माया देवी मंदिर:हरिद्वार, उत्तराखंड, भारत

माया देवी मंदिर भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है।

माया देवी मंदिर:हरिद्वार का लोकप्रिय माया देवी मंदिर भारत के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है। यह मंदिर हिंदू देवी माया को समर्पित है। इस मंदिर को तीन शक्तिपीठों में शामिल होने का गौरव भी प्राप्त है। माना जाता है कि देवी सती का हृदय और नाभि इसी स्थान पर स्थापित हैं। आदि शक्ति का एक रूप मानी जाने वाली देवी माया के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में भक्तों भीड़ एकत्रित होती है। खासकर नवरात्र और कुंभ मेले के दौरान इस मंदिर में ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है।

माया देवी मंदिर
माया देवी मंदिर

कई भक्तों का यह भी मानना है कि इस पवित्र स्थल पर प्रार्थना करने से व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति और मोक्ष प्राप्त कर सकता है। लोगों का मानना है कि हरिद्वार की प्राथमिक देवी के रूप में मानी जाने वाली माया देवी का एक विशेष महत्त्व है। देवी माता की एक झलक देखे बिना कोई भी तीर्थ यात्रा पूरी नहीं मानी जाती है।

हरिद्वार को पहले ‘मायापुरी’ भी कहा जाता था। प्राचीन मंदिर होने के कारण इस मंदिर की संरचना भी हरिद्वार के तीन सबसे पुराने मंदिरों में से एक है, जो अभी भी कायम है। इसके अलावा नारायण-शिला और भैरव मंदिर हैं। देवी माया के साथ, पवित्र मंदिर में देवी कामाख्या और देवी काली की मूर्तियाँ हैं – जिन्हें आदि पराशक्ति के विभिन्न रूप माना जाता है।

माया देवी मंदिर का इतिहास

11वीं शताब्दी में माया देवी मंदिर का निर्माण किया गया था। क्योंकि हरिद्वार में 11वीं शताब्दी में यह मंदिर अस्तित्व में आया। माया देवी मंदिर धार्मिक महत्व के साथ साथ ऐतिहासिक महत्व भी रखता है। पवित्र गंगा के तट पर स्थित इस मंदिर द्वारा कई राजवंशों के उत्थान और पतन को देखा गया है। कई बार इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है। इस प्राचीन मंदिर में पीढ़ियों से चली आ रही आस्था और भक्ति की भावना को जीवित रखा है। वर्षो बाद भी यह मंदिर नारायण-शिला मंदिर और भैरव मंदिर के साथ अभी भी मजबूती से खड़ा है।

माया देवी मंदिर का महत्व

माया देवी मंदिर में दर्शन करने श्रद्धालु दूर-दूर से हरिद्वार आते है। इस मंदिर में पूजा अर्चना करने की विशेष मान्यता यह है कि यहां पर मांगी गई समस्त मनोकामनाएं पूरी होती है। विशेषकर महिलाएं जो भी मनोकामना लेकर इस मंदिर में दर्शन को आती है। वह यहां से खाली नहीं जातीं। उनकी मनोकामना अवश्य ही पूरी होती है। माया देवी मंदिर 52 शक्तिपीठों में से पहला शक्तिपीठ है, जो हरिद्वार शहर के मध्य में स्थित है। इस मंदिर की कहानी भगवान शिव और माता सती से सम्बंधित है। समस्त शक्तिपीठों की उत्पत्ति का केंद्र हरिद्वार की अधिष्ठात्री देवी मायादेवी मंदिर है। माता सती ने यहीं बैठकर योगाग्नि से अपने शरीर का त्याग किया था।

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माया देवी मंदिर की वास्तुकला

माया देवी मंदिर उत्तरी भारत की पारंपरिक वास्तुकला को दर्शाता है। इस मंदिर में पारंपरिक और आधुनिक शैलियों का एक अच्छा मिश्रण देखने को मिलता है। मंदिर की संरचना साधारण होने के बावजूद भी मंदिर में प्लास्टर वाली मूर्तियां है जो विभिन्न मुद्राओं को चित्रित करती हैं। मुख्य गर्भगृह के अंदर, तीन मूर्तियाँ स्थापित हैं।

इसके केंद्र में माया देवी, बाईं ओर देवी काली, और दाईं ओर देवी कामाख्या विराजित हैं। इसके अलावा, मंदिर में दो अन्य देवियाँ भी हैं, जिन्हें देवी शक्ति का रूप माना जाता है। चामुंडा की एक धातु की मूर्ति और शीतला देवी को समर्पित एक उप-मंदिर भी है। भक्त मंदिर परिसर के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। वह हर देवी देवताओं से आशीर्वाद लेते हैं।

मंदिर का सुबह का समय

06:30 AM – 12:00 PM

शाम को मंदिर खुलने का समय

03:00 PM – 09:00 PM

मंदिर का प्रसाद

माया देवी मंदिर में फल, नारियल, मिठाई, फूल और अगरबत्ती अर्पित की जाती है।

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