Shri Baba Balaknath Aarti:बाबा बालक नाथ आरती

Baba Balaknath Aarti:बाबा बालक नाथ आरती के फायदे Baba Balaknath Aarti:बाबा बालक नाथ जी की आरती का पाठ करने से मन को शांति मिलती है Baba Balaknath Aarti और आध्यात्मिक उन्नति होती है। मान्यता है कि इस आरती के नियमित पाठ से कई लाभ प्राप्त होते हैं, जैसे कि Baba Balaknath Aarti:बाबा बालक नाथ आरती का पाठ कैसे करें Baba Balaknath Aarti:कहां से करें आरती Baba Balaknath Aarti:आप बाबा बालक नाथ जी के मंदिर में जाकर आरती में शामिल हो सकते हैं या घर पर भी आरती का पाठ कर सकते हैं। Shri Baba Balaknath Aarti:बाबा बालक नाथ आरती ॐ जय कलाधारी हरे,स्वामी जय पौणाहारी हरे,भक्त जनों की नैया,दस जनों की नैया,भव से पार करे,ॐ जय कलाधारी हरे ॥ बालक उमर सुहानी,नाम बालक नाथा,अमर हुए शंकर से,सुन के अमर गाथा ।ॐ जय कलाधारी हरे ॥ शीश पे बाल सुनैहरी,गले रुद्राक्षी माला,हाथ में झोली चिमटा,आसन मृगशाला ।ॐ जय कलाधारी हरे ॥ सुंदर सेली सिंगी,वैरागन सोहे,गऊ पालक रखवालक,भगतन मन मोहे ।ॐ जय कलाधारी हरे ॥ अंग भभूत रमाई,मूर्ति प्रभु रंगी,भय भज्जन दुःख नाशक,भरथरी के संगी ।ॐ जय कलाधारी हरे ॥ रोट चढ़त रविवार को,फल, फूल मिश्री मेवा,धुप दीप कुदनुं से,आनंद सिद्ध देवा ।ॐ जय कलाधारी हरे ॥ भक्तन हित अवतार लियो,प्रभु देख के कल्लू काला,दुष्ट दमन शत्रुहन,सबके प्रतिपाला ।ॐ जय कलाधारी हरे ॥ श्री बालक नाथ जी की आरती,जो कोई नित गावे,कहते है सेवक तेरे,मन वाच्छित फल पावे ।ॐ जय कलाधारी हरे ॥ ॐ जय कलाधारी हरे,स्वामी जय पौणाहारी हरे,भक्त जनों की नैया,भव से पार करे,ॐ जय कलाधारी हरे ॥

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स्वप्न शास्त्र: सपने में खुद को पिटते या चोट लगते देखना जैसे सपने किस बात का देते हैं संकेत ?

स्वप्न शास्त्र: अगर कोई व्यक्ति स्वयं को किसी से पिटते हुए या थप्पड़ खाते हुए जैसा अटपटा सपना देखता है तो ये परेशान होने वाली बात नहीं है। क्योंकि स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना एक शुभ संकेत है।सपनों की दुनिया बड़ी अटपटी है। कब आपको कौन सा सपना दिखाई दे जाए कोई पता नहीं। आपको कई बार ऐसे सपने भी दिखाई दे जाते हैं जो बड़े ही अटपटे होते हैं और उनका आपकी आपकी निजी ज़िंदगी से कोई संबंध नहीं होता। तो आइए जानते हैं ऐसे अटपटे सपनों का क्या मतलब हो सकता है और ये आपके लिए शुभ संकेत है या अशुभ… स्वप्न शास्त्र: अगर कोई व्यक्ति स्वयं को किसी से पिटते हुए या थप्पड़ खाते हुए जैसा अटपटा सपना देखता है तो ये परेशान होने वाली बात नहीं है। क्योंकि स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना एक शुभ संकेत है। सपनों की दुनिया बड़ी अटपटी है। कब आपको कौन सा सपना दिखाई दे जाए कोई पता नहीं। आपको कई बार ऐसे सपने भी दिखाई दे जाते हैं जो बड़े ही अटपटे होते हैं और उनका आपकी आपकी निजी ज़िंदगी से कोई संबंध नहीं होता। तो आइए जानते हैं ऐसे अटपटे सपनों का क्या मतलब हो सकता है और ये आपके लिए शुभ संकेत है या अशुभ… 1. सपने में किसी को थप्पड़ मारना स्वप्न शास्त्र के अनुसार यदि आप ऐसा सपना देखते हैं जिसमें आप किसी को थप्पड़ मारते है तो इस सपने का मतलब है कि आने वाले समय में आप किसी बड़े झंझट या षड़यंत्र में फंसने वाले हैं। इसलिए सतर्क हो जायें और हर कार्य सोच-समझकर करें। 2. सपने में खुद को पिटते हुए देखना अगर कोई व्यक्ति स्वयं को किसी से पिटते हुए या थप्पड़ खाते हुए जैसा अटपटा सपना देखता है तो ये परेशान होने वाली बात नहीं है। क्योंकि स्वप्न शास्त्र के अनुसार यह सपना एक शुभ संकेत है। यानि अगर आप लंबे समय से कोई योजना बना रहे हैं तो उसे अमल करने का वक्त आ गया है और इस कार्य में आपको सफलता मिल सकती है। 3. सपने में रक्त या लाल वस्तु देखना सपने में अगर आप किसी का रक्त बहते हुए या लाल रंग की कोई चीज देखते हैं तो आपको विचलित होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह आपके लिए एक अच्छा संकेत है। इस सपने का अर्थ है कि आपको आने वाले समय में कहीं से धन लाभ होने का योग है। इसलिए अगर आप पैसा कमाने की कोई योजना बना रहे हैं तो तुरंत उस काम को शुरू करें। आपकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। 4. सपने में स्वयं या किसी और की विदाई देखना स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में यदि आप स्वयं की या किसी और की विदाई होते हुए देखते हैं तो इसका मतलब बहुत सकारात्मक होता है। यानि ऐसा सपना देखने पर आपको व्यापार में कोई बड़ी सफलता मिलने के आसार हैं। आपको कोई बड़ा धन लाभ हो सकता है। वहीं जो लोग नौकरी में हैं वे अगर ऐसा सपना देखते हैं तो आने वाले भविष्य में आपको कोई बड़ा पद प्राप्त होने वाला है। साथ ही विदेश यात्रा का भी योग है।

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Guru Nanak Aarti:गुरु नानक आरती

Guru Nanak Aarti:गुरु नानक आरती के फायदे Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, Guru Nanak Aarti बल्कि यह मन को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने का एक शक्तिशाली साधन है। इस आरती के नियमित जाप से व्यक्ति को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। यहां कुछ प्रमुख फायदे दिए गए हैं: Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती का महत्व: Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती का जाप कैसे करें: निष्कर्ष: Guru Nanak Aarti:गुरु नानक देव जी की आरती एक शक्तिशाली साधन है जो व्यक्ति को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने में मदद करता है। यह न केवल व्यक्तिगत जीवन में बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक है। Guru Nanak Aarti:गुरु नानक आरती श्री गुरु नानक देव आरती ॥ धनासरी महला १ आरती ੴ सतिगुर प्रसादि ॥गगन मै थालु रवि चंदु दीपकबने तारिका मंडल जनक मोती ॥ धूपु मल आनलो पवणु चवरो करेसगल बनराइ फूलंत जोती ॥ कैसी आरती होइ भव खंडना तेरी आरती ॥अनहता सबद वाजंत भेरी रहाउ ॥ सहस तव नैन नन नैन है तोहि कउसहस मूरति नना एक तोही ॥ सहस पद बिमल नन एक पद गंध बिनुसहस तव गंध इव चलत मोही ॥ सभ महि जोति जोति है सोइ ॥तिस कै चानणि सभ महि चानणु होइ ॥ गुर साखी जोति परगटु होइ ॥जो तिसु भावै सु आरती होइ ॥ हरि चरण कमल मकरंद लोभित मनोअनदिनो मोहि आही पिआसा ॥ कृपा जलु देहि नानक सारिंगकउ होइ जा ते तेरै नामि वासा ॥ गगन मै थालु, रवि चंदु दीपक बने,तारका मंडल, जनक मोती।धूपु मलआनलो, पवण चवरो करे,सगल बनराइ फुलन्त जोति॥कैसी आरती होइ॥भवखंडना तेरी आरती॥अनहत सबद बाजंत भेरी॥

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Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती

Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती के फायदे Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश की आरती विशेषकर “शेंदुर लाल चढ़ायो” वाला मंत्र बहुत ही प्रसिद्ध और भक्तों द्वारा प्रिय है। इस आरती के गायन से व्यक्ति को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। यहां कुछ प्रमुख लाभ दिए गए हैं “शेंदुर लाल चढ़ायो” मंत्र का विशेष महत्व कैसे करें आरती निष्कर्ष श्री गणेश की आरती, विशेषकर “शेंदुर लाल चढ़ायो” वाला मंत्र, भक्तों के लिए एक शक्तिशाली साधन है। यह न केवल आध्यात्मिक लाभ प्रदान करता है बल्कि व्यक्ति के जीवन में समृद्धि और सफलता लाने में भी मदद करता है। क्या आप गणेश जी के बारे में और जानना चाहते हैं? यहां कुछ अन्य प्रश्न पूछे जा सकते हैं: Shri Ganesh Shendur Laal Chadhayo Aarti:श्री गणेश – शेंदुर लाल चढ़ायो आरती शेंदुर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुखको ।दोंदिल लाल बिराजे सुत गौरिहरको ।हाथ लिए गुडलद्दु सांई सुरवरको ।महिमा कहे न जाय लागत हूं पादको ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराजविद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ अष्टौ सिद्धि दासी संकटको बैरि ।विघ्नविनाशन मंगल मूरत अधिकारी ।कोटीसूरजप्रकाश ऐबी छबि तेरी ।गंडस्थलमदमस्तक झूले शशिबिहारि ॥जय देव जय देव.. जय देव जय देव,जय जय श्री गणराजविद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥ भावभगत से कोई शरणागत आवे ।संतत संपत सबही भरपूर पावे ।ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे ।गोसावीनंदन निशिदिन गुन गावे ॥ जय देव जय देव,जय जय श्री गणराजविद्या सुखदाताधन्य तुम्हारा दर्शनमेरा मन रमता,जय देव जय देव ॥

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Tulsi Mata Aarti:तुलसी माता आरती

Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरतीचे फायदे Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरती हा एक पवित्र अनुष्ठान आहे जो भक्ती आणि श्रद्धेचे प्रतीक आहे. दत्तगुरुंच्या चरणी ही आरती गाणे हा एक आध्यात्मिक अनुभव आहे जो अनेक प्रकारे फायदेशीर ठरू शकतो. Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरतीचे काही प्रमुख फायदे खालीलप्रमाणे आहेत Tulsi Mata Aarti:दत्ताची आरती करताना काही गोष्टी लक्षात ठेवा अंततः, दत्ताची आरती हा एक वैयक्तिक अनुभव आहे. प्रत्येक व्यक्तीला याचा वेगवेगळ्या प्रकारे अनुभव येतो. जर तुम्ही दत्तगुरुंच्या भक्त असाल तर दत्ताची आरती तुमच्या आध्यात्मिक वाटचालीत एक महत्त्वपूर्ण टप्पा ठरू शकते. Tulsi Mata Aarti:तुलसी माता आरती जय जय तुलसी माता,मैया जय तुलसी माता ।सब जग की सुख दाता,सबकी वर माता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ सब योगों से ऊपर,सब रोगों से ऊपर ।रज से रक्ष करके,सबकी भव त्राता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ बटु पुत्री है श्यामा,सूर बल्ली है ग्राम्या ।विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे,सो नर तर जाता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ हरि के शीश विराजत,त्रिभुवन से हो वंदित ।पतित जनों की तारिणी,तुम हो विख्याता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ लेकर जन्म विजन में,आई दिव्य भवन में ।मानव लोक तुम्हीं से,सुख-संपति पाता ॥॥ जय तुलसी माता…॥ हरि को तुम अति प्यारी,श्याम वर्ण सुकुमारी ।प्रेम अजब है उनका,तुमसे कैसा नाता ॥हमारी विपद हरो तुम,कृपा करो माता ॥ [Extra]॥ जय तुलसी माता…॥ जय जय तुलसी माता,मैया जय तुलसी माता ।सब जग की सुख दाता,सबकी वर माता ॥

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Datta Aarti:दत्ताची आरती

Datta Aarti:दत्ताची आरतीचे फायदे Datta Aarti:दत्ताची आरती हा एक पवित्र अनुष्ठान आहे जो भक्ती आणि श्रद्धेचे प्रतीक आहे. दत्तगुरुंच्या चरणी ही आरती गाणे हा एक आध्यात्मिक अनुभव आहे जो अनेक प्रकारे फायदेशीर ठरू शकतो. Datta Aarti:दत्ताची आरतीचे काही प्रमुख फायदे खालीलप्रमाणे आहेत Datta Aarti:दत्ताची आरती करताना काही गोष्टी लक्षात ठेवा अंततः, दत्ताची आरती हा एक वैयक्तिक अनुभव आहे. प्रत्येक व्यक्तीला याचा वेगवेगळ्या प्रकारे अनुभव येतो. जर तुम्ही दत्तगुरुंच्या भक्त असाल तर दत्ताची आरती तुमच्या आध्यात्मिक वाटचालीत एक महत्त्वपूर्ण टप्पा ठरू शकते. Datta Aarti:दत्ताची आरती त्रिगुणात्मक त्रैमूर्ती दत्त हा जाणा ।त्रिगुणी अवतार त्रैलोक्य राणा ।नेती नेती शब्द न ये अनुमाना ॥सुरवर मुनिजन योगी समाधी न ये ध्याना ॥ जय देव जय देव जय श्री गुरुद्त्ता ।आरती ओवाळिता हरली भवचिंता ॥ सबाह्य अभ्यंतरी तू एक द्त्त ।अभाग्यासी कैची कळेल हि मात ॥पराही परतली तेथे कैचा हेत ।जन्ममरणाचाही पुरलासे अंत ॥ दत्त येऊनिया ऊभा ठाकला ।भावे साष्टांगेसी प्रणिपात केला ॥प्रसन्न होऊनि आशीर्वाद दिधला ।जन्ममरणाचा फेरा चुकवीला ॥ दत्त दत्त ऐसें लागले ध्यान ।हरपले मन झाले उन्मन ॥मी तू पणाची झाली बोळवण ।एका जनार्दनी श्रीदत्तध्यान ॥

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Ram Lala Ki Aarti:आरती राम लला की

Ram Lala Ki Aarti:आरती राम लला की के फायदे Ram Lala Ki Aarti:आरती एक धार्मिक अनुष्ठान है जो भक्ति और श्रद्धा को व्यक्त करने का एक माध्यम है। Ram Lala Ki Aarti राम लला भगवान राम का एक रूप हैं, जिन्हें हिंदू धर्म में आदर्श पुरुष माना जाता है। इसलिए, आरती राम लला की करने से कई लाभ मिल सकते हैं। ये लाभ मुख्यतः मानसिक और आध्यात्मिक होते हैं। Ram Lala Ki Aarti:यहां कुछ प्रमुख लाभ दिए गए हैं ध्यान रखें Ram Lala Ki Aarti:आरती राम लला की के फायदे आरती कीजे श्रीरामलला की ।पूण निपुण धनुवेद कला की ॥ धनुष वान कर सोहत नीके ।शोभा कोटि मदन मद फीके ॥ सुभग सिंहासन आप बिराजैं ।वाम भाग वैदेही राजैं ॥ कर जोरे रिपुहन हनुमाना ।भरत लखन सेवत बिधि नाना ॥ शिव अज नारद गुन गन गावैं ।निगम नेति कह पार न पावैं ॥ नाम प्रभाव सकल जग जानैं ।शेष महेश गनेस बखानैं ॥ भगत कामतरु पूरणकामा ।दया क्षमा करुना गुन धामा ॥ सुग्रीवहुँ को कपिपति कीन्हा ।राज विभीषन को प्रभु दीन्हा ॥ खेल खेल महु सिंधु बधाये ।लोक सकल अनुपम यश छाये ॥ दुर्गम गढ़ लंका पति मारे ।सुर नर मुनि सबके भय टारे ॥ देवन थापि सुजस विस्तारे ।कोटिक दीन मलीन उधारे ॥ कपि केवट खग निसचर केरे ।करि करुना दुःख दोष निवेरे ॥ देत सदा दासन्ह को माना ।जगतपूज भे कपि हनुमाना ॥ आरत दीन सदा सत्कारे ।तिहुपुर होत राम जयकारे ॥ कौसल्यादि सकल महतारी ।दशरथ आदि भगत प्रभु झारी ॥ सुर नर मुनि प्रभु गुन गन गाई ।आरति करत बहुत सुख पाई ॥ धूप दीप चन्दन नैवेदा ।मन दृढ़ करि नहि कवनव भेदा ॥ राम लला की आरती गावै ।राम कृपा अभिमत फल पावै ॥

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Utpanna Ekadashi Puja Muhurat : उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें क्या नहीं? जानें सभी जरूरी नियम

Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता की उत्पति मानी जाती है। शास्त्र में इस दिन को लेकर कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी के दिन क्या करें और क्या नहीं। Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का एक प्रमुख माध्यम माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है और व्यक्ति को सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति को हजारों यज्ञ करने के बराबर पुण्य प्राप्त होता है. Utpanna Ekadashi 2024 Dos and dont: उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि के दिन रखा जाता है। इस साल उत्पन्ना एकादशी का व्रत 26 नवंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्ण की विधि- विधान से पूजा की जाती है। Utpanna Ekadashi उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्पन्ना एकादशी के दिन ही एकादशी माता उत्पन्न हुईं थी, इसलिए इसे उत्पन्ना एकादशी के नाम जाना जाता है। शास्त्रों में उत्पन्ना एकादशी के लिए कुछ खास नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं इस दिन क्या करें क्या नहीं। उत्पन्ना एकादशी तिथि | Utpanna Ekadashi Date पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 26 नवंबर दिन मंगलवार को देर रात 01 बजकर 01 मिनट से लेकर अगले दिन यानी 27 नवंबर दिन बुधवार को देर रात 03 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदया तिथि तिथि के अनुसार, 26 नवंबर को ही उत्पन्ना एकादशी का व्रत किया जाएगा. वहीं व्रत का पारण 27 नवंबर की दोपहर 1 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 3 बजकर 18 मिनट तक किया जा सकता है. उत्पन्ना एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त | Utpanna Ekadashi Puja Muhurat पंचांग के अनुसार, उत्पन्ना एकादशी पूजा का समय 26 नवंबर सुबह 11 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा. Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन करें ये काम Utpanna Ekadashi:उत्पन्ना एकादशी के दिन न करें ये काम उत्पन्ना एकादशी का महत्व | Utpanna Ekadashi Significance मान्यता के अनुसार, एकादशी का पालन करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश होता है. इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मोक्ष प्राप्ति और विष्णु लोक में स्थान मिलता है. इस व्रत को करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है. यह व्रत करने से न केवल वर्तमान जीवन में सुख-शांति मिलती है, बल्कि अगले जन्म में भी शुभ फल प्राप्त होते हैं. Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती

Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती के लाभ Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ, नाथ संप्रदाय के एक प्रमुख संत हैं और उन्हें योगीश्वर भी कहा जाता है। Baba Goraknath Aarti उनकी आरती का गायन न केवल आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है बल्कि कई अन्य लाभ भी देता है। Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: Baba Goraknath Aarti:बाबा गोरखनाथ आरती जय गोरख देवा,जय गोरख देवा ।कर कृपा मम ऊपर,नित्य करूँ सेवा ॥ शीश जटा अति सुंदर,भाल चन्द्र सोहे ।कानन कुंडल झलकत,निरखत मन मोहे ॥ गल सेली विच नाग सुशोभित,तन भस्मी धारी ।आदि पुरुष योगीश्वर,संतन हितकारी ॥ नाथ नरंजन आप ही,घट घट के वासी ।करत कृपा निज जन पर,मेटत यम फांसी ॥ रिद्धी सिद्धि चरणों में लोटत,माया है दासी ।आप अलख अवधूता,उतराखंड वासी ॥ अगम अगोचर अकथ,अरुपी सबसे हो न्यारे ।योगीजन के आप ही,सदा हो रखवारे ॥ ब्रह्मा विष्णु तुम्हारा,निशदिन गुण गावे ।नारद शारद सुर मिल,चरनन चित लावे ॥ चारो युग में आप विराजत,योगी तन धारी ।सतयुग द्वापर त्रेता,कलयुग भय टारी ॥ गुरु गोरख नाथ की आरती,निशदिन जो गावे ।विनवित बाल त्रिलोकी,मुक्ति फल पावे ॥

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Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती

Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती के लाभ Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती करना मात्र एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रभक्ति और देश प्रेम का प्रतीक भी है। यह आरती न केवल आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है बल्कि देश के प्रति समर्पण की भावना को भी जागृत करती है। Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती के कुछ प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: Bharat Mata Ki Aarti:कब करें आरती: Bharat Mata Ki Aarti:कैसे करें आरती: ध्यान रखें: Bharat Mata Ki Aarti:भारत माता की आरती आरती भारत माता की,जगत के भाग्य विधाता की ।आरती भारत माता की,ज़गत के भाग्य विधाता की । सिर पर हिम गिरिवर सोहै,चरण को रत्नाकर धोए,देवता गोदी में सोए,रहे आनंद, हुए न द्वन्द,समर्पित छंद,बोलो जय बुद्धिप्रदाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । जगत में लगती है न्यारी,बनी है इसकी छवि न्यारी,कि दुनियाँ देख जले सारी,देखकर झलक,झुकी है पलक, बढ़ी है ललक,कृपा बरसे जहाँ दाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । गोद गंगा जमुना लहरे,भगवा फहर फहर फहरे,लगे हैं घाव बहुत गहरे,हुए हैं खण्ड, करेंगे अखण्ड,देकर दंड मौत परदेशी दाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । पले जहाँ रघुकुल भूषण राम,बजाये बँसी जहाँ घनश्याम,जहाँ का कण कण तीरथ धाम,बड़े हर धर्म, साथ शुभ कर्म,लढे बेशर्म बनी श्री राम दाता की,जगत के भाग्य विधाता की आरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की । बड़े हिन्दू का स्वाभिमान ,किया केशव ने जीवनदान,बढाया माधव ने भी मान,चलेंगे साथ,हाथ में हाथ, उठाकर माथ,शपथ गीता गौमाता की,जगत के भाग्य विधाता कीआरती भारत माता की,जगत के भाग्यविधाता की ।

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Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती

Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती के लाभ Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती का गायन मात्र ही मन को शांति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह माना जाता है कि उनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: Shakumbhari Devi Ki Aarti:कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: Shakumbhari Devi Ki Aarti:श्री शाकुम्भरी देवी जी की आरती हरि ओम श्री शाकुम्भरी अंबा जी की आरती क़ीजोएसी अद्वभुत रूप हृदय धर लीजोशताक्षी दयालू की आरती किजो तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ,सब घट तुम आप भखनी माँशकुंभारी अंबा जी की आरती किजो तुम्ही हो शाकुम्भर,तुम ही हो सताक्षी माँशिवमूर्ति माया प्रकाशी माँशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो नित जो नर नारी अंबे आरती गावे माँइच्छा पूरण किजो,शाकुम्भर दर्शन पावे माँशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो जो नर आरती पढ़े पढ़ावे माँ,जो नर आरती सुनावे माँबस बैकुण्ठ शाकुम्भर दर्शन पावेशाकुम्भरी अंबा जी की आरती किजो

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Kushmanda Aarti:कूष्मांडा आरती

Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा आरती के लाभ Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा की आरती का गायन मात्र ही मन को शांति और आत्मविश्वास प्रदान करता है। यह माना जाता है कि उनकी कृपा से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा आरती के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं: कब करें आरती: कैसे करें आरती: ध्यान रखें: अन्य लाभ: निष्कर्ष: Kushmanda Aarti:मां कूष्मांडा की आरती का गायन एक पवित्र अनुष्ठान है Kushmanda Aarti जो भक्तों को शांति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक विकास प्रदान करता है। Kushmanda Aarti:कूष्मांडा आरती माँ कूष्मांडा आरती:कूष्मांडा जय जग सुखदानी ।मुझ पर दया करो महारानी ॥ पिगंला ज्वालामुखी निराली ।शाकंबरी मां भोली भाली ॥ लाखों नाम निराले तेरे ।भक्त कई मतवाले तेरे ॥ भीमा पर्वत पर है डेरा ।स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ॥ सबकी सुनती हो जगदंबे ।सुख पहुंचती हो मां अंबे ॥ तेरे दर्शन का मैं प्यासा ।पूर्ण कर दो मेरी आशा ॥ मां के मन में ममता भारी ।क्यों ना सुनेगी अरज हमारी ॥ तेरे दर पर किया है डेरा ।दूर करो माँ संकट मेरा ॥ मेरे कारज पूरे कर दो ।मेरे तुम भंडारे भर दो ॥ तेरा दास तुझे ही ध्याए ।भक्त तेरे दर शीश झुकाए ॥

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