंदिर मध्य लसे ।शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी,दर्शन पाप नसे ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ करुणासागर करुणा कीजे,आकर शरण गही।दीन दयाला जगप्रतिपाला,आनन्द भरण तु ही ॥॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥ जय सन्मति देवा,प्रभु जय सन्मति देवा।वर्द्धमान महावीर वीर अति,जय संकट छेवा ॥

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Narasimha Aarti:नृसिंह आरती

Narasimha Aarti:नृसिंह आरती के लाभ (फायदे):नृसिंह भगवान की आरती करने से व्यक्ति को अनेक आध्यात्मिक और मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं। Narasimha Aarti यह आरती विशेष रूप से भय और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने के लिए मानी जाती है। Narasimha Aarti:फायदे: Narasimha Aarti:शुभ मुहूर्त: नोट: पूजा के समय पवित्रता, भक्ति, और श्रद्धा का होना अति महत्वपूर्ण है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान का आह्वान करने से आरती का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। Narasimha Aarti:नृसिंह आरती नमस्ते नरसिंहायप्रह्लादाह्लाद-दायिने हिरण्यकशिपोर्वक्षः-शिला-टङ्क-नखालये इतो नृसिंहः परतो नृसिंहोयतो यतो यामि ततो नृसिंहः बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहोनृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये तव करकमलवरे नखमद्भुत-शृङ्गंदलितहिरण्यकशिपुतनुभृङ्गम्केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे ।

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Murder In Dream:सपने में खुद को या किसी दूसरे को मरते हुए देखने का क्या होता है मतलब, जानिए रियल लाइफ पर क्या पड़ेगा प्रभाव

Murder In Dream: स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में आत्महत्या करते हुए देखते हैं। तो इसका मतलब है कि आप किसी परेशानी में पड़ने वाले हैं। सपने में खुद को या किसी दूसरे को मरते हुए देखने के पीछे कई संभावित अर्थ होते हैं, और ये हमारे भावनात्मक, मानसिक और आध्यात्मिक पहलुओं से जुड़े हो सकते हैं। यहाँ इसके कुछ सामान्य मतलब दिए गए हैं: Murder In Dream: सपने हर कोई व्यक्ति देखता है, वहीं कुछ सपने देखकर हम चिंता में पड़ जाते हैं, तो कुछ सपने हमको बहुत सुखद एहसास कराते हैं। लेकिन आपको बता दें कि स्वप्न शास्त्र अनुसार जो सपना आपने देखा होगा कि उसका रियल लाइफ में भी वो ही मतलब हो आपको बता दें कि आमतौर पर सुबह के समय देखा गया सपना सच होता है। ऐसे में हम यहां आपको बताने जा रहे हैं कि आप सपने में किसी को मर्डर करते हुए देखते हैं तो इसका क्या अर्थ होता है। जानिए क्या कहता है स्वप्न शास्त्र… Murder In Dream:सपने में मर्डर करते हुए देखना Murder In Dream:स्वप्न शास्त्र अनुसार अगर किसी व्यक्ति को चाकू से मर्डर करते हुए देखते हैं तो यह एक बेहद अशुभ संकेत है। साथ ही इसका मतलब है कि आपको कोई अशुभ सूचना प्राप्त हो सकती है। साथ ही आपका किसी साथ झगड़ा हो सकता है। वहीं आपका किसी व्यक्ति से किसी विषय  को लेकर मनमुटाव हो सकता है। Murder In Dream:जहर पिलाकर मर्डर देखना  अगर आप सपने में किसी व्यक्ति को जहर पिलाकर मर्डर करते हुए देखते हैं तो भी यह बेहद अशुभ संकेत है। साथ ही इसका मतलब है कि आपको आने वाले दिनों में कोई व्यक्ति धोखा दे सकता है। साथ ही आपका कोई काम रुक सकता है। Murder In Dream वहीं आपको धन हानि हो सकती है। Murder In Dream:सपने में आत्महत्या करते देखना Murder In Dream:स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में आत्महत्या करते हुए देखते हैं। तो इसका मतलब है कि आप किसी परेशानी में पड़ने वाले हैं या आपको कोई बीमारी हो सकती है। सपने में भूत दिखाई देना भी भविष्य में आने वाली किसी बड़ी परेशानी का संकेत देता है। साथ ही आपको कोई अशुभ सूचना मिल सकती है। स्वास्थ्य और चिंता: कभी-कभी, ऐसे सपने आ सकते हैं जब व्यक्ति स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हो या किसी तरह के अनिश्चित भविष्य का डर हो। Murder In Dream:सपने में माता- पिता का मर्डर देखना Murder In Dream:अगर आप सपने में अपने मातापिता का मर्डर होते देखते हैं तो यह एक बेहद अशुभ संकेत है। साथ ही . इसका मतलब है आपका अपने घर में अपमान हो सकता है। वहीं माता- पिता की सेहत खराब हो सकती है। Murder In Dream साथ ही ये सपना अपमानित होने का संकेत देता है। Murder In Dream:सपने में कटा हुए सिर देखना Murder In Dream:स्वप्न शास्त्र अनुसार यदि सपने में कटा हुआ सिर देखते हैं तो यह एक अशुभ संकेत है। साथ ही इसका मतलब आपके ऊपर कोई बड़ी परेशानी आने वाली है। इसलिए आने वाले दिनों में आपको बहुत सावधान रहना चाहिए। रियल लाइफ पर प्रभाव: Murder In Dream सपनों को कभी भी सीधे जीवन की घटनाओं से नहीं जोड़ा जा सकता है, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य हमारे मन और अवचेतन की भावनाओं को प्रतिबिंबित करना है।

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Shri Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती — श्री नंगली निवासी सतगुरु

Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती – श्री नंगली निवासी सतगुरु जी Nangli Niwasi Satguru Arti:श्री नंगली निवासी सतगुरु जी की आरती का पाठ उनके प्रति श्रद्धा, समर्पण और आस्था का प्रतीक है। सतगुरु जी को मार्गदर्शक, कल्याणकारी और सत्य की राह दिखाने वाला माना जाता है। इस आरती का पाठ करते समय भक्त अपने गुरुदेव के प्रति अपनी भक्ति प्रकट करते हैं और उनके आशीर्वाद से जीवन में शांति, मार्गदर्शन, और आत्मिक उन्नति प्राप्त करते हैं। Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती के लाभ और महत्व Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव आरती का शुभ समय निष्कर्ष Nangli Niwasi Satguru Arti:गुरुदेव की आरती से उनके प्रति अपनी भक्ति, आस्था और समर्पण प्रकट किया जाता है। यह आरती जीवन में आध्यात्मिक उन्नति, शांति, सद्गुणों का विकास और सुख-शांति का संचार करती है। श्री नंगली निवासी सतगुरु जी के आशीर्वाद से भक्त अपने जीवन में सफल, संतुलित, और सच्चे मार्ग पर चलने में सक्षम होते हैं। Guru Aarti – Shri Nangli Niwasi Satguru:गुरुदेव आरती — श्री नंगली निवासी सतगुरु आरती श्री गुरुदेव जी की गाऊँ ।बार-बार चरणन सिर नाऊँ ॥ त्रिभुवन महिमा गुरु जी की भारी ।ब्रह्मा विष्णु जपे त्रिपुरारी ॥ राम कृष्ण भी बने पुजारी ।आशीर्वाद में गुरु जी को पाऊं ॥ भव निधि तारण हार खिवैया ।भक्तों के प्रभु पार लगैया ॥ भंवर बीच घूमे मेरी नैया ।बार बार प्रभु शीष नवाऊँ ॥ ज्ञान दृष्टि प्रभु मो को दीजै ।माया जनित दुख हर लीजै ॥ ज्ञान भानु प्रकाश करीजै ।आवागमन को दुख नहीं पाऊं ॥ राम नाम प्रभु मोहि लखायो ।रूप चतुर्भुज हिय दर्शायो ॥ नाद बिंदु पुनि ज्योति लखायो ।अखंड ध्यान में गुरु जी को पाऊँ ॥ जय जयकार गुरु उपनायों ।भव मोचन गुरु नाम कहायो ॥श्री माताजी ने अमृत पायो ।

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Mata Gayatri Aarti:माता गायत्री आरती

Mata Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती: महत्व और लाभ Gayatri Aarti:गायत्री माता को वेदों की माँ और त्रिदेवों की शक्ति का स्वरूप माना गया है। गायत्री माता की उपासना करने से व्यक्ति को ज्ञान, शुद्धता, और ऊर्जा प्राप्त होती है। गायत्री माता की आरती उनके प्रति आस्था और श्रद्धा को दर्शाने का माध्यम है, और इसे करने से भक्त को अनेक आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। Mata Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती के लाभ और महत्व Mata Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती का शुभ समय निष्कर्ष Gayatri Aarti:गायत्री माता की आरती करने से व्यक्ति को ज्ञान, शक्ति, और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। यह आरती व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि, और सुख का संचार करती है। गायत्री माता अपने भक्तों को हर प्रकार के संकटों से दूर रखती हैं और उन्हें आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती हैं। Mata Gayatri Aarti:माता गायत्री आरती जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता ।सत् मारग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ आदि शक्ति तुम अलख निरंजन जगपालक क‌र्त्री ।दु:ख शोक, भय, क्लेश कलश दारिद्र दैन्य हत्री ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ ब्रह्म रूपिणी, प्रणात पालिन जगत धातृ अम्बे ।भव भयहारी, जन-हितकारी, सुखदा जगदम्बे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ भय हारिणी, भवतारिणी, अनघेअज आनन्द राशि ।अविकारी, अखहरी, अविचलित, अमले, अविनाशी ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ कामधेनु सतचित आनन्द जय गंगा गीता ।सविता की शाश्वती, शक्ति तुम सावित्री सीता ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ ऋग, यजु साम, अथर्व प्रणयनी, प्रणव महामहिमे ।कुण्डलिनी सहस्त्र सुषुमन शोभा गुण गरिमे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ स्वाहा, स्वधा, शची ब्रह्माणी राधा रुद्राणी ।जय सतरूपा, वाणी, विद्या, कमला कल्याणी ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ जननी हम हैं दीन-हीन, दु:ख-दरिद्र के घेरे ।यदपि कुटिल, कपटी कपूत तउ बालक हैं तेरे ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ स्नेहसनी करुणामय माता चरण शरण दीजै ।विलख रहे हम शिशु सुत तेरे दया दृष्टि कीजै ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव द्वेष हरिये ।शुद्ध बुद्धि निष्पाप हृदय मन को पवित्र करिये ॥॥ जयति जय गायत्री माता..॥ जयति जय गायत्री माता,जयति जय गायत्री माता ।सत् मारग पर हमें चलाओ,जो है सुखदाता ॥

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Bhog Aarti:आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन – भोग आरती

Bhog Aarti:भोग आरती का महत्व और लाभ “Bhog Aarti:भोग आरती” एक विशेष प्रकार की आरती है, जो भगवान को भोजन अर्पित करने के बाद की जाती है। Bhog Aarti इसे भगवान के प्रति प्रेम और भक्ति की अभिव्यक्ति माना जाता है। यह आरती हिंदू मंदिरों और घरों में विशेष रूप से भोग लगाने के समय की जाती है। इस आरती का उद्देश्य भगवान को भोजन अर्पित करना और उनके आशीर्वाद से उस भोजन को पवित्र करना है। Bhog Aarti:भोग आरती के लाभ और महत्व Bhog Aarti:भोग आरती करने का सही समय निष्कर्ष Bhog Aarti:भोग आरती करने से भगवान के प्रति भक्ति, प्रेम, और आस्था का संचार होता है। Bhog Aarti यह हमें भगवान का आशीर्वाद दिलाती है और हमारे जीवन में पवित्रता, संतोष, और सकारात्मकता का संचार करती है। भोग आरती से न केवल भोजन पवित्र होता है, बल्कि परिवार और घर में सुख-समृद्धि और शांति भी बनी रहती है। Bhog Aarti:आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन – भोग आरती आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… दुर्योधन को मेवा त्यागो,साग विदुर घर खायो प्यारे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… भिलनी के बैर सुदामा के तंडुलरूचि रूचि भोग लगाओ प्यारे मोहन…आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… वृदावन की कुञ्ज गली मे,आओं रास रचाओ मेरे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… राधा और मीरा भी बोले,मन मंदिर में आओ मेरे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… गिरी, छुआरा, किशमिश मेवा,माखन मिश्री खाओ मेरे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… सत युग त्रेता दवापर कलयुग,हर युग दरस दिखाओ मेरे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… जो कोई तुम्हारा भोग लगावेसुख संपति घर आवे प्यारे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… ऐसा भोग लगाओ प्यारे मोहनसब अमृत हो जाये प्यारे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… जो कोई ऐसा भोग को खावेसो त्यारा हो जाये प्यारे मोहन,आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन… आओ भोग लगाओ प्यारे मोहन…

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Shri Bal Krishna Ki Arti: श्री बाल कृष्ण जी आरती

Bal Krishna Ki Arti:श्री कृष्ण जन्माष्टमी मे इस आरती का बड़ा ही महत्व है… Bal Krishna Ki Arti:श्री बाल कृष्ण जी की आरती के लाभ और महत्व Bal Krishna Ki Arti:श्री बाल कृष्ण, भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप का प्रतीक हैं, और उनके इस रूप की पूजा करने से भक्तों को अद्वितीय लाभ और आशीर्वाद प्राप्त होते हैं। बाल कृष्ण की आरती करने से भक्तों को आध्यात्मिक, मानसिक, और पारिवारिक लाभ मिलते हैं। यहाँ श्री बाल कृष्ण जी की आरती के कुछ प्रमुख लाभ बताए गए हैं: Bal Krishna Ki Arti:श्री बाल कृष्ण जी की आरती के लाभ Bal Krishna Ki Arti:श्री बाल कृष्ण जी की आरती का शुभ समय निष्कर्ष Bal Krishna Ki Arti:श्री बाल कृष्ण जी की आरती से भक्तों को प्रेम, शांति, सुख-समृद्धि, आत्मबल, संतान सुख, और मानसिक शांति का आशीर्वाद मिलता है। बाल कृष्ण अपने भक्तों को न केवल उनकी भौतिक इच्छाओं की पूर्ति में सहायता करते हैं, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक उन्नति और जीवन में संतोष भी प्रदान करते हैं। Shri Bal Krishna Ki Arti: श्री बाल कृष्ण जी आरती आरती बाल कृष्ण की कीजै,अपना जन्म सफल कर लीजै ॥ श्री यशोदा का परम दुलारा,बाबा के अँखियन का तारा ।गोपियन के प्राणन से प्यारा,इन पर प्राण न्योछावर कीजै ॥॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥ बलदाऊ के छोटे भैया,कनुआ कहि कहि बोले मैया ।परम मुदित मन लेत बलैया,अपना सरबस इनको दीजै ॥॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥ श्री राधावर कृष्ण कन्हैया,ब्रज जन को नवनीत खवैया ।देखत ही मन लेत चुरैया,यह छवि नैनन में भरि लीजै ॥॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥ तोतली बोलन मधुर सुहावै,सखन संग खेलत सुख पावै ।सोई सुक्ति जो इनको ध्यावे,अब इनको अपना करि लीजै ॥॥आरती बाल कृष्ण की कीजै…॥ आरती बाल कृष्ण की कीजै,अपना जन्म सफल कर लीजै ॥

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Mata Shri Chintpurni Devi Arti:श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती

Chintpurni Devi Arti:श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती के लाभ और शुभ समय Chintpurni Devi Arti:चिंतपूर्णी देवी को “चिंताओं को दूर करने वाली” देवी के रूप में पूजा जाता है। माता के प्रति भक्तों की गहरी आस्था है, और उनकी आरती करने से कई आध्यात्मिक एवं सांसारिक लाभ प्राप्त होते हैं। Chintpurni Devi Arti यह आरती विशेष रूप से उन भक्तों के लिए सहायक है, Chintpurni Devi Arti जो अपने जीवन में समस्याओं से मुक्ति और मानसिक शांति की खोज में हैं। Chintpurni Devi Arti:श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती के लाभ Chintpurni Devi Arti:श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती का शुभ समय निष्कर्ष Chintpurni Devi Arti श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती करने से सभी चिंताओं से मुक्ति, मनोकामना की पूर्ति, सुख-शांति, स्वास्थ्य, आत्मबल, और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। Chintpurni Devi Arti देवी अपने भक्तों को हर प्रकार की विपत्ति से बचाकर उनके जीवन में सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं। श्री चिंतपूर्णी देवी की आरती (Mata Shri Chintpurni Devi Arti) चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी,जग को तारो भोली माँ जन को तारो भोली माँ,काली दा पुत्र पवन दा घोड़ा ॥॥ भोली माँ ॥ सिन्हा पर भाई असवार,भोली माँ, चिंतपूर्णी चिंता दूर ॥॥ भोली माँ ॥ एक हाथ खड़ग दूजे में खांडा,तीजे त्रिशूल सम्भालो ॥॥ भोली माँ ॥ चौथे हाथ चक्कर गदा,पाँचवे-छठे मुण्ड़ो की माला ॥॥ भोली माँ ॥ सातवे से रुण्ड मुण्ड बिदारे,आठवे से असुर संहारो ॥॥ भोली माँ ॥ चम्पे का बाग़ लगा अति सुन्दर,बैठी दीवान लगाये ॥॥ भोली माँ ॥ हरी ब्रम्हा तेरे भवन विराजे,लाल चंदोया बैठी तान ॥॥ भोली माँ ॥ औखी घाटी विकटा पैंडा,तले बहे दरिया ॥॥ भोली माँ ॥ सुमन चरण ध्यानु जस गावे,भक्तां दी पज निभाओ ॥॥ भोली माँ ॥ चिंतपूर्णी चिंता दूर करनी,जग को तारो भोली माँ

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Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती 

Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गा देवी की आरती के लाभ और महत्व Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गा देवी गोवा की प्रमुख देवी मानी जाती हैं और उन्हें शांति की देवी के रूप में पूजा जाता है। श्री शांतादुर्गा की आरती करने से भक्तों को कई आध्यात्मिक और व्यक्तिगत लाभ प्राप्त होते हैं। यहाँ उनके आरती के कुछ मुख्य लाभ दिए गए हैं: Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गा देवी की आरती के लाभ Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गा देवी की आरती का सही समय निष्कर्ष श्री शांतादुर्गा देवी की आरती करने से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, आत्मबल, कठिनाइयों से मुक्ति, सकारात्मक ऊर्जा, और आध्यात्मिक उन्नति मिलती है। देवी शांतादुर्गा अपने भक्तों को हर विपत्ति से बचाकर उनके जीवन में सुख-शांति, संतुलन, और समृद्धि लाती हैं। Shri Shanta Durgechi Aarti:श्री शांतादुर्गेची आरती  जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ भूकैलासा ऐसी ही कवला नगरी ।शांतादुर्गा तेथे भक्तभवहारी ।असुराते मर्दुनिया सुरवरकैवारी ।स्मरती विधीहरीशंकर सुरगण अंतरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ प्रबोध तुझा नव्हे विश्वाभीतरी ।नेति नेति शब्दे गर्जती पै चारी ।साही शास्त्रे मथिता न कळीसी निर्धारी ।अष्टादश गर्जती परी नेणती तव थोरी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ कोटी मदन रूपा ऐसी मुखशोभा ।सर्वांगी भूषणे जांबूनदगाभा ।नासाग्री मुक्ताफळ दिनमणीची प्रभा ।भक्तजनाते अभय देसी तू अंबा । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ अंबे भक्तांसाठी होसी साकार ।नातरी जगजीवन तू नव्हसी गोचर ।विराटरूपा धरूनी करीसी व्यापार ।त्रिगुणी विरहीत सहीत तुज कैचा पार । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥ त्रितापतापे श्रमलो निजवी निजसदनी ।अंबे सकळारंभे राका शशीवदनी ।अगमे निगमे दुर्गे भक्तांचे जननी ।पद्माजी बाबाजी रमला तव भजनी । जय देवी जय देवी जय शांते जननी ।दुर्गे बहुदु:खदमने रतलो तव भजनी ॥

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Kartikeya Aarti:कार्तिकेय आरती

Kartikeya Aarti:भगवान कार्तिकेय की आरती के लाभ और समय Kartikeya Aarti:भगवान कार्तिकेय, जिन्हें भगवान स्कंद, मुरुगन, या सुब्रमण्य के नाम से भी जाना जाता है, विशेष रूप से शक्ति, साहस, और विजय के देवता माने जाते हैं। उनकी आरती और उपासना करने से जीवन में कई लाभ प्राप्त होते हैं। Kartikeya Aarti यहाँ उनके आरती के फायदे और इसे करने का सही समय दिया गया है: Kartikeya Aarti:भगवान कार्तिकेय की आरती के लाभ भगवान कार्तिकेय Kartikeya Aarti की आरती करने का समय अतः, भगवान कार्तिकेय की आरती करने से साहस, आत्मविश्वास, स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख, शत्रुओं पर विजय, और मानसिक शांति मिलती है। Kartikeya Aarti:कार्तिकेय आरती कार्तिकेय जी की आरती –जय जय आरती वेणु गोपालावेणु गोपाला वेणु लोलापाप विदुरा नवनीत चोरा जय जय आरती वेंकटरमणावेंकटरमणा संकटहरणासीता राम राधे श्याम जय जय आरती गौरी मनोहरगौरी मनोहर भवानी शंकरसदाशिव उमा महेश्वर जय जय आरती राज राजेश्वरिराज राजेश्वरि त्रिपुरसुन्दरि महा सरस्वती महा लक्ष्मीमहा काली महा लक्ष्मी जय जय आरती आन्जनेयआन्जनेय हनुमन्ता जय जय आरति दत्तात्रेयदत्तात्रेय त्रिमुर्ति अवतार जय जय आरती सिद्धि विनायकसिद्धि विनायक श्री गणेश जय जय आरती सुब्रह्मण्यसुब्रह्मण्य कार्तिकेय

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