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Maha Shivratri:2025 में महाशिवरात्रि कब है? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि

Maha Shivratri:2025 Date: सनातन धर्म में महाशिवरात्रि के व्रत का बहुत ही खास महत्व है। ये व्रत भगवान महादेव की पूजा के लिए समर्पित होता है। आइए जानते हैं कि साल 2025 में महाशिवरात्रि का व्रत कब रखा जाएगा। यहां नोट करें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाई जाती है। धर्मशास्त्र के अनुसार जिस दिन अर्धरात्रि में चतुदर्शी हो, उसी दिन शिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि पर्व का बड़ा महत्व है Mahashivratri 2025 Date: महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन महीने में रखा जाता है। ये व्रत हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख व्रतों में से एक होता है। महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। Maha Shivratri:2025 महाशिवरात्रि का व्रत रखने से और विधि- विधान के साथ शिव जी की पूजा करने से साधक को उत्तम फल की प्राप्ति होती है। मनचाहे वर के लिए भी महाशिवरात्रि का व्रत बहुत ही लाभकारी होता है। शिव जी आराधना के लिए और कृपा प्राप्त करने के लिए महाशिवरात्रि का दिन सबसे उत्तम माना जाता है। आइए जानते हैं साल 2025 में महाशिवरात्रि का व्रत कब रखा जाएगा। Mahashivratri 2025 Date (महाशिवरात्रि डेट 2025)महाशिवरात्रि का व्रत हर साल फाल्गुन महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मनाया जाता है। साल 2025 में महाशिवरात्रि का व्रत 26 फरवरी 2025 को रखा जाएगा। Mahashivratri 2025 Shubh Muhurat (महाशिवरात्रि 2025 पूजा शुभ मुहूर्त)साल 2025 में Maha Shivratri:2025 महाशिवरात्रि 26 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी। इस दिन निशिता काल में पूजा का समय 12:09 ए एम से 12:59 ए एम तक रहने वाला है। निशिता काल पूजा समय – 12:09 ए एम से 12:59 ए एम, फरवरी 27 अवधि – 50 मिनट शिवरात्रि व्रत पारण समय- 27 फरवरी को 06:48 ए एम से 08:54 ए एम तक Maha Shivratri:2025 Puja Subh Muhurat:पूजा का शुभ मुहूर्त- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – 06:19 पी एम से 09:26 पी एम रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – 09:26 पी एम से 12:34 ए एम, फरवरी 27 रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – 12:34 ए एम से 03:41 ए एम, फरवरी 27 रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – 03:41 ए एम से 06:48 ए एम, फरवरी 27 Maha Shivratri:2025 Puja Vidhi महाशिवरात्रि पूजा-विधि: इस पावन दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें। मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। शिवलिंग का गंगा जल, दूध, आदि से अभिषेक करें। भगवान शिव के साथ ही माता पार्वती की पूजा अर्चना भी करें। भोलेनाथ का अधिक से अधिक ध्यान करें। ऊॅं नम: शिवाय मंत्र का जप करें। भगवान भोलेनाथ को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। भगवान की आरती करना न भूलें। Maha Shivratri:2025 Puja Samgri list:महाशिवरात्रि पूजा सामग्री की लिस्ट पुष्प, पंच फल पंच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पंच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें,तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार की सामग्री आदि। Mahashivratri Significance (महाशिवरात्रि व्रत महत्व) हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि के व्रत का बहुत ही खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही माता पार्वती और भगवान शिव का मिलन हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन शिव जी की पूजा करने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि के व्रत का ज्योतिष महत्व भी है। वैदिक मान्यताओं के अनुसार हर मास की चतुर्थी तिथि Maha Shivratri:2025 भगवान शिव को समर्पित होती है। मान्यता के अनुसार इस तिथि पर चंद्रमा बहुत कमजोर होता है, इसलिए शिव जी ने उसे अपने मस्तक पर धारण किया जाता है। इस दिन शिव जी की उपासना करने से साधक की कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होती है।

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Bhagwan Shiv:शिवलिंग पर यह 5 चीज चढ़ाने से भोलेनाथ होते हैं प्रसन्न, धन- दौलत के साथ आरोग्य की होती है प्राप्ति

Bhagwan Shiv भगवान शिव का प्रिय महीना है सावन , वैसे तो रोज महादेव की पूजा करनी चाहिए और गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, कपूर, दूध, चावल, चंदन और भस्म जैसी चीजें चढ़ाई जाती हैं। Bhagwan Shiv इससे शुभ फल मिलते हैं और सोया भाग्य जाग जाता है। लेकिन सोमवार, त्रयोदशी और शिवरात्रि पर शिवजी की पूजा से भगवान भोलेनाथ आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। आइये जानते हैं उन 12 वस्तुओं के बारे में जिसे चढ़ाने पर मिलता है विशेष फल….. Bhagwan Shiv Shivling par kya chadhana chahiye: भगवान भोलेनाथ एक लोटा जल और एक बेलपत्र से ही प्रसन्न हो जाते हैं और हर मनोकामना पूरी कर देते हैं। लेकिन कुछ ऐसी वस्तुएं हैं जिन्हें सावन में शिवलिंग पर चढ़ाने से उसी के अनुरूप फल देते हैं। फिर मधुमेह टीबी जैसे रोग से राहत हो या धन संपत्ति की मनोकामना हो।  1- शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाएं (Akshat to Shivalinga) शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर चावल चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। अक्षत चढ़ाने से धन से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। लेकिन ध्यान रहे कि चावल के दाने साबुत हों, टूटे हुए नहीं होने चाहिए। 2- चढ़ाएं काले तिल शिवलिंग पर काले तिल चढ़ाना लाभप्रद माना जाता है। आपको बता दें कि काले तिल चढ़ाने से पितृ दोष शांत होता है। Bhagwan Shiv साथ ही काले तिल चढ़ाने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है। वहीं काले तिल शिवलिंग पर चढ़ाने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। Bhagwan Shiv:भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है तो फिर क्या है उनकी अवतरण कथा… 3. शमी का पत्ता करें अर्पित भोलेनाथ की पूजा करते समय शमी के पत्तों को भी अर्पित करना चाहिए। Bhagwan Shiv क्योंकि शमी के पेड़ का संबंध शनिदेव से माना जाता है और शनिदेव भगवान शिव को अपना गुरु मानते हैं। इसलिए अगर आप शिवलिंग पर शमी का पत्ता अर्पित करते हैं तो आपको भगवान शिव के साथ शनि देव की कृपा प्राप्त होगी।  4. शिवलिंगं पर चढ़ाएं गेहूं शिवलिंग पर गेहूं चढ़ाना बेहद शुभ माना जाता है। गेहूं चढ़ाने से वैवाहिक सुख प्राप्त होता है। Bhagwan Shiv साथ ही जिन लोगों को संतान प्राप्ति मेंं बाधा आ रही हो, वो लोग भी शिवलिंग पर गेहूं चढ़ा सकते हैं। जिससे संतान प्राप्ति के योग बनते हैं।  5- शिवलिंग पर चढ़ाएं बेलपत्र भगवान शिव को बेलपत्र विशेष प्रिय है। इसलिए बेलपत्र चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। साथ ही सुख- समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वहीं मान्यता है कि सावन में भोलेनाथ पर जलाभिषेक के साथ बेलपत्र चढ़ाते हैं तो तीन जन्मों का पाप नष्ट हो जाता है।

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Bhagwan Shiv:भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है तो फिर क्या है उनकी अवतरण कथा…

Bhagwan Shiv:हम सबके प्रिय भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है वे स्वयंभू हैं। लेकिन पुराणों में उनकी उत्पत्ति का विवरण मिलता है। विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा भगवान विष्णु की नाभि कमल से पैदा हुए जबकि शिव भगवान विष्णु के माथे के तेज से उत्पन्न हुए बताए गए हैं। विष्णु पुराण के अनुसार माथे के तेज से उत्पन्न होने के कारण ही शिव हमेशा योगमुद्रा में रहते हैं।  श्रीमद् भागवत के अनुसार एक बार जब भगवान विष्णु और ब्रह्मा अहंकार से अभिभूत हो स्वयं को श्रेष्ठ बताते हुए लड़ रहे थे तब एक जलते हुए खंभे से भगवान शिव प्रकट हुए। विष्णु पुराण में वर्णित शिव के जन्म की कहानी शायद भगवान शिव का एकमात्र बाल रूप वर्णन है। इसके अनुसार ब्रह्मा को एक बच्चे की जरूरत थी। उन्होंने इसके लिए तपस्या की। तब अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रकट हुए। ब्रह्मा ने बच्चे से रोने का कारण पूछा तो उसने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया कि उसका कोई नाम नहीं है इसलिए वह रो रहा है।  तब ब्रह्मा ने शिव का नाम ‘रूद्र’ रखा जिसका अर्थ होता है ‘रोने वाला’। शिव तब भी चुप नहीं हुए। इसलिए ब्रह्मा ने उन्हें दूसरा नाम दिया पर शिव को नाम पसंद नहीं आया और वे फिर भी चुप नहीं हुए। इस तरह शिव को चुप कराने के लिए ब्रह्मा ने 8 नाम दिए और शिव 8 नामों (रूद्र, शर्व, भाव, उग्र, भीम, पशुपति, ईशान और महादेव) से जाने गए। शिव पुराण के अनुसार यह नाम पृथ्वी पर लिखे गए थे। Bhagwan Shiv:शिव के इस प्रकार ब्रह्मा पुत्र के रूप में जन्म लेने के पीछे भी विष्णु पुराण की एक पौराणिक कथा है। इसके अनुसार जब धरती, आकाश, पाताल समेत पूरा ब्रह्माण्ड जलमग्न था तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) के सिवा कोई भी देव या प्राणी नहीं था। तब केवल विष्णु ही जल सतह पर अपने शेषनाग पर लेटे नजर आ रहे थे। Bhagwan Shivतब उनकी नाभि से कमल नाल पर ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा-विष्णु जब सृष्टि के संबंध में बातें कर रहे थे तो शिव जी प्रकट हुए। ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इंकार कर दिया। तब शिव के रूठ जाने के भय से भगवान विष्णु ने दिव्य दृष्टि प्रदान कर ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई। ब्रह्मा को अपनी गलती का एहसास हुआ और शिव से क्षमा मांगते हुए उन्होंने उनसे अपने पुत्र रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। Bhagwan Shivशिव ने ब्रह्मा की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें यह आशीर्वाद प्रदान किया। जब ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना शुरू की तो उन्हें एक बच्चे की जरूरत पड़ी और तब उन्हें भगवान शिव का आशीर्वाद ध्यान आया। अत: ब्रह्मा ने तपस्या की और बालक शिव बच्चे के रूप में उनकी गोद में प्रकट हुए। श्रावण मास में पढ़ें पवित्र श्री शिव चालीसा- जय गिरिजा पति दीन दयाला भगवान शिव को अजन्मा माना जाता है। वे सृष्टि के आरंभ से ही विद्यमान हैं, यानी उनका कोई जन्म नहीं हुआ है। वे अनंत, अनादि और अचल हैं। Bhagwan Shiv क्यों कहा जाता है कि भगवान शिव अजन्मा हैं? Bhagwan Shiv:अवतरण कथा न होने के बावजूद शिव पुराण में क्या वर्णित है? Bhagwan Shivहालांकि शिव का कोई जन्म नहीं हुआ है, लेकिन शिव पुराण में उनकी कई कथाएं वर्णित हैं। इन कथाओं में शिव के विभिन्न रूपों और लीलाओं का वर्णन मिलता है। ये कथाएं शिव के विभिन्न गुणों और सिद्धांतों को समझने में मदद करती हैं। Bhagwan Shiv:उदाहरण के लिए: ये कथाएं हालांकि काल्पनिक हैं, लेकिन इनका उद्देश्य शिव के विभिन्न रूपों और लीलाओं के माध्यम से उनके गुणों और सिद्धांतों को समझाना है। निष्कर्ष भगवान शिव का जन्म नहीं हुआ है, वे अजन्मा हैं। शिव पुराण में वर्णित कथाएं हमें शिव के विभिन्न रूपों और लीलाओं के बारे में बताती हैं, लेकिन इनका उद्देश्य शिव के दर्शन को समझना है।

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Masik Shivratri List: साल 2024 में मासिक शिवरात्रि कब-कब है? जानें तारीख, पूजा विधि-व्रत नियम और महत्व

Masik Shivratri:मासिक शिवरात्रि हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। यह हिंदू धर्म में भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और व्रत रखा जाता है। हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है. प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. मासिक शिवरात्रि वर्ष के प्रत्येक महीने में एक बार और महाशिवरात्रि वर्ष में एक बार मनाते है, इस दिन व्रत करने से व्यक्ति का हर मुश्किल काम आसान हो जाता है. Masik Shivratri 2024 Date : शिवरात्रि शिव और शक्ति के संगम का एक पर्व है. पंचाग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन यानि चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है. यह पर्व न केवल उपासक को अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि उसे क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं को रोकने में भी मदद करता है. मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है. वहीं हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि मनाई जाती है. पंचांग के अनुसार फाल्गुन महीने की मासिक शिवरात्रि को महाशिवरात्रि की मान्यता प्राप्त है. Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि: Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि व्रत विधि Masik Shivratri हर महीने आने वाले कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है. मासिक शिवरात्रि का व्रत भगवान शिव को समर्पित है, जो भक्त Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि करने की इच्छा रखते हैं, उन्हें मासिक शिवरात्रि का प्रारम्भ महाशिवरात्रि के दिन से करना चाहिए, इस व्रत को महिला और पुरुष दोनों कर सकते है. श्रद्धालुओं को शिवरात्रि की रात को जाग कर शिव जी की पूजा करनी चाहिए कब है भाद्रपद माह का पहला प्रदोष व्रत? नोट करें शुभ मुहूर्त एवं योग Masik Shivratri मासिक शिवरात्रि का महत्व हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि का व्रत बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है. मासिक शिवरात्रि में व्रत, उपवास रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने से सभी मनोमनाएं पूरी होती हैं, इस दिन व्रत करने से हर मुश्किल कार्य आसान हो जाता है और जातक की सारी समस्याएं दूर होती हैं. (Masik Shivratri)मासिक शिवरात्रि के दिन की महिमा के बारे में यह भी कहा जाता है कि वो कन्याएं जो मनोवांछित वर पाना चाहती हैं, इस व्रत को करने के बाद उन्हें उनकी इच्छा अनुसार वर मिलता है और उनके विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं. शिव पुराण के अनुसार जो भी सच्चे मन से इस व्रत को करता है उसकी सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. मासिक शिवरात्रि के दिन शिव पार्वती की पूजा व्यक्ति को हर तरह के कर्जों से मुक्ति दिलाती है. Masik Shivratri साल 2024 में पड़ने वाले सभी शिवरात्रि की लिस्ट Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

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Shiva Chalisa:श्रावण मास में पढ़ें पवित्र श्री शिव चालीसा- जय गिरिजा पति दीन दयाला

Shiva Chalisa शिव चालीसा: भोलेनाथ की भक्ति में डूब जाइए Shiva Chalisa आपने जो शिव चालीसा का अंश दिया है, वह निश्चित रूप से भगवान शिव की भक्ति का एक अद्भुत उदाहरण है। “जय गिरिजा पति दीन दयाला” यह पंक्ति भोलेनाथ के दयालु स्वरूप का वर्णन करती है। Shiva Chalisa:शिव चालीसा का महत्व Shiva Chalisa शिव चालीसा भगवान शिव की स्तुति में गाया जाने वाला एक बहुत ही लोकप्रिय स्तोत्र है। यह स्तोत्र भक्तों को शिव भक्ति के मार्ग पर अग्रसर करता है और मन को शांत करता है। Shiva Chalisa शिव चालीसा के नियमित पाठ से निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं: Shiva Chalisa शिव चालीसा का पाठ कैसे करें Shiva Chalisa ।।दोहा।। श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥ भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥ अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥ मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥ नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥ देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥ किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥ तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥ आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥ त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥ किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥ दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥ वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥ प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥ कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥ पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥ सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥ एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥ कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥ जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥ दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥ त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥ लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥ मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥ स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥ धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥ अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥ शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥ योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥ नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥ जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥ ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥ पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥ पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥ त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥ धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥ जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥ कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥ ॥दोहा॥ नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा। तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥ मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान। अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥ 

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Sawan Somwar 2024: कब है सावन का अंतिम सोमवार? अभी नोट करें शुभ-अशुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Somwar 2024 date muhurat  Sawan Somwar 2024 भगवान भोलेनाथ का प्रिय माह सावन अब अपने समापन की ओर है. सबसे अच्छी बात ये है कि श्रावण मास का समापन सोमवार के दिन हो रहा है, जो व्रत की दृष्टि से बहुत ही अच्छा माना जाता है. यह इस साल का अंतिम सावन सोमवार व्रत होगा. अंतिम सावन सोमवार के दिन 5 शुभ संयोग बन रहे हैं. वैसे तो आप पूरे साल कभी भी शिव पूजा कर सकते हैं लेकिन सावन सोमवार आपको बार-बार नहीं मिलेगा. अंतिम सावन सोमवार पर आप व्रत और शिव पूजा करके भगवान भोलेनोथ का आशीर्वाद प्राप्त कर लें, वरना इस मौके को चूक गए तो फिर आपको 1 साल तक इंतजार करना होगा. कब है अंतिम सावन सोमवार 2024?Sawan Somwar 2024 इस साल का अंतिम सावन सोमवार व्रत 19 अगस्त को है. अंतिम सावन सोमवार के दिन श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि है. वैदिक पंचांग के अनुसार, 19 अगस्त को ही श्रावण तिथि 3:04 एएम से शुरू होगी और रात 11:55 बजे तक रहेगी. सनातन धर्म में सावन के महीने को बेहद शुभ माना जाता है। पंचांग के अनुसार सावन महीने की शुरुआत 22 जुलाई से हुई है और इसका समापन 19 अगस्त को होगा। Sawan Somwar 2024 सावन सोमवार का व्रत करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से साधक को मनचाहा वर की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कब है सावन का अंतिम सोमवार? Sawan Somwar 2024 अंतिम सावन सोमवार 2024 मुहूर्त19 अगस्त को अंतिम सावन सोमवार पर शिव पूजा के लिए सबसे उत्तम समय योग के आधार पर 05:53 ए एम से 08:10 ए एम के बीच है. वैसे पूरे दिन बना शोभन योग भी पूजा पाठ के लिए अच्छा है. Sawan Somwar 2024 अंतिम सावन सोमवार 2024 जलाभिषेक समयSawan Somwar 2024 सावन सोमवार के दिन भगवान शिव का जल से अभिषेक करते हैं. अंतिम सावन सोमवार को आप 05:53 ए एम से शिव जी का जलाभिषेक कर सकते हैं. उस दिन रक्षाबंधन का त्योहार दोपहर से मनाया जाएगा, इसलिए आप जलाभिषेक और शिव पूजा का कार्यक्रम सुबह में कर सकते हैं. सावन का अंतिम सोमवार 2024 की डेट और शुभ मुहूर्त (Sawan Ka Antim Somwar 2024 Date Shubh Muhurat) सावन का अंतिम सोमवार व्रत पूर्णिमा पर किया जाएगा। पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा 19 अगस्त को रात 03 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी और 19 अगस्त को रात 11 बजकर 55 मिनट पर होगा। इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04 बजकर 25 मिनट से लेकर 05 बजकर 09 मिनट तक रहेगा। सावन सोमवार पूजा विधि (Sawan Somwar Vrat Puja Vidhi) Sawan Somwar 2024 इस दिन सुबह जल्दी उठें और दिन की शुरुआत देवी-देवता के ध्यान से करें। सूर्य देव को जल अर्पित करें। अब मंदिर की सफाई कर गंगाजल के छिड़काव से शुद्ध करें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को विराजमान करें। इसके बाद भगवान शिव का गुड़, दही, गंगाजल, दूध, घी और शक्कर समेत आदि चीजों से रुद्राभिषेक करें। मां पार्वती को सोलह श्रृंगार की चीजें अर्पित करें। Sawan Somwar 2024 देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और मंत्रों का जप करें। प्रभु से जीवन में सुख-शांति की कामना करें। सफेद मिठाई, हलवा, दही और फल का भोग लगाएं। इस दिन दान करना बेहद शुभ माना जाता है। Sawan Somwar 2024 अंतिम सावन सोमवार पर 5 शुभ संयोगअंतिम सावन सोमवार Sawan Somwar 2024 के दिन 5 शुभ संयोगों का निर्माण हो रहा है. अंतिम सावन सोमवार पर शोभन योग बन रहा है, जो सूर्योदय से लेकर देर रात 12 बजकर 47 मिनट तक रहेगा. वहीं रवि योग सुबह में 5 बजकर 53 मिनट से सुबह 8 बजकर 10 मिनट तक रहेगा. रवि योग में सभी दोषों को दूर करने की क्षमता होती है. अंतिम सावन सोमवार पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो 05:53 ए एम से 08:10 ए एम तक रहेगा. इस योग में आप जो भी कार्य करेंगे, वह सफल सिद्ध हो सकता है. ये तीनों ही योग शुभ कार्यों के लिए अच्छे माने जाते हैं. अंतिम सावन सोमवार व्रत पर इन 3 शुभ संयोगों के अलावा सावन Sawan Somwar 2024 पूर्णिमा और रक्षाबंधन भी है. सावन पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है. वहीं सावन पूर्णिमा के दिन भद्रा रहित मुहूर्त में बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं और हर्षोल्लास के साथ रक्षाबंधन का त्योहार मनाते हैं. भगवान शिव के मंत्र (Lord Shiv Mantra) 1. ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।। 2. मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय । मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय तस्मै मकाराय नम: शिवाय ।। 3. नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय महेश्वराय । नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय तस्मै नकाराय नम: शिवाय ।। 4. शिवाय गौरीवदनाब्जवृन्द सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय । श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय तस्मै शिकाराय नम: शिवाय ।। Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Sawan Somwar 2024: सावन के चौथे सोमवार पर करें भगवान शिव का राशि अनुसार अभिषेक, चमक जाएगी आपकी किस्मत

Sawan Somwar 2024 सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। लेकिन साथ ही कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। धार्मिक मान्यता है कि सावन के सोमवार (Sawan Somwar 2024) पर विधिपूर्वक भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से विवाहित स्त्रियों को अखंड सुहाग की प्राप्ति होती है। वहीं अविवाहित जातकों के विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। इसके अलावा पूजा के बाद महादेव को प्रिय चीजों का भोग लगाकर लोगों में प्रसाद का वितरण करें। Sawan Somwar 2024: आज सावन महीने का चौथा सोमवार है। इस दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने का विधान है। सावन सोमवार के दिन व्रत रखने और भगवान शिव की उपासना करने से जीवन में हर प्रकार के सुख सुविधाओं की प्राप्ति होती है। वहीं इस दिन व्रत करने से कुंवारी कन्याओं को सुयोग्य और मनपसंद जीवनसाथी मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, सावन में महादेव माता पार्वती के साथ धरती पर आते हैं और अपने हर सच्चे भक्त पर अपार कृपा बरसाते हैं।  Sawan Somwar 2024 शिवलिंग पर क्या चढ़ाना चढ़ाना चाहिए? जल, सफेद या पीला चंदन, अक्षत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल, कच्चा दूध, गंगाजल, चीनी, मिश्री, शहद, पंचामृत,  सुपारी, फल और शमी के पत्ते शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर सावन सोमवार के दिन इन चीजों को अर्पित करना बिल्कुल भी न भूलें। Sawan Somwar 2024 puja vidhi सावन सोमवार पूजा विधि Shiv ji ke Mantra:इन शिव मंत्रों का जाप करें  शिवलिंग पर नहीं अर्पित करें ये चीजें Sawan Somwar ke Chouthe sombar सावन के चौथे सोमवार पर ये काम करने से बचें इसके अलावा, कुछ अन्य सावधानियां बरतनी चाहिए: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Sawan 2025: शिव पर चढ़े हुए जल से करें ये काम, तरक्की चूमेगी कदम; महादेव करेंगे बेड़ा पार

Sawan 2025 उज्जैन हिंदू धर्म में भगवान शिव को कल्याण का देवता माना गया है, जिनकी पूजा करने पर साधक के सभी दुख पलक झपकते दूर हो जाते हैं. सनातन परंपरा में हर दिन शिव पूजा के लिए बेहद शुभ माना गया है. यदि कोई साधक किसी शिवालय में जाकर भगवान शिव के निराकार स्वरूप यानी शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा करता है तो उस पर देवों के देव महादेव की पूरी कृपा बरसती है. Sawan 2025 मान्यता है कि शिवलिंग की पूजा करने पर साधक की सभी मनोकामनाएं पलक झपकते पूरी होती हैं, लेकिन ध्यान रहे कि शिवलिंग की पूजा का भी अपना एक नियम होता है. शिव पुराण में बताया गया है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने से व्यक्ति को पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. कई लोगों में इस बात को लेकर संशय बना रहता है कि शिवलिंग पर चढ़े हुए जल का क्या करना चाहिए. चलिए जानते हैं उज्जैन के ज्योतिष रवि शुक्ला से कि इस विषय में शिव पुराण क्या कहता है. Sawan 2025 जल पीना शुभ या अशुभ शिवलिंग पर चढ़े हुए जल को चरणामृत के समान माना जाता है. ऐसे में आप इस जल को  प्रसाद के रूप में ग्रहण कर सकते हैं. इसका वर्णन शिव पुराण के 22 अध्याय के 18 श्लोक में भी मिलता है, जिसके अनुसार, शिवलिंग का जल पीने से व्यक्ति को कई प्रकार के रोगों से मुक्ति मिलती है. दिशा का जरूर रखें ध्यानहिंदू मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर कभी भी पूर्व दिशा की ओर मुख करके जल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि सनातन परंपरा के अनुसार यह भगवान शिव का मुख्य प्रवेश द्वार माना गया है. हिंदू मान्यता के अनुसार शिवलिंग पर हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुख करके जल चढ़ाना चाहिए. शिव पूजन में जरुर रखें परिक्रमा का ध्यानधार्मिक मान्यता है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा न करें. ऐसा करने से पूजा का फल प्राप्त नहीं होता है. परिक्रमा करने के लिए शिवलिंग पर अर्पित जल को लांघना पड़ता है. Sawan 2025 शास्त्र में ऐसा करने की मनाही है. इसके लिए जल चढ़ाने के बाद परिक्रमा बिल्कुल न करें. Sawan 2025 धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक तर्क का संगम Sawan 2025 शिवलिंग पर चढ़ावा चढ़ाना हिंदू धर्म में एक प्राचीन परंपरा है। माना जाता है कि शिवलिंग पर चढ़ाया गया जल देवों के देव महादेव की कृपा प्राप्त करने का एक माध्यम है। यह लेख शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल के धार्मिक महत्व और इसके संभावित वैज्ञानिक पक्ष पर प्रकाश डालता है। धार्मिक महत्व: वैज्ञानिक दृष्टिकोण: शिव जल का उपयोग: Sawan 2025 शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल को कई तरह से उपयोग किया जा सकता है: सावधानियां: निष्कर्ष: Sawan 2025 शिवलिंग पर जल चढ़ाना एक आध्यात्मिक अनुभव है। यह न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो मन को शांत करती है, वातावरण को शुद्ध करती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाती है। अंत में, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि शिवलिंग पर जल चढ़ाना केवल एक बाहरी क्रिया नहीं है, बल्कि यह एक आंतरिक यात्रा भी है। जब हम शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, तो हमें अपने भीतर के शिव से जुड़ने का प्रयास करना चाहिए। क्या आप शिवलिंग पर जल चढ़ाने के अन्य तरीकों या इसके लाभों के बारे में अधिक जानना चाहते हैं? यहां कुछ अतिरिक्त सुझाव दिए गए हैं: Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Sawan Somwar 2024: सावन में अब कितने सोमवार बाकी ? यहां जानें डेट

Sawan 4th Somwar 2024 सावन सोमवार पर शिव पूजा सबसे शुभ फलदायी है. मान्यता है इससे अधूरी इच्छाएं जल्द पूरी होती है. हर तरह का तनाव खत्म होता है. जानें 2024 में सावन का चौथा सोमवार कब है ? Sawan Somwar 2024 सावन का महीना आमतौर पर जुलाई और अगस्त महीने में आता है और इसे शिव भक्तों के लिए बहुत पवित्र माना जाता है। इस महीने में पड़ने वाले सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है और शिव जी की पूजा-अर्चना की जाती है। सावन का चौथा सोमवार 2024 सावन का चौथा सोमवार 12 अगस्त, 2024 को है। Sawan Somwar 2024 सावन का महत्व Sawan Somwar 2024 सावन हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण महीना है, Sawan Somwar 2024 जो भगवान शिव को समर्पित है। इस महीने में शिव भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और व्रत रखते हैं। मान्यता है कि इस दौरान भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। सावन के सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है। चौथे सोमवार का महत्व Sawan Somwar 2024 सावन के प्रत्येक सोमवार का अपना महत्व होता है, लेकिन चौथा सोमवार भी विशेष माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पूजा विधि सावन के सोमवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। शिवलिंग पर जल चढ़ाएं और बेल पत्र, धतूरा, फूल आदि अर्पित करें। इसके अलावा, भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। पूजा के बाद ब्राह्मण को दान करें। व्रत का महत्व सावन के सोमवार को कई लोग व्रत रखते हैं। व्रत रखने से मन की शुद्धि होती है और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। व्रत के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करें और मन-वचन से भगवान शिव की आराधना करें। सावन में क्या करें सावन में क्या न करें सावन का चौथा सोमवार एक पवित्र अवसर है। इस दिन भगवान शिव Sawan Somwar 2024 की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। इसलिए, इस दिन को पूरे मनोयोग से मनाएं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें। क्यों पूछा जाता है सावन के सोमवार से जुड़ी कुछ रोचक बातें Sawan Somwar 2024: शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है. कहते हैं कि सावन के हर सोमवार पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कई उपाय, पूजा की जाती है. इससे भक्तों को विशेष लाभ मिलता है और उनके दुःख-दर्द दूर हो जाते हैं. अब सावन के दो सोमवार शेष हैं. सोमवार की पूजा और व्रत करने से सभी रुके हुए कार्यों को गति मिलती है. वहीं वैवाहिक जीवन खुशहाली के लिए सुहागिनें इस दिन व्रत रखती हैं. चौथा सावन सोमवार कब है, जानें यहां डेट, पूजा मुहूर्त. चौथा सावन सोमवार 2024 डेट (Sawan Somwar 2024 List Date) सावन का चौथा सोमवार 12 अगस्त 2024 को है. इसके बाद सावन का पांचवां सोमवार 19 अगस्त 2024 को होगा. इस दिन सावन की समाप्ति होगी. सावन के सोमवार को घर में सफेद रंग के नटराज, पार्थिव शिवलिंग, स्फटिक के शिवलिंग की स्थापना सर्वोत्तम मानी जाती है. चौथा सावन सोमवार 2024 मुहूर्त (4th Sawan Somwar 2024 Muhurat) पूजा विधि सावन के चौथे सोमवार पर सुबह नहाने के पानी में गंगाजल डालकर स्नान करें,  इसके बाद शुभ मुहूर्त में दूध से शिव जी का अभिषेक करें, फिर घी की धारा बनाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं, अब दही, शहद चढ़ाएं. फिर शक्कर से शिवलिंग को स्नान कराएं. स्वच्छ जल से महादेव को स्नान कराएं और फिर चंदन का टीका लगाकर भोलेनाथ पर घी का दीपक फूल, बेलपत्र, भांग की पत्तियां, शमी के पत्ते और मिठाई चढ़ाएं. शिव चालीसा का पाठ करें. आरती के बाद यथाशक्ति दान दें. सावन सोमवार पूजा मंत्र ॐ नंदराज नमः ॐ भूतनाथ नमः ॐ कैलाश पति नमः ॐ ज्योतिलिंग नमः ॐ नटराज नमः Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि KARMASU.IN किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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Sawan2024:सावन का तीसरा सोमवार कल, इस विधि से करें शिव जी की पूजा, भोलेनाथ होंगे प्रसन्न

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस महीने में पड़ने वाले सोमवार को विशेष महत्व दिया जाता है। सावन का तीसरा सोमवार और भी अधिक खास होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। सावन का तीसरा सोमवार भगवान शिव को समर्पित एक विशेष दिन होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस दिन शिव जी की पूजा करने की विधि और कुछ महत्वपूर्ण मंत्र। Sawan 2024 : प्रतिपदा तिथि शाम 06:03 तक रहेगी फिर द्वितीया तिथि लग जाएगी. इस दिन व्यतीपात और वरीयान योग भी रहेगा. साथ ही आश्लेषा और मघा नक्षत्र भी रहेगा. Sawan Third Somvar 2024 : शिव जी का प्रिय महीना सावन भोलेनाथ के भक्तों के लिए बहुत खास होता है. इस पूरे माह भक्त शिव जी की भक्ति में डूबे होते हैं. सावन के महीने में पड़ने वाले सोमवार व्रत का विशेष महत्व होता है. यह व्रत लड़कियों व महिलाओं के बीच बहुत प्रचलित है. ऐसी मान्यता है कि जो कुंआरी लड़कियां सावन के सोमवार का उपवास करती हैं उनको मनचाहा वर प्राप्त होता है जबकि विवाहित महिलाओं का वैवाहिक जीवन खुशहाल होता है. ऐसे में सावन का तीसरा सोमवार कब है, Hariyali Teej 2024: सावन में कब मनाई जाएगी हरियाली तीज,तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व सावन का तीसरा सोमवार कब 2024 आपको बता दें कि सावन के तीसरे सोमवार का व्रत 5 अगस्त को रखा जाएगा. सावन सोमवार व्रत और मुहूर्त 2024 : Sawan somvar vrat and muhurat 2024 सावन के तीसरे सोमवार को शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी. जो शाम 06:03 तक रहेगी फिर द्वितीया तिथि लग जाएगी. इस दिन व्यतीपात और वरीयान योग भी रहेगा. साथ ही आश्लेषा और मघा नक्षत्र भी रहेगा.  पूजा विधि: विशेष ध्यान रखने योग्य बातें: सावन के तीसरे सोमवार के दिन क्या करें: सावन के तीसरे सोमवार के दिन क्या न करें: सावन के तीसरे सोमवार का महत्व: सावन का तीसरा सोमवार भगवान शिव को प्रसन्न करने का सबसे अच्छा दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन में शिव मंत्र : Shiv mantra ॐ नमः शिवाय॥ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ॐ नमो भगवते रूद्राय।ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥ ॐ नमः शिवाय: यह सबसे सरल और प्रभावी मंत्र है।महामृत्युंजय मंत्र: यह मंत्र जीवन और मृत्यु पर विजय दिलाता है।शिव तांडव स्तोत्र: यह स्तोत्र भगवान शिव की शक्ति और शौर्य का वर्णन करता है। शिव जो क्या भोग लगाएं हलवा, दही, भांग, पंचामृत, शहद, दूध, खीर, मालपुआ और ठंडाई आदि का भोग लगा सकते हैं.  (Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. KARMASU.IN इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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Sawan Shivratri 2024:अगस्त में कब है सावन शिवरात्रि? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा सामग्री से विधि तक सब कुछ

Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि का त्योहार सावन या सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन मनाया जाता है। सावन शिवरात्रि भगवान शिव की पूजा के लिए दूसरा सबसे बड़ा दिन है। सावन का हर दिन शिव पूजा के लिए शुभ होता है, लेकिन सावन की शिवरात्रि का दिन सबसे अच्छा दिन माना जाता है। इस साल सावन शिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग भी बनेगा।  इस दिन लोग व्रत रखते हैं और शिव-पार्वती की पूजा करते हैं। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार मासिक शिवरात्रि 2 अगस्त को मनाई जाएगी।  ऐसे में इस पवित्र दिन पर भग्वान शिव की पूरे विधि विधान से पूजा अर्चना करें और लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करें। Sawan Shivratri सावन शिवरात्रि की तिथि  हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस बार श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 2 अगस्त को दोपहर 3:26 बजे शुरू हो रही है। यह 3 अगस्त को अपराह्न 3:50 बजे समाप्त हो रही है। ऐसे में सावन शिवरात्रि 2 अगस्त 2024 को होगी और इसी दिन शिवरात्रि की पूजा और व्रत किया जाएगा।  सावन शिवरात्रि पूजा मुहूर्त रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – सायं  07:11 – रात्रि 09:49 तक (2 अगस्त)रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – रात्रि  09:49 – रात्रि 12:27 तक (3 अगस्त)रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – रात्रि 12:27 – प्रातः 03:06 तक (3 अगस्त)रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – प्रातः 03:06 – प्रातः  05:44 तक (3 अगस्त)निशिता काल मुहूर्त –         रात्रि  12:06 – रात्रि 12:49 तक (3 अगस्त)शिवरात्रि पारण समय – प्रातः 05:44 – दोपहर 03:49 तक (3 अगस्त) Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि पर पूजन सामग्री सावन शिवरात्रि के दिन आप नीचे दी गई पूजन सामग्री से पूजा करें।  सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ को लगाएं ये भोग Sawan Shivratri:सावन शिवरात्रि पर पूजन के समय आप भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती को खीर, हलवा, ठंडाई, मालपुआ, लस्सी, सफेद बर्फी, सूखा मावा, आदि का भोग लगा सकते हैं।  सावन शिवरात्रि पूजा विधि  सावन शिवरात्रि का महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन महीने की Sawan Shivratri शिवरात्रि को बहुत खास माना जाता है क्योंकि शिवरात्रि भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का एक विशेष त्योहार है। इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने का विशेष महत्व है। शिवरात्रि भगवान शिव और शक्ति के मिलन का दिन है। ऐसे में मनचाहा वर पाने और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इस रात महादेव की पूजा करनी चाहिए। माना जाता है कि सावन शिवरात्रि का व्रत और भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने से अपार कृपा मिलती है। इसके अलावा आप कठिन और असंभव कार्यों को भी पूरा कर सकते हैं। सावन शिवरात्रि की शाम जागरण करने से विशेष लाभ होता है। सावन शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में विशेष फलदायी होती है। (रात में होने वाली पूजा को निशिदा पूजा कहा जाता है।) (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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Shivling:घर में शिवलिंग स्थापना,कुछ जरूरी नियम ?

हिंदू धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है और त्रिदेवों में इन्हें भी सर्वोच्च देवता की उपाधि प्राप्त है। यदि आप अपने घर में महादेव की कृपा प्राप्त करना चाहते हैं और घर में शिवलिंग स्थापित कर रहे हैं। तो इससे जुड़े कुछ खास नियम आज हम आपको बताने जा रहे हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी है। Shivling: महादेव की कृपा के बिना जीवन अधूरा है ऐसे में उनके भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके निमित्त कुछ न कुछ पूजा अनुष्ठान करते ही रहते हैं। वहीं शिवरात्रि,  प्रदोष व्रत और सोमवार का दिन ये सब शिव कृपा पाने के लिए हिंदू धर्म में सबसे प्रमुख दिन बताए गए हैं। माना जाता है कि इन दिनों में यदि आप भोलेबाबा की सच्चे मन से आराधना कर लें तो वह शीघ्र अपनी कृपा बरसा देते हैं। 11 प्रकार के अभिषेक से करें शिवजी को प्रसन्न, हर मनोकामना होगी पूर्ण अधिकतर शिव भक्त उनके मंदिर जाकर शिवलिंग पर जलाभिषेक भी करते हैं। वहीं कुछ ऐसे भक्त भी हैं जो अपने घर में शिवलिंग Shivling की स्थापना करते हैं और नित्य शिव पूजन भी करते हैं। अगर आप भी अपने घर में शिवलिंग की स्थापना करना चाहते हैं तो आज हम आपको इससे जुड़े कुछ जरूरी नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं। शिवलिंग की स्थापना घर में करते समय कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना होता। यह नियम आज आप भी जान लीजिए। Shivling शिवलिंग स्थापना का शुभ मुहूर्त Shivling शिवलिंग स्थापना की विधि Shivling शिवलिंग की पूजा Shivling शिवलिंग स्थापना के कुछ महत्वपूर्ण नियम घर में शिवलिंग रखने के नियम 

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