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Raksha Bandhan 2024: भाई की तरक्की के लिए हर बहन को रक्षाबंधन पर करने चाहिए ये 5 उपाय

Raksha Bandhan 2024 भाई की तरक्की के लिए रक्षाबंधन के 5 अचूक उपाय Raksha Bandhan 2024 रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं। इस पवित्र त्योहार पर आप अपने भाई की उन्नति और सफलता के लिए कुछ खास उपाय कर सकती हैं। आइए जानते हैं उन उपायों के बारे में: Raksha Bandhan 2024: इस साल 19 अगस्त 2024 को राखी का पर्व मनाया जाएगा। ये दिन सभी बहनों के लिए बहुत खास होता है, क्योंकि वह भाई की लंबी उम्र और तरक्की की कामना करते हुए उसकी कलाई पर राखी बांधती है। Raksha Bandhan 2024 इस दौरान भाई अपनी बहन को रक्षा का वचन देता है। भारत में इसे विश्वास और प्रेम बढ़ाने वाला पर्व माना गया है। वहीं इस साल राखी का त्योहार सभी के लिए लाभदायक रहने वाला है। इस तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शोभन योग और श्रवण नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। यही नहीं इस दिन सावन माह का अंतिम सोमवार व्रत भी रखा जाएगा। ऐसे में रक्षाबंधन के दिन कुछ खास उपाय करने से भाई के जीवन में चल रही समस्याओं का निवारण होता है। साथ ही रिश्तों में मिठास बनी रहती है। आइए इन उपायों के बारे में जान लेते हैं। Raksha Bandhan 2024:90 साल बाद रक्षा बंधन पर बन रहा दुर्लभ संयोग, इन 3 राशियों की बदल जाएगी किस्मत, मिलेगा पैसा और शोहरत 1.शिव जी की पूजा  इस साल रक्षाबंधन पर सावन का आखिरी सोमवार व्रत भी रखा जा रहा है। ऐसे में बहनों को भाई की तरक्की और लंबी उम्र के लिए शिव जी की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं। 2. मंदिर में जाएं: 3. दान करें: 4. मंत्र जाप: 5. राखी बांधते समय मंत्र: यम सूत्रं बध्नामि रक्षे मा चल मा चल। अक्षतैश्च पुष्पैश्च यथा शुभं भवति। तथा ते भवतु सर्वदा। अर्थ: मैं तुझे यम का सूत्र बांधती हूँ, हे भाई तू चल नहीं। अक्षत और पुष्पों से जिस प्रकार शुभ होता है, उसी प्रकार तेरा जीवन सदैव शुभ हो। अन्य उपाय: ध्यान दें: ये सभी उपाय केवल आस्था और विश्वास पर आधारित हैं। Raksha Bandhan 2024 इन उपायों को करने से भाई की उन्नति जरूरी नहीं है। सफलता के लिए कड़ी मेहनत और लगन भी बहुत जरूरी है। रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को और मजबूत बनाने का अवसर है। इन उपायों को करते हुए आप अपने भाई के लिए शुभकामनाएं दें और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना करें। डिस्क्लेमर  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर KARMASU.IN नहीं है। 

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Rakshabandhan 2024 Tilak: रक्षाबंधन पर छोटे और बड़े भाई को टीका लगाने के हैं अलग नियम, जानें किस उंगली से करें तिलक

Rakshabandhan 2024 Tilak रक्षाबंधन 2024: भाई को तिलक लगाने के नियम Rakshabandhan 2024 Tilak रक्षाबंधन का त्योहार बहन और भाई के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देता है। रक्षाबंधन के दिन भाई को तिलक लगाने की परंपरा भी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि छोटे और बड़े भाई को तिलक लगाने के अलग-अलग नियम होते हैं? आइए जानते हैं इन नियमों के बारे में विस्तार से। Rakshabandhan 2024 Tilak इस साल 19 अगस्त 2024, सोमवार को रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जा रहा है। यह त्योहार भाई-बहन के रिश्ते के लिए खास है और दोनों साल भर इसका इंतजार करते हैं। यह एक खास दिन होता है जब बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र  यानी राखी बांधती है Rakshabandhan 2024 Tilak और उसके सुखी जीवन की कामना करती है। जैसा कि आप सब जानते हैंकि राखी बांधने से पहले बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है, लेकिन कई बहनें जानकारी के अभाव में गलत तरीके से तिलक लगाती हैं। तिलक का प्रयोग करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। आप तिलक लगाने के लिए किस उंगली का उपयोग करते हैं? ये भी महत्वपूर्ण है। आइए जानते हैं तिलक से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। तिलक के लिए कौन सी उंगली का प्रयोग करें?ज्योतिषियों के अनुसार भाई के माथे पर तिलक लगाते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तिलक के लिए कौन सी उंगली चुनें। अगर आपका भाई बड़ा है और बहन छोटी है Rakshabandhan 2024 Tilak तो आपको अपनी छोटी उंगली पर तिलक लगाना चाहिए। यह तथाकथित अनामिका है, जिस पर सगाई की अंगूठियां भी पहनी जाती हैं। वहीं अगर भाई छोटा है और बहन बड़ी है तो बहन को अपने अंगूठे से तिलक लगाना चाहिए। Aja Ekadashi 2024: अजा एकादशी कब? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व भाई को तिलक लगाने का महत्व छोटे भाई को तिलक लगाने के नियम बड़े भाई को तिलक लगाने के नियम अन्य बातें जिनका ध्यान रखना चाहिए Rakshabandhan 2024 Tilak दाहिने हाथ की अंगुलियों से तिलक लगाने के फायदे इस बात का भी रखें ध्यानयह भी याद रखें कि तिलक हमेशा सीधा लगाना चाहिए, तिरछा नहीं। तिलक के बाद चावल अवश्य लगाएं। इसके बिना तिलक अधूरा माना जाता है। राखी बांधने का शुभ मुहूर्तभद्रा के कारण राखी बांधने का मुहूर्त दोपहर में नहीं है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल राखी बांधने का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:30 से रात्रि 09:07 तक रहेगा। कुल मिलाकर शुभ मुहूर्त 07 घंटे 37 मिनट का रहेगा। डिस्क्लेमर ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है।

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Krishna Janmashtami 2024:जन्माष्टमी पूजा में न करें ऐसी भूल, जानें क्या करें, क्या न करें

Krishna Janmashtami 2024: वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन कृष्ण जन्माष्टमी पर्व हर्षोल्लाह के साथ मनाया जाता है. यह दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है Krishna Janmashtami 2024 कृष्ण जन्माष्टमी 2024 Krishna Janmashtami 2024 वैदिक पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 26 अगस्त सुबह 03:40 पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 27 अगस्त सुबह 02:19 पर होगा. ऐसे में कृष्ण जन्माष्टमी व्रत का पालन 26 अगस्त 2024, सोमवार के दिन किया जाएगा. इस विशेष दिन पर मध्य रात्रि का क्षण 27 अगस्त रात्रि 12:25 पर है और पूजा के लिए शुभ मुहूर्त मध्य रात्रि 12:02 से रात्रि 12:45 के बीच रहेगा. वही व्रत का पारण 27 अगस्त सुबह 05:55 के बाद किया जा सकेगा. जन्माष्टमी पूजा में क्या करें: Krishna Janmashtami 2024 जन्माष्टमी पर क्या करें के बाद व्रत का संकल्प लें. इस दिन कुछ लोग पूरे दिन फलाहार या एक समय भोजन करते हैं. इसलिए व्रत का संकल्प अपनी क्षमता अनुसार ही लें और उसे पूरा करें. ऐसे सजाएं झांकी- श्रीकृष्ण को शंख के माध्यम से ही जल या दूध से स्नान कराएं. इस दिन पूजा से पहले सुगंधित फूलों से भगवान कान्हा की झांकी सजाएं. कान्हा को झूले में विराजमान करें. पालने के पास बांसुरी, मोरपंख अवश्य रखें. कान्हा का श्रृंगार – श्रीकृष्ण के अभिषेक के बाद उन्हें स्वच्छ कपड़े, आभूषण, मुकुट, पहलनाएं. श्रृंगार करें, काजल जरुर लगाएं, क्योंकि यशोदा मैय्या कान्हा को तैयार करने के बाद उन्हें बुरी नजर से बचाने के लिए काजल लगाती थीं. खीरा जरुर काटें – रात में 12 बजे खीरा काटकर कान्हा का जन्म कराएं. जन्माष्टमी के दिन खीरे को उसके तने से काटकर अलग किया जाता है। इसे श्री कृष्ण का माता देवकी से अलग होने का प्रतीक माना गया है. भोग – पूजा में बाल गोपाल को माखन, मिश्री, धनिए की पंजीरी, मखाने की खीर, मिठाई का भोग लगाएं. इसके बिना कान्हा की पूजा अधूरी है. भोग में तुलसी दल जरुर डालें, इसके बिना कान्हा भोग स्वीकार नहीं करते व्रत पारण – जन्माष्टमी व्रत में पूजा के बाद ही व्रत खोलने चाहिए, कुछ लोग रात्रि में ही व्रत पारण कर लेते हैं तो कुछ अगले दिन सूर्योदय के बाद या फिर अष्टमी तिथि के समापन के पश्चात व्रत खोलते हैं. ध्यान रहें आपने जैसा व्रत का संकल्प लिया है Krishna Janmashtami 2024 उसी के अनुसार व्रत का पारण करें. जन्माष्टमी पर क्या न करें जन्माष्टमी का महत्व: जन्माष्टमी का त्योहार हमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर देता है। भगवान कृष्ण ने हमें सत्य, अहिंसा और धर्म का मार्ग दिखाया। Krishna Janmashtami 2024 जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण की पूजा करने से मन शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। Disclaimer: यह सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Nagpanchami : नागपंचमी के दिन भूल से भी न करना ये काम, नहीं तो लग जाएगा दोष

Nagpanchami नागपंचमी: कुछ सावधानियां बरतने की जरूरत Nagpanchami नागपंचमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है। नाग देवता को जल, दूध और फल चढ़ाए जाते हैं। इस दिन कुछ विशेष सावधानियां बरतने की आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं नागपंचमी के दिन क्या-क्या सावधानियां बरतनी चाहिए। Nagpanchami नागपंचमी के दिन क्या न करें? इन गलतियों से बचें और नाग देवता को प्रसन्न करें नागपंचमी के दिन क्या करें? क्यों मनाई जाती है नागपंचमी? Nagpanchami नागपंचमी को नाग देवता की पूजा का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन नाग देवता पृथ्वी पर आते हैं। नाग देवता को जल, दूध और फल चढ़ाकर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। ऐसा माना जाता है कि नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है। हिन्दू धर्म मे नाग महाराज को देवता के रूप मे पूजा जाता है. साल भर मे एक ऐसा पर्व आता है. जिस दिन नाग महाराज की पूजा की जाती है. हर बार श्रावण मास के शुक्‍ल पक्ष की पंचमी तिथि नागपंचमी मनाई जाती है. अबकी बार नागपंचमी 9 अगस्‍त को है. इस दिन भगवान शिव के गण माने जाने वाले नाग देवता की घर-घर में पूजा की जाती है. इस दिन नागदेवता की पूजा करने से आपका धन बढ़ता है. सर्पदंश का भय दूर होता है. Nagpanchami इस दिन ऐसे बहुत से कार्य है जिनको भूल से भी नहीं करना चाहिए. आइए जानते है उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से नागपंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए. नाग पंचमी पूजा विधिनाग पंचमी के दिन सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पहले उठकर नित्य कर्मों से मुक्त हो लें. स्नान करें. इसके बाद शिव जी के साथ-साथ नाग देवता की पूजा करें. नाग देवता की पूजा में फल, फूल, मिठाई और दूध अर्पित करें. मान्यताओं के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या फिर राहु-केतु से संबंधित कोई दोष हो तो नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा जरूर करनी चाहिए. नागपंचमी पर भूल से भी ना करें यह कार्यNagpanchami नाग पंचमी के दिन भूल से भी सांप को नहीं मारना चाहिए. अगर सांप को नुकसान पहुंचाते हैं. इसका पाप आप पर नहीं, बल्कि आपके पूरे वंश पर पड़ेगा. नागपंचमी के दिन चूल्हे पर खाना बनाने के लिए तवा और लोहे की कढ़ाही का उपयोग नहीं करना चाहिए. ऐसा करने से नाग देवता को कष्ट हो सकता है. नाग पंचमी के दिन जमीन की खुदाई नहीं करनी चाहिए. माना जाता है कि जमीन के अंदर सापों का बिल रहता है. जमीन की खुदाई करने से सांपों का घर या बिल नष्ट हो सकता है. ऐसा करने से कई पीढ़ियों को दोष लगता है. धार्मिक शास्त्र के अनुसार, नाग पंचमी के दिन धारदार वस्तु का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. जैसे सिलाई, कढ़ाई, इत्यादि अशुभ माना जाता है.

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Raksha Bandhan 2024: राखी बांधते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान, अन्यथा भाइयों को हो सकती है परेशानी

Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन का त्योहार हर साल सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। यह त्योहा भाई-बहन के प्यार का प्रतीक है।  देशभर में रक्षाबंधन का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन को श्रावणी पूर्णिमा भी कहा जाता है। सावन पूर्णिमा के बाद भाद्रपद मास प्रारंभ हो जाता है। रक्षाबंधन पर बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। Raksha Bandhan 2024 इस बार राखी का यह पवित्र त्यौहार 19 अगस्त 2024,  दिन सोमवार को होगा। इस दिन बहन अपने भाई का तिलक करती है और राखी बांधती है। बदले में,  भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वादा करता है और उसे उसकी क्षमताओं के अनुसार उपहार देता है। परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन के दिन कई बातों का ध्यान रखना होता है। अगर आप इन बातों का ध्यान नहीं रखेंगे तो भाइयों के समक्ष समस्या आ सकती है। आइए जानते हैं विस्तार से ।  खंडित अक्षत का प्रयोग न करेंRaksha Bandhan 2024 राखी के दिन बहन अपने भाई के माथे पर अक्षत (चावल) और कुमकुम मिलाकर तिलक लगाती है। हिंदू धर्म में, अक्षत का अर्थ है “जिसको कोई नुकसान न पहुंचे।” भाई को तिलक लगाते समय ध्यान रखें कि टूटे हुए चावल का प्रयोग न करें। दिशा का ध्यान रखेंवास्तु के अनुसार रक्षाबंधन के दिन राखी बांधना शुभ होता है। राखी बांधते समय बहनों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि भाई का मुंह दक्षिण दिशा की ओर न हो। राखी बांधते समय मुख उत्तर और पूर्व की ओर होना चाहिए। Raksha Bandhan 2024 काली राखी न बांधें  इस बात का विशेष ध्यान रखें कि राखी के दिन काली राखी न पहनें। शास्त्रों में यह रंग नकारात्मकता का भी प्रतिनिधित्व करता है। भद्रा और राहुकाल का ध्यान रखेंहिंदू पंचांग के अनुसार भद्रा और राहुकाल के दौरान भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधनी चाहिए। दोनों ही समय अत्यंत प्रतिकूल माने जाते हैं। इन दोनों समय में किए गए कार्य अशुभ माने जाते हैं। Raksha Bandhan 2024 ऐसा माना जाता है कि इस समय राखी बांधने से भाई पर कई परेशानियां आती हैं। बहन को भूलकर भी न दें ये उपहारराखी के दिन भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। इस दिन अपनी बहन को तौलिए और टिश्यू न दें। इसके अलावा, चित्र फ़्रेम, दर्पण या नुकीली वस्तुएं न दें। यह सब अप्रिय माना जाता है। रक्षाबंधन 2024: राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और रिश्ते का प्रतीक है। इस पावन पर्व पर बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं। Raksha Bandhan 2024 लेकिन क्या आप जानते हैं कि राखी बांधते समय कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है? अगर इन बातों का ध्यान नहीं रखा गया तो भाइयों को परेशानी हो सकती है। Raksha Bandhan 2024 राखी बांधते समय इन बातों का जरूर रखें ध्यान Raksha Bandhan 2024 अन्य बातें जिनका ध्यान रखना चाहिए (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Raksha Bandhan 2024: इस साल राखी बांधने का सही समय यहां जानिए

Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन का पर्व सभी बहनों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, और उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। Raksha Bandhan 2024 Shubh Muhurat Time: रक्षाबंधन का पर्व सभी बहनों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं, और उसकी लंबी उम्र की कामना करती हैं। इस दौरान भाई भी अपनी बहन को रक्षा का वचन देता है, और क्षमता के अनुसार उसे उपहार देता है। भारत में राखी के पवित्र पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इसे रिश्तों में मिठास, विश्वास और प्रेम बढ़ाने वाला पर्व माना गया है। इसे हर साल सावन मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। वहीं इस साल 19 अगस्त 2024 को रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शोभन योग और श्रवण नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। माना जाता है कि इस योग में राखी बांधने से रिश्तों में मधुरता बनी रहती है। लेकिन इस साल Raksha Bandhan 2024 रक्षाबंधन के दिन भद्राकाल का साया भी रहेगा, और इस काल में राखी बांधना अशुभ हो सकता है। ऐसे में आइए राखी बांधने का सही समय क्या है, जान लेते हैं। Raksha Bandhan 2024:राखी बांधने की विधि Raksha Bandhan 2024: रक्षाबंधन का महत्व रक्षाबंधन का महत्व सिर्फ एक त्योहार से कहीं अधिक है। यह भाई-बहन के बीच का प्यार, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र और खुशहाली की कामना करती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा करने का वचन देते हैं। ध्यान देने योग्य बातें भद्राकाल का समयइस साल रक्षाबंधन के दिन भद्रा सुबह 5 बजकर 53 मिनट से आरंभ हो जाएगी, जो दोपहर 1 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 2024 पंचांग के अनुसार इस साल राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 19 अगस्त को दोपहर 01:30 से लेकर रात्रि 09:07 तक रहेगा। इस मुहूर्त में आप भाई को राखी बांध सकती है।  रक्षाबंधन के दिन भद्रा काल का होना शुभ नहीं माना जाता है। इसलिए, भद्रा काल के बाद ही राखी बांधने का शुभ मुहूर्त माना जाता है। राखी बांधने की सही विधिRaksha Bandhan 2024 भाई की कलाई पर राखी हमेशा सही विधि से बाधंनी चाहिए। इस दौरान सबसे पहले भाई को रोली, अक्षत का टीका लगाएं। फिर भाई के दाहिने कलाई पर राखी बांधें। इसके बाद उसे मिठाई खिलाएं। फिर भाई की आरती उतारे, और उसके सुखी जीवन की कामना करें। वहीं राखी बंधवाने के बाद भाई को अपनी बहनों के चरण स्पर्श करने चाहिए। Raksha Bandhan 2024 रक्षा बंधन का मंत्र येन बद्धो बलि राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि ,रक्षे माचल माचल:। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Nag Panchami 2024:इन गलतियों से बचें और नाग देवता को प्रसन्न करें

Nag Panchami नाग पंचमी का त्योहार हिंदू धर्म में काफी महत्वपूर्ण है। इस दिन नाग देवता की पूजा की जाती है और मान्यता है कि ऐसा करने से नाग दोष से मुक्ति मिलती है। हालांकि, नाग पंचमी के दिन कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। आइए जानते हैं कि नाग पंचमी के दिन किन गलतियों से बचना चाहिए | हिंदू धर्म में नाग पंचमी के त्योहार का खास महत्व है। नाग पंचमी सावन के महीने में मनाई जाती है। सावन का महीना भगवान शिव और नाग की पूजा के लिए सबसे उत्तम महीना माना गया है। सनातन धर्म में Nag Panchami नाग पंचमी के दिन भगवान भोलेनाथ और नागदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस खास मौके पर कुछ गलतियां भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से अशुभ फल मिलते हैं चलिए जानते हैं… नाग पंचमी 2024 (Nag Panchami 2024) हिंदू धर्म में Nag Panchami नाग पंचमी का दिन बेहद खास माना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ नागदेव की विशेष पूजा की जाती है। इस शुभ अवसर पर किए पूजा-पाठ और धर्म-कर्म के कार्यों से व्यक्ति को शुभ फल प्राप्त होते हैं, लेकिन नाग पंचमी के दिन कुछ गलतियां आपके जीवन में बड़ी मुश्किलें और बाधाएं ला सकती है। इसलिए इस दिन इन गलतियों को भूलकर भी ना करें। चलिए जानते हैं कि नाग पंचमी की नाग पंचमी कब हैं और इस दिन क्या नहीं करना चाहिए? साल 2024 में कब है नाग पंचमी, जानें तारीख और शुभ मुहूर्त Nag Panchami 2024 कब है नाग पंचमी 2024?  हर साल सावन मास शुक्ल पक्ष की Nag Panchami पंचमी को नाग पंचमी मनाया जाता है। साल 2023 में 22 अगस्त 2023 को नाग पंचमी पड़ रहा है। इस दिन भगवान शिव और नाग देवता की विशेष पूजा होती है। नागदेव को चावल, फूल, हल्दी और रोली अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही धन-वैभव और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।  Nag Panchami नागपंचमी पर ना करें ये काम दूसरों के बारे में नकारात्मक ना बोलें: मान्यता है कि इस शुभ दिन किसी व्यक्ति के बारे में नकारात्मक बातें नहीं बोलनी चाहिए। दूसरों के बारे में गलत बाते बोलने से समाज में आपकी खराब छवि बनेगी और आपको दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए इस दिन भूलकर भी किसी के बारे बुरे-शब्दों का इस्तेमाल ना करें। नुकीली चीजों का इस्तेमाल: नाग पंचमी के दिन नुकीली और धारदार चीजों का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इस दिन सुई-धागा का भी इस्तेमाल करने से अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसलिए इस दिन ये काम बिल्कुल ना करें। लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल: नाग पंचमी के विशेष मौके पर लोहे के बर्तनों का इस्तेमाल करना और उसमें खाना बनाना बेहद अशुभ माना गया है। इस दिन लोहे के बर्तनों के उपयोग से जीवन में बैड लक आता है। खेती का काम ना करें: मान्यता है कि नाग पंचमी के अवसर पर खेती की जुताई या मिट्टी नहीं खोदना चाहिए। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है। इस खास मौके पर हरे पेड़-पौधों को भी नहीं काटना चाहिए। सांपो को परेशान ना करें: नाग पंचमी के दिन सांपो को परेशान नहीं करना चाहिए। अगर में घर में कहीं सांप निकल जाए, तो उसे बाहर फेंकने के लिए किसी की मदद लें। लेकिन सांप को मारना नहीं चाहिए। नाग पंचमी मंत्र (Nag Panchami Mantra) ॐ भुजंगेशाय विद्महे, सर्पराजाय धीमहि, तन्नो नाग: प्रचोदयात्।। सर्वे नागा: प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथ्वीतले। ये च हेलिमरीचिस्था ये न्तरे दिवि संस्थिता:।। ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिन:। ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नम:।। अनंत वासुकी शेषं पद्मनाभं च मंगलम्शं खपालं ध्रतराष्ट्रकंच तक्षकं कालियं तथा।। ॐ हँ जू स: श्री नागदेवतायेनमोनम:।। ॐ श्री भीलट देवाय नम:।। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Krishna Janmashtami 2024: क्या हैं कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम और पूजा विधि ?

कृष्ण जन्माष्टमी व्रत के नियम (Krishna Janmashtami Vrat Niyam 2024) भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्री कृष्ण (Shri Krishna) का जन्म हुआ था। इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह हिन्दू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है। भक्तजन इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना करते हैं, व्रत रखते हैं, और उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं। जन्माष्टमी (Janmashtami) पर भगवान कृष्ण (Shri Krishna) के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है। उनके जन्म का समय मध्यरात्रि माना जाता है, इसलिए देर रात तक भजन-कीर्तन और आरती होती है। भक्त इस पावन अवसर पर कान्हा के श्रृंगार में तल्लीन हो जाते हैं। Krishna Janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। इस दिन व्रत रखने से भगवान कृष्ण (Shri Krishna) प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी कृपा बरसाते हैं। लेकिन व्रत रखते समय कुछ नियमों का पालन करना अति आवश्यक है। इसके साथ ही, तुलसी का भी इस दिन विशेष महत्व है। Krishna Janmashtami कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कृष्ण जन्माष्टमी हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का जश्न मनाता है। यह त्योहार आमतौर पर भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। ह त्योहार हर साल भाद्रपद माह की Krishna Janmashtami कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, 26 अगस्त को रात 3:39 बजे अष्टमी तिथि शुरू होगी जो अगले दिन 27 अगस्त को रात 2:19 बजे समाप्त होगी। हालांकि, भगवान कृष्ण का जन्म मध्यरात्रि में हुआ था, इसलिए उनकी पूजा 26 अगस्त की रात को की जाएगी। साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है? जन्माष्टमी व्रत के नियम जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भक्त विभिन्न नियमों का पालन करते हुए भगवान की पूजा करते हैं। जन्माष्टमी व्रत के कुछ प्रमुख नियम दिए गए हैं यह व्रत भक्तों के लिए भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपने भक्ति व्यक्त करने और उनकी आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर होता है। जन्माष्टमी व्रत विधि जन्माष्टमी का व्रत भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन पर मनाया जाता है। यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं और व्रत रखते हैं। व्रत का संकल्प व्रत के नियम पूजा विधि व्रत पारण जन्माष्टमी का महत्व जन्माष्टमी का महत्व इसलिए भी है क्योंकि भगवान श्रीकृष्ण को धर्म, कर्म और योग का प्रतीक माना जाता है। उनकी लीलाओं से हमें जीवन जीने का सही मार्ग दिखता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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When is Janmashtami 2024: साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है?

When is Janmashtami साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी कब है? When is Janmashtami 2024 कृष्ण जन्माष्टमी, भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के रूप में मनाया जाने वाला एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह त्योहार हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। When is Janmashtami 2024: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को When is Janmashtami 2024 जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, द्वापर युग में इसी दिन भगवान विष्णु ने भगवान कृष्ण का अवतार लिया था। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को मथुरा में हुआ था। इस दिन भक्त भगवान कृष्ण के बालस्वरूप की विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और उपवास रखते हैं। जानें साल 2024 में कब मनाई जाएगी कृष्ण जन्माष्टमी और आने वाले पांच सालों में जन्माष्टमी कब है- कार्तिक मास को क्यों कहते हैं दामोदर माह ? साल 2024 में जन्माष्टमी कब है- साल 2024 में कृष्ण जन्माष्टमी 26 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी।  When is Janmashtami 2024 साल 2024 में अष्टमी तिथि व रोहिणी नक्षत्र कब से कब तक- अष्टमी तिथि 26 अगस्त को सुबह 03 बजकर 39 मिनट से प्रारंभ होगी और 27 अगस्त को सुबह 02 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। रोहिणी नक्षत्र 26 अगस्त को शाम 03 बजकर 55 मिनट पर प्रारंभ होगा और 27 अगस्त को शाम 03 बजकर 38 मिनट पर समाप्त होगा। निशिथ काल पूजा का समय- 26 अगस्त को रात 12 बजे से लेकर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा।व्रत पारण का समय- 27 अगस्त को सुबह 05 बजकर 56 मिनट के बाद होगा।दही हांडी- 27 अगस्त 2024, मंगलवार को होगा। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Paush Purnima:24 या 25 जनवरी, पौष पूर्णिमा कब हैं ? नोट कर लें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजाविधि

Paush Purnima January 2024 : हर साल जनवरी माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पौष पूर्णिमा मनाई जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्यदेव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। Paush Purnima 2024 Date हर साल जनवरी माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को पौष पूर्णिमा मनाई जाती है। हिंदू धर्म में पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का बड़ा महत्व है। इस दिन पौष पूर्णिमा मनाई जाती है। पौष पूर्णिमा के दिन सूर्यदेव की पूजा-आराधना और स्नान-दान के कार्य बेहद शुभ माने जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन सूर्य और चंद्रदेव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए जानते हैं पौष पूर्णिमा की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजाविधि … कब है पौष पूर्णिमा ? हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल 24 जनवरी 2024 को रात्रि 9 बजकर 24 मिनट से पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत होगी और अगले दिन यानी 25 जनवरी 2024 को रात्रि 11 बजकर 23 मिनट तक रहेगी। इसलिए उदयातिथि के अनुसार, इस वर्ष 25 जनवरी 2024 को पौष पूर्णिमा मनाई जाएगी। Kalashtami 2024:साल 2024 में कब-कब रखा जाएगा कालाष्टमी व्रत? जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त पौष पूर्णिमा पर बन रहें हैं अद्भुत संयोग :  इस साल पौष पूर्णिमा के दिन पुनर्वसु नक्षत्र , सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और गुरु पुष्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। इस शुभ योग में स्नान-दान समेत सभी धार्मिक कार्यों का कई गुना ज्यादा फल मिलता है। पौष पूर्णिमा का महत्व : हिंदू धर्म में पौष पूर्णिमा के उदयातिथि में स्नान-दान का बड़ा महत्व है। इस दिन सूर्यदेव के साथ चंद्रदेव की भी पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन स्नान, दान और धर्म-कर्म के कार्यों से पुण्य की प्राप्ति होती है। पौष पूर्णिमा के दिन पूजा विधि पौष पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर मंदिर जाएं। मंदिर में देवी शाकम्भरी की पूजा करें। देवी शाकम्भरी को फल, फूल, मिठाई, और प्रसाद अर्पित करें। देवी शाकम्भरी की आरती करें। घर पर भी देवी शाकम्भरी की पूजा कर सकते हैं। इसके लिए एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर देवी शाकम्भरी की तस्वीर या मूर्ति रखें। देवी शाकम्भरी को फल, फूल, मिठाई, और प्रसाद अर्पित करें। देवी शाकम्भरी की आरती करें। पूजा के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें। सूर्यदेव को जल, फूल, और अक्षत अर्पित करें। इसके बाद अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और पिंडदान करें। इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें। पौष पूर्णिमा के दिन व्रत पौष पूर्णिमा के दिन व्रत रखने से विशेष फल मिलता है। इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। फिर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर मंदिर जाएं। मंदिर में देवी शाकम्भरी की पूजा करें। देवी शाकम्भरी से व्रत रखने की अनुमति लें। व्रत के दौरान सात्विक भोजन करें। मांस, मदिरा, और नशीले पदार्थों से दूर रहें। व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। फिर मंदिर जाएं और देवी शाकम्भरी की पूजा करें। शाम को सूर्यास्त के बाद व्रत का पारण करें। DIS.इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

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Kalashtami :साल में कब-कब रखा जाएगा कालाष्टमी व्रत? जानिए तिथि और शुभ मुहूर्त

कालाष्टमी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी Kalashtami तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है। काल भैरव को भगवान शिव के रुद्र अवतारों में से एक माना जाता है। वह अपने भक्तों के कष्टों को दूर करने और उन्हें सुख और समृद्धि प्रदान करने के लिए जाने जाते हैं। Kalashtami 2024 कालाष्टमी पूजा का महत्व कालाष्टमी पूजा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन से सभी प्रकार के कष्ट और बाधाएं दूर हो जाती हैं। इसके अलावा, काल भैरव की पूजा करने से व्यक्ति को मानसिक शांति और सुख प्राप्त होता है। Kalashtami कालाष्टमी पूजा विधि कालाष्टमी पूजा विधि निम्नलिखित है: Kalashtami 2024:कालाष्टमी पूजा मंत्र Kalashtami 2024:कालाष्टमी व्रत कालाष्टमी (Kalashtami) के दिन व्रत रखना भी बहुत शुभ माना जाता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और फिर पूरे दिन निराहार रहना चाहिए। शाम को पूजा के बाद व्रत खोलना चाहिए। व्रत खोलने के लिए मीठी रोटी और गुड़ का भोग लगाना चाहिए। कालाष्टमी के दिन निम्नलिखित कार्य करने से बचना चाहिए: कालाष्टमी के दिन निम्नलिखित कार्य करने से पुण्य प्राप्त होता है: Kalashtami 2024 Dates 4 जनवरी 2024, कालाष्टमी, बृहस्पतिवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 07:48 पी एम, जनवरी 03, समाप्त – 10:04 पी एम, जनवरी 04 2 फरवरी 2024, कालाष्टमी, शुक्रवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 04:02 पी एम, फरवरी 02, समाप्त – 05:20 पी एम, फरवरी 03 3 मार्च 2024, कालाष्टमी, रविवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 08:44 ए एम, मार्च 03, समाप्त – 08:49 ए एम, मार्च 04 1 अप्रैल 2024, कालाष्टमी, सोमवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 09:09 पी एम, अप्रैल 01, समाप्त – 08:08 पी एम, अप्रैल 02 1 मई 2024, कालाष्टमी, बुधवारशुभ मुहूर्त –  प्रारम्भ – 05:45 ए एम, मई 01, समाप्त – 04:01 ए एम, मई 02 30 मई 2024, बृहस्पतिवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 11:43 ए एम, मई 30, समाप्त – 09:38 ए एम, मई 31 28 जून 2024, कालाष्टमी, शुक्रवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 04:27 पी एम, जून 28, समाप्त – 02:19 पी एम, जून 29 27 जुलाई 2024, कालाष्टमी, शनिवारशुभ मुहूर्त –  प्रारम्भ – 09:19 पी एम, जुलाई 27, समाप्त – 07:27 पी एम, जुलाई 28 26 अगस्त 2024, कालाष्टमी, सोमवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 03:39 ए एम, अगस्त 26, समाप्त – 02:19 ए एम, अगस्त 27 24 सितम्बर 2024, कालाष्टमी, मंगलवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 12:38 पी एम, सितम्बर 24, समाप्त – 12:10 पी एम, सितम्बर 25 24 अक्टूबर 2024, कालाष्टमी, बृहस्पतिवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 01:18 ए एम, अक्टूबर 24, समाप्त – 01:58 ए एम, अक्टूबर 25 22 नवम्बर 2024, कालभैरव जयन्ती, शुक्रवारशुभ मुहूर्त – प्रारम्भ – 06:07 पी एम, नवम्बर 22, समाप्त – 07:56 पी एम, नवम्बर 23 22 दिसम्बर 2024,कालाष्टमी, रविवारशुभ मुहूर्त –  प्रारम्भ – 02:31 पी एम, दिसम्बर 22, समाप्त – 05:07 पी एम, दिसम्बर 23

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Makar Sankranti 2024:वर्ष 2024 में कब मनाई जाएगी मकर संक्रांति, जानिए शुभ मुहूर्त और महत्व

मकर संक्रांति भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है। यह पूरे भारत और नेपाल में भिन्न रूपों में मनाया जाता है। पौष मास में जिस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है उस दिन इस पर्व को मनाया जाता है। वर्तमान शताब्दी में यह त्योहार जनवरी माह के चौदहवें या पन्द्रहवें दिन ही पड़ता है, इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है।मकर संक्रांति Makar Sankranti के दिन कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। Makar Sankranti 2024 Dateवर्ष 2024 में मकर संक्रांति 15 जनवरी 2024 को मनाई जाएगी। इस दिन सूर्य देव प्रातः 02 बजकर 54 मिनट पर धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर शुभ मुहूर्त इस प्रकार रहेगा। Makar Sankrantiमकर संक्रांति पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 21 मिनट तक मकर संक्रांति महा पुण्यकाल – 07 बजकर 15 मिनट से 09 बजकर 06 मिनट तक दूर होते हैं शनि दोषमकर संक्रांति पर भगवान सूर्य की उपासना, दान, गंगा स्नान और शनिदेव की पूजा करने से सूर्य और शनि से संबंधित तमाम तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। दरअसर सूर्यदेव अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं और शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं,उसमें सूर्य के प्रवेश मात्र से शनि का प्रभाव क्षीण हो जाता है। अयोध्या का पौराणिक महत्व: सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या, जानिए किसने बसाई यह नगरी Makar Sankranti मकर संक्रांति का महत्व मकर संक्रांति के दिन कई तरह के धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। इस दिन स्नान, दान, जप, तप, श्राद्ध और अनुष्ठान का विशेष महत्व है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। मकर संक्रांति Makar Sankranti का धार्मिक महत्व भी बहुत अधिक है। हिंदू धर्म में सूर्य को देवता माना जाता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन लोग सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और उनसे सुख, समृद्धि और आरोग्य की कामना करते हैं। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में प्रकाश और ज्ञान का उदय होता है। मकर संक्रांति की पौराणिक मान्यताएं मकर संक्रांति (Makar Sankranti)के दिन ही भीष्म पितामह महाभारत युद्ध समाप्ति के बाद सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में मकर संक्रान्ति को प्राण त्यागे थे। मकर संक्रांति पर देवी यशोदा ने श्रीकृष्ण को प्राप्त करने के लिए व्रत किया था। मकर संक्रान्ति के दिन ही गंगा कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थी और भगीरथ के पूर्वज महाराज सगर के पुत्रों को मुक्ति प्रदान की थी। मकर संक्रांति पर उपायमकर संक्रांति पर कुछ उपाय करने से कष्टों से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति होती है। मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले स्नान करना चाहिए ऐसा करने से दस हजार गौ दान का फल प्राप्त होता है। इस दिन ऊनी कपड़े, कम्बल, तिल और गुड़ से बने व्यंजन और खिचड़ी दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। 

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