क्या आपको पता है हनुमान जी के पांच भाईयो के बारे में ?
ब्रह्मांडपुराण के अनुसार, हनुमान जी के पांच भाई थे, जिनके नाम हैं: इन सभी भाइयों का जन्म अंजना और केसरी के गर्भ से हुआ था। हनुमान जी इन सबमें बड़े थे। मतिमान, श्रुतिमान, केतुमान, गतिमान और धृतिमान सभी विवाहित थे और सभी संतान से युक्त थे। हनुमान जी के इन भाइयों के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध है। केवल उनके नाम ही ब्रह्मांडपुराण में उल्लिखित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि हनुमान जी के ये भाई भी भगवान शिव के अवतार थे। हालांकि, इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। हनुमान जी के भाइयों के नाम और उनके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए और शोध की आवश्यकता है। देवराज इंद्र के लोक में एक अप्सरा कुंजीस्थली रहती थी जब एक बार दुर्वासा ऋषि इंद्र की सभा में उपस्थित थे जब अप्सरा बार-बार अंदर बाहर आकर सभा में विघ्न उत्पन्न कर रही थी जिससे दुर्वासा ऋषि क्रोधित हो गए और उन्होंने उस अप्सरा को बंदरिया हो जाने का श्राप दे दिया इसके बाद अप्सरा ने ऋषि से श्राप वापस लेने के लिए बहुत प्रार्थना की तब दुर्वासा ऋषि ने उन्हें इच्छा अनुसार रूप धारण करने का वरदान दिया कुछ वर्षों बाद अप्सरा कुंजीस्थली ने वानर श्रेष्ठ ब्रज के यहां वानरी रूप में जन्म लिया और उनका नाम अंजनी रखा गया विवाह योग्य होने पर उनके पिता ने अपनी पुत्री अंजनी का विवाह महान पराक्रमी, शिरोमणि वानरराज केसरी से कर दिया बहुत समय तक जब अंजनी मां को संतान नहीं हुई तब उन्होंने शिवजी को प्रसन्न करने के लिए कठिन तप किया फिर एक बार वानर राज केसरी प्रभास तीर्थ के निकट थे तब उन्होंने देखा की वहां बहुत से साधु ध्यान लगाकर पूजा अर्चना कर रहे हैं तभी एक विशाल हाथी आया और उसने वहां बैठे ऋषियों को मारना प्रारंभ कर दिया वहीं ऋषि भरद्वाज Bhardwaj अपने आसन पर ध्यान लगाकर बैठे थे वह हाथी उनकी ओर बढ़ रहा था तभी वानर राज केसरी ने बलपूर्वक हाथी के दांतो को पकड़कर उसे मार डाला तब सभी ऋषियों ने प्रसन्न होकर राजा केसरी को वरदान मांगने को कहा,तब उन्होंने इच्छा अनुसार रूप धारण करने वाला पवन के समान तेज तथा रूद्र के समान पुत्र प्राप्त करने का वरदान मांगा था इसके बाद सभी ऋषि उन्हें यह वरदान देकर वहां से चले गए | बजरंगबली क्यों कहा जाता है हनुमान जी भगवान शिव के 11वें रुद्र अवतार है जो सबसे बलशाली और बुद्धिमान है हनुमान जी का जन्म श्री राम और श्री राम भक्तों की सहायता करने के लिए हुआ है इस संपूर्ण कलयुग में हनुमान जी उपस्थित रहकर श्री राम भक्तों की सहायता अवश्य करते हैं जो सच्चे मन, कर्म, और वचन से श्री राम जी का भक्त हैं स्वयं हनुमान जी की कृपा उस पर हमेशा बनी रहती है इस पृथ्वी पर जिन 7 ऋषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है उनमें हनुमान जी भी शामिल है हनुमान जी के पराक्रम की अनेक कथाएं रामायण एवं अन्य ग्रंथों में प्रचलित है इनका शरीर वज्र के समान होने के कारण इन्हें “बजरंगबली” और पवन के समान वेग होने के कारण इन्हें “मारुति” कहा जाता है बचपन में मां अंजनी और पिता केसरी ने इनका नाम मारुति रखा था लेकिन जब सूर्य को निगल लेने पर इंद्र ने मारुति पर वज्र प्रहार किया तब मारुति की टोडी का रूप बिगड़ गया जब से इनका नाम हनुमान पड़ गया हनुमान का अर्थ होता है बिगड़ी हुई टोंडी हनुमान जी के 108 और नाम है और हर नाम का अलग-अलग अर्थ है इन के 108 नामों का जप करने से समस्त दुख रोगों का नाश हो जाता है कहते हैं कि हनुमान जी आज भी अयोध्या में श्री राम नवमी पर सरयू नदी के किनारे साधु का वेश धारण कर ब्राह्मणों को भोजन कराने आते हैं | Hanuman Putra:जानिये कौन हैं हनुमान पुत्र और क्या है उनके जन्म की कथा? हनुमान जी के पांच भाई एक बार हनुमान जी ने श्रीराम की याद में अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया था क्योंकि उन्होंने 1 दिन माता सीता को सिंदूर लगाते हुए देख लिया था जब उन्होंने माता सीता से इसका कारण पूछा तो माता सीता ने कहा यह सिंदूर श्री राम के प्रति प्रेम और सम्मान का प्रतीक है यह जानने के बाद हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगा लिया यह दर्शाने के लिए कि वह भी श्री राम से बहुत प्रेम करते हैं इस घटना के बाद हनुमान जी का लाल रंग में उनका रूप बहुत ही प्रचलित हुआ महाभारत काल में भीम Bheem अपने बल के कारण जाने जाते थे वह भी हनुमान जी के भाई थे इनके अलावा हनुमान जी के पांच भाई और भी थे हनुमान जी के पांच सगे भाई और भी थे और वह सभी विवाहित थे इस बात का उल्लेख ब्रह्मांड पुराण में मिलता है पांचों भाइयों में बजरंगबली सबसे बड़े थे हनुमान जी को शामिल करने के बाद वानर राज केसरी के 6 पुत्र थे सभी में सबसे बड़े बजरंगबली थे इनके बाद मति मान, श्रुति मान ,केतु मान, गतिमान धूती मान थे इन सभी की संताने भी थी जिसके कारण इनका वंश कई वर्षों तक चला था | हनुमान जी की सत्य घटना जब बाली को यह वरदान मिला कि जो भी उस से युद्ध करने उसके सामने आएगा तो उसकी आदि शक्ति वाली में चली जाएगी और बाली हर युद्ध में जीत जाएगा सुग्रीव और बाली दोनों ब्रह्मा के औरस पुत्र थे बाली पर ब्रह्मा जी की सदैव कृपा बनी रहती थी बाली को अपनी शक्ति पर बहुत ही घमंड था उसका घमंड और भी अधिक बढ़ गया जब उसने तीनों लोकों के सबसे शक्तिशाली योद्धा रावण से युद्ध किया था बाली ने रावण को अपनी पूंछ से बांधकर पूरी दुनिया में भ्रमण किया था रावण जैसे योद्धा को हराकर बाली के घमंड की कोई सीमा नहीं रही थी इसके बाद बाली अपने आपको संसार का सबसे बड़ा योद्धा समझने लगा था 1 दिन बाली अपने घमंड में हरे भरे पौधों को तिनके के समान उखाड़ कर फेंक रहा था बाली अपनी ताकत के नशे में पूरे जंगल को उजाड़ रहा था और वह बार-बार युद्ध करने की चेतावनी दे रहा था उसी जंगल में
क्या आपको पता है हनुमान जी के पांच भाईयो के बारे में ? Read More »
KARMASU