Uncategorized

Karwa Chauth 2024: करवाचौथ व्रत के इन 6 विशेष नियमों के बिना अधूरा रह जाता है व्रत, अखंड सौभाग्य के लिए हर सुहागिन को करना चाहिए इनका पालन

Karwa Chauth:करवा चौथ 2024: करवाचौथ व्रत के 6 विशेष नियमों के बिना अधूरा है व्रत, अखंड सौभाग्य के लिए पालन जरूरी Karwa Chauth:करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। Karwa Chauth यह व्रत पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। करवाचौथ के दिन सुहागिन महिलाएं निर्जल व्रत करती हैं, और रात को चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत तोड़ा जाता है। Karwa Chauth इस पर्व की खास बात यह है कि इसके साथ कुछ विशिष्ट नियम जुड़े होते हैं, जिनके बिना व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं करवाचौथ व्रत के उन 6 प्रमुख नियमों के बारे में, जिनका पालन हर सुहागिन के लिए आवश्यक है। 1. निर्जल व्रत (बिना पानी के व्रत रखना) करवा चौथ का सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि व्रती महिला को पूरे दिन बिना पानी और अन्न के रहना होता है। व्रत का मुख्य उद्देश्य पति की लंबी उम्र की कामना करना होता है, Karwa Chauth और यह तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक कि इसे निर्जल और निराहार रखा जाए। इस दिन सूर्योदय से पहले सरगी खाकर व्रत की शुरुआत की जाती है, और चंद्रमा के दर्शन के बाद पति के हाथों से पानी पीकर ही इसे समाप्त किया जाता है। 2. सरगी का सेवन सरगी करवाचौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले किया जाने वाला भोजन है, जो विशेष रूप से व्रती महिला की सास द्वारा दिया जाता है। सरगी में हल्के और पौष्टिक आहार होते हैं, जैसे फल, मिठाइयाँ, सूखे मेवे, और कभी-कभी पराठा या हलवा भी। सरगी का सेवन करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि यह पूरे दिन के व्रत के दौरान शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।Karwa Chauth सरगी का सेवन शुभ माना जाता है और इसे आदर और प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। 3. सजधज कर व्रत करना करवा चौथ पर व्रत रखने वाली महिला को अपने सुहाग की निशानी के रूप में सजधज कर तैयार होना होता है। यह दिन खासतौर पर सुहागिनों के लिए होता है, इसलिए व्रत के दौरान महिलाएं अपने पारंपरिक परिधान, जैसे साड़ी या लहंगा, पहनती हैं। इसके अलावा, सोलह श्रृंगार जैसे सिंदूर, बिंदी, कंगन, मंगलसूत्र, चूड़ियाँ आदि का महत्व होता है। यह माना जाता है कि सजधज कर व्रत करने से देवी पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और व्रत को पूर्णता मिलती है। 4. पूजा और करवा का विशेष महत्व करवा चौथ के दिन पूजा का विशेष महत्व होता है। शाम के समय महिलाएं एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और करवा की पूजा करती हैं। करवा एक विशेष मिट्टी का बर्तन होता है जिसे पूजा के दौरान प्रयोग किया जाता है। इस बर्तन में जल भरकर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की पूजा की जाती है। करवा का यह जल चंद्र दर्शन के बाद अर्पण किया जाता है, जो कि व्रत को पूरा करने का एक आवश्यक हिस्सा है। 5. चंद्र दर्शन के बिना व्रत अधूरा करवा चौथ का व्रत तब तक पूरा नहीं माना जाता जब तक कि चंद्रमा के दर्शन न हो जाएं। चंद्र दर्शन के बाद महिलाएं अपने पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर व्रत तोड़ती हैं। यह मान्यता है कि चंद्रमा के दर्शन से सौभाग्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है, और इससे पति की दीर्घायु की कामना पूरी होती है। कई बार आसमान में बादल होने के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता, ऐसे में महिलाएं प्रतीकात्मक रूप से व्रत तोड़ने के लिए चंद्रमा की दिशा में जल अर्पण करती हैं। 6. पति के हाथ से व्रत खोलना करवा चौथ के दिन एक और महत्वपूर्ण परंपरा यह है कि व्रती महिला अपने पति के हाथ से पानी पीकर और मिठाई खाकर ही व्रत समाप्त करती है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। इस परंपरा का पालन करना जरूरी होता है, क्योंकि यह मान्यता है कि इससे पति-पत्नी का रिश्ता और अधिक मजबूत होता है, और उनके बीच के संबंध में विश्वास और प्यार बढ़ता है। Karwa Chauth:करवा चौथ का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व Karwa Chauth:करवा चौथ का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व भी है। इस दिन महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं Karwa Chauth और अपने अनुभव साझा करती हैं, जिससे सामाजिक संबंध और भी प्रगाढ़ होते हैं। इसके अलावा, यह व्रत महिला के धैर्य, समर्पण और आत्मसंयम का प्रतीक है। करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए तपस्या करती हैं, जो एक उच्चतम आध्यात्मिकता का प्रतीक है। निष्कर्ष करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और इसके साथ जुड़े ये 6 विशेष नियम इसे पूर्णता प्रदान करते हैं। अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इन नियमों का पालन करना हर सुहागिन के लिए जरूरी है।Karwa Chauth यह पर्व न केवल पति-पत्नी के बीच के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन के हर रिश्ते को समर्पण और आदर के साथ निभाने की सीख भी देता है। करवा चौथ का यह व्रत भारतीय समाज में सदियों से चली आ रही परंपराओं का जीवंत उदाहरण है, और इसके साथ जुड़ी आस्थाएं और विश्वास इसे और भी खास बनाते हैं।

Karwa Chauth 2024: करवाचौथ व्रत के इन 6 विशेष नियमों के बिना अधूरा रह जाता है व्रत, अखंड सौभाग्य के लिए हर सुहागिन को करना चाहिए इनका पालन Read More »

शरद पूर्णिमा: महत्व, धार्मिक मान्यताएँ, मंत्र और वैदिक प्रमाण – SHARAD PURNIMA 2024

शरद पूर्णिमा: महत्व, धार्मिक मान्यताएँ, मंत्र और वैदिक प्रमाण शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जिसे आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन को चंद्रमा की विशेष महिमा के लिए जाना जाता है, और धार्मिक रूप से यह त्यौहार लक्ष्मी पूजन, भगवान कृष्ण के रास और अमृत वर्षा के लिए विशेष महत्व रखता है। शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व शरद पूर्णिमा की खीर और चंद्रमा की किरणें इस दिन रात को खीर बनाकर उसे चंद्रमा की रोशनी में रखा जाता है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों से इस खीर में अमृत तत्व समाहित हो जाता है, जिसे खाने से स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है। आयुर्वेद में भी इस खीर को स्वास्थ्यवर्धक माना गया है, विशेष रूप से यह पाचन तंत्र को सुधारने और शरीर को शीतलता प्रदान करने में सहायक होती है। शरद पूर्णिमा का वैदिक प्रमाण वेदों और पुराणों में शरद पूर्णिमा का उल्लेख मिलता है। शरद पूर्णिमा ऋग्वेद में चंद्रमा को औषधियों का स्वामी कहा गया है, जो जीवन के स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए आवश्यक है। अथर्ववेद में चंद्रमा की महिमा का वर्णन है, जो इस दिन विशेष प्रभावकारी होती है। इसका अर्थ है, “चंद्रमा मन से उत्पन्न हुआ है।” यह शांति, सौम्यता और मानसिक संतुलन का प्रतीक है, जो शरद पूर्णिमा की रात विशेष रूप से प्रभावी होता है। शरद पूर्णिमा पर विशेष अनुष्ठान और पूजन विधि शरद पूर्णिमा की आधुनिक मान्यता आज के समय में शरद पूर्णिमा केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि यह स्वास्थ्य और प्रकृति से जुड़ने का एक पर्व भी है। इस दिन को आध्यात्मिक शांति और मन की स्थिरता पाने के लिए उत्तम माना जाता है। इसके साथ ही चंद्रमा की किरणों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों को भी आधुनिक विज्ञान ने स्वीकार किया है। निष्कर्ष शरद पूर्णिमा का पर्व धर्म, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। वैदिक प्रमाण और मंत्रों के साथ इस दिन का महत्व और भी बढ़ जाता है। इस पर्व पर भगवान चंद्रमा और माता लक्ष्मी की आराधना से व्यक्ति को सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

शरद पूर्णिमा: महत्व, धार्मिक मान्यताएँ, मंत्र और वैदिक प्रमाण – SHARAD PURNIMA 2024 Read More »

Karwa Chauth 2024: करवा चौथ की पूजा थाली में जरूर करें ये चीजें शामिल, वरना पूजा रह जाएगी अधूरी

करवा चौथ 2024 का व्रत 24 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जो भारतीय संस्कृति और परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। इस व्रत में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और समृद्धि की कामना करते हुए दिनभर निर्जला उपवास रखती हैं। करवा चौथ की पूजा विधि में पूजा थाली का विशेष महत्व होता है। अगर पूजा की थाली में सही सामग्री शामिल नहीं होती है, तो पूजा अधूरी मानी जाती है। आइए जानते हैं कि करवा चौथ की पूजा थाली में कौन-कौन सी चीजें जरूर होनी चाहिए ताकि पूजा का फल प्राप्त हो सके। करवा चौथ की पूजा थाली: महत्व और सामग्री करवा चौथ की पूजा थाली पूरी तरह से शुभ और पवित्र होती है, और इसमें सभी जरूरी चीजों का होना आवश्यक होता है। यह न केवल एक धार्मिक कृत्य है बल्कि पति-पत्नी के बीच के प्रेम और आपसी समर्पण का प्रतीक भी है। इस दिन महिलाएं अपनी पूजा की थाली सजाती हैं, जिसमें कुछ विशेष सामग्रियों का होना जरूरी होता है। करवा चौथ की पूजा थाली में आवश्यक वस्तुएं 1. दीया (दीपक) पूजा थाली में दीया एक महत्वपूर्ण वस्तु है, क्योंकि दीये को प्रकाश और जीवन का प्रतीक माना जाता है। करवा चौथ की रात जब महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, तब दीये का प्रकाश उन्हें शक्ति और आशीर्वाद प्रदान करता है। दीये का इस्तेमाल व्रत के दौरान अंधकार को दूर करने और सकारात्मकता लाने के लिए किया जाता है। 2. करवा (मिट्टी का बर्तन) करवा चौथ का नाम ही “करवा” से आया है, जो एक मिट्टी का बर्तन होता है। करवा को पानी से भरकर चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह करवा पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसे सुहागिन स्त्रियां पूजा के दौरान भगवान को अर्पित करती हैं और इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। Karwa Chauth:का व्रत इन कार्यों से हो सकता है खंडित, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें 3. चावल और गेहूं के दाने पूजा थाली में चावल और गेहूं के दाने रखना अनिवार्य होता है। चावल को शुद्धता का प्रतीक माना जाता है और इसका प्रयोग हर शुभ कार्य में किया जाता है। गेहूं के दाने समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक होते हैं, जो जीवन में उन्नति और प्रगति का संकेत देते हैं। 4. सिंदूर और कुमकुम सिंदूर और कुमकुम का प्रयोग हिन्दू विवाहिता स्त्रियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। करवा चौथ की पूजा में इसे जरूर शामिल किया जाता है। यह स्त्री के सौभाग्य और पति की लंबी उम्र का प्रतीक होता है। पूजा थाली में सिंदूर और कुमकुम से सुहागिन स्त्रियां अपनी मांग भरती हैं और अपने पति की सुरक्षा की कामना करती हैं। 5. जल से भरा हुआ कलश जल से भरा हुआ कलश भी पूजा की थाली में रखना आवश्यक होता है। इसे जीवन और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। जब महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, तो जल का प्रयोग किया जाता है। इसे घर की समृद्धि और खुशहाली के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। 6. मिठाई (मिठास का प्रतीक) मिठाई का प्रयोग हर पूजा में किया जाता है, और करवा चौथ की पूजा में भी इसका विशेष महत्व है। इसे पूजा के बाद चंद्रमा और भगवान को अर्पित किया जाता है, और फिर प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। मिठाई रिश्तों में मिठास और खुशहाली का प्रतीक मानी जाती है। 7. धूप और अगरबत्ती धूप और अगरबत्ती का प्रयोग पूजा के दौरान वातावरण को शुद्ध और पवित्र करने के लिए किया जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। करवा चौथ की पूजा में इसे जरूर शामिल करना चाहिए, ताकि पूजा विधि पूर्ण हो सके। 8. फूल (प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक) फूलों का इस्तेमाल हर पूजा में होता है, और करवा चौथ की पूजा थाली में भी ताजे फूलों का विशेष महत्व होता है। फूल भगवान को अर्पित किए जाते हैं और इसे सौंदर्य, पवित्रता और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक माना जाता है। लाल और पीले रंग के फूल विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं। 9. करवा माता की मूर्ति या चित्र करवा चौथ की पूजा में करवा माता की पूजा की जाती है, इसलिए पूजा थाली में करवा माता की मूर्ति या चित्र जरूर होना चाहिए। करवा माता की पूजा से महिलाओं को संतान सुख, समृद्धि और पति की लंबी उम्र का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 10. सुपारी, पान के पत्ते और द्रव्य (रूपया/सिक्का) पान के पत्ते, सुपारी और सिक्का भी करवा चौथ की पूजा थाली में रखा जाता है। पान और सुपारी का प्रयोग हर शुभ कार्य में किया जाता है और यह देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। यह पूजा को पूर्ण और सफल बनाने के लिए आवश्यक होता है। करवा चौथ की पूजा थाली सजाते समय ध्यान रखने योग्य बातें निष्कर्ष करवा चौथ की पूजा थाली में हर सामग्री का विशेष महत्व है। यह पूजा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते को भी और मजबूत बनाती है। पूजा थाली में अगर सभी सामग्रियां ठीक से रखी जाती हैं और पूजा सही तरीके से की जाती है, तो यह व्रत अवश्य फलदायी होता है।

Karwa Chauth 2024: करवा चौथ की पूजा थाली में जरूर करें ये चीजें शामिल, वरना पूजा रह जाएगी अधूरी Read More »

Karwa Chauth:का व्रत इन कार्यों से हो सकता है खंडित, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें

Karwa Chauth:करवा चौथ का व्रत भारतीय महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यह व्रत खासकर उत्तर भारत में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए उपवास करती हैं। इस व्रत में संपूर्ण निष्ठा और श्रद्धा का होना जरूरी माना जाता है। व्रत का पालन करते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह खंडित न हो। आइए जानते हैं कि Karwa Chauth करवा चौथ व्रत में कौन-कौन से कार्य व्रत को खंडित कर सकते हैं और इस दिन क्या करें और क्या न करें। Karwa Chauth:करवा चौथ व्रत को खंडित करने वाले कार्य Karwa Chauth:करवा चौथ के दिन क्या करें Karwa Chauth:करवा चौथ के दिन क्या न करें निष्कर्ष Karwa Chauth:करवा चौथ का व्रत भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें पतिव्रता स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु और समृद्धि के लिए उपवास करती हैं। इस व्रत का पालन करते समय सही विधियों और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक है। व्रत के दौरान नकारात्मकता से दूर रहना, पूजा विधि को पूरी निष्ठा से करना, और चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत खोलना महत्वपूर्ण है।

Karwa Chauth:का व्रत इन कार्यों से हो सकता है खंडित, जानें इस दिन क्या करें और क्या न करें Read More »

Sharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा कब है, जानें इस दिन का महत्‍व शुभ मुहूर्त और पूजाविधि 

Sharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा 2024: तिथि, महत्त्व, शुभ मुहूर्त और पूजाविधि Sharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा 2024 की तिथिSharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा, जिसे कोजागरी पूर्णिमा या रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, और इसे आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। Sharad Purnima 2024:में शरद पूर्णिमा की तिथि इसलिए, 17 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। Sharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा का महत्त्व शरद पूर्णिमा का विशेष महत्त्व हिंदू धर्म में है क्योंकि इस दिन चंद्रमा अपनी पूरी चमक और रूप में होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा से अमृत की वर्षा होती है। इसे धन, आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इस दिन कोजागरी व्रत करने और चंद्रमा की पूजा करने से देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। शरद पूर्णिमा का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन गोपियों के साथ महारास का आयोजन किया था। इसलिए, इसे रास पूर्णिमा भी कहते हैं। यह दिन भक्ति और प्रेम का प्रतीक है और ब्रज में इसे विशेष रूप से धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन व्रत और पूजन का विशेष महत्त्व है। भक्तजन उपवास करते हैं और रात में चंद्रमा के प्रकाश में खीर बनाकर उसे बाहर रखते हैं ताकि चंद्रमा की किरणों का प्रभाव उस पर पड़ सके। मान्यता है कि इस खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण करने से आरोग्य और समृद्धि प्राप्त होती है। Sharad Purnima 2024:शुभ मुहूर्त और पूजा विधि शरद पूर्णिमा की पूजा के लिए सही समय का निर्धारण बहुत महत्वपूर्ण है। चंद्रमा का पूजन रात के समय किया जाता है, जब वह अपनी पूर्ण कलाओं में होता है। Sharad Purnima 2024:शुभ मुहूर्तरात के समय चंद्रमा की पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है। इसलिए, रात्रि 11:45 बजे से लेकर 12:30 बजे के बीच चंद्रमा को अर्घ्य देकर पूजा करना शुभ होता है। यह समय खासतौर से लक्ष्मी पूजन और चंद्र पूजन के लिए उपयुक्त माना गया है। Sharad Purnima 2024:पूजा विधि शरद पूर्णिमा की पूजा विधि में खास ध्यान देने वाली बात यह है कि इस दिन देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए मां लक्ष्मी के 108 नामों का जाप किया जाता है और साथ ही विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। Sharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा पर क्या करें Sharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा पर क्या न करें निष्कर्षशरद पूर्णिमा का त्योहार श्रद्धा और भक्ति से मनाया जाता है। इस दिन चंद्रमा की पूजा और देवी लक्ष्मी का आह्वान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि और आरोग्य का वास होता है। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Sharad Purnima 2024:शरद पूर्णिमा कब है, जानें इस दिन का महत्‍व शुभ मुहूर्त और पूजाविधि  Read More »

karwa chauth muhurat : करवा चौथ कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, मंत्र, चंद्रोदय और पूजा विधि

karwa chauth:करवा चौथ 2024 हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 20 अक्टूबर 2024 को पड़ रहा है। करवा चौथ व्रत का विशेष महत्व है, और विवाहित महिलाएँ इस दिन अपने पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए निर्जल व्रत रखती हैं। व्रत के दिन महिलाएँ सरगी लेकर व्रत की शुरुआत करती हैं और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह उनके पति के जीवन और उनकी खुशहाली के लिए होता है। साथ ही, इस व्रत को रखने से घर में सुख-समृद्धि आती है और पारिवारिक जीवन में शांति बनी रहती है। आइए जानते हैं इस दिन का शुभ मुहूर्त, चंद्रोदय का समय, पूजा विधि, और मंत्र: करवा चौथ 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त karwa chauth:करवा चौथ व्रत विधि करवा चौथ के व्रत में महिलाओं द्वारा सूर्योदय से पहले सरगी ग्रहण करके व्रत की शुरुआत की जाती है। सरगी को सास द्वारा दिया जाता है, जिसमें सूखे मेवे, मिठाई, फल, और कुछ तरल पदार्थ होते हैं। इसके बाद पूरे दिन निर्जल व्रत रखा जाता है, यानी न तो कुछ खाया जाता है और न ही पानी पिया जाता है। शाम के समय विशेष पूजा अर्चना की जाती है, और फिर चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाता है। 1. सरगी का सेवन: सरगी का सेवन सूर्योदय से पहले किया जाता है। इसे खाने से व्रत रखने वाली महिलाओं को पूरे दिन ऊर्जा मिलती है। सरगी में आमतौर पर सूखे मेवे, फल, मिठाई, और कभी-कभी हल्का भोजन भी होता है। यह सास द्वारा अपनी बहू को आशीर्वाद स्वरूप दिया जाता है। 2. पूजा की तैयारी: शाम के समय महिलाएँ सज-धजकर करवा चौथ की पूजा की तैयारी करती हैं। पूजन स्थान को अच्छे से सजाया जाता है, और देवी पार्वती, शिव, गणेश और करवा माता की प्रतिमाओं या चित्रों की पूजा की जाती है। पूजन के लिए करवा (मिट्टी का पात्र) का विशेष महत्व होता है, जिसमें जल भरकर भगवान को अर्पित किया जाता है। 3. karwa chauth:करवा चौथ कथा: करवा चौथ के व्रत के दौरान करवा चौथ की कथा सुनी जाती है। यह कथा विवाहिता महिलाओं को व्रत के महत्व और इसके पीछे के धार्मिक कारणों को समझने में मदद करती है। कथा सुनने के बाद सभी महिलाएँ एक साथ अपने-अपने करवे को एक-दूसरे के साथ घुमाकर देवी-देवताओं को अर्पित करती हैं। 4. karwa chauth:चंद्रमा को अर्घ्य देना: रात में जब चंद्रमा निकलता है, तब महिलाएँ चंद्र दर्शन करके उन्हें अर्घ्य देती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए एक थाली में दीपक, चावल, जल, और फूल रखकर उसे अर्पित किया जाता है। इसके बाद महिलाएँ छलनी से चंद्रमा और फिर अपने पति का दर्शन करती हैं। पति द्वारा जल पिलाने के बाद व्रत समाप्त होता है और महिलाएँ भोजन ग्रहण करती हैं। karwa chauth:करवा चौथ के मंत्र करवा चौथ की पूजा के दौरान कुछ विशेष मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। ये मंत्र देवी पार्वती और शिव जी की स्तुति के लिए होते हैं, जिससे व्रत का फल अधिक शुभकारी होता है। यहाँ कुछ प्रमुख मंत्र दिए गए हैं: 1. karwa chauth:करवा चौथ व्रत का मुख्य मंत्र: इस मंत्र का जाप करवा चौथ के व्रत के दौरान करने से शिव और पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है। 2. चंद्रमा को अर्घ्य देते समय मंत्र: चंद्रमा को अर्घ्य देते समय इस मंत्र का जाप करने से चंद्रमा के शुभ प्रभाव से जीवन में शांति और समृद्धि आती है। 3. पूजन मंत्र: पूजन के समय इस मंत्र का उच्चारण करने से परिवार की सुख-शांति और कल्याण की प्राप्ति होती है। karwa chauth:करवा चौथ के दिन ध्यान रखने योग्य बातें निष्कर्ष करवा चौथ का व्रत हिन्दू समाज में पति-पत्नी के प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। इस दिन महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और सुखमय जीवन की कामना करती हैं। व्रत की पूजा और चंद्रोदय के समय का पालन करना आवश्यक होता है। साथ ही, विधिपूर्वक पूजा-अर्चना और व्रत के नियमों का पालन करने से यह व्रत अत्यंत फलदायी होता है।

karwa chauth muhurat : करवा चौथ कब है, जानिए शुभ मुहूर्त, मंत्र, चंद्रोदय और पूजा विधि Read More »

karwa chauth:करवा चौथ पर इन 10 कामों से अवश्य बचें तभी मिलेगा व्रत का फल

karwa chauth:करवा चौथ हिन्दू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे विशेष रूप से विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए मनाती हैं। इस व्रत को करने के दौरान कई धार्मिक नियम और परंपराएँ निभाई जाती हैं। करवा चौथ के व्रत का फल तभी प्राप्त होता है जब इसे पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया जाए। karwa chauth लेकिन कुछ ऐसी गलतियाँ या काम होते हैं जो इस व्रत के दौरान नहीं करने चाहिए, अन्यथा व्रत का फल नहीं मिलता या इसका प्रभाव कम हो सकता है। यहाँ हम उन 10 कामों के बारे में चर्चा करेंगे जिनसे करवा चौथ के दिन अवश्य बचना चाहिए: 1. Karwa chauth:सूर्योदय के बाद भोजन या जल ग्रहण न करें करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले ही सरगी का सेवन करना आवश्यक होता है। सरगी में सास द्वारा दी गई सामग्री का सेवन किया जाता है, लेकिन एक बार सूर्योदय के बाद कुछ भी खाना-पीना वर्जित होता है। karwa chauth अगर सूर्योदय के बाद गलती से कुछ खा या पी लिया, तो व्रत का फल प्राप्त नहीं होता। अत: पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। 2. क्रोध या झगड़ा करने से बचें व्रत के दिन मन और वचन को शांत रखना बहुत जरूरी होता है। यदि आप क्रोधित हो जाती हैं या किसी से झगड़ा करती हैं, तो इससे नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो व्रत के प्रभाव को कमजोर कर सकती है। शांति और संयम बनाए रखना व्रत की सफलता के लिए आवश्यक है। 3. झूठ न बोलें झूठ बोलना किसी भी धार्मिक कार्य में वर्जित होता है। karwa chauth करवा चौथ के दिन विशेष रूप से सच्चाई का पालन करना चाहिए। झूठ बोलने से व्रत की पुण्यता कम हो जाती है, इसलिए इस दिन किसी भी प्रकार का झूठ बोलने से बचें। 4. सूर्य या चंद्र दर्शन से पहले व्रत न तोड़ें करवा चौथ का व्रत तभी पूर्ण माना जाता है जब आप चंद्रमा का दर्शन करने के बाद व्रत खोलें। चंद्र दर्शन से पहले जल ग्रहण या भोजन करने से व्रत अधूरा माना जाता है, और इसका फल नहीं मिलता। इसलिए चंद्रमा निकलने के बाद ही व्रत खोलें। 5. अशुद्ध वस्त्र न पहनें धार्मिक कार्यों में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रत के दिन अशुद्ध या बिना धुले कपड़े पहनने से बचें। karwa chauth करवा चौथ के दिन साफ-सुथरे वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है, खासकर लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ होता है। 6. सदाचार और नियमों का पालन न करना व्रत के दिन सदाचार, अनुशासन और नियमों का पालन करना बहुत आवश्यक है। karwa chauth धार्मिक नियमों और मर्यादाओं का पालन न करने से व्रत का पुण्य नष्ट हो सकता है। इस दिन हर काम को नियम और विधि-विधान के अनुसार करने का प्रयास करें। 7. व्रत के प्रति उदासीनता करवा चौथ का व्रत पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ करना चाहिए। अगर आप व्रत के प्रति उदासीन रहती हैं karwa chauth या मन में असंतोष उत्पन्न होता है, तो इसका असर आपके व्रत पर पड़ सकता है। इस दिन सकारात्मकता और विश्वास बनाए रखना जरूरी है। 8. पति के प्रति नकारात्मक विचार न रखें करवा चौथ का व्रत पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है। इस दिन पति के प्रति मन में कोई नकारात्मक भावना या विचार रखना व्रत के उद्देश्यों के विपरीत होता है। इसलिए, इस दिन पति के प्रति आदर और प्रेम बनाए रखें। 9. अन्य महिलाओं की निंदा न करें धार्मिक परंपराओं के अनुसार, करवा चौथ के दिन किसी की निंदा या बुराई नहीं करनी चाहिए। निंदा या आलोचना करने से व्रत की सकारात्मक ऊर्जा कम हो सकती है। इसलिए इस दिन केवल अच्छे और सकारात्मक विचारों को ही मन में रखें। 10. अपशब्दों का प्रयोग न करें व्रत के दिन वचन का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। अपशब्दों का प्रयोग करना या किसी के प्रति कठोर शब्दों का इस्तेमाल करना व्रत की शुद्धता को भंग कर सकता है। इसलिए व्रत के दिन अपने वचन और भाषा पर संयम रखें और केवल मधुर और स्नेहपूर्ण शब्दों का प्रयोग करें। निष्कर्ष: करवा चौथ का व्रत एक पवित्र और महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे निभाने में पूरी श्रद्धा, भक्ति और नियमों का पालन करना चाहिए। इस व्रत से जुड़े नियमों का पालन करते हुए इन 10 कामों से बचें, ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। व्रत का उद्देश्य पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है, और इसे सही तरीके से करने पर ही इसका शुभ परिणाम प्राप्त होता है।

karwa chauth:करवा चौथ पर इन 10 कामों से अवश्य बचें तभी मिलेगा व्रत का फल Read More »

PITRU PAKSHA 2024 पितृ दोष: कारण, लक्षण और समाधान | जानें कैसे करें पितृ दोष निवारण

पितृ दोष: कारण, लक्षण और समाधान | जानें कैसे करें निवारण पितृ दोष हिंदू ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण दोष माना जाता है, जो हमारे पूर्वजों की आत्मा या पितरों के असंतोष से उत्पन्न होता है। यह दोष कुंडली में राहु, केतु और सूर्य ग्रहों की अशुभ स्थिति से बनता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में होता है, तो उसे कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह दोष व्यक्ति के जीवन में बाधाएँ, आर्थिक परेशानियाँ, स्वास्थ्य समस्याएँ और पारिवारिक तनाव उत्पन्न कर सकता है। पितृ दोष के कारण: पितृ दोष के लक्षण: निवारण के उपाय: निष्कर्ष: एक गंभीर ज्योतिषीय दोष है, जिसे नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए। सही उपायों और पूजा-पाठ से इसे नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि और खुशहाली आती है। यदि आपको अपने जीवन में बार-बार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, तो किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श करें और की जाँच करवाएँ। Tags: पितृ दोष क्या है, पितृ दोष निवारण उपाय, पितृ दोष के लक्षण, पितृ दोष निवारण पूजा, पितरों की शांति, श्राद्ध तर्पण

PITRU PAKSHA 2024 पितृ दोष: कारण, लक्षण और समाधान | जानें कैसे करें पितृ दोष निवारण Read More »

संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak)

Hanuman Ashtak:संकटमोचन हनुमानाष्टक: एक संक्षिप्त परिचय Hanuman Ashtak:संकटमोचन हनुमानाष्टक एक प्रसिद्ध हिंदू स्तोत्र है जो Hanuman Ashtakभगवान हनुमान को समर्पित है। यह स्तोत्र आठ श्लोकों का बना हुआ है और इसमें भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन किया गया है। यह माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से सभी प्रकार के संकटों से मुक्ति मिलती है। Hanuman Ashtak:स्तोत्र का महत्व स्तोत्र के कुछ श्लोक Hanuman Ashtak:संकटमोचन हनुमानाष्टक के सभी श्लोक बहुत ही प्रभावशाली हैं और भगवान हनुमान की विभिन्न विशेषताओं का वर्णन करते हैं। उदाहरण के लिए: Hanuman Ashtak:कब और कैसे करें पाठ? श्री हनुमंत लाल की पूजा आराधना में संकट मोचन हनुमान अष्टक का नियमित पाठ करने से भक्तों पर आये गंभीर संकट का भी निवारण हो जाता है। Hanuman Ashtak Hanuman Ashtak॥ हनुमानाष्टक ॥बाल समय रवि भक्षी लियो तब,तीनहुं लोक भयो अंधियारों ।ताहि सों त्रास भयो जग को,यह संकट काहु सों जात न टारो ।देवन आनि करी बिनती तब,छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ।को नहीं जानत है जग में कपि,संकटमोचन नाम तिहारो ॥ १ ॥ बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि,जात महाप्रभु पंथ निहारो ।चौंकि महामुनि साप दियो तब,चाहिए कौन बिचार बिचारो ।कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु,सो तुम दास के सोक निवारो ॥ २ ॥ अंगद के संग लेन गए सिय,खोज कपीस यह बैन उचारो ।जीवत ना बचिहौ हम सो जु,बिना सुधि लाये इहाँ पगु धारो ।हेरी थके तट सिन्धु सबै तब,लाए सिया-सुधि प्राण उबारो ॥ ३ ॥ रावण त्रास दई सिय को सब,राक्षसी सों कही सोक निवारो ।ताहि समय हनुमान महाप्रभु,जाए महा रजनीचर मारो ।चाहत सीय असोक सों आगि सु,दै प्रभुमुद्रिका सोक निवारो ॥ ४ ॥ बान लग्यो उर लछिमन के तब,प्राण तजे सुत रावन मारो ।लै गृह बैद्य सुषेन समेत,तबै गिरि द्रोण सु बीर उपारो ।आनि सजीवन हाथ दई तब,लछिमन के तुम प्रान उबारो ॥ ५ ॥ रावन युद्ध अजान कियो तब,नाग कि फाँस सबै सिर डारो ।श्रीरघुनाथ समेत सबै दल,मोह भयो यह संकट भारो Iआनि खगेस तबै हनुमान जु,बंधन काटि सुत्रास निवारो ॥ ६ ॥ बंधु समेत जबै अहिरावन,लै रघुनाथ पताल सिधारो ।देबिहिं पूजि भलि विधि सों बलि,देउ सबै मिलि मन्त्र विचारो ।जाय सहाय भयो तब ही,अहिरावन सैन्य समेत संहारो ॥ ७ ॥ काज किये बड़ देवन के तुम,बीर महाप्रभु देखि बिचारो ।कौन सो संकट मोर गरीब को,जो तुमसे नहिं जात है टारो ।बेगि हरो हनुमान महाप्रभु,जो कछु संकट होय हमारो ॥ ८ ॥ ॥ दोहा ॥लाल देह लाली लसे,अरु धरि लाल लंगूर ।वज्र देह दानव दलन,जय जय जय कपि सूर ॥ रामायण के बाद हनुमानजी यहां चले गए थे और अब वे इन जगहों पर मिलते हैं…

संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak) Read More »

Types of Havan and Yagya in Hindu Rituals According to Vedas and Puranas

Types of Havan and Yagya in Hindu Rituals According to Vedas and Puranas In Hinduism, Havan and Yagya are sacred fire rituals deeply rooted in Vedic traditions and the Puranas. These rituals are central to many ceremonies, ranging from personal purification to large-scale societal benefits. They invoke divine forces and create spiritual vibrations to cleanse the environment and individuals. Havan and Yagya rituals, when performed with specific mantras, help achieve specific goals. This post will explore various types of Havans and Yagyas, their significance, and the associated mantras. What is Havan and Yagya? Havan and Yagya Both involve chanting sacred Vedic mantras and offerings to the fire god, Agni, who is considered the carrier of these offerings to other deities. Types of Havan and Yagya According to the Vedas and Puranas Conclusion Havans and Yagyas are not merely religious rituals; they are potent spiritual tools that can cleanse the mind, body, and environment while invoking divine blessings. Each type of Havan or Yagya, when performed with the proper mantras and intentions, can bring about transformation and healing in various aspects of life. Rooted in the rich tradition of the Vedas and Puranas, these sacred fire ceremonies remain a vital part of Hindu religious practices, providing individuals with a direct connection to the divine. How to Book a Havan or Yagya Service Online At Karmasu, we offer personalized and community-based Havan and Yagya services performed by expert priests, both online and offline. Whether you’re seeking spiritual cleansing, prosperity, health, or protection, you can choose from a range of rituals tailored to your needs. Feel free to contact us or visit our website to learn more and book a ritual that suits your spiritual goals! CALL NOW – 9129388891 Keywords: Types of Havan, Types of Yagya, Hindu rituals, Vedic mantras, Fire rituals, Spiritual cleansing, Vedas and Puranas, Online Havan services, Karmasu Sri Durga Chalisa:श्री दुर्गा चालीसा:नमो नमो दुर्गे सुख करनी…

Types of Havan and Yagya in Hindu Rituals According to Vedas and Puranas Read More »

Radha Ashtami 2024: क्यों मनाते हैं राधा अष्टमी का पर्व? जानें इस त्योहार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

Radha Ashtami:सनातन धर्म में राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2024) पर्व का विशेष महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का विधान है। साथ ही प्रिय चीजों का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है। इस साल भाद्रपद महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन राधा अष्टमी मनाई जाएगी। कई भक्त जन इस दिन उपवास भी करते हैं। यह दिन राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जन्माष्टमी के बाद भाद्रपद माह में ही राधा अष्टमी के त्योहार को मनाया जाता है। यह पर्व श्री राधा रानी को समर्पित है। इस खास दिन पर बरसाना समेत देशभर में खास उत्साह देखने को मिलता है। क्या आपको पता है कि हर साल राधा अष्टमी (Radha Ashtami 2024) क्यों मनाई जाती है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं इसके बारे में। कब है राधा अष्टमी, जानें डेट, पूजा-विधि व महत्व Radha Ashtami:राधा अष्टमी से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें Radha Ashtami:राधा अष्टमी का महत्व Radha Ashtami :ये है वजह पौराणिक कथा के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर श्री राधा रानी का जन्म बरसाना में हुआ था। इसलिए इस दिन को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस खास पर्व का श्रीकृष्ण भक्त बेसब्री से इंतजार करते हैं। राधा अष्टमी के लिए श्री राधा रानी के मंदिरों को बेहद सुंदर तरीके से सजाया जाता है और राधा रानी की विशेष उपासना की जाती है। Radha Ashtami:राधा अष्टमी 2024 डेट और शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 10 सितंबर को रात 11 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इसका समापन अगले दिन यानी 11 सितंबर को रात 11 बजकर 46 मिनट पर होगा। ऐसे में राधा अष्टमी 11 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पूजा करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 03 मिनट से दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक है। मान्यता है कि इस मुहूर्त में पूजा करने से दोगुना फल प्राप्त होगा। Radha Ashtami:राधा अष्टमी का महत्व जैसे भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित जन्माष्टमी का व्रत किया जाता है। ठीक वैसे ही राधा अष्टमी का व्रत किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राधा रानी की सच्चे मन से पूजा करने से वैवाहिक जीवन में खुशियों का आगमन होता है और पति-पत्नी के रिश्ते में मजबूती आती है। इसके अलावा व्यक्ति को धन, ऐश्वर्य, आयु एवं सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा के दौरान करें इन मंत्रों का जप ओम ह्रीं श्रीराधिकायै नम:। ओम ह्रीं श्री राधिकायै नम:। नमस्त्रैलोक्यजननि प्रसीद करुणार्णवे। ब्रह्मविष्ण्वादिभिर्देवैर्वन्द्यमान पदाम्बुजे।। नमस्ते परमेशानि रासमण्डलवासिनी। रासेश्वरि नमस्तेऽस्तु कृष्ण प्राणाधिकप्रिये।। मंत्रैर्बहुभिर्विन्श्वर्फलैरायाससाधयैर्मखै: किंचिल्लेपविधानमात्रविफलै: संसारदु:खावहै। एक: सन्तपि सर्वमंत्रफलदो लोपादिदोषोंझित:, श्रीकृष्ण शरणं ममेति परमो मन्त्रोड्यमष्टाक्षर।। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

Radha Ashtami 2024: क्यों मनाते हैं राधा अष्टमी का पर्व? जानें इस त्योहार से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें Read More »

Janmashtami 2024: इस दिन घर-घर जन्म लेंगे लड्डू गोपाल, यहां जानें कृष्णा जन्माष्टमी की सही तिथि और पूजा शुभ मुहूर्त

Janmashtami जन्माष्टमी 2024: लड्डू गोपाल का आगमन Krishna Janmashtami 2024: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी एक महत्वपूर्ण त्यौहार माना जाता है। इस दिन देशभर में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है। तो जानिए इस साल जन्माष्टमी का पर्व कब है। Krishna Janmashtami 2024: हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को Janmashtami जन्माष्टमी का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन देशभर के कृष्ण मंदिर और घरों में कान्हा के जन्मोत्सव की खास तैयारी की जाती है। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात 12 बजे बाल गोपाल का जन्म कराया जाता है। कृष्ण जन्मोत्सव की असल रौनक बृज की धरती पर देखने को मिलती है। खासतौर से मथुरा-वृंदावन में दूर-दूर से लोग कृष्ण जन्मोत्सव देखने के लिए यहां जुटते हैं। जन्माष्टमी की मौके पर मथुरा के मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है।  कृष्ण जन्माष्टमी 2024 तिथि और शुभ मुहूर्त बता दें कि इस साल जन्माष्टमी का त्यौहार 26 अगस्त 2024, सोमवार को मनाया जाएगा। भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि प्रारंभ 26 अगस्त को मध्य रात्रि 3 बजकर 39 मिनट से होगा। कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का समापन 27 अगस्त को मध्य रात्रि 2 बजकर 19 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण का जन्म भाद्रपद अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। हिंदू पंचांग के मुताबिक, रोहिणी नक्षत्र का आरंभ 26 अगस्त 2024 को दोपहर 3 बजकर 55 मिनट से होगा। रोहिणी नक्षत्र समाप्त 27 अगस्त को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट पर होगा। भगवान कृष्ण की पूजा के लिए निशिता पूजा का समय  मध्य रात्रि 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 45 मिनट (27 अगस्त)  तक रहेगा। Janmashtami कृष्णा जन्माष्टमी के दिन इन मंत्रों का करें जाप Janmashtami जन्माष्टमी की पूजा विधि Janmashtami जन्माष्टमी के दिन क्या करें Janmashtami जन्माष्टमी का महत्व जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप लडूड गोपाल की पूजा की जाती है। कहते हैं कि जन्माष्टमी के दिन व्रत रख कान्हा जी की पूजा करने से निःसंतान दंपतियों को संतान की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही Janmashtami जन्माष्टमी का व्रत रखने से भक्तों के जीवन से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और धन-संपन्नता में भी बढ़ोतरी होती है। लड्डू गोपाल: जन्माष्टमी के दिन लड्डू गोपाल की पूजा का विशेष महत्व है।मथुरा और वृंदावन: इन स्थानों पर जन्माष्टमी का उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

Janmashtami 2024: इस दिन घर-घर जन्म लेंगे लड्डू गोपाल, यहां जानें कृष्णा जन्माष्टमी की सही तिथि और पूजा शुभ मुहूर्त Read More »