Makar Sankranti 2025:मकर संक्रांति 2025 कब है 14 या 15 जनवरी, जानें, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Makar Sankranti 2025: हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बड़ा महत्व है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. इस दिन सूर्य उत्तरायण होता है, जिसका अर्थ है सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है. साथ ही, मकर संक्रांति से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है. पौष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है. Makar Sankranti 2025: सूर्य का किसी राशि विशेष राशि में भ्रमण करना संक्रांति कहलाता है. सूर्य हर माह में राशि का परिवर्तन करते हैं. साल में बारह संक्रांतियां होती हैं और दो संक्रांतियां महत्वपूर्ण होती हैं- मकर संक्रांति और कर्क संक्रांति. सूर्य जब मकर राशि में जाता है तब मकर संक्रांति होती है. मकर संक्रांति से वातावरण में बदलाव शुरू हो जाता है क्योंकि इस संक्रांति से अग्नि तत्व की शुरुआत हो जाती है. इस समय सूर्य उत्तरायण होता है. इस दिन किए गए जाप और दान का फल अनंत गुना होता है. इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. आइए आपको मकर संक्रांति के बारे में विस्तार से बताते हैं.  मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त (Makar Sankranti 2025 Shubh Muhurat) हिंदू धर्म में हर त्योहार उदया तिथि के अनुसार ही मनाया जाता है. इस वजह से इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी. सूर्य इस दिन सुबह 8 बजकर 41 मिनट के करीब मकर राशि में प्रवेश करेगा. वहीं, इसका पुण्यकाल सुबह 9 बजकर 03 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 46 मिनट तक जारी रहेगा. Makar Sankranti 2025 puny kal muhurat मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त मकर संक्रांति- मंगलवार, 14 जनवरी 2025 मकर संक्रांति पुण्य काल- सुबह 9.03 मिनट से शाम 5.29 मिनट तक कुल अवधि-8 घंटे 26 मिनट मकर संक्रांति महा पुण्य काल- सुबह 9.03 बजे से 10.50 मिनट तक कुल अवधि-01 घंटा 47 मिनट मकर संक्रांति का क्षण-9.03 मिनट दान करके कमाइये पुण्य ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति 2025 के दिन पवित्र नदी में स्नान करना शुभ होता है. इसके साथ-साथ सूर्यदेव की पूजा भी विशेष लाभ देती है. वहीं, दान देना भी लाभकारी होता है. उत्तर भारत में इस दिन सभी लोग खिचड़ी का दान करते हैं. कुछ राज्यों में नई फसल की भी कटाई होती है.

Makar Sankranti 2025:मकर संक्रांति 2025 कब है 14 या 15 जनवरी, जानें, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि Read More »

Mahakumbh 2025: आखिर कहां से आते हैं नागा साधु? रहस्य नहीं, अब जानिए हकीकत!

Mahakumbh 2025: नागा साधुओं की रहस्यमयी दुनिया को लेकर हर किसी के मन में उत्सुकता रहती है। आज हम आपको नागा साधुओं के कुछ रहस्यों के बारे में अपने इस लेख में जानकारी देंगे। Kumbh Mela 2025: महाकुंभ का मेला इस साल प्रयागराज में लगने वाला है। यहां सबसे पहले 13 जनवरी के दिन नागा साधुओं के द्वारा शाही स्नान किया जाएगा। बड़ी संख्या में नागा साधु कुंभ मेले में आते हैं। हालांकि, बाकी समय ये एकांतवास करते हैं, हिमालय की दुर्गम चोटियों पर ये दुनिया से अलग रहकर गुप्त तरीके से योग-ध्यान और साधना करते हैं। लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि, इन्हें महाकुंभ का पता कैसे लग जाता है, और कैसे महाकुंभ के दौरान बड़ी संख्या में नागा साधु पवित्र घाटों पर पहुंच जाते हैं। नागा साधुओं की दुनिया से जुड़े कुछ ऐसे ही रहस्यों के बारे में आज हम आपको अपने इस लेख में जानकारी देने वाले हैं।  Mahakumbh 2025: नागा परंपरा (Naga Sadhu) की पूरी दुनिया रहस्यों से भरी हुई है. कुंभ के आते ही नागा जंगलों से निकल आते हैं. घोड़े, हाथी पर सवार होकर जुलूस निकालते हुए कुंभ की ओर कूच करने लगते हैं. न सिर्फ आते हैं बल्कि लौटते वक्त अपने साथ तमाम नए नागा साधुओं को भी ले जाते हैं. महाकुंभ में आने वाले नागा साधु (Naga Sadhu) जंगलों में रहते हैं. यह वह धारणा है जो सबसे आम तौर पर प्रचलित है. लेकिन सवाल यह है कि वे कौन-से जंगल हैं, जहां ये साधु वास्तव में निवास करते हैं? इन दो क्षेत्रों में रहते हैं नागा साधु नागा साधु मुख्यतः देश के दो क्षेत्रों में रहते हैं. पहला, केदारखंड, जो केदारनाथ के आसपास के जंगलों में स्थित है. यह क्षेत्र उत्तराखंड के गढ़वाल इलाके में आता है. दूसरा क्षेत्र नर्मदा नदी के किनारे फैले जंगल हैं, जिन्हें नर्मदाखंड कहा जाता है. ये जंगल मुख्यतः महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश में फैले हुए हैं. हिमालय या ऊंचे पहाड़ की गुफाओं में निवास करते हैं नागा नागा साधु किसी न किसी अखाड़े, आश्रम या मंदिर से जुड़े होते हैं. अखाड़े, आश्रम या मंदिर में रहने वाले नागा साधु “नागाओं के समूह” में रहते हैं, लेकिन इनमें से कुछ तप के लिए हिमालय या किसी ऊंचे पहाड़ की गुफाओं में निवास करते हैं. इनमें से कई अखाड़ा के नागा साधु पैदल भ्रमण कर भिक्षाटन करते हुए धुनी रमाते हैं. बहुत रहस्मयी होता है नागा साधुओं का जीवन नागा साधुओं का जीवन बहुत रहस्मयी होता है. कुंभ के बाद वह कहीं गायब हो जाते हैं. कहा जाता है कि नागा साधु जंगल के रास्ते से देर रात में यात्रा करते हैं. इसलिए ये किसी को नजर नहीं आते हैं. नागा साधु समय-समय पर अपनी जगह बदलते रहते हैं. इस कारण इनकी सही स्थिति का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है. ये लोग गुप्त स्थान पर रहकर ही तपस्या करते हैं. Mahakumbh : कैसे बनते हैं नागा साधु? नागा साधु बनने की प्रक्रिया बहुत कठिन होती है. यदि कोई नागा साधु बनाना चाहता तो उसकी प्रक्रिया महाकुंभ के दौरान ही शुरु होती है. इसके लिए उन्हें ब्रह्मचर्य की परीक्षा देनी पड़ती है. इसमें 6 महीने से लेकर 12 साल तक का समय लग जाता है. जिसके बाद महापुरुष का दर्जा मिलता है और फिर 5 गुरु भगवान शिव, भगवान विष्णु, शक्ति, सूर्य और गणेश निर्धारित किए जाते हैं. जिसके बाद नागाओं के बाल कटवाए जाते है. कुंभ के दौरान इन लोगों को गंगा नंदी में 108 डुबकियां भी लगानी पड़ती हैं. खुद को मृत घोषित कर खुद करते हैं पिंड दान महाकुंभ में ही तमाम सामान्य व्यक्ति जीते जी अपने आप को मृत घोषित करते हैं, फिर खुद और परिवार का पिंड दान करके गंगा किनारे सारे कपड़ों को त्याग करके बाकियों के साथ जंगल की ओर चल देते हैं. बिना पिंड दान के नागा साधु बनेंगे ही नहीं. चाहे पिता जीवत हो या मरा हो, इसके अलावा नागा साधु बनने से पहले व्यक्ति के सात पीड़ी का पिंड दान होता है. इसके अलावा व्यक्ति के शरीर का भी पिंड दान होता है, ऐसा इसलिए कि नागा साधुओं का मनाना है कि उनके मरने के बाद उनका पिंड दान कौन करेगा. पिंड दान के बाद ही साधु को नागा की दीक्षा दी जाती है. Mahakumbh : नागा का अर्थ ‘नागा’ शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है, जिसका अर्थ पहाड़ होता है और इस पर रहने वाले लोग ‘पहाड़ी’ या ‘नागा संन्यासी’ कहलाते हैं. कच्छारी भाषा में ‘नागा’ से तात्पर्य ‘एक युवा बहादुर सैनिक’ से भी है. ‘नागा’ का अर्थ बिना वस्त्रों के रहने वाले साधु भी है. Mahakumbh : नागा साधुओं का इतिहास Mahakumbh : बताया जाता है कि आदिगुरु शंकराचार्य ने 8वीं सदी में सनातन धर्म की स्थापना के लिए देश के चार कोनों पर चार पीठों की स्थापना की. गोवर्धन पीठ, शारदा पीठ, द्वारिका पीठ और ज्योतिर्मठ पीठ. इन पीठों, मठों-मन्दिरों और सनातन धर्म की रक्षा के लिए आदिगुरु ने सशस्त्र शाखाओं के रूप में अखाड़ों की स्थापना की शुरूआत की. इन्हीं अखाड़ों के सैनिकों को धर्म रक्षक या नागा कहा जाता था. (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। KARMASU.IN एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

Mahakumbh 2025: आखिर कहां से आते हैं नागा साधु? रहस्य नहीं, अब जानिए हकीकत! Read More »

Maha Kumbh Mela 2025 Niyam: महाकुम्भ में क्या करें, क्या न करें, जानें ये नियम ताकि आपसे जाने-अन्जाने कोई त्रुटि न हो

Maha Kumbh Mela 2025 कुम्भ मेले में व्यक्ति पुण्य कमाने के उद्देश्य से संगम स्नान, दान, ध्यान करता है, इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि जाने-अन्जाने में ऐसा कोई भी कार्य न करें, जिससे पाप अर्जन हो। कुम्भ मेले kumbh mela में व्यक्ति पुण्य कमाने के उद्देश्य से संगम स्नान, दान, ध्यान करता है, इसलिए यह ध्यान रखना चाहिए कि जाने-अन्जाने में ऐसा कोई भी कार्य न करें, जिससे पाप अर्जन हो।

Maha Kumbh Mela 2025 Niyam: महाकुम्भ में क्या करें, क्या न करें, जानें ये नियम ताकि आपसे जाने-अन्जाने कोई त्रुटि न हो Read More »

Swapna Shastra: क्या आपने भी सपने में देखा है हंस या तोता, जैसे इन 7 पक्षियों को तो जानिए क्या हो सकता है इसका मतलब

Swapna Shastra स्वप्न शास्त्र में भविष्य के बारे में कुछ खास संकेत दे सकता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार कुछ सपने भविष्य में होने वाली घटनाओं का संकेत देते हैं तो कुछ ऐसे सपने माने गए हैं जिनके दिखाने पर व्यक्ति को धन लाभ के संकेत मिलते लगते हैं। स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि हर सपने का एक खास मतलब होता है। Auspicious signs in Dreams: सोते समय हमें कई तरह के सपने आते हैं, लेकिन हम सभी का अर्थ नहीं समझ पाते। लेकिन स्वप्न शास्त्र में कहा गया है कि हर सपना व्यक्ति को कुछ न कुछ संकेत देता है। स्वप्न शास्त्र की मानें तो, कुछ पक्षियों को सपने में देखना बहुत ही शुभ माना गया है। यह व्यक्ति को भविष्य के बारे में बहुत ही शुभ संकेत देते हैं। आइए जानते हैं इन सपनों के बारे में। हंस का दिखना hansh ka dikhna स्वप्न शास्त्र sapne में माना गया है कि यदि आपको सपने में पानी में तैरता हुआ हंस दिखाई देता है या फिर दो हंसों का जोड़ा दिखाई देता है, तो इसे एक शुभ संकेत माना जाता है। यह आपके लिए घर में मांगलिक कार्य होने का संकेत दे सकता है। इसके साथ ही यह सपना धन लाभ की ओर भी इशारा करता है। लेकिन यदि आपको सपने में काले रंग का हंस या मृत हंस दिखाई देता है, तो यह एक बुरा सपना माना जाता है। मोर ( moor)- सपने में यदि मोर दिखाई दे तो समझिए कि जीवन में सुख-संपन्नता आने वाली है और कोई बड़ी उपलब्धि success आपको हासिल होने वाली है. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि सपने में सफेद मोर को ही देखना शुभ माना गया है. यदि आपने मोर पर शनि देव को बैठे हुए देखा है तो यह अत्यंत ही शुभ होता है. इसका अर्थ होता है कि आपको जल्द ही अपार धन की प्राप्ति होने वाली है. तोता tota – सपने में तोता देखना शुभ समाचार का संकेत माना गया है. स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने में जोड़ा तोता दिखाई दे तो इसका अर्थ यह होता है कि घर पर नया मेहमान आना वाला है. जोड़ा तोता देखने से आपके वैवाहिक जीवन में भी प्यार बढ़ता है. नीलकंठ nilkanth – नीलकंठ पक्षी को सपने में देखना शुभ होता है. कुंवारे लोगों द्वारा सपने में नीलकंठ पक्षी को देखना अत्यंत ही शुभ संकेत होता है. यह इस बात का संकेत है कि आपको जल्द ही आपका जीवनसाथी मिलने वाला है. सारस sarash – सपने में सारस पक्षी को देखने का संबंध धन लाभ से होता है. यदि आपने सपने में सारस पक्षी को देखा है तो इसका अर्थ है कि आपको व्यापार में लाभ होगा, नौकरी में तरक्की होगी या कहीं से आकस्मिक धन की प्राप्ति हो सकती है. आसमान में उड़ते हुए सारस देखना, सारस को दाना खिलाते हुए देखना और सारस को जोड़े में देखना बेहद शुभ होता है. लेकिन मछली को पकड़े हुए सारस को देखना या फिर मरा हुआ सारस देखना अशुभ होता है. चिड़िया bird –सपने में चिड़िया या बुलबुल को चहचहाते हुए देखना शुभ नहीं माना जाता है. हालांकि इन्हें देखना शुभ होता है. यदि सपने में चिड़िया या बुलबुल जैसे पक्षी दिखाई दे तो ये इस बात का संकेत होते हैं कि घर पर खुशियां आने वाली है. उल्लू ullu – सपने में उल्लू को देखना बहुत शुभ होता है. सपने में उल्लू देखने से मां लक्ष्मी laximi mata की कृपा प्राप्त होती है. ऐसे सपने को धन प्राप्ति का संकेत माना जाता है.

Swapna Shastra: क्या आपने भी सपने में देखा है हंस या तोता, जैसे इन 7 पक्षियों को तो जानिए क्या हो सकता है इसका मतलब Read More »

Lambodara Sankashti Chaturthi: कब है विनायक चतुर्थी और सकट चौथ? अभी नोट करें डेट एवं शुभ मुहूर्त

Lambodara Sankashti Chaturthi:गणेश चतुर्थी व्रत भगवान गणेश ganesh bhagwan को समर्पित है। इस दिन गणेश जी की विशेष पूजा की जाती है। पंचांग के अनुसार हर महीने दो चतुर्थी आती हैं। एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। हर महीने पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है, जबकि शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी 2025 शुभ मुहूर्त (Lambodara Sankashti Chaturthi 2025 Shubh Muhurat) पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 17 जनवरी (january) को सुबह 04 बजकर 06 मिनट पर होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 18 जनवरी को सुबह 05 बजकर 30 मिनट पर होगा। ऐसे में 17 जनवरी को लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ (Sakat chauth 2024) के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा (Lord Ganesh Puja Vidhi) चतुर्थी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठें और स्नान करने के बाद घर और मंदिर की सफाई करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें। व्रत का संकल्प लें। पूजा की शुरुआत करें। देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें। भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें। इसके बाद फल और मोदक का भोग लगाएं। जीवन में सुख-शांति की प्राप्ति के लिए कामना करें। अंत में लोगों में प्रसाद का वितरण करें। श्रद्धा अनुसार दान करें। गणोश मंत्र (Ganesh Mantra) 1. ऊँ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ॥2. ॐ एकदंताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ महाकर्णाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥ॐ गजाननाय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दंती प्रचोदयात् ॥3. ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा॥ संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि Sankashti Chaturthi Puja vidhi ❀ गणेश संकष्टी चतुर्थी के दिन प्रात: काल स्नान आदि करके व्रत लें।❀ स्नान के बाद गणेश जी की पूज आराधना करें, गणेश जी के मन्त्र का उच्चारण करें।❀ पूजा की तैयारी करें और गणेश जी को उनकी पसंदीदा चीजें जैसे मोदक, लड्डू और दूर्वा घास चढ़ाएं।❀ गणेश मंत्रों का जाप करें और श्री गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें।❀ शाम को चंद्रोदय के बाद पूजा की जाती है, अगर बादल के चलते चन्द्रमा नहीं दिखाई देता है तो, पंचांग के हिसाब से चंद्रोदय के समय में पूजा कर लें।❀ शाम के पूजा के लिए गणेश जी की मूर्ति murti के बाजू में दुर्गा जी की भी फोटो या मूर्ति रखें, इस दिन दुर्गा जी की पूजा बहुत जरुरी मानी जाती है।❀ मूर्ति/फोटो पर धुप, दीप, अगरबत्ती लगाएँ, फुल से सजाएँ एवं प्रसाद में केला, नारियल रखें।❀ गणेश जी के प्रिय मोदक बनाकर रखें, इस दिन तिल या गुड़ के मोदक बनाये जाते है।❀ गणेश जी के मन्त्र का जाप करते हुए कुछ मिनट का ध्यान करें, कथा सुने, आरती करें, प्रार्थना करें।❀ इसके बाद चन्द्रमा की पूजा करें, उन्हें जल अर्पण कर फुल, चन्दन, चावल चढ़ाएं।❀ पूजा समाप्ति के बाद प्रसाद सबको वितरित किया जाता है।❀ गरीबों को दान भी किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा Sankashti Chaturthi Vrat ki mahima नारद पुराण के अनुसार संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रती को पूरे दिन का उपवास रखना चाहिए। शाम के समय संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा को सुननी चाहिए। संकष्टी चतुर्थी के दिन घर में पूजा करने से नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं । इतना ही नहीं संकष्टी चतुर्थी का पूजा से घर में शांति बनी रहती है। घर की सारी परेशानियां दूर होती हैं। गणेश जी भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। इस दिन चंद्रमा को देखना भी शुभ माना जाता है। सूर्योदय से शुरू होने वाला संकष्टी व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही समाप्त होता है, साल भर में 12-3 संकष्टी व्रत रखे जाते हैं। हर संकष्टी व्रत की एक अलग कहानी होती है। दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में संकष्टी चतुर्थी को गणेश संकटहरा या संकटहरा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। ध्यान दें – संकष्टी चतुर्थी व्रत का दिन, उस दिन के चन्द्रोदय के आधार पर निर्धारित होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि के दौरान चन्द्र उदय होता है, संकष्टी चतुर्थी का व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए प्रायः ऐसा देखा गया है कि, कभी-कभी संकष्टी चतुर्थी व्रत, चतुर्थी तिथि से एक दिन पूर्व अर्थात तृतीया तिथि के दिन ही होता है। कहा जाता है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत नियमानुसार ही संपन्न करना चाहिए, तभी इसका पूरा लाभ मिलता है। इसके अलावा गणपति बप्पा की पूजा करने से यश, धन, वैभव और अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।

Lambodara Sankashti Chaturthi: कब है विनायक चतुर्थी और सकट चौथ? अभी नोट करें डेट एवं शुभ मुहूर्त Read More »

शुक्रवार के ये उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत! घर में दौड़ी आएंगी मां लक्ष्मी

Shukrawar Ke Upay: शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से धन-संपत्ति का आशीर्वाद मिलता है. इस दिन कुछ खास उपाय करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं, जिससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए आज हम आपको शुक्रवार के दिन किए जाने वाले कुछ अचूक उपाय बताने जा रहे हैं, जिससे घर में धन के साथ-साथ सुख-शांति भी आएगी. हिंदू धर्म में हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस दिन विधि- विधान से मां लक्ष्मी की पूजा- अर्चना करनी चाहिए। मां लक्ष्मी को धन की देवी भी कहा जाता है।  मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार के दिन कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं। इन उपायों को करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के आसान उपाय मां को लाल वस्त्र अर्पित करें maa ko lal bastra arpeet kare मां लक्ष्मी को पुष्प अर्पित करें maa laximi ko pusp arpeet kare विष्णु भगवान की पूजा करें bhagwan vishnu ki puja kare खीर का भोग लगाएं kheer ka bhog lagaye शुक्रवार के दिन श्री लक्ष्मीनारायण भगवान और मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। इस उपाय को करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और धन- लाभ होता है।  मंत्र जाप Mantra jap मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शुक्रवार को इन मंत्रों का जाप करें: दिन ॐ शुं शुक्राय नम: या ॐ हिमकुन्दमृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम् सर्वशास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहं. दान करें सफेद वस्तुएं dan kare safed bastuye शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने के साथ ही सफेद रंग की वस्तुएं जैसे सफेद कपड़े, चावल, आटा, चीनी, दूध और दही का दान करें. शास्त्रों के अनुसार सफेद रंग मां लक्ष्मी को प्रिय है. कलह-कलेश से मुक्ति अगर आपके घर में लगातार कलह-कलेश रहता है तो हर शुक्रवार को गाय को रोटी खिलाना शुरू कर दें. गाय को रोटी खिलाने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं. अखंड ज्योति akhand jyoti अगर आप आर्थिक तंगी से परेशान हैं तो शुक्रवार को मां लक्ष्मी की मूर्ति के सामने 11 दिनों तक अखंड ज्योति जलाएं.  ऐसा करने से आपको आर्थिक समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है. कमल गट्टे की माला kamal gatte ki mala अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाने और धन की कमी से छुटकारा पाने के लिए हर शुक्रवार को कमल गट्टे की माला से देवी लक्ष्मी का नाम जपें. इससे देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी. जल चढ़ाने का उपाय jal chadane ka uppay शुक्रवार के दिन नीम के पेड़ पर जल चढ़ाएं क्योंकि इसे देवी दुर्गा का एक रूप माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि इससे सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति मिलती है.

शुक्रवार के ये उपाय बदल देंगे आपकी किस्मत! घर में दौड़ी आएंगी मां लक्ष्मी Read More »

Vishnu Puja Vidhi: भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए इस तरीके से करें पूजा-अर्चना, उत्तम फल की होगी प्राप्ति

Vishnu Puja Vidhi:सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना आप कभी भी कर सकते हैं। लेकिन गुरुवार के दिन श्रीहरि की पूजा अत्यंत ही मंगलकारी मानी गई है। भगवान विष्णु की पूजा से जीवन के सभी दुखों का अंत हो जाता है। सनातन परंपरा में सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi की पूजा-अर्चना करने से मनचाहा फल प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं में भी श्रीहरि विष्णु की पूजा किए जाने से कई कष्टों से मुक्ति मिलने के साथ ही उनकी कृपा प्राप्त होने का उल्लेख मिलता है। भगवान विष्णु की पूजा के लिए गुरुवार का दिन अत्यंत ही शुभ और मंगलकारी माना गया है। मान्यता के अनुसार, श्रीहरि भगवान विष्णु की गुरुवार के दिन पूजा-अर्चना से वे शीघ्र ही प्रसन्न होते हैं और जीवन से जुड़े सभी सुखों की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि कभगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi की पूजा से व्यक्ति के पूर्व जन्म और इस जन्म के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही व्यक्ति को पुण्यफल की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु की साधना-आराधना करने से धन-संपदा के साथ ही वैवाहिक सुखों की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि गुरुवार के दिन भगवान विष्णु की किस विधि से पूजा करनी चाहिए Vishnu Puja Vidhi और उनके किस मंत्र का जाप करना चाहिए। श्रीहरि की कृपा पाने के लिए करें इसका पाठ vishnu ki krapa pane ke liye kare eska path Vishnu Puja Vidhi भगवान श्रीहरि की कृपा पाने के लिए आप उनके सरल मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘ॐ नमो नारायण’ और ‘श्रीमन नारायण नारायण हरि-हरि’ का पूरे श्रद्धा और भक्ति से जाप करें। इसके अलावा आप विष्णु सहस्त्रनाम, गजेंद्र मोक्ष और नारायण कवच आदि का पाठ कर सकते हैं। इनका पाठ करने से आप पर निश्चित ही भगवान विष्णु की विशेष कृपा बरसती है।  मां लक्ष्मी संग करें नारायण की पूजा maa laximi sang kare narayan ki puja Vishnu Puja Vidhi अगर आप आर्थिक रूप से परेशान हैं तो भगवान विष्णु Vishnu Puja Vidhi के साथ मां लक्ष्मी का पूजन जरूर करना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली हल्दी का प्रयोग आप मां लक्ष्मी को भी प्रसन्न करने के लिए कर सकते हैं। मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए धन की देवी को 5 हल्दी की साबुत गांठें अर्पित करें। इसके बाद उन हल्दी की गांठों को अगले दिन लाल कपड़े में लपेट कर अपने धन वाले स्थान पर रख दें। इस उपाय को करने से आपको मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने लगेगी। भगवान विष्णु की पूजा विधि (Lord Vishnu Puja Vidhi) भगवान विष्णु की आरती (Lord Vishnu Aarti) ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे। भगवान विष्णु की आरती भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे। जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का। स्वामी दुःख विनसे मन का। सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय जगदीश हरे। मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी। स्वामी शरण गहूँ मैं किसकी। तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी। स्वामी तुम अन्तर्यामी। पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता। स्वामी तुम पालन-कर्ता। मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय जगदीश हरे। तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति। स्वामी सबके प्राणपति। किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय जगदीश हरे। दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे। स्वामी तुम ठाकुर मेरे। अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय जगदीश हरे। विषय-विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा। स्वमी पाप हरो देवा। श्रद्धा-भक्ति बढ़ा‌ओ, सन्तन की सेवा॥ ॐ जय जगदीश हरे। श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे। स्वामी जो कोई नर गावे। कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥ ॐ जय जगदीश हरे।

Vishnu Puja Vidhi: भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने के लिए इस तरीके से करें पूजा-अर्चना, उत्तम फल की होगी प्राप्ति Read More »

Ketu Stotra:केतु स्तोत्र

Ketu Stotra:केतु स्तोत्र: केतु स्तोत्र स्कंद पुराण से लिया गया है! किसी भी व्यक्ति की कुंडली में यदि केतु ग्रह बुरे प्रभाव में हो या गोचर में हो या फिर ग्रह की स्थिति खराब हो और हृदय में अशुभता हो तो दिए गए केतु के प्रतिदिन जाप से केतु से संबंधित समस्याओं से मुक्ति मिलती है। केतु स्तोत्र के प्रतिदिन पाठ से केतु अपना बुरा प्रभाव छोड़कर अच्छा परिणाम देने लगता है। दक्षिण नोड या केतु को पिछले जन्म के कठिन कर्मों का बिंदु माना जाता है जिसमें व्यक्ति ने दूसरों की कीमत पर अपने स्वार्थ को आगे बढ़ाया। सकारात्मक पक्ष पर दक्षिण नोड मजबूत एकाग्रता और अस्पष्ट या रहस्यमय विषयों पर महारत विकसित कर सकता है। केतु अच्छे या बुरे के लिए अचानक और अप्रत्याशित परिणाम देता है। आध्यात्मिक मोर्चे पर केतु अधिक वास्तविक तरीके से धारणा, मुक्ति, ज्ञान और मानसिक संवेदनशीलता देता है। केतु एक छाया ग्रह है और ऋषि कश्यप और सिमिहिका नामक एक राक्षस का पुत्र है। वह एक सर्प के सिर के साथ पैदा हुआ था। जब मोहिनी (भगवान विष्णु का स्त्री रूप) देवताओं को अमृत बांट रही थी, तब केतु ने पंक्ति में प्रवेश किया और अमृत पी लिया। Ketu Stotra सूर्य और चंद्रमा ने यह देखा और भगवान विष्णु को इसकी जानकारी दी। भगवान विष्णु ने उसे दो टुकड़ों में काट दिया। सिर वाला टुकड़ा राहु है। बिना सिर वाला टुकड़ा केतु है। दोनों टुकड़े जीवित रहे और घड़ी की सुई के विपरीत दिशा में पृथ्वी की परिक्रमा करते रहे। केतु उन सभी समस्याओं का कारण है जो मंगल ग्रह द्वारा उत्पन्न की जाती हैं। केतु एक ग्रह के रूप में हानिकारक और लाभकारी दोनों हो सकता है। एक अच्छा केतु अचानक ऊर्जा, मुक्ति, विवेक, आदर्शवाद, करुणा, आत्म-बलिदान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। इसे एक महान सलाहकार और यात्रा के स्वामी के रूप में जाना जाता है। एक कमजोर केतु कठोर और क्रूर हो सकता है, और चीजों को दूर ले Ketu Stotra जाने के लिए जाना जाता है। केतु स्तोत्र रीढ़ और तंत्रिका तंत्र के रोग, घाव, चोट, मोटापा, घुटने की समस्या, मानसिक अस्थिरता और थकान जैसी संभावित स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत देता है। Ketu Stotra ke labh केतु स्तोत्र के लाभ ऐसा माना जाता है कि केतु स्तोत्र व्यक्ति के जीवन में समृद्धि के साथ-साथ बुद्धि, ज्ञान, अच्छा स्वास्थ्य और आध्यात्मिक ऊंचाइयां भी लाता है। इस स्तोत्र का पाठ किसे करना चाहिए? जिन व्यक्तियों के केतु अशुभ होते हैं, उन्हें भौतिक हानि, मानसिक अशांति, असीम चिंताएं, एकाग्रता में कमी और अनावश्यक अवसाद का सामना करना पड़ सकता है, उन्हें वैदिक पद्धति के अनुसार केतु स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। केतु स्तोत्र | Ketu Stotra केतु: काल: कलयिता धूम्रकेतुर्विवर्णक:। लोककेतुर्महाकेतु: सर्वकेतुर्भयप्रद: ।।1।। रौद्रो रूद्रप्रियो रूद्र: क्रूरकर्मा सुगन्ध्रक्। फलाशधूमसंकाशश्चित्रयज्ञोपवीतधृक् ।।2।। तारागणविमर्दो च जैमिनेयो ग्रहाधिप:। पंचविंशति नामानि केतुर्य: सततं पठेत् ।।3।। तस्य नश्यंति बाधाश्चसर्वा: केतुप्रसादत:। धनधान्यपशूनां च भवेद् व्रद्विर्नसंशय: ।।4।।

Ketu Stotra:केतु स्तोत्र Read More »

Krishna Stotra: कृष्ण स्तोत्र

Krishna Stotra:कृष्ण स्तोत्र:श्री कृष्ण भगवान विष्णु के 8वें अवतार के रूप में जाने जाते हैं। कृष्ण का प्रभाव दुनिया भर में है और उनके लाखों अनुयायी हैं जिन्होंने अपना जीवन भगवान कृष्ण को समर्पित कर दिया है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के केवल दो अवतारों को दुनिया में सबसे अधिक प्रसिद्धि मिली – राम और कृष्ण। अन्य अवतारों के बारे में केवल वही लोग जानते हैं जिन्हें हिंदू पौराणिक कथाओं का गहरा ज्ञान है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, अगर स्तोत्र का सही तरीके से उच्चारण नहीं किया जाता है, तो वे प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। 13 चमत्कारी कृष्ण मंत्र हैं जो आपको प्रचुरता, धन और समृद्धि प्रदान करेंगे। प्राचीन भारत के बुद्धिमान पुरुषों और ऋषियों ने सप्ताह के एक दिन को किसी विशेष भगवान की पूजा करने के लिए निर्धारित किया था। ऐसा माना जाता है Krishna Stotra कि उन्हें समर्पित दिन पर भगवान की प्रार्थना और पूजा करने से वे आसानी से प्रसन्न होते हैं और आपको अच्छे लाभ प्राप्त करने में मदद करते हैं। बुधवार का दिन भगवान कृष्ण को समर्पित है। भगवान कृष्ण के भक्त उनके समर्पित मंदिरों में जाते हैं। वे अक्सर भगवान को प्रसन्न करने के लिए व्रत और उपवास रखते हैं। भगवान कृष्ण को समर्पित मंदिरों में बुधवार को विशेष पूजा और अनुष्ठान किए जाते हैं। Krishna Stotra हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कृष्ण स्तोत्र का नियमित जाप भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद पाने का सबसे शक्तिशाली तरीका है। Krishna Stotra सर्वोत्तम परिणाम पाने के लिए आपको सुबह स्नान करने के बाद भगवान कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर के सामने कृष्ण स्तोत्र का जाप करना चाहिए। इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए आपको सबसे पहले हिंदी में कृष्ण मंत्र का अर्थ समझना चाहिए। यह कृष्ण स्तोत्र बुधवार को जपे जाने वाले सबसे लोकप्रिय मंत्रों में से एक है। भगवान कृष्ण को प्रसन्न करने के लिए कई अन्य मंत्र भी जपे जाते हैं। Krishna Stotra ke labh:कृष्ण स्तोत्र के लाभ बेहतर परिणामों के लिए, सुबह स्नान के बाद 108 बार इस कृष्ण स्तोत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप आपके जीवन को बाधा मुक्त और खुशहाल बना देगा। इस मंत्र का जाप करने से कहीं भी पैसा नहीं अटकेगा। यह कृष्ण स्तोत्र बहुत लाभकारी है लेकिन इसका जाप नियमित रूप से किया जाना चाहिए। इस कृष्ण स्तोत्र का नियमित जाप करने से सभी परेशानियाँ आपसे दूर रहेंगी। Krishna Stotra ka jap kese kare इस स्तोत्र का जाप किसे करना चाहिए जिन व्यक्तियों को धन की कमी है और कोई समाधान नहीं मिल रहा है, उन्हें नियमित रूप से इस कृष्ण स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। कृष्ण स्तोत्र | Krishna Stotra त्वं ब्रह्म परमं धाम निरीहो निरहंकृतिः । निर्गुणश्च निराकारः साकारस्सगुणः स्वयम् ॥ १ ॥ साक्षिरूपश्च निर्लिप्तः परमात्मा निराकृतिः । प्रकृतिः पुरुषस्त्वं च कारणं च तयोः परम् ॥ २ ॥ सृष्टिस्थित्यन्तविषये ये च देवास्त्रयः स्मृताः । ते त्वदंशास्सर्वबीजाः ब्रह्मविष्णुमहेश्वराः॥ ३ ॥ यस्य लोम्नां च विवरे चाखिलं विश्वमीश्वर । महाविराण् महाविष्णुः त्वं तस्य जनको विभो ॥ ४ ॥ तेजस्त्वं चापि तेजस्वी ज्ञानं ज्ञानी च तत्परः । वेदेऽनिर्वचनीयस्त्वं कस्त्वां स्तोतुमिहेश्वरः ॥ ५ ॥ महदादेस्सृष्टिसूत्रं पञ्चतन्मात्रमेव च । बीजं त्वं सर्वशक्तीनां सर्वशक्तिस्वरूपकः ॥ ६ ॥ सर्वशक्तीश्वरः सर्वः सर्वशक्त्याश्रयस्सदा । त्वमनीहः स्वयंज्योतिः सर्वानन्दस्सनातनः ॥ ७ ॥ अहो आकारहीनस्त्वं सर्वविग्रहवानपि । सर्वेन्द्रियाणां विषयं जानासि नेन्द्रियी भवान् ॥ ८ ॥ सरस्वती जडीभूता यत्स्तोत्रे यन्निरूपणे । जडीभूतो महेशश्च शेषो धर्मो विधिः स्वयम् ॥ ९ ॥ पार्वती कमला राधा सावित्री वेदसूरपि । वेदश्च जडतां याति को वा शक्ता विपश्चितः ॥ १० ॥ वयं किं स्तवनं कुर्मः स्त्रियः प्राणेश्वरेश्वर । प्रसन्नो भव नो देव दीनबन्धो कृपां कुरु ॥ ११ ॥ विप्रपत्नीकृतं स्तोत्रं पूजाकाले च यः पठेत् । स गतिं विप्रपत्नीनां लभते नात्र संशयः ॥ १२ ॥

Krishna Stotra: कृष्ण स्तोत्र Read More »

 Kamala Stotram:कमला स्तोत्रम्

कमला स्तोत्रम् | Kamala Stotram कमला स्तोत्रम् (Kamala Stotram) ओंकाररूपिणी देवि विशुद्धसत्त्वरूपिणी।देवानां जननी त्वं हि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी लक्ष्मी! आप ओंकारस्वरूपिणी हैं, आप विशुद्धसत्त्व गुणरूपिणीऔर देवताओं की माता हैम्। हे सुंदरी! आप हम पर प्रसन्न होम्। तन्मात्रंचैव भूतानि तव वक्षस्थलं स्मृतम्।त्वमेव वेदगम्या तु प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे सुंदरी! पंचभूत और पंचतन्मात्रा आपके वक्षस्थल हैं,केवल वेद द्वारा ही आपको जाना जाता है। आप मुझ पर कृपा करें। देवदानवगन्धर्वयक्षराक्षसकिन्नरः।स्तूयसे त्वं सदा लक्ष्मि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी लक्ष्मी! देव, दानव, गंधर्व, यक्ष, राक्षस्और किन्नर सभी आपकी स्तुति करते हैम्। आप हम पर प्रसन्न होम्। लोकातीता द्वैतातीता समस्तभूतवेष्टिता।विद्वज्जनकीर्त्तिता च प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे जननी! आप लोक और द्वैत से परे और सम्पूर्ण भूतगणों सेघिरी हुई रहती हैं। विद्वान लोग सदा आपका गुण-कीर्तन करते हैं।हे सुंदरी! आप मुझ पर प्रसन्न होम्। परिपूर्णा सदा लक्ष्मि त्रात्री तु शरणार्थिषु।विश्वाद्या विश्वकत्रीं च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी लक्ष्मी! आप नित्यपूर्णा शरणागतों का उद्धार करने वाली,विश्व की आदि और रचना करने वाली हैं। हे सुन्दरी! आप मुझ परप्रसन्न होम्। ब्रह्मरूपा च सावित्री त्वद्दीप्त्या भासते जगत्।विश्वरूपा वरेण्या च प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे माता! आप ब्रह्मरूपिणी, सावित्री हैं। आपकी दीप्ति से ही त्रिजगतप्रकाशित होता है, आप विश्वरूपा और वर्णन करने योग्य हैं।हे सुंदरी! आप मुझ पर कृपा करें। क्षित्यप्तेजोमरूद्धयोमपंचभूतस्वरूपिणी।बन्धादेः कारणं त्वं हि प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे जननी! क्षिति, जल, तेज, मरूत् और व्योमपंचभूतों की स्वरूप आप ही हैं। गंध, जल का रस,तेज का रूप, वायु का स्पर्श और आकाश में शब्द आप ही हैं।आप इन पंचभूतों के गुण प्रपंच का कारण हैं, आप हमपर प्रसन्न होम्। महेशे त्वं हेमवती कमला केशवेऽपि च।ब्रह्मणः प्रेयसी त्वं हि प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे देवी! आप शूलपाणि महादेवजी की प्रियतमा हैं। आप केशव कीप्रियतमा कमला और ब्रह्मा की प्रेयसी ब्रह्माणी हैं, आप हम परप्रसन्न होम्। चंडी दुर्गा कालिका च कौशिकी सिद्धिरूपिणी।योगिनी योगगम्या च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप चंडी, दुर्गा, कालिका, कौशिकी,सिद्धिरूपिणी, योगिनी हैं। आपको केवल योग से ही प्राप्त किया जाता है।आप हम पर प्रसन्न होम्। बाल्ये च बालिका त्वं हि यौवने युवतीति च।स्थविरे वृद्धरूपा च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप बाल्यकाल में बालिका, यौवनकाल में युवती औरवृद्धावस्था में वृद्धारूप होती हैं। हे सुन्दरी! आप हम परप्रसन्न होम्। गुणमयी गुणातीता आद्या विद्या सनातनी।महत्तत्त्वादिसंयुक्ता प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे जननी! आप गुणमयी, गुणों से परे, आप आदि, आप सनातनीऔर महत्तत्त्वादिसंयुक्त हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। तपस्विनी तपः सिद्धि स्वर्गसिद्धिस्तदर्थिषु।चिन्मयी प्रकृतिस्त्वं तु प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे माता! आप तपस्वियों की तपःसिद्धि स्वर्गार्थिगणों कीस्वर्गसिद्धि, आनंदस्वरूप और मूल प्रकृति हैं।हे सुंदरी! आप हम पर प्रसन्न होम्। त्वमादिर्जगतां देवि त्वमेव स्थितिकारणम्।त्वमन्ते निधनस्थानं स्वेच्छाचारा त्वमेवहि॥ हे जननी! आप जगत् की आदि, स्थिति का एकमात्र कारण हैं। देह केअंत में जीवगण आपके ही निकट जाते हैं। आप स्वेच्छाचारिणी हैं।आप हम पर प्रसन्न होम्। चराचराणां भूतानां बहिरन्तस्त्वमेव हि।व्याप्यव्याकरूपेण त्वं भासि भक्तवत्सले॥ हे भक्तवत्सले! आप चराचर जीवगणों के बाहर और भीतर दोनोंस्थलों में विराजमान रहती हैं, आपको नमस्कार है। त्वन्मायया हृतज्ञाना नष्टात्मानो विचेतसः।गतागतं प्रपद्यन्ते पापपुण्यवशात्सदा॥ हे माता! जीवगण आपकी माया से ही अज्ञानी और चेतनारहित होकरपुण्य के वश से बारम्बार इस संसार में आवागमन करते हैं। तावन्सत्यं जगद्भाति शुक्तिकारजतं यथा।यावन्न ज्ञायते ज्ञानं चेतसा नान्वगामिनी॥ जैसे सीपी में अज्ञानतावश चांदी का भ्रम हो जाता है और फिरउसके स्वरूप का ज्ञान होने पर वह भ्रम दूर हो जाता है, वैसेही जब तक ज्ञानमयी चित्त में आपका स्वरूप नहीं जाना जाता है,तब तक ही यह जगत् सत्य भासित होता है, परन्तु आपके स्वरूपका ज्ञान हो जाने से यह सारा संसार मिथ्या लगने लगता है। त्वज्ज्ञानात्तु सदा युक्तः पुत्रदारगृहादिषु।रमन्ते विषयान्सर्वानन्ते दुखप्रदान् ध्रुवम्॥ जो मनुष्य आपके ज्ञान से पृथक रहते हुए जगत् को ही सत्यमानकर विषयों में लगे रहते हैं, निःसंदेह अंत में उनकोमहादुख मिलता है। त्वदाज्ञया तु देवेशि गगने सूर्यमण्डलम्।चन्द्रश्च भ्रमते नित्यं प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवेश्वरी! आपकी आज्ञा से ही सूर्य और चंद्रमा आकाश मण्डलमें नियमित भ्रमण करते हैम्। आप हम पर प्रसन्न होम्। ब्रह्मेशविष्णुजननी ब्रह्माख्या ब्रह्मसंश्रया।व्यक्ताव्यक्त च देवेशि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवेश्वरी! आप ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर की भी जननी हैं।आप ब्रह्माख्या और ब्रह्मासंश्रया हैं, आप ही प्रगट और गुप्त रूपसे विराजमान रहती हैम्। हे देवी! आप हम पर प्रसन्न होम्। अचला सर्वगा त्वं हि मायातीता महेश्वरि।शिवात्मा शाश्वता नित्या प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप अचल, सर्वगामिनी, माया से परे,शिवात्मा और नित्य हैम्। हे देवी! आप हम पर प्रसन्न होम्। सर्वकायनियन्त्री च सर्वभूतेश्वरी।अनन्ता निष्काला त्वं हि प्रसन्ना भवसुन्दरि॥ हे देवी! आप सबकी देह की रक्षक हैं। आप सम्पूर्ण जीवों कीईश्वरी, अनन्त और अखंड हैम्। आप हम पर प्रसन्न होम्। सर्वेश्वरी सर्ववद्या अचिन्त्या परमात्मिका।भुक्तिमुक्तिप्रदा त्वं हि प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे माता! सभी भक्तिपूर्वक आपकी वंदना करते हैं। आपकी कृपासे ही भुक्ति और मुक्ति प्राप्त होती है। हे सुंदरि! आप हम परप्रसन्न होम्। ब्रह्माणी ब्रह्मलोके त्वं वैकुण्ठे सर्वमंगला।इंद्राणी अमरावत्यामम्बिका वरूणालये॥ हे माता! आप ब्रह्मलोक में ब्रह्माणी, वैकुण्ठ में सर्वमंगलाअमरावती में इंद्राणी और वरूणालय में अम्बिकास्वरूपिणी हैं।आपको नमस्कार है। यमालये कालरूपा कुबेरभवने शुभा।महानन्दाग्निकोणे च प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप यम के गृह में कालरूप, कुबेर के भवन मेंशुभदायिनी और अग्निकोण में महानन्दस्वरूपिणी हैं, हे सुन्दरी! आप हम पर प्रसन्न होम्।नैरृत्यां रक्तदन्ता त्वं वायव्यां मृगवाहिनी।पाताले वैष्णवीरूपा प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप नैरृत्य में रक्तदन्ता, वायव्य कोण में मृगवाहिनीऔर पाताल में वैष्णवी रूप से विराजमान रहती हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। सुरसा त्वं मणिद्वीपे ऐशान्यां शूलधारिणी।भद्रकाली च लंकायां प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप मणिद्वीप में सुरसा, ईशान कोण में शूलधारिणी औरलंकापुरी में भद्रकाली रूप में स्थित रहती हैं। हे सुंदरी! आपहम पर प्रसन्न होम्। रामेश्वरी सेतुबन्धे सिंहले देवमोहिनी।विमला त्वं च श्रीक्षेत्रे प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप सेतुबन्ध में रामेश्वरी, सिंहद्वीप में देवमोहिनीऔर पुरूषोत्तम में विमला नाम से स्थित रहती हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। कालिका त्वं कालिघाटे कामाख्या नीलपर्वत।विरजा ओड्रदेशे त्वं प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे देवी! आप कालीघाट पर कालिका, नीलपर्वत पर कामाख्या औरऔड्र देश में विरजारूप में विराजमान रहती हैं। हे सुंदरी!आप हम पर प्रसन्न होम्। वाराणस्यामन्नपूर्णा अयोध्यायां महेश्वरी।गयासुरी गयाधाम्नि प्रसन्ना भव सुंदरि॥ हे देवी! आप वाराणसी क्षेत्र में अन्नपूर्णा, अयोध्या नगरी मेंमाहेश्वरी और गयाधाम में गयासुरी रूप से विराजमान रहती हैं।हे सुंदरी! आप हम पर प्रसन्न होम्। भद्रकाली कुरूक्षेत्रे त्वंच कात्यायनी व्रजे।माहामाया द्वारकायां प्रसन्ना भव सुन्दरि॥ हे देवी! आप कुरूक्षेत्र में भद्रकाली, वज्रधाम में कात्यायनी औरद्वारकापुरी में महामाया रूप में विराजमान रहती हैं। हे देवी! आपहम पर प्रसन्न होम। क्षुधा त्वं सर्वजीवानां वेला

 Kamala Stotram:कमला स्तोत्रम् Read More »

Putrada Ekadashi 2025 Date :पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, जानें सही तारीख और व्रत का महत्व

Putrada Ekadashi 2025 : पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को संतान सुख मिलता है। साथ ही व्यक्ति को सभी प्रकार की सुख सुविधाएं भी मिलती है। आइए जानते हैं साल 2025 में पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा 9 या 10 जनवरी। साथ ही जानें पुत्रदा एकादशी व्रत का महत्व । Putrada Ekadashi 2025 Date: साल 2025 में आने वाली सबसे पहली एकादशी है पुत्रदा एकादशी। वैसे तो सभी एकादशी का हिंदू धर्म में महत्व है। लेकिन, पुत्रदा एकादशी का विशेष महत्व हिंदू धर्म में बताया गया है।  पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत माना जाता है। यह व्रत संतान प्राप्ति और संतान की सुख समृद्धि के लिए अति उत्तम माना गया है। Putrada Ekadashi 2025 पौष माह में आने वाला यह व्रत कई दंपतियों के जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला होता है। साल 2025 की पहली एकादशी पुत्रदा एकादशी ही है। ऐसे में इस दिन व्रत रखने से आप पूरे साल भर शुभ फल भी प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में आइए जान लेते हैं कि, जनवरी के महीने में पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा। व्रत की विधि क्या और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व है।   Putrada Ekadashi 2025 पुत्रदा एकादशी तिथि 2025 kab hai Putrada Ekadashi 2025 कब है पुत्रदा एकादशी 2025 ?पंचांग के अनुसार, पुत्रदा एकादशी तिथि का आरंभ 9 जनवरी को दोपहर में 12 बजकर 23 मिनट पर होगा और 10 जनवरी को सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक एकादशी तिथि रहेगी। शास्त्रों के अनुसार, उदय काल में एकादशी तिथि होने के कारण पुत्रदा एकादशी का व्रत 10 जनवरी को रखा जाएगा। Putrada Ekadashi 2025 brat vidhi पुत्रदा एकादशी व्रत विधि एकादशी तिथि के व्रत रखने वाले हैं तो दशमी तिथि से ही आपको सात्विक जीवन जीना चाहिए। इसके बाद एकादशी तिथि के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और व्रत का संकल्प आपको लेना चाहिए। पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित इसके बाद करें। विष्णु भगवान को गंगाजल, रोली, चावल, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद दीपक और अगरबत्ती जलाएं। तत्पश्चात भगवान को फल, मिष्ठान्न और पंचामृत अर्पित करें। व्रत रखने वालों के लिए पूजा के दौरान पुत्रदा एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना अनिवार्य माना गया है। कथा सुनने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है। इस दिन व्रत रखने वालों को दिनभर भगवान विष्णु के नाम का जप करना चाहिए। आप चाहें तो “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप कर सकते हैं। व्रत का पारण द्वादशी के दिन सूर्योदय के बाद आपको करना चाहिए। इस दिन ब्राह्मणों को भोजन खिलाकर दान-दक्षिणा दें और फिर स्वयं भोजन ग्रहण करें। Putrada Ekadashi 2025 mahetwa पुत्रदा एकादशी का महत्व पुत्रदा एकादशी का व्रत करने से दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत पारिवारिक सुख-शांति और संतान के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महिष्मति नगरी के राजा सुकेतुमान और उनकी रानी शैव्या ने इस व्रत को रखा था, जिससे उन्हें योग्य संतान की प्राप्ति हुई थी। तभी से संतान सुख की कामना रखने वाले लोग इस व्रत को करने लगे। (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Karmasu.in एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।) Ekadashi Date List 2025:साल 2025 में कब-कब है एकादशी?नोट करें सही डेट एवं पूरी लिस्ट

Putrada Ekadashi 2025 Date :पुत्रदा एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा, जानें सही तारीख और व्रत का महत्व Read More »

Elephant in Dreams Meaning: सपने में हाथी देखने का मतलब, जानें मिलेगी गुड न्यूज या बढ़ेगी चिंता

Elephant in Dreams Meaning: सपने कई मायनों में हमें भविष्य का संकेत देते हैं. कहते हैं कि सपने में हाथी (Hathi) अगर हमला करता हुआ दिखाई दे तो इसका क्या मतलब होता है आइए जानते हैं. Sapne Mai Hathi Dekhna: हिंदू धर्म (Hindu Dharam) में हाथी को शुभता, समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. वास्तु (Vastu)के अनुसार घर में चांदी (Chandi) का हाथी रखना बेहद शुभ माना जाता है. इसे घर में सुख-शांति आने का सूचक माना जाता है. सपने में हाथी (Elephant dreams) देखने का मतलब कई शुभ-अशुभ संकेत देता है. स्वप्न शास्त्र से जानते हैं कि सपने में हाथी देखने का क्या मतलब होता है. आइए जानते हैं. Sapne me safed hathi dekhne ka matlab सपने में सफेद हाथी देखने का मतलब ? स्वप्न शास्त्र के अनुसार, अगर आपको सपने में सफेद हाथी दिखाई देता है तो इसका मतलब जल्द ही घर में खुशियों का आगमन होने वाला है. मान्यता है कि इससे धन लाभ,  संतान पक्ष से सुखद समाचार प्राप्त हो सकते हैं. सफेद हाथी का सपने में दिखना बेहद शुभ माना जाता है.  हाथी का सपने में हमला करना Hathi ka sapne me hamla karna सपने में अगर कोई हाथी आप पर हमला करता दिखाई दे तो ये परेशानी आने संकेत देता है. इसका अर्थ है आपके जीवन में कई तरह की कठिनाईयां आने वाली हैं. धन हानि हो सकती है. कोई अपना आपको धोखा दे सकता है. हाथी का झुंड Hathi ka jhund सपने में हाथियों का झुंड दिखाई देना आकस्मिक धन लाभ का संकेत देता है. स्वप्न में खड़ा हाथी देखने का मतलब है कि आपके कार्य में कोई बाधा आ सकती है और मुसीबत के वक्त आप अकेले हो सकते हैं. Elephant in Dreams संतान का आगमन Elephant in Dreams अगर कोई गर्भवती स्त्री सपने में हाथी देखती है तो यह भाग्यशाली संतान आगमन का संकेत देता है.मस्त झूमते हुए हाथी का सपना देखने का मतलब है कि आपको जल्द अपनी सभी समस्याओं से छुटकारा मिलने वाला है. गर्भवती स्त्री के सपने में हाथी आने का मतलब अगर किसी गर्भवती स्त्री को सपने में हाथी दिखाई देता है तो यह बहुत ही अच्छा सपना माना जाता है। Elephant in Dreams इसका अर्थ है कि आपको भाग्यशाली संतान की प्राप्ति होगी। Elephant in Dreams साथ ही इस तरह का सपना संतान के तीव्र बुद्धि होने के योग भी दर्शाता है।

Elephant in Dreams Meaning: सपने में हाथी देखने का मतलब, जानें मिलेगी गुड न्यूज या बढ़ेगी चिंता Read More »