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SAWAN 2024:सावन मास के पहले दिन खरीदें यह 10 सामग्री, अच्छे दिनों की होगी शुरुआत

SAWAN 2024: सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की पूजा और आध्यात्मिकता के लिए समर्पित होता है। इस महीने का पहला दिन, जिसे सावन मास की पहली तारीख कहा जाता है, विशेष रूप से शुभ माना जाता है। शिव भक्त भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उपाय आरंभ कर देंगे। हम लाए हैं बहुत ही सरल और सटीक उपाय। SAWAN 2024 सावन मास के पहले दिन भगवान शिव की प्रिय सामग्री घर में लाने से शुभता में वृद्धि होती है।   1. गंगाजल: गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह आपके घर को शुद्ध करता है और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। 2. शिवलिंग: भगवान शिव का प्रतीक, शिवलिंग पूजा के लिए आवश्यक है। 3. त्रिशूल: भगवान शिव का त्रिशूल बुरी आत्माओं से रक्षा करता है और सौभाग्य लाता है। त्रिशूल शिव के हाथों में हमेशा होता है। यह 3 देव और 3 लोक का प्रतीक है।  4. रुद्राक्ष: रुद्राक्ष को भगवान शिव का आँसू माना जाता है। इसे पहनने से शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। 5. बेल पत्र: भगवान शिव को बेल पत्र बहुत प्रिय है। 6. धूप: धूप जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। 7. कपूर: कपूर आरती और पूजा में उपयोग किया जाता है। यह मन को शांत करता है और एकाग्रता बढ़ाता है। 8. घी: घी का दीपक जलाने से धन और समृद्धि प्राप्त होती है। 9. नारियल: नारियल भगवान विष्णु और गणेश जी को प्रिय है। 10. फल: भगवान शिव को फल अर्पित करना शुभ होता है। राखी क्यों मनाई जाती है? इसके पीछे की कहानी क्या है? इन 10 सामग्री के अलावा, आप अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्य धार्मिक सामग्री भी खरीद सकते हैं। SAWAN 2024 सावन मास की पहली तारीख को इन सामग्री को खरीदकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह भी ध्यान रखें:

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Kawad Yatra 2024: 22 जुलाई से कांवड़ यात्रा शुरू, शिवजी की कृपा पाने के लिए यात्रा के दौरान अपनाएं ये नियम

सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई 2024, सोमवार के दिन से हो रही है। ऐसे में Kawad Yatra 2024 कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जिसका समापन 02 अगस्त 2024 को सावन शिवरात्रि पर होगा। सनातन परंपरा में श्रावण मास में की जाने वाली Kawad Yatra 2024 कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। हर साल लाखों श्रद्धालु सुख-समृद्धि की कामना लिए इस पावन यात्रा के लिए निकलते हैं। इस साल सावन माह की शुरुआत 22 जुलाई 2024, सोमवार के दिन से हो रही है। ऐसे में कांवड़ यात्रा की शुरुआत भी इसी दिन से होगी, जिसका समापन 02 अगस्त 2024 को सावन शिवरात्रि पर होगा। श्रावण के महीने में कांवड़ लेकर जाने और शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा होती है। शिव भक्त कांवड़ को बांधकर कंधों पर लटकाकर अपने मूल स्थान के शिवालय में लाते हैं और फिर यहां के शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करते हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं अनुसार सबसे पहले कावड़ यात्रा की शुरुआत भगवान परशुराम ने की थी। कहते हैं भगवान परशुराम गढ़मुक्तेश्वर धाम से गंगाजल लेकर आए थे और फिर इस गंगाजल को उन्होंने यूपी के बागपत के पास स्थित ‘पुरा महादेव’ पर चढ़ाया था। भगवान शिव को समर्पित इस कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु पवित्र गंगा जल या फिर किसी नदी विशेष के शुद्ध जल से अपने ईष्ट देव का जलाभिषेक करते हैं। शुचिता, पवित्रता और संकल्प के साथ की गई इस यात्रा से प्रसन्न होकर कल्याण के देवता भगवान शिव अपने भक्तों पर अवश्य कृपा करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन ध्यान रहे कांवड़ यात्रा के कुछ नियम भी होते हैं, जिन्हें तोड़ने पर न सिर्फ यह यात्रा अधूरी रह जाती है उसका पूर्ण फल भी नहीं मिलता। सपने में भगवान को देखना मिलता है चौकाने वाला संकेत जानिए क्या है रहस्य ? Kawad Yatra 2024:कांवड़ यात्रा के नियम

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Sawan 2024: शिव जी की पूजा में इन मंत्रों का करें जाप, सभी समस्याओं का होगा निवारण

Sawan 2024: कुछ ही दिनों में सावन माह की शुरुआत होने वाली है। यह माह देवों के देव महादेव की पूजा को समर्पित है। इस माह के हर दिन को भोलेनाथ की पूजा के लिए शुभ माना गया है। मान्यता है कि सावन में शिव जी की पूजा करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है। साथ ही तरक्की के भी योग बनते हैं। इस माह में चातुर्मास होने के कारण सृष्टि का संचालन शिव जी के हाथों में होता है। ऐसे में उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कई मांगलिक कार्यक्रम किए जाते हैं। साल 22 जुलाई 2024 से सावन माह की शुरुआत हो रही है। इस दिन प्रीति आयुष्मान योग बन रहा है। इसके अलावा सर्वार्थ सिद्धि योग भी बना रहेगा। ऐसे में यह पूरा दिन शिव जी की आराधना करने के लिए शुभ रहेगा। माना जाता है कि महादेव को प्रसन्न करने के लिए हमेशा सफेद मदार या आक का फूल चढ़ाना चाहिए। इससे व्यक्ति को धरती लोक से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दौरान व्रत रखने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। हालांकि, महादेव की पूजा उनके मंत्रों के बिना अधूरी मानी जाती है। इसी कड़ी में आइए शिव जी के मंत्रों के बारे में जान लेते है। Sawan 2024 मंत्र जाप करते समय ध्यान रखने योग्य बातें: इन मंत्रों के जाप से भगवान शिव को करें प्रसन्न ॐ नमः शिवायये मंत्र शिवजी का प्रिय मंत्र माना जाता है। पूजा में इसका 108 बार जाप करना चाहिए। इससे दिमाग शात रहता है। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥महादेव के इस मंत्र को सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है। इसका पूजा में जाप करना लाभदायक होता है। सावन में शिवलिंग की इस विधि से करें पूजा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर एक मनोकामना शिव आरोग्य मंत्रमाम् भयात् सवतो रक्ष श्रियम् सर्वदा।आरोग्य देही में देव देव, देव नमोस्तुते।।ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।उर्वारुकमिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् । तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि। शिव शक्तिशाली मंत्र ऐं ह्रीं श्रीं ‘ऊँ नम: शिवाय:’ श्रीं ह्रीं ऐं। ऊँ हौं जूं स: डिस्क्लेमर : ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए Karmasu.in उत्तरदायी नहीं है। 

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Baba Bhootnath:हिमाचल में यहां स्‍वयंभू प्रकट शिवलिंग में विराजे हैं बाबा भूतनाथ

यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और इसका इतिहास 5वीं शताब्दी का बताया जाता है।यहाँ स्वयंभू शिवलिंग है, जो कि धरती से निकला हुआ माना जाता है।यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है और हर साल हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। भगवान शिव हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। ऐसा ही स्वयं-भू प्रकट शिवलिंग का रूप है बाबा भूतनाथ का। मंडी शहर के बीचों बीच शिखारा शैली में बने बाबा के मंदिर में हर रोज भक्तों की भीड़ रहती है। Baba Bhootnath:बाबा भूतनाथ मंदिर, मंडी, हिमाचल प्रदेश भगवान शिव हिमाचल प्रदेश के विभिन्न भागों में अलग-अलग रूपों में विद्यमान है। ऐसा ही स्वयं-भू प्रकट शिवलिंग का रूप है Baba Bhootnathबाबा भूतनाथ का। मंडी शहर के बीचों बीच शिखारा शैली में बने बाबा के मंदिर में हर रोज भक्तों की भीड़ रहती है। सावन माह में यहां हर सोमवार को विशेष पूजा अर्चना और भंडारे का आयोजन होता है। 1527 ई में बने इस मंदिर का रूप आज भी जस का तस है। मंदिर के अंदर प्राचीन वाद्य यंत्र भी रखे गए हैं और प्राचीन मूर्तियां भी हैं। यहां सुबह पांच बजे और रोज शाम को आरती का आयोजन होता है। साथ ही दूध, दहीं, शहद, बिल व भांग पत्र से पूजा का विशेष लाभ भक्तों को मिलता है। मंडी शहर के साथ-साथ देश व विदेश से श्रद्धालु भी बाबा भूतनाथ के दर्शनों के लिए यहां पहुंचते हैं। Baba Bhootnath:यह है मान्यता बताया जाता है कि प्राचीन समय में एक ग्वाला अपनी गाय को चराने के लिए मंडी आता था, तो गाय एक स्थान पर खड़ी हो जाती और उसके थनों से अपने आप ही उस स्थान पर दूध निकलने लगता। यह बात चारों और फैल गई। इसी बीच उक्त समय के राजा अजबेर सेन को भगवान शिव ने सपने में आकर कहा कि उक्त स्थान पर उनका शिवलिंग हैं। सपना आने के अगले दिन ही जब राजा ने वहां खोदाई करवाई तो स्वयं-भू प्रकट शिवलिंग वहां मिला। इसके बाद राजा ने यहां शिखरा शैली में एक मंदिर का निर्माण करवाया और तब से आज दिन तक मंडी शहर के अलावा देश भर के लोगों की आस्था का केंद्र बाबा भूतनाथ का मंदिर माना जाता है। बाबा भूतनाथ के बारे में कुछ रोचक तथ्य बाबा भूतनाथ मंदिर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल शादी में आ रही है दिक्कतें तो जरुर कर लें जुलाई में इस दिन शिव जी की आराधना बाबा भूतनाथ मंदिर, जयपुर, राजस्थान बाबा भूतनाथ मंदिर, वाराणसी, उत्तर प्रदेश इनके अलावा भी भारत में कई जगहों पर बाबा भूतनाथ के मंदिर हैं।

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Sawan 2024: सावन में शिवलिंग की इस विधि से करें पूजा, भोलेनाथ पूरी करेंगे हर एक मनोकामना

Sawan सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस महीने में शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। Sawan सावन 2024 में शिवलिंग पूजा की विधि दी गई है: सामग्री: विधि: Sawan शिवलिंग पर जल चढ़ाने का मंत्र मन्दाकिन्यास्तु यद्वारि सर्वपापहरं शुभम् । तदिदं कल्पितं देव स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम् ॥ श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः । स्नानीयं जलं समर्पयामि। कुछ विशेष बातें: इन उपायों से आपकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होंगी और भगवान शिव आप पर सदैव अपनी कृपा रखेंगे। सावन महीने में रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति ? अतिरिक्त जानकारी: Sawan सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का पवित्र महीना है। इस महीने में शिवलिंग की पूजा करने से आपको निश्चित रूप से शुभ फल प्राप्त होंगे। डिस्क्लेमर  ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए KARMASU.IN उत्तरदायी नहीं है। 

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Shiv mantra:सावन महीने में रोजाना करें इन मंत्रों का जाप, सभी कष्टों से मिलेगी मुक्ति ?

सावन महीने में मंत्र जाप: कष्टों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और मंत्र जाप के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए मंत्र जाप का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है। सावन का महीना देवों के देव महादेव को अति प्रिय है। इस महीने में प्रत्येक दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा-उपासना की जाती है। साथ ही सावन सोमवार पर भगवान शिव के निमित्त व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने से साधक के सभी मनोरथ पूर्ण हो जाते हैं। साथ ही व्यक्ति विशेष को उनकी मनोकामना के अनुरूप फल की प्राप्ति होती है। अतः साधक यथा शक्ति तथा भक्ति भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। शास्त्रों में निहित है कि सृष्टि के रचयिता भगवान शिव महज जलाभिषेक से प्रसन्न हो जाते हैं। इसके लिए सावन के महीने में प्रतिदिन भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें। साथ ही रोजाना पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करें। इन मंत्रों के जाप से साधक को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। आइए, मंत्र जाप करते हैं- Shiv mantra भगवान शिव के मंत्र शिव मूल मंत्र ॐ नमः शिवाय॥ रूद्र मंत्र ॐ नमो भगवते रूद्राय । Shiv mantra रूद्र गायत्री मंत्र ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ Shiv mantra महामृत्युंजय मंत्र ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ शिव प्रार्थना मंत्र करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं । विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥ शिव नमस्कार मंत्र शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।। ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।। Sawan 2024: दुर्लभ संयोग से भरा हुआ है जाने क्या है महत्वपूर्ण बाते ? श‍िव नामावली मंत्र श्री शिवाय नम: श्री शंकराय नम: श्री महेश्वराय नम: श्री सांबसदाशिवाय नम: श्री रुद्राय नम: ॐ पार्वतीपतये नम: ॐ नमो नीलकण्ठाय नम: शिव आवाहन मंत्र ॐ मृत्युंजय परेशान जगदाभयनाशन । तव ध्यानेन देवेश मृत्युप्राप्नोति जीवती ।। वन्दे ईशान देवाय नमस्तस्मै पिनाकिने । नमस्तस्मै भगवते कैलासाचल वासिने । आदिमध्यांत रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। त्र्यंबकाय नमस्तुभ्यं पंचस्याय नमोनमः । नमोब्रह्मेन्द्र रूपाय मृत्युनाशं करोतु मे ।। नमो दोर्दण्डचापाय मम मृत्युम् विनाशय ।। देवं मृत्युविनाशनं भयहरं साम्राज्य मुक्ति प्रदम् । नमोर्धेन्दु स्वरूपाय नमो दिग्वसनाय च । नमो भक्तार्ति हन्त्रे च मम मृत्युं विनाशय ।। अज्ञानान्धकनाशनं शुभकरं विध्यासु सौख्य प्रदम् । नाना भूतगणान्वितं दिवि पदैः देवैः सदा सेवितम् ।। सर्व सर्वपति महेश्वर हरं मृत्युंजय भावये ।। शिव स्तुति मंत्र ॐ नमो हिरण्यबाहवे हिरण्यवर्णाय हिरण्यरूपाय हिरण्यपतए अंबिका पतए उमा पतए पशूपतए नमो नमः ईशान सर्वविद्यानाम् ईश्वर सर्व भूतानाम् ब्रह्मादीपते ब्रह्मनोदिपते ब्रह्मा शिवो अस्तु सदा शिवोहम तत्पुरुषाय विद्महे वागविशुद्धाय धिमहे तन्नो शिव प्रचोदयात् महादेवाय विद्महे रुद्रमूर्तये धिमहे तन्नों शिव प्रचोदयात् नमस्ते अस्तु भगवान विश्वेश्वराय महादेवाय त्र्यंबकाय त्रिपुरान्तकाय त्रिकाग्नी कालाय कालाग्नी रुद्राय नीलकंठाय मृत्युंजयाय सर्वेश्वराय सदशिवाय श्रीमान महादेवाय नमः ॐ ॐ ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।। Shiv mantra मंत्र जाप करते समय कुछ ध्यान रखने योग्य बातें: यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी मंत्र का जाप करने से पहले उसका अर्थ और उच्चारण विधि जान लेना आवश्यक है। आप किसी विद्वान ब्राह्मण या गुरु से भी मंत्र के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। डिसक्लेमर: ‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’

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Sawan 2024:सावन में इस प्रकार रखे व्रत नोट कर लें इस बार कब-कब पड़ेंगे सोमवार

सावन का महीना भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा करना और व्रत रखना महाफल माना जाता है। साल 2024 में सावन मास 22 जुलाई से शुरू होकर 19 अगस्त तक चलेगा। इस साल सावन में 5 सोमवार आएंगे। Sawan 2024 सावन सोमवार व्रत विधि: सावन सोमवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। शिवलिंग को गंगाजल, दूध, दही, घी और शहद से स्नान कराएं। बेल पत्र, धतूरा, फल, फूल और भांग अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और अगरबत्ती लगाएं। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें। दिन भर फलाहार करें। शाम को सूर्यास्त के बाद व्रत का पारण करें। Sawan पहला सावन सोमवार सावन का पहला सोमवार 22 जुलाई के दिन ही मनाया जाएगा, इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें दूध, बेलपत्र और धतूरा जरूर चढ़ाएं और इसके बाद शिवलिंग की परिक्रमा करें. Sawan दूसरा सावन सोमवार सावन का दूसरा सोमवार 29 जुलाई को मनाया जाएगा. इस दिन शिवलिंग पर गंगाजल और कच्चे दूध का अभिषेक करना चाहिए, इससे भगवान भोलेनाथ बहुत प्रसन्न होते हैं. शिवलिंग की पूजा के जान लीजिए नियम MAHASHIVRATRI Sawan तीसरा सावन सोमवार सावन का तीसरा सोमवार 5 अगस्त को पड़ रहा है. सावन के तीसरे सोमवार में आप किसी प्रसिद्ध शिव मंदिर में जा सकते हैं या घर में ही मिट्टी की शिवलिंग बनाकर या अपने घर के शिवलिंग की ही विधि-विधान से पूजा अर्चना करके भोलेनाथ का आशीर्वाद पा सकते हैं. Sawan चौथा सावन सोमवार सावन का चौथा सोमवार 12 अगस्त के दिन पड़ रहा है. कहते सावन के चौथे सोमवार पर शिवलिंग पर घी अर्पित करना चाहिए, इसके बाद शुद्ध जल या गंगाजल से भगवान शिव का अभिषेक करने से सभी दुखों और कष्टों का नाश होता है. Sawan पांचवा सावन सोमवार सावन का पांचवा और आखिरी सोमवार 29 अगस्त के दिन मनाया जाएगा. कहते हैं सावन के आखिरी सोमवार के दिन शाम के समय शिवजी और पार्वती जी की आरती करने के साथ ही ओम गौरी शंकराय नमः  और ॐ नमः पार्वती पतये नमः मंत्र का जाप 108 बार करना चाहिए. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Masik Shivratri 2024: शादी में आ रही है दिक्कतें तो जरुर कर लें जुलाई में इस दिन शिव जी की आराधना

मासिक शिवरात्रि हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह भगवान शिव की पूजा का पवित्र अवसर है। Masik Shivratri :मासिक शिवरात्रि का महत्व: Masik Shivratri : मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि: Masik Shivratri : मासिक शिवरात्रि जुलाई 2024 तिथि जुलाई माह में मासिक शिवरात्रि का व्रत आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को रखा जाएगा. 4 जुलाई, 2024 गुरुवार के दिन इस व्रत को रखा जाएगा. शिवलिंग की पूजा के जान लीजिए नियम  दांपत्य जीवन में परेशानी के लिए उपाय शादीशुदा जिंदगी में अगर आपको दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तो Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि का व्रत इन समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए बहुत खास होता है.  शिव पुराण के अनुसार इन लोगों की शादीशुदा जिंदगी में मुश्किलें आ रही हों अगर इस दिन सच्ची श्रद्धा के साथ पूजा-पाठ करें तो मुश्किलों का अंत हो सकता है. शादी में देरी के लिए उपाय अगर कुंवारी कन्याएं Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि का व्रत रखती हैं तो उनको मनचाहे वर की प्राप्ति होती है. इसीलिए इस व्रत को बहुत खास माना जाता है और साथ ही उन्हें सुख, सौभाग्य, और सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है. जिन पुरुषों को भी शादी में देरी का सामना करना पड़ रहा हो वो पुरुष भी इस व्रत को रख सकते हैं और भोलेनाथ और माता -पार्वती का शीर्वाद पा सकते हैं. इस व्रत को रखने से सुख जीवन का आशीर्वाद मिलता है.

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महाशिवरात्रि की पूजा में भगवान शिव को ये चीजें करें अर्पित, जीवन में नहीं आएंगी मुश्किलें

महाशिवरात्रि पूजा विधि: महाशिवरात्रि भगवान शिव का सबसे पवित्र त्यौहार है, जो हर साल फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। इस दिन भक्तगण भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। महाशिवरात्रि का पर्व इस साल 2024 में 8 मार्च दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन लोग व्रत रखकर भगवान शिव की विधान से पूजा-अर्चना करते हैं और घर परिवार में सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए प्रार्थना करते हैं. इस दिन महाशिवरात्रि की पूजा में भगवान शिव को बेलपत्र, भांग, मदार पुष्प, धतूरा, अक्षत्, चंदन आदि अर्पित किए जाते हैं ताकि भोलेनाथ को जल्दी प्रसन्न किया जा सके और महादेव प्रसन्न होकर हमारी मनोकामनाओं को पूरा करें. महाशिवरात्रि के अवसर पर आप भगवान भोलेनाथ को उनके प्रिय भोग लगाकर भी उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं. उनको भोग अर्पित करने से सुख, संतान की प्राप्ति होती है और दुख दूर होते हैं. महाशिवरात्रि के मौके पर भगवान शिव को भांग जरूर अर्पित करें. भगवान शिव को भांग इसलिए चढ़ाई जाती है कि जब शिव ने विष का पान किया था. तब उनके उपचार के लिए कई तरह की जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया गया था जिसमें भांग भी शामिल थी. इस वजह से हर साल शिवरात्रि के मौके पर भांग के पत्ते या भांग को पीसकर दूध या जल में घोलकर भोलनाथ का अभिषेक किया जाता है. इससे लोगों को रोग दोष के छुटकारा मिलता है. पूजन सामग्री: पूजन विधि: व्रत विधि: महाशिवरात्रि पूजा के लाभ: महत्वपूर्ण बातें: यह भी ध्यान रखें: दूर होंगे कष्ट जीवन में कष्टों के निवारण के लिए शिवलिंग पर आक का फूल भी अर्पित किया जाता है. आक का फूल और पत्ता दोनों ही भगवान भोलेनाथ को बेहद प्रिय है. मान्यता है कि जो भक्त भगवान शिव को आक के पुष्प और पत्ते अर्पित करते हैं. भगवान शिव उसके दैहिक, दैविक और भौतिक सभी तरह के कष्ट हर लेते हैं और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है. भोलेनाथ जरूर चढ़ाएं भस्म भगवान शिव की पूजा में भस्म का उपयोग करना बहुत शुभ माना जाता है. महाशिवरात्रि के दिन विशेष तौर पर इसे शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवजी का प्रमुख वस्त्र भस्म को भी माना जाता है, क्योंकि उनका पूरा शरीर भस्म से ढका रहता है. इसलिए महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव पर भस्म जरूर चढ़ाएं.

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शिवलिंग की पूजा के जान लीजिए नियम MAHASHIVRATRI

शिवपुराण एक प्रमुख हिंदू धार्मिक ग्रंथ है जो भगवान शिव के बारे में विस्तृत ज्ञान प्रदान करता है। यह पुराण भगवान शिव की विभिन्न अवतार, उनके लीलाएं, तप, विवाह, और उनके भक्तों के अनुभवों को समेटता है। इसमें भगवान शिव की महिमा का वर्णन भी किया गया है। शिवपुराण में भगवान शिव को महादेव, महाकाल, रुद्र, नीलकंठ, भैरव, इत्यादि के नामों से संदर्भित किया गया है। यहां कुछ महत्वपूर्ण विशेषताएं और महिमा की कुछ उदाहरण दिए जा सकते हैं: ये थे कुछ मुख्य तथ्य जो शिवपुराण में भगवान शिव की महिमा को वर्णित करते हैं। यह पुराण उनकी अनंत शक्ति, अनुग्रह, और समर्पण की कथाएं भी समेटता है। ऐसे करें मूर्ति का निर्माण? आधुनिक काल में मूर्ति बनाने के तरीकों में बहुत से बदलाव आ चुके हैं. लोग साचों का इस्तेमाल कर मूर्तियों का निर्माण करते हैं. आमतौर पर लोग बाजार से खरीदकर मूर्ति लाते हैं और उसे ही अपने घर के मंदिर में स्थापित कर पूजा करते हैं. लेकिन शिवपुराण के अनुसार यह बताया गया है कि मिट्टी की बनाई हुई प्रतिमा से सभी लोगों की मनोकामना पूरी होती है. शिवपुराण के अनुसार मूर्ति को बनाने के लिए किसी नदी, तालाब, कुआं या जल के भीतर की मिट्टी लाकर उसमें सुगंधित द्रव्य मिलाकर शुद्ध करें. उसके बाद मिट्टी में दूध मिलाकर हाथों से सुंदर मूर्ति का निर्माण करें और पद्मासन द्वारा मूर्ति का आदर सहित पूजन करें. मूर्ति और शिवलिंग का पूजन शिवपुराण के अनुसार गणेश जी, भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान सूर्य, भगवान विष्णु और शिवलिंग की हमेशा पूजा करनी चाहिए. मन्नत पूरी करने के लिए सोलह उपचारों से पूजा करना फलदायक होता है. किसी व्यक्ति के द्वारा स्थापित शिवलिंग पर नैवेद्य से शिवलिंग का पूजन करना चाहिए. देवताओं के द्वारा स्थापित शिवलिंग पर नैवेद्य अर्पित करना चाहिए और यदि शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ है, तब उसका पूजन पांच सेर नैवेद्य से करें. इस प्रकार पूजन करने से मनचाहा फल मिलता है. साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह सहस्र यानि हजार बार पूजा करने से व्यक्ति को सतलोक की प्राप्ति होती है. शिव पुराण के अनुसार शिवलिंग का महत्व भगवान शिव को मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है. योनि और लिंग दोनों ही शिव समाहित है. इसलिए भगवान शिव जगत का जन्म निरूपण हैं. यही कारण है कि व्यक्ति को जन्म की निवृत्ति के लिए पूजन के अलग नियमों का पालन करना होता है. साथ ही सारा जगत बिंदु- नाद स्वरुप है. बिंदु शक्ति और नाद स्वयं शिव है. इसलिए पूरा जगत ही शिव और शक्ति का ही स्वरूप है और इस ही जगत का कारण बताया जाता है. बिंदु देव है और नाद भगवान शिव हैं, इनका मिला जुला रूप ही शिवलिंग कहलाता है. देवी उमा जगत की माता है और भगवान शिव जगत के पिता है जो उनकी सेवा करता है उस पर उनकी कृपा बढ़ती रहती है. शिवलिंग अभिषेक और प्रकार जीवन और मृत्यु के बंधन से मुक्त होने के लिए श्रद्धापूर्वक शिवलिंग का पूजन करना चाहिए. गाय के दूध, दही और घी को शहद और शक्कर के साथ मिलाकर पंचामृत तैयार करें और उन्हें अलग-अलग भी रखें. पंचामृत को शिवलिंग पर अर्पित करें. दूध और अनाज मिलाकर नैवेद्य तैयार कर प्रणव मंत्र का जाप करते हुए उसे भगवान शिव को अर्पित करें. प्रणव को ध्वनि लिंग स्वयंभू लिंग और नाद स्वरूप होने के कारण नाद लिंग और बिंदु स्वरूप होने के कारण बिंदु लिंग के रूप में जाना जाता है. अचल रूप में शिवलिंग को मकर स्वरूप माना जाता है. पूजा की दीक्षा देने वाले गुरु आचार्य विग्रह आकार का प्रतीक होने से आकार लिंग के भी छह भेद हैं.

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Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत में रात को ही क्यों की जाती है भोलेनाथ की पूजा? जानिए वजह

( Masik Shivratri ) मासिक शिवरात्रि व्रत हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस व्रत को रखने से भक्तों को भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके जीवन में सुख-समृद्धि, संतान प्राप्ति, रोगों से मुक्ति, और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ( Masik Shivratri ) मासिक शिवरात्रि व्रत की मान्यताओं के अनुसार, चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं। इसलिए इस दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से उन्हें प्रसन्न किया जा सकता है। इसके अलावा, पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव का विवाह चतुर्दशी तिथि को हुआ था। इसलिए इस दिन का विशेष महत्व है। मासिक शिवरात्रि व्रत रखने वाले भक्तों को इस दिन निम्नलिखित बातों का पालन करना चाहिए: Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत रखने से भक्तों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं: मासिक शिवरात्रि व्रत हर महीने किया जा सकता है। यह व्रत सभी वर्ग के लोगों के लिए उपयुक्त है। मासिक शिवरात्रि का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मासिक शिवरात्रि का व्रत असंभव को भी संभव कर सकता है और इस व्रत को रखने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती है. इस व्रत में रात्रि के समय में पूजा करने के बाद रात को जागरण करते हुए भोलेनाथ की अराधना करनी चाहिए. यदि कुंवारे लोग मासिक शिवरात्रि का व्रत व पूजन करते हैं तो जल्द ही उन्हें अच्छा जीवनसाथी मिलता है. रात को क्यों होती है भोलेनाथ की पूजा पौराणिक कथाओं के अनुसार चतुर्दशी तिथि की रात्रि में भगवान शिव का विवाह हुआ था, इसलिए भोलेनाथ को रात्रि प्रिय है. यही वजह है कि मासिक शिवरात्रि के दिन अगर रात्रि के समय भगवान शिव का पूजन किया जाए तो वह प्रसन्न होते हैं. इसके अलावा शिव को संहार का देवता भी कहा गया है और रात्रि संहार काल की प्रतिनिधि है. इसलिए मासिक शिवरात्रि की रात को विधि-विधान के साथ भगवान शिव का पूजन करने से जीवन में आ रहे कष्टों से मुक्ति मिलती है. मासिक शिवरात्रि का व्रत करने पर जातक रात्रि के चार प्रहर में भगवान शिव का पूजन करता है. बता दें ​कि प्रत्येक प्रहर 3 घंटे का होता है. एक प्रहर में भोलेनाथ का दूध से अभिषेक किया जाता है, फिर दही और फिर शहद से ​अभिषेक होता है.

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भगवान शिव के इन 108 नाम का जाप मिलेगा मनवांछित फल

प्रत्येक माह में शिव रात्रि की तिथि होती है। लेकिन फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी को भगवान शिव का वरदान प्राप्त है और यह तिथि भगवान शिव की पूजा अर्चना के लिए समर्पित मानी गई है। भगवान शिव को भोले भंडारी कहा जाता है। अगर कोई उन्हें सच्चे मन से एक लोटा जल चढ़ा दें तो ही वो प्रसन्न होकर उसे सब कुछ दे डालते हैं। आइए आज जानें भोलेनाथ के 108 नामों के बारे में जिनका यदि सच्चे मन से सोमवार को जाप करते हुए भगवान शिव को जल चढ़ाया जाए या शिव के इन नामों का साधारण जाप किया जाए तो कठिन से कठिन काम भी संवर जाता है। 

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